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तीन जून को राम मंदिर में दूसरी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, अयोध्या उत्सव की तैयारी में जुटी

अयोध्या  राम नगरी अयोध्या में इस समय तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। तीन जून को अयोध्या एक बार फिर भव्य उत्सव मनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। तीन जून को राम मंदिर में दूसरी प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस बार राम दरबार समेत अन्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। संबंधित निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक होगी। बैठक में समिति चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा शामिल होंगे। राम मंदिर निर्माण को लेकर शुरू हो रही तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में पहले और दूसरे तल समेत परकोटा के छह मंदिरों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा होगी। सप्त मंडपम के मंदिरों की समीक्षा की जाएगी। राम मंदिर की लाइटिंग की भी समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा राम मंदिर में आवागमन के लिए लगाई गई सीढ़ियों पर लगी रेलिंग के अतिरिक्त कुछ स्थानों पर पत्थरों को रिप्लेसमेंट करने को लेकर भी समीक्षा होगी। राम मंदिर में दूसरी बार प्राण-प्रतिष्ठा के लिए साधु-संतों को निमंत्रण दिया जा रहा है। उत्तराखंड के संतों को निमंत्रण देने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपतराय के अलावा अन्य पदाधिकारी हरिद्वार पहुंचे हैं। महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि और योग गुरु बाबा रामदेव के अलावा अन्य संतों को निमंत्रण देंगे। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण 5 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा समारोह तीन जून से शुरू होगा। यह पांच जून तक चलेगा। पांच जून के बाद एक सप्ताह के अंदर सभी मंदिर दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार अतिथि अलग होंगे। बता दें कि पिछले साल 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा भव्य राम मंदिर में हुई थी। इसमें खेल, बिजनेस और राजनीति से जुड़ी हस्तियों को आमंत्रित किया गया था।  

अयोध्या में राम दरबार 6 जून से श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा, राम, सीता और अन्य देवताओं की प्रतिमाएं 23 मई को स्थापित होंगी

अयोध्या श्रीराममंदिर के निर्माण कार्य में तेजी देखने को मिल रही है। योगी सरकार की निगरानी में यह ऐतिहासिक राम मंदिर निर्माण कार्य अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। बुधवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में राममंदिर में रामलला के अलावा 18 और मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा जून में होगी। ये मूर्तियां राजस्थान के जयपुर में बनाई जा रही हैं। ये मूर्तियां 15 अप्रैल के बाद अयोध्या पहुंच जाएंगी। इसके बाद 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के मौके पर सिंहासन पर मूर्तियों को रखा जाएगा। फिर जून में प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार और परकोटा में छह मंदिरों की स्थापना होगी। इनमें सूर्य, भगवती, अन्नपूर्णा, शिवलिंग, गणपति और हनुमान जी की मूर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, शेषावतार मंदिर में लक्ष्मण जी की मूर्ति स्थापित की जाएगी। सप्त मंडप में महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य मुनि, निषाद राज, शबरी और अहिल्या की मूर्तियां स्थापित होंगी। ये सभी प्रतिमाएं सफेद मकराना मार्बल से तैयार की गई हैं, जिनका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। मूर्तियों के श्रृंगार, वस्त्र और आभूषणों की तैयारी भी जोरों पर है। चंपत राय ने बताया कि तुलसीदास की मूर्ति पहले ही स्थापित की जा चुकी है और यात्री सुविधा केंद्र के मंडप में श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर राम दरबार को प्रथम मंजिल के गर्भगृह में स्थापित कर दिया जाएगा। जून में ट्रस्ट के सभी सदस्यों की उपस्थिति में तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित होगा, जिसमें जलवास, अन्नवास, औषधिवास और शैय्यावास जैसे अनुष्ठान शामिल होंगे। शेषावतार मंदिर का कार्य बाद में शुरू होगा, जिसके लिए अंदर के टावर क्रेन से हटाए जाएंगे। मिश्र ने बताया, ‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा इस मंदिर के भूतल पर 2024 में हो चुकी है। अब राजा राम को प्रथम तल पर राम दरबार में विराजमान करने की बारी है। अनुमान है कि भगवान राम, उनके भाइयों और माता सीता की प्रतिमाएं अयोध्या पहुंचेंगी और 23 मई को मंदिर के प्रथम तल पर इन्हें स्थापित किया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘जब भगवान राम की प्रतिमा उनके दरबार में स्थापित होगी तो स्वभाविक है कि एक धार्मिक समारोह के बाद ही यह होगा। यहां पूजा होगी, लेकिन इसे प्राण प्रतिष्ठा कहना ठीक नहीं होगा क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा पहले ही हो चुकी है। हां, राम दरबार को आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने से पूर्व अलग-अलग तरह की पूजा होगी। यह पूजा 5 जून को संपन्न होगी।’ 23 मई को होगी प्रतिमा स्थापित मिश्र ने कहा कि 23 मई और 5 जून की तिथियों का अपना ज्योतिषीय योग है। इसलिए 23 मई को स्थापना करने और 5 जून को पूजा संपन्न होने के बाद राम दरबार को आम लोगों के लिए खोलने का फैसला किया गया है। करीब पांच फुट की राम की प्रतिमा जयपुर में सफेद संगमरमर से तैयार की गई है और इसे राम दरबार में स्थापित किया जाएगा। यहां सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की भी प्रतिमाएं होंगी। यह पूछने पर क्या पूरा मंदिर 5 जून तक तैयार हो जाएगा और 6 जून से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा, मिश्र ने कहा, ‘हां, यह हो जाएगा क्योंकि दूसरा फ्लोर भी उसी दिन तैयार हो जाएगा। मुख्य मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा, लेकिन परिसर की दीवार का निर्माण पूरा होने में कुछ और माह लगेंगे। हालांकि, 6 जून तक राम मंदिर के बाहर महर्षि वाल्मिकी मंदिर जैसे अन्य सात मंदिरों का निर्माण पूरा हो जाएगा।’ राय ने कहा, ‘जून में कोई पावन तिथि तय करके सभी विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा होगी।’ राय ने बालक राम लला के सूर्य तिलक की व्यवस्था के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सूर्य तिलक की परिकल्पना पीएम नरेंद्र मोदी की थी। ‘सभी मूर्तियां लगभग तैयार हैं’ राय ने कहा, ‘सभी मूर्तियां लगभग तैयार हैं। वस्त्र और आभूषण तैयार कराए जा रहे हैं। 15 अप्रैल के बाद मूर्तियों को लाने का क्रम शुरू हो जाएगा। सफेद मकराना पत्थर की मूर्तियां भारी हैं, इसलिए उन्हें लाकर निर्धारित स्थान पर स्थापित कर दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘इसमें संत तुलसीदास की मूर्ति स्थापित हो चुकी है। कुल 18 मूर्तियां जयपुर से आनी हैं। सप्तमंडप की महर्षि बाल्मीकि, गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी, अहिल्या आदि की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।’ उन्होंने बताया कि अप्रैल तक टावर क्रेन हट जाएगी तब उत्तर, दक्षिण में अधूरे छोड़े गए परकोटे का निर्माण होगा। इसके बाद परकोटा के उत्तर और दक्षिण हिस्से का निर्माण शुरू होगा। राम मंदिर का निर्माण कार्य अक्तूबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। चंपत राय ने बताया कि शिखर का पूजन हो चुका है और भुज दंड सहित अन्य हिस्सों की स्थापना क्रमिक रूप से की जाएगी। योगी सरकार की सक्रिय भागीदारी से यह परियोजना न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी अयोध्या को नई पहचान दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि यह मंदिर संपूर्ण भारत के लिए एकता और श्रद्धा का प्रतीक बने। जन्मभूमि में तांबे की गिलहरी स्थापित होगी राम जन्मभूमि में तांबे की गिलहरी की बड़ी मूर्ति रखी जाएगी। इसे ऐसी जगह रखा जाएगा, जिससे सभी की नजर पड़े। बता दें कि भगवान राम ने लंका तक पहुंचने के लिए रामसेतु का निर्माण शुरू किया, तब गिलहरी ने भी इसमें मदद करने की कोशिश की थी। वह रेत और मिट्टी के छोटे-छोटे ढेले उठाकर पुल में जोडऩे की कोशिश करती थी। भारत की आध्यात्मिक एकता दर्शाएंगे द्वार मंदिर में चार द्वार बनाए जा रहे हैं। उत्तरी दिशा का द्वार, क्रॉसिंग 11 का द्वार, क्रॉसिंग 3 का द्वार और राम जन्मभूमि का मुख्य प्रवेश द्वार। इन द्वारों के नाम रामानुज, शंकराचार्य, माधवाचार्य और रामानंदाचार्य की परंपराओं के आधार पर रखे जाएंगे, जो भारत की आध्यात्मिक एकता को दर्शाएंगे।

बुस एक काम करे और करे अयोध्या में रामलला के मुफ्त दर्शन

इंदौर  इंदौर में भिक्षावृत्ति की सूचना देने पर जिला प्रशासन की तरफ से इनाम की घोषणा के बाद अब राशन दुकानों पर कालाबाजारी और मिलावट आदि की जानकारी देने वालों को अब अयोध्या के राम मंदिर जाने का मौका मिलेगा. साथ उन्हें वहां रहने और खाने की सुविधा भी दी जाएगी. जबकि नकद पुरस्कार चाहने वालों को 1100 से 2100 रुपये तक दिए जाएंगे. इंदौर नगर निगम परिषद में गरीबी उपशमन विभाग के प्रमुख मनीष शर्मा ने यह घोषणा की है. अब तक 40 से ज्यादा अनाज व्यापारियों के खिलाफ दर्ज की गई है एफआईआर जानकारी के मुताबिक इंदौर में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जरूरतमंद हितग्राहियों को राशन की दुकान से मिलने वाला अनाज खुले बाजार में व्यापारियों को बेच दिया जाता है. इसकी धर पकड़ के लिए अभियान चलाकर अब तक 40 से ज्यादा अनाज व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा कुछ व्यापारियों के खिलाफ रासुका के तहत भी कार्रवाई की गई है. हालांकि अब भी बड़े पैमाने पर या तो राशन की दुकान संचालक सरकारी अनाज को बेच देते हैं. ऐसे तमाम मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए इंदौर नगर निगम के एमआईसी मेंबर मनीष शर्मा उर्फ मामा ने ऐसे मामलों की सूचना देने वालों के लिए बाकायदा पुरस्कार देने की घोषणा की है. अयोध्या की फ्री टिकट के साथ ही रहने-खाने की निशुल्क होगी व्यवस्था एमआईसी मेंबर मनीष शर्मा के मुताबिक “शहर में अब कोई भी राशन माफिया को पकड़ता है या उन्हें अनाज की कालाबाजारी और भ्रष्टाचार की सूचना देता है तो उन्हें अयोध्या जाकर तीर्थ यात्रा करने का फ्री टिकट और रहने-खाने की व्यवस्था की जाएगी. जबकि नकद राशि चाहने वालों को 1100 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा. जबकि बड़े मामलों में पुरस्कार की यह राशि 2100 रुपए होगी.” दरअसल यह पहला मामला है जब शहर में राशन माफिया के खिलाफ धरपकड़ और कार्रवाई को लेकर निजी तौर पर किसी पुरस्कार के तौर पर तीर्थ यात्रा करने की घोषणा की गई हो. इसे लेकर मनीष शर्मा का मानना है “सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज लोगों के निजी उपयोग के लिए है लेकिन कई राशन दुकानदार इसे वापस खरीद कर राशन माफिया को बेच देते हैं. बाजार में राशन कार्ड के आधार पर लिया गया चावल 15 से 17 रुपए किलो तक बेच दिया जाता है जो केंद्र सरकार और शासन की गरीबी उपशमन योजना के खिलाफ है.” गुजरात महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों में जा रहा राशन का अनाज दरअसल इंदौर में बीते कुछ सालों में ऐसे बड़े मामले सामने आए हैं, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली का गेहूं या चावल शहर में किराए के गोदाम या अन्य स्थानों पर चोरी छुपे रखा गया था. छापेमारी की कार्रवाई में गेहूं और चावल के हजारों कट्टे बरामद हुए हैं. जिसको देखते हुए खाद्य विभाग और जिला प्रशासन ने ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई का फैसला किया है. बीते दिनों अरविंदो कॉलेज के पास एक गोदाम में छापे की कार्रवाई के दौरान एक वाहन और 800 कट्टे बरामद हुए लेकिन कोई उस पर दावा करने नहीं आया.

नौ महीनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों में अयोध्या शीर्ष पर रहा

 अयोध्या  अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ ही उत्तर प्रदेश ने पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में एक नया कीर्तिमान बनाया है। राज्य में इस साल जनवरी से सितंबर के बीच 47.61 करोड़ पर्यटक आए जो अपने-आप में रिकॉर्ड है। इन नौ महीनों में राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों में अयोध्या शीर्ष पर रहा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस साल सितंबर तक अयोध्या में 13.55 करोड़ घरेलू और 3,153 विदेशी पर्यटक पहुंचे। पर्यटकों की संख्या में इस उछाल की एक बड़ी वजह इस साल राम मंदिर के उद्घाटन को माना जा रहा है। अयोध्या की तुलना में, आगरा के लिए पर्यटकों की संख्या 12.51 करोड़ रही, जिनमें 11.59 करोड़ घरेलू और 92.4 लाख विदेशी पर्यटक शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने राज्य में पर्यटन को लेकर इस शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश ने पिछले साल 48 करोड़ पर्यटकों का स्वागत किया, जो इस साल केवल नौ महीने में ही एक मील का पत्थर बन गया है।” अयोध्या के अलावा, दूसरे आध्यात्मिक स्थलों को लेकर भी पर्यटकों की संख्या में तेजी दर्ज की गई है। वाराणसी में 6.2 करोड़ घरेलू पर्यटक और 1,84,000 विदेशी पर्यटक आए, मथुरा में 6.8 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें 87,229 विदेशी शामिल थे। कुंभ मेले के लिए प्रसिद्ध प्रयागराज में 4.8 करोड़ पर्यटक आए, मिर्जापुर में 1.18 करोड़ पर्यटकों ने विजिट किया। इसके अलावा, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 2034 तक 61 लाख से ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद की जा रही है। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) और ईवाई द्वारा 18वें वार्षिक सीआईआई पर्यटन शिखर सम्मेलन में जारी व्हाइट पेपर के मुताबिक, घरेलू पर्यटन के बल पर यह क्षेत्र मजबूती से उभर रहा है। मौजूदा समय में टूरिज्म सेक्टर का भारत के कुल रोजगार में योगदान करीब आठ प्रतिशत का है।

Ayodhya:रामलला के दरबार में इजरायली राजदूत रियुवेन ने लगाई हाजिरी

 अयोध्या इजरायल में भारत के राजदूत रियुवेन अजार बुधवार सुबह ही अयोध्या पहुंचे और राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन किए। वह अपनी पत्नी के साथ रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद कई श्रद्धालुओं से भी बात की। उन्होंने कहा कि इस इजरायल हमेशा से भारत की संस्कृति का सम्मान करता रहा है और यह लोगों के आपस में जुड़े का एक बड़ा माध्यम भी है। रियुवेन अजार ने कहा कि मेरे लिए यह सम्मान की बात है कि अयोध्या आकर भगवान राम के दर्शन का सौभाग्य मिला है। मैं यहां आकर श्रद्धालुओं को देखकर भी अभिभूत हूं, जो हर दिन इतनी बड़ी संख्या में आते हैं। उन्होंने कहा, ‘इजरायल और भारत के लोग प्राचीन काल से ही साथ हैं। उनकी संस्कृति, विरासत और परंपरा प्राचीन हैं। जैसे हमें अपनी विरासत पर गर्व है, उसी तरह आपको भी अपनी विरासत पर प्राउड है। यह बहुत जरूरी है क्योंकि समर्पण और गर्व का भाव ही आपको शक्ति प्रदान करता है। इसीलिए मैं यहां आया हूं और देखा कि लोगों का कैसे भाव भगवान राम की भक्ति को लेकर है।’ उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर निर्माण को लेकर हुए संघर्ष पर भी संकेतों में ही बात की। सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलते इजरायली राजदूत इजरायली राजदूत ने कहा, ‘जैसा कि हम कहते हैं कि स्थान का बहुत महत्व होता है। ऐसा इसलिए कि यह कोई कल्पना की बात नहीं है। इतिहास में यहां चीजें हुईं हैं और लोग उसे हर दिन याद करते हैं। साल दर साल वह परंपरा चलती जाती है और हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाती है। इजरायल के राजदूत के तौर पर यह अहम है कि हम यहां आए और भगवान के दर्शन किए। इसके अलावा लोगों से मुलाकात की। मैं यहां अपनी पत्नी के साथ आया हूं और भारतीय संस्कृति को गहराई से समझने का प्रयास किया है।’ इजरायली अधिकारी ने मंगलवार को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी।

इस बार Diwali पर टूटेगा दीपों का रिकॉर्ड, 25 लाख दीपों से जगमगाएगी Ayodhya नगरी

अयोध्या  अयोध्या में प्रभु रामलला के नव मंदिर में विराजित होने के बाद पहली दीपावली बेहद भव्य और दिव्य होने जा रही है। सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन में में सकल विश्व में एक यूनीक इवेंट के तौर पर अपनी पहचान बना चुके अयोध्या के दीपोत्सव कार्यक्रम में इस बार भी नया विश्व रिकॉर्ड कायम करने की तैयारी है। रामनगरी में छोटी दीपावली पर 55 घाटों पर 25 लाख से अधिक दीए प्रज्ज्वलित होंगे जिसकी अगुआई खुद डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल कर रही हैं। उनके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 30 हजार स्वयंसेवकों को लगाने की तैयारी की है, जिनकी मदद से सातवीं बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अयोध्या धाम का नाम दर्ज होगा। खास बात ये है कि 25 लाख दीए जलाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 28 लाख दीए बिछाये जाएंगे। दीपोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद का पहला दीपोत्सव ऐतिहासिक बनाया जायेगा। आठवें दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमर कस ली है। दीपोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। दीपोत्सव में सहभागिता के लिए पंजीकरण की तिथि विस्तारित कर दी है। अब 15 अक्टूबर तक सहभागिता हेतु पंजीकरण कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त स्वयंसेवकों के दीपोत्सव आईकार्ड को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। 20 अक्टूबर से स्वयंसेवकों को आईकार्ड का वितरण शुरू कर दिया जायेगा। जल्द ही शुरू होगा घाटों की मार्किंग का कार्य दीपोत्सव की तैयारियों को लेकर नोडल समन्वयक प्रो0 एसएस मिश्र ने बताया कि राम पैड़ी के 55 घाटों पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए 25 लाख दीए प्रज्ज्वलित किए जाने के लक्ष्य को लेकर 28 लाख दीए बिछाये जायेंगे, जिसके लिए 30 हजार स्वयंसेवक तैनात किए जायेंगे। विवि परिसर सहित 14 महाविद्यालय, 37 इण्टर कालेज, 40 एनजीओ शामिल है। विश्वविद्यालय द्वारा मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। 17 या 18 अक्टूबर से घाटों पर कर्मियों द्वारा मार्किंग का कार्य होगा। 90 हजार लीटर तेल का होगा इस्तेमाल योजना के अनुसार, राम की पैड़ी के सभी घाटों पर 16 गुणे 16 ब्लॉक में 30 एमएल दीए में 30 एमएल सरसों का तेल पड़ेगा। सभी दीयों में कुल मिलाकर 90 हजार लीटर सरसों के तेल लगेगा जिसके इंतेजाम के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से पूरा किया जा रहा है। दीपोत्सव में सहभागिता के लिए पंजीकरण का कार्य 15 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जायेगा। 20 अक्टूबर से स्वयंसेवकों का आईकार्ड का वितरण शुरू कर दिया जायेगा। 26 अक्टूबर से घाटों पर दीए की खेप पहुंचनी शुरू हो जायेगी। 27 अक्टूबर से स्वयंसेवकों द्वारा घाटों पर दीए बिछाने के साथ 30 अक्टूबर को दीए प्रज्ज्वलित करके विश्व रिकार्ड बनायेंगे। मीडिया प्रभारी डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी ने बताया कि जिला प्रशासन व विवि के सहयोग से दीपोत्सव को एतिहासिक बनाने के लिए कार्यो को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

बुजुर्ग तीर्थयात्रियों का पहला जत्था मंगलवार को हुआ रवाना, करेँगे अयोध्या, प्रयागराज और बनारस की यात्रा

BJP is preparing to overthrow the Municipal Corporation President in Chhindwara

 भोपाल  नगर की एक प्रमुख सामाजिक संस्था श्री गुजराती समाज ने अपने समाज के बुजुर्ग सदस्यों को हवाई जहाज से मुफ्त तीर्थयात्रा कराने की पहल की है। यह संस्था बुजुर्गों को अयोध्या, प्रयागराज एवं काशी विश्वनाथ की हवाई यात्रा करा रही है। तीर्थ यात्रियों का पहला जत्था मंगलवार को रवाना हुआ। बुधवार को तीर्थ यात्रियों का दूसरा दल रवाना होगा। यह तीर्थ यात्रा उन बुजुर्गों के लिए बिल्कुल निश्शुल्क है, जो कार एवं एसी का इस्तेमाल नहीं करते। शेष तीर्थ यात्रियों को भी सिर्फ 50 प्रतिशत शुल्क ही देना होगा। श्री गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल ने बताया कि यात्रा दो से छह जुलाई तक चलेगी। दो जुलाई को रवाना हुए तीर्थ यात्री पांच जुलाई को वापस लौट आएंगे, जबकि बुधवार को तीर्थ के लिए रवाना होने वाले बुजुर्ग छह जुलाई को राजधानी वापस लौटेंगे। कार्य कारिणी समिति द्वारा लिये गये निर्णयानुसार समाज के ऐसे सदस्य जो कार एवं एसी का उपभोग नही करते हैं, साथ ही पहली बार हवाई यात्रा करेंगे। ऐसे नौ परिवार के सदस्यों को समाज निश्शुल्क हवाई यात्रा करवा रहा है। इसके अतिरिक्त अन्य वरिष्ठ सदस्यों का 50 प्रतिशत खर्च समाज वहन कर रहा है। इस तीर्थयात्रा में समाज के 37 पुरुष एवं 33 महिलाए शामिल हैं। तीर्थयात्री 60 से लेकर 82 वर्ष तक की आयु के हैं। समाज सदस्यों के निर्णयानुसार श्री रामलला मंदिर अयोध्या में एक प्रतीक चिह्न भी समाज की ओर से भेंट किया जाएगा। धार्मिक यात्रा का पहला दल मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे श्री गुजराती समाज भवन से गंतव्य के लिए रवाना हुआ।

हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य का आमरण अनशन 11वें दिन अनवरत जारी।

The fast unto death of the ascetic Chhawni Peethadhishwar Jagatguru Paramhans Acharya continues for the 11th day continuously for the demand of Hindu Rashtra. अन्न जल का परित्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में कर रखा है कैद। समर्थन में उतरे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने गदा भेंट कर किया सम्मान। संतोष सिंह तोमर अयोध्या। भारत देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य को उनके सहयोगियों ने आज अनशन के 11 दिन बीतने पर करीब आधा घंटे के लिए अनशन कक्ष से बाहर बुलाया। इस दौरान तपस्वी छावनी में मौजूद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय प्रमुख ने संघठन के सदस्यों के साथ आमरण अनशन पर बैठे तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर को हनुमान जी का गदा भेंट कर उनका सम्मान किया। हम आपको याद दिला दें की विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने विगत 7 नवंबर मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। उन्होंने सुबह 4 बजे से ही अन्न जल का त्याग कर खुद को आश्रम के एक कमरे में बंद कर लिया था वह तब से लेकर आज तक अपने आश्रम पर अन्न जल के बिना खुद को कमरे में बंद किए हुए हैं। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन पर जबरन आमरण अनशन तुड़वाने की साजिश करने का आरोप लगाया है। हम आपको बता दें कि परमहंसाचार्य ने हिंदू राष्ट्र घोषित ना होने पर आमरण अनशन करने की चेतावनी बहुत पहले ही दे दी थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी लिख चुके हैं कई पत्र आमरण अनशन से जगतगुरु परमहंसाचार्य एक बार फिर से सुर्खियों में छा गए हैं। उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए वह एक लंबे समय से संवैधानिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पूरे देश में घूम- घूमकर हिंदू राष्ट्र की अलख जगाई। हिंदू राष्ट्र की मुहिम से भारत के कई हिंदूवादी संगठनों को भी जोड़ा। उनकी मांग थी कि 6 नवंबर 2023 तक भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। नही तो 7 नवंबर से अन्न जल का त्याग कर वह आमरण अनशन पर बैठ जायेंगे इसके लिए वह कई बार देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई, जिसके कारण उन्हें भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने हेतु अन्न जल का त्याग कर आमरण अनशन पर बैठना पड़ा है। इससे पूर्व राममंदिर के लिए उन्होंने 16 दिनों तक आमरण- अनशन किया था जो श्रीरामजन्मभूमि के फैसले में निर्णायक भी साबित हुआ था। पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र बना, भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर उन्होंने सबसे पहले देश में आवाज उठाई और आमरण अनशन किया। आज हिंदू राष्ट्र की मांग पूरे देश की आवाज बन चुका है। विश्व हिंदू सिक्ख महापरिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष व तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि हिंदू राष्ट्र सौ करोड़ हिंदुओं की मांग है। जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ। मुसलमानों को पाकिस्तान और बांग्लादेश दिया गया। जो मुस्लिम राष्ट्र बन चुका है, तो भारत हिंदुराष्ट्र क्यों नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि 1947 के बंटवारे से भारत का जो भाग बचा हुआ है। उसको जल्द से जल्द हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म व मानवता को बचाने के लिए भारत संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र बना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि देश में लगातार लव जेहाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोग सनातन धर्म को मिटाने की चुनौती दे रहे हैं। भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और मानवता को बचाने के लिए भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो इसके लिए हमारी मांग मान ली जाए। नही तो मेरा शरीर छूट जाए कोई बात नहीं एक परमहंस जायेंगे, तो न जानें कितने हजारों-लाखों परमहंस आयेंगे। परमहंसाचार्य के समर्थन में ओजस्वी फाउंडेशन महाराष्ट्र के एकनाथ महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी समेत उनके तमाम समर्थक आमरण अनशन स्थल पर मौजूद रहते हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल ने दिया है संपूर्ण समर्थन जगतगुरु परमहंस आचार्य के आमरण अनशन को समर्थन देने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी अनशन शुरू होने के साथ ही तपस्वी छावनी पहुंच गए थे। जहां उन्होंने स्पष्ट कर दिया था श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल जगतगुरु परमहंस आचार्य के हिंदू राष्ट्र की मांग के समर्थन में पूरी तरह खड़ा है। यह कोई नाजायज नहीं बल्कि जायज मांग है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिदल के राष्ट्रीय प्रमुख राजेशमणि त्रिपाठी ने शासन-प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब मैं तपस्वी छावनी पहुंचा तो महाराज श्री एक कमरे में अपने आपको बंद करके आमरण अनशन कर रहे थे। पता चला कि पुलिस प्रशासन उनको उठाने के लिए तपस्वी छावनी पहुंच गया था। आज ग्यारह दिन बाद अनशन पर बैठे आचार्य श्री से निवेदन कर उन्हें अनशन कक्ष से बाहर बुलाया। इस दौरान हिंदू राष्ट्र के लिए प्रयत्नशील तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु श्री परमहंस आचार्य को हिन्दू राष्ट्र के लिए शुरू की गई इस लड़ाई में विजय हेतु महाबली श्री हनुमान जी का गदा प्रतीक चिन्ह के रूप में भेंट कर उनका सम्मान किया गया। इस बीच करीब तीस मिनट तक आचार्य श्री अनशन कक्ष से बाहर ही रहे लेकिन तीस मिनट के बाद उन्होंने फिर से अपने आपको तालों के बीच कैद कर लिया। भारत का शायद पहला ऐसा आमरण अनशन होगा। जहां पर किसी अनशनकारी ने खुद की सुरक्षा के लिए अपने आपको तालों में बंद कर रखा हो, ऐसा शायद इतिहास में कहीं नहीं मिलेगा। संत के आमरण अनशन से बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेश मणि त्रिपाठी ने महाराज जी के इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक जनमानस जिस लिए भाजपा को चुनाव जीताकर यहां पहुंचाया इसका मुख्य आधार इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाया जाना ही था, लेकिन हिंदू राष्ट्र का सपना आम जनमानस का साकार नहीं हुआ। आज एक संत हिंदू राष्ट्र के लिए आमरण आसान कर … Read more

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