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वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और पत्थर से हमला, 3 वनकर्मी घायल

Forest department team attacked with sticks and stones, 3 forest workers injured राजगढ़ में वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और पत्थर से हमला हुआ है। जिसमें तीन वनकर्मी घायल हो गए हैं। किशनगढ़ में कुछ लोगों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर लिया था। राजगढ़ ! जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने ग‌ई वन विभाग की टीम पर मंगलवार को हमला हो गया। हमला करने वालों ने कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे और पत्थरों से अतिक्रमण हटाने ग‌ई टीम पर हमला कर दिया। हमलें में तीन वनकर्मीयों को चोटें आई हैं। वन विभाग की शिकायत पर कोतवाली थाने में तीन लोगों पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। राजगढ़ रेंज ऑफिसर गौरव गुप्ता ने बताया कि वन विभाग के किशनगढ़ क्षेत्र की डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। कब्जा करने वालों ने वन विभाग की जमीन पर लकड़ी के खंभे गाड़कर तार फेसिंग कर दी थी। जिसकी सूचना मिलने पर मंगलवार दोपहर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। कब्जा करने वालों ने इसका विरोध किया। उन्होंने टीम पर लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और पत्थर से हमला कर दिया। टीम ने अपनी जान बचाते हुए पुलिस को सूचना दी। कुछ देर बाद 20 से 25 पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस को देखकर हमलावर मौके से भाग निकले। तीन वनकर्मीयों को आई चोंटे इस घटना में में तीन वनकर्मीयों को पत्थर लगे हैं। उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है। पुलिस की मौजूदगी में टीम ने अतिक्रमणहटाने की कार्रवाई की। इसके बाद राजगढ़ थाने पहुंचे और हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने पर आरोपी मोहन उर्फ बंटी गुर्जर, भारत गुर्जर, राजू गुर्जर पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।

अग्निवीर की तर्ज पर प्रदेश सरकार लायेंगी वनवीर भर्ती योजना

On the lines of Agniveer, the state government will bring Vanveer recruitment scheme. भोपाल। जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार सेना के अग्निवीर की तर्ज पर मध्य प्रदेश में वन वीर की भर्ती करेगी। इसके लिए भर्ती नियम बना लिए गए हैं। इनमें वन्य जीवों की सुरक्षा का खास ध्यान रखने के लिए बाघ मित्र, चीता मित्र और हाथी मित्र नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जंगल के अंदर और उसके आस-पास रहने वाले ग्रामीण, वनवासी और आदिवासी युवाओं की पांच साल के लिए भर्ती की जाएगी। हर वर्ष उनका प्रदर्शन देखकर उनकी सेवा में वृद्धि की जाएगी। पांच साल तक उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा। पांच साल बाद भर्ती किए गए कुल वनवीरों में से अच्छा प्रदर्शन करने वाले 30 प्रतिशत लोगों को वन रक्षक के पद पर नियमित नियुक्ति दी जाएगी।वहीं चीतों के प्रति जागरूकता लाने और ग्रामीणों में उनके प्रति डर को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर ‘चीता मित्र’ भी बनाए गए हैं। वे स्थानीय लोगों को चीतों की प्रवृति से अवगत करा कर उन्हें चीताें की रक्षा कर संरक्षण के लिए जागरूक करते हैं। अब वन वीर भर्ती में चीता मित्रों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, क्योंकि वे जंगल को अच्छे से समझते हैंवन वीर भर्ती की व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि स्थानीय समुदाय के युवा जंगल को अच्छे से पहचानते हैं और जंगल एवं वन्य प्राणियों की भली भांति रक्षा भी कर सकते हैं। वन रक्षक के पदों पर सीधी भर्ती में कई बार शहरी युवा भी आ जाते हैं, जिन्हें जंगलों में रहने की आदत नहीं होती है। वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए स्थानीय युवा मददगार साबित होते हैं तथा इससे उन्हें रोजगार के भी नए अवसर मिलेंगे हर साल की जाएगी पांच सौ से अधिक भर्तियां वन विभाग की तैयारी है कि वन वीर योजना के तहत हर साल मध्‍य प्रदेश में पांच सौ से अधिक भर्तियां की जाएगी। इन्हें 15 से 20 हजार रुपये मासिक मानदेय भी दिया जाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार यह प्रक्रिया शुरू कर सकती है। वन वीर भर्ती के लिए शारीरिक मापदंड और व्यवहारिकता को प्राथमिकता में रखा जाएगा। साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण को प्राथमिकता दी जा सकती है। एक नजर मेंकुल वनरक्षक के पद: 20,670 वर्तमान में सेवाएं दे रहे वनरक्षक: 16,875 खाली पद: 3,795

बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत फिर भी सरकार मौन क्यों?

Continuous death of tigers in Bandhavgarh, yet why is the government silent? उमरिया । विश्व प्रसिद्ध और बाघ दर्शन के लिए मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर वन्य प्राणी प्रेमियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। जिसमें एक नर बाघ शावक की मौत हो जाने की जानकारी मिली है। प्रबंधन के द्वारा मृत बाघ शावक का पीएम आदि कराकर टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दरअसल बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत से जहां प्रबंधन कटघरे में है।वहीं बीते दिसंबर माह में दर्जन भर बाघों की असमय मौत हो जाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। इस बार भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर परिक्षेत्र अंतर्गत बरबसपुर बीट के कक्ष क्रमांक 125 में एक नर बाघ शावक मृत अवस्था में गश्ती दल को मिला है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई है कि अमृत न भाग सावन के आसपास एक दूसरे बैग की पगमार्क मिले हैं इसके अलावा मृत शावक को घसीटने के भी निशान दिखाई दे रहे हैं। मृत शावक के शरीर के सभी अंग मौजूद हैं। इसके बाद मृत शावक का डॉक्टर नितिन गुप्ता और बी बी एस मार्को के द्वारा पोस्टमार्टम कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजने सैंपल एकत्रित किए गए हैं। मृत शावक का पीएम उपरांत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों एनटीसीए के मेम्बर की मौजूदगी और एनटीसीए गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। बताया गया कि नर बाघ शावक की मौत प्रथम दृष्ट्या किसी दूसरे बाघ से आपसी संघर्ष के कारण होना प्रतीत होता है।

कूनो में चीते की मौत नामीबिया से लाए एक और चीते ने तोड़ा दम

भोपाल। मॉनीटरिंग टीम को चीता शौर्य अचेत अवस्था में मिला था। कूनो में अब तक दस चीतों की मौत हो चुकी है, इनमें सात चीते और तीन शावक शामिल हैं। लॉयन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर ने बताया कि आज करीब सवा तीन बजे चीता शौर्य की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का खुलासा होगा। अब तक 7 चीते और 3 शावक की मौत कूनो में अब तक चीते और शावक को मिलाकर यह 10वीं मौत है। इनमें 7 चीते और 3 शावक हैं। प्रोजेक्ट चीता में सितंबर 2022 में आठ चीतों को नामीबिया से लाया गया था। इसके बाद फरवरी 2023 में 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। नामीबिया से लाया गया चीता शौर्य अपने सगे भाई गौरव के साथ आया था। दोनों हमेशा एकसाथ रहते थे, साथ शिकार करते थे। कुछ समय पहने दोनों की अग्नि और वायु चीते से भिड़ंत हुई थी। वे दोनों भी सगे भाई थे। इसमें अग्नि चीता गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बार चीतों को बाड़े में बंद कर दिया था। + कब-कैसे हुई चीतों की मौत… 26 मार्च 2023: साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत  नामीबिया से लाई गई 4 साल की मादा चीता साशा की किडनी इंफेक्शन से मौत हो गई। वन विभाग ने बताया कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में साशा का ब्लड टेस्ट किया गया था, जिसमें क्रियेटिनिन का स्तर 400 से ज्यादा था। इससे ये पुष्टि होती है कि साशा को किडनी की बीमारी भारत में लाने से पहले ही थी। साशा की मौत के बाद चीतों की संख्या घटकर 19 रह गई। 27 मार्च : ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया साशा की मौत के अगले ही दिन मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया। ज्वाला को नामीबिया से यहां लाया गया था। कूनो नेशनल पार्क में इन शावकों को मिलाकर चीतों की कुल संख्या 23 हो  गई। 23 अप्रैल : उदय की दिल के दौरे से मौत साउथ अफ्रीका से लाए गए चीते उदय की मौत हो गई। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में बताया गया कि उदय की मौत कार्डियक आर्टरी फेल होने से हुई। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जेएस चौहान ने बताया कि हृदय धमनी में रक्त संचार रुकने के कारण चीते क्की मौत हुई। यह भी एक प्रकार का हार्ट अटैक है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 22 रह गई।  9 मई : दक्षा की मेटिंग के दौरान मौत दक्षा को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। जेएस चौहान ने बताया कि मेल चीते को दक्षा के बाड़े में मेटिंग के लिए भेजा गया था। मेटिंग के दौरान ही दोनों में हिंसक इंटरेक्शन हो गया। मेल चीते ने पंजा मारकर दक्षा को घायल कर दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 21 रह गई। 23 मई : ज्वाला के एक शावक की मौत मादा चीते ज्वाला के एक शावक की मौत हो गई। जिएस चौहान ने बताया कि ये शावक जंगली 31 परिस्थितियों में रह रहे थे। 23 मई को श्योपुर में भीषण गर्मी थी। तापमान 46-47 डिग्री सेल्सियस था। दिनभर गर्म हवा और लू चलती रही। ऐसे में ज्यादा गर्मी, डिहाइड्रेशन और कमजोरी इनकी मौत की वजह हो सकती है। इसके बाद कूनो में शावकों सहित चीतों की संख्या 20 रह गई। 25 मई : ज्वाला के दो और शावकों की मौत पहले शावक की मौत के बाद तीन अन्य को चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया था। इनमें से दो और शावकों की मौत हो गई। अधिक तापमान होने और लू के चलते इनकी तबीयत खराब होने की बात आमने सामने आई थी। इसके बाद कूनो में एक शावक सहित 18 चीते बचे। 11 : मेल चीता तेजस की मौत चीते तेजस की गर्दन पर घाव था, जिसे देखकर अनुमान लगाया गया कि चीतों के आपसी संघर्ष में उसकी जान गई है। इस मौत के बाद कूनो में 17 चीते बचे थे। 14 जुलाई : मेल चीता सूरज की मौत चीते सूरज की गर्दन पर भी घाव मिला। कूनो प्रबंधन का अनुमान है कि चीतों के आपसी संघर्ष में ही सूरज की जान गई है। इससे नेशनल पार्क में चीतों की संख्या घटकर 16 रह गई थी। 2 अगस्त : मादा चीता धात्री की मौत कूनो परिसर में ही मादा चीता धात्री का शव मिला था। पोस्टमॉर्टम में इंफेक्शन से मौत की वजह सामने आई थी। धात्री की मौत होने के बाद चीतों की संख्या 15 रह गई थी। 03 जनवरी : आशा ने तीन शावक जन्मे इसी साल 03 जनवरी को श्योपुर जिले के कूनो बेशनल पार्क से बड़ी खुशखबरी आई। मादा चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया। कूनो में अब 4 शावक समेत कुल 18 चीते हो गए थे। नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाई गई मादा चीता आशा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह नाम दिया था।  16 जनवरी 2024: नर चीते शौर्य की मौत नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क लाए गए नर चीते शौर्य ने दम तोड़ा। अब यहां 4 शावक समेत 17 चीते बचे हैं।

कलेक्टर-एसपी और सेना अफसरों के लिए निशुल्क सफारी करने नियमों में करें प्रावधान

Make provision in the rules for free safari for Collector-SP and Army officers भोपाल। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1974 के नियम 34 में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में विभाग ने टाइगर रिजर्व के सभी फील्ड डायरेक्टरों से सुझाव मांगे गए हैं। पन्ना नेशनल पार्क के क्षेत्र संचालक विजेंद्र झा ने सुझाव दिया है कि कलेक्टर-एसपी, न्यायालयीन अधिकारियों और सेना के अफसरों को टाइगर रिजर्व में निशुल्क सफारी करने के लिए नियम 34 में प्रावधान किया जाए। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी को लिखे पत्र में फील्ड डायरेक्टर विजेंद्र झा ने कहा है कि पार्क सफारी में आने वाले न्यायालयीन अधिकारी, सेना के अधिकारी, जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारी निःशुल्क प्रवेश की अपेक्षा रखते हैं, इस सम्बन्ध में भी नियमों में प्रवाधान किया जाना आवश्यक है। झा ने पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) को स्मरण करवाया है कि टाइगर फाउण्डेशन सोसायटी की बैठक के दौरान माननीय वन मंत्री द्वारा जन प्रतिनिधियों को रियायती पास दिये जाने की घोषणा की गई थी, इसका उल्लेख भी नियमों के उल्लेख किये जाने का कष्ट करें। पांडवफॉल के लिए ₹50 शुल्क करें झा ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि नवीन नियम प्रारूप में पन्ना टाइगर रिजर्व के विशिष्ट स्थल पाण्डवफाल हेतु दर निर्धारित नहीं की गई है। प्रारूप नियम की तालिका 02 के वर्ग 03(ग) में दर्शायी शुल्क रु० 100/- अधिक प्रतीत होती है। वर्ष 2021 में जारी अधिसूचना में प्रवेश दर रु0 25/- थी। अतः पाण्डवफाल हेतु प्रतिव्यक्ति प्रवेश शुल्क की राशि रु० 50/- किये जाने का सुझाव है।

प्रेरकों के साथ बच्चों ने की जंगल की सैर, देखी ( मै भी बाघ ) डाक्यूमेंट्री

Children took a trip to the jungle with the inspirations, watched the documentary (Main Bhi Bagh) हरिप्रसाद गोहे आमला ! स्कूली क्षात्रो को वन, वन्यप्राणी एवं पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकाशित करने के उद्देश्य को लेकर मध्य प्रदेश वन विभाग एवं मध्य प्रदेश ईकोपर्यटन विकास बोर्ड द्वारा दिनांक 11 जनवरी 2024 को भूमका देव (सारणी-बेलोण्ड रोड), आमला में वनसंरक्षक वनवृत्त बैतूल एवं वनमंडल अधिकारी दक्षिण बैतूल, उ.व.म.अ. आमला (सा.) के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में वन परिक्षेत्र आमला अंतर्गत अनुभूति वर्ष 2024 कार्यक्रम का आयोजन आयोजित किया गया।कार्यक्रम में अशासकीय मदरलैंड पब्लिक अकादमी स्कूल आमला के 126 छात्र/छात्रों ने भाग लिया । आयोजित शिविर में छात्रों ने प्रदेश के अनुभूति प्रेरक श्री के.एल. चंदेलकर सहित वन विभाग के 3 अन्य प्रेरकों के साथ एक प्राकृतिक सैर में हिस्सा लिया, जहाँ उन्हें पेड़ों और पक्षियों की विविध प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई । इस दौरान बच्चों को अनसिले कपड़े से बैग बनाने के साथ साथ “मैं भी बाघ” थीम पर डाक्युमेंट्री दिखाई गई । वहीं छात्र/छात्राओं के लिए चित्रकला, रंगोली, और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी वन विभाग द्वारा आयोजित किया गया । शिविर के दौरान मुख्य अतिथि बतौर गणेश यादव जनपद पंचायत अध्यक्ष आमला, भाजपा किसान नेता हरी यादव , सुखराम कुमरे सभापति जैवविविधता वन समिति के साथ सुखदेव यादव सरपंच, रामाधार यादव सरपंच,भगवंतसिंह रघुवंशी जिला मंत्री भाजपा अतिथि के रूप में शामिल हुये । प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य अतिथियों द्वारा प्रथम/द्वितीय/तृतीय पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम में “मैं भी बाघ” थीम गान का गायन किया गया एवं प्रकृति और वन्य जीव संरक्षण की प्रतिज्ञा के साथ अनुभूति कार्यक्रम सफलतापूर्वक समापन हुआ ।

वनविभाग नहीं कर रहा मजदूरी का भुगतान,रेंजर और एसडीएफओ को सुनाई अपनी पीड़ा

वनविभाग ने मजदूरों से खुदाए चोपनी बिट में गड्डे भुगतान के लिए लगा रहे विभाग के चक्कर Forest department is not paying wages भैंसदेही ! दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल भैंसदेही के मजारवनी एवम चोपनी क्षेत्र में मजदूरी करने वाले मजदूर अपनी समस्या लेकर मुख्यालय के वन विभाग पहुंचे जहा उन्होंने रेंजर अमित चौहान को मजदूरी का भुगतान नहीं होने से आ रही समस्या से अवगत कराया। उपस्थित मजदूरों ने बताया की उनके द्वारा चोपनी बिट में बिट अधिकारी के कहने पर गड्ढा खुदाई का काम किया गया। परंतु उन्हें लगभग 2 से 3 माह हो चुके है मजदूरी का भुगतान नहीं मिल पाया है। एसडीएफओ कार्यालय से महीनो आगे नहीं बढ़ती फाइलें….?मांजरवानी चौपनी ग्राम के मजदूर विभाग पहुंचकर एसडीएफओ पांडे जी से भी अपनी मजदूरी की समस्या को लेकर मिले मजदूरों ने बताया की काफी इंतजार के बाद साहब अपने सरकारी क्वाटर से बाहर आए उसके बाद हम मजदूरों ने उनको भी अपनी मजदूरी की समस्याएं से अवगत कराया। उन्होंने हमे जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया। तो वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी में सामने आया की दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल का कोई भी भुगतान संबंधित या अन्य कार्य एसडीएफओ कार्यालय से होकर ही जिले को जाता है। जानकारी में यह भी सामने आया की एसडीएफओ कार्यालय में महीनो फाइलों को रोककर रखा जाता है। आगे उच्च विभाग में नहीं भेजी जाती। अब क्यों नही भेजी जाती , कितनी पेंडेंसी एसडीएफओ कार्यालय में पढ़ी है। क्या इन मजदूरों की फाइल भी एसडीएफओ कार्यालय में पेंडिंग है । प्राप्त जानकारी में कितनी सत्यता है जिसकी पुष्टि के लिए जब दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल भैंसदेही परिक्षेत्र अधिकारी एसडीएफओ देवानंद पांडे को जब कॉल पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाही तो महोदयजी ने फोन रिसीव नहीं किया। और न ही खबर का समय होते तक कॉल बैक कर संपर्क किया। बता दे की पूर्व वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री बसोड़ द्वारा हमेशा जब भी कार्य में व्यस्त होने के चलते यदि कोई कॉल रिसीव नहीं किया जाता था तो वह जिम्मेदारी से कॉल बैक कर संपर्क साधा करते थे। जब तक वह मुख्यालय पर रहे हमेशा उन्होंने एक जिम्मेदार अधिकारी होने का परिचय दिया है। इनका कहना हैचोपानी बिट में पौधा रोपण के लिए गद्दे खोदने और तार फिनिशिंग का कार्य किया है, दो माह से भुगतान नहीं मिला बड़ी समस्याएं आ रही है। 50 से अधिक मजदूरों ने मजदूरी का काम किया है। इसलिए हम सभी मजदूर भैंसदेही आए है,साहब से मिलने। गुड्डू कास्देकरमजदूर साहब के कहने पर चोपनी में गड्डे खोदने के काम पर गए थे, दो महीने हो गए पैसे नही मिले। साहब से उसके बारे में ही पूछने आए है। घर चलाने में बहुत परेशानी हो रही है। रामरती बाईमजदूर मांजरवानी मजारवानी,चोपनी ग्राम के मजदूर अपनी मजदूरी की समस्या लेकर आए थे। हमारे द्वारा समय पर उनके भुगतान के लिए 28 दिसंबर 2023 को ही समस्त बिल बाउचर बना कर उच्च अधिकारियों को भेज दिए थे।अब भुगतान क्यों नही हुआ उसकी जानकारी फिलाल मुझे नही है।मैं अपने उच्च अधिकारियों को इन ग्रामीण मजदूरों की समस्या से अवगत कराकर मजदूरों को जल्द भुगतान हो उसके लिए प्रयास करूंगा। अमित चौहानरेंजर दक्षिण (सामान्य) उप वन मंडल भैंसदेही

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व , गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला

Bandhavgarh Tiger Reserve skeleton of tiger cub found in deep ditch बाघ शावक का कंकाल मिला, संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से प्रबंधन चिंता में उमरिया ! बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बुधवार को गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल मिला है। उसकी संदिग्ध मौत को लेकर प्रबंधन में चिंता है। बताया जा रहा है कि करीब 25 दिन पहले ही शावक की मौत हो गई थी। उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फिर बाघ का कंकाल मिला है। संदिग्ध परिस्थितियों में बाघ शावक की मौत से प्रबंधन चिंता में है। माना जा रहा है कि 25 दिन पहले शावक की मौत हुई है।उमरिया जिले के बांधवगढ़ में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है तो वहीं तेजी से कम भी होती हुई नजर आ रही है। प्रबंधन चाहे कितने भी दावे क्यों न कर ले, लेकिन वह ट्रैप कर पाने में नाकाम साबित होता नजर आ रहा है। पैदा होने से लेकर बड़े होने तक चारों तरफ कैमरे को लगाकर बाघ के बच्चों की निगरानी की जाती है, लेकिन फिर भी बाघ के बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जहां उसका अब कंकाल मिला है। बता दें कि बुधवार के दिन कैमरा ट्रैप को लगाते समय गहरी खाई में बाघ शावक का कंकाल देखा गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र की पतौर परिक्षेत्र अंतर्गत चिल्हारी बीच के आर 421 के कुशवाहा नाला के समीप यह कंकाल मिला है। प्रबंधन की मानें तो यह कंकाल देखकर उन्हें लग रहा है कि यह लगभग 25 दिन पुराना कंकाल है। जहां किसी वजह से उसकी मौत हो गई है। हालांकि प्रबंधन अब पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रहा है।

गांधी सागर अभयारण्य में विदेश से आएंगे चीते.

In Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary, cheetahs will be brought from abroad. गांधी सागर अभयारण्य में विदेश से आएंगे चीते, 28 किमी क्षेत्र में फेंसिंग का काम पूरा करने में जुटा वन विभाग – फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जल्द निर्णय करेगी केंद्र सरकार  उदित नारायण भोपाल। गांधी सागर अभयारण्य में 64 किमी को बाड़ा तैयार कर लिया गया है। यहां पर करीब 28 किमी की फेंसिंग का काम करीब करीब पूरा हो गया है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 17 से 18 करोड़ के आसपास है। अगले माह यानी फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद चीतों को लाने का निर्णय होगा। केंद्र सरकार की किसी अफ्रीकी देश से चीते लाने को लेकर चर्चा चल रही है। गांधी सागर अभयारण्य का क्षेत्र छोटा है। इसलिए यहां पर 5 से 6 चीतों को ही लाकर रखा जाएगा।  बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सबसे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीते श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए थे। इसके बाद 18 फरवरी को 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो नेशनल पार्क में लाकर छोड़े गए। कूनो के जंगल में कुल 20 चीते लाए गए। इनमें से छह चीतों की मौत हो गई है। कूनो में अभी 14 बड़े चीते हैं और एक शावक है। वहीं, तीन नए शावकों ने अभी जन्म लिया है। कूनो नेशनल पार्क में एक-एक कर चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जा रहा है। अब तक दो को ही खुले में छोड़ा गया है। कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी की भी शुरूआत कर दी गई। कूनो से शिफ्ट नहीं होंगे चीते – प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) असीम श्रीवास्तव ने बताया कि गांधी सागर अभयारण्य में कूना से चीते शिफ्ट नहीं किए जाएंगे। वहां विदेश से नए चीते लाए जाएंगे। इसका निर्णय केंद्र सरकार करेगी। अभयारण्य में तैयारी अंतिम दौर में है।

जांच एजेंसियां की सुस्त रफ्तार के चलते दागी अफसरों की पदोन्नत

Promotion of tainted officers due to slow pace of investigation agencies भोपाल ! भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस की भाजपा सरकार की नीति को प्रदेश की जांच एजेंसियां लोकायुक्त एवं ईओडब्ल्यू गंभीरता से नहीं ले रही है। जांच एजेंसियां की सुस्त रफ्तार के चलते दागी अफसरों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है, वहीं वे प्रमोशन और प्राइम पोस्टिंग से उपकृत किए जा रहें हैं। हाल ही में वन विभाग में जिस आईएफएस के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में दो प्रकरण दर्ज है, उसे डीएफओ से वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि उनकी सुनवाई के दौरान लोकायुक्त विभाग द्वारा कोई कारवाई नहीं किए जाने पर अफसरों को फटकार लगा चुका है। इस मामले में अब नए वन मंत्री नागर सिंह चौहान ने प्रकरण की फाइल तलब की है।पिछले दिनों वन विभाग में ने 2010 बैच के आईएफएस अफसरों को डीएफओ से सीएफ के पद पर प्रमोट किया गया। प्रमोशन पाने वालों में शहडोल उत्तर में कार्यरत आईएफएस गौरव चौधरी भी है. अधिकृत जानकारी के अनुसार चौधरी के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में आर-क्रमांक 216/16 और आर -क्रमांक 218/18 प्रकरण की सुनवाई चल रही है। लंबित प्रकरण होते हुए भी वन संरक्षक के पद पदोन्नत कर दिया गया। पदोन्नति करने के पहले विभागीय विजिलेंस शाखा ने गौरव चौधरी के खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी एवं कदाचरण से समन्धित पूरी कुंडली बनाकर विभागीय पदोन्नति कमेटी के भेजा। बावजूद इसके, सीनियर अफसरों ने कमेटी को गुमराह करते हुए गौरव चौधरी को पदोन्नत करने की सिफारिश कर दी। इस आधार पर दाग़दार होने के बाद उन्हें प्रमोट कर दिया गया।लघु वनोपज में भी लंबित हैं मामलासीधी में पदस्थापना के दौरान लोकायुक्त की जांच झेल रहे उत्तर शहडोल के डीएफओ गौरव चौधरी एक बार फिर विवादों से घिर गए हैं। डीएफओ चौधरी ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे फर्म को भुगतान कर दिया गया। प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूह का गठन किया गया था। इस योजना के अंतर्गत कोई भी भुगतान इसी समूह के माध्यम से किया जाना था किंतु गौरव चौधरी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बाबू सतीश त्रिपाठी और रेंजर के जरिए मैकल ट्रेडिशनल ऑर्गेनिक फार्मर शहडोल और केके मेमोरियल समिति शाहपुरा को सीधे भुगतान कर दिया गया। इसी प्रकार डीएफओ द्वारा तेंदूपत्ता लाभांश राशि से कराए गए वृक्षारोपण का भुगतान भी समितियों के माध्यम से न कराकर रेंजर के माध्यम से कराया गया।

अभय कुमार पाटिल वन विभाग के नए मुखिया

Abhay Kumar Patil new head of forest department एक महीने के लिए ही होगा कार्यकालउदित नारायणभोपाल. राज्य शासन ने वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल को वन बल प्रमुख के पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी कर दिया है। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव होंगे।राज्य शासन ने इस आशय का आदेश शुक्रवार को जारी किया है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह 31 दिसम्बर को अवकाश रहने के कारण शुक्रवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों को मुख्यालय के अफसरों ने दोनों वरिष्ठ अफसरों को भावभीनी विधाई दी। राज्य शासन ने अलग-अलग आदेश जारी कर सिंह परियोजना एवं चीता प्रोजेक्ट के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा को एपीसीसीएफ के पद पर पदोन्नति करते हुए वहीं पदस्थ किया है। इसी प्रकार दो वन संरक्षक को मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति किया है। इनमें जे देव प्रसाद वर्किंग प्लान पेंच नेशनल पार्क और राज्य शासन में पदस्थ विशेष कर्तव्य अधिकारी अशोक कुमार के नाम शामिल है।दागी डीएफओ भी पदोन्नतिराज्य शासन ने शहडोल उत्तर में कार्यरत डीएफओ गौरव चौधरी के खिलाफ लोकायुक्त प्रकरण लंबित होते हुए भी वन संरक्षक के पद पदोन्नत किया। सूत्रों ने बताया कि गौरव चौधरी के प्रकरण को लेकर विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष वन विभाग के सीनियर अधिकारियों ने लोकायुक्त में जांच लंबित रहने संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं की थी। जबकि 2009 बैच कि आईएफएस और उज्जैन डीएफओ किरन बिसेन के मामले कई वर्ष पुराने जांच लंबित रहने की वजह से प्रमोशन पर ब्रेक लग गया है। वन संरक्षक के पद पर प्रमोट होने वालों में पन्ना नेशनल पार्क के उपसंचालक रिपुदमन सिंह भदौरिया, राज्य वन अनुसन्धान संस्थान जबलपुर में पदस्थ रविन्द्रमणि त्रिपाठी, और सिवनी उत्तर डीएफओ में पदस्थ बासु कनोजिया का नाम शामिल है।चार डीएफओ को मिला प्रवर श्रेणी वेतनमानराज्य शासन ने 2011 बैच के आए थे अधिकारियों को प्रमाण श्रेणी वेतनमान देने का आदेश जारी किया है। इनमें मीना कुमारी मिश्रा, अनुराग कुमार और सुश्री संध्या शामिल किया है। जबकि डीएफओ बुरहानपुर विजय सिंह को सशर्त प्रवर श्रेणी वेतनमान देने का आदेश जारी किया है. दरअसल विजय सिंह को 10 जून 20 को जारी विभागीय आदेश में कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड में इस शर्त के साथ नियुक्त किया गया था कि वे मिड कैरियर फेज-।।। कार्यक्रम में अनिवार्यतः भाग लेंगे। किंतु उनके द्वारा आज दिनांक तक मिड कैरियर फेज-।।। कार्यक्रम में भाग नहीं लिया गया है। अतः प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही उनका वेतन निर्धारण करने की शर्त पर प्रवर श्रेणी वेतनमान स्वीकृत किया जाता है।

वन विहार उपचार हेतु लाये गये तेंदुआ शावक की मृत्यु.

Death of leopard cub brought for treatment in forest parkभोपाल। सामान्य वनमंडल अलीराजपुर की परिक्षेत्र जोबट के ग्राम छोटा उण्डवा से रेस्क्यू कर उपचार के लिए लाए गए तेंदुआ शावक की 28 एवं 29 दिसम्बर 2023 की दरम्यानी रात में उक्त तेंदुआ शावक की मृत्यु हो गई। प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण निमोनिया परिलक्षित हुआ है। मृत तेंदुआ शावक का सेम्पल एकत्रित कर परीक्षण हेतु स्कूल आफ वाईल्डलाईफ फॉरेंसिक हैल्थ जबलपुर भेजे गये है। पोस्टमार्टम उपरांत मृत नर तेंदुआ शावक का नियमानुसार वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन विहार के अधिकारियों तथा उपस्थित कर्मचारियों के समक्ष दाह संस्कार किया गया।वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता वन विहार एवं वन्यप्राणी चिकित्सक, वाईल्ड लाईफ एस.ओ.एस. डॉ. रजत कुलकर्णी, द्वारा संयुक्त रूप से पोस्टमार्टम किया गया। उल्लेखनीय है कि तेंदुआ शावक मां से बिछड़ गया था। मां से अलग होने के बाद रेस्क्यू कर अलीराजपुर डिपो परिसर में रखा गया। शावक की अत्यंत कमजोर स्थिति को देखते हुये वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार इसे को दिनांक 23.08.2023 को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में उपचार एवं रखरखाव हेतु लाया गया था। तत्समय उक्त तेंदुआ शावक को क्वेरेंटाईन बाड़े में रखा जाकर उसका उपचार एवं रखरखाव किया गया। क्वेंरेटाईन अवधि पूर्ण होने के पश्चात उक्त शावक को स्वस्थ्य हालत में तेंदुआ हाउसिंग में स्थानांतरित किया गया था।

अग्रवाल और सुबुद्धि को नए साल में प्रमोट करने विभाग ने मांगे पी.पी.सी.एफ के चार नए पद.

The department to promote Agarwal and Subuddhi has sought four new positions for the PPCF in the New Year. उदित नारायणभोपाल। वन विभाग ने सेवानिवृत होने से पहले दो वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों को प्रमोशन देने के लिए राज्य शासन से पीसीसीएफ के चार पद मांगे है। इस आशय का प्रस्ताव मंत्रालय वल्लभ भवन में भेज दिया गया है। राज्य शासन 6 महीने के लिए अस्थाई तौर पर पीसीसीएफ के चार पद स्वीकृत कर सकता है। पीसीसीएफ के चार पद की मंजूरी मिलने के बाद 1991 बैच के दो अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक (वन्य प्राणी) और एपीसीसीएफ (वित्त एवं बजट) पंकज अग्रवाल के अलावा 1992 बैच के एपीसीसीएफ (विकास) यूके सुबुद्धि तथा वन विकास निगम में पदस्थ एपीसीसीएफ सुदीप सिंह पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगे। विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को मंजूरी के लिए भेज दी है। 1991 बैच के एपीसीसीएफ पंकज अग्रवाल मार्च 24 में और 1992 बैच के यूके सुबुद्धि नवम्बर 24 में रिटायर हो जाएंगे। यहां यह भी उल्लेखनीय है केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के अनुसार राज्य में पीसीसीएफ के निर्धारित मापदंड (2%) से अधिक पद पर कार्य कर रहें है। इसके पहले भी वन विभाग ने रिटायरमेंट के पहले के रमन को पीसीसीएफ पद पर प्रमोशन देने की मंशा से राज्य शासन ने पद मांगे थे, जिसे तत्कालीन मुख्य सचिव इक़बाल सिंह बैस ने ख़ारिज कर दिया था।आईएफएस के लिए डीपीसी टलीराज्य सरकार के गठन की प्रक्रिया के चलते 13 राज्य वन सेवा से आईएफएस अवार्ड के लिए 22 दिसंबर को प्रस्तावित पदोन्नति कमेटी की बैठक टल गई है। इस बैठक में 2009 बैच के राज्य वन सेवा के अधिकारी रामकुमार अवधिया को आईएफएस पद पर प्रमोट करने के लिए हरी झंडी मिलने की संभावना थी। कमेटी 2011 बैच के आशीष बांसोड़, विद्याभूषण सिंह, गौरव कुमार मिश्रा, तरुणा वर्मा, हेमंत यादव, सुरेश कोड़ापे, प्रीति अहिरवार, लोकेश निरापुरे, राजाराम परमार, करण सिंह रंधा और माधव सिंह मौर्य को आईएफएस अवार्ड के लिए हरी झंडी दे सकती है। गड़बड़ियों में उलझे रहने की वजह से 2011 बैच की डॉ कल्पना तिवारी और राजबेंद्र मिश्रा के नाम विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि 13 अधिकारियों को आईएफएस अवार्ड देने के लिए 2011 बैच से 2013 बैच के करीब राज्य वन सेवा के 39 अफसरों के नाम पर मंथन होना था।

वन विभाग ने वनों की सुरक्षा के लिए मांगी एस.ए.एफ की तीन अतिरिक्त कंपनियां

The Forest Department requested three additional companies of the Special Armed Forces (S.A.F.) for the protection of forests. उदित नारायण भोपाल। राज्य के वन विभाग ने मंत्रालय में दिये एक उच्च स्तरीय प्रेजेन्टेशन में एसएएफ की तीन अतिरित कंपनियां मांगी हैं। वर्तमान में एसएएफ की तीन कंपनियां क्रमशः आठवीं वाहिनी छिन्दवाड़ा, 15 वीं वाहिनी इंदौर एवं 26 वीं वाहिनी गुना के 221 सशस्त्र अधिकारी एवं कर्मचारी वन क्षेत्र में पदस्थ हैं जिन्हें 14 संवेदनशील वनमंडलों में संलग्न किया गया है। चूंकि वनकर्मियों को बंदूक चलाने का अधिकार नहीं दिया गया है, इसलिये वन विभाग ने एसएएफ की तीन अतिरिक्त कंपनियों को देने की और मांग की है। इसी प्रकार, प्रेजेन्टेशन में वन अधिकारियों को पुलिस की तरह वाहनों में बीकन लाईन लाइट लगाने, वन्य प्राणी के हमले में जनहानि होने पर 12 लाख रुपये हर्जाना देने, वन कर्मचारियों को पुलिस की तरह 13 माह का वेतन देने, पौष्टिक आहार भत्ता देने एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थी पर पुलिस की तरह नक्सल भत्ता देने की भी मांग की है जिससे वन कर्मियों का मनोबल बढ़ सके।

दागी रेंजर को बचाने सीसीएफ और डीएफओ आमने- सामने.

CCF and DFO face off to save the Ranger. उदित नारायणभोपाल । एक दागी रेंजर को लेकर ग्वालियर सर्कल के सीसीएफ तोमर सिंह सूलिया और श्योपुर डीएफओ चंदू सिंह चौहान आमने-सामने आ गए है। डीएफओ दागी रेंजर के खिलाफ उनके नियम विरुद्ध कृत्य पर कार्यवाई चाहते है। जबकि सीसीएफ सूलिया की इच्छा है कि वह दाग़ रहित रिटायर हो जाए। रेंजर की सेवानिवृत इस माह है।वन विभाग में किसी भी अधिकारी हो या फिर कर्मचारी उनके विरुद्ध जांच कछुआ चाल से की जाती है। इसके कारण कई बार बिना किसी कार्यवाई से वह रिटायर भी जाते है। वर्तमान में सबलगढ़ के गेम रेंज में पदस्थ केएम त्रिपाठी से जुड़ा मामला है। त्रिपाठी की जब 2017-18 में विजयपुर में पोस्टिंग थी तब केम्पा फंड से विभिन्न कार्य कराए गए थे। इन कार्यों के सम्पादन में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए बीएल ओझा और बनवारी शर्मा ने विभाग के विजिलेंस को शिकायत की थी। 2019 में की गई शिकायत का आज तक निराकरण नहीं हुआ। हालांकि विजिलेंस के निर्देश पर एसडीओ जोगेन्दर पारदे की अध्यक्षता के कमेटी ने जांच में कई बिन्दुओ पर रेंजर त्रिपाठी को क्लीनचिट दे दी किन्तु पूर्व में जॉच दिलीप आदिवासी एवं पवन आदिवासी द्वारा की गर्य शिकायत पर आनन्द सिंह चौहान उप वनमण्डलाधिकारी विजयपुर द्वारा की गई जांच में पत्र रेंजर केएम त्रिपाठी तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी विजयपुर पश्चिम एवं रामवरन शर्मा उप वनक्षेत्रपाल को अग्नि सुरक्षा के 47,950 रुपये की राशि के फर्जी प्रमाणक तैयार करने के मामले में दोषी ठहराने को कमेटी ने भी दोषी माना है।इनका कहना“मैंने डीएफओ से आरोप पत्र पर अभिमत मांगा है। उनके अभिमत के बाद निर्णय लिया जाएगा।”टीएस सूलिया, सीसीएफ ग्वालियर“मैंने आरोप पत्र के साथ अपना अभिमत भेज दिया है। अगर दोबारा अभिमत मांगा है तो मैं दिखवाता हूं।”सीएस चौहान, डीएफओ श्योपुर

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