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विवाद, बहिष्कार और अंत—SDM सर्वेश यादव की विदाई, नए अध्याय की शुरुआत!

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Controversy, boycott and end – SDM Sarvesh Yadav’s farewell, beginning of a new chapter! संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा। प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा का विषय बने सुसनेर के SDM सर्वेश यादव को आखिरकार उनके पद से हटा दिया गया है। शासन ने उनकी जगह किरण बरबड़े को सुसनेर का नया SDM नियुक्त किया है। क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद और विरोध की स्थिति बनी हुई थी, जिसके बाद यह प्रशासनिक बदलाव हुआ है।दरअसल, SDM सर्वेश यादव का कार्यकाल शुरू से ही विवादों से घिरा रहा। सबसे पहले मामला विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा से जुड़ा सामने आया, जहां मंदिर के पुजारियों ने उनके व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताते हुए उनका बहिष्कार कर दिया था। मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन कलेक्टर आगर ने हस्तक्षेप करते हुए सर्वेश यादव को मंदिर से जुड़े सभी दायित्वों से अलग कर दिया और यह जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर कमल मंडलोई को सौंप दी गई।इसके बाद एक और विवाद उस समय सामने आया जब सुसनेर के अधिवक्ताओं ने SDM कोर्ट का बहिष्कार कर दिया। अधिवक्ताओं का आरोप था कि SDM सर्वेश यादव द्वारा उनसे बातचीत के दौरान असभ्य व्यवहार और कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस मुद्दे को लेकर वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह विरोध केवल सुसनेर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नलखेड़ा और सोयत तहसील के अधिवक्ताओं ने भी समर्थन देते हुए उनकी कोर्ट में पेशी देने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक हलकों में यह मामला लगातार चर्चा में बना रहा।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा होती रही कि SDM सर्वेश यादव अक्सर खुद को उच्च राजनीतिक संपर्कों वाला अधिकारी बताते थे। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन प्रशासनिक दफ्तरों और स्थानीय हलकों में यह बातें लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।लगातार बढ़ते विवाद, मंदिर प्रकरण और अधिवक्ताओं के विरोध के बाद आखिरकार शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करते हुए सर्वेश यादव को सुसनेर से हटा दिया और उनकी जगह किरण बरबड़े को नई SDM के रूप में पदस्थ किया है।नई SDM की नियुक्ति के बाद क्षेत्र में यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब प्रशासन और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और लंबे समय से चल रहे विवादों पर विराम लगेगा।

नलखेड़ा में अवैध गांजा खेती पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 227 पौधे जब्त, पिता- पुत्र गिरफ्तार

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Police crack down on illegal cannabis cultivation in Nalkheda, seize 227 plants, arrest father and son संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत नलखेड़ा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गेहूँ की फसल की आड़ में उगाई जा रही गांजे की खेती का भंडाफोड़ करते हुए 227 गांजा पौधे जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में लगभग 10.846 किलोग्राम हरा गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद किया गया है। साथ ही दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह के निर्देशन में जिलेभर में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रविन्द्र कुमार बोयट व एसडीओपी सुसनेर देवनारायण यादव के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी नागेश यादव के नेतृत्व में नलखेड़ा पुलिस ने यह कार्रवाई की। मुखबिर सूचना पर हुई कार्रवाई पुलिस को 27 फरवरी 2026 को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम पचलाना निवासी पुरालाल भिलाला और उसका पुत्र लखन भिलाला द्वारा लसुल्ड़िया गोपाल स्थित शासकीय भूमि पर, जो उनके कब्जे में है, गेहूँ की फसल के बीच अवैध रूप से गांजा के पौधे लगाए गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मौके पर दबिश दी। पुलिस को देखते ही दो व्यक्ति भागने का प्रयास करने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। पूछताछ में उन्होंने अपना नाम पुरालाल पिता शंकरलाल भिलाला (60 वर्ष) तथा लखन पिता पुरालाल भिलाला (33 वर्ष) निवासी ग्राम पचलाना बताया। गेहूँ की फसल के बीच उगाए गए थे गांजा पौधे खेत की तलाशी के दौरान गेहूँ की फसल के बीच अवैध रूप से लगाए गए गांजा के पौधे पाए गए। पुलिस ने मौके से 227 छोटे-बड़े हरे पत्तेदार गांजा पौधे उखाड़कर जब्त किए। इलेक्ट्रॉनिक तोलकांटे से तौल करने पर इनका कुल वजन 10.846 किलोग्राम पाया गया। एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ थाना नलखेड़ा में अपराध क्रमांक 73/2026 दर्ज किया है। आरोपियों के विरुद्ध धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है। पुलिस अब आरोपियों से गांजा की बिक्री और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ कर रही है। इन पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका इस कार्रवाई में थाना प्रभारी नागेश यादव, सउनि दरबार सिंह जादोन, सउनि डीसी भिलाला, प्रधान आरक्षक शंभु सिंह जाट, प्रधान आरक्षक ललित सारस्वत, प्रधान आरक्षक नरेन्द्र भाटी, आरक्षक राजेश दांगी, आरक्षक अतेन्द्र, आरक्षक रोड़ीलाल दांगी सहित अन्य पुलिस स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ीं? नीलकंठ महादेव मंदिर की शासकीय भूमि पर दोबारा कब्जे की कोशिश

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Court order flouted? Attempt to reclaim government land belonging to the Neelkanth Mahadev Temple संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर के सर्वे क्रमांक 304 एवं 305 स्थित शासकीय माफी छतरी नीलकंठ महादेव मंदिर की भूमि (रकबा 0.857 हेक्टेयर), जिसका प्रबंधन कलेक्टर महोदय के अधीन है, एक बार फिर अतिक्रमण के कारण चर्चा में है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेवाड़ा विश्वकर्मा सामाजिक विभाग एवं सेवा समिति द्वारा मध्य प्रदेश भूमि राजस्व संहिता की धारा 248 के अंतर्गत तहसील न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई थी। सुनवाई उपरांत तहसील न्यायालय ने नलखेड़ा निवासी पवन विश्वकर्मा सहित अन्य व्यक्तियों को मंदिर की शासकीय भूमि से बेदखल करने का आदेश पारित किया था। न्यायालय ने संबंधित पक्षों पर ₹5000-₹5000 का अर्थदंड भी अधिरोपित किया था तथा पटवारी को अतिक्रमण हटवाकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान में प्रकरण क्रमांक 13/2023 में न्यायालय द्वारा उक्त सर्वे क्रमांक 304 एवं 305 पर स्थगन आदेश प्रभावी है। बताया जाता है कि संबंधित पक्ष द्वारा न्यायालय में अंडरटेकिंग प्रस्तुत की गई थी कि प्रकरण लंबित रहने तक न तो स्वयं निर्माण करेंगे और न ही किसी अन्य से करवाएंगे। इसके बावजूद विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार बीते सोमवार को पवन, जगदीश, कमल एवं घनश्याम आदि द्वारा पुनः निर्माण की तैयारी एवं गतिविधियाँ प्रारंभ कर दी गईं। आरोप है कि अन्य व्यक्तियों के साथ सांठगांठ कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के आदेश एवं स्थगन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा अवमानना की स्थिति में संबंधितों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। अब पूरे प्रकरण में प्रशासनिक कदमों पर नगरवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। न्यायालय के आदेश और ज़मीनी हकीकत के बीच खिंची यह रेखा कब स्पष्ट होगी, यह आने वाले दिनों में तय होगा।

नलखेड़ा में वकीलों का बड़ा ऐलान एसडीएम सर्वेश यादव के कोर्ट का बहिष्कार, सुसनेर में पहले से हड़ताल; दो तहसीलों में थमा न्यायिक काम

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Lawyers in Nalkheda make a major announcement, boycotting SDM Sarvesh Yadav’s court; Susner already on strike; judicial work halted in two tehsils. संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा ! न्यायालयीन माहौल को लेकर बढ़ते विवाद के बीच नलखेड़ा अधिवक्ता संघ ने बड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार को हुई बैठक में संघ ने सर्वसम्मति से सर्वेश यादव के न्यायालय के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित कर दिया। वकीलों का आरोप है कि एसडीएम का व्यवहार न्यायालय में संतोषजनक नहीं है, जिससे अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों ने कहा कि न्यायालय का वातावरण गरिमामय होना चाहिए। यदि अधिवक्ताओं को सम्मानजनक माहौल नहीं मिलता, तो सामूहिक निर्णय लेना मजबूरी बन जाता है। सुसनेर में 13 फरवरी से हड़तालइसी मुद्दे को लेकर सुसनेर में 13 फरवरी से वकीलों की हड़ताल जारी है। अब नलखेड़ा में भी बहिष्कार का प्रस्ताव पारित होने के बाद आंदोलन दो तहसीलों तक पहुंच गया है। इससे राजस्व और न्यायालयीन कार्य प्रभावित होने लगे हैं।काम करने पर कार्रवाई की चेतावनीअधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि बहिष्कार के दौरान यदि कोई वकील एसडीएम कोर्ट में पेश होता है या कार्य करता है, तो उसके खिलाफ संघ के नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे संगठनात्मक एकता का विषय बताया गया है। प्रशासन से दखल की मांगसंघ ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि जब तक उचित कार्रवाई नहीं होती, बहिष्कार जारी रहेगा।अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को कैसे सुलझाता है और न्यायालयीन कार्य को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

एसडीएम के कथित व्यवहार के खिलाफ वकीलों का खुला मोर्चा, सुसनेर में बहिष्कार और हड़ताल

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Lawyers open front against alleged behaviour of SDM, boycott and strike in Susner  संवाददाता चंदा कुशवाह सुसनेर। सुसनेर अधिवक्ता संघ ने एसडीएम सर्वेश यादव के खिलाफ सर्वसम्मति से बहिष्कार प्रस्ताव पारित करते हुए उनकी अदालत में लंबित किसी भी प्रकरण में पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अधिवक्ता हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे न्यायालयीन कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि यह कदम सम्मानजनक कार्य वातावरण और न्यायिक गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एसडीएम का व्यवहार लंबे समय से वकीलों के प्रति अनुचित रहा है तथा कई अवसरों पर विवाद की स्थिति बनी। अधिवक्ताओं का कहना है कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया, जिसके चलते सामूहिक बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा एवं  एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताते हैं, जिससे अधिवक्ताओं के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर असंतोष पैदा हुआ। अधिवक्ता संघ के अनुसार, इस निर्णय को नलखेड़ा, सोयत, आगर मालवा और बड़ौद के अधिवक्ता संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। संघ का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर समाज और न्याय व्यवस्था में वकीलों की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनका कहना है कि अधिवक्ता केवल मुकदमों की पैरवी करने वाले पेशेवर नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा, विधिक जागरूकता और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। न्यायालय और जनता के बीच सेतु के रूप में अधिवक्ता व्यवस्था की पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के सम्मान और स्वतंत्र कार्य वातावरण को बनाए रखना पूरे न्याय तंत्र के हित में बताया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीएम या प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल यह मुद्दा स्थानीय न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

नलखेड़ा में धूमधाम से शिव विवाह की तैयारियां तेज, हल्दी रस्म श्रद्धा के साथ संपन्न

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Preparations for Shiva Vivah in full swing in Nalkheda, Haldi ceremony completed with devotion संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। नगर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला भगवान शिव का पारंपरिक विवाह महोत्सव इस वर्ष भी भक्ति और उत्साह के वातावरण में प्रारंभ हो गया है। आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होने वाले शिव विवाह से पूर्व आज गुप्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में हल्दी की रस्म विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न की गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। हल्दी कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए और भगवान शिव को हल्दी अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा नगर की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर को फूलों और रंगोली से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर आगामी शिव विवाह महोत्सव के सफल आयोजन की प्रार्थना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि शिव विवाह को लेकर नगर में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। विवाह शोभायात्रा, भजन संध्या और धार्मिक अनुष्ठानों सहित कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग दिया जा रहा है, जिससे आयोजन को भव्य स्वरूप दिया जा सके। नगरवासियों में शिव विवाह को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत करने का भी अवसर है।

देवी लोक की उड़ान, पार्किंग में दलदल का पड़ाव: नलखेड़ा में विकास बनाम कीचड़

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Flight to the Divine, Parking Lot to the Swamp: Development vs. Mud in Nalkheda संवाददाता चंदा कुशवाहनलखेड़ा । इन दिनों “देवी लोक” निर्माण की चर्चाएं आसमान छू रही हैं। योजनाओं की फाइलें इतनी ऊंची उड़ान भर रही हैं कि लगता है जल्द ही शहर अंतरिक्ष पर्यटन की सूची में शामिल हो जाएगा। लेकिन ज़मीन पर उतरते ही हकीकत ऐसी फिसलन भरी है कि हर बारिश के बाद पार्किंग स्थल कुश्ती का अखाड़ा बन जाता है, जहां गाड़ियां नहीं, संतुलन गिरता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही पार्किंग क्षेत्र का रंग “मिट्टी ब्राउन” हो जाता है और जूते-चप्पल “कीचड़ संस्करण 2.0” में अपग्रेड हो जाते हैं। श्रद्धालु और आम नागरिक दोनों ही मजबूरन इस दलदली रास्ते से गुजरते हैं, मानो देवी लोक से पहले “कीचड़ लोक” की परीक्षा देनी अनिवार्य हो।नगर के एक दुकानदार ने व्यंग्य करते हुए कहा,“देवी लोक बने या न बने, पार्किंग में कीचड़ का स्थायी स्मारक पहले तैयार हो गया है।”वहीं एक राहगीर का कहना है कि विकास की बातें सुनकर उम्मीद जगती है, लेकिन हर बारिश के बाद वही पुराना दृश्य देखकर लगता है कि योजनाएं शायद बादलों के साथ उड़ जाती हैंऔर ज़मीन तक पहुंचते-पहुंचते गल जाती हैं।नगरवासियों की मांग है कि देवी लोक जैसी बड़ी परियोजना से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। कम से कम इतना तो हो कि बारिश में पार्किंग तालाब न बने और शहरवासियों को कीचड़ में “आस्था के साथ स्लिप टेस्ट” न देना पड़े।अब देखना यह है कि प्रशासन पहले देवी लोक की तस्वीर बनाएगा या पार्किंग से कीचड़ की तस्वीर हटाएगा। फिलहाल नलखेड़ा में विकास की चर्चा और कीचड़ की मौजूदगी साथ-साथ चल रही है, बिल्कुल वैसे ही जैसे पोस्टर में चमक और ज़मीन पर फिसलन।

नलखेड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 20 हजार की चाइनीज डोर जप्त

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Nalkheda police take major action, seize Chinese rope worth Rs 20,000 संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में चाइनीज डोर से होने वाली दुर्घटनाओं और बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संक्रांति पर्व के दौरान जिला दंडाधिकारी महोदय द्वारा जारी आदेशों के पालन में नलखेड़ा पुलिस ने प्रतिबंधित चायनीज माझा के विरुद्ध विशेष कार्रवाई की। थाना प्रभारी नलखेड़ा के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने नगर में जांच अभियान चलाया। इसी क्रम में नलखेड़ा निवासी मुकेश पिता रमेश चंद्र जैन, उम्र 42 वर्ष, निवासी महावीर मार्ग, नलखेड़ा की बगलामुखी मंदिर रोड स्थित बेकरी की दुकान पर दबिश दी गई। जांच के दौरान दुकान की आड़ में छुपाकर रखा गया प्रतिबंधित चायनीज माझा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से चायनीज माझा के 13 छोटे-बड़े चकरे, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 20,000 रुपये है, जप्त किए। जप्ती के पश्चात नलखेड़ा पुलिस द्वारा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित चायनीज डोर का उपयोग, विक्रय या भंडारण न करें। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि आमजन, पशु-पक्षियों और राहगीरों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस का जागरूकता अभियान, नागरिकों ने हेलमेट पहनने का लिया संकल्प।

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Awareness campaign of Nalkheda Police on Gharaula Road, citizens took a pledge to wear helmets. चंदा कुशवाह (सहारा समाचार) नलखेड़ा। आज घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस द्वारा यातायात सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पुलिस टीम ने लोगों को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी देते हुए हेलमेट पहनने की आवश्यकता और महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा हादसों से संबंधित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए, जिनमें यह दिखाया गया कि हेलमेट न पहनने की छोटी सी गलती किस तरह बड़े हादसे और नुकसान का कारण बन सकती है। वीडियो देखने के बाद उपस्थित नागरिकों ने विषय को गंभीरता से समझा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि हेलमेट केवल कानूनी नियम नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण कवच है। अभियान के अंत में सभी नागरिकों ने नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लिया और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने का भरोसा भी दिलाया।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत

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Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।

नलखेड़ा को बड़ी सौगात: हेलीकॉप्टर सेवा के सेक्टर-1 में शामिल हुआ नलखेड़ा, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर की मेहनत से खुला रास्ता; किराया और शुरू होने की तारीख जल्द घोषित होगी

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Nalkheda gets a big gift: Nalkheda joins Sector-1 of helicopter service चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आरंभ की गई नई हवाई पर्यटन सेवा में अब नलखेड़ा का नाम भी शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के बाद नलखेड़ा को आधिकारिक रूप से प्रथम सेक्टर की सूची में स्थान मिल गया है। यह कदम नलखेड़ा के विकास और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पूरे प्रयास का सबसे बड़ा श्रेय पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर को दिया जा रहा है, जिन्होंने लगातार प्रयास करते हुए नलखेड़ा को इस हवाई मार्ग में जोड़ने की माँग को मजबूती से उठाया। विभागीय अधिकारियों से मुलाकातें, लिखित प्रस्ताव और लगातार आग्रह—इन सभी प्रयासों के कारण अंततः नलखेड़ा को इस सेवा से जोड़ने की मंजूरी मिल पाई। नलखेड़ा माँ बगलामुखी धाम के कारण देशभर के श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, ऐसे में हवाई सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को भारी सुविधा मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस सेवा से क्षेत्र में व्यापार, आवागमन, होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे नलखेड़ा का नाम धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक प्रमुखता से उभरेगा। विभाग ने अभी उड़ानों के मार्ग, समय और किराये की अंतिम घोषणा नहीं की है, परंतु संकेत मिले हैं कि अन्य धार्मिक स्थलों की तरह नलखेड़ा का किराया भी पाँच से सात हजार रुपये के बीच रह सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नलखेड़ा के हेलीपैड का निरीक्षण अगले सप्ताह किया जाएगा, जिसके बाद परीक्षण उड़ान कराई जाएगी। परीक्षण पूरा होते ही सेवा के शुरू होने की तारीख सार्वजनिक कर दी जाएगी। अनुमान है कि यह सेवा अगले तीन से चार सप्ताह में प्रारंभ हो सकती है, यदि सभी तकनीकी औपचारिकताएँ समय पर पूरी हो जाएँ। सेवा को लेकर नलखेड़ा में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर क्षेत्र, दुकानदारों और स्थानीय जनता का कहना है कि यह कदम नलखेड़ा को नई पहचान देगा और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने इसे नलखेड़ा के विकास की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि यह सफलता जनता के सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

कलेक्टर की फटकार भी बेअसर! महीनों पुराना ड्यूटी चार्ट आज भी टंगा — कौन संभाल रहा अस्पताल?

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Even the Collector’s reprimand is ineffective! Months-old duty charts still hang—who’s managing the hospital? चंदा कुशवाहनलखेड़ा ! सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नलखेड़ा की अव्यवस्थाएँ अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं। आलम यह है कि कुछ माह पूर्व कलेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों का जो ड्यूटी चार्ट लगाया गया था, वह आज भी 24/09/25 की उसी तारीख के साथ जस का तस टंगा हुआ है। न तारीख बदली गई, न नई सूची जारी हुई। यह देखकर साफ होता है कि अस्पताल प्रबंधन के लिए मरीजों की सुविधा किसी मजाक से कम नहीं है। ड्यूटी चार्ट न होने के कारण रोजाना सैकड़ों मरीज अस्पताल में भटकते रहते हैं। कौन-सा डॉक्टर कब उपलब्ध होगा—इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिलती। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि सरकारी अस्पताल में लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, जबकि कई डॉक्टर अपने सरकारी समय में खुलेआम निजी क्लीनिकों पर बैठकर कमाई में लगे रहते हैं। अस्पताल में मरीज तड़पते रहें, यह उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अव्यवस्था कोई नई नहीं है। अस्पताल में अनुशासन नाम की चीज़ बची ही नहीं है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव तो मानो पूरे मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुके हैं। उनकी उदासीनता और कुप्रबंधन ने अस्पताल की प्रणाली को लगभग ठप कर दिया है। डॉक्टरों और कर्मचारियों पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक पकड़ नहीं रह गई है — जो चाहे जब चाहे मनमानी कर रहा है। नागरिकों का आरोप है कि डॉ. यादव की लापरवाही अब सीधे मरीजों की जान पर बन आई है। करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था करती है, लेकिन यहां डॉक्टर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध ना होकर मरीजों को उनके निजी क्लीनिकों पर बुला रहे हैं। इस तरह की हरकतें न सिर्फ सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सीधी लूट है। मरीजों और उनके परिजनों ने मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नलखेड़ा अस्पताल की अव्यवस्थाओं और बीएमओ डॉ. विजय यादव की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही तत्काल अपडेटेड ड्यूटी चार्ट जारी किया जाए, ताकि मरीजों को इस जानलेवा अव्यवस्था से राहत मिल सके।

नलखेड़ा में बाल दिवस पर पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने बच्चों संग बिताया समय, दिए संस्कार और प्रेरणा से भरे संदेश

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Former city president Prem Rathore spent time with children on Children’s Day in Nalkheda, imparting values and inspirational messages. चंदा कुशवाह नलखेड़ा । बाल दिवस के अवसर पर आज नलखेड़ा में एक स्नेहपूर्ण और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने स्थानीय बच्चों को आमंत्रित कर उनके साथ समय बिताया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन में सही दिशा देने का था। प्रेम राठौर ने बच्चों से सरल और प्रेरक शब्दों में कहा कि— “जीवन में इंसान की असली पहचान उसके व्यवहार और कर्मों से होती है। हमेशा सच बोलें, अच्छे कर्म करें और कभी भी गलत रास्ते पर न चलें। वही बच्चा भविष्य में सफल होता है जो ईमानदारी और मेहनत को अपना साथी बनाता है।” उन्होंने बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाया और बताया कि पढ़ाई सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की समझ देती है। कार्यक्रम के दौरान प्रेम राठौर ने बच्चों के साथ हँसी-खुशी समय बिताया, उनके साथ खेल-कूद भी किए और बाल दिवस की शुभकामनाएँ दीं। माहौल पूर्णतः पारिवारिक और सौहार्दपूर्ण रहा। बच्चों को दिए उपहार: इस अवसर पर प्रेम राठौर ने बच्चों को टॉफ़ी, टिफिन बॉक्स, कॉपी-पेंसिल, स्टोरी बुक्स और चॉकलेट्स भेंट किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों ने पूर्व नगर अध्यक्ष की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “बच्चों के बीच जाकर समय बिताना ही असली बाल दिवस है। इससे बच्चों में सामाजिक मूल्यों और संस्कारों को बढ़ावा मिलता है।” नलखेड़ा में बाल दिवस का यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार रहा और समाज में सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने किया पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान, विभागीय तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण

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Government Advocate Kishore Singh Rajput honored journalist Rajesh Sharma, an excellent example of departmental coordination. नलखेड़ा । प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग की मिसाल शुक्रवार को तब देखने को मिली, जब शासकीय अधिवक्ता (Govt. Lawyer) किशोर सिंह राजपूत ने अपनी ओर से पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान किया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत सौहार्द का प्रतीक है, बल्कि विभागीय समन्वय और जनहित के प्रति साझा जिम्मेदारी को भी प्रदर्शित करता है। सम्मान समारोह के दौरान अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने कहा कि “पत्रकार समाज की सशक्त आवाज़ होते हैं। जनहित, समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को ईमानदारी से सामने लाने वाला पत्रकार प्रशासन की बड़ी ताकत होता है। राजेश शर्मा जैसे जिम्मेदार पत्रकारों का सम्मान करना वास्तव में गर्व की बात है।” पत्रकार राजेश शर्मा ने भी सम्मान के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि “नलखेड़ा में प्रशासन, न्यायिक विभाग और मीडिया हमेशा एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत जैसे अनुभवी और विनम्र अधिकारी हमें सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रेरित करते हैं।” स्थानीय स्तर पर शासकीय अधिवक्ता और पत्रकार के बीच इस सौहार्दपूर्ण रिश्ते को लोगों ने “सकारात्मक संवाद और मजबूत विभागीय तालमेल” की अनूठी मिसाल बताया। नलखेड़ा क्षेत्र में यह पहल मीडिया और प्रशासन के बीच भरोसे और सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नलखेड़ा – निजी स्कूल बस संचालकों की मनमानी से बढ़ रहा है खतरा, प्रशासन मौन!

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Nalkheda – The danger is increasing due to the arbitrariness of private school bus operators, the administration is silent! चंदा कुशवाह  नलखेड़ा। नगर में निजी स्कूल बस संचालकों द्वारा परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जा रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इन बस संचालकों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से बसें चलाना आम बात बना ली है। हर सुबह और दोपहर के समय इन बसों के कारण नगर की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बसें अब गलियों और मोहल्लों तक ले जाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस, परमिट और बीमा तक संदिग्ध है, पर फिर भी वे रोजाना बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। फिर सवाल उठता है — आखिर प्रशासन कहाँ है? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में हैं? जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होगी, क्या तब तक यह अनदेखी जारी रहेगी? जनता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस पर सख्त कार्रवाई करे, बसों का फिटनेस व परमिट जांच अभियान चलाए, और नलखेड़ा में नियम विरुद्ध बस संचालन पर रोक लगाए — ताकि बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

नलखेड़ा में विकास के नाम पर विनाश! देवीलोक के पास ब्लास्टिंग से हिली मंदिर की नींव – प्रशासन खामोश क्यों?

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Destruction in the name of development in Nalkheda! Blasting near Devilok shakes the foundation of a temple – why is the administration silent? चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा। एक ओर अधिकारी कागज़ों पर “विकास” के दावे कर रहे हैं, वहीं जमीन पर विनाश की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। नलखेड़ा में विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी देवी मंदिर के पीछे बनाए जा रहे पुल निर्माण में खुलेआम ब्लास्टिंग की जा रही है — और यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा लगातार पत्थर तोड़ने के लिए विस्फोटक (ब्लास्टिंग) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इतना कंपन होता है कि मंदिर की दीवारें तक हिल जाती हैं। यह वही मंदिर है, जहाँ लाखों श्रद्धालु हर साल अपनी आस्था लेकर पहुँचते हैं। पर अब सवाल ये है — टेंडर किसने जारी किया? ब्लास्टिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई? और सबसे बड़ा सवाल — इतिहासिक मंदिर की सुरक्षा का सर्वे कराया भी गया या नहीं? इन सवालों का जवाब न तो निर्माण एजेंसी दे रही है, न ही प्रशासन के पास कोई स्पष्ट बयान है। स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि अगर यही “विकास” है, तो फिर यह मंदिर की नींव हिला देने वाला विकास है, न कि नलखेड़ा का गौरव बढ़ाने वाला। लोगों ने आरोप लगाया है कि “यह पूरा खेल भ्रष्टाचार की ब्लास्ट के नीचे दबा हुआ है — जहाँ पैसे की चमक ने श्रद्धा की दीवारें तक हिला दी हैं।” अब वक्त आ गया है कि अगर यही विकास की परिभाषा है, तो जनता पूछेगी — “देवीलोक में विकास नहीं, विनाश हो रहा है — और प्रशासन तमाशा देख रहा है।”

नशे की गिरफ्त में नलखेड़ा नगर, बढ़ रहा बच्चों में लत का खतरा

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Nalkheda town in the grip of drug addiction, increasing risk of addiction among children चंदा कुशवाहनलखेड़ा । जिले में हाल ही में 253 किलो गांजे की बड़ी खेप जब्त करने के दावे के बावजूद नलखेड़ा क्षेत्र में खुलेआम गांजा विक्रय जारी है। इसके पीछे पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही और संभवतः मिलीभगत की कड़ियों से इंकार करना मुश्किल है। क्या नलखेड़ा की पुलिस इस गंभीर अपराध से बेदखल हो गई है या जान-बूझकर आंखें बंद किए बैठी है? स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पुलिस सिर्फ दिखावे की पकड़ में लगी है, जबकि असल गिरोह खुली हवा में कारोबार कर रहा है। यह स्थिति पुलिस की जिम्मेदारी और ईमानदारी पर सवाल खड़े करती है। जहां जिले के बड़े स्तर पर नशा तस्करों को दबोचने की खबरें आ रही हैं, वहीं नलखेड़ा में पुलिस की सक्रियता नाममात्र की प्रतीत होती है।पुलिस को चाहिए कि इस गंभीर स्थिति से आंखें न मूंदे और अपने दायित्वों का निर्वहन करे। सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम मादक पदार्थ बिक रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, इससे समाज और खासकर युवाओं का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ता है। गांजा जैसे नशे की लत मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाती है, खासकर किशोरों और बच्चों के लिए इसका प्रभाव विनाशकारी होता है। सवाल उठता है कि जब इतने बड़े नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर खुलेआम नशा बिकने से अवगत होकर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?यह स्थिति सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि गांजा तस्करों को संरक्षण देने वाली सांठगांठ की भी ओर इशारा करती है। यह दीगर है कि कई बार बड़े नशा सिंडिकेट में परस्पर जुड़े रसूखदारों और पुलिस अधिकारियों का नेटवर्क भी सामने आता रहा है। ऐसे में नलखेड़ा में भी पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की अटकलें लगना स्वाभाविक है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा यह पूरी व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास घटना शुरू हो जाएगा। एक तरफ तस्करों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट आयें, तो दूसरी ओर खुले बाजार में नशा बिके—यह विपत्ति की घड़ी है।समाज और प्रशासन के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि अब और कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। नलखेड़ा की पुलिस को चाहिए कि वह जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाए, तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यह लड़ाई सिर्फ कानून का अभाव नहीं, ईमानदारी और तत्परता की लड़ाई भी है, जिसमें पुलिस को अब कमजोरी दिखाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसा न होने पर नशे के व्यापार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी खुद सवालों के घेरे में आ सकते हैं, और समाज का आक्रोश गहराता जाएगा।

स्कूल छोड़ने के बहाने अतिथि शिक्षक ने नाबालिग के साथ किया दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को लिया रिमांड पर

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Guest teacher rapes minor on pretext of dropping her off at school, police remands accused चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर की एक शर्मनाक घटना में एक अतिथि शिक्षक द्वारा नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और शिक्षा संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। शुक्रवार सुबह 9 बजे नलखेड़ा नगर की 15 वर्षीय छात्रा स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में उसे उसके पूर्व शिक्षक कृष्ण प्रजापति उर्फ कन्हैयालाल मिला, जो ग्राम धरोला तहसील नलखेड़ा का निवासी है। उसने छात्रा को स्कूल छोड़ने की बात कहकर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। लेकिन, स्कूल ले जाने की बजाय वह छात्रा को अपने गांव, घर ले गया। वहां कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया और छात्रा के साथ बलात्कार किया। इस घिनौनी हरकत के बाद आरोपी ने छात्रा को धमका कर स्कूल की छुट्टी के समय उसके घर से कुछ दूर छोड़ दिया और किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी।छात्रा ने अपने परिजनों को सारा वाकया बताया। परिजनों ने उस दिन ही थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी अतिथि शिक्षक कृष्ण प्रजापति को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64, 65(1), 87, 127(2), 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5, 6 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस द्वारा आरोपी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ रिमांड पर भेज दिया गया।आरोपी का स्कूल एवं पदप्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी पहले नगर के एक निजी स्कूल में शिक्षक था। वर्तमान में वह आगर तहसील के ग्राम मथुराखेड़ी में अतिथि शिक्षक के पद पर कार्यरत है। अभिभावकों एवं समाज से सहारा समाचार की मार्मिक अपील— अपने बच्चों से हमेशा खुलकर बातें करें, उनकी गतिविधियों पर रोज ध्यान दें। बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि किसी भी असामान्य घटना, डर या धमकी की तुरंत जानकारी अपने परिवारवालों या विश्वसनीय व्यक्तियों को दें। ऐसी जागरूकता बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। समाज की सुरक्षा बच्चों की सुरक्षा से ही संभव है। आइए, मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएं.यदि आपके बच्चे को कोई परेशानी या डर महसूस हो तो तुरंत कार्रवाई करें। सहारा समाचार आपसे आग्रह करता है— बच्चों को हमेशा सुरक्षित रखिए और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाइए।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर जब उठे सवाल — तो बौखलाए बीएमओ ने मीडिया से तोड़ा रिश्ता!

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When questions were raised about the negligence of the health department, the distraught BMO broke ties with the media! नलखेड़ा। जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने वाले ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव शायद भूल गए हैं कि सरकारी कुर्सी जवाबदेही के लिए होती है, अहंकार के लिए नहीं।स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्थाओं पर जब मीडिया ने आईना दिखाया, तो बीएमओ ने उस आईने को ही तोड़ देने का रास्ता चुन लिया।मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप से खुद को अलग कर लेना, क्या इस बात का प्रमाण नहीं कि अधिकारी आलोचना से भाग रहे हैं? नलखेड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।अस्पतालों में गंदगी, झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला, पीने के पानी की दुर्दशा और जांच केंद्रों की मनमानी – इन सब पर जब पत्रकारों ने बार-बार लिखा, तो विभाग की नींद टूटने के बजाय बेबसी और दबाव की बदबू आने लगी।जिम्मेदार अधिकारी ने सुधार की दिशा में कदम उठाने के बजाय पत्रकारिता पर ही दूरी बनाकर यह साबित कर दिया कि अब सिस्टम की पारदर्शिता उन्हें खटकने लगी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि डॉ. यादव पिछले 23 सालों से नलखेड़ा में ही क्यों टिके हुए हैं?क्या स्वास्थ्य विभाग में कोई और अधिकारी नहीं जो इस जिम्मेदारी को संभाल सके?या फिर स्थानीय राजनीतिक संरक्षण और रसूख ने नियमों को ताक पर रख दिया है? इतने लंबे समय से एक ही जगह जमे रहना, खुद में एक बड़ा सवाल है —क्योंकि विभागीय नियम साफ कहते हैं कि हर अधिकारी का तबादला निश्चित अवधि में होना चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।लेकिन जब अधिकारी खुद को पद से बड़ा समझने लगे, तो ऐसी ही नौबत आती है — जहां जनता बीमार है, और जिम्मेदार मौन। वंदे मातरम कार्यक्रम जैसे सरकारी आयोजनों से दूरी बनाना,मीडिया संवाद से पलायन करना,और ग्रुप छोड़ देना —ये सब वही संकेत हैं जो यह बताते हैं कि नलखेड़ा का स्वास्थ्य तंत्र बीमार है और इलाज करने वाला खुद इलाज से भाग रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा किक्या डॉ. विजय यादव इस आलोचना को आत्ममंथन का अवसर बनाएंगे,या फिर आलोचना से चिढ़कर नलखेड़ा को लाचारियों की नई दवा लिख देंगे।

मां बगलामुखी मंदिर में गैर पंडा-पुजारियों का बढ़ता अवैध दखल — प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल, SDM की भूमिका पर चर्चा तेज

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The growing illegal interference of non-priests at the Maa Baglamukhi Temple—questions raised about administrative negligence, and the SDM’s role is being debated. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में शासन द्वारा नियुक्त पंडा-पुजारियों के बावजूद गैर अधिकृत व्यक्तियों का मंदिर परिसर और गर्भगृह में लगातार दखल बढ़ता जा रहा है।श्रद्धालुओं का कहना है कि कुछ लोग बिना किसी अधिकार के गर्भगृह व पांडाल में रुककर पूजा-पाठ की परंपराओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे मंदिर की मर्यादा और अनुशासन पर असर पड़ रहा है। मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मां बगलामुखी मंदिर प्रबंधन समिति की है, जिसके पदेन अध्यक्ष SDM नलखेड़ा हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब मंदिर का संचालन सीधे SDM के अधीन है, तो इस प्रकार की अव्यवस्था पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “SDM मंदिर के अध्यक्ष हैं, सभी गतिविधियाँ उनके संज्ञान में रहती हैं” मंदिर से जुड़े एक प्रमुख पुजारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि — “मां बगलामुखी मंदिर का संचालन मंदिर प्रबंधन समिति के माध्यम से होता है, जिसके अध्यक्ष SDM हैं। मंदिर में जो भी गतिविधियाँ होती हैं, वे सामान्यतः प्रशासन के ज्ञान में रहती हैं। हम सिर्फ अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते हैं, बाकी प्रशासनिक व्यवस्था उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आती है।” इस बयान से यह साफ झलकता है कि मंदिर परिसर की प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी तरह SDM और प्रबंधन समिति पर है। जनचर्चा में प्रशासन की निष्क्रियता स्थानीय श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि गैर पंडा-पुजारियों का प्रवेश और गतिविधियाँ प्रशासन की अनदेखी का परिणाम हैं।नवरात्रि से पूर्व हुई मंदिर समिति की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि मां बगलामुखी मंदिर, जो नलखेड़ा की पहचान और श्रद्धा का प्रतीक है, उसकी मर्यादा की रक्षा के लिए प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। श्रद्धालुओं की मांग श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से यह प्रमुख मांगें रखी हैं —

ठा. धीरेंद्र सिंह सिसोदिया ‘पिलवास’ को मिली बड़ी जिम्मेदारी, करणी सेना परिवार आगर के जिला महामंत्री पद से नवाज़े गए

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Awarded the post of District General Secretary of Karni Sena Parivar Agar चंदा कुशवाह ( संवाददाता ) नलखेड़ा। दृढ़ नेतृत्व और समाजसेवा के प्रति अटूट समर्पण के लिए पहचान बनाने वाले ठा. धीरेंद्र सिंह सिसोदिया ‘पिलवास’ को करणी सेना परिवार, आगर का जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। संगठन ने उनके व्यक्तित्व, कार्यकुशलता और संगठनात्मक दक्षता को देखते हुए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नियुक्ति की घोषणा के बाद करणी सेना के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में हर्ष की लहर दौड़ गई। सभी ने सिसोदिया को बधाई देते हुए क्षेत्र और समाज की प्रगति हेतु उनके उत्कृष्ट नेतृत्व की उम्मीद जताई। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि सिसोदिया का सक्रिय एवं परिश्रमी स्वभाव, समाजहित के प्रति सजग दृष्टिकोण और संघर्षशील कार्यशैली हमेशा प्रेरणादायक रही है। उनकी नियुक्ति से करणी सेना को नई दिशा और संगठनात्मक मजबूती मिलेगी। सिसोदिया ने दायित्व के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने, सामाजिक सरोकारों को सशक्त करने और युवाओं को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ज्ञात हो कि सिसोदिया लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी रहे हैं और जनसेवा में भी उनकी छवि ईमानदार एवं जनप्रिय नेतृत्वकर्ता की है।

नलखेड़ा नगर में देवउठनी ग्यारस पर किया तुलसी विवाह कार्यक्रम

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Tulsi marriage ceremony was organised on Devuthani Gyaras in Nalkheda town. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में देवउठनी ग्यारस के उपलक्ष में नगर की महिला और पुरुषों द्वारा तुलसी विवाह का कार्यक्रम रखा गया जिसमें सप्तमी के दिन माता पूजन धोली कलश  कार्यक्रम रखा गया, ग्यारस के दिन श्री राम मंदिर से भगवान शालिग्राम की बारात बैंड बाजे के साथ निकली जो नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए बारात निकली जहां रास्ते में नगर की जनता द्वारा जगह जगह पुष्पों से बारात का स्वागत किया गया व फलाहार मिठाई से स्वागत किया जिसमें बाराती नाचते गाते हुए भारत में चल रहे थे, ,उसके पश्चात  बारात गणपति मंदिर पहुंची जहां पर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का विधि विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया साथ ही तुलसी माता के  मामा पवन कुशवाहा द्वारा शादी विवाह का हथेला छुड़वाया गया,  उसके पश्चात नगर के भक्तगणों   द्वारा भोजन प्रसादी का आयोजन रखा गया था जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भोजन प्रसादी का लाभ उठाया !

मां बगलामुखी मंदिर में बच्चे कर रहे छीना-झपटी, भिक्षावृत्ति का वीडियो वायरल; भोपाल मॉडल जैसी कार्रवाई की मांग — SDM व मंदिर प्रशासन पर सवाल

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Video of children engaging in physical assault and begging at the Maa Baglamukhi Temple goes viral; demands for action similar to the Bhopal model—SDM and temple administration questioned. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से जबरदस्ती भिक्षा मांगने और सामान छीनने की कोशिश का वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो में कुछ बच्चे पर्यटकों और भक्तों के पीछे भागते, सामान पकड़ते और छीना-झपटी की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस घटना ने मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की चौकसी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का दावा सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। धार्मिक पर्यटन स्थल होने के बावजूद सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने में प्रशासन नाकाम नजर आ रहा है। भोपाल में भिक्षावृत्ति अपराध, नलखेड़ा में क्यों ढील? भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत भीख मांगना और देना, दोनों को दंडनीय अपराध घोषित किया है। साथ ही भिक्षुकों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है — “जब यह सख्त कदम राजधानी में उठाया जा सकता है, तो नलखेड़ा जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर क्यों नहीं?” SDM सर्वेश यादव की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिसकर्मी और CCTV कैमरे मौजूद हैं। इसके बावजूद भिक्षावृत्ति और श्रद्धालुओं के साथ असुविधा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि SDM नलखेड़ा सर्वेश यादव द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है और मंदिर क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिखते। स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगें भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों की पहचान कर पुनर्वास कराया जाए बच्चों को भिक्षा दिलाने वाले परिजनों/गिरोहों पर FIR मंदिर परिसर में सुरक्षा एवं चेकिंग सिस्टम मजबूत किया जाए बाल संरक्षण विभाग द्वारा नियमित अभियान चलाया जाए त्वरित शिकायत और कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन स्थापित हो “नलखेड़ा अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल, व्यवस्था पर समझौता नहीं” भक्तों ने कहा कि माँ बगलामुखी धाम की प्रतिष्ठा विश्वस्तरीय है। ऐसे में प्रशासन को भोपाल मॉडल लागू कर मंदिर क्षेत्र को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाना चाहिए। “भोपाल में नियम लागू हो सकते हैं, तो नलखेड़ा में क्यों नहीं?” यह सवाल अब स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं का है।

प्रेस क्लब नलखेड़ा ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की बड़ी पहल

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Press Club Nalkheda took a big initiative against quack doctors. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! क्षेत्र में बढ़ते झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर अब प्रेस क्लब नलखेड़ा ने निर्णायक कदम उठाया है। बीते मंगलवार को प्रेस क्लब प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को एक शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में उल्लेख किया गया कि नलखेड़ा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के लोगों का इलाज कर रहे हैं। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि शासन के स्वास्थ्य नियमों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त अभियान चलाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन नलखेड़ा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आवेदन में इस बात पर नाराजगी जताई गई कि पूर्व में जिन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग ने सील लगाई थी, उन्होंने सील तोड़कर पुनः अपने क्लीनिक चालू कर लिए, जो सीधा-सीधा कानूनी अपराध है। प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश कश्यप ने कहा कि प्रेस क्लब ने यह शिकायत जनता की सुरक्षा और जनहित में दी है। जब प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तब मीडिया को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अब स्वास्थ्य विभाग को यह साबित करना होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी लागू होते हैं। आवेदन में यह भी मांग की गई है कि जिन झोलाछाप डॉक्टरों ने सील तोड़ी है, उनके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाकर उनके क्लीनिकों को स्थायी रूप से बंद कराया जाए। प्रेस क्लब ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी जनस्वास्थ्य त्रासदी का कारण बन सकती है। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में जिस तरह जहरीली दवा से मासूम बच्चों की मौत हुई थी, उसी तरह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गलत दवा या इलाज नलखेड़ा क्षेत्र में भी किसी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। इसलिए इस खतरे को देखते हुए तत्काल और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। जनता और मीडिया की बढ़ती जागरूकता के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग वास्तव में इन झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कस पाएगा या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश देहलकर ने कहा कि, झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने सील तोड़ी है या अवैध रूप से इलाज किया जा रहा है, तो उसके विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

नलखेड़ा में सरदार पटेल जयंती पर भव्य रैली

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Grand rally on Sardar Patel Jayanti in Nalkheda चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आज नलखेड़ा में समस्त पाटीदार समाज नलखेड़ा द्वारा भव्य शोभायात्रा एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर में सुबह से ही उत्साहपूर्ण माहौल रहा और लोगों में विशेष जोश देखा गया। नगर के प्रमुख मार्गों को आकर्षक पुष्प सजावट, रंग-बिरंगे झंडों एवं स्वागत द्वारों से सजाया गया था। बच्चों व युवाओं की टोलियों द्वारा देशभक्ति गीतों, ढोल-ढाकों और बैंड-बाजों के साथ रैली निकाली गई। महिलाओं ने परंपरागत परिधानों में भाग लेकर समाज की एकता और सांस्कृतिक गौरव को प्रकट किया। रैली नगर के मुख्य मार्गों से होकर सरदार पटेल की प्रतिमा स्थल पर पहुंची, जहाँ उपस्थित जनसमूह द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। समाजजनों द्वारा राष्ट्रीय एकता और भाईचारे के नारों से शहर गुंजायमान होता रहा। इस अवसर पर श्री गोविंद पाटीदार (निवासी टोलक्याखेड़ी) ने कहा कि लौह पुरुष सरदार पटेल ने अपने लोहे जैसे संकल्प, अदम्य साहस और दूरदर्शिता के बल पर देश को एक सूत्र में बांधकर इतिहास रचा। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों का अनुसरण करते हुए राष्ट्रहित, समाज उत्थान और एकजुटता की भावना को निरंतर मजबूत करें। वक्ताओं ने कहा कि पाटीदार समाज सदैव राष्ट्र सेवा, कृषि उन्नति, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण में अग्रणी रहा है, और आगे भी यही परंपरा जारी रहेगी। समाज द्वारा भविष्य में शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों को और मजबूत करने का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवा वर्ग, महिला शक्ति सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। शोभायात्रा एवं श्रद्धांजलि समारोह उत्साह और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम राठौर ने उठाई आवाज — वर्षों से बंद मट पंप से नागरिकों को नहीं मिल रही सुविधा, ओडीएफ श्रेणी पर भी उठे सवाल

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Former Nagar Panchayat President Prem Rathore raised his voice – the water pump, which has been out of service for years, has been depriving citizens of its services, and questions have also been raised about the ODF category. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ा मट पंप अब नगरवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। इस संबंध में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम राठौर ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि नगर पंचायत की पूर्व परिषद द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए यह मट पंप खरीदा गया था, ताकि घर-घर बने सेफ्टिक टैंकों की सफाई आसानी से की जा सके। लेकिन यह मट पंप लंबे समय से खराब होकर बेकार पड़ा है, जिससे नगर के लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। राठौर ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शासन द्वारा घर-घर शौचालय और सेफ्टिक टैंक बनवाए गए थे। इन टैंकों की समय-समय पर सफाई आवश्यक होती है, जिसके लिए नगर पंचायत ने मट पंप खरीदा था। नागरिक एक निश्चित शुल्क देकर इसकी सेवा लेते थे, जिससे नगर पंचायत को राजस्व भी प्राप्त होता था और नागरिकों को सुविधा भी मिलती थी। पूर्व अध्यक्ष राठौर के अनुसार, प्रशासक काल के दौरान से यह मट पंप खराब पड़ा हुआ है। कुछ माह पूर्व इसे दुरुस्त करवाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके चलते नागरिकों को मजबूरी में अन्य नगरों जैसे सारंगपुर से मट पंप मंगवाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। हाल ही में एक स्थानीय नागरिक ने सारंगपुर से मट पंप बुलाकर अपने टैंक की सफाई करवाई। उन्होंने बताया कि नया मट पंप खरीदने पर लगभग 3 से 4 लाख रुपये का खर्च आएगा, जबकि पुराने पंप को कुछ हजार रुपये में ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नागरिकों की इस मूलभूत सुविधा की ओर नहीं जा रहा है। ओडीएफ डबल प्लस श्रेणी पर उठे सवाल पूर्व अध्यक्ष प्रेम राठौर ने यह भी बताया कि नलखेड़ा नगर पंचायत ओडीएफ डबल प्लस श्रेणी में शामिल है, जिसमें मट पंप की उपलब्धता अनिवार्य शर्तों में शामिल है। ऐसे में वर्षों से बंद पड़े मट पंप के कारण नलखेड़ा की ओडीएफ श्रेणी पर भी सवाल उठ रहे हैं। राठौर ने जिला प्रशासन एवं नगर पंचायत से आग्रह किया है कि नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मट पंप को शीघ्र दुरुस्त करवाया जाए, ताकि नगरवासियों को इस आवश्यक सेवा से फिर से जोड़ा जा सके।

अभी गुर्जर बने पुनः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री

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Now Gurjar has again become the city minister of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नगर इकाई में संगठन पुनर्गठन के दौरान अभी गुर्जर को पुनः नगर मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके पिछले कार्यकाल में उत्कृष्ट संगठनात्मक कार्य, विद्यार्थियों के हित में सक्रिय भूमिका और बेहतर व्यवहार को देखते हुए परिषद पदाधिकारियों ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। अभी गुर्जर अपने मिलनसार स्वभाव और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में नगर में विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों को नई दिशा दी थी। परिषद द्वारा आयोजित अनेक शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। संगठन के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन उन्हें युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाता है।नवनियुक्त नगर मंत्री अभी गुर्जर ने कहा कि संगठन ने जो विश्वास उन पर जताया है, वह उसे पूरी निष्ठा, अनुशासन और परिश्रम से निभाएँगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद सदैव विद्यार्थियों की आवाज़ रही है और आगे भी समाज व शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक कार्य जारी रखेगी।इस अवसर पर परिषद के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन और भी सशक्त और सक्रिय बनेगा।

नलखेड़ा के साईं श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय कुश्ती में जीता स्वर्ण पदक, प्रदेश का नाम किया रोशन

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Sai Srivastava of Nalkheda won the gold medal in the national wrestling competition, bringing glory to the state. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा । नगर के होनहार खिलाड़ी साईं श्रीवास्तव ने विद्या भारती द्वारा भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में अपने दमदार प्रदर्शन से 86 किलोग्राम फ्री स्टाइल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मूल रूप से नलखेड़ा निवासी साईं श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल श्रीवास्तव के पुत्र हैं। साईं वर्तमान में सरस्वती विद्या मंदिर, मारूतीगंज (उज्जैन) में अध्ययनरत हैं, जहां वे शिक्षा के साथ खेल में भी लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रतियोगिता में देशभर से आए नामी पहलवानों के बीच साईं ने अपने मजबूत इरादों और शानदार दांव-पेच से सभी को मात दी। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को परास्त कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। साईं की इस उपलब्धि से नलखेड़ा नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। नगरवासियों, विद्यालय परिवार और खेल प्रेमियों ने साईं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने छोटे से कस्बे से निकलकर यह सिद्ध किया है कि मेहनत और लगन से किसी भी मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है। साईं श्रीवास्तव की यह जीत न केवल उज्जैन संभाग बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय बनी है।

नलखेड़ा : SDM ने अब तक नहीं किया स्थान निर्धारित, लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग का आरोप — नगर पालिका प्रतिनिधि विजय सोनी ने जताई नाराज़गी

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Nalkheda: SDM has not yet determined the location, and is demanding ₹1,500 for the license. Municipal representative Vijay Soni expressed his displeasure. चंदा कुशवाहनलखेड़ा। दिवाली में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन नगर में इस बार अब तक पटाखों की दुकानें नहीं लग सकी हैं। इसका कारण है — SDM कार्यालय द्वारा पटाखा बाजार के लिए स्थान निर्धारित न किया जाना। व्यापारी तैयार बैठे हैं, लेकिन अनुमति और स्थान न मिलने से वे दुकानें नहीं सजा पा रहे हैं। इधर, कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि SDM कार्यालय द्वारा पटाखा दुकान के लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग की जा रही है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हम पिछले कई सालों से पटाखे बेचते आ रहे हैं, लेकिन इस बार लाइसेंस जारी करने में देरी की जा रही है और ₹1500 की मांग की जा रही है। अगर जल्द अनुमति नहीं मिली, तो दिवाली का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा।” नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “नलखेड़ा में हर साल सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर दिवाली का पर्व मनाते हैं। यह हमारे सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, लेकिन इस बार बच्चों के चेहरे पर खुशी की जगह मायूसी है क्योंकि पटाखों की दुकानें ही नहीं लगीं।” उन्होंने प्रशासन से तुरंत स्थान तय कर व्यापारियों को राहत देने की मांग की है।व्यापारी भी कहते हैं कि तैयारी पूरी है — स्टॉक आ चुका है, पर बेचने की अनुमति नहीं मिली। दिवाली तक अगर जगह तय नहीं हुई तो उनका माल बेकार हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की देरी से हर साल की तरह इस बार भी अंतिम समय पर हड़बड़ी मचेगी। लोग चाहते हैं कि त्योहार की खुशियों में रुकावट न आए और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटे।

नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने थामी कमान, देर रात तक चल रहा मुआवज़ा तैयार करने का काम

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Farmers may receive a bell of relief on Dhanteras! Nalkheda Tehsildar Priyank Srivastava is in charge, and the work of preparing compensation continues late into the night. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा से राहत भरी खबर लंबे इंतज़ार के बाद किसानों को इस धनतेरस पर मुआवज़े की सौगात मिल सकती है। जब ज़िले को मुआवज़े की सूची से वंचित रखा गया और किसानों में नाराज़गी बढ़ी, तब नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने खुद मोर्चा संभाला। सूत्रों के अनुसार, तहसील कार्यालय में बीते कई दिनों से तहसीलदार श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी और राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके लगातार काम में जुटे हुए हैं। तीनों अधिकारी देर रात तक दफ़्तर में रहकर मुआवज़ा सूची की जांच, सत्यापन और बिल तैयार कराने का काम कर रहे हैं, ताकि हर पात्र किसान तक राहत राशि समय पर पहुंच सके। राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके द्वारा एक-एक गांव के प्रकरण की बारीकी से जांच की जा रही है, जिससे कोई भी पात्र किसान मुआवज़े से वंचित न रह जाए।एक पटवारी ने बताया कि “तहसीलदार साहब हर सूची खुद देख रहे हैं, कहीं कोई गलती न रह जाए इसके लिए रोज़ मॉनिटरिंग हो रही है। उनका लक्ष्य साफ़ है — धनतेरस पर किसानों के खातों में मुआवज़ा पहुंचना चाहिए।” कर्मचारियों का कहना है कि “अगर यह काम पहले शुरू होता तो हम भी परिवार के साथ दीवाली मना पाते, लेकिन अब किसानों की मुस्कान ही हमारी दीवाली है।” नलखेड़ा तहसील प्रशासन की यह कार्यशैली पूरे जिले के लिए मिसाल बन गई है — जब बाकी जगह फाइलें अटकी रहीं, नलखेड़ा में अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात डटे हुए हैं।

नलखेड़ा मंडी में नहीं बिक रही सोयाबीन… बिक रही है किसानों की मजबूरी!

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Soybean is not being sold in Nalkheda Mandi… Farmers’ helplessness is being sold! चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नलखेड़ा कृषि उपज मंडी में इस बार किसान भारी परेशानी झेल रहे हैं। सोयाबीन की खरीदी न शुरू होने से लेकर अव्यवस्था तक, हर मोर्चे पर किसानों का सब्र टूटता दिख रहा है। मंडी में न बैठने की जगह है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही शौचालय। किसान खुले आसमान के नीचे अपनी बोरियां लिए मंडी प्रांगण में बैठे हैं — उम्मीद बस यही कि कोई व्यापारी आए और दाम थोड़ा ठीक मिल जाए।  “ना दाम मिल रहा, ना व्यवस्था… मजबूरी में बेच रहे हैं” ग्राम नालखेड़ा  के किसान चिन्तामन विश्वकर्मा  ने बताया — “सुबह से मंडी में बैठे हैं, लेकिन कोई भाव ही नहीं लगाता। जो आ भी रहे हैं वो ₹3500 से ऊपर देने को तैयार नहीं। MSP जो कि ₹5300 रुपए का तो नाम तक नहीं ले रहे।” एक अन्य किसान बोले — “बैठने की जगह तक नहीं है। मंडी में पानी नहीं, टॉयलेट नहीं, अधिकारी दिखते तक नहीं।” पंजीयन पोर्टल पर फसल नहीं दिख रही, किसान हैरान कई किसानों ने शिकायत की कि पंजीयन के समय पोर्टल पर उनकी सोयाबीन की एंट्री दिख ही नहीं रही। इससे वे खरीदी प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं। इस बारे में जब तहसील  नलखेड़ा के एक पटवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा — “गिरदावरी का काम शासन द्वारा नियुक्त स्थानीय युवाओं द्वारा समय पर किया गया था। सभी रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड भी किए गए हैं। यह समस्या संभवतः तकनीकी गड़बड़ी के कारण है।” SDM सुसनेर की लापरवाही पर उठे सवाल किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी की बदहाल व्यवस्था पर SDM सुसनेर का ध्यान नहीं है। ना तो उन्होंने मौके का निरीक्षण किया, और ना ही मंडी प्रशासन को कोई सख्त निर्देश दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इस बार हालत और खराब हैं। मंडी में व्यवस्था सुधारना SDM की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

राहत वितरण में देरी पर किसानों का रोष, किसान संघ ने की त्वरित कार्रवाई की माँग।

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Farmers angry over delay in relief distribution, farmers union demands immediate action. चंदा कुशवाह ( विशेष संवाददाता )नलखेड़ा ! जिले में सोयाबीन फसल के भारी नुकसान के बावजूद किसानों को अब तक राहत राशि नहीं मिल पाने से किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान संघ, जिला इकाई आगर मालवा ने बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की माँग की।संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि मौसमी बीमारियों पीलामोजक और असमय वर्षा के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। शासन के आरबी-6 (4) के प्रावधानों के तहत सर्वे कर राहत राशि का वितरण किया जाना था, लेकिन सर्वे कार्य नियमानुसार और उदारतापूर्वक नहीं किया गया, जिससे जिले के किसान राहत से वंचित रह गए।भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से माँग की है कि— सर्वे पत्रक, अनावरी रिपोर्ट और नेत्रांकन सर्वे के पंचनामों की प्रति प्रत्येक पटवारी हल्केवार किसान संघ को उपलब्ध कराई जाए।पूर्व में बनी रिपोर्टों का पुनः परीक्षण कर संशोधित रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाए, ताकि वास्तविक प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।संघ ने कहा कि किसानों को नुकसान की भरपाई न मिलने से ग्रामीण अंचलों में निराशा और रोष बढ़ रहा है। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय किसान संघ जिला इकाई आगर मालवा किसानों के हितों की रक्षा हेतु धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।संघ ने आशा जताई कि प्रशासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द उचित कदम उठाएगा, ताकि किसानों को न्याय और राहत दोनों मिल सकें। ज्ञापन देने वाले प्रमुख पदाधिकारी: रामनारायण तेजरा, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ जिला आगर मालवा जगदीश पाटीदार, जिला कार्यालय मंत्री, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा प्रमोद जोशी, जिला कोषाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा राघुसिंह चौहान, जिला मंत्री, भारतीय किसान संघ, जिला आगर मालवा

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