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‘पीएम मोदी को हटाना चाहता था US, रची थी बड़ी साजिश’, पूर्व विदेश विभाग अधिकारी के दावे से मची खलबली

नई दिल्ली/ वाशिंगटन अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग के अधिकारी माइक बेंज (Mike Benz) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत के आंतरिक राजनीति में दखल दिया है। इतना ही नहीं अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति में भी दखल देने की कोशिश की है।उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से भारत की राजनीति को प्रभाव डालने की कोशिश की है। एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने अमेरिकी संस्था ‘यूएसएड’ (USAID) द्वारा भारत को विभाजित करने के लिए विभिन्न संस्थाओं को धन दिए जाने का दावा किया था। उन्होंने सोमवार को अपनी सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस मामले में जांच कराई जाए और दोषी पाए गए लोगों को जेल में डाला जाए। अब दुबे के दावे को अमेरिका के एक पूर्व अधिकारी के खुलासे से और बल मिलेगा। दरअसल अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग अधिकारी माइक बेंज ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत और बांग्लादेश सहित कई देशों की आंतरिक राजनीति में दखल दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से इन देशों की राजनीति को प्रभावित किया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी सरकार से जुड़ी संस्थाओं ने ‘लोकतंत्र को बढ़ावा देने’ की आड़ में चुनावों को प्रभावित करने, सरकारों को अस्थिर करने और अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप विदेशी सरकार बनाने का काम किया। 2019 के भारतीय आम चुनाव में दखल का आरोप एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंज ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े इस कांड में यूएसएड, थिंक टैंक और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। इन्होंने भारत के 2019 के आम चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि इन समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ चुनावी नैरेटिव तैयार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संगठनों ने इस धारणा को बढ़ावा दिया कि मोदी की राजनीतिक सफलता गलत सूचनाओं की वजह से है। इसके आधार पर व्यापक सेंसरशिप का वातावरण तैयार किया गया। सोशल मीडिया पर दबाव का आरोप बेंज का कहना है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने फेसबुक, वॉट्सऐप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर प्रभाव डालते हुए मोदी समर्थक कंटेंट पर अंकुश लगाने का प्रयास किया। वॉट्सऐप की जनवरी 2019 में मैसेज फॉरवर्डिंग की सीमा को कम करने की नीति को भाजपा की डिजिटल पहुंच रोकने का एक सटीक उदाहरण बताया गया। बेंज के अनुसार, अमेरिका समर्थित संस्थाओं ने भारत के डिजिटल स्पेस में हस्तक्षेप को सही ठहराने के लिए मोदी के समर्थकों को ऑनलाइन फर्जी खबरें फैलाने के लिए रणनीतिक रूप से फंसाया। उनका दावा है कि यूएसएड से जुड़े संगठनों सहित कई अन्य संगठनों ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया और डिजिटल फोरेंसिक समूहों के साथ मिलकर ऐसी रिपोर्टें बनाईं, जिनमें भारत को गलत सूचना के गंभीर संकट से जूझते हुए दिखाया गया। उनका तर्क है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मोदी समर्थक बयानों को दबाने का एक बहाना बन गया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने मोदी समर्थक कंटेंट को रोकने के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों पर दबाव डाला। ‘यूएसएड’ ने संस्थाओं को पैसा दिया- भाजपा सांसद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘यूएसएड’ संस्था को पूरी तरह बंद कर दिया है क्योंकि यह वर्षों से विभिन्न सरकारों को गिराने के लिए पैसा खर्च कर रही थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को बताना चाहिए, ‘‘क्या यूएसएड ने जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन को पांच हजार करोड़ रुपये भारत को विभाजित करने के लिए दिये या नहीं। उसने राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा दिया या नहीं।’’ दुबे ने सवाल उठाया कि क्या ‘यूएसएड’ ने तालिबान को पैसा दिया था? उन्होंने कहा कि इस अमेरिकी संस्था ने आतंकवादी और नक्सलवादी गतिविधिया बढ़ाने वाले कुछ संगठनों को पैसा दिया या नहीं, विपक्ष यह बताए। भाजपा सांसद ने देश में मानवाधिकार के नाम पर और ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ के नाम पर विभिन्न संस्थाओं को ‘यूएसएड’ द्वारा पैसा दिए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार से अनुरोध किया कि इनकी जांच हो और जिन्होंने देश को नुकसान पहुंचाने के लिए पैसा लिया, उन्हें जेल में डाला जाए। दुबे के इन आरोपों पर कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी की। कुछ सदस्य इस संबंध में व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाह रहे थे। हालांकि, पीठासीन सभापति संध्या राय ने कहा कि शून्यकाल में व्यवस्था का प्रश्न नहीं होता। भाजपा सांसद दुबे पहले भी सदन में इन मुद्दों को उठाते रहे हैं। बांग्लादेश में भी अमेरिकी हस्तक्षेप वहीं बेंज ने दावा किया कि अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति को भी प्रभावित करने की कोशिश की, खासकर प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को कमजोर करने के लिए यूएसएड का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम बांग्लादेश और चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के कारण उठाया गया। उनके अनुसार, अमेरिकी संगठनों ने सांस्कृतिक और जातीय तनावों का उपयोग करते हुए विभाजन पैदा करने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की योजना बनाई। रैप संगीत के जरिए सरकार विरोधी माहौल एक दिलचस्प आरोप में बेंज ने कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल बांग्लादेश में ऐसे रैप संगीत को फंड करने के लिए किया गया, जो सरकार विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देता था। बेंज ने इन गतिविधियों को अमेरिका की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य लोकतंत्र को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि चीन के प्रभाव का मुकाबला करना, सैन्य ठिकाने सुरक्षित करना और आर्थिक पहुंच बनाए रखना है। बेंज का कहना है कि ये गतिविधियां अक्सर अमेरिकी प्रशासन की अनुमति के बिना विदेश नीति प्रतिष्ठान के कुछ गुटों द्वारा की जाती हैं। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान भी इन गतिविधियों को अंजाम दिया गया, जबकि ट्रंप और मोदी के बीच अच्छे संबंध थे। बेंज ने अपनी रिसर्च के आधार पर यह दावा किया कि यह सिर्फ भारत और बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका ने वेनेजुएला, यूक्रेन, मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका जैसे कई देशों में भी … Read more

रिपोर्ट में 1400 मौत का दावा- बांग्लादेश हिंसा के लिए शेख हसीना जिम्मेदार: संयुक्त राष्ट्र

ढाका संयुक्त राष्ट्र ने आज बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शन के लिए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को जिम्मेदार ठहराया है। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को कहा कि बांगलादेश की पूर्व सरकार ने सत्ता बनाए रखने के लिए पिछले साल प्रदर्शनकारियों पर सुनियोजित हमले करवा और हत्याएं हुईं। यह’मानवता के खिलाफ अपराध’ हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने विरोध प्रदर्शनों का दमन किया। इस दौरान सैकड़ों गैरकानूनी हत्याएं की गईं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने बांगलादेश में 1 जुलाई से 15 अगस्त 2024 के बीच हुए घटनाओं की जांच की और पाया कि पूर्व सरकार द्वारा हत्या, यातना, कैद और अन्य अमानवीय कृत्य किए गए। इन कृत्यों में शेख हसीना की सरकार, उनके अवामी लीग पार्टी के हिंसक तत्वों और बांगलादेशी सुरक्षा एवं खुफिया सेवाओं के हाथ थे। इस दौरान बांगलादेश में विरोध प्रदर्शन सरकारी नौकरी में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए थे। इसके बाद शेख हसीना से इस्तीफे की मांग शुरू हुई। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि करबी 1400 लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि मारे गए अधिकांश लोग बांगलादेश के सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में मारे गए। उनमें बच्चे भी शामिल थे। मृतकों में 12 से 13 प्रतिशत बच्चे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सुरक्षा बलों ने शेख हसीना की सरकार का समर्थन किया और प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसक उपायों का इस्तेमाल किया। इसमें महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और बच्चों के खिलाफ अत्याचार भी शामिल थे। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने बच्चों को मारा-पीटा और उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में गिरफ्तार किया और यातना दी। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा, “पूर्व सरकार की बर्बर प्रतिक्रिया सत्ता बनाए रखने की एक सुनियोजित और समन्वित रणनीति थी, जो जन विरोध का सामना कर रही थी।” उन्होंने कहा कि इस दौरान हजारों व्यक्तियों की हत्या, गिरफ्तारियां और यातनाएं राजनीतिक नेतृत्व और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की जानकारी में हुईं।

छात्रों को नग्न कर प्राइवेट पार्ट्स से लटका दिए डम्बल, रैगिंग की खौफनाक कहानी सुन कांप उठेगी रूह

कोट्टायम: केरल के एक मेडिकल कॉलेज से रैगिंग की एक खौफनाक वारदात सामने आई है जिसमें जूनियर छात्रों को सीनियर्स ने पहले कपड़े उतारकर नग्न कर दिया गया, फिर उनके गुप्तांगों पर डम्बल लटका दिया। इतना ही नहीं, उसके बाद सीनियर्स ने ज्योमेट्री बॉक्स के कंपास से बार बार वार किया गया और तीन महीने तक बुरी तरह पीटा। केरल के एक सरकारी कॉलेज में हुए रैगिंग की इस घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है, जहां नर्सिंग के तीसरे वर्ष के पांच छात्रों को कथित तौर पर अपने जूनियर्स को महीनों तक क्रूर शारीरिक और मानसिक शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। थाने में दर्ज शिकायत से हुआ खुलासा यह घटना कोट्टायम के सरकारी नर्सिंग कॉलेज में हुई, जहां प्रथम वर्ष के तीन छात्रों, जो सभी तिरुवनंतपुरम से हैं, सभी ने कोट्टायम गांधीनगर पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की, जिसमें नवंबर 2024 में शुरू हुई और लगभग तीन महीने तक जारी हिंसक कृत्यों का खुलासा किया गया। शिकायत के कारण आरोपी छात्रों को निलंबित कर दिया गया और एंटी-रैगिंग अधिनियम के तहत उनकी गिरफ्तारी की गई। घटना जानकर रूह कांप जाएगी पुलिस के अनुसार, प्रथम वर्ष के छात्रों को सीनियर छात्रों ने नग्न खड़े होने के लिए मजबूर किया, जबकि उनके वरिष्ठ छात्रों ने उनके निजी अंगों से डम्बल लटका दिए। पीड़ितों को ज्योमेट्री बॉक्स से कंपास सहित तेज वस्तुओं का उपयोग करके भी चोट पहुंचाई गई थी। उनकी क्रूरता यहीं नहीं रुकी. घावों पर लोशन लगाया गया, जिससे दर्द होने लगा। जब पीड़ित दर्द से चिल्लाने लगे तो उनके मुंह में जबरन लोशन ठूंस दिया गया। वरिष्ठों ने कथित तौर पर इन कृत्यों को फिल्माया और जूनियर्स को धमकी दी कि यदि उन्होंने दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने की हिम्मत की तो उनका कैरियर खत्म हो जाएगा। पांच छात्र हुए गिरफ्तार शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि रविवार को सीनियर्स नियमित रूप से जूनियर्स से शराब खरीदने के लिए पैसे वसूलते थे। जो लोग इस आदेश को मानने  से इनकार करते थे उन्हें पीटा जाता था। एक छात्र, जो अब उत्पीड़न सहन करने में असमर्थ था, ने अपने पिता को सबकुछ बताया दिया, जिन्होंने उसे पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया। सभी पांचों आरोपी छात्र फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और उनके बुधवार दोपहर तक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की उम्मीद है। 

डोनाल्ड ट्रंप के गाजा योजना को लेकर अरब देश करेंगे ध्वस्त, दिया दो टूक जवाब

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा योजना को लेकर अरब दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल गैत और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने इस योजना को सख्ती से खारिज कर दिया है। अरब लीग के महासचिव अबुल गैत ने दुबई में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा और वेस्ट बैंक से विस्थापित करना अरब क्षेत्र के लिए अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “अरब जगत पिछले 100 साल से इस विचार के खिलाफ लड़ता आ रहा है।” इसी कड़ी में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने भी ट्रंप के साथ बैठक में दो टूक कहा कि उनका देश फिलिस्तीनियों के विस्थापन के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, मानवीय आधार पर उन्होंने गाजा के 2,000 बीमार बच्चों को शरण देने की पेशकश की। ट्रंप के गाजा प्लान बढ़ा विवाद उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह प्रस्ताव रखा था कि अमेरिका गाजा पर नियंत्रण कर सकता है और इसे एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर सकता है। अरब देशों को लगता है कि उनकी यह योजना फिलिस्तीनियों को उनकी भूमि से बेदखल करने पर आधारित है, जिसे अरब देशों ने पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है। ट्रंप ने जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला के साथ एक बैठक के दौरान कहा, “हम गाजा को अपने नियंत्रण में लेंगे और संजो कर रखेंगे।” हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह व्यक्तिगत रूप से वहां कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं करेंगे। किंग अब्दुल्ला ने ट्रंप को समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि मिस्र इस मुद्दे पर एक व्यापक योजना तैयार कर रहा है, जिस पर आगे चर्चा होगी। उन्होंने कहा, “हमें इंतजार करना चाहिए कि मिस्र क्या प्रस्ताव रखता है, और फिर हम इस पर रियाद में चर्चा करेंगे।” मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने भी गाजा पुनर्निर्माण का समर्थन किया, लेकिन फिलिस्तीनियों के विस्थापन को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। क्या जॉर्डन पर दबाव बनाएंगे ट्रंप? जॉर्डन को अमेरिका से हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद और 350 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता मिलती है। ऐसा बताया जा रहा है कि ट्रंप इस सहायता को रोकने की धमकी देकर जॉर्डन और अन्य अरब देशों पर दबाव बना सकते हैं। हालांकि, किंग अब्दुल्ला ने यह संकेत दिया कि उनके देश का रुख अडिग रहेगा। अब सबकी नजरें आगामी रियाद बैठक पर टिकी हैं, जहां अरब देश ट्रंप के इस विवादास्पद प्रस्ताव पर अपनी साझा रणनीति तय करेंगे।

पीएम मोदी 17 फरवरी को दिखाएंगे हरी झंडी, उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना का काम पूरा

जम्मू उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना का काम पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी को जम्मू से कश्मीर के लिए वंदे भारत ट्रेन काे हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। उक्त जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि वर्षों के समर्पण, इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता और अथक प्रयासों के बाद कश्मीर की रेल कनेक्टिविटी का लंबे समय से संजोया हुआ सपना आखिरकार साकार हो गया है। इस महत्वपूर्ण परियाेजना के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई वंदे भारत एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी 17 फरवरी काे जम्मू संभाग से हरी झंडी दिखाएंगे। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन को विशेष रूप से कटरा-श्रीनगर रेल मार्ग पर जम्मू और कश्मीर की कठोर सर्दियों की परिस्थितियों में कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें उन्नत जलवायु-प्रतिरोधी तकनीकाें का प्रयाेग किया गया है, जिसमें हीटिंग सिस्टम शामिल हैं, जो पानी और बायो-टॉयलेट टैंकों को जमने से रोकेगा। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि एयर-ब्रेक सिस्टम को उप-शून्य तापमान में भी सुचारू संचालन के लिए अनुकूलित किया गया है। अधिकारी ने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस में विंडशील्ड में एम्बेडेड हीटिंग तत्व भी शामिल हैं जो ड्राइवर के सामने के लुकआउट ग्लास को स्वचालित रूप से डीफ़्रॉस्ट करते हैं, जिससे अत्यधिक सर्दियों की परिस्थितियों में स्पष्ट दृश्यता सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि इन विशेष अनुकूलनों के अलावा ट्रेन में सभी मानक वंदे भारत सुविधाएं हैं जैसे पूरी तरह से वातानुकूलित कोच, स्वचालित प्लग दरवाजे, मोबाइल चार्जिंग सॉकेट हैं।  

1984 सिख विरोधी दंगे केस में कांग्रेस के पूर्व MP सज्जन कुमार दोषी करार, राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला; सजा पर बहस 18 को

नई दिल्ली 1984 सिख विरोधी दंगे मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को दो लोगों की हत्या के लिए दोषी ठहराया। अब 18 फरवरी को सज्जन कुमार की सजा को लेकर बहस होगी। सज्जन कुमार पर भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप यह मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या से जुड़ा है। यहां दो सिखों, सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह, की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में सज्जन कुमार पर भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगा। भीड़ ने घर में घुसकर दो सिखों को जिंदा जलाया आरोप है कि सज्जन कुमार के उकसावे के बाद भीड़ ने बाप-बेटे को उनके घर में जिंदा जला दिया गया। भीड़ ने घर में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी भी की थी। मारपीट कर घर के अन्य लोगों को भी घायल कर दिया। पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को दोषी करार दिए जाने पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने कहा, ’40 साल पहले सिख कत्लेआम का नेतृत्व करने वाले सज्जन कुमार को दोषी करार दिया गया है और उन्हें सजा मिलेगी।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इसके लिए अदालत का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं सत्ता में आने के बाद एसआईटी गठित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया अदा करता हूं। यह बंद मामलों की दोबारा जांच का नतीजा है। हमें उम्मीद है कि जगदीश टाइटलर मामले में भी हमें न्याय मिलेगा।’ कोर्ट के फैसले पर एडवोकेट एचएस फुल्का ने कहा, ‘आज सीबीआई की विशेष अदालत की जज कावेरी बावेजा ने सज्जन कुमार को 1984 में दो सिखों की हत्या के लिए दोषी करार दिया है। यह जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या से जुड़ा मामला है। इस केस को पुलिस ने बंद कर दिया था। 2015 में मोदी सरकार द्वारा एसआईटी गठित किए जाने के बाद इसे फिर से खोला गया। हम अदालत, सरकारी वकील मनीष रावत और आईओ जगदीश कुमार के आभारी हैं जिन्होंने इस पर बहुत मेहनत की। 18 फरवरी को अदालत सजा सुनाएगी।’ आजीवन कारावास की सजा काट रहे सज्जन कुमार अभी सज्जन कुमार दिल्ली कैंट में एक अन्य सिख विरोधी दंगा मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। फैसला सुनाने के लिए सज्जन कुमार को तिहाड़ जेल से कोर्ट में पेश किया गया। बता दें कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी जिसके बाद दंगे भड़क गए थे। विशेष जांच दल ने अपने हाथ में ली ली थी जांच 1 नवंबर, 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी. पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन ने यह मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में एक विशेष जांच दल ने इसकी जांच अपने हाथ में ले ली थी. 16 दिसंबर, 2021 को अदालत ने कुमार के खिलाफ आरोप तय किए और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाया था. दो लोगों की हत्या कर घर में की गई थी लूटपाट इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि भीड़ ने शिकायतकर्ता जसवंत की पत्नी के घर पर हमला किया था. उसके पति और बेटे की हत्या कर दी थी और सामान लूट लिया था. इसके बाद उनके घर को आग के हवाले कर दिया गया था.

अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने दी जानकारी, जल्द धरती पर लौटेंगी सुनीता विलियम्स

नई दिल्ली भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स सहित अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे NASA यानी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के दो अंतरिक्ष यात्रियों को निर्धारित समय से थोड़ा पहले पृथ्वी पर वापस लाया जा सकता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने यह जानकारी दी। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर पिछले साल जून से बोइंग के स्टारलाइनर की तकनीकी समस्याओं के कारण अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं, जो उन्हें आईएसएस तक ले गया था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा कि ‘स्पेसएक्स’ आगामी अंतरिक्ष यात्री उड़ानों के लिए कैप्सूल बदलेगा, ताकि बुच विल्मोर और सुनी (सुनीता) विलियम्स को मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत के बजाय मार्च के मध्य में वापस लाया जा सके। वे आठ महीने से ज्यादा समय से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे हुए हैं। नासा के वाणिज्यिक क्रू प्रोग्राम के प्रबंधक स्टीव स्टिच ने एक बयान में कहा, ‘अंतरिक्ष यात्रा अप्रत्याशित चुनौतियों से भरी हुई है।’ परीक्षण पायलटों को जून में बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल पर वापस लाया जाना था। लेकिन कैप्सूल को अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने में इतनी परेशानी हुई कि नासा ने इसे खाली वापस लाने का फैसला किया। इसके बाद स्पेसएक्स ने अधिक तैयारियों की आवश्यकता के मद्देनजर नए कैप्सूल को भेजने में देरी कर दी, जिसकी वजह से विल्मोर और विलियम्स को वापस लाने के मिशन में और देर हुई। अब 12 मार्च को नए कैप्सूल का प्रक्षेपण किया जाएगा। इस पुराने कैप्सूल को पहले ही एक निजी चालक दल को सौंप दिया गया है।

शरद पवार ने एकनाथ शिंदे को किया सम्मानित, महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया, भड़की की शिवसेना

महाराष्ट्र महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार देश के पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने दिल्ली में शिंदे को प्रदान किया। इस पुरस्कार समारोह को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के प्रवक्ता संजय राउत ने शरद पवार के इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संजय राउत ने कहा, “महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य बहुत अजीब दिशा में जा रहा है। कौन किसको धोखा देता है, कौन किसका समर्थन करता है, यह सब देखने वाली बात है। एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र सरकार गिराई, विश्वासघात किया। ऐसे व्यक्ति को शरद पवार पुरस्कार दे रहे हैं, यह महाराष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाने वाला है।” उन्होंने आगे कहा, “महाराष्ट्र की जनता के सामने हम अब किस मुंह से जाएंगे? राजनीति में दोस्त और दुश्मन नहीं होते, यह मान्यता सही हो सकती है। लेकिन महाराष्ट्र के खिलाफ काम करने वाले लोगों को इस तरह से सम्मान देना, यह राज्य की पहचान के लिए हानिकारक है। यह हमारी भावना है, शायद पवार साहब की भावना अलग हो सकती हैय़ लेकिन यह महाराष्ट्र के लोगों को स्वीकार्य नहीं है।” संजय राउत ने शरद पवार के राजनीतिक फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “जिन्होंने शिवसेना को तोड़ा, उन्हें सम्मान देना यह हमारे लिए दुखद है। दिल्ली का राजनीतिक माहौल कुछ और हो सकता है, लेकिन इस तरह की बात हम सहन नहीं कर सकते। कुछ चीजें राजनीति में अनावश्यक होती हैं।” अंत में संजय राउत ने शरद पवार के साहित्य सम्मेलन में भूमिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “दिल्ली में हो रहा साहित्य सम्मेलन राजनीति से प्रेरित है, साहित्य से उसका कोई संबंध नहीं है। यह भाजपा का खेल है। क्या आपने मराठी माणुसों की सेवा की है? महाराष्ट्र की पीठ पर पांव रखने वालों का सम्मान करना गलत है।”

देश के कम से कम 2 राज्यों में जीबीएस के मरीजों की पुष्टि, मुंबई में हुई पहली मौत, अब तक 8 ने गंवाई जान

नई दिल्ली GBS यानी गुलियन बार सिंड्रोम का कहर जारी है। खबर है कि अब देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वली मुंबई में भी पहले मरीज की मौत हो गई है। इससे पहले महाराष्ट्र के ही पुणे में 7 मरीज जीबीएस के चलते जान गंवा चुके हैं। देश के कम से कम 2 राज्यों में जीबीएस के मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नायर अस्पताल में भर्ती 53 वर्षीय मरीज ने जीबीएस के चलते दम तोड़ दिया। वह वेंटिलेटर पर थे। शुक्रवार को ही शहर में जीबीएस का पहला मामला सामने आया था। तब 64 साल की एक महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि शहर के अंधेरी पूर्व क्षेत्र निवासी महिला को बुखार और दस्त के बाद लकवाग्रस्त हो जाने की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कितना घातक जीबीएस जीबीएस एक दुर्लभ विकार है, जिसमें व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता परिधीय तंत्रिका पर हमला करती है, जिससे शरीर के हिस्से अचानक सुन्न पड़ जाते हैं। मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और कुछ निगलने या सांस लेने में भी दिक्कत होती है। जीबीएस के गंभीर मामलों में मरीज पूरी तरह लकवाग्रस्त तक हो सकता है। अधिकतर वयस्कों और पुरुषों में इस विकार के होने के आसार ज्यादा हैं, हालांकि सभी उम्र के लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं। अब तक 8 मौतें जीबीएस के चलते पुणे के 37 वर्षीय एक वाहन चालक की शहर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही, पुणे में जीबीएस से जुड़ी मौतों की संख्या बढ़ कर सात हो गई थी, जिनमें संदिग्ध और पुष्टि हो चुके मामले, दोनों शामिल हैं। मुंबई में एक और मौत के बाद आंकड़ा बढ़कर 8 हो गया है।

तेलंगाना सरकार ने बीयर की कीमतों में संशोधन न करने के कारण बढ़ाए दाम

तेलंगाना तेलंगाना सरकार ने तेलंगाना बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को बीयर की कीमतों में 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की अनुमति दे दी है। यूबीएल ने एक नियामकीय सूचना में कहा कि यह निर्णय वर्ष 2019-20 से कंपनी की बीयर की कीमतों में संशोधन न करने के कारण राज्य में हुए भारी नुकसान के कारण लिया गया था। यह निर्णय ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) के अनुरोध के बाद और यूनाइटेड ब्रूअरीज लिमिटेड द्वारा आपूर्ति रोकने के बाद आया है। आठ जनवरी को यूनाइटेड ब्रूअरीज लिमिटेड (यूबीएल) ने घोषणा की कि उसने तेलंगाना बेवरेजेज कॉरपोरेशन को अपनी बीयर की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला किया है। इसके अतिरिक्त, यूबीएल ने दावा किया कि टीजीबीसीएल पर पिछली बीयर आपूर्ति के लिए काफी बकाया है। हालांकि, इस बारे में किसी विशेष विवरण का खुलासा नहीं किया गया। हालांकि, यूनाइटेड ब्रूअरीज ने बाद में आपूर्ति फिर से शुरू कर दी। राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए, बीएआई ने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी से बीयर उद्योग के भीतर लंबित मुद्दों को हल करने का आग्रह किया। बीएआई ने बयान में कहा, ‘हालांकि, जिस वृद्धि की अनुमति दी जा रही है, वह उत्पादन की लागत में वृद्धि या उद्योग की अपेक्षा से कम है, लेकिन हम इसका स्वागत करते हैं क्योंकि यह संकेत देता है कि सरकार राज्य में व्यवसाय लाभप्रदता पर उद्योग की चिंताओं के प्रति सजग है और इस पर विचार करने के अपने वादे पर खरी उतरी है।’ बीएआई के महानिदेशक विनोद गिरी ने कहा कि बाजार संचालित प्रणाली सभी को लाभ पहुंचाने का सबसे कुशल तरीका है और हम इस दृष्टिकोण की वकालत करने के लिए सरकार के साथ बातचीत जारी रखेंगे।

आंध्र प्रदेश में संदिग्ध बर्ड फ्लू से लाखों मुर्गियों की सामूहिक मृत्यु , पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी किया

कोलेरू भोपाल हाई सिक्योरिटी लेबोरेटरी ने पुष्टि की है कि आंध्र प्रदेश में लाखों मुर्गियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू है। पिछले कुछ हफ्तों में गोदावरी जिलों में बड़ी संख्या में मुर्गियां मर रही हैं। एपी पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोलेरू जलग्रहण क्षेत्रों में पक्षियों के प्रवास के कारण वायरस फैला है। एपी के दो जिलों में बर्ड फ्लू की पुष्टि आंध्र प्रदेश में मुर्गियों की अचानक हुई मौतों का कारण पता चल गया है। गोदावरी जिलों में पिछले कुछ हफ्तों में लाखों मुर्गियों की मौत से हड़कंप मच गया है। वायरस के कारण एपी और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में कई मुर्गियां मरी हैं। खम्मम और सथुपल्ली के साथ-साथ दोनों गोदावरी जिलों में भी बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत हुई है। जवाब में, पशुपालन विभाग ने मृत मुर्गियों के नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे। पश्चिमी गोदावरी जिले के दो इलाकों में मुर्गियों की मौत का कारण एवियन इन्फ्लूएंजा (HN1 – बर्ड फ्लू वायरस) होने की पुष्टि हुई है। आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में मरे मुर्गियों के नमूने जांच के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान में भेजे गए। पश्चिम गोदावरी जिले के तनुकु मंडल के वेलपुर और पूर्वी गोदावरी जिले के पेरावली मंडल के कानुर, अग्रहारम के मुर्गी फार्मों से लिए गए नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने दोनों जिलों के फार्मों में मुर्गियों को क्वारंटीन कर दिया है। प्रभावित मुर्गी फार्मों के एक किलोमीटर के दायरे में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है। आसपास के इलाकों में वायरस को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपाय लागू किए गए हैं और रेड जोन की निगरानी विशेष टीमें कर रही हैं। मुर्गी फार्मों में काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है और मुर्गियों को प्रभावित करने वाली बीमारियों के बारे में किसानों के लिए जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। प्रवासी पक्षियों से फैलता है वायरस ऐसा माना जाता है कि बर्ड फ्लू प्रवासी पक्षियों में पाए जाने वाले वायरस से फैलता है जो हर साल विभिन्न देशों से कोलेरू क्षेत्र में आते हैं। पक्षियों के पानी में शौच करने से वायरस जलाशयों में पहुंच गया। अनुमान है कि मुर्गियों में संक्रमण पानी के जरिए हुआ। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नवंबर, दिसंबर और जनवरी में कम तापमान के कारण वायरस तेजी से फैला। शुरुआत में, प्रसार को मृत पक्षियों के अनुचित निपटान से जोड़ा गया था। यदि तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच है तो बर्ड फ्लू वायरस जीवित नहीं रहता है। वर्तमान में, राज्य के अधिकांश हिस्सों में 34 डिग्री से अधिक तापमान का अनुभव हो रहा है, इसलिए वायरस के आगे फैलने की संभावना नहीं है। एपी पशुपालन विभाग ने घोषणा की है कि उसने अधिकारियों को बर्ड फ्लू से पहचाने गए दो फार्मों में मुर्गियों और अंडों को दफनाने का आदेश दिया है। दफनाए गए प्रत्येक मुर्गे के लिए 90 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एहतियात के तौर पर, दो चिकन फार्मों के एक किलोमीटर के दायरे में रेड अलर्ट घोषित किया गया है और उन इलाकों में चिकन की दुकानें बंद कर दी गई हैं। हालांकि, अन्य स्थानों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। पशुपालन विभाग के निदेशक दामोदर नायडू ने कहा कि वायरस प्रभावित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में निगरानी जारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के अन्य हिस्सों में मुर्गियों के साथ कोई समस्या नहीं है और आश्वासन दिया कि उच्च तापमान पर पकाए जाने पर चिकन का मांस खाने के लिए सुरक्षित है।  

शुद्ध प्रत्यक्ष करीब 15% बढ़ा, हो गया 17.78 लाख करोड़ रुपये, जानिए कितना जारी किया गया रिफंड

नई दिल्ली चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.69 प्रतिशत बढ़कर 17.78 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक शुद्ध गैर-कॉर्पोरेट करों से संग्रह जिसमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत आयकर शामिल है जो प‍िछले साल के मुकाबले 21 प्रतिशत बढ़कर लगभग 9.48 लाख करोड़ हो गया। 1 अप्रैल, 2024 से 10 फरवरी, 2025 के बीच शुद्ध कॉर्पोरेट कर संग्रह 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 7.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इस वित्त वर्ष में अब तक प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) से शुद्ध संग्रह 65 प्रतिशत बढ़कर 49,201 करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि के दौरान 4.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए गए जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 42.63 प्रतिशत अधिक है। 10 फरवरी तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.06 प्रतिशत बढ़कर 21.88 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) में सरकार ने कुल आयकर संग्रह 12.57 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है जो बजट अनुमान 11.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इस वित्त वर्ष में एसटीटी से संग्रह 55,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो बजट अनुमान (बीई) 37,000 करोड़ रुपये से अधिक है। कॉरपोरेट कर संग्रह लक्ष्य को संशोधित कर 9.80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है जो बजट लक्ष्य 10.20 लाख करोड़ रुपये से कम है। कुल मिलाकर, संशोधित अनुमान में प्रत्यक्ष कर संग्रह 22.37 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है जो बजट अनुमान के 22.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 फरवरी को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस सप्ताह लोकसभा में नया प्रत्यक्ष कर विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। नया कर विधेयक देश की कर प्रणाली में सुधार के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मौजूदा कर ढांचे में सुधार करके इसे और अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

‘पीएम मोदी के विमान पर आतंकी हमला कर सकते हैं’,पुलिस ने धमकी देने वाले व्यक्ति को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान पर उनके दो दिवसीय अमेरिकी दौरे से पहले आतंकी हमले की धमकी मिली है। मुंबई पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। कॉल करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है और बताया जा रहा है कि वह मानसिक रूप से बीमार है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने मुंबई पुलिस के हवाले से बताया कि 11 फरवरी को मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम में एक कॉल आया जिसमें चेतावनी दी गई थी कि आतंकवादी प्रधानमंत्री मोदी के विमान पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि वह आधिकारिक विदेश यात्रा पर जा रहे हैं। चेंबूर से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अन्य एजेंसियों को सूचित किया और जांच शुरू की। पुलिस ने कहा कि मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को धमकी भरा कॉल करने वाले व्यक्ति को चेंबूर इलाके से हिरासत में ले लिया गया है। वह मानसिक रूप से बीमार है। पीएम मोदी सोमवार को फ्रांस और अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। बुधवार को उनकी दो दिवसीय अमेरिकी यात्रा शुरू होने वाली है। पहले भी मिली थी धमकी हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मुंबई पुलिस को पीएम मोदी की जान को खतरा होने की धमकी मिली हो। अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन पर एक धमकी भेजी गई थी। इसमें दो कथित आईएसआई एजेंटों से जुड़े बम की साजिश का दावा किया गया था। इसके अलावा, पिछले साल प्रधानमंत्री की जान को खतरा होने के आरोप में 34 वर्षीय कांदिवली निवासी शीतल चव्हाण को गिरफ्तार किया गया था। चव्हाण ने कथित तौर पर पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके दावा किया था कि उसके पास हथियार तैयार हैं।

पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल कल पंचायत विकेंद्रीकरण सूचकांक रिपोर्ट जारी करेंगे

नई दिल्ली भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने के महत्वपूर्ण कदम के तहत, पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल 13 फरवरी, 2025 को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली में व्यापक पंचायत विकेंद्रीकरण सूचकांक रिपोर्ट जारी करेंगे। राज्यों में पंचायतों के विकेंद्रीकरण की स्थिति – एक सांकेतिक साक्ष्य आधारित रैंकिंग 2024 शीर्षक संबंधी यह रिपोर्ट देश में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को सशक्त बनाने और 73वें संविधान संशोधन के स्थानीय स्वशासन के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति है। कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय सचिव श्री विवेक भारद्वाज और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के संकाय सदस्य भाग लेंगे। पंचायत विकेंद्रीकरण सूचकांक, गहन शोध और विश्लेषण द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विकेंद्रीकरण तथा पंचायतों के विकास, प्रदर्शन और प्रगति का आकलन करता है। पारंपरिक मापदंडों से परे यह सूचकांक छह महत्वपूर्ण आयामों: ढांचा, कार्य, वित्त, कार्यकर्ता, क्षमता निर्माण और पंचायतों के उत्तरदायित्व का मूल्यांकन करता है। संविधान के अनुच्छेद 243जी की भावना के अनुरूप यह विशेष रूप से पड़ताल करता है कि पंचायतें निर्णय लेने और उन्हें लागू करने में कितनी स्वतंत्र हैं। यह अनुच्छेद राज्य विधानसभाओं को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों में पंचायतों को शक्तियां और उत्तरदायित्व सौंपने का अधिकार देता है। विकेंद्रीकरण सूचकांक सहकारी संघवाद और स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने के उपकरण के रूप में कार्य करता है, जिससे राज्यों को सुधार वाले क्षेत्रों की पहचान करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को अपनाने में मदद मिलती है। इस सूचकांक की विभिन्न हितधारकों के लिए व्यावहारिक उपयोगिता है। यह लोगों को पंचायतों के कामकाज और संसाधन आवंटन पर नज़र रखने में पारदर्शिता प्रदान करता है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को यह पक्षसमर्थन और सुधार के लिए डेटा आधारित सूचना देता है। अधिकारियों के लिए, यह प्रभावी विकेंद्रीकरण नीतियां लागू करने में रोडमैप का कार्य करता है। नीति निर्माता स्थानीय शासन के समग्र विकास पहलुओं के आकलन और सुधारों के सबसे अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों के तौर पर चिन्हित करने में विकेंद्रीकरण सूचकांक का उपयोग कर सकते हैं। जमीनी स्तर पर समावेशी विकास और सतत विकास को बढ़ावा देने की यह पहल विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जहां विकसित और सशक्त पंचायतें ग्रामीण परिवर्तन की बुनियाद के तौर पर काम करती हैं।

दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की लिस्ट में कहां हैं भारत-पाकिस्तान कहाँ पर है जाने, डेनमार्क सबसे ईमानदार देशों में टॉप पर

बर्लिन  ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) 2024 की रैंकिंग जारी कर दी है। भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक के तहत दुनिया भर के सबसे भ्रष्ट और सबसे ईमानदार देशों की रैंकिंग की जाती है। लिस्ट जारी करने के लिए सीपीआई 180 देशों और क्षेत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कथित स्तरों के आधार पर रैकिंग को जारी करता है। देशों को 0 से 100 के बीच अंक दिए जाते हैं, जिसके सबसे अधिक अंक पाने वाले सबसे साफ सुथरा और कम अंक पाने वाले को सबसे भ्रष्ट देश घोषित किया जाता है। रिपोर्ट के ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बर्लिन ने जारी किया है। सीपीआई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भ्रष्टाचार का स्तर चिंताजनक रूप से उच्च बना हुआ है। रिपोर्ट में दुनिया भर में गंभीर भ्रष्टाचार सामने आया है। दो तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 100 में से 50 से नीचे है। लगभग 6.8 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जिनका सीपीआई स्कोर 50 से कम है, जो दुनिया की कुल आबादी के 85 प्रतिशत के बराबर है। ये हैं सबसे ईमानदार देश सबसे कम भ्रष्टाचार वाले देशों में डेनमार्क लगातार 7वें साल टॉप पर रहा, जिसने 90 अंक प्राप्त किया। उसके बाद फिनलैंड (88) और सिंगापुर (84) का स्थान रहा। इसके बाद न्यूजीलैंड (83) और लग्जमबर्ग (81) शामिल हैं। टॉप रैकिंग वाले देशों में नॉर्वे और स्विटजरलैंड को भी 81 अंक मिले हैं। वहीं, स्वीडन को 80 अंक मिले हैं। ये हैं सबसे भ्रष्ट देश दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों की लिस्ट में दक्षिणी सूडान टॉप पर है। इंडेक्स के अनुसार इसे 8 अंक हासिल हुए हैं और इसे सबसे नीचे की 180वीं रैंक दी गई है, जो इसके सबसे भ्रष्ट देश होने का प्रमाण है। इसके बाद सोमालिया 179वें और वेनेजुएला 178वें स्थान पर है। लिस्ट में सीरिया 177वें और यमन, लीबिया, इरीट्रिया, इक्वाटोरियल गिनी 13 अंकों के साथ 173वें स्थान पर हैं। निकारागुआ 14 अंकों के साथ 172वीं रैंक पर है। भारत और पाकिस्तान की रैंकिंग कंगाल पाकिस्तान रैकिंग में 135वें स्थान पर है, जो साल 2023 के मुकाबले दो अंकों की गिरावट है। 27 अंक पाने वाला पाकिस्तान रैकिंग में माली, लाइबेरिया और गबोन जैसे देशों के साथ खड़ा है। करप्शन इंडेक्स में भारत की रैकिंग पाकिस्तान से बहुत ऊपर है। हालांकि, 2023 के मुकाबले इसमें 1 अंक की गिरावट आई है, जिसके रैंकिंग पर 3 का अंतर आया है। साल 2024 की रैकिंग में भारत 38 अंकों के साथ 96वें स्थान पर है। भारत का एक और पड़ोसी चीन 42 अंकों के साथ रैकिंग में 76वें स्थान पर है। बांग्लादेश 23 अंक के साथ 151वें स्थान पर है, जबकि श्रीलंका को 32 अंक मिले हैं और वह 121वें स्थान पर है। तालिबान राज में अफगानिस्तान को 17 अंक मिले हैं और वह 165वें स्थान पर है।

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