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स्कूल छोड़ने के बहाने अतिथि शिक्षक ने नाबालिग के साथ किया दुष्कर्म, पुलिस ने आरोपी को लिया रिमांड पर

Guest teacher rapes minor on pretext of dropping her off at school, police remands accused चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। नलखेड़ा नगर की एक शर्मनाक घटना में एक अतिथि शिक्षक द्वारा नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और शिक्षा संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। शुक्रवार सुबह 9 बजे नलखेड़ा नगर की 15 वर्षीय छात्रा स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। रास्ते में उसे उसके पूर्व शिक्षक कृष्ण प्रजापति उर्फ कन्हैयालाल मिला, जो ग्राम धरोला तहसील नलखेड़ा का निवासी है। उसने छात्रा को स्कूल छोड़ने की बात कहकर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा लिया। लेकिन, स्कूल ले जाने की बजाय वह छात्रा को अपने गांव, घर ले गया। वहां कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया और छात्रा के साथ बलात्कार किया। इस घिनौनी हरकत के बाद आरोपी ने छात्रा को धमका कर स्कूल की छुट्टी के समय उसके घर से कुछ दूर छोड़ दिया और किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी दी।छात्रा ने अपने परिजनों को सारा वाकया बताया। परिजनों ने उस दिन ही थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी अतिथि शिक्षक कृष्ण प्रजापति को गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 64, 65(1), 87, 127(2), 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5, 6 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस द्वारा आरोपी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ रिमांड पर भेज दिया गया।आरोपी का स्कूल एवं पदप्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी पहले नगर के एक निजी स्कूल में शिक्षक था। वर्तमान में वह आगर तहसील के ग्राम मथुराखेड़ी में अतिथि शिक्षक के पद पर कार्यरत है। अभिभावकों एवं समाज से सहारा समाचार की मार्मिक अपील— अपने बच्चों से हमेशा खुलकर बातें करें, उनकी गतिविधियों पर रोज ध्यान दें। बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि किसी भी असामान्य घटना, डर या धमकी की तुरंत जानकारी अपने परिवारवालों या विश्वसनीय व्यक्तियों को दें। ऐसी जागरूकता बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। समाज की सुरक्षा बच्चों की सुरक्षा से ही संभव है। आइए, मिलकर ऐसे अपराधों के खिलाफ शिक्षा संस्थानों को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएं.यदि आपके बच्चे को कोई परेशानी या डर महसूस हो तो तुरंत कार्रवाई करें। सहारा समाचार आपसे आग्रह करता है— बच्चों को हमेशा सुरक्षित रखिए और समाज में सकारात्मक जागरूकता फैलाइए।

स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शिक्षा सत्र में तैयार किया है एजुकेशन पोर्टल

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शिक्षा सत्र एक अप्रैल, 2025 से एजुकेशन पोर्टल 3.0 तैयार किया है। इस पोर्टल में विभाग से जुड़ी मानव संसाधन की व्यापक जानकारी का समावेश किया गया है। इस पोर्टल से विभाग के कर्मचारियों का डाटाबेस तैयार किया गया है। पोर्टल में मानव संसाधन से संबंधित जानकारी को कर्मचारी और विकासखण्ड स्तर पर वेरीफाई किया गया है। इसमें विभाग के करीब 2 लाख 75 हजार कर्मचारियों की समस्त जानकारी पारदर्शी रूप से पोर्टल पर प्रदर्शित की गयी है। विभाग के पौने तीन लाख कर्मचारियों के स्‍थानांतरण को भी पारदर्शी माध्यम से स्थानांतरण नीति-2022 के आधार पर ऑनलाइन ट्रांसफर मॉड्यूल तैयार किया गया है। उच्च पद प्रभार एवं अतिथि शिक्षक प्रक्रिया को भी पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा रहा है। विभाग के सभी कर्मचारियों को वेतन पर्ची उनके मोबाइल पर प्राप्त हो सके, ऐसी व्यवस्था विभाग द्वारा की गयी है। परिवेदना प्रणाली विभाग के कर्मचारी छोटी-छोटी समस्याओं के लिये जिला या मुख्यालय स्तर पर चक्कर न लगायें। इसके लिये उनकी शिकायतों निराकरण के लिये परिवेदना प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है। पोर्टल में इंटीग्रेटेड डेशबोर्ड से मुख्यालय, जिला और विकासखण्ड स्तर पर समस्त गतिविधियों की मॉनीटरिंग किये जाने की व्यवस्था की गयी है। एजुकेशन पोर्टल 3.0 में एकीकृत डाटाबेस के आधार पर जानकारी तैयार की जा रही है। यह जानकारी सुरक्षित रहे, इसके लिये ब्लॉक चेन बेस्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। विभाग में विभिन्न जानकारियों के लिये अलग-अलग पोर्टल का उपयोग अब तक किया जा रहा था। अब विभाग में एकीकृत पोर्टल के माध्यम से सभी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा सकेगा। मॉनीटरिंग सहित एआई तकनीक का उपयोग एजुकेशन पोर्टल 3.0 में ऑर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जा रहा है। पोर्टल पर दी गई सुविधा से स्कूल स्तर पर विद्यार्थी एआई जैसी तकनीक का उपयोग कर सकेंगे। सीएम राइज योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालयों में सिलेबस, कैलेण्डर, टाइम-टेबल, टीचर एण्ड क्लॉस और स्कूल ट्रांसपोर्ट जैसी गतिविधियों को ऑनलाइन किया गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूल की बसों में भी जीपीएस एवं कैमरों के माध्यम से मॉनीटरिंग की व्यवस्था एजुकेशन पोर्टल 3.0 में की गयी है। सभी सरकारी स्कूलों में उपलब्ध इन्फ्रा-स्ट्रक्चर और प्रोक्योरमेंट को भी ऑनलाइन किया गया है। अभिभावकों की सुविधा के लिये पोर्टल के माध्यम से बच्चे की डायरी को भी ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे अभिभावक अपने बच्चों के टेस्ट, मार्क्स एवं होमवर्क ऑनलाइन देख सकेंगे। विद्यार्थियों के लिये व्होकेशनल और कैरियर गाइडेंस को ऑनलाइन किया गया है, जिससे विद्यार्थी प्रगति की ओर अग्रसर हो सकें। पहली बार प्रदेश में सरकारी स्कूल की केश-बुक ऑनलाइन लिखने की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे विभाग के बजट की पूर्णत: मॉनीटरिंग किया जा सकेगा। विभाग के सभी छोटे-बड़े निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग भी ऑनलाइन करने की सुविधा पोर्टल में दी गयी है।  

उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए साल का तोहफा, 31 दिसंबर से शुरू होंगे म्यूचुअल ट्रांसफर

  लखनऊ उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए साल का तोहफा दिया है! छह महीने में दूसरी बार म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. बेसिक शिक्षा परिषद ने सर्दी की छुट्टियों में एक से दूसरे जिले में पारस्परिक स्थानान्तरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं. यह छह महीने में दूसरी बार होगा जब शिक्षकों को अंतरजनपदीय म्यूचुअल ट्रांसफर का अवसर मिलेगा. 31 दिसंबर से शुरू होगा म्यूचुअल ट्रांसफर शिक्षक सेवा नियमावली के अनुसार, गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में तबादले का प्रावधान है. इस बार भी जिले से जिले की बजाय स्कूल से स्कूल में स्थानान्तरण की योजना है. यह प्रक्रिया 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश में पूरी की जाएगी. जून में हुआ था 2700 से ज्यादा शिक्षकों का ट्रांसफर इससे पहले इसी साल गर्मी की छुट्टियों में 19 जून को 2796 परिषदीय शिक्षकों (1398 जोड़े) का तबादला हुआ था. हालांकि, तबादले का शासनादेश दो जून 2023 को जारी हुआ था, लेकिन कानूनी अड़चन के कारण शिक्षकों को सालभर इंतजार करना पड़ा था. परिषद ने शासन को भेजा प्रस्ताव स्थानान्तरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक फिर से तबादला करने का अनुरोध कर रहे हैं. बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है. सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि शासन से अनुमति मिलने पर सर्दी की छुट्टियों में अंतरजनपदीय पारस्परिक तबादले की प्रक्रिया की जाएगी.  

मध्य प्रदेश सरकार बच्चों के भविष्य से कर रही खिलवाड़ ? महज एक-एक शिक्षक से चलाए जा रहे 22 हजार विद्यालय

Is Madhya Pradesh government playing with the future of children?

Is Madhya Pradesh government playing with the future of children? 22 thousand schools are being run with just one teacher each. कमलेश ( विशेष संवादाता )भोपाल ! मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह दावे केवल कागजों ही शोभा बढ़ा रहे हैं. मध्य प्रदेश में 1275 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 22 हजार स्कूलों में महज एक-एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है. मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सीएम राईज स्कूल की शुरुआत की है. यह स्कूल सुविधाओं से युक्त है. इन स्कूलों में बच्चों को आने-जाने के लिए नि:शुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध की है, लेकिन दूसरी ओर स्थिति यह है कि 46 जिलों के 1275 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि करीब 22 हजार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं और साढ़े तीन हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी बच्चा नहीं है. 79 हजार शिक्षक पद खाली प्रदेश में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के करीब 79 हजार पद खाली हैं. हालांकि इस साल 9 हजार पदों पर भर्ती होने के बाद भी करीब 70 हजार पद खाली रह जाएंगे. जिसका सीध असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर देखें तो शहरों में स्थित स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है तो गांवों में टोटा पड़ा हुआ है. जिसकी वजह से गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है. शहरों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हर शिक्षक अपने आपको शहर में पदस्थ करने की जुगाड़ में लगा रहता है. यही कारण है कि शहरों के स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं. इंदौर में 1,337, ग्वालियर में 1,153, भोपाल में 1,115 और जबलपुर में 887 शिक्षक पदस्थ हैं, वहीं सतना, बालाघाट, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, उज्जैन, राजगढ़, भिंड, मुरैना और देवास जिलों में भी शिक्षकों की संख्या अत्याधिक है. शौचालय विहिन 20 प्रतिशत स्कूल केन्द्र सरकार के आह्वान व प्रयासों के बाद हर घर शौचालय की जरूरत तो पूरी हो गई है, लेकिन स्कूलों में इस सुविधा का अभाव है. प्रदेश में 20 प्रतिशत स्कूल शौचालयविहिन है. जहां शौचालय है वहां पानी की व्यवस्था नहीं है, ऐसे में 35.9 प्रतिशत शौचालयों का इस्तेमाल ही नहीं हो पाता. 28.4 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है. इसी राज्य प्रदेश के 5176 स्कूलों में पेयजल के इंतजाम नहीं है. 44 हजार 754 स्कूलों में खेल मैदान का अभाव है.

Teachers Day पर सामने आई नशेड़ी शिक्षक की करतूत, बच्ची की चोटी काटी, अब पुलिस कर रही तलाश

The actions of a drug addict teacher came to light on Teachers Day

The actions of a drug addict teacher came to light on Teachers Day, he chopped off the girl’s braid, now the police is searching. रतलाम ! शिक्षक दिवस के अवसर पर एक शराबी शिक्षक का नशे की हालत में छात्र की चोटी काटने का वीडियो सामने आया है. इस मामले में रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम ने दोषी शिक्षक को निलंबित करते हुए उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दे दिए हैं. रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें नशे की हालत में शिक्षक एक छात्रा के बाल काट रहा था. इस वीडियो के वायरल होने की जानकारी लगने के बाद उनके द्वारा संकुल केंद्र शासकीय हाई स्कूल नायन अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय सेमलखेड़ी 2 के शिक्षक वीर सिंह मेड़ा के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. कलेक्टर ने बताया कि वीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है. उनके द्वारा शिक्षक के पद की गरिमा के विपरीत मर्यादाहीन आचरण किया गया, जिसकी वजह से उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय हाई स्कूल गुडभेली नियत किया गया है. इसके अलावा, नशे की हालत में छात्र की चोटी काटने वाले शिक्षक के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं. छात्रा रोती रही, नहीं माना शिक्षकजब शिक्षक वीर सिंह मेड़ा छात्रा की चोटी काट रहा था, उस समय छात्रा काफी रो रही थी. वह भयभीत थी और मदद के लिए इधर-उधर देख रही थी. शिक्षक वीर सिंह ने किसी बात की चिंता किए बिना छात्रा के बाल काट दिए.

एक्सक्लूसिव खबर : किर्गिस्तान से डॉक्टरी करने वाले 82% स्टूडेंट भारत में फेल

Exclusive news: 82% of medical students from Kyrgyzstan fail in India डिग्री होने के बाद भी नहीं कर सकेंगे प्रैक्टिस; 2 हजार ही कर पाए क्वालिफाई विषेश संवाददाता  भोपाल। भारत से हर साल हजारों छात्र, रूस, यूक्रेन, किर्गिस्तान, फिलीपींस, चीन जैसे देशों में मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं। यहां पांच साल पढ़ाई करने के बाद MBBS की डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन भारत लौटने पर इनमें से केवल 18 से 20 फीसदी ही प्रैक्टिस कर पाते हैं। दरअसल, दूसरे देशों से MBBS की डिग्री लेने वाले छात्रों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) स्क्रीन टेस्ट पास करना जरूरी है, लेकिन फॉरेन से डिग्री हासिल करने वाले 80 फीसदी से ज्यादा छात्र इस एग्जाम को क्लियर ही नहीं कर पाते। पहले जानिए मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश क्यों जाते हैं छात्र  भारत में सीटों की कम संख्या, खर्च ज्यादा भारत में हर साल करीब 25 लाख छात्र NEET एग्जाम में शामिल होते हैं। यानी डॉक्टर बनने की इच्छा रखने वाले बच्चों की संख्या देश में मौजूद सीटों की संख्या से करीब 24 गुना है। नर्सिंग और पैरामेडिकल कोर्स लें या फिर रूस, चीन, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान जैसे देशों में जाकर अपना सपना पूरा करें। ये देश ऐसे हजारों बच्चों का सपना पूरा कर देते हैं।  स्टूडेंटों का कहना है कि भारत में मेडिकल की पढ़ाई काफी महंगी है। यहां कोर्स पूरा करने में 60 लाख से 2 करोड़ रुपयों तक का खर्च आता है, लेकिन यूक्रेन, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान जैसे देशों में छह साल की पढ़ाई, रहने-खाने का पूरा खर्च 22 से 25 लाख रुपयों तक ही है। यह रकम भी कई किस्तों में अदा करने की सुविधा है। अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के संस्थानों में भी बहुत से विद्यार्थी जाते हैं, लेकिन वहां पढ़ाई और रहना दोनों महंगा है। ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है। सबसे अधिक भीड़ चीन, रूस, यूक्रेन, बेलारूस, पोलैंड, किर्गिस्तान, सर्बिया, तजाकिस्तान, अर्मेनिया, अजरबैजान जैसे देशों में जाती है। यहां पढ़ाई और रहने का खर्च अपेक्षाकृत कम है।  स्टूडेंटों का कहते हैं । कि किर्गिस्तान जैसे देशों में एमबीबीएस में प्रवेश भारत की तरह कठिन नहीं है। वहां NEET जैसी परीक्षा नहीं होती, लेकिन 2021 के बाद बदले नियम से वहां की संस्थाओं में प्रवेश के लिए उन्हीं को अनुमति मिलती है जिन्होंने NEET परीक्षा को न्यूनतम अंकों से पास किया हो। इस पासिंग मार्क के साथ विद्यार्थी संबंधित विश्वविद्यालय में आवेदन करता है। वहां एक सामान्य सी परीक्षा होती है, जिसे अधिकतर विद्यार्थी आसानी से पास कर लेते हैं। 10 दिन के भीतर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर मेल पर प्रवेश पत्र आ जाता है। नेशनल मेडिकल काउंसिल पहले विदेशी विश्वविद्यालयों की सूची जारी कर उनकी मान्यता तय करती थी। अब ऐसा नहीं है। अब वहां पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी होना ही अनिवार्य है। किर्गिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई छह साल की है। इसमें पांच साल सैद्धांतिक पढ़ाई होती है और आखिरी का एक साल किसी अस्पताल में इंटर्न के तौर पर काम करते हुए बिताना पड़ता है। विदेशों से डिग्री लेकर आए 80 फीसदी छात्र प्रैक्टिस नहीं कर पाते एफएमजीई एग्जाम में विदेशों से डॉक्टरी करके आए छात्रों से तकनीकी सवाल पूछे जाते हैं। करीब 80% मेडिकल ग्रेजुएट यह परीक्षा पास ही नहीं कर पाते। उदाहरण के लिए 2023 में देश भर में 61 हजार 216 लोग एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल हुए थे। उनमें से केवल 10 हजार 261 यानी 16.65% लोग ही पास हो पाए। किर्गिस्तान में एमपी के 1200 बच्चे फंसे हैं। मप्र सरकार ने उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकालने का भरोसा दिया है। लेकिन, यहां रह रहे छात्र इस बात से नाराज है कि सरकार ने उन्हें वापस लाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए।

5वीं और 8वीं के नतीजे जारी, दोनों परिणामों में लड़कियों ने मारी बाजी

Results of class 5th and 8th released, girls won in both the results Result 2024: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। कक्षा आठ का परीक्षा परिणाम 87.71% और कक्षा पांच का परीक्षा परिणाम 90.97% रहा है।प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (एमपीबीएसई) ने कक्षा 5वीं और 8वीं के परीक्षा परिणाम जारी कर दिए हैं। कक्षा आठवीं का परीक्षा परिणाम 87.71% रहा है, वहीं कक्षा पांच का परीक्षा परिणाम 90.97% रहा। कक्षा पांच में 89.62% बालक और 92.41% बालिकाएं उत्तीर्ण हुई हैं। वहीं, कक्षा आठ में बालकों का पास प्रतिशत 85.94% और बालिकाओं का 89.56% रहा। www. rskmp.in मदरसों का परिणाम सरकारी और प्राइवेट स्कूल से पीछेकक्षा पांच की बात करें तो सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 91.53% रहा, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 90.18% बच्चे ही पास हुए। मदरसे में 73.26% बच्चे ही पास हो सके। कक्षा आठ की बात करें तो सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 86.22% रहा, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 90.60% बच्चे पास हुए। मदरसों का पास प्रतिशत 67.40% ही रहा। ग्रामीण स्कूलों का रिजल्ट बेहतरग्रामीण और शहरी स्कूलों की तुलना करें तो पांचवीं और आठवीं में ग्रामीण स्कूलों का प्रदर्शन शहरी स्कूलों से बेहतर रहा है। कक्षा पांचवीं में ग्रामीण स्कूलों में पास प्रतिशत 92.60% रहा, जबकि शहरी स्कूलों में 86.19% बच्चे ही पास हुए है। इसी तरह आठवीं कक्षा में ग्रामीण स्कूलों के 88.35 प्रतिशत बच्चे पास हो गए। वहीं, कक्षा आठवीं में शहरी स्कूलों में 86.04 प्रतिशत बच्चे ही पास हुए।

खातेगांव cm राइस विद्यालय के लिए आवंटित 5 हेक्टेयर भूमि में से सिर्फ तीन हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिला पाए खातेगांव तहसीलदार

Khategaon Tehsildar was able to get possession of only three hectares of land out of 5 hectares allotted for Khategaon CM Rice School. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं cm राइस विद्यालय प्रभारी पर इतना दबाव की केमरे पर अपना हक भी ना मांग पाएमामला देवास जिले के खातेगांव का है जहां बहु प्रचलित मामला cm राइस विद्यालय भवन निर्माण का है,जिला कलेक्टर द्वारा 5 हेक्टेयर भूमि cm राइस भवन के लिए खातेगांव शिक्षा विभाग को आवंटित की गई थी,जिस दिनांक को cm राइस भवन का भूमि पूजन हुआ उस दिनांक को किसी अन्य के कब्जे में थी संबंधित भूमि,खबरें प्रकाशित होने के पश्चात खातेगांव तहसीलदार अपने दलबल के साथ संबंधित भूमि पर पहुंचे और सीमांकन कर कब्जा दिलाने के कार्यवाही प्रारंभ की उस दौरान पीआईयू के इंजीनियर एवं शिक्षा विभाग से ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर एवं cm राइस विद्यालय प्रभारी भी वहा मौजूद थे,किंतु तहसीलदार तीन साढे तीन हेक्टेयर भूमि ही शिक्षा विभाग को हैंडोवर कर पाए, इस दौरान अनेको बार विद्यालय परिवार की ओर से 5 हेक्टर भूमि कब्जा दिलाने के लिए निवेदन किया गया लेकिन तहसीलदार ने एक ना सुनी,जब मीडिया कर्मी संबंधित खबर को प्रकाशित करने के लिए ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर एवं cm राइस विद्यालय प्रभारी से संपर्क किया तो आफ द कैमरा उन्होंने अपनी पीड़ा सुनाई और बताया कि हमें सिर्फ तीन हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिलाया गया है भविष्य में अगर वहां कोई निर्माण होना है तो उसके लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं रहेगी,मीडिया द्वारा अनेकों बार शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को कहा गया कि आपकी पीड़ा केमरे पर सुनाइए किंतु लोकल प्रशासन का शिक्षा विभाग पर इतना दबाव है कि वह अपनी पीड़ा खुलकर बता भी नहीं पाए,आखिरकार प्रशासन का यह रवैया क्या सिद्ध करना चाहता है, पूरे मामले पर भाजपा मंडल अध्यक्ष कचरू पटेल का कहना है मेरे द्वारा भी अनेकों बार खातेगांव तहसीलदार को कहा गया कि आवंटित पांच हेक्टेयर भूमि को शिक्षा विभाग के सुपुर्द किया जाए लेकिन तहसीलदार सुनने को तैयार नहीं है,जब इस पूरे मामले पर खातेगांव विधायक आशीष शर्मा से बात की गई तो विधायक आशीष शर्मा के अनुसार मेरे द्वारा तहसीलदार को निर्देशित किया गया है कि संबंधित पांच हेक्टेयर भूमि शिक्षा विभाग को आवंटित की जाए,इस पूरे मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता रवि वर्मा ने जिला कलेक्टर से पत्राचार के माध्यम से शिकायत की थी जिसमें लिखा था की शिक्षा विभाग की जमीन पर व्यावसायिक दुकान का निर्माण किया जा रहा है जवाब में जिला कलेक्टर द्वारा पत्र भेजा गया जिसमें उल्लेख किया गया क्योंकि cm राइस भवन के लिए लगभग 5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होती है इसलिए उक्त भूमि पर cm राइस भवन ना बनाते हुए अन्य स्थान पर cm राइस भवन का निर्माण किया जाएगा, तो अब कैसे मात्र 3 हेक्टेयर भूमि में cm राइस भवन निर्माण हो जाएगा क्या दोनों स्थान पर कानून की परिभाषा अलग-अलग हो गई है,अंततः एक बात साफ नजर आती है कि शिक्षा विभाग के छोटे कर्मचारियों पर प्रशासन का दबाव इतना है कि वह अपनी बात भी खुलकर नहीं रख पा रहे हैं,और खातेगांव प्रशासन की दमनकारी नीति के चलते छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए निर्माणाधीन cm राइस भवन महज 3 हेक्टेयर भूमि में निर्माण होकर ही रह जाएगा,संदर्भ में मीडिया द्वारा तहसीलदार एवं एसडीएम से अनेकों बार बात करने का प्रयास किया गया किंतु बात नहीं हो पाई

5 साल की बच्ची पर टीचर ने बरसाए थप्पड़, अस्पताल में भर्ती

Teacher slaps 5 year old girl, admitted to hospital शिवपुरी जिले में एक टीचर ने 5 साल की बच्ची की पिटाई कर दी. होमवर्क पूरा न करने पर टीचर ने बच्ची पर थप्पड़ों की बौछार कर दी. टीचर की पिटाई से बच्ची की हालत गंभीर हो गई. बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है. शिवपुर ! एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. कोलारस थाना क्षेत्र अंतगर्त आने वाले बांगरोद गांव की रहने वाली एक पांच साल की मासूम बच्ची की होमवर्क न करने पर टीचर ने पिटाई कर दी. टीचर ने बेरहमी से बच्ची के एक गाल पर थप्पड़ बरसाए, जिससे बच्ची के गाल पर टीचर द्वारा मारे गए थप्पड़ के निशान पड़ गए. वहीं आंख में भी चोट आ गई. फिलहाल मासूम बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जानकारी के मुताबिक, बांगरोद गांव निवासी कृपान सिंह रावत ने बताया कि उनकी पांच साल की बेटी तमन्ना कक्षा एक की छात्रा है. वह गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ती है. गांव में एक कोलारस कस्बे का रहने वाला शिक्षक सुनील कुशवाह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आता था. सुनील गांव की आंगनबाड़ी पर बच्चों की ट्यूशन पढ़ाता था. उसने अपनी बेटी को भी ट्यूशन भेजना शुरू कर दिया था. आज बेटी ट्यूशन का होमवर्क करके नहीं ले गई थी. बच्ची के गाल पर उंगलियों के निशानइससे भड़के शिक्षक सुनील कुशवाहा ने अन्य छात्राओं से उसके हाथ पकड़वाए और बेटी के गाल पर थप्पड़ों की बौछार कर दी. शिक्षक की मारपीट से बेटी के गाल पर उंगलियों के निशान बन गए. घंटों बाद उंगलियों के निशान नहीं हटे. उसकी एक आंख में भी चोट आ गई. साथ ही कान में भी लगातार दर्द हो रहा था. थाने में नहीं की शिकायतकृपान सिंह रावत ने बताया कि आनन-फानन में वह अपनी बेटी को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उसे भर्ती कर इलाज किया जा रहा है. वहीं बच्ची के पिता कृपान सिंह ने आरोपी शिक्षक सुनील कुशवाहा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है. जब कोलारस पुलिस से बच्ची से मारपीट को लेकर जानकारी ली गई तो पुलिस ने कहा कि अभी तक मामले की शिकायत थाने में नहीं आई है. शिकायत आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी.

प्राइवेट स्कूल संचालक नहीं बेच सकते बस्ता और बैग, नियम तोड़ा तो…

Private school operators cannot sell backpacks and bags, if rules are broken… मध्य प्रदेश में निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक निर्देश जारी किया है. कलेक्टर के इस निर्देश को अभिभावक खूब सराह रहे हैं और काफी खुश हैं भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देशों से भोपाल के अभिभावकों में खुशी का माहौल है. भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निजी संचालकों के लिए आदेश जारी किए हैं कि कोई भी स्कूल संचालक बस्ता और ड्रेस नहीं बेच सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी. भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले में संचालित होने वाले सभी निजी स्कूलों के संचालकों के लिए एक आदेश जारी किया है. इस आदेश में स्पष्ट किया है कि विद्यालय की स्टेशनरी, यूनिफार्म पर स्कूल का नाम प्रिंट कराकर दुकानों से क्रय कराने या एक विशिष्ट दुकान से यूनिफार्म और पाठ्य पुस्तकें बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. निर्देश का पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, विद्यालय के प्राचार्य और प्रबंध के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 188 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही संबंधित एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी को इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है. कलेक्टर ने निजी विद्यालयों को स्पष्ट किया है कि आगामी शिक्षण सत्र प्रारंभ होने से पहले ही लेखक और प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करें. कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी और उनके अभिभावकगण इन पुस्तकों को अपनी सुविधानुसार खुले बाजार से खरीद सकें. अभिभावकों में खुशी की लहर भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल संचालकों को सूचना पटल पर यह भी अंकित करना होगा कि किसी दुकान विशेष से सामग्री क्रय करने की बाध्यता नहीं है. कहीं से भी पुस्तकें, यूनिफार्म और अन्य आवश्यक सामग्री क्रय की जा सकती है. पुस्तकों के अतिरिक्त स्कूल प्रबंधकों की ओर से यूनिफार्म, टाई, जूते, कापियां आदि भी स्कूल से उपलब्ध या बेचने की कोशिश नहीं की जाएगी. भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की तरफ से जारी किए गए इस तरह के आदेश से भोपाल के अभिभावकों ने खुशी जाहिर कर जिला प्रशासन की सराहना की है. उनका कहना है कि इस आदेश के बाद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी पर विराम लग सकेगा, साथ ही कमीशन खोरी नहीं होने की वजह से स्कूलों का कोर्स भी अधिक कीमत का नहीं रहेगा. यह अच्छा फैसला है. इसे पूरे प्रदेश में सख्ती के साथ लागू किया जाना चाहिए.

रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय का सीएम ने किया शुभारंभ एवं सागर के लोगों को दी बड़ी सौगात

CM inaugurated Rani Avanti Bai Lodhi Government University and gave a big gift to the people of Sagar. मोहन यादव ने रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय का शुभारंभ करते हुए कहा कि ‘हमने सौ दिन से भी कम समय में विश्वविद्यालय दिया। इसी सत्र से विश्वविद्यालय कामकाज करना शुरू करेगा। यहां के बच्चे जो कोर्स चाहेंगे, वो सारे के सारे खोले जाएंगे। सागर । मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को पीटीसी मैदान में आयोजित रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय का शुभारंभ किया। सीएम ने कहा कि डा. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद यहां के विद्यार्थियों को विवि में प्रवेश के लिए परेशान होना पड़ रहा था। इसलिए मैंने अपने सौ दिन के कार्यकाल के अंदर ही सागर में रानी अवंती बाई लोधी राजकीय विवि की न सिर्फ घोषणा की बल्कि उसका शुभारंभ भी किया है, जिसमें इसी सत्र से यहां के विद्यार्थियो की मांग के अनुसार सभी विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके बाद जल्द ही सागर में राज्य स्तरीय हवाई यातायात की शुरूआत की जाएगी। विधायक से कहा- उंगली पकड़ी अब कोंचा मत पकड़ो ….मुख्यमंत्री मंच से घोषणाएं कर रहे थे तभी बार-बार विधायक शैलेंद्र जैन उनके पास अपनी मांगों की लिस्ट लेकर पहुंच रहे थे। उन्हें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होना था तो वह जल्दी-जल्दी घोषणा कर रहे थे, लेकिन विधायक के बार-बार आने पर सीएम उनसे बोले, लालच मत करो, बहुत हो गया। अब मुझे कुछ नहीं दिख रहा, कुछ नहीं सुन रहा। एक अंगुली पकड़ी, दो पकड़ी, तीन पकड़ी, पूरी ही पकड़ रहे हो। जरा ठहरो तो सही आखिरी बार थोड़ी आया, बार-बार आता रहूंगा। यह बात सुनकर विधायक पीछे हट गए। हैलीपेड से मुख्यमंत्री कार द्वारा संत शिरोमणि रविदास मंदिर एवं संग्रहालय का अवलोकन करने बड़तूमा पहुंचे और यहां संत रविदास महाराज को नमन किया। मुख्यमंत्री ने मंच से की यह घोषणाएं …

निजी स्कूलों की मनमानी जारी, नहीं की पोर्टल पर जानकारी अपलोड

Arbitrariness of private schools continues, information is not uploaded on the portal भोपाल। फीस का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने को लेकर प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी होने के एक माह बाद भी स्कूलों ने जानकारी पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। हालात यह है कि राजधानी भोपाल में ही भोपाल में 321 स्कूलों में से करीब 13 स्कूलों ने ही जानकारी अपलोड की है।  दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने आठ फरवरी को आदेश जारी कर प्रदेश में फीस विनियमन अधिनियम 2020 कानून का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रदेश के निजी स्कूलों से फीस, पाठ्यक्रम और किताबों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन स्कूलों ने जानकारी अपलोड नहीं की है।  उल्लेेखनीय है कि राज्य शासन ने मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) 2017 एवं नियम-2020 लागू कर चुका है। जिसके तहत निजी स्कूलों को विगत तीन वर्षों (2020-21, 2021-22, 2022-23) के बजट की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। बैलेंस शीट, प्राप्ति एवं भुगतान पत्रक, आय-व्यय शेड्यूल सहित अंकेक्षण प्रतिवेदन शामिल होंगे। इसके बाद संबंधित विषयों के पालन में निजी स्कूलों द्वारा 100 रूपये के गैर न्यायिक स्टांप पेपरों पर आवश्यक वचन पत्र भी अपलोड करना होगा।

बीयू में 4000 रुपए स्पेशल लेट फीस देकर पहले पेपर दो बाद में भरो परीक्षा फार्म

Pay special late fee of Rs 4000 in BU, give paper first and fill exam form later. भोपाल। बरकलउल्ला विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने विवि के विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। इस फैसले का लाभ अब परीक्षार्थियों को मिलेगा। कार्यपरिषद की हुई बैठक में पिछले दिनों यह निर्णय लिया गया है कि विवि के किसी भी पात्र छात्र के भविष्य को देखते हुए विवि उसे परीक्षा से वंचित नहीं करेगा। यदि कोई छात्र जो उस परीक्षा में बैठने की पात्रता रखता है और वह परीक्षा शुरू होने के दिन भी सीधे किसी भी परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होता है, तो उससे 4000 रुपए विशेष विलंब शुल्क परीक्षा केंद्र पर जमा कराते हुए उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही छात्र पहले पेपर में शामिल होने के बाद संबंधित कॉलेज में पहुंच कर परीक्षा आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। बीयू के रजिस्ट्रार ने अब इस आशय का आदेश भी जारी कर दिया है।

मान्यता नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर होगी कार्यवाही

Action will be taken against schools that do not follow recognition rules भोपाल। मान्यता नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग सख्त रवैया अपनाया है। अब मान्यता नवीनीकरण और मापदंड पूरे नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्यवाही की तैयारी है। इसको लेकर लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेशभर के संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर कहा गया है कि ऐसे शैक्षणिक संस्थाओं के विरूद्ध कार्यवाही की जाए, जिन्होंने वर्ष 2024-25 में मान्यता नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है। आयुक्त ने संभागीय और जिला अधिकारियों से अपने संबंधित क्षेत्र में इस संबंध में प्रमाणीकरण रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट में यह बताने के लिये कहा गया है कि उनके क्षेत्र में वर्ष 2024-25 में कोई भी ऐसी संस्था नहीं जिसने मान्यता नवीनीकरण के लिये आवेदन नहीं दिया है। ऐसी शैक्षणिक संस्थाओं की सूची भेजी जाने के निर्देश दिये गए हैं। ऐसी अशासकीय संस्थाओं के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए तत्काल बंद करने के लिए कहा है। जिला शिक्षा अधिकारियों से अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं का सतत् निरीक्षण करने के लिए भी कहा गया है।

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