Destruction in the name of development in Nalkheda! Blasting near Devilok shakes the foundation of a temple – why is the administration silent?
चंदा कुशवाह संवाददाता
नलखेड़ा। एक ओर अधिकारी कागज़ों पर “विकास” के दावे कर रहे हैं, वहीं जमीन पर विनाश की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।
नलखेड़ा में विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी देवी मंदिर के पीछे बनाए जा रहे पुल निर्माण में खुलेआम ब्लास्टिंग की जा रही है — और यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा लगातार पत्थर तोड़ने के लिए विस्फोटक (ब्लास्टिंग) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इतना कंपन होता है कि मंदिर की दीवारें तक हिल जाती हैं।
यह वही मंदिर है, जहाँ लाखों श्रद्धालु हर साल अपनी आस्था लेकर पहुँचते हैं।
पर अब सवाल ये है —
- क्या यह “विकास” है या माँ के धाम के साथ खिलवाड़?
- क्या SDM, जो स्वयं माँ बगलामुखी मंदिर समिति के अध्यक्ष हैं, इन गतिविधियों से बेखबर हैं?
- या फिर सब कुछ उनकी जानकारी और मौन स्वीकृति से हो रहा है?
टेंडर किसने जारी किया? ब्लास्टिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई?
और सबसे बड़ा सवाल —
इतिहासिक मंदिर की सुरक्षा का सर्वे कराया भी गया या नहीं?
इन सवालों का जवाब न तो निर्माण एजेंसी दे रही है, न ही प्रशासन के पास कोई स्पष्ट बयान है।
स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि अगर यही “विकास” है, तो फिर यह मंदिर की नींव हिला देने वाला विकास है, न कि नलखेड़ा का गौरव बढ़ाने वाला।
लोगों ने आरोप लगाया है कि
“यह पूरा खेल भ्रष्टाचार की ब्लास्ट के नीचे दबा हुआ है — जहाँ पैसे की चमक ने श्रद्धा की दीवारें तक हिला दी हैं।”
अब वक्त आ गया है कि
- प्रशासन जवाब दे कि देवी के धाम में धमाका करने की अनुमति किसने दी,
- SDM बताएं कि उनकी निगरानी में मंदिर की दीवारों तक क्यों हिल रही हैं,और
- निर्माण विभाग बताए कि क्या किसी की जेब भरने के लिए माँ का धाम दांव पर लगाया जा रहा है?
अगर यही विकास की परिभाषा है, तो जनता पूछेगी —
“देवीलोक में विकास नहीं, विनाश हो रहा है — और प्रशासन तमाशा देख रहा है।”