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प्रदेश की जनता सीधे चुनेगी नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष, राइट टू रिकॉल भी होगा लागू

The people of the state will directly elect the Municipal Council and Municipal Council President, Right to Recall will also be implemented भोपाल ! एक दिसंबर से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Madhya Pradesh Legislative Assembly Winter Session) में सरकार नगर पालिका अधिनियम में संशोधन का विधेयक लाएगी। जिसमें जनता द्वारा सीधे नगर पालिका व नगर परिषद का अध्यक्ष चुने जाने का प्रविधान होगा। मझौली नगर परिषद के उपचुनाव से प्रविधान लागू हो जाएगामझौली नगर परिषद के उपचुनाव से ही यह प्रविधान लागू हो जाएगा। निर्वाचित अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास होने पर राइट टू रिकॉल के तहत वापस भी बुलाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही दस हजार करोड़ रुपये से अधिक के द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई। संशोधन विधेयक लाया जाएगातत्कालीन कमल नाथ सरकार ने नगर पालिका अधिनियम में संशोधन करके पार्षदों के बीच में से अध्यक्ष चुनने की व्यवस्था लागू की थी। शिवराज सरकार में इसी प्रविधान से चुनाव हुए। अब 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं। पार्षदों द्वारा अध्यक्ष पर दबाव बनाने सहित अन्य शिकायतों को देखते हुए मोहन यादव सरकार ने नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने का प्रविधान अध्यादेश के माध्यम से किया। अब इसके स्थान पर संशोधन विधेयक लाया जाएगा। नए वाहनों के लिए विभागों को राशि नहीं दी जाएगीवहीं, विधानसभा में वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले द्वितीय अनुपूरक बजट के प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई। सूत्रों का कहना है कि यह दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। इसमें कोई भी नई योजना प्रारंभ नहीं होगी। नए वाहनों के लिए विभागों को राशि नहीं दी जाएगी। बलिदानी आशीष के भाई को मिलेगी अनुकंपा नियुक्तिमाओवादी विरोधी अभियान के दौरान पुलिस-नक्सल मुठभेड़ मे 19 नवंबर 2025 को बलिदान हुए विशेष सशस्त्र बल के निरीक्षक आशीष शर्मा के छोटे भाई अंकित शर्मा को जिला पुलिस बल में उप निरीक्षण नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। साथ ही स्वजन को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

मध्य प्रदेश में छात्रों के आत्महत्या करने के मामले में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर

Indore is at first place and Bhopal is at second place in the number of student suicides in Madhya Pradesh. भोपाल ! देशभर में स्वच्छता में पहले स्थान पर आने वाला इंदौर लोगों में बढ़ते तनाव को कम करने में काफी पीछे है। खासकर विद्यार्थियों में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं। इंदौर के कोचिंग संस्थानों (Coaching institutes) में पढ़ने वाले 20 से अधिक विद्यार्थी हर वर्ष तनाव में आत्महत्या कर रहे हैं। सबसे अधिक तनाव नीट(NEET) और जेईई (JEE) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में है। आत्महत्या की दर ने सरकार की चिंता बढ़ाईविद्यार्थियों में बढ़ रही आत्महत्या की दर ने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में देशभर में 15 हजार से अधिक बच्चों ने आत्महत्या की है। 1668 मामलों के साथ मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर (महाराष्ट्र के बाद) पर है। वहीं प्रदेश में भी इंदौर पहले और भोपाल जिला दूसरे स्थान पर है। एक्शन में सरकार, एसटीएफ का गठनमानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एसटीएफ का गठन सरकार ने बच्चों को आत्मघात से बचाने की जिम्मेदारी शिक्षकों-अफसरों को सौंपी है। उच्चशिक्षा विभाग ने अभिनव प्रयोग करते हुए स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया है। यह बल सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय करेगा। शैक्षणिक संस्थानों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। कॉलेजों में काउंसलिंग कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इंदौर में पांच हजार से अधिक कोचिंगइंदौर प्रदेश का कोचिंग हब है। यहां पांच हजार से अधिक कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। इसमें से 200 से अधिक नीट, जेईई और आईआईटी (IIT) की तैयारी की कोचिंग है। भंवरकुआं, गीताभवन, पलासिया, विजय नगर आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान हैं। यहीं सबसे अधिक विद्यार्थी रहते भी हैं। इंदौर में आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। पढ़ाई का दबाव बना जानलेवाकेस 1ः फरवरी 2025 में भंवरकुआं थाना क्षेत्र में नीट की परीक्षा में चयन न होने से परेशान छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। छात्रा का नाम गारगी सुमन (23) निवासी श्रीराम नगर पालदा था। गारगी कई वर्षों से नीट की तैयारी कर रही थी। दो बार कम अंक आने के कारण वह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद उसने बैंक की परीक्षा की तैयारी की, लेकिन इसमें भी वह सफल नहीं हो सकी। केस 2ः वर्ष 2024 में भंवरकुआं क्षेत्र में एक छात्र ने नोट लिखा कि मैं जीवन में सफल नहीं हो पाया और आत्महत्या कर ली। छात्र नीट की तैयारी कर रहा था। मूलरूप से शिवनी जिले का रहने वाला था। केस 3ः फरवरी 2024 में 20 वर्षीय आर्यन तिवारी ने फांसी लगा ली थी। वह मूलरूप से हुजूर (रीवा) का रहने वाला था। इंदौर रहकर वह नीट की तैयारी कर रहा था। केस 4ः मई 2025 में नर्सिंग की छात्रा आशा कानूनगो (25) ने आत्महत्या कर ली। वह मूलरूप से सिवनी की रहने वाली थी। उसकी दीवार पर कई नोट चिपके हुए थे। उनमें लिखा था कि वह सरकारी नर्स नहीं बन सकती और डिप्रेशन में है।केस 5ः मई 2025 में संयोगितागंज थाना क्षेत्र में नर्स यास्मित्रा ने आत्महत्या की। वह निजी मेडिकल कॉलेज में आगे की पढ़ाई कर रही थी। आशंका जताई गई थी कि पढ़ाई के दबाव के चलते यह कदम उठाया है। विशेषज्ञ ने बताया क्या करें माता-पितामनोचिकित्सक डॉ. राहुल माथुर ने बताया कि अब बच्चों में तनाव सहने की क्षमता कम हो गई है। पढ़ाई का तनाव इतना अधिक ले लेते हैं कि आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि वह बच्चों से उम्मीद रखने के बजाय उनके सहायक की भूमिका निभाएं। उनसे खुलकर बात करें। यदि बच्चा कई दिनों से चुपचाप है, अकेला रहने लगा है, रात में जल्दी नहीं सो रहा है, तो हमें इन लक्षणों को पहचानकर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। बच्चों को यह लगता है कि परीक्षा में फेल हो गया तो क्या होगा। उन्हें यह समझना होगा कि जो व्यक्ति परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं, वह भी आगे बढ़ते हैं। विद्यार्थियों में इन लक्षणों को पहचानें

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation, the Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?”

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

Death on the roads: One fatal accident every hour in Madhya Pradesh, 150+ accidents daily, and over 38 deaths. भोपाल। मध्य प्रदेश 2023 में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में देश के सबसे खतरनाक राज्यों में से एक रहा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 14,098 लोगों की मौत हुई, जो भारत की कुल आकस्मिक मौतों का 9.8 प्रतिशत है। 2022 की तुलना में दुर्घटनाओं में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट बताती है कि 2023 में मध्य प्रदेश में 54,763 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 54,699 लोग घायल भी हुए। राज्य में आकस्मिक मृत्यु दर 49.8 रही, जो देश में छठी सबसे अधिक दर है। मध्य प्रदेश के हाईवे खतरनाकयात्रियों के लिए राजमार्ग सबसे खतरनाक साबित हुए। भारत की कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 7 प्रतिशत केवल मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज किया गया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच का समय विशेष रूप से जोखिम भरा रहा, इस दौरान 10,613 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा, देश में हुई घातक बस दुर्घटनाओं में से 10.2 प्रतिशत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मिलाकर हुईं। छोटे वाहनों से ज्यादा हुए एक्सीडेंटखराब बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय कारक भी इन मौतों में योगदान करते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारी और यात्री वाहनों के कारण बड़ी संख्या में मौतें हुईं। राज्य की सड़कों पर स्ङ्क/जीप और कारों से होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या ट्रक/लॉरी/मिनी-ट्रक से होने वाली मौतों से अधिक थी। राजधानी भोपाल में भी बढ़ोतरीराष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 2022 की तुलना में हुई है। कुल 2,906 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 196 लोगों की जान गई और 2,196 लोग घायल हुए। रात 9 बजे से आधी रात तक का समय सबसे खतरनाक रहा। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे ज़्यादा असुरक्षित पाए गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी भोपाल को ओवर-स्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में चौथे स्थान पर रखा था।

Bjp अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को PIC से किया बाहर ,भाजपा आपसी खींचतान के चलते

The BJP president expelled councillors from his own party from the PIC due to internal infighting within the BJP. मध्य प्रदेश के गुना में भाजपा आपसी खींचतान खुलकर सामने आई। नपा परिषद अध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी के पार्षदों को सबक सिखाते हुए पीआईसी से बाहर किया और जातीय समीकरण साधते हुए नए सदस्य जोड़े। BJP Faction War: गुना नगरपालिका परिषद (Guna Municipal Council) में भाजपा पार्षदों की आपसी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दिनों भाजपा के अधिकतर पार्षदों ने अपनी ही नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा रखे गए प्रस्ताव विपक्ष के साथ मिलकर गिरा दिए थे। आठ पार्षद केवल नगर पालिका अध्यक्ष के साथ थे। इसके बाद् भाजपा पार्षदों में रार बढ़ गई। इसके चलते नगरपालिका अध्यक्ष ने उन पार्षदों को सबक सिखाने के लिए प्रेसीडेंट इन काउंसिल (पीआइसी) से छुट्टी कर दी है। इसमें पीआइसी के सदस्य रहे दिनेश शर्मा, अलका कोरी, अजब बाई लोधा और सुमन लोधा को हटाया गया है। उनकी जगह विनोद लोधा, राजकुमारी जाटव, अनीता कुशवाह, कीर्ति सरवैया को पीआइसी में प्रभारी के रूप में शामिल किया है। पीआइसी सदस्यों के बदले गए विभागनई पीआइसी में कई सदस्यों के भी विभाग बदल दिए हैं। पीआइसी की किसी भी समिति या विभाग में कांग्रेस की पार्षद रश्मि शर्मा को शामिल नहीं किया है। पार्षदों के बीच यह चर्चा है कि पीआइसी के फेरबदल का मामला स्थानीय संगठन के साथ-साथ भाजपा प्रदेश संगठन के पास भेजा जा सकता है। वहीं अध्यक्ष इस फेरबदल का कारण भाजपा के रीति-नीति के अनुसार जातिगत समीकरण और महिलाओं का प्रतिनिधित्व देने वाला बता रही है। गुटबाजी के चलते किया गया बदलावनपा अध्यक्ष के अनुसार स्वास्थ्य समिति के प्रभारी दिनेश शर्मा, सामान्य प्रशासन समिति की प्रभारी अलका कोरी, शहरी गरीबी उपशमन विभाग की प्रभारी सुमन लोधा और यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी अजब बाई लोधा को अध्यक्ष ने पीआइसी सदस्य बनाया था। लेकिन लगातार विवाद और गुटबाजी चलते बदलाव किया गया है। विरोध के चलते पास नहीं हो पाए थे कई प्रस्तावपिछले दिनों हुई नगरपालिका परिषद की बैठक में रेलवे को पानी दिए जाने, शहर की मुख्य सड़कों के डामरीकरण किए जाने आदि प्रस्ताव को भाजपा पार्षद दल की आपसी गुटबाजी के चलते स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। ऐसे ही पूर्व में 19 सितंबर को होने वाली नगरपालिका परिषद की बैठक आपसी सहमति न बनने और विवाद होने के कारण स्थगित कर दी थी। भाजपा कई पार्षद विवाद के बाद शिकायत करने पुलिस थाने भी पहुंच गए थे। अब ये है नई पीआइसी नई पीआईसी में राजकुमारी जाटव, राजू ओझा, अनीता कुशवाह, कैलाश धाकड़, विनोद लोधा, कीर्ति सरवैया, बबीता साहू को शामिल किया है।सामान्य प्रशासन विभाग समिति की प्रभारी राजकुमारी जाटव होंगी, तथा सदस्य के रूप में बबीता साहू, अनीता कुशवाह, अलका कोरी. राजू ओझा. नीता कुशवाह, कैलाश धाकड़, विनोद लोधा होंगे। जल कार्य एवं सीवरेज विभाग के प्रभारी राजू ओझा को बनाया है। सदस्य के रूप में सुशीला कुशवाह. संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह. फूलबाई ओझा, राममूर्ति कुशवाह, तरुण सेन, नीता कुशवाह है।लोक निर्माण एवं उद्यान, विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभारी अनीता कुशवाह हैं। इसमें सदस्य के रूप में अलका कोरी. सुमन लोधा, राधाबाई कुशवाह, संध्या सोनी. राजकुमारी जाटव, सुनीता शर्मा, तरुण मालवीय हैं।राजस्व, वित्त एवं लेखा विभाग के प्रभारी कैलाश धाकड़ होंगे। सदस्य के रूप में महेश कुशवाह, ओमप्रकाश कुशवाह, कीर्ति सरवैया, नीता कुशवाह, रमेश भील, दिनेश शर्मा, विनोद लोधा शामिल हैं। स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ठ प्रबर्धन विभाग के प्रभारी विनोद लोधा होंगे, सदस्य के रूप में ममता तोमर, तरन्नुम खान, कृष्णा मौर्या, फूलबाई ओझा, संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह, अनीता कुशवाह शामिल रहेंगे।योजना यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी कीर्ति सरवैया को बनाया गया है। इनके साथ सदस्य के रूप में शेखर वशिष्ठ, बृजेश राठौर, सचिन धूरिया, राजू ओझा, नीता कुशवाह. सुशीला कुशवाह, बबीता साहू शामिल हैं।शहरी गरीबी उपशमन विभाग में बबीता साहू प्रभारी रहेंगी। इसमें अजब बाई लोधा, सुनीता रघुवंशी, हलीम गाजी, रामवीर जाटव, अनीता कुशवाह, नीता कुशवाह को शामिल किया गया है। ठोस अपशिष्ठ प्रबर्धन विभाग के प्रभारी विनोद लोधा होंगे, सदस्य के रूप में ममता तोमर, तरन्नुम खान, कृष्णा मौर्या, फूलबाई ओझा, संध्या सोनी, ओमप्रकाश कुशवाह, अनीता कुशवाह शामिल रहेंगे।योजना यातायात परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रभारी कीर्ति सरवैया को बनाया गया है। इनके साथ सदस्य के रूप में शेखर वशिष्ठ, बृजेश राठौर, सचिन धूरिया, राजू ओझा, नीता कुशवाह. सुशीला कुशवाह, बबीता साहू शामिल हैं।शहरी गरीबी उपशमन विभाग में बबीता साहू प्रभारी रहेंगी। इसमें अजब बाई लोधा, सुनीता रघुवंशी, हलीम गाजी, रामवीर जाटव, अनीता कुशवाह, नीता कुशवाह को शामिल किया गया है।

भोपाल वन विहार घूमने वाले को बूरी ख़बर: आज से ‘नो-व्हीकल जोन: न कार अंदर जा सकेगी, न बाइक बस; 40 गोल्फ कार्ट से घूम सकेंगे टूरिस्ट

Bad news for visitors to Bhopal’s Van Vihar: From today, it’s a ‘no-vehicle zone’: no cars, bikes, or buses will be allowed inside; tourists can explore using 40 golf carts. भोपाल । वन विहार नेशनल पार्क आज (1 अक्टूबर) से ‘नो व्हीकल’ जोन हो जाएगा। न कार अंदर जा सकेंगी और न बाइक या बसें । टूरिस्ट 40 गोल्फ कार्ट के जरिए वन विहार घूम सकेंगे। वन विहार में घूमने आने वाले टूरिस्ट कई बार अपनी गाड़ियों के हॉर्न तेज आवाज में बजाते हैं। इससे अन्य पर्यटकों के साथ जानवर भी परेशान होते हैं। इसलिए वन विहार प्रबंधन यह कदम उठाने जा रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव वन विहार में ही राज्य स्तरीय वन्य प्राणी सप्ताह की शुरुआत भी करेंगे। हर 10 मिनट में मिलेंगे गोल्फ कार्ट वन विहार की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रूही हक ने बताया कि वन विहार में भ्रमण के लिए 40 गोल्फ कार्ट का संचालन किया जाएगा। इन गोल्फ कार्ट में से 32 गोल्फ कार्ट हॉप ऑन हॉप ऑफ पद्धति संचालन के लिए रहेंगे। वहीं, 8 गोल्फ कार्ट (6 सीटर) पूर्ण रूप से 3 घंटे के लिए बुकिंग पर पर्यटकों को उपलब्ध रहेंगे। गोल्फ कार्ट का संचालन दोनों गेट से 10 मिनट पर लगातार होगा। सभी व्यू पाइंट पर 30 सेकेंड से 1 मिनट के लिए रुकेंगे। इससे पर्यटकों को अपनी स्वेच्छानुसार व्यू पाइंट पर वन्यप्राणियों को देखने का पर्याप्त समय मिलेगा। साइकिल से भी घूम सकेंगे गोल्फ कार्ट के अलावा पैदल भ्रमण, साइकिल, शाकाहारी सफारी की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इस बदलाव से वन विहार में पर्यटकों को सशुल्क 150 नई साइकिलें भी उपलब्ध कराएगा। जिससे वन विहार भ्रमण और सुगम बनेगा। अलग-अलग रंग के बैंड भी मिलेंगे विभिन्न प्रकार के माध्यम से भ्रमण करने हेतु पर्यटकों को विभिन्न रंग के बाइओडिग्रेडबल बैंड भी दिए जाएंगे। जिससे किसी भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। पार्किंग के लिए रुपए चुकाने होंगे वन विहार को जहां नो व्हीकल जोन बनाया जा रहा है तो पार्किंग के रूप में पर्यटकों को रुपए भी चुकाने होंगे। चार पहिया वाहनों की पार्किंग के लिए केवल प्रवेश द्वार नंबर-2 पर पार्किंग स्थल बनाया गया है। टूव्हीलर्स के लिए गेट नंबर-1 और 2 दोनों पर ही व्यवस्था रहेगी।

MPWLC में 10 करोड़ का टेंडर घोटाला : नियम ताक पर, चहेती फर्मों को फायदा, कार्रवाई गायब

MPWLC tender scam: Rules flouted, favoured firms benefit by crores; learn how officials are committing fraud भोपाल। MPWLC Scam in 10 crores मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन (MPWLC) में सड़क और साइनज के करीब 10 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। शिकायतें बताती हैं कि अधिकारियों ने तय नियमों की अनदेखी कर चहेती फर्मों को फायदा पहुँचाया और पात्रता की मूल शर्तें पूरी न करने के बावजूद उन्हें क्वालिफाई कर दिया। टेंडर की पहली शर्त ही टूटी MPWLC Scam in 10 crores जुलाई 2025 में जारी इस टेंडर में साफ लिखा था कि भाग लेने वाली फर्म मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी में पंजीकृत होनी चाहिए। लेकिन कॉर्पोरेशन ने एवेन्यू ग्राफिक्स, सत्यम ग्राफिक्स और अबुल फैज जैसी फर्मों को भी क्वालिफाई कर लिया, जिनका रजिस्ट्रेशन उस वक्त नहीं था। हद तो यह कि एक फर्म ने तो टेंडर जारी होने के बाद आवेदन किया, जो कि नियमों के हिसाब से अमान्य है। OEM सर्टिफिकेट के बिना भी क्वालिफाई MPWLC Scam in 10 crores पड़ताल में यह भी सामने आया कि इन फर्मों के पास ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) का इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट तक नहीं था। बावजूद इसके उन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाया गया और बाद में दस्तावेज़ लेकर खानापूर्ति कर दी गई। प्रतिस्पर्धा खत्म, थ्री एम वेंडर बाहर इस टेंडर में छह वेंडर शामिल हुए थे, जिनमें तीन थ्री एम इंडिया से और तीन ओराफिल से थे। लेकिन अधिकारियों ने एक पेपर के आधार पर थ्री एम इंडिया के सभी वेंडरों को बाहर कर दिया। जबकि उनके पास पीडब्ल्यूडी रजिस्ट्रेशन और सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद थे। इससे प्रतिस्पर्धा घट गई और अनुमान लगाया जा रहा है कि टेंडर सामान्य से 20–25% कम दर पर मंजूर होने की बजाय केवल ढाई प्रतिशत कम दर पर खोला गया। नियमों की अनदेखी, पारदर्शिता पर सवाल जानकारों का कहना है कि टेक्निकल बिड खुलने के सिर्फ एक घंटे बाद ही फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई, जबकि नियमानुसार इसमें कम से कम 24 घंटे का अंतर होना चाहिए। इस प्रक्रिया से किसी भी वेंडर को आपत्ति दर्ज कराने का मौका ही नहीं मिला। जवाबदेही से बचते अधिकारी जब चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “हमने पीडब्ल्यूडी एनआईटी के अनुसार फर्मों को क्वालिफाई किया है, बाकी जानकारी अधीक्षण यंत्री से लीजिए।”अधीक्षण यंत्री एसके जैन का कहना था कि “स्टैंडर्ड मानकों के हिसाब से कार्रवाई हुई है और रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाली फर्म को भी पात्र माना जाता है। शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।”वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की एसीएस रश्मि अरुण शमी ने कहा, “मुझे जानकारी नहीं है, पता करती हूं।” एमडी अनुराग वर्मा से संप

मुख्यमंत्री आवास पर ओबीसी आरक्षण को लेकर अहम बैठक

Important meeting regarding OBC reservation at Chief Minister’s residence भोपाल ! ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर आज शाम 6:30 बजे मुख्यमंत्री आवास पर माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक के प्रमुख बिंदु: इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि मध्यप्रदेश सरकार और ओबीसी समाज एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष प्रस्तुत करेंगे और ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक हक दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ओबीसी आरक्षण प्रकरण के संदर्भ में आयोजित बैठक में ओबीसी महासभा से अपनी ओर से दो अधिवक्ताओं के नाम सुझाने का अनुरोध किया गया था। इस पर महासभा ने देश के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल श्री पी. विल्सन का नाम प्रस्तावित किया है। शीघ्र ही एक और वरिष्ठ अधिवक्ता का नाम भी ओबीसी महासभा द्वारा प्रदान किया जाएगा।13% होल्ड हटाने एवं 27% आरक्षण लागू करने की दिशा में ओबीसी महासभा द्वारा एक अभिमत (Representation) एडवोकेट जनरल को सौंपा जाएगा। तत्पश्चात एडवोकेट जनरल उस अभिमत का गहन अध्ययन कर अपना अभिमत सरकार को प्रस्तुत करेंगे, जिसके आधार पर 13% होल्ड हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार पदों पर वर्षों से जमे शिक्षक

Teachers stuck on lucrative posts for years by taking deputation भोपाल। मध्यप्रदेश समग्र शिक्षक संघ ने राज्य में प्रतिनियुक्ति की अवधि को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे एवं प्रदेश संरक्षक मुरारी लाल सोनी ने इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन को पत्र प्रेषित किया है। संघ पदाधिकारियों ने पत्र में उल्लेख किया है कि शासन के नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि सामान्यत: 4 वर्ष तय है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि दोनों विभागों की सहमति से केवल 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान में नीति के विपरीत अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षक ऐसे हैं, जो व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं। जो स्पष्ट रूप से प्रतिनियुक्ति नियमों के विपरीत है। संघ ने तर्क दिया है कि प्रतिनियुक्ति की लंबी अवधि से मूल विभाग के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि प्रतिनियुक्ति का उद्देश्य केवल विशेष प्रशासनिक आवश्यकता की पूर्ति होती है, न कि व्यक्तिगत सुविधा से इसे स्थायी पदस्थापना का रूप देना है। प्रतिनियुक्ति लेकर मलाईदार विभागों में जमेसंघ के अध्यक्ष सुरेशचंद दुबे का कहना है कि विभिन्न संगठनों से जुड़े कई शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिजन मलाईदार विभागों में नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर 10 से 15 वर्षों से जमे हुए हैं। ऐसे सभी कर्मचारी, अधिकारियों और शिक्षकों को मूल विभाग में तत्काल प्रभाव से वापस भेजा जाए। प्रतिनियुक्ति पर जमे लोकसेवकों की संपत्ति की जांच होसंघ के प्रदेश संरक्षक मुरारीलाल सोनी का का आरोप है कि अनेक लोकसेवक कई वर्षों से नियमविरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर जमे हैं। वे शासन को आर्थिक रूप से खोखला कर रहे हैं। ऐसे लोकसेवकों की प्रति नियुक्ति समाप्त कर उनके कार्यकाल और संपत्ति की जांच कराई जाए।

संघर्ष से शिखर तक : हेमंत खंडेलवाल का राजनीतिक सफर

From struggle to peak: Hemant Khandelwal’s political journey भोपाल ! BJP President Hemant Khandelwal मध्य प्रदेश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे चेहरे सामने आते हैं, जिनकी चमक न तो पोस्टरों से आती है और न ही बड़ी-बड़ी रैलियों की भीड़ से। हेमंत खंडेलवाल ऐसा ही एक नाम हैं—जो बिना ढोल-नगाड़े, बिना सत्ता का शोर मचाए आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुँच गए। सवाल यह है कि क्या यह सफर केवल सादगी और संघर्ष का है, या फिर संगठन की राजनीतिक गणित का भी खेल? हेमंत खंडेलवाल सिर्फ भाजपा के अध्यक्ष नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और संगठन के उस दर्शन का चेहरा हैं जो राजनीति को जनसेवा का सच्चा माध्यम बनाता है। BJP President Hemant Khandelwal 3 सितंबर 1964 को मथुरा में जन्मे हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में पढ़ाई की और धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखा। पिता विजय कुमार खंडेलवाल चार बार सांसद रहे, इसलिए राजनीतिक माहौल घर में मौजूद था। लेकिन यहाँ भी दिलचस्प मोड़ यह है कि हेमंत ने विरासत की मलाई खाने के बजाय खुद को संघर्ष के रास्ते में झोंक दिया। वरना आजकल तो नेता जी का बेटा सीधे ‘उत्तराधिकारी’ घोषित हो जाता है। 2008 में पिता के निधन के बाद बैतूल उपचुनाव से सांसद बने। यही वह पल था जब उन्हें राष्ट्रीय राजनीति की रोशनी मिली। लेकिन उनके साथ विडंबना यह रही कि वे लंबे समय तक सत्ता की गाड़ी के इंजन से दूर रहे—कभी विधायक, कभी जिला अध्यक्ष, कभी कोषाध्यक्ष, और कभी प्रवासी प्रभारी। कहते हैं, उन्होंने राजनीति को ‘करियर’ नहीं, बल्कि ‘धैर्य की परीक्षा’ मान लिया था। BJP President Hemant Khandelwal की सबसे बड़ी पूंजी उनकी सादगी है। सुना है, कार्यकर्ताओं को शर्ट तक दे दी और कभी स्कूटर तक। अब सोचिए, जिस दौर में नेता जी चुनाव में नोटों की बारिश कर रहे हों, उसमें कोई नेता अपनी शर्ट उतारकर कार्यकर्ता को दे दे—ये दृश्य राजनीति की किताब में दुर्लभ ही है। लेकिन राजनीति केवल सादगी से नहीं चलती। 2020 की सत्ता पलट की पटकथा में उनकी भूमिका किसी पर्दे के पीछे के निर्देशक जैसी रही। कमलनाथ सरकार जब गिर रही थी, तब खंडेलवाल ने सिंधिया खेमे और भाजपा के बीच पुल का काम किया। और कहते हैं, यही पुल उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक ले आया। राजनीति में ऐसे मौके हर किसी को नहीं मिलते—यह किस्मत और कौशल का संगम है। अब वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं। सवाल यह है कि क्या वे भाजपा को बूथ स्तर तक और मजबूत बना पाएंगे, या फिर संगठनात्मक जोड़-तोड़ में ही उलझ जाएंगे? याद रखिए, प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी केवल शोभा की वस्तु नहीं है; यह वह कुर्सी है जिस पर बैठकर पार्टी का भविष्य तय होता है। एक और दिलचस्प पहलू यह है कि 31 साल बाद वैश्य समाज से किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। तो क्या यह केवल जातीय संतुलन साधने की कोशिश है, या फिर सचमुच संगठन के ‘सच्चे सेवक’ को उसकी मेहनत का इनाम? जनता तो यही देख रही है कि सियासी समीकरणों में जनता का हिस्सा कितना है। BJP President Hemant Khandelwal के पास अब मौका है कि वे यह साबित करें कि राजनीति सिर्फ ‘सत्ता का गणित’ नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष का भी नाम है। क्योंकि अगर वे भी बाकी नेताओं की तरह महंगे काफिलों और बेतहाशा पोस्टरों में उलझ गए, तो जनता उन्हें भी उसी भीड़ में गुम कर देगी, जहाँ नेता बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की उम्मीदें वही की वही रहती हैं। हेमंत खंडेलवाल का नया अध्याय केवल भाजपा के संगठन का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का भी इम्तिहान है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी सादगी और संघर्ष को कायम रखते हैं या फिर सत्ता के गलियारों की चकाचौंध उन्हें भी उसी रंग में रंग देती है, जिसमें बाकी नेता डूब चुके हैं।

वन विभाग में खरीदनी थी फोर व्हील ड्राइव खरीद ली टू व्हील ड्राइव….!

I had to buy a four wheel drive from the forest department but bought a two wheel drive…! भोपाल। जंगल महकमे में 26 करोड़ के 214 वाहनों की खरीदी को लेकर उठे सवाल थम ही नहीं रहे हैं। अब इसकी अनुगूंज विधानसभा के मानसून सत्र में सुनाई देगी। कांग्रेस विधायक ध्यानाकर्षण के जरिए यह मुद्दा उठाने जा रहे हैं। सूचना अधिकार के तहत मिले दस्तावेज के अनुसार डॉ दिलीप कुमार की अध्यक्षता वाली क्रय समिति ने फोर व्हील ड्राइव वाहन खरीदने की अनुशंसा की थी किंतु कतिपय शीर्ष अधिकारियों के निजी हितार्थ के चलते टू व्हील ड्राइव वाहनों की खरीदी की गई। चिंता जनक पहलू यह है कि टू व्हील ड्राइव वाली वाहन महंगी कीमत पर खरीदे गए।सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेज वाहन क्रय करने के लिए तीन कमेटियां इसलिए बनाई गई, ताकि वाहन खरीदी में गड़बड़ करने की मंशा से अधिकारी अपनी मनमर्जी कर सके। यही वजह रही की तीन बार क्रय समिति का गठन करना पड़ा। जबकि पहले क्रय समिति के अध्यक्ष रहे डॉ दिलीप कुमार कमेटी ने फोर व्हील (4wD) वाहन खरीदने की अनुशंसा की थी। इस सवाल का जवाब वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों के पास नहीं है कि जब फोर व्हील ड्राइव स्कार्पियो-एन 15.84 लाख कीमत पर मिल रही थी तो फिर टू व्हील ड्राइव स्कार्पियो 18.24 कुल लागत में क्यों खरीदी ? वन विभाग के लिए 4wD वाहन की रिक्वारमेंट थी, क्योंकि जब शहर और गांवों की रोड समाप्त होते है तब वन विभाग की सीमा आरंभ होती है। कच्चे, रेतीले, गिट्टो, और पहाड़ों पर वन विभाग का वाहन चलता है। ऐसी जगह पर 4wD वाहन की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार वाहन खरीदते समय अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस का ध्यान भी नहीं रखा गया। डॉ दिलीप कुमार के रिटायर्ड होने के बाद यूके सुबुद्धि और उसके बाद सुदीप सिंह अध्यक्षता वाली कमेटियां बनाई गई। समिति में विशेषज्ञ को जगह नहीं दी गई थी। इन कमेटियों को भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन कर वाहन स्पेसिफिकेशन और दरों का तुलनात्मक पत्रक नहीं बनाया। यानि कम से कम दो अलग-अलग कंपनियों के वाहन मॉडल तय करना था पर एक ही कंपनी को परचेज ऑर्डर जारी कर दिए गए। यानी पूर्व से ही या तय कर लिया गया था कि महिंद्रा एन्ड महिंद्रा कंपनी के विशेष वाहन खरीदने हैं।वित्त विभाग के परिपत्र की अनदेखीवाहन क्रय समिति वित्त विभाग के सर्कुलर की अनदेखी की। यानि एसीएस और वन बल प्रमुख को भी गुमराह किया। वित्त विभाग के परिपत्र के अनुसार अफसर के लिए वाहन पे-स्केल के आधार पर खरीदने का प्रावधान है। यदि पात्रता से अधिक कीमत ( स्कॉर्पियो और इनोवा जैसी अधिक कीमत वाली वाहन) की वाहन खरीदना था तब संबंधित प्रस्ताव पर कैबिनेट के मंजूरी लेना चाहिए थी।राइट ऑफ वाहन की सूची में गड़बड़ी15 वर्ष पुराने वाहनों को राइट ऑफ किए जाने के एवज में नए वाहन खरीदने की बात कही जा रही है। राइट ऑफ वाहनों की सूची में भी गड़बड़ी प्रकाश में आई है। दस्तावेज के आधार पर आरटीआई एक्टिविस्ट पुनीत टंडन ने दावा किया है कि सूची में दिए गए वाहनों के नंबरों का मिलन परिवहन विभाग की बेवसाइट पर मिलान किया तब 5 वाहन के नंबर एम्बुलेंस के बताए जा रहें हैं। एक वाहन का नंबर तो इंदौर आरटीओ का है जो फाइनेंस पर ली गई है।

मॉनसून सत्र की बारिश से पहले राजनीतिक गरमाहट: सरकार-जवाबदेही और विपक्ष-रणनीति आमने-सामने

Political heat before the monsoon session rains: Government-accountability and opposition-strategy face to face भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, और 8 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में कुल 10 बैठकें प्रस्तावित हैं। यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार जहां अनुपूरक बजट लेकर आने वाली है, वहीं कांग्रेस विपक्ष जनहित और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। नई भूमिका में हेमंत खंडेलवालबैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल, जिन्हें हाल ही में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है, अब विधानसभा में पहली पंक्ति में स्थान पाएंगे। यह न सिर्फ उनकी बढ़ी हुई भूमिका का संकेत है, बल्कि पार्टी के भीतर नई राजनीतिक रणनीति का भी प्रतीक है। 3,377 प्रश्न, 191 ध्यानाकर्षण और एक स्थगन प्रस्तावविधानसभा सचिवालय को इस सत्र के लिए 3,377 सवाल मिल चुके हैं, जिनमें से अनेक सवाल शासन की जवाबदेही को कठघरे में खड़ा करेंगे। 191 ध्यानाकर्षण सूचनाएं और एक स्थगन प्रस्ताव यह दर्शाते हैं कि सत्र में विपक्ष आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। बजट की प्राथमिकता – सिर्फ जनहितमोहन सरकार अनुपूरक बजट लाने की तैयारी में है, लेकिन इस बार सरकार का रुख फिजूलखर्ची के खिलाफ सख्त और जनहित योजनाओं के पक्ष में दिख रहा है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वाहन जैसी गैर-ज़रूरी मांगें न भेजें। यह रुख सरकार की वित्तीय अनुशासन और छवि सुधार की मंशा को दर्शाता है। रणनीति की थाली: कांग्रेस विधायकों की डिनर बैठकसत्र की पूर्व संध्या पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक होटल में होगी। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मांडू में हुए नव संकल्प शिविर में तय किए गए मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। चर्चा है कि जल जीवन मिशन घोटाले जैसे संवेदनशील मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाया जाएगा। सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे रोस्टर मंत्रीमुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि हर दिन सदन में कम से कम तीन मंत्री रोस्टर अनुसार अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। ये मंत्री न केवल सवालों के जवाब सुनिश्चित करेंगे, बल्कि विधायकों की उपस्थिति भी ट्रैक करेंगे। यह पहल सरकार की तैयारियों को संगठित रूप में दर्शाती है। मानसून सत्र – बहस, बजट और भरोसे की परीक्षायह मानसून सत्र सिर्फ सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और विपक्ष की धार का टेस्ट बन गया है। एक ओर जहां सरकार बजट से भरोसा पैदा करना चाहती है, वहीं विपक्ष जवाबदेही से सरकार को झकझोरने की रणनीति बना रहा है। अगले दस दिन नीतियों से ज्यादा नीयत की परीक्षा साबित होंगे।

राज्यपाल पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं के साथ किया सह-भोज

Governor Patel had lunch with differently abled girls भोपाल ! राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन में सफलता और आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखते रहना चाहिए। राज्यपाल बहुदिव्यांग बालिकाओं से उनके शिक्षकों के माध्यम से राजभवन के सभा कक्ष जवाहर खण्ड में आत्मीय चर्चा कर रहे थे। राज्यपाल पटेल से सौजन्य भेंट करने के लिए आनंद सर्विस सोसायटी की मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिकाएं शुक्रवार को इंदौर से राजभवन आईं थीं। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे। निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं से उनके मार्ग दर्शकों के माध्यम से परिचय प्राप्त किया। उनके जीवन की कठिनाईयों और सफलताओं को जाना। उनको निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। दिव्यांग बालिकाओं के साथ बालिका सुश्री गुरदीप कौर वासु के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। उन्होंने दिव्यांग बालिकाओं और शिक्षकों के साथ सह-भोज भी किया। राजभवन भ्रमण के अनुभव किए साझा राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सभी बालिकाओं से राजभवन भ्रमण के अनुभव जाने और सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। बालिकाओं ने सांकेतिक भाषा में ऐतिहासिक राजभवन परिसर और विशेष रूप से आर्ट गैलेरी भ्रमण के सुखद अनुभव साझा किए। उन्होंने राज्यपाल के प्रति मुलाकात, सह-भोज करने और राजभवन भ्रमण का अवसर देने के लिए आत्मीय आभार जताया। राज्यपाल को स्व-रचित कलाकृतियां की भेंट राज्यपाल मंगुभाई पटेल से भेंट के अवसर पर मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिका सुश्री दिव्या गोले और वैष्णवी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्हें सुश्री किरण विश्वकर्मा और अन्य बालिकाओं ने स्वयं द्वारा सृजित पैंटिंग और कलाकृतियां भेंट की। राज्यपाल ने देखी बहुदिव्यांग गुरदीप पर बनी फिल्म राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बालिकाओं के साथ मध्यप्रदेश वाणिज्य कर विभाग में कार्यरत मूकबधिर बहुदिव्यांग शासकीय सेवक सुश्री गुरदीप के जीवन और संघर्षों पर आधारित लघु फिल्म को देखा। उन्होंने उपस्थित बालिकाओं से गुरदीप के जीवन के संघर्षों और सफलताओं से प्रेरणा लेने और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुरदीप के परिजनों, संस्था के शिक्षकों और प्रतिनिधियों के समर्पण की प्रशंसा की। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, संस्था की को-फाउंडर और संचालक श्रीमती मोनिका पुरोहित, सचिव ज्ञानेन्द्र पुरोहित, गुरदीप की माताजी श्रीमती सीमा मंजीत कौर, शिक्षिका श्रीमती मृणालिनी शर्मा और बालिकाएं उपस्थित रही।

मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां शुरू, ओबीसी कल्याण आयोग में कुसमारिया को अध्यक्ष और मौसम बिसेन को बनाया सदस्य

Political appointments started in Madhya Pradesh, Kusmaria appointed as Chairman and Mausam Bisen as member in OBC Welfare Commission भोपाल। हेमंत खंडेलवाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के 21 दिन के भीतर ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बड़ा निर्णय हुआ है। बुधवार को डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया को ओबीसी कल्याण आयोग का अध्यक्ष और मौसम बिसेन को सदस्य बनाने का आदेश जारी हुआ है। इसके साथ ही पार्टी ने राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत के संकेत दे दिए हैं। मौसम बिसेन पूर्व मंत्री गौरी शंकर बिसेन की बेटी हैं, जो वर्ष 2021 में आयोग के गठन के साथ अगस्त 2023 तक इसके अध्यक्ष रहे। अब उनकी जगह ओबीसी आयोग के अध्यक्ष कुसमारिया को कल्याण बोर्ड का भी अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही संतुलन की दृष्टि से मौसम को सदस्य बनाया गया है। बालाघाट से टिकट दिया थाबता दें कि पार्टी ने मौसम बिसेन को विधानसभा चुनाव में भी बालाघाट से टिकट दिया था। बाद में इसे बदलकर गौरी शंकर बिसेन को लड़ाया था, जिसमें वह हार गए थे। मौसम की नियुक्ति के साथ उन नेताओं में भी निगम, मंडल और आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बनने की आस जगी है, जो लंबे समय से प्रतीक्षा में हैं। इसमें विधानसभा चुनाव हार चुके तो कुछ कांग्रेस से आए नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोकसभा चुनाव के पहले 13 फरवरी 2024 को 46 निगम, मंडल और आयोगों में नियुक्तियां रद कर दी थीं। सभी नियुक्तियां शिवराज सरकार में हुई थीं। 25 पदों पर 2021 में नियुक्तियां हुई थीं। शैलेन्द्र बरुआ, जितेन्द्र लिटोरिया और आशुतोष तिवारी जैसे भाजपा के संगठन मंत्रियों को भी निगम मंडलों में जगह मिली थी। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 सामाजिक कल्याण बोर्ड भी बनाए थे। हालांकि, इनकी नियुक्तियां रद नहीं की गई थीं। नए प्रदेश अध्यक्ष की प्रतीक्षा में टलती रहीं नियुक्तियांमाना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियां प्रारंभ होंगी, पर अध्यक्ष का निर्वाचन दो जुलाई 2025 को पूरा हो पाया। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य नहीं होने से कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। नीतिगत निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है अब चरणबद्ध तरीके सभी निगम मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियां शीघ्र होंगी। सबसे पहले उन्हें लिया जा सकता है, जिनके लिए दावेदार कम हैं और नियुक्ति में अंदरूनी विरोध होने की संभावना नहीं है। सत्ता-संगठन के सामंजस्य से सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को देखते हुए नियुक्तियां की जाएंगी। प्रदेश में वर्ष 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इस कारण पार्टी का पूरा जोर संतुलन पर रहेगा, जिससे कोई नाराज नहीं होने पाए। अगले चरण में कैबिनेट विस्तार की संभावनाराजनीतिक नियुक्तियों के बाद अगली कड़ी में सरकार मंत्रिमंडल में रिक्त तीन पदों को भरने के लिए कैबिनेट का विस्तार भी कर सकती है। कई महीने से विस्तार की अटकलें चल रही हैं।

बड़ी खबर, अब ‘राम बाग’ कहलाएगा अशोका गार्डन, हमीदिया और हबीबगंज का नाम भी बदलेगा

ashoka garden now called ram bagh hamidia and habibganj also renamed Bhopal News : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर के प्रमुख जगहों के नाम बदलकर शहर सरकार ‘शुद्धिकरण अभियान’ चला रही है। दावा किया जा रहा है कि, अब गुलामी और विदेशी आंक्राताओं के नाम से नहीं, बल्कि भोपाल की पहचान भारतीय संस्कृति के नामों से होगी। इसी के चलते नगर निगम द्वारा हमीदिया कॉलेज, हमीदिया अस्पताल, हबीबगंज के साथ-साथ शहर के कई प्रमुख इलाकों के नाम बदलने के लिए शासन से मांग की है। इसी के तहत मेयर इन काउंसिल (MIC) ने शहर के बड़े और प्रमुख इलाके में शामिल अशोका गार्डन का नाम बदल भी दिया है। इस इलाको को अब ‘राम बाग’ नाम से जाना जाएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि, गुलामी और विदेशी आक्रांताओं के नामों को बदलना जरूरी है। भारतीय संस्कृति के नामों से भोपाल को राजा भोजपाल की पहचान मिले। कई सड़कों और संस्थानों के नाम बदलने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। शहर सरकार की शक्तियों का उपयोग कर अशोका गार्डन का नाम बदलकर राम बाग का प्रस्ताव पारित हुआ है। निगम अद्यक्ष ने कहा कि, भोपाल का नवाब रहा हमीदुल्लाह खान के नाम की सड़कों के नाम बदले। भोपाल का हमीदुल्लाह खान पाकिस्तान में विलय चाहता था। इसलिए ये शुद्धिकरण का अभियान है। विपक्ष के मति में भ्रम और अशुद्धि है।

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