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MP : BHOPAL में संक्रमित बैंककर्मी का शव लेकर भटकती रही बेटी, PPE किट भी नहीं

भोपाल। भोपाल के जेपी हॉस्पिटल 1250 में कोरोना संक्रमित एक महिला की मौत के बाद उनकी बेटी ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि अपने चाचा के साथ वह मां का शव लेकर भटकती रही। पहले तो इलाज में देरी की गई। ऑक्सीजन सप्लाई सही से नहीं हुई। अस्पताल प्रबंधन ने कोई जवाब नहीं दिया राजधानी भोपाल निवासी प्रियंका ने बताया कि वह अस्पताल से कलेक्टर और मंत्री के दरवाजे तक खटखटा आई, लेकिन मदद नहीं मिली। मौत के बाद भी उसकी मां को सुकून नहीं मिला और उन्हें यूं ही छोड़ दिया गया। परिजनों ने ही रात में शव को मोर्चरी में रखा। 43 साल की मां संतोष भोपाल कोऑपरेटिव सेंट्रल बैंक कोटरा सुल्तानाबाद ब्रांच में कार्यरत थीं। पिता की 8 साल पहले मौत के बाद मां को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वह 14 सितंबर को कोरोना पॉजिटिव हुई थीं। दो प्राइवेट अस्पतालों में उनसे 50-50 हजार महज 18 घंटे के अंदर ले लिए गए, लेकिन इलाज अच्छे से नहीं किया गया। मजबूर होकर मैं अपनी मां को एंबुलेंस में बिठाकर करीब 13 घंटे तक शहर में इधर से उधर घूमती रही, लेकिन कहीं भी उनकी मां को भर्ती नहीं किया गया। उन्होंने कलेक्टर से गुहार लगाई, तब जाकर जेपी अस्पताल में मां को भर्ती किया गया, लेकिन भर्ती करने के अलावा उनका किसी तरह का इलाज नहीं किया गया। मैं दिन भर अस्पताल के बाहर रहती थी। जरूरत पड़ने पर आईसीयू में जाकर मां की मदद करती थी। खाना-पीना भी उनकी तरफ से ही दिया जाता था। प्रियंका ने आरोप लगाया कि गुरुवार रात मां की मौत हो गई उसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि अब तुम शव को ले जाओ। उन्होंने ना तो मां को पीपीई किट पहनाई और ना ही वार्डबॉय तक दिया। प्रियंका ने बताया कि इलाज में लापरवाही को देखते हुए वह मंत्री विश्वास सारंग से भी मिलने गई थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह दिखाते हैं, लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। मां को काफी तकलीफ हो रही थी। शाम 4:00 बजे मां से मिली थीं। उस दौरान वे ठीक लग रही थीं। उन्होंने बताया कि बीच-बीच में ऑक्सीजन नहीं मिलती है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन उनसे ही ऑक्सीजन के सिलेंडर भी यहां से वहां रखवाया गया।

MP : दो और मंत्रियों को कोरोना, BMHRC की डायरेक्टर सहित राजधानी में 271 नये मरीज़

भोपाल. मध्य प्रदेश में मंत्रियों के कोरोना पीड़ित होने का सिलसिला जारी है. मंगलवार को फिर दो मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है. इससे पहले सीएम शिवराज सहित उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को कोरोना हो चुका है. रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया चिरायु अस्पताल में भर्ती हो गए हैं.मिली जानकारी के मुताबिक सिसोदिया अपनी मां का कोरोना टेस्ट कराने चिरायु अस्पताल गए थे. मां की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. जिसके बाद उन्होंने भी अपना टेस्ट कराया. जांच में वे भी संक्रमित मिले. इसके बाद वो मां के साथ ही अस्पताल में भर्ती हो गए. डंग की अपील ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.संक्रमित होने के बाद मंत्री डंग ने सोशल मीडिया के ज़रिए ये जानकारी साझा की है.डंग ने ट्वीट कर ये बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह अस्पताल में भर्ती हैं.साथ ही ये अपील भी की है कि उनके संपर्क में जो लोग भी आए हैं, वे अपना कोरोना टेस्ट करा लें. यह भी संक्रमण की चपेट में शहर में मिले संक्रमित मरीजों में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर डॉ. प्रभा देसिकन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.भोपाल में उप लोकायुक्त सुशील कुमार पॉलो को भी कोरोना हो गया है. नेशनल ज्यूडिशियल अकेडमी में दो मरीज मिले. जीएमसी में दो, आरकेडीएफ में दो और चिरायु अस्पताल में एक डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई.राजभवन में तीन, पुलिस कंट्रोल रूम में दो जवान संक्रमित मिले हैं. मैनिट की स्थापना शाखा के अधीक्षक की पत्नी भी कोरोना से संक्रमित हो गयी हैं. 16 दिन बाद मौत के गिरे आंकड़े राजधानी में संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. रोजाना ढाई सौ से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं.मंगलवार को शहर में 271 नए संक्रमित मिले हैं. लगभग 16 दिन बाद संक्रमितों की मौतों के मामलों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 16 दिन बाद सिर्फ एक मरीज की मौत हुई है.इससे पहले 7 सितंबर के बुलेटिन में सिर्फ एक मौत रिकॉर्ड हुई थी.

मरीज रातभर में 6 से 7 अस्पताल भटके, नहीं मिले बेड, एक या दो दिन में ही मौत

इंदौर। इंदौर में 80 साल की महिला को 28 अगस्त की रात सांस में तकलीफ होने पर मेदांता अस्पताल ले गए। वहां एक्सरे करने पर पता चला कि निमोनिया है। बेड नहीं होने से अरविंदो अस्पताल भेजा। वहां भी दो घंटे तक बेड नहीं मिला। फिर इंडेक्स ले गए। वहां भी बेड नहीं मिला। वहां से ग्रेटर कैलाश अस्पताल ले गए। बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया। यह काेई एक वाक्या नहीं है, ऐसे ढेरों दुखद मामले आपको कोरोनाकाल में सुनाई दे जाएंगे, जहां बेड नहीं मिल पाया और मिला भी तो भर्ती होने के एक दिन बाद ही मरीज ने दम तोड़ दिया। कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन डेथ-ऑडिट करवा रहा है। जिसके लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति ने भी इस बार माना है कि मरने वाले कुछ मरीज ऐसे थे जो रातभर कई अस्पताल भटके हैं। उन्हें बेड नहीं होने का बताकर रैफर कर दिया गया। कुछ तो 5 से 7 अस्पताल भटके थे, जिसके कारण कुछ की एक या दो दिन में ही मौत हो गई। इनमें से 90 फीसदी डायबिटीज, अस्थमा और हाइपरटेंशन सरीखी पुरानी बीमारियों से भी पीड़ित थे। इस रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ डेंगू के एक मरीज को कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। बावजूद अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। अस्पतालों में भटके, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। दो दिन बाद वह पॉजीटिव आ गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई। धार, झाबुआ, बड़वानी से आए मरीजों को भी यहां लाने में देर की गई। समिति ने सैंपलिंग और क्वारैंटाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसमें तीनों मेडिकल कॉलेजों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यह जानकारी ली जाए कि मरीजों को क्यों निजी अस्पतालों से रैफर किया जा रहा है। इसके अलावा यह टिप्पणी भी की गई है कि मरीज निजी अस्पताल जाना इसलिए पसंद कर रहे हैं, क्योंकि वहां सफाई और सुविधाएं सरकारी अस्पतालों से बेहतर है। केस 1: 64 वर्षीय महिला को चार दिन से बुखार आ रहा था। डेंगू की जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। फेरिटिन लेवल भी 1600 हो गया। प्लेटलेट्स भी कम हो गए थे। दवा चल रही थी। मरीज काे सर्दी-जुकाम भी नहीं था और सांस लेने में भी कोई दिक्कत नहीं थी। यानी कोरोना बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। 29 अगस्त को अचानक सीने में दर्द हुआ तो उन्हें चोइथराम अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने कहा कि कोरोना नहीं है। अभी भर्ती नहीं कर सकते। वहां भर्ती करने से मना किया। यही स्थिति एप्पल हॉस्पिटल में भी हुई। इसके बाद परिजनों ने इंडेक्स अस्पताल में बात की। वहां पर भी मना कर दिया गया। परिजन फिर मयूर अस्पताल ले गए और महिला को भर्ती करवाया गया। 30 अगस्त को कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन उसी दिन उनकी मौत हो गई। मरीज को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा की समस्या थी। बीमार होने के बाद अस्पताल में यह सिर्फ एक ही दिन भर्ती रहे। केस 2: इसी तरह 58 साल के मरीज को जब सांस लेने में तकलीफ हुई तो उन्हें विशेष हॉस्पिटल ले जाया गया। यह अस्पताल नेमावर रोड पर शिफ्ट हो गया था तो परिजन सुयश अस्पताल ले गए। वह भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद से सैम्स अस्पताल ले गए। जहां बैठ की समस्या के कारण भर्ती नहीं किया गया। परिजन गोकुलदास अस्पताल ले गए तो वहां बताया गया कि बेड खाली हैं, लेकिन ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद परिजन राजश्री अपोलो अस्पताल ले गए। वहां भी बेड खाली नहीं था। मेदांता अस्पताल में फोन करने पर पता चला बेड खाली नहीं है। 29 अगस्त को मरीज को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां पर ऑक्सीजन सेचुरेशन 30 फीसदी बताया गया। 29 अगस्त की सुबह ही उनका ऑक्सीजन लेवल 80 से 87 फीसदी हो गया था, लेकिन उसी दिन उसकी मौत हो गई। मरीज का अस्पताल स्टे केवल एक ही दिन पाया गया।

दूसरे दिन संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी; देश में 53.98 लाख केस

नई दिल्ली. देश में कोरोना मरीजों की संख्या 53 लाख 98 हजार 230 हो गई है। पिछले 24 घंटे के अंदर रिकॉर्ड 12 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई। एक दिन में टेस्टिंग का ये सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इन 12 लाख लोगों में 7.66% यानी 92 हजार 574 नए मरीज बढ़े। अब तक 42 लाख 99 हजार 724 लोग ठीक हो चुके हैं। शनिवार को 94 हजार 384 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अच्छी बात है कि यह लगातार दूसरा दिन था जब देश में संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी। इसी के साथ भारत अब मरीजों के ठीक होने के मामले में पहले नंबर पर हो गया है। यहां अब तक अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा मरीज ठीक हुए हैं। अमेरिका अब दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। (भारत में 100 संक्रमितों में से 79 रिकवर, पूरी खबर पढ़ें) मरने वालों का आंकड़ा 86 हजार के पार शनिवार को देश में 1,149 संक्रमितों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी के साथ मरने वालों की संख्या अब 86 हजार 774 हो गई है। अभी 10 लाख 10 हजार 975 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है। ये मरीज घर में रहकर या फिर अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें करीब 9 हजार मरीजों की हालत गंभीर है। कल से कोरोना वैक्सीन का आखिरी ट्रायल शुरू होगा कोरोना के लिए बनाए जा रहे ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का आखिरी और फेज-3 ट्रायल सोमवार से पुणे में शुरू हो जाएगा। इसके लिए 150 से 200 वालंटियर्स डोज लेने के लिए तैयार हैं।

सरकारी अस्पताल में मिला नवजात का शव, फ्रीजर में रखकर भूला स्टाफ

इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय अस्पताल के मुर्दाघर में हाल ही में एक लावारिस शव के स्ट्रैचर में ही सड़ जाने और कंकाल बन जाने का मामला सामने आया था. जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया में वायरल हुई थीं. ऐसे में जहां एक तरफ मामले की जांच भी पूरी नहीं हो पायी वहीं गुरुवार को एक अज्ञात बच्चे का शव मुर्दाघर में एक बक्से में बंद मिलने से हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि यहां बीते पांच दिन से एक बच्चे का शव मर्चुरी रूम के फ्रीजर में रखा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवजात बच्चे की मौत 5 दिन पहले यानी कि 12 सितंबर हो चुकी थी. ऐसे में पांच दिन से शव उसी हालत में फ्रीजर में पड़ा रहा. ऐसे में माना जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन बच्चे का शव फ्रीजर में रखकर भूल गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि बच्चे को 11 सितंबर को किसी ने अलीराजपुर में छोड़ दिया था. जिसे एक सोशल वर्कर उठाकर अस्पताल में भर्ती कर गया. उन्होंने बताया कि उसी दिन इस बच्चे की मौत भी हो गयी थी जिसे सीएमओ को भी बताया गया था. लावारिस शव के सड़ जाने पर आयोग ने मांगी रिपोर्ट वहीं स्ट्रैचर पर शव के सड़ जाने और कंकाल बन जाने के मामले में एक अधिकारी ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) के मुर्दाघर में स्ट्रैचर पर रखे गये लावारिस शव के सड़ जाने को लेकर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और इस सरकारी अस्पताल के अधीक्षक से चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. ‘लापरवाही के चलते लावारिस शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका’ अधिकारी ने बताया कि आयोग ने मीडिया की खबरों पर इस घटना का संज्ञान लिया है. खबरों में कहा गया है कि सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों की कथित लापरवाही के चलते लावारिस शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका जिससे यह मुर्दाघर में स्ट्रैचर पर पड़े-पड़े सड़ गया और कंकाल बन गया. प्रबंधन ने दिये जांच के आदेश इस बीच, सोशल मीडिया के जरिये मामले का खुलासा होने पर सकते में आये एमवायएच प्रबंधन ने जांच के आदेश दिये हैं. अस्पताल के अधीक्षक प्रमेंद्र ठाकुर ने बताया, “हमने लावारिस शव सड़ने के मामले की जांच के लिये समिति बनायी है. जांच में एमवायएच का जो भी कर्मचारी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.”

नाक बहने, छींक आने का मतलब कोरोना नहीं, जानें किस आयु में दिखाई देते हैं कौन लक्षण

नई दिल्ली . बच्चे को नाक बहने, बार-बार छींक आने या सीने में जकड़न की शिकायत हो तो घबराएं नहीं। जरूरी नहीं कि ये लक्षण आपके जिगर के टुकड़े के कोरोना संक्रमण की जद में आने का संकेत हों। मुमकिन है कि वह साधारण सर्दी-जुकाम या फ्लू से जूझ रहा हो। किंग्स कॉलेज लंदन के शीर्ष संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर टिम स्पेक्टर ने ‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है। स्पेक्टर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे सर्दी-जुकाम से परेशान होकर बच्चे को कोरोना जांच के लिए अस्पताल लेकर न दौड़ें। इससे न सिर्फ टेस्टिंग की प्रक्रिया में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है, बल्कि संक्रमितों की समय रहते पहचान कर वायरस के प्रसार पर लगाम लगाने की कोशिशें भी प्रभावित हो रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना जांच करवाने वाले कुल संदिग्धों में 25 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें टेस्टिंग की जरूरत ही नहीं थी। मामूली सर्दी-जुकाम होने पर भी उन्होंने मन की तसल्ली के लिए कोरोना जांच करवाई। हर आयुवर्ग में अलग लक्षण -स्पेक्टर ने बताया कि सार्स-कोव-2 वायरस से संक्रमित अलग-अलग उम्र के मरीजों में अलग-अलग लक्षण उभर सकते हैं। 18 साल से कम और 65 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में बुखार, खांसी और सूंघने-स्वाद चखने की क्षमता कमजोर पड़ जाए, यह जरूरी नहीं जबकि इन तीनों ही लक्षणों को व्यक्ति के कोरोना पीड़ित होने की मुख्य निशानी करार दिया जाता है। ऐसे में नाक बहने या छींक आने मात्र पर कोरोना जांच के लिए दौड़ने का कोई फायदा नहीं है। यह समय और संसाधनों की बर्बादी भर है। 52% बच्चों को बुखार-जुकाम नहीं -‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्रिटेन में 18 साल से कम उम्र के 52 फीसदी संक्रमितों में सर्दी-जुकाम, बुखार और सूंघने की शक्ति कमजोर पड़ने जैसे लक्षण नहीं पनपे। वहीं, 33 प्रतिशत बच्चों में तो ऐप में दर्ज 20 में से एक भी लक्षण नहीं दर्ज किए गए। इसका मतलब यह है कि वे ‘एसिम्टोमैटिक’ थे। उनकी पहचान संक्रमित के संपर्क में आने के बाद हुई जांच के चलते की जा सकी। ‘कोविड सिम्पटम स्टडी ऐप’ पर ढाई लाख बच्चों का डाटा दर्ज है। इनमें 198 में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। 90% स्वैब जांच के नतीजे नेगेटिव -ब्रिटिश सरकार की ओर से जारी आंकड़ों पर गौर करें तो देश में रोजाना दो लाख से अधिक संदिग्धों के स्वैब नमूने इकट्ठे किए जा रहे हैं। इससे जांच प्रक्रिया में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों का काम धीमा पड़ रहा है और रिपोर्ट में देरी की शिकायत लगातार बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि लगभग 90 फीसदी मामलों में स्वैब जांच की रिपोर्ट नेगेटिव आती है। यानी लोग जल्दबाजी में कोरोना जांच करवा रहे हैं। इससे जो वास्तविक रूप में संक्रमित हैं, उन लोगों की पहचान में देरी हो रही है और कोरोना की रोकथाम में मुश्किल आ रही है। बच्चों में सबसे आम लक्षण- -55% बच्चों को थकान, सुस्ती की शिकायत होती है -54% में सिरदर्द और चक्कर जैसे लक्षण उभरते हैं -49% तेज बुखार और बदनदर्द का सामना करते हैं -38% के गले में खराश होती है, 35% की भूख मिट जाती है व्यस्कों में संक्रमण की निशानी -87% वयस्कों में थकान, सुस्ती की समस्या पनपती है -72% को सिरदर्द और चक्कर की शिकायत सताती है -60% की सूंघने, स्वाद महसूस करने की क्षमता खो जाती है -54% लगातार खांसी तो 49% गले में खराश की समस्या से परेशान रहते हैं

खुशखबरी: धीमी गति से रूप बदल रहा कोरोना अब और ज्यादा संक्रामक नहीं होगा

लंदन . दुनियाभर में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस अब धीमी गति से अपना रूप बदल रहा है। ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन के शोध से यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक वायरस के आनुवांशिक तत्वों में हुआ एक भी बदलाव उसे और ज्यादा संक्रामक नहीं बनाता। इससे साफ है कि वायरस फैलने की गति और घातक क्षमता में कमी आई है। जबकि पूर्व के शोध में कहा गया था कि भले वायरस धीमी गति से फैल रहा हो पर ज्यादा घातक हो गया है। टीका बनने पर असरकारी होगा- शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर कोविड-19 वायरस में म्यूटेशन या रूप परिवर्तन बहुत धीमा हो रहा है तो इसका फायदा कोविड का टीका तैयार होने पर मिलेगा। यह टीका ज्यादा लंबे वक्त तक लोगों को वायरस से सुरक्षा दे सकेगा क्योंकि वायरस समय गुजरने के साथ और शक्तिशाली नहीं हो रह पाएगा। वायरस अब स्थायी रूप में मौजूद- कैंब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े और शोध के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. जेफ्री स्मिथ का कहना है कि वायरस रफ्तार और क्षमता के लिहाज से अब ज्यादा स्थायी है। इसकी आसानी से पहचान के साथ सही ढंग से उपचार हो सकता है। रॉयल सोसायटी के साइंस इन इमरजेंसी टास्क फोर्स ने इस अध्ययन को प्री-प्रिंट के रूप में ऑनलाइन प्रकाशित किया है। घातक नहीं बन रही बीमारी- शोधकर्ताओं ने जीनोम शृंखला का अध्ययन कर पाया कि धीमी गति से हो रहे रूप परिवर्तन के बावजूद वायरस के अंदर ऐसे गुण विकसित नहीं हो रहे हैं, जिससे वायरस का नया स्ट्रेन किसी दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ले। ऐसे में शोधकर्ताओं का भरोसा है कि यह वायरस अब बीमारी को और ज्यादा संक्रामक और जानलेवा नहीं बना रहा है। प्रयोगशाला में तैयार नहीं हुआ वायरस- वैज्ञानिकों ने वायरस की उत्पत्ति का भी अध्ययन किया। उनका कहना है कि वायरस किसी प्रयोगशाला में तैयार नहीं हुआ। सार्सकोव-2 व अन्य वायरसों की आनुवांशिक प्रकृति के बीच इतना अंतर है कि इसे प्रयोगशाला में बनाना असंभव है। वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन में फैले कोविड-19 वायरस के स्ट्रेन की ट्रेसिंग की। उन्होंने पाया कि वायरस के 97 प्रतिशत निकटतम गुण वाला एक अन्य वायरस ‘आरएटीजी13’ चीन के चमगादड़ों में मौजूद था। हालांकि दोनों वायरस के आनुवांशिक तत्वों की जांच में काफी भिन्नता मिली। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 और कोरोना प्रजाति के अन्य वायरस में इतना ज्यादा अंतर है कि इसे लैब में तैयार करना संभव नहीं है। पहले का दावा- नौ गुना तेजी से फैल रहा संक्रमण- जुलाई में सेल पत्रिका में छपे शोध में कहा गया कि वायरस का नया रूप ‘जी614’ पूरी दुनिया में तेजी से संक्रमण फैला रहा है, हालांकि यह संक्रमण पहले के स्ट्रेन की तुलना में ज्यादा घातक नहीं है। कैलिफोर्निया के ला जोला इंस्टीट्यूट फॉर इम्यूनोलॉजी के शोध में कहा गया कि नया स्ट्रेन नौ गुना तेजी से दुनिया में वायरस को फैला रहा है। मार्च की शुरूआत में इसकी मौजूदगी यूरोप में थी और मार्च के अंत तक यह अमेरिका तक फैल चुका था। फरवरी में शुरू हुआ था म्यूटेशन – कोरोना के आनुवांशिक तत्वों में आंशिक बदलाव या म्यूटेशन सबसे पहले फरवरी में देखा गया। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यूरोप से अमेरिका में वायरस का बदला हुआ स्वरूप फैला। रॉयल सोसायटी के शोध का महत्व- रॉयल सोसायटी ऑफ लंदन की स्थापना 1660 में हुई थी, यह ब्रिटेन की सबसे पुरानी वैज्ञानिक संस्था है। कोरोना संक्रमण के इस आपातकाल में रॉयल सोसायटी एक विशेष टास्क फोर्स बनाकर इस वायरस से जुड़े अध्ययन कर रहा है। इस ताजा शोध की अभी समीक्षा होना बाकी है, जिसके बाद इसे जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा। पर सोसायटी से जुड़े प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के अध्ययन को इस क्षेत्र से जुड़े अन्य वैज्ञानिक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं। सोसायटी ने सबसे पहले बताई थी मास्क की जरूरत- रॉयल सोसायटी उन वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है, जिससे सबसे पहले कहा था कि सिर्फ तालाबंदी से संक्रमण नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों को फेसमास्क लगाने को प्रेरित किया जाए और वे शारीरिक दूरी अपनाएं।

भोपाल में रोज 200-250 नए केस, 15 हजार के करीब पहुंचा आंकड़ा

भोपाल। राजधानी भोपाल में कोरोना का कहर थम नहीं रहा है। यहां पर हर रोज कोरोना के 200-250 नए केस मिल रहे हैं। बुधवार को भी यहां पर 245 नए कोरोना मरीज मिले। ऐसे में सरकार कोविड नियंत्रण के लिए स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। इसमें इंटर्न, मेडिकल स्टूडेंट, प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स, आयुष डॉक्टर और नर्सिंग स्टूडेंट को शामिल किया जाएगा। इसमें कोरोना की रोकथाम और मरीजों के मन से भय को कैसे दूर किया जाए। इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही जागरुकता के लिए नए-नए तरीके अपनाने पर भी जोर दिया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि शहर के 24 प्राइवेट अस्पतालों में कोविड का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत को देखते हुए अन्य निजी अस्पतालों को भी कोविड सेंटर बनाएंगे। अस्पतालों में आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ऑक्सीजन सप्लाई की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नये अस्पतालों को शामिल करते समय विशेष रूप से देख रहे हैं कि वहां पर ऑक्सीजन की निर्बाध सप्लाई हो रही है या नहीं। हमीदिया में कोविड के लिए 50 बेड और बढ़ेंगे आयुष्मान योजना के तहत इम्पैनल्ड 61 अस्पतालों की टोटल क्षमता 5894 में से 1184 बेड कोविड के लिए डेडिकेटेड किए जाएंगे। हर अस्पताल के साथ जिला प्रशासन के प्रतिनिधि कोऑर्डिनेट करेंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द ही कोविड मरीजों के लिए 50 बेड और बढ़ाए जाएंगे। साथ ही टीबी अस्पताल में 10 बेड का आईसीयू भी शुरू होगा, इससे इसकी क्षमता और बढ़ जाएगी। जूनियर डॉक्टरों के लिए इलाज के लिए जीवन रक्षक दवाइयां दी जाएंगी जीएमसी के जूनियर डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की मांग को सरकार ने मान ली है। मंत्री सारंग ने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स के संक्रमित होने पर उनके कोविड उपचार के लिए रि-इन्वेस्टमेंट मोड पर जीवन-रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने गांधी मेडिकल कॉलेज में सुव्यवस्थित कैंटीन और रिक्रिएशन सेंटर बनाने के निर्देश दिए। 5 सरकारी और 10 प्राइवेट अस्पतालों में हो रहा है इलाज राजधानी में कोरोना का इलाज पांच सरकारी और 10 प्राइवेट अस्पतालों में किया जा रहा है। इसमें एम्स, जीएमसी, जे.पी. हॉस्पिटल, कस्तूरबा हॉस्पिटल और मिलिट्री हॉस्पिटल हैं। वहीं अधिग्रहित किए गए अस्पतालों में चिरायु, जेके अस्पताल सहित पीपुल्स, बंसल, आरकेडीएफ, भोपाल केयर हॉस्पिटल, केयर मल्टी स्पेशियलिटी, निर्मल प्रेम मूर्ति हॉस्पिटल, करोंद मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एबीएम हॉस्पिटल में इलाज किया जा रहा है। अब 24 अस्पतालों में कोरोना मरीजों का मुफ्त इलाज होगा आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड जिले के 24 अस्पतालों में 20 प्रतिशत बेड कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए आरक्षित करा दिए हैं। यहां मरीजों को नि:शुल्क इलाज मिलेगा। इलाज की राशि सरकार देगी। वर्तमान में 12 से अधिक अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड लोगों के इलाज कर रहे हैं। यहां अभी तक 61 मरीज भर्ती हैं और कोरोना का इलाज करा रहे हैं। दरअसल, प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। गुरुवार से 6 व 19 सितंबर से 6 अन्य अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड वाले लोगों को कोरोना का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा। सभी 24 अस्पतालों में 300 से अधिक ऑक्सीजन बेड उपलब्ध होंगे। इन अस्पतालों में मिलेगा इलाज कोलार क्षेत्र में – अक्षय हॉस्पिटल, नोबेल, नर्मदा ट्रामा सेंटर, आरकेडीएफ हॉस्पिटल, पुष्पांजलि, सिद्धांता अस्पताल और सहारा हॉस्पिटल। हुजूर क्षेत्र में – रुद्राक्ष मल्टी सिटी हॉस्पिटल और लीलावती हाॅस्पिटल। गोविंदपुरा क्षेत्र में- केयर मल्टी और अनंतश्री हॉस्पिटल। बैरागढ़ क्षेत्र में – एबीएम, ग्रीन सिटी, एलबीएस, राजदीप, सेंट्रल हॉस्पिटल, गुरु आशीष हॉस्पिटल, जवाहरलाल कैंसर हॉस्पिटल, माहेश्वरी, सर्वोत्तम, सिल्वर लाइन हॉस्पिटल। टीटी नगर क्षेत्र में- पीपुल्स हॉस्पिटल। एमपी नगर में – सहारा हॉस्पिटल और पालीवाल हॉस्पिटल।

वैक्सीन का काम कर रहा मास्क

इंटरनेशनल जर्नल की रिपोर्ट में दावा- 90%वायरस रोक लेता है मास्क और इस तरह से मास्क वैक्सीन का काम कर रहा  | यह दावा इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की हाल ही में प्रकाशित एक ताजा शोध में किया गया है। इस रिपोर्ट को तैयार किया है अमेरिका के सैनफ्रांसिस्को के स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर (मेडिसिन) मोनिका गांधी और एपिडियोमॉलिजी एंड बायोइन्फोमैटिक्स के प्रोफेसर जॉर्ज रदरफोर्ड ने। रिपोर्ट कहती है कि फेसमास्क काफी हद तक वैक्सीन जैसा ही काम कर रहा है।

सलमान खान की पेशी

काले  हिरण शिकार एवं  आर्म्स एक्ट प्रकरण में फिल्म अभिनेता सलमान खान को जिला एवं सेशन न्यायालय जोधपुर ने 28 सितम्बर को पेश होने के आदेश दिए हैं। मामले में आज सुनवाई चल रही थी। आज सलमान की याचिका पर काला हिरण शिकार प्रकरण व राज्य सरकार की याचिका पर आर्म्स एक्ट प्रकरण की सुनवाई पूरी नहीं हो पाई और सलमान को अगली सुनवाई तिथि पर खुद कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया।

महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों का आंकड़ा आज 10 लाख के पार

महाराष्ट्र में मरीजों का आंकड़ा आज 10 लाख के पार हो जाएगा, दुनिया में 4 देश हैं जहां अब तक इतने संक्रमित मिले; देश में अब तक 45 लाख केस से अधिक  है | महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की संख्या ज्यादा  होने लगी  है। आज शाम तक यहां संक्रमितों का आंकड़ा 10 लाख  पार हो गया । अभी तक भारत समेत दुनिया के चार देश ही हैं जहां 10 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें अमेरिका, ब्राजील और रूस शामिल है। राज्य में अब तक 41 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी है और इनमें 20% लोग संक्रमित मिले। यहां हर 10 लाख की आबादी में 32 हजार  लोगों की जांच हो रही है।

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