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आंगनबाड़ी केंद्रों में पुष्टाहार वितरण में चेहरा पहचान प्रणाली से हुई प्रगति

चेहरा पहचान प्रणाली से आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार वितरण में बड़ी प्रगति फरवरी में लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों तक एफआरएस से पहुंचा पुष्टाहार डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ी, फर्जीवाड़े पर रोक लगने से उचित लाभार्थियों को फायदा  लखनऊ  प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों में अनुपूरक पुष्टाहार के वितरण को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लागू की गई चेहरा पहचान प्रणाली यानी एफआरएस के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। फरवरी में प्रदेश के लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों में से 81 लाख लाभार्थियों को इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के दिशा निर्देशों के तहत प्रदेश में एफआरएस प्रणाली से ही पुष्टाहार वितरण को मान्यता दी गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही एफआरएस से पुष्टाहार वितरण का शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। योगी सरकार में न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ है कि पोषण का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे1 फरवरी में 81 प्रतिशत तक पहुंचे एफआरएस लाभार्थी प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार के लगभग 1 करोड़ लाभार्थी हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपनाते हुए फरवरी में करीब 81 प्रतिशत लाभार्थियों तक पुष्टाहार पहुंचाया। इस तरह फरवरी में लगभग 81 लाख लाभार्थियों को फेस रिकॉग्निशन प्रणाली के माध्यम से पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया। विभाग के अनुसार यह उपलब्धि पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकेत है। किशोरियों तक भी पहुंच रहा पोषण प्रदेश सरकार पोषण योजनाओं के दायरे को लगातार व्यापक बना रही है। इसी क्रम में आठ जनपदों में किशोरियों को भी अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान माह में भी एफआरएस प्रणाली के माध्यम से वितरण की प्रगति संतोषजनक है और उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने में लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रतिशत फरवरी की तुलना में और बेहतर होगा। डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित व्यवस्था से पोषण योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी बनता दिखाई दे रहा है।

राज्यव्यापी अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों में न्योता भोज कार्यक्रम, पोषण और शिक्षा पर जोर

आंगनबाड़ी केन्द्रों में न्योता भोज कार्यक्रम : पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का राज्यव्यापी अभियान प्रदेशभर में 9,763 न्योता भोज आयोजित, 1.83 लाख से अधिक बच्चे हुए लाभान्वित  रायपुर आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम प्रदेश में पोषण, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप शुरू की गई इस पहल के तहत अब समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। राज्य स्तर पर जनवरी से फरवरी 2026 तक कुल 9,763 न्योता भोज आयोजनों के माध्यम से 1,83,927 बच्चों को लाभान्वित किया गया है, जो इस योजना की व्यापक सफलता को दर्शाता है। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिले में सर्वाधिक 884 आयोजन हुए, जिनमें 18,703 बच्चे लाभान्वित हुए। वहीं कोरबा में 720 आयोजनों के माध्यम से 13,944 बच्चों, रायगढ़ में 690 आयोजनों से 9,835 बच्चों तथा कांकेर में 636 आयोजनों से 7,915 बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार धमतरी में 606 आयोजन कर 11,228 बच्चों, महासमुंद में 415 आयोजनों के माध्यम से 7,302 बच्चों तथा जांजगीर-चांपा में 439 आयोजनों से 10,518 बच्चों को लाभ पहुंचाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत समाज के नागरिक, जनप्रतिनिधि, दानदाता एवं पालक अपने विशेष अवसरों—जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य पारिवारिक खुशियों—पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साथ भोजन साझा कर रहे हैं। इससे बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिल रहा है, साथ ही समाज में उनके प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। ऐसे में ‘न्योता भोज’ जैसे प्रयास उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल न केवल कुपोषण को कम करने की दिशा में कारगर साबित हो रही है, बल्कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण भी बढ़ा रही है। शासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने सामाजिक एवं पारिवारिक अवसरों को आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ साझा कर इस अभियान को और मजबूत बनाएं।

योगी सरकार में स्मार्ट टीवी से आधुनिक बन रहे सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र

प्रदेश के हजारों केंद्रों में डिजिटल शिक्षा से बदल रहा पढ़ाई का तरीका तकनीक से मजबूत हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र, प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में आई क्रांति लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रदेश भर में लगभग 16 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्मार्ट टीवी स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा गया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना और आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक प्ले स्कूल जैसी सुविधाओं से लैस करना है। डिजिटल तकनीक से बदल रहा आंगनबाड़ी केंद्रों का स्वरूप स्मार्ट टीवी के उपयोग से अब आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई का पारंपरिक तरीका बदल रहा है। स्मार्ट टीवी की स्थापना पर प्रति इकाई लगभग 25 हजार रुपये का व्यय किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जाए। बच्चों को कहानियों, पहेलियों, कार्टून और एनिमेशन के माध्यम से डिजिटल सामग्री दिखाई जा रही है। इसके जरिए छोटे बच्चे खेल खेल में अक्षर ज्ञान, गिनती और रंगों की पहचान करना सीख रहे हैं। इस डिजिटल पद्धति से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ रही है और उनकी भाषा व संप्रेषण क्षमता भी विकसित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती शिक्षा के इस नए मॉडल से बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास को बेहतर आधार मिलेगा। सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र योजना से मिल रही नई गति डिजिटल माध्यमों के उपयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई का वातावरण अधिक आकर्षक और प्रभावी बन रहा है। इससे बच्चों की उपस्थिति बढ़ने के साथ ही सीखने की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा में तकनीक का यह समावेश भविष्य में बच्चों की शैक्षिक यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बना रही है, बल्कि प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा भी तय कर रही है।

IAS पुलकित गर्ग की बेटी का आंगनबाड़ी में एडमिशन, समाज में हो रही तारीफ

चित्रकूट  चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग इन दिनों एक खास फैसले को लेकर चर्चा में हैं. जहां आमतौर पर सक्षम परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट प्ले स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, वहीं IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का एडमिशन सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर मिसाल पेश की है. उनके इस कदम को सरकारी शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है. पुलकित गर्ग की बतौर जिलाधिकारी पहली तैनाती चित्रकूट में हुई है. पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी के प्ले स्कूल में एडमिशन की बारी आई, तो उन्होंने इसे औपचारिकता की तरह नहीं लिया, बल्कि एक जागरूक अभिभावक की तरह विकल्पों की गंभीरता से पड़ताल की. उन्होंने और उनकी पत्नी ने जिले के कई निजी प्ले स्कूलों के साथ-साथ कई आंगनबाड़ी केंद्रों का भी दौरा किया. सुविधाएं, वातावरण, बच्चों की गतिविधियां और शिक्षण व्यवस्था देखने के बाद उन्होंने जिला मुख्यालय में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को सबसे उपयुक्त पाया. जिस आंगनबाड़ी केंद्र में बेटी सिया का दाखिला कराया गया है, वहां करीब 35 बच्चे पंजीकृत हैं. सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर एक्टिविटीज में भाग लेती है, पढ़ाई करती है और मध्याह्न भोजन के समय सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती है. केंद्र में बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का माहौल तैयार किया गया है. रंगीन दीवारें, तस्वीरें, खिलौने, एजुकेशन किट, एबीसी और नंबर चार्ट जैसे साधन हैं, जो प्राइमरी एजुकेशन को रोचक बनाते हैं. जिलाधिकारी पुलकित गर्ग का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूती बड़ी बिल्डिंग्स या हाई फीस से नहीं, बल्कि सही माहौल, देखभाल और एक्टिविटी से आती है. उन्होंने कहा कि प्ले स्कूल या प्री-स्कूल स्तर की शिक्षा बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री पर लगातार काम किया जा रहा है. कार्यकर्ताओं को यह तय शेड्यूल दिया जाता है कि बच्चों को रोज क्या और कैसे सिखाना है- जैसे कहानियां, भावगीत, खेल गतिविधियां और बुनियादी सीख. आईएएस पुलकित गर्ग ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग भी कराई जा रही है, ताकि बच्चों को बेहतर प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके. छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और मानसिक विकास पर यहां विशेष ध्यान दिया जाता है. उनका कहना है कि अभिभावकों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भरोसा करना चाहिए और छोटे बच्चों को वहां जरूर भेजना चाहिए. आईएएस अधिकारी के इस फैसले का एक प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है. यदि व्यवस्थाएं मजबूत हों तो अधिकारी खुद भी उन पर भरोसा दिखा सकते हैं. पुलकित गर्ग ने कहा कि उनका लक्ष्य जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करना है. जहां जरूरत होगी वहां मरम्मत, नवीनीकरण और संसाधन बढ़ाने का काम किया जाएगा. स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने इस कदम की सराहना की है. उनका कहना है कि जब जिले के शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजते हैं तो इससे व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है.

दमोह में आंगनवाड़ी केंद्रों पर जल्द ही सैकड़ों आंगनवाड़ी सहायिकाओं के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने वाली

दमोह दमोह जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों पर जल्द ही सैकड़ों आंगनवाड़ी सहायिकाओं के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। दरअसल, लंबे समय से कम वेतन पर कार्यरत मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अब अपग्रेड किया गया है। इन्हें महिला बाल विकास विभाग ने मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मुख्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता में तब्दील कर दिया है। सरकार के इस फैसले से दमोह की 254 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ जाएगा। उन्हें अब 6,700 रुपये से बढ़कर 13,100 रुपये मिलने लगेंगे। मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की जगह अब इन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में माना जाएगा। सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह से प्रारंभ होगी। खास बात यह है कि इस बार स्थानीय स्तर पर भर्ती नहीं होगी। शासन को इसकी सूचना भेजी जाएगी और वहां से पोर्टल के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दिसंबर के पहले सप्ताह में कार्यप्रणाली तैयार होगी महिला बाल विकास विभाग के सहायक संचालक संजीव मिश्रा ने बताया कि अब भोपाल से पोर्टल के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया होगी। यहां से केवल खाली पद की जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले से जानकारी भेजी जा चुकी है। जो पुरानी मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं, उन्हें अब प्रमोट करके आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बना दिया गया है। संभवतः दिसंबर के पहले सप्ताह में इसकी कार्यप्रणाली तैयार हो जाएगी और पोर्टल के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले मिनी आंगनवाड़ी केंद्र पर केवल कार्यकर्ता होते थे, लेकिन अपग्रेड होने के बाद वहां सहायिका की नियुक्ति की जाएगी।  

आंगनबाड़ी में फल-दूध न मिलने पर लिया संज्ञान, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला-बाल विकास विभाग से मांगा जवाब

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी में बच्चों को फल, दूध आदि नहीं दिए जाने पर स्वतः संज्ञान लिया है. मामले की जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट से सचिव महिला बाल विकास विभाग के शपथ पत्र का तुलनात्मक मिलान करने को कहा है. मामले में अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी. बता दें कि दुर्ग जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को फल और दूध नहीं दिए जाने की खबर मीडिया में आई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डीबी ने इसके लिए एडवोकेट अमिय कांत तिवारी , सिध्दार्थ दुबे, आशीष बेक, ईशान वर्मा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया. कोर्ट कमिश्नरों ने इन केन्द्रों में जाकर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की. कोर्ट कमिश्नरों को सबंधित अधिकारियों ने बताया कि फल दूध की जगह पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है. रिपोर्ट आने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन के संबंधित प्राधिकारी से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था. मामले में राज्य के मुख्य सचिव और अन्य अफसरों को पक्षकार बनाया गया. इसके कुछ समय बाद सूरजपुर, कवर्धा और बस्तर से भी यही मामला सामने आया. इन जगहों पर जाकर भी कमिश्नरों ने निरीक्षण कर फिर अपनी रिपोर्ट तैयार की. इस बीच सचिव महिला बाल विकास ने कोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत किया. आज मंगलवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान उपस्थित कोर्ट कमिश्नर से कोर्ट ने कहा कि वे अपनी रिपोर्ट से इस शपथपत्र को तुलना कर लें ताकि मालूम हो सके कि अदालत के आदेश का पालन हुआ है या नहीं.

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