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बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में कबीर दर्शन यात्रा पर NGT की सख्ती

 NGT’s strictness on Kabir Darshan Yatra in Bandhavgarh Tiger Reserve भोपाल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, केंद्रीय क्षेत्र पीठ  ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार समिति की सिफारिशों और आवश्यक अतिरिक्त उपायों के साथ तीन माह की समय-सीमा में निर्णय ले तथा उसे प्रकाशित करे। साथ ही एनटीसीए ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को बाद में उपयुक्त मंच पर आवेदन करने का अधिकार होगा। इन निर्देशों के साथ मूल आवेदन का निस्तारण कर दिया गया। भोपाल में मूल आवेदन संख्या 268/2024 (सीज़ेड) अजय शंकर दुबे बनाम  शुभरंजन सेन एवं अन्य में सुनवाई दिनांक 12 अगस्त 25 को हुई। पीठ के समक्ष आवेदक की ओर से अधिवक्ता श्री हरषवर्धन तिवारी उपस्थित हुए, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता श्री प्रशांत एम. हर्ने उपस्थित रहे। इस प्रकरण में आवेदक ने एक गंभीर पर्यावरणीय प्रश्न उठाया, जो बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र अधिकारी द्वारा श्री सद्गुरु कबीर धर्मदास साहब वंशावली को “दर्शन यात्रा” आयोजित करने की दी गई अनुमति से संबंधित था। यह यात्रा बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र में प्रस्तावित थी, जो प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बाघ आवास है। आवेदक का कहना था कि यह यात्रा उद्यान के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर खतरा पहुँचाती है, इसकी समृद्ध जैवविविधता को नुकसान पहुँचाती है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972; वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन करती है। आवेदक के अनुसार, पिछले वर्षों में इस यात्रा में 14,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिन्होंने संवेदनशील कोर क्षेत्र में प्रवेश किया, चरनगंगा नदी में धार्मिक अनुष्ठान किए, रात्रि विश्राम बिना किसी स्वच्छता सुविधा के किया, बांस काटकर लाठियाँ बनाई, और प्रदूषण, शोर व अन्य गतिविधियों से पारिस्थितिकीय क्षति पहुँचाई। इससे बाघ एवं उनके शिकार प्रजातियों के व्यवहार और प्रजनन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। आवेदक ने यह भी कहा कि दी गई अनुमति में प्रतिभागियों की संख्या सीमित करने, प्रवेश-निकास समय तय करने, स्वच्छता सुविधाएँ उपलब्ध कराने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना लागू करने जैसी आवश्यक शर्तें शामिल नहीं थीं। विनाश का कारण बनते हैं आयोजन कोर क्षेत्र में आवासीय केंद्रीय एनटीसीए पीठ ने यह माना कि ऐसे धार्मिक आयोजन कोर क्षेत्र में आवासीय विनाश का कारण बनते हैं और संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव एवं वनों की रक्षा के लिए बनाए गए क़ानूनों के विपरीत हैं। सुनवाई में 27 नवम्बर 2024 के प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पत्र का उल्लेख हुआ, जिसमें कुछ शर्तों के साथ यात्रा की अनुमति दी गई थी, तथा वर्ष 2022 में उसी अधिकारी द्वारा राज्य वन विभाग को इस प्रकार की गतिविधियों के नियमन की सिफारिश की गई थी। आवेदक ने सरिस्का टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन से संबंधित उच्चतम न्यायालय में लंबित स्वतः संज्ञान याचिका का भी हवाला दिया। एनटीसीए में सरकार का जवाब  प्रदेश राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 6 जनवरी 2025 को कबीर मेला के संदर्भ में हुई बैठक के बाद वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यू.आई.आई.) ने 9 जनवरी 2025 से 18 जनवरी 25 तक कबीर मंदिर तक जाने वाले मार्ग की तीर्थयात्रियों की वहन क्षमता तथा वन्यजीव एवं जैवविविधता पर प्रभाव का अध्ययन किया। डॉ. पराग निगम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में क्षमता 7,000–8,000 यात्रियों की आंकी गई, लेकिन कठिन चढ़ाई, क्षतिग्रस्त मार्ग, और जंगली हाथी व बाघों की उपस्थिति के कारण इसे घटाकर केवल 4,000–5,000 यात्रियों तक सीमित करने की सिफारिश की गई। ऑनलाइन पंजीकरण करें  समिति ने यह भी अनुशंसा की कि सभी यात्री मेले में आने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण करें, जिसकी जानकारी आयोजकों और गुरुओं के माध्यम से एक माह पूर्व दी जाए, और सभी यात्रियों को केवल वाहनों द्वारा कबीर गुफा तक पहुँचने की व्यवस्था की जाए ताकि कोर क्षेत्र में वन्यजीवों को न्यूनतम व्यवधान हो। इन सिफारिशों को राज्य सरकार की स्वीकृति हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक को भेजा गया और इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) एवं दिशा-निर्देश अंतिम रूप देने की कार्यवाही लंबित थी। राज्य के अधिवक्ता ने कहा कि विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन कर उपाय सुझाए गए हैं, और नीति-निर्माण का अधिकार राज्य सरकार के पास है।

बांधवगढ़ में संरक्षण नहीं, विवाद की गूंज: रेंजर पर आरोप और सियासी संग्राम

There is no protection in Bandhavgarh, but controversy reverberates: allegations against the ranger and political conflict बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व इन दिनों वन्यजीव संरक्षण से ज्यादा प्रशासनिक विवादों को लेकर चर्चा में है। इलाके के रेंजर अर्पित मैराल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। कांग्रेस नेता कुनाल चौधरी ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रेंजर पर गंभीर आरोप लगाए हैं और भाजपा सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया है। कुनाल चौधरी ने कहा भाजपा सरकार का प्रशासन कोर्ट के आदेश को अपनी जेब में रख जनता से तलवे चटवा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के रेंजर जिसके क्षेत्र में 10 हाथियों की मौत हुई थी उस मामले को दबा गए और अब ग्रामीणों के साथ लगातार बदसलूकी की जा रही है। वायरल वीडियो में ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखी जा सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर ने कथित रूप से तलवे चाटने जैसी भाषा का प्रयोग किया, जिससे जनाक्रोश भड़क गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।जब इस विवाद पर रेंजर अर्पित मैराल से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि यह मामला 150 एकड़ वनभूमि पर अवैध कब्जा हटाने का है। हमारी 100 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम वहां गई थी। अतिक्रमण हटाने के दौरान गांव वालों का विरोध हुआ और कुछ गहमा-गहमी हो गई।रेंजर ने वीडियो में आए आरोपों को नकारते हुए कहा कि जो व्यक्ति इस वीडियो को फैला रहा है वह पहले वन विभाग में कार्यरत था, लेकिन अनुशासनहीनता के चलते हटा दिया गया था। यह पूरी साजिश उसी की है। मैंने गांव वालों के लिए ऐसा कुछ नहीं कहा। हालांकि ग्रामीण इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि रेंजर का रवैया पहले से ही तानाशाही वाला रहा है। यह पहली बार नहीं है जब रेंजर ने हमारे साथ बदसलूकी की है। कई बार अपशब्द बोले गए हैं और हमारी बात तक नहीं सुनी जाती।

वन विभाग में बड़े ट्रांसफर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक को हटाया

Major transfers in the forest department, Principal Chief Forest Conservator removed भोपाल। मध्यप्रदेश शासन ने गुरुवार रात वन विभाग के दो बड़े अधिकारियों का तबादला कर दिया है. इस ट्रांसफर ऑर्डर को भी बांधवगढ़ मामले से जाेड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत के मामले के बाद लगातार अधिकारियों के तबादले हो रहे हैं. वहीं अब मोहन यादव सरकार ने भारतीय वन सेवा के दो अधिकारियों को प्रशासकीय हित का हवाला देते हुए स्थानांतरित किया है. किन IFS के हुए ट्रांसफर मध्य प्रदेश शासन ने गुरुवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) मुख्यालय भोपाल वीएन अम्बाड़े का ट्रांसफर कर दिया गया है. उनकी जगह वित्त एवं बजट शाखा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन को प्रदेश का नया प्रधान मुख्य वन संरक्षक नियुक्त किया गया है. वहीं वीएन अम्बाड़े को वन राज विकास निगम भोपाल में प्रबंध संचालक बनाकर भेजा गया गया है. हाथियों की मौत के बाद प्रशासनिक सर्जरी गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व कुछ दिन पहले एक-एक करके 11 हाथियों की मौत हो गई थी. घटना के कुछ समय बाद ही बांधवगढ़ के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था. वहीं अब वाइल्डलाइफ वार्डन को भी हटा दिया गया है, और उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है.

मध्यप्रदेश: 10 हाथियों के मरने की वजह आई सामने, मिलेट का फंगी कनेक्शन

Madhya Pradesh: Reason for death of 10 elephants revealed, understand the fungal connection of millet भोपाल: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले महीने 10 हाथियों की मौत का कारण कोदो में फफूंद संक्रमण बताया जा रहा है। हैदराबाद के ICRISAT के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी राज्य सरकार को दी है। वन अधिकारियों का कहना है कि ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। तीन तरह के फंगस मिले ICRISAT ने शुरुआती जांच में कोदो के नमूनों में तीन तरह के फफूंद – एस्परजिलस फ्लेवस, एस्परजिलस पैरासिटिकस और पेनिसिलियम साइक्लोपियम की मौजूदगी की पुष्टि की है। इन फफूंदों से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड नामक जहरीला पदार्थ पैदा होता है, जिसके सेवन से हाथियों की मौत होने की आशंका है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमें ICRISAT की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। उन्होंने पुष्टि की है कि हाथियों द्वारा खाए गए कोदो में ये फफूंद मौजूद थे। घटना की जांच के लिए, एमपी के अधिकारियों ने ICRISAT सहित पूरे भारत में 10 प्रयोगशालाओं में नमूने भेजे थे। ICRISAT, हैदराबाद स्थित एक गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन है, जो विशेष रूप से अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को बेहतर बनाने में माहिर हैं। बरेली से आ गई है रिपोर्ट बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने भी अपनी विषाक्तता परीक्षा रिपोर्ट में पुष्टि की है कि कोदो में फफूंद विषाक्त पदार्थों, विशेष रूप से साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड के कारण हाथियों की मौत हुई। जहर की नहीं हुई थी पुष्टि हाथियों के लीवर, किडनी, तिल्ली और आंतों सहित विभिन्न अंगों के नमूने विश्लेषण के लिए IVRI भेजे गए थे। परीक्षणों में साइनाइड, भारी धातुओं, या ऑर्गनोफॉस्फेट या पाइरेथ्रोइड जैसे सामान्य कीटनाशकों का कोई निशान नहीं पाया गया। हालांकि, सभी नमूनों में साइक्लोपिआज़ोनिक एसिड पाया गया, जिसकी सांद्रता 100 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) से अधिक थी। सात एकड़ में कोदो की खेती हाथियों ने जिस कोदो की फसल को खाया था वह बांधवगढ़ के अंदर 7 एकड़ जमीन पर थी। असामान्य फफूंद वृद्धि के संकेतों के बावजूद, जांचकर्ताओं को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि उस क्षेत्र में कीटनाशकों का उपयोग किया गया था। स्थानीय किसानों ने भी ऐसे किसी भी रसायन के उपयोग से इनकार किया है। हाथियों की मौत 29 अक्टूबर, 2024 को शुरू हुई थी। शुरुआत में फफूंद संक्रमण पर ही संदेह जताया गया था। अधिकारी अभी भी इस मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि फंगस की पूरी सीमा और क्षेत्र के वन्यजीवों पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।

पर्यटकों का जल्द खत्म होगा इंतजार, 1 अक्टूबर से बांधवगढ़- कान्हा समेत अन्य टाइगर रिजर्व में उमड़ेगी भीड़, विदेशी भी है वन्य प्रेमी

From October 1, crowds will gather in Bandhavgarh

From October 1, crowds will gather in Bandhavgarh-Kanha and other tiger reserves उदित नारायण भोपाल। अगर आपको प्रकृति और जंगली जीवों से प्यार है और आप जंगलों में घूमना पसंद करते हैं। ऐसे लोगों के लिए इंतजार की घड़ियां समाप्त हो गई। 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व शुरू हो रहा है। पूरे देश के अंदर पाए जाने वाले 3167 बाघों में से 700 से अधिक बाघ केवल मध्य प्रदेश में ही हैं। टाइगर रिजर्व में 30 जून की शाम से ही पर्यटकों के लिए सफारी बंद हो गई थी। 3 माह बाद 1 अक्टूबर को फिर से सफारी शुरू हो जाएंगी। इस बार पर्यटकों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। विदेशी सैलानियों के लिए गाइड को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।  देसी और विदेशी वन्य प्राणियों का सबसे अधिक दबाव कान्हा और बांधवगढ़ का टाइगर रिजर्व में रहता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यहां दर्शकों को बड़ी आसानी से टाइगर के दीदार हो जाया करते हैं। हालांकि सतपुड़ा, पेंच और पन्ना नेशनल पार्क भी पर्यटकों की पसंद में शामिल हैं। पर्यटकों के लिए क्या तैयारी की गई है, के सवाल के जवाब में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पीके वर्मा बताते हैं कि,”1 अक्टूबर से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुल जाएगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हमारे गाइडों की दो दिन के लिए ट्रेनिंग चल रही है. इसके लिए हमने पुणे से करीब 24 से 25 साल अनुभवी ट्रेनर को बुलाकर इन गाइडों को अच्छे से ट्रेंड किया गया हैं। हम चाहते हैं कि जब भी यहां कोई टूरिस्ट आए और हमारे गाइड के साथ सफर करें, तो वो बोलें कि बांधवगढ़ के गाइड का नॉलेज बहुत अच्छा है और वो सही से प्रकृति के बारे में हम लोगों को डिस्क्राइब करते हैं। इंटरनेशनल लेवल की फैसिलटी की तैयारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा ने कहा कि “हमारा प्रयास है कि हम टूरिस्ट को जो फैसिलिटी दे रहे हैं, वो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की हो। हमारे पास इंटरनेशनल टूरिस्ट बहुत ज्यादा आते हैं। बांधवगढ़ में इंटरनेशनल टूरिस्ट जब हमारे पास आते हैं, इसलिए हमारी कोशिश है कि उन्हें किसी तरह की तकलीफ ना हो, इसके लिए हम विशेष योजना भी बना रहे हैं। हमने रिसोर्ट संगठन वालों से भी बात की है, जहां प्रशासन से हो पाएगा वहां सीएसआर फंड (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) से हम सब मिलकर के अच्छी फैसिलिटी देने की कोशिश कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि जब हमारे पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे, तो उसको इंटरनेशनल लेवल का लुक दिखे और वो खुद को सेल्फी लेने से रोक ना सके।

राजनीतिक रसूख के चलते  बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर सब पर भारी

Due to political influence the ranger posted in Bandhavgarh is stronger than everyone

Due to political influence the ranger posted in Bandhavgarh is stronger than everyone उदित नारायण  भोपाल। बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह राजनीतिक रसूख के चलते सीनियर अधिकारियों के आदेशों के नाफरमानी कर रही है। इसी बात को लेकर डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि  आपके द्वारा आज दिनांक तक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं किया गया है। यही नहीं आपके द्वारा राजनैतिक दबाव अधिकारियों पर डलवाना अनुशासनिक नियमों के विपरीत है। क्यों न आपके विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (3) (1) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाये? अतः आपको निर्देशित किया जाता है, कि पत्र प्राप्ति के 3 दिवस के अन्दर सन्दर्भित आदेश का पालन करते हुए प्रभार सूची से इस कार्यालय को अवगत कराया जायेगा। अन्यथा आदेश का पालन नहीं करने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अवहेलना करने के संबंध में क्यों न आपके विरूद्ध विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 16 (1) (क) के आपके विरूद्ध के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जायेगा। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगें। नोटिस का रेंजर पुष्पा सिंह ने आज दिनांक तक जवाब नहीं दिया। करंजिया रेंज के लिए लिखवाई नोटशीट  सूत्रों का कहना है कि रेंजर पुष्पा सिंह अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए बांधवगढ़ से डिंडोरी वन मंडल के करंजिया रेंज में वापसी का प्रयास कर रही है। उनकी करंजिया रेंज डिंडोरी में पोस्टिंग के लिए एक उप मुख्यमंत्री ने  सिफारिश की है। इसी सिफारिश के कारण उन्होंने शासकीय आवास खाली नहीं किया है। बताया जाता है कि मंत्रालय में पदस्थ अफसर भी उनकी मदद कर रहे हैं।  हमेशा विवादों की सुर्खियों में रहीं  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह अक्सर विवादों की सुर्खियों में रही हैं। डिंडोरी वन मंडल के  करंजिया रेंज में पदस्थी के दौरान आर्थिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे थे। कारंजा रेंज में उन पर आरोप था कि उन्होंने वन सुरक्षा समिति खारीडीह में रोड निर्माण हेतु आठ लाख अड्टालीस हजार की सड़क मात्रा डेढ़ लाख में बनाया गया जिसमे डिप्टी रेंजर को सस्पेंड किया गया। जबकि किंतु पुष्पा सिंह पर विभागीय जांच वर्तमान में चल रही है। रोचक तथ्य है कि वह एक भी पेशी में आज तक उपस्थित नहीं हुई। इसके पहले वह जब वह शहडोल में पदस्थ थीं तब  इनका रेत माफियों से लेन-देन संबंधित एक ऑडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था।

हॉफ के मौखिक फरमान और सीसीएफ ने लिखे तीन पत्र फिर भी नहीं दिया चार्ज

Hoff's verbal order and CCF's three letters, still no charge was given

Hoff’s verbal order and CCF’s three letters, still no charge was given उदित नारायण  भोपाल। 2010 बैच के आईएफएस गौरव चौधरी का पद वन संरक्षक, पोस्टिंग डायरेक्टर बांधवगढ़ पर डीएफओ के पद का चार्ज नहीं देने पर आमादा है। फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वन मण्डल का चार्ज देने के सीसीएफ शहडोल तीन पत्र लिख चुके हैं और गत बुधवार को वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने भी निर्देश दिए किन्तु वे चार्ज नहीं देने पर बालहठ करके बैठे हैं।   केंद्र सरकार की मंशा थी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पूर्णकालिक फील्ड डायरेक्टर हो। यही वजह रही कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के सख्त निर्देश पर राज्य शासन ने एक सितम्बर दिन रविवार को सिंगल आदेश जारी कर गौरव चौधरी को डीएफओ शहडोल उत्तर वनमंडल से फील्ड डायरेक्टर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पद पर कर दिया गया। राज्य शासन के आदेश के बाद गौरव चौधरी ने फील्ड डायरेक्टर का पदभार तो संभाल लिया किंतु शहडोल उत्तर वनमंडल के डीएफओ का चार्ज आज तक नहीं दिया। जबकि सीसीएफ  शहडोल एलएस उईके ने फील्ड डारेक्टर गौरव चौधरी को उत्तर शहडोल वनमंडल का चार्ज  उमरिया के डीएफओ विवेक सिंह को देने के लिए  अब तक तीन पत्र लिखे और उसकी कॉपी वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव और पीसीसीएफ विवेक जैन को भी भेजी। श्रीवास्तव ने गत बुधवार को सीसीएफ को निर्देश दिए कि गौरव चौधरी से चार्ज लेकर विवेक सिंह को दें।  इनका कहना चार्ज नहीं देने की कुछ तो वजह होगी। जहां तक सीसीएफ के चार्ज देने संबंधित पत्र की कॉपी हमें नहीं मिला है। कई बार डाक आने में देरी हो जाती है।   विवेक जैन,  पीसीसीएफ प्रशासन-एक बांधवगढ़ में रेंजर सब पर भारी बांधवगढ़ में पदस्थ रेंजर पुष्पा सिंह राजनीतिक रसूख के चलते सीनियर अधिकारियों के आदेशों के नाफरमानी कर रही है। इसी बात को लेकर डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि  आपके द्वारा आज दिनांक तक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं किया गया है। यही नहीं आपके द्वारा राजनैतिक दबाव अधिकारियों पर डलवाना अनुशासनिक नियमों के विपरीत है। क्यों न आपके विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (3) (1) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जाये? अतः आपको निर्देशित किया जाता है, कि पत्र प्राप्ति के 3 दिवस के अन्दर सन्दर्भित आदेश का पालन करते हुए प्रभार सूची से इस कार्यालय को अवगत कराया जायेगा। अन्यथा आदेश का पालन नहीं करने पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अवहेलना करने के संबंध में क्यों न आपके विरूद्ध विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 16 (1) (क) के आपके विरूद्ध के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जायेगा। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगें। नोटिस का रेंजर पुष्पा सिंह ने आज दिनांक तक जवाब नहीं दिया।

एसडीओ फारेस्ट के बिगड़े बोल, मैंने अवार्ड दे दिया है…. तुझसे जो बने उखाड़ लेना…..

SDO Forest's harsh words, I have given the award.... do whatever you can to get it done...

SDO Forest’s harsh words, I have given the award…. do whatever you can to get it done… भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला में पदस्थ एसडीओ दिलीप मराठा के बिगड़े बोल के ऑडियो सोशल मिडिया और अफसरों के बीच खूब वायरल हो रहे है। एसडीओ ताला दीपक ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायतकर्ता को फोन कर धमका रहा है कि ‘हलो मैंने अवार्ड दे दिया है, तुझसे जो बने उखाड़ लेना।’  यह वाकिया बुधवार की है। ग्राम पंचायत बनचाचर, जनपद जयसिंहनगर के अजय यादव ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की कि विस्थापन मुआवजे के वितरण में फर्जीवाड़ा की जा रही है। इस शिकायत पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पदस्थ एसडीओ दिलीप मराठा भड़क गए। एसडीओ दिलीप मराठा ने शिकायतकर्ता अजय यादव को फोन लगाया।  एसडीओ मराठा – हलो, कौन अजय बोल रहे.. यार एकाध दिन ताला आओ न आप… हम एसडीओ फारेस्ट बोल रहें हैं….आपने शिकायत की हैं न… उसी सम्बन्ध में आपसे चर्चा करना चाहते हैं… अजय – जी, सर मैं आ जाऊंगा… नमस्ते सर… एसडीओ – आ जाओ किस दिन आ रहे हो…. अजय – आप कौन हो… सर  एसडीओ – एसडीओ बोल रहा हूं  अजय – तो ऑफिस में मुलाक़ात होगी..सर  एसडीओ – ऑफिस में नहीं जहां कहो वहां भी आ सकता हूं…. अजय – वैसे सर आपसे निवेदन है कि आप यहां आ जाए तो… एसडीओ – तुम्हारा नौकर नहीं हूं… तुमने सीएम हेल्पलाइन बहुत लगा रखी है…आ जा तो तेरे को मैं समझता हूं…तू सोच रहा है कि मैंने कलेक्टर – कमीशनर और दुनिया को रिपोर्ट कर दी तो बड़ा हो गया… अजय – सुनिए सर.. आप इस तरह से बात न करो.. एसडीओ – आ तो मैं तेरे को बताता हूं… हां, मैंने अवार्ड ( विस्थापन मुआवजा) कर दिया है, जो बने उखाड़ लेना। क्या है शिकायत अजय यादव ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है कि ग्राम पंचायत डोभा ग्राम गढ़पुरी जनपद पंचायत मानपुर के अंतर्गत विस्थापन हेतु मुआवजे की राशि वितरित की जा रही है। इसमें प्रकाशित सूची क्रमांक 424, 425, और 426 में जो नाम प्रकाशित किए गए हैं, उनमें रामशरण, विजय और  विनीत के नाम हैं। ये तीनों नाम ग्राम पंचायत बनचाचर जनपद पंचायत जयसिंहनगर के निवासी हैं। पीएम आवास आवासीय पट्टा शासन के द्वारा चलाए गए अन्य लाभ ग्राम बनचाचर में प्राप्त कर चुके है। मुआवजे के लालच में अपना नाम ग्राम गढ़पुरी में रामलाल से रामशरण करवा लिए हैं, जिससे मुवावजे की राशि मिल सके। एक ही व्यक्ति के द्वारा नाम बदल-बदल कर शासन के साथ फ्राड कर सभी लाभों को प्राप्त कर रहें हैं। जिसकी शिकायत उप संचालक बांधवगढ़ नेशनल पार्क को 15 मई 24 को की गई है। इस पर आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इनका कहना  ‘मुझे मुख्यालय से ऑडियो भेजा गया है। मैं एसडीओ के अभद्र भाषा को लेकर नोटिस दे रहा हूं। उन्हें पब्लिक से ऐसी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायत के तथ्यों की भी जांच करूंगा।’  प्रकाश वर्मा,  उपसंचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व   एसडीओ का ऑडियो मिला है। मैंने पीसीसीएफ वन्य प्राणी और बांधवगढ़ नेशनल पार्क की डिप्टी डायरेक्टर को भेज दिया है। डिप्टी डायरेक्टर से जांच करने के लिए भी कहा है। समिता राजौरा  एपीसीसीएफ वन्य प्राणी

बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत फिर भी सरकार मौन क्यों?

Continuous death of tigers in Bandhavgarh, yet why is the government silent? उमरिया । विश्व प्रसिद्ध और बाघ दर्शन के लिए मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर वन्य प्राणी प्रेमियों के लिए बुरी खबर सामने आई है। जिसमें एक नर बाघ शावक की मौत हो जाने की जानकारी मिली है। प्रबंधन के द्वारा मृत बाघ शावक का पीएम आदि कराकर टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दरअसल बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत से जहां प्रबंधन कटघरे में है।वहीं बीते दिसंबर माह में दर्जन भर बाघों की असमय मौत हो जाना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। इस बार भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर परिक्षेत्र अंतर्गत बरबसपुर बीट के कक्ष क्रमांक 125 में एक नर बाघ शावक मृत अवस्था में गश्ती दल को मिला है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई है कि अमृत न भाग सावन के आसपास एक दूसरे बैग की पगमार्क मिले हैं इसके अलावा मृत शावक को घसीटने के भी निशान दिखाई दे रहे हैं। मृत शावक के शरीर के सभी अंग मौजूद हैं। इसके बाद मृत शावक का डॉक्टर नितिन गुप्ता और बी बी एस मार्को के द्वारा पोस्टमार्टम कर जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजने सैंपल एकत्रित किए गए हैं। मृत शावक का पीएम उपरांत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वरिष्ठ अधिकारियों एनटीसीए के मेम्बर की मौजूदगी और एनटीसीए गाइडलाइन के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। बताया गया कि नर बाघ शावक की मौत प्रथम दृष्ट्या किसी दूसरे बाघ से आपसी संघर्ष के कारण होना प्रतीत होता है।

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