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दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक के घर सीबीआई ने छापा मारा

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी नेता दुर्गेश पाठक के आवास पर सीबीआई की टीम ने छापेमारी की है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, ये कार्रवाई विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) से संबंधित मामले में हुई है। सीबीआई की छापेमारी के खिलाफ तमाम आप नेताओं के बयान सामने आए हैं। आप नेताओं ने इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है। आतिशी ने बीजेपी पर साधा निशाना दुर्गेश पाठक के आवास पर सीबीआई रेड को लेकर विधानसभा में नेता विपक्ष आतिशी का बयान सामने आया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘आम आदमी पार्टी ने जैसे ही गुजरात चुनाव की तैयारी शुरू की, गुजरात के सह-प्रभारी दुर्गेश पाठक के घर CBI रेड करने पहुंच गई! गुजरात में आप ही भाजपा को चुनौती दे सकती है और यह रेड इनकी बौखलाहट दिखा रही है! इतने सालों मे भाजपा को समझ नहीं आया कि हम उनकी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।’ ‘बीजेपी ने गंदा खेल शुरू किया’ वहीं आप सांसद संजय सिंह ने एक्स पर कहा, “BJP का गंदा खेल फिर शुरू गुजरात के सहप्रभारी दुर्गेश पाठक के घर CBI पहुंची है। मोदी सरकार ने आम आदमी पार्टी को खत्म करने का हर हथकंडा अपना कर देख लिया लेकिन फिर भी उनको चैन नही। गुजरात में BJP की हालत पतली है जैसे ही दुर्गेश पाठक को गुजरात का सहप्रभारी बनाया गया उनको धमकाने के लिए CBI भेज दी।’ मनीष सिसोदिया का भी बयान आया सामने इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया का भी बयान सामने आया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “गुजरात चुनाव 2027 की ज़िम्मेदारी मिलते ही दुर्गेश पाठक के घर पर CBI रेड! ये कोई इत्तेफाक नहीं, ये बीजेपी की डर से निकली हुई साजिश है। BJP जानती है कि गुजरात में अब सिर्फ़ आम आदमी पार्टी ही उन्हें चुनौती दे सकती है — और इस सच्चाई ने उन्हें हिला दिया है। डर की गूंज, CBI की दस्तक में साफ सुनाई दे रही है।”

लोको पायलट परीक्षा में धांधली पर CBI की बड़ी कार्रवाई, दो अधिकारी समेत 26 लोगों को ले गई अपने साथ

चंदौली उत्तर प्रदेश के चंदौली में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. यहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय (PDDU) रेल मंडल की डिपार्टमेंटल परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़ा करने के आरोप में सीबीआई ने 26 लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों में रेलवे के दो बड़े अफसर, दर्जन भर लोको पायलट और अन्य लोग शामिल हैं. लखनऊ से आई सीबीआई की टीम ने चंदौली के एक मैरिज लॉन से कई सॉल्वर्स को भी हिरासत में लिया है. आरोप है कि ये सभी डिपार्टमेंटल परीक्षा में दूसरे की जगह एग्जाम दे रहे थे. बताया जा रहा है कि पकड़े गए लोगों की निशानदेही पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का कैश भी बरामद हुआ है. आरोप है कि प्रमोशन के लिए आयोजित इस डिपार्टमेंटल परीक्षा को पास कराने के लिए बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों से धन उगाही की गई और सॉल्वर्स को बुलाकर एग्जाम दिलाया जा रहा था. दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय (PDDU) रेल मंडल की डिपार्टमेंटल परीक्षा बीते मंगलवार को होनी थी. इस बीच सीबीआई को सूचना मिली कि इस परीक्षा में गड़बड़ी हो रही है और कुछ सॉल्वर्स चंदौली के एक मैरिज लॉन में ठहरे हुए हैं. सूचना पाकर सीबीआई एक्टिव हुई और सोमवार रात को उक्त मैरिज लॉन में छापा मारते हुए दो दर्जन से अधिक लोगों को रंगेहाथ पकड़ लिया, जो दूसरों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे. पकड़े गए आरोपियों के पास से परीक्षा के पेपर भी बरामद हुए हैं. इस कार्रवाई से पूरे रेल मंडल में हड़कंप मच गया. दो सीनियर अफसर, लोको पायलट सहित 26 गिरफ्तार जानकारी के मुताबिक, मामले में पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के दो सीनियर अफसर और लोको पायलट सहित कुल 26 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई रेलवे की विभागीय प्रमोशन परीक्षा में पेपर लीक किए जाने के मामले में हुई है. रेलवे के लोको इंस्पेक्टर के लिए होने वाली यह विभागीय प्रमोशन की परीक्षा 4 मार्च को होनी थी, लेकिन इससे पहले ही सीबीआई टीम ने पेपर लीक किए जाने के इनपुट के बाद ताबड़तोड़ छापेमारी कर 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल, सीबीआई की टीम इन सभी आरोपियों को अपने साथ लेकर लखनऊ निकल गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो की लखनऊ ब्रांच की टीम को यह इंफ़ॉर्मेशन मिली थी कि 4 मार्च को पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के अंतर्गत होने वाली रेलवे की लोको इंस्पेक्टर की विभागीय प्रमोशन परीक्षा में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है और इसका पेपर लीक कराया गया है. इस लीड के मिलने के बाद लखनऊ सीबीआई ब्रांच की टीम एक्टिव मोड में आ गई और इस टीम के तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा मेंबर्स ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के अधिकारियों के साथ-साथ उन परीक्षार्थी लोको पायलट के ठिकानों पर भी छापेमारी की जिनको मंगलवार को परीक्षा देना था. अलग-अलग इलाकों से उठाए गए आरोपी सीबीआई की टीम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के अलग-अलग इलाकों से कई लोगों पायलट को रात में ही हिरासत में ले लिया. इसके बाद इन सभी लोगों को लेकर सीबीआई की टीम मुगलसराय कोतवाली पहुंची, जहां पर उनसे पूछताछ की गई. इन सभी लोगों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के बाद अगली सुबह सीबीआई की टीम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के दफ्तर में भी छापा मारा और इस मामले में कथित तौर पर शामिल रेलवे के दो बड़े अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर लिया. पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के दफ्तर में स्थित सभा कक्ष में सीबीआई के अधिकारियों ने इन सभी आरोपियों से पूरे दिन पूछताछ की. इसके बाद इन सभी 26 आरोपियों को प्रिजन वैन में बैठाकर सीबीआई की टीम लखनऊ लेकर चली गई. इस संदर्भ में जब सीबीआई के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात करने और किसी भी तरह की जानकारी शेयर करने से साफ-साफ इनकार कर दिया. हालांकि, बाद में सीबीआई की ओर से प्रेस नोट जारी कर डिटेल दी गई.  दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल में हड़कंप बताते चलें कि विभागीय प्रमोशन के लिए भारतीय रेलवे में अलग-अलग परीक्षाएं कराई जाती हैं. रेलवे की जो प्रमोशनल परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया है वह परीक्षा लोको पायलट से लोको इंस्पेक्टर बनने के लिए आयोजित की जानी थी. कोई भी लोको पायलट अगर 10 साल तक लोको पायलट की नौकरी कर लेता है या फिर 5 लाख किलोमीटर तक ट्रेन को चला लेता है तो इसके बाद वह लोको इंस्पेक्टर की परीक्षा के लिए एलिजिबल हो जाता है. इसी लोको इंस्पेक्टर की प्रमोशन परीक्षा 4 मार्च को पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल में होनी थी. लेकिन इससे पहले ही इस परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आ गया और सीबीआई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे के सीनियर ऑफिसर्स के साथ-साथ कुल 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल, सीबीआई लखनऊ की टीम इन सभी 26 लोगों को लेकर लखनऊ के लिए निकल गई है, जहां पर पूरे मामले की जांच पड़ताल और अग्रिम कार्रवाई की जाएगी. सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई से पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल में हड़कंप मचा हुआ है. विभागीय परीक्षा पेपर लीक कांड का भंडाफोड़ सीबीआई ने 3 और 4 मार्च 2025 की मध्यरात्रि को शुरू किए गए एक अभियान के दौरान मुगलसराय में पूर्व मध्य रेलवे के तहत आयोजित एक विभागीय परीक्षा पेपर लीक घोटाले का भंडाफोड़ किया है. सीबीआई ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि पूर्व मध्य रेलवे ने 4 मार्च 2025 को मुख्य लोको निरीक्षकों के पदों के लिए एक विभागीय परीक्षा निर्धारित की थी. मुगलसराय में मध्यरात्रि को तीन स्थानों पर सीबीआई द्वारा की गई जांच के दौरान, 17 उम्मीदवारों के पास हस्तलिखित प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी पाई गई. जांच एजेंसी ने अपने बयान में कहा- “इस संबंध में एक वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता और आठ अन्य रेलवे अधिकारियों और अज्ञात उम्मीदवार और अज्ञात अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. ” सीबीआई की अब तक की जांच के अनुसार, आरोपी वरिष्ठ डीईई व्यक्ति को उक्त परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने अंग्रेजी में प्रश्न लिखे … Read more

दवा कारोबारी से 75 हजार की मांगी रिश्वत, छत्तीसगढ़-रायपुर में सीजीएसटी के दो अफसरों को CBI ने पकड़ा

रायपुर. सीबीआई की टीम ने शुक्रवार को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के दो अफसरों को दवा कारोबारी से 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया है. रायपुर में पदस्थ सुपरिंटेंडेंट इलोंका ​मिंज और इंस्पेक्टर सौम्य रंजन मलिक जीएसटी की राशि में गड़बड़ी की सेटलमेंट करने और पेनल्टी से बचाने के नाम पर घूस मांग रहे थे. जानकारी के मुताबिक मिंज और मलिक ने दवा कारोबारी राहुल वर्मा को 3 लाख रुपए की ​पेनल्टी का डर दिखाया. इसके सेटलमेंट के लिए उसने पहले 75 हजार रुपए मांगे थे. छत्तीसगढ़ में ऐसा पहला मौका है, जब सीजीएसटी अफसरों को रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया है.

पॉवर कंपनी के डायरेक्टर गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-पीएससी घोटाले में CBI ने कैसा शिकंजा

रायपुर. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती अनियमितता 2021 मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा बहू-बेटे को डिप्टी कलेक्टर बनाने के एवज में 45 लाख रुपये रिश्वत देने के आरोप में रायपुर के एक निजी स्टील एंड पॉवर लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में अब तक की ये पहली गिरफ्तारी है। चर्चा है कि अन्य पर भी सीबीआई जल्द शिकंजा कसेगी। इस घोटाले मामले में श्रवण कुमार गोयल ने अपने बहु और बेटे को डिप्टी कलेक्टर के रूप में चयन कराने के लिये सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को कथित रूप से 45 लाख रुपये रिश्वत के रूप में दिये थे। आरोप है कि उन्होंने ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से दो किश्तों में 20 लाख और 25 लाख रुपये कथित रूप से रिश्वत राशि का भुगतान किया था। ये रिश्वत गोयल के बेटे शशांक गोयल और बहु भूमिका कटारिया का छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उप जिलाधिकारी के रूप में चयन करने के लिये दी गई थी। 48 शिकायतों के बाद हुई थी कार्रवाई पिछली सरकार (कांग्रेस कार्यकाल) में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में 48 मामलों की शिकायत राज्यपाल, सीएम और मुख्य सचिव से की गई थी। आयोग ने सीजीपीएससी 2021 के लिए 171 पदों पर प्रारंभिक भर्ती परीक्षा 13 फरवरी 2022 को ली थी। इसमें 2565 लोग उत्तीर्ण हुए थे। 26 से 29 मई 2022 को हुई मुख्य परीक्षा में कुल 509 उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए थे। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई थी। इस भर्ती में अनियमितता और भाई भतीजावाद के आरोप में सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जीवनकिशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई थी। पूर्व मंत्री की शिकायत को बनाया आधार इस भर्ती घोटाले को लेकर रमन सरकार में पूर्व मंत्री रहे और बीजेपी के सीनियर नेता ननकीराम कंवर ने पीएससी परीक्षा 2021-22 में अनियमित की शिकायत राज्यपाल से लिखित में की थी। इसके बाद महानिदेशक ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर को अपराध पंजीबद्ध करने के लिए राज्य शासन की ओर से 2 फरवरी 2024 को पत्र मिला था। शिकायत में राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष सोनावानी, सचिव, राजनेता और अन्य ने मिलीभगत कर अपने बेटे-बेटियों, रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर समेत अन्य पदों पर फर्जी तरीके से भर्ती किए जाने पर केंद्रीय एजेंसी से जांच कराकर क्रमांक 1 से 71 की चयन सूची को निरस्त कर मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज करते हुए कार्रवाई करने के लिये राज्यपाल से अनुरोध किया था। भाई-भतीजावाद का खेल! आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष सोनवानी के बेटे नितेश सोनवानी का चयन कथिततौर पर डिप्टी कलेक्टर, उनके बड़े भाई के बेटे साहिल सोनवानी का चयन डीएसपी और उनकी बहन की बेटी सुनीता जोशी का चयन श्रम पदाधिकारी, बेटे नितेश सोनवानी की पत्नी निशा कोसले का चयन डिप्टी कलेक्टर और भाई की बहू दीपा आदिल का चयन जिला आबकारी अधिकारी के रूप में हुआ था। इतना ही नहीं आरोप ये भी है कि सीजीपीएससी के तत्कालीन सचिव किशोर ने अपने बेटे सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर कराया। इसके साथ ही आरोप ये भी है कि उस दौरान कांग्रेस सरकार के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों के बेटा-बेटियों, रिश्तेदारों, नेताओं और पदाधिकारी को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी आदि पद के रूप में चयनित किया गया । विधानसभा चुनाव 2023 में उठा था ये मामला विधानसभा चुनाव 2023 में सीजीपीएससी भर्ती घोटाला मामला काफी गरमाया हुआ था। इस मामले को लेकर प्रदेश के युवा आक्रोशित होकर सड़क पर उतर गये थे। विधानसभा चुनाव दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई राष्ट्रीय नेताओं ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की गारंटी दी थी। पांच साल की भूपेश सरकार के सत्ता से बाहर होने और राज्य में चौथी बार बीजेपी की सरकार बनने पर सीएम विष्णुदेव साय की कैबिनेट ने 3 जनवरी 2024 को मामले की सीबीआई से जांच कराने का निर्णय लिया था। राज्य सरकार की समिति के बाद केंद्र से जांच के लिए अधिसूचना जारी किया गया और मामला सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया। इन धाराओं में केस दर्ज सीजीपीएससी घोटाला मामले में सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव समेत कई अधिकारियों, राजनेताओं के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 120 बी, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1998 तथा संशोधित 2018 की धारा 7,7 (क) व 12 के तहत अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

CG लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष 45 लाख की रिश्वत लेने में गिरफ्तार, जानें क्या मामला

रायपुर छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर सीबीआई ने सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पॉवर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया है। पीएससी घोटाले में यह पहली गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तारी बजरंग इस्पात के डायरेक्टर पर अपने रिश्तेदार को नौकरी लगवाने के नाम पर 45 लाख रुपए रिश्वत देने के मामले में हुई है। सीबीआई का ताबड़तोड़ एक्शन  बताया जाता है कि राज्य सेवा परीक्षा के जरिए नौकरी लगाने के नाम पर लेनदेन हुई थी। जांच के दौरान इसकी पुष्टि होने पर बजरंग इस्पात के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए पीएससी में हुए घोटाले पर कार्रवाई की गारंटी दी थी। जिसके बाद विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री बनते ही मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए। सीबीआई सोमवार को प्रदेश में एक्शन मोड में दिखी। सीबीआई ने सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को पीएससी घोटाले में गिरफ्तार कर लिया। दूसरी ओर शराब घोटाले में आबकारी विभाग के विशेष सचिव एपी त्रिपाठी से सीबीाई की पूछताछ का रास्ता साफ हो गया है। वहीं कोरबा में सीबीआई की टीम ने श्रमिक नेता के घर आर्थिक गड़बड़ी के मामले में छापा मारा।  ईओडब्ल्यू ने सीबीआई को सौंपी थी फाइल पीएससी घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के बाद ईओडब्ल्यू वर्ष 2019 से 2022 में आयोजित सीजीपीएस परीक्षा में अफसर, नेताओं तथा प्रभावशाली लोगों के 18 रिश्तेदार, परिजन तथा करीबियों से रिश्वत लेकर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित अन्य पदों पर चयन करने के आरोप के बाद एफआईआर की थी। इसके अलावा सीजीपीएसी के एक प्रतिभागी ने बालोद, अर्जुंदा थाने में फरवरी में एफआईआर दर्ज कराई थी। मिली अनुमति: एपी त्रिपाठी से होगी पूछताछ रायपुर में सीबीआई 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा के शराब घोटाले में आबकारी विभाग के विशेष सचिव एपी त्रिपाठी से पूछताछ करेगी। राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद जल्दी ईडी और ईओडब्ल्यू के बाद सीबीआई भी एफआईआर दर्ज कर सकती है। साथी इस प्रकरण में बनाए गए अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ करने रिमांड पर लिया जा सकता है। बता दे कि आबकारी विभाग के विशेष सचिव रहे एपी त्रिपाठी के खिलाफ झारखंड में शराब घोटाला करने के अपराध दर्ज है। इस समय एपी त्रिपाठी को रायपुर से जगदलपुर जेल शिफ्ट किया गया है। कोरबा: श्रमिक नेता के घर सीबीआई की रेड सीबीआई की टीम ने कोरबा के हरदीबाजार और दीपका क्षेत्र में छापेमारी की। इंटक के जिलाध्यक्ष श्यामू (खुशाल जायसवाल) के निवास व दीपका के एक व्यवसायी राजेश जायसवाल के घर व दुकान में दबिश दी। उनके संपत्ति सहित आय के अन्य स्रोतों की जांच की। सीबीआई की यह कार्यवाही सुबह 6 बजे से शुरू हुई जो दोपहर बाद तक जारी रही। लेकिन सीबीआई ने इस मामले को लेकर दोनों ही स्थानों पर कई घंटे तक तलाशी ली और परिवार की आय और संपत्ति के स्रोत का पता लगाया। मुआवजा वितरण में गड़बड़ी का मामला बताया जाता है कि यह पूरा मामला एसईसीएल की दीपका खदान के लिए अधिग्रहित गांव सुआभोड़ी और मलगांव की जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा वितरण से जुड़ा है। कई पात्र लोगों को अफसरों ने अलग-अलग कारणों का हवाला देकर अपात्र कर दिया है तो कई अपात्र लोगों को ज्यादा मुआवजा मिला है। ये है विवाद CGPSC 2019 से 2022 तक की भर्ती में कुछ अभ्यर्थियों के चयन को लेकर विवाद है। EOW और अर्जुंदा पुलिस ने भ्रष्टाचार-अनियमितता के आरोप में केस दर्ज किया है। PSC ने 2020 में 175 पदों पर और 2021 में 171 पदों पर परीक्षा ली थी। इन्हीं भर्तियों को लेकर ज्यादा विवाद है। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों समेत कांग्रेसी नेता और ब्यूरोक्रेट्स के बच्चों की नौकरी लगवाई है। 171 पदों के लिए हुई थी भर्ती परीक्षा CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई।

अवैध रेत खनन मामला में CBI की छापेमारी, ये छापेमारी संदिग्ध व्यक्तियों के आवासीय और आधिकारिक परिसरों में की गई

जयपुर राजस्थान में CBI ने शुक्रवार को अवैध रेत खनन से जुड़े एक मामले की जांच के तहत जयपुर, टोंक, अजमेर और भीलवाड़ा में 10 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। ये छापेमारी संदिग्ध व्यक्तियों के आवासीय और आधिकारिक परिसरों में की गई. जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई राजस्थान उच्च न्यायालय (जयपुर बेंच) के आदेश 16 अप्रैल, 2024 के तहत की गई। CBI ने 26 अप्रैल 2024 को इस मामले को पुनः दर्ज किया था, जो पहले थाना सदर, जिला बूंदी राजस्थान में FIR संख्या 527/2023 के तहत IPC की धारा 379 और MMDR अधिनियम की धारा 21(4) के अंतर्गत दर्ज था। प्रवक्ता ने बताया कि आरोप है कि 24 अक्टूबर, 2023 को एक निजी व्यक्ति को 40 MT रेत (माइनर मिनरल) को बिना वैध पास/परमिट/लाइसेंस या अन्य अनुमति के वाहन (डंपर) में परिवहन करते हुए गिरफ्तार किया गया था। राजस्थान पुलिस ने इस जांच के दौरान संबंधित वाहन के पंजीकृत मालिक को भी 22 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। CBI की इस छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज मिले हैं और मामले की जांच अभी भी जारी है।

आरजी कर अस्पताल मामले में सीबीआई ने खून के धब्बे, आरोपी की डीएनए रिपोर्ट समेत 11 साक्ष्य सूचीबद्ध किए

कोलकाता केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यहां आरजी कर अस्पताल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में गिरफ्तार कोलकाता पुलिस के स्वयंसेवी संजय रॉय को ‘‘इकलौता आरोपी’’ ठहराने के लिए अपने आरोपपत्र में डीएनए और रक्त नमूनों की रिपोर्ट जैसे 11 साक्ष्य सूचीबद्ध किए हैं। सीबीआई ने रॉय के खिलाफ सबूत के तौर पर मृतक चिकित्सक के शरीर में आरोपी के डीएनए की मौजूदगी, छोटे बाल, मृतका के खून के धब्बे, रॉय के शरीर पर चोटों, सीसीटीवी फुटेज और ‘कॉल डिटेल रिकॉर्ड’ (सीडीआर) के मुताबिक उसके मोबाइल फोन की लोकेशन का उल्लेख किया है। आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि रॉय को ‘‘महिला चिकित्सक द्वारा प्रतिरोध/संघर्ष के निशान के तौर पर जोर-जबरदस्ती से लगने वाली चोटें लगी थीं।’’ कोलकाता पुलिस ने 10 अगस्त को रॉय को गिरफ्तार किया था। सीबीआई के आरोपपत्र में कहा गया है, ‘‘आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और आपातकालीन इमारत की तीसरी मंजिल पर, जहां अपराध हुआ, वहां आठ और नौ अगस्त की मध्यरात्रि को उसकी (रॉय की) मौजूदगी सीसीटीवी फुटेज से साबित हुई है। सीडीआर के मुताबिक उसके मोबाइल फोन की लोकेशन से उसकी मौजूदगी साबित होती है।’’ केंद्रीय जांच एजेंसी ने सोमवार को यहां एक स्थानीय अदालत में दाखिल किए गए अपने आरोपपत्र में मृतक महिला को ‘वी’ कहकर संबोधित किया है। आरोपपत्र में कहा गया है, ‘‘पोस्टमार्टम के दौरान ‘वी’ के शरीर पर उसका (रॉय) डीएनए मिला… उसकी जींस तथा जूते पर ‘वी’ के रक्त के धब्बे थे, जिन्हें स्थानीय पुलिस ने 12 अगस्त को पूछताछ के बाद बरामद किया था। अपराध स्थल से मिले छोटे बाल का मिलान आरोपी संजय रॉय के बाल से हुआ है।’’ आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमीनार कक्ष से नौ अगस्त को 31 वर्षीय महिला चिकित्सक का शव बरामद किया गया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी थी।  

सीबीआई ने पुलिस के दो जवानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज किया पहला केस

नई दिल्ली सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के दो जवानों के खिलाफ नए भारतीय न्याय संहिता के तहत अपनी पहली एफआईआर दर्ज की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि तिहाड़ जेल में बंद एक शख्स की रिहाई में मदद के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में यह केस दर्ज किया है। बता दें कि भारतीय न्याय संहिता ने ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ले ली है। सीबीआई ने बताया कि बुधवार शाम को दिल्ली के मौरिस नगर स्थित नारकोटिक्स सेल में तैनात हेड कांस्टेबल रवींद्र ढाका और परवीन सैनी के खिलाफ नए कानून 61(2) के तहत आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपियों ने गलत तरीके से ड्रग्स बरामद करना दिखाया आरोप है कि आरोपी पुलिस जवान तिहाड़ जेल में बंद शिकायतकर्ता के भाई की रिहाई में मदद के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। दरअसल, जेल में बंद शख्स के पास से एनआरएक्स ड्रग्स बरामद हुई थी। पीड़ित शिकायतकर्ता ने सीबीआई को बताया कि ड्रग्स को गलत तरीके से उसके भाई कोशिंदर के पास दिखाया गया है। रवींद्र ढाका और परवीन सैनी ने फर्जी बिल तैयार किया वहीं, सीबीआई ने आरोप लगाया है कि रवींद्र ढाका और परवीन सैनी ने फर्जी बिल तैयार करने और उन्हें सक्षम कोर्ट के सामने पेश करने के लिए शिकायतकर्ता को एनआरएक्स ड्रग्स की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई ने शिकायतकर्ता को गुप्त रिकॉर्डर के साथ भेजा सीबीआई ने शिकायतकर्ता के दावों की पुष्टि करने के लिए उसे गुप्त रिकॉर्डर के साथ भेजा। आरोपी रवींद्र ढाका ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से कहा कि मामले का जांच अधिकारी 2.50 करोड़ रुपये में समझौता कर लेगा।

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