भोपाल: औषधि निरीक्षक एवं CMHO की सयुंक्त टीम ने शहर के क्लिनिक पर की कार्यवाही से शहर में मचा हड़कंप ।
The joint team of drug inspector and CMHO created a stir in the city due to the action taken against the city clinic. भोपाल, ड्रग इंस्पेक्टर तबस्सुम मेरोठा ने शुक्रवार को दोपहर बाद भोपाल शहर के बाणगंगा क्षेत्र में संचालित विकास क्लिनिक पर कार्यवाही की जिसमे उन्होंने पाया की फर्जी तरीके से क्लिनिक जिसका नाम विकास क्लिनिक का आकस्मिक निरीक्षण किया। जहाँ करीब 6 बॉक्स भरकर एलॉपथी की दवाईया मिली, उन्होंने विभिन्न दवाओं के खरीद के बिल चेक किए, रजिस्टर चेक किए। विकास क्लिनिक के संचालक डॉक्टर अनिल शर्मा इन सभी के कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए. जिसके तहत फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने क्लिनिक पर एलॉपथी दवाई पाए जाने पर उचित कार्यवाही की गयी। CMHO एवं निरयंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की सयुक्त टीम ने यह कार्यवाही की, टीम में DHO मनोज हुरमाडे व् सदस्य, ड्रग इंस्पेक्टर मौजूद थे। उन्होंने इसके अलावा टीम ने आस पास के क्षेत्र में भी मेडिकल चेक किये तथा अपनी रूटीन कार्यवाही को अंजाम दिया। ड्रग इंस्पेक्टर भोपाल तबस्सुम मेरोठा ने बताया कि दवा मेडिकल स्टोर पर दवाओं की खरीद और बिक्री का विवरण रखें, शेड्यूल एच 1 का रजिस्टर बनाएं, फ्रिज रखें, मेडिकल स्टोर लाइसेंस चस्पा करके रखें, इसके अलावा पशुओं की दवा बेचते हैं तो वह दवा रखने के स्थान पर बोर्ड भी लगाएं। ड्रग इंस्पेक्टर कन्हैया लाल अग्रवाल एवं तबस्सुम मेरोठा से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक महीने में अनेक कार्यवाहियां खाघ एवं औषधि प्रशासन के आदेश कार्यक्षेत्र में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के द्वारा औषधियों पर अंकित एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर औषधियों का विक्रय न हो एवं आम जनता को उचित मूल्य पर औषधियों उपलब्ध हो सके, साथ ही औषधि विक्रय संस्थान द्वारा बेची जाने वाली ऐसी औषधियों जिनका दुरूपयोग नशे के रूप में हो सकता है। औषधि विक्रय संस्थानों द्वारा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर के पर्चे के बिना यदि कोई शेडयूल एथ, एच। एवं एक्स का विक्रय किये जाने के संबंध में कोई प्रकरण पाया जाता है तो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली, 1945 के तहत् कठोर कार्यवाही की जाएगी सभी निजी चिकित्सालयों/ नर्सिंग होम परित्तर में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के मालिक, कर्मचारी, स्टॉफ अथवा चिकित्सालयों के स्टॉफ द्वारा मरीजों को अथवा मरीजों के परिजन को उनके ही औषधि विक्रय संस्थान से ही औषधि क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं कर सकते । इस प्रकार का कृत्य करते पाए जाने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कठोर कार्यवाही की जाएगी।