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CG में एसीबी और ईओडब्ल्यू की छापेमारी, 100 अधिकारी, नेता-मंत्री के घर में घुसे धड़ाधड़

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की है. प्रदेश में हुए शराब घोटाले को लेकर एसीबी और ईओडल्ब्यू की टीम ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके करीबियों के ठिकाने पर फिर छापा मारा. शनिवार सुबह ईओडलब्यू की टीम ने रायपुर, जगदलपुर, सुकमा, तोंगपाल, दंतेवाड़ा, अंबिकापुर सहित करीब 15 ठिकानों पर दबिश दी है. लगभग 100 अफसरों की अलग-अलग टीमों ने छापा मारा. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, सुकमा और अंबिकापुर में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की संयुक्त टीमों ने शनिवार को छापा मारा. यह कार्रवाई शराब घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को लेकर की गई. सूत्रों के मुताबिक, दंतेवाड़ा जिले के तोंगपाल और सुकमा में पूर्व मंत्री कवासी लखमा से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापे मारे गए. कांग्रेस नेता राजकुमार तांबों के ठिकानों पर छापा दंतेवाड़ा में कांग्रेसी नेता राजकुमार तांबों के निवास पर ACB और EOW की टीमें सुबह पहुंचीं. तांबों को कवासी लखमा का करीबी और गरीबों का नेता माना जाता है. सूत्रों का कहना है कि टीमें महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं. शराब घोटाले से संबंधित सबूतों की तलाश में उनके घर और कार्यालयों की गहन जांच चल रही है. वहीं, अंबिकापुर में प्रतिष्ठित व्यवसायी अशोक अग्रवाल के घर ACB की टीम ने छापा मारा. अग्रवाल ध्वजाराम रामकुमार व्यवसायिक प्रतिष्ठान के संचालक हैं और शासकीय विभागों में सामग्री आपूर्ति का काम करते हैं. सकुमा जिले में 4 ठिकानों पर छापे कोतवाली थाना क्षेत्र के बसंतलाल गली स्थित उनके निवास पर सुबह तीन गाड़ियों में पहुंची ACB की टीम ने जांच शुरू की. सुकमा जिला मुख्यालय में भी ACB ने एक हार्डवेयर दुकानदार के घर छापेमारी की. आय से अधिक संपत्ति के मामले में यह कार्रवाई की जा रही है. जिला मुख्यालय में चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए. ACB और EOW की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मचा है. सभी स्थानों पर जांच जारी है और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए जा रहे हैं. अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. रायपुर के देवेंद्र नगर के शहीद हेमू कलाणी वार्ड स्थित जी नागेश्वर राव और जी श्रीनिवास राव के घर भी छापा पड़ा है। श्रीनिवास कांग्रेस से पार्षद प्रत्याशी थे। नागेश्वर राव कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा के करीबी हैं। सुबह 2 गाड़ियों में करीब 8-10 अधिकारियों ने दबिश दी है। EOW-ACB की टीम दस्तावेज खंगाल रही है। वहीं दंतेवाड़ा में कांग्रेस नेता राजकुमार तामो के घर ACB-EOW ने दबिश दी है।राजकुमार तामो को कवासी लखमा का करीबी माना जाता है। सुकमा जिले में 4 स्थानों पर छापेमारी हुई है। इसमें जिला मुख्यालय के 3 और तोंगपाल के 1 स्थान पर कार्रवाई जारी है। अंबिकापुर में कपड़ा व्यवसाय से जुड़ी फर्म के खिलाफ रेड इनमें हार्डवेयर और पेट्रोल पंप कारोबारी भी शामिल हैं। ये सभी व्यक्ति भी कवासी लखमा के नजदीकी बताए जा रहे हैं। वहीं अंबिकापुर में भी कार्रवाई की गई है। यहां ACB-EOW की टीम ने कपड़ा व्यवसाय से जुड़ी फर्म धजाराम-विनोद कुमार के संचालकों के ठिकानों पर छापा मारा है। इस फर्म का नाम पहले भी चर्चित डीएमएफ (DMF) घोटाले में आ चुका है। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। पहले भी ईडी (ED) और आयकर विभाग (IT) इन व्यापारियों पर कार्रवाई कर चुके हैं। फर्म के संचालक मुकेश अग्रवाल और विनोद अग्रवाल हैं, जिनके घरों पर शनिवार सुबह छापेमारी शुरू हुई। घोटाले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं छापेमारी के दौरान दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़ी कई अहम जानकारियां जुटाई जा रही हैं। फिलहाल ACB-EOW की टीमें जांच में जुटी हैं। पूरे नेटवर्क को खंगालने का काम चल रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। ED की ओर से दर्ज कराई गई FIR की जांच ACB कर रही है। ACB से मिली जानकारी के अनुसार साल 2019 से 2022 तक सरकारी शराब दुकानों से अवैध शराब डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर बेची गई। इससे शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। ED का आरोप- लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी।वही शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। वही ED का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। कमिशन के पैसे से बेटे का घर बना, कांग्रेस भवन निर्माण भी ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि, 3 साल शराब घोटाला चला। लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। इस दौरान 36 महीने में लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे। ईडी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। शराब सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई भरी गई। घोटाले की रकम 2100 करोड़ से ज्यादा लखमा के खिलाफ एक्शन को लेकर निदेशालय की ओर से कहा गया कि जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले की रकम 2100 करोड़ रुपए से ज्यादा है। 2019 से 2022 के बीच चले शराब घोटाले में ED के मुताबिक ऐसे होती थी अवैध कमाई।     पार्ट-A कमीशन: CSMCL … Read more

पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी पर ईडी की रेड, बैंक लोन घोटाले में CBI भी कर रही जांच

लखनऊ यूपी में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी की फर्म गंगोत्री एंटरप्राइजेज के दफ्तरों पर ED ने छापेमारी की है. लखनऊ, गोरखपुर और मुंबई में गंगोत्री इंटरप्राइजेज के दफ्तरों पर ये छापेमारी की गई है. 1500 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में सीबीआई जांच पहले से ही चल रही है. अब ED ने भी PMLA एक्ट में केस दर्ज किया है. आपको बता दें कि बसपा से विधायक रहते हुए दिवंगत बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी ने गंगोत्री इंटरप्राइजेज के नाम पर कई बैंकों से लोन लिया था. बैंक ऑफ़ इंडिया के क्लस्टर में लोन देने वाले बैंक ने शिकायत की थी, जिसके बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी. वहीं, अब ईडी ने भी मनी लांड्रिंग एक्ट में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस क्रम में कई जगहों पर छापेमारी की गई. पूरा मामला बैंक के लोन को दूसरी जगह निवेश कर हड़पने का है. बताया जा रहा है कि विनय शंकर तिवारी ईडी की कई नोटिस के बाद भी बयान के लिए पेश नहीं हो रहे थे. जिसके बाद सोमवार तड़के ईडी की दर्जन भर टीमों ने तिवारी के तमाम ठिकानों पर छापेमारी की. करीब 4 घंटे टीम ने जांच-पड़ताल की और जानकारी जुटाई. मालूम हो कि विनय साल 1985 से लेकर 2007 तक विधायक और अलग-अलग सरकारों में मंत्री रहे बाहुबली हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं. एक समय तिवारी की पूरे पूर्वांचल में तूती बोलती थी. लेकिन समय के साथ निजाम बदला तो तिवारी परिवार का रसूख भी मंद पड़ता गया. फिलहाल, तिवारी परिवार और यूपी सरकार से अदावत जगजाहिर है. कई मौकों पर विनय तिवारी सरकार के मुखिया पर हमलावर रहे हैं.  

ED को सट्टेबाजी आरोपी के मध्य प्रदेश बैंक लॉकर से मिला 3.5 किलो से ज्यादा सोना

इंदौर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इंदौर की टीम ने क्रिकेट की ऑनलाइन सट्टेबाजी में शामिल आरोपितों के बैंक लाकर से विदेशी सोना जब्त किया है। ईडी ने सट्टेबाजी में आरोपित संजय अग्रवाल के बैंक लॉकर को मंगलवार को खुलवाकर जांच की। इस दौरान विदेशी सोने के बिस्किट जिनका वजन 3.50 किलो है, बरामद हुए। साथ में 750 ग्राम गहने भी मिले हैं। इन सबकी कुल कीमत 3.36 करोड़ आंकी गई है। सोने और गहनों को ईडी ने जब्त कर लिया है। इंदौर और लुधियाना पहुंची थी टीम 12 दिसंबर को ईडी ने उज्जैन के सट्टेबाज पीयूष चौपड़ा और उसके सहयोगियों के ठिकाने पर छापे मारकर जांच की थी। सट्टेबाजी के उसके कारोबार में शामिल सहयोगियों के ठिकानों पर इंदौर और लुधियाना में भी टीमें पहुंची थीं। बैंक अकाउंट और लॉकर फ्रीज कर दिए चौपड़ा के सहयोगी इंदौर के संजय अग्रवाल के ठिकानों पर भी ईडी की टीम पहुंची थी। प्रारंभिक जांच में बैंक खाते और लॉकर फ्रीज कर दिए गए थे। मंगलवार को अग्रवाल के लॉकरों को खुलवाना शुरू कर जांच को आगे बढ़ाया गया। टेनिस के मैंचों पर भी ऑनलाइन सट्टेबाजी ईडी के अनुसार इंदौर-उज्जैन के ये सट्टेबाज अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े थे। क्रिकेट के साथ टेनिस के मैचों पर भी ऑनलाइन सट्टेबाजी चलाते थे। फर्जी दस्तावेजों से मोबाइल सिम हासिल कर ये रैकेट चलाते थे। साथ में हवाला व मनी लांड्रिंग के सबूत भी मिलने के बाद ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट में केस दर्ज किया था। दिसंबर के छापों में 31 लाख रुपये की नकदी और आठ करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

कवासी लखमा को हर महीने मिलते थे 50 लाख रुपए, छत्तीसगढ़-ED की ECIR में किया दावा

रायपुर. छत्तीसगढ़ में हुआ शराब घोटाला काफी लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सुर्खियों पर है. इस मामले में शनिवार को भी पूर्व मंत्री कवासी लखमा समेत कई अन्य के खिलाफ ईडी ने दबिश देकर कार्रवाई की. सूत्रों से खबर है कि ईडी ने अपनी ECIR में दावा किया है कि घोटाले में बतौर कमीशन हर महीने 50 लाख रुपए पूर्व मंत्री कवासी लखमा को भी मिलते थे. हालांकि, कवासी लखमा ने हर महीने कमीशन मिलने की बात से इनकार किया है. इस घोटाले में अन्य नेताओं और अफसरों का भी नाम सामने आया है. आपको बता दें कि ईडी ने अब तक इस मामले में करीब 65 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. वहीं कवासी लखमा ने अब खुद अपने आप को अनपढ़ बता दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस शासनकाल में राजस्व के लिहाज से सबसे अहम आबकारी विभाग से जुड़े तमाम काम क्या कवासी लखमा खुद या उनकी आड़ में कोई और करते थे ?

सौरभ शर्मा मामले में ED की एंट्री, घर और दफ्तर लिया कब्जे में, CRPF जवानों के साथ सर्चिंग जारी

भोपाल मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा मामले में शुक्रवार को बड़ा अपडेट सामने आया है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीम भोपाल और ग्वालियर स्थित सौरभ के घर और दफ्तर पहुंच गई है. लोकायुक्त और आयकर विभाग के ईडी इस मामले की जांच करने में जुटी है. लोकायुक्त का छापा पड़ने के बाद से ही फरार चल रहे सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी ई-7 स्थित घर और दफ्तर में सीआरपीएफ जवानों के साथ ED की सर्चिंग जारी है. जबकि ग्वालियर में विनय नगर सेक्टर-2 स्थित सौरभ के पैतृक घर पर भी एजेंसी ने दबिश दी है. दोनों  शहरों के की पॉश इलाकों में सौरभ शर्मा का घर है. दरअसल, लोकायुक्त छापे मामले का प्रमुख आरोपी सौरभ शर्मा फ़िलहाल पत्नी दिव्या समेत फरार चल रहा है. उसके वकील ने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया. बता दें कि लोकायुक्त पुलिस के छापे में पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा के पास 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति मिली है, जिसमें 2.87 करोड़ रुपये नकद और 234 किलोग्राम चांदी शामिल है.   भ्रष्टाचार निरोधक लोकायुक्त पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि लोकायुक्त पुलिस ने 18 और 19 दिसंबर को सौरभ शर्मा के आवास और कार्यालय की तलाशी ली थी. लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद ने बताया कि सौरभ शर्मा के पिता आरके शर्मा सरकारी डॉक्टर थे और उनकी 2015 में मृत्यु हो गई थी. आईपीएस अधिकारी ने बताया कि इसके बाद सौरभ शर्मा को 2015 में अनुकंपा के आधार पर राज्य परिवहन विभाग में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति मिली और उसने 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली. उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा ने भ्रष्ट तरीकों से अर्जित धन का इस्तेमाल भारी संपत्ति अर्जित करने में किया, जिसमें अपनी मां उमा, पत्नी दिव्या, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों चेतन सिंह गौड़ और शरद जायसवाल के नाम पर स्कूल और होटल स्थापित करना शामिल है. आयकर विभाग ने शर्मा के सहयोगियों गौड़ से नकदी और सोना भी जब्त किया है. प्रसाद ने बताया कि तलाशी के दौरान मिले बैंक विवरण और जमीन के दस्तावेजों की जांच की जा रही है. सौरभ के पास से मिली थी चांदी और कैश दरअसल, लोकायुक्त टीम ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापा मारा था। जहां से 235 किलो चांदी और 2.95 करोड़ रुपए कैश मिले थे। वहीं 19 दिसंबर की देर रात मेंडोरी के जंगल से एक कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए कैश आईटी की टीम ने बरामद किया था। घर के सामान, आभूषण और नगद जिसकी कुल कीमत 3 करोड़ 86 लाख रुपये है। सौरभ के सहयोगी के निवास से भी मिले थे करोड़ों रुपये वहीं आरोपी के कार्यालय जहां उनका सहयोगी चेतन सिंह गौर का निवास भी है, वहां से चांदी और नगद, कुल 4 करोड़ 12 लाख की संपत्ति बरामद की गई थी। बताया जा रहा है कि प्रदेश के अलग-अलग जगह पर बेनामी संपत्ति के दस्तावेज भी मिले थे। सौरभ शर्मा को पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। उन्होंने सिर्फ 10-12 साल की नौकरी की, फिर परिवहन विभाग से वीआरएस ले लिया था। आयकर विभाग के अधिकारियों के हाथ लगी सौरभ की डायरी से बड़ा खुलासा हुआ। डायरी की मानें तो परिवहन विभाग में हर साल 100 करोड़ का काला हिसाब होता था। प्रदेश के 52 RTO और बड़े अफसरों के नाम, नंबर, पता के साथ हर माह पहुंचने वाली रकम लिखी है। उगाही की काली कमाई का पैसा ऊपर तक पहुंचाने का अनुमान है। सौरभ के सहयोगी चेतन का 150 पन्ने में बयान दर्ज हुआ। चेतन ने अफसरों के साथ कई बड़े नेताओं से सौरभ के गठजोड़ का भी खुलासा किया है। इस मामले में लोकायुक्त, आईटी के बाद ईडी की एंट्री हुई। प्रवर्तन निदेशालय ने सौरभ शर्मा और उसके साथी चेतन के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था। दुबई से लौटने के बाद सौरभ शर्मा और उसके परिवार से पूछताछ की जाएगी। IT का लुक आउट सर्कुलर, सौरभ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज आयकर विभाग ने लुक आउट सर्कुलर जारी किया था। वहीं दुबई में बैठे सौरभ शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए भोपाल कोर्ट में पिटीशन दायर की थी, लेकिन भोपाल कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी। इस मामले में आज शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन वकील के विशेष अनुरोध पर जज ने कल गुरुवार को ही सुनवाई कर दी।सौरव शर्मा के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि आरोपी लोक सेवक नहीं है, इसलिए उसे अग्रिम ज़मानत का लाभ दिया जाए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उसे लोक सेवक मानते हुए एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया। फिलहाल इस पूरे मामले में लोकायुक्त, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय, तीनों एजेंसियां जांच में जुटी हुई है।  

लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री

भोपाल  लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की एंट्री हो गई है। ईडी ने सौरभ शर्मा और चेतन सिंह गौर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में सौरभ के परिवार से भी पूछताछ की जाएगी। इधर जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे ही नए-नए खुलासे भी हो रहे हैं। अब सौरभ के बारे में पता चला है कि वह नौकरी छोड़ने के बाद भी परिवहन विभाग में सक्रिय था। अपने लोगों को परिवहन के चेक पोस्टों पर भेजा करता था। हालांकि तब सितंबर 2023 में कुछ अधिकारियों ने इसका विरोध करते हुए जानकारी ऊपर तक भी पहुंचाई थी, लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं अब लोकायुक्त और आयकर विभाग के रडार पर आने के बाद सौरभ शर्मा के बारे में ये सारी बातें सामने आ रही हैं। हालांकि जिन अधिकारियों के सामने तब ये मामले आए थे, अब वे भी कुछ कहने से बच रहे हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो सौरभ शर्मा के पास करीब 12 लोगों की ऐसी टीम थी, जिनको परिवहन के चेक पोस्टों पर वसूली का अनुभव था। बीच-बीच में उसके लोगों के वीडियो भी सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर वायरल हुए थे, तब मामला ऊपर तक भी पहुंचा था, लेकिन लिखित शिकायत से पहले ही पूरा मामला दबा दिया गया था। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सौरभ काफी सतर्क रहकर काम करता था। उसे नाकों की भी पूरी खबर रहती थी। अगर उसके लोगों की कुछ शिकायत आती थीं तो वह अपने रसूख का उपयोग कर उसे दबा देता था। आयकर विभाग का बिल्डर के बाद सौरभ पर फोकस आयकर विभाग की टीम ने बिल्डर के यहां छापेमारी में अहम राजफाश करने के बाद अब सौरभ शर्मा पर फोकस बढ़ा दिया है। दिल्ली से दिशा-निर्देश मिलने के बाद आयकर विभाग ने सोने और 10 करोड़ रुपये की नकदी की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। सौरभ के दुबई से भारत आने के बाद उसे पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। ऊपर से रकम को होल्ड करने के मिले निर्देश आयकर सूत्रों का कहना है कि रातीबड़ में एक फार्म की जमीन पर खड़ी कार से जब्त सोना और रुपये को लोकायुक्त को वापस करने की चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। आला अधिकारियों की बैठक के बाद रकम को होल्ड करने का निर्णय लिया गया है। जब तक सोने की पूरी जानकारी नहीं मिल जाती है, तब तक रकम और सोना आयकर विभाग के पास ही रहेगा। पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा… पढ़िए अब तक की पूरी कहानी     पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के यहां कुछ रोज पहले ही लोकायुक्त ने भोपाल निवास व कार्यालय पर छापा मारा था। सौरभ मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला है।     जो गाड़ी आयकर की टीम ने पकड़ी, उसमें 54 किलो सोना व नौ करोड़ से ज्यादा नकद मिला था। यह गाड़ी सौरभ के नजदीकी चेतन सिंह गौर की थी। सौरभ की ग्वालियर के थाटीपुर में ससुराल है।     सोशल मीडिया पर पहले सौरभ व उसकी पत्नी दिव्या और इसके बाद एक एक करके सभी रिश्तेदार व नजदीकियों ने अपने फेसबुक व इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर लिए हैं। परिवहन महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा सौरभ को लेकर परिवहन मुख्यालय से लेकर जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय तक में इन दिनों भारी चर्चा है। सौरभ शर्मा के कई जानने वाले कार्यालयों में पदस्थ हैं और दबी जुबान से अलग-अलग बातें कर रहे हैं। विभाग के कुछ लोगों का कहना है कि सौरभ ने ग्वालियर में शुरुआत जरूर की, लेकिन इसके बाद भोपाल की ओर रुख करने में देर नहीं की। सौरभ के अलग-अलग कारोबारों में पार्टनर भी हैं। जिस तरह रोहित तिवारी व शरद जायसवाल पार्टनर हैं, उसमें एक मेहता भी सौरभ का काफी नजदीकी है। शरद जायसवाल होटल फाटिगो भोपाल का भी काम देखता है। वहीं मेहता भी होटल से लेकर रियल स्टेट कारोबार में सौरभ का साथ देता है। सौरभ की नियुक्ति में पूर्व विधायक का बड़ा हाथ इस बीच, परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की नियुक्ति नियम विरुद्ध बताई जा रही है। इसमें ग्वालियर अंचल के कांग्रेस से जुड़े एक कद्दावर नेता और पूर्व विधायक का बड़ा हाथ है। तत्कालीन कलेक्टर पर भोपाल तक से दबाव डलवाकर दो बार अनुकंपा नियुक्ति को लेकर प्रस्ताव भिजवाया गया। परिवहन आयुक्त के स्टेनो ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। आखिर सौरभ को यह लोग परिवहन विभाग में लाने में कामयाब हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री तक से पूर्व विधायक ने प्रदेश के मंत्रियों को सौरभ के लिए सिफारिश कराई थी। यह पूर्व विधायक सौरभ के परिवार से सालों से जुड़े हैं। सौरभ की नियुक्ति होने के बाद उसे परिवहन विभाग के दांव-पेंच सीखते में अधिक समय नहीं लगा। दो साल तक भाजपा सरकार में उसने पूरे दांव-पेंच सीखकर परिवहन चेक पोस्टों का ठेका उठाया। दो बार पीएससी मुख्य तक पहुंचा, अनुकंपा नियुक्ति से लगा पैसा कमाने का चस्का प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले मनोज शर्मा बताते हैं कि सौरभ पढ़ने में बहुत होशियार था। कोचिंग के टेस्ट में अव्वल आता था। उसमें प्रतिभा थी। दो बार उसने एमपीपीएससी दी और प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की मुख्य परीक्षा तक पहुंचा। एक बार साक्षात्कार में रह गया। इसी दौरान पिता के निधन के बाद उसकी अनुकंपा नियुक्ति परिवहन विभाग में हो गई। यहां से उसे पैसा कमाने का चस्का लगा।

पीपुल्स ग्रुप की 280 करोड़ की सम्पत्ति ED ने की कुर्क

भोपाल  एक समय भोपाल की प्रमुख जगहों पर निर्माण और अपनी भव्यता के लिए मशहूर रहे पीपुल्स समूह को बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने समूह की भोपाल में 280 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली है। प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में की है। ईडी के अनुसार पीपुल्स समूह को विदेशी निवेशकों से 494 करोड़ रुपये का निवेश मिला था। इसके बाद पीपुल्स ग्रुप के सदस्यों ने यह राशि निकालकर व्यक्तिगत खर्च के उपयोग कर ली। बाद में इस मामले की शिकायत पीएमएलए कोर्ट में शिकायत की गई थी। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई ईडी ने पीपुल्स ग्रुप की कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ग्वालियर, पीपुल्स इंटरनेशनल, सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पीजीएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, पीपुल्स जनरल हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के खिलाफ कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 447 के अंतर्गत जांच की। इस जांच में सामने आया कि पीपुल्स ग्रुप के सदस्यों ने एफडीआई राशि का उपयोग कर खुद को समृद्ध किया है। राशि में गड़बड़ी करने के लिए समूह के लोगों ने संदिग्ध तरीकों और साधनों का उपयोग किया है। राशि में गड़बड़ी करने के लिए समूह के लोगों ने संदिग्ध तरीकों और साधनों का उपयोग किया है। इसके चलते 3 कंपनियों के शेयरधारकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। आपको बता दें कि पीपुल्स ग्रुप की कंपनी पीपुल्स इंटरनेशनल एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पीजीएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और पीपुल्स जनरल हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के तहत 494 करोड़ रुपए की राशि मिली थी। वर्ष 2000-2011 के दौरान पीपुल्स ग्रुप ने इस राशि को निकाल लिया था। इसके अलावा ऋण, सिक्योरिटी डिपाजिट और अग्रिम राशि भी वर्ष 2000 से 2022 के दौरान निकाली गई है। यह संपत्ति हुई है कुर्क 280 करोड़ रुपए की कुर्क प्रॉपर्टी में जो संपत्ति शामिल हैं, उसमें पीपुल्स स्वामित्व और शेयर की संपत्ति हैं- पीपुल्स इंटरनेशनल एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पीजीएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, पीपुल्स जनरल हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल में एक आवासीय संपत्ति और विभिन्न बैंक खाते। पहले भी हुई कार्रवाई गौरतलब है कि इसी मामले के पहले भी ईडी ने एक नवंबर 2023 को 230.4 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की थी। इसमें ग्रुप की भूमि, भवन और मशीनरी, कॉलेज, स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र, पेपर मिल, अखबारी कागज, मशीनरी शामिल हैं। बता दें कि पीपुल्स ग्रुप की कुर्क की गई ज्यादातर प्रॉपर्टी भोपाल के भानपुर क्षेत्र में है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले नवंबर 2023 में भी भोपाल के पीपुल्स ग्रुप की 230.4 करोड़ की संपत्ति अटैच की थी। निदेशालय ने इसकी जानकारी गुरुवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करके दी थी। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत मामले दर्ज हुए थे। इसमें कार्रवाई करते हुए ईडी ने पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च सेंटर, पीपुल्स यूनिवर्सिटी, पीपुल्स इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की जमीन, पेपर मिल, बिल्डिंग और मशीनरी को अटैच किया है। होटल राजा भोज को भी अटैच किया गया था।

ईडी हल्दिया, दुर्गापुर और कोलकाता समेत राज्य के कई निजी मेडिकल कॉलेजों पर छापेमारी की

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को पूर्वी मेदिनीपुर के हल्दिया में मेडिकल कॉलेज एडमिशन कोटा भ्रष्टाचार मामले में तलाशी अभियान चलाया। ईडी हल्दिया, दुर्गापुर और कोलकाता समेत राज्य के कई निजी मेडिकल कॉलेजों पर छापेमारी कर रही है। कथित तौर पर, इस मामले में पैसे के बदले फर्जी प्रमाण जमा किए गए और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिए गए। इस साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले पर चिंता जताई थी। पूरे देश में 28 जगहों पर एमबीबीएस एडमिशन में कोटा भ्रष्टाचार की खबरें आई हैं। प्रत्येक छापामारी दल को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों द्वारा सुरक्षा प्रदान की गई। सूत्रों ने बताया कि मेडिकल दाखिलों में करोड़ों रुपये की अनियमितताएं मुख्य रूप से राज्य में संचालित कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों में हुई हैं। सूत्रों ने बताया कि हल्दिया में छापेमारी और तलाशी अभियान तामलुक से पूर्व माकपा लोकसभा सदस्य लक्ष्मण सेठ के आवास पर चलाया जा रहा है। सेठ हल्दिया में निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों का संचालन करने वाला एक गैर सरकारी संगठन चलाते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में संचालित आठ निजी मेडिकल कॉलेज ईडी की जांच के दायरे में थे। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने बिधाननगर सिटी पुलिस के तहत इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर जांच शुरू की थी। एनआरआई कोटे के तहत मेडिकल प्रवेश में अनियमितताओं को सबसे पहले सितंबर में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उजागर किया था। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ऐसे कई प्रवेशों में भारी नकदी लेनदेन के बदले फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करना शामिल था। उन्होंने राज्य स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर भी अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप लगाया था।  

लिंक मिलने पर ईडी ने की बड़ी कार्रवाई, छत्तीसगढ़-रायपुर महाराष्ट्र बिटकॉइन में गौरव मेहता के कई ठिकानों पर छापे

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की है। महाराष्ट्र बिटकॉइन मामले से जुड़े होने के बाद ईडी ने गौरव मेहता के ठिकानों पर छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को गौरव मेहता के छत्तीसगढ़ ठिकानों पर छापेमारी की, जो कथित तौर पर चुनावी राज्य महाराष्ट्र में बिटकॉइन लेनदेन मामले से जुड़े हैं। यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के तहत की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मेहता के ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। भाजपा ने एनसीपी नेता और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस नेता नाना पटोले पर मौजूदा चुनावों में अवैध रूप से बिटकॉइन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, क्योंकि उसके नेताओं ने कथित तौर पर एक रिकॉर्डिंग चलाई है, जिसमें दावा किया गया है कि यह सुले की आवाज है। मेहता कथित तौर पर इन लेनदेन से जुड़े हैं। सांसद सुले ने आरोपों से इनकार किया है। सूत्रों के अनुसार, ईडी मेहता और कुछ अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने भोले-भाले लोगों से बिटकॉइन के रूप में बड़ी रकम (2017 में छह हजार 600 करोड़ रुपये) इकट्ठा की और बिटकॉइन के रूप में 10 प्रतिशत प्रति माह रिटर्न का झूठा वादा किया। यह मामला महाराष्ट्र और दिल्ली में दर्ज पुलिस एफआईआर से जुड़ा है।

महाराष्ट्र में सुले पर लगे हैं गंभीर आरोप, वोटिंग के बीच ऐक्शन में ED, बिटकॉइन केस में छापेमारी

मुंबई महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए चल रही वोटिंग के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चुनावी राज्य महाराष्ट्र के बिटकॉइन मामले से कथित तौर पर जुड़े गौरव मेहता के छत्तीसगढ़ स्थित परिसरों पर बुधवार को छापेमारी की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह तलाशी मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जारी जांच के तहत की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मेहता के ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापेमारी की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता एवं बारामती से सांसद सुप्रिया सुले तथा कांग्रेस नेता नाना पटोले पर मौजूदा चुनावों में अवैध रूप से बिटकॉइन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इसके नेताओं ने एक रिकॉर्डिंग सुनाई जिसमें सुले की आवाज होने का आरोप लगाया गया है। सुले ने आरोपों से इनकार किया है। सूत्रों ने बताया कि ईडी मेहता और कुछ अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने भोले-भाले लोगों से बिटकॉइन के रूप में भारी धनराशि (जिसका मूल्य 2017 में 6,600 करोड़ रुपये था) एकत्र की और उनसे बिटकॉइन के रूप में 10 प्रतिशत मासिक रिटर्न का झूठा वादा किया। यह मामला महाराष्ट्र और दिल्ली में दर्ज पुलिस प्राथमिकी से संबंधित है। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए बुधवार को मतदान जारी है। राज्य में दोपहर तीन बजे तक 45.53 फीसदी मतदान हो चुका है। महाराष्ट्र के अलावा, झारखंड और यूपी में उपचुनावों के लिए भी वोट डाले जा रहे हैं। सभी राज्यों के चुनावी नतीजों का ऐलान 23 नवंबर को होगा। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी और महायुति में मुख्य मुकाबला है। एमवीए में कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना शामिल है, जबकि महायुति में बीजेपी, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी हैं। बिटकॉइन मामले में बीजेपी का सुले और पटोले पर निशाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव के खर्च के लिए अवैध रूप से ‘बिटकॉइन’ का उपयोग करने में कथित संलिप्तता के लिए महाराष्ट्र के विपक्षी नेताओं सुप्रिया सुले और नाना पटोले पर अपना हमला तेज करते हुए दावा किया कि जांच के दौरान उनकी भूमिका सामने आ जाएगी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष से इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए कहा। एक संवाददाता सम्मेलन में पात्रा ने विपक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि महाराष्ट्र चुनाव के बीच उसे निशाना बनाने की ‘साजिश’ के पीछे भाजपा का हाथ था। उन्होंने दावा किया कि संदिग्ध ‘क्रिप्टो’ मुद्रा धोखाधड़ी वर्षों पहले हुई थी और विपक्षी गठबंधन ने पिछले चुनाव में भी पैसे का इस्तेमाल किया था।

हवाला घोटाले में गिरफ्तार दो बांग्लादेशी नागरिकों के बैंक खातों की भी ईडी अधिकारी जांच कर रहे

कोलकाता पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हवाला मामले में उसके द्वारा गिरफ्तार किए गए दो बांग्लादेशी नागरिकों रोनी मोंडल और समीर चौधरी के बैंक खातों की जांच कर रहा है। उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर में रहने वाले मंडल के बहन, बहनोई और भतीजे के बैंक खातों की भी ईडी अधिकारी जांच कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच अधिकारियों का मानना है कि मंडल के पास उच्च स्तरीय प्रभावशाली राजनीतिक संपर्क हैं, जिसके कारण वह बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद स्थानीय बैरकपुर नगर पालिका से शहरी नागरिक निकाय के लिए अनुबंध कार्य करने हेतु व्यापार लाइसेंस प्राप्त करने में सक्षम हो गया। जांच अधिकारियों का मानना है कि मंडल इलाके में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की विभिन्न जनसभाओं में मौजूद था। सूत्रों ने बताया कि उनके बैंक खातों की जांच से अधिकारियों को पैसे के लेनदेन के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी, जिससे समय के साथ प्रभावशाली लोगों की पहचान हो सकेगी। मंडल और चौधरी के अलावा ईडी अधिकारियों ने हवाला घोटाले के सिलसिले में पिंटू हलदर और पिंकी बसु नामक दो नागरिकों को भी गिरफ्तार किया था। मंगलवार को ईडी के अधिकारियों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों के साथ पश्चिम बंगाल और झारखंड में फैले हवाला घोटाले के सिलसिले में पश्चिम बंगाल में 12 स्थानों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। इस घोटाले का संबंध बांग्लादेश से भी है। इन 12 स्थानों में उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में एक महिला का घर भी शामिल है, जिसके खिलाफ रांची में मामला दर्ज किया गया था। संबंधित महिला ने बांग्लादेश से अन्य महिलाओं को रोजगार का झांसा देकर अवैध रूप से पश्चिम बंगाल में प्रवास करवाया और फिर उन्हें अंतर-राज्यीय हवाला रैकेट में शामिल किया, जिसमें मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और झारखंड शामिल थे। इन बांग्लादेशी महिलाओं को हिंदू नामों वाले आधार कार्ड जैसे फर्जी दस्तावेज भी दिए गए। सूत्रों ने बताया कि इनमें से कुछ बांग्लादेशी महिलाएं रांची भागने में सफल रहीं और वहां के एक स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। चूंकि, हवाला कारोबार धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के दायरे में आता है, इसलिए प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करने के बाद ईडी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले को अपने हाथ में ले लिया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि हवाला के जरिए आए धन का एक हिस्सा परिवहन व्यवसाय में भी निवेश किया गया था।  

फर्जी बैंक खाता खुलवाकर लेन-देन का आरोप, छत्तीसगढ़ में पूर्व सीएम के करीबी पर ED ने दर्ज किया मामला

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी केके श्रीवास्तव के खिलाफ पीएमएलए और एफईओए के तहत मामला दर्ज किया है. इसके पहले तेलीबांधा थाने में केके श्रीवास्तव के खिलाफ 500 करोड़ रुपए का ठेका दिलवाने के नाम से 15 करोड़ रुपए की ठगी करने का अपराध दर्ज किया गया था. बताया जा रहा है कि पुलिस की जांच में पाया गया कि केके श्रीवास्तव ने दिल्ली और मुंबई में जोमैटो तथा स्विगी में काम करने वाले लड़कों के नाम से फर्जी बैंक खाता खुलवाकर 500 करोड़ रुपए का ट्रांजैक्शन किया गया है. इस बात की जानकारी रायपुर पुलिस ने ईडी और आयकर विभाग को पत्र लिखकर दी थी. मामले में अब ईडी ने रायपुर पुलिस की एफआईआर के आधार पर केके श्रीवास्तव के खिलाफ पीएमएलए ‘धन शोधन निवारण अधिनियम‘ (Prevention of Money Laundering Act) और एफईओए ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’ (Fugitive Economic Offender Act-FEO) के तहत मामला दर्ज किया है. जानकारी के अनुसार, केके श्रीवास्तव ने दिल्ली के रावत एसोसिएट के डायरेक्टर अर्जुन रावत को स्मार्ट सिटी लिमिटेड रायपुर में 500 करोड रुपए का ठेका दिलवाने के नाम से विभिन्न बैंक अकाउंट में 15 करोड़ रुपए डलवाए थे. रावत एसोसिएट्स कंपनी – हाइवे कंस्ट्रक्शन, सरकारी ठेके बिल्डिंग निर्माण और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम करती है. कंपनी के डायरेक्टर की केके श्रीवास्तव से मुलाकात 2023 में आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद कृष्णन के माध्यम से हुई थी. राखड़ और फ्लाई ऐश का काम करने वाले केके श्रीवास्तव ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का करीबी बता ठेका दिलाने के नाम पर 15 करोड़ लिया और काम नहीं दिलाया. प्रार्थी ने पुलिस से की गई अपनी शिकायत में लिखा है कि केके श्रीवास्तव ने उन्हें रायपुर बुला प्रदेश के सबसे बड़े नेता से मिलवाया था. बड़े नेता ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा था कि केके भरोसे के आदमी है, आपका काम हो जाएगा. लेकिन काम नहीं होने पर रकम वापसी के लिए तीन-तीन करोड़ के चेक दिए गए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए. पुलिस के अपराध दर्ज करने की जानकारी लगते ही केके श्रीवास्तव परिवार के साथ फरार हो गया. पुलिस ने उन्हें भगोड़ा घोषित करते हुए दस हजार रुपए का इनाम रख दिया गया. थाने में अपराध दर्ज होने के बाद रायपुर सत्र न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद केके श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. केके श्रीवास्तव के अधिवक्ता ने इसे धोखाधड़ी न मानते हुए आपसी लेनदेन का मामला बता जमानत देने का निवेदन किया था. याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मामले में गंभीर टिप्पणी की थी. पुलिस द्वारा पेश की गई तगड़ी केस डायरी और जमानत विरोध को देखते हुए श्रीवास्तव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अब ईडी के द्वारा मामला दर्ज करने से केके श्रीवास्तव की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

प्रदेश के 6 बड़े CA फर्म पर ED की Raid, मचा हड़कंप, भोपाल में आधा दर्जन ठिकानों पर कार्रवाई जारी

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए प्रमुख चार्टर्ड अकाउंटेंट बीसी जैन के ठिकानों पर छापा मारा है। ईडी की टीम बुधवार सुबह 6 बजे उनके अरेरा कॉलोनी स्थित निवास पर पहुंची और छानबीन शुरू की। बीसी जैन का नाम प्रदेश के बड़े उद्योगपतियों और व्यवसायियों से जुड़ा हुआ है। ईडी की टीम ने सुबह-सुबह अरेरा कॉलोनी में स्थित बीसी जैन की चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म BCP जैन एंड CO. के कार्यालय और निवास पर छापा मारा। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर की गई है। सुबह 6 बजे ईडी के अधिकारियों की टीम उनके घर और अन्य ठिकानों पर पहुंची और दस्तावेजों की जांच-पड़ताल शुरू की। सुबह 6 बजे से कार्रवाई जारी ED के अधिकारी आज सुबह लगभग 6 बजे बीसी जैन के घर पहुंचे और कार्रवाई शुरू की। इसके अलावा राज्य के बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्म्स के कुल 6 स्थानों पर भी कार्रवाई जारी है। यह छापेमारी वित्तीय अनियमितताओं और अन्य संभावित अपराधों की जांच के हिस्से के रूप में की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने बीसी जैन के अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की है। हालांकि, फिलहाल ईडी की ओर से इस छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बीसी जैन की फर्म कई प्रमुख उद्योगपतियों और व्यवसायियों के वित्तीय मामलों का प्रबंधन करती है, जिसके चलते यह छापेमारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बीसी जैन मध्य प्रदेश के प्रमुख चार्टर्ड अकाउंटेंट में से एक हैं और उनकी फर्म BCP जैन एंड CO. बड़े कारोबारियों और उद्योगपतियों के लिए वित्तीय सेवाएँ प्रदान करती है। जैन की फर्म द्वारा प्रबंधित किए जाने वाले मामलों में बड़े वित्तीय लेनदेन और उद्योगों से जुड़ी फाइलें शामिल हैं, जो इस कार्रवाई को गंभीर बनाती हैं। बीसी जैन चार्टर्ड अकाउंट फर्म चलाते हैं। उनके खिलाफ लगातार वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिली थी। जिसके बाद टीम ने छापेमारी की है। ED के अधिकारी बुधवार सुबह करीब 6 बजे बीसी जैन के घर पहुंचे। इसके अलावा प्रदेश के बड़े CA फर्म के कुल 6 ठिकानों पर भी ईडी की कार्रवाई जारी है।  

ED का खुलासा PFI ने कैंप में हथियार चलाना सिखाया, हवाला के पैसे से भारत में फैला रहा था आतंक

 नई दिल्ली  प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सिंगापुर और खाड़ी देशों जैसे कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई में 13 हजार से अधिक सक्रिय सदस्य हैं। ईडी ने बताया कि पीएफआई ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी मुस्लिमों के लिए जिला कार्यकारी समितियां (डीईसी) बनाई हैं। इन समितियों को फंड जुटाने का काम सौंपा गया है। प्रत्येक डीईसी को कई करोड़ रुपये फंड जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। विदेश से जुटाए गए फंड को गई धनराशि को बैंकिंग चैनलों के साथ-साथ हवाला चैनलों के माध्यम से भारत में ट्रांसफर किया गया था, ताकि उनके स्त्रोत का पता न लगाया जा सके। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ईडी समेत विभिन्न एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि पीएफआई की जड़ें भारत के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों तक फैली हुई हैं। इसके अलावा इसके पैसे के स्रोत को लेकर भी बड़ी जानकारियां सामने आई हैं। इस संगठन के खिलाफ जांच 2022 में शुरू हुई थी। इसका सिलसिला शुरू हुआ था दिसंबर 2020 से। तब ईडी ने कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के महासचिव केए रऊफ शेरिफ को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद पीएफआई के नेटवर्क के बारे में कई जानकारियां सामने आईं। यह संगठन भारत और विदेशों में धन इकट्ठा कर रहा है और देश में आतंकी गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है। चार साल की जांच के बाद ईडी द्वारा तैयार डोजियर में कई जानकारियां सामने आई हैं। इसमें केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, जम्मू कश्मीर और मणिपुर में इसके सदस्य और ऑफिस होने की बात सामने आई है। ईडी के डोजियर के अनुसार, 2022 की जुलाई में संगठन द्वारा पीएम मोदी पर हमले का असफल प्रयास हुआ। इसके बाद इस पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया। इस सिंगापुर और पांच खाड़ी देशों में कम से कम 13,000 सदस्य हैं। यहां से अज्ञात लोगों से कैश लिया जाता है और हवाला के जरिए से भारत भेजा जाता है। इन पैसों को ट्रस्टों और संबद्ध संस्थाओं के 29 बैंक खातों में जमा किया गया। पिछले कुछ साल में ईडी ने भारत से पीएफआई के 26 शीर्ष पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद उनकी संपत्ति और बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। ईडी के डोजियर के मुताबिक पीएफआई ने दिल्ली दंगों और हाथरस में अशांति फैलाने में भूमिका निभाई थी। 2020 के बाद से गिरफ्तार किए गए लोगों में प्रमुख शामिल हैं रऊफ शेरिफ, सीएफआई के राष्ट्रीय महासचिव शफीक पायथ, कतर में स्थित एक पीएफआई सदस्य परवेज अहमद, दिल्ली पीएफआई के अध्यक्ष और साहुल हमीद शामिल हैं। साहुल हमीद सिंगापुर से पीएफआई के लिए हवाला का कारोबार कर रहे हैं। एजेंसी के मुताबिक केरल के कन्नूर जिले के नारथ में एक हथियार प्रशिक्षण शिविर पाया गया। यहां पर फिजिकल एजुकेशन क्लास के नाम पर पीएफआई कैडरों को विस्फोटकों और हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीएफआई और उसके सहयोगियों द्वारा अब तक 94 करोड़ से अधिक रुपए जुटाने की बात सामने आई है। ईडी ने 57 करोड़ रुपये की 35 संपत्तियों को आपराधिक आय बताया है। यह संगठन कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में सक्रिय पाया गया है। इसे इन्हीं जगहों से सबसे ज्यादा पैसा पाया गया है। ईडी के मुताबिक पीएफआई का वास्तविक उद्देश्य जिहाद के माध्यम से भारत में इस्लामी आंदोलन को आगे बढ़ाना शामिल है। हालांकि पीएफआई खुद को एक सामाजिक आंदोलन के रूप में पेश करता है। साक्ष्य बताते हैं कि विरोध प्रदर्शनों का हिंसक तरीके से समर्थन करता है। ईडी ने बताया है कि पीएफआई ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी मुस्लिम प्रवासियों के लिए जिला कार्यकारी समितियां बनाई हैं। ED ने पीएमएलए के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के स्वामित्व वाली 56.56 करोड़ रुपये की 35 संपत्तियां जब्त की हैं. 16 अक्टूबर 2024 को 35.43 करोड़ रुपये की 19 संपत्तियां जब्त की गईं, जबकि 16 अप्रैल 2024 को 21.13 करोड़ रुपये की 16 संपत्तियां जब्त की गईं. ईडी की जांच एनआईए और अन्य एजेंसियों द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें पीएफआई के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हैं. पीएफआई ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत और विदेश में बैंकिंग चैनलों, हवाला और दान के माध्यम से पैसे जुटाए. कई राज्यों में 29 पीएफआई बैंक खातों में 94 करोड़ रुपये जमा किए गए. इस बीच 26 पीएफआई सदस्य गिरफ्तार हुए. फरवरी 2021 और मई 2024 के बीच 9 अभियोजन शिकायतें दर्ज की गईं. हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएफआई के पूर्व नेशनल कॉओर्डिनेटर इब्राहिम पुथनाथनी की जमानत याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी किया. अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा है. कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को करेगी. ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज करने और उन्हें जमानत देने से इनकार करने के बाद इब्राहिम पुथानाथनी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. एनआईए ने दाखिल की थी चार्जशीट एनआईए ने इब्राहिम पुथनाथनी और कुछ अन्य पीएफआई नेताओं के खिलाफ यूएपीए के तहत एक आतंकी मामले में चार्जशीट दायर की है. उन्हें 2022 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था. एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये लोग कई राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भारत और विदेशों से फंड इकट्ठा कर रहे थे और साजिश रच रहे थे. PFI को बॉम्बे हाई कोर्ट से लगा झटका इससे पहले PFI के तीन कथित सदस्यों को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा था. कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था. अदालत ने कहा कि उन्होंने 2047 तक भारत को इस्लामिक देश में बदलने की साजिश रची थी. जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की बेंच ने रजी अहमद खान, उनैस उमर खैय्याम पटेल और कय्यूम अब्दुल शेख की जमानत याचिका खारिज कर दी.  

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप सांसद संजीव अरोड़ा के घर ED के छापे

लुधियाना आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम छापेमारी करने पहुंची है। पंजाब से राज्यसभा सांसद अरोड़ा के गुरुग्राम और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। रेड को लेकर आम आदमी पार्टी भड़ उठी। दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज फिर केंद्र सरकार ने अपने तोता मैना को खुला छोड़ दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि 61 वर्षीय सांसद के गुरुग्राम स्थित घर पर एक मनी लॉन्ड्रिंग केस के छापेमारी की गई है। यह एक जमीन धोखाधड़ी से जुड़ा मामला है। संजीव अरोड़ा के अलावा पंजाब में कुछ अन्य लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है। मनीष सिसोदिया ने एक्स पर लिखा, ‘आज सुबह से आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजीव अरोड़ा जी के घर ED वाले रेड कर रहे हैं। पिछले दो सालों में इन्होंने अरविंद केजरीवाल के घर रेड कर लिया, मेरे घर रेड कर दिया, संजय सिंह के घर रेड दिया, सत्येंद्र जैन के घर रेड कर दिया। कहीं भी कुछ भी नहीं मिला। लेकिन पूरी शिद्दत से केंद्र सरकार की एजेंसियां लगी हुई है एक के बाद एक फर्जी केस बनाने में।’ सिसोदिया ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी को तोड़ने के लिए यह लोग किसी भी हद तक जाएंगे। लेकिन कोशिश कितनी भी कर ले, आम आदमी पार्टी वाले ना रुकेंगे, ना बिकेंगे, ना डरेंगे। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी छापेमारी को लेकर अपना आक्रोश जाहिर किया और कहा कि उनकी पार्टी के हौसले नहीं टूटने वाले हैं। संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, ‘एक और सुबह, एक और रेड। आप सांसद संजीव अरोड़ा के घर ED वाले पहुंचे है। मोदीजी की फर्जी केस बनाने वाली मशीन 24 घंटे आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इनको लताड़ा की झूठे केस बनवाना बंद करो, लेकिन फिर भी ED को समझ नहीं आ रहा। ये एजेंसियों कोर्ट को नही मानती, सिर्फ अपने आका की मानती है। लेकिन मोदी जी का अहंकार आम आदमी पार्टी के नेताओं के हौसलों के सामने बिल्कुल फेल है। फर्जी केस और रेड वाले हथकंडों से आप एक कट्टर ईमानदार पार्टी को तोड़ नहीं सकते मोदी जी।’

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