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भोपाल प्रशासन का बड़ा फैसला, स्कूलों में ई-रिक्शा पर प्रतिबंध लगेगा, बच्चों की सेफ्टी के सही नहीं

Bhopal administration’s big decision, e-rickshaws will be banned in schools, not good for children’s safety भोपाल: शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए शुक्रवार को कंट्रोल रूम में एक मीटिंग हुई। सांसद आलोक शर्मा ने जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मीटिंग में लेफ्ट-टर्न को सुधारने, ई-रिक्शा पर नियंत्रण रखने, ट्रांसफार्मर हटाने और पार्किंग व्यवस्था को ठीक करने जैसे मुद्दों पर बात हुई। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को उनके अधूरे प्लान के लिए फटकार लगाई गई और उन्हें एक हफ्ते में ट्रैफिक एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर लेफ्ट टर्न सुधार का प्लान पेश करने का निर्देश दिया गया। शहर के 42 चौराहों पर लेफ्ट टर्न की समस्या को दूर करने के लिए 3 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। ई-रिक्शा पर रोकई-रिक्शा के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई और कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को ई-रिक्शा में स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। इसलिए स्कूलों में ई-रिक्शा को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया, क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। मीटिंग में सड़कों से अतिक्रमण हटाने और कंडम वाहनों को हटाने पर भी बात हुई। सांसद शर्मा ने ट्रांसफार्मर और खंभों को हटाने की बात कही और पार्किंग व्यवस्था को आम लोगों के लिए आसान बनाने के निर्देश दिए। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकारसांसद आलोक शर्मा ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकार भी लगाई। दरअसल, पीडब्ल्यूडी अधिकारी बिना किसी वर्किंग प्लान के मीटिंग में पहुंच गए थे। इस पर सांसद ने नाराजगी जताई। मीटिंग में संबंधित विभागों को कुछ निर्देश दिए गए। उन्हें मैनिट के ट्रैफिक विशेषज्ञों की मदद से सभी 42 चौराहों की समीक्षा रिपोर्ट और एस्टीमेट तैयार करने को कहा गया। इससे जल्द से जल्द काम शुरू किया जा सके। ऐसा करने से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों का आना-जाना आसान हो जाएगा। साथ ही, चौराहों की सुरक्षा और दृश्यता भी बेहतर हो जाएगी।

धार वन मंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुई गड़बड़झाला

There was a mess in the tender process in Dhar forest division भोपाल। इंदौर सर्किल के अंतर्गत वन विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में है। धार वन मंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर हुई गड़बड़ियों की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल और वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ अधिकारियों को की गई है। आरोप है कि अफसरों और सप्लायर्स के गठजोड़ (नेक्सस) के चलते निविदाएं नियमों को ताक पर रखकर जारी की गईं, जिससे खास सप्लायर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके।धार वन मंडल की संदिग्ध निविदाएंशिकायतकर्ता हितेंद्र भावसार ने बताया कि धार वन मंडल अधिकारी द्वारा 3 जुलाई को पांच निविदाएं जेम पोर्टल पर प्रकाशित की गईं। इनके क्रमांक इस प्रकार हैं —GEM/2025/B/6413130GEM/2025/B/6411838GEM/2025/B/6412580GEM/2025/B/6412737GEM/2025/B/6413223ये निविदाएं महज एक दिन के भीतर यानी 4 और 5 जुलाई को पूर्ण भी कर दी गईं। आरोप है कि इस प्रक्रिया में क्रय भंडार नियमों और वन बल प्रमुख द्वारा निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है। यह भी कहा गया है कि जिन वस्तुओं के लिए निविदाएं निकाली गईं, उन्हें पहले भी तीन बार प्रकाशित किया गया था, लेकिन हर बार उन्हें बिना कारण बताए निरस्त कर दिया गया। वन मुख्यालय से नहीं ली गई अनुमतिमध्यप्रदेश के वन नियमों के अनुसार, किसी भी निविदा को निर्धारित समय से पूर्व निरस्त करने के लिए वन मुख्यालय से पूर्वानुमति लेना आवश्यक होता है। मगर धार वन मंडल अधिकारी ने यह जरूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई। इस मामले में संदेह जताया जा रहा है कि इंदौर सर्किल के प्रभावशाली अधिकारियों और एक खास सप्लायर के बीच सांठगांठ है और उसी को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी निविदा प्रक्रिया को मनमर्जी से चलाया गया। हॉफ के दिशा-निर्देशों की अवहेलनायह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब यह देखा जाए कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने सप्लायर्स और अधिकारियों के इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए ‘उत्तम शर्मा कमेटी’ बनाई थी। इस कमेटी ने प्रदेश के लिए統一ित (एकजाई) निविदा नियम तय किए थे। इसके तहत निर्देश दिए गए थे कि सभी निविदाएं केवल जेम पोर्टल पर ही नहीं बल्कि विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।हालांकि धार वन मंडल में न तो विभागीय पोर्टल पर जानकारी दी गई और न ही पारदर्शिता के नियमों का पालन किया गया। यह सीधे तौर पर विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना है। आईटी शाखा की रिपोर्ट भी हुई नजरअंदाजपूर्व में वन विभाग की आईटी शाखा द्वारा विभाग के हॉफ (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) को एक रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें ऐसे मामलों में लगातार नियमों की अनदेखी और नेक्सस की गतिविधियों को उजागर किया गया था। लेकिन उस रिपोर्ट पर भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभागीय प्रमुख स्तर पर भी ऐसी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायतअब जबकि यह शिकायत सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच चुकी है, विभागीय हलकों में हलचल बढ़ गई है। हितेंद्र भावसार ने अपने पत्र में मांग की है कि धार वन मंडल में हुई निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी है पारदर्शितामध्यप्रदेश वन विभाग में बीते कुछ वर्षों में कई टेंडर प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। सप्लायर्स और अधिकारियों के बीच बने अपारदर्शी गठजोड़ के कारण विभाग की छवि लगातार धूमिल हो रही है। यह मामला इस बात की एक और बानगी है कि कैसे विभागीय आदेशों को दरकिनार कर कुछ चहेते सप्लायर्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

तबादला और पोस्टिंग में एसीएस-पीएस की मनमानी, मंत्रियों में नाराजगी

ACS-PS’s arbitrariness in transfer and posting, ministers unhappy उदित नारायणभोपाल। प्रदेश में एक महीना 17 दिन ट्रांसफर और पोस्टिंग का सीजन चला। सरकार ने मंत्रियों को छूट दी थी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग में विभाग के एसीएस-पीएस ने अपनी मनमार्जी चलाई और उन्होंने ही अपनी रणनीति के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए। चिंताजनक पहलू यह है कि गंभीर बीमारी से जुड़े प्रकरणों में कर्मचारियों को ट्रांसफर का लाभ नहीं मिला। जबकि नीति में गंभीर बीमारी, परिवार में बीमार और पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया था। वन विभाग ने तो ‘ए-प्लसÓ की नोटशीट तक की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया है। आखिरी दिन तक वन मंत्रालय में तबादला सूची में मैनेजमेंट कोटे के आधार देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे। तबादला सीजन में मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के बीच तालमेल की कमी भी खुलकर सामने आई है। तबादले के लिए तमाम मनुहार कर बैन हटवाने वाले मंत्रियों को अपने मिलने-जुलने वालों के तबादले और पोस्टिंग करने का मौका नहीं मिल सका है। वरिष्ठ अफसरों ने इसके लिए सरकार के नियमों को भी दरकिनार किया है। एसीएस और मंत्रियों के बीच खींचतान की वजह से कई विभागों में 8 फीसदी तक तबादले नहीं हो पाए हैं। वहीं कई विभागों द्वारा अब बैकडेट में तबादला आदेश जारी किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग ने 509 पटवारियों का तबादला किए। इसके बाद 89 पटवारियों के आधी रात को आदेश जारी कर दिए गए हैं। अभी कुछ सूची जारी करने की तैयारी विभाग कर रहा है। वह भी बैकडेट में होने की तैयारी चल रही है। वन विभाग में फारेस्ट गार्ड, प्रभारी रेंजर से लेकर एसडीओ तक के ट्रांसफर 17 और 18 जून तक जारी किए गए हैं। सीएम के विभागों को लेकर खासी माथा-पच्चीमुख्यमंत्री के पास गृह, जेल, उद्योग, नर्मदा घाटी, विमानन, वन जैसे करीबन 10 से ज्यादा विभाग हैं। इन विभागों में जितने भी ट्रांसफर किए गए हैं, उसमें सीएम मॉनिट के नाम पर एसीएस-पीएस ने अपनी मनमानी की है। वन विभाग में दीगर मंत्रियों को डस्टबिन में डाल दिया गया। इससे मंत्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। साथ ही स्थानांतरित हुए अधिकारियों-कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कई अधिकारियों का मैनेजमेंट कोटे से मनपसंद पोस्टिंग कराने की सिफारिश मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों से की थी। उनके नाम सूची में आए, लेकिन चाही गई जगह नहीं मिली। यहां भी देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे हैं। यही वजह रही कि एक रेंजर स्वस्ति श्री जैन की पोस्टिंग 2 जगह कर दी गई। कुछ मामलों में जहां जगह ही नहीं, वहां भी तबादले किए गए हैं। वन विभाग में चर्चा है कि मंत्रालय के अधिकारियों ने जमकर मनमानी की, क्योंकि वन विभाग सीएम के पास है और उनके पास गृह जेल उद्योग और आईएएस की पोस्टिंग संबंधित महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसके कारण उनका वन विभाग पर फोकस कम रहा और इसका फायदा नौकरशाह और शीर्ष अफसरों ने जमकर उठाया। यही स्थिति जेल विभाग में भी रही। उद्योग विभाग की सूची का तो कर्मचारियों को पता ही नहीं चला। एमएसएमई विभाग में मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रस्तावों को तवज्जो ही नहीं दी गई। उधर, पीएचई में किए गए तबादलों में विभागीय मंत्री द्वारा की गई अनुशंसाओं को दरकिनार कर ट्रांसफर किए गए। यह सब मुख्यमंत्री के नाम पर विभागों के अफसरों ने खेल खेला है। इस मामले में तो कर्मचारियों ने विभागाध्यक्षों पर लेनदेन के भी आरोप लगाए हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल की तबादलों में नहीं चलीकैबिनेट में प्रहलाद पटेल कद्दावर मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन तबादलों में अफसरों ने उनकी नहीं सुनी। तबादला आदेश जारी करने के दौरान अफसरों ने यह कहकर मंत्री के नाम रिजेक्ट किए कि यह तीन फार्मूले में फिट नहीं बैठते हैं। ये फार्मूला है-पारस्परिक तबादला, गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या ब्रेन ट्यूमर तथा तीसरा महिला का अपने परिवार से दूर पदस्थ होना बताया गया। यही वजह है कि मंत्री के यहां से गए प्रस्तावों पर तबादले नहीं किए गए। उधर, आजीविका मिशन, आरईएस, पंचायत राज सहित अन्य विभागाध्यक्ष कार्यालयों में ट्रांसफर खुलकर किए गए हैं। राजस्व विभाग के पीएस विवेक पोरवाल ने मंत्री करण सिंह वर्मा की भी नहीं सुनी, ऐसी चर्चा है। मंत्री ने जो सूची भेजी, उसमें भारी काट-छांट करते हुए प्रमुख सचिव और सीएलआर ने नामात्र के तबादले किए हैं।

पशुपालन विभाग का नया नाम गौपालन विभाग, एमपी की मोहन सरकार ने की बड़ी घोषणा

New name of Animal Husbandry Department is Cow Husbandry Department भोपाल! एमपी सरकार के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव शुक्रवार को भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने डॉक्टर भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिए। साथ ही गौशालाओं के लिए 90 करोड़ रुपये की राशि जारी की। इसके साथ ही उन्होंने पशुपालन विभाग का नया नामकरण भी किया है। सीएम मोहन यादव ने पशुपालन विभाग का नाम बदलकर गौपालन विभाग करने की भी घोषणा की है। सीएम यादव ने आचार्य विधासागर जीव दया पुरस्कार भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को दूध की राजधानी बनना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तरीय गौ-शाला सम्मेलन में मध्य प्रदेश को दूध उत्पादन में नंबर वन बनाने का लक्ष्य रखा। दूध का महत्व बढ़ाने को लेकर कामसीएम मोहन ने कहा कि एमपी को दूध उत्पादन में सबसे आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश नदियों का मायका है। दूध का महत्व आर्थिक रूप से बढ़े, इस दिशा में सरकार काम कर रही है। भाजपा सरकार ने पशुपालन विभाग का बजट बढ़ाया है। पहले यह 300 करोड़ था, जिसे अब 2600 करोड़ कर दिया गया है। पशुपालन विभाग का बदला नामसीएम यादव ने कहा कि गौशालाओं में दूध उत्पादन तो होना ही चाहिए, साथ ही सीएनजी भी बनाई जा सकती है। उन्होंने पशुपालन विभाग के नाम में बदलाव करते हुए कहा कि अब इसे गौपालन विभाग के नाम से भी जाना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर घूमने वाली गायों को गौशालाओं में पहुंचाया जाएगा। सीएम ने कहा कि सरकार एक साल में पूरे प्रदेश में बदलाव लाने के लिए संकल्पित है। सरकार ने गोवर्धन पूजा मनाने का भी फैसला किया है।

एनआईए ने भोपाल और राजस्थान में आतंकी साजिश के आरोप में की छापेमारी

भोपाल  आतंकी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) और राजस्थान के झालावाड़ में छापा मारा है. एनआईए की टीमों ने तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस जब्त कीं, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. भोपाल में तीन स्थानों पर NIA का छापा एनआईए ने आतंकी साजिश को लेकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन स्थानों पर और राजस्थान के झालवाड़ में दो स्थानों पर छापे मारे हैं. यह कार्रवाई हिज्ब-उत-तहरीरसंगठन से जुड़े लोगों पर लिया गया है. इस दौरान डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए जाने की सूचना है. एनआईए की यह कार्रवाई HUT को लेकर है.  कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी बता दें कि राजधानी भोपाल में कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े HUT के सदस्यों के होने की सूचना पर पहले भी जांच एजेंसियां इन पर कार्रवाई कर चुकी हैं. इस दौरान इस संगठन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. ये लोग भोपाल में युवाओं का ब्रैनवॉश करते हुए पकड़े गए थे. इन आतंकियों के तार बांग्लादेश से जुड़े हुए मिले थे. एक मामले का हिस्सा थी छापामारी जांच एजेंसी द्वारा जारी बयान के अनुसार, तलाशी एनआईए द्वारा दर्ज किए गए एक मामले का हिस्सा थी, जो भारत में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे विभिन्न आतंकवादी और कट्टरपंथी नेटवर्क और संगठनों को नष्ट करने के प्रयासों का हिस्सा था। ये कमजोर मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने की एचयूटी की साजिश से संबंधित है। फॉरेंसिक लेब जाएगी डिजिटल डिवाइस इसमें कहा गया है कि, युवाओं को भारत की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून द्वारा शासित एक इस्लामिक राज्य स्थापित करने के लिए हिंसा फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।’ बयान में ये भी कहा गया कि, एनआईए की टीमों ने तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस जब्त की, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की दस्सावेजी कार्रवाई की जा रही है। पहले भी हो चुका है एक्शन ये कोई पहली बार नहीं, बल्कि पहले भी कट्टरपंथी संगठनों द्वारा यहां छापामारी कर कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। ये लोग भोपाल में युवाओं का ब्रैनवॉश करते हुए पकड़े गए थे। पहले हुई गिरफ्तारियों में आतंकियों के तार बांग्लादेश से जुड़े हुए मिले थे। हिज्ब-उत-तहरीर के बारे में जानें हिज्ब-उत-तहरीर एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1953 में यरुशलम में हुई थी। इसका मकसद वैश्विक इस्लामी खलीफा (इस्लामिक स्टेट) की स्थापना करना है, जो उनके विचार में मुस्लिम दुनिया पर शरिया कानून लागू करेगा। संगठन का मुख्यालय मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय है। भारत में संगठन की गतिविधियां भारत में हाल के वर्षों में हिज्ब-उत-तहरीर की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है। मोदी सरकार ने इस संगठन को एक ‘खतरा’ मानते हुए इस संगठन को प्रतिबंधित किया है। सरकारी अधिकारियों की मानें तो हिज्ब-उत-तहरीर भारत में इस्लामिक स्टेट की स्थापना की दिशा में काम कर रहा है और यहां के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने में जुटा है। प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा इस संगठन की विचारधारा इस्लामिक कट्टरता पर आधारित है। ये लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को स्वीकार नहीं करता और एक एकीकृत इस्लामिक राज्य की स्थापना पर जोर देता है। संगठन का दावा है कि वह गैर-हिंसात्मक तरीके से काम करता है, लेकिन इसके समर्थक कई बार सरकार विरोधी और अशांत गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। HuT को आतंकवादी संगठन घोषित कर लगाया गया प्रतिबंध दरअसल, साल 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 1953 में यरूशलम में बने वैश्विक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर (HuT) को आतंकवादी संगठन घोषित कर इसके उपर प्रतिबंध लगा दिया था. यह संगठन देश में शरिया कानून लागू करने की साजिश रच रहा था.  सरकार का कहना था कि यह संगठन आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है, जो की देश के भोले-भाले नागरिकों को जिहाद की आड़ लेकर उन्हें बैन आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल करने के लिए उकसाता है.

पचमढ़ी अभ्यारण्य का नया नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर, मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय

New name of Pachmarhi Sanctuary after Raja Bhabhut Singh, many important decisions in Mohan government’s cabinet meeting मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को पचमढ़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। अब पचमढ़ी वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर होगा। यह फैसला राजा भभूत सिंह की वीरता और जनजातीय समाज के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया। बैठक की शुरुआत पचमढ़ी के राजभवन में वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि राजा भभूत सिंह की जन्म और कर्मभूमि पर यह विशेष बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि राजा भभूत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया और उन्हें नर्मदा अंचल का शिवाजी माना जाता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि कैबिनेट ने राजस्व विभाग के बिल को स्वीकृति दी है। इसमें प्रमुख राजस्व आयुक्त और अभिलेख आयुक्त के पदों को मिलाकर नया पद “कमिश्नर लैंड रिसोर्स एंड मैनेजमेंट” बनाया गया है। अब लोगों को सीधे और पारदर्शी सुविधा मिले, इसके लिए आईटी का प्रवेश राजस्व विभाग में जल्द हो। अब तहसीलदार को दो श्रेणी में बांटा जाएगा। राजस्व का न्यायालय देखने वाले न्यायालय देखेंगे और जो लॉ एंड ऑर्डर देखेंगे वो लॉ एंड ऑर्डर का काम ही देखेंगे। उन्होंने कहा कि आईटी के चलते अब विभाग के 500 पदों को समाप्त कर 1200 नए पद सृजित किए जाएंगे। इन नए पदों में सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित पदों को प्राथमिकता दी जाएगी। विजयवर्गीय ने कहा कि यह तेज गति से राजस्व को चलाने वाला देश का पहला राज्य मध्य प्रदेश होगा। इसके अलावा बैठक में श्रम विभाग के संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें ठेका श्रम विनियम उत्पादन अधिनियम 1970 में 20 ठेका श्रमिक को 50 तक बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। साथ ही कारखाना अधिनियम 1948 में 10 श्रमिक के स्थान पर 20 श्रमिक बिना हाथ से काम करने वाले यानी मशीन पर काम करने और हाथ से काम करने वालों की संख्या 20 से 40 की गई है। इन परिवर्तन से औद्योगिकरण में श्रमिकों के अधिकारों का संरक्षण करते हुए लेवर एक्ट में संशोधन किया है। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में रात में काम करने की अनुमति देने हेतु श्रम कानूनों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। साथ ही, ठेका श्रमिकों से जुड़े नियमों को भी संशोधित किया जाएगा ताकि शोषण से बचाव हो सके। कैबिनेट ने इंदौर स्थित आईआईटी में “एग्रो आईआईटी हब” स्थापित किया जाएगा। यह हब कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। इसके लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें अच्छे बीज हो, अच्छी खेती और उत्पादन बढ़े इसको लेकर काम होगा। ताकि खेती लाभ का धंधा बनें। विजय शाह तीसरी बार कैबिनेट से नदारदजनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए। यह लगातार तीसरी बार है जब वे बैठक से अनुपस्थित रहे। कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए बयान को लेकर चल रही जांच के बीच उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

Rahul Gandhi’s strong message to Congress leaders in Bhopal भोपाल | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत करते हुए पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया: गुटबाजी अब और नहीं चलेगी, सभी को मिलकर संगठन को मजबूत करना होगा। पार्टी संगठन को मिशन 2028 के तहत नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश के तहत राहुल गांधी ने एक ही दिन में पांच अहम बैठकें कीं। उन्होंने सभी नेताओं से साफ कहा, कोई भी फैसला ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। आप मिलकर निर्णय लें, और अगर कोई बदलाव चाहिए, तो बताइए – मैं करूंगा। लेकिन पहले एकजुट हो जाइए। संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश राहुल गांधी ने नेताओं को याद दिलाया कि पिछले बीस सालों में कांग्रेस का संगठन मध्य प्रदेश में कमजोर हुआ है और अब समय है इसे फिर से खड़ा करने का। उन्होंने संगठन को मजबूत, पारदर्शी और जनसरोकार से जुड़ा बनाने पर जोर दिया। कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ का लक्ष्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय और जिला स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करना है। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जाएगी और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे, न कि ऊपर से थोपे जाएंगे।

स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र – अहिल्या वाहिनी महिला बाइक रैली का भव्य आयोजन

Self-reliant women, strong nation – Ahilya Vahini women bike rally organized grandly भोपाल । लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के पावन अवसर पर ‘स्वावलंबी महिला, सशक्त राष्ट्र’ की संकल्पना को साकार करते हुए भोपाल स्थित शौर्य स्मारक से अहिल्या वाहिनी महिला बाइक रैली का भव्य शुभारंभ हुआ। इस जनकल्याणी पर्व के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण एवं उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से आयोजित इस रैली को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आयोजन पुलिस विभाग एवं खेल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस ऑर्केस्ट्रा ने देशभक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो उठा। इस अवसर पर सांसद बीडी शर्मा, खेल एवं युवा कल्यारण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, महा‍पौर श्रीमती मालती राय, डीजीपी कैलाश मकवाणा, अपर मुख्यि सचिव गृह जे.एन कंसोटिया, विशेष पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्ताव, संचालक खेल एवं युवा कल्याण राकेश गुप्ता, विधायक भगवान दास सबनानी सहित प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, महिला पुलिसकर्मी, स्कूली छात्राएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। इच्छाशक्ति और सेवा भाव से रचा जा सकता है सशक्तह राष्ट्र – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में लोकमाता अहिल्याबाई की प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक समर्पण और उनके द्वारा स्थापित सुशासन की प्रेरणादायी परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई एक आदर्श बहू, आदर्श मां, आदर्श पत्नी और महान शासिका थीं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुखों को शक्ति में बदलते हुए नारी सशक्तिकरण, महिला शिक्षा, धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और जनकल्याण के अनेक कार्य किए। उन्होंसने कहा कि इच्छाशक्ति और सेवा भाव से ही सशक्तज राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाइक रैली के माध्यम से हमारी बहनें आज भोपाल की सड़कों पर चल रही हैं, यह हमारी संस्कृति, परंपरा और नारी सम्मान का प्रतीक है। देवी अहिल्या बाई की जीवनगाथा नारीशक्ति के लिए प्रेरणा स्त्रोत – डीजीपी कैलाश मकवाणापुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि देवी अहिल्या बाई की जीवनगाथा नारीशक्ति के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने कहा कि “स्वयं के आत्मबल और दृढ़ इच्छा शक्ति से जीवन में कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है। देवी अहिल्या का जीवन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सामाजिक न्याय और महिला उत्थान की नींव रखी।उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में इस सप्ताह विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण को लेकर पुलिस विभाग निरंतर प्रयासरत है, जिसमें सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण सहित अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने उपस्थित छात्राओं से भी सोशल मीडिया के भ्रम से बचकर आत्मरक्षा व आत्मनिर्भरता की दिशा में सजग रहने की अपील की।विशेष पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचार श्रीवास्तमव ने कहा कि हमारे युवा वर्ग, हमारी बेटियों और महिलाओं में जो उत्साह और ऊर्जा दिखाई दे रही है, वह प्रेरणादायक है। यह भले ही एक प्रतीकात्मक प्रयास हो, लेकिन यह स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाएं और बच्चियां भी मोटर बाइक चला सकती हैं। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त पहल है, जो दर्शाती है कि मध्यप्रदेश किसी भी शासन से इस दिशा में पीछे नहीं है।इस कार्यक्रम में सृजन कार्यक्रम के 500 बालक/बालिका भी शामिल हुए। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में बाल संरक्षण, आत्मरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में संचालित सृजन कार्यक्रम ने एक नई मिसाल कायम की है। सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरी क्षेत्र के झुग्गी झोपड़ियां एवं बस्तियों में निवासरत किशोर बालक-बालिकाओं हेतु सृजन कैंप आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें गुड टच-बैड टच, महिलाओं पर होने वाले घरेलू एवं यौन हिंसा की रोकथाम, बाल अधिकारों, आत्मरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जा रही है। सृजन कार्यक्रम न केवल बच्चों को आत्मरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बना रहा है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य को नई दिशा भी दे रहा है। कार्यक्रम में भोपाल की संस्थाएं जैसे आरंभ सामाजिक संस्था मुस्कान, आरंभ, उदय संस्था मीत आदि संस्था शामिल हुई। जो लगातार पुलिस के साथ मिलकर थाना स्तर पर बच्चों को एकत्रित करके इस कार्यक्रम को सफल बना रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने किया आईएफएस को कमजोर करने वाले मप्र सरकार के आदेश को किया खारिज

Supreme Court rejects MP government’s order weakening IFS भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को मप्र सरकार द्वारा 29 जून, 2024 को जारी किए गए एक विवादास्पद आदेश को खारिज कर दिया। इस आदेश में कहा गया था कि गैर-वन अधिकारी – विशेष रूप से कलेक्टर और संभागीय आयुक्त – प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों की कार्य-निष्पादन मूल्यांकन प्रक्रिया में भाग लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के एपीएआर संशोधन प्रक्रिया के आदेश को अनुचित ठहराते हुए वर्ष 2002 में पूर्ववर्ती आदेश को यथावत रखा। यानि अब डीएफओ और एपीसीसीएफ के एपीएआर में कलेक्टर कमिश्नर और प्रमुख सचिव टिप्पणी नहीं लिखेंगे। उच्चतम न्यायालय के आदेश से आईएफएस अफसर की जहां जीत हुई है वही प्रदेश के नौकरशाही खासकर एसीएस अशोक वर्णवाल की किरकिरी हुई है।पर्यावरण अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल और अन्य द्वारा दायर याचिका के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने माननीय न्यायमूर्ति मसीह के साथ मिलकर यह फैसला सुनाया। बुधवार को सुप्रीम न्यायालय ने प्रशासनिक औचित्य और पारिस्थितिकी संवेदनशीलता के सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए आदेश को निर्णायक रूप से रद्द कर दिया। पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि विवादित सरकारी आदेश प्रकृति में अवमाननापूर्ण है, क्योंकि यह सरकारी आदेश इस न्यायालय के दिनांक 22 सितम्बर 2000 और 19 अप्रैल 2024 के पूर्वोक्त आदेशों का उल्लंघन करता है और इसे इस न्यायालय से स्पष्टीकरण/संशोधन मांगे बिना ही जारी किया गया है। हम ऐसे सरकारी आदेश जारी करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू कर सकते थे। हालांकि, हम ऐसा करने से खुद को रोकते हैं। उक्त सरकारी आदेश इस न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने के कारण रद्द किए जाने योग्य है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। अधिवक्ता बंसल ने आदेश की संवैधानिकता और प्रशासनिक सुदृढ़ता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि इसने भारतीय वन सेवा की संस्थागत अखंडता का उल्लंघन किया है और वन संरक्षण प्रयासों को कमजोर किया है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि महत्वपूर्ण वन और वन्यजीव संरक्षण कार्य का आकलन करने में गैर-वन अधिकारियों को शामिल करना न केवल अनुचित होगा, बल्कि टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ (2000) और संतोष भारती बनाम मध्य प्रदेश राज्य जैसे ऐतिहासिक पर्यावरण मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित कानूनी मिसालों के भी विपरीत होगा। मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य का आदेश भारतीय वन सेवा की स्वायत्तता और तकनीकी अध्यादेश का उल्लंघन करता है और भारत के वन प्रशासन के लिए इसके दूरगामी परिणाम हैं। क्या थी एपीएआर लिखने की नई व्यवस्था? 29 जून 24 को जारी आदेश के तहत राज्य शासन ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एपीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। राज्य शासन के आदेश खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका कर्ता एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने अपने याचिका में कहा है कि 29 जून 24 के अपने आदेश के तहत मध्य प्रदेश राज्य ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) तक के भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए पीएआर चैनल के संबंध में एक नई व्यवस्था शुरू की है। आईएफएस का संरक्षण जरूरी जहां भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों का समग्र काम राजस्व और प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित है और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का काम कानून और व्यवस्था पर केंद्रित है, वहीं भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों का काम प्रकृति में अधिक तकनीकी है। वह पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित हैं। इस अद्वितीय भूमिका के कारण, कई बार भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों को अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जब उनके संरक्षण प्रयास राज्य अधिकारियों द्वारा अपनाए गए विकासात्मक उद्देश्यों से टकराते हैं। ऐसे आईएफएस अफसरों का संरक्षण अधिक जरूरी है। अतः एपीआर लिखने की प्रक्रिया में संशोधन गैर वाजिब है।

श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाएं, सरकार खरीदेगी किसानों से श्रीअन्न : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Increase the production of Shrianna, the government will buy Shrianna from farmers: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रागी, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, मक्का जैसे श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाया जाए और किसानों को श्रीअन्न उत्पादन के लिए प्रोत्साहि त किया जाए। किसानों द्वारा उत्पादित श्रीअन्न अब सरकार खरीदेगी। उन्होंने कहा कि तुअर उत्पादक किसानों को अच्छे किस्म के खाद, बीज और उत्पादन वृद्धि के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाए। इसके लिए किसानों को फसल अनुदान देने और उनकी फसल का बीमा कराने जैसे नवाचार भी किये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव सहकारिता अशोक बर्णवाल, सचिव कृषि एम. सेल्वेन्द्रम सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। कृषि उपज मंडी के अलावा फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी स्थापना के लिए भी करें प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सभी मंडियों में प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी मंडियों का विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से आकस्मिक निरीक्षण करायें। मंडियों की व्यवस्थाओं को और भी बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई जरूरतों के मुताबिक अब अलग-अलग मंडियों की स्थापना पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंडियों का फसलवार मॉडल तैयार करें। कृषि उपज मंडी के अलावा अब फल व सब्जी मंडी, मसाला मंडी या अन्य विशेष पैदावार की मंडी स्थापना के लिए भी प्रयास किए जाएं। इसके लिए रोडमैप तैयार किया जाए और यदि आवश्यकता है तो इसमें प्रायवेट सेक्टर को भी सम्मिलित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडियों में जारी वर्तमान व्यवस्थाओं का समुचित तरीके से किसानों के हित में प्रबंधन किया जाए। मंडी शुल्क की प्राप्त राशि से किसानों की कल्याण गतिविधियों पर फोकस किया जाए। आदर्श बनें प्रदेश की कृषि उपज मंडियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की कृषि उपज मंडियों को आदर्श बनाया जाए। मंडियों में कृषि आधारित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। मंडियों में किसानों को फसल बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंडी में अपनी फसल बेचने आने वाले हर किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले किसी का भी नुकसान न होने पाए। मंडियों को और अधिक आधुनिक बनाया जाए यहां किसानों को उनके उपज में गुणवत्ता संवर्धन के बारे में भी बताया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंडियां अपने विकास कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्थानीय निकायों से नई मंडियों की स्थापना/ फसल भण्डारण क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय करें, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक सुविधाएं मिल सकें। किसानों को मिले प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। प्रदेश के किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों, अच्छा भाव, अनुदान आदि का प्रोत्साहन मिले। उन्होंने कहा कि श्रीअन्न रागी, कोदो-कुटकी, मक्का, ज्वार, बाजरा की फसलों को प्रोत्साहन दिया जाए। इन फसलों के उत्पादक क्षेत्र को अच्छी पैदावार करने के लिए प्रोत्साहन मिले। आवश्यकता अनुसार अनुदान की राशि भी बढ़ाई जाए। ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग को करें हतोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीष्मकालीन मूंग में खरपतवारनाशकों के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए खरपतवारनाशकों को हतोत्साहित करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिले। स्वाभाविक फसलों की पैदावार पर विशेष जोर दिया जाए। कृषि उद्योग समागम के अनुभवों से आगे बढ़ें, किसानों को मिले बेहतर परिणाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर संभाग में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में कृषि आधारित उद्योगों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में मंदसौर जिले के सीतापुर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को कृषि के आधुनिक यंत्रों और तकनीक से अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीतामऊ में हुए कृषि उद्योग समागम के अनुभवों को सामने रखें और इन अनुभवों के आधार पर आगे होने वाले कृषि उद्योग समागमों की तैयारी करें, जिससे किसानों को इन समागमों से अधिक और बेहतर परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतों में नरवाई जलाने से रोकने के प्रयास किए जाएं। किसानों को हैप्पी सीडर कृषि यंत्र का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने कृषि यंत्रों को प्रोत्साहन और हर ग्राम पंचायत में हैप्पी सीडर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। तीन फसलों को जल्द ही मिलेगा जीआई टैग बैठक में बताया गया कि राज्य शासन की प्रगतिशीलता से प्रदेश में उत्पादित होने वाली 3 फसलों को बहुत जल्द जीआई-टैग मिल जाएगा। सचिव कृषि ने बताया कि डिंडोरी जिले की नागदमन मकुटकी, सिताही कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल को जीआई टैग परीक्षण के लिए भेजा गया है, उम्मीद है कि जल्द ही इन फसलों को जीआई टैग प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू करने के बाद प्रदेश में बीते एक अप्रैल 2025 से प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना भी लागू कर दी गई है। सभी मंडियों में अब डिजीटल तरीके से रिकार्ड कीपिंग की जा रही है। 26,27 एवं 28 मई को नरसिंहपुर में होगा कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन बैठक में सचिव कृषि ने जानकारी दी कि आगामी 26, 27 एवं 28 मई को जिला मुख्यालय नरसिंहपुर में कृषि आधारित उद्योगों का सम्मेलन सह विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। आयोजन में कृषि आधारित उद्योगों के बारे में जानकारी के अलावा दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन, शाक-सब्जी उत्पादन, श्रीअन्न उत्पादन, उद्यानिकी, बागवानी, उन्नति किस्म के बीज, खाद, उर्वरक की जानकारी सहित उन्नत कृषि उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन दिन अलग-अलग गतिविधियां होंगी। इस दौरान उन्नत कृषि उपकरणों के साथ किसानों से आधुनिक कृषि उपकरणों की बुकिंग भी कराई जाएगी। कृषि के क्षेत्र में नए र्स्टाट-अप्स के बारे में जानकारी भी दी जाएगी। उन्होंने बताया … Read more

भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन व राजगढ़ शामिल, बनेगी ग्रेटर केपिटल सिटी

भोपाल  भोपाल को ग्रेटर केपिटल की तर्ज पर विकसित करने के लिए भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region)का नोडल एजेंसी बनाया है। इंदौर में भी आइडीए का यह जिमा सौंपा गया है। भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन व राजगढ़ शामिल हैं। प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं विकास संजय शुक्ला के अनुसार बीडीए कंसलटेंट तय कर आगामी प्लानिंग बनाएगा। यह उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी।भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ को मिलाकर मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत अगले 14 महीने में पांचों जिलों का सर्वे करने के साथ रीजनल डेवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। इस प्लान के आधार पर भोपाल को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाया जाना है। बुधवार को संभागायुक्त संजीव सिंह के कार्यालय में पांचों जिलों के कलेक्टर्स की मौजूदगी में बीडीए के सीईओ श्यामवीर सिंह ने प्रजेंटेशन दिया। इसमें डीपीआर को लेकर बात रखी गई। आठ हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कवर होगा संभागायुक्त ने बताया कि पांच जिलों के आठ हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा और इसमें पांच जिले शामिल होंगे, जिसमें भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ शामिल किया गया है। इन जिलों को जोड़ने से महानगर की आबादी 35 लाख हो जाएगी। चार स्टेज में काम किया जाएगा। पहले चरण में टीम का गठन, सर्वे, बैठकें आयोजित कर अमलीजामा पहनाना, वर्कप्लान फाइनल करना, सभी विभागों का सर्वे अपने अपने एरिया में करना और विधानसभावार 18 विभागों का डेटा जुटाने का काम किया जाएगा, जबकि आखिरी स्टेज में इंजीनियरिंग, लागत अनुमान और वर्कप्लान की डीपीआर तैयार की जाएगी। दो जून को डीपीआर बनाने के लिए टेंडर निकाला जाएगा। इसके आधार पर टैंडर लेने वाली कंपनी को डीपीआर बनाने का काम सौंपा जाएगा। इस डीपीआर के लिए 18 विभागों से डेटा मांगा गया है। ये तहसील होंगी शामिल     भोपाल जिला : हुजूर, बैरसिया, कोलार     विदिशा जिला : विदिशा शहर, ग्यारसपुर, गुलाबगंज     रायसेन जिला : रायसेन, औबेदुल्लागंज, गौहरगंज     सीहोर जिला : सीहोर शहर, आष्टा, इच्छावर, श्यामपुर, जावर     राजगढ़ जिला : राजगढ़, नरसिंहगढ़, पचोर ये भी होंगे काम     पांचों जिलों के गांव और शहरों को एक दूसरे से जोड़ा जाएगा     सड़कों को एक दूसरे से जोड़कर आवागमन आसान किया जाएगा     इन शहरों शुरू होगा उद्योगों का विकास     इन जिलों के पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा     सैटेलाइट से गांवों को चिह्नित किया जाएगा     कचरा डिस्पोजल और सीवेज सिस्टम भी डेवलप किया जाएगा ऐसे होगा काम ● सीहोर- भोपाल की प्लानिंग कर तालाब व कैचमेंट संरक्षण का काम होगा। ● मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र को भोपाल से जोडकऱ काम किया जाएगा। ● अन्य जिलों में स्थित भोपाल के पास की वैश्विक धरोहरें सांची, भीमबैठका और अन्य पर भोपाल से काम तय हो जाएगा। ● मेट्रो का नेटवर्क भी पास के क्षेत्रों तक बढ़ाने की राह खुलेगी। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। इतना ही नहीं, रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इस तरह होगा विकास का खाका क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजना ग्रोथ सेंटर को चिन्हित करना सेटेलाइट टाउन के लिए क्षेत्र चिन्हित करना टूरिस्ट सेंटर व सर्किट भी तय होगा पर्यावरणीय विकास के लिए पूरा मैनेजमेंट तय करना बेहतर कृषि भूमि का संरक्षण प्लान कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्राथमिक मैप तैयार है। बेहतर प्लान के साथ रीजन तय करेंगे। भोपाल का स्वरूप बदलेगा, विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व प्रशासक बीडीए एमपी में 9 शहरों को मिलाकर बनेंगे 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, 6 संभागों का होगा डेवलपमेंट  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहला मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर-उज्जैन-देवास और धार को मिलाकर और दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भोपाल-सीहोर, रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर विकसित किया जाएगा।  केंद्र के विजन के मुताबिक राज्य के प्रमुख संभाग मुख्यालय ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम और शहडोल को रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार का यह प्रयास अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार और निवेश के नये अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। सुविधाओं में होगा सुधार जानकारी के तहत इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर का 100 प्रतिशत क्षेत्र शामिल किया जाएगा, जबकि उज्जैन का 44 प्रतिशत धार और नागदा का भी कुछ हिस्सा इसमें जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक और शहरी विकास को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार हो और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। 5 जिलों की बदल जाएगी सूरत, जानिए कैसे मेगा रोड प्रोजेक्ट से 80 लाख को होगा फायदा  मध्य प्रदेश के पांच जिलों – भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम की सूरत अब जल्द ही बदलने वाली है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में मेगा रोड प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य इन जिलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। इस परियोजना के तहत, आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लोग 80 लाख की आबादी तक को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इन जिलों को भोपाल से बेहतर कनेक्ट करने के लिए सड़क नेटवर्क पर काम तेज कर दिया गया है और कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अगले एक महीने में इन पांच जिलों से जुड़े रोड नेटवर्क का सर्वे भी पूरा कर लिया जाएगा। सीएम का ग्रेटर राजधानी की बात करना हाल ही में भोपाल में आयोजित आंबेडकर ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वृहद राजधानी के निर्माण की बात की थी। इस घोषणा के बाद से ही इस दिशा में कार्य शुरू हो गया था और अब वृहद राजधानी के रूप में भोपाल और आसपास के इलाकों … Read more

मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे

Transfer policy issued in Madhya Pradesh 4 days after approval: Order after midnight; Those with poor performance will be replaced first 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। भोपाल। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। मंगलवार 29 अप्रैल को मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश जारी नहीं किए थे। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें… विभाग अपने लिए अलग से तबादला नीति बना सकेंगे, लेकिन जीएडी के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा। जीएडी की नीति से हटकर किए जाने वाले तबादलों में मुख्यमंत्री के समन्वय में आदेश प्राप्त करने होंगे। जिला संवर्ग के कर्मचारी का और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर तबादला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जाएगा। पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर जिलों में पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं… जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। काॅलेज से अतिशेष शिक्षकों को हटाएंगे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, उच्च शिक्षा विभाग के जिन संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों में विषयवार तय संख्या से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं, वहां से अतिशेष शिक्षकों को दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा। ऐसा करने से जूनियर टीचर को अतिशेष कर्मचारी होने की स्थिति में सबसे पहले स्थानांतरित किया जाएगा। मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग शिक्षकों और जिनका रिटायरमेंट एक साल के कम है, उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। स्कूल शिक्षा में 6 से 16 मई तक लेंगे आवेदन उधर, स्कूल शिक्षा विभाग की तबादलों के लिए जारी गाइडलाइन में कहा है कि स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 6 मई से 16 मई तक किए जा सकेंगे। इस पर आदेश जनरेट करने का काम 20 मई तक होगा। ऐसे अतिशेष शिक्षक जिन्होंने स्वैच्छिक स्थानांतरण का … Read more

उपभोक्ता की जीत: सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त 1 रुपये जीएसटी वसूलने पर रेस्तरां को ₹6,000 भुगतान का आदेश

Consumers win: Restaurant ordered to pay ₹6,000 for charging extra Rs 1 GST on soft drinks भोपाल, संवाददाता। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अधिवक्ता अर्चित दीक्षित द्वारा अनिरुद्ध वाधवानी Vs हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज केस में जीत हासिल की है। जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक अहम निर्णय में रेस्तरां को आदेश दिया है कि वह सॉफ्ट ड्रिंक पर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी वसूलने के चलते उपभोक्ता को ₹6,000 का भुगतान करे। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने भोपाल में एम. पी. नगर जोन-2 स्थित हॉन्ग कॉन्ग चाइनीज रेस्तरां में भोजन करते समय एक सॉफ्ट ड्रिंक का ऑर्डर दिया था। बिल में उत्पाद के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर अतिरिक्त ₹1 जीएसटी के रूप में वसूला गया। आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद, रेस्तरां प्रबंधन ने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिसके पश्चात द्वारा उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दायर की। सुनवाई के दौरान फोरम ने स्पष्ट किया कि किसी भी उत्पाद के MRP में कर सम्मिलित होते हैं और उपभोक्ता से MRP से अधिक राशि वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए रेस्तरां को आदेशित किया कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक कष्ट और उत्पीड़न के मद में ₹5,000 तथा ₹1,000 मुकदमेबाजी व्यय के रूप में अदा करे।

एमएफपी पार्क में आदिवासी समितियों को दरकिनार कर व्यापारिक सिंडिकेट से हो रही खरीदी

Purchases are being made from commercial syndicates in MFP Park bypassing the tribal committees पूर्व विधायक उरेती ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग भोपाल। मध्यप्रदेश में लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र (एमएफपी पार्क) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आदिवासी हितों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच भाजपा के पूर्व आदिवासी विधायक दुलीचंद उरेती ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय गैर विभागीय जांच की मांग की है। उरेती का आरोप है कि सहकारी संस्थान के नाम पर एमएफपी पार्क व्यापारिक सिंडिकेट को फायदा पहुंचा रहा है, जबकि आदिवासी समितियों और वनधन केंद्रों को खरीदी प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।पूर्व विधायक उरेती ने आरोप लगाया कि एमएफपी पार्क द्वारा रॉ मटेरियल की खरीदी में सहकारी समितियों के बजाय पसंदीदा निजी फर्मों से टेंडर के माध्यम से सामग्री खरीदी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार से भरी हुई है। कई बार टेंडर की शर्तें ऐसी रखी जाती हैं कि केवल बड़ी व्यापारिक कंपनियां ही हिस्सा ले सकें। इस कारण से असली हितग्राही—आदिवासी संग्राहक और समितियां—प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। गूग्गल खरीदी में घोटाले का आरोप उरेती ने हाल ही में गूग्गल खरीदी में हुई अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसमें नियमों को ताक पर रखकर एमओयू के माध्यम से एक निजी व्यापारी से ऊंचे दामों पर खरीदी की गई, जिससे संस्था को लाखों का नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच में एक एसडीओ को बचा लिया गया जबकि एसीएफ की रिपोर्ट में कई वरिष्ठ अधिकारी दोषी पाए गए। आठ वर्षों में 100 करोड़ से अधिक की खरीदी शिकायती पत्र में बताया गया कि बीते आठ वर्षों में एमएफपी पार्क ने करीब 100 करोड़ रुपये की लघु वनोपज खरीदी की है। यह खरीदी बिना संचालक मंडल की स्वीकृति या वनोपज संघ से अनुमति लिए बिना की गई। परफॉर्मेंस गारंटी जैसी शर्तों का उल्लंघन कर फर्मों को लाभ पहुंचाया गया।टेंडर प्रक्रिया आदिवासियों के खिलाफ उरेती ने कहा कि निविदा शर्तों में ऐसा प्रावधान कर दिया गया है कि जिन फर्मों का टर्नओवर एक करोड़ रुपये हो और जिनके पास मान्यता प्राप्त लैब रिपोर्ट हो, वही हिस्सा ले सकती हैं। इससे आदिवासी समितियां और छोटे व्यापारी पूरी तरह से बाहर हो जाते हैं। यहां तक कि प्रदेश में उपलब्ध वनोपज जैसे आंवला, हर्र, बहेड़ा, शहद, महुआ आदि को भी निजी फर्मों से ऊंचे दामों पर खरीदा जा रहा है। गैर विभागीय जांच समिति की मांग पूर्व विधायक उरेती ने मांग की है कि वनोपज खरीदी के लिए जारी मौजूदा टेंडर को तत्काल निरस्त किया जाए और एक निष्पक्ष, गैर विभागीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए। साथ ही विगत दस वर्षों के एमओयू, खरीदी गई सामग्री, संबंधित फर्मों और भुगतान की गहन जांच की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी संग्राहकों, वन समितियों और वनधन केंद्रों के माध्यम से खरीदी सुनिश्चित की जाए।एमएफपी पार्क में हो रही अनियमितताएं एक बार फिर इस सवाल को जन्म देती हैं कि आदिवासी कल्याण के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं का असली लाभ किसे मिल रहा है। यदि आरोप सही हैं, तो यह आदिवासियों के अधिकारों और संसाधनों की खुली लूट है, जिसकी निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है।

BHEL में भीषण आग, एक के बाद एक हो रहे धमाके, कई किलोमीटर दूर दिख से रहा धुआं

Huge fire in BHEL, explosions happening one after another, smoke visible several kilometers away Huge Fire in BHEL : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। शहर के पिपलानी थाना क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तान के 9 रत्नों में से एक भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड ( BHEL ) में गुरुवार की दोपहर भीषण आग लग गई। बताया गया कि आग भेल के 9 नंबर गेट के पास कॉमर्शियल ग्रीन बेल्ट एरिया में लगी थी, जिसपर अब और अपडेट सामने आया है।जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में स्थापित ऑयल की टंकियों में ब्लास्ट हुआ है। आग इतनी भयावह है कि कई किलोमीटर दूर से उसका काला धुआं देखा जा सकता है। आग बुझाने के लिए दमकल की 8 फायर गाडियां और 4 टैंकर मौके पर भेजे जा चुके हैं। अबतक की गई कार्रवाई के अनुसार, तेज गर्मी के चलते आग तेजी से फैली है। आग लगने से बीएचईएल के साथ-साथ आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई है। घटना के बाद एक तरफ तो बीएचईएल का अपना अग्निशमन यंत्र सक्रीय कर आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण दमकल विभाग को सूचना दी गई। जानकारी लगते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गई हैं। फिलहाल, खबर लिखे जाने के दौरान आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है। इधर, भेल परिसर में स्थित जिस कारखाने के नजदीक आग लगी है, विशेष रूप से उसके अधिकारी-कर्मचारियों को परिसर से बाहर सुरक्षित स्थान पर कर दिया गया है, ताकि किसी अप्रीय घटना से बचा जा सके।चुनौती साबित हो रहा आग पर काबू पाना प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आग लगने के कुछ देर में ही धुए का बड़ा गुबार आसमान पर छा गया, जिसने विशेष रूप से स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया। लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई। बेल परिसर के बाहर सड़क पर स्थित कुछ लोग तो एहतियाद के तौर पर अपनी दुकानें भी बंद कर चुके हैं, ताकि समय रहते किसी अनहोनी से बच सकें। फिलहाल, आग पर काबू पाने की कोशिश जारी है। दमकल दल की मानें तो गर्म हवाओं के कारण आग पर काबू पाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। प्रशासन ने दिए जांच के आदेशफिलहाल, आग लगने के कारणों का अबतक कोई पता नहीं चल सका है। हालांकि, प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट से आगजनी की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, साथ लोगों से घटनास्थल के आसपास तक न जाने की अपील की है।

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