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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: अब दूसरों को कैसे दिखाएंगे वन्यजीवों के संग बिताए यादगार पल? बदल गए जंगल सफारी के नियम

Bandhavgarh Tiger Reserve: How will you now show others your memorable moments with wildlife? Jungle safari rules have changed. मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अब जंगल सफारी का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। कोर क्षेत्र में पर्यटकों के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। नए नियम के तहत पर्यटकों को सफारी पर जाने से पहले अपने मोबाइल फोन बंद कर सुरक्षित रूप से जमा कराने होंगे। बिना मोबाइल फोन जमा किए किसी भी पर्यटक को कोर एरिया में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। पार्क प्रबंधन का कहना है कि यह फैसला जंगल और वन्यजीवों के प्रति पर्यटकों की संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। बीते वर्षों में देखा गया था कि अधिकांश पर्यटक सफारी के दौरान फोटो खींचने, वीडियो बनाने और सोशल मीडिया के लिए रील्स रिकॉर्ड करने में ही व्यस्त रहते थे। इससे न केवल उनका ध्यान वन्यजीवों से भटकता था, बल्कि कई बार जानवरों की स्वाभाविक गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से जंगल की शांति भंग हो रही थी। उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर सभी प्रवेश द्वारों पर मोबाइल जमा करने के लिए विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां पर्यटकों को सुरक्षित व्यवस्था के तहत अपने फोन जमा करने की सुविधा मिलेगी, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। आदेश में देश के सभी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों में मोबाइल फोन के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शुभरंजन सेन ने इस संबंध में सभी रिजर्व प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिसके बाद बांधवगढ़ प्रबंधन ने तुरंत अमल शुरू कर दिया। नए नियम से सोशल मीडिया पर जंगल की तस्वीरें और वीडियो साझा करने का चलन कम होगा। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों को प्रकृति के साथ वास्तविक जुड़ाव का अवसर मिलेगा। बाघों की अच्छी संख्या के लिए प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। प्रबंधन को उम्मीद है कि यह कदम जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देगा और जंगल का मूल स्वरूप बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

Bandhavgarh Tiger Reserve: रेस्क्यू टीम ने घायल बाघिन को किया पिंजरे में कैद, इनक्लोजर में होगा उपचार

उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के पतौर कोर परिक्षेत्र में पिछले एक महीने से दहशत फैलाने वाली एक बाघिन को अंततः पार्क प्रबंधन ने शुक्रवार सुबह सफलतापूर्वक पकड़ लिया। यह बाघिन कोठिया और कुशमहा गांवों में दो बार घुसपैठ कर एक वनकर्मी सहित तीन लोगों को घायल कर चुकी थी। ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ था, जिसे देखते हुए पार्क प्रबंधन ने तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाया। प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह रेस्क्यू ऑपरेशन पतौर कोर परिक्षेत्र की बीट पनपथा, रेंज पतौर के RF 428 में चलाया गया। विभागीय हाथियों सूर्या, लक्ष्मण और गणेश की सहायता से विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम ने बाघिन को पिंजरे में कैद किया। बाघिन की शारीरिक जांच में पाया गया कि उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह पिछले कुछ समय से शारीरिक रूप से अस्वस्थ थी। रेस्क्यू के बाद बाघिन को बहरहा स्थित इनक्लोजर में शिफ्ट किया गया है, जहां उसका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया जाएगा। साथ ही उसके स्वभाव और व्यवहार का गहन अध्ययन कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पार्क प्रबंधन का कहना है कि बाघिन की गतिविधियों में यदि सुधार होता है, तो उसे पुनः जंगल में छोड़ा जा सकता है, अन्यथा उसकी सुरक्षा और देखभाल इनक्लोजर में ही की जाएगी। रेस्क्यू कार्य में क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, सहायक संचालक पनपथा, वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी बांधवगढ़ एवं संजय टाइगर रिजर्व, रेंजर पतौर और पनपथा कोर, रेस्क्यू टीम तथा अन्य फील्ड स्टाफ की सक्रिय भूमिका रही। सभी ने मिलकर सतर्कता और संयम के साथ इस ऑपरेशन को सफल बनाया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देशभर में अपनी बाघों की सघन संख्या और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। ऐसी घटनाएं जहां मानव और वन्यजीवों का आमना-सामना होता है, उनके समाधान के लिए सजग और वैज्ञानिक उपाय किए जा रहे हैं। बाघिन के सफल रेस्क्यू से न केवल गांवों में राहत की सांस ली गई है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की भी एक महत्वपूर्ण सफलता है।

उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक पर्यटक की हार्ट अटैक से मौत

उमरिया  कोलकाता से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने आए एक पर्यटक की मौत हो गई है। इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक पर्यटक का नाम अरुण कुमार दास पिता आनंद मोहन दास उम्र 79 साल निवासी साल्ट लेक कोलकाता बताया गया है। पर्यटक के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद हैं। उनके बेटे ने सुबह तकलीफ होने के बाद अरुण कुमार दास को होटल के कर्मचारियों की मदद से जिला स्वास्थ्य अस्पताल पहुंचाया। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। सुबह आया हार्ट अटैक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला में स्थित अरण्यक रिजॉर्ट के कर्मचारियों ने बताया कि सुबह लगभग 4 बजे के बीच अरुण कुमार दास को तकलीफ होना शुरू हो गई थी। उन्हें सीने में दर्द हो रहा था। क्योंकि एके दास हार्ट पेशेंट थे और पहले भी बीमार हो चुके थे इसकी जानकारी उनके परिवार को थी। इसलिए उन्होंने तुरंत ही उन्हें अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई। इसके बाद रिसोर्ट के कर्मचारियों ने वहां की व्यवस्था करवाई जिस एके दास को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान अरुण कुमार दास ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में हुई मौत इस बारे में जानकारी देते हुए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ केसी सोनी ने बताया कि बांधवगढ़ से एक पर्यटक को अटैक आने के बाद उमरिया अस्पताल लाया गया था। जिला अस्पताल में पहुंचने तक उनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। फिर भी उनके यहां उपचार शुरू किया गया और उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल जिला अस्पताल प्रबंधन ने घटना की सूचना पुलिस को दे दी इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी।

बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के उप संचालक पीके बर्मा वाइल्ड लाइफ एंड टूरिज्म अवार्ड से हुए सम्मानित

Bandhavgarh Tiger Reserve Deputy Director PK Burma honored with Wildlife and Tourism Award भोपाल ! उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में उप संचालक के पद पर पदस्थ पीके वर्मा को अखिल भारतीय स्तर पर वन्य जीव सरंक्षण से जुड़ी संस्था ट्रैवल ऑपरेटर्स फॉर टाईगर ने वाइल्ड लाइफ एंड टूरिज्म इनिशिएटिव ऑफ द ईयर 2024 अवार्ड से सम्मानित किया है,2014 बैच के आईएफएस पीके वर्मा को यह सम्मान कूनो राष्ट्रीय उद्यान में पदस्थापना के दौरान चीता प्रोजेक्ट की सफलता के साथ साथ वनों को आग से रोकने,शांतिपूर्ण व्यवस्थापन,हैबिटेट डेवलेपमेंट,वन्य जीव सरंक्षण के कार्य में कम्युनिटी को जोड़ने में अग्रणी कार्यों के लिए प्रदान किया गया है।बता दें ट्रैवल ऑपरेटर्स फॉर टाइगर्स एक स्वयं सेवी संस्था है जिसका गठन 2004 में वन्य जीव सरंक्षण,पर्यटन,प्लास्टिक मुक्त जंगल,बाघों के सरंक्षण में योगदान जैसे उद्देश्यों को लेकर किया गया है यह संस्था अखिल भारतीय स्तर पर कार्यरत है, टाईगर रिजर्व में संसाधन मुहैया कराने के साथ साथ यह संस्था वन्य जीव सरंक्षण से जुड़े लोगों को हर वर्ष सम्मानित भी करती है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की बायसन प्रोजेक्ट 2 की तैयारी पूरी, बायसन जनवरी 2025 के शुरुआत में लाए जा सकते

उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के बाद अब बायसन के लिए भी प्रसिद्ध हो सकता है। यहां देश-विदेश से पर्यटक बाघों का दीदार करने के लिए पहुंचते हैं, क्योंकि यहां बाघों का दिखना आसानी है। लेकिन, अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बायसन की हेल्दी पॉपुलेशन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है, जिसके तहत बायसन प्रोजेक्ट 2 की तैयारी पूरी कर ली गई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि यहां 50 और बायसन लाने की तैयारी की गई है, जो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए जाएंगे। ये बायसन जनवरी 2025 के शुरुआत में लाए जा सकते हैं।   ऐसा नहीं है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अभी बायसन नहीं हैं। डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि 2011-12 में कान्हा से 50 बायसन लाए गए थे, जिनकी संख्या अब 170 हो चुकी है। कुल 120 बायसन यहां बढ़े हैं। बांधवगढ़ के मगधी, कल्लवाह और ताला परिक्षेत्र के जंगलों में बायसन झुंड में देखे जा सकते हैं। बायसन क्यों लाए जा रहे हैं? इस पर डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा बताते हैं कि हाल ही में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून द्वारा किए गए सर्वे में यह पाया गया कि कान्हा के बायसन आपस में इनब्रीड हो रहे हैं। जिससे उनकी जेनेटिक गुणवत्ता पर असर पड़ा है और उनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो रहा है। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट रही है, क्योंकि इनका जीन पूल सीमित है। सतपुड़ा के बायसन का वेरिएंट थोड़ा अलग है, इसलिए 50 बायसन सतपुड़ा से लाए जा रहे हैं ताकि बायसन की विविधता बनी रहे और उनकी पॉपुलेशन हेल्दी बने। 50 बायसन लाने की अनुमति प्राप्त बांधवगढ़ में बायसन के सैंपल पहले लिए गए थे और उन पर अध्ययन किया गया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। रिसर्च पेपर तैयार करने के बाद इसे पीसीसी वाइल्डलाइफ को भेजा गया और फिर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से 50 बायसन लाने की अनुमति मिली है। यह बायसन प्रोजेक्ट 2 के तहत किया जा रहा है, जो 2025 के शुरुआती महीनों में पूरा हो सकता है। बाड़े में रखे जाएंगे बायसन बायसन प्रोजेक्ट 2  के तहत लाए जाने वाले बायसन को पहले 50 हेक्टेयर के बाड़े में रखा जाएगा, जहां उन्हें 30 दिनों तक निगरानी की जाएगी। इसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ने की तैयारी की जाएगी। यह बाड़ा बांधवगढ़ के कल्लवाह परिक्षेत्र में बनाया जाएगा। जंगल में इकोसिस्टम और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बायसन का महत्व है, क्योंकि बायसन मोटी घास खाते हैं, जिसके बाद नई घास उगती है, जिसे अन्य वन्य प्राणी खाते हैं। इसलिए बायसन के रहने से आसपास के अन्य वन्य प्राणियों की संख्या भी बढ़ती है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट कॉलरिंग सफल

Umaria News: Satellite collaring successful for the protection of wild elephants in Bandhavgarh Tiger Reserve उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों के संरक्षण के लिए सैटेलाइट कॉलरिंग तकनीक का प्रयोग सफल रहा है। मार्च 2024 में शहडोल के जयसिंहनगर वन क्षेत्र से रेस्क्यू किए गए एक जंगली हाथी को सैटेलाइट कॉलर लगाकर ताला वन परिक्षेत्र की दमना बीट में छोड़ा गया। इसके माध्यम से हाथी के मूवमेंट पर नजर रखी गई, जो संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक जंगली हाथियों के मूवमेंट और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करती है। इससे न केवल हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी सहायता मिलेगी। अब सरकार इस तकनीक को प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व और हाथी संरक्षण क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बना रही है।इस प्रक्रिया के दौरान क्षेत्र संचालक डॉ. नितिन गुप्ता, सहायक संचालक ताला, और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक हाथियों के प्राकृतिक वास के अध्ययन और संरक्षण की दिशा में एक अहम पहल है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों की सैटेलाइट कॉलरिंग पहली बार की गई है, जो अन्य टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में इस तकनीक के उपयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। इससे न केवल हाथियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि उनके संरक्षण में नए आयाम जोड़े जाएंगे।

उमरिया जिले का विश्व प्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैश्विक धरोहर है

भोपाल उमरिया जिले का विश्व प्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैश्विक धरोहर है। यहाँ की जैव-विविधता, दुर्लभ वन्य-जीवों की उपलब्धता, कल्चुरी कालीन किला और हिन्दू देवताओं के प्राचीन मंदिर पूरी दुनिया में दुर्लभ हैं। टाइगर रिजर्व की स्थापना के पूर्व यहाँ का जंगल एवं पहाड़ियों के बीच निर्मित किला एवं अन्य संरचनाएँ रीवा रियासत के महाराजा की निजी सम्पत्ति हुआ करती थी। किले में राजकीय कार्यों के अलावा राज परिवार का निवास भी होता था। घनघोर जंगल राजा और महाराजाओं का निजी शिकारगाह होता था, जहाँ देश-विदेश के राजा समय-समय पर आकर आखेट करते थे। कालांतर में देश की आजादी के बाद तत्कालीन रीवा महाराजा मार्तण्ड सिंह ने सन् 1967 में किला सहित पूरा जंगल मध्यप्रदेश शासन को नेशनल पार्क स्थापित करने एवं वन्य-जीव संरक्षण के लिये दान में दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन द्वारा बाँधवगढ़ नेशनल पार्क की स्थापना की गयी। वर्ष 1981 के बाद यहाँ पर केन्द्र की टाइगर परियोजना शुरू की गयी। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मौजूद जल-स्रोतों से यहाँ की जैव-विविधता देश-दुनिया के जंगलों की अपेक्षा उत्कृष्ट रही है। यहाँ जल-स्रोतों की मौजूदगी हमेशा से रही है, जिससे हरियाली बनी रहती है। पर्याप्त जल-स्रोत, चारागाह, सघन वन, शाकाहारी, मांसाहारी वन्य-जीवों के लिये आवश्यक आहार और रहवास की अनुकूलता होने से यहाँ दुर्लभ से दुर्लभ वन्य-प्राणी एवं पक्षी अपना आश्रय-स्थल बनाये हुए हैं। बाघों की सघन मौजूदगी पूरी दुनिया में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को एक अलग पहचान दिलाती है। टाइगर रिजर्व 1526 वर्ग किलोमीटर के कोर एवं बफर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस जंगल में वर्ष 2022 की गणना अनुसार 165 से भी ज्यादा बाघों की संख्या पायी गयी थी। इसके अलावा कान्हा टाइगर रिजर्व से 49 बायसन लाकर वर्ष 2012 में बसाये गये थे, जो अनुकूल परिस्थितियों में बढ़कर वर्तमान में लगभग 200 की संख्या में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व में दुनिया में विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके विशेष प्रजाति के बारहसिंघा भी कान्हा टाइगर रिजर्व से लाकर बाँधवगढ़ में बसाये गये हैं। वर्ष 2018 से जंगली हाथियों ने भी अपना रहवास यहाँ बनाया है। तकरीबन 70 से 80 जंगली हाथी टाइगर रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न झुण्डों में विचरण कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व में बाघ, बायसन, जंगली हाथी के अलावा नीलगाय, भालू, तेंदुआ, चीतल और सांभर यहाँ के मुख्य वन्य-प्राणी हैं, जो पर्यटन के साथ जैव-विविधता का केन्द्र हैं। टाइगर रिजर्व बाँस एवं साल के सघन वृक्षों से घिरा हुआ है। यहाँ वन्य-जीव दर्शन के अलावा हिन्दू मान्यताओं के कई प्राचीन धार्मिक मंदिर भी हैं। इसमें बाँधवगढ़ किले के समीप स्थित भगवान राम-जानकी मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है। यहाँ पर प्रतिवर्ष जन्माष्मी के पर्व पर मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर से हिन्दू धर्मावलम्बी पूजा-दर्शन के लिये पहुँचते हैं। बाँधवगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित कबीर गुफा कबीरपंथियों की आस्था का केन्द्र है। प्रतिवर्ष अगहन पूर्णिमा के दिन यहाँ पर कबीरपंथियों का जमावड़ा होता है और कबीर गुफा में कबीर अनुयायी उनकी पूजा-पाठ करते हैं। संत शिरोमणि सेन की तपोस्थली भी बाँधवगढ़ में ही रही है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा संत सेन का मंदिर एवं समाधि-स्थल बनाने के लिये टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे हुए क्षेत्र में भूमि आरक्षित की गयी है, जिसमें निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिये विश्व प्रसिद्ध है। इसमें पहली बार दो दिवसीय बटरफ्लाई सर्वे कराया गया। टाइगर रिजर्व के 15 कैम्पों में 61 सदस्यों ने रिजर्व के जंगलों में पैदल सर्वे किया और सर्वे शीट पर तितलियों की जानकारी को अपडेट किया। दो दिवसीय सर्वे में तितलियों की 100 से अधिक प्रजातियाँ पायी गयीं। इनमें 5 से अधिक तितलियाँ दुर्लभ प्रजाति की हैं। कॉमन रैड आई, ब्लैक राजा, किंग क्रो और इंडियन डॉर्ट लेट जैसी तितली भी सर्वे में पायी गयी। तितलियों के सर्वे में मोबाइल एप का उपयोग नहीं किया गया। हाथ से ही सर्वे शीट में पैन से जानकारी को अपडेट किया गया।  

सर्दियों में जंगल सफारी: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रकृति और वन्यजीवों का अद्भुत संगम

Jungle Safari in Winter: Amazing confluence of nature and wildlife in Bandhavgarh Tiger Reserve Kanha and Bandhavgarh tiger reserve घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है। अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ कान्हा पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं। उमरिया। Kanha and Bandhavgarh tiger reserve ऊंचे-ऊंचे साल के वृक्षों के बीच से होकर धरती को चूमती सूर्य रश्मियां, पक्षियों के कलरव, कुलांचे मारते हिरणों के झुंड और उन्मुक्त विचरण करते बाघ। घने वन के बीच घास के लंबे-लंबे मैदान और वन्य जीवों की गतिविधियों के बीच सर्दी के मौसम में जंगल सफारी का आनंद अलग है।अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में प्रकृति के निकट कुछ समय व्यतीत करना चाहते हैं तो टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा, पेंच और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व स्वागत को तैयार हैं।पर्यटकों से संकोच नहीं करते बजरंग और छोटा भीमटाइगर स्टेट में सर्वाधिक बाघों की संख्या वाला बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व है। 165 बाघों वाले इस राष्ट्रीय उद्यान में बजरंग और छोटा भीम नाम के बाघ लोगों को सर्वाधिक आकर्षित करते हैं। यह दोनों पर्यटकों के समक्ष आने में संकोच नहीं करते। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने वाले पर्यटक एक ही दिन में कम से कम दो टाइगर रिजर्व की सफारी कर सकते हैं। बांधवगढ़ में सुबह की सफारी करने के बाद पर्यटक कान्हा टाइगर रिजर्व, संजय धुबरी टाइगर रिजर्व अथवा मुकुंदपुर टाइगर सफारी का भ्रमण आसानी से कर सकते हैं। इन सभी स्थानों की दूरी चंद घंटों की है। टाइगर स्टेट के टाइगर रिजर्व की बुकिंग के आंकड़ों के अनुसार दिसम्बर के दूसरे पखवाड़ा से जनवरी के पहले पखवाड़ा तक एक लाख से ज्याद पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। अन्य प्रमुख स्थल बांधवगढ़ से कान्हा की दूरी महज 210 किलोमीटर है और सड़क बेहद शानदार है। पर्यटक रास्ते में पड़ने वाले घुघुवा जीवाश्म पार्क का भ्रमण भी कर सकते हैं। बांधवगढ़ आने वाले पर्यटक मुकुंदपुर टाइगर सफारी इसलिए जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें वहां सफेद बाघ की सतवीं-आठवीं पीढ़ी के दर्शन सुगम होते हैं। यहां से 129 किमी की दूरी पर मुकुंदपुर टाइगर सफारी तथा 84 किमी की दूरी पर संजय धुबरी टाइगर रिजर्व है। इस तरह पहुंचे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और दुबरी टाइगर रिजर्व तक पहुंचने के लिए जबलपुर केंद्र बिंदु है। जबलपुर हवाई अड्डे से सभी प्रमुख शहरों की कनेक्टिवटी है। जबलपुर और कटनी रेलवे स्टेशन से भी पर्यटक बांधवगढ़ पहुंच सकते हैं इसके लिए उमरिया स्टेशन उतरना होता है। कान्हा नेशनल पार्क जबलपुर से 160 किमी तथा पेंच पार्क 170 किमी दूर है। वहीं संजय दुबरी टाइगर रिजर्व जबलपुर से 350 किमी की दूरी पर है। ठहरने की व्यवस्था बांधवगढ़, पेंच, कान्हा और संजय दुबरी में रुकने के लिए अच्छे होटल और सर्वसुविधा संपन्न होम स्टे सुविधा है। यहां मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के गेस्ट हाउस भी पर्यटकों की अच्छी आवभगत करता है।

अर्जित अवकाश पर रहे गौरव चौधरी के निलंबन पर उठ रहें है सवाल

Questions are being raised on the suspension of Gaurav Chaudhary, who was on earned leave. मां के उपचार के लिए अर्जित अवकाश हैं तो हाथियों की मौत के लिए दोषी कैसे..? उदित नारायणभोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की मौत को लेकर हुई गौरव चौधरी के निलंबन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग के आला अफसर सवाल उठा रहें है कि जब मां के उपचार के लिए गौरव चौधरी 26 अक्टूबर से अर्जित अवकाश का थे तब हाथियों की मौत के लिए उन्हें कसूरवार कैसे ठहराया जा सकता हैं? निलंबित आईएफएस अधिकारी गौरव चौधरी ने 2 सितंबर को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का कार्यभार संभाला और 26 अक्टूबर से अर्जित अवकाश पर चले गए। उनके अवकाश पर जाने के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का प्रभार अमित दुबे को दिया गया है। बांधवगढ़ में हाथियों की मौत का सिलसिला 30 अक्टूबर से शुरू हुआ। 31 अक्टूबर को पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ बीएन अंबाड़े बांधवगढ़ पहुंचे थे। बांधवगढ़ से अंबाड़े ने मोबाइल पर गौरव चौधरी से बात की। तभी चौधरी ने अपनी मां के स्वास्थ्य का उपचार होने की बात कहकर 5 नवंबर के बाद लौटने की बात कही। ऐसे में निलंबन आदेश में टेलीफोन नहीं उठाने की बात भी उचित प्रतीत हो रही है। वैसे निलंबन कोई सजा नहीं है, फिर भी जो जिम्मेदार है, उस पर ही कार्रवाई होना चाहिए। जो ड्यूटी पर ही नहीं है, सरकार की अनुमति से कार्य से अनुपस्थित है, तो फिर उस पर ठीकरा फोड़कर दंडित करने का तो मतलब केवल इतना है, कि तात्कालिक रूप से यह दिखा दिया जाए, कि कार्रवाई कर दी गई है। बाद में तो निलंबन समाप्त ही हो जाएगा। यह कार्रवाई ही जंगल प्रबंधन का सबसे बड़ा उदाहरण है। वैसे भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 70- 80 हां जंगली हाथियों का स्थाई बसेरा तीन-चार साल से है। इस बीच कई फील्ड डायरेक्टर रहे। हाथियों की मौत पर जो भी हाहाकार मच रहा है, वह शमशान वैराग्य जैसा ही लगता है। मौत की सुर्खियां दब जाएंगी. फिर रिएक्शन-एक्शन प्लान के कागज भी इधर-उधर बिखरे मिल जाएंगे। वन्य प्राणी और मानव द्वंद से जनहानि भी एक अहम मुद्दा है। इसके बीच में संतुलन ही वन प्रबंधन का अहम दायित्व है। डॉ. सहाय बांधवगढ़ के नए फील्ड डायरेक्टर राज्य शासन नेभावसे-2009 बैच के डॉ अनुपम सहाय को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का नया फील्ड डायरेक्टर बनाया है। राज्य शासन एक आदेश जारी कर वन संरक्षक, शिवपुरी वन वृत्त के डॉ अनुपम सहाय को स्थानांतरित करते हुये वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व, उमरिया के पद पर तत्काल प्रभाव से पदस्थ करता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10वें हाथी की मौत, दिनभर जांच करती रही टीमें; जांच एजेंसियों ने डेरा जमाया

10 elephants arrived one by one in bandhavgarh Tiger Reserve उमरिया । बांधवगढ़ नेशनल पार्क में गुरुवार को दो और हाथियों ने दम तोड़ दिया। दोपहर में 9वें हाथी और शाम को दसवें हाथी की मौत हुई। मामले में एसटीएफ ने डॉग स्क्वॉड की मदद से 7 खेतों और 7 घरों की तलाशी ली है। उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मंगलवार को चार हाथियों की मौत हो गई। बुधवार को सुबह खबर आई कि तीन और हाथियों ने दम तोड़ दिया है, फिर बुधवार रात को एक गुरुवार को सुबह एक और शाम को एक और हाथी ने दम तोड़ दिया। इस तरह से मरने वाले हाथियों की संख्या कुल 10 हो चुकी है। कई स्तर पर जांच जारी, हाथियों के शवों का किया जा रहा परीक्षण हाथियों की मौत के बाद राज्य से लेकर केंद्र तक हड़कंप मचा हुआ है। हर कोई सकते में है कि आखिर अचानक इतने हाथियों की मौत कैसे हो गई। ऐसा क्या हुआ जिससे एक-एक करके दस हाथियों ने दम तोड़ दिया। मौत की जांच के लिए केंद्र और राज्य की वाइल्डलाइफ एजेंसी की टीम भी बुधवार को बांधवगढ़ पहुंची है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए हाथियों के शवों का परीक्षण किया जा रहा है।

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