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लाखों की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगा रहता है ताला, लोगों को नहीं मिल रहा इलाज.

A lock is placed on the Sub health Center built at a cost of millions, depriving people of access to medical treatment. मलखान सिंह परमार मुरैना । ग्राम पंचायत आरोली मे बीच का पुरा गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र ताे खोले गए हैं। लेकिन इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों को इलाज के लिए लोगों को निजी चिकित्सालय क्लीनिकों पर या जिला स्तर पर अस्पताल में जाना पड़ता है। उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कहने को तो यहां 24 घंटे एएनएम और इलाज की सुविधा मिलना है, लेकिन ताला नहीं खुलने से ग्रामीणों को विकासखंड के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। लाखों की लागत से बने बीच के पुरा पर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र बना जर्जर केंद्र जानकारी के अनुसार देखने में तो उप स्वास्थ्य केंद्र को बने अभी कुछ अधिक समय नहीं हुआ लेकिन उसकी दीवारें, प्लास्टर सभी खंडर हो गए है केंद्र को बनाने में घटिया सामग्री का उपयोग किए जाने से कम समय में ही उप स्वास्थ्य केंद्र खंडर हो गया है। ग्राम पंचायत अरोली में ग्राम बीच के पूरा को शासकीय उप स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई दिनों से ताला लटका हुआ हैं, वहीं जिले में बैठे जिम्मेदार जांच सहित अन्य के नाम पर वाहन द्वारा डीजल का भुगतान लेते है, लेकिन समझ से परे यह है कि आखिर इनके द्वारा किस चीज की जांच की जाती है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराना महज दिखावा बनकर रह गया है, क्योंकि कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर पिछले कई दिनों से उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटक रहा है। मजे की बात तो यह है कि यहां पदस्थ जिम्मेदार से अगर कोई पूछ ले कि आप कहां हैं, तो इनके द्वारा मीटिंग के साथ भ्रमण बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मुहैया करवाने के उद्देश्य से सरकार ने गांव में उप-स्वास्थ्य केन्द्र खोला था, लेकिन यह ग्रामीणों का दुर्भाग्य ही रहा कि लाखों रुपये की लागत से बने उप-स्वास्थ्य केन्द्र में आये दिन ताला लटका रहता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधिकारी घोड़ाडोंगरी की हिटलर शाही

Community Health Center Officer Hitler Shahi of Ghoradongri स्वास्थ्य केंद्र सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मी को तीन-तीन माह से वेतनमान नहीं डॉ जाकिर शेख घोड़ाडोंगरी ! किरण चाहे सूर्य की हो, या आशा की जीवन के सभी अंधकार मिटा देती है, इसी तारम्य मे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ा डोंगरी के सफाई कर्मी एवं सुरक्षा कर्मी जी रहे हैं, के बीते 4 माह से वेतनमान नहीं दिया गया, सफाई कर्मी एवं सुरक्षा कर्मी द्वारा वेतन की मांग करने पर नौकरी से निकलने की धमकी मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित प्रथम नेशनल सिक्योरिटी के बैतूल में बैठे ग्रुर्ग द्वारा दी जाती है… जो की सुरक्षा कर्मी एवं सफाई कर्मी का शोषण जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी बैतूल के साथ ही मेडिकल अधीक्षक घोड़ाडोंगरी द्वारा किया जा रहा है….चुकी सफाई कर्मी एवं सुरक्षा कार्मि को कलेक्टर दर के अनुसार 10500 से लेकर 11000 के दरमियान होता है. जिन्हें 6000 दिया जाता है, किंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी के अधीक्षक के मिली भगत के चलते समय पर नहीं दिया जा रहा है, वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में समय पर नहीं आते अधिकारी एवं कर्मचारी चाहे महिला ओपीडी कक्ष हो या दवाई वितरण कक्ष अन्य कक्षओं के क्या कहने, “अंधेर नगरी चौपट राजा, टके शेर भाजी, टके खाजा” के तर्ज पर चल रहा है.. चुके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर एवं कर्मचारियों की सुबह 11:00 बजे होती है, चुके देखा गया सुबह के 11:00 बजे तक सारी कुर्सियां खाली नजर आई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी के उपस्थित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से पूछने पर पता चला कि बस अभी आता ही होंगे, जोकी प्रति दिवस दिनचर्या के अनुसार 10:30-11के पश्चात ही अधिकारियों का आगमन होता है, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में…आने वाले रोगियों का बेहाल है, जहां कोई किसी की नहीं सुनता इस तरह की शिकायत क्षेत्रीय आने वाले रोगी एवं उनके परिजनों ने की है… सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में न ही कोई कर्मचारी सुनता है या न डॉ, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी अपने समय पर उपस्थित होकर कार्य करते हुए दिखाई देते हैं.. चुके रामभरोस से चल रहा है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी… सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी व सफाई कर्मी का शोषण को रोकने एवं मानदेय में वृद्धि के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई, के बीते कई वर्षों से प्रथम नेशनल सिक्योरिटी इंदौर के द्वारा ठेका पद्धति के जरिए सुरक्षा एवं सफाई कर्मी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी में नियुक्त किया गया था… जिसे वेतनमान कलेक्टर दर से एवं इपीएफ की शर्तों पर नियुक्त कर अपने ही अंदाज में करवाते हैं घोड़ाडोंगरी के अधिकारी कार्य, नहीं देते वेतनमान ठेकेदार की चल रही मनमानी, जिले में बैठे हैं श्री शैलेंद्र सिंह उपाध्याय जो कि सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मी को नौकरी से निकलने की धमकी देते हुए चार-चार माह तक वेतन नहीं दिया जाता, वेतन चाहिए तो नौकरी से हाथ धोना होगा, जिस कारण सुरक्षा कर्मी एवं सफाई कर्मी के परिवार पर भूखे मरने की नौबत नेशनल सिक्योरिटी इंदौर मुख्य चिकित्सा अधिकारी बैतूल के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ संजू शर्मा द्वारा किया जा रहा है… जबकि समय-समय पर सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मी द्वारा अपनी पीड़ा को संविदा जिला अकाउंट प्रबंधक श्री पुष्पेंद्र सिंह चौरसिया को अवगत कराने पर, नौकरी से निकलने की धमकी चौरसिया द्वारा दी जाती है…. समस्त आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी सफाई कर्मी स्वास्थ्य विभाग प्रथम नेशनल सिक्योरिटी इंदौर द्वारा कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बैतूल के अंतर्गत सामुदायिक /प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए नियुक्त किए गए थे, वर्तमान समय में सुरक्षाकर्मी एवं सफाई कर्मी का वेतनमान 10500 से 11000 के दरमियान है, कलेक्टर दर एवं इपीएफ में आदर्श अनुसार जो कि समय पर नहीं दिया जाता, एवं खातों मे ₹6000 के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जो की सितंबर माह से आज दिनांक तक नहीं दिया गया, और न ही अभी तक खाते में इपीएफ डाला गया है. यह तो वर्षों से चला आ रहा है, कि तीन-तीन, 4-4 महीने वेतन नहीं दिया जाना, वेतन की बात करने पर कंपनी के पदाधिकारी द्वारा धमकी दी जाती है, बोला जाता है, वेतन की जल्दी है तो काम छोड़ दो, हम अभि वेतन नहीं दे पाएंगे, सुरक्षाकर्मी एवं सफाई कर्मी द्वारा जिला कलेक्टर से भी पहले शिकायत की गई है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों एवं जिले में संविदा जिला अकाउंट प्रबंधक श्री पुष्पेंद्र सिंह चौरसिया को पता चलने पर काम से निकाल देने की धमकी इन छोटे कर्मचारियों को बार-बार दी जाती है, साथ ही कई कई महीने वेतन नहीं मिलने से सुरक्षा कर्मी एवं सफाई कर्मी के घरों की स्थिति बहुत खराब एवं दयनीय हो गई.. जीस कारण सफाई कर्मी एवं सुरक्षाकर्मियों का परिवार तनाव पूर्वक जिंदगी जी रहा है, समस्याओं से जूझ रहे है, कई वर्ष से स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करने के पश्चात भी न तो कार्य के अनुरूप सम्मानजनक वेतन मिला रहा है और न ही इस बार दीपावली पर बोनस दिया गया है.. जबकि सुरक्षा एवं सफाई कर्मियों को वेतन घंटे के हिसाब से जांब दर का वेतन भुगतान किया जाता है, जो समय पर नहीं किया जाता.. उक्त कर्मियों को परिवार पालने लायक वेतन भी नहीं दिया जाता है, कल को इन कर्मियों के घर में किसी तरह की कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए प्रथम नेशनल सिक्योरिटी इंदौर के प्रताप उपाध्याय एवं जिले में संविदा डीएम श्री पुष्पेंद्र सिंह चौरसिया जिम्मेदार होंगे… क्योंकि श्री चौरसिया द्वारा कंपनी को सहयोग किया जाता रहा है.. वही समय पर नहीं पहुंचाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ा डोंगरी के डॉ एवं अधिकारियों का आए दिन का एक हिस्सा है, जोकि सुधार नहीं जा सकता, क्योंकि बरसों से बैठे हैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक डॉक्टर संजीव शर्मा जिनकी छत्रछाया में फल- फुल रहे हैं डॉक्टर एवं अधिकारी जिला प्रशासन के क्या कहने…

कोरोना वायरस की दस्‍तक, बागेश्वर धाम से लौटा व्यक्ति संक्रमित.

Corona virus knocks, person returned from Bageshwar Dham infected. ग्वालियर में एक कोरोना संक्रमित मरीज मिला है, जिसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। ग्‍वालियर में कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि ,गजराराजा मेडिकल कालेज में लिए थे सैंपल ,चार कोविड टेस्ट में एक की रिपोर्ट पाजिटिव ग्वालियर। ग्वालियर में कोरोना पाजिटिव मरीज मिला है। इसके साथ ही जिले में एक्टिव मरीज की संख्या एक हो गई है। कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। कोरोना के चार सैंपल गजराराजा मेडिकल कालेज में जांच के लिए पहुंचे थे। इनमें से एक 58 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित पाए गए। यह 15 दिन पहले बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। फिलहाल 58 वर्षीय मरीज को होम आइसोलेशन में रखा गया है। इनके संपर्क में आने वाले परिवार के सदस्यों के सैंपल लेने स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमएचओ के निर्देश पर उनके घर पहुंची।फिलहाल हालत स्थिरकोरोना संक्रमित ने बताया कि वह बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। वहां से लौटने पर सर्दी-जुखाम हुआ, तो एक हजार बिस्तर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। यहां चिकित्सक ने कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर जांच के लिए बोला। जांच गजराराजा मेडिकल कालेज में कराई तो रिपोर्ट पाजिटिव निकली। घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा हूं। हालत स्थिर है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.राजौरिया ने बताया कि मरीज की जांच के लिए रोजाना स्वास्थ्य टीम को भेजा जाएगा। दवा उपलब्ध करा दी गई हैं। संक्रमित के घर उनकी पत्नी व एक बच्चा भी है। इसलिए चिकित्सकों ने सलाह दी है कि अगर किसी को सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो सूचना दें।सोमवार को लिए जाएंगे जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपलमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.आरके राजौरिया ने बताया कि मरीज की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल सोमवार को लिए जाएंगे। इस जांच से कोरोना के वेरिएंट का पता लगाया जाएगा। कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद हमें उस मरीज में कोरोना का कौन सा वेरिएंट है, इसकी जांच करनी होती है। जेएएच के पुराने आइसीयू में 30 बेड आरक्षितकोरोना को लेकर जेएएच प्रबंधन अलर्ट है। यहां पुराने आइसीयू भवन में तीस बेड आरक्षित किए गए हैं। यहां दस वेंटिलेटर, मल्टीपैरा मीटर, दवा, पीपीइ किट के साथ अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। जीआरएमसी के डीन डा.अक्षय निगम कोविड वार्ड निरीक्षण कर चिकित्सक और स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दे चुके हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में दस पलंग का वार्ड आरक्षित किया गया है। सैंपल जांच की सुविधा शुरू की गई है।

कोरोना के JN.1 वेरिएंट ने भारत में मचाया कोहराम, 24 घंटे में 5 लोगों की मौत, 529 नए मामले

The JN.1 variant of the coronavirus has caused havoc in India, with 5 deaths and 529 new cases reported in the last 24 hours. नई दिल्ली ! भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर कोविड के 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। दरअसल, JN.] वेरिएंट दिल्ली से लेकर भारत के 9 राज्यों में फैला हुआ है। वहीं महाराष्ट्र में तीन महीने में पहली बार कोविड-19 से मौत की खबर सामने आई है। वहीं 4,093 मरीज इलाज करा रहे है। रिपोर्ट के अनुसार JN.1 वेरिएंट गुजरात, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में पाया गया है। एक्सपर्ट के अनुसार, JN.1 के लक्षण हल्के हैं। इसलिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 वेरिएंट में म्यूटेशन होता है। 24 घंटे में सामने आए 529 नए मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में 24 घंटों में कोविड-19 के 529 मामले और 5 मौतें दर्ज की गईं हैं। वहीं कोविड का JN.] वेरिएंट का पहला केस 8 दिसंबर को केरल में पाया गया था। इसके बाद यह 9 राज्यों में फैल गया। इसके साथ ही नई दिल्ली में JN.1 वेरिएंट का पहला मामला मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत में बुधवार सुबह 8 बजे तक 24 घंटे में 529 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक कोविड के कारण 5 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं बुधवार को 87 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब तक JN.1 के कुल 110 मामलों की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में JN.1 के सबसे अधिक 36 मामले हैं। इसके बाद कर्नाटक में 34, गोवा में 14, महाराष्ट्र में 9, केरल में 6, राजस्थान में 4, तमिलनाडु में 4, तेलंगाना में 2 और दिल्ली में एक मामले सामने आए है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मामले बढ़ रहे हैं लेकिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम पड़ रही है क्योंकि अधिकतर मामलों में हल्के लक्षण है।

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर, पर्चे में दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में लिखना होगा.

Doctors at Hamidia Hospital will need to write the names of medicines in capital letters on prescriptions. हमीदिया अस्पताल में फरमान, पर्ची की जांच भी होगी भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर परिचय में दावों के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं, जिन परचों में जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। हमीदिया अस्पताल भोपाल के अधीक्षक डा. आशीष गोहिया ने बताया कि हम मॉनिटरिंग भी करेंगे हमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मानिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था। घसीटा राइटिंग से होता है कन्फ्यूजनडॉक्टरों की रेटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मानीटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिखते हैं चिकित्सक :चिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानीटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है । अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं।ऐसे जारी होते रहे आदेश

फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन, 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए- Central Drugs Standard Control Organisation.

According to the Central Drugs Standard Control Organisation, the combination of Chlorpheniramine Maleate and Phenylephrine should not be administered to children under 4 years of age in a fixed-dose combination. Manish Trivedi, Sahara Samachaar. नई दिल्ली ! सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के इस हफ़्ते लिए गए फ़ैसले के अनुसार फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का इस्तेमाल करने पर दवा कंपनियों को दवा के लेबल पर लिखना होगा कि “एफडीसी का उपयोग 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए ! सरकार का यह फ़ैसला कुछ महीने पहले कई देशों में कफ़ सीरप पीने से 100 से अधिक बच्चों की मौत होने के बाद आया है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि बच्चों के लिए एक अस्वीकृत सर्दी-रोधी दवा फॉर्मूलेशन के प्रमोशन को लेकर चिंता जताई गई थी. अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एफडीसी का इस्तेमाल न करने की सिफारिश की गई. नियामक के आदेश के अनुसार, फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का उपयोग करने पर दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर चेतावनी के साथ लेबल लगाने की ज़रूरत होगी. फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन शामिल होते हैं. इसका उपयोग अक्सर सर्दी जुकाम के इलाज के लिए सिरप या गोलियों में किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पांच साल से छोटे बच्चों में खांसी और सर्दी के इलाज के लिए बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप या अन्य दवाई के उपयोग की सिफ़ारिश नहीं करता.

भारत में कोरोना वायरस के एक्टिव केस बढ़कर 3420 हुए.

The active cases of coronavirus in India have increased to 3,420. Corona virus spreading rapidly नई दिल्ली। भारत में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के ताजा मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमित मरीजों की सबसे अधिक संख्या केरल में दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 423 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 266 केरल से और 70 पड़ोसी राज्य कर्नाटक से हैं। इस बीच केरल में कोरोना संक्रमण के कारण दो लोगों की मौत की भी खबर है। देश में फिलहाल कुल संक्रमित 3420केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोविड-19 के कुल सक्रिय मामलों की संख्या 3,420 दर्ज की गई। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट के कारण बढ़ती चिंता बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन लोगों को एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी है। पूरी दुनिया में बढ़ रहे कोरोना केसभारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि फिलहाल ताजा वेरिएंट JN.1 के एनालिसिस के लिए डाटा उपलब्ध नहीं हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल कहा है कि यह वेरिएंट BA.2.86 वेरिएंट से अलग है। वैश्विक स्तर पर कोरोना के नए वेरिएंट जेएन.1 के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने JN.1 से स्वास्थ्य को ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं जताई गई है। 4 सप्ताह में 52 फीसदी की बढ़ोतरीWHO ने कहा कि बीते 4 हफ्तों के दौरान नए कोविड ​​​​मामलों की संख्या में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें 850,000 से अधिक नए मामले सामने आए हैं। WHO ने कहा है कि COVID-19 महामारी की शुरुआत के बाद से 17 दिसंबर तक वैश्विक स्तर पर 772 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और करीब 70 लाख लोगों की मौत हुई है।

जिला चिकित्सालय बजट के अभाव से गुजर रहा है जिसके कारण मरीजों को हो रही है समस्या.

The district hospital is facing challenges due to a shortage of budget, causing difficulties for patients. छतरपुर। जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई 5 लिफ्ट में से 4 खराब पड़ी हुई है। लिफ्ट खराब होने के कारण गंभीर मरीजों तथा उनके परिजनों को काफी समस्या हो रही है। मीडिया द्वारा पिछले दिनों इस समस्या को अस्पताल प्रबंधन सहित जिला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन अभी भी लिफ्ट का सुधार कार्य नहीं हो सका है। इस संबंध में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएल अहिरवार ने बताया कि बजट न होने के कारण लिफ्ट का सुधार कार्य नहीं हो पा रहा है। डॉ. अहिरवार के मुताबिक वे कई बार राज्य शासन को इस आशय का पत्र भेज चुके हैं। हालांकि पिछले दिनों कलेक्टर संदीप जी आर ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही किसी अन्य शासकीय मद से राशि उपलब्ध कराकर लिफ्ट का सुधार कार्य कराया जाएगा। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि अस्पताल में बजट की समस्या लंबे समय से है। दीपावली के त्यौहार पर अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल सका था।

झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए बड़ा एक्शन, समिति गठित.

Significant action against Jholachaap doctors, committee formed for disciplinary action. Special Correspondent, Sahara Samachaar, Chhatarpur.छतरपुर। राज्य शासन के निर्देशानुसार तथा कलेक्टर छतरपुर के अनुमोदन से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों के विरूद्ध कार्यवाही के लिए समिति का गठन किया गया है। समिति में संबंधित अनुभाग के एसडीएम, एसडीओपी तथा संबंधित खण्ड चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। समिति के सदस्य सामंजस्य स्थापित करते हुये शासन के निर्देशानुसार फर्जी चिकित्सक, पैथॉलोजी, झोलाछाप, डॉक्टर म.प्र. में चिकित्सा व्यवसाय कर रहे अन्य राज्य में पंजीकृत फर्जी चिकित्सकों के विरूद्ध कार्यवाही करेंगे।

फिर बढ़ा कोरोना का खतरा, डायट में शामिल करें ये इम्यूनिटी बूस्टर जड़ी बूटियां.

The threat of COVID-19 has increased again; include these immunity-boosting herbs in your diet. ( L.K varma ) अदरक की तासीर गर्म होती है। इस मसालेदार जड़ में जिंजरोल होता है, जिसमें रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। सर्दी के मौसम में जहां इम्यूनिटी कमजोर होने से कई संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, वहीं दूसरी ओर इन दिनों कोरोना संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि आप भी अपने शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो डायट में ऐसी जड़ी बूटियों को जरूर शामिल करना चाहिए, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। हल्दी, में कई औषधीय गुणों होते हैं। इसमें करक्यूमिन नाम का यौगिक होता है, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा हल्दी में सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। अदरक, की तासीर गर्म होती है। इस मसालेदार जड़ में जिंजरोल होता है, जिसमें रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। यह पाचन में सहायता करता है। सूजन कम होने से शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होती है। लहसुन, भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ कई औषधीय गुणों से भरपूर है। लहसुन में एसिलिन नाम का यौगिक होता है, जो इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। एसिलिन रोगाणुरोधी और एंटीवायरल गुणों वाला एक यौगिक है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवाइन, भी एक स्वादिष्ट जड़ी-बूटी है, जो विटामिन-C और खनिजों से भरपूर है। अजवाइन में रोगाणुरोधी गुण भी होते हैं। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। इसके अलावा कोरोना से बचने के लिए तुलसी, एलोवेरा, त्रिफला आदि का भी सेवन कर सकते हैं।

घरेलू नुस्खों से दूर करें गले की खराश, सर्दियों में होती है परेशानी.

Home Remedies for throat in winter season. मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। वह इसके लिए कई महंगी दवाईयों को खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन फिर भी कोई आराम नहीं मिलता है। ऐसे में कई घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है। घरेलू नुस्खों को आसानी से रसोई में मौजूद चीजों के इस्तेमाल से बनाया जा सकता है। डाइटिशियन सिमरन कौर ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। हल्दी वाला पानी पिएं ,हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी एंटी-सेप्टिक और एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। यह हमारे शरीर में मौजूद इंफेक्शन को दूर कर देते हैं। गर्म पानी के साथ लहसुन, हल्दी और गुड़ का पेस्ट भी खाया जा सकता है। यह आपको फायदा पहुंचाएगा। तुलसी और अदरक की चाय पिएंसर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए तुलसी और अदरक की चाय भी पी सकते हैं। तुलसी की 4-5 पत्तियां और आधा इंच अदरक का टुकड़ा लें। दोनों को पानी में उबाले। पानी के आधा रह जाने पर इसको गैस को बंद कर दें। चाय को गुनगुना रहते ही पी लें। यह आपके गले की खराश को दूर करने में मदद करेगा। दालचीनी और शहद का नुस्खादालचीनी और शहद के घरेलू नुस्खे से गले की खराश को खत्म कर सकते हैं। आप चौथाई चम्मच दालचीनी का पाउडर लें। इसको आधा रह जाने तक उबालते रहें। यह जब रूम टेम्परेचर पा आ जाएं, तब ही इसमें शहद को मिलाएं। इसको पीने से आपके गले की खराब दूर हो जाएगी।

सर्दी के मौसम में तेजी से फैलता है इन्फ्लूएंजा वायरस.

 The influenza virus spreads rapidly during the cold weather. फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। The flu is caused by the influenza virus, which infects the nose, throat, and lungs. Manish Trivedi, Sub-Editor, Sahara Samachaar. ठंड के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस मौसम में कई मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी और फ्लू का खतरा अधिक रहता है। फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। ठंड के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा वायरस अधिक सक्रिय रहता है। सर्दी में ठंडी हवाएं और गिरता तापमान सबसे ज्यादा परेशान करता है। इस मौसम में कई मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-खांसी और फ्लू का खतरा अधिक रहता है। इस मौसम में फ्लू लोगों को बेहद प्रभावित करता है। मेडिसिन विभाग के सह प्राध्यापक डा. अशोक ठाकुर ने बताया कि फ्लू इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, जो नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित करता है। जब फ्लू से पीड़ित लोग खांसते, छींकते या आपस में बात करते हैं तो ये वायरस हवा के जरिए एक-दूसरे में फैलने लगता है। यह वायरस सबसे आसानी से फैल जाता है। कोविड के प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए इससे बचाव के लिए हमें कोविड की तरह प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए। जैसे मास्क लगाकर रखें, बार-बार हाथ धोएं, भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। खासकर घर में यदि कोई व्यक्ति बीमार है, तो उससे दूरी बनाकर रखना चाहिए। इस मौसम में सबसे अधिक समस्या सांस के मरीज को होती है। उन्हें अपना विशेष तौर पर ध्यान रखने की आवश्यकता है। ऐसे में खानपान में ठंडी चीजों को नहीं खाना चाहिए। जिन लोगों की जिस भी तरह के खाने से एलर्जी है, उसे खाने से बचना चाहिए।सर्दी में मौसमी बीमारियों से बचाव करने के लिए टीका लगना जरूरी है। फ्लू से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन से अपने हाथ धोएं या फिर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। हाथों को अपनी आंखें, नाक, या मुंह को छूने से बचें।

अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

सेहत के लिए फायदेमंद है कांटेदार सत्यानाशी पौधा, कई औषधीय गुणों से है भरपूर.

The thorny devil’s snare plant is beneficial for health, possessing numerous medicinal properties. हमारे आसपास कई तरह के पेड़ पौधे ऐसे होते हैं, जो कई सारे औषधीय गुना से भरपूर रहते हैं। There are many types of trees and plants around us that are abundant in various medicinal properties. हालांकि, कई बार अपने आसपास मौजूद चीजों को हम बेकार या फिर जंगली समझकर तोड़ देते हैं या उखाड़ कर फेंक देते हैं। ऐसा ही दिखने वाला एक कांटेदार पौधा सत्यानाशी फूल का होता है जो कई तरह की औषधीय गुणों से भरपूर है। हमारे आसपास मौजूद पार्क, गार्डन और सड़क के किनारे पर कई तरह के पेड़ पौधे और फूल उगे हुए दिखाई देते हैं। कई पेड़ पौधे ऐसे होते हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है और वह इन्हें जंगली और बेकार समझ लेते हैं। ऐसा ही एक पौधा पीले रंग ला सत्यानाशी फूल है, जिस अक्सर ही बेकार समझ कर फेंक दिया जाता हैं। इस पौधे में बहुत सारे कांटे होते हैं, यही वजह है कि इसे बेकार समझा जाता है। आपको बता दें कि ये कांटेदार फूल का पौधा सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। इसे खुसबसूरती के साथ अगर गमले में लगाया जाए तो ये देखने में भी सुंदर दिखेगा और इससे होने वाले फायदे का लाभ भी उठाया जा सकता है। चलिए आज आपको इस पौधे से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं। कैसा होता है सत्यानाशी पौधासत्यानाशी पौधा देखने में बहुत खूबसूरत होता है और अक्सर ही खाली जमीन पर उग जाता है। इस पौधे में कई तरह की औषधि गुण मौजूद है और यह आपको अक्सर सड़क किनारे या निर्जन स्थान पर देखने को मिल जाएगा। इस पौधे में फूल, पत्ते, डाली सभी जगह पर कांटेदार पौधे होते हैं और इसे बहुत ही सावधानी के साथ तोड़ना पड़ता है। पीले रंग के स्कूल के अंदर बैंगनी रंग के बीच दिखाई देते हैं। सबसे खास बात यह है कि जब भी आप किसी पौधे या फूल को तोड़ते हैं तो उसमें से सफेद रंग का दूध निकलता है। लेकिन जब आप सत्यानाशी पौधे को तोड़ेंगे तो इसमें से आपको पीले रंग का दूध निकलता हुआ दिखाई देगा। सत्यानाशी पौधे के फायदेकांटेदार और बेकार सा दिखने वाला यह पौधा कई गुणों से भरपूर है और इससे बहुत तरह के फायदे होते हैं। जिन लोगों को अक्सर खांसी चलने या फिर सांस चलने की शिकायत होती है, वह अगर इसकी जड़ को पानी में उबालकर काढ़े की तरह पिएंगे तो उन्हें बहुत फायदा होगा।सत्यानाशी के तेल में गिलोय का जूस मिलाकर पीने से पीलिया जैसे रोग से मुक्ति मिलती है।पेट दर्द की समस्या को दूर करने में भी यह पौधा काफी कारगर है बस आपको इसके दूध में घी मिलाकर पीना होगा और दर्द से आराम मिल जाएगा। कैसे लगाए पौधासत्यानाशी पौधे को आप अपने घर में कैक्टस प्लांट की तरह ही लगा सकते हैं। जब इसमें फूल खिलेंगे तो यह बहुत ही खूबसूरत दिखाई देगा। इसे लगाने के लिए बस आपको पके हुए बीज की आवश्यकता होगी। आप इन्हें मिट्टी में मिला दें और बस पौधा उगने लगेगा। इस पौधे को कुछ खास देखभाल की जरूरत नहीं होती है। लगाते वक्त ही थोड़ी ऑर्गेनिक खाद इसकी मिट्टी में मिला दें। बीज के जरिए पौधा उगाने के अलावा आप छोटा सा पौधा लाकर भी इसे लगा सकते हैं। दिन में दो-तीन बार इसे पानी देने के अलावा आप धूप या छांव में कहीं भी इसे रख सकते हैं। दाद-खाज-खुजली से छुटकारा (What stops itching fast)स्किन रोगों के लिए सत्यानाशी का प्रयोग (Prickly Poppy use to Treat Skin Disease)सत्यानाशी का पौधा आपको आसानी से पार्क या सड़क के किनारे लगा दिख जाएगा। यह एक कांटेदार पौधा होता है, जिस पर पीले रंग के फूल होते हैं। सत्यानाशी पंचांग के रस में हल्का नमक डालकर सेवन करने से स्किन संबंधी रोगों में लाभ होता है। इसके लिए आपको रोजाना सत्यानाशी पंचांग के रस का 1 या 2 चम्मच सेवन करना होगा। दाद का इलाज (ringworm treatment)एंटीफंगल गुणों से भरपूर सत्यानाशी का पौधा दाद के इलाज में भी फायदेमंद साबित होता है। सत्यानाशी की पत्तियों का रस या तेल को दाद वाली जगह पर लगाने से दाद के लक्षण धीरे धीरे हल्के होने लगते हैं और इसका इंफेक्शन फैलना भी बंद हो जाता है। खुजली के लिए सत्यानाशी का उपयोग (uses of Prickly Poppy for itching)खुजली की समस्या में इंसान परेशान हो जाता है, ज्यादा खुजली के कारण स्किन पर रैशेज भी आ जाते हैं और कई बार खून भी निकलने लगता है। फोड़े, फुंसी, खुजली और जलन के लिए सत्यानाशी फायदा करता है। इसके लिए आप सत्यानाशी पंचांग का रस या पीला दूध लगाएं। इसे लगाने से आपको खुजली से राहत मिलेगी।

सिरोंज ब्लॉक में 28,169 के निर्धारित लक्ष्य में से 27,548 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई.

In the Sironj block, 27,548 out of the targeted 28,169 children have been administered polio medicine. सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार विदिशा.विदिशा/ सिरोंज, तीन दिन तक राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान में सिरोंज ब्लॉक में ग्रामीण एवं शहरी खेत्र में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी सिरोंज के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ विकास सिंह बघेल ने बताया है 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही शहर एवं ग्रामीण अधिकांश जगहों पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके । इसी अभियान के तहत विदिशा के सिरोंज ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया गया. जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई गयी, यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है जिसमें सिरोंज समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 28,169 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा। जिसमें से पहले दिन 27,548 बच्चों को दवाई पिलाई गई । रविवार से मध्य प्रदेश के 16 जिलों में राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई । इस अभियान के तहत लगभग 36 लाख, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा हैं।

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