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ऑफर वाले बयान पर सियासी तकरार, केदार कश्यप बोले— बयानबाजी से नहीं बदलती हकीकत

 रायपुर भूपेश बघेल के बीजेपी में शामिल होने के ऑफर पर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी जरूरत न छत्तीसगढ़ को है, और न ही भाजपा को है. वो सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं. कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने आज अपने विभाग का लेखा-जोखा मीडिया के सामने पेश किया. इस दौरान पत्रकारों के सवालों का दवाब देते हुए कांग्रेस नेताओं के बयानों का जवाब भी दिया. उन्होंने पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के पीडीएस दुकान के खाली होने के आरोप पर कहा कि जिन लोगों ने पूरे प्रदेश को लूटने का काम किया, जिनके ऊपर केस चल रहा हैं, वो बता रहे हैं कि हमारी पीडीएस की दुकानें खाली हो गई हैं. जिन लोगों ने खाली किया आज वे विपक्ष में हैं. वहीं अमरजीत भगत के नक्सली कमांडर हिडमा को सपोर्ट वाले बयान पर कहा मंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस हमेशा नक्सलियों के साथ में रही है. झीरम घाटी के नाम पर ये घड़ियाली आंसू बहाते हैं. इस बात को साबित करता है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हो या यहाँ के लोग हों. ये कहते हैं कि झीरम के सबूत इनके पास है. जब सबूत है तो स्वाभाविक है, आपसी गुटबाजी के कारण झीरम कांड हुआ है. दरअसल, कांग्रेस पार्टी को इस बात का दुख है कि नक्सलवाद खत्म हो रहा है, और कांग्रेस के समर्थक खत्म हो रहे हैं. कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने हमेशा मंचों से कहा है कि वे नक्सलियों के साथ खड़े हैं. वहीं बीजापुर विधायक के सुरक्षा वाले मामले में केदार कश्यप ने कहा कि कहीं किसी को जाने के लिए नहीं रोका जा रहा है. वो बिना सुरक्षा के अंदरूनी क्षेत्र में चले जाते थे. उनको सुरक्षा की क्या आवश्यकता है. वो बिना सुरक्षा और बिना पुलिसकर्मी के नक्सल क्षेत्र में घूमते थे, उन्हें क्या सुरक्षा की आवश्यकता है. अब बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा है. असम में कांग्रेस नेता चुनाव में गए हैं, क्या बीजेपी नेता भी जाएंगे? इस पर केदार कश्यप ने स्पष्ट किया कि असम में हमारे नेता प्रचार करने जा रहे है. फिर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में लोग किसलिए जा रहे, ये बाद में पता चलेगा. पिछले बार तो यहां लाकर बकरा और सूअर खिलाए थे. इस बात क्या खिलाएंगे ये देखना होगा. वहीं बस्तर में स्वास्थ्य की स्थिति पर मंत्री कश्यप ने कहा कि हमारी सरकार में 3 मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई. स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसी स्थिति निर्मित ना हो, इसे लेकर हमारी सरकार काम कर रही है. चिकित्सा के क्षेत्र में और भी विस्तार हो रहा है. अंदुरूनी क्षेत्र में भी चिकित्सा का जाल बिछ रहा है. वहीं युवा कांग्रेस की महापंचायत का केदार कश्यप ने स्वागत करते हुए कहा कि उम्मीद है कि वो वास्तविक लोगों को लेकर आएंगे, मरे हुए लोगों को न लाए. 2 सालों में परिवहन विभाग के कार्यों को लेकर कहा कि सीएम ग्रामीण बस योजना से लोगों को लाभ मिला. 425 नए गांव तक पहली बार बस पहुंचे. सड़क दुर्घटना में रायपुर जिले को सड़क दुर्घटना में शून्य मृत्यु जिले के रूप में शामिल किया जा रहा है. इलेक्ट्रिक वाहन नीति में वाहन मूल्य का 10% या अधिकतम 1 लाख रुपए छूट दी जा रही है. आटो एक्सपो के माध्यम से 133.4 करोड़ के RTO टैक्स का छूट मिला. बस संगवारी एप की सुविधा लोगों को दी गई है. वाहन 4.0 और सारथी 4.0 ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से हो रहे है. आरसी/डीएल की घर पहुंच सेवा के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीयन प्रमाण पत्र को डाक के माध्यम से भेजा जा रहा है. ई-चालान के माध्यम से अनफिट वाहनों पर कार्रवाई हो रही है. वर्तमान में 20 टोल नाकों से गुजरने वाले बिना फिटनेस और टैक्स के वाहनों पर ई-चालान की कार्रवाई की जा रही है. सड़क दुर्घटना में घायलों को कैशलेश उपचार की व्यवस्था की जा रही है. वन विभाग की दो साल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि 355 हाथियों का विचरण हो रहा है. हाथी-मानव द्वंद कम हो, इस पर काम हो रहा है. प्रभावित इलाकों में एलिफेंट ट्रेकिंग मेसेज के माध्यम से जानकारी दी जाती है. दो सालों में छत्तीसगढ़ ने नया कीर्तिमान रचा है. सघन वनों में 70% घनत्व बढ़ा है. 7 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण का कार्य हुआ है. भूमि स्वामी को वृक्षारोपण के लिए योजना बनाकर प्रेरित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले देवगुड़ियों का निर्माण कराया गया. 463 पदों में भर्ती की गई, 1500 में और भी करना है. वर्तमान में बाघों की संख्या 35 है. बाघों के संरक्षण में काम किया जा रहा है. वन भैंसा, पहाड़ी मैना के संरक्षण में काम किया जा रहा है. वहीं सहकारिता विभाग में किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री के संकल्प से विभाग लोगों के हित में काम कर रहा है. 515 नई पैक्स समितियों का गठन किया गया है. 2739 उपार्जन केंद्रों में 25.49 किसानों से 139 मिट्रिक टन धान खरीदी हुई है, 1.45 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड दिया गया. उच्च शक्कर कारखाने लगाए गए है.

भूपेश ने बताया- मोदी और शाह ने BJP में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, मना करने पर दबाव का सामना करना पड़ा

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में कहा कि मुझे भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। जब कमिटमेंट नहीं दिया तो मेरे यहां लगातार छापे पड़ने लगे। भूपेश बघेल ने कहा कि एक-दो बार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मिलने के लिए बुलाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। शुरुआत में समझ नहीं आया कि किस मकसद से बुलाया जा रहा है। बाद में एहसास हुआ कि जब-जब वे इन मुलाकातों से लौटते थे, उसके कुछ दिनों के भीतर छापा पड़ जाता था। भूपेश बोले- मदद का दिया ऑफर भूपेश बघेल ने कहा कि मुलाकात के दौरान पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं, कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह मदद की जा सकती है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और विपक्ष का धर्म सरकार की आलोचना करना होता है, जिसे वे निभाते रहेंगे। इसके बावजूद मदद की बात सुनकर उन्हें हैरानी होती थी। 8-10 दिन अंदर फिर से पड़ता था छापा पूर्व सीएम ने कहा कि वे अपनी बात कहकर लौट आते थे, लेकिन करीब आठ-दस दिन के भीतर फिर से छापा पड़ जाता था। एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर कहा कि आपने तो मदद की बात कही थी, लेकिन मेरे यहां तो छापा पड़ गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करेंगे। ज्ञात हो कि कई बड़े मामलों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता कपिल सिब्बल यू ट्यूब में दिल से विद कपिल सिब्बल नाम का एक शो संचालित करते हैं. अपने इस शो में उन्होंने देश की कई नामचीन हस्तियों से बातचीत की है. अभी चंद दिनों पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी अपने शो में आमंत्रित किया था. इस शो में जब कपिल सिब्बल ने बघेल से पूछा कि क्या मोदी और शाह ने कभी भाजपा में शामिल होने के लिए कोई दबाव डाला था तो जवाब में बघेल ने कहा कि एक-दो बार मुझे गृहमंत्री अमित शाह ने बुलाया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आमंत्रित किया था. जब दोनों नेताओं ने मुझे बुलाया तो मैं यह समझ नहीं पाया कि मुझे किसलिए बुलाया गया है, लेकिन उनका इशारा बाद में समझ में आया. जब मैं उनसे मिलकर आता था तो उसके बाद और ज्यादा छापा पड़ता था…फिर वे पूछते थे कि आपको कैसे मदद करें. उनकी लाइन यहीं होती थी कि आपके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं ? कौन-कौन से अधिकारी आपके विश्वसनीय है. बघेल ने कपिल सिब्बल को बताया कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें इस बात का सुखद आश्चर्य भी होता था कि विपक्ष में होने के बावजूद दोनों नेता उनकी मदद के लिए तत्पर है. इंटरव्यूह में बघेल यह कहते हुए भी दिखाई देते है कि- जब-जब मैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिलता था तो यह जरूर कहता था कि मैं विपक्ष में हूं और विपक्ष का धर्म है कि आपकी आलोचना करुं…बावजूद इसके आप सहयोग करना चाहते हैं. बस…इतना कहकर जाता था और आठवें दिन फिर से  छापा पड़ जाता था. एक बार मैंने प्रधानमंत्री को फोन पर कहा कि आपने तो मदद करने को कहा था, लेकिन इधर तो रेड डलवा दी आपने. प्रधानमंत्री का जवाब था-मैं अधिकारियों से बात करता हूं. बघेल के इस बयान के बाद राजनीति के गलियारों में हलचल मची हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि देश के कई अन्य नेताओं की तरह बघेल भी भाजपा की वाशिंग मशीन में प्रवेश लेते तो उन पर और उनके पुत्र चैतन्य बघेल पर जबरिया लादे गए प्रकरणों से उन्हें निजात तो मिल जाती, लेकिन उनकी इमेज संकट के समय भी कांग्रेस का साथ न छोड़ने वाले एक प्रतिबद्ध कांग्रेसी नेता के तौर पर बनी हुई है तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बड़ा नुकसान झेलना भी पड़ता. भाजपा में आने का इशारा था- भूपेश भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत में समझ नहीं आया कि भाजपा में शामिल होने के लिए बुलाया जा रहा है। कभी सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा गया, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि वे कोई कमिटमेंट देकर नहीं लौटते थे, इसलिए हर चार-पांच दिन में उनके यहां छापे पड़ते थे। भूपेश बोले- मदद का दिया ऑफर भूपेश बघेल ने कहा कि मुलाकात के दौरान पूछा जाता था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से केस चल रहे हैं, कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह मदद की जा सकती है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि वे विपक्ष में हैं और विपक्ष का धर्म सरकार की आलोचना करना होता है, जिसे वे निभाते रहेंगे। इसके बावजूद मदद की बात सुनकर उन्हें हैरानी होती थी। 8-10 दिन के अंदर फिर से पड़ता था छापा पूर्व सीएम ने कहा कि वे अपनी बात कहकर लौट आते थे, लेकिन करीब आठ-दस दिन के भीतर फिर से छापा पड़ जाता था। एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर कहा कि आपने तो मदद की बात कही थी, लेकिन मेरे यहां तो छापा पड़ गया। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से बात करेंगे। भाजपा में आने का इशारा था- भूपेश भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत में समझ नहीं आया कि भाजपा में शामिल होने के लिए बुलाया जा रहा है। कभी सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा गया, लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि वे कोई कमिटमेंट देकर नहीं लौटते थे, इसलिए हर चार-पांच दिन में उनके यहां छापे पड़ते थे। 18 जुलाई 2025 को ED ने किया था चैतन्य को गिरफ्तार दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई 2025 को शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था, हालांकि अब उन्हें जमानत मिल गई है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया। साथ ही 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई। हालांकि, शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चैतन्य को 2 जनवरी हाईकोर्ट से जमानत … Read more

कांग्रेस नेताओं पर भारी मामला: 500 करोड़ का मानहानि केस, CM हिमंता ने सवाल उठाए—सबूत दिखाइए

रायपुर   असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के प्रमुख नेताओं पर 500 करोड़ रुपये मानहानि का मुकदमा दायर कर राजनीतिक हलचल मचा दी है. सीएम सरमा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह और असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत अन्य नेताओं पर झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने का आरोप लगाया है. यह मुकदमा गुवाहाटी की अदालत में दाखिल किया गया. इस बात से शुरू हुआ विवाद विवाद की जड़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस है. उसमें असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया था कि पार्टी को पता चला कि राज्य भर में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की ओर से लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा किया गया है. इसके अलावा, AI जनित वीडियो को लेकर भी तनाव बढ़ा है, जिसमें कथित तौर पर सीएम सरमा के खिलाफ गलत सामग्री प्रसारित की गई. वहीं, कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए सरमा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्हें भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जन के आरोप में घेरा गया. 9 फरवरी को शुरू हुई कानूनी कार्रवाई हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, 9 फरवरी 2026 को भूपेश बघेल सहित कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि, राजनीतिक असहमति अलग बात है, लेकिन सार्वजनिक मंच से निराधार आरोप लगाना कानून के दायरे में आता है। सीएम सरमा का आरोप है कि, कांग्रेस नेताओं, खासकर भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उनके खिलाफ ऐसे बयान दिए जो पूरी तरह झूठे और तथ्यहीन हैं। इसी को लेकर उन्होंने सीधे कोर्ट का रुख किया। सरमा ने कांग्रेस नेताओं दावों को पूरी तरह से “झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक” करार दिया है। सीएम ने एक्स पर किया पोस्ट सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा, “आरोप लगाकर भागने वाली राजनीति का दौर खत्म हो चुका है. गांधी परिवार की इस साजिश को अदालत में देखूंगा.” उन्होंने 9 फरवरी को सिविल और क्रिमिनल मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की घोषणा की थी, जो अब अमल में आ गई. भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. गांधी परिवार पर भी हमला मुकदमे के पहले सीएम कह चुके थे कि वह कांग्रेस नेताओं के आरोपों को लेकर लीगल एक्शन लेंगे. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस लीडरशिप पर मिलकर बदनामी करने और पॉलिटिकल ड्रामा करने का भी आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि यह हमला गांधी परिवार के कहने पर किया गया था. उन्होंने कहा कि विपक्ष को पर्सनल बुराई के बजाय मुद्दों और गवर्नेंस पर फोकस करना चाहिए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के बयान बने विवाद की वजह बता दें कि, मामला 4 फरवरी को गुवाहाटी में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता से शुरू हुई। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया था कि पार्टी की आंतरिक जांच में यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने राज्य भर में लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है। सरमा ने इन दावों को पूरी तरह से “झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक” करार दिया है। इससे पहले सरमा ने कहा था कि वे गांधी परिवार के गुलामों की ओर से किए जा रहे प्रचार, बदनाम करने की कोशिश या राजनीतिक नाटक से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हिट एंड रन राजनीति का दौर खत्म हो चुका है। अगर उनके पास जरा भी साहस या सबूत है तो अदालत में पेश करें। इसी बीच असम की राजनीति में हिमंता सरमा और गौरव गोगोई के बीच टकराव और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में आरोप लगाया था कि गौरव गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख से गहरे संबंध हैं और इससे संवेदनशील सूचनाएं पाकिस्तान तक पहुंचने की आशंका जताई थी। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के पास अपने दावों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है और उन्होंने मानसिक संतुलन खो दिया है।

केंद्रीय बजट से निराश भूपेश बघेल, कहा—नीतियों का असर बाजार पर साफ दिखा

रायपुर केंद्रीय बजट पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया भी आ गई है. उन्होंने इस बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि देश में इस बजट से किसी को कुछ नहीं मिला है, और छत्तीसगढ़ को अडानी के लिए छोड़ दिया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि केंद्रीय बजट का प्रतिगामी असर दिखाई दे रहा है. न कृषि, ना उद्योग, न रोजगार और न ही मजदूरों के लिए इसमें कुछ है. यही वजह है कि शेयर मार्केट के साथ सब कुछ भी धराशाई हो गया है. मिडिल क्लास के लिए भी कुछ नहीं है. इनकम टैक्स के स्लैब में बदलाव नहीं किया गया है. शराब महंगी हो गई है और मछली सस्ता हो गया है, बस यही बजट में दिखा है. शराब की दुकानें बढ़ा दी, ऊपर से शराब महंगी हो गई. इसका मतलब अब अवैध शराब और बढ़ेगी. प्रदेश में डबल इंजन की सरकार धान खरीदी नहीं कर पाई. 31 तारीख निकल गई, किसान सड़कों पर थे. वहीं प्रदेश में धान खरीदी पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेता अपना बचत धान नहीं बेच पाए तो दूसरों का क्या ही होगा. मोदी खुद बोले थे कि ये मोदी की गारंटी है कि 31 सौ क्विंटल में सबका धान खरीद जाएगा, लेकिन किसी का धान बिक नहीं पाया. छोटे किसानों को समर्पण कराया गया, और बड़े किसानों को टोकन नहीं मिला, स्थिति यह है.

महादेव सट्टा एप मामले में CBI ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी बनाया आरोपी, FIR में दर्ज हुआ पूर्व सीएम का नाम

रायपुर केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने महादेव बेटिंग एप केस में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी आरोपी के रूप नामजद किया है. 18 दिसंबर 2024 को सीबीआई द्वारा दर्ज की गई FIR में अब भूपेश बघेल के नाम का भी जिक्र है. इस मामले में  सीबीआई ने भूपेश बघेल समेत कुल 21 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है. पूर्व सीएम भूपेश बघेल समेत 21 के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज किया है FIR रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई ने एफआईआऱ में FIR में महादेव सट्टा एप के संचालक प्रमोटर रवि उप्पल सौरभ चंद्राकर शुभम सोनी और पिंटू चंद्रभूषण वर्मा असीम दास सतीश चंद्राकर नीतीश दीवान अनिल अग्रवाल विकास क्रिया रोहित गुलाटी विशाल आहूजा धीरज अहूजा अनिल अंबानी सुनील दमानी सिपाही भीम सिंह यादव, हरिशंकर ट्रिब्लेवाल, सुरेंद्र बागड़ी सूरज चोखानी पुलिस अधिकारी पूर्व सीएम के OSD और निजी व्यक्ति शामिल हैं. महादेव ऐप से जुड़े धनशोधन मामले की जांच कर रहा है प्रवर्तन निदेशालय गौरतलब है प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) महादेव ऐप से जुड़े धनशोधन मामले की जांच कर रहा है, जिसका खुलासा राज्य में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था. ईडी ने पहले भी राज्य में इस मामले में कई छापे मारे थे और अवैध सट्टेबाजी व गेमिंग एप के दो मुख्य प्रवर्तकों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ अभियोजन शिकायतें (आरोप पत्र) दायर की थीं. क्या है ये एप? महादेव बेटिंग एप ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए बनाया गया था. इस पर यूजर्स पोकर जैसे कार्ड गेम्स और अन्य गेम खेल सकते थे. इस एप के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, जैसे खेलों में सट्टेबाजी भी की जाती थी. इसकी शुरुआत 2019 को  छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले सौरभ चंद्राकर ने की थी. अब तक क्या हुआ? हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने कथित शराब घोटाले के मामले में बघेल के आवास पर छापेमारी की थी. राज्य सरकार ने पिछले साल सीबीआई को कथित महादेव घोटाले से संबंधित विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 70 मामले और राज्य में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) में दर्ज एक मामला सौंप दिया था. 455 करोड़ तक पहुंच गया था महादेव ऐप का मंथली टर्नओवर महादेव बुक ऐप मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल की तरह काम करता था. इसमें क्लाइंट्स को ‘पैनल ओनर्स’ के जरिए जोड़ा जाता था. जो यूजर आईडी बनाकर सट्टेबाजी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते थे. ये पैनल सिस्टम एक तरह की फ्रेंचाइजी की तरह काम करता था. जहां प्रमोटर्स अपने पैनल ओनर्स को 70-80% तक का मुनाफा देते थे. ऐप से जुड़े पैनल ओनर्स व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों से संपर्क करते थे और उन्हें सट्टेबाजी के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराते थे. इस ऐप का मासिक टर्नओवर 455 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. अब तक की जांच में क्या सामने आया? जांच में सामने आया है कि इस अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रमोटर्स ने कई सरकारी अधिकारियों को ‘प्रोटेक्शन मनी’ के रूप में भारी रकम दी थी. सीबीआई ने छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जब्त किए है. जिनमें वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल है. इस मामले की जांच ED के पास भी है. ED के मुताबिक 3 नवंबर 2023 को इसी मामले में एक कोरियर आसिम दास को गिरफ्तार किया गया था और उसके पास से 5.39 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई थी. पूछताछ में उसने बताया था कि ये रकम भूपेश बघेल के लिए थी. जांच में ये भी सामने आया था कि महादेव बुक के प्रमोटरों ने कई सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देकर अपने नेटवर्क को सुरक्षित रखा. सीबीआई अभी भी इस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते है.

भूपेश बघेल की बढ़ सकती हैं परेशानी, सीडी कांड में बरी करने के फैसले को चुनौती

रायपुर पूर्व CM भूपेश बघेल की बढ़ी मुश्किलें. CD कांड में CBI ने पूर्व CM बघेल पर लगाया रिवीजन पिटिशन. मामले में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा, ‘पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ नहीं रही पैदा की जा रही है. 7 साल तक CD कांड का मामला चला फिर प्रकरण खारिज हो गया. सरकार CD कांड मामले को छोड़ नहीं रही है. विपक्ष के नेताओं को बदनाम किया जा रहा है.’ विशेष कोर्ट में मामले की सुनवाई चार अप्रैल को होगी अब इस फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई ने बुधवार को जिला न्यायाधीश के कोर्ट में रिवीजन फाइल की है। जिला जज ने इसे सुनवाई के लिए सीबीआइ के विशेष कोर्ट को भेज दिया है। विशेष कोर्ट में मामले की सुनवाई चार अप्रैल को होगी। यदि विशेष कोर्ट सीबीआइ की रिवीजन फाइल को स्वीकार कर लेता है तो बघेल को कोर्ट में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद इस मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी। बघेल को झूठे मामले में फंसाया गया है- वकील गौरतलब है कि अश्लील सीडी कांड में चार मार्च को भूपेश बघेल, विनोद वर्मा और कैलाश मुरारका सीबीआइ की विशेष अदालत में दूसरी बार पेश हुए थे। भूपेश की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने दलील रखते हुए कहा था कि बघेल को झूठे मामले में फंसाया गया है। भूपेश ने कोई सीडी नहीं बनवाई भूपेश ने कोई सीडी नहीं बनवाई और न ही सीडी बांटी है। उन्होंने किसी तरह का अपराध नहीं किया है। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी धाराओं को हटाते हुए कहा था कि बघेल के खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है। वहीं भारतमाला प्रोजेक्ट को लेकर डिप्टी CM अरुण साव ने कहा कि, कांग्रेस को बताना चाहिए कि, गड़बड़ी किसके कार्यकाल में हुई और कौन- कौन लोग इस गड़बड़ी के जिम्मेदार हैं। भारतमाला प्रोजेक्ट में सरकार ने अफसरों पर कार्रवाई की है। EOW भारतमाला प्रोजेक्ट में गड़बड़ी की जांच करेगी। घोटाले में जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। भूपेश बघेल के लिए सरकार मुश्किलें पैदा कर रही  इस मामले को लेकर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा कि, भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ नहीं रही पैदा की जा रही है। 7 साल पुराना CD कांड का मामला चला और फिर खारिज हो गया। सरकार CD कांड मामले को छोड़ नहीं रही है और विपक्ष के नेताओं को बदनाम किया जा रहा है।

भूपेश बघेल का गढ़ माना जाता है पाटन, बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव हारा दिया, अमलेश्वर में भी कांग्रेस की हार हुई

दुर्ग  छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय चुनावों के रिजल्ट आज घोषित हो रहे हैं। दुर्ग नगर निगम में बीजेपी बड़ी जीत की तरफ आगे बढ़ रही है। वहीं, पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ा झटका लगा है। भूपेश बघेल की नगर पंचायत पाटन में कांग्रेस उम्मीदवार की हार हुई है। भूपेश बघेल, दुर्ग जिले की पाटन विधानसभा सीट से विधायक हैं। ऐसे यहां कांग्रेस की हार के बाद एक बार फिर से संगठन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पाटन नगर पंचायत में भाजपा प्रत्याशी योगेश निक्की भाले ने 601 वोटों से जीत दर्ज की है। कांग्रेस की हार की वजह आपसी गुटबाजी और बागी उम्मीदवारों का चुनाव मैदान में उतरना बताया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अमलेश्वर नगर पंचायत में भी बीजेपी को जीत मिली है। अमलेश्वर नगर पंचायत में पहली बार चुनाव हुए थे। इससे पहले यह ग्राम पंचायत थी। भूपेश बघेल के कार्यकाल में ही अमलेश्वर को नगर पंचायत घोषित किया गया था। भूपेश बघेल को झटका पाटन नगर पंचायत में कांग्रेस की हार पूर्व सीएम भूपेश बघेल के लिए बड़ा झटका है। यहां कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं ने चुनाव प्रचार किया था। पाटन नगर पंचायत में बीजेपी की जीत से कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। यहां जीत का जश्न मनाया जा रहा है। अमलेश्वर में भी बीजेपी जीती अमलेश्वर नगर पंचायत में भी बीजेपी ने जीत दर्ज की है। अमलेश्वर नगर पंचायत भी पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां से बीजेपी उम्मीदवार दयानंद सोनकर 319 मतों से अपना चुनाव जीत गए हैं। वहीं, नगर निगम की बात करें तो बीजेपी सभी 10 नगर निगम में बड़ी बढ़त के साथ आगे चल रह है। महासचिव बने हैं भूपेश बघेल नगरीय निकाय चुनाव के रिजल्ट के एक दिन पहले ही कांग्रेस ने भूपेश बघेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। भूपेश बघेल को कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव घोषित किया गया है। भूपेश बघेल को पंजाब राज्य का प्रभार भी सौंपा गया है।

निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, छत्तीसगढ़-पूर्व सीएम भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार ने छोड़ी पार्टी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार रहे रुचिर गर्ग ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को अपना इस्तीफा भेजा है. उनके इस्तीफे से कांग्रेस में हलचल मच गई है. बता दें कि रुचिर गर्ग ने 2018 में पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में कदम रखा था. राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी. बताया जा रहा है कि रुचिर गर्ग ने अपना इस्तीफा पीसीसी चीफ दीपक बैज को भेज दिया है. हालांकि उनके इस्तीफे की असली वजह अभी साफ नहीं हो पाई है. लेकिन इस इस्तीफे से प्रदेश में सियासी भूचाल आ गया है. बता दें कि  रुचिर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कोर टीम का अहम हिस्सा रहे थे. उन्होंने ने पिछले विधानसभा चुनाव के बाद खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया था. हाल ही में उन्हें दक्षिण विधानसभा चुनाव टीम में शामिल किया गया था, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी निभाने में असमर्थता जताई थी. राहुल गांधी ने दिलाई थी सदस्यता रुचिर गर्ग पत्रकारिता छोड़कर 2018 में राजनीति में आए थे. राहुल गांधी ने उन्हें सदस्यता दिलाई थी. वे भूपेश बघेल की कोर टीम का अहम हिस्सा थे, खास तौर पर मीडिया सलाहकार के तौर पर उनकी भूमिका अहम थी. निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू बता दें कि छत्तीसगढ़ में निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने भी तैयारियां शुरू कर दी. दरअसल, छत्तीसगढ़ के 14 में से 10 नगर निगम में मेयर का कार्यकाल खत्म होने के बाद यहां प्रशासक बैठाए गए हैं. जिनकी कमान अब जिलों के कलेक्टरों के हाथ में होगी. यानि शहर की सरकार कलेक्टर चलाएंगे, वहीं कामकाज देखेंगे और फैसले भी लेंगे. इस दौरान टेंडर और सभी काम जारी रहेंगे. हालांकि प्रदेश नगरीय प्रशासन विभाग की तरफ से निकाय चुनाव की प्रक्रिया भी चल रही है.

‘स्कूल बंद और स्कॉच शुरू, हमने बनाया है-हम ही पिलाएंगे’, छत्तीसगढ़ में ‘मनपसंद’ ऐप पर पूर्व सीएम का निशाना

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शराब उपभोक्ताओं के लिए एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च किए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर हमलावर हैं। राज्य के आबकारी विभाग ने बुधवार को ‘मनपसंद’ नाम से ऐप लॉन्च किया, जिसके जरिए ग्राहक शराब उपलब्धता, दुकानों, ब्रांड और कीमत से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शराब की दुकान में अपनी पसंद का ब्रांड भी मंगवा सकते हैं। इसी मामले को लेकर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकार के इस कदम की जमकर आलोचना की। पूर्व सीएम ने एक्स पर लिखते हुए कहा कि बीजेपी कह रही है कि इससे लोगों को “सबसे अच्छी” शराब पीने को मिलेगी।पूर्व सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि ‘स्कूल बंद और स्कॉच शुरू’ योजना के तहत, बीजेपी का नया नारा है ‘हमने बनाया है, हम ही पिलाएंगे’। दरअसल ‘हमने बनाया है, हम ही सवारेंगे’ पिछले साल के विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी का नारा था। जिसको लेकर पूर्व सीएम ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। पूर्व सीएम ने बीजेपी नेता चंद्राकर का एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उन्हें एप्लीकेशन के बारे में कहते हुए सुना जा सकता है कि यह अच्छा है कि लोग नकली ‘माल’ (शराब का जिक्र) से बचेंगे और असली ‘माल’ का सेवन करेंगे। शराबबंदी कभी भी हमारा (भाजपा का) मुद्दा नहीं रहा है। वहीं वीडियो को लेकर भाजपा नेता ने भूपेश बघेल पर हमला बोला है।

दिवाली के अगले दिन गांव पहुंचे, छत्तीसगढ़-दुर्ग में पूर्व CM बघेल ने निभाई सोटा प्रहार की परंपरा

दुर्ग. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल ने हर साल की तरह इस साल भी दिवाली के दूसरे दिन सोटा खाने की परंपरा को निभाने कुम्हारी के जंजगिरी गांव पहुंचे और खुशहाली की कामना के लिए अपने हाथ पर सोटा (चाबुक) भी खाया। जंजगिरी के आयोजित आदिवासी ध्रुव गोंड समाज के द्वारा यह परंपरा कई वर्षो से मनाई जाती आ रही है। दीपावली के दूसरे दिन समाज के लोगों के द्वारा गौरी गौरा पूजा की जाती है। जिसमें जंजगीरी गांव के मुखिया को सोटा खाने का निमंत्रण दिया जाता है। इसमें मान्यता यह है कि सोटा खाने वाला मुखिया या प्रधान गांव और अपने क्षेत्र की खुशहाली की कामना भगवान शिव और माता पार्वती से करता है। पूर्व मुख्यमंत्री को गांव के बुजुर्ग भरोसा ठाकुर यह प्रहार करते थे। लेकिन उनके निधन के बाद इस परंपरा को उनके बेटे बीरेंद्र ठाकुर ने निभाते आ रहे है। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुंदर परंपरा सबकी खुशहाली के लिए मनाई जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने भरोसा ठाकुर को याद किये खुशी इस बात की है कि उनके बेटे बीरेंद्र, उनका परिवार और जजंगिरी के ग्रामीण इस परंपरा को बढ़ा रहे हैं।

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