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संस्कृति, सभ्यता और शिल्प का प्रतिमान “ममेत्रि“ 

Model of culture, civilization and craft “Mametri” मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा का स्थापना दिवस आज भारत के संघीय इतिहास में 21 जनवरी की तारीख का खास महत्व है। 1972 में इसी दिन मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा के रूप में तीन नये राज्यों का उदय हुआ। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा  यानी “ममेत्रि“ को अस्तित्व में आए पांच दशक हो गए हैं। इन तीनों प्रदेशों की संस्कृति, सभ्यता, रहन, सहन, तीज-त्योहार और  शिल्प लोगों को खासा आकर्षित करता है। गीत-नृत्य और संगीत की तो बात ही निराली है। तीनों राज्यों के स्थापना दिवस पर करते हैं वहां की संस्कृति,सभ्यता और प्रकृति के दर्शन।  डॉ. केशव पाण्डेय अतिथि संपादक ममेत्रि में सबसे पहले बात करते हैं मणिपुर की, छोटा सा अनोखा और अलौलिक राज्य मणिपुर रंगों से जीवंत है और प्राचीन परंपराओं और समृद्ध संस्कृतिक प्रतिमानों का मिश्रण है। राज्य का इतिहास और रीति-रिवाज दुनिया के  लोगों को आकर्षित करती है। आस्था और अंधविश्वास हमेशा विदेशियों को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में, राज्य का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व इसके शास्त्रीय और लोक नृत्य रूपों द्वारा किया जाता है। रासलीला- मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य का प्रतीक, राधा-कृष्ण के दिव्य और शाश्वत प्रेम के माध्यम से बुना गया है। यह सुंदर नृत्य कृष्ण और राधा के उदात्त और पारलौकिक प्रेम और भगवान कृष्ण के प्रति गोपी की भक्ति को प्रकट करता है।  त्योहारों की बात करें तो मन में मिठास घुल जाती है। लाई हराओबा एक वासंतिक त्योहार है, जो शांति और समृद्धि के तौर पर पारंपरिक और प्रतीकात्मक नृत्य का प्रतीक है। विविध और रंगीन आदिवासी लोक नृत्य आदिवासी जीवन शैली की प्रकृति, सृजन और सौंदर्यवाद की अभिव्यक्ति हैं। लुई-नगाई-नी जैसे आदिवासी त्योहारों में रंगीन वेशभूषा, नृत्य चाल और अद्वितीय अनुष्ठान बेहद राजसी और आकर्षक होते हैं जो आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेते हैं।  मणिपुर के डोल जात्रा, रथ जात्रा, लाई-हरोबा, रामजन आईडी, कुट, गैंग-नगाई, चुम्फा, चेइराओबा, हेइक्रू हिडोंगबा, लुई-नगाई-नी और क्वाक जात्रा प्रमुख त्यौहार हैं। इन्नाफी और फानेक महिलाओं के लिए सबसे आम मणिपुरी पारंपरिक पोशाक हैं। मीताई महिलाएं एक कपड़ा सिलती हैं जिसे कनाप फानेक कहा जाता है। जिस पर अनेक सुंदर डिज़ाइन होते हैं। ’लाई-फी’ और ’चिन-फी’ अन्य मणिपुरी पारंपरिक पोशाक हैं। सफेद पगड़ी पुरुषों की पसंद है। खमेन चत्पा उच्च वर्ग के पुरुषों द्वारा पहना जाता है। मणिपुर में नृत्य संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, और दर्शकों के लिए, यह अपनी गीतात्मक सुंदरता और लय के कारण एक आनंद की अनुभूति है। कहा जाता है कि राजा खुयोई तोमपोक कला और संस्कृति के बहुत बड़े प्रेमी थे और उन्होंने दूसरी शताब्दी ईस्वी में मणिपुरी नृत्य का विकास किया था। 15वीं शताब्दी में वैष्णववाद की शुरुआत के बाद, नृत्य शैली परिचित और बहुत आम होने लगी। रास लीला और राधा-कृष्ण की प्रेम की कहानी सबसे प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नुपा पाला यानी कार्तल चोलोम या झांझ नृत्य के नाम से भी जाना जाता है। पंगु चोलोम देवताओं को बुलाने के आव्हान के लिए किया जाता है। यह मणिपुरी सांकृतना संस्कृति की आत्मा है। इशेई गीत का दूसरा रूप है जो पेना नामक संगीत वाद्ययंत्र की मदद से बजाया जाता है। मेघालय : प्राकृतिक सुंदरता का खजाना   प्राकृतिक रूप से मनोरम मेघालय में अनेक गुफ़ाएँ, पर्वत शिखर, बाग़, झील-रिज़ॉर्ट स्थल, ख़ूबसूरत दृश्यावलियाँ, गर्म पानी के सोते और जलप्रपात हैं। प्रमुख पर्यटक स्थल हैं-शिलांग, उमियाम, चेरापूँजी, मॉसिनराम, जाक्रीयम, माईरांग, जोवाई, नार्तियांग, थदलाशीन, तुरा, सीजू और बलपाक्रम राष्ट्रीय उद्यान। मेघालय में ‘का पांबलांग-नोंगक्रेम’ खासियों का एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है। पांच दिवसीय यह त्योहार शिलांग से लगभग 11 किमी की दूरी पर स्थित ’स्मित’ नामक गांव में मनाया जाता है। ’शाद सुक मिनसीम’ खासियों का महत्वपूर्ण त्योहार है। जबकि ’बेहदीनखलम जयंतिया’ आदिवासियों का महत्वपूर्ण त्योहार है। गारो आदिवासी सलजोंग (सूर्य देवता) नामक देवता के सम्मान में अक्टूबर-नवंबर में ’वांगला’ नामक त्योहार मनाते हैं। मेघालय के लोग मेहमान नवाज़, खुशमिजाज़ और मिलनसार माने जाते हैं। परंपरागत रूप से, खासी मानते हैं कि उनका धर्म ईश्वर प्रदत्त है और एक सर्वोच्च ईश्वर, निर्माता ’यू ब्लेईनोंगथॉ’ के विश्वास पर आधारित है। खासी धार्मिक प्रवृति के लोग हैं जिन्हें अपने जीवन से असीम प्रेम है। मौजूदा परिवेश में तीनों राज्य वक्त के साथ कदमताल कर रहे हैं और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। त्रिपुरा : लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत   भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है त्रिपुरा। अगरतला इसकी राजधानी है। त्रिपुरा में बंगाली और मणिपुरी समुदायों के साथ-साथ 19 आदिवासी समुदाय हैं। जो त्रिपुरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में योगदान करते हैं। यहां की संस्कृति उस संस्कृति और परंपरा का मिश्रण है जिसका ये समुदाय पालन करते हैं। अपनी संस्कृति और परंपरा में समृद्ध है यह राज्य। प्रत्येक जनजाति की अपनी सांस्कृतिक गतिविधियाँ हैं। उनके पास अपना विशिष्ट नृत्य और संगीत है, जो मुख्य रूप से लोक प्रकृति का है। लोक गीत और नृत्य शादियों, धार्मिक और अन्य त्योहारों जैसे अवसरों पर किए जाते हैं। बिज़ू नृत्य, लेबांग बूमनी नृत्य, गरिया नृत्य, हाई हक नृत्य, झूम नृत्य आदि त्रिपुरा के कुछ महत्वपूर्ण नृत्य और गीत रूप हैं। यह अनेक मेलों और त्योहारों की भूमि भी है। आदिवासी समुदाय साल भर अलग-अलग त्योहार मनाता है। बुइसू या बिसु, गरिया और गजन महोत्सव, होजागिरी, खारची त्यौहार, केर त्यौहार जैसे त्यौहार त्रिपुरा के आदिवासियों द्वारा मनाए जाते हैं। उसी के अनुरूप अन्य गैर आदिवासी समुदाय दुर्गा पूजा, दिवाली, होली और कई अन्य त्योहारों को बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। त्रिपुरा का खान-पान आदिवासी भोजन का प्रतिनिधित्व करता है। व्यंजनों का सबसे महत्वपूर्ण घटक बेरमा है। यह मूल रूप से किण्वित सूखी पुथी मछली है। त्रिपुरा का खाना मुख्यतः बिना तेल के बनाया जाता है। त्रिपुरा अपने बांस और बेंत उत्पादों, हथकरघा और आभूषण उत्पादों के लिए जाना जाता है। त्रिपुरा के लोगों में शिल्पकला का विशेष कौशल है। यहां कई लघु कुटीर उद्योग हैं और अधिकांश लोग विभिन्न प्रकार के हथकरघा और हस्तशिल्प निर्माण में लगे हुए हैं। बांस और बेंत के उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र और आभूषण, और अन्य प्रकार के शिल्प निर्माण कला और शिल्प उद्योग की कुछ गतिविधियाँ हैं जिनमें त्रिपुरा के लोग शामिल हैं। 19वीं सदी के मध्य में ईसाईयत के आगमन और उसके साथ जुड़ी नैतिकता ने अनेक जनजातीय और सामुदायिक संस्थाओं … Read more

बाल भवन में जिला स्तरीय आर्म रेसलिंग 21 जनवरी को,

District level arm wrestling at Bal Bhawan on 21st January. संतोष सिंह तोमर ग्वालियर। ग्वालियर आर्म रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वधान में जिला स्तरीय आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप होने जा रही है, उक्त प्रतियोगिता बाल भवन सिटी सेंटर ग्वालियर में दिनांक 21 जनवरी 2024 को होगी प्रतियोगिता सुबह 8 बजे से प्रारंभ होगी। यह जानकारी ग्वालियर आर्म रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ केशव पांडे ने एक मीटिंग में दी ग्वालियर आर्म रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव एवं ग्रीनवुड स्कूल के डायरेक्टर डॉ आदित्य भदौरिया ने बताया कि इस प्रतियोगिता में खिलाड़ी भार वर्ग एवं आयु वर्ग में विभाजित होकर मुकाबला करेंगे कुछ मुख्य वर्ग इस प्रकार हैं, सब जूनियर, जूनियर, सीनियर, महिला वर्ग, दिव्यांग वर्ग आदि। प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ी को पदक एवं प्रमाण पत्र दिया जाएगा और विजेता खिलाड़ियों को 28 जनवरी को भोपाल में संपन्न होने जा रही राज्य स्तरीय आर्म रेसलिंग प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिलेगा। संस्था के सचिव डॉक्टर आदित्य भदौरिया ने आगे बताया कि ग्वालियर आर्म रेसलिंग का हब बन चुका है ! तथा ग्वालियर में नेशनल एवं इंटरनेशनल खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। मीटिंग में वर्ल्ड चैंपियनशिप एवं ग्वालियर आर्म रेसलिंग कोच मनीष कुमार एवं भूपेंद्रकांत भी उपस्थित थे, वर्ल्ड चैंपियन मनीष कुमार जी ने बताया कि यह प्रतियोगिता प्रो पंजा लीग सीजन 1 के बाद पहली जिला आर्म रेसलिंग प्रतियोगिता है। इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का ध्यान इसी बात पर होगा कि किसी भी तरह इस प्रतियोगिता में भाग लेकर राज्य स्तरीय आर्म रैसलिंग प्रतियोगिता में भाग ले और वहां से जीत कर नेशनल प्रतियोगिता में लेंगे। भूपेंद्रकांत जी ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन 15 एवं 16 जनवरी 2024 को ग्वालियर आर्म रेसलिंग अकादमी जेसी मिल बिरला नगर में होंगे।

कलम के धनी और विनम्रता की प्रतिमूर्ति थे हरीश 

Harish was a master of pen and an embodiment of humility. संतोष सिंह तोमर ग्वालियर। इंटरनेशनल सेंटर ऑफ मीडिया एक्सीलेंसी (आईकॉम) पर शहर के वरिष्ठ पत्रकार एवं श्रीराम एक्सप्रेस  के संपादक हरीश उपाध्याय के आकस्मिक निधन पर रविवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। शहर के पत्रकार, समाज सेवी एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की |  साथ ही उनका पुण्य स्मरण कर उनकी आत्मा की शांति व शोक संतृत्प परिवार को साहस और धैर्य प्रदान करने के लिए दो मिनट का मौन धारण कर ईश्वर से प्रार्थना की।   इस दौरान डॉ. सुरेश सम्राट ने कहा कि उनकी पत्रकारिता में लंबी व सफल पारी रही। पत्रकारिता का माहौल बदलने पर रचनात्मकता की गुंजाइश खोजी। साहित्य को बढ़ावा दिया। राज एक्सप्रेस के संपादक अनुराग त्रिवेदी ने कहा वे विनम्र स्वभाव की प्रतिमूर्ति थे। राकेश अचल ने उनके पत्रकारिता के मूल्यों का उल्लेख किया। आईकॉम के डायरेक्टर डॉ. केशव पाण्डेय ने पत्रकारिता जीवन की उनकी उपलब्धियों को याद कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता को जीवन में आत्मसात किया और उसे जीकर दिखाया। अपनी कलम से राष्ट्रहित, समाज हित की पत्रकारिता की।  सादगी, सरलता, और सहजता के साथ वे विनम्रता की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। पत्रकारिता में  उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। प्रिंट से पत्रकारिता की शुरूआत करने वाले हरीश उपाध्याय वास्तविक रूप से कलम के धनी थे। श्रद्धांजलि सभा को स्वर्गीय हरीश उपाध्याय के भाई गिरीश उपाध्याय, पुत्र अक्षत उपाध्याय सहित श्रीराम एक्सप्रेस के प्रधान संपादक प्रकाश नारायण शर्मा, रविंद्र झारखरिया, सुरेंद्र माथुर, आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री, रवि शेखर, राजेश अवस्थी लावा, महेश मुदगल, सुजाता संग्राम सिंह, रामबाबू कटारे एवं विजय पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इनका मानना था कि स्वर्गीय हरीश उपाध्याय ने ग्वालियर की कला, संस्कृति, सभ्यता, साहित्य, परिवेश और लोकरंग को अपनी पत्रकारिता के जरिए आगे रखा। उनका आकस्मिक निधन ना केवल पत्रकारिता के लिए बल्कि हर आम ओ खास के लिए अपूरर्णीय क्षति है। मौजूद लोगों ने उपाध्याय के परिवारजनों को इस वज्रघात को सहने की हिम्मत देने के साथ उनकी पुण्य आत्मा को श्री चरणों में जगह देने की प्रार्थना की।  पुष्पाजंलि अर्पित करने वालों में विजय पाराशर, पीडी पाण्डेय, सुनील शर्मा, रामचरण रुचिर, सुनील भदौरिया, डॉ. वंदना प्रेमी,  केसी राजपुरिया, आदेश सक्सेना, डॉ. आदित्य भदौरिया, विवेके सुड़ेले, जितेंद्र जादौन, प्रमोद पचौरी, भूपेंद्र प्रेमी, अनिल कांत, मनीष मौर्य, हरिओम गौतम, अरविंद जैमिनी, मनोज अग्रवाल, राजेंद्र मुदगल, आलोक द्विवेदी, गौरव शर्मा एवं मनीष शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद थे।

ट्रांसफर 4 अक्टूबर 2023 को कर दिया गया लेकिन विभाग अधिकारियों ने नहीं किया रिलीव

ग्वालियर ! ग्वालियर से एक मामला सामने आया है थाटीपुर स्थित लोक स्वास्थ्य यांत्रिक विभाग में प्रशासन द्वारा सुमित मेहरा सहायक ग्रेड 3 सुनील कुमार अग्रवाल सहायक ग्रेड 2 का ट्रांसफर 4 अक्टूबर 2023 को कर दिया गया ! लेकिन आज दिनांक तक अधिकारियों ने विभाग से इन्हें रिलीव नहीं किया वही जब हमारे संवाददाता ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिक विभाग के EE अनमोल कोचर से चर्चा की तो उन्होंने कर्मचारियों के बचाव में बताया ऐसा लग रहा है की अधिकारी की मिली जुली भगत से पूरा मामला चल रहा है जबकि विभाग में कई सीनियर बाबू बैठे हुए लेकिन उन्हें चार्ज न देते हुए शासन प्रशासन के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं

देश की तकदीर और तस्वीर बदलते युवा ,राष्ट्रीय युवा दिवस आज

Youth changing the fate and image of the countryNational Youth Day today युवा शक्ति की प्रतिभा का दुनिया लोहा मान रही है। डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) भारत की पावन धरा से निकले युवाओं ने विश्व में अपना परचम लहराया है। भारतवर्ष की धरती के कण-कण में देश प्रेम भरा है। देश की गौरवशाली परंपरा, प्रेम, सद्भाव, एकता और सहयोग का विश्व में डंका बज रहा है। युवा शक्ति की प्रतिभा का दुनिया लोहा मान रही है। भविष्य में भारत ही विश्व को दिशा प्रदान करने वाला देश होगा और यह सब संभव होगा युवा शक्ति की सोच और उसके दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर। क्योंकि सदियों से ही देश के युवाओं ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता को विश्व में स्थापित करने का काम किया है। राष्ट्रीय युवा दिवस पर मौजूदा परिवेश में समझिये स्वामी विवेकानंद का जीवन मूल्य। 12 जनवरी को युग प्रवर्तक, ओजस्वी विचारक और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत “स्वामी विवेकानंद” की पावन जयंती को प्रति वर्ष “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति को विश्व में स्थापित करने वाले महान आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंदजी की जयंती देश में अपना महत्व रखती है। विवेकानंद जी ने कहा था कि देश का भविष्य पूर्णतः उस देश के युवाओं के सुविचारों और सुदृढ़ कंधो पर निर्भर करता है। उन्हीं से होकर ही किसी देश का विकास क्रम आगे बढ़ता है। देश के युवा जिस आचरण के होंगे, देश भी उसी का अनुगमन करेगा। अतः समयानुसार देश के युवाओं का सही मार्गदर्शन जरूरी है। उन्हीं के आचरण को युवाओं के जीवन में उतारने के लिए 1984 में भारत सरकार द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी। 1985 से हर साल इसे मनाया जा रहा है। इस बार 40वां उत्सव है। इस युवा दिवस का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के विचार और आदर्शों के महत्व को बढ़ावा देना है। हर वर्ष यह दिवस एक विशेष थीम पर मनाया जाता है। युवा दिवस राष्ट्र के ऐसे युवाओं को समर्पित है, जो भारत को बेहतर भविष्य देने की क्षमता रखते हैं और इसके लिए कार्य करते हैं। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम “इट्स ऑल इन द माइंड“ यानी सब कुछ आपके दिमाग में है रखी गई है। सरल भाषा में कहा जाए तो यदि किसी युवा ने कुछ करने की ठान ली है तो फिर पूरा करने से उसे कोई रोक नहीं सकता।12 जनवरी 1863 में कलकत्ता में जन्में नरेंद्र दत्त 25 साल की उम्र में ही सांसारिक मोह माया को त्याग कर सन्यास धारण कर स्वामी विवेकानंद बने। वे वेदांत के विख्यात और प्रभावी आध्यात्मिक गुरु थे।स्वामी विवेकानंद के विचार, दर्शन और अध्यापन भारत की महान सांस्कृतिक और पारंपरिक संपत्ति हैं। उनका दर्शन, जीवन, कार्य एवं उनके आदर्श भारतीय युवकों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। स्वामीजी एक महान इंसान ही नहीं, वरन एक युग पुरूष थे, जिन्होंने हमेशा देश की ऐतिहासिक परंपरा को सुदृढ़ बनाने और सही नेतृत्व करने के लिए युवा शक्ति पर विश्वास किया।उनका मानना था कि भारत को विकासित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं की अनन्त ऊर्जा को जागृत कर उन्हे विभिन्न कार्य क्षेत्रों में प्रयोग कर सफलता प्राप्त करने के लिए एक निश्चित चुनौती का पीछा करना अनिवार्य है। जो उन्हें निरंतर सफलता के मार्ग की ओर अग्रसर करती रहेगी। क्योंकि युवाओं का देश कहे जाने वाले भारत में युवा शब्द से ही उत्साह, स्फूर्ति और सक्रियता जैसे गुणों का बोध होता है। उन्हांने शारीरिक बल नहीं बल्कि मानसिक बल को युवा शक्ति का केन्द्र माना। उनका मानना था कि युवा होने की परिपूर्णता उसमें है, जिसमें बिना रुके और बिना थके संघर्ष करने का जज्बा हो। उन्होंने युवाओं के दिल में अपने कार्य करने के लिए जो आग फूंकी वो आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।हिंदू धर्म की विचारधाराओं को पुनर्जीवित करने के साथ ही औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के दौरान देश में राष्ट्रवादी उत्साह पैदा किया। इससे वे दुनिया भर में लोकप्रिय हुए।स्वामी विवेकानंद को धर्म, दर्शन, इतिहास, कला, सामाजिक विज्ञान और साहित्य का ज्ञाता कहा जाता है। शिक्षा के साथ ही वे भारतीय शास्त्रीय संगीत का भी ज्ञान रखते थे। उनके विचार और कार्य आज के समय में भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने युवाओं को खुद पर विश्वास करना सिखाया। क्योंकि जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।11 सितंबर 1893 में अमेरिका में आयेजित धर्म संसद में विवेकानंद ने भाषण देते हुए हिंदी में कहा अमेरिका के भाइयों और बहनों… उनके यह कहते ही आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में पूरे दो मिनट तक तालियां बजती रहीं। इसे भारत के इतिहास में गर्व और सम्मान की घटना के तौर पर जाना जाता है। देश का हर युवा स्वामी विवेकानंद के दार्शनिक विचारों व भाषणों को सुनने के बाद प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकता है। उन्होंने भारत को विश्व मंच से अपने भाषणों के द्वारा गौरान्वित किया था। आध्यात्म चिंतन, देशप्रेम को सही अर्थों में समझाया। उन्होंने कहा था कि भारत युवाओं का देश है और इस देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत स्वामी जी के अलावा और कोई नहीं हो सकता है।युवा वह है, जो देश का भविष्य बदलने की क्षमता रखता है। जिसके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता हो, लोगों को सही मार्ग पर लाने का काम करने वाला ही युवा कहलाता है। स्वामी जी कहते थे युवा वो होता है, जो बिना अतीत की चिंता किए अपने भविष्य के लक्ष्यों की दिशा में काम करता है। हर इंसान को कभी न कभी अकेले ही शुरूआत करनी होती है, इसलिए किसी भी काम को करने से घबराना नहीं चाहिए। अगर आपकी नीयत साफ, इरादे स्पष्ट और हांसले बुलंद हैं, तो आपके साथ अपने आप ही लोग जुड़ने लगते हैं। युवा जब ठान लेता है, तो कुछ भी कर सकता है। ऊर्जा से भरा युवा देश के हर कोने में मौजूद है। कोई पहाड़ों से निकलने वाले छोटे झरनों से बिजली बना रहा है, कोई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनिया का सबसे ऊॅचा रेलवे पुल बनाकर इतिहास रच रहा है। अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करके लोगों का भला … Read more

शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए ग्वालियर पुलिस की बैठक सम्पन्न 

शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए ग्वालियर पुलिस की बैठक सम्पन्न   ग्वालियर। शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए ग्वालियर जिले के पुलिस कप्तान राजेश चंदेल ने आज पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के आल्हा पुलिस अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकर रणनीति बनाई. जिसमें हाल ही में ट्रांसफर हुए यातायात पुलिस के  अधिकारी भी मौजूद रहे. एसपी राजेश सिंह चंदेल ने कहा कि जिले में यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पुलिस एक्शन प्लान बना रही है जिसमें सभी लेफ्ट टर्न फ्री किए जाएंगे इसके साथ ही  चौराहों पर अनावश्यक लगने वाले जाम को रोकने के लिए नगर निगम और स्मार्ट सिटी के साथ ट्रैफिक पुलिस द्वारा रणनीति तय की जाएगी उन्होंने कहा कि शहर में चलने वाले विक्रम ऑटो और ई रिक्शा के वाहन चालकों के लिए वर्दी नियमित की जाएगी इसके साथ ही सवारी वाहन नियत स्थान पर रुके इसका भी ध्यान रखा जाएगा और जो व्यक्ति नियमों का पालन नहीं करेगा उस पर कड़ी कार्रवाई होगी. राजेश सिंह चंदेल एसपी ग्वालियर

नगर निगम प्रशासन ने शहर की मीट मार्केट चावड़ी बाजार और माधवगंज में संघन चेकिंग अभियान चलाया.

The Municipal Administration conducted a crackdown operation on the meat market in Chawari Bazaar and Madhav Ganj as part of the city’s cleanliness drive. ग्वालियर! ग्वालियर नगर निगम प्रशासन ने शुक्रवार से शहर में खुले में मांस एवं मछली की बिक्री पर रोक लगाने और नियमानुसार ही इसके विक्रय को सुनिश्चित करने के लिए अभियान छेड़ दिया है। निगम का यह अभियान 31 दिसंबर तक जारी रहेगा। शहर की प्रमुख मीट मार्केट चावड़ी बाजार और माधवगंज में नगर निगम के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी अनुज शर्मा के नेतृत्व में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इसमें नगर निगम के अमले को देखकर कई दुकानदार अपनी दुकानें बंद करके गायब हो गए। जबकि वहीं दुकानें निगम प्रशासन को खुली मिलीं जो नियमानुसार चल रही थीं।ये दुकानदार विधिवत शीशे को लगाकर उसके पीछे से मछली या मीट की बिक्री कर रहे थे। ओपन स्पेस में मुर्गा बकरा या अन्य किसी जानवर को काटने की मनाही है।इसे सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने अभियान छेड़ दिया है। इसके साथ ही नगर निगम मीट विक्रेताओं के लाइसेंस को भी चेक कर रहा है कुछ लोगों को नोटिस दिए गए हैं ।जबकि कुछ लोगों के यहां दस्तावेज और अन्य शर्तों का पालन होता हुआ मिला है। डॉ अनुज शर्मा… मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम ग्वालियर

डी.आर.डी.ई. में किया गया स्वच्छता पखवाड़े का आयोजन

ग्वालियर ! डीआरडीओ मुख्यालय से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार रक्षा अनुसंधान तथा विकास स्थापना ग्वालियर में 1 से 15 दिसंबर 2023 के दौरान स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत स्थापना में पूरे पखवाड़े के दौरान अनेक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सर्वप्रथम 1 दिसंबर 2023 को ‘स्वच्छता शपथ’ का आयोजन किया गया जिसमें डी.आर.डी.ई. निदेशक डॉ. एम. एम. परीडा ने समस्त वैज्ञानिकों अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। स्थापना के कर्मचारियों में स्वच्छता जागरूकता को प्रोत्साहित करने के लिए 4 दिसंबर 2023 को ‘जागरूकता दिवस’ के अतंर्गत व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. ए. के. गोयल, वैज्ञानिक ‘जी’ ने व्याख्यान दिया। इस अवसर पर डी.आर.डी.ई. ग्वालियर में विभिन्न स्थानों एवं भवनों में जागरूकता प्रसार करने वाले पोस्टर आदि प्रदर्शित किये गए। 5 दिसंबर 2023 को ‘अभिलेख प्रबंधन दिवस’ के अंतर्गत पुराने रिकॉर्ड को छटाई कर व्यवस्थित करने का कार्य किया गया। 6 दिसंबर 2023 को ‘स्क्रैप / कचरा निस्तारण दिवस’ के अंतर्गत स्थापना में एकत्र कचरे एवं सूखी वनस्पतियों का निस्तारण किया गया। पुरानी और सूखी पत्तियों से खाद बनाने के लिए कम्पोस्ट पिट भी तैयार की गयी है। इसके अलावा डीआरडीई के पुराने अभिलेखों को छांट कर सुव्यवस्थित किया गया एवं पुरानी एवं निष्प्रयोज्य सामग्रियों को निस्तारित किया गया। 7 दिसंबर 2023 को ‘गो ग्रीन ड्राइव’ के अंतर्गत स्थापना के झांसी मार्ग स्थित परिसर के बाहर झांसी मार्ग पर बृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्थापना के निदेशक डॉ. मनमोहन परीडा एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने अपने करकमलों से बृहद पैमाने पर वृक्षारोपण किया। स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत अगले पूरे सप्ताह भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन प्रस्तावित है, जिनमें दि. 08 दिसंबर 2023 को ‘कम्युनिटी आउटरीच’ के अंतर्गत गांवों में जागरूकता हेतु संपर्क, व्याख्यान आयोजन, सार्वजनिक स्थलों पर लगी प्रतिमाओं की सफाई आदि गतिविधियां शामिल हैं। 12 दिसंबर 2023 को ‘सोशल बज डे’ के अंतर्गत स्वच्छता रैली का आयोजन, एवं 13 दिसंबर 2023 को ‘प्रतियोगिता दिवस’ के अंतर्गत डीआरडीई के कर्मचारियों के लिए चित्रकला, निबंध, वाद-विवाद एवं स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। दि. 14 दिसंबर 2023 को ‘परस्पर संवाद’ के अंतर्गत डीआरडीई के कर्मचारियों के लिए आपसी विचार विमर्श एवं संवाद का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सफाई और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अभिनव विचारों को साझा किया जएगा। 15 दिसंबर 2023 को ‘पुरस्कार वितरण दिवस’ के अंतर्गत निदेशक महोदय के करकमलों से विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता अधिकारियों/कर्मचारियों को पुरस्कार प्रदान किए जायेंगे एवं पूरे पखवाड़े के विस्तृत रिपोर्ट डीआरडीओ मुख्यालय को प्रेषित की जाएगी।

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