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अग्रवाल और सुबुद्धि को नए साल में प्रमोट करने विभाग ने मांगे पी.पी.सी.एफ के चार नए पद.

The department to promote Agarwal and Subuddhi has sought four new positions for the PPCF in the New Year. उदित नारायणभोपाल। वन विभाग ने सेवानिवृत होने से पहले दो वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों को प्रमोशन देने के लिए राज्य शासन से पीसीसीएफ के चार पद मांगे है। इस आशय का प्रस्ताव मंत्रालय वल्लभ भवन में भेज दिया गया है। राज्य शासन 6 महीने के लिए अस्थाई तौर पर पीसीसीएफ के चार पद स्वीकृत कर सकता है। पीसीसीएफ के चार पद की मंजूरी मिलने के बाद 1991 बैच के दो अपर प्रधान मुख्यमंत्री वन संरक्षक (वन्य प्राणी) और एपीसीसीएफ (वित्त एवं बजट) पंकज अग्रवाल के अलावा 1992 बैच के एपीसीसीएफ (विकास) यूके सुबुद्धि तथा वन विकास निगम में पदस्थ एपीसीसीएफ सुदीप सिंह पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगे। विभाग ने प्रस्ताव बनाकर शासन को मंजूरी के लिए भेज दी है। 1991 बैच के एपीसीसीएफ पंकज अग्रवाल मार्च 24 में और 1992 बैच के यूके सुबुद्धि नवम्बर 24 में रिटायर हो जाएंगे। यहां यह भी उल्लेखनीय है केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के अनुसार राज्य में पीसीसीएफ के निर्धारित मापदंड (2%) से अधिक पद पर कार्य कर रहें है। इसके पहले भी वन विभाग ने रिटायरमेंट के पहले के रमन को पीसीसीएफ पद पर प्रमोशन देने की मंशा से राज्य शासन ने पद मांगे थे, जिसे तत्कालीन मुख्य सचिव इक़बाल सिंह बैस ने ख़ारिज कर दिया था।आईएफएस के लिए डीपीसी टलीराज्य सरकार के गठन की प्रक्रिया के चलते 13 राज्य वन सेवा से आईएफएस अवार्ड के लिए 22 दिसंबर को प्रस्तावित पदोन्नति कमेटी की बैठक टल गई है। इस बैठक में 2009 बैच के राज्य वन सेवा के अधिकारी रामकुमार अवधिया को आईएफएस पद पर प्रमोट करने के लिए हरी झंडी मिलने की संभावना थी। कमेटी 2011 बैच के आशीष बांसोड़, विद्याभूषण सिंह, गौरव कुमार मिश्रा, तरुणा वर्मा, हेमंत यादव, सुरेश कोड़ापे, प्रीति अहिरवार, लोकेश निरापुरे, राजाराम परमार, करण सिंह रंधा और माधव सिंह मौर्य को आईएफएस अवार्ड के लिए हरी झंडी दे सकती है। गड़बड़ियों में उलझे रहने की वजह से 2011 बैच की डॉ कल्पना तिवारी और राजबेंद्र मिश्रा के नाम विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि 13 अधिकारियों को आईएफएस अवार्ड देने के लिए 2011 बैच से 2013 बैच के करीब राज्य वन सेवा के 39 अफसरों के नाम पर मंथन होना था।

वन विभाग ने वनों की सुरक्षा के लिए मांगी एस.ए.एफ की तीन अतिरिक्त कंपनियां

The Forest Department requested three additional companies of the Special Armed Forces (S.A.F.) for the protection of forests. उदित नारायण भोपाल। राज्य के वन विभाग ने मंत्रालय में दिये एक उच्च स्तरीय प्रेजेन्टेशन में एसएएफ की तीन अतिरित कंपनियां मांगी हैं। वर्तमान में एसएएफ की तीन कंपनियां क्रमशः आठवीं वाहिनी छिन्दवाड़ा, 15 वीं वाहिनी इंदौर एवं 26 वीं वाहिनी गुना के 221 सशस्त्र अधिकारी एवं कर्मचारी वन क्षेत्र में पदस्थ हैं जिन्हें 14 संवेदनशील वनमंडलों में संलग्न किया गया है। चूंकि वनकर्मियों को बंदूक चलाने का अधिकार नहीं दिया गया है, इसलिये वन विभाग ने एसएएफ की तीन अतिरिक्त कंपनियों को देने की और मांग की है। इसी प्रकार, प्रेजेन्टेशन में वन अधिकारियों को पुलिस की तरह वाहनों में बीकन लाईन लाइट लगाने, वन्य प्राणी के हमले में जनहानि होने पर 12 लाख रुपये हर्जाना देने, वन कर्मचारियों को पुलिस की तरह 13 माह का वेतन देने, पौष्टिक आहार भत्ता देने एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थी पर पुलिस की तरह नक्सल भत्ता देने की भी मांग की है जिससे वन कर्मियों का मनोबल बढ़ सके।

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया

Patil will be the new head of forest department in the new year डीपीसी कमेटी ने लगाई उनके नाम पर मुहर उदित नारायणभोपाल ! वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अभय कुमार पाटिल जंगल महकमे के नए मुखिया होंगे। उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। फरवरी में वन विभाग के नए मुखिया असीम श्रीवास्तव हो बनेंगे।मुख्य सचिव वीणा राणा की अध्यक्षता में शुक्रवार को डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के वन बल प्रमुख सुधीर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे। इसी बैठक में पहली बार वन बल प्रमुख के लिए डीपीसी कमेटी ने 1986 बैच के अभय कुमार पाटिल और 1988 बैच के असीम श्रीवास्तव के नाम पर अपनी मुहर लगाई। ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अगले वन बल प्रमुख पाटिल का कार्यकाल एक महीने का ही है। यानि फरवरी में हॉफ पद के लिए दोबारा डीपीसी न करनी पड़े। फरवरी में बनने वाले वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव का कार्यकल जुलाई 2025 तक रहेगा। कमेटी ने बैठक में 1990 बैच के बिभाष ठाकुर और विवेक जैन को एपीपीसीएफ से पीसीसीएफ पद पर प्रमोट करने पर मुहर लगाई है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। नए साल में होंगे बदलाववन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता की अनदेखी की गई। इसी कारण यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है।

हरे भरे वृक्षों की कटाई जारी, विभाग अंजान, जिम्मेदार चुप.

Continued Cutting of green trees, department unaware, responsible parties silent. कटनी । वन विभाग की लचर कार्य प्रणाली के चलते जंगल काटे जा रहे हैं हरे-भरे वृक्षों को ऊजाडा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है लेकिन विभाग के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसे सवाल खड़े हो रहे हैं यह बात जिम्मेदार अधिकारियों तक भी है लेकिन मामले को दबाया जा रहा है जानकारी के अनुसार बरही रेंज सुधरने का नाम नहीं ले रहा है अभी हाल ही में बंजर बरेला और सलैया सिहोरा में हज़ारों क्विंटल लकड़ी हर रोज काटी जा रही हैं फ़ोटो मे तुरन्त की कटान स्पश्ट दिखाई दे रही है जी पी एस के साथ फोटो खींची गईं हैं ताकि विभाग राजस्व की ज़मीन न बता सके सारी तस्वीर जी पी एस के साथ हैं जब भी कोई बात आती है तभी किसी न किसी बहाने से जांच को भटकाया जाता है ताकि संलिप्त कर्मचारियों को बचाया जा सके और जंगल ऐसे ही कटते और लुटते रहें। और आरोपी पर्दे के पीछे रहें। किन्तु अब वन विभाग की बेशर्मी की हद हो गई कार्यालय में बैठकर ही काम किया जा रहा है पूरी तरह फील्ड में जाने से अधिकारी गुरेज कर रहे हैं मजे की बात तो यह है कि जंगल को सुरक्षित रखने का विभाग वन विभाग का होता है लेकिन कर्मचारियों के द्वारा ही जिम्मेदारी से काम नहीं किया जाता है

अपर सचिव वन के खिलाफ लोकायुक्त में मामला दर्ज.

A case has been filed against the Deputy Secretary of Forests in the Lokayukta. लोकायुक्त संगठन तत्कालीन छतरपुर डीएफओ एवं वर्तमान अवर सचिव वन अनुराग कुमार के खिलाफ वायरबेड और चैनलिंक खरीदी में अनियमित किए जाने पर प्रकरण पंजी बात कर लिया है। जांच की जिम्मेदारी एसपी सागर लोकायुक्त को दी गई है। लोकायुक्त संगठन ने वन विभाग को पत्र लिखकर खरीदी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के बार-बार निर्देश दिए जा रहे है किन्तु विभाग दस्तावेज उपलब्ध कराने में टालमटोल कर रहा है। उज्जैन एसपी लोकायुक्त ने 3 साल पहले एपीसीसी सत्यानंद के खिलाफ प्रकरण पंजीबद किया था। इसके बाद से सत्यानंद से संबंधित जांच आगे नहीं बढ़ पाई। इसके अलावा खरगोन डीएफओ प्रशांत कुमार, इको टूरिज्म बोर्ड में पदस्थ साहिल गर्ग सहित आधा दर्जन आईएफएस अधिकारियों के खिलाफ जांच लंबित है किंतु फैसला अभी तक नहीं लिया जा सका है। मैं इस मामले को दिखवाता हूं। कमल अरोरा सीसीएफ जबलपुर

वन विभाग में कमीशन का खेल: चहेते सप्लायर को उपकृत करने मार्केट से हो रही है खरीदी.

The Game of Commission in Forest Department. उदित नारायण भोपाल। वन विभाग में कमीशनबाजी का खेल बदस्तूर जारी है। निर्वतमान वन मंत्री विजय शाह ने अपने कार्यकाल में कमीशनबाजी के खेल पर रोक लगाने की मंशा से प्रदेश स्तर पर एकजाई टेंडर करने के आदेश जारी किए थे। अफसरों ने उनके आदेश को धुंआ में उड़ाते वनमंडल स्तर पर खरीदी का क्रम जारी रखा है। ताज़ा मामला मंडला पूर्व और मंडला पश्चिम का है। दोनों ही वनमंडल की कमान एक ही अफसर के हाथ में है. यही वजह है कि डीएफओ ने अपने चहेते सप्लायर्स जैन बंदुओं को बिल्डिंग मैटेरियल्स और नीमखली गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी प्राय करने का वर्क आर्डर जारी कर दिया। सूत्रों के अनुसार डीएफओ को खरीदारी की इतनी जल्दबाजी थी कि वर्क आर्डर पहले जारी कर दिया और टेंडर बाद में बुलाई। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यालय से आदेश जारी है कि वर्मी खाद और नीमखली अनुसंधान एवं विस्तार शाखा से ही खरीदा जाए किंतु विभाग की शाखा से खरीदने पर कमीशन बाजी का खेल नहीं हो पता, इसलिए निविदा कर मार्केट से खरीदी की जा रही है, वह भी डीएफओ के पसंदीदा गगन जैन के फर्म से खरीदने का फरमान है। डीएफओ ने निविदा 15 दिसंबर को बुलवाई और वर्क आर्डर 14 दिसंबर को ही कर दिया। बिल्डिंग मैटेरियल सप्लाई का ऑर्डर भी अचल जैन की फर्म को दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पौधारोपण के कार्य अनुसंधान एवं विस्तार शाखा के द्वारा किया जाता है। मंडल वन मंडल में यह कार्य टेरिटोरियल डीएफओ कर रहे हैं. डीएफओ नित्यानंद ने पश्चिमी वन मंडल के लिए नीम खली गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी सप्लायर का ठेका गगन जैन की फर्म को दिया है। इन सामग्रियों की खरीदी मार्केट दर से कई गुना अधिक है। पश्चिमी वन मंडल में खरीदी का लेखा-जोखा नीम खली 7350 कुंटल गोबर खाद 881 कुंटल उपजाऊ मिट्टी 1742 कुंटल

बाघ एवं कछुओं की अंतर्राज्यीय तस्करी करने वाला गिरफ्तार.

Caught the international poacher involved in tiger and turtle smuggling. भोपाल। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स भोपाल ने अलग अलग स्थानों पर कार्यवाही करते हुये! डिण्डोरी एवं राज्य के बाहर अयोध्या उप्र से बाघ के अंगों एवं दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।कछुआ तस्करी में विगत 3 माह से फरार एक आरोपी को अयोध्या उप्र से गिरफ्तार कर न्यायालय नर्मदापुरम के समक्ष पेश किया गया। वहीं वन्यप्राणी बाघ के शिकार एवं उसके अवयवों की अंतराज्जीय तस्करी के प्रकरण में संगठित बावरिया गिरोह के 1 अन्य आरोपी को केन्द्रीय जेल चन्द्रपुर महाराष्ट्र से प्रोडक्शन वारंट पर न्यायालय नर्मदापुरम के समक्ष पेश किये जाने उपरांत रिमांड पर लिया जाकर बाघ के शिकार एवं उससे अवयवों में लिप्त गिरोह के अन्य सदस्यों के संबंध मे विस्तृत पूछताछ की गई एवं आरोपी को तमिलनाडू राज्य में बाघ के शिकार वाले स्थान पर ले जाकर आवश्यक कार्यवाही की गई। उक्त प्रकरण में पूर्व में कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय तस्कर कल्ला बावरिया को गिरफ्तार किया था। जिसके विरूद्ध भारत एवं नेपाल राष्ट्र में बाघ के शिकार एवं उसके अवयवों की तस्करी के कई प्रकरण दर्ज हैं।

वन एवं पर्यावरण स्वीकृति हुई आसान, केंद्र ने किया वन एवं पर्यावरण नियमों में संशोधन.

Approval for forest and environment became easier as the central government made amendments to the forest and environmental regulations. उदित नारायण,    भोपाल। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों को सरल कर दिया है ताकि बड़े प्रोजेक्ट के क्लीयरेंस जल्द से जल्द मिल सके। नए संशोधन के तहत अब कंसलटेंट वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए सीधे तकनीकी कमेटी को फॉरेस्ट और पर्यावरण  के लिए अपना प्रस्ताव भेज सकेंगे। यानी अब सिया कमेटी की भूमिका को निष्प्रभावी बना दिया गया है।  केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक डेटा संचालित तरीके से हितधारकों और तकनीकी मूल्यांकन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, मंत्रालय ने जीआईएस, एडवांस डेटा एनालिटिक्स आदि जैसी उभरती तकनीकी परिवेश के दायरे का विस्तार किया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नियमों में संशोधन करते हुए कठिन और जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश की है। अब से, सभी नए प्रस्ताव चाहे किसी भी प्रकार के हों, प्रारंभिक जांच के लिए सदस्य सचिव (एमएस), एसईएसी ( स्टेट  एक्सपर्ट अप्रैज़ल कमेटी ) को प्रस्तुत किए जाएंगे। परिवेश पोर्टल पर ही संबंधित एसईआईएए को स्पष्ट सिफारिशें करने के लिए विशेषज्ञ समिति (एसईएसी) द्वारा जांच और आगे विचार किया जाएगा। नए संस्करण ने अब एमएस, एसईएसी को उपरोक्त ओएम में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार मानक टीओआर जारी करने में सक्षम बना दिया है। क्या थी पुरानी व्यवस्था संशोधन के पहले तक व्यवस्था यह थी कि प्रोजेक्ट के कंसलटेंट को अपने प्रस्ताव को पहले सिया कमेटी के किंतु-परंतु बिंदुओं के सवालों जवाबों से गुजरना पड़ता था। इसके कारण प्रस्ताव को वन और पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था। कई बार ऐसा भी हुआ कि सरकारी प्रोजेक्ट भी सिया कमेटी के समक्ष ही महीना और वर्षों तक लंबित रहे। इन समस्याओं को लेकर कई बार भारत सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को शिकायत भी कई गई और इस शिकायत के आधार पर नया संशोधन आदेश जारी किया गया है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर प्रबंधन का जीपीएस बघीरा एप्प बना खिलौना.

The GPS Bagheera app has become a tool for management within the Bandhavgarh Tiger Reserve. भारत सरकार के कई लाखो की राशियों से खरीदा गया घटिया मोबाईल जीपीएस, प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में नियम विरुद्ध तरीके से प्रवेश वाहनों पर वाहन चालकों पर व गाइडो पर जीपीएस बघीरा एप्प लोकेशन अनुशार प्रबंधन कार्यवाही करने में हों रहा है नाकाम.बांधवगढ़ जंगल सफ़ारी में निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जिया पर्यटको हेतु प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्र में भी प्रवेश कर रही है खुले आम पर्यटक वाहन फुल डे सफारी वाहन चालक व गाइड पर्यटक मिलकर वन्य जीव के रहवासी स्थल में पैदा करते हैं खलल. विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी छवि का मोहताज नही है किंतु कुछ वाहन चालक गाइड वह पर्यटक अपने निजीगत लाभ प्राप्त करने के लिए विश्व विख्यात पर्यटक स्थल बांधवगढ़ की छवि धूमिल करने में पीछे नहीं है उपरोक्त मामला जब प्रकाश में आया की स्थानीय कुछ वाहन चालक व गाइडों का कहना है की प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे गाइड च्वाइस सुविधा जिसका आदेश किसी भी राज्य पत्र व कोई ऐसी टाइगर रिजर्व की पॉलिसी में नहीं है उपरोक्त मामला पूर्व के क्षेत्र संचालक व प्रबंधन की जानकारी में लाई गई थी जिस पर क्षेत्र संचालक द्वारा मनपसंद गाइड को ले जाने पर रोक भी लगाया गया था किंतु कुछ ऐसे फोटो ग्राफर्स है जो नार्मल सफारी के वापस पार्क से आने के बाद करप्शन के रूप में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के पास काफी नजदीक लेकर ले जाकर फोटोग्राफी करना चाहते हैं व साथ में रोड में अथवा रोड के पास में सोए हुए बाघों को जगाने का प्रयास कर फोटो ग्राफी करते हैं उपरोक्त कार्य में हर गाइड सम्मिलित होने से मना कर देता है तो फीर पर्यटक ऐशे कार्य वाले गाइड वाहन चालक को तलाशता है और उपरोक् कार्यो को अंजाम देने के लिए ऊपर के रसूख दारो से पर्यटक द्वारा दवाब वनवाया गया जिसके कारण बड़े ऐसे फोटोग्राफरों के व् रसूखदार के दबाव में आकर प्रबंधन ने यह कहते हुए की उपरोक्त मामला राजपत्र या एल ए सी में पारित करवाया जाएगा तब तक के लिए वैकल्पिक गाइड व्यवस्था चालू किया जाए किन्तु आज दिनाक तक कोई ऐशा क़ानून पारित नही किया गया जिसका खुलेआम दुरुपयोग देखने को मिल रहा है औए यह भी देखा गया की कुछ वाहन चालक व गाइड चंद पैसों के लिए सभी नियम कानून को रौंदते हुए वन्य जीव व बाघ के राहवास में खलल पैदा करते है जिस पर वन्य प्राणियों के जीवन यापन पर असर पड़ रहा है जिस पर राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण विभाग ने भारत सरकार राजपत्र में नियम पारित करते हुए 20 की स्पीड नियंत्रण व् वाहन से से वाहन की दूरी 50 मी किसी भी जानवर के पास 15 से 20 मिनट से अधिक न रुकने का और किसी भी वन्य प्राणी से वाहन की दूरी 20 मी पर वाहन रोकने का निर्देश जारी किया है और बाघ के मेटिंग पीरियड के दौरान व शिकार पर खाने के दौरान पूर्णतः प्रतिबंध हुआ है लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देखा गया कि सबसे अधिक वाहन तेज गति में उपरोक्त स्थान पर ही पहुंचाते हैं और उपरोक्त स्थान पर ही काफी देरी तक काफी नजदीक पर खड़े रहते हैं और यह सब नजारा प्रबंधन की आंखों के सामने ही होता होता है निर्धारित गति के नियमों की उड़ रही धज्जियाजहा बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं मध्य प्रदेश। बाघों के गढ़ की सफारी में लगे वाहन जंगलों के अंदर तय गति सीमा की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिस पर की राज्य सरकार व भारत सरकार द्वारा पार्क में चल रहे पर्यटक वाहनों में स्पीड गति नियंत्रण हेतु जीपीएस बगीरा एप्प हेतु अभी हाल में ही कई लाख रु का बजट संचालन हेतु दिया है किंतु प्रबंधन द्वारा उपरोक्त राशि का वारा न्यारा कर दिया गया ,और प्रबन्धन उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। बाघ क्षेत्रों में सफारी ने न सिर्फ तय नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाने में जुटे है, बल्कि सरकार के राजपत्र की अवमानना भी कर रहे हैं, लेकिन बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के सरोकारता का दम भरने वाला बांधवगढ़ प्रबन्धन चिर निंद्रा में लीन है। बाघ सफारी के लिए सफारी हेतु जिन जिप्सियों का उपयोग किया जाता है, उन जिप्सियों की गति सीमा एनटीसी निर्धारित की गई है, जिसमें अचानक वन्यप्राणियों या बाघ के आने पर वाहन नियंत्रित हो सके, तो वहीं बाघों के फ़ोटोग्राफी और विडियोग्राफी के लिए भी दूरियां तय की गई हैं फिर भी पार प्रबंधक के आंखों के सामने सभी नियम कानूनों को जिप्सी संचालको व गाइडों द्वारा रौंदते हुए फोटोग्राफी बाघों के पास वाहन लगा कर शोरगुल कराते हुए वन्य जीव के विचरण क्षेत्र में खलल पैदा किया जा रहा है। पहले हो चुकी है घटनाबावजूद इसके नियम बीटीआर में दम तोड़ रहे हैं, खबर है कि इन सबकी जानकारी बीटीआर फील्ड डायरेक्टर व प्रबंधन के अमला को भलीभांति है, लेकिन उनके द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। विदित हो कि पूर्व में फोटोग्राफी व मोबाइल फोन के फेर में एक पर्यटक वाहन तेज गति में अपना नियंत्रण खो दिया था, जिसमें कई पर्यटक घायल हो गए थे। बावजूद इसके पार्क प्रबन्धन नियमों का पालन कराने और न ही सफारी वाहन संचालकों द्वारा नियमों का पालन कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, बल्कि उदासीन रवैया घटना की पुनरावृत्ति के ताक में बैठा है। फोटोग्राफी पर लगा प्रतिबंधपार्क क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं को देखते हुए 29 मई 2018 के राजपत्र में पर्यटक भ्रमण के दौरान वाहन चालकों के फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लगा दिया गया, किंतु कुछ वाहन चालक सरेआम राजपत्र की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम फोटोग्राफी कर रहे हैं और तो और वन्यप्राणियों के अधिकतम पास वाहनों को सटाकर फोटोग्राफी करते और कराते हैं, जो भारत राजपत्र व एनटीसीए के नियमों के विपरीत है। पार्क प्रबंधन ने बंद की आंखेंबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफ़ारी के दौरान पर्यटक वाहनों के शोरगुल के दबाव में आकर संरक्षित क्षेत्र के बाघ अपना क्षेत्र छोड़ बफर क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं, जिसके बाद उनकी … Read more

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया, दिसंबर में हो रही है गुप्ता की विदाई.

In the new year, Patil will be the new chief of the Forest Department, and Gupta’s farewell is scheduled for December. डॉ श्रीवास्तव लघु वनोपज संघ और यादव होंगे वन विकास निगम नए एमडी उदित नारायणभोपाल. नए साल में वन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वन विभाग के हॉफ गुप्ता के सेवानिवृत्ति के बाद वन विकास निगम के एमडी एके पाटिल वन बल प्रमुख होंगे। हालांकि उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। इसी प्रकार लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता अनदेखी की गई। इसी कारण संभावना जताई जा रही है की नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है। अनूपपुर डीएफओ पर गिर सकती है गाजअनूपपुर डीएफओ सुशील प्रजापत पर गाज गिरने की संभावना प्रबल हो गई है। महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी और खरीदी में गड़बड़ी संबंधित जांच रिपोर्ट प्रशासन-एक को मिल गई है। पीसीसीएफ प्रशासन एक शाखा ने आरोप पत्र तैयार कर लिए है। शीघ्र ही उन्हें जारी किया जा रहा है। डीएफओ प्रजापत के खिलाफ जांच वन संरक्षक शैलेंद्र गुप्ता ने की थी। सूत्रों ने बताया कि जांच प्रतिवेदन में उन्हें दोषी करार दिया गया है। इस बीच डीएफओ द्वारा वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बदसलूकी का सिलसिला जारी है।

वन विभाग में चल रहा जंगलराज – हरियाली बढ़ाने के बजाय 10 हजार पौधों को फेंका.

Jungle Raj is prevailing in the Forest Department – instead of promoting greenery, 10 thousand saplings were thrown away. जेसीबी से मिट्टी और खाद नालों में डाली, एसडीओ ने रिपोर्ट में दस्तावेज और फोटो दिए, फिर भी डीएफओ ने कोई एक्शन नहीं लियाThe Soil and Fertilizers were added, and the SDO provided documentation and photos in the report. District Forest Officer (DFO) did not take any action. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश में वन विभाग के अंदर जंगलराज पूरी तरह से फैल चुका है। हरियाली को बढ़ाने के लिए लाए गए करीब दस हजार पौधों जंगल में फेंकने का कारनामा उजागर हुआ है। जूनियर अधिकारी की रिपोर्ट के बाद भी वृक्षारोपण में बरती गई। इस लापरवाही पर कोई एक्शन नहीं हुआ है। ताजा मामला खरगोन जिले के भीकनगांव का है। खरगोन के इस मामले में भी बार-बार एसडीओ की रिपोर्ट पर डीएफओ ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में दस्तावेज और फोटो संलग्न किए हैं, बावजूद इसके डीएफओ ने कोई एक्शन नहीं लिया है। वृक्षारोपण में गड़बड़ी का मामला खरगोन वन मंडल के भीकनगांव रेंज का है। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि 10 हजार से अधिक पौधे जंगल में फेंक दिए गए जिनका प्लांटेशन नहीं किया गया। यही नहीं प्लांटेशन के लिए खोदे गए गड्ढे के पास खाद और मिट्टी का ढेर लगा हुआ है। इसकी तस्वीर भी एसडीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में डीएफओ को भेजी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फर्जी और घटिया काम के प्रमाणकों को पास करने के लिए दबाव बनाया जाता है। वृक्षारोपण के लिए गड्ढों में मिट्टी परिवर्तन और खाद भी नहीं डाला गया है। जेसीबी से मिट्टी और खाद नालों में फेंके गए हैं। इस मुद्दे को लेकर वन विभाग के अफसरों ने चुप्पी साध ली। सूत्रों का कहना है कि खरगोन डीएफओ प्रशांत कुमार जब सागर दक्षिण में पदस्थित है तब वनीकरण क्षतिपूर्ति के तहत किए गए वृक्षारोपण में भी इसी तरीके की धांधली पाई गई थी। ऐसी गड़बड़ी के चलते उनके खिलाफ विभाग की जांच अभी भी चल रही है। इसके बाद भी खरगोन में वृक्षारोपण की गड़बड़ी पर उनकी लापरवाही बनी हुई है।

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