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होर्डिंग लगाकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ FIR दर्ज!

नई दिल्ली दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को झटका देते हुए होर्डिंग लगाने के लिए कथित तौर पर पब्लिक मनी के दुरुपयोग के मामले में FIR दर्ज करने आदेश दे दिया है. बताया जा रहा है कि होली के बाद केजरीवा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी. राउज एवेन्यू कोर्ट ने साल 2019 में द्वारका में बड़े होर्डिंग लगाकर कथित तौर पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में ये स्पष्ट किया कि केजरीवाल और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बनता है. पुलिस को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 156(3) CRPC के तहत याचिका मंजूर की जाती है. कोर्ट ने द्वारका साउथ पुलिस को इस मामले मे FIR दर्ज कर 18 मार्च तक SHO को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. क्या है मामला दरअसल, 2019 में कोर्ट के समक्ष दाखिल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि केजरीवाल, पूर्व आप विधायक गुलाब सिंह और द्वारका की पार्षद नितिका शर्मा ने इलाके में विभिन्न जगहों पर बड़े आकार के होर्डिंग लगाकर जानबूझकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया है. इसके बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने सितंबर 2022 में शिकायत को खारिज करते हुए एक आदेश पारित किया था. इसके बाद सत्र न्यायाधीश ने मामले को मजिस्ट्रेट अदालत में वापस भेज दिया था. इस मामले में विशेष न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट अदालत से मामले की नए सिरे से सुनवाई करने को कहा था.  

राज्यसभा सदस्य बन सकते हैं अरविंद केजरीवाल, संजीव अरोड़ा छोड़ सकते हैं अपनी सीट

नई दिल्ली दिल्ली चुनाव में आप की शिकस्त के बाद अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे. अब सूत्रों से ये खबर आ रही है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए संजीव अरोड़ा राज्‍यसभा की सीट छोड़ सकते हैं. कहा जा रहा है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल राज्यसभा में संजीव अरोड़ा की जगह ले सकते हैं. इस तरह केजरीवाल का पंजाब से राज्य सभा जाना तय माना जा रहा है. वहीं संजीव अरोड़ा लुधियाना वेस्ट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार होंगे. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव नहीं जीत पाए. केजरीवाल की हार के साथ दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की भी करारी हार हुई.  मीडिया के गलियारों में केजरीवाल के सियासी सफर पर अटकलें जारी हैं. इस बीच पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने दावा करते हुए कहा था कि केजरीवाल पंजाब के रास्ते राज्यसभा जा सकते हैं. केजरीवाल को लेकर कई तरह के दावे फिलहाल, इस पर भी अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. खबरें ये भी हैं कि आप अरोड़ा की जगह केजरीवाल को ऊपरी सदन भेजने की योजना पर विचार कर रही है. पहले केजरीवाल के लुधियाना विधानसभा सीट से चुनाव लडने की अटकलें थी. हालांकि आप सांसद मलविदर सिंह कंग ने इन अटकलों को खारिज कर दिया था. दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी और तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि केजरीवाल पंजाब के सीएम की कुर्सी भी अपने हाथों में ले सकते हैं. मतलब ये कि वो खुद सीएम बन सकते हैं. इन दावों और बयानों पर CM भगवंत मान ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है. ये संभव ही नही है. विपक्ष ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रहा-आप आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को पंजाब से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाओं पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि पार्टी के स्तर पर अभी तक इस प्रकार की कोई बात नहीं हुई है. विपक्ष ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रहा है. विपक्ष के नेता विधानसभा के अंदर कोई मुद्दा उठा नहीं सकते ना ही कुछ बोल सकते हैं इसलिए इस प्रकार के मुद्दे गुमराह करने के लिए उठा रहे हैं. पंजाब सरकार टिकने वाली नहीं- बाजवा दिल्ली में आप की हार के बाद से ही सबकी निगाहें पंजाब सरकार पर टिकी हुई है. भगवंत मान की सरकार को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह सरकार टिकने वाली नहीं है, अगले चार से पांच महीनों में इस सरकार के साथ एकनाथ शिंदे प्रकरण होगा, जब महाराष्ट्र का विमान चंडीगढ़ में उतरेगा. आम आदमी पार्टी (AAP) के 32 विधायक संपर्क में हैं. बाजवा कह रहे हैं बीजेपी नेतृत्व रवनीत बिट्टू के जरिए सीएम मान के संपर्क में है और कई गुप्त बैठकें हो चुकी है. चुनाव लड़ेंगे संजीव अरोड़ा लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को अपना उम्मीदवार बनाया है. ये सीट आप विधायक गुरप्रीत गोगी के निधन के बाद खाली हुई है. संजीव अरोड़ा को विधानसभा चुनाव में उतारे जाने के बाद पंजाब में एक राज्यसभा सीट खाली हो जाएगी. संजीव अरोड़ा की जगह खाली होने वाली राज्यसभा सीट से अरविंद केजरीवाल राज्य सभा जा सकते हैं. कौन हैं संजीव अरोड़ा संजीव अरोड़ा पंजाब के बड़े बिजनेसमेन हैं. संजीव अरोड़ा का एक्सपोर्ट इंडस्ट्री में प्राइमरी बिजनेस है. उनके ऑफिस दूसरे देशों में भी है. संजीव अरोड़ा ने चंडीगढ़ रोड पर हैम्पटन बिजनेस पार्क और हैम्पटन होम्स को भी विकसित किया है. साल 2018 में उन्होंने फेमेला फैशन लिमिटेड कंपनी लॉन्च की और महिलाओं के कपड़ों के ब्रांड फेमेला की स्टेबलिश किया. इसके बाद साल 2019 में उन्होंने मेटल बिजनेस में भी कदम रखा. संजीव अरोड़ा कई सोशल और कल्चर संस्थाओं से भी जुड़े हैं. वह दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के गवर्निंग बोर्ड में हैं.

पंजाब में पैदा हो सकते हैं दिल्ली जैसे हालात, आप पार्टी को लड़नी होगी अस्तित्व की लड़ाई

नई दिल्ली दिल्ली में करारी हार के बाद पंजाब में भी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 10 साल राजधानी में काबिज रहने के बाद अरविंद केजरीवाल ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि चुनाव में जनता उन्हे इस तरह का झटका देगी। केजरीवाल खुद अपनी सीट पर हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हार गए। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्री सौरभ भारद्वाज को भी कड़ी शिकस्त झेलनी पड़ी। 2013 के बाद दिल्ली में पहली बार AAP को हार का मुंह देखना पड़ा। इसमें बड़ा फैक्टर एंटी इनकंबेंसी भी है जिसका सामना पंजाब में भी करना पड़ेगा। ऐसे में आम आदमी पार्टी को अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी है। 62 से सीधे 22 पर AAP आम आदमी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं इस बार उसे मात्र 22 सीटों पर संतष करना पड़ा है। पार्टी का वोट शेयर भी 10 फीसदी कम होकर 43.57 प्रतिशत हो गया है। दिल्ली में ऐसी भी 14 सीटें थीं जिनपर जीत हार का फैसला बेहद कम अंतर से हुआ। इन सीटों पर 5 हजार से कम के अंतर से जीत हार हुई। वहीं अरविंद केजरीवाल ने दोपहर में ही अपनी हार स्वीकार कर ली। इसके बाद रविवार को आतिशी ने भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। मिडिल क्लास की नाराजगी पड़ी भारी जानकारों का कहना है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को मिडिल क्लास की नाराजगी का सामना करना पड़ा। वहीं बीजेपी ने ‘शीश महल’ का नाम लेकर चुनाव प्रचार किया जो कि मिडल क्लास का मुद्दा बन गया। वहीं दिल्ली के लोगों ने उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान को भी देखा है। ऐसे में डबल इंजन की सरकार के प्रति लोगों ने भरोसा जता दिया। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आम आदमी पार्टी ने गरीबों के वोट से पकड़ खो दी है। इस चुनाव में भी गरीबों ने आम आदमी पार्टी का खुलकर साथ दिया है। आम आदमी पार्टी अब भी एमसीडी पर काबिज है। 250 मे से 134 सीटें आम आदमी पार्टी के पास हैं। ऐसे में दिल्ली के लोगों के साथ AAP का जुड़ाव खत्म नहीं होने वाला है। वहीं आम आदमी पार्टी की हालत बीजेपी जैसी नहीं हुआ है। अब भी विधानसभा में उसके 22 सदस्य होंगे। आम आदमी पार्टी विधानसभा में सक्रिय विपक्ष की भूमिका निभा सकती है। वहीं पंजाब की बात करें तो वहां आम आदमी पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव के दौरान ही खतरे की घंटी बज गई थी। वहीं दिल्ली का चुनाव आम आदमी पार्टी को फिर सावधान कर रहा है। यह भी चर्चा है कि पंजाब में भी कई AAP विधायक असंतुष्ट हैं। ऐसे में पंजाब पर पकड़ बनाए रखने के लिए आम आदमी पार्टी को जमीन पर उतरना पड़ेगा। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार के आरोपों से पार पाने की है। पीएम मोदी ने साफ कह दिया है कि दिल्ली में भ्रष्टाचार की चांज करवाई जाएगी।

आम आदमी पार्टी के ‘अजेय’ होने का दंभ बना हार का कारण, फ्रीबीज पॉलिटिक्स में बीजेपी ने केजरीवाल को दे दी पटखनी

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की आंधी में आम आदमी पार्टी हवा हो गई। वो आम आदमी पार्टी जो लगातार दो चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन इस बार बीजेपी की कुछ ऐसी हवा चली कि AAP के बड़े-बड़े शूरमा उखड़ गए। खुद अरविंद केजरीवाल चुनाव हार गए। मनीष सिसोदिया चुनाव हार गए। AAP के तमाम दिग्गज चुनाव हार गए। न फ्री का वादा काम आया, न मुफ्त की रेवड़ियां काम आईं और न ही ‘कट्टर ईमानदार’ अरविंद केजरीवाल का चेहरा काम आया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कभी 70 में से 67 और 62 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी को इस बार बुरी शिकस्त का सामना करना पड़ा? आइए देखते हैं AAP की हार के 7 बड़े कारण क्या रहे। 1- एंटी-इन्कंबेंसी आम आदमी पार्टी ने अपने जन्म के साथ ही दिल्ली के लोगों के दिल पर राज किया। 2013 के अपने पहले चुनाव में वह बीजेपी के बाद दूसरे नंबर पर रही थी लेकिन त्रिशंकु विधानसभा में वह उस कांग्रेस से हाथ मिला ली, जिसके कथित भ्रष्टाचार के विरोध से राजनीति शुरू की थी। खैर, कांग्रेस के साथ गठबंधन वाली आम आदमी पार्टी की वो सरकार 2 महीने भी नहीं टिकी। उसके बाद 2015 में 70 में से 67 और 2020 में 70 में से 62 सीटों पर जीत के साथ इतिहास रचा। पार्टी लगातार 10 सालों तक दिल्ली की सत्ता में रही। लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करना वैसे भी बहुत आसान नहीं होता क्योंकि सत्ताविरोधी रुझान यानी एंटी-इन्कंबेंसी का खतरा बना रहता है। आम आदमी पार्टी को भी इस फैक्टर का नुकसान उठाना पड़ा। 2- करप्शन का दाग अब इसे विडंबना ही कहेंगे कि जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन से जन्म लिया, सत्ता में आने पर वह भी अपने दामन को करप्शन की कालिख से नहीं बचा पाई। खुद को कट्टर ईमानदार कहने वाले अरविंद केजरीवाल को करप्शन का दाग भारी पड़ा। भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें खुद जेल जाना पड़ा। मनीष सिसोदिया को जेल जाना पड़ा। सत्येंद्र जैन को जेल जाना पड़ा। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी लगातार खुद के कट्टर ईमानदार होने की दुहाई देते रहे लेकिन दिल्ली की जनता ने उनको नकार दिया। अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के शिल्पी अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली की सत्ता में आए तो एक नई तरह की साफ-सुथरी, ईमानदार और वैकल्पिक राजनीति का वादा किया था। लेकिन किया क्या? सीएजी की रिपोर्ट को विधानसभा की पटल तक पर नहीं रखा। कभी जिस दिल्ली के एक मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना जैन हवाला कांड में अपना नाम लिए जाने पर ही पद से इस्तीफा दे दिया था, उसी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल आरोप तो छोड़िए, जेल में जाने के बाद भी इस्तीफा नहीं दिया। लालू प्रसाद यादव से लेकर हेमंत सोरेन तक तमाम मुख्यमंत्रियों ने जेल जाने की नौबत आने पर नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन ईमानदारी की राजनीति के कथित चैंपियन केजरीवाल ने तो जेल से सरकार चलाने की ऐसी जिद दिखाई जो भारत की राजनीति में कभी नहीं हुआ। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इस्तीफा जरूर दिया लेकिन शायद तबतक बहुत देर हो चुकी थी। अगर जेल जाते ही इस्तीफा दिए होते तो 3- मुफ्त बिजली-पानी मॉडल से आगे नहीं बढ़ पाना अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने पहली बार सत्ता में आने के बाद मुफ्त-बिजली पानी वाला मॉडल पेश किया। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की दशा में भी सुधार का दावा किया। सुधार हुए भी, लेकिन उतने भी नहीं जितना आम आदमी पार्टी ढिंढोरा पीटती है। इस मॉडल की बदौलत दो बार सरकार भी बनाई लेकिन पार्टी इससे आगे नहीं बढ़ पाई। हर नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का चलन चलाया। सड़कें बदहाल रहीं। जगह-जगह गंदगी का अंबार रहा। निगम चुनाव में जीत के बाद साफ-सफाई की जिम्मेदारी से भाग भी नहीं सकते थे। यमुना को साफ करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन पानी आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं रहा। ये सब चीजें आम आदमी पार्टी के खिलाफ गईं। 4- फ्रीबीज पॉलिटिक्स में केजरीवाल को मिला तगड़ा कंपटिशन दूसरी तरफ, विरोधियों ने भी केजरीवाल के खिलाफ उसी हथियार का इस्तेमाल किया जो उनकी ताकत थी। ये हथियार था मुफ्त वाली योजनाओं का जिन्हें राजनीति में फ्रीबीज या मुफ्त की रेवड़ियां भी कहा जाता है। केजरीवाल की फ्रीबीज पॉलिटिक्स को मुफ्त की रेवड़ियां बताकर और देश के लिए घातक बताकर खारिज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी भी इसी होड़ में कूद गए। बीजेपी ने भी महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये, त्योहारों पर मुफ्त सिलिंडर, बुजुर्गों के लिए बढ़ी हुई पेंशन, मुफ्त इलाज जैसे लोकलुभावन वादे किए। साथ में ये भी कि आम आदमी पार्टी की सरकार की तरफ से चलाई जा रहीं मुफ्त वाली योजनाओं को भी जारी रखेंगे। इस चुनाव से पहले तक बीजेपी दिल्ली में मुफ्त की रेवड़ियों का विरोध किया था लेकिन इस बार उसने केजरीवाल के ही हथियार से केजरीवाल को मात दे दी। ये बात दीगर है कि फ्रीबीज पॉलिटिक्स से दिल्ली की इकॉनमी का कचूमर निकलता है, सत्ता तो आ ही गई। 5- केंद्रीय बजट दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के कारणों में केंद्रीय बजट को भी गिना ही जाएगा। चुनाव से ठीक पहले जिस तरह बजट में मध्यम वर्ग को बड़ी सौगात दी गई, 12 लाख रुपये तक की आमदनी और वेतनभोगियों के मामले में तो 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को इनकम टैक्स से मुक्त करने का जो ऐलान हुआ, उसका सीधा लाभ बीजेपी को दिल्ली चुनाव में मिला है। 6-अरविंद केजरीवाल की गैर-जिम्मेदार राजनीति अरविंद केजरीवाल ने सियासत में कदम रखते ही अलग तरह की राजनीति के नाम पर बिना किसी सबूत या आधार के बाकी सभी पार्टियों और उनके नेताओं को थोक के भाव में चोर-बेईमान का सर्टिफिकेट बांटना शुरू किया था। ये सिलसिला तब खत्म हुआ जब उन्हें नितिन गडकरी, कपिल सिब्बल, अवतार सिंह भड़ाना जैसे तमाम नेताओं से अदालतों में माफी मांगनी पड़ी। खैर इन सबका उन्हें राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा, बस ये फर्क पड़ा कि हर विरोधी नेता को चोर बताने की उनकी आदत छूट गई। लेकिन इस बार के दिल्ली … Read more

सचिवालय सील, सरकारी दस्तावेजों और डाटा की सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों को तुरंत दिल्ली सचिवालय पहुंचने का निर्देश दिया

नई दिल्ली दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों की मतगणना जारी है। इसी बीच प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकारी दस्तावेजों और डाटा की सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों को तुरंत दिल्ली सचिवालय पहुंचने का निर्देश दिया गया है। संयुक्त सचिव ने आदेश जारी किया है। जिसमें उन्होंने आला अधिकारी को तुरंत दिल्ली सचिवालय पहुंचने का निर्देश दिया है। यह फैसला दिल्ली में चुनाव रुझानों को देखते हुए लिया गया है। दिल्ली में भाजपा की जीत के बाद हलचल तेज हो गई है। सरकारी दस्तावेजों और डाटा की सुरक्षा के लिए संयुक्त सचिव प्रदीप तायल ने अधिकारियों को तुरंत दिल्ली सचिवालय पहुंचने का आदेश दिया है। आदेश में उन्होंने लिखा है, ‘सुरक्षा चिंताओं और रिकॉर्ड्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, यह अनुरोध किया जाता है कि प्रशासनिक विभाग की अनुमति के बिना कोई भी फाइल/दस्तावेज, कंप्यूटर हार्डवेयर आदि दिल्ली सचिवालय परिसर से बाहर न ले जाया जाए। इसलिए यह निर्देश दिया जाता है कि दिल्ली सचिवालय में स्थित विभागों/कार्यालयों के अंतर्गत संबंधित सभी ब्रांच इंचार्ज को उनके सेक्शन/ब्रांच के अंतर्गत रिकॉर्ड्स, फाइलों, दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक फाइलों आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।’

दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी की हार के ये बड़े 5 फैक्टर

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 27 सालों का सूखा खत्म करते हुए सत्ता की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। भाजपा ने सीटों पर बढ़त बनाकर रुझानों में बहुमत हासिल कर लिया है। 2013 में अन्ना हजारे के ‘क्रांतिपथ’ से निकलकर राजनीति की राह में बढ़ने वाले अरविंद केजरीवाल को पहली राजनीतिक हार मिली है। मुफ्त बिजली, पानी, बस सफर जैसी स्कीमों के बाद उनकी हार ने काफी कुछ साफ कर दिया है। मुस्लिम बहुल इलाके हों, गांधी नगर जैसे कारोबारी क्षेत्र हों या फिर पूर्वी दिल्ली का पटपड़गंज हो, सभी जगहों पर आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा है तो साफ है कि अलग-अलग वर्गों में उसने अपने जनाधार को खोया है। इसकी पर्याप्त वजहें हैं, जो चुनाव के दौरान ही साफ थीं, लेकिन अरविंद केजरीवाल अपने नाम पर चुनाव में जीत दिलाने की कोशिश में थे।   दिल्ली की सड़कों की बदहाली अरविंद केजरीवाल एक तरफ रेवड़ियां बांटने के लगातार ऐलान करते रहे तो भाजपा ने सड़क, पानी जैसे मुद्दों को नहीं छोड़ा। बुराड़ी से संगम विहार तक और पटपड़गंज से उत्तम नगर तक अलग-अलग इलाकों में टूटी सड़कों को भाजपा दिखाती रही। भाजपा का कहना था कि कहीं जल बोर्ड ने सड़कें उखाड़ तो दीं, लेकिन उन्हें सही नहीं किया। वहीं तमाम इलाकों में 10 साल में एक बार भी सड़क नहीं बनी। खराब सड़कों की रिपेयरिंग तक नहीं हो सकी। यहां तक कि अरविंद केजरीवाल ने भी सड़कों की बदहाली को स्वीकार किया था और उनका कहना था कि हम इस मोर्चे पर काम नहीं कर सके। पानी के टैंकर और पलूशन का भी असर दिल्ली के कई इलाकों में टैंकर माफिया के सक्रिय होने और गर्मी के मौसम में हर साल पानी की किल्लत की खबरें आती रही हैं। एक तरफ फ्री बिजली और पानी देने के वादे तो कहीं पानी की ही किल्लत होने से दिक्कतें आईं। माना जा रहा है कि जनता ने पानी की परेशानी के नाम पर भी वोट दिया। एक तरफ भाजपा ने फ्री वाली स्कीमों को जारी रखने का वादा किया तो वहीं सुधार की भी बात कही। माना जा रहा है कि दिल्ली के लोगों ने पानी और सड़क के नाम पर भाजपा को मौका देने का फैसला लिया है। मुस्लिम वोटों का बंटवारा, दिल्ली दंगों ने बदला माहौल ओखला से लेकर मुस्तफाबाद तक में भाजपा ने बढ़त कायम की है। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने वोट काटे हैं तो वहीं कांग्रेस को भी मुस्लिमों का वोट मिला है। इस बार मुस्लिमों के बीच आम आदमी पार्टी के लिए एकतरफा वोटिंग नहीं हुई। माना जा रहा है कि इसके चलते भाजपा को सीधे बढ़त मिली है। कई मुस्लिम बहुल इलाकों में लोगों ने इस बात की शिकायत की कि 2020 के दंगों में अरविंद केजरीवाल ने साथ नहीं दिया। इसके अलावा कोरोना काल में मुस्लिमों को बदनाम किया गया। ऐसे में मुस्लिम वोटों का AAP के पक्ष में एकजुट न रहना उसके लिए झटके के तौर पर सामने आया है। 8वां वेतन आयोग, पेंशन और टैक्स राहत के ऐलान से भाजपा के साथ सरकारी कर्मी? आरके पुरम जैसी सीट पर भाजपा आगे है। यह सीट सरकारी कर्मचारिचों के बहुलता वाली मानी जाती है। ऐसे में कहा जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों ने भाजपा को समर्थन किया है। यूनिफाइड पेंशन स्कीम और फिर 8वां वेतन आयोग घोषित करके भाजपा ने दिल्ली चुनाव में सरकारी कर्मचारियों को लुभा लिया। यही नहीं 1 फरवरी को ही आए बजट में 12 लाख रुपये तक ही कमाने वालों की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इसका फायदा पार्टी को चुनाव में मिला है। आरएसएस ने संभाला मोर्चा, एकजुटता से लड़ा संगठन भाजपा ने लोकसभा चुनाव में दिल्ली में सातों सीटें पाई थीं। लेकिन कुछ राज्यों में झटका लगा था तो आरएसएस के साथ तालमेल को लेकर सवाल उठा था। इस बार भाजपा और आरएसएस के बीच बेहतर तालमेल दिखा। यही नहीं संघ के लोगों को बूथ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह भाजपा और संघ के आनुषांगिक संगठनों में अच्छा समन्वय दिखा। माना जा रहा है कि इसका असर ग्राउंड पर दिखा और अब नतीजा सामने है।

दो सीटों से चुनाव लड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वो सिर्फ एक सीट से चुनाव लड़ेंगे

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनावों का ऐलान हो चुका है। 5 फरवरी को दिल्ली में वोटिंग होनी है। चुनावों के ऐलान से पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल दिल्ली की दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने सभी अटकलों पर ब्रेक लगाते हुए अपना मूड बता दिया। अटकलों को खारिज करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वो सिर्फ एक सीट से चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि विधानसभा चुनावों के की सुगबुगाहट के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ेंगे। इस मामलो को लेकर भाजपा ने भी हवा दी थी। भाजपा का कहना था कि अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव में जीत को लेकर अश्वस्त नहीं हैं, इसलिए वो दूसरी सीट से भी चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अब इन सभी अटकलों विराम लगाते हुए केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि वो सिर्फ नई दिल्ली विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने तेजी दिखाते हुए सभी 70 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। ‘आप’ कैंडिडेट लिस्ट में जानकारी सामने आई, जिसमें पूर्व डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की सीट बदल गई थी। सिसोदिया की सीट पटपड़गंज विधानसभा से मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर अवध ओझा पर आम आदमी पार्टी ने भरोसा जताया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री आतिशी कालका जी और मनीष सिसोदिया को इस बार के चुनावों में जंगपुरा सीट से मैदान में उतारा है। इसके अलावा आप ने सभी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान पहले ही कर दिया था। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के ऐलान के बाद अब भाजपा के प्रत्याशियों का ऐलान बाकी है। हालांकि, भाजपा ने भी 29 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है।

Delhi: ‘दिल्ली के जाटों को OBC सूची में करें शामिल’, जाट समाज को लेकर अरविंद केजरीवाल ने PM मोदी को लिखा पत्र

arvind kejriwal writes to pm modi to include the jat community of delhi in the center s obc list आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जाट समुदाय को केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल करने के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा। केजरीवाल ने लिखा कि केंद्र सरकार पिछले 10 सालों से लगातार जाट समाज के साथ धोखा कर रही है। केंद्र सरकार की वादाखिलाफी की वजह से दिल्ली के ओबीसी समाज के हजारों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। केजरीवाल ने पत्र में लिखा, ‘एक महत्वपूर्ण विषय पर 10 साल पहले आपका किया वादा आपको याद दिलाने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। दिल्ली के जाट समाज के कई प्रतिनिधियों से पिछले कुछ दिनों में मुलाकात हुई। इन सभी ने केंद्र की ओबीसी लिस्ट में दिल्ली के जाट समाज की अनदेखी किये जाने पर चिंता जाहिर की। जाट समाज के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया कि आपने 26 मार्च 2015 को दिल्ली के जाट समाज के प्रतिनिधियों को अपने घर बुलाकर ये वादा किया था कि जाट समाज, जो दिल्ली की ओबीसी लिस्ट में है, उसे केंद्र की ओबीसी लिस्ट में भी जोड़ा जाएगा ताकि उन्हें दिल्ली में मौजूद केंद्र सरकार के कॉलेजों और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके।’ केजरीवाल ने आगे लिखा, ‘फिर 8 फरवरी 2017 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी चुनाव से पहले चौधरी बीरेंद्र सिंह के घर पर दिल्ली और देश के जाट नेताओं की मीटिंग बुलाई और उनसे वादा किया कि स्टेट लिस्ट में जो ओबीसी जातियां हैं उनको केंद्र की लिस्ट में जोड़ा जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में फिर भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा के आवास पर अमित शाह जाट नेताओं से मिले और उन्होंने फिर वादा किया कि दिल्ली के जाट समाज को केंद्र की ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाएगा लेकिन चुनाव के बाद इस पर कोई काम नहीं हुआ।’केजरीवाल ने लिखा, ‘ओबीसी आरक्षण को लेकर केंद्र की नीतियों में कई विसंगतियां हैं जिनकी तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। जैसे कि मुझे पता चला कि केंद्र की ओबीसी लिस्ट में होने की वजह से राजस्थान से आने वाले जाट समाज के युवाओं को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है, लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली के ही जाट समाज को दिल्ली यूनिवर्सिटी में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि आपकी सरकार ने दिल्ली में जाट समाज को ओबीसी आरक्षण होने के बावजूद उन्हें केंद्रीय ओबीसी लिस्ट में शामिल नहीं किया है। ये तो दिल्ली के जाट समाज के साथ धोखा है। और भाजपा की केंद्र सरकार पिछले 10 सालों से लगातार ये धोखा कर रही है। सिर्फ जाट समाज ही नहीं रावत, रौनियार, राय तंवर, चारण व ओड, इन सभी जातियों को दिल्ली सरकार ने ओबीसी दर्जा दिया हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार इन जातियों को दिल्ली में मौजूद अपने संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दे रही है।’उन्होंने आगे लिखा, ‘दिल्ली में केंद्र सरकार की सात यूनिवर्सिटी हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के दर्जनों कॉलेज हैं। दिल्ली पुलिस, एनडीएमसी, डीडीए, एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया जैसे केंद्र सरकार के कई संस्थानों में नौकरियां हैं जिनमें केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की इस वादाखिलाफी की वजह से दिल्ली के ओबीसी समाज के हजारों युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। दिल्ली में जाट समाज व ओबीसी की 5 अन्य जातियों के साथ केंद्र सरकार का ये पक्षपातपूर्ण रवैया इन जातियों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के उचित अवसर हासिल नहीं होने दे रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को तुरंत केंद्रीय ओबीसी सूची की विसंगतियों में सुधार कर दिल्ली में ओबीसी दर्जा प्राप्त सभी जातियों को केंद्र सरकार के संस्थानों में भी आरक्षण का लाभ देना चाहिये।

केजरीवाल ने ‘AAP’ का कैंपेन सॉन्ग लॉन्च कर बीजेपी पर तंज किया, देश में गाली-गलौच वाली पार्टी को भी यह गाना पसंद आएगा

नई दिल्ली चुनाव आयोग आज बुधवार को दोपहर 2 बजे दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने वाला है। दिल्ली चुनाव को लेकर सियासी पार्टियों ने प्रचार अभियान भी तेज कर दिया है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने पार्टी का कैंपेन सॉन्ग लॉन्च किया है। इस गाने में दिल्ली सरकार की योजनाओं के बारे में बताया गया है। अरविंद केजरीवाल ने ‘AAP’ का कैंपेन सॉन्ग लॉन्च करने के मौके पर बीजेपी पर तंज सकते हुए कहा, “देश में गाली-गलौच वाली पार्टी को भी यह गाना पसंद आएगा। वे इसे बंद कमरे में बैठकर सुन सकते हैं और थिरक सकते हैं।” उन्होंने कहा कि दिल्ली में चुनाव एक त्योहार जैसा होता है, जहां लोग नाचते और झूमते हैं।   गाने को दिल्ली के लोगों को समर्पित कर रहे- केजरीवाल केजरीवाल ने आगे कहा, “पूरे चुनावी माहौल में, दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के लोगों को एक चीज का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है और वह है ‘AAP’ का कैंपेन सॉन्ग। मुझे लगातार फोन आते थे कि ‘आप का कैंपेन सॉन्ग कब लॉन्च हो रहा है?’ अब हम इस गाने को दिल्ली के लोगों को समर्पित कर रहे हैं। इस गाने का खूब प्रचार करें, क्योंकि यह हमारे दिल्लीवासियों के लिए है।” अरविंद केजरीवाल ने इस कैंपेन सॉन्ग को दिल्ली के लोगों के बीच और पार्टी के प्रचार में उत्साह बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने ‘‘विश्वसनीय सूत्रों” का हवाला देते हुए दावा किया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अगले कुछ दिनों में पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के घर पर छापेमारी करेगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए उनकी (केजरीवाल) यह ‘‘चाल” है क्योंकि उन्हें चुनाव हारने का डर है। सीबीआई ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ‘अगले कुछ दिनों में सीबीआई का छापा पड़ेगा’ केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैंने कुछ दिन पहले बोला था कि दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी जी को गिरफ्तार किया जाएगा और ‘आप’ के कुछ नेताओं के घर पर छापेमारी की जाएगी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, मनीष सिसोदिया जी के घर अगले कुछ दिनों में सीबीआई का छापा पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव हार रही है, इसलिए ये गिरफ्तारियां और छापेमारी उनकी बौखलाहट का नतीजा है। केजरीवाल ने कहा, ‘‘अभी तक इन्हें हमारे खिलाफ कुछ नहीं मिला है और आगे भी कुछ नहीं मिलेगा। आप एक कट्टर ईमानदार पार्टी है।” 

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ‘सामना’ में केजरीवाल पर कड़ी टिप्पणी की, जनता की अनदेखी कर ‘शीशमहल’ बनवाया

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) ने अपने संपादकीय ‘सामान’ में दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। ‘सामना’ में कहा गया है कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के हितों पर कुठाराघात किया है। केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए जनता के हितों की अनदेखी करते हुए अपने लिए करोड़ों का शीशमहल बनवा लिया, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ‘सामना’ में कहा गया है कि केजरीवाल सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल साबित हुई। उन्होंने दिल्ली की जनता को जो सुविधाएं देने का दावा और वादा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने से पहले किया था। बड़े अफसोस की बात है कि वो उन दावों और वादों को पूरा करने में विफल साबित हुए और दिल्ली की जनता यह सबकुछ देख रही है। इतना ही नहीं, ‘सामना’ के संपादकीय में दिल्ली के विधानसभा चुनाव की तुलना मौत से की गई है। कहा गया है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव अब दोनों पार्टियों के लिए जिंदगी और मौत का खेल बन चुका है। ऐसी स्थिति में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि दिल्ली की राजनीति की दिशा व दशा कैसी रहती है। ‘सामना’ ने अपने संपादकीय में कहा है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर लड़ा था। लेकिन, अब दिल्ली का विधानसभा चुनाव दोनों ही पार्टियां फ्रीस्टाइल कुश्ती के तौर पर लड़ रही है। बता दें कि फरवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। ऐसे में अभी से ही दोनों पार्टियां चुनाव प्रचार में जुट गई है। दिल्ली की राजनीति में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच माना जा रहा है। बता दें कि इससे पहले उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना ने अपने संपादकीय ‘सामना’ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ करके प्रदेश की राजनीतिक में कई बड़े संकेत दे दिए थे। ‘सामना’ ने अपने संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कई कार्यों का उल्लेख कर उनकी तारीफ की थी। ‘सामना’ ने अपने लेख में लिखा था कि नए साल की शुरुआत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गढ़चिरौली जिले को विकास की नई दिशा देने का संकल्प लिया। जब बाकी मंत्रिमंडल के मंत्री विशेष जिलों और मलाईदार महकमों की तलाश में थे, मुख्यमंत्री फडणवीस ने गढ़चिरौली का दौरा किया और वहां कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। ‘सामना’ में आगे कहा गया था कि मुख्यमंत्री ने इस दौरान गढ़चिरौली के विकास के नए युग की शुरुआत की बात कही। मुख्यमंत्री का कहना था कि अगर यह विकास योजनाएं सफल होती हैं, तो यह न केवल गढ़चिरौली, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक सकारात्मक कदम होगा। विशेष रूप से गढ़चिरौली के गरीब आदिवासी समुदाय के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।  

केंद्र सरकार उन तीन कृषि कानूनों को ‘पॉलिसी’ कहकर पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश कर रही है: अरविंद केजरीवाल

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच किसानों के मुद्दे पर ठन गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खत को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी से लेकर आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जोरदार पलटवार किया है। पूर्व सीएम केजरीवाल ने तो यहां तक दावा किया है कि केंद्र सरकार उन तीन कृषि कानूनों को ‘पॉलिसी’ कहकर पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें विरोध के बाद वापस ले लिया गया था। शिवराज का लेटर सामने आने के कुछ देर बाद अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है और उनके साथ किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। केजरीवाल ने लिखा, ‘पंजाब में किसान कई दिनों से धरने और अनिश्चित अनशन पर बैठे हैं। इनकी वही मांगे हैं जो केंद्र सरकार ने तीन साल पहले मान ली थी, लेकिन अभी तक लागू नहीं की। बीजेपी सरकार अब अपने वादे से मुकर गई। बीजेपी सरकार किसानों से बात तक नहीं कर रही। उनसे बात तो करो। हमारे ही देश के किसान हैं। बीजेपी को इतना ज्यादा अहंकार क्यों है कि किसी से बात भी नहीं करते? पंजाब में जो किसान अनिश्चित अनशन पर बैठे हैं, भगवान उन्हें सलामत रखें लेकिन यदि उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए बीजेपी जिम्मेदार होगी।’ इसी के साथ ‘आप’ प्रमुख ने दावा किया कि केंद्र सरकार वापस लिए गए कृषि कानूनों को ‘पॉलिसी’ के रूप में फिर से लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘देशभर के किसानों की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि जो तीन काले कानून केंद्र ने 3 साल पहले किसानों के आंदोलन की वजह से वापिस लिए थे, उन्हें ‘पालिसी’ कहकर केंद्र सरकार पिछले दरवाजे से दोबारा लागू करने की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी की कॉपी उनके विचार जानने के लिए केंद्र ने सभी राज्यों को भेजी है।’ केजरीवाल ने यह दावा ऐसे समय पर किया है जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ‘आप’ की सरकार को केंद्र की योजनाओं को लागू कर किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए। शिवराज ने मुख्यमंत्री आतिशी लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिल्ली में आप पार्टी की सरकार किसानों के प्रति बेहद उदासीन है और किसानों के लिए आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में कोई संवेदना नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आतिशी ने कभी किसानों के हित में उचित निर्णय नहीं लिए। चौहान ने कहा कि 10 साल से दिल्ली में आप की सरकार है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने हमेशा किसानों के साथ केवल धोखा किया है। केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं को आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में लागू नहीं किया। इस कारण से दिल्ली के किसान केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आप पार्टी सरकार का किसानों के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया है। शिवराज ने कहा कि दिल्ली के किसान एकीकृत बागवानी मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, बीज ग्राम कार्यक्रम सहित अनेक योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। केंद्र की कृषि योजनाएं लागू नहीं होने से किसान नर्सरी और टिशू कल्चर की स्थापना, रोपण सामग्री की आपूर्ति, फसल उपरांत प्रबंधन के इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, नए बाग, पाली हाउस एवं कोल्ड चैन की सब्सिडी सहित अनेक योजनाओं के लाभ नहीं ले पाए। किसानों को कृषि विकास योजना को लागू नहीं होने से कृषि मशीनीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, फसल अवशेष प्रबंधन, परंपरागत कृषि विकास योजना, कृषि वानिकी और फसल विविधीकरण के लिए सब्सिडी जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित किसान उपकरण का पंजीकरण कमर्शियल व्हीकल श्रेणी में किया जा रहा है, जिससे किसानों को अधिक दाम देना पड़ रहा है। दिल्ली में किसानों के लिए बिजली की उच्च दरें निर्धारित कर रखी है। यमुना से लगे गांवों में सिंचाई उपकरणों के बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। कृषि मंत्री ने पत्र में कहा कि राजनैतिक प्रतिस्पर्धा किसान कल्याण में बाधा नहीं बननी चाहिए। किसान कल्याण सभी सरकारों का कर्तव्य हैं। इसलिए दलगत राजनीति से उठकर आप पार्टी की सरकार को किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर पुजारी का रजिस्ट्रेशन कर ‘पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना’ की शुरुआत की

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ‘पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना’ के रजिस्ट्रेशन की शुरुआत मंगलवार से कर दी। उनके साथ उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल भी मौजूद थी। अरविंद केजरीवाल ने आईएसबीटी स्थित मरघट वाले बाबा के मंदिर पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके साथ वहां मौजूद पुजारी का रजिस्ट्रेशन कर इस योजना की शुरुआत की। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मरघट वाले बाबा मंदिर के महंत का योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करके प्रदेशभर में ‘पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना’ के रजिस्ट्रेशन कार्यक्रम की शुरुआत की। अरविंद केजरीवाल ने कहा, “आज मरघट वाले बाबा के मंदिर (आईएसबीटी) में दर्शन किए और पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना का शुभारंभ किया। यहां के महंत जी का आज जन्मदिन है। उनके साथ जन्मदिन भी मनाया।” उन्होंने कहा, “भाजपा ने रजिस्ट्रेशन रोकने की पूरी कोशिश की। लेकिन, भक्त को अपने भगवान से मिलने से कोई नहीं रोक सकता।” अरविंद केजरीवाल ने सुबह ही सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “बीजेपी वाले मुझे कल से गंदी-गंदी गालियां दे रहे हैं, जब से पुजारी ग्रंथी सम्मान योजना की घोषणा हुई है। मेरा उनसे प्रश्न है – क्या मुझे गाली देने से देश का फायदा होगा? आपकी 20 राज्यों में सरकारें हैं। गुजरात में तो आपकी 30 साल से सरकार है। अभी तक आपने वहां पुजारियों और ग्रंथियों का सम्मान क्यों नहीं किया? चलो अब ही कर दो? मैंने अब सबको रास्ता दिखा दिया है। मुझे गाली देने की बजाय आप अपने बीस राज्यों में इसे लागू करो ना, तब तो सबका फायदा होगा? मुझे गालियां क्यों देते हो?” दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच वाद-विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। इससे पहले महिला सम्मान योजना और बुजुर्गों के लिए शुरू की गई संजीवनी योजना को लेकर भी बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच भिड़ंत हो चुकी है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा- आतिशी को गिरफ्तार किया जा सकता है, मुझ पर भी रेड होगी

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संजोयक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में चुनाव से पहले आशंका जाहिर की है कि मुख्यमंत्री आतिशी को गिरफ्तार किया जा सकता है। केजरीवाल ने बुधवार को आतिशी, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए दावा किया कि एक बार फिर उनके खिलाफ भी रेड होगी। केजरीवाल ने आशंका जाहिर की कि ट्रांसपोर्ट विभाग के एक केस के तहत ऐसा किया जा सकता है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें सूत्रों से ऐसी जानकारी मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, ‘हमें 3-4 दिन पहले हमें अपने सूत्रों से पता चला है कि ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स की मीटिंग हुई है। उस मीटिंग में ऊपर से आदेश आए हैं कि कुछ भी फर्जी केस करके आतिशी को गिरफ्तार किया जाए। मैं पूरी जिम्मेदारी से आरोप लगा रहा हूं कि इन तीनों एजेंसियों से कहा गया है कि कुछ भी फर्जी केस करके आतिशी को गिरफ्तार किया जाए।’ आप सुप्रीमो ने कहा कि चुनावी तैयारियों से रोकने के लिए उनके खिलाफ, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, आतिशी, सौरभ भारद्वाज के खिलाफ छापेमारी की जाएगी। केजरीवाल ने कहा, ‘ऐसा भी सूत्रों से पता चला है कि ट्रांसपोर्ट विभाग में कोई फर्जी केस तैयार किया जा रहा है। इनका मकसद है कि महिलाओं की फ्री यात्रा बंद कराना चाहते हैं। ट्रांसपोर्ट विभाग में फर्जी केस तैयार किया जा रहा है। हमें यकीन है कि लोग गंदी साजिशों का जवाब देंगे। देश की जनता इस तरह की राजनीति पसंद नहीं करती।’ मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा: आतिशी आतिशी ने कहा, ‘हमें पुख्ता खबर मिली है कि ट्रांसपोर्ट विभाग के एक फर्जी केस के माध्यम से दिल्ली में महिलाओं की फ्री यात्रा बंद करने के लिए मेरे ऊपर फर्जी केस का प्रयास किया जा रहा है। हमने हमेशा ईमानदारी से काम किया है और करेंगे। मुझे विश्वास है कि यदि एजेंसियां मुझे गिरफ्तार करती हैं, आखिरकार सच्चाई सामने आएगी। मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। जिस तरह सीनियर नेताओं को फर्जी केस में गिरफ्तार किया गया और फिर सबको बेल मिली। मुझे संविधान और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। आप हम पर झूठे केस करके दिल्लीवालों की सुविधाएं रोकना चाहते हैं, दिल्ली की जनता सब देख रही है।’ महिला सम्मान योजना और संजीवनी पर क्या दी सफाई आतिशी ने महिला एवं बाल कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी नोटिस को गलत बताया है, जिनमें जनता से अपील की गई है कि वे इन योजनाओं के नाम पर अपने दस्तावेज किसी से साझा ना करें। मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा, ‘जो नोटिस आज अखबारों में जारी हुए वे पूरी तरह गलत हैं। कुछ अफसरों पर भाजपा ने दबाव बनाकर गलत सूचना अखबार में छपवाई है। इन अफसरों पर पुलिस कार्रवाई भी की जाएगी। सूचना निकाली गई कि महिला सम्मान जैसी योजना नहीं, जबकि दिल्ली सरकार की कैबिनेट का नोटिफिकेशन है। 1000 की स्कीम नोटिफाई हो चुकी है। अफसरों पर सख्त कार्रवाई होगी, पुलिस कार्रवाई भी होगी। आम आदमी पार्टी की घोषणा है कि सरकार बनने के बाद संजीवनी योजना लाई जाएगी। सरकार बनने के बाद 1000 की स्कीम को 2100 किया जाएगा।’ वहीं, पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘जाहिर तौर पर यह चुनावी घोषणा है, जनता को भरोसा है, जनता रजिस्टर कर रही है। जो लोग रजिस्टर कर रहे हैं, उन्हें चुनाव के बाद फायदा दिलाएंगे। यह हमारा, आम आदमी पार्टी का चुनावी वादा है तो आम आदमी पार्टी रजिस्टर कर रही है।’

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के बुज़ुर्गों के लिए एक स्पेशन स्कीम का ऐलान किया, बुज़ुर्गों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का ऐलान किया है। इस योजना में 60 साल से ज्यादा उम्र के बुज़ुर्गों का इलाज फ्री में होगा। ये केजरीवाल की गारंटी है।  केजरीवाल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने दिल्ली के बुज़ुर्गों के लिए एक स्पेशन स्कीम का ऐलान किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली में 60 साल से ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों का इलाज मुफ्त होगा। ये केजरीवाल की गारंटी है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे 100 बीमारियों आकर घेर लेती हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चिंता इलाज की होती है। मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं, जो काफी अच्छे परिवार से आते हैं, लेकिन फिर भी उनके बच्चे उनका ख्याल नहीं रखते। उन्होंने कहा कि रामायण में एक प्रसंग है जब लक्ष्मण मूर्च्छित हो गए थे और हनुमान ने उनके लिए संजीवनी बूटी लाकर उन्हें जीवनदान दिया। आज, मैं दिल्ली सरकार के लिए बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का ऐलान कर रहा हूं। इस योजना के तहत 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों का इलाज पूरी तरह से निशुल्क होगा। चुनाव के बाद हम इस योजना को पारित करेंगे और इसमें किसी भी तरह की आय सीमा नहीं होगी। आपको एक कार्ड दिया जाएगा, जिसे संभालकर रखना होगा। जैसे ही आम आदमी पार्टी चुनाव जीतकर सरकार बनाएगी, यह योजना पारित कर लागू की जाएगी। जानते हैं क्या है संजीवनी स्कीम- संजीवनी स्कीम 60 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए लाई गई है। इस योजना के तहत बुजुर्गों का इलाज निशुल्क होगा। वे सरकारी या प्राइवेट हॉस्पिटल में अपना इलाज करवा सकते हैं। इस स्कीम के तहत आप पार्टी के कार्यकर्ता अगले दो से तीन दिनों में घर-घर जाकर बुजुर्गों का रजिस्ट्रेशन करेंगे। इस स्कीम इलाज करवाने वाले बुज़ुर्गों का पूरा खर्चा दिल्ली सरकार करेगी। महिलाओं के लिए भी लाई गई थी स्कीम- जानकारी के लिए बता दें कि बीते सप्ताह केजरीवाल ने महिलाओं के लिए महिला सम्मान योजना भी पेश की थी। इस स्कीम में दिल्ली की 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये जबकि चुनाव जीतने के बाद 2100 रुपये मिलना शुरू हो जाएंगे।

केजरीवाल ने भाजपा मुख्यालय के पास धरना देते हुए कहा कि वह दिल्ली चुनाव में आंबेडकर मामले को घर-घर लेकर जाएंगे

नई दिल्ली गृहमंत्री अमित शाह की ओर से संसद में भीमराव आंबेडकर पर दिए गए बयान को बाबा साहब का अपमान बताते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली चुनाव में इसे मुद्दा बनाने की बात कही है। ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा मुख्यालय के पास धरना देते हुए कहा कि वह दिल्ली चुनाव में इस बात को घर-घर लेकर जाएंगे। पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा के समर्थकों को भाजपा और बाबा साहब में से किसी एक को चुनना होगा। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नारा देते हुए लिखा- जो बाबा साहेब से करे प्यार, वो बीजेपी को करे इनकार। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह समेत पार्टी के कार्यकर्ताओं संग भाजपा मुख्यालय के पास सड़क पर धरना दिया। वह भाजपा मुख्यालय तक जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग करके प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। केजरीवाल ने सड़क पर बैठकर मीडिया से बात की और भाजपा पर आरोप लगाया कि जानबूझकर बाबा साहब का अपमान किया गया। केजरीवाल ने कहा, ‘मैं अमित शाह जी से कहना चाहता हूं कि देश के करोड़ों दलितों, गरीबों, पिछड़ों, वंचितों के लिए बाबा साहब भगवान से कम नहीं। मरने के बाद पता नहीं स्वर्ग मिलता है या नहीं, लेकिन पृथ्वी पर करोड़ों लोग जिंदा हैं क्योंकि उन्हें संविधान ने जीने और रहने का हक दिया। जिस तरह अमित शाह ने आंबेडकर का अपमान किया करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुईं।’ केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री जी अमित शाह जी के समर्थन में उतर आए उससे लगता है कि कल जो अमित शाह ने कहा था वह भाजपा की सोची हुई रणनीति थी, जिसके तहत संसद में बाबा साहब का अपमान किया गया। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। इससे साफ हो गया कि भाजपा बाबा साहब और संविधान के खिलाफ है। अब भाजपा के समर्थकों को चुनना पड़ेगा कि या तो भाजपा के साथ हैं या बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के साथ। आप दोनों के साथ नहीं हो सकते हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वो बाबा साहब के खिलाफ हैं। दिल्ली में चुनाव, हम घर-घर ले जाएंगे यह बात: केजरीवाल पूर्व सीएम ने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि अमित शाह जी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जो लोगों में रोष है वह खत्म तो नहीं हो सकता है, लेकिन गुस्सा कम हो सकता है। हम देशभर में इस बात को लेकर जाएंगे कि किस तरह भाजपा और शीर्ष नेतृत्व बाबा साहब का अपमान कर रहा है। दिल्ली में चुनाव है, हम घर-घर में इस बात को लेकर जाएंगे कि किस तरह उनका अपमान हो रहा है।’

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