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आत्मघाती हमले से दहला पाक आर्मी बेस, लाहौर में क्रिकेट मैच और पाकिस्तानी मिलिट्री कैंप पर आत्मघाती हमला, 21 की मौत

इस्लामाबाद पाकिस्तान में चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन के बीच मिलिट्री छावनी पर हुए भीषण हमले ने पाकिस्तानी सेना और शहबाज सरकार को हिलाकर रख दिया है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित बन्नू छावनी पर हुए इस हमले में कम के कम 21 लोग मारे गए हैं, जबकि लगभग 30 लोग घायल हुए हैं। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने छह आतंकवादियों के मारे जाने का दावा किया है। खुरासान डायरी की रिपोर्ट के अनुसार, बन्नू छावनी पर तीन तरफ से हमला किया गया। मंगलवार की रात विस्फोटकों से भरे वाहनों के साथ दो आत्मघाती हमलावरों ने खुद को छावनी के मुख्य चेक पॉइंट पर उड़ा लिया, जबकि एक अन्य आत्मघाती हमलावर ने दूसरे गेट पर विस्फोट किया। इसके बाद अन्य हमलावरों ने धावा बोल दिया। आतंकियों ने ग्रेनेड और भारी गोलीबारी करते हुए अंतर घुसने की कोशिश की। इस दौरान तीन हमलावर मारे गए। गोलीबारी में सुरक्षाबल का एक अधिकारी भी घायल हो गया। खुरासान डायरी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 4 और सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। अस्पताल ने की 12 मौतों की पुष्टि अस्पताल से मिली जानकारी से पता चलता है कि वहां 42 लोग लाए गए थे, जिनमें 11 को मृत घोषित कर दिया गया। एक व्यक्ति की बाद में मौत हो गई, जबकि अन्य का इलाज चल रहा है। घायलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी की घोषणा करनी पड़ी। बन्नू अस्पताल के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एपी से बताया कि हमले में 12 लोग मारे गए और 30 घायल हो गए। उन्होंने बताया कि ये सभी नागरिक थे, जो एक ढही हुई इमारतों और दीवारों के नीचे दब गए थे। मलबे से निकाले गए 3 शव मलबे को साफ कर रहे एक बचावकर्मी के हवाले से खुरासान डायरी ने बताया कि विस्फोट के कारण ढह गई मस्जिद से 3 शव बरामद किए गए हैं। एक घायल को भी मलबे से निकाला गया है। हमले के बाद सुरक्षाकर्मियों ने पूरे इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। छावनी के आस-पास से भारी विस्फोट और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला गोधरा कांड के 14 गवाहों की हटाई गई सुरक्षा, SIT रिपोर्ट के बाद

 गोधरा गुजरात के बहुचर्चित गोधरा कांड (Godhra Case) के गवाहों की सुरक्षा हटा दी गई है। केंद्र सरकार ने यह फैसला गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद लिया है। सूत्रों के मुताबिक, कुल 14 गवाहों की सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिन्हें पहले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 150 जवानों द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा रही थी। गृह मंत्रालय ने इस निर्णय के लिए विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट को आधार बनाया है। SIT ने 10 नवंबर 2023 को अपनी सिफारिशी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें गवाहों की सुरक्षा हटाने का सुझाव दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। जिन 14 गवाहों की सुरक्षा हटी है, उनमें हबीब रसूल सय्यद, अमीनाबेन हबीब रसूल सय्यद, अकीलाबेन यासीनमिन, सैय्यद यूसुफ भाई, अब्दुलभाई मरियम अप्पा, याकूब भाई, रजकभाई अख्तर हुसैन, नजीमभाई सत्तार भाई, माजिदभाई शेख यानुश महामद, हाजी मयुद्दीन, समसुद्दीन फरीदाबानू, समदुद्दीन मुस्तफा इस्माइल, मदीनाबीबी मुस्तफा और भाईलालभाई चंदूभाई राठवा शामिल हैं। क्या था गोधरा कांड गुजरात के गोधरा कांड को 23 साल बीत चुके हैं। फरवरी 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगाए जाने के बाद 59 कार सेवकों की मौत हो गई थी जिससे देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इसकी कहानी यह है कि 27 फरवरी 2002 की सुबह साबरमती एक्सप्रेस के कोच S-6 में आग लगा दी गई और उस कोच में यात्रा कर रहे 59 यात्रियों की जलकर मौत हो गई। ट्रेन तभी गुजरात के गोधरा स्टेशन पर आ चुकी थी। पीड़ितों में 27 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं। ट्रेन में सवार अन्य 48 यात्रियों को चोटें आईं। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मामले में एक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग में न्यायमूर्ति जी टी नानावटी और न्यायमूर्ति केजी शाह शामिल थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मारे गए 59 लोगों में से ज्यादातर कार सेवक थे जो उत्तर प्रदेश के अयोध्या से लौट रहे थे। साबरमती एक्सप्रेस ने मुजफ्फरपुर से अपनी यात्रा शुरू की थी और अहमदाबाद जा रही थी। विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर पूर्णाहुति महायज्ञ में शामिल होने गए कम से कम 2,000 कार सेवक अयोध्या से ट्रेन में सवार हुए थे. यह यज्ञ राम मंदिर निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा था। ट्रेन जलाने की घटना के कुछ ही घंटों के भीतर राज्य भर में हिंसक दंगे भड़क उठे। दंगे 2 फरवरी की शाम को भड़के और पूरे राज्य में 2-3 महीने तक जारी रहे। 2005 में केंद्र ने राज्यसभा को सूचित किया कि दंगों में 254 हिंदुओं और 790 मुसलमानों की जान चली गई। कुल 223 लोग लापता बताए गए। हजारों लोग बेघर भी हो गये।  

चैंपियंस ट्रॉफी २०२५ – न्यूजीलैंड ने साउथ अफ्रीका को 363 टारगेट दिया: ये चैंपियंस ट्रॉफी का हाईएस्ट टोटल

Champions Trophy 2025 – New Zealand set a target of 363 for South Africa: This is the highest total in the Champions Trophy लाहौर। चैंपियंस ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड साउथ अफ्रीका के खिलाफ टॉस जीतकर बैटिंग कर रही है। 49 ओवर के बाद टीम का स्कोर 349/5 है। ग्लेन फिलिप्स और माइकल ब्रेसवेल क्रीज पर हैं। डेरिल मिचेल 49 रन पर ऑलआउट हुए। उन्हें लुंगी एनगिडी ने कगिसो रबाडा के हाथों कैच कराया। उन्होंने विल यंग (21 रन) को भी आउट किया। टॉम लैथम (4 रन) को कगिसो रबाडा ने बोल्ड कर दिया। उन्होंने रचिन रवींद्र (108 रन) को भी आउट किया। केन विलियम्सन (102 रन) को वायन मुल्डर ने लुंगी एनगिडी के हाथों कैच कराया। यह मैच जीतने वाली टीम 9 मार्च को भारत से दुबई में फाइनल मुकाबला खेलेगी।

बिक्रम सिंह मजीठिया को 17 मार्च को एसआईटी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को उनके खिलाफ ड्रग्स मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मजीठिया को 17 मार्च को सुबह करीब 11 बजे एसआईटी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। जांच में सहयोग करना जमानत की अनिवार्य शर्त यह आदेश पंजाब सरकार द्वारा यह कहे जाने के बाद आया कि मजीठिया जांच में सहयोग करने से इन्कार कर रहे हैं। मजीठिया ने कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है और उन्होंने कोर्ट से पूछताछ के लिए तारीखें तय करने को कहा। पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने कहा कि जांच में सहयोग करना जमानत के लिए एक अनिवार्य शर्त है और मजीठिया को इसका पालन करना होगा। पंजाब सरकार की याचिका पर हुई सुनवाई सुप्रीम कोर्ट पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा मजीठिया को 10 अगस्त, 2022 को जमानत दिए जाने के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट ने यह मानने के लिए उचित आधार का उल्लेख किया कि वह दोषी नहीं है, लेकिन अपनी टिप्पणी को केवल जमानत याचिका के निर्णय तक सीमित रखा। 5 महीने से अधिक समय तक जेल में रहे मजीठिया सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहिए। इस मामले में मजीठिया पांच महीने से अधिक समय तक पटियाला जेल में रहने के बाद बाहर आए। वह शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के रिश्तेदार और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं। मजीठिया पर राज्य में ड्रग रैकेट की जांच कर रहे एंटी ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की 2018 की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।

महिला दिवस से पहले महिलाओं के खाते में सीधे तीन हजार रुपये डाले जाएंगे: महाराष्ट्र सरकार

मुंबई 8 मार्च विश्व महिला दिवस से पहले महिलाओं को सरकार बड़ा तोहफा देने जा रही हैं. महाराष्ट्र सरकार की तरफ से शुरू की गई लाड़की बहिन योजना की दो महीनों की किस्त एक साथ महिलाओं के खाते में डाली जाएगी. इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं, यानी महिला दिवस से पहले महिलाओं के खाते में सीधे तीन हजार रुपये डाले जाएंगे.   महाराष्ट्र सरकार की तरफ से बजट सत्र के दौरान एक साथ फरवरी और मार्च की किस्त जारी करने का ऐलान किया गया. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अदिती तटकरे ने बताया है कि लाडकी बहिन योजना की दो महीने की किस्त महिला दिवस के मौके पर जारी की जाएगी, जो उनके लिए एक बड़े तोहफे की तरह होगा. महाराष्ट्र के अलावा झारखंड में मंईयां सम्मान योजना की किस्त भी इसी दिन जारी हो सकती है. वहीं दिल्ली में बीजेपी सरकार ने ऐलान किया है कि 8 मार्च से महिला समृद्धि योजना की शुरुआत होगी, जिसके तहत दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये मिलेंगे. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी महतारी वंदन योजना की राशि महिला दिवस के अवसर पर जारी की जाएगी. बता दें कि महाराष्ट्र सरकार की महत्वकाक्षी योजना लाड़की बहिन योजना से नौ लाख महिलाएं बाहर हो गई हैं. योजना के तहत कई ऐसे आवेदन भी पाए गए हैं, जो फर्जी हैं. ऐसे में कई महिलाओं के नाम भी काटे गए हैं. अनियमितता की जांच के दौरान यह सामने आया था कि कुछ लोगों के नाम पर कई खाते थे. इसके अलावा कुछ पुरुष भी इस योजना का लाभ ले रहे थे. अब उनके नाम योजना से हटा दिए गए हैं. वहीं जिन महिलाओं ने फर्जी तरीके से पैसे लिए हैं उनसे वसूली की तैयारी भी की जा रही है.

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत अब तक 4.26 करोड़ महिलाएं रजिस्ट्रेशन करा चुकी

नईदिल्ली गर्भवती महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बहुत ही अहम योजना चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं के खाते में पैसा भेजकर उनके पोषण व देखभाल में मदद देने की कोशिश की गई है। अब तक 4.26 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुकी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 3.76 करोड़ महिलाओं के खाते में 17 हजार करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। अगर आप या आपकी जान-पहचान में कोई मां बनने वाली हैं, तो वह इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। PMMVY योजना के लिए कैसे आवेदन करें? यह योजना क्या है, कितना पैसा खाते में आएगा? आइए इस लेख में जानते हैं… प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) क्या है? प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक मातृत्व लाभ योजना है। 1 जनवरी, 2017 को केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा इसे लॉन्च किया गया। यह योजना गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की गई, ताकि उन्हें उचित पोषण और स्वास्थ्य देखभाल मिल सके। PMMVY योजना का उद्देश्य क्या है? इस योजना का उद्देश्य गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आर्थिक मदद देकर मां और शिशु के स्वास्थ्य में सुधार करना है। इसके अलावा महिलाओं को उचित आहार और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक कर देश में कुपोषण की दर को कम करना है। मेहनत-मजदूरी कर घर चलाने में मदद करने वाली महिलाओं को प्रसव के दौरान उचित आराम मिल सके और उन्हें पैसों की चिंता न करना पड़े, इसकी भी कोशिश इस योजना के जरिए की गई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के फायदे क्या हैं? प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार गर्भवती होने पर महिलाओं को 5000 रुपये दिए जाते हैं। यह पैसा दो किस्तों में आता है। अगर दूसरी बार गर्भवती होने पर महिला बेटी को जन्म देती है तो एकमुश्त 6000 रुपये दिए जाते हैं। हालांकि यह पैसा सिर्फ बेटी के जन्म पर ही मिलता है। क‍िस्‍त                                  शर्त                                                                                                 राश‍ि (रुपये) पहली क‍िस्‍त    प्रेग्नेंसी के रजिस्ट्रेशन और आखिरी पीरियड की तारीख से 6 महीने के भीतर कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच कराने पर                                                                                                                                                     3000 दूसरी क‍िस्‍त     1. श‍िशु के जन्‍म का रज‍िस्‍ट्रेशन 2. श‍िशु को पहले चरण के दौरान सभी टीके लग गए हों        2000 नोट: अगर किसी को महिला जननी सुरक्षा योजना (JSY) का लाभ मिल रहा है तो उसे PMMVY योजना से सिर्फ अतिरिक्त रकम ही मिलेगी। PMMVY योजना के लिए पात्रता क्या है?     गर्भवती महिला की उम्र कम से कम 19 साल या उससे ज्यादा हो     वैसे यह योजना पहले जीवित बच्चे के लिए ही है। हालांकि दूसरी बार इसका लाभ बेटी के जन्म पर ही मिलेगा     अगर दूसरी बार गर्भवती महिला जुड़वा बच्चों को जन्म देती है और उनमें से एक बेटी है तो PMMVY 2.0 का लाभ मिलेगा     गर्भवती महिला के परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए     महिला के पास मनरेगा कार्ड हो या किसान सम्मान निधि के तहत महिला किसान को लाभ मिल रहा हो     महिला के पास e-Shram कार्ड या बीपीएल कार्ड हो, महिला दिव्यांगजन हो     जो गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं सरकारी नौकरी (केंद्र या राज्य सरकार) में नहीं हैं     जिन महिलाओं को किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा हो प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? STEP-1     ऑनलाइन आवेदन के लिए आपको ऑफिशियल वेबसाइट पर Sign Up करना होगा     Sign Up के लिए अपना मोबाइल नंबर डालकर वैरिफाई के बटन पर क्लिक करें     OTP और Captcha Code लिखकर Validate पर क्लिक करें STEP-2     मोबाइल नंबर से लॉगिन करने के बाद Dashboard खुल जाएगा     Data Entry विकल्प में Beneficiary Registration पर क्लिक करें, फॉर्म खुल जाएगा     पहले बच्चे के लिए अप्लाई कर रहे हैं या दूसरे के लिए, यह बताना होगा     इसके बाद नाम, पता, आधार नंबर, जन्म तिथि, उम्र वगैरह सब भरना होगा     मनरेगा कार्ड नंबर की जानकारी भी देनी होगी, इसके बाद बच्चे से जुड़ी सारी जानकारी भरनी होगी     घर का पूरा पता और गर्भाधारण के दौरान और शिशु के जन्म के बाद टीकाकरण के बारे में पूछा जाएगा     अपनी पास की आंगनवाड़ी की जानकारी भरें और Submit पर क्लिक कर दें     पूरी जानकारी के साथ फॉर्म आपके सामने होगा, अगर कुछ बदलाव करना चाहते हैं तो करें, नहीं तो SUBMIT कर दें   प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए ऑफलाइन कैसे अप्लाई करें?     महिलाएं पास के आंगनवाड़ी केंद्र जाकर भी PMMVY योजना के लिए आवेदन कर सकती हैं     रजिस्ट्रेशन के लिए Form 1-A को भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा कराना होगा     रजिस्ट्रेशन के दौरान महिला को अपना आधार नंबर और बैंक अकाउंट की जानकारी भी देनी होगी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स     आधार कार्ड     गर्भावस्था प्रमाण पत्र     बैंक खाता विवरण     मोबाइल नंबर     पति का आधार कार्ड दूसरे बच्चे के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना का लाभ कैसे मिलेगा?     PMMVY 2.0 के तहत दूसरी बार इस योजना का लाभ बेटी के जन्म पर ही मिलेगा     दूसरे बच्चे के रूप में बेटी के जन्म पर योजना के तहत 6000 रुपये … Read more

दिसंबर 2024 तक, 27 मिलियन महिलाएं अपने क्रेडिट की निगरानी कर रही , पिछले वर्ष की तुलना में 42 प्रतिशत की वृद्धि

नईदिल्ली नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम द्वारा जारी की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में अधिक महिलाएं ऋण लेना चाहती हैं और सक्रिय रूप से वे अपने क्रेडिट स्कोर की निगरानी कर रही हैं। दिसंबर 2024 तक, 27 मिलियन महिलाएं अपने क्रेडिट की निगरानी कर रही थीं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 42 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है और ये बढ़ती वित्तीय जागरूकता का संकेत देता है। “उधारकर्ताओं से निर्माणकर्ताओं तक: भारत की वित्तीय विकास की कहानी में महिलाओं की भूमिका” नामक शीर्षक से इस रिपोर्ट को ट्रांसयूनियन सीआईबीआईएल, नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) और माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) द्वारा प्रकाशित किया गया है। लॉन्च के दौरान, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने में वित्त तक पहुंच की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “सरकार मानती है कि वित्त तक पहुंच महिला उद्यमिता के लिए एक बुनियादी प्रवर्तक है। महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) का एक समावेशी इको-सिस्टम बनाने की दिशा में काम करना जारी है, जो वित्तीय साक्षरता, ऋण तक पहुंच, परामर्श और बाजार लिंकेज को बढ़ावा देता है। हालांकि, न्यायसंगत वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। महिलाओं की जरूरतों के अनुरूप समावेशी उत्पादों को डिज़ाइन करने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका, साथ ही संरचनात्मक बाधाओं को संबोधित करने वाली नीतिगत पहलें, इस गति को बढ़ाने में सहायक होंगी। सुब्रह्मण्यम ने डब्ल्यूईपी के तत्वावधान में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, फाइनेंसिंग वूमेन कोलैबोरेटिव (एफडब्ल्यूसी) का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि वित्तीय क्षेत्र के और अधिक हितधारक एफडब्ल्यूसी से जुड़ें और इस मिशन में अपना योगदान दें। नीति आयोग के अनुसार 2019 से, व्यवसाय ऋण उत्पत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और गोल्ड लोन में उनकी हिस्सेदारी 6 प्रतिशत बढ़ी है, दिसंबर 2024 तक व्यवसाय उधारकर्ताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी। हालांकि, ऋण से बचने, खराब बैंकिंग अनुभव, ऋण तत्परता में बाधाएं और कलैटरल् और गारंटर के साथ समस्याएं जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। बढ़ती ऋण जागरूकता और बेहतर स्कोर के साथ, वित्तीय संस्थानों के पास महिलाओं की अनूठी आवश्यकताओं के अनुरूप जैंडर-स्मार्ट वित्तीय उत्पाद पेश करने का अवसर है। रिपोर्ट उजागर करती है कि कुल स्व-निगरानी आधार में महिलाओं की हिस्सेदारी दिसंबर 2024 में बढ़कर 19.43 प्रतिशत हो गई, जो 2023 में 17.89 प्रतिशत थी। गैर-मेट्रो क्षेत्रों की महिलाएं, मेट्रो क्षेत्रों की तुलना में, अपने ऋण की सक्रिय रूप से स्वयं निगरानी कर रही हैं, गैर-मेट्रो क्षेत्रों में 48 प्रतिशत और मेट्रो क्षेत्रों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2024 में, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में सभी स्व-निगरानी महिलाओं का 49 प्रतिशत हिस्सा होगा, जिसमें दक्षिणी क्षेत्र 10.2 मिलियन के साथ सबसे आगे है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित उत्तरी और मध्य राज्यों में पिछले पांच वर्षों में सक्रिय महिला उधारकर्ताओं में सबसे अधिक चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) देखी गई। नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार और डब्ल्यूईपी की मिशन निदेशक अन्ना रॉय ने कहा, “महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करना भारत के कार्यबल में प्रवेश करने वाली महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने का एक तरीका है। यह समान आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक व्यवहार्य रणनीति के रूप में भी काम करता है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने से 150 से 170 मिलियन लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और साथ ही इससे श्रम बल में महिलाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है।

नए आयकर कानून में अधिकारियों को ऐसी शक्ति देगा, जिससे वे आपका सोशल मीडिया अकाउंट खंगाल सकें

नई दिल्ली सरकार ने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया है। लेकिन 1 अप्रैल, 2026 से आयकर विभाग को आपके सोशल मीडिया अकाउंट, निजी ईमेल, बैंक अकाउंट, ऑनलाइन निवेश अकाउंट, ट्रेडिंग अकाउंट और अन्य चीजों को देखने और उन तक पहुंचने का कानूनी अधिकार होगा। हालांकि ईमानदार टैक्सपेयर्स को इससे कोई परेशानी होगी लेकिन टैक्स चोरी करने वालों की खैर नहीं। नए आयकर कानून में अधिकारियों के पास यह अधिकार होगा। मौजूदा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 अधिकारियों को तलाशी लेने और संपत्ति और खाता-बही जब्त करने की अनुमति देती है। यह तब होता है जब उनके पास सूचना और कारण हो कि किसी व्यक्ति के पास कोई अघोषित आय, संपत्ति या दस्तावेज हैं, जिन्हें वह जानबूझकर आयकर से बचने के लिए छिपा रहा है। मान लीजिए आपके पास एक गुप्त तिजोरी है जिसमें आप काला धन छिपाते हैं, तो आयकर विभाग उसे खोल सकता है। वर्तमान कानूनों के तहत ऐसा करने का एक तरीका यह है कि किसी भी दरवाजे, बॉक्स या लॉकर का ताला तोड़ा जा सकता है। ऐसा तब किया जा सकता है जब उनकी चाबियां उपलब्ध न हों और अगर उन्हें शक हो कि कोई अघोषित संपत्ति या खाता-बही वहां रखा जा रहा है। जैसे पुराने जमाने में चोर ताला तोड़कर अंदर घुसते थे, वैसे ही। लेकिन अब यह ताला आपके घर का नहीं, आपके कंप्यूटर का भी हो सकता है। क्या कहते हैं जानकार नए आयकर बिल के तहत आयकर अधिकारियों को आपके कंप्यूटर सिस्टम या वर्चुअल डिजिटल स्पेस का एक्सेस दिया गया है। मतलब अब आपका कंप्यूटर, आपका ईमेल, आपका सोशल मीडिया, सब कुछ सरकार की नजर में है। आयकर विधेयक के क्लौज 247 के अनुसार यदि किसी अधिकृत अधिकारी के पास यह मानने का कारण है कि किसी व्यक्ति के पास अघोषित आय या संपत्ति है जो आयकर अधिनियम के दायरे में आती है, तो वह किसी भी दरवाजे, बॉक्स, लॉकर, तिजोरी, अलमारी या अन्य इंस्ट्रूमेंट का ताला तोड़ सकता है। वे किसी भी कंप्यूटर सिस्टम या वर्चुअल डिजिटल स्पेस में एक्सेस कोड को ओवरराइड करके एक्सेस प्राप्त कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर अधिकारियों को आप पर जानबूझकर आयकर चोरी करने का संदेह है तो वे आपके कंप्यूटर सिस्टम, ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट में सेंध लगा सकते हैं। सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर (हेड-टैक्सेशन) एस.आर. पटनायक का मानना है कि ऐसी तलाशी और जब्ती केवल एक अपवाद के रूप में की जा सकती है, नियम के रूप में नहीं। इसकी वजह यह है कि जब वर्चुअल डिजिटल स्पेस की बात आती है तो किसी व्यक्ति को गोपनीयता की उचित अपेक्षा होती है। मतलब आपकी ऑनलाइन निजता का सम्मान किया जाना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मेक्सिको और कनाडा से आयात पर लगाया गया नया 25% टैरिफ हुई लागू

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मेक्सिको और कनाडा से आयात पर लगाया गया नया 25% टैरिफ मंगलवार से लागू हो गया। वहीं चीनी वस्तुओं पर शुल्क दोगुना करके 20% कर दिया गया। इसके साथ ही अमेरिका के शीर्ष तीन व्यापारिक साझेदारों के साथ नए व्यापारिक संघर्षों की शुरुआत हो गई। टैरिफ एक्शन लागू होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने कहा कि तीनों देश अमेरिका में घातक फेंटेनाइल ओपिओइड और अन्य ड्रग्स के प्रवाह को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने पलटवार करते हुए 10 मार्च से कुछ अमेरिकी आयातों पर 10%-15% का अतिरिक्त टैरिफ लगाने और नामित अमेरिकी संस्थाओं के लिए कुछ नए निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि ओटावा ’30 बिलियन कनाडाई डॉलर’ (20.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के अमेरिकी आयातों पर तत्काल 25% टैरिफ लगाएगा, और यदि ट्रंप के टैरिफ 21 दिनों तक लागू रहे तो ‘125 बिलियन कनाडाई डॉलर’ (86.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। उन्होंने पहले कहा था कि कनाडा अमेरिकी बीयर, वाइन, बॉर्बन, घरेलू उपकरणों और फ्लोरिडा संतरे के जूस को लक्षित करेगा। ट्रूडो ने कहा, “टैरिफ एक अविश्वसनीय रूप से सफल व्यापारिक संबंध को बाधित करेगा।” उन्होंने कहा कि टैरिफ ट्रंप द्वारा अपने पहले कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षरित यूएस-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते का उल्लंघन करेंगे। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने एनबीसी को बताया कि वह जवाबी कार्रवाई में अपने प्रांत से अमेरिका को निकेल की खेप और बिजली का ट्रांसमिशन रोकने के लिए तैयार हैं। मेक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम भी मंगलवार को अपनी प्रतिक्रिया की घोषणा करेंगी। मेक्सिको के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने यह जानकारी दी। टैरिफ एक घरेलू कर है जो देश में प्रवेश करने वाले सामानों पर लगाया जाता है, जो आयात के मूल्य के अनुपात में होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति कह चुके हैं कि टैरिफ लगाने का फैसला उन्होंने अवैध इमिग्रेशन और ड्रग्स तस्करी की चिंताओं को लेकर उठाया है। रिपब्लिकन नेता ने इन दो मुख्य मुद्दों को अपने चुनावी अभियान का आधार बनाया था।

इजरायल की संसद में जमकर मचा बवाल, नेतन्याहू के भाषण के बीच घुसने लगी भीड़

तेल अवीव इजरायल की संसद में जमकर बवाल मचा है। पीएम बेंजामिन नेतन्याहू जिस वक्त संसद में भाषण दे रहे थे। उसी दौरान हमास के हमले का शिकार हुए लोगों के परिजनों ने धावा बोल दिया। ये लोग नारेबाजी करते हुए अंदर घुसना चाहते थे, लेकिन उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने गेट पर ही रोक दिया। ऐसा करने पर पीड़ितों के परिजन भड़क गए और धक्कामुक्की शुरू हो गई। यही नहीं सुरक्षाकर्मियों ने कई लोगों पर बल प्रयोग किया और उन्हें घसीटते हुए या घूंसे बरसाते हुए बाहर निकाला। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की भी खबर है और उनका इलाज कराना पड़ा। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। यही नहीं इस दौरान पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भी चिल्लाने लगे और कुछ लोगों को फटकारते हुए नजर आए। संसद में घुसने की कोशिश करने वाले लोगों में 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले में मारे गए लोगों के परिजन शामिल थे। इसके अलावा ऐसे भी कई लोग थे, जिनके परिवार के लोगों या रिश्तेदारों को हमास के आतंकवादियों ने अगवा कर लिया था। उन अगवा लोगों में से 8 आतंकियों ने कत्ल ही कर दिया था। ये लोग हमास से बेंजामिन नेतन्याहू सरकार की डील को लेकर नाराज हैं। कुछ लोगों का इस बात को लेकर गुस्सा है कि उनके परिजनों पर अत्याचार किए गए। फिर भी हमास से सरकार ने समझौता कर लिया। कुछ लोगों का कहना है कि यदि इजरायल सरकार को समझौता ही करना था तो यह पहले भी किया जा सकता था। बता दें कि इजरायल और हमास के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है। सीजफायर के दौरान हमास ने इजरायल के बंधकों को रिहा किया है तो वहीं इजरायल ने सैकड़ों कैदियों को रिहा किया है। इन कैदियों की हालत काफी खराब पाई गई है, जिसका जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक ने किया है। बता दें कि समझौते को हमास ने अपनी जीत करार दिया है। उसका कहना है कि इजरायल तो उसे खत्म करने की कसमें खा रहा था। अब हमारे साथ ही यदि उसने समझौता किया है तो इसका मतलब है कि उसने हमारी ताकत को स्वीकार किया है।

बांग्लादेश ने इस्लामिक देश तुर्की से खरीदे खतरनाक ड्रोन, कर दिए भारत की सीमा पर तैनात

ढाका बांग्लादेश की पाकिस्तानी सेना और सरकार से बढ़ती करीबी के बीच तुर्की से भी रिश्तों में सुधार आया है। शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का रुख इस्लामिक देशों के प्रति दोस्ताना रहा है। अब उसने इस्लामिक मुल्क तुर्की से TB-2 बेरक्तार ड्रोन्स खरीद लिए हैं और इन्हें भारत से लगती सीमाओं पर तैनात किया है। यह ड्रोन लंबे समय तक आसमान में उड़ान भरने में सक्षम है। इसी जनरेशन के ड्रोन पाकिस्तान ने भी तुर्की से खरीदे हैं। पाकिस्तान के तुर्की से लंबे वक्त से अच्छे रिश्ते रहे हैं। कश्मीर के मामले में भी पाकिस्तान के बरगलाने पर कई बार तुर्की ने आपत्तिजनक टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र के मंच से की थीं। अब बांग्लादेश ने भी उसे अपने साथ लिया है और हथियारों की खरीदकर भारत की सीमा पर तैनात किया है। भारतीय सुरक्षा बल इन ड्रोन्स की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में इन ड्रोन्स ने सीमा पर उड़ान भरी हैं। अब तक ये ड्रोन बांग्लादेश की सीमा पर ही उड़ते पाए गए हैं। रक्षा सूत्रों ने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पर राडार लगा दिए हैं ताकि ऐसे उपकरणों की निगरानी की जा सके। कई बार बांग्लादेश के इन ड्रोन्स ने 20 घंटे तक आसमान में उड़ान भरी है। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने भारत से लगती सीमा तक पाकिस्तान के अधिकारियों का दौरा कराया है। इनमें आईएसआई से जुड़े लोग भी शामिल रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए बांग्लादेश की हरकतें चिंता का विषय हैं और उस पर निगरानी की जरूरत है।अब बांग्लादेश ने जो ड्रोन खरीदे हैं। वह एक मध्यम ऊंचाई पर लंबी अवधि तक उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन है। एक बार चार्ज होने के बाद यह ड्रोन करीब 27 घंटे तक लगातार उड़ सकता है। यही नहीं करीब 8230 मीटर तक की ऊंचाई तक यह उड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ड्रोन दूसरे देशों के फाइटर जेट्स तक को आसमान में ही गिरा सकता है। बांग्लादेश की पाकिस्तानी सेना और सरकार से बढ़ती करीबी के बीच तुर्की से भी रिश्तों में सुधार आया है। शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का रुख इस्लामिक देशों के प्रति दोस्ताना रहा है। अब उसने इस्लामिक मुल्क तुर्की से TB-2 बेरक्तार ड्रोन्स खरीद लिए हैं और इन्हें भारत से लगती सीमाओं पर तैनात किया है। यह ड्रोन लंबे समय तक आसमान में उड़ान भरने में सक्षम है। इसी जनरेशन के ड्रोन पाकिस्तान ने भी तुर्की से खरीदे हैं। पाकिस्तान के तुर्की से लंबे वक्त से अच्छे रिश्ते रहे हैं। कश्मीर के मामले में भी पाकिस्तान के बरगलाने पर कई बार तुर्की ने आपत्तिजनक टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र के मंच से की थीं। अब बांग्लादेश ने भी उसे अपने साथ लिया है और हथियारों की खरीदकर भारत की सीमा पर तैनात किया है। भारतीय सुरक्षा बल इन ड्रोन्स की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में इन ड्रोन्स ने सीमा पर उड़ान भरी हैं। अब तक ये ड्रोन बांग्लादेश की सीमा पर ही उड़ते पाए गए हैं। रक्षा सूत्रों ने कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पर राडार लगा दिए हैं ताकि ऐसे उपकरणों की निगरानी की जा सके। कई बार बांग्लादेश के इन ड्रोन्स ने 20 घंटे तक आसमान में उड़ान भरी है। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने भारत से लगती सीमा तक पाकिस्तान के अधिकारियों का दौरा कराया है। इनमें आईएसआई से जुड़े लोग भी शामिल रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए बांग्लादेश की हरकतें चिंता का विषय हैं और उस पर निगरानी की जरूरत है।अब बांग्लादेश ने जो ड्रोन खरीदे हैं। वह एक मध्यम ऊंचाई पर लंबी अवधि तक उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन है। एक बार चार्ज होने के बाद यह ड्रोन करीब 27 घंटे तक लगातार उड़ सकता है। यही नहीं करीब 8230 मीटर तक की ऊंचाई तक यह उड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ड्रोन दूसरे देशों के फाइटर जेट्स तक को आसमान में ही गिरा सकता है। बता दें कि बांग्लादेश के रवैये पर फिलहाल सरकार से लेकर सेना तक की नजर है। पिछले दिनों आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी कहा था कि भारत की सीमा पर बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तानी अधिकारियों को लाना चिंता की बात है। उनका कहना था कि पाकिस्तान को हम आतंकवाद का केंद्र मानते रहे हैं। अब यदि उसके लोग हमारी सीमा तक आएंगे तो यह चिंता की बात होगी।

देश में एमएसएमई की संख्या आज बढ़कर 6 करोड़ से भी ज्यादा हो गई: पीएम मोदी

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में एमएसएमई की संख्या आज बढ़कर 6 करोड़ से भी ज्यादा हो गई है। इसी के साथ करोड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। पीएम मोदी ने पोस्ट-बजट वेबिनार के मंच से सभा को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि 2020 में हमने एमएसएमई की परिभाषा में संशोधन किया। यह 14 साल बाद किया गया। इससे यह डर दूर हो गया कि बढ़ते कारोबार से सरकारी लाभ खत्म हो जाएंगे। एमएसएमई को निरंतर आगे बढ़ते रहने का आत्मविश्वास मिले, इसके लिए इस बजट में एमएसएमई की परिभाषा का विस्तार किया गया है। उन्होंने लोन वितरण के लिए नए तरीके अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नए तरीकों के साथ एमएसएमई को कम लागत और समय पर लोन मिलना सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने उद्योगों को एमएसएमई को सहयोग देने के क्रम में मेंटरशिप कार्यक्रम शुरू करने को कहा। बजट में एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी कवर को 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज 14 सेक्टर्स को पीएलआई योजना का लाभ मिल रहा है। इस योजना के तहत 7.5 करोड़ यूनिट को मंजूरी दी गई है। इससे देश में 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है और 13 लाख करोड़ से ज्यादा का उत्पादन हुआ है। इसी के साथ 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात हुआ है।” मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया का हर देश, भारत के साथ अपनी इकोनॉमिक भागीदारी को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से इस पार्टनरशिप का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने भारत की मैन्युफैक्चरिंग यात्रा में रिसर्च और डेवलपमेंट (आरएंडडी) के अहम योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इसे आगे बढ़ाने और गति देने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि आरएंडडी से हम इनोवेटिव प्रोडक्ट्स पर फोकस कर सकते हैं और साथ ही प्रोडक्ट्स में वैल्यू एडिशन कर सकते हैं।  

ओडिशा में दर्दनाक हादसा फिजिकल टेस्ट के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत

सुंदरगढ़ ओडिशा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (OSSC) द्वारा आयोजित फॉरेस्ट गार्ड, फॉरेस्टर और लाइवस्टॉक इंस्पेक्टर भर्ती के शारीरिक परीक्षण में 25 किलोमीटर की दौड़ के दौरान दो अभ्यर्थियों की मौत हो गई. इस घटना के बाद हड़कंप मच गया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू की. मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी गई है. राउरकेला निवासी प्रबीन कुमार पांडा सदर पुलिस थाना क्षेत्र के तहत भवनपुर से बरागड़ा तक की दौड़ के दौरान किरई के पास बेहोश होकर गिर पड़े. मौके पर मौजूद एम्बुलेंस तुरंत उन्हें अस्पताल ले गई, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. दूसरी मौत: ब्योमकेश नायक केओंझर जिले के ब्योमकेश नायक ने भी दूसरी जगह आयोजित फिजिकल टेस्ट के दौरान अपनी जान गंवा दी. इस घटना के बाद ओडिशा सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिवारों को ₹4-4 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की. हार्ट अटैक से मौत की आशंका इस घटना पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह 25 किमी की दौड़ थी, लेकिन दुर्भाग्य से उम्मीदवार सिर्फ 2-3 किमी ही दौड़ पाया और गिर गया. मौके पर एम्बुलेंस मौजूद थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक के पिता भी वहां मौजूद थे. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) की आशंका है, लेकिन असली कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा.  

भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- कश्मीर और मणिपुर पर टिप्पणी निराधार

जिनेवा भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क द्वारा वैश्विक अपडेट में कश्मीर और मणिपुर का उल्लेख किए जाने पर इनकी टिप्पणियों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। जबकि दिल्ली ने इस अपडेट पर चिंता जताते हुए कहा है कि इसमें परिस्थितियों को मनमाने ढंग से चुना गया है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची ने सोमवार को कहा, ”जैसा कि भारत का नाम (अपडेट में) लिया गया है, मैं इस बात को पुरजोर ढंग से कहता हूं विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र एक स्वस्थ, जीवंत और बहुलवादी समाज बना हुआ है। अपडेट में की गई निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियां जमीनी हकीकत से बिल्कुल जुदा हैं।” भारतीयों ने चिंताओं को गलत साबित किया बागची ने कहा, ”भारतीयों ने हमारे बारे में ऐसी गलत चिंताओं को बार-बार गलत साबित किया है। हम भारत एवं हमारी विविधता तथा खुलेपन की सभ्यता को बेहतर तरीके से समझने की सलाह देते हैं, जो हमारे मजबूत और अक्सर शोरगुल वाले नागरिकों को परिभाषित करती है।” बागची ने कहा कि तुर्क ने वैश्विक अपडेट में गलती से जिसे कश्मीर कहा है, वो जम्मू-कश्मीर है और यह इस अंतर को सबसे ज्यादा दर्शाता है। भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया विडंबना यह है कि जिस वर्ष यहां शांति और समावेशी प्रगति में सुधार हुआ, फिर चाहे प्रांतीय चुनाव में भारी मतदान हो, बढ़ता पर्यटन या तेज विकास, उस साल ही ऐसा हुआ। भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया तुर्क द्वारा मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में वैश्विक अपडेट में इसका नाम लिए जाने पर आई है। तुर्क ने वैश्विक अपडेट में क्या लिखा? तुर्क ने इसमें लिखा, ”मैं मणिपुर हिंसा और विस्थापन को रोकने के लिए संवाद, शांति बनाने वाले और मानवाधिकार पर आधारित कोशिशों को तेज करने की मांग करता हूं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ सख्त कानूनों के प्रयोग और उत्पीड़न से चिंतित हूं, जिसके चलते मनमानी हिरासत और कश्मीर सहित अन्य नागरिक स्थान में कमी आई है।” चीन में प्रतिबंधों पर जताई चिंता एएनआई के अनुसार, तुर्क ने चीन में बढ़ते प्रतिबंधों पर चिंता जताते हुए कहा, ”चीन भले ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार प्रणाली से जुड़ा हो, लेकिन मैं गंभीर चिंताओं को दोहराता हूं। मुझे उम्मद है इन मुद्दों पर मजबूत प्रगति होगी। मैं उन वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक पत्रकारों के लिए आवाज उठाता रहूंगा, जिन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है।” अमेरिका पर भी चिंतित एपी के अनुसार तुर्क ने अमेरिका में हो रहे मानवाधिकारों की दिशा में मौलिक बदलाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने ट्रंप प्रशासन का नाम नहीं लिया, जिसने जनवरी में इस परिषद से अमेरिका को हटाने की घोषणा की थी लेकिन कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे मौलिक बदलाव चिंतिंत करते हैं। लोग भड़काऊ भाषणों से भ्रमित हो रहे हैं, धोखा खा रहे हैं और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। इससे लोगों में डर और बेचैनी फैल रही है। बांग्लादेश का भी जिक्र उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने बीते वर्ष हिंसा का अनुभव किया क्योंकि तत्कालीन सरकार ने मानवाधिकार की मशाल लेकर चलने वाले छात्र आंदोलन को क्रूरतापूर्ण ढंग से दबा दिया था। इस संबंध में बीते माह जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद वहां हिंदुओं, अहमदिया मुसलमानों और स्वदेशी समुदायों के कुछ लोगों का मानवाधिकार हनन किया गया था। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 1 जुलाई से 15 अगस्त के बीच हिंसा में करीब 1,400 लोग मारे गए होंगे।

महंगाई, बेरोजगारी, टैक्स राहत, और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ट्रंप सरकार के कदमों से लोग संतुष्ट नहीं

वाशिंगटन अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CBS द्वारा किए गए हालिया सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। इस सर्वे में अमेरिकी नागरिकों ने खुलकर अपने विचार रखे और बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने जिन वादों के साथ राष्ट्रपति पद हासिल किया था, अब वे उन सभी मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी, टैक्स राहत, और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ट्रंप सरकार के कदमों से लोग संतुष्ट नहीं हैं। अमेरिका की जनता आर्थिक सुधार चाहती है सर्वे में हिस्सा लेने वाले 82 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करे। 80 प्रतिशत लोगों ने बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने की मांग की, जबकि 59 प्रतिशत लोग टैक्स में छूट चाहते हैं। मैक्सिको बॉर्डर को लेकर ट्रंप सरकार ने जो सख्त रुख अपनाया है, वह जनता को उतना जरूरी नहीं लग रहा। सिर्फ 51 प्रतिशत लोगों ने ही इसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया, जबकि 73 प्रतिशत लोगों ने कहा कि सरकार इसे जरूरत से ज्यादा तूल दे रही है। बेरोजगारी बढ़ाने पर लगी ट्रंप सरकार! 69 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन नई नौकरियों के अवसर पैदा करने के बजाय नौकरियां खत्म करने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। वहीं, केवल 29 प्रतिशत लोग ही मानते हैं कि ट्रंप सरकार महंगाई को लेकर गंभीर है। विदेश नीति पर भी जनता असंतुष्ट सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ट्रंप सरकार की विदेश नीति को लेकर भी जनता संतुष्ट नहीं है। 42 प्रतिशत लोगों का मानना है कि विदेश नीति में हुए बदलावों से अमेरिका की स्थिति खराब हो सकती है। वहीं, केवल 31 प्रतिशत लोग इसे सही मानते हैं। यूक्रेन विवाद पर ट्रंप सरकार पर उठे सवाल यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को लेकर भी अमेरिकी जनता ने अपनी राय दी। 52 प्रतिशत लोगों ने यूक्रेन का समर्थन किया, जबकि केवल 4 प्रतिशत लोग रूस के पक्ष में दिखे। ट्रंप सरकार ने यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने पर रोक लगा दी थी, जिसे 51 प्रतिशत लोगों ने गलत बताया। उनका मानना है कि ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ज्यादा समर्थन कर रहे हैं, जबकि उन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का साथ देना चाहिए था।

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