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हर दिन ₹38 करोड़ की ठगी का शिकार, सरकार अब AI तकनीक का इस्तेमाल कर सख्ती से रोक लगाएगी

नई दिल्ली Cyber Fraud Prevention India: भारत में साइबर फ्रॉड की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और इसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. हर 24 घंटे में करीब 38 करोड़ रुपये साइबर अपराधी लोगों के बैंक खातों से उड़ा ले जाते हैं. यह पैसा आम लोगों की मेहनत की कमाई होती है, जो ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट या अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय ठगी का शिकार हो जाते हैं. हैरानी की बात यह है कि इस बड़ी रकम में से सिर्फ लगभग 8 करोड़ रुपये ही बचाए जा पाते हैं. बाकी पैसा साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच जाता है. यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क कितना मजबूत हो चुका है और वे लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हर दिन हजारों शिकायतें  साइबर ठगी के मामलों को लेकर हर दिन हजारों लोग शिकायत दर्ज करा रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े साइबर सिस्टम के मुताबिक, हर 24 घंटे में 7000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज होती हैं. इनमें से करीब 6000 शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. जांच में सामने आया है कि इन मामलों में रोजाना करीब 38 करोड़ रुपये की ठगी हो रही है. हालांकि एजेंसियां लगातार पैसा बचाने की कोशिश करती हैं, लेकिन औसतन सिर्फ 8 करोड़ रुपये ही रिकवर हो पाते हैं. इसका मतलब यह है कि ठगों का नेटवर्क बेहद तेज और संगठित तरीके से काम कर रहा है। साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर साइबर ठगी से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने एक विशेष साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (Cyber Fraud Mitigation Centre) बनाया है. यह सेंटर 24 घंटे काम करता है और यहां अलग-अलग एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं. इस सेंटर का उद्देश्य जैसे ही किसी साइबर फ्रॉड की जानकारी मिले, तुरंत कार्रवाई करना है. यहां पुलिस, बैंक और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधि मिलकर काम करते हैं. जब किसी फ्रॉड का अलर्ट मिलता है, तो पूरा सिस्टम एक साथ सक्रिय हो जाता है. इस समन्वय के जरिए ठगी की रकम को ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश की जाती है। 24×7 कंट्रोल रूम साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर में एक हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहां 24×7 निगरानी रखी जाती है. जैसे ही किसी खाते से संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलती है, तुरंत सायरन बजता है और संबंधित एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं. इसके बाद बैंक और पुलिस मिलकर उस ट्रांजैक्शन को रोकने की कोशिश करते हैं. कई मामलों में खाते को तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है. हालांकि ठगों की तेजी के कारण कई बार पैसा दूसरे खातों में ट्रांसफर हो जाता है, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है. पांच साल में 55 हजार करोड़ की ठगी गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगों ने लोगों के खातों से 55 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है. यह आंकड़ा 2021 से 2025 के बीच का है. इन पांच वर्षों में कुल 6 करोड़ 58 लाख से ज्यादा शिकायतें साइबर फ्रॉड को लेकर दर्ज की गईं. यह संख्या बताती है कि देश में डिजिटल सेवाओं के बढ़ने के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं. हालांकि सरकार और एजेंसियां लगातार इन्हें रोकने की कोशिश कर रही हैं. 2025 में सबसे ज्यादा शिकायतें रिपोर्ट के मुताबिक अकेले 2025 में ही साइबर फ्रॉड के 24 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. यह पिछले सभी वर्षों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. हालांकि इस साल ठगी की रकम थोड़ी कम रही, लेकिन मामलों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई. इससे यह साफ होता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ठगों के लिए नए अवसर भी बन रहे हैं. 2021 से 2025 तक शिकायतों का ग्राफ अगर पिछले पांच साल के आंकड़ों को देखें तो साइबर फ्रॉड की शिकायतों में लगातार वृद्धि हुई है- 2021 में 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुई थीं. 2022 में यह संख्या बढ़कर 6,94,446 हो गई. 2023 में 13,10,357 शिकायतें दर्ज हुईं. 2024 में यह संख्या 19,18,835 पहुंच गई. 2025 में शिकायतों का आंकड़ा बढ़कर 24,02,579 हो गया. यह आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है. ठगी की रकम में भी बड़ा उछाल साइबर ठगी की रकम भी हर साल तेजी से बढ़ी है- 2021 में लगभग 551 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी. 2022 में यह रकम बढ़कर 2290 करोड़ रुपये हो गई.  2023 में 7465 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई. 2024 में यह आंकड़ा 22,848 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.  हालांकि 2025 में यह थोड़ा घटकर 22,495 करोड़ रुपये रहा.  इसके बावजूद यह बेहद बड़ी रकम है, जो साइबर अपराधियों की ताकत को दिखाती है. 2025 में बचाए गए हजारों करोड़ हालांकि एजेंसियों की कोशिशों से कुछ सफलता भी मिली है. I4C सिस्टम के जरिए 2025 में करीब 8189 करोड़ रुपये की ठगी होने से बचाई गई. यह रकम तब बचाई गई जब लोगों ने तुरंत शिकायत दर्ज कराई और बैंक तथा पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की. इससे यह साबित होता है कि समय पर शिकायत करने से कई बार पैसा वापस मिल सकता है. डिजिटल इंडिया के साथ बढ़ा खतरा भारत में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है. आज देश के अधिकांश घरों में इंटरनेट पहुंच चुका है. लोग ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे लोगों को सुविधा जरूर मिली है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ गया है. साइबर ठग इसी डिजिटल सिस्टम का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. म्यूल अकाउंट बना बड़ा हथियार साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक बड़ा तरीका म्यूल अकाउंट है. इसमें ठग दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं. इन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है और फिर उसे कई अन्य खातों में बांट दिया जाता है. इससे पैसे का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. एजेंसियां अब इन म्यूल खातों की पहचान करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं. AI के जरिए ठगी … Read more

सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत

सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत   टेलीग्राम ग्रुप से जोडऩे के बाद दिया ठगी को अंजाम  भोपाल  पिपलानी पुलिस ने एक व्यवसायी की रिपोर्ट पर अज्ञात सायबर जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने शेयर बाजार तथा अन्य कंपनियों में निवेश का लालच देकर रुपये जमा करवाए और उसके बाद करीब एक लाख साठ हजार रुपये ठग लिए। जानकारी के अनुसार जगदीश सिंह (50) कर्मवीर नगर पिपलानी में रहते हैं और आक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई करने का काम करते हैं। करीब एक महीने पहले उनके वाट्सएप नंबर पर एक लिंक आई।उन्होंने जैसे ही उसे खोला तो एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। इस गुप में कई मेंबर थे जो कि ट्रेड में निवेश का काम ऑनलाइन तरीके से कर रहे थे। वह अलग-अलग कंपनियों में पैसा लगाते थे, जिसके बाद उन्हें मुनाफा होता था। मुनाफे की बात वे इस ग्रुप पर शेयर करते थे। जगदीश सिंह ने भी जब ट्रेड में निवेश के लिए हामी भर दी तो उन्हें टेलीग्राम ऐप के एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। उन्होंने शुरूआत में 2 हजार रुपए का निवेश किया तो उन्हें फायदा हुआ। इसके बाद दो-तीन बार और उन्हें फायदा हुआ। फायदे की यह रकम ग्रुप के एडमिन द्वारा बनाए गए उनके खाते में दिखाई दे रही थी। दो दिन के भीतर ही उन्होंने 1 लाख 59 हजार रुपए का निवेश कर दिया। बाद में जब उन्होंने यह मूल राशि और मुनाफे की राशि लेना चाही तो उनसे कहा गया कि आपको और भी पैसे भरने होंगे तभी आपके पैसे मिलेंगे। जगदीश सिंह को ठगी का अहसास हुआ तथा उन्होंने मामले की शिकायत साइबर सेल को कर दी। वहां से पिपलानी थाने में शिकायत आने पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर लिया।

थ्रीइएमइ सेंटर में एक मेजर से निवेश के नाम पर 14.40 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई

बैरागढ़  बैरागढ़ स्थित थ्रीइएमइ सेंटर में एक मेजर से निवेश के नाम पर 14.40 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई है। मेजर को इंग्लैंड के एक नंबर से वाट्सएप ग्रुप पर जुड़ने के लिए लिंक आया था। वे ग्रुप में जुड़े तो उन्हें भारी मुनाफे का लोभ दिया गया, जिसमें फंसकर उन्होंने एक फर्जी एप डाउनलोड कर लिया और 24 लाख रुपये निवेश कर दिए। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए पहले उनके 10 लाख रुपये तो बैंक खाते में लौटा दिए, लेकिन बाकि की राशि निकालने का प्रयास किया तो उन्हें आइपीओ आवंटन के जाल में फंसा दिया। मेजर की शिकायत पर भोपाल साइबर सेल ने प्रकरण दर्ज किया है। आईपीओ के जरिए 60 लाख रुपये और ऐंठने की फिराक में थे ठग     पुलिस के अनुसार मूलत: पंजाब के पठानकोट के रहने वाले 35 वर्षीय आशीष चौधरी पिता कुलदीप राज थ्रीइएमइ सेन्टर बैरागढ में मेजर के रूप में पदस्थ हैं।     पिछले वर्ष अप्रैल में उन्होंने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज की थी। जिसमें बताया गया कि उन्हें इंग्लैंड के एक नंबर से उनके वाट्सएप पर निवेश के एक ग्रुप से जुड़ने का लिंक आया था।     मेजर ने बताया कि उस ग्रुप में पहले से कई सदस्य जुड़े थे। ग्रुप में बताया गया कि हमारे एप के जरिए निवेश करें, हम आपको बताएंगे किन शेयरों में निवेश करना है।     इससे आपको भारी मुनाफा होगा और उसमें से 30 प्रतिशत का हिस्सा देना होगा।     उन्होंने पहले 16 लाख रुपये डाले। कुछ समय बात मेजर ने उसमें से 10 लाख रुपये बैंक में ट्रांसफर कर लिए। इससे उन्हें एप पर भरोसा हो गया।     मेजर ने एक बार फिर एप में 15 लाख रुपये डालने की कोशिश की, लेकिन बैंक लिमिट होने के कारण उसमें 10 लाख रुपये ही डाल सके।     बाद में उनके स्वजनों ने फ्राॅड एप की जानकारी दी तो मेजर ने रुपये निकाले, लेकिन 1.60 लाख रुपये ही निकाल सके।     उन्होंने एप के संचालकों से संपर्क किया तो बताया गया कि आपके नंगर पर 60 लाख रुपये के आइपीओ शेयर आवंटित किए गए हैं, जिसके बाद मेजर ने एप डिलीट किया और पुलिस को शिकायत की।     निवेश के नाम पर यदि कोई मोटे मुनाफे का लालच देता है तो उस पर विश्वास न करें। पहले कंपनी और एप के बारे में पुख्ता जानकारी लें। साइबर सेल लगातार एडवाइजरी जारी कर लोगों को जागरूक कर रही है। जो भी ठगी के मामले आ रहे हैं, पुलिस उनमें प्रकरण दर्ज कर आरोपितों को पकड़ रही है। सुजीत तिवारी, एसीपी साइबर क्राइम  

एक जनवरी से मध्‍य प्रदेश के 43 जिलों में शुरू होगी साइबर तहसील.

From January 1, cyber tehsils will be inaugurated in 43 districts of Madhya Pradesh. मध्य प्रदेश में सबसे पहले दतिया एवं सीहोर दो जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 27 मई 2022 को साइबर साइबर तहसील लागू की गई थी। Manish Trivedi, Sahara Samachaar. भोपाल । नए साल में मोहन सरकार प्रदेशवासियों को सौगात देगी। एक जनवरी 2024 से मध्य प्रदेश के 43 जिलों में साइबर तहसील की व्यवस्था लागू हो जाएगी। इससे रजिस्ट्री के बाद नामांतरण, अविवादित नामांतरण के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाना होगा।अभी केवल 12 जिलों में ही साइबर तहसील की व्यवस्था लागू है। शेष 43 जिलों में अब भी दफ्तर के चक्कर लगाने होते हैं, लेकिन एक जनवरी से अन्य 43 जिलों में भी साइबर तहसील की व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके लिए अलग से स्टाफ भी रखा जाएगा और प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में भी स्टाफ बढ़ाया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने 13 दिसंबर को मंत्रिमंडल की पहली बैठक एक जनवरी 2024 से साइबर तहसील की व्यवस्था प्रदेश के सभी 55 ज़िलों में लागू करने का निर्णय लिया था।

केंद्र सर्कार द्वारा फर्जी दस्तावेज लगाकर चल रहे 5.5 मिलियन से अधिक अवैध मोबाइल कनेक्शन बंद -अश्विनी वैष्णव.

Govt blocked over 1.32L mobile phones for financial fraud, cybercrime: Vaishnaw केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल धोखाधड़ी से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल के तहत “फर्जी दस्तावेज लगाकर चल रहे ” 5.5 मिलियन से अधिक अवैध मोबाइल कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं। भारत सरकार ने साइबर अपराधियों से 400,000 नागरिकों के 1,000 करोड़ रुपये से अधिक जब्त और बरामद किए हैं, केंद्र ने शुक्रवार को राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी द्वारा धोखाधड़ी वाले मोबाइल फोन के उपयोग और साइबर अपराध पर उठाए गए सवालों की एक श्रृंखला पर संसद को सूचित किया।केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार द्वारा साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े 132,000 मोबाइल कनेक्शन की सेवाएं बंद कर दी गयी हैं, और इसके अतिरिक्त 278,000 कनेक्शन काट दिए गए हैं। वैष्णव ने कहा कि मोबाइल धोखाधड़ी से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा की गई पहल के तहत “फर्जी दस्तावेजों पर प्राप्त” 5.5 मिलियन से अधिक अवैध मोबाइल कनेक्शन भी बंद कर दिए गए हैं।उन्होंने जवाब दिया कि सरकार ने धोखाधड़ी वाले मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने के लिए एक प्रणाली विकसित की है। उन्होंने संसद में एक लिखित उत्तर में कहा, “एक बार पता चलने पर, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को ऐसे मोबाइल कनेक्शनों का पुन: सत्यापन करने का निर्देश दिया जाता है… पुन: सत्यापन में विफल रहने पर, ऐसे मोबाइल कनेक्शन काट दिए जाते हैं।” सरकार ने एक पोर्टल भी विकसित किया है – संचार साथी जो उपयोगकर्ताओं को उनके नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन की जांच करने और अवैध कनेक्शन की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है। वैष्णव ने लिखा, यह उपयोगकर्ताओं को अपने चोरी हुए या खोए हुए फोन की रिपोर्ट करने की भी अनुमति देता है, जिसके बाद नंबर सभी टीएसपी पर ब्लॉक कर दिए जाते हैं।उन्होंने कहा कि नागरिक मोबाइल या लैंडलाइन नंबर से प्राप्त अंतरराष्ट्रीय कॉल की भी रिपोर्ट कर सकते हैं।केंद्रीय मंत्री ने बताया कि टेक्स्ट-आधारित साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए, टेक्स्ट संदेशों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विश्लेषण के परिणामस्वरूप फरवरी 2023 और नवंबर 2023 के बीच टेक्स्ट-आधारित साइबर अपराध में 36% की कमी आई है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अवैध मोबाइल कनेक्शन से जुड़े 220,000 व्हाट्सएप खातों को बंद कर दिया गया है, और 2021 से 162 अवैध दूरसंचार सेट-अप का भंडाफोड़ किया गया है।वैष्णव ने कहा कि गलत बिक्री केंद्रों के खिलाफ 365 से अधिक मामले दर्ज किए गए और 70,313 को काली सूची में डाल दिया गया है। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि डिस्कनेक्ट किए गए मोबाइल फोन से जुड़े ‘बैंक और पेमेंट्स’ वॉलेट द्वारा भी 983,000 खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। सरकार सभी को 1963/1800110420 पर धोखाधड़ी और संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट करने की सलाह देती है।

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