Maa Baglamukhi Temple Dispute: Pandits enraged by SDM’s dictatorship, stopped havan and forced the administration to bow down
संवाददाता चंदा कुशवाह
नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में उत्पन्न विवाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर के पंडितों का आरोप है कि सुसनेर के एसडीएम ने लगातार मंदिर के धार्मिक कार्यों में अनावश्यक दखल दिया, बिना किसी समन्वय के आदेश थोपे और पूजा-पद्धति को बाधित किया।

पंडितों का कहना है कि एसडीएम का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण रहा और उन्होंने बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर पंडितों और मंदिर प्रबंधन पर दबाव बनाते रहे, जिससे भय और असंतोष का माहौल बना। इस रवैये से आक्रोशित होकर पंडितों ने हवन-अनुष्ठान बंद कर दिया और खुली चेतावनी दी कि यदि एसडीएम को तत्काल नहीं हटाया गया तो उन्हें जूतों की माला पहनाकर मंदिर परिसर से बाहर छोड़ा जाएगा। स्थिति के बिगड़ते ही प्रशासन पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद एडीएम ने सख्ती दिखाते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से मंदिर से जुड़े सभी कार्यों से मुक्त कर दिया। इस कार्रवाई को पंडितों ने प्रशासन की मजबूरी में उठाया गया कदम बताया और कहा कि यदि समय रहते एसडीएम को नहीं रोका जाता तो मंदिर की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंचता।