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हमीदिया अस्पताल में नवंबर माह पहला बोनमैरो प्रत्यारोपण भी हो सकता है, पांच लाख रुपये में हो सकेगा

भोपाल हमीदिया अस्पताल में किडनी के बाद बोनमैरो प्रत्यारोपण नवंबर माह तक शुरू करने की उम्मीद है। अगले माह तक यहां पहला बोनमैरो प्रत्यारोपण भी हो सकता है। इसके शुरू होने पर इंदौर के बाद हमीदिया प्रदेश का दूसरा सरकारी अस्पताल होगा, जहां यह सुविधा उपलब्ध मरीजों की दी जाएगी। इसके लिए बकायदा अस्पताल के एच-1 ब्लाक की चौथी मंजिल पर 12 कमरों की स्वीकृति भी मिल गई है। जिसमें मरीजों के लिए 24 बिस्तर का वार्ड तैयार किया जाएगा। यह सुविधा शुरू होने से ब्लड कैंसर और खून की कमी से होने वाली बीमारियों-थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया का स्थायी इलाज किया जा सकेगा। करीब 16 करोड़ रुपये की आएगी लागत जानकारी अनुसार इस यूनिट को जमाने के लिए प्रबंधन को करीब 16 करोड़ खर्च करने होंगे। निजी अस्पतालों में बोनमैरो प्रत्यारापेण पर करीब 24 लाख तक खर्च आता है। यहां करीब पांच लाख तक आएगा। अमेरिका के कोलंबिया विवि के बोनमैरो ट्रांसप्लांट एक्सपर्ट डा. प्रकाश सतवानी से इसके लिए एमओयू हो गया है। आठ महीने बाद फिर शुरू होगा किडनी प्रत्यारोपण वहीं हमीदिया अस्पताल में करीब आठ महीने बाद दोबारा किडनी प्रत्यारोपण करने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। बतादें कि हमीदिया प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल है, जहां सात किडनी प्रत्यारोपण हो चुके हैं। गांधी मेडिकल कालेज के यूरोलाजी विभाग के डा. अमित जैन ने बताया कि दो मरीजों के किडनी ट्रांसप्लांट होने हैं। इसके लिए अंगदान समिति ने मंजूरी दे दी है।  

हमीदिया में वार्ड ब्वॉय और टेक्नीशियन चार महीने से वेतन नहीं मिलने के चलते 500 कर्मचारी हड़ताल पर

भोपाल हमीदिया अस्पताल में वार्ड ब्वॉय और टेक्नीशियन चार महीने से वेतन नहीं मिलने के चलते लगभग 500 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इसके चलते सुबह से ही यहां आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार इन सभी कर्मचारियों को एजाइल सिक्योरिटी सर्विस कंपनी द्वारा वेतन दिया जाता है। यह सभी हमीदिया में एजाइल कंपनी के आउट सोर्स कर्मचारी हैं। इससे पहले इन कर्मचारियों ने तीन से चार बार कंपनी को पत्र लिखकर शिकायत की थी। पत्र के जवाब में कंपनी द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया गया। इसके चलते कर्मचारियों ने हडताल कर दी। अब अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में कंपनी के अलावा शासन स्तर पर भी बातचीत की है, ताकि जल्द से जल्द ये मामला खत्म हो। कर्मचारियों की मांग- जिस विभाग में काम, वहीं से मिले वेतन वार्ड ब्वॉय रज्जू लाल ने कहा, हमारी मांग है कि जिस विभाग में हम काम कर रहे हैं, उसी विभाग से पेमेंट दिया जाए। वार्ड ब्वॉय, हाउस कीपिंग, लैब टेक्नीशियन, ऑपरेटर किसी की भी पेमेंट नहीं आई है। हम लोग पेमेंट के लिए कई बार लगातार आवेदन दे चुके हैं। लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया है। अगर हमारी बात नहीं सुनी गई, तो हम यहां से जिला कलेक्टर के पास जाएंगे। इसके अलावा हम मुख्यमंत्री के सामने भी अपनी परेशानी बताएंगे। पर्चा नहीं बनने से हो रही परेशानी आष्टा से आए मरीज के परिजन बताया कि वे सुबह से अपनी पत्नी को लेकर आए हैं। पत्नी को दर्द की शिकायत है, मगर पर्चा नहीं बनने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हमीदिया अस्पताल में सफलतापूर्वक की गयी प्रथम आईवीयूएस गाइडेड एंजियोप्लास्टी

भोपाल हमीदिया अस्पताल, भोपाल के हृदय रोग विभाग की कैथ लैब में पहली बार आईवीयूएस (इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड) गाइडेड एंजियोप्लास्टी सफलतापूर्वक की गई। इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने टीम को बधाई दी और कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास है कि उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं, शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में भी उपलब्ध हों। यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. राजीव गुप्ता एवं प्रो. डॉ. अजय शर्मा की देखरेख में संपन्न हुई। उल्लेखनीय है कि गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में मात्र 10,000 रुपये में आईवीयूएस गाइडेड एंजियोप्लास्टी जैसे उच्च स्तरीय उपचार किया गया है, निजी अस्पतालों में इसका खर्च लगभग 3 लाख रुपये तक आता है। क्या है आईवीयूएस तकनीकी आईवीयूएस तकनीक से कोरोनरी धमनियों की दीवारों का अंदर से निरीक्षण किया जा सकता है, जिससे प्लाक बिल्डअप की मात्रा और प्रकार की सटीक जानकारी मिलती है। यह तकनीक यह समझने में मदद करती है कि मरीज को दिल का दौरा पड़ने का खतरा है या नहीं। साथ ही, इससे इलाज के दौरान स्टेंट लगाने की सटीक जगह का निर्धारण किया जाता है, जिससे जटिलताओं की संभावना को कम किया जा सकता है। इससे मरीजों के इलाज में अधिक सटीकता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

अब हमीदिया अस्पताल में गर्भाशय कैंसर का इलाज मिलेगा, प्रदेश की इकलौती ओपीडी, अब तक 150 से अधिक मरीजों का इलाज

भोपाल गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में गर्भाशय कैंसर के निदान के लिए इलाज शुरू हो गया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यह गर्भाशय कैंसर की यह इकलौती ओपीडी है। यहां हर सोमवार को उक्त बीमारी से संबंधित मरीजों को देखा जाता है। दो सप्ताह में अब तक 150 से अधिक रोगियों क जांच की जा चुकी है। इसकी शुरुआत गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डा. कविता एन. सिंह की पहल पर हुई है। उन्हें गर्भाशय कैंसर के उपचार का 20 वर्षाें का अनुभव भी है। वे स्वयं ओपीडी में रोगियाें की जांच करती है, साथ में विशेषज्ञ और मेडिकल छात्र भी होते हैं, ऐसा होने से कॉलेज के विद्यार्थियों और डाॅक्टरों को भी गर्भाशय कैंसर के उपचार के लिए अहम जानकारियां मिल रही हैं। डीन डा. कविता ने बताया कि गर्भाशय कैंसर के लिए ओपीडी शुरू करने का उद्देश्य गायनी विभाग के डाॅक्टरों और जूनियरों इसके इलाज और तरीकों से अवगत कराया जाना है। अगर मरीज का केस मुश्किल होता है तो उस समय में किस तरह से सर्जरी की जा सकती है, यह भी बताया जाएगा। जांच सोमवार को की जाती है, सर्जरी का दिन बुधवार को निर्धारित किया गया है। चिकित्सा छात्रों को मिलेगा अनुभव इस पहल के साथ गायनी विभाग के डाॅक्टरों और जूनियर डाक्टरों को अनुभव भी मिल रहा है। डीन डा कविता ने बताया कि मैं गर्भाशय कैंसर के लिए पिछले 20 वर्षाें से काम कर रही हूं। विशेषकर गर्भाशय कैंसर रोकथाम काल्पोस्कोपी से संबंधित कार्य निरंतर कर रही हूं। इस विषय में डा. सिंह का शोध जर्मनी के एक मोनोग्राफ में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने इस कैंसर को लेकर महिलाओं की काउंसिलिंग का काम भी किया है।

हमीदिया अस्पताल: नई बिल्डिंग में शिफ्ट होगी ओपीडी, 100 मीटर के दायरे में होंगी सभी सुविधाएं

Hamidia Hospital: OPD will be shifted to the new building, all facilities will be within 100 meters radius सोमवार से ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी एच 1 बिल्डिंग में होगी संचालित  भोपाल। हमीदिया अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब जांच, इलाज के साथ भर्ती जैसी सुविधाओं के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी। अब मरीजों को अस्पताल की सारी सुविधाएं 100 मीटर के दायरे में ही मिल जाएगी। इसके लिए अस्पताल के पुराने भवन और ट्रॉमा इमरजेंसी बिल्डिंग में संचालित ओपीडी को नई बिल्डिंग यानि एच 1 और एच 2 ब्लॉक में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी शुरूआत सोमवार से की जाएगी। सोमवार को ऑर्थोपेडिक्स विभाग की ओपीडी एच 1 बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित होगी। इसके बाद अन्य विभागों की ओपीडी को चरणबद्ध तरीके से शिफ्ट कर दिया जाएगा। मालूम हो कि हमीदिया अस्पताल में करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से 11 मंजिला नए ओपीडी ब्लॉक का निर्माण किया जा रहा है। यह ब्लॉक अस्पताल के पुराने भवनो की जगह तैयार किया जाना है। ऐसे में पुराने अस्पताल के भवन के एक हिस्से को पूरी तरह से तोड़ा जा चुका है, अब दूसरे हिस्से को तोड़ा जाएगा। इसी हिस्से में ओपीडी संचालित होती है, यही कारण है कि ओपीडी को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है। मरीजों को यह होगी सुविधा अस्पताल प्रबंधन के इस कदम से मरीजों को खासा फायदा होगा। दरअसल अभी अस्पताल में ओपीडी, रजिस्ट्रेशन, ब्लड बैंक, दवा लेने और वार्ड तक जाले में मरीजों को करीब एक किलोमीटर का फासला तय करना होता है। यही नहीं 11 मंजिल पर स्थित वार्ड में भर्ती मरीजों को बिलिंग के लिए गेट के पास बने रजिस्ट्रेशन सेंटर आना पड़ता है। अब यह सारी व्यवस्थाएं मरीजों को एक ही जगह पर ही मिल जाएंगी। एमआरआई और कैथलैब का प्लान नहीं ओपीडी शिफ्टिंग का प्लान को तैयार कर लिया गया है, लेकिन पुराने भवन में स्थित एमआरआई, सीटी स्कैन के सथ कैथ लैब की शिफ्टिंग का कोई प्लान नहीं है। इन सभी सुविधाओं की शिफ्टिंग में तीन से चार महीने का वक्त लगता है। यही नहीं इसमें भारी भरकम खर्च भी होता है। ऐसे में अगर बिल्डिंग टूटती है तो इन सुविधाओं को बंद करना पड़ेगा, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना होगा। गिरी फॉलसीलिंग हमीदिया अस्पताल के एच1 ब्लॉक के सेकेंड फ्लोर पर ओटी कॉम्प्लेक्स कॉरीडोर की फाल्स सीलिंग गिर गई। घटना गुरुवार को चली तेज हवाओं और आंधी के चलते हुई है। इन घटनाओं से 750 करोड़ रुपए में बने नए भवनों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे है। हमीदिया अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि मरीजों की सुविधाओं को देखते हुए ओपीडी शिफ्ट की जा रही है। मरीजों को सभी सुविधाएं आस पास ही मिले ऐसी व्यवस्थाएं की जा रही है।

हमीदिया अधीक्षक के निर्देश: अब नहीं चलेगी घसीटा राइटिंग, डॉक्टर कैपिटल लेटर में लिखेंगे दवाओं के नाम

Hamidia Superintendent’s instructions: Now cursive writing will not work, doctors will write names of medicines in capital letters. भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों को ओपीडी पर्चे पर दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं जिन पर जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ सुमित टंडन ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। बतादें कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। ओपीडी पर्ची की होगी मॉनिटरिंग डॉक्टरों की राइटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। डॉक्टरों को लिखनी होगी जेनेरिक दवाएंचिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानिटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है। अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं। पहले भी जारी हो चुके ऐसे आदेश9 दिसंबर 2014 को चिकित्सकों को घसीटामार लिखावट नहीं करने के लिए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने निर्देश जारी किए थे। इसमें भी डाक्टरों से कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा गया था। इसके बाद अप्रैल 2015 में एक बार फिर यही आदेश जारी किए गए। – 2 जनवरी 2021 – हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों के पर्चे पर चिकित्सकों का नाम, मोबाइल नंबर और उनकी मुहर भी लगाने के आदेश जारी हुए थे। इनका कहनाहमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मॉनिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था।डॉ सुमित टंडन, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

हमीदिया अस्पताल को रोबोटिक सर्जरी के लिए किया जा रहा तैयार

Hamidia Hospital is being prepared for robotic surgery भोपाल ! इस साल के अंत तक हमीदिया अस्पताल में रोबोटिक्स तकनीक से घुटने और कूल्हे के आपरेशन शुरू करने की तैयारी। राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में जल्द ही घुटने और कूल्हे (नी एंड हिप रिप्लेसमेंट) की रोबोटिक सर्जरी को शुरु करने की तैयारियों में जुट गया है। अब तक सिर्फ प्रदेश के निजी अस्पतालों में नी और हिप की सर्जरी होती है। प्रदेश के एम्स को छोड़ किसी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा पहली बार शुरू होने जा रही है। रिप्लेसमेंट के लिए इसकी शुरुआत दिसंबर 2024 तक की जाएगी, जिसकी कार्ययोजना काम किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों की मानें तो साल के अंत तक इसकी सुविधा सर्जरी वाले मरीजों को मिलना भी शुरू हो जाएगी। गांधी मेडिकल कालेज से मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए बेंगलुरु की एक निजी कंपनी से अस्पताल के विशेषज्ञ संपर्क में भी हैं। क्या है रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट रोबोटिक सर्जरी कंप्यूटराइज्ड डिवाइस से की जाएगी, जो चिकित्सक के सहयोगी के रूप में काम करेगी। इसमें सर्जरी के दौरान चिकित्सक रोबोटिक सेटअप का रिमोट हाथ में पहनते हैं। इसमें लगे कैमरे और सेंसर रोबोट घुटने के सारे मूवमेंट और स्थिति को नोट कर उसकी थ्रीडी इमेज तैयार करते हैं। थ्रीडी इमेज के हिसाब से रोबोट सर्जरी का सटीक प्लान तैयार करता है। वह चिकित्सक को बताता है कि हड्डी कितनी खराब है, कितनी और किस जगह से काटने पर क्या परिणाम आ सकते हैं। आपरेशन एक विशेष कंसोल में बैठा सर्जन आपरेशन का काम संभालता है। सर्जन को आपरेशन करने वाली जगह का एक बड़ा 360 डिग्री दृश्य दिखता है। इसके अलावा साथ खड़ा चिकित्सक इस बात की जानकारी देता है कि उपकरण सही जगह पर जाकर अपना काम कर रहा है। रिप्लेसमेंट के तीन दिन बाद अस्पताल से मिलेगी छुट्टी अब तक यह सारे आकलन चिकित्सक अपने विवेक और अनुभव के आधार पर करते थे। अब चिकित्सक के पास सटीक आकलन और प्लान होगा। इससे सर्जरी काफी आसान हो जाएगी। यही नहीं, रोबोटिक सर्जरी में इंप्लांट की उम्र 10 साल तक बढ़ जाती है और सर्जरी फेल होने का खतरा न के बराबर होता है। यह सर्जरी इतनी सटीक होती है कि रिप्लेसमेंट के तीन दिन बाद ही मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इनका कहना हैरोबोटिक सर्जरी को लेकर काम काफी समय से चल रहा है। इसके पूर्व में भी इस सर्जरी के लिए डेमों विशेषज्ञों के सामने हो चुका है। वर्ष 2024 के अंत तक में इसकी शुरुआत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा। इतना ही नहीं तकनीकी को बढ़ाने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं, बाहर के विशेषज्ञों से इसे लेकर लगातार संपर्क में हैं, जिससे इसकी सफलता की जानकारी दी जा सके।

हमीदया अस्पताल में हफ्ता वसूली की जांच जारी

Investigation of week recovery continues in Hamiday Hospital भोपाल। मप्र मानव अधिकार आयोग ने भोपाल जिले के तीन मामलों मे संज्ञान लिया है। भोपाल जिले के हमीदिया अस्पताल में असामाजिक तत्वों द्वारा कर्मचारियों से हफ्ता वसूली करने का मामला सामने आया है। असामाजिक तत्व रात के समय अस्पताल में घुसकर कर्मचारियों से हफ्ता वसूली कर रहे है। इस संबंध में अस्पताल कर्मचारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है। मामले में संज्ञान लेकर आयोग ने अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल और पुलिस कमिश्नर को जांच के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही की गई कार्यवाही के संबंध में तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।इन मामलों में भी लिया संज्ञानआयोग ने भोपाल के शाहपुरा इलाके की एक बस्ती में रहने वाली 47 वर्षीय महिला के साथ एक युवक द्वारा शारीरिक दुराचार करने और मिसरोद थानाक्षेत्र में पुलिस विभाग के एक आरक्षक द्वारा युवती के साथ दुराचार और दैहिक शोषण करने के मामले में संबंधित अधिकारियों के जांच के निर्देश देने के साथ ही मामले की रिपोर्ट तलब की है।

हमीदिया अस्पताल: एंबुलेंस चालकों का आरोप: शव ले जाने से पहले पार्किंग संचालक मांगता है कमीशन

Hamidia Hospital: Allegations of ambulance drivers: Parking operator demands commission before taking the dead body भोपाल। हमीदिया अस्पताल में पार्किंग व शव वाहन का संचालन विवाद की जड़ बन गया है। अकसर रात में यहां दो गुट एक दूसरे के लोगों को धमकाते व मारपीट करते हैं। हाल ही में इसका एक वीडियो भी वयरल हुआ था। वहीं अब करीब 11 एंबुलेंस चालकों द्वारा कोहफिजा थाने में लिखित शिकायत की गई है। जिसमें पार्किंग संचालक नरेंद्र गोस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखित आवेदन में कहा गया है कि पार्किंग संचालक शव ले जाने से पहले कमीशन मांगता है। उसकी बात ना मानने मारपीट व जान से मारने तक की धमकी देता है। इस मामले में पार्किंग संचालक नरेंद्र का कहना है कि यह वे लोग हैं जो प्रति माह 2 हजार रुपए का तय किराया नहीं दे रहे हैं। इनसे जब किराया मांगा गया तो, इन्होंने झूठा आरोप लगाना शुरू कर दिया। इनके पीछे सलमान और आरीफ नाम के लोगों का हाथ। जो अकसर हमीदिया परिसर में गुंडागर्दी करते हैं। परिजनों से वसूल रहे दो से ढाई गुना किरायापार्किंग को लेकर चल रहे इस विवाद से परेशान मरीजों व परिजनों को होना पड़ रहा है। परिजनों को हमीदिया से शव निवास तक ले जाने के लिए दो से ढाई गुना अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। यह स्थिति बीते डेढ़ से दो साल से बनी हुई। अस्पताल प्रबंधन से लेकर प्रसाशन तक ने अब तक इस पर कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं। जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

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