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एमपी के 5 जिलों में हैवी रेन का अलर्ट, 7 डिग्री गिरा पारा, धान की फसल को मिली राहत

भोपाल मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान 27 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। सबसे ज्यादा नर्मदापुरम और मंडला में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। अगले कुछ घंटों में गुना, शिवपुरी, श्योपुर, रायसेन, विदिशा और नरसिंहपुर में भारी बारिश होने की संभावना है। अशोकनगर, ग्वालियर, मुरैना, दतिया, सागर, भोपाल, नीमच, मंदसौर, राजगढ़, आगर-मालवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़, निवाड़ी, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, पन्ना, सीधी, उमरिया, सिंगरौली, जबलपुर, दमोह और सीहोर में भी बारिश और आंधी का अलर्ट है। 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवाएं गुरुवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और बीच-बीच में हल्की फुहार भी पड़ी। मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार को 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है। साथ ही जिले में कहीं-कहीं बारिश का पूर्वानुमान भी है। धान की फसल को राहत बारिश से धान की खेती करने वाले किसानों को राहत मिली है। किसानों ने पहले ही धान के गढ़े बना लिए थे और पौध भी तैयार कर ली थी। अब तेज बारिश के साथ धान की रोपाई शुरू हो सकेगी। धान की फसल के लिए आवश्यक पानी की पूर्ति मानसून की बारिश से होगी।     छिंदवाड़ा में 4 घंटे से पानी गिरना जारी है। इससे ठंडक बढ़ गई है।     ग्वालियर में हजीरा इलाके में बारिश के कारण तलघर ढह गया।     सीहोर, नरसिंहपुर और निवाड़ी में सुबह से पानी गिर रहा है।     भोपाल में सुबह 5 बजे से रिमझिम हो रही है, ये 9 बजे के बाद भी जारी है।     मंडला में रातभर में दो इंच बारिश दर्ज की गई है।     ग्वालियर में पूरी रात रिमझिम होती रही। सुबह तक 31.3 मिमी पानी गिर चुका है।     रायसेन में रातभर बारिश जारी रही। जिले में गुरुवार रात 8 बजे मानसूनी बारिश शुरू हुई थी।     नर्मदापुरम में गुरुवार रात 12 बजे से शुरू हुई बारिश सुबह 6 बजे तक चली। करीब 6 घंटे लगातार पानी गिरा। ट्रफ, साइक्लोनिक सकुर्लेशन-लो प्रेशर एरिया एक्टिव सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि वर्तमान में लो प्रेशर एरिया, तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन और दो ट्रफ की एक्टिविटी है। एक ट्रफ प्रदेश के पास से गुजर रही है। इन वजहों से प्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी है। भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में बारिश, महू में झरना बहा इससे पहले गुरुवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, अशोकनगर और हरदा समेत कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहा। मालवा क्षेत्र में भारी बारिश के चलते नदी नाले उफान पर आ गए। नीमच में उफनती पुलिया पार करने के दौरान दो बाइक सवार बह गए। लोगों ने उन्हें बचा लिया। नीमच में रूपा नदी के किनारे बसे गांव कंजार्डा में सड़क पर पानी भर गया। मंदसौर में सड़कों पर डेढ़ फीट तक पानी भर गया। इंदौर के महू में सूखे पड़े झरनों में पानी आ गया है। गुरुवार को पातालपानी के झरने में पानी बहने लगा। ग्वालियर में चलती कार पर पेड़ गिर गया। इस दौरान बारिश भी हो रही थी। बैंक मैनेजर को राहगीरों ने पेड़ काटकर बाहर निकाला। राजगढ़ जिले के ब्यावरा में लगातार तेज बारिश हुई। जिले के सुठालिया, मलावर, करनवास सहित आसपास के गांवों में भी पानी गिरा। नर्मदापुरम, डिंडौरी में भी बारिश दर्ज की गई। 16 जिलों में बारिश, रतलाम में सवा इंच पानी गिरा प्रदेश के 16 जिलों में गुरुवार को बारिश का दौर रहा। रतलाम में सबसे ज्यादा सवा इंच पानी गिर गया। इंदौर में आधा इंच बारिश हुई। बारिश की वजह से कई शहरों में पारा काफी लुढ़क गया। इंदौर में दिन-रात का तापमान बराबर हो गया है। बुधवार-गुरुवार की रात में तापमान 24.3 डिग्री था, जबकि गुरुवार को यह 25.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह गुरुवार को प्रदेश में सबसे कम तापमान रहा। रतलाम और उज्जैन में दिन-रात के तापमान में सिर्फ 2 डिग्री का अंतर रहा। रतलाम में बुधवार-गुरुवार की रात में पारा 24.2 डिग्री रहा था, जबकि गुरुवार को दिन में तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, उज्जैन में रात में 25.5 डिग्री और दिन में 27.5 डिग्री दर्ज किया गया। बालाघाट के मलाजखंड, गुना, रायसेन, पचमढ़ी और धार में भी पारा 30 डिग्री से कम रहा। बड़े शहरों में भोपाल में 30 डिग्री, इंदौर में 31.4 डिग्री, ग्वालियर में 33.5 डिग्री और जबलपुर में 32.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। टीकमगढ़ में सबसे ज्यादा 40.5 डिग्री रहा। भिंड जिले में नहीं पहुंचा मानसून इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। वहीं, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया। ऐसे में अनुमान था कि मध्यप्रदेश में यह जून के पहले सप्ताह में ही आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। इस वजह से एमपी में इसकी एंट्री नहीं हो पाई। 13-14 जून को मानसून आगे बढ़ा। बावजूद यह प्रदेश में 1 दिन लेट हो गया। हालांकि, 3 दिन में ही मानसून ने प्रदेश के 54 जिलों को कवर कर लिया। बाकी बचे एक जिले भिंड में मानसून के गुरुवार को पहुंचने की संभावना थी, लेकिन यह नहीं पहुंचा। मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को भिंड को भी मानसून कवर कर लेगा। बता दें कि एमपी में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून ही है। पिछले साल यह 21 जून को एंटर हुआ था।

मुख्यमंत्री ने 266 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

सीमा की रक्षा करने वाले जवानों और अन्न पैदा करने वाले किसानों के सम्मान के लिए काम कर रही है प्रदेश सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 65 करोड़ रुपए की लागत से होगा बेड़िया मंडी का विकास मुख्यमंत्री ने 266 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन मुख्यमंत्री की घोषणा – लाड़ली बहनों को दीवाली से मिलेगी 1500 रुपए की राशि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार देश की सीमा पर जान की बाजी लगाने वाले और सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों तथा खेतों में कड़ी मेहनत कर अन्न पैदा करने वाले किसानों के सम्मान के लिए काम कर रही है। हमारी सरकार कमजोर और गरीब वर्ग की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खरगोन जिले के बेड़िया में विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत अम्बा-रोडिया माइक्रो उदवहन सिंचाई योजना का लोकार्पण सहित 266 करोड़ रुपए की लागत के 24 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने सिकलसेल के मरीजों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृति के प्रमाण-पत्र तथा हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर तरक्की कर रहा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर तरक्की कर रहा है और विश्व में देश का नाम हो रहा है। हमारी सरकार किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं की जिंदगी बदलने और उन्हें खुशहाल बनाने का काम कर रही है। निमाड़ क्षेत्र में मां नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है और इससे खेतों में फसले लहलहा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को सम्मान निधि देने की योजना बनाई है और किसानों को इसका लाभ भी मिल रहा है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां गेहूं पर किसानों को प्रति क्विंटल 2600 रुपए दिए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार कृषि को प्रोत्साहन दे रही है और किसानों को उद्यमी बनने के लिए काम कर रही है। प्रदेश सरकार कपास से धागा बनाने, उससे कपड़ा बनाने और रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री लगाने का अभियान चला रही है। प्रदेश सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी काम कर रही है और किसानों को अनुदान पर सोलर पैनल कनेक्शन दिया जाएगा इससे किसानों की आय बढ़ेगी और वह अपने संयंत्र में पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली प्रदेश सरकार को बेच भी सकेंगे। प्रदेश सरकार ने मूंग और उड़द के समर्थन मूल्य पर खरीदी के इंतजाम किए हैं। दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। देश में दूध उत्पादन में मध्य प्रदेश की भागीदारी अभी 09 प्रतिशत है इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों को गाय भैंस पालन के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। राज्य सरकार के समग्र प्रयासों से अब प्रति व्यक्ति आय 11 हजार रूपये से बढ़कर एक लाख 52 हजार रूपये हो गई है। दीवाली से लाड़ली बहनों को हर माह मिलेंगे 1500 रुपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार रक्षाबंधन पर लाड़ली बहनों को 250 रुपए की अतिरिक्त राशि देगी और अक्टूबर में दीवाली से लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की राशि नियमित दी जाएगी। इस राशि को बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा। गरीबों और जरूरतमंद की जान बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने एयर एम्बुलेंस की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि सभी पात्र लोग अपना आयुष्मान कार्ड बनवा लें, जिससे गंभीर बीमारी के समय जान बचाने के लिए उन्हें बड़े शहरों के अच्छे अस्पतालों में उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर विमान या हेलीकॉप्टर से प्रदेश सरकार मरीजों को उपचार के लिए भी भेजती है। उन्होंने कहा कि अभी तक दुर्घटना में सड़कों पर घायलों को अस्पताल पहुंचने में लोग डरते थे अब सरकार ने राह-वीर योजना लागू की है। यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है और उसकी जान बचाता है तो उसे 25 हजार रुपए का इनाम प्रदेश सरकार देगी। शासकीय सेवकों के प्रमोशन होने के बाद 2 लाख पद होंगे रिक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवकों के 9 सालों से रुके प्रमोशन के मामले को हल कर दिया है और अब अनुसूचित जाति, जनजाति और सामान्य वर्ग के शासकीय सेवकों के प्रमोशन का रास्ता साफ कर दिया है। प्रमोशन होने से 2 लाख पद रिक्त होंगे और इससे नए लोगों की भर्ती का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार शासकीय सेवाओं में भर्ती में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देगी। आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। भगवान राम प्रदेश में जिन स्थानों से गुजरे थे उन स्थानों पर बनेंगे राम पथ गमन मार्ग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 19 धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री बंद कर दी है। प्रदेश में खुले में मांस की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। नगरीय क्षेत्र में गीता भवन बनाए जाएंगे। भगवान राम प्रदेश में जिन स्थानों से गुजरे थे उन पर राम पथ गमन मार्ग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की 100वींग जन्म शताब्दी के अवसर पर ग्वालियर में कैबिनेट की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। संदीपनी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों के तर्ज पर पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव-गांव तक बस सेवा शुरू करने जा रही है इससे ग्रामीण जनता को आवागमन की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि बेड़ियां मिर्च मंडी के विकास के लिए 65 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी। इसी प्रकार खनगांव से खेड़ीखुर्द मार्ग पर 05 करोड़ रुपए की लागत से पुल निर्माण किया जाएगा। बांसवा से घोसला मार्ग पर सिड़कुई नदी पर 06 करोड़ रुपए के लागत से पुल बनाया जाएगा। भीकनगांव से झिरन्या तक सड़क निर्माण के लिए 38 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। बेड़ियां एवं बासवा बायपास निर्माण के लिए 21 करोड़ रुपए स्वीकृत किए जाएंगे। बेड़ियां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में … Read more

जलसंरचनाओं के संरक्षण के लिये देश में पहली बार एकजुट हो रही 200 से अधिक हस्तियां

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शाम 6 बजे भारत भवन में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सदानीरा समागम का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे। समागम का आरंभ ऋषिकेश पांडे द्वारा निर्देशित लघु फिल्म ‘सदानीरा’ के लोकार्पण से होगा। मुख्य्मंत्री डॉ. यादव वीर भारत न्यास, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् तथा मध्यप्रदेश जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों सदानीरा, पृथ्वी  पानी का देश है…, अमृत जलधारा (चार खंड) व ‘जल धरा’ का विमोचन भी करेंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन, संस्कृति और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।  मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्या‍सी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि ‘सदानीरा समागम’ देश में ऐसा अकेला समारोह है जो नदियों, जलस्रोतों, जल संरचनाओं को संवर्धित एवं संरक्षित करने के लिए विविध गतिविधियों से भरा है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब साहित्य, कला व विज्ञान सहित अनेक माध्यमों के लगभग 200 से अधिक वैज्ञानिक, पुरातत्वविद, साहित्‍यकार, लेखक, पत्रकार, सिने अभिनेता व नाट्य कलाकार सहभागी बनेंगे। न्यासी सचिव ने बताया कि सदानीरा समागम केवल एक उत्सव नहीं, अपितु हमारी नदियों, जलसंस्कृति और जीवनदायिनी जलधाराओं के प्रति कृतज्ञता और जागरूकता का एक समवेत प्रयास है। आयोजन नदियों को मात्र भौतिक जलस्रोत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर, आध्यात्मिक आधार और लोकचेतना के रूप में प्रस्तुत करने का सशक्त संदेश देगा। आयोजन में प्रदर्शनी, संगीत, नृत्य, संवाद और साहित्य के माध्यम से नदी और जल जीवन का भाव जागृत किया गया है। समागम में सात पुस्तकों के लोकार्पण के साथ ही मध्यप्रदेश माध्यम द्वारा निर्मित एवं राजेन्द्र जांगले द्वारा निर्देशित फिल्म ‘रागा ऑफ रिवर नर्मदा’ का प्रदर्शन भी होगा। समागम के पहले दिन की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्मिता नागदेव एवं राहुल शर्मा द्वारा संगीत और कविता पर केन्द्रित ‘साउंड ऑफ रिवर’ की सांगीतिक प्रस्तुति तथा विदुषी शर्मा भाटे, पुणे द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका ‘हम नवा’ का मंचन होगा।  प्राचीन जलस्रोतों पर एकाग्र प्रदर्शनी मध्यप्रदेश जनसंपर्क द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान पर प्रदर्शनी आयोजित होगी। मध्यप्रदेश के प्राचीन जलस्रोतों पर एकाग्र पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय द्वारा समय-समय पर किये गये जलस्रोत संवर्धन कार्यों पर केन्द्रित छायाचित्रों की प्रदर्शनी और बावडि़याँ  इस समागम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। सदानीरा समागम में जलीय जीवन पर आधारित प्रदर्शनी जलचर भी आयोजित की गयी  है। यह प्रदर्शनी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय एवं क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, भोपाल के सहयोग से निर्मित किया गया है। वरिष्ठ छायाकार राजेन्द्र जांगले की नर्मदा परिक्रमा पर आधारित छायाचित्रों की प्रदर्शनी अमृतस्य नर्मदा भी आयोजित है। 

8th Pay Commission: इस दिन से बढ़ जाएगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी! सैलरी-पेंशन का स्ट्रक्चर, NPS और CGHS योगदान पर क्या होगा असर

नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. इस साल की शुरुआत में ही केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को हरी झंडी दे दी , जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है. इससे देश के 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.  8वें वेतन आयोग से सैलरी और पेंशन में कितनी होगी बढ़ोतरी? 8वें वेतन आयोग से सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स जानना चाहते हैं कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितना इजाफा होगा.आइए जानते हैं कि नए वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों के लिए क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं. इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को लिए ये बदलाव क्यों खास माना जा रहा है. बेसिक सैलरी और पेंशन में भारी इजाफा इस आयोग में सबसे अहम बात फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर है, जिसकी मदद से नई बेसिक सैलरी  और पेंशन  (Salary and Pension Hike)  तय होती है. 7वें वेतन आयोग में ये फैक्टर 2.57 था, लेकिन अब इसे 2.86 तक बढ़ाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 51,480 रुपये हो सकती है. वहीं, पेंशन 9,000 से बढ़कर करीब 25,740 रुपये हो सकती है.इस तरह सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बंपर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 8वें वेतन आयोग में क्या होगा बदलाव? 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में कई बड़े बदलाव ला सकता है। बेसिक सैलरी के अलावा, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी बदलाव की उम्मीद है। यह इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी की पोस्टिंग किस शहर में है और उसका काम किस तरह का है। मतलब कि उन्हें दफ्तर में काम करना रहता है, या काम के सिलसिले में भागदौड़ करनी रहती है। इस वजह से, एक ही वेतन ग्रेड के दो कर्मचारी भी अलग-अलग कुल वेतन (Total Salary) पा सकते हैं, क्योंकि उनके भत्ते अलग-अलग होंगे। NPS और CGHS योगदान पर असर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 10 प्रतिशत योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14 प्रतिशत योगदान देती है। 8वें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने के बाद, ये दोनों योगदान राशि भी बढ़ेंगी। केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS): CGHS की सदस्यता शुल्क सैलरी स्लैब पर आधारित होती है। जैसे ही बेसिक सैलरी बढ़ेगी, CGHS के शुल्क भी नए सैलरी स्ट्रक्चरके अनुसार रिवाइज होंगे। किस ग्रेड में कितनी बढ़ेगी सैलरी? प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 2.86 के आधार पर ग्रेड के हिसाब से सैलरी में इजाफा भी अलग-अलग हो सकता है। आइए समझते हैं कि रिवाइज्ड सैलरी स्ट्रक्चर कैसा दिख सकता है: ग्रेड 2000 (लेवल 3): इस ग्रेड में बेसिक सैलरी ₹57,456 तक बढ़ सकती है। HRA और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों को मिलाकर, कुल मासिक वेतन (ग्रॉस सैलरी) करीब ₹74,845 हो सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद अनुमानित इन-हैंड सैलरी लगभग ₹68,849 रहने की संभावना है। ग्रेड 4200 (लेवल 6): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹93,708 तक हो सकता है। कुल ग्रॉस सैलरी, भत्तों सहित, ₹1,19,798 के आसपास हो सकती है। डिडक्शन के बाद अनुमानित नेट मासिक सैलरी करीब ₹1,09,977 हो सकती है। ग्रेड 5400 (लेवल 9): इस वेतन ग्रेड में बेसिक वेतन ₹1,40,220 तक बढ़ सकता है। भत्तों को जोड़ने पर कुल वेतन ₹1,81,073 तक जा सकता है। कटौतियों के बाद इन-हैंड वेतन करीब ₹1,66,401 होने की संभावना है। ग्रेड 6600 (लेवल 11): इस ग्रेड में संशोधित बेसिक वेतन ₹1,84,452 हो सकता है। सभी भत्तों को मिलाकर, मासिक कुल आय ₹2,35,920 तक हो सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद इन-हैंड सैलरी करीब ₹2,16,825 हो सकती है। अलग-अलग लेवल पर कितनी बढ़ेगी सैलरी? 8वें वेतन आयोग में अलग-अलग पे लेवल पर कितनी सैलरी मिल सकती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं:     लेवल 3 (ग्रेड पे 2000): बेसिक सैलरी लगभग 57,456 रुपये, कुल सैलरी 74,845 रुपये, डिडक्शन के बाद इनहैंड सैलरी करीब 68,849 रुपये     लेवल 6 (ग्रेड पे 4200): बेसिक सैलरी करीब 93,708 रुपये, कुल सैलरी 1,19,798 रुपये, इनहैंड सैलरी लगभग 1,09,977 रुपये     लेवल 9 (ग्रेड पे 5400): बेसिक सैलरी 1,40,220 रुपये, कुल सैलरी 1,81,073 रुपये, इनहैंड करीब 1,66,401 रुपये     लेवल 11 (ग्रेड पे 6600): बेसिक 1,84,452 रुपये, कुल सैलरी 2,35,920 रुपये, इनहैंड सैलरी करीब 2,16,825 रुपये अलाउंस में भी होगा बदलाव बेसिक सैलरी बढ़ने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे भत्तों में भी इजाफा होगा. ये इस पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी किस लोकेशन में पोस्टेड हैं और उनका ट्रैवल कितना होता है. इसी वजह से एक ही ग्रेड के दो कर्मचारियों की कुल सैलरी अलग-अलग हो सकती है. NPS और CGHS में कितना बढ़ेगा कॉन्ट्रीब्यूशन? नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अभी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 10% योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14% देती है. बेसिक सैलरी बढ़ने से ये योगदान भी बढ़ेगा. सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की फीस भी सैलरी के स्लैब से जुड़ी होती है. ऐसे में बेसिक सैलरी में इजाफा होने से CGHS की मासिक कटौती भी बढ़ सकती है. क्यों खास है ये बदलाव? 8वां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ाने का काम नहीं करेगा, बल्कि इससे जुड़े सभी खर्चों, सुविधाओं और कर्मचारियों की आर्थिक प्लानिंग पर भी असर पड़ेगा. खासकर रिटायरमेंट प्लानिंग, होम लोन EMI, टैक्स सेविंग और इंश्योरेंस जैसे मामलों में ये बढ़ी हुई सैलरी लोगों को नई राहत दे सकती है.

सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई

पीएम जनमन अभियान छिंदवाड़ा में 1067 भारिया परिवारों को मिले पक्के आवास जनजाति वर्ग का समग्र उत्थान मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई  सामग्री की सामूहिक खरीद पर भी की एक करोड़ की बचत भोपाल  प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत छिंदवाड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में निवासरत 1067 भारिया जनजाति के परिवारों को पक्के आवास आवंटित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजाति संवर्ग के उत्थान के लिये प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की इस योजना को मध्यप्रदेश में शत प्रतिशत मूर्तरूप दिया जायेगा। जिला प्रशासन द्वारा आवास आवंटन के साथ ही सामूहिक खरीदी के नवाचार से एक करोड़ रूपये की बचत भी संभव हुई है। प्रधानमंत्री जनमन अभियान के तहत छिन्दवाड़ा को कुल 5825 आवासों का लक्ष्य प्रदान किया गया था, जिसके अंतर्गत चौरई, हर्रई, तामिया, अमरवाड़ा, जुन्नारदेव एवं परासिया जनपद के दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत भारिया हितग्राहियों को योजना का लाभ देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। ग्रामों की दूर-दराज़ स्थिति (जिला मुख्यालय से 100-125 कि.मी.) के कारण स्थानीय भवन सामग्री विक्रेताओं द्वारा महंगे दाम और कम गुणवत्ता वाली सामग्री हितग्राहियों को दिये जाने से भी आवास निर्माण में बाधा थी। इससे कई परिवारों ने आवास निर्माण में रुचि ही लेना बंद कर दिया था। इस स्थिति पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह ने अधिकारियों के साथ स्वयं मौका स्थल का भ्रमण कर हितग्राहियों से चर्चा की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया। उन्होंने जनपद पंचायतों के अमले, सहायक यंत्री, और ग्राम पंचायतों के सरपंच आदि से सामूहिक चर्चा की जिसमें ग्रामवासियों और सामग्री विक्रेताओं के साथ संवाद स्थापित कर कम दर पर उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई। नवाचार से हुई एक करोड़ की बचत जिला प्रशासन द्वारा जनपद स्तर पर थोक विक्रेताओं से संपर्क कर भवन निर्माण सामग्री की दरों को भी पूर्व निर्धारित किया गया। सीमेंट, ईंट, गिट्टी, सरिया, सेंटरिंग आदि निर्माण सामग्री स्थानीय दरों से 2 से 55 रूपये तक सस्ती दरों पर हितग्राहियों के ग्रामों में ही थोक में पहुँचाई गई। इस नवाचार से न केवल परिवहन लागत बची, बल्कि समय पर सामग्री मिलने से अधिकांश हितग्राहियों ने 2 माह से भी कम समय में अपने पक्के आवास तैयार कर लिए। इस पहल से 1067 परिवारों को 99,21,443 रूपये की सीधी बचत हुई, यानी प्रति परिवार लगभग 9,298 रूपये की औसत बचत हुई। साथ ही 1052 आवासों का निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया है और शेष 508 आवास शीघ्र पूर्ण होने की स्थिति में है। बिचौलियों से मिली मुक्ति नवाचार न केवल योजनांर्गत लक्ष्य प्राप्ति में सहायक बना, बल्कि इससे हितग्राहियों को ठगने वाले बिचौलियों से भी मुक्ति दिलाई गई। अब जिले के अन्य नवीन स्वीकृत आवासों में भी इसी मॉडल को अपनाने की योजना है।  

लगातार बढ़ रही मुंबई में रियल एस्टेट की कीमतें, दुबई को भी पीछे छोड़ा

 मुंबई  मुंबई में प्रॉपर्टी कीमतें अब दुबई से भी 20 फीसदी ज्यादा हो गई हैं, लेकिन भारतीय खरीदार इससे विचलित नहीं हुए हैं.   Wisdom Hatch के अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि मुंबई का बढ़ता हुआ प्रॉपर्टी मार्केट वैश्विक तर्क को क्यों चुनौती देता है और बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद खरीदारों को आकर्षित करता रहता है. अक्षत श्रीवास्तव कहते हैं- “मुंबई का रियल एस्टेट बढ़ता जा रहा है, क्योंकि भारतीय किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं.”  उन्होंने कहा कि भारत का प्रॉपर्टी मार्केट भावनाओं और स्थानीय मांग से प्रेरित है. भले ही दुबई बेहतर मूल्य दे, यहां लोग उसी में निवेश करना पसंद करते हैं जिसे वे समझते हैं.’ कोविड के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में आई तेजी उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र COVID के बाद तेजी से आगे बढ़ रहा. नवीनतम 1 फाइनेंस हाउसिंग टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) के अनुसार, भारत के शीर्ष शहरों में घरों की कीमतें औसतन 48% बढ़ गई हैं. यह इंडेक्स, जो RERA-पंजीकृत लेनदेन आंकड़ों पर आधारित है, दर्शाता है कि आवास बाजार महामारी के बाद से मजबूत रूप से उबर आया है. मुंबई सबसे महंगा मुंबई भारत का सबसे महंगा रियल एस्टेट बनकर उभरा है, जिसकी औसत कीमतें ₹26,975 प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई हैं. एक आंकड़ा जो न केवल अन्य भारतीय शहरों को बल्कि दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों को भी पीछे छोड़ देता है.  शहर की लगातार बुनियादी ढांचे की समस्याओं के बावजूद, प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं. श्रीवास्तव इसका कारण सांस्कृतिक मनोविज्ञान और अनौपचारिक वित्तीय प्रथाओं का मिश्रण बताते हैं. वो कहते हैं- ‘यह खरीदारों के लिए सुविधा बढ़ाता है, क्योंकि वे उस काले धन का इस्तेमाल कर सकते हैं. बहुत सारे खरीदार हैं जो किसी भी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं”. उन्होंने कहा कि जहां दुबई जैसे प्रॉपर्टी मार्केट पारदर्शी हैं और वैश्विक खरीदारों को आकर्षित करते हैं, वहीं मुंबई का हाउसिंग मार्केट स्थानीय मांग और गहरे विश्वास पर फलता-फूलता है. एक भारतीय सबसे ज्यादा भारत में ही प्रॉपर्टी खरीदना चाहता है. रियल एस्टेट बहुत हद तक स्थानीय है. महंगी प्रॉपर्टी में दुबई रह गया पीछे!  दुबई में महंगे फ्लैट मिलते हैं तो अपनी सोच बदल लीजिए। अपने देश के एक शहर ने महंगी अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में दुबई को पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं, इससे मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों भी पीछे रह गए हैं। यह शहर कोई और नहीं बल्कि एनसीआर का गुरुग्राम है। अल्ट्रा-लग्जरी प्रॉपर्टी के मामले में गुरुग्राम काफी आगे निकल गया है। देश में इस समय लग्जरी हाउसिंग प्रॉपर्टी की मांग काफी बढ़ रही है। साल 2024 में काफी लोगों ने करोड़ों रुपये के फ्लैट सहित दूसरे हाउसिंग प्रोजेक्ट खरीदे। ऐसे में देखा जाए तो साल 2024 भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक सुपर-लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट की मांग गुरुग्राम से लेकर मुंबई तक हो रही है। गुरुग्राम निकला आगे लग्जरी रियल एस्टेट कैटेगरी में गुरुग्राम ने मुंबई और दुबई को कड़ी टक्कर दी है। दिसंबर 2024 तक गुरुग्राम का DLF कैमेलियास प्रोजेक्ट भारत की रियल एस्टेट सुर्खियों में सबसे आगे रहा। इस प्रोजेक्ट में कई महंगे-महंगे सौदे हुए। ऐसे में ग्रुरुग्राम ने अल्ट्रा-लक्जरी सेगमेंट में मुंबई और दुबई दोनों को पीछे छोड़ दिया है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के सीएमडी प्रदीप मिश्रा के मुताबिक DLF कैमेलियास में 16,290 वर्ग फुट के पेंटहाउस को एक कारोबारी ने 190 करोड़ में खरीदा। यह कीमत 1.80 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट के बराबर है। ऐसे में कैमेलियास भारत के सबसे महंगे हाई-राइज कॉन्डोमिनियम के रूप में सबसे आगे रहा। कहां कितनी कीमत? मुंबई में जुहू को सबसे पॉश इलाका माना जाता है। ओआरएएम डेवलपमेंट्स के मुताबिक यहां प्रॉपर्टी की औसतन कीमत 55 हजार से 60 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं मालाबर हिल में यह कीमत 50 हजार से 55 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। वहीं बात अगर दुबई की करें तो यहां की सिलिकॉन ओएसिस में प्रॉपर्टी की औसत कीमत 40 हजार रुपये प्रति वर्ग फुट है। दुबई में पाम जुमेरह (Palm Jumeirah) काफी चर्चित जगह है। यहां समुद्र के ऊपर कॉलोनी बनी है। यहां पर प्रॉपर्टी की कीमत सबसे ज्यादा है जिसकी शुरुआत करीब एक लाख रुपये प्रति वर्ग फुट जो 10 लाख रुपये प्रति वर्ग फुट तक जाती है। गुरुग्राम कितना आगे? महंगी प्रॉपर्टी के मामले में देखें तो अभी गुरुग्राम दुबई को कड़ी टक्कर दे रहा है। कुछ मामले में तो यह दुबई से भी आगे निकल गया है। वहीं देश में अभी सबसे महंगी प्रॉपर्टी गुरुग्राम में ही बिकी है। जानकारों के मुताबिक गुरुग्राम में प्रॉपर्टी की कीमत आने वाले समय में और तेजी से बढ़ सकती है।

MP में कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की, विदिशा बनेगा कांग्रेस की प्रयोगशाला

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमजोर क्षेत्रों में विदिशा मॉडल लागू करेगी, जिसके तहत 650 पंचायतों और वार्डों में समितियां वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन और इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखेंगी। यह मॉडल उन क्षेत्रों में लागू होगा जहां कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है और संगठन कमजोर है। इस मॉडल में एक्सपर्ट्स कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे और 30 जून तक वेरिफिकेशन का काम पूरा किया जाएगा। कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे पटवारी इसके बाद जुलाई में जीतू पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ टिफिन मीटिंग करेंगे और फिर भोपाल और नर्मदापुरम में भी यह मॉडल शुरू किया जाएगा। मध्यप्रदेश में कांग्रेस पिछले 20 सालों से सत्ता से बाहर है, सिर्फ 15 महीनों को छोड़कर पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। 2020 में हुए दलबदल के बाद कई क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन बेहद नाजुक स्थिति में है। अब कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने के लिए विदिशा मॉडल का सहारा ले रही है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। पहले जानिए क्या है विदिशा मॉडल पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने संगठनात्मक रूप से सबसे कमजोर जिले विदिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। समितियों का डेटा ऑनलाइन हुआ दर्ज कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा। वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा विदिशा जिले की पंचायतों और वार्डों में बनाई गई समितियों के वेरिफिकेशन का काम 30 जून तक चलेगा। इसके लिए पीसीसी में एक कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। जहां से सभी समितियों के अध्यक्ष सहित तमाम सदस्यों से टेलीफोनिक बातचीत कर सत्यापन किया जाएगा। टिफिन मीटिंग करेंगे जीतू पटवारी विदिशा जिले में गठित हुई पंचायत और वार्ड समिति के अध्यक्षों के साथ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जुलाई के महीने में टिफिन मीटिंग करेंगे। विधानसभा वार होने वाली टिफिन मीटिंग में सभी कार्यकर्ता अपने-अपने घर से भोजन बनवाकर टिफिन लेकर आएंगे और एक जगह पीसीसी चीफ सभी अध्यक्षों के साथ बैठकर चर्चा करेंगे और भोजन करेंगे। अब भोपाल और नर्मदापुरम में होगा काम शुरू विदिशा जिले के बाद कांग्रेस अब इस मॉडल पर भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की उन विधानसभाओं में इसपर काम शुरू करेगी। जहां कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। कांग्रेस का मानना है कि इन दोनों संभागों में कांग्रेस की स्थिति सुधारने की सबसे ज्यादा जरूरत है। विदिशा से हुई पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने बताया- कांग्रेस पार्टी ने बहुत महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए विदिशा जिले को चुना था। पार्टी में इस बात की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी कि संगठन में किस तरह से संगठन में बदलाव करना चाहिए। कैसे कांग्रेस पार्टी की जमीनी स्तर पर शुरुआत कर सकते हैं। हमारे अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर जोर दिया। 70 एक्सपर्ट्स को काम पर लगाया इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 70 एक्सपर्ट्स को चुनकर विदिशा जिले की पांचों विधानसभा सीटों के हर ग्राम पंचायत और वार्ड में भेजा गया। एक्सपर्ट्स ने पंचायत और वार्ड में सबसे पहले कांग्रेस की कमजोरी की वजहों को लेकर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद पंचायत और वार्ड समिति के लिए वैचारिक रूप से मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटे गए। बातचीत के बाद पंचायत और वार्ड समिति का गठन किया गया। इन समितियों के सदस्य अब गांव और वार्ड में कांग्रेस के लिए काम करेंगे। ऑनलाइन डेटा भी किया अपलोड फर्जी वोटर्स की पहचान से लेकर वोटरलिस्ट वेरिफिकेशन और चुनाव की तैयारी में ये समिति काम करेगी। विदिशा जिले में समितियों के गठन के बाद अब इस मॉडल पर प्रदेश के दूसरे जिलों में काम किया जाएगा। कांग्रेस ने विदिशा जिले की पंचायत और वार्ड समितियों का गठन करने के बाद ऑनलाइन डेटा अपलोड भी किया है। इसमें समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई है। अब इन समितियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाकर आगे संगठन के काम को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित किया जाएगा।

प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन, दस दिन में शुरू होगी डीपीसी प्रक्रिया

भोपाल   कैबिनेट से पदोन्नति नियम 2025 को मंजूरी मिलने से नौ वर्ष बाद अब अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नति की तैयारी प्रारंभ हो गई है। सबसे पहले मंत्रालय में अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत किए जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग वरिष्ठता के हिसाब से सूची तैयार कर रहा है। प्रयास यही है कि जून में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाए। डेढ़ साल में दो बार पदोन्नति करने की तैयारी है। एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू होंगे नियम पदोन्नति नियम एक सप्ताह में अधिसूचित कर लागू कर दिए जाएंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चूंकि नियम हमने तैयार किए हैं, इसलिए सबसे पहले इनका क्रियान्वयन भी हम ही कर रहे हैं। इससे सभी विभागों को प्रक्रिया भी समझ आ जाएगी। मंत्रालयीन सेवा संवर्ग में हर स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति होगी। लगभग सभी कर्मचारी पदोन्नत होंगे। इसके लिए विभागीय पदोन्नति समिति बनाई जाएगी। वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी दस पद हैं तो कुल 24 लोगों की एक जनवरी 2025 की स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर सूची तैयार होगी। सेवा अभिलेख के आधार पर नए नियम से पात्रता निर्धारित कर पदोन्नति दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अधिकतर कर्मचारी पदोन्नत पदों का वेतनमान प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए इसमें कोई परेशानी भी नहीं होगी। पदोन्नति के लिए पदों की गणना संवर्ग के हिसाब से होगी। पदोन्नति भी पहले आरक्षित पदों के लिए होगी सबसे पहले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 प्रतिशत पद अलग किए जाएंगे। पहले पदोन्नति भी आरक्षित पदों के लिए होगी। इसके बाद अनारक्षित पदों पर पदोन्नति की जाएगी। इसमें सभी कर्मचारी शामिल होंगे। प्रथम श्रेणी के पदों पर योग्यता सह वरिष्ठता और शेष पदों पर वरिष्ठता सह उपयुक्तता का फार्मूला रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन होगी पदोन्नति प्रक्रिया नई डीपीसी प्रक्रिया को सशर्त माना जाएगा, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होगी। जीएडी का कहना है कि कोर्ट में रिवर्ट के मामलों को लेकर भी सरकार अपना पक्ष रखेगी और कैविएट दाखिल करेगी, ताकि भविष्य में कोई निर्णय बिना पक्ष सुने न हो। सभी विभागों को दी जाएगी ट्रेनिंग जीएडी के अधिकारियों के अनुसार सबसे पहले सामान्य प्रशासन विभाग अपनी डीपीसी करेगा। इसके बाद अन्य विभागों के अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें निम्न बिंदुओं की जानकारी दी जाएगी। पदों की गणना कैसे हो, नये नियमों के पैरा की व्याख्या, वर्गवार आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन और मेरिट और सीनियरिटी के नियम के बारे में बताया जाएगा। आरक्षित वर्ग को कैसे मिलेगा लाभ अनुसूचित जाति (अजा) को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (अजजा) को 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कैडर स्तर पर लागू होगा। यदि आरक्षित कोटे के पद भरे जा चुके हैं, तब पात्र अजा/अजजा वर्ग के व्यक्ति को अनारक्षित श्रेणी में स्थान मिल सकता है। भविष्य की डीपीसी में उस पद को आरक्षित कोटा में ही गिना जाएगा। अनारक्षित वर्ग के लिए चयन प्रक्रिया प्रत्येक पद के लिए दो गुना + 4 अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे। जैसे 10 पद खाली हैं तो 24 लोग चयन प्रक्रिया में शामिल होंगे। पद भरने की प्राथमिकता में पहले अजजा, फिर अजा और अंत में अनारक्षित वर्ग को लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति नियमों को अंतिम रूप देने से पहले 27 ड्राफ्ट तैयार किए गए थे। अंततः मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से चर्चा कर कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियम को अधिसूचित किया जाएगा। जीएडी का दावा है कि यह नया नियम सभी वर्गों को समान अवसर सुनिश्चित करता है। आरक्षित पदों की संख्या हो जाएगी कम नए नियम में सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है। सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को प्रदेश में शासकीय सेवाओं में जो आरक्षण निर्धारित है, वह पदोन्नति में भी मिलेगा यानी 36 प्रतिशत। शेष पद अनारक्षित वर्ग के रहेंगे। इसमें आरक्षित वर्ग भी शामिल रहता है। आरक्षित वर्ग के पद भरने के बाद अनारक्षित वर्ग में सभी शामिल होंगे। आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी को अनारक्षित श्रेणी से पदोन्नति मिलने पर आगे संवर्ग की गणना में उन्हें आरक्षित कोटे का ही माना जाएगा और आगे चलकर उनकी संख्या कोटे में कम हो जाएगी। पदोन्नति देने के लिए होगा प्रशिक्षण ‘पदोन्नति की प्रक्रिया के संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। दरअसल, नए नियमों में कई प्रविधान किए गए हैं, जिसके बारे में सभी को बारी-बारी से बताया जाएगा। हम प्रयास कर रहे हैं कि जून में ही मंत्रालय संवर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति कर दी जाएगी। सितंबर-अक्टूबर में वर्ष 2026 के लिए फिर पदोन्नत करेंगे। इस प्रकार डेढ़ वर्ष में दो बार पदोन्नति हो जाएगी।’ – संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, भोपाल

दमोह में किसान प्रहलाद पटेल ने हिमाचल के सेब की खेती कर लोगों को हैरत में डाल दिया

टीकमगढ़  बुंदेलखंड के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। हिमाचल प्रदेश के हरमन शर्मा ने एक ऐसा सेब का पौधा विकसित किया है जो 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल दे सकता है। इस खोज से बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदल गई है। उन्हें इस उपलब्धि के लिए पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया है। हरमन 99 सेब की किस्म बुंदेलखंड के कई जिलों में खूब पैदा हो रही है। किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। 50 डिग्री सेल्सियस में देता है फल हिमाचल प्रदेश के हरमन शर्मा ने कई सालों की मेहनत के बाद एक खास किस्म के सेब के पौधे को विकसित किया। यह पौधा 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी फल दे सकता है। इस खोज के लिए भारत सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रपति सम्मान दिया। फिर 2024-25 में पद्मश्री से सम्मानित किया। बुंदेलखंड में हरमन 99 सेब की किस्म अब खूब पैदा हो रही है। इन जिलों में हो रहा उत्पादन बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हरमन 99 सेब का उत्पादन हो रहा है। टीकमगढ़ के किसान सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने 2021 में ऑनलाइन इस पौधे को मंगाया था। पिछले 3 सालों से उनके पेड़ लगातार फल दे रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के उद्यानिकी विभाग की मदद से सेब का उत्पादन शुरू किया था। हर साल उन्हें अच्छा उत्पादन मिल रहा है। 22 पेड़ से की शुरुआत सुरेंद्र राजपूत ने 22 पेड़ ऑनलाइन मंगाए थे। आज वे सभी 22 पेड़ जिंदा हैं और उनमें फल लग रहे हैं। बुंदेलखंड में तापमान 40 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। लेकिन इस पौधे पर इसका कोई असर नहीं होता। इसका उत्पादन अच्छा होता है। उन्होंने बताया कि एक पेड़ में करीब 25 से 30 किलो सेब का उत्पादन होता है। यह फल मई के आखिर और जून के पहले हफ्ते में आता है। उस समय कश्मीर का सेब आना बंद हो जाता है। इसलिए बुंदेलखंड में सेब का अच्छा दाम मिलता है। इस मौसम में सेब की कीमत 250-300 रुपए किलो है। जनवरी में सूख जाता है पेड़ सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि जनवरी में पेड़ सूख जाता है। इसके बाद उसकी कटाई की जाती है। जितनी अच्छी कटाई होगी, उतना ही फल पेड़ में लगेगा। इसके बाद फूलों की क्रॉसिंग कराई जाती है। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी करना पड़ता है। वे पिछले 3 सालों से लगातार सेब का उत्पादन कर रहे हैं और बाजार में बेच रहे हैं। थोक में 200 रुपए किलो बिकता किसान सुरेंद्र राजपूत बताते हैं कि जब कश्मीर का सेब बाजार में आना बंद हो जाता है, तो बुंदेलखंड का सेब सबसे ज्यादा दिखता है। गर्मियों में होने वाले सेब का स्वाद मीठा होता है और रंग भी अच्छा होता है। इसलिए इसका थोक रेट ₹200 तक बिक जाता है। बुंदेलखंड में उत्पादन होने से बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है। यह सेब ताजा होता है। कश्मीर से आने में समय लगता है। गर्मियों में यह सेब तुरंत बाजार में पहुंच जाता है। इसलिए इसका मुनाफा भी अच्छा होता है। इन बातों का रखना होगा ध्यान सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि बुंदेलखंड में सेब का उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। अगर कोई किसान इसकी खेती करना चाहता है, तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। पौधा लगाते समय ध्यान रखना जरूरी है कि उसे कम मात्रा में पानी दें। कीटनाशक दवा का छिड़काव करें, ताकि दीमक न लगे। 2 साल बाद फल देने लगता है। जब पेड़ बड़ा हो जाए और जनवरी में सूख जाए, तो उसकी डालियों की कटाई करें। अगर मधुमक्खी नहीं है, तो फूलों की क्रॉसिंग भी एक दूसरे फूल से करनी पड़ती है। इससे फल का उत्पादन अच्छा होता है। हिमाचल के हरमन शर्मा ने किया है रिसर्च हिमाचल के बिलासपुर जिले के रहने वाले हरमन शर्मा ने कई सालों तक रिसर्च के बाद एक ऐसा पौधा बनाया जो 60 डिग्री के तापमान पर भी पैदा होता है और फल देता है। जब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में यह सेब सफल हुआ, तो भारत सरकार ने उन्हें पहले राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया। इस पौधे का नाम भी उन्हीं के नाम पर है, हरमन 99। इसके बाद वर्ष 2024-25 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। उनके द्वारा रिसर्च किए गए इस पौधे ने अब बुंदेलखंड के किसानों की तस्वीर और तकदीर बदल दी है।

देश में कोविड-19 के एक्टिव मामलों में अब लगातार गिरावट देखी जा रही है: संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन कुमार

नई दिल्ली  कोरोना वायरस के नए ‘सिंगापुर वेरिएंट’ की भारत में पुष्टि के बीच ICMR-NIV ने देशवासियों को राहत की खबर दी है। संस्थान के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि देश में कोविड-19 के एक्टिव मामलों में अब लगातार गिरावट देखी जा रही है और फिलहाल जो वेरिएंट्स फैल रहे हैं, उनके लक्षण सामान्य और हल्के हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसका असर उतना घातक नहीं है जितना पहले देखा गया था। ऐसे में घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। डॉ. कुमार ने कहा, “हम कोविड के वेरिएंट्स की जीनोमिक जांच और डायग्नोसिस कर रहे हैं। सिंगापुर और उसके आसपास के देशों में मामलों की बढ़ोतरी के बाद हमने देखा कि वही वेरिएंट भारत में भी पिछले 5-6 हफ्तों से देखा जा रहा है। हमने इस पर अपनी निगरानी और टेस्टिंग बढ़ा दी है।” भारत में अभी कौन-कौन से वेरिएंट एक्टिव? ICMR-NIV के अनुसार, भारत में इस समय JN.1, LF.7, XFG और NB.1.8.1 जैसे ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट्स सक्रिय हैं। डॉ. कुमार के मुताबिक, “हमने इन सभी वेरिएंट्स को आइसोलेट कर लिया है और अभी तक इनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं। ज़्यादातर संक्रमण हल्के ही हैं।” सरकार की तैयारी ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने ANI से बातचीत में कहा कि सरकार तीन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दे रही है, जिसमें संक्रमण की गति और केसों में तेजी, क्या वायरस हमारी प्राकृतिक या वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी से बच निकल रहा है? क्या ये वेरिएंट पहले से ज्यादा गंभीर हैं या फिर ओमिक्रॉन जैसे हल्के हैं, शामिल हैं। उन्होंने कहा, “फिलहाल ज़्यादातर मामलों में लक्षण ओमिक्रॉन जैसे ही हल्के और सामान्य हैं।” सरकार की रणनीति डॉ. बहल ने यह भी बताया कि अगर कोई नया वेरिएंट उभरता है, तो सरकार के पास दो विकल्प हैं- एक मौजूदा वैक्सीन की प्रभावशीलता की जांच करना और दूसरा विशेष रूप से नए वेरिएंट को टारगेट कर नई वैक्सीन बनाना। उन्होंने आगे कहा, “हमारी वैक्सीन डेवलपमेंट क्षमता तैयार है और ज़रूरत पड़ने पर नई वैक्सीन जल्द विकसित की जा सकती है। अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है।”  

पीएम मोदी ने बताया- क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 शिक्षा जगत के लिए अच्छी खबर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारतीय विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। पीएम मोदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक एक्स पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आई है। हमारी सरकार भारत के युवाओं के लाभ के लिए अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।” धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा, “वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ 54 उच्च शिक्षा संस्थानों में शामिल होने के साथ भारत ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग में एक नया मुकाम हासिल किया है। साल 2014 में सिर्फ 11 संस्थानों से अब 54 तक, यह लगभग पांच गुना वृद्धि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए परिवर्तनकारी शैक्षिक सुधारों को दर्शाती है। मुझे विश्वास है कि अनुसंधान, नवाचार और अंतर्राष्ट्रीयकरण पर एनईपी पर जोर के साथ आने वाले समय में और अधिक भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान वैश्विक उत्कृष्टता हासिल करेंगे।” आपको बता दें, गुरुवार को जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में कुल 54 भारतीय संस्थानों को शामिल किया गया है, जो भारत के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली शीर्ष रैंक वाला भारतीय संस्थान बनकर उभरा है, जो वैश्विक स्तर पर 150वें स्थान से 123वें स्थान पर पहुंच गया है, जो अब तक का उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। शिक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया, “आईआईटी दिल्ली भारत के शीर्ष रैंक वाले संस्थान के रूप में अग्रणी है। यह क्यूएस रैंकिंग में संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक ऊंचाई है।” मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने क्यूएस रैंकिंग में प्रतिनिधित्व में 390 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज की है, जो जी-20 देशों में सबसे तेज है। पिछले साल की रैंकिंग में भारत का शीर्ष संस्थान आईआईटी बॉम्बे इस साल 118वें स्थान से फिसलकर 129वें स्थान पर आ गया है। इस वर्ष भारत के लगभग 48 प्रतिशत विश्वविद्यालयों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। वैश्विक शीर्ष 100 में पांच भारतीय संस्थानों ने भी स्थान प्राप्त किया है।

एक जुलाई तक पूरे राज्य में 100 प्रतिशत एफआरएस कवरेज हासिल करने के दिए निर्देश: योगी सरकार

लखनऊ यूपी में गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों को लेकर योगी सरकार नई योजना लागू करने जा रही है। जुलाई से ये योजना लागू हो जाएगी। दरअसल कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए, यूपी सरकार ने पोषण ट्रैकर में ‘फेस रिकॉग्निशन सिस्टम’ (एफआरएस) को एकीकृत किया है, जिससे गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरों और छह महीने से छह साल की उम्र तक के बच्चों को ‘टेक-होम राशन’ (टीएचआर) का लक्षित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित हो सके। एक बयान अनुसार, एक जुलाई तक पूरे राज्य में 100 प्रतिशत एफआरएस कवरेज हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए राज्यव्यापी जागरूकता और पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा। बयान में कहा गया है कि पोषण ट्रैकर में एफआरएस दो-स्तरीय प्रमाणीकरण प्रणाली है, जिसमें चेहरे की पहचान और ‘वन टाइम पासवर्ड’ (ओटीपी) का उपयोग होता है। इसमें कहा गया है कि लाभार्थी की फोटो को आधार से जुड़े ई-केवाईसी के साथ मिलाया जाता है और उनके पंजीकृत मोबाइल पर भेजा गया ओटीपी आंगनवाड़ी केंद्र पर सत्यापित किया जाता है। यह प्रणाली धोखाधड़ी रोकने और राशन वितरण में पारदर्शिता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बयान के मुताबिक, उप्र में 2024 से शुरू हुई इस योजना में एफआरएस प्रणाली को जुलाई 2025 तक प्रदेश में शत-प्रतिशत लागू करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से दिये गये हैं। एफआरएस का पायलट चरण अगस्त 2024 में कानपुर नगर के बिधनू और सरसौल प्रोजेक्ट्स में शुरू हुआ। 13 जून 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, 1.18 करोड़ पात्र लाभार्थियों के ई-केवाईसी का कार्य किया जा रहा है।  

प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को समूल खत्म करने का है संकल्प

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल के संपूर्ण उन्मूलन के लिए हम सबकी सक्रिय सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। सबके विश्वास, साथ और प्रयासों से ही रोग का उन्मूलन होगा। राज्यपाल श्री पटेल विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर बड़वानी में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर से वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रदेश की जनता के नाम संदेश और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों पर आधारित अभिनंदन-पत्र का उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा वाचन किया गया। जनजातियों के कल्याण का स्वर्ण काल राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जनजाति जीवन के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए समर्पित और संवेदनशील व्यक्तित्व है। उनके नेतृत्व में भारत में जनजाति कल्याण का स्वर्ण युग चल रहा है। सिकल सेल उन्मूलन मिशन के तहत प्रदेश सरकार सराहनीय कार्य कर रही है। राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों के लिए राज्य सरकार की पूरी टीम को बधाई दी। सिकल सेल के उन्मूलन के लिए दिए मंत्र राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए जागरूकता सर्वाधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विवाह के पूर्व युवक-युवती अपने जेनेटिक कार्ड का मिलान ज़रूर करें। इसी प्रकार गर्भावस्था में माँ और बच्चे की सिकल सेल जाँच और जन्म के 72 घंटों में नवजात की जाँच किया जाना ज़रूरी है। राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल से पीड़ित रोगी और वाहकों से भी अपील की है कि वे नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और चिकित्सक की सलाह अनुसार दवाइयाँ लें। उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि सिकल सेल प्रभावित बच्चों के साथ आत्मीय व्यवहार करें। उन्हें सिकल सेल को समझने, लड़ने और हराने में संबल प्रदान करें। जनजातीय प्रतिनिधियों से की सहयोग की अपील राज्यपाल श्री पटेल ने स्वयं जनजातीय समुदाय से आने की बात कहते हुए समुदाय के प्रतिनिधियों से अपील की कि जनजाति क्षेत्रों में सिकल सेल के जनजागरण प्रयासों में सतत्, सक्रिय और संवेदनशीलता के साथ सहयोग करें। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोगी बने। युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग जनजातीय कल्याण में करें राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि सिकल सेल की जागरूकता और रोकथाम प्रयासों को शैक्षणिक संस्थानों की विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के साथ पाठ्यक्रमों में भी शामिल करने के लिये कहा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने वाले जनजाति समुदाय के विद्यार्थियों से अपील की कि वे सिकल सेल रोग उन्मूलन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करें। इस बीमारी पर शोध करें। अपने ग्रामीण अंचलों में जागरूकता प्रयासों में सहभागी बने। अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग अपने समुदाय के कल्याण और विकास में करें। प्रदेश में 1 करोड़ 6 लाख से नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग हुई पूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे समाज में शादी से पहले कुंडली मिलान की परंपरा है। अब समय आ गया है कि कुंडली के साथ हम वर-वधु का ‘सिकल सेल जेनेटिक कार्ड’ भी मिलाएं। इस बीमारी का पता जितनी जल्दी चल जाए इसे नियंत्रण में रखने और रोगी को स्वस्थ रखने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। प्रदेश का जनजातीय समाज बड़ी संख्या में इस बीमारी से प्रभावित है। सिकल सेल हमारे लिए केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। वर्ष 2047 तक सिकल सेल को जड़ से मिटाने का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में “राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047” प्रारंभ किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्क्रीनिंग, रोग प्रबंधन, परामर्श और जन-जागरूकता, इन चारों महत्वपूर्ण स्तरों पर प्रदेश में समन्वित रूप से कार्य किया जा रह है। प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 6 लाख से नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। सभी चिन्हित मरीजों को हाइड्रॉक्सी यूरिया, फॉलिक एसिड और नि:शुल्क रक्तदान की सुविधा दी जा रही है। सिकल सेल रोगियों की जेनेटिक कॉउंसिलिंग का कार्य भी जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खरगोन जिले में नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे संपूर्ण निमाड़ अंचल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी पहुंचने के लिए भोपाल से रवाना हुए लेकिन मौसम खराब होने के कारण वे बड़वानी नहीं पहुंच पाए और उन्होंने इन्दौर से ही कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया।  राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एमीनिया के प्रति जागरुकता अभियान चलाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल ने प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एमीनिया के प्रति जागरुकता अभियान चलाया है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र को इसका लाभ मिला है। सिकल सेल बीमारी से भावी पीढ़ियां खराब हो जाती हैं। सिकल सेल बीमारी से जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। सिकल सेल एनीमिया होने पर हमारी रक्त कोशिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। यह बीमारी आनुवांशिक तौर पर आगे बढ़ती रहती है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की है। इसमें बड़वानी जिले के सिकल सेल से सबसे ज्यादा प्रभावित होने की जानकारी मिली। यहां सिलक मित्र तैनात किए गए हैं। मु्ख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिकल सेल एमीनिया से डरने की आवश्यकता नहीं है। स्क्रीनिंग और रोकथाम के योग्य तरीकों से इस बीमारी से मुक्ति मिल सकती है। नवजात शिशुओं की जांच के लिए एम्स भोपाल में सिकल सेल जांच यूनिट शुरू की गई है। प्रदेश में जारी अभियान सिकल सेल के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा है। जनजातीय अंचलों में खोली जा रहीं फूड प्रोसेसिंग यूनिट मु्ख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़वानी, झाबुआ, धार सहित प्रदेश के अन्य जनजातीय बहुल जिलों के लिए अनेक कल्याणकारी कदम उठाए हैं। निमाड़ के किसानों को अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। राज्य सरकार ने तापी मेगा रीचार्ज परियोजना पर कार्य शुरू किया है। जनजातीय अंचलों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट करने के अभियान अंतर्गत प्रदेशभर में कृषि मेले लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने तीसरी फसल मूंग के लिए सरकारी खरीद शुरू करने के लिए पंजीयन शुरू कर दिया हैं। बिजली बिल से … Read more

इंडिया- इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का हो गया आधिकारिक नामकरण, ट्रॉफी के साथ नजर आए सचिन और एंडरसन

नई दिल्ली इंडिया- इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से पहले एक बात तो तय थी कि इस सीरीज का नाम अब पटौदी ट्रॉफी नहीं होगा। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि इस सीरीज का नाम भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और इंग्लैंड के महान तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन के नाम पर रखा जाएगा। ये भी दावा किया गया था कि इस सीरीज का नाम तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी होगा, लेकिन इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी ने इसका नाम थोड़ा सा बदला है। ईसीबी और बीसीसीआई ने मिलकर इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। इंडिया और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली हर एक टेस्ट सीरीज को अब से हम एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी कहेंगे। सचिन तेंदुलकर और जेम्स एंडरसन ने नई ट्रॉफी का अनावरण भी कर दिया है। इसके अलावा इस बात की भी आधिकारिक पुष्टि हो गई है कि पटौदी परिवार की शान में इस ट्रॉफी को जीतने वाले कप्तान को पदौटी पदक दिया जाएगा। सिर्फ इंग्लैंड में ही नहीं, बल्कि भारत में भी इसी नाम से ये ट्रॉफी जानी जाएगी और विजेता कप्तान को पटौदी मेडल मिलेगा। ईसीबी ने मीडिया रिलीज में बताया, “एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी, इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के बीच एक संयुक्त पहल है, जो अब इंग्लैंड और भारत के बीच होने वाली सभी भविष्य की टेस्ट सीरीज का प्रतिनिधित्व करेगी। इससे पहले इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज पटौदी ट्रॉफी और भारत में टेस्ट सीरीज एंथनी डी मेलो ट्रॉफी के नाम से जानी जाती थी। हालांकि, अब दोनों ही देशों में सीरीज एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी होगी।” आपको बता दें, ट्रॉफी में एंडरसन और तेंदुलकर की एक्शन में तस्वीरें हैं, साथ ही उनके सिग्नेचर भी इनग्रेव्ड हैं। खेल के दो सबसे महान खिलाड़ियों के लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि बीसीसीआई और ईसीबी की ओर से है। एंडरसन और तेंदुलकर दोनों को व्यापक रूप से सर्वकालिक महान माना जाता है। वे टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज़्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं। तेंदुलकर ने 200 मैच खेले हैं, जबकि एंडरसन ने 188 मैच अपने टेस्ट करियर में खेले हैं।  

पुतिन ने इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश, ट्रंप ने लताड़ा

सेंट पीटर्सबर्ग  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की. अपनी यूक्रेन वाली जंग में फंसकर चारों खाने चित हो रहे पुतिन अब इजरायल और ईरान के बीच शांति का ‘मसीहा’ बनने चले हैं. सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम में पुतिन ने बड़े जोश में कहा, ‘हम इजरायल-ईरान के झगड़े को सुलझा सकते हैं. रूस इस संकट के समाधान के लिए एक ऐसा समझौता कराने में मदद कर सकता है जिससे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने की अनुमति मिले और इजराइल की सुरक्षा चिंताएं भी दूर हों.’ लेकिन इस बयान को सुनकर दुनिया हैरान है. क्योंकि पुतिन अभी अपना युद्ध ही नहीं रोक पाए हैं. पुतिन ने कहा, ‘यह एक संवेदनशील मामला है, लेकिन मेरी नजर में इसका समाधान संभव है.’ लेकिन पुतिन को ट्रंप ने नसीहत दी है कि वह पहले अपनी जंग से निपटें और दूसरों की फिक्र करना छोड़ दें. पुतिन का यह बयान तब आया है जब यूक्रेन ने दावा किया है कि अब तक 10 लाख रूसी सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं. जब रूसी राष्ट्रपति से यह पूछा गया कि अगर इजराइल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दे तो रूस की प्रतिक्रिया क्या होगी, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया. पुतिन ने कहा, ‘मैं इस संभावना पर चर्चा भी नहीं करना चाहता. लगातार बढ़ रहा है ईरान-इजरायल का संघर्ष ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध दो साल से ऊपर चला गया है और हालात सुधरने की जगह और बिगड़ते जा रहे हैं. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों की असली संख्या छुपाई जा रही है. उन्होंने कहा, “बहुत ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जितना बताया जा रहा है उससे कहीं ज़्यादा. वहां एक बिल्डिंग गिरती है और कहा जाता है कि कोई घायल नहीं हुआ  क्या ये मजाक है?” वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि पुतिन इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. रूस के लिए यूक्रेन युद्ध का समाधान जितना दूर है, उतना ही जटिल इजरायल-ईरान संकट भी बनता जा रहा है. पुतिन ने की थी पेशकश बुधवार को पुतिन ने इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने में मध्यस्थता करने की पेशकश की थी. अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के पत्रकारों के साथ एक गोलमेज सत्र में बोलते हुए, पुतिन ने कहा कि “यह एक नाजुक मुद्दा है. मेरे विचार से, एक समाधान पाया जा सकता है.” पुतिन ने कहा कि उन्होंने ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मास्को के प्रस्तावों को साझा किया. ट्रंप ने पुतिन को सुना दिया इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने इजरायल के हमलों के आगे झुकने से इनकार करते हुए चेताया कि अगर अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो यह उसके लिए ‘अपूरणीय क्षति’ साबित हो सकती है. पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस ने ईरान, इजराइल और अमेरिका को अपने प्रस्ताव साझा कर दिए हैं. उन्होंने कहा, ‘हम किसी पर कुछ थोप नहीं रहे हैं. हम सिर्फ इस स्थिति से बाहर निकलने का एक रास्ता सुझा रहे हैं. लेकिन अंतिम निर्णय इन देशों के राजनीतिक नेतृत्व का है, खासकर ईरान और इजरायल का.’ हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश पर चुटकी लेते हुए कहा, ‘मैंने पुतिन से कहा, मुझ पर अहसान करो. पहले अपने ही मुद्दे सुलझा लो. बाद में बाकी की चिंता करना.’ ईरान से रिश्तों की दुहाई दे रहे पुतिन पुतिन ने बड़े गर्व से बताया कि रूस और ईरान की दोस्ती ‘पक्की’ है. रूस ने ईरान के बुशहर में परमाणु संयंत्र बनाया, और अब वहां दो और रिएक्टर बना रहा है. वहां 200 से ज्यादा रूसी कर्मचारी दिन-रात जुटे हैं. पुतिन ने ये भी कहा कि ईरान ने कभी उनसे सैन्य मदद नहीं मांगी. रूस ने इजरायल के साथ बातचीत कर यह सुनिश्चित किया है कि उसकी सुरक्षा से समझौता न हो. यूक्रेन युद्ध पर रूस का रुख पुतिन ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बातचीत को तैयार हैं, लेकिन दोहराया कि जेलेंस्की का कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब वह वैध नेता नहीं हैं. हालांकि कीव और उसके सहयोगी देशों ने इस दावे को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, ‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो हम अपने लक्ष्यों को सैन्य माध्यम से प्राप्त करेंगे.’

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