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11793 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई, पहले दिन 68% टारगेट पूरा किया.

11,793 children were administered polio medicine, achieving 68% of the target on the first day. सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार विदिशा.विदिशा/गंज बासोदा, रविवार से मध्य प्रदेश के 16 जिलों में राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई । जिला स्वास्थ्य प्राधिकृतियां इस अभियान के तहत लगभग 36 लाख, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा हैं। जिलों को उनकी संक्रामक संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर चयनित किया गया है. इसी अभियान के तहत विदिशा के गंज बासोदा ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया गया. जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई, यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है जिसमें गंज बासोदा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 17756 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा। जिसमें से पहले दिन 11793 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक गंज बासोदा ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी गंज बासोदा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ प्रमोद कुमार दीवान ने बताया है 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही शहर के अधिकांश जगहों पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की जीरो से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

12244 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई.

Administered polio medicine to 12,244 children सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार, विदिशाविदिशा! ग्यारसपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्यारसपुर के सरपंच राजू कुशवाहा एवं स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर गणेशराम विश्वकर्मा के द्वारा जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है! जिसमें ग्यारसपुर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 16432 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा है। जिसमें से पहले दिन 12244 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक ग्यारसपुर ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी ग्यारसपुर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सुनीता नागाचे ने बताया कि 169 केंद्र ग्यारसपुर ब्लॉक में बनाए गए हैं! जहां पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही बस स्टैंड पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की बसों में आने जाने वाले 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

एचडीएफसी बैंक जबलपुर शाखा द्वारा 46 केंद्रों में रक्तदान अभियान के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया.

HDFC Bank’s Jabalpur branch collected 4661 units of blood across 46 centers through a blood donation campaign. भोपाल! भारत का अग्रणी निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक ने शुक्रवार 8 दिसंबर, 2023 से शुरू होने वाले अपने राष्ट्रव्यापी रक्तदान अभियान के 15वें संस्करण का आयोजन जबलपुर के विजय नगर शाखा में किया। अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम परिवर्तन के तहत भारत के 1200 शहरों में 6,000 केंद्रों पर रक्तदान शिविर का संचालन किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन निर्मला देवी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्री मुनेंद्र मिश्रा जी के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। श्री मिश्रा ने एचडीएफसी बैंक द्वारा किए जा रहे रक्तदान शिविर की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह बैंक व्यवसायिक दायित्वों के निर्वाह के साथ साथ सामाजिक दायित्व के निर्वहन में भी देश का नंबर वन बैंक बन चुका है। एचडीएफसी बैंक के सर्किल हेड श्री अनूप शर्मा ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि इस दान से बड़ा और कोई दान नहीं हो सकता। श्री शर्मा ने शहर के सभी युवाओं को स्वेच्छा से रक्तदान करने का आग्रह किया। गत माह में एचडीएफसी बैंक के जबलपुर सर्किल के द्वारा 45 विभन्न कैंपों के माध्यम से 4661 यूनिट ब्लड का कलेक्शन किया गया। एचडीएफसी बैंक अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, कॉरपोरेट्स, रक्षा बलों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों सहित विभिन्न प्रकार के रक्त दानदाताओं को जुटाने के लिए तैयार है। इस साल एक अनोखे दृष्टिकोण में एचडीएफसी बैंक ने लोगों को रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए ‘फीलिंग ऑफ सेविंग समवन नामक एक फिल्म लॉन्च की है। फिल्म व्यक्तियों को इस जीवन रक्षक कार्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करती है और रक्तदान की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर देती है। यह फिल्म बैंक के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी, यह जनता के बीच उनके योगदान के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करेगा और अभियान में बड़े पैमाने पर रक्तदान के लिए प्रेरित करेगा। एचडीएफसी बैंक के कार्यकारी निदेशक, श्री भावेश ज़वेरी ने कहा, “एचडीएफसी बैंक में हम लोगों को इस प्रयास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में बहुत गर्व महसूस करते हैं, क्योंकि दान किए गए रक्त की हर बूंद एक संभावित जीवन रक्षक है। अपने 15वें अखिल भारतीय रक्तदान अभियान के साथ हम नागरिकों को इस नेक काम में भाग लेने और अपना योगदान देने के लिए एक मंच देना चाहते हैं।” यह पहल 2007 में केवल 88 केंद्रों और 4000 दानदाताओं के साथ शुरू की गई थी जो केवल बैंक कर्मचारियों के बीच ही चलाई गई थी। पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया और इसमें कॉलेज के छात्रों, कॉरपोरेट्स और सेना और सेवा कर्मियों को शामिल किया गया। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्डसा” से सबसे बड़े (सिंगल डे, मल्टीपुल वेन्यू) रक्तदान अभियान के रूप में मान्यता और प्रमाणन प्राप्त हुआ। 2022 में बैंक ने 25 लाख यूनिट से अधिक रक्त एकत्र किया। कुछ महत्वपूर्ण दानकर्ता 1500- कॉलेजों, 550 कॉरपोरेट्स और 105- रक्षा और सेवा कर्मियों से आए जिन्होंने रक्तदान अभियान में भाग लिया। एचडीएफसी बैंक के रक्तदान अभियान के बड़े पैमाने और व्यापक आधार ने देश के समग्र रक्त संग्रह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।रक्तदान शिविर का संचालन जबलपुर शाखा के ऑपरेशन प्रबंधक श्री लीजू जोसेफ ने किया एवं समस्त स्टाफ ने स्वेच्छा से रक्तदान करने आए बैंक के ग्राहकों एवं युवा वर्ग का आभार व्यक्त किया।

मध्य प्रदेश में फिर डराने लगा कोरोना, इंदौर में मरीज मिलने के बाद मचा हड़कंप

COVID in Madhya Pradesh, as a patient in Indore tests positive. Doctors advise people to stay vigilant. इंदौर। मध्य प्रदेश में एक बार फिर कोरोना ने दस्तक दे दी है। इंदौर में एक मरीज मिलने के बाद डॉक्टरों ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एक बुजुर्ग की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह सर्दी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराई गई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीज को होम आईसोलेशन में रखा गया है। दो साल बाद भी कोविड का भय खत्म नहीं हुआ है। 70 वर्षीय बुजुर्ग की सर्दी खांसी के जांच के बाद कोविड पॉजिविट मिला है। इसके बाद मरीज का होम आईसोलेशन कर उपचार किया गया। मरीज की हालत ठीक है।कोविड नोडल अधिकारी डॉ अमित मालाकार ने बताया कि हरदा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग सर्दी खांसी और बुखार से पीड़ित था। निजी लैब में कोविड जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद मरीज को आईसोलेशन में रखकर उसका उपचार किया गया। फिलहाल मरीज की हालत ठीक है। मामला 24 नवंबर का है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर परिवार के सभी सदस्यों की कोविड जांच की गई, लेकिन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव है। बता दे कि मामले के 16 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट मरीज की सांझा नहीं की है।

युवाओं में अब इस बीमारी का खतरा, लगातार हो रहे शिकार.

The danger of this illness is now looming over the youth, becoming a continuous threat. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एकाकीपन को गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा घोषित किया है। जिसकी मृत्यु दर प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने के बराबर है। आंकड़ों के अनुसार विश्व में 5 से 15 प्रतिशत किशोर अकेले हैं। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। बुजुर्गों में होने वाली एकाकीपन की समस्या ने अब युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। कोविड के बाद इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनोचिकित्सक केंद्र में रोजाना टेलीमानस पर 20 से 40 युवाओं के कॉल आ रहे हैं, जो एकाकीपन का शिकार है। इसमें ज्यादातर आईआईटी, नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले व घर से दूर रहने वाले युवा शामिल है। वहीं बुजुर्गों की ओपीडी में हर सप्ताह 30 मरीज आ रहे हैं। जिनमें 8 से 10 केस एकाकीपन से जुड़े हैं। एंग्जाइटी, डिप्रेशन और तनावमनोचिकित्सक डॉ. ललित बत्रा बताते हैं कि इंसान भावनाओं को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करता है। परिवार में उसकी यह जरूरतें पूरी हो जाती है। अकेलेपन से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, तनाव जैसी समस्याएं पनपने लगती है। स्कूल-कॉलेज में बच्चों के बीच एक समूह बने, जिसमें वे अपने मन की बात साझा कर सकें। ये हैं दूर करने के उपायदिनचर्या को ठीक रखने का प्रयास करें।सोने और उठने का समय निर्धारित करें।मेडिटेशन और योगा करें।स्वयं को सामाजिक संवाद में शामिल करें।दोस्तों और परिजनों के साथ समय बिताए और मन की बात साझा करें।

हमारे पास डॉक्टरों की कमी है. भारत में प्रति 1000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना सबसे जरूरी – नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल.

We have a shortage of doctors. In India, there is one doctor per 1000 population, and it is crucial to increase the number of specialist doctors – says NITI Aayog member Vinod K. Paul. Manish Trivedi – Sahara Samachaar नई दिल्ली: नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल ने दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के स्थापना दिवस समारोह को बीते गुरुवार (30 नवंबर) को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों की पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल के लिए देश में एमबीबीएस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना सबसे जरूरी है. पॉल ने कहा, ‘हमारे पास डॉक्टरों की कमी है. भारत में प्रति 1000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है, अगर हम आयुष चिकित्सकों को जोड़ दें तो 1.3 डॉक्टर हैं, जबकि विकसित देशों में समान जनसंख्या के लिए तीन डॉक्टर हैं.’ ‘विशेषज्ञों की आवश्यकता और भी अधिक है.’ देश में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए डीएनबी (डिप्लोमैट ऑफ नेशनल बोर्ड) पाठ्यक्रम और जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम (डीआरपी) का उपयोग किया जाना चाहिए. डीआरपी के तहत एक-चौथाई उम्मीदवारों को बेहतर शिक्षा और मरीजों की सेवा के लिए जिला अस्पतालों में तैनात किया जाता है. उत्तर प्रदेश में डीआरपी इस साल की शुरुआत में शुरू की गई है और सभी मेडिकल कॉलेजों के 768 उम्मीदवारों को तीन महीने की अवधि के लिए जिला अस्पतालों में तैनात किया गया है. एमबीबीएस छात्रों को पीजी पाठ्यक्रमों में सीट पाने के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि पीजी सीटों की संख्या बढ़ गई है और अधिक सीटें जोड़ने पर काम चल रहा है. अगर डीपीआर ठीक से लागू किया गया तो प्रत्येक जिला अस्पताल में 5 से 10 पीजी छात्र होंगे.’ ‘देश में 68,000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें हैं और अगर एक-चौथाई अस्पतालों में हैं तो इससे मरीजों की सेवा में सुधार करने में मदद मिलेगी और उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ेगी, क्योंकि कॉलेज अतिरिक्त छात्रों को ले सकते हैं.’ ‘देश में पीजी सीटें 32,000 से बढ़कर 63,000 से अधिक हो गई हैं और यूजी मेडिकल सीटें 52,000 से बढ़कर 1.8 लाख हो गई हैं. चुनौती देश में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की है.’ कार्यक्रम में शामिल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक और भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, ‘अनुसंधान केवल कुछ संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए. सभी संस्थानों को इसमें भाग लेना चाहिए.’ डॉ. बहल ने कहा, ‘इस साल आईसीएमआर ने 203 विभिन्न संस्थानों को 600 अनुदान दिए और उनमें से कई को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में नहीं जाना जाता था.’ समारोह में प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य, पार्थ सारथी सेन शर्मा और आरएमएलआईएमएस निदेशक प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद भी उपस्थित थे.

जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की लापरवाही का सिलसिला जारी, कार्यवाही के नाम पर रस्म अदायगी, प्रसूता की हुई मौत.

The saga of doctors’ negligence continues at the district hospital, with formalities being carried out in the name of disciplinary action, leading to the unfortunate death of a pregnant woman. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी। जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय बिगड़ती जा रही हैं ऐसे डॉक्टर है जो स्वयं के क्लीनिक चला रहे हैं जिला अस्पताल में दो दिन बाद फिर एक बार डॉ की लापरवाही से प्रसूता की मौत लागतार डॉक्टरों की लापरवाही से प्रस्तुओ की मौत होने का सिलसिला थम ही नही रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ जांच का अस्वाशन देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है लेकिन आज तक किसी पर ठोस कार्यबाही नही होने के कारण लापरबाही का रवैया अपनाते हुए डॉक्टर अपने प्राइवेट डिस्पेंसरी में लगे रहते है जानकारी के अनुसार बताया गया है कि विजयराघवगढ़ से आयी प्रसूता की इलाज दौरान मौत विजयराघवगढ़ से आई शालिनी तिवारी पति राजू तिवारी 28 वर्ष कारितलाई निवाशी कल विजयराघवगढ़ में कल शाम 8 बजे स्वास्थ केन्द्र में प्रसव हुआ जिसमें लड़का हुआ था महिला की हालत गम्भीर होने के कारण जिला अस्पताल कटनी रेफर किया गया था जहाँ पर महिला को किसी भी डॉक्टर ने नही देखा रात में डॉक्टर सुनीता वर्मा को अस्पताल से कॉल गया था आधे घण्टे करते करते सुबह 5 बजा दिया, फिर परिजनों को कही ओर ले जाने की सलाह स्टाफ द्वारा दी गयी। जहाँ परिजन शारदा हॉस्पिटल ले गए लेकिन से भी बोल दिया गया था कि जबलपुर ले जाओ लेकिन महिला की मौत हो गयी परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया कि इलाज में बेपरवाही की गई जिससे प्रसूता की मौत हो गयी गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही चौधरी परिवार की एक महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था जिससे उसके परिवारजनो ने लापरवाही का आरोप लगाया था.

108 एम्बुलेंस के लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की गई जान.

Chhindwara; Sahara Samachaar; Health Department;

Negligence of 108 ambulances led to the death of a newborn child चन्द्रदीप गगन तेकामछिंन्दवाडा, जिले के पतालकोट में जननी 108 की लापरवाही के चलते नवजात बच्चे की गई जान लापरवाही की भेंट चढ़ा मासूम मामला ग्राम गैलडुब्बा का बताया जा रहा रहा यहां निवासी श्याम कुमारी पति ब्रजलाल उईके को प्रसव पीड़ा के चलते जननी 108 एम्बुलेंस की राह देखते देखते घर पर ही डिलेवरी होने से बच्चे की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही मौत हो गई अगर समय रहते महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तामिया लाया गया होता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी लेकिन 108वाहन ना मिलने से एक नौ निहाल बच्चे की जान नहीं बची छिंदी में ना तो डाक्टर ना उचित स्वास्थ्य व्यवस्था फिर भी नेता मंत्री बड़े बड़े वादे करने से पीछे नहीं है आखिर कब होगी स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त फिलहाल कहना मुश्किल है।

कोविड और हार्ट अटैक पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का चौकाने वाला बड़ा बयान.!

Corona; Covid; Hearth Attack; Sahara Samachaar; Mansukh Mandaviya

Shocking statement by the Central Health Minister on COVID and heart attacks Manish Trivediनई दिल्ली : लगातार देश में आ रही हार्ट अटैक की खबरों से लोगों की नींद हराम हो गईं हैं,अगर देखा जाये तो सबसे अधिक युवा वर्ग प्रभावित हो रहे हैं. लोगों के दिमाग में ये भी सवाल उठना शुरू हो गया है कि कहीं हार्ट अटैक बढ़ने की खबरों का कोविड से तो कोई संबंध नहीं है. जानिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का चौकाने वाला बड़ा बयान जरूर पढ़ें. स्वास्थ्य मंत्री ने साफ तौर पर इसका जवाब हां में दिया है. उन्होंने कहा कि जिस किसी व्यक्ति को कोविड की बीमारी हुई थी, उसे आने वाले दो-तीन सालों तक कोई भी कठिन और तनावपूर्ण कार्य से बचना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को दो से तीन सालों तक कठिन एक्सरसाइज भी नहीं करना चाहिए. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस संबंध में इंडियन काउंसल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक स्टडी का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने इस संबंध में एक स्टडी की है. इसके अनुसार जिन्हें भी कोविड का इन्फेक्शन हुआ था, उन्हें आने वाले कम से कम दो सालों तक कठिन कार्य से बचना चाहिए. मंडाविया ने कहा कि हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं, जिसके बाद इस पर स्टडी किया गया. मंत्री ने कहा कि 22 अक्टूबर को गुजरात के खेडा में गर्बा खेलते-खेलते 17 साल का एक लड़का हार्ट अटैक का शिकार हो गया. इस तरह की कई घटनाएं हुईं हैं,

प्राईवेट नर्सिंग होम एवं पैथोलॉजी सेंटर्स संचालकों को गंभीर बीमारियों के सेंपल का जिला चिकित्सालय से पुनः परीक्षण के निर्देश

Katni; CMHO; Private Hospitals; Katni Private Hospitals; Pathalogy; Orders;

Operators of private nursing homes and pathology centers have been directed to undergo reexamination for serious diseases using samples from the district hospital.

फूड पॉयजनिंग का शिकार lNIPE छात्रों से मिले केंद्रीय मंत्री सिंधिया।

ग्वालियर। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे, यहां उन्होंने मंगलवार को फूड पॉयजनिंग का शिकार होने के बाद अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के 100 से ज्यादा छात्रों अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना है। यहां 15 छात्र भर्ती मिले हैं जिनमें एक वेंटीलेटर पर था, जबकि अधिकांश छात्रों को उपचार के बाद आराम मिलने पर अस्पताल से डिसचार्ज किया जा चुका है।छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर अस्पताल के डॉक्टरों से जानकारी ली और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिये केन्द्रीय मंत्री सिंधिया सभी छात्रों के परिजनों से मुलाकात की है। यहां छात्रों ने बताया कि उन्होंने पनीर खाया तभी उनकी हालत बिगड़ने लगी थी। अस्पताल से बाहर निकलने के बाद केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान में इतनी संख्या में वहां पढ़ने वाले छात्रों का फूड पॉइजनिंग का शिकार हो जाना, यह कोई साधारण बात नहीं है। मामले की पूरी जांच की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी कोई भी हो बच नहीं सकेगा। सिंधिया ने कहा कि मैंने छात्रों और उनके परिजन से बातचीत कर उनका हाल चाल जाना है। वेंटीलेटर पर जो छात्र है उसकी भी हालत में सुधार है। ऐसे समझिए पूरा मामला शहर के रेसकोर्स रोड स्थित महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान में तीन दिन पहले मंगलवार को उस समय हड़कंप मंच गया था, जब एक सैकड़ा से अधिक छात्र-छात्राएं फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए थे। पूछताछ में छात्रों ने बताया था कि सोमवार रात को उन्होंने डिनर में सादा चपाती के साथ उनको खाने में पनीर दिया गया था। पनीर ग्रेवी वाला था। पनीर खाने के बाद छात्र अपने अपने कमरे में सो गए थे, लेकिन सोमवार-दरमियानी रात से ही छात्रों को पेट में दर्द और दस्त की शिकायत होने लगी थी। इनमें कुछ छात्रों को उल्टियां होने लगीं थी। उस समय तो यह बात सामान्य लग रही थी, लेकिन मंगलवार सुबह होते-होते हालत बद से बदतर होने लगे थे। और करीब 100 से ज्यादा छात्र-छात्राएं बुरी तरह से उल्टी दस्त से ग्रसित होने लगे थे। इसके बाद छात्र-छात्राओं को बीमार होता देख महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के अधिकारी और कर्मचारियों ने तत्काल सभी को कैंपस में बने अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन अस्पताल में बच्चों की हालत में सुधार नहीं हुआ और उनकी हालत हर मिनट बिगड़ती जा रही थी, इसके बाद इन सभी छात्रों को गंभीर हालत में जयारोग्य के हजार बिस्तर के अस्पताल में मंगलवार रात को भर्ती कराया गया था। खाद्य विभाग चुका है सैंपल महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान के 119 छात्रों के फूड पॉयजनिंग का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती होने खबर मिलने के बाद कॉलेज पहुंचे खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कार्यवाही करते हुए महारानी लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारिरिक शिक्षण संस्थान की किचन से पनीर, दूध, दही घी, तेल, आटा, चावल, सलाद, मसाले सहित एक दर्जन खाद्य सामग्री के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए थे। सैंपल की जांच आने पर यह स्पष्ट हो पाएगा कि किचन में बने खाद्य पदार्थ खाने से फूड पॉइजनिंग के शिकार होकर तबीयत बिगड़ी थी या नहीं । पुलिस कर रही है जांच बड़ी संख्या में छात्रों के फूड पॉयजनिंग का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती होने की सूचना अस्पताल के डॉक्टरों और कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अस्पताल और कॉलेज पर पहुंच कर आवश्यक कार्यवाही करने के साथ ही मैस के प्रभारी अधिकारियों से मामले में जानकारी ली इसके बाद से मैस की किचिन स्टाफ, सुपरवाइजर व अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।

आशा किरण नवोदय सोसायटी में मिली वित्तीय गड़बड़ियां, बच्चों की देखरेख के मामले में कलेक्टर हुए सख्त, वित्तीय अनियमितता की जांच हेतु गठित किया दल

कटनी। महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत संचालित बाल देख रेख संस्थाओं की जांच हेतु कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा गठित 5 सदस्यीय समिति द्वारा आशा किरण नवोदय सोसायटी कटनी की, की गई जांच में यहां संचालित बाल गृह में 4 लाख 20 हजार रूपये की भवन किराया मद में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई गई। कलेक्टर अवि प्रसाद ने आशा किरण नवोदय सोसायटी में इसके अलावा अन्य वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के अनुक्रम मे वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच हेतु दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है। इस जांच दल मे जिला कोषालय अधिकारी शैलेष गुप्ता और जिला संस्थागत वित्त अधिकारी दीपक सिंह शामिल है। कलेक्टर श्री प्रसाद ने जांच दल को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आशा किरण नवोदय सोसायटी को प्रदाय मान्यता वर्ष 2010 से अब तक के वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण कर 15 दिवस में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। 5 सदस्यीय जांच समिति कलेक्टर अवि प्रसाद ने आशा किरण नवोदय सोसायटी में अनियतिताओं की जांच हेतु 7 जून 2023 को जिला पंचायत सी.ई.ओ शिशिर गेमावत की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय जांच समिति गठित किया था। इसके सदस्यों मे जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास नयन सिंह, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण पूजा द्विवेदी, सदस्य बाल कल्याण समिति योगेश बघेल और प्रभारी विशेष किशोर पुलिस इकाई रेणु तिवारी को शामिल किया था। इस समिति ने आशा किरण सोसायटी सहित मिशन वात्सल्य के अंतर्गत संचालित अन्य बाल देखरेख संस्था लिटिल स्टार फाउण्डेशन कटनी बालिका गृह, शंकर सरस्वती शिक्षा समिति आसरा बालगृह एवं किलकारी शिशु गृह की जांच की थी।

स्वास्थ विभाग की बड़ी कार्यवाही, दवा दुकानों के खिलाफ

कटनी। औषधि निरीक्षक एवं औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन जिला कटनी द्वारा दवा दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। श्रीमती मनीषा धुर्वे औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि निरीक्षण के दौरान औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की नियमावली 1945 के नियमों का उल्लंघन करने पर एन.के.जे स्थित मेसर्स लाल जी मेडिकल स्टोर्स प्रोपराइटर विनय कुमार पटेल सहित शर्मा मेडिकल स्टोर्स प्रोपराइटर रमेश शर्मा एवं मेसर्स अनन्या मेडिकल एवं जनरल स्टोर्स रोशन नगर प्रोपराइटर मनीष कुमार अहिरवार को प्रदत्त औषधि अनुज्ञप्तियां दो दिवस के लिए निलंबित की गई है। निलंबन के दौरान औषधियों का क्रय- विक्रय पूर्ण रूप से बंद रहेगा एवं दुकान बंद रहेगी। यदि देखा जाये तो कटनी जिले में अधिकांश मेडिकल स्टोर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का उल्लंघन कर रहे है अभी कुछ ही दिन पहले कटनी जिले के ही मेडिकल स्टोर के इलाज से मौत का मामला सामने आया था. अभी हाल ही में ही रीठी स्वास्थ केंद्र का मामला संज्ञान में आया था. देखते है मनीषा धुर्वे औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब क्या कारवाही करती है.

महाराष्ट्र नांदेड़ के अस्पताल में 24 लोगों की मौत के 24 घंटे बाद छत्रपति संभाजीनगर जिले के सरकारी अस्पताल में 2 शिशुओं सहित कम से कम 8 मरीजों की मौत की खबर

महाराष्ट्र, नांदेड़, नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में 24 लोगों की मौत की घटना के बमुश्किल 24 घंटे बाद महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के एक सरकारी अस्पताल में 2 शिशुओं सहित कम से कम 8 मरीजों की मौत की खबर से हड़कंप मच गया है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इसे राज्य सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली पर “काला धब्बा” करार दिया है। छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व-औरंगाबाद) जिले के एक सरकारी अस्पताल में मरने वाले 8 लोगों में 5 पुरुष हैं और उनकी मौत के कारणों का विवरण अभी तक स्पष्ट नहीं है।

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