Lawyers open front against alleged behaviour of SDM, boycott and strike in Susner
संवाददाता चंदा कुशवाह
सुसनेर। सुसनेर अधिवक्ता संघ ने एसडीएम सर्वेश यादव के खिलाफ सर्वसम्मति से बहिष्कार प्रस्ताव पारित करते हुए उनकी अदालत में लंबित किसी भी प्रकरण में पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अधिवक्ता हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि यह कदम सम्मानजनक कार्य वातावरण और न्यायिक गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है।
संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एसडीएम का व्यवहार लंबे समय से वकीलों के प्रति अनुचित रहा है तथा कई अवसरों पर विवाद की स्थिति बनी। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया, जिसके चलते सामूहिक बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा एवं एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताते हैं, जिससे अधिवक्ताओं के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर असंतोष पैदा हुआ।
अधिवक्ता संघ के अनुसार, इस निर्णय को नलखेड़ा, सोयत, आगर मालवा और बड़ौद के अधिवक्ता संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। संघ का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर समाज और न्याय व्यवस्था में वकीलों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनका कहना है कि अधिवक्ता केवल मुकदमों की पैरवी करने वाले पेशेवर नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा, विधिक जागरूकता और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। न्यायालय और जनता के बीच सेतु के रूप में अधिवक्ता व्यवस्था की पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण को बनाए रखना पूरे न्याय तंत्र के हित में बताया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीएम या प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल यह मुद्दा स्थानीय न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।








