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तुलसी, सेहत के लिए बेहद फायदेमंद, कई बीमारियों के लिए औषधि

Tulsi, very beneficial for health, medicine for many diseases भोपाल ! क्या आप जानते हैं कि तुलसी आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि तुलसी की पत्तियां आपके स्वास्थ्य के लिए कितनी लाभदायक हैं. सर्दी के मौसम में ज्यादातर घरों में तुलसी का उपयोग कभी चाय में तो कभी-कभी काढ़े के रूप में किया जाता है. सर्दी में तुलसी का सही विधि से उपयोग किया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं !तुलसी के अंदर एंटी-ऑक्सीडेंट, आयरन, कैल्शियम, जिंक प्रॉपर्टी होती है, जो आपको अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है. एंटी-ऑक्सीडेंट होने की वजह से यह शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करने में मददगार है. सर्दी-जुकाम, सूखी खांसी, बलगम खांसी में भी तुलसी के पत्तों का रस लाभदायक होता है. साइनस की समस्या में लाभदायक तुलसी तुलसी के पत्ते साइनस की समस्या में भी लाभकारी हैं. यदि किसी मरीज को साइनस की दिक्कत है, नाक बंद रहती है या बार-बार छींक आती है, तो तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसकी कुछ बूंदें डायरेक्ट नाक में डालने से नाक का सारा बलगम निकल जाता है और आपको साइनस की समस्या में राहत मिलती है. नाक में डायरेक्ट तुलसी की बूंदें अप्लाई करने से यदि तेज जलन होती है, तो इसे थोड़ा पानी के साथ डाइल्यूट करके भी इस्तेमाल किया जा सकता है. छोटे बच्चों को शहद में मिलाकर दें तुलसी का रस सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, नाक बंद जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं और इन मौसमी बीमारियों का असर सबसे पहले छोटे बच्चों पर दिखाई देता है. यदि आपके भी 5 से 15 साल के बच्चे को सर्दी-जुकाम हो रहा है, तो आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बच्चों को पिलाने से सर्दी-जुकाम की समस्या खत्म हो जाती है.

खीरे के पानी में छुपे हैं अद्भुत गुण, इन 6 बीमारियों में होता है फायदेमंद

Amazing properties are hidden in cucumber water it is beneficial in these 6 diseases रोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। आजकल अनियमित जीवनशैली और खानपान में लापरवाही के कारण लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यदि आप दिन की शुरुआत ही व्यवस्थित तरीके से कर दें तो आप कई समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। सुबह उठते ही शरीर को डिटॉक्स करने से लिए पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके स्थान पर यदि आप खीरे का पानी का सेवन करेंगे तो सेहत को कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। यहां डायटिशियन मीना कोरी खीरे के पानी के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही है। शरीर में पानी की कमी नहींसुबह यदि आप खीरे का पानी का सेवन करते हैं तो शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। सामान्य जल की तुलना में खीरे का पानी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। यह पानी सुगंधित होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। यह पानी शरीर की आंतरिक सफाई में अहम भूमिका निभाता है। वजन घटाने में मददगारखीरा एक ऐसी सब्जी है, जिसमें कैलोरी काफी कम होती है। यदि सुबह सुबह खीरे का पानी पीते हैं तो इससे पेट काफी देर तक भरा हुआ रहता है। यह वजन कम करने में मदद करता है। खीरे का पानी एक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में काम करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। खीरे के पानी में घुलनशील फाइबर भी होता है, जो शरीर का वजन नहीं बढ़ने देता है। कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशरखीरे के पानी में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। खीरे का पानी किडनी में जमा सोडियम की मात्रा को नियंत्रित करता है। खीरे का पानी पीने से हार्ट अटैक का खतरा भी कम होता है।स्किन में बढ़ता है ग्लोरोज सुबह खीरे का पानी पीने से स्किन का ग्लो बना रहता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। खीरे के पानी में विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी होते हैं, जो स्किन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

कोरोना वायरस की दस्‍तक, बागेश्वर धाम से लौटा व्यक्ति संक्रमित.

Corona virus knocks, person returned from Bageshwar Dham infected. ग्वालियर में एक कोरोना संक्रमित मरीज मिला है, जिसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। ग्‍वालियर में कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि ,गजराराजा मेडिकल कालेज में लिए थे सैंपल ,चार कोविड टेस्ट में एक की रिपोर्ट पाजिटिव ग्वालियर। ग्वालियर में कोरोना पाजिटिव मरीज मिला है। इसके साथ ही जिले में एक्टिव मरीज की संख्या एक हो गई है। कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। कोरोना के चार सैंपल गजराराजा मेडिकल कालेज में जांच के लिए पहुंचे थे। इनमें से एक 58 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित पाए गए। यह 15 दिन पहले बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। फिलहाल 58 वर्षीय मरीज को होम आइसोलेशन में रखा गया है। इनके संपर्क में आने वाले परिवार के सदस्यों के सैंपल लेने स्वास्थ्य विभाग की टीम सीएमएचओ के निर्देश पर उनके घर पहुंची।फिलहाल हालत स्थिरकोरोना संक्रमित ने बताया कि वह बागेश्वर धाम छतरपुर गए थे। वहां से लौटने पर सर्दी-जुखाम हुआ, तो एक हजार बिस्तर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। यहां चिकित्सक ने कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर जांच के लिए बोला। जांच गजराराजा मेडिकल कालेज में कराई तो रिपोर्ट पाजिटिव निकली। घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा हूं। हालत स्थिर है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.राजौरिया ने बताया कि मरीज की जांच के लिए रोजाना स्वास्थ्य टीम को भेजा जाएगा। दवा उपलब्ध करा दी गई हैं। संक्रमित के घर उनकी पत्नी व एक बच्चा भी है। इसलिए चिकित्सकों ने सलाह दी है कि अगर किसी को सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो सूचना दें।सोमवार को लिए जाएंगे जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपलमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.आरके राजौरिया ने बताया कि मरीज की जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल सोमवार को लिए जाएंगे। इस जांच से कोरोना के वेरिएंट का पता लगाया जाएगा। कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद हमें उस मरीज में कोरोना का कौन सा वेरिएंट है, इसकी जांच करनी होती है। जेएएच के पुराने आइसीयू में 30 बेड आरक्षितकोरोना को लेकर जेएएच प्रबंधन अलर्ट है। यहां पुराने आइसीयू भवन में तीस बेड आरक्षित किए गए हैं। यहां दस वेंटिलेटर, मल्टीपैरा मीटर, दवा, पीपीइ किट के साथ अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। जीआरएमसी के डीन डा.अक्षय निगम कोविड वार्ड निरीक्षण कर चिकित्सक और स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दे चुके हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में दस पलंग का वार्ड आरक्षित किया गया है। सैंपल जांच की सुविधा शुरू की गई है।

कोरोना के JN.1 वेरिएंट ने भारत में मचाया कोहराम, 24 घंटे में 5 लोगों की मौत, 529 नए मामले

The JN.1 variant of the coronavirus has caused havoc in India, with 5 deaths and 529 new cases reported in the last 24 hours. नई दिल्ली ! भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर कोविड के 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। दरअसल, JN.] वेरिएंट दिल्ली से लेकर भारत के 9 राज्यों में फैला हुआ है। वहीं महाराष्ट्र में तीन महीने में पहली बार कोविड-19 से मौत की खबर सामने आई है। वहीं 4,093 मरीज इलाज करा रहे है। रिपोर्ट के अनुसार JN.1 वेरिएंट गुजरात, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में पाया गया है। एक्सपर्ट के अनुसार, JN.1 के लक्षण हल्के हैं। इसलिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 वेरिएंट में म्यूटेशन होता है। 24 घंटे में सामने आए 529 नए मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में 24 घंटों में कोविड-19 के 529 मामले और 5 मौतें दर्ज की गईं हैं। वहीं कोविड का JN.] वेरिएंट का पहला केस 8 दिसंबर को केरल में पाया गया था। इसके बाद यह 9 राज्यों में फैल गया। इसके साथ ही नई दिल्ली में JN.1 वेरिएंट का पहला मामला मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत में बुधवार सुबह 8 बजे तक 24 घंटे में 529 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक कोविड के कारण 5 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं बुधवार को 87 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब तक JN.1 के कुल 110 मामलों की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में JN.1 के सबसे अधिक 36 मामले हैं। इसके बाद कर्नाटक में 34, गोवा में 14, महाराष्ट्र में 9, केरल में 6, राजस्थान में 4, तमिलनाडु में 4, तेलंगाना में 2 और दिल्ली में एक मामले सामने आए है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मामले बढ़ रहे हैं लेकिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम पड़ रही है क्योंकि अधिकतर मामलों में हल्के लक्षण है।

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर, पर्चे में दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में लिखना होगा.

Doctors at Hamidia Hospital will need to write the names of medicines in capital letters on prescriptions. हमीदिया अस्पताल में फरमान, पर्ची की जांच भी होगी भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर परिचय में दावों के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं, जिन परचों में जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। हमीदिया अस्पताल भोपाल के अधीक्षक डा. आशीष गोहिया ने बताया कि हम मॉनिटरिंग भी करेंगे हमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मानिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था। घसीटा राइटिंग से होता है कन्फ्यूजनडॉक्टरों की रेटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मानीटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिखते हैं चिकित्सक :चिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानीटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है । अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं।ऐसे जारी होते रहे आदेश

जिला चिकित्सालय में रक्त स्त्राव से गर्भवती महिला की मृत्यु के मामले में चार सदस्यीय समिति गठित।

A four-member committee was formed in the case of death of a pregnant woman due to bleeding in the district hospital. विशेष संवाददाता सहारा समाचार कटनी। कलेक्टर अवि प्रसाद ने गर्भवती महिला श्रीमती रंजीता बर्मन निवासी डुमरिया की गुरूवार की सुबह उपचार के दौरान अधिक रक्त स्त्राव से मृत्यु के मामले में जिला अस्पताल द्वारा मृतिका को रक्त उपलब्ध कराने के समुचित प्रयासों की जांच हेतु समिति का गठन किया है। जिले के ब्लड बैंक मे रक्त की पर्याप्त उपलब्धता के मद्देनजर कलेक्टर अवि प्रसाद की अध्यक्षता में शनिवार 23 दिसंबर को शाम 5 बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई है। बैठक में सामाजिक एवं स्वैच्छिक संगठनों सहित महाविद्यालयों के एन एस एस, स्काउट गाइड के कार्यक्रम अधिकारियों की सहभागिता से रक्तदान हेतु अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जायेगा

फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन, 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए- Central Drugs Standard Control Organisation.

According to the Central Drugs Standard Control Organisation, the combination of Chlorpheniramine Maleate and Phenylephrine should not be administered to children under 4 years of age in a fixed-dose combination. Manish Trivedi, Sahara Samachaar. नई दिल्ली ! सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के इस हफ़्ते लिए गए फ़ैसले के अनुसार फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का इस्तेमाल करने पर दवा कंपनियों को दवा के लेबल पर लिखना होगा कि “एफडीसी का उपयोग 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए ! सरकार का यह फ़ैसला कुछ महीने पहले कई देशों में कफ़ सीरप पीने से 100 से अधिक बच्चों की मौत होने के बाद आया है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि बच्चों के लिए एक अस्वीकृत सर्दी-रोधी दवा फॉर्मूलेशन के प्रमोशन को लेकर चिंता जताई गई थी. अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एफडीसी का इस्तेमाल न करने की सिफारिश की गई. नियामक के आदेश के अनुसार, फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का उपयोग करने पर दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर चेतावनी के साथ लेबल लगाने की ज़रूरत होगी. फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन शामिल होते हैं. इसका उपयोग अक्सर सर्दी जुकाम के इलाज के लिए सिरप या गोलियों में किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पांच साल से छोटे बच्चों में खांसी और सर्दी के इलाज के लिए बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप या अन्य दवाई के उपयोग की सिफ़ारिश नहीं करता.

जिला चिकित्सालय बजट के अभाव से गुजर रहा है जिसके कारण मरीजों को हो रही है समस्या.

The district hospital is facing challenges due to a shortage of budget, causing difficulties for patients. छतरपुर। जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई 5 लिफ्ट में से 4 खराब पड़ी हुई है। लिफ्ट खराब होने के कारण गंभीर मरीजों तथा उनके परिजनों को काफी समस्या हो रही है। मीडिया द्वारा पिछले दिनों इस समस्या को अस्पताल प्रबंधन सहित जिला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन अभी भी लिफ्ट का सुधार कार्य नहीं हो सका है। इस संबंध में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएल अहिरवार ने बताया कि बजट न होने के कारण लिफ्ट का सुधार कार्य नहीं हो पा रहा है। डॉ. अहिरवार के मुताबिक वे कई बार राज्य शासन को इस आशय का पत्र भेज चुके हैं। हालांकि पिछले दिनों कलेक्टर संदीप जी आर ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही किसी अन्य शासकीय मद से राशि उपलब्ध कराकर लिफ्ट का सुधार कार्य कराया जाएगा। सिविल सर्जन ने यह भी बताया कि अस्पताल में बजट की समस्या लंबे समय से है। दीपावली के त्यौहार पर अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल सका था।

फिर बढ़ा कोरोना का खतरा, डायट में शामिल करें ये इम्यूनिटी बूस्टर जड़ी बूटियां.

The threat of COVID-19 has increased again; include these immunity-boosting herbs in your diet. ( L.K varma ) अदरक की तासीर गर्म होती है। इस मसालेदार जड़ में जिंजरोल होता है, जिसमें रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। सर्दी के मौसम में जहां इम्यूनिटी कमजोर होने से कई संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, वहीं दूसरी ओर इन दिनों कोरोना संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यदि आप भी अपने शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाना चाहते हैं तो डायट में ऐसी जड़ी बूटियों को जरूर शामिल करना चाहिए, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। हल्दी, में कई औषधीय गुणों होते हैं। इसमें करक्यूमिन नाम का यौगिक होता है, जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा हल्दी में सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। अदरक, की तासीर गर्म होती है। इस मसालेदार जड़ में जिंजरोल होता है, जिसमें रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण होते हैं। यह पाचन में सहायता करता है। सूजन कम होने से शरीर को प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत होती है। लहसुन, भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ कई औषधीय गुणों से भरपूर है। लहसुन में एसिलिन नाम का यौगिक होता है, जो इम्यूनिटी बूस्टर का काम करता है। एसिलिन रोगाणुरोधी और एंटीवायरल गुणों वाला एक यौगिक है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवाइन, भी एक स्वादिष्ट जड़ी-बूटी है, जो विटामिन-C और खनिजों से भरपूर है। अजवाइन में रोगाणुरोधी गुण भी होते हैं। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। इसके अलावा कोरोना से बचने के लिए तुलसी, एलोवेरा, त्रिफला आदि का भी सेवन कर सकते हैं।

घरेलू नुस्खों से दूर करें गले की खराश, सर्दियों में होती है परेशानी.

Home Remedies for throat in winter season. मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-खांसी और गले में खराश का होना आम बात है। कई लोग कफ और कोल्ड की समस्या से जूझते हैं। मौसम के बदलाव के साथ कई लोगों को गल में खराश की समस्या होने लगती है। वह इसके लिए कई महंगी दवाईयों को खाना शुरू कर देते हैं, लेकिन फिर भी कोई आराम नहीं मिलता है। ऐसे में कई घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है। घरेलू नुस्खों को आसानी से रसोई में मौजूद चीजों के इस्तेमाल से बनाया जा सकता है। डाइटिशियन सिमरन कौर ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी। हल्दी वाला पानी पिएं ,हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी एंटी-सेप्टिक और एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। यह हमारे शरीर में मौजूद इंफेक्शन को दूर कर देते हैं। गर्म पानी के साथ लहसुन, हल्दी और गुड़ का पेस्ट भी खाया जा सकता है। यह आपको फायदा पहुंचाएगा। तुलसी और अदरक की चाय पिएंसर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए तुलसी और अदरक की चाय भी पी सकते हैं। तुलसी की 4-5 पत्तियां और आधा इंच अदरक का टुकड़ा लें। दोनों को पानी में उबाले। पानी के आधा रह जाने पर इसको गैस को बंद कर दें। चाय को गुनगुना रहते ही पी लें। यह आपके गले की खराश को दूर करने में मदद करेगा। दालचीनी और शहद का नुस्खादालचीनी और शहद के घरेलू नुस्खे से गले की खराश को खत्म कर सकते हैं। आप चौथाई चम्मच दालचीनी का पाउडर लें। इसको आधा रह जाने तक उबालते रहें। यह जब रूम टेम्परेचर पा आ जाएं, तब ही इसमें शहद को मिलाएं। इसको पीने से आपके गले की खराब दूर हो जाएगी।

शासकीय ज़िला चिकित्सालय के सभी डॉक्टर्स एवं नसों का स्वागत सम्मान किया गया.

All doctors and staff of the government district hospital were welcomed and honored. बुरहानपुर! जिला अस्पताल के सभी 40 डॉक्टर्स एवं 90 नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ एवं सभी डिपार्टमेंट के पदाधिकारियों का असहाबे सुफफ़ा एजुकेशनल सोसाइटी की ओर से जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक सेवको के हाथ से सर्टिफिकेट एवं पौधा और फूल माला से उनका सम्मान किया गया। सोसाइटी के अध्यक्ष एवं युवा समाज सेवी हाजी अब्दुल बासित ने बताया के इस आयोजन का मक़सद सभी डॉक्टर एवं मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की हौसला अफजाई करना है। इस सम्मान समारोह की आयोजन से हमारी टीम को बहुत गर्व महसूस हुआ है। तिलावत ए कुरान ए पाक से प्रारंभ हुए इस प्रोग्राम की अध्यक्षता निगम अध्यक्ष श्रीमती अनीता अमर यादव ने की एवं पूर्व प्रदेश महासचिव श्री अजय सिंह रघुवंशी, नेता प्रतिपक्ष श्री अकील औलिया, उप नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता उबेद शेख, पार्षद फहीम हाशमी, पार्षद आसिफ खान, समाजसेवी मुशर्रफ़ खान, समाजसेवी शेख अजगर, एवं असहाबे सुफ्फा एजुकेशनल सोसाइटी के सभी पद अधिकारी मौजूद थे।

12244 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई.

Administered polio medicine to 12,244 children सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार, विदिशाविदिशा! ग्यारसपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्यारसपुर के सरपंच राजू कुशवाहा एवं स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर गणेशराम विश्वकर्मा के द्वारा जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है! जिसमें ग्यारसपुर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 16432 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा है। जिसमें से पहले दिन 12244 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक ग्यारसपुर ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी ग्यारसपुर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सुनीता नागाचे ने बताया कि 169 केंद्र ग्यारसपुर ब्लॉक में बनाए गए हैं! जहां पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही बस स्टैंड पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की बसों में आने जाने वाले 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

12 महीनों में भारत में लगभग 60% स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) संगठनों को साइबर अटैक का सामना करना पड़ा.

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In the last 12 months, nearly 60% of healthcare organizations in India had to face cyberattacks. Manish Trivedi नई दिल्ली: पिछले 12 महीनों में भारत में लगभग 60% स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) संगठनों को साइबर अटैक का सामना करना पड़ा है. इकोनॉमिक टाइम्स ने यूके स्थित साइबर सुरक्षा फर्म सोफोस के एक नए अध्ययन का हवाला देते हुए बताया है कि इनमें से, साइबर अपराधी लगभग 75% रैंसमवेयर अटैक में डेटा को सफलतापूर्वक एन्क्रिप्ट करने में सक्षम थे, जो पिछले तीन वर्षों में एन्क्रिप्शन की सबसे ऊंची दर है. अख़बार ने साइबर सुरक्षा फर्म के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि यह पिछले साल किए गए 61% डेटा एन्क्रिप्शन के मुकाबले बड़ी वृद्धि है. बताय गया है कि केवल 24% स्वास्थ्य सेवा संगठन साइबर अपराधियों द्वारा उनके डेटा को एन्क्रिप्ट करने से पहले रैंसमवेयर के अटैक को रोकने में सक्षम थे. रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा 2022 में 34% था. पिछले साल 30 नवंबर को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की वेबसाइट पर 24 घंटे में करीब 6,000 हैकिंग प्रयास हुए थे. यह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पांच सर्वरों को रैंसमवेयर द्वारा हैक किए जाने के हफ्तेभर बाद हुआ था. अनुमान ही कि इसमें 1.3 टेराबाइट डेटा एन्क्रिप्ट किया गया था. हैकर्स ने एम्स के लिए अपने ही डेटा तक पहुंच को असंभव बना दिया था. 31 अक्टूबर, 2023 को बड़े पैमाने पर हुए डेटा ब्रीच (सेंधमारी) में आईसीएमआर के साथ 81.5 करोड़ से अधिक भारतीयों की जानकारी डार्क वेब पर बेची गई. लेकिन हेल्थकेयर क्षेत्र डेटा ब्रीच का नया निशाना क्यों बन रहा है? साइबर जोखिम प्रबंधन फर्म एरेटे के अध्यक्ष एपीएसी राज शिवाराजू ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि पुराने सॉफ्टवेयर, पुराने सिस्टम और साइबर सुरक्षा में अपर्याप्त निवेश ने स्थिति खराब कर दी है. जैसे-जैसे भारत स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऑनलाइन सिस्टम को सुरक्षित करना तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है. ट्रेंड माइक्रो की 2023 रिपोर्ट के अनुसार, 2023 की पहली छमाही में साइबर सुरक्षा जोखिम की घटनाओं के लिए भारत को अमेरिका और ब्राजील के बाद तीसरा सबसे खराब देश बताया गया. साइबर ख़तरे का हाल कोलंबिया स्थित साइबर सुरक्षा कंपनी टेनेबल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि भारतीय कंपनियां लगभग आधे साइबर अटैक को नहीं रोक सकती हैं. यह रिपोर्ट 825 आईटी और साइबर सुरक्षा पेशेवरों के ऑनलाइन अध्ययन पर आधारित है, जिनमें से 69 भारतीय थे. टेनेबल इंडिया के कंट्री मैनेजर कार्तिक शाहनी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ‘आज के खतरे के माहौल में जब तक संगठन साइबर अटैक पर प्रतिक्रिया देते हैं, तब तक बाजी आधी हारी जा चुकी होती है.’ रिपोर्ट के अनुसार, इसका कारण आईटी और साइबर सुरक्षा टीमों के बीच समन्वय की कमी है, जिसे 43% भारतीय संगठनों ने स्वीकार किया है. शाहानी ने कहा कि संगठनों में आईटी और सुरक्षा टीमों के बीच लक्ष्यों के अलग होने के परिणामस्वरूप तालमेल की स्पष्ट कमी होती है, जिससे साझा लक्ष्य की दिशा में एकजुट होकर काम करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. अध्ययन में उत्तर देने वाले कम से कम 78% भारतीयों का मानना है कि उनके संगठन प्रिवेंटिव साइबर सुरक्षा के लिए समर्पित ज़्यादा संसाधनों के साथ साइबर अटैक से बेहतर बचाव कर सकते हैं. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 में से केवल सात (71%) संगठनों का कहना है कि उनकी आईटी टीमें पैचिंग और सुधार की तुलना में अपटाइम के बारे में अधिक चिंतित हैं. बेहतर साइबर सुरक्षा के लिए कौशल की कमी इसके अलावा, भारत के साइबर सुरक्षा उद्योग में मांग और आपूर्ति के बीच गहरी खाई है. चीन के बाद सक्रिय इंटरनेट यूजर्स की दूसरी सबसे बड़ी संख्या होने के बावजूद भारत में वैश्विक साइबर सुरक्षा नौकरियों का केवल 6% है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 तक इस उद्योग में केवल 40,000 नौकरियां थीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में साइबर सुरक्षा पेशेवरों की मांग बढ़ रही है, लेकिन उद्योग को जरूरी कौशल को लेकर बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है, जहां मांग-आपूर्ति के बीच का अंतर 30% है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का साइबर सुरक्षा कार्यबल 2023 में लगभग 0.3 मिलियन था, जो 2022 में 0.21 मिलियन और 2021 में 0.1 मिलियन था. इसकी तुलना में, साइबर सुरक्षा पेशेवरों का वैश्विक कार्यबल लगभग 4.7 मिलियन था. इसमें यह भी कहा गया है कि साइबर सुरक्षा राजस्व के मामले में भारत 222 बिलियन डॉलर के वैश्विक राजस्व में से 2.50 बिलियन डॉलर का अनुमानित राजस्व पैदा कर रहा है. यह रिपोर्ट द वायर हिंदी की एक रिपोर्ट पर आधारित है 

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