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शेयर बाजार में हाहाकार के बीच तुहिन पांडेय ने संभाली सेबी की कमान

नई दिल्ली शेयर बाजार में मचे हाहाकार के बीच वरिष्ठ नौकरशाह तुहिन कांत पांडेय ने पूंजी बाजार नियामक सेबी के 11वें चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इस मौके पर उन्होंने पारदर्शिता और टीम-वर्क पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया। पांडेय ऐसे समय में सेबी के प्रमुख का पद संभालेंगे जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बाद बाजार में मंदी का दबाव देखने को मिल रहा है। बता दें कि जनवरी से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है। तुहिन कांत पांडे के लिए बाजार की ऐतिहासिक गिरावट एक बड़ी चुनौती होगी। इस बिगड़े माहौल में निवेशकों को सुरक्षा और भरोसा देने की जिम्मेदारी है।   क्या कहा सेबी के नए चेयरमैन ने अब तक वित्त सचिव के रूप में कार्य कर रहे पांडेय ने सेबी को एक ऐसा मजबूत बाजार संस्थान बताया, जिसे वर्षों से विभिन्न दिग्गजों ने आकार दिया है। नए चेयरमैन ने अपने उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए चार टी- विश्वास (ट्रस्ट), पारदर्शिता (ट्रांसपेरैंसी), टीमवर्क और प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) को अपने मुख्य ध्यान वाले क्षेत्रों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ये चार तत्व हमें (सेबी) विशिष्ट बनाते हैं, और हम दुनिया में सबसे अच्छे बाजार संस्थानों में से एक बनाना जारी रखेंगे। अपने कार्य-एजेंडे या कार्यशैली के बारे में बताने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी पर टिप्पणी नहीं करेंगे। बता दें कि अब तक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच थीं। बुच पर उनके कार्यकाल के अंतिम कुछ महीनों में अनियमितताओं के कई आरोप लगे थे। पिछले कुछ महीनों में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में कुछ गतिविधियां देखने को मिली हैं, जहां इसके कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है।   ओडिशा कैडर के अधिकारी तुहिन कांत पांडेय ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1987 बैच के अधिकारी हैं और उनका कार्यकाल तीन साल का है। पांडेय वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग को संभालने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सचिव थे। दीपम वित्त मंत्रालय का एक विभाग है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी इक्विटी का प्रबंधन करता है।

केंद्र और राज्य सरकार की 1,200 योजनाओं में से 1,100 में डीबीटी सिस्टम के जरिए लोगों तक लाभ पहुंच रहा: वित्त मंत्री

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की 1,200 योजनाओं में से 1,100 में डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सिस्टम के जरिए लोगों तक लाभ पहुंच रहा है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि डीबीटी से यह सुनिश्चित होता है कि धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित हो, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो और देरी कम हो। राष्ट्रीय राजधानी में 49वें सिविल लेखा दिवस समारोह में बोलते हुए मंत्री ने कहा, “अब हर चीज के लिए सीधे भुगतान किया जा रहा है और इसमें कोई बिचौलिया नहीं है और किसी अजन्मे बच्चे को भत्ता नहीं मिल रहा है।” वित्त मंत्री ने कहा कि धनराशि प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के पास बायोमेट्रिक सत्यापित खाता होता है, जिसमें धनराशि ट्रांसफर की जाती है। उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) ने डीबीटी को सुव्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।” वित्त मंत्री ने कहा कि यह प्रणाली सरकार को यह सुनिश्चित करने में सक्षम बनाती है कि धनराशि बिना किसी अनियमितता के सही लाभार्थियों तक पहुंचे। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि पीएफएमएस वर्तमान में लगभग 60 करोड़ लाभार्थियों को सेवा प्रदान करता है, जिससे यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली बन गई है। इसके संपूर्ण डिजिटलीकरण फीचर ने वित्तीय प्रशासन को मजबूत किया है और फंड वितरण में जवाबदेही बढ़ाई है। उन्होंने आगे कहा कि पीएफएमएस ने 31 राज्य कोषागारों और 40 लाख से अधिक कार्यक्रम कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ काम करते हुए राज्यों की वित्तीय प्रणालियों को जोड़ा है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “अपने व्यापक नेटवर्क के साथ, यह प्रणाली यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि सरकारी धन का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए और उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।”

डोनाल्ड ट्रंप और जेलेंस्की की तीखी बहस से पुतिन के सहयोगी खुशी से झूमे, फिदा हुई रूसी मीडिया

मॉस्को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के साथ यूक्रेनी प्रेसिडेंट वोलोदिमिर जेलेंस्की की तीखी बहस को रूसी मीडिया एक ‘अच्छी खबर’ के तौर पर देख रहा है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी भी इससे बहुत खुश हैं। रूसी सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, ने टेलीग्राम पर लिखा कि यूएस प्रेसिडेंट ने यूक्रेन को ‘कड़ा तमाचा’ जड़ा है हालांकि यह नाकाफी है – हमें नाजी मशीन (जेलेंस्की सरकार) की सैन्य सहायता बंद करनी होगी। राज्य-नियंत्रित मीडिया आउटलेट आरटी ने ट्रम्प-जेलेंस्की की बैठक को लेकर एक्स पर लिखा: “जेलेंस्की अपने दोनों पैरों के बीच हाथ रखकर बैठे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति उन पर निशाना साध रहे हैं।” रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा के मुताबिक यह ‘चमत्कार’ ही था कि ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, किसी तरह जेलेंस्की पर हमला करने से खुद को रोक पाए। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा, “मुझे लगता है कि जेलेंस्की का सबसे बड़ा झूठ व्हाइट हाउस में उनका यह दावा था कि 2022 में कीव शासन अकेला था, बिना किसी समर्थन के।” इस बीच, रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के प्रमुख किरिल दिमित्रिएव ने ओवल ऑफिस में हुई तीखी नोकझोंक को ‘ऐतिहासिक’ बताया। दिमित्रिएव 18 फरवरी को सऊदी अरब में आयोजित रूसी-अमेरिकी वार्ता में मास्को के वार्ताकारों में से एक थे। व्हाइट हाउस में हुई ट्रंप-जेलेंस्की नोकझोंक के बाद जहा अधिकांश यूरोपीय नेताओं ने जेलेंस्की और यूक्रेन का समर्थन किया वहीं हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ट्रंप की तारीफ करते नजर आए। पुतिन के दोस्त ओर्बन के मुताबिक ट्रंप ‘शांति के लिए बहादुरी से खड़े हैं। भले ही कई लोगों के लिए इसे पचाना मुश्किल हो।’ उन्होंने एक्स पर लिखा, “शक्तिशाली लोग शांति कायम करते हैं, कमजोर लोग युद्ध करते हैं।” रूस की अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहयोग एजेंसी के प्रमुख येवगेनी प्रिमाकोव ने टेलीग्राम पर लिखा, “हर किसी ने सबकुछ देखा। मैं सिर्फ इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि कीव शासन की प्रकृति क्या है: उकसावा, खूनी उकसावा। अभी जेलेंस्की और उनके सहयोगी उकसावे में रुचि रखते हैं, जिससे शांतिपूर्ण नागरिकों की सामूहिक मृत्यु हो सकती है, कुछ ऐसा जो पहले कभी न हुआ हो।” इससे पहले शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस के साथ राष्ट्रपति जेलेंस्की की मुलाकात एक शोरगुल वाली तीखी बहस में बदल गई। अमेरिकी नेताओं ने जेलेंस्की पर उनकी टिप्पणियों के लिए व्हाइट हाउस और अमेरिका का अनादर करने का आरोप लगाया। वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति ने उन पर आक्रमण का शिकार होने की हताशा को महसूस नहीं करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए। इस समझौते का उद्देश्य कीव के युद्ध प्रयासों में किए मदद के लिए यूक्रेन के दुर्लभ खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के भंडार पर अमेरिका का अधिकार स्थापित करना था।

कनाडा में वर्क वीजा प्राप्त करने में प्राथमिकता मिलेगी, 2025 में सबसे ज्यादा डिमांड वाली जॉब की आई लिस्ट

कनाडा अगर आप 2025 में कनाडा में नौकरी करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। कनाडा ने 2025 के लिए ‘स्किल इमिग्रेशन’ योजना के तहत नौकरी की प्राथमिकताएँ बदल दी हैं। इस नई लिस्ट के अनुसार, जिन नौकरी प्रोफेशनल्स को इसमें शामिल किया गया है, उन्हें कनाडा में वर्क वीजा प्राप्त करने में प्राथमिकता मिलेगी। सबसे ज्यादा जरूरत टीचर्स की है, साथ ही कुक और हेल्थकेयर क्षेत्र से जुड़ी नौकरियों को भी प्राथमिकता दी गई है। कनाडा में नौकरी की नई प्राथमिकताएँ कनाडा में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले पेशेवरों के लिए इस लिस्ट में कई बदलाव किए गए हैं। इसमें टीचर्स के असिस्टेंट्स, अर्ली चाइल्डहुड एजुकेटर्स (KG जैसे स्कूल में पढ़ाने वाले) और कुक जैसी जॉब्स को अब प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी नौकरियों को इस लिस्ट से हटा दिया गया है, जबकि STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) से संबंधित नौकरियों को भी बाहर कर दिया गया है। कनाडा का इमिग्रेशन डिपार्टमेंट इस समय ‘कैटेगरी-बेस्ड सेलेक्शन’ सिस्टम का पालन कर रहा है, जिसका उद्देश्य कनाडा की लेबर मार्केट की जरूरतों के अनुसार स्किल्ड वर्कर्स को प्राथमिकता देना है। कनाडा में कौन-कौन सी नौकरियों की जरूरत है? ‘स्किल इमिग्रेशन’ के तहत प्राथमिकता वाले सेक्टर्स में अब एजुकेशन सेक्टर को भी जोड़ा गया है। इसमें किंडरगार्टन, प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल के टीचर्स और उनके असिस्टेंट्स, बच्चों की देखभाल करने वाले पेशेवर, और विकलांग व्यक्तियों के लिए इंस्ट्रक्टर्स शामिल हैं। हेल्थकेयर क्षेत्र में अब सामाजिक सेवाओं से जुड़े पेशेवर और तकनीशियन नौकरियां भी शामिल की गई हैं। इंश्योरेंस एजेंट्स और ब्रोकर्स को भी लिस्ट में जोड़ा गया है। इसके अलावा, कुक की भी अब उच्च प्राथमिकता वाली जॉब्स में शामिल है। कौन सी नौकरियाँ अब प्राथमिकता लिस्ट से बाहर हो गई हैं? इस बार STEM कैटेगरी से कई नौकरियाँ हटा दी गई हैं, जैसे आर्किटेक्ट्स, कंप्यूटर और इंफोर्मेशन सिस्टम मैनेजर्स, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डेवलपर्स, और डेटा साइंटिस्ट। साथ ही, ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी नौकरियाँ, जैसे ट्रक ड्राइवर, भारी उपकरण ऑपरेटर और एयरलाइन पायलट, को भी अब स्किल इमिग्रेशन सिस्टम से बाहर कर दिया गया है। कनाडा के इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने कहा कि कनाडा का सेलेक्शन सिस्टम अब देश की बदलती जरूरतों के अनुरूप होगा। अगर आप टीचर, कुक या हेल्थकेयर से जुड़ी जॉब्स में रुचि रखते हैं, तो कनाडा में आपकी मांग अब अधिक है, और आपको वर्क वीजा मिलने में आसानी हो सकती है।

यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में बारिश, आंधी तूफान व ओलावृष्टि होगी: मौसम विभाग

नई दिल्ली वेस्टर्न डिस्टर्बेंस समेत उत्तर भारत के कई राज्यों का मौसम बदल चुका है। पहाड़ी राज्यों में जहां भारी बारिश और बर्फबारी से जनजीवन पर असर पड़ा है तो उधर मैदानी इलाकों में भी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में बारिश, आंधी तूफान व ओलावृष्टि होगी। हालांकि, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सिस्टम थोड़ा कमजोर जरूर पड़ा है। मौसम विभाग की वैज्ञानिक डॉ. सोमा सेन ने एएनआई को बताया, ”उत्तरी भारत के ऊपर एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ गुजर रहा है… यह सिस्टम कमजोर हो रहा है, लेकिन उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में मध्यम गरज के साथ बारिश होने की उम्मीद है। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है। पूर्वी लहरें चल रही हैं, जिसके कारण दक्षिण भारत में भारी बारिश हो रही है, जिसका असर तमिलनाडु, केरल और लक्षद्वीप पर पड़ रहा है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ आने की उम्मीद है, जिससे उत्तरी पहाड़ियों पर बारिश और तूफान का एक और दौर आएगा।” उत्तर प्रदेश और बिहार में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आज हवाएं चलेंगी, जबकि आंधी तूफान व बिजली कड़कने की भी चेतावनी जारी की गई है। इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ में भी आज ओलावृष्टि होने वाली है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में आज तेज बारिश होगी। कल आ रहा नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस मौसम विभाग ने बताया है कि एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कल रात याी कि दो मार्च से उत्तर पश्चिम भारत में दस्तक देने जा रहा है। इसकी वजह से मौसम बिगड़ेगा और जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में दो से चार मार्च, हिमाचल प्रदेश में तीन मार्च को भारी बारिश होगी। पूर्वोत्तर राज्यों की बात करें तो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर असम, नगालैंड में एक मार्च को तेज बारिश होगी। वहीं, अरुणाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर असम में एक मार्च को तेज बरसात का अलर्ट है। इसके अलावा, दक्षिण में तमिलनाडु में एक मार्च, केरल, लक्षद्वीप में एक और दो मार्च को बारिश होने की चेतावनी जारी की गई है। चार डिग्री तक गिर जाएगा तापमान उत्तर पश्चिम भारत का तापमान अगले दो दिनों में चार डिग्री तक गिर जाएगा। मध्य भारत में अगले तीन दिनों बाद न्यूनतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। वहीं, तटीय कर्नाटक में एक और दो मार्च को हीटवेव की स्थिति रहने वाली है। कोंकण, गोवा में एक से तीन मार्च, तटीय कर्नाटक में तीन मार्च को हॉट एंड ह्यूमिड वेदर रहने वाला है।

जेलेंस्की और डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी तकरार के दौरान यूक्रेन के समर्थन में आए ये देश, कहा-अकेले नहीं हो, निडर रहो

कीव यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई तीखी तकरार के बाद यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जबरदस्त समर्थन मिला है।  दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान तीखी बहस छिड़ गई। इस टकराव ने यूक्रेन-रूस संघर्ष के संदर्भ में अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर कर दिया है। यूक्रेन के यूरोपीय साझेदारों और दुनिया के अलग-अलग देशों के नेताओं ने जहां जेलेंस्की का समर्थन किया तो वहीं दूसरी ओर ‘व्हाइट हाउस’ ट्रंप के साथ खड़ा दिखाई दिया। ट्रंप-जेलेंस्की में तीखी बहस शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई इस बैठक में ट्रंप ने जेलेंस्की पर रूस के साथ शांति वार्ता में सहयोग न करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी नीतियां “तीसरे विश्व युद्ध” को निमंत्रण दे रही हैं। जवाब में, जेलेंस्की ने ट्रंप और उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की आलोचना करते हुए कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही संघर्षविराम तोड़ा है और उनकी “कूटनीति” पर सवाल उठाए। इस तीखी नोकझोंक के बाद जेलेंस्की ने बैठक को बीच में ही छोड़ दिया, जिसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक असामान्य घटना माना जा रहा है। यूरोपीय देशों ने की जेलेंस्की के पक्ष में आवाज बुलंद इसके तुरंत बाद, यूरोप के कई प्रमुख देशों ने जेलेंस्की के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘एक हमलावर है: रूस। एक पीड़ित है: यूक्रेन। हमारा तीन साल पहले यूक्रेन की मदद करना और रूस पर प्रतिबंध लगाना सही था – और ऐसा करते रहना सही भी है।” मैक्रों ने कहा, “हमारे से मेरा तात्पर्य अमेरिकी, यूरोपीय, कनाडाई, जापानी और कई अन्य से है।” उन्होंने कहा, “उन सभी का आभार जिन्होंने मदद की और कर रहे हैं। उन लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूं जो शुरू से ही लड़ रहे हैं – क्योंकि वे अपनी गरिमा, अपनी स्वतंत्रता, अपने बच्चों और यूरोप की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं।” उन्होंने ट्रंप के दोनों पक्षों को समान मानने के दृष्टिकोण की निंदा की। “प्रिय यूक्रेनी मित्र, आप अकेले नहीं हैं” जर्मनी के अगले संभावित चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रिय वोलोदिमीर जेलेंस्की, हम अच्छे और मुश्किल समय में यूक्रेन के साथ खड़े हैं। हमें इस भयानक युद्ध में कभी हमलावर और पीड़ित को लेकर भ्रमित नहीं होना चाहिए।” वहीं यूक्रेन के पड़ोसी पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी कहा, “प्रिय यूक्रेनी मित्र, आप अकेले नहीं हैं।” एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिशल ने कहा कि उनका देश स्वतंत्रता की लड़ाई में जेलेंस्की और यूक्रेन के साथ एकजुट है। मिशनल ने कहा, “हमेशा। क्योंकि यह सही है, आसान नहीं है।” एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिशल ने कहा कि उनका देश स्वतंत्रता की लड़ाई में जेलेंस्की और यूक्रेन के साथ एकजुट है। मिशनल ने कहा, “हमेशा। क्योंकि यह सही है, आसान नहीं है।” स्वीडन, लिथुआनिया, लातविया, चेक गणराज्य, स्पेन, नॉर्वे, नीदरलैंड्स, और बेल्जियम जैसे देशों ने भी जेलेंस्की और यूक्रेन के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने कहा, “आज यह स्पष्ट हो गया कि आजाद दुनिया को एक नए नेता की जरूरत है, और यह जिम्मेदारी यूरोप को लेनी होगी।” यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आपने जो गरिमा दिखाई, उसने यूक्रेन के लोगों की बहादुरी को दर्शाया है। मजबूत, बहादुर और निडर बने रहें, प्रिय वोलोदिमीर जेलेंस्की। हम न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए आपके साथ काम करते रहेंगे।” यूक्रेन के समर्थन में ट्रंप की करीबी जियोर्जिया मेलोनी ट्रंप की करीबी सहयोगी मानी जाने वाली इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि वे कूटनीति को पुनः पटरी पर लाने के लिए यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच शिखर सम्मेलन का आह्वान करेंगी। उन्होंने एक बयान में कहा, “अमेरिका, यूरोपीय देशों और सहयोगियों के बीच तत्काल एक शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाने की आवश्यकता है, जिसमें इस बारे में खुलकर बात की जाए कि हम आज की बड़ी चुनौतियों से कैसे निपटना चाहते हैं। इसकी शुरुआत यूक्रेन से हो, जिसका हमने हाल के वर्षों में मिलकर बचाव किया है।” हंगरी ने दिया ट्रंप का साथ हालांकि, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने ट्रंप का समर्थन करते हुए कहा, “मजबूत लोग शांति बनाते हैं, कमजोर लोग युद्ध को जन्म देते हैं।” यह बयान यूरोप के भीतर मतभेदों को दर्शाता है। दूसरी ओर, ‘व्हाइट हाउस’ ने एक बयान जारी कर कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति वेंस की ‘अमेरिका फर्स्ट स्ट्रेंथ’ को समर्थन मिल रहा है। ट्रंप और वेंस ने दुनिया को स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका का फायदा नहीं उठाने दिया जाएगा। कैबिनेट और पूरे देश के सांसद यह भावना जाहिर कर चुके हैं।” बयान में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम समेत कई सांसदों के उद्धरण शामिल हैं।

गर्माहट के बीच जेलेंस्की ने ट्रंप को कहा शुक्रिया, पर माफी मांगने से किया इनकार; खाली हाथ लौटना पड़ा

वाशिंगटन अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्‍ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच व्‍हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में तीखी बहस हुई. इसके बाद अब ये सवाल उठ रहा है कि लगभग 3 साल से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध का क्‍या होगा? क्‍या यूक्रेन, बिना अमेरिका की मदद के रूस के सामने टिका रह सकता है? यूक्रेन को अभी यूरोपीय देशों का साथ मिल रहा है, क्‍या इनके दम पर वोलोदिमीर जेलेंस्की युद्ध में खड़े रह पाएंगे? रूस आखिर क्‍यों यूक्रेन के साथ अब समझौते को तैयार हो गए हैं? इन सभी सवालों के जवाब हमें आने वाले समय में मिल जाएंगे, लेकिन ट्रंप और जेलेंस्की के बीच इतनी दूरियां क्‍यों आती जा रही है… आखिर, क्‍यों सत्‍ता बदलते ही अमेरिका का नजरिया रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बदल गया है? आइए जानते हैं… क्‍या यहीं तक था यूक्रेन और अमेरिका का साथ? अभी तक सिर्फ ऐसी अटकलें लग रही थीं कि ट्रंप और जेलेंस्की में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, लेकिन अब ये जगजाहिर हो गया है. ओवल ऑफिस में बैठक के दौरान हुई गरमागरम बहस के बाद अमेरिका-यूक्रेन के बीच का मनमुटाव साफ हो गया है. पिछले दिनों ट्रंप द्वारा जेलेंस्की को ‘तानाशाह’ कहे जाने के बाद हुई इस बैठक में दोनों के बीच तनाव इस कदर बढ़ा कि जेलेंस्की बैठक के लिए तय समय से पहले ही यूएस-यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण खनिज सौदे पर हस्ताक्षर किए बिना व्हाइट हाउस से चले गए. ट्रंप के साथ तीखी बहस के बाद जेलेंस्‍की ने कहा कि उनका मानना ​​है अमेरिका के साथ यूक्रेन के रिश्‍तों को बचाया जा सकता है. ‘उसी हाथ को काट रहे…’ रूस की सिक्योरिटी काउंसिल के उपाध्यक्ष मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर पोस्ट किया, “ओवल ऑफिस में क्रूर तरीके से पिटाई की गई.” रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि यह चमत्कार था कि ट्रंप और वेंस ने बहस के दौरान ज़ेलेंस्की पर हमला करने से खुद को रोक लिया, जिसे दुनिया भर के समाचार चैनलों पर प्रसारित किया गया. उन्होंने कहा कि ज़ेलेंस्की उसी हाथ को काट रहे थे, जिसने उन्हें खिलाया था. रूस ने लंबे वक्त से ज़ेलेंस्की को एक अस्थिर और आत्म-मुग्ध अमेरिकी कठपुतली के रूप में चित्रित किया है. ज़ेलेंस्की ने उस कैरेक्टर को खारिज कर दिया है, उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन के सहयोगियों की मदद से रूस से अपने देश की रक्षा करने के लिए वह सब कुछ कर रहे हैं, जो वह कर सकते हैं. ‘चुनाव के बिना तानाशाह…’ मॉस्को और वॉशिंगटन के बीच तेजी से हो रहे मेल-मिलाप से यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी चिंतित हो गए हैं, जिन्हें डर है कि ट्रंप और राष्ट्रपति पुतिन एक ऐसा सौदा कर सकते हैं, जो उन्हें दरकिनार कर देगा और उनकी सुरक्षा को कमजोर कर देगा. पुतिन ने बार-बार कहा है कि ज़ेलेंस्की वैध नेता नहीं हैं क्योंकि उनका पांच साल का कार्यकाल पिछले साल खत्म हो गया था. यूक्रेन चुनाव कराने में असमर्थ रहा है क्योंकि फरवरी 2022 में युद्ध छिड़ने के बाद से यह मार्शल लॉ के अधीन है. ट्रंप ने पिछले हफ्ते पुतिन के बयान को दोहराते हुए ज़ेलेंस्की को ‘चुनाव के बिना तानाशाह’ बताया. व्हाइट हाउस में ट्रंप और ज़ेलेंस्की के बीच टकराव ने यूक्रेनी नेता को तीन साल के युद्ध में पहले से कहीं ज़्यादा उजागर कर दिया है, जिसके दौरान उनका देश ट्रंप के पूर्ववर्ती जो बाइडेन द्वारा आपूर्ति की गई सहायता और हथियारों पर बहुत अधिक निर्भर रहा है. क्रेमलिन के पूर्व सलाहकार सर्गेई मार्कोव ने कहा कि ओवल ऑफिस में टकराव से ज़ेलेंस्की के सियासी सफर के आखिरी में तेजी आने की संभावना है. कुछ रूसी अधिकारी कुछ समय से यह देखना चाहते थे, क्योंकि उनका मानना ​​था कि किसी और के साथ शांति समझौता करना आसान होगा. रूस के संसद के ऊपरी सदन के उपाध्यक्ष कोंस्टेंटिन कोसाच्योव ने कहा कि गहमागहमी के बाद ज़ेलेंस्की को पहचाना जा चुका है, उनका असली रंग उजागर हो चुका है.

महिला की हर बात को सत्य मान लेना ठीक नहीं, यौन उत्पीड़न केस में पुरुषों को फंसाने का ट्रेंड: केरल हाईकोर्ट

केरल केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि आपराधिक मामलों, खासकर यौन अपराधों में यह मान लेना कि शिकायतकर्ता का हर बयान सत्य होता है, गलत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में ऐसे मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन ने एक महिला कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने के दौरान यह बातें कही हैं। कोर्ट ने कहा, “एक आपराधिक मामले की जांच का मतलब केवल शिकायतकर्ता के पक्ष की जांच नहीं है, बल्कि आरोपी के मामले की भी जांच की जानी चाहिए। केवल इसलिए कि शिकायतकर्ता महिला है यह मान लेना कि उसका हर बयान सत्य है, यह सही नहीं है। पुलिस केवल उसके बयान के आधार पर कार्रवाई नहीं कर सकती है। आरोपी के मामले को भी गंभीरता से जांचना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी कहा कि आजकल यह प्रवृत्ति बन गई है कि महिलाओं द्वारा पुरुषों पर यौन उत्पीड़न के आरोप झूठे होते हुए भी उन्हें फंसा लिया जाता है। यदि पुलिस यह पाती है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप झूठे थे तो वह शिकायतकर्ता के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है। ऐसा कानून भी कहता है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों में फंसाया जाता है तो उसका नाम, समाज में प्रतिष्ठा और स्टेटस को नुकसान हो सकता है। केवल पैसे के मुआवजे से उसे वापस हासिल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को सच की जांच में सतर्क और चौकस रहने की सलाह दी, ताकि अपराध मामलों की जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न हो। क्या है मामला? आपको बता दें कि महिला ने आरोप लगाया था कि कंपनी के प्रबंधक ने उसके हाथों को यौन उद्देश्य से पकड़ा। वहीं, आरोपी ने पुलिस से शिकायत की थी कि महिला ने उसे गाली दी और धमकियां दीं। उन्होंने इस संबंध में एक पेन ड्राइव में महिला की कथित बातें रिकॉर्ड कर के पुलिस को सौंपी। कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा मामला था जिसमें जांच अधिकारी (IO) को आरोपी की शिकायत की भी जांच करनी चाहिए थी। कोर्ट ने आरोपी को पेन ड्राइव जांच अधिकारी के समक्ष पेश करने का आदेश दिया और जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह उसकी जांच करें। जमानत का आदेश कोर्ट ने आरोपी को 50,000 रुपये की जमानत राशि और दो सक्षम जमानतदारों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके अलावा आरोपी को जांच में सहयोग करने, गवाहों को प्रभावित या डराने की कोशिश न करने और जब भी जांच अधिकारी बुलाए पेश होने का आदेश भी दिया गया।

चमोली हिमस्खलन में रेस्क्यू किए गए 50 में से चार मजूदरों की मौत, 5 मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान जारी

चमोली उत्तराखंड के चमोली में हुए हिमस्खलन में मांड़ा गांव में 55 मजदूर फंस गए थे. मजदूरों के बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. अब तक 50 मजदूरों का रेस्क्यू कर लिया गया है. हालांकि, रेस्क्यू किए गए 50 में से चार मजूदरों की मौत हो गई. वहीं, फंसे हुए 5 मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. मजदूरों को बचाने के लिए आइबेक्स ब्रिगेड की बचाव टीम के नेतृत्व में अभियान चलाया जा रहा है. सड़कें अवरुद्ध होने के कारण लोगों को निकालने के लिए कुल 06 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं. हेलीकॉप्टरों में भारतीय सेना विमानन के 3 चीता हेलीकॉप्टर, वायु सेना के 2 चीता हेलीकॉप्टर शामिल हैं. वहीं, रेस्क्यू अभियान में एक नागरिक हेलीकॉप्टर को भी शामिल किया गया है. रेस्क्यू अभियान में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि अभी तक 50 लोगों को बचाया जा चुका है. दुर्भाग्य से चार घायल व्यक्तियों की मृत्यु की पुष्टि हुई है. घायलों को निकालने के लिए प्राथमिकता दी जा रही है. सेना द्वारा लापता शेष पांच लोगों को बचाने के लिए खोज अभियान जारी है. वरिष्ठ सेना अधिकारी व्यक्तिगत रूप से चल रहे बचाव अभियान की निगरानी करने के लिए दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए हैं. वहीं,  मुख्यमंत्री खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं. जोशीमठ के आर्मी हेलीपैड से चलाया जा रहा है रेस्क्यू अभियान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर जोशीमठ के आर्मी हेलीपैड से रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं. वर्ष 2013 की आपदा में भी यहीं से हेलीपैड से लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था. उसे समय भी आईटीबीपी और भारतीय सेना देवदूत साबित हुई थी. हालांकि अभी भी बचे हुए 5 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. रेस्क्यू अभियान में खराब मौसम बांधा बन रहा है.

बैंक से लेकर UPI और स‍िलेंडर से लेकर ATF के प्राइस तक, आज से इन 7 चीजों में हुआ बदलाव!

नई दिल्ली हर महीने की तरह ही 1 मार्च, 2025 से नए नियमों में बदलाव हो रहा है. 1 मार्च यानी आज से 6 बड़े नियम बदल रहे हैं. इसमें UPI, म्‍यूचुअल फंड से लेकर एलपीजी सिलेंडर के दाम तक शामिल हैं. ये बदलाव सीधे आपके बैंक अकाउंट पर असर डालेंगे. आइए जानते हैं किन किन नियमों में बदलाव किया जा रहा है. LPG सिलेंडर के दाम बढ़े तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए हैं. इस एलपीजी सिलेंडर के दाम में 6 रुपये का इजाफा किया गया है, जबकि 1 फरवरी को इसके दाम में 7 रुपये की कमी की गई थी. 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 1803 रुपये हो गई है. वहीं मुंबई में कमर्शियल सिलेंडर का प्राइस 1755.50 रुपये हो गया है. कोलकाता की बात करें तो 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत 1913 रुपये हो चुकी है और चेन्‍नई में 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम 1965.50 रुपये हो चुका है. यह कीमतें आज से ही लागू हैं. रसोई गैस के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. ATF की कीमत घटी जेट ईंधन या एविएशन टर्बाइन ईंधन (ATF) की कीमत में मामूली 0.23 प्रतिशत की कमी आई है. राष्ट्रीय राजधानी में मार्च 2025 के लिए ATF प्राइस 222 रुपये प्रति किलोलीटर से घटकर 95,311.72 रुपये प्रति किलोलीटर हो गया है, जबकि पहले यह 95,533.72 रुपये था. इससे पहले 1 फरवरी को कीमतों में 5.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की हुई थी. UPI के नियम में बदलाव अगला बदलाव इंश्योरेंस प्रीमियम पेमेंट सिस्टम (Insurance Payment System) से जुड़ा हुआ है. 1 मार्च 2025 से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) में चेंज होने जा रहा है, जिससे बीमा प्रीमियम का भुगतान और अधिक आसान होगा. यूपीआई सिस्टम में बीमा-ASB (एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक अमाउंट) नामक एक नई सुविधा जोड़ी जा रही है. इसके जरिए लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीहोल्डर अपने प्रीमियम पेमेंट के लिए पहले से ही पैसे को ब्लॉक रख सकेंगे. पॉलिसी होल्डर के अप्रूवल के बाद खाते से अपने आपका पैसा कट जाएगा. म्‍यूचुअल फंड को लेकर क्‍या बदल रहा आज यानी मार्च की पहली तारीख से म्यूचुअल फंड और डीमैट खातों में नॉमिनी जोड़ने से जुड़े नियमों में बदलाव हो रहा है. इसके तहत कोई इन्वेस्टर डीमैट या म्यूचुअल फंड फोलियो में अधिकतम 10 नॉमिनी एड कर सकता है. इस संबंध में मार्केट रेग्युलेटर SEBI गाइडलाइंस जारी की है, जो 1 मार्च, 2025 से प्रभावी है. इस चेंज का उद्देश्य क्लेम न की जाने वाली संपत्तियों में कमी लाना और बेहतर इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट सुनिश्चित करना है. पंजाब नेशनल बैंक ने दिया अपडेट पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में अगर 2 साल से ज्‍यादा समय तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो बैंक अकाउंट बंद कर दिया जा सकता है. बैंक ने इस बारे में अपने ग्राहकों को अलर्ट जारी किया है. बैंक ऐसे अकाउंट्स को डी-एक्टिवेट कर सकता है यानी बंद कर सकता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बैंक खाता एक्टिव रहे तो इसके लिए आपको KYC करा लेना चाहिए. 14 दिन बैंक रहेंगे बंद RBI Bank Holiday List के मुताबिक, होली (Holi 2025) और ईद-उल-फितर समेत अन्य त्योहारों वाले इस महीने में 14 दिन बैंक बंद रहेंगे. इनमें दूसरे और चौथे शनिवार समेत रविवार का साप्ताहिक अवकाश शामिल हैं. हालांकि, बैंक में छुट्टी के बावजूद आप ऑनलाइन बैंकिंग और ATM के जरिए पैसे का ट्रांजैक्शन कर सकते हैं या अन्य बैंकिंग काम निपटा सकते हैं. ये सर्विस 24 घंटे चालू रहेंगी.  

उत्तराखंड : चमोली हिमस्खलन में मांड़ा गांव में 55 मजदूर में से 47 मजदूरों को रेस्क्यू कर लिया गया,जबकि 8 अभी फंसे हुए

चमोली उत्तराखंड के चमोली में एवलांच को आए 24 घंटे से ज्यादा हो गए. अभी भी 8 मजदूर फंसे हुए हैं. 47 मजदूरों का रेस्क्यू कर लिया गया है. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन प्रोजेक्ट में कुल 57 लोग काम कर रहे थे, जिसमें से दो लोग छुट्टी पर थे. ये सभी एवलांच की चपेट में आ गए. हालांकि 47 लोगों को निकाल लिया गया है लेकिन 7 अभी भी फंसे हुए हैं. सेना, ITBP, BRO, SDRF और NDRF की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है. मौसम चुनौती बना हुआ है. सेना का Mi-17 हेलिकॉप्टर स्टैंड बाय पर है. जैसे ही मौसम ठीक होता हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन तेज हो जाएगा. वहीं, सीएम धामी चमोली में ग्राउंड जीरों पर पहुंच गए हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा ले रहे हैं. फंसे मजदूरों को निकालने के लिए जारी है रेस्क्यू अभियान बचाव अभियान की जानकारी अपडेट करते हुए उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि फंसे हुए मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. चमोली जिले के ऊंचाई वाले गांव मांड़ा में हिमस्खलन के कारण फंसे कुल 55 बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) श्रमिकों में से 47 को बचा लिया गया है. 14 मजदूरों को शनिवार सुबह निकाला गया. जबकि 8 मजदूर अभी फंसे हुए हैं. एवलांच शुक्रवार सुबह 6:30 के करीब आया था. गंभीर रूप से घायल 3 श्रमिकों को आर्मी चिकित्सालय में कराया गया भर्ती मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मांड़ा के निकट हुए हिमस्खलन में फंसे हुए श्रमिकों को निकालने के लिए चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान के क्रम में 14 अन्य श्रमिकों को भी सकुशल बाहर निकाल लिया गया है. बाहर निकाले गए श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं. गंभीर रूप से घायल 3 श्रमिकों को आर्मी चिकित्सालय, जोशीमठ में उपचार हेतु भेज दिया गया है. अभी तक कुल 47 श्रमिकों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है. फंसे हुए अन्य श्रमिकों को भी जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कार्य किया जा रहा है. इन राज्यों के हैं मजदूर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी सूची के अनुसार फंसे हुए मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर सहित अन्य राज्यों से हैं. ऋषिकेष-बद्रीनाथ हाइवे पर भी गिरा पहाड़ों का मलबा कर्णप्रयाग के पास ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाइवे पर भी पहाड़ों का मलबा गिर गया. जिससे ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाइवे अवरुद्ध हो गया है.  इसका वीडियो भी सामने आया है. जिसमें देखा जा सकता है कि रास्ते पर बड़े-बड़े पत्थर गिरे हुए हैं. हालांकि, पत्थरों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है.

‘बकरीद पर कुर्बानी से करें किनारा ‘, मुस्लिम देश के किंग को क्यों करनी पड़ी ऐसी अपील?

 रबात उत्तर अफ्रीकी इस्लामिक देश मोरक्को के राजा ने लोगों से इस साल बकरीद यानी ईद-उल-अज़हा (Eid Al-Adha) के मौके पर धार्मिक त्यौहार के दौरान भेड़ों की कुर्बानी नहीं देने का आह्वान किया है। राजा मोहम्मद-VI ने अपने देश के लोगों से कहा है कि देश लगातार सातवें साल सूखे की मार झेल रहा है। इस वजह से देश में पशुधन की आबादी कम हो गई है और मांस की कीमतें बढ़ गई हैं। ईद-उल-अज़हा के दौरान हर साल दुनिया भर में बसे मुसलमान लाखों भेड़, बकरियों और अन्य पशुओं की बलि देते हैं। इस साल ईद-उल-अज़हा 6 जून या 7 जून को मनाया जाएगा। यह इस्लाम के दो प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, ईद-उल-अज़हा हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इसे बकरीद, ईद उल जुहा, बकरा ईद अथवा ईद उल बकरा के नाम से भी जाना जाता है। बकरीद के मौके पर नमाज पढ़ने के साथ-साथ जानवरों की कुर्बानी देने की प्रथा है। कुर्बानी के बाद मुस्लिम समुदाय उस मांस को अपने परिजनों के बीच बांटकर खाता है और एक हिस्सा गरीबों में भी दान करता है। राष्ट्रीय टेलीविजन पर धार्मिक मामलों के मंत्री द्वारा पढ़े गए राजा मोहम्मद VI के भाषण में कहा गया है, “हमारा देश जलवायु और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पशुधन में काफी गिरावट आई है। इसलिए ईद पर पशुओं की कुर्बानी से बचें।” ईद के त्यौहार के महत्व को स्वीकार करते हुए, राजा ने अपने लोगों से “कुर्बानी की रस्म निभाने से परहेज करने” का आह्वान किया। ईद उल-अजहा इस साल जून की शुरुआत में मनाया जाएगा. यह बलिदान का पर्व है जिसमें मुसलमान पशुओं की कुर्बानी देते हैं. मोरक्को में भेडों की कीमतें इतनी ज्यादा हो गई हैं कि पिछले साल देश के गैर सरकारी संगठन ‘मोरक्को सेंटर फॉर सिटिजनशिप’ द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 55 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्हें भेड़ों को खरीदने और कुर्बानी के बाद उन्हें पकाने के लिए बर्तन खरीदने तक में मुश्किलें आ रही हैं. भेड़ों की कीमतों में उछाल का कारण चरागाहों का कम होना है, जिससे इन्हें चारा खिलाने के लिए इनके मालिकों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. मोरक्को के कृषि मंत्री ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि इस मौसम में बारिश पिछले 30 वर्षों के वार्षिक औसत से 53 प्रतिशत कम हुई है और इस कारण भेड़ और मवेशियों की संख्या में कमी आई है. मोहम्मद VI के पिता हसन II ने 1966 में भी इसी तरह का आह्वान किया था, जब देश में लंबे समय तक सूखा पड़ा था। पशुधन की संख्या में गिरावट के कारण मांस की कीमतों में उछाल आया है – जिससे गरीबों पर बोझ बढ़ गया है, जिनकी न्यूनतम मजदूरी लगभग 290 यूरो प्रति माह है। मोरक्को इस बार लगातार सातवें साल सूखे का सामना कर रहा है। इस वजह से वहां 12 महीनों में पशुधन की संख्या में 38 फीसदी की गिरावट आई है। मोरक्को के कृषि मंत्रालय के अनुसार, पिछले 30 वर्षों के औसत से 53 फीसदी कम बारिश हुई है। बता दें कि मोरक्को में 99 फीसदी से अधिक आबादी सुन्नी मुस्लिमों की है, और 0.1 प्रतिशत से कम आबादी शिया मुस्लिमों की है। कुल आबादी का 1 प्रतिशत से कम हिस्सा बनाने वाले समूहों में ईसाई, यहूदी और बहाई भी शामिल हैं।

भारत में हर साल कम से कम 35-40 सैन्य विमानों के निर्माण की आवश्यकता, लक्ष्य को पूरा करना असंभव नहीं: वायुसेना चीफ

नई दिल्ली एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रक्षा विनिर्माण के लिए स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल कम से कम 35-40 सैन्य विमानों के निर्माण की आवश्यकता है और इस लक्ष्य को पूरा करना असंभव नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना स्वदेशी प्रणाली को प्राथमिकता देगी, भले ही वह थोड़ा कम प्रदर्शन करे। शुक्रवार को यहां ‘भारत 2047: युद्ध में आत्मनिर्भर’ विषय पर आयोजित चाणक्य डायलॉग्स कॉन्क्लेव में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना की पहली प्राथमिकता ऐसे सैन्य विमानों का निर्माण करना है जो स्वदेशी हो। स्वदेशी प्रणाली पर दें जोर वायुसेना प्रमुख ने जोर देते हुए कहा कि इस बात को लेकर मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह से स्पष्ट है और मैं बिल्कुल आश्वस्त हूं कि भले ही स्वदेशी प्रणाली का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम हो। अगर यह विश्व बाजार में उपलब्ध प्रणाली का 90 प्रतिशत या 85 प्रतिशत हो तो भी हम स्वदेशी प्रणाली पर ही जोर देंगे। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह है कि केवल यही एकमात्र तरीका है जिससे हम अपनी रक्षा की दृष्टि से आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। वायुसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि स्वदेशी प्रणाली रातोंरात विकसित नहीं की जा सकती है। इसमें समय लगेगा और इसे समर्थन की भी आवश्यकता होगी। इसके लिए भारतीय वायु सेना किसी भी अनुसंधान एवं विकास परियोजना के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हर साल भारत को बनाने होंगे कम से कम 40 लड़ाकू विमान वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भारत को हर साल कम से कम 35- 40 लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता विकसित करने की जरूरत है ताकि पुराने हो रहे बेड़े को बदलने की जरूरतें पूरी की जा सकें। मेरा मानना है कि ये क्षमताएं रातों-रात नहीं आ सकतीं। लेकिन, हमें खुद को इस दिशा में आगे बढ़ाना होगा। अब हल्के लड़ाकू विमान एमके1ए के निर्माण की तरह हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने वादा किया है कि अगले साल से हम हर साल 24 विमान बनाएंगे। साथ ही कुछ सुखोई या कुछ अन्य विमान का भी निर्माण किया जाएगा। मेक इन इंडिया पर रहेगा जोर उन्होंने कहा कि हम अकेले एचएएल द्वारा हर साल संभवत: 30 विमानों के निर्माण की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सैन्य विमान निर्माण के लिए अगर कोई निजी उद्योग ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सामने आता है तो हम उनकी तरफ से भी हर साल शायद 12-18 विमान के निर्माण की उम्मीद कर सकते हैं। धीरे-धीरे हम उस संख्या तक पहुंच रहे हैं और इसे हासिल करना भी संभव है। उन्होंने लंबे युद्ध लड़ने के लिए घरेलू रक्षा उपकरणों के महत्व पर भी जोर दिया।एआइ जैसी तकनीकों के बारे में उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना स्वचालन (आटोमेशन) के साथ बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। मुझे लगता है कि हम सभी एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वचालन जैसी तकनीकों की उपयोगिता से भलीभांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में इन तकनीकों की खूब चर्चा हो रही है। इसलिए हम भी सकारात्मक रूप से इस दिशा में काम कर रहे हैं। बहुत सारी प्रणालियां स्वचालित हो गई हैं। बहुत सारे पूर्वानुमान स्वचालित हो गए हैं। इनकी बदौलत न केवल हमारा कीमती समय बच रहा है, अपितु यह हमें कुशल समाधान भी दे रहा है।  

पशु चिकित्सा विभाग ने चिक्कबल्लापुर गांव में एक पोल्ट्री फार्म में 350 मुर्गियों को मारने का आदेश दिया

चिक्काबल्लापुर (कर्नाटक) बेंगलुरू के निकट स्थित चिक्कबल्लापुर जिले में बर्ड फ्लू के प्रकोप को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग ने शुक्रवार को चिक्कबल्लापुर के वरदाहल्ली गांव में एक पोल्ट्री फार्म में 350 मुर्गियों को मारने का आदेश दिया है। जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है क्योंकि वरदहल्ली में मुर्गियों में एच5एन1 वायरस पाया गया है। डिप्टी कमिश्नर पी.एन. रविंद्र की अगुवाई में जिला प्रशासन ने आपात बैठक की और गांव से मुर्गियों के बाहर जाने पर रोक लगा दी गई। गांव की सभी सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और गाड़ियों की कड़ी निगरानी की जा रही है ताकि मुर्गियों को बाहर न ले जाया जा सके। शुरुआती जांच में पाया गया कि वरदाहल्ली के निवासी द्यामप्पा के घर पर 28 मुर्गियां मरी हुई मिली। गांव के अन्य घरों में भी मुर्गियों की मौत हो रही है। प्रशासन ने एक पोल्ट्री फार्म के तीन डेड चिकन के सैंपल जांच के लिए बेंगलुरू की सेंट्रल लैब भेजे। प्रयोगशाला परीक्षणों से सैंपल में एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई। इसके बाद पोल्ट्री फार्म की सभी मुर्गियों को मारने का आदेश जारी कर दिया गया। अधिकारियों ने गांव में घर-घर जाकर सर्वे किया और पूरे इलाके में सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव किया। स्वास्थ्य विभाग भी ग्रामीणों की सेहत पर नजर रख रहा है। इस बीच, खबर मिली है कि दो दिन पहले वरदाहल्ली के पोल्ट्री फार्म से लगभग 10,000 मुर्गियों को बेंगलुरू भेजा गया था, जहां इन्हें मीट की दुकानों और होटलों में बेचा गया हो सकता है। अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं और विक्रेताओं को सतर्क कर रहे हैं कि वे वरदाहल्ली से लाए गए मुर्गों की बिक्री न करें। आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में एवियन इन्फ्लूएंजा फैलने के बाद कर्नाटक सरकार ने सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। कर्नाटक पहले दावा कर चुका था कि राज्य में बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं है और वे पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। राज्य में हर महीने करीब चार करोड़ ब्रॉयलर चिकन का उत्पादन होता है और यहां 73 ब्रीडर व 20,000 पोल्ट्री किसान हैं। सीमा से सटे बेलगावी जिले में प्रशासन ने चिकन सैंपल की जांच शुरू कर दी है और महाराष्ट्र बॉर्डर पर चेकपोस्ट लगाए हैं। बर्ड फ्लू की खबरों के बाद पोल्ट्री किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है क्योंकि लोग चिकन और अंडे खाने से बच रहे हैं।  

मुझे विश्वास है कि आईएमईसी वैश्विक वाणिज्य, विकास और समृद्धि के लिए एक शक्ति के रूप में काम करेगा: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष और कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की भारत यात्रा को ‘अभूतपूर्व’ बताया। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि यह यात्रा भारत-यूरोपीय संघ की बहुआयामी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “यह न केवल यूरोपीय आयोग की भारत की पहली यात्रा है, बल्कि यह किसी एक देश में यूरोपीय आयोग की पहली व्यापक भागीदारी भी है। इसके अलावा, यह आयोग की अपने नए कार्यकाल की पहली यात्राओं में से एक है।” यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष, ईयू कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स के साथ, प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर दो दिवसीय भारत यात्रा पर गुरुवार दोपहर नई दिल्ली पहुंची थी। यह ईयू कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की पहली भारत यात्रा है। साथ ही दिसंबर 2024 में कार्यभार संभालने वाले नए कमिश्नर्स की यूरोप के बाहर पहली यात्रा है। पीएम मोदी ने कहा, “निवेश संरक्षण और जीआई (भौगोलिक संकेत) समझौते सहित निवेश ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा हुई। हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में एक विश्वसनीय और मजबूत निवेश ढांचे पर जोर दिया। हमारी साझा प्रतिबद्धता में सेमीकंडक्टर, एआई और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सहयोग शामिल है। दोनों पक्षों के बीच भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर भी व्यापक चर्चा हुई। इसकी घोषणा सितंबर 2023 में भारत में आयोजित जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। आईएमईसी में दो अलग-अलग गलियारे शामिल हैं – [भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ने वाला पूर्वी गलियारा और खाड़ी को यूरोप से जोड़ने वाला उत्तरी गलियारा]। इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना, लागत कम करना, क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना, व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाना, रोजगार पैदा करना, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि आईएमईसी वैश्विक वाणिज्य, सतत विकास और समृद्धि के लिए एक प्रेरक शक्ति के रूप में काम करेगा। रक्षा और सुरक्षा मामलों पर हमारा बढ़ता सहयोग आपसी विश्वास को दर्शाता है। हम साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करेंगे।”

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