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किस विटामिन की कमी से जल्दी आता है बुढ़ापा? वैज्ञानिकों ने लगाया पता

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. हर कोई बूढ़ा होता है, लेकिन कुछ लोगों की उम्र उनके चेहरे पर नहीं दिखती. वे अपनी उम्र से काफी छोटे लगते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब ढूंढ निकाला है. न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी कई महत्वपूर्ण कारकों को प्रभावित करता है जो उम्र बढ़ने और उम्र से संबंधित बीमारियों से जुड़े होते हैं. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया कैसे होती है?उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कई बदलाव होते हैं. सेल्स में सूजन, सेल्स के बीच संचार में गड़बड़ी, स्टेम सेल की थकान, सेल्स की सेंसिटिविटी कम होना, माइटोकोंड्रिया का कमजोर होना, पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषण न होना, प्रोटीन में बदलाव और जीन में बदलाव जैसे कई कारक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. ये सभी प्रक्रियाएं बहुत जटिल हैं, लेकिन विटामिन डी इन सभी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विटामिन डी कैसे करता है काम?विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. यह हड्डियों को मजबूत बनाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसके अलावा, विटामिन डी सेल्स की मरम्मत और नवीनीकरण में भी मदद करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी सूजन को कम करके, सेल्स के बीच संचार को बेहतर बनाकर और स्टेम सेल को सक्रिय करके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. विटामिन डी की कमी के क्या होते हैं लक्षण?विटामिन डी की कमी से हड्डियों का कमजोर होना, थकान, मसल्स में दर्द, डिप्रेशन और इम्यून सिस्टम कमजोर होना जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से दिल की बीमारियां, कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. विटामिन डी कैसे प्राप्त करें?विटामिन डी सूर की रोशनी से मिलता है. आप रोजाना कुछ समय धूप में बैठकर अपनी विटामिन डी की जरूरत पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा, आप विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अंडे और दूध का सेवन भी कर सकते हैं. यदि आपको विटामिन डी की कमी है तो आप अपने डॉक्टर से विटामिन डी की गोलियां लेने की सलाह ले सकते हैं.

सुबह खाली पेट पानी पीना के फायदे सुनकर चौंक जाएंगे? जानें यहां

Will you be surprised to know the benefits of drinking water on an empty stomach in the morning? Know here हमारे देश में अधिकतर लोगों को सुबह उठते ही चाय या फिर कॉफी पीने की आदत है लेकिन इसकी जगह आप उठते ही गुनगुना पानी पीना शुरू कर देते हैं. आइए जानते हैं हेल्दी रहने के लिए सुबह उठते ही कितने गिलास पानी पीना फायदेमंद होगा. स्वस्थ रहने के लिए कुछ हेल्दी आदतों को अपनाना बेहद जरूरी होता है. इन्हीं हेल्दी आदतों में से एक है रोज सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना. खाली पेट पानी पीने से पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है. इससे शरीर में जमी गंदगी आसानी से बाहर निकल जाती है. इतना ही नहीं जो लोग रोज सुबह खाली पेट पानी पीते हैं उन लोगों में किडनी और स्टोन की समस्या बाकि लोगों के मुकाबले कम देखी जाती है. वहीं शरीर को स्वस्थ रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हमें रोज सुबह खाली पेट पानी जरूर पीना चाहिए रोज सुबह खाली पेट पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं लेकिन अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर कितने गिलास पानी पीना फायदेमंद होता है. रोज सुबह पानी पीने के फायदे तो हर कोई बताएगा लेकिन आपको कितने गिलास पानी पीना चाहिए आइए इसके बारे में जानते हैं. रोज सुबह कितने गिलास पानी पीना चाहिए? सुबह उठते ही आप सबसे पहले तो ब्रश करें इसके बाद अगर आपको चाय पीने की आदत है तो इसकी जगह आप पानी पीने की आदत डालें. सुबह उठने के बाद कम से कम 2-3 गिलास पानी जरूर पिएं. अगर आप एकदम से इतना पानी नहीं पी सकते हैं तो एक गिलास पानी से शुरूआत करें. धीरे-धीरे कुछ दिनों में 2-3 गिलास पानी पीना शुरू कर दें. अगर सुबह पानी पी रहे हैं तो इसे हल्का गुनगुना कर लें. ये आपके पाचन को बेहतर बनाने में मदद करेगा. गुनगुना पानी पीने से न सिर्फ आपका पाचन बेहतर होता है बल्कि इम्यूनिटी भी स्ट्रांग होती है. गर्म पानी पीने से आपका पाचन तंत्र एक्टिव रहता है लेकिन ध्यान रहे पानी पीने के कम से कम आधे घंटे न तो कुछ खाएं न ही कुछ पिएं. सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने के फायदे 1.सुबह उठकर खाली पेट गर्म पानी पीने से आपका पाचन बेहतर होता है साथ ही मेटाबॉलिज्म भी स्ट्रांग होती है. 2.दिन की शुरूआत गुनगुने पानी से करने से आप पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस करेंगे. 3.इससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है और रात भर पानी न पीने के गैप को भी कवर कर देता है. 4.बॉडी नेचुरल तरीके से डिटॉक्स करना चाहते हैं तो रोज सुबह खाली पेट गुनगुना पानी जरूर पिएं

टमाटर खाने से दूर हो सकती हैं कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां, जानें फायदे

Eating tomatoes can cure dangerous diseases like cancer, know the benefits टमाटर में विटामिन C ही नहीं सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और सल्फर जैसे पावरफुल तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन इम्यूनिटी बढ़ाकर कई तरह की बीमारियों से बचा सकता है. हेल्थ डेस्क सहारा समाचार, भोपाल ! टमाटर हर सब्जी की जान होता है. इसे सलाद, चटनी, सॉस और न जाने कितने सारे फूड्स को टेस्टी बनाने में उपयोग किया जाता है. यह सेहत के लिए जबरदस्त फायदेमंद है. इसमें (Tomatoes) ढेर सारे पौष्टिक तत्व और कई एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidant) भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से भी बचा सकते हैं. इसके अलावा कब्ज और कमजोरी जैसी समस्याएं भी दूर करने में टमाटर उपयोगी हो सकते हैं. आइए जानते हैं टमाटर के क्या-क्या फायदे हैं… टमाटर क्यों इतना फायदेमंदटमाटर में लाइकोपेन नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो हार्ट की बीमारी और कैंसर के खतरे को कम करता है. टमाटर में विटामिन C ही नहीं सोडियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और सल्फर जैसे जरूरी और पावरफुल तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद ग्लूटाथियोन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ा देता है और प्रोस्ट्रेट कैंसर से भी शरीर की रक्षा करता है. यह एक अच्छे एंटीऑक्सिडेंट का काम करता है, इसीलिए यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को सामान्‍य बनाने में मदद करता है. टमाटर के क्या-क्या फायदे हैं कैंसर का खतरा करें कमरिसर्च में पता चला है कि जब मोनोपॉज के बाद अगर महिलाएं टमाटर खाती हैं तो ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क काफी कम हो सकता है. इससे ग्लूटाथियोन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो हार्मोन्स पर सकारात्मक असर डालकर कैंसर का रिस्क कम होता है. वजन कम करेंलो कैलोरी फूड होने के कारण यह टमाटर आपके वजन को कंट्रोल में रखता है. इसमें पानी के साथ ही फाइबर भी काफी ज्यादा मात्रा में होता है. इस वजह से वजन कम करने में ये काफी मदद कर सकता है. वेट कंट्रोल करने वाले गुण की वजह से ही इसे ‘फिलिंग फूड’ नाम से भी जाना जाता है. शरीर को दे मजबूतीटमाटर में विटामिन और कैल्शियम पाए जाते हैं, जो हड्डियों के टिशूज़ हेल्दी रखकर उन्हें मजबूत बनाते हैं. टमाटर खाने से ब्रेन हैमरेज की का खतरा भी कम किया जा सकता है. इससे शरीर को मजबूती मिलती है. पाचन शक्ति बढ़ाएटमाटर में मौजूद क्लोरीन और सल्फर के कारण पाचन शक्ति बढती है और गैस-कब्ज जैसी परेशानी दूर हो जाती हैं. टमाटर हमारे शरीर से खराब पदार्थों को बाहर निकालने में भी मददगार होता है.Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

डायबिटीज के मरीजों के लिए हैं वरदान , पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं मोरिंगा के पत्ते

Moringa leaves are a boon for diabetic patients, they are rich in nutrients. मोरिंगा की फली का इस्तेमाल कई तरह के भोजन बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि न सिर्फ इसकी फली बल्कि पत्ते भी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज कंट्रोल से लेकर पाचन बेहतर करने तक इसके कई फायदे हैं।मोरिंगा की फली का इस्तेमाल कई तरह के भोजन बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि न सिर्फ इसकी फली बल्कि पत्ते भी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज कंट्रोल से लेकर पाचन बेहतर करने तक इसके कई फायदे हैं। खुद को हेल्दी रखने के लिए हम कई चीजें को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। फलों हो या हरी सब्जियां ये सब हमारे हेल्दी डाइट का ही एक हिस्सा होती हैं। इन्हीं में से एक है सहजन की फली जिसका इस्तेमाल लोग सब्जी के रूप में करते हैं। खासकर सांभर बनाने के लिए इसका बहुत इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपके पता हैं कि सहजन की सिर्फ फली ही नहीं इसके पत्ते भी हमारे सेहत के लिए फायदेमंद हैं। सेहजन की पत्तियों में कई पोषक तत्व होते हैं जो सेहत को दुरूस्त रखने में मदद करते हैं। ऐसे में इन पत्तों को अपनी डाइट में शामिल करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। डायबिटीज में असरदारअगर आप भी डायबिटीज से परेशान है तो ये आपके बहुत काम आ सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए सहजन के पत्ते किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये हमारे बॉडी में ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर करने में योगदान देती हैं। जिसका सकारात्मक प्रभाव डायबिटीज मरीजों पर पड़ता है। इतना ही नहीं ये हमारे शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत रखने में मदद करता है। बेहतर बनाए पाचनआप भी अगर पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं तो ये आपके काम आ सकती है। जी हां सहजन की पत्तियां आपके पाचन संबंधी समस्या के बेहतर बनाने के काम आ सकती है। इसकी पत्तियों में एंटीबायोटिक और एंटी-बैक्टीरियल जैसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने का काम करते हैं। विटामिन से भरपूरमोरिंगा की पत्तियां विटामिन ए, विटामि सी, विटामि बी1, फोलेट, आयरन, कैल्शियम जैसे कई विटामिन की मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसी कई बीमारियों के लिए फायदेमंद है। इन पत्तियों को अपने डाइट में शामिल करके आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। Disclaimer – इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। सहारा समाचार इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।

हल्के में ना लें सिरदर्द, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

Do not take headache lightly, it can lead to serious diseases. जानें राहत पाने के उपाय सिरदर्द होने पर आमतौर पर दर्द की दवा खाकर ठीक हो जाते हैं लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है तो कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है. ऐसी कंडीशन में इसे सामान्य दर्द समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. Headache Remedies: सिरदर्द एक आम समस्या मानी जाती है लेकिन अगर इससे ज्यादा दिन से परेशान हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि जब कई दिनों तक सिरदर्द (Headache) ठीक न हो तो वह गंभीर रूप भी ले सकती है. इसका कारण कई खतरनाक बीमारी भी हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर के पास जाने की नौबत आ सकती है. इसलिए सिरदर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं सिरदर्द के क्या कारण हो सकते हैं और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए… सिरदर्द का गंभीर कारण बुखार के साथ सिरदर्दकई बार बुखार के साथ सिरदर्द या गर्दन में अकड़न की वजह से भी होती है. यह इंसेफेलाइटिस या मेनिन्जाइटिस के संकेत भी हो सकते हैं. जिसे दिमागी बुखार या मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है.यह एक संक्रामक बीमारी है, जिसमें मेनिन्जेस में सूजन आ जाती है. इस तरह का सिरदर्द खतरनाक भी हो सकता है. ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या उनकी इम्यूनिटी कमजोर है, उनके लिए यह जानलेवा भी हो सकती है. इसलिए समय रहते इसका इलाज करवाना चाहिए. माइग्रेन या क्लस्टर हेडेकक्लस्टर हेडेक या माइग्रेन से होने वाला सिरदर्द अलग होता है. माइग्रेन की वजह से सिर के किसी एक हिस्से में काफी तेज दर्द होता है. इसमें उल्टी या मिचली भी आती है. कई बार यह दर्द इतना ज्यादा होता है कि नींद खुल जाती है. यह समस्या 20 से 50 साल की उम्र वालों में ज्यादा देखने को मिलता है. कई बार ब्रेन ट्यूमर, स्लीप एपनिया और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की वजह से भी सिरदर्द होता है. स्ट्रेस की वजह से सिरदर्दस्ट्रेस यानी तनाव की वजह से भी सिरदर्द की समस्या होती है. इसमें सिरदर्द अचानक से होता है और फिर खुद से ही ठीक हो जाता है. हालांकि, तनाव से होने वाले दर्द में कोई दूसरा लक्षण नहीं दिखाई देता लेकिन इसे भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. थंडर क्लैप सिरदर्दथंडरक्लैप सिरदर्द काफी गंभीर बीमारी है. इसमें कुछ ही सेकेंडस में ही तेज दर्द होने लगता है. कई बार स्ट्रोक, आर्टरीज के डैमेज होने या सिर में चोट की वजह से भी दर्द हो सकता है. कई बार ये दर्द सिर से पीठ की तरफ बढ़ जाता है और कई-कई घंटों तक बना रहता है. थंडर क्लैप सिरदर्द की वजह से मिचली, बेहोशी और चक्कर आने की समस्याएं हो सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर वालों को यह दर्द ज्यादा परेशान कर सकता है. साइनस सिरदर्दसिर में साइनस या कैविटी में सूजन आने के कारण भी कई बार सिर में तेज दर्द होता है. यह दर्द लगातार होता रहता है. इसमें सिरदर्द के अलावा नाक के ऊपरी हिस्से या गाल की हड्डी पर भी दर्द हो सकता ह. इसकी वजह से चेहरे पर सूजन, कान बंद होना, बुखार और नाक बहने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. आंखों की बीमारी से सिरदर्दआंखों का धुंधलापन, रेटिना की प्रॉब्लम्स या आंखों की दूसरी समस्याओं की वजह से भी सिर दर्द बहुत तेज होता है. अगर आंखों की रोशनी कम है तो भी सिरदर्द की समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर को दिखाना चाहिए. सिरदर्द के ये कारण भी50 साल या उससे ज्यादा उम्र वालों में शारीरिक बदलाव की वजह से कमजोरी होती है और इससे भी सिरदर्द हो सकता है.कुछ महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान सिरदर्द होता है.चाय-कॉफी पीने की आदत है तो कैफीन की लत पड़ जाती है, जब ये न मिले तो सिरदर्द होने लगता है.ज्यादा शराब पीने या डिहाइड्रेशन से भी सिरदर्द हो सकता है.नींद पूरी न होने से से भी सिर दर्द करता रहता है. सिरदर्द से राहत पाने के उपाय Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

सुनने की क्षमता छीन सकता है OME, एक्सपर्ट से जानें इस समस्या के बारे में सबकुछ

OME can take away the ability to hear, know everything about this problem from experts कान हमारे शरीर का सबसे जरूरी अंग है जिसके बिना जीवन की कल्पना करता मुश्किल हो जाता है। हालांकि बावजूद इसके लोग अपने कानों का ख्याल नहीं रखते हैं। ऐसे में इसे लेकर जागरूकता फैलाने के मकसद से हर साल World Hearing Day मनाया जाता है। इस मौके पर आज एक्सपर्ट से जानेंगे कानों में होने वाले ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन के बारे में कान हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है, जो हमें सुनने में मदद करता है।ऐसे में इसकी देखभाल के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है।ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन कान में होने वाली एक समस्या है, जिसकी अनदेखी हानिकारक हो सकती है। हमारे शरीर में मौजूद सभी अंग हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। यह सभी अंग हमें सेहतमंद रहने में मदद करते हैं। हमारे सेंस ऑर्गन इन्हीं में से एक है, जो हमें आसानी से जीवन जीने में मदद करते हैं। कान इन्हीं जरूरी अंगों में से एक है, जो हमें सुनने में मदद करते हैं। यह हमारे लिए काफी जरूरी होते हैं, जिसके बिना अपना जीवन तक सोच पाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि अपने कान का भी ख्याल रखना बेहद जरूरी है। अपनी बिजी लाइफ में लोग अक्सर अपने कानों की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में कानों की सेहत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मकसद से हर साल 3 मार्च को वर्ल्ड हियरिंग डे मनाया जाता है। यह दिन हियरिंग लॉस और बहरेपन को रोकने के बारे में जागरूकता बढ़ाना और विश्व स्तर पर कान और उनकी देखभाल को बढ़ावा देना है। इस मौके पर आज हम जानेंगे कानों में होने वाले संक्रमण ओटिटिस मीडिया (ओएमई) के बारे में, जिसकी अनदेखी आपके लिए हानिकारक हो सकती है। इस बारे में हमने सीके बिरला हॉस्पिटल गुरुग्राम में लीड ईएनटी कंसल्टेंट डॉक्टर अनिष गुप्ता से विस्तार में जानने की कोशिश की क्या है ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन?डॉक्टर बताते हैं कि पिछले कुछ समय में मिडल ईयर में ओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन (Otitis Media with Effusion) या ओएमई (OME) के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। इस परेशानी को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन अगर इसका इलाज न कराया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे मिडल ईयर का इन्फेक्शन हो सकता है या मिडिल ईयर में धीरे-धीरे वेंटिलेशन की समस्या हो सकती है। ओएमई के कारणओटिटिस मीडिया विथ इफ्यूजन (ओएमई) होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें लगातार कोल्ड होना, एलर्जी, वायरल इंफेक्शन, एडेनोओडाइटिस और एडेनोइड हाइपरट्रॉफी शामिल हैं। क्यों बढ़ रहे ओएमई के मामलेओएमई के बढ़ते मामलों पर डॉक्टर कहते हैं कि ओएमई के मामले खासकर कोरोनाकाल के बाद ज्यादा बढ़ी हैं। इसकी वजह एडेनोइड संक्रमण और हाइपरट्रॉफी को माना जाता है। हालांकि, कोरोना वायरस से इसका सीधा संबंध अभी स्थापित होना बाकी है, लेकिन हाल के वक्त में ओएमई के मामलों में 25 से 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। खासकर 3 से 6 साल के बच्चों को इसका खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में जिन बच्चों को एडोनोइड हाइपरट्रॉफी, बार-बार सर्दी, खांसी और एलर्जी होती है, उन्हें लगातार स्क्रीनिंग और चेकअप की जरूरत है। ओएमईम के जोखिम कारकओएमई की समस्या गंभीर रूप ले सकती है, अगर समय रहते इसकी पहचान न की जाए और इसके इलाज में देर हो जाए। इसकी वजह से ईयरड्रम को डैमेज हो सकता है, और फिर कान की बीमारी हो सकती है। इस सबके कारण सुनने की क्षमता कम हो सकती है, कान तरल पदार्थ बहने लगता है और दूसरी अन्य समस्याएं भी हो जाती हैं। ऐसे में ओएमई के नकारात्मक प्रभाव से बचाव के लिए सही समय पर इसकी पहचान और फिर सही इलाज बहुत जरूरी है।

इम्युनिटी बूस्ट करने के लिए बेहद जरूरी है Zinc, इन फूड आइटम्स से करें इसकी कमी दूर

Zinc is very important to boost immunity, overcome its deficiency with these food items. हमारे शरीर में मौजूद सभी पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। Zinc इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में से एक है हमारी इम्युनिटी बूस्ट करने में मदद करता है। ऐसे में जरूरी है कि आपकी डाइट में जिंक पर्याप्त मात्रा में शामिल हो क्योंकि शरीर में इसकी कमी कई समस्याओं की वजह बन सकती है। आप इन फूड्स से इसकी कमी को पूरा कर सकते हैं। सेहतमंद रहने के लिए शरीर में सभी पोषक तत्वों का होना बेहद जरूरी है। ये सभी पोषत तत्व हमारे शरीर में कई अहम कार्य करते हैं। जिंक (Zinc) इन्हीं जरूरी सप्लीमेंट्स में से एक है, जो इम्युनिटी बूस्ट करने में मदद करता है। इसके सेवन से आपकी इम्युनिटी को काफी हद तक मजबूत किया जा सकता है। कम ही सही लेकिन रोजाना इसका सेवन स्वस्थ शरीर के लिए बहुत जरूरी है। ये स्किन, बालों और आंखों के स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। घाव भरने के लिए, बच्चों के विकास और युवाओं में जरूरी पोषण के लिए जिंक का डेली डाइट में शामिल होना जरूरी है। अगर समय रहते इसकी कमी को पूरा नहीं किया गया, तो स्वास्थ्य संबंधित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसका नियमित मात्रा में सेवन आपको जिंक की कभी कमी नहीं होने देता। ऐसे में आज इस आर्टिकल में जानेंगे जिंक से भरपूर कुछ ऐसे फूड्स, जो आपके शरीर में कभी जिंक की कमी नहीं होने देंगे। बैरीजबैरीज में काफी मात्रा में जिंक पाया जाता है, जो हमारे शरीर में कभी जिंक की कमी नहीं होने देते। ऐसे में आप जिंक की पूर्ति के लिए ब्लूबेरी, रास्पबेरी को डाइट में शामिल कर सकते हैं। चनाचना जिंक का बेहतरीन सोर्स है। सफेद चने में ज्यादा जिंक होता है, इसलिए इसका सेवन ज्यादा सेहतमंद होता है। नट्स और सीड्सड्राई फ्रूट्स जैसे काजू, किशमिश, बादाम, अखरोट, कद्दू के बीच, सूरजमुखी के बीच और तिल में भरपूर मात्रा में जिंक पाया जाता है। आप इनको भी अपनी डेली डाइट में शामिल कर जिंक की कमी दूर कर सकते हैं। तरबूज के बीजतरबूज का बीज जिंक का अच्छा स्रोत है। जिंक के अलावा इसमें पोटेशियम और कॉपर होता है, जो कि हमारे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए इसका हफ्ते में दो से तीन बार चम्मच सेवन शरीर के लिए फायदेमंद होता है। अंडाअंडा कई तरीकों से सेहत के लिए फायदेमंद होता है। प्रोटीन के साथ-साथ इसे खाने से शरीर में जिंक की कमी को भी दूर किया जा सकता है। एक अंडे में लगभग 5% जिंक होता है। दहीदही में मौजूद बैक्टीरिया आंतो की सफाई करता है और साथ ही साथ शरीर में जिंक की कमी को भी पूरा करता है। इसलिए इसे भी डेली रूटीन में जरूर शामिल करें। मछलियांमछलियां जिंक का सबसे अच्छा सोर्स होती हैं। इसलिए इसका हफ्ते में दो बार सेवन करना फायदेमं साबित होगा।

बदलते मौसम में शरीर में रहता है दर्द और अकड़न तो ऐसे पाएं निजात

If there is pain and stiffness in the body during the changing season, then get relief like this. जानें इसका कारण और ठीक करने का तरीका बदलते मौसम में शरीर में दर्द और अकड़न की समस्या बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में हम आपको बता रहे हैं कुछ खास उपाय जिसकी मदद से आप निजात पा सकते हैं. इन दिनों मौसम तेजी से बदल रहा है. ऐसी स्थिति में शरीर में दर्द और अकड़न की शिकायत हो रही है. हर कोई सुबह उठने के साथ हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द और अकड़न से परेशान है. वहीं कुछ लोग तो पूरे दिन आलस और नींद महसूस करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह बदलते मौसम की वजह से हो रहा है. लेकिन सवाल यह है कि बदलते मौसम में क्या वजह है कि शरीर में अकड़ने और दर्द होता है. क्या मौसम भी शरीर के दर्द का कारण बनता है? इन दिनों शरीर में दर्द और अकड़न की काफी शिकायत हो रही है. क्योंकि टेंपरेचर कम- ज्यादा हो रहा है. जिसके कारण जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, गठिया और फाइब्रोमायल्गिया जैसी गंभीर बीमारी ट्रिगर कर सकती है. टेंपरेचर के दबाव के कारण आसपास का वातावरण काफी ज्यादा प्रभावित होता है. जिसके कारण शरीर पर हवा का दबाव कम होता है. इसके कारण टिश्यूज फैलते हैं शरीर के अंदर दबाव बढ़ता है. यही वजह होता है शरीर में दर्द और अकड़न का कारण. इस मौसम में शरीर में थोड़ी सुस्ती छा जाती है. टेंपरेचर में गिरावट के कारण जोड़ों में नमी हो जाती है. जिसके कारण सिरदर्द और अकड़न हो जाता है. शरीर में दर्द और अकड़न के कारण शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्या शुरू होती है. इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि इस मौसम में डाइट का खास ख्याल रखें. गर्म चीजें ज्यादा खाएं. साथ ही साथ ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. इन सब के अलावा सुबह उठकर गुनगुना पानी पिएं. साथ ही एक्सरसाइज करें. जिससे ब्लड सर्कुलेशन तेज होगा. तभी आपको सभी तरह के समस्याओं से निजात मिल पाएगी. मौसम के हिसाब से शरीर को एडजस्ट होने का मौका दें.

स्ट्रेस नहीं आएगा पास, तनाव भी चला जाएगा दबे पांव, बस आपको करने होंगे ये उपाय

Stress will not come near, tension will also disappear, you just have to do these measures हमारे शरीर में तनाव से जो प्रक्रियाएं होती है, उसे कंट्रोल करने का कामकोर्टिसोल नाम का हार्मोन करता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ने लगता है. आजकल करीब-करीब हर इंसान तनाव में है. वो बात अलग है कि हर किसी का कारण अलग-अलग होता है. जिस तेजी से दुनिया आगे बढ़ रही है, तनाव भी उसी तरह हम सभी की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है. इसकी वजह से कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. तनाव को पूरी तरह खत्म कर पाना भी आसान नहीं है. हालांकि, कुछ प्रयास कर इससे छुटकारा जरूर पाया जा सकता है. आइए जानते हैं तनाव का कारण और इससे बचने के 5 सबसे कारगर उपाय… तनाव क्यों होता है दरअसल, हमारे शरीर में तनाव से जो प्रक्रियाएं होती है, उसे कंट्रोल करने का कामकोर्टिसोल नाम का हार्मोन करता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ने लगता है. कुछ अच्छी हैबिट्स से कोर्टिसोल और तनाव दोनों को कंट्रोल किया जा सकता है. तनाव से छुटकारा पाने के 5 जबरदस्त उपाय तनाव और खानपान का गहरा जुड़ाव होता है. पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. इससे नींद अच्छी आती है और टेंशन कम रहता है. पुदीने या लेमन ग्रास टी कोर्टिसोल के लेवल को कम कर तनाव से छुटकारा दिला सकते हैं. स्ट्रेस से बचने के लिए आप चाहें तो थोड़ी सी डार्क चॉकलेट भी खा सकते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो तनाव कम करने का काम करते हैं. इसके अलावा एवोकाडो, बादाम, अखरोट, पिस्ता, चिया सीड्स और अलसी जैसी चीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम खूब पाए जाते हैं, जिससे तनाव दूर होते हैं. खट्टे फल और पत्तेदार सब्जियां भी तनाव से राहत दिलाते हैं. स्मार्टफोन या लैपटॉप का इस्तेमाल इन दिनों काफी ज्यादा बढ़ गया है. ऐसे में सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. दरअसल, इन गैजेट्स से निकलने वाली नीली रोशनी नींद को प्रभावित करती हैं. लगातार फोन यूज करने से दिमाग एक्टिव रहता है. जिससे बॉडी में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ता है. ऐसे में तनाव ट्रिगर हो सकता है. तनाव से बचना है तो अपना नजरिया बदलना चाहिए. दरअसल, लोग उन चीजों को लेकर ज्यादा दुखी हैं, जो उन्हें नहीं मिल पाए हैं. ऐसे में आपके पास जो भी है, उसके लिए ईश्वर का आभार जताएं और उसी में खुश रहने की आदत डालें. इससे छोटे-छोटे अचीवमेंट्स आपको खुश रखेंगे. जिससे आप शांत रह पाएंगे और अच्छा महसूस करेंगे. योग और मेडिटेशन को अपनी लाइफ का हिस्सा बनाएं. इससे तनाव दूर करने में मदद मिलती है. योग-मेडिटेशन जिंदगी में पॉजिटिविटी लाने का काम करते हैं और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव करते हैं. जिससे बॉडी रिलैक्स होती है. इससे मन शांत रहता है और फोकस बढ़ता है.

देश के जायकेः पालक के पत्तों की लज्जतदार चाट 

Flavors of the country: Delicious chaat of spinach leaves सर्दी के मौसम के खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। यानी हरी पत्तेदार सब्जियों का सीजन भी जल्द ही बीत जाएगा। तो क्यों न हरे पत्तों के जाते हुए सीजन में + आज कुछ अलग-सी डिश पर हाथ आजमाएं। आज हम बनाते हैं अब भी बहुतायत में आ रहीं पालक के पत्तों की लज्जतदार चाट। सामग्री: पालक के पत्ते – 7 से 8 नग बेसन – 1 कप चावल का आटा – 2 छोटे चम्मच कॉर्न फ्लोर – 2 छोटे चम्मच – लाल मिर्च पाउडर – 1 चम्मच हल्दी पाउडर – 1 चम्मच – गरम मसाला 1 चम्मच – नमक 1 चम्मच तलने के लिए तेल सामग्री: गार्निशिंग के लिए – दही – 1/2 कप – पीसी हुई शक्कर – 1 छोटा चम्मच काला नमक – 2 छोटे चम्मच भुना जीरा पाउडर – 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर – 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर – 2 छोटे चम्मच – हरी चटनी – 2 बड़े चम्मच – मीठी चटनी – 2 बड़े चम्मच अदरक (पतली कतरन) – 2 बड़े चम्मच अनार के दाने 2 बड़े चम्मच – हरा धनिया (बारीक कटा हुआ) – 2 छोटे चम्मच बनाने की विधि : – पालक के पत्तों को अच्छे से धोकर और साफ करके उन्हें एक तरफ रख दीजिए। – एक बॉउल में बेसन लेकर उसमें चावल का आटा, कॉर्न फ्लोर, नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और पानी डालकर चिकना घोल बना लीजिए। – पालक के पत्तों को बेसन के घोल में पूरी तरह लपेट लीजिए और फिर गहरे फ्राई पैन में अच्छे से तल लीजिए – अब एक बॉउल में दही डालकर उसमें पीसी हुई शक्कर और काला नमक डालकर अच्छे से मिला लीजिए।  अब पालक पत्ता चाट की प्लेट लगाने की शुरुआत करते हैं। इसके लिए तले हुए पालक पत्ता को प्लेट में रखें और ऊपर से काला नमक, भुना हुआ जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, दही का मिश्रण, हरी चटनी, मीठी चटनी, कटा हुआ हरा धनिया, अनार के दाने डालिए। अब इसी प्रकिया को दोहराएं और जितनी जरूरत हो, उतनी परतें बनाते जाएं। तैयार है आपकी पालक पत्ता चाट।

आयुष विभाग जिला विदिशा के द्वारा अश्वगंधा, शतावर एवं तुलसी की कृषि तकनीक, संग्रहण एवं स्वेच्छिक प्रमाणन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

Two day training program on collection and voluntary certification सीताराम कुशवाहा सहारा समाचार विदिशा ! आयुष विभाग जिला विदिशा के द्वारा अश्वगंधा, शतावर एवं तुलसी की कृषि तकनीक, संग्रहण तकनीक स्वेच्छिक प्रमाणन आदि विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 12 जनवरी 2024 से 13 जनवरी 2023 का शुभारंभ हुआ।दिनांक 12 जनवरी 2024 को प्रातः 10 बजे से होटल राजावत, माधवगंज विदिशा में किया गया। उक्त प्रशिक्षण मे अश्वगंधा शतावर एवं तुलसी आदि कृषि उत्पादन संग्रहण आदि विषयो पर संबंधित विशेषज्ञो आयुष विभाग/कृषि विभाग/उधानिकी विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उक्त प्रशिक्षण में आज दिनांक 12.01.2024 को जिला अंतर्गत विभिन्न विकासखण्डों के कृषकों के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया साथ ही कृषकों के द्वारा उक्त प्रशिक्षण को औषधीय पौधों की कृषि में अत्यधिक लाभकारी बताया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषकों को इन औषधीय पौधों के संरक्षण, तकनीक एवं प्रमाणन पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जायेगा।

नगर में धड़ल्ले से चल रहा गांजे और नशे का व्यापार

Cannabis and drug trade running rampant in the city नैनपुर ! नैनपुर नगर में लंबे समय से नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र के युवा गांजे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। नैनपुर शहर से लेकर आसपास के छोटे-छोटे गांव के हर हिस्से में गांजे का नशा करने वाले युवाओं को यह जहर आसानी से उपलब्ध हो रहा है। शहर में कुछ परिवार तो ऐसे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा बुधवारी बाजार मटन मार्केट के पास जो अपने घर पर एवं अपनी दुकानों के माध्यम से परिवार सहित खुलेआम गांजे का व्यापार करते हैं।वहीं कुछ लोग अपने वाहन पर सवार होकर गांजे को खरीददार के बताए स्थान पर उपलब्ध कराते हैं।नैनपुर पुलिस ने पिछले कुछ समय में इन अवैध गांजा कारोबारीयों पर नकेल कसने का कार्य करते हुए कुछ लोगों के पास से गांजा बरामद कर जेल भेजने की कार्रवाई की थी।लेकिन न जाने इन गांजा कारोबारीयों को किसका संरक्षण है, जो पुनः धड़ल्ले से गांजे का व्यापार नगर में कर रहे हैं।नगर में सबसे ज्यादा गंजे की बिक्री बुधवारी बाजार चूना मार्केट एरिया से ही की जाती है। नगर के नागरिकों कहे अनुसार मानें तो अगर यही हालत रहे तो वो दिन दूर नही जब कोई भी अनहोनी हो जाए।नगर की जनता प्रशासन से इस नशे के कारोबार में अंकुश लगाने को मांग करती हे जिससे युवा पीढ़ी को नशे से बचाया जा सके।

घरेलू नुस्खों से दूर करें गले की खराश, सर्दियों में होती है परेशानी.

Home Remedies for throat in winter season. मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। वह इसके लिए कई महंगी दवाईयों को खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन फिर भी कोई आराम नहीं मिलता है। ऐसे में कई घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है। घरेलू नुस्खों को आसानी से रसोई में मौजूद चीजों के इस्तेमाल से बनाया जा सकता है। डाइटिशियन सिमरन कौर ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। हल्दी वाला पानी पिएं ,हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी एंटी-सेप्टिक और एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। यह हमारे शरीर में मौजूद इंफेक्शन को दूर कर देते हैं। गर्म पानी के साथ लहसुन, हल्दी और गुड़ का पेस्ट भी खाया जा सकता है। यह आपको फायदा पहुंचाएगा। तुलसी और अदरक की चाय पिएंसर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए तुलसी और अदरक की चाय भी पी सकते हैं। तुलसी की 4-5 पत्तियां और आधा इंच अदरक का टुकड़ा लें। दोनों को पानी में उबाले। पानी के आधा रह जाने पर इसको गैस को बंद कर दें। चाय को गुनगुना रहते ही पी लें। यह आपके गले की खराश को दूर करने में मदद करेगा। दालचीनी और शहद का नुस्खादालचीनी और शहद के घरेलू नुस्खे से गले की खराश को खत्म कर सकते हैं। आप चौथाई चम्मच दालचीनी का पाउडर लें। इसको आधा रह जाने तक उबालते रहें। यह जब रूम टेम्परेचर पा आ जाएं, तब ही इसमें शहद को मिलाएं। इसको पीने से आपके गले की खराब दूर हो जाएगी।

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