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इंदौर नगर निगम में छापेमारी, करोड़पति पूर्व अधिकारी की जायदाद कुर्क

इंदौर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज 1 करोड़ 6 लाख रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में एक आवासीय मकान, एक प्लॉट, एक फ्लैट और कृषि भूमि शामिल है। ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर ईडी ने बताया कि यह जांच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राजेश परमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अपने और परिवार के नाम पर अर्जित की। घोषित आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति जांच में सामने आया कि वर्ष 2007 से 2022 के बीच परमार ने करीब 1 करोड़ 66 लाख रुपये की संपत्ति जुटाई। यह राशि उनकी घोषित आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक बताई गई है। ईडी ने अपनी जांच में करीब 1 करोड़ 21 लाख रुपये को संदिग्ध और अवैध आय माना है। दस्तावेज पेश नहीं कर सके परमार जांच एजेंसी के अनुसार परमार और उनके परिवार के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया। यह राशि अलग-अलग खातों के माध्यम से जमा कर बाद में संपत्तियों की खरीद में उपयोग की गई। ईडी का कहना है कि पूछताछ के दौरान परमार इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल किए गए धन के वैध स्रोत से जुड़े ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

इंदौर नगर निगम के अफसर चेतन पाटिल के घर ईओडब्ल्यू का छापा, आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप

इंदौर  इंदौर में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने नगर निगम के अधिकारी चेतन पाटील के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की। इस छापेमारी का मुख्य कारण वित्तीय अनियमितताएं और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। सुबह से ही EOW की टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी थी, और नगर निगम परिसर के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई। EOW की कार्रवाई का कारण     चेतन नगर निगम में सहायक अधीक्षक हैं। EOW को चेतन पाटील के खिलाफ कई महीनों से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। पाटील पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप था। इसके चलते आज (मंगलवार) सुबह से ही EOW की टीम उनके घर और कार्यालय पर छापेमारी करने पहुंची। टीम ने नगर निगम परिसर में स्थित उनके कार्यालय को भी सील कर दिया। पहले भी लग चुके हैं आरोप चेतन पाटील कई वर्षों से नगर निगम के उद्यान विभाग में कार्यरत थे, और इस दौरान उन पर विभिन्न गंभीर आरोप लग चुके हैं। दावा है कि सालों से नगर निगम में कार्यरत पाटील ने पिछले कुछ वर्षों में अपने संपत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि की थी, जिससे उन पर संदेह और सवाल उठने लगे थे। इसी संदर्भ में, EOW ने उनके खिलाफ छापेमारी की योजना बनाई और आज इसे अंजाम दिया। पाटील का कार्यालय सील EOW की टीम नगर निगम की नई बिल्डिंग में भी पहुंची और वहां स्थित पाटील के कार्यालय को सील कर दिया। इस कदम से नगर निगम में चल रही वित्तीय जांच पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर निगम में यह पहली बार नहीं है कि किसी अधिकारी पर इस प्रकार के आरोप लगे हैं। हाल ही में कई अन्य अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं।

भोपाल में एक किसान के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया

भोपाल भोपाल के एक किसान के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में सामने आया कि ‘मेसर्स ट्राईडेंट मल्टीवेंचर्स’ नामक फर्म के संचालकों ने भोपाल के रातीबड़ निवासी किसान चिंता सिंह मारण से उनकी 12.46 एकड़ कृषि भूमि धोखाधड़ी पूर्वक कम कीमत पर रजिस्ट्री करवाई और फर्जी बैंक खाता खोलकर लगभग 2.02 करोड़ रुपये की राशि हड़प ली। इस संगठित साजिश में मुख्य आरोपी राजेश शर्मा, उनकी पत्नी राधिका शर्मा, सहयोगी राजेश तिवारी और फर्म प्रतिनिधि दीपक तुलसानी शामिल हैं। मामले में भादंवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120B एवं आईटी एक्ट की धारा 66C, 66डी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस संगठित साजिश में ट्राइडेंट मल्टीवेंचर्स के मास्टरमाइंड राजेश शर्मा, सहयोगी दीपक तलुसानी और राजेश तिवारी की भूमिका सामने आई है। तीनों पर भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। कैसे रची गई दो करोड़ की ठगी की साजिश? रातीबड़ निवासी शिकायतकर्ता चिंतामणि सिंह मारण की कृषि भूमि को हाईकोर्ट के आदेश पर उनके नाम किया गया था। इसके बाद राजेश शर्मा ने उन्हें जमीन के नामांतरण और बिक्री के नाम पर झांसा दिया। शिकायतकर्ता को पहले बैंक ऑफ इंडिया में तकनीकी दिक्कत का हवाला देकर ICICI बैंक में नया खाता खुलवाया गया। लेकिन इस खाते में शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना आरोपी राजेश तिवारी का मोबाइल नंबर और ईमेल ID दर्ज कर दी गई। इस फर्जी खाते में ₹2.86 करोड़ के भुगतान का झूठा उल्लेख किया गया, जबकि असल में केवल ₹81 लाख की राशि ही शिकायतकर्ता को मिली। बाकी रकम इसी फर्जी खाते से ट्रांसफर कर आरोपी राजेश तिवारी के IDFC बैंक खाते में भेज दी गई। फर्जी चेक, डिजिटल फ्रॉड और स्टॉप पेमेंट रजिस्ट्री में दर्शाए गए तीन चेक (प्रत्येक ₹22 लाख) को बाद में ‘स्टॉप पेमेंट’ कर वापस ले लिया गया। OTP और पासवर्ड के जरिए डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से खातों से रकम ट्रांसफर की गई। जांच में सामने आया कि सिर्फ कुछ घंटों के भीतर बड़ी रकम आरोपी के खाते में ट्रांसफर हो गई। यह भी देखें     ₹2.86 करोड़ का भुगतान रजिस्ट्री में दर्शाया गया     सिर्फ ₹81.13 लाख शिकायतकर्ता को मिला     ₹2.02 करोड़ की रकम धोखाधड़ी से हड़पी गई     फर्जी ईमेल, मोबाइल नंबर से ICICI बैंक खाता ऑपरेट किया गया तीन मुख्य आरोपी राजेश शर्मा:पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड। ICICI में फर्जी खाता खुलवाया, रजिस्ट्री करवाई और सभी लेन-देन पर नियंत्रण रखा। दीपक तलुसानी:फर्म ट्राइडेंट का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता। फर्जी रजिस्ट्री में खरीदार के रूप में नाम दर्ज कराया। राजेश तिवारी:तकनीकी सहयोगी। फर्जी खाता ऑपरेट कर OTP और पासवर्ड के जरिए करोड़ों की रकम अपने खाते में ट्रांसफर कराई। IPC और IT एक्ट की धाराओं में केस दर्ज आरोपियों पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (फर्जी दस्तावेज बनाना), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 120बी (साजिश) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C व 66D के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

बिशप पीसी सिंह मंगलोर से गिरफ्तार, रेलवे मुआवजा घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई

जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ (EOW) जबलपुर ने पूर्व बिशप पीसी सिंह को 2.45 करोड़ के गबन के मामले में गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ देश के अलग-अलग राज्‍यों में 64 अपराध पंजीबद्ध हैं। ईओडब्ल्यू की टीम ने कर्नाटक से गिरफ्तार किया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ के मुताबिक, पूर्व बिशप जबलपुर डायोसिस पीसी सिंह और एनडीटीए के चेयरमैन पॉल दुपारे ने बार्स्लेय स्कूल कटनी की जमीन अधिग्रहण मामले में फर्जीवाड़ा किया है। रेलवे ने स्कूल की 0.22 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की है, लेकिन जमीन के बदले मिले 2,45,30,830 रुपए आरोपियों ने हड़प लिए।     आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ (EOW), जबलपुर द्वारा पूर्व विशप पी.सी.सिंह को धोखाधडी एवं कूट रचना कर 2,45,30,830/-रूपये का गबन करने के आरोप में कर्नाटक राज्‍य से गिरफ्तार किया गया । आरोपी पूर्व विशप पी.सी.सिंह के विरूद्ध देश के विभिन्‍न राज्‍यों में 64 अपराध पंजीबद्ध है। इन धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ की जांच में पता चला है कि पीसी सिंह ने चेयरमैन एनडीटीए पॉल दुपारे के साथ षड्यंत्र कर न्यायालय में कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत कर मुआवजा राशि (2,45,30,830 रुपए) एनडीटीए के अधिकृत खातों की बजाय अन्य बैंक खातों में हस्तांतरित करा लिए हैं। उनके खिलाफ इस मामले में धारा 406, 420, 120बी भादंवि के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। यह हैं नियम ईओडब्ल्यू ने बताया कि एनडीटीए के चेयरमेन पॉल दुपारे ने डायोसिस ऑफ जबलपुर के अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों की देखरेख के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी पूर्व बिशप पीसी सिंह को सौंप रखी थी। एनडीटीए चैरिटी कमिश्नर नागपुर के कार्यालय में बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है। बिना चैरिटी कमिश्नर की अनुमति के ट्रस्ट की प्रॉपर्टी का विक्रय और मुआवजा राशि नहीं प्राप्त की जा सकती। मुआवजा घोटाले में 2.45 करोड़ रुपए का गबन कटनी स्थित बार्लेय स्कूल की 0.22 हेक्टेयर जमीन का रेलवे विभाग द्वारा अधिग्रहण किया गया था। इसके एवज में रेलवे ने मुआवजे के रूप में 2 करोड़ 45 लाख 30 हजार 830 रुपए की राशि स्वीकृत की थी। यह राशि स्कूल और उसके संचालन संस्था एनडीटीए के खाते में जानी चाहिए थी, लेकिन पूर्व बिशप पीसी सिंह और संस्था के चेयरमैन पॉल दुपारे ने मिलकर इस रकम को गैर-कानूनी तरीके से हड़प लिया। उन्होंने इस मामले में फर्जी दस्तावेज बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत किए और खुद को मुआवजा प्राप्त करने का पात्र सिद्ध करने की कोशिश की। फर्जी पत्र बनाकर कोर्ट को किया गुमराह जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पीसी सिंह और उनके साथी पॉल दुपारे ने न्यायालय में स्कूल के प्रिंसिपल के नाम से एक कूटरचित पत्र प्रस्तुत किया, ताकि मुआवजा राशि को स्वयं प्राप्त किया जा सके। यह पत्र पूरी तरह फर्जी था और इसका कोई वैधानिक अस्तित्व नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने इस दस्तावेज के आधार पर करोड़ों रुपए अपने नियंत्रण में ले लिए और संस्था के अधिकारिक खातों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। एनडीटीए को नहीं दी गई कोई जानकारी जिस संस्था एनडीटीए के अंतर्गत यह स्कूल संचालित होता है, उसे न तो इस मुआवजे की जानकारी दी गई और न ही उससे कोई अनुमति ली गई। संस्था को तब इस धोखाधड़ी का पता चला जब रेलवे से प्राप्त राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं मिला। साफ है कि पीसी सिंह और उनके सहयोगी ने पहले से तय योजना के तहत पूरी साजिश को अंजाम दिया और सार्वजनिक संपत्ति की राशि को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया। अब और भी गंभीर धाराएं जोड़ी गईं आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने शुरू में IPC की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन अब जाली दस्तावेजों के उपयोग की पुष्टि होने पर धारा 467, 468 और 471 भी जोड़ दी गई है। इससे मामला और गंभीर हो गया है और न्यायालय में अभियोजन की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। 64 मामलों में शामिल है आरोपी बिशप पूर्व बिशप पीसी सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि किसी शातिर अपराधी से कम नहीं है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में उसके खिलाफ कुल 64 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कई मामलों में आर्थिक अनियमितताएं, कूट रचना, और धर्म संस्थानों के नाम पर फर्जीवाड़ा शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उसके खिलाफ जांच कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह लंबे समय से कानून की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था। गिरफ्तारी में जबलपुर-भोपाल की EOW टीम की अहम भूमिका इस जटिल और अंतरराज्यीय अपराध में आरोपी की गिरफ्तारी EOW के लिए बड़ी चुनौती थी। अंततः जबलपुर इकाई के उप पुलिस अधीक्षक एस.एस. धामी के नेतृत्व में निरीक्षक मोमेन्द्र कुमार मर्सकोले, प्रधान आरक्षक अभिनव ठाकुर, आरक्षक शेख नदीम और सुनील मिश्रा ने कर्नाटक के मंगलोर जाकर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। इस टीम के समर्पण और सतर्कता ने यह गिरफ्तारी संभव बनाई, जिससे एक बड़े आर्थिक घोटाले पर लगाम लगी है। अभी भी एक आरोपी फरार इस घोटाले में बिशप पीसी सिंह तो गिरफ्तार हो गया है, लेकिन उसका एक अन्य साथी अभी भी फरार है। EOW ने उस आरोपी की तलाश भी तेज कर दी है। वहीं, गिरफ्तार आरोपी को जबलपुर लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की पूछताछ और न्यायिक कार्यवाही की जाएगी। संभावना है कि आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे इस मामले में सामने आएंगे। कानून के शिकंजे में बड़ा अपराधी इस गिरफ्तारी से साफ है कि कानून के हाथ लंबे हैं और अपराध कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, एक दिन न्याय की पकड़ में जरूर आता है। पीसी सिंह जैसे प्रभावशाली और संगठित अपराधों में संलिप्त व्यक्ति की गिरफ्तारी EOW की बड़ी सफलता है। यह उन सभी संस्थाओं और अधिकारियों के लिए एक चेतावनी भी है जो धार्मिक या शैक्षणिक संस्थाओं के नाम पर जनता और सरकार को ठगने का प्रयास करते हैं। रेलवे मुआवजा घोटाला कटनी जिले में स्थित बार्लेय स्कूल की 0.22 हेक्टेयर भूमि का रेलवे विभाग द्वारा अधिग्रहण किया गया था, जिसके बदले में 2 करोड़ 45 लाख 30 हजार 830 रुपए का मुआवजा दिया गया। यह राशि एनडीटीए ट्रस्ट के खाते में जानी चाहिए थी, लेकिन पीसी सिंह और उनके सहयोगी … Read more

MP Police की तरह ही अब लोकायुक्त, EOW सहित 6 जांच एजेंसियां आरोपी को रख सकेंगे हिरासत में, अधिसूचना जारी

 भोपाल मध्य प्रदेश की जांच एजेंसियां लोकायुक्त, EOW, स्टेट CID या STF के पास अब अपना खुद का लॉकअप और इंटेरोगेशन रूम होने वाला है. इसको लेकर राज्य के गृह विभाग ने निर्देश जारी कर दिए हैं. लंबे समय से यह जांच एजेंसियां आरोपियों को हिरासत में रखने और पूछताछ के लिए खुद के लॉकअप और इंटेरोगेशन रूम की मांग कर रही थीं, जिसे आखिरकार अब मान लिया गया है. गृह विभाग के सर्कुलर के तहत अब लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, सीआईडी, एसटीएफ, राज्य नारकोटिक्स को लॉकअप और इंटेरोगेशन रूम बनाने की अनुमति है. इसके लिए इन एजेंसियों को अपने कार्यालय में एक कक्ष चिह्नित करना होगा, जहां आरोपी को 5-6 घंटे तक पूछताछ के लिए रखा जा सकेगा. कमरे में एक टेबल होगी, जिस पर एक तरफ आरोपी और दूसरी तरफ जांच अधिकारी होंगे. रूम में एचडी कैमरे लगाए जाएंगे, जिसका लाइव आउटपुट वरिष्ठ अफसरों के केबिन में दिया जाएगा, जहां से वे पूछताछ को लाइव देख सकेंगे. आरोपी को हिरासत के दौरान यहीं पर खाना भी दिया जाएगा. इन जांच एजेंसियों के वर्तमान में जो संभागीय मुख्यालय हैं, वहां इसका निर्माण किया जाएगा. क्यों हुई जरूरत महसूस? दरअसल, वर्तमान में यह जांच एजेंसियां जब किसी को हिरासत में लेती हैं तो इनसे जांच अधिकारी अपने कक्ष में पूछताछ करते हैं या बेहद संवेदनशील मामलों में आला अधिकारीयों के कमरे में पूछताछ की जाती है. पूछताछ खत्म होने के बाद आरोपियों को नजदीकी पुलिस थाने के लॉकअप में रात बिताने के लिए लाया जाता है. इससे समय भी लगता है और एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करते समय आरोपियों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना पड़ता है. हाल ही में लोकायुक्त की हिरासत में रहे आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा को लोकायुक्त कार्यालय के पास स्थित कोहेफिजा थाने में रखा गया था.  

पूर्व IFS अधिकारी के विरुद्ध FIR दर्ज, EOW ने दो अन्य पर भी मामला दर्ज किया

भोपाल राज्य आजीविका मिशन में अवैध नियुक्तियों के आरोपों में घिरे मध्य प्रदेश के पूर्व आईएफएस अधिकारी और राज्य आजीविका मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं, ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है, जांच के बाद हुई इस एफआईआर में विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला का भी नाम शामिल है, कोर्ट के निर्देश के बाद हुई एफआईआर के बाद अभी तक की जाँच में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं EOW को अंदेशा है कि अभी भ्रष्टाचार की और परतें खुल सकती हैं। राज्य आजीविका मिशन में नियम विरुद्ध नियुक्तियों से जुड़े मामले की जांच में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को कई गड़बड़ियाँ मिली हैं, जांच में सामने आया कि बिना अनुमोदित मानव संसाधन मार्गदर्शिका (एचआर गाइड लाइन ) के आधार पर नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियाँ की गईं। जो नियुक्तियां की गई उनमें दस्तावेजों में हेराफेरी कर अवैधानिक तरीके से नियुक्तियां  की गई साथ ही मानदेय में अवैध रूप से वृद्धि की गई। EOW ने ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला पर की FIR पूरा मामला श्रीमती सुषमा शुक्ला की नियुक्ति से जुड़ा है और अब तक जो कुछ सामने आया है उस हिसाब से शुक्ला की नियुक्ति कूटरचित एवं मिथ्या प्रमाणपत्रों के आधार पर की गई। दरअसल 17 फरवरी 2025 को दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता राजेश कुमार मिश्रा द्वारा राज्य आजीविका मिशन, म.प्र. में वर्ष 2015 से 2018 के बीच की गयी नियुक्तियों तथा व्यय में व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्ट आचरण के आरोप लगाए गए थे, उसकी अभी तक की विस्तृत जांच के बाद EOW ने ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला के विरुद्ध प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित पाए जाने पर FIR दर्ज की गई है। इस तरह की फर्जी नियुक्तियां जांच में कई बातें उजागर हुई  इसमें  मानव संसाधन मार्गदर्शिका को अनुमोदित दर्शाने के बाद, उसी आधार पर राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के पदों पर संविदा नियुक्तियाँ की गई। इन नियुक्तियों के लिए  योग्यता, अनुभव, चयन पद्धति आदि के जो मापदंड निर्धारित किए गए वे मिशन कार्यालय स्तर पर ही बनाये गये, जबकि ऐसे मापदंडों को शासन से अनुमोदित कराना आवश्यक होता है। कई नियुक्तियाँ ऐसे अभ्यर्थियों को दी गईं जिनकी योग्यता या अनुभव न तो निर्धारित मानकों के अनुरूप थी, न ही वे पद के लिए उपयुक्त थे। सुषमा रानी शुक्ला के लिए नियमों को ताक पर रख दिया नियम विरुद्ध नियुक्तियों में विशेष रूप से श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला को उस पद पर नियुक्त किया गया जिसके लिए न्यूनतम 15 वर्ष का प्रबंधकीय अनुभव अपेक्षित था, जबकि उन्हें यह अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उन्हें नियुक्त करने के मात्र चार माह के भीतर अवैध तरीके से 70,000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय स्वीकृत किया गया। जांच टीम ने यह भी पाया कि अन्य कर्मचारियों को जिनके पास अपेक्षित अनुभव था उन्हें यह लाभ नहीं दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि चयन और मानदेय निर्धारण की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और चहेतों को लाभ देने के उद्देश्य से की गई। बेलवाल ने HR Policy को बेईमानीपूर्वक HR Manual के रूप में प्रस्तुत किया जांच में ये तथ्य सामने आया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल द्वारा म.प्र. राज्य आजीविका मिशन की मानव संसाधन नीति (HR Policy) को बेईमानीपूर्वक HR Manual के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि ऐसे किसी ‘HR Manual को राज्य आजीविका फोरम द्वारा अनुमोदन प्राप्त नहीं था। दिनांक 27 मार्च 2015 को राज्य आजीविका फोरम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में केवल मानव संसाधन नीति (Human Resource Policy) को मंजूरी दी गई थी, HR Manual का कोई उल्लेख नहीं था। इसके विपरीत बेलवाल द्वारा तैयार की गई नस्ती संख्या 40-01/MP-SRLM/HR/43 में नोटशीट पृष्ठ क्र. 5 में कूटरचित रूप से “HR Manual” शब्द जोड़ा गया। सुषमा रानी शुक्ला के मानदेय में भी अवैध तरीके से 40% की वृद्धि कई नियुक्तियाँ न्यूनतम योग्यता और अनुभव के बिना की गईं जैसे कि श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला को आवश्यक अनुभव व योग्यता के बिना राज्य परियोजना प्रबंधक (सामुदायिक संस्थागत विकास) पद पर नियुक्त किया गया। संविदा नियुक्त कर्मचारियों को 40% तक मानदेय की अवैध वृद्धि दी गई, जबकि अन्य संवों में जीवन यापन लागत सूचकांक (CPI) के अनुसार ही वृद्धि हुई, स्पष्ट रूप से यह कृत्य सुषमा रानी शुक्ला व अन्य चहेतों को अवैध लाभ देने के लिए किया गया। नियुक्ति एवं वेतन निर्धारण में शासन की स्पष्ट नीतियों की अवहेलना कर निजी हितों की पूर्ति हेतु नियुक्तियाँ की गई। EOW ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज की   अभी तक की प्रारंभिक जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों और दस्तावेजों को परीक्षण से यह सिद्ध हुआ है कि ललित मोहन बेलवाल, विकास अवस्थी और श्रीमती सुषमा रानी शुक्ला ने मिलकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया, फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग किया और शासन को गुमराह कर व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया। उक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471, 120-बी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (सी) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। EOW में राज्य आजीविका मिशन में की गईं अन्य अवैध गतिविधियों की जांच अभी जारी है। भविष्य में और भी कई गड़बड़ियों के खुलासे की संभावना है।

इंदौर निगम के राजस्व अधिकारी के तीन जगह स्थित आवासों पर ईओडब्ल्यू का छापा, पहले से निलंबित है अफसर

इंदौर  आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के अधिकारियों ने आज सुबह दो-दो पत्नियों (Wives) के पति (Husband) नगर निगम (Municipal council) के राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के तीन आवासों पर छापामार कार्रवाई करते हुए करोड़ों की अनुपातहीन सम्पत्ति का खुलासा किया है। छापे में तीन अलग-अलग क्षेत्रों में बहुुमंजिला मकानों, प्लाट, कृषि भूमि का खुलासा हुआ है।  ईओडब्ल्यू की टीम ने शुक्रवार को इंदौर नगर निगम से सस्पेंड एआरओ राजेश परमार के घर छापा मारा है. परमार के तीन ठिकानों पर एक्शन जारी है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा गया है. यहां स्पष्ट कर दें कि अनियमितता के चलते कुछ दिन पहले ही परमार नगर निगम से सस्पेंड हुए थे. इंदौर के आवास कॉलोनी में मुख्य कारवाई चल रही है. राजेश परमार जोन 16 के एआरओ थे. कार्रवाई के लिए टीम सुबह ही पहुंच गई थी, इंदौर स्थित निवास स्थान पर.   EOW की टीम को बंद मिला परमार का ऑफिस इंदौर के बिजलपुर इलाके में स्थित आवास कॉलोनी में नगर निगम के राजस्व अधिकारी राजेश परमार रहते हैं, जहां टीम ने सर्चिंग शुरू कर दी है. वहीं, आसपास के लोगों से भी लगातार पूछताछ जारी है. जानकारी के ईओडब्ल्यू की टीम जब परमार के ऑफिस पहुंची, तब वह बंद मिला. इसके बाद उनके घर पर ही सारे दस्तावेजों की छानबीन जारी है. बेलदार से राजस्व अधिकारी तक का सफर ईओडब्ल्यू से मिली जानकारी के मुताबिक राजेश परमार ने अपने करियर की शुरुआत बेलदार के पद से की थी और बाद में प्रमोशन होते हुए सहायक राजस्व अधिकारी के पद तक पहुंच गया। हाल ही में उसे वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उनके पास करोड़ों रुपए की संपत्ति है, जो उसकी आय और करियर के अनुसार अनुकूल नहीं है। प्रारंभिक तौर पर चार मकानों के बारे में जानकारी मिली है, जिनमें से दो पर कार्रवाई चल रही है। राजेश ने एक मकान करीब 25 लाख रुपए में खरीदा था और बाद में उस पर एक आलीशान भवन बना लिया। एक मकान में माता-पिता, दूसरे में पूर्व पत्नी एसपी आरएस यादव के मुताबिक एक मकान में राजेश के माता-पिता रहते हैं, जबकि दूसरे मकान में पूर्व पत्नी रहती है। वर्तमान में उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहरी जांच की जा रही है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में और भी संपत्तियों का पता चल सकेगा। दो बार निलंबित हुआ राजेश परमार राजेश परमार संपत्तिकर असेसमेंट में गड़बड़ी के कारण 10 फरवरी को सस्पेंड हो गया था। जोन 16 पर एआरओ रहते परमार ने संपत्ति कर असेसमेंट में गड़बड़ी कर कम टैक्स लिया था और उसका खुलासा तब हुआ जब निगमायुक्त शिवम वर्मा ने राजस्व वसूली को लेकर समीक्षा की थी। परमार की गड़बड़ी पकड़ में आते ही निगमायुक्त वर्मा ने उन्हें सस्पेंड कर ट्रेचिंग ग्राउंड भेज दिया। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी थी। जो फिलहाल चल रही है। बताया जा रहा है कि परमार इससे पहले भी एक बार सस्पेंड हुआ था, जब उसने तत्कालीन अपर आयुक्त एसके चैतन्य के खिलाफ नारेबाजी की थी। जोन-8 पर एआरओ रहते उन्होंने चैतन्य के खिलाफ नारेबाजी की थई। बगैर अनुमति विदेश यात्रा भी की इंदौर नगर निगम जोन क्रमांक 8 में एआरओ रहते हुए राजेश परमार ने नए खाते खोले और राशि जमा कर नगर निगम को करोड़ों की राशि की चपत लगाई थी। वे बगैर अनुमति पांच बार विदेश यात्रा भी कर चुके हैं। परमार के बारे में कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी महापौर, निगमायुक्त, राजस्व समिति प्रभारी सहित कई अधिकारियों को शिकायत की थी बताया जा रहा है कि राजेश परमार मूलतः दरोगा है, लेकिन जोड़-तोड़ करके प्रभारी एआरओ के पद तक पहुंच गया। जोन क्रमांक 19 में भी पदस्थ रहते हुए शुल्क की वसूली में गड़बड़ी के आरोप परमार पर लगे थे।

EOW की बड़ी कार्रवाई: निगम अधिकारी के ठिकानों पर छापा, करोड़ों की संपत्ति जब्त

EOW’s big action: Raid on corporation officer’s premises, property worth crores seized इंदौर ! नगर निगम राजस्व अधिकारी राजेश परमार के घर और कार्यालय समेत कई ठिकानों पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने शुक्रवार सुबह छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में करोड़ों की अवैध संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि परमार ने नौकरी के दौरान अपने और परिवार के नाम पर कई महंगी संपत्तियां खरीदीं। मामले की जांच जारी है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना है। घर और ऑफिस पर छापा, संपत्ति के दस्तावेज जब्त सूत्रों के अनुसार, इंदौर के बिजलपुर स्थित आवास कॉलोनी में EOW की टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से सर्चिंग अभियान चलाया। टीम को परमार के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। साथ ही, परमार के कार्यालय पर भी छापा मारा गया, लेकिन वह बंद मिला। टीम ने श्रीजी वैली, बिचौली मर्दाना स्थित अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई की। EOW डीएसपी मधुर रीना गौड़ ने बताया कि परमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। अब तक की जांच में कुछ संपत्तियों के दस्तावेज सामने आए हैं, लेकिन उनकी सटीक कीमत का निर्धारण अभी बाकी है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यह संपत्तियां करोड़ों रुपये की हो सकती हैं। पहले ही हो चुका है निलंबन राजेश परमार को हाल ही में नगर निगम आयुक्त द्वारा अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया था। बताया जा रहा है कि परमार की भर्ती पहले बेलदार के पद पर हुई थी, लेकिन बाद में वह प्रमोशन पाकर सहायक राजस्व अधिकारी बन गया। नौकरी के दौरान, उसने अपने और परिवार के नाम पर कई महंगी संपत्तियां खरीदीं। परमार के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत कांग्रेस पार्षद रुबिना खान ने 20 अक्टूबर 2024 को नगर निगम आयुक्त से की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि परमार दरोगा के पद पर रहते हुए प्रभारी एआरओ बन गया और जोन-19 में बेटरमेंट शुल्क की कम वसूली कर भ्रष्टाचार कर रहा था। इसके अलावा, बिना अनुमति विदेश यात्रा करने के भी आरोप हैं। रुबिना खान ने महापौर, आयुक्त, राजस्व समिति प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों को प्रमाणों के साथ शिकायत सौंपी थी। उन्होंने मांग की थी कि परमार को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उसके पूरे कार्यकाल की जांच की जाए। जांच जारी, और खुलासों की संभावना EOW की कार्रवाई अभी जारी है और आगे और भी संपत्तियों के दस्तावेज मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे मामले में निगम के अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा सकती है। इस छापेमारी के बाद नगर निगम के अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में आगे और क्या खुलासे होते हैं और राजेश परमार पर क्या कार्रवाई की जाती है।

मुश्किल में मध्य प्रदेश के उपनेता प्रतिपक्ष, अब भ्रष्टाचार के मामले में खुली फाइल, भोपाल में ISBT प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप

भोपाल मध्यप्रदेश में पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा की काली कमाई और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह सहित कई नेताओं पर हमलावर रहे हेमंत कटारे ईओडब्ल्यू के लपेटे में आ गए हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के साथ ही उनकी पत्नी, भाई योगेश कटारे और बहू समेत 7 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। EOW ने दर्ज की एफआईआर दरअसल, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने उन पर एफआईआर दर्ज की है। यह मामला भोपाल के आईएसबीटी प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन में गड़बड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसके अलावा भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के तत्कालीन सीईओ केपी राही, ओएसडी मनोज वर्मा, मेसर्स हाई स्पीड मोटर्स और अन्य पर भी ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की है। इन सभी पर आरोप है कि इन अधिकारियों ने साठगांठ कर कटारे परिवार को नियम विरुद्ध प्लॉट का आवंटन किया। जांच एजेंसी के पास यह शिकायत भोपाल के हर्षवर्धन नगर निवासी सीआर दत्ता द्वारा की गई है। शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने जांच की और भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के नियमों के खिलाफ जाकर एक निजी कंपनी को जमीन आवंटन का मामला उजागर किया। बताया जा रहा है कि हेमंत कटारे, योगेश कटारे, मीरा कटारे और रुचि कटारे पर धारा 120 वी, 420, 468, 471 भादंवि के तहत एफआईआर दर्ज की है।   वहीं, इस मामले में बातचीत करते हुए हेमंत ने कहा कि मुझ पर और मेरे परिवार पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। उन्होंने सरकार पर ब्लेकमेल करने का आरोप भी मढ़ा। हेमंत ने कहा कि जब मैं पहली बार विधायक बना तब भी मुझे पर 6 झूठे प्रकरण दर्ज हुए थे। बाद में कोर्ट ने सभी आरोपों को खारिज भी कर दिया था। उनका दावा है कि वे इस मामले में कोर्ट जाएंगे और दोष मुक्त साबित होंगे।   आपको बता दें कि पिछले दिनों हेमंत कटारे ने पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह पर काफी हमलावर रहे थे। इसके बाद भूपेंद्र सिह ने हेमंत कटारे पर आरोप लगाते हुए जांच के लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र लिखा था।  

प्राइमरी स्कूल टीचर के घर EOW का छापा, हुआ चौंकाने वाला खुलासा, 52 प्लाटों की रजिस्ट्री, 14 बैंकों में खाते

शिवपुरी  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के भौंती में बुधवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने एक प्राथमिक सहायक शिक्षक सुरेश सिंह भदौरिया के घर रेड की है। इस छापामार कार्रवाई के दौरान प्राथमिक शिक्षक के पास 8 करोड़ से अधिक की संपत्ति की जानकारी हाथ लगी है। प्राथमिक शिक्षक के खिलाफ एक शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई है। शिकायत में बताया गया था कि शिक्षक के यहां पर आय से अधिक संपत्ति है। पूर्व कांग्रेस विधायक के करीबी बताया जा रहा है कि भौंती के प्राइमरी टीचर सुरेश सिंह भदौरिया भिंड जिले के रहने वाले हैं। वह वर्ग तीन के शासकीय शिक्षक है और कैडर गांव के प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ हैं। वैसे सुरेश सिंह भिंड के रहने वाले हैं। लेकिन शिक्षक बनने के बाद वह यही रहने लगे। यह भी सामने आ रहा है कि वह पिछोर के पूर्व कांग्रेस विधायक केपी सिंह के करीबी हैं। इसके साथ ही जमीनों के कारोबार से भी जुड़े हैं। वहीं, सुरेश सिंह भदौरिया पर हरिजन एक्ट सहित आधा दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। ईओडब्ल्यू को 8 करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली ईओडब्ल्यू ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि शिक्षक के नाम पर 8 करोड़ से भी ज्यादा की संपत्ति है। जिनमें दुकानें, घर, कार, सोना-चांदी, ट्रक-ट्रैक्टर और भी अन्य चीजें शामिल हैं। आय से अधिक संपत्ति के आरोप में दर्ज मामले के तहत यह कार्रवाई की गई। शिक्षक के घर से छापे में एजेंसी को एक रिहायशी भवन और 1करोड़ 70 लाख की 11 दुकानें, पिछोर रोड पर करीब 1 करोड़ की 10 दुकानें, करीब 5 करोड़ के 52 प्लॉट से संबंधित रजिस्ट्री के बारे में पता चला है। आय से अधिक संपत्ति हुई बरामद ईओडब्ल्यू के अनुसार सुरेश सिंह भदौरिया ने अपने सेवाकाल में लगभग 38 लाख 4 हजार रुपए वेतन के रूप में कमाए हैं। लेकिन, छापे में मिली संपत्तियों की अनुमानित कीमत 8 करोड़ 36 लाख 32 हजार 340 रुपए है। इस प्रकार, आरोपी ने अपनी वैध आय से 7 करोड़ 98 लाख 28 हजार 340 रुपए की अधिक संपत्ति अर्जित की है। ईओडब्ल्यू को छापे के दौरान 44 भू अधिकार पुस्तिकाएं और 12 बैंक खातों की पासबुक मिली हैं। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के संबंध में जानकारी जुटा रही है। छापे में यह संपत्ति भी मिली इसके अलावा चल संपत्ति में 4 लाख 71 हजार 370 रुपए कैश, 2342214 रुपए कीमत का 371 ग्राम सोना, करीब 128736 रुपए की 2 किलो 826 ग्राम चांदी, एक ट्रक, एक स्कॉर्पियो, फर्नीचर, एलसीडी टीवी और एसी, एक बाइक बरामद हुए। इसकी कीमत 31 लाख 90 हजार रुपए हैं। इसके अलावा एक ट्रैक्टर, 5 थ्रेसर, एक टैंकर, चार ट्रॉली और 25 लाख के तीन कल्टीवेटर भी बरामद किए हैं।

शिवपुरी में शासकीय शिक्षक के घर EOW ने दस्तक दे दी, सुबह 6 बजे पहुंची टीम

शिवपुरी  जिले के भोंती में एक शासकीय शिक्षक के घर EOW ने दस्तक दे दी. टीम सुबह 6 बजे शिक्षक के घर पहुंची. जहां उन्होंने सोते समय घर की कुंदी खटखटा दी और सभी को जगा दिया और अंदर जा पहुंचे. जानकारी के अनुसार भोंती में शासकीय शिक्षक सुरेंद्र सिंह भदोरिया के यहां आज सुबह 6 बजे ईओडब्ल्यू के अधिकारी एक दर्जन कर और एक बस पुलिस के साथ अचानक से पहुंची. जहाँ उन्होंने सुबह 6 बजे सभी लोगों को सोते से जगा दिया और अपनी कार्रवाई शुरू कर दी. जिससे आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई हैं. अभी यह कार्रवाई लगातार जारी है.

अब आरोपितों से पूछताछ EOW कार्यालयों में ही होगी, नए भवनों में बनेंगे लॉकअप

भोपाल आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) आरोपितों से पूछताछ अपने ही भवनों में करेगा। अब नए बनने वाले सभी भवनों में इसके लिए लाकअप की व्यवस्था भी की जाएगी। पहले से बने भवनों में भी लाकअप के लिए जगह देखी जा रही है। अभी आरोपितों को जिला पुलिस बल के थानों में रखा जाता है। जहां आरोपितों को रखा जाएगा वहां पर रात में पुलिस बल भी तैनात किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता होगी।   अलग-अलग पाली में कम से कम चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी सुरक्षा के लिए लगानी होगी। इसके अतिरिक्त खान-पान की व्यवस्था भी करनी होगी। ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा ने कहा कि नए भवनों की आरोपितों को रिमांड पर रखने की व्यवस्था रहेगी। आवश्यकता होने पर उन्हें पूछताछ के लिए यहां रखा जा सकेगा। ईओडब्ल्यू के अतिरिक्त भोपाल स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्यालय में भी इसी तरह की व्यवस्था की जा रही है।

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