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चीन में एचएमपीवी वायरस से पहले ही अफरा-तफरी फैली हुई है, अब एक नए वायरस के नए स्ट्रेन ने देश में खलबली मचा दी

चीन चीन में एचएमपीवी वायरस से पहले ही अफरा-तफरी फैली हुई है, अब एक नए वायरस के नए स्ट्रेन ने देश में खलबली मचा दी है. चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने नए एमपॉक्स स्ट्रेन क्लेड आईबी का पता लगाया है. पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किए जाने के बाद ये वायरल संक्रमण कई देशों में फैल रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र ने कहा कि मंकीपॉक्स का क्लेड 1बी कांगो सहित कुछ अफ्रीकी देशों में पहले से मौजूद है और यहीं से एक विदेशी शख्स से संक्रमित होकर शुरू हुआ था. विदेशी नागरिक के संपर्क में आने के बाद चार और नए मामले पाए गए हैं. मरीजों के लक्षण हल्के हैं. उनकी स्किन पर दाने और छाले हैं. एमपॉक्स की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपाय राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने कहा कि एमपॉक्स को कैटगरी बी संक्रामक रोग के रूप में मैनेज किया जाएगा. अधिकारी आपातकालीन उपाय कर सकेंगे. जैसे कि भीड़-भाड़ को रोकना, काम और स्कूल को निलंबित करना और बीमारी के फैलने पर क्षेत्रों को सील करना. चीन ने पिछले साल अगस्त में कहा था कि वह देश में एंट्री करने वाले लोगों और सामानों पर एमपॉक्स की निगरानी रखेगा. कैसे फैलता है एमपॉक्स? एमपॉक्स क्लोज कॉन्टेक्ट में आने से फैलता है. ये फ्लू जैसे लक्षण और शरीर पर मवाद भरे घाव कर देता है. हालांकि आमतौर पर ये उतना घातक नही होता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में यह घातक भी हो सकता है. पिछले दो सालों में दूसरी बार डब्ल्यूएचओ ने पिछले अगस्त में एमपॉक्स को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था. ये कदम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में मंकीपॉक्स का प्रकोप फैलने के बाद उठाया गया था. यह वैरिएंट डीआरसी से पड़ोसी देशों बुरुंडी, केन्या, रवांडा और युगांडा में फैल गया है, जिसकी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकाल की घोषणा की है.

रिपोर्ट : नागालैंड में एचआईवी/एड्स की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक पाया गया

कोहिमा राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में कहा गया है कि नागालैंड में 15 से 49 साल के उम्र के लोगों में एचआईवी/एड्स की दर 1.36 प्रतिशत है, जो पूरे देश में 0.2 प्रतिशत की दर से काफी ज्यादा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार सामान्य आबादी में एचआईवी/एड्स की दर 1.61 प्रतिशत है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि नागालैंड में 2006 से 2023 तक लगभग 16 लाख रक्त नमूनों की जांच के बाद कुल 33,396 व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। 2023-24 के दौरान परीक्षण किए गये कुल रक्त नमूनों में से 1.17 प्रतिशत एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। इसके अलावा, एचआईवी पॉजिटिव पाए गए 14.83 प्रतिशत मरीजों का उपचार चल रहा है। वर्ष 2023-24 के दौरान 14 वर्ष से कम आयु के जिन बच्चों के रक्त की जांच की गई, उनमें से 2.06 प्रतिशत बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 वर्ष से कम आयु के एचआईवी पॉजिटिव बच्चों में 53.70 प्रतिशत लड़के और 46.30 प्रतिशत लड़कियां थीं। अक्टूबर 2007 से नवंबर 2023 तक 14 वर्ष से कम आयु के कुल 1,385 बच्चे (2,099 प्रतिशत) एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया गया है कि एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर (एआरटीसी) में कुल 26,419 एचआईवी पॉजिटिव मरीज रजिस्टर्ड थे। इनमें से 21,110 एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) पर थे जबकि एआरटी पर कुल 3,116 मरीजों की मौत हो गई। इसमें यह भी बताया गया है कि एचआईवी पॉजिटिव कुल 6,205 पुरुष, 6,332 महिलाएं, 12 ट्रांसजेंडर/ट्रांससेक्सुअल व्यक्ति, तथा 370 लड़कियों सहित 748 बच्चे एआरटी पर हैं। हाल ही में जारी भारत एचआईवी अनुमान 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2.5 मिलियन से अधिक लोग एचआईवी से प्रभावित हैं। वयस्कों में एचआईवी का प्रसार 0.2 प्रतिशत पर है और अनुमानित वार्षिक नए एचआईवी संक्रमणों की संख्याो लगभग 66,400 हैं। वर्ष 2010 से अब तक नए वार्षिक एचआईवी संक्रमणों में 44 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक कमी दर 39 प्रतिशत से अधिक है।  

चीन ने बीच समंदर रोका 8 ऑयल टैंकरों का बेड़ा, चीन ने अपने ही मित्र पुतिन को दे दिया करारा झटका

बीजिंग रूस और चीन की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है। दुनिया के इन दोनों महाशक्तिशाली देशों के संबंध 1950 के दशक से ही मजबूत रहे हैं। करीब तीन साल पहले जब रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला, तब भी चीन ने उसकी आलोचना नहीं की। खबर यहां तक आती रही कि यूक्रेन जंग में चीन रूस को बड़े पैमाने पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद मॉस्को का दौरा किया लेकिन अब एक ऐसी खबर आई है, जिसने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को करारा झटका दिया है। चीन के सबसे बड़े बंदरगाह के अधिकारियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस के बड़े-बड़े तेल टैंकरों को ले जा रहे आठ जहाजों के बेड़े को अपने बंदरगाह पर आने से रोक दिया है। रॉयटर्स ने तीन व्यापारियों के हवाले से इस चीनी प्रतिबंध की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पूर्वी चीन के शांदोंग पोर्ट ग्रुप ने रूसी तेल टैंकरों के बेड़े पर ये प्रतिबंध लगाया है। इस क्षेत्र में स्थित कई ऑयल रिफाइनरीज विदेशी तेल के प्रमुख आयातक रहे हैं। चीन दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है और फरवरी 2022 के बाद से वह रूसी कच्चे तेलों का सबसे बड़ा आयातक रहा है क्योंकि पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। बावजूद इसके चीनी बंदरगाह ने रूसी जहाजों को वहां अनलोडिंग या डॉकिंग करने से रोक दिया है। यह प्रतिबंध सिर्फ शांदोंग बंदरगाह पर नहीं लगाया गया है बल्कि नजदीकी पोर्ट रिझाओ, यंताई और किंगदाओ पर भी है, जिसका संचालन शांदोंग पोर्ट ग्रुप करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन आठ ऑयल टैंकरों पर रोक लगाया गया है, उनमें से हरेक की क्षमता 20 लाख बैरल की है। यानी कुल 160 लाख बैरल क्रूड ऑयल के शिपमेंट को चीन ने बीच समंदर में छोड़ दिया है। बता दें कि अमेरिका ने प्रतिबंधों को तोड़ने वाले बेड़े को शैडो बेड़ा का नाम दिया है। पिछले महीने ही बाइडेन प्रसासन ने ईरानी शिपमेंट से जुड़ी 35 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान से कच्चे तेल का 90 फीसदी निर्यात चीन को किया जाता है। इसके बदले ईरान नकदी ना लेकर माल खरीदता है। जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा गया तो उन्होंने रूसी बेड़े पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी होने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि चीन की हालिया कार्रवाई अमेरिका में हो रहे सत्ता परिवर्तन के मद्देनजर हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप इसी महीने 20 तारीख को अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हैं। वह पहले ही चीन पर भारी भरकम टैक्स लगाने की बात कह चुके हैं।

कश्मीर घाटी में दिन में गर्माहट, रात का तापमान गिरना जारी, शीत लहर को प्रकोप जारी

श्रीनगर कश्मीर घाटी में तेज धूप निकलने के कारण दिन गर्माहट भरा रहता है और वहीं पारा लुढ़कने के बाद रात में शीत लहर को प्रकोप बढ़ जाता है। मौसम विज्ञान केन्द्र, श्रीनगर ने गुरुवार को बताया कि राजधानी श्रीनगर में बुधवार दिन का तापमान मौसमी औसत 6.6 डिग्री सेल्सियस से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। इसी तरह, घाटी भर के अन्य मौसम केंद्रों ने सामान्य से अधिक दिन के तापमान की सूचना दी, जो पिछले दिन दर्ज किए गए औसत से एक डिग्री सेल्सियस से चार डिग्री सेल्सियस अधिक था। कश्मीर घाटी में रात का तापमान गिरना जारी रहा और जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में गुरुवार को तापमान शून्य से 4.4 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस कम है। इसके अलावा, गुरुवार को पर्यटन स्थल गुलमर्ग में शून्य से 9.6 डिग्री सेल्सियस कम, पहलगाम में शून्य से 10.4 डिग्री सेल्सियस कम और सोनमर्ग में शून्य से 9.4 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जो कश्मीर घाटी के सबसे ठंडे स्थान रहे। गुलमर्ग के स्की रिसॉर्ट में न्यूनतम तापमान बुधवार के शून्य से 9.0 डिग्री सेल्सियस कम के मुकाबले गुरुवार को शून्य से 9.6 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.8 डिग्री सेल्सियस कम है। पहलगाम में तापमान शून्य से 10.4 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया, जबकि पिछली रात यह शून्य से 8.2 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.2 डिग्री सेल्सियस कम था। मध्य कश्मीर के गंदेरबल जिले के सुरम्य सोनमर्ग में बुधवार देर रात न्यूनतम तापमान शून्य से 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसमें गुरुवार को एक डिग्री की वृद्धि हुई। कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में न्यूनतम तापमान शून्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस कम के मुकाबले शून्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग के पिकनिक स्थल में भी न्यूनतम तापमान शून्य से 5.6 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जबकि पिछली रात तापमान शून्य से 1.9 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया था और काजीगुंड में गुरुवार को न्यूनतम तापमान शून्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जबकि बुधवार को यह शून्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया था। इसके अलावा, 15 जनवरी तक मौसम आमतौर पर शुष्क रहने, जम्मू के मैदानी इलाकों में हल्की बारिश और 11-12 जनवरी के दौरान जम्मू- कश्मीर में छिटपुट जगहों पर बर्फबारी का अनुमान है।  

मोदी की तरह शाह भी अपने अभियान की शुरुआत आप पार्टी के सबसे बड़े वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कोशिश करेंगे

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए अब एक महीने से भी कम का वक्त रह गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो रैलियों के बाद अब गृहमंत्री अमित शाह भी दिल्ली दंगल में मोर्चा संभालने जा रहे हैं। मोदी की तरह शाह भी अपने अभियान की शुरुआत आम आदमी पार्टी (आप) के सबसे बड़े वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कोशिश के साथ करेंगे। अमित शाह का यह कार्यक्रम करीब 30 लाख की आबादी और 20 सीटों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह 11 जनवरी को झुग्गी-झोपड़ियों के नेताओं के साथ मुलाकात करने जा रहे हैं। वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में मौजूद झुग्गी-झोपड़ियों वाली 3 हजार कॉलोनियों के प्रमुखों के साथ बातचीत करेंगे। यह बैठक शनिवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होने जा रही है। इसके जरिए भाजपा की कोशिश झुग्गी-झोपड़ियों के वोटर्स को अपने पाले में लाने की है, जो अभी तक मुख्यतौर पर ‘आप’ के समर्थक माने जाते रहे हैं। भाजपा ने इस बार झुग्गी-झोपड़ियों में मौजूद ‘आप’ के सबसे बड़े वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए कई दांव चले हैं। पिछले कई महीनों से दिल्ली के सांसद, विधायक और अन्य नेता झुग्गियों में जाकर रात बिताते हैं। करीब दो दर्जन नेता सप्ताह में एक रात झुग्गी में ही बिताते हैं। यहां रहने वाले लोगों की समस्याएं सुनते हैं और सरकार बनने पर उन्हें दूर करने का भरोसा देते हैं। ‘जहां झुग्गी वहां मकान’ के नारे को भी खूब प्रचारित किया जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के अशोक विहार में 1675 फ्लैट्स झुग्गीवासियों को सौंपे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे घर-घर जाकर सभी झुग्गीवालों को कह दें कि उन्हें भी इसी तरह पक्का मकान दिया जाएगा। दिल्ली में करीब 675 झुग्गी कल्स्टर हैं, जिनमें से 18-20 फीसदी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी लोकसभा क्षेत्रों में हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में झुग्गी-झोपड़ियों को वोटर्स ने ‘आप’ को दिल खोलकर वोट किया। हालांकि, भाजपा का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने झुग्गीवासियों से झूठे वादे किए। भाजपा कहती है कि पिछले 10 साल में झुग्गीवासियों के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आया है। दिल्ली की झुग्गियों में करीब 30 लाख लोगों की आबादी है, जिनमें से करीब आधे वोटर भी हैं। एक सर्वे के मुताबिक, 2020 में करीब 61 फीसदी ऐसे वोटर्स ने ‘आप’ का समर्थन किया जिनकी मदद से पार्टी 70 में से 67 सीटें जीतने में कामयाब रही।

बाइडन को रोम और वेटिकन के लिए रवाना होना था, PM मेलोनी से होने थी मुलाकात, अचानक विदेश दौरा रद्द किया

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी विदेश दौरे को अचानक रद्द कर दिया। बाइडन को रोम और वेटिकन के लिए रवाना होना था, जहां उनकी मुलाकात पोप फ्रांसिस और इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला के साथ-साथ प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से भी होनी थी। बाइडन के इस फैसले की वजह कैलिफोर्निया में फैली भीषण आग बताई जा रही है। राष्ट्रपति ने फैसला किया कि वे वॉशिंगटन में ही रहकर इस संकट पर नजर रखेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे। बाइडन ने अपने दौरे को रद्द करने से पहले लॉस एंजेलेस में अपनी पहली परपोती से मुलाकात की, जो बुधवार को पैदा हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय फायर विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर आग की स्थिति का जायजा लिया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरीन जीन-पियरे ने एक बयान में कहा, “लॉस एंजेलेस से लौटने के बाद राष्ट्रपति ने यह निर्णय लिया कि वे इटली का अपना आगामी दौरा रद्द कर देंगे और आने वाले दिनों में कैलिफोर्निया संकट में राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे।” कैलिफोर्निया में लगी इस भीषण आग ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाइडन ने इस आपदा के लिए लॉस एंजेलेस काउंटी के लिए एक ‘मेजर डिजास्टर डिक्लेरेशन’ को मंजूरी दी, जिससे राहत कार्यों के लिए संघीय फंडिंग का रास्ता साफ हो गया है। अब प्रभावित लोगों को अस्थायी आवास, घरों की मरम्मत और बीमा न होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कम ब्याज दर पर लोन मिल सकेगा। बाइडन ने एक्स पर कहा, “हम दक्षिणी कैलिफोर्निया की आग को रोकने और पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए कुछ भी और सब कुछ करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम जानते हैं कि यह एक लंबा रास्ता तय करेगा।” समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, कैलिफोर्निया के लॉस एंजिलिस काउंटी के जंगलों में लगी आग में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और कम से कम 1,100 इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने मंगलवार को आपातकाल स्थिति की घोषणा की, क्योंकि दक्षिणी कैलिफोर्निया में तेजी से फैलती जंगल की आग के कारण हजारों लोगों को जगह खाली करने का आदेश दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

भुवनेश्वर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा- मैंने हमेशा भारतीय डाइस्पोरा को भारत का राष्ट्रदूत माना है। मुझे खुशी होती है जब दुनिया में आप सभी साथियों से बात करता हूं। जो प्यार मिलता है उसे भूल नहीं सकता। प्रधानमंत्री ने कहा, आपका स्नेह आशीर्वाद मेरे साथ रहता है। मैं सभी का निजी तौर पर आभार करता हूं। आपको थैंक यू भी बोलना चाहता हूं। वो इसलिए क्योंकि आपकी वजह से मुझे दुनिया में गर्व से सिर ऊंचा रखने का मौका मिलता है। बीते दस साल में मेरी दुनिया के अनेक लीडर से मुलाकात हुई है। अपने देश के भारतीय डाइस्पोरा की बहुत प्रशंसा करता हूं। इसका एक बड़ा कारण वो सोशल वैल्यूज हैं जो आप सभी वहां की सोसाइटी में दिखाते हैं। हम सिर्फ मदर ऑफ डेमोक्रेसी ही नहीं हैं बल्कि जीवन का हिस्सा हैं। पीएम मोदी ने प्रवासियों के दिलों में धड़कते भारत की बात की। बोले, भारतीय हर जगह जुड़ जाते हैं, हमें विविधता सिखानी नहीं पड़ती, हमारा जीवन ही इससे चलता है। इसलिए भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां की सोसाइटी से जुड़ जाते हैं। जहां जाते हैं, वहां के नियमों और परम्पराओं की इज्जत करते हैं। देश की सेवा करते हैं। विकास में योगदान करते हैं। इनके बीच हमारे दिल में भारत भी धड़कता रहता है। हम भारत की हर खुशी में खुश होते हैं। उत्सव मनाते हैं। 21वीं सदी का भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, जिस गति से विकास के काम हो रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की बात कही। बोले, “यह समय उत्सव का है। हम महाकुंभ, मकर संक्रांति, लोहड़ी और पोंगल जैसे पर्वों के बीच एकत्र हुए हैं, जो हमारे समाज की विविधता और एकता को प्रदर्शित करते हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे और तब से यह दिन विशेष रूप से मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर की सराहना करते हुए कहा, “ओडिशा की भूमि पर कदम-कदम पर संस्कृति का प्रतीक देखने को मिलता है। यह भूमि हमारे सम्राट अशोक की शांति की धरोहर को संजोए हुए है। ओडिशा का यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व हमें शांति, विकास और वैश्विक समृद्धि की दिशा में प्रेरित करता है।” प्रधानमंत्री ने भारत के विकास की गति पर जोर देते हुए कहा, “बीते 10 वर्षों में भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। यह अभूतपूर्व सफलता है और हम आगे बढ़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हैं।” उन्होंने कहा, “आज भारत का चंद्रयान अपनी सफलता की ओर बढ़ रहा है, हम नवीकरणीय ऊर्जा, मेट्रो, बुलेट ट्रेन, और मेड इन इंडिया उत्पादों के साथ प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। यह सभी कारक भारत के वैश्विक प्रभाव को मजबूत कर रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “भारत की सफलता को अब दुनिया देख रही है और हमारे विकास की दिशा का सम्मान किया जा रहा है। हमारा देश न केवल अपने मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाता है, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज भी बनता है।” कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव, शोभा करांदे, कीर्ति वर्धन सिंह, ओडिशा सरकार के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव और अन्य मंत्रीगण, सांसद तथा विधायकों सहित हजारों प्रवासी भारतीय उपस्थित थे। पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों को ध्यान में रखकर शुरू की गई स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से चली और तीन सप्ताह तक कई पर्यटक स्थलों तक जाएगी।  

IAS और IPS के बच्चों को न मिले SC-ST आरक्षण, SC में पहुंची अर्जी, जिस पर अदालत ने विचार करने से ही इनकार किया

नई दिल्ली आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बच्चों को एससी और एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। ऐसी मांग वाली याचिका गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई, जिस पर अदालत ने विचार करने से ही इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि किसे आरक्षण मिलना चाहिए और किसे उसके दायरे से बाहर करना चाहिए। यह तय करना संसद का काम है। अदालत इस बारे में कोई निर्णय नहीं ले सकती। अदालत ने कहा कि यह तो संसद पर है कि वह इस संबंध में कोई कानून लाए। दरअसल बीते साल अगस्त में एक केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ही यह राय जाहिर की थी कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के आरक्षण में भी क्रीमी लेयर का प्रावधान होना चाहिए। इसके तहत दलित और आदिवासी वर्ग के ऐसे लोगों के बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाएगा, जिनके माता-पिता आईएएस या आईपीएस हों। इनके स्थान पर उसी वर्ग के उन वंचित लोगों को मौका मिलना चाहिए, जो अब तक मुख्य धारा में नहीं आ पाए हैं। अर्जी में जब अदालत की उस टिप्पणी को ही आधार के रूप में पेश किया गया तो जजों ने उस पर भी साफ जवाब दिया। जस्टिस बीआर गवई ने कहा, ‘हमारी ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। ऐसी राय 7 जजों की बेंच में से एक जस्टिस की थी, जिसे दो अन्य जजों ने समर्थन दिया था। उस मामले में अदालत का एकमत से यह फैसला था कि एससी और एसटी कोटा में उपवर्गीकरण होना चाहिए।’ यह जनहित याचिका संतोष मालवीय की ओर से दाखिल की गई थी। मालवीय का कहना था कि मध्य प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अफसरों के बच्चों को एससी और एसटी वर्ग का आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। यह याचिका पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ही दाखिल की गई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद याची ने शीर्ष अदालत का रुख किया। दरअसल उच्च न्यायालय ने कहा था कि यह याचिका उच्चतम न्यायालय में ही जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ही अपने एक फैसले में क्रीमी लेयर की बात कही थी। बता दें कि अगस्त में क्रीमी लेयर का सुझाव देने वाली उस बेंच में जस्टिस गवई भी शामिल थे। तब 7 जजों की बेंच ने साफ कहा था कि दलित और आदिवासी वर्ग के ही उन लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर करना चाहिए, जिनके माता-पिता आईएएस और आईपीएस जैसे पदों पर हैं। इससे पता चलता है कि अब वे समाज की मुख्यधारा में आ गए हैं और अब उनके स्थान पर उन लोगों को आरक्षण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो अब तक पिछड़े रहे हैं।

नितिन गडकरी ने कहा- दुर्घटना के पीड़ितों के इलाज के लिए कैशलेस योजना सरकार लाने वाली है, पीड़ितों को मिलेगी रहत

नई दिल्ली सड़क हादसे के पीड़ितों को सरकार बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि दुर्घटना के पीड़ितों के इलाज के लिए कैशलेस योजना सरकार लाने वाली है। इसके तहत एक लाख रुपये से ज्यादा का इलाज मिल सकेगा। उन्होंने बताया है कि मार्च तक एक संशोधित योजना लाए जाने की तैयारी है। गडकरी ने कहा कि यह योजना किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहनों के कारण होने वाली सभी सड़क दुर्घटनाओं पर लागू होगी। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘पायलट कार्यक्रम की व्यापक रूपरेखा के अनुसार पीड़ित दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिन की अवधि के लिए प्रति व्यक्ति अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ‘कैशलेस’ उपचार के हकदार हैं।’ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 मार्च, 2024 को सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ‘कैशलेस’ उपचार प्रदान करने के लिए एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया था। चंडीगढ़ में शुरू किए गए पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए एक परिवेश तैयार करना था। पायलट परियोजना को बाद में छह राज्यों तक बढ़ाया गया। कैसे और कितने का मिलेगा इलाज सरकार ने अगस्त 2024 में जानकारी दी थी कि योजना के अंतर्गत आने वाले पीड़ितों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों की अवधि के लिए ट्रॉमा और पॉलीट्रॉमा देखभाल से संबंधित अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य लाभ पैकेज दिए जाते हैं। पीआईबी पर जारी विज्ञप्ति के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एनएचए, स्थानीय पुलिस, सूचीबद्ध अस्पतालों, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र और सामान्य बीमा परिषद के साथ समन्वय कर कार्यक्रम को लागू करने के लिए जिम्मेदार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गडकरी ने कहा है कि अगर पुलिस को हादसे के 24 घंटे के अंदर सूचित कर दिया जाता है, तो सरकार इलाज का खर्च उठाएगी। उन्होंने कहा है कि सड़क सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी है कि 2024 में करीब 1.80 लाख लोगों ने सड़क हादसे में जान गंवा दी है। इनमें से 30 हजार मौतें हेलमेट नहीं पहनने से हुई हैं। अगर हिट एंड रन की स्थिति में मौत हो जाती है, तो पीड़ित के परिवार को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। कार्यक्रम को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ई-विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (eDAR) एप्लिकेशन और एनएचए की लेनदेन प्रबंधन प्रणाली की कार्यक्षमता को मिलाकर एक आईटी मंच के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा।

14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं की मतदाता संख्या ने पुरुषों को पीछे छोड़ा, अंतिम मतदाता सूची में सामने आई जानकारी

नई दिल्ली भारत के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं की मतदाता संख्या ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। यह जानकारी 1 जनवरी 2025 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में सामने आई है। पिछले साल, जब 1 जनवरी 2024 को संदर्भ तिथि के साथ मतदाता सूची अपडेट की गई थी, तब ऐसे 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश थे जहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक थी। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर कुल महिला मतदाताओं की संख्या अभी भी पुरुष मतदाताओं से 2.33 करोड़ कम है। भारत के कुल 99 करोड़ से अधिक मतदाताओं में 50.7 करोड़ पुरुष और 48.3 करोड़ महिलाएं (48.8%) शामिल हैं। तीसरे लिंग के मतदाताओं की संख्या 48,870 है, जिसमें तमिलनाडु (9,161), महाराष्ट्र (6,145), उत्तर प्रदेश (6,089) और कर्नाटक (5,095) शीर्ष पर हैं। नए राज्यों की सूची में शामिल हुए असम, कर्नाटक और नागालैंड टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक हो गई है, उनमें असम, कर्नाटक और नागालैंड नए नाम हैं। हालांकि, चंडीगढ़ में स्थिति उलट गई है, जहां इस साल पुरुष मतदाता संख्या फिर से महिलाओं से अधिक हो गई है। चंडीगढ़ और नागालैंड की सूची अभी अस्थायी है क्योंकि इनकी अंतिम मतदाता सूची कुछ दिनों में प्रकाशित की जाएगी। महिला मतदाताओं का नेतृत्व करने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस साल जिन 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला मतदाता संख्या पुरुषों से अधिक है, उनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। पिछले साल आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गोवा, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना इस सूची में शामिल थे। लिंग अनुपात में सुधार के संकेत देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 22 में राष्ट्रीय औसत लिंग अनुपात 954 से अधिक दर्ज किया गया है। 14 राज्यों में तो यह अनुपात महिलाओं के पक्ष में है। हालांकि, दिल्ली (859), उत्तर प्रदेश (876) और हरियाणा (890) जैसे राज्य राष्ट्रीय औसत को नीचे खींचते हैं। महिलाओं की प्रतिशत हिस्सेदारी 2025 की मतदाता सूची के अनुसार, पुडुचेरी में महिलाओं की हिस्सेदारी 53.2%, केरल और मणिपुर में 51.7%, मिज़ोरम में 51.6%, गोवा में 51.5%, और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और तमिलनाडु में लगभग 51% है। 2024 लोकसभा चुनाव में अधिक मतदान प्रतिशत 2024 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने 65.8% मतदान किया था, जो पुरुषों के 65.6% के मतदान प्रतिशत से अधिक था। यह महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े महिलाओं की बढ़ती जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर इस अंतर को कम करने की जरूरत है।

हिंसक टकराव में आया उछाल, यूक्रेन युद्ध के तीन साल बाद भी शांति की उम्मीदें धुंधली

वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने आगाह किया है कि रूसी सैन्य बलों द्वारा यूक्रेनी आम नागरिकों को हवाई हमलों के जरिए निशाना बनाया जाना जारी है। इसमें लंबी दूरी की मिसाइलों व ड्रोन विमानों समेत अन्य बमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यूएन कार्यालय ने जोर देकर कहा कि अन्य स्थानों पर आम लोगों की तरह यूक्रेनी नागरिकों के पास भी शांति पाने का अधिकार है। मानवाधिकार मामलों के लिए उप-उच्चायुक्त नाडा अल-नशीफ ने बुधवार को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद को यूक्रेन में मानवाधिकारों की स्थिति पर आयोजित एक बैठक में बताया कि इन हमलों के जरिए यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में और अधिक इलाके को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर रूसी सैन्य बलों के पूर्ण आक्रमण के तीन वर्ष पूरे होने से पहले एक शांतिपूर्ण निपटारे की दिशा में प्रगति धुंधली नजर आ रही है, जबकि टकराव में खतरनाक तेजी आई है। यह रिपोर्ट पिछले वर्ष 1 सितंबर से 30 नवंबर की अवधि पर आधारित है। रूसी सैन्य बलों के हमलों में अब तक 574 नागरिकों की जान जा चुकी है, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। जुलाई 2022 के बाद सितम्बर महीने में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए। उन्होंने कहा कि रूसी बमबारी में जल आपूर्ति, तापन व्यवस्था व परिवहन सेवाओं समेत बुनियादी ढांचे को भीषण क्षति पहुंची है। यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भी बड़े हमले किए गए हैं। मानवतावादी कानून का हनन OHCHR उप-उच्चायुक्त द्वारा लगाए गए इन आरोपों को रूसी प्रतिनिधिमंडल ने खारिज करते हुए यूक्रेनी सैन्य बलों पर रूस के विभिन्न क्षेत्रों में आतंकी कृत्यों को अंजाम देने का आरोप लगाया। यूक्रेनी प्रतिनिधि ने रूसी सैन्य बलों के घातक हमलों की निंदा की। नए साल की पूर्व संध्या पर राजधानी कीव पर हुए हमलों में 100 ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें दो लोग मारे गए व सात घायल हुए। उप उच्चायुक्त अल-नशीफ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून, मानवतावादी कानून के बढ़ते उल्लंघन मामलों के प्रति सचेत किया और कहा कि युद्ध अपराधों को अंजाम दिए जाने की भी आशंका है। यूक्रेनी युद्धबंदियों ने व्यापक स्तर पर व्यवस्थागत ढंग से यातना दिए जाने की बात कही है। उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए, गला घोंटा गया और लम्बे समय तक एकांत कारावास में रखा गया। पुरुष व महिला युद्धबंदियों ने दुष्कर्म, जबरन नग्न किए जाने समेत अन्य प्रकार की यौन हिंसा का शिकार बनाए जाने के भी आरोप लगाए हैं। बिना सुनवाई के ही मौत नाडा अल-नशीफ ने चिंता जताई कि रूसी सैन्य बलों द्वारा पकड़े गए यूक्रेनी सैन्यकर्मियों को बिना सुनवाई के ही मार दिए जाने के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। बिना अदालती कार्रवाई के जान से मार देना एक युद्ध अपराध है। हमारे कार्यालय ने इस अवधि के दौरान 19 अलग-अलग घटनाओं में ऐसे 62 मामलों पर जानकारी जुटाई है और ऐसे पांच मामलों की पुष्टि की है। यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र निगरानी मिशन के अनुसार, फरवरी 2022 के बाद से अब तक हिंसक टकराव में 12,300 आम नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 650 से अधिक बच्चे हैं। 27 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। साथ ही, 700 से अधिक मेडिकल केंद्रों, 1500 से अधिक स्कूलों व कॉलेज, हिंसा में क्षतिग्रस्त या पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गए हैं।

भगदड़ और भीड़ काबू करने की व्यवस्था नहीं, तिरुपति बालाजी मंदिर में एक काउंटर पर हजारों लोग

हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के तिरुमाला हिल्स पर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में वैकुंठ एकादशी उत्सव शुरू होने से दो दिन पहले मची भगदड़ ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्सव के लिए टिकट या टोकन मुहैया कराने के लिए बनाए गए 90 से अधिक टिकट काउंटरों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देखते ही देखते वहां भगदड़ मच गई और छह लोगों की मौत की खबर आई। बता दें कि इस त्योहार के दौरान श्रद्धालु मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार से भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। 1,20,000 टोकन वितरित करने की व्यवस्था की गई थी दरअसल, 10 से 12 जनवरी को वार्षिक दर्शन के पहले तीन दिनों के लिए भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के ‘सर्व दर्शन’ (निःशुल्क दर्शन) के लिए भक्तों को 1,20,000 टोकन वितरित करने की व्यवस्था की गई थी। 10 दिवसीय उत्सव के लिए दर्शन टोकन गुरुवार को सुबह 5 बजे से दिए जाने थे, लेकिन हजारों लोग मंदिर के संचालन की देखरेख करने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की ओर से बनाए गए काउंटरों पर एक रात पहले ही एकत्र हो गए। 4,000-5,000 लोग काउंटर पर जमा हो गए अधिकारियों ने बताया कि तिरुपति में सत्यनारायणपुरम, बैरागीपट्टेडा और रामानायडू स्कूल के अलावा तीन तीर्थयात्री लॉज विष्णु निवासम, श्रीनिवासम और भूदेवी कॉम्प्लेक्स में 94 काउंटरों पर वितरण व्यवस्था की गई थी। तिरुपति नगर आयुक्त एन मोरुआ ने बताया कि विष्णु निवासम मंदिर के पास बैरागीपट्टेडा में एमजीएम हाईस्कूल में बने काउंटर पर हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। बुधवार सुबह से ही करीब 4,000-5,000 लोग काउंटर पर जमा हो गए। शाम तक भीड़ बेकाबू हो गई और धक्का-मुक्की होने लगी। ‘महिला की मदद के लिए गेट खोला तो भीड़ बढ़ गई’ टीटीडी के चेयरमैन बीआर नायडू के मुताबिक, जब अस्वस्थ महसूस कर रही एक महिला की मदद के लिए गेट खोला गया तो भीड़ एक साथ आगे बढ़ गई और अफरा-तफरी मच गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण बुधवार देर शाम भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 40 से अधिक घायल हो गए। पीएम मोदी, राहुल गांधी ने जताया दुख घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दुख जताया। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस कठिन समय में हर संभव सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।

आयोजन समिति ने अब तक जुटाए 170 मिलियन डॉलर, ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के लिए चंदा देने की होड़

वासिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 जनवरी को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। बड़े-बड़े अरबपति, कारोबारी और तकनीकी विशेषज्ञ इस समारोह में अपनी सहभागिता के साथ आर्थिक सहयोग भी कर रहे हैं। समारोह के लिए चंदा देने की होड़ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आयोजन समिति को अब तक 170 मिलियन डॉलर का चंदा मिल चुका है। जोकि एक रिकॉर्ड है। इस चंदे के लिए अमेरिका के बड़े-बड़े कारोबारियों और हस्तियों ने बड़े चेक लिखे हैं। व्यक्तिगत तौर पर चंदा वसूलने वाले एक व्यक्ति ने समारोह के लिए अब तक मिले चंदे की पुष्टि की। उसने कहा कि आयोजन समिति को उम्मीद है कि वह समारोह होने तक 200 मिलियन डॉलर चंदा जुटा लेगी। हालांकि वह सार्वजनिक तौर पर इस बारे में बात नहीं कर सकता है। वहीं आयोजन समिति ने भी इसे दावे पर कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि वह चंदे को कैसे खर्च करेगी। ट्रंप के राष्ट्रपति पुस्तकालय में होगा बची हुई रकम का उपयोग अमेरिका के नियमों के मुताबिक व्यक्तिगत चंदे से मिली रकम का उपयोग आमतौर पर शपथ ग्रहण समारोह किया जाता है। इसमें शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी लागतें, परेड और शानदार उद्घाटन समारोह। बताया जाता है कि आयोजन समिति समारोह के बाद बचने वाले पैसे का उपयोग ट्रंप राष्ट्रपति पुस्तकालय में करेगी। बाइडन को मिला था 62 मिलियन डॉलर का चंदा अमेरिकी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह की आयोजन समिति ने अब तक सबसे ज्यादा चंदा जुटाया है। यह चार साल पहले राष्ट्रपति जो बाइडन को मिले चंदे के दोगुने से भी अधिक है। बाइडन को लगभग 62 मिलियन डॉलर चंदा मिला था। वहीं 2016 में ट्रंप के प्रथम शपथ ग्रहण समारोह में भी लगभग 107 मिलियन डॉलर का चंदा प्राप्त हुआ था, जिसने एक रिकार्ड स्थापित किया था। राष्ट्रपति के साथ संबंध सुधारने की कवायद नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप और कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन के नियंत्रण के बाद तकनीकी कंपनियां सहित प्रमुख लोग बड़े चेक लिख रहे हैं। ताकि वे नए राष्ट्रपति के साथ अपने संबंध सुधार सकें। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा और अमेजन ने पिछले महीने कहा था कि वे ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के कोष में एक मिलियन डॉलर का चंदा देंगे। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी कहा कि एक मिलियन डॉलर का चंदा देने की बात कही थी।

पीएम मोदी ने 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में दिया मंत्र, ‘भविष्य युद्ध में नहीं, बुद्ध में है’

भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। यहां पीएम मोदी ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा पीएम मोदी ने कहा कि यह जीवंत त्योहारों का समय है। कुछ ही दिनों में प्रयागराज में महाकुंभ शुरू हो रहा है। मकर संक्रांति, बिहू, पोंगल, लोहड़ी जैसे त्योहार आने वाले हैं। हर जगह आनंदमय वातावरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज आप ओडिशा की जिस महान धरती पर जुटे हैं वो भी भारत की समृद्ध विरासत का प्रतिबिंब है। ओडिशा में कदम कदम पर हमारी विरासत के दर्शन होते हैं। सैकड़ों वर्ष पहले भी ओडिशा से हमारी व्यापारी कारोबारी लंबा सफर करके बाली, सुमात्रा, जावा जैसे स्थानों तक जाते थे…ओडिशा में आज भी बाली यात्रा का आयोजन होता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जब तलवार के जोर पर साम्राज्य बढ़ाने का दौर था, तब हमारे सम्राट अशोक ने यहां शांति का रास्ता चुना था। हमारी इस विरासत का ये वही बल है जिसकी प्रेरणा से आज भारत दुनिया को कह पाता है कि भविष्य युद्ध में नहीं है, बुद्ध में है। पीएम मोदी ने कहा कि मैंने हमेशा भारतीय डायस्पोरा को भारत का राष्ट्रदूत माना है। मुझे बहुत खुशी होती है, जब पूरी दुनिया में आप सभी साथियों से मिलता हूं, आपसे बातचीत करता हूं। जो प्यार मुझे मिलता है, वो भूल नहीं सकता हूं। आपका प्यार, आपका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहता है। हम सिर्फ लोकतंत्र की जननी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र हमारे जीवन का हिस्सा है। हमें विविधता सिखानी नहीं, हमारा जीवन ही विविधता प्रदान करता है। भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां के समाज के साथ जुड़ जाते हैं। भारतीय जहां भी जाते हैं,  वहां के नियम और परंपरा का सम्मान करते हैं। हम पूरी ईमानदारी से उस देश की, उस समाज की सेवा करते हैं। इस सबके साथ ही हमारे दिल में भारत भी धड़कता रहता है। उन्होंने कहा कि भारत की सफलता आज दुनिया देख रही है। आज जब भारत का चंद्रयान शिव शक्ति प्वाइंट पर पहुंचता है, तो हम सब को गर्व होता है।  आज जब दुनिया, डिजिटल इंडिया की ताकत देखकर हैरान होती है, तो हम सब को गर्व होता है।  आज भारत का हर सेक्टर आसमान की ऊंचाई छूने को आगे बढ़ रहा है। भारत की बात को आज दुनिया ध्यान से सुनती है। आज का भारत, अपना पॉइंट तो मजबूती से कायम है, ग्लोबल साउथ की आवाज को भी पूरी ताकत से उठाता है। ‘वैश्विक युग में प्रवासी समुदाय का महत्व प्रत्येक वर्ष के साथ बढ़ता गया’ इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि हर 2 साल में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के माध्यम से विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने देश में हो रही प्रगति और विकास को देख पाते हैं, अनुभव कर पाते हैं। आप सभी न केवल अपने जीवन की उपलब्धियों पर गर्व कर करते हैं, बल्कि विदेशों में हमारे लिए बढ़ते सम्मान का भी अनुभव करते हैं। वैश्विक युग में प्रवासी समुदाय का महत्व प्रत्येक वर्ष के साथ बढ़ता गया है। ‘विकसित भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों का योगदान’ ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि इस बार प्रवासी भारतीय दिवस की थीम ‘विकसित भारत के निर्माण में प्रवासी भारतीयों का योगदान’ है। आज मैं ओडिशा की धरती से सभी का अभिवादन करता हूं।

एक मिनट में साढ़े चार लाख गोलियां करती है फायर, चीन ने बनाई दुनिया की सबसे ताकतवर मशीनगन ‘मेटल स्टॉर्म’

  बीजिंग। चीन एक ऐसा हथियार बनाने में लगा है, जिसका नाम सुनकर अमेरिका भी थर्राने लगेगा. यह मानव इतिहास की सबसे शक्तिशाली मशीन गन है, जिसे चीनी इंजीनियर और वैज्ञानिक विकसित कर रहे हैं. इसकी ताकत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसमें पांच से ज्यादा बैरल होंगे. वहीं यह 450,000 गोलियां प्रति मिनट फायर कर सकेगा. गोलीबारी का घनत्व 7 मैक से ज्यादा की गति से यात्रा करने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी रोक सकता है. अमेरिका के लिए यह चिंता की बात है. क्योंकि अभी तक उसके पास मौजूद ‘फालैंक्स सिस्टम’ प्रति मिनट 4,500 राउंड गोलियां फायर कर सकता है. हालांकि इस हथियार की ताकत ही इसकी कमजोरी रही है. लाखों गोलियां प्रति मिनट दागने वाले इस हथियार के लिए गोला-बारूद भरना एक असंभव चुनौती माना जाता रहा है. लेकिन चीन के केंद्रीय औद्योगिक केंद्र ताइयुआन के शोधकर्ताओं ने इसका समाधान खोज निकाला है. इसके लिए वह एक कंटेनर जैसा मैग्जीन बनाएंगे, जिसमें बैरल भरे होते हैं. प्रत्येक बैरल पहले से ही गोलियों से भरा होता है. फायरिंग के बाद बैरल को कंटेनर समेत डिस्पोज कर दिया जाता है. क्या है इस बंदूक की टेक्नोलॉजी साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर चीन विश्वविद्यालय के यांत्रिक और विद्युत इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर लू शुताओ के नेतृत्व वाली प्रोजेक्ट टीम ने कहा, ‘बॉक्सटाइप रोटरी फायरिंग तकनीक से लोडिंग की स्पीड बढ़ती है और बैरल की शक्ति और सटीकता में गिरावट नहीं आती. साथ ही, कई हमलों के दौरान लगातार संचालन और तेज जवाबी हमला संभव हो सका है. पारंपरिक मशीन गन मैकेनिकल ट्रिगर्स का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन यह प्रति सेकंड 7,500 हमले नहीं कर सकती है, जो चीन की सेना चाहती है. इस समस्या से निपटने के लिए लू और उनके सहयोगियों ने एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर विकसित किया है, जिसमें कॉइल्स का इस्तेमाल होता है. यह संपर्क रहित ट्रिगर तुरंत गोली में मौजूद मिश्र धातु की तार को पिघला देगा, जिससे हाई पावर के साथ गोली निकलेगी. इस इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर की दक्षता इतनी ज्यादा है कि यह 17.5 माइक्रोसेकंड में फायरिंग करने लगता है. रिपोर्ट के मुताबिक टेस्ट डेटा कन्फर्म करता है कि प्रत्येक बैरल 450,000 राउंड प्रति मिनट का लक्ष्य पाने के लिए पर्याप्त है. सबसे पहले कब आया खतरनाक हथियार? इस हथियार की अवधारणा पहली बार 1990 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई आविष्कारक माइक ओ’ड्वायर ने प्रस्तुत की थी. हथियार का नाम मेटल स्टॉर्म रखा गया. उनकी कंपनी, मेटल स्टॉर्म इंक, ने एक 36-बैरल टेस्ट सिस्टम बनाया जो 10 लाख राउंड प्रति मिनट की फायरिंग दर तक पहुंच गई. साल 2006 में उन्होंने मीडिया को बताया कि चीनी सेना ने इस तकनीक के लिए 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पेशकश की थी. जब अमेरिका को इसकी खबर लगी तो उन्होंने ओ’ड्वायर के साथ युद्धक्षेत्र के लिए नए हथियार सिस्टम विकसित करने में सहयोग किया. लेकिन तकनीकी और अन्य चुनौतियों के कारण प्रोजेक्ट रद्द हो गया. बाद में 2012 में मेटल स्टॉर्म इंक दिवालिया हो गई.

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