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खाघ एवं औषधि नियंत्रक के आदेश की, रायसेन औषधि निरीक्षक द्वारा उड़ाई जा रही है धज्जिया। 

Raisen; Health Department; DI Ajeet Jain; Bhopal;

The orders of the Food and Drug Controller are being flouted by the Raisen Drug Inspector. Special Correspondent, Raisen, Madhya Pradesh भोपाल , मध्य प्रदेश के सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को खाघ एवं औषधि नियंत्रक द्वारा 27 जुलाई 2024 को एक आदेश भेजा गया था, जिसमे मध्यप्रदेश के सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को उनके कार्यक्षेत्र में संचालित हो रहे औषधि विक्रय संस्थानों के द्वारा औषधियों पर अंकित एम.आर.पी. से अधिक मूल्य पर औषधियों का विक्रय न हो एवं आम जनता को उचित मूल्य पर औषधियों उपलब्ध हो सके, साथ ही औषधि विक्रय संस्थान द्वारा बेची जाने वाली ऐसी औषधियों जिनका दुरूपयोग नशे के रूप में हो सकता है ऐसी औषधियों की बिक्री को और प्रभावी रूप से नियंत्रित किये जाने के संबंध में आदेश जारी किये गए थे, एवं औषधि निरीक्षको को निरिक्षण कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया था की किसी फार्मेसी/ केमिस्ट शॉप / मेडिकल स्टोर के द्वारा बिना प्रिस्क्रिप्शन के शेडयूल H, H1 एवं X में दी गई औषधियों का विक्रय न किया जाये।  निजी चिकित्सालयों/ नर्सिंग होम परित्तर में संचालित औषधि विक्रय संस्थानों के मालिक, कर्मचारी, स्टॉफ द्वारा अथवा चिकित्सालयों के स्टॉफ द्वारा मरीजों को अथवा मरीजों के परिजन को उनके ही औषधि विक्रय संस्थान से ही औषधि क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं किया जाय।  रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टीशनर के पर्चे के बिना यदि शेडयूल H, H1 एवं X का विक्रय न किया जाये एवं आम जनता हेतु औषधि विक्रय संस्थान द्वारा प्रमुख स्थान पर इस आशय को प्रदर्शित किया जाये कि ऐसी औषधियों जो शेडयूल H, H1 एवं X में आती है उन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेचा जाय। इन्होने क्या कहा —-? लेकिन रायसेन जिले के औषधि निरीक्षक “अजीत जैन” इस आदेश की धज्जियां उड़ाते दिख रहे है “सहारा समाचार” टीम के द्वारा फ़ोन पर बात करने पर औषधि निरीक्षक अजीत जैन ने लगभग 24 घंटे बाद 5-6 कॉल करने पर हमारी टीम का फ़ोन उठाया एवं जानकारी देने से मना कर दिया और कहा की में इस सम्बन्ध में आप से कोई बात नहीं कर सकता।   हमारे संवाददाता ने रायसेन क्षेत्र में जाकर जानकारी इकठा करने की कोशिश की तो पता चला की यहाँ पर किसी भी प्रकार की कोई कारवाही नहीं की गयी। इस से यह स्पष्ठ होता है की रायसेन के औषधि निरीक्षक इस आदेश को गंभीरता से नहीं ले रहे है आसपास के जिलों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल संस्थानों पर शेडयूल H, H1 एवं X के चेतावनी का विज्ञापन प्रदर्शित देखा गया है।

कोलकाता की घटना के बाद मध्य प्रदेश प्रशासन सख्त, सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों का पता लगाया जाएगा बैकग्राउंड

Madhya Pradesh administration strict after Kolkata incident, background of government hospital employees will be ascertained

Madhya Pradesh administration strict after Kolkata incident, background of government hospital employees will be ascertained भोपाल। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत की घटना के बाद मप्र में भी स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतलों की सुरक्षा- व्यवस्था पुख्ता करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकारी अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों की कुंडली जांची जाएगी। स्वास्थ्य आयुक्त ने सरकारी अस्पताल के सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी सहित अन्य कर्मचारियों के बैकग्राउंड की जांच के आदेश दिए हैं। इससे यह पता चल जाएगा कि अस्पतालों में काम करने वालों में से कोई किसी आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है। इसके अलावा सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की जानकारी उपलब्ध करवाएं। इससे अस्पताल में सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता हो सकेगी। क्योंकि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में महिला डॉक्टर दिन-रात ड्यूटी करती हैं। हमीदिया हो या फिर जेपी अस्पताल, इनमें डाक्टर एक साथ ड्यूटी रूम साझा करने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि यहां पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए अलग-अलग कमरे नहीं हैं।जेपी अस्पताल में कमरों के दरवाजे टूटे, कैमरा भी नहींराजधानी के मॉडल जिला अस्पताल जेपी में बने ड्यूटी रूम में कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। कमरों के दरवाजे भी टूटे हुए हैं। कई बार कोई गार्ड भी ड्यूटी पर नहीं होता है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार मेडिसिन विभाग में 15 ड्यूटी डाक्टर हैं और एक समय में 10 से अधिक ड्यूटी पर रहते हैं, लेकिन यहां सिर्फ एक सामान्य ड्यूटी रूम हैं, जो काफी छोटे हैं। शौचालय की स्थिति खराब है, टूटे हुए बिस्तर हैं और वेंटिलेशन के लिए कोई जगह नहीं है। कई बिस्तरों पर तो सिर्फ सामान ही रखा जा रहा है।शिकायत के बावजूद सुनवाई नहींचिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय ने बताया कि डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ। अस्पताल में डॉक्टरों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कोई भी घूमते हुए किसी भी वार्ड में घुस सकता है।डॉ. राकेश मालवीय के अनुसार, बड़ी संख्या में स्वजन और कई असामाजिक तत्व बिना किसी जांच के गलियारों में बैठे रहते हैं। इतना ही नहीं मरीजों के स्वजन द्वारा दुर्व्यवहार के समय भी मौके पर गार्ड नहीं होता है, हमें उसे ढूंढना पड़ता है। सुरक्षा बढ़ाने और CCTV की जांच के निर्देश

उप स्वास्थ्य केन्द्र की बिल्डिंग निर्माण सामग्री में गुणवत्ता की कमी

Lack of quality in building construction material of Sub Health Center कटनी । ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण करा रही है ताकि ग्रामीणों को एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा महिया कराई जा सके । परंतु निर्माणधीन ठेकेदार अपनी जेब भरने के लिए गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग कर बिल्डिंग का निर्माण कर रहे हैं हम बात कर रहे कटनी जिले की रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की ग्राम उमरिया में जहां उपस्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कार्य किया जा रहा है । ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीणों क आरोप है कि ठेकेदार द्वारा मनमानी पूर्वक बिल्डिंग में कच्चा मटेरियल व डस्ट की जुढ़ाई की जा रही है और आज तक इसमें पानी की तराई नहीं की गई । जिसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी परंतु यहां देखने आज तक कोई नहीं पहुंचा अब देखना यह होगा की जिम्मेदार विभाग इस पर क्या कार्यवाही करता है

मुरैना जिला अस्पताल में आग लगने से मचा हड़कंप।

There was a stir due to fire in Morena District Hospital संतोष सिंह तोमर मुरैना। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भीषण आग लग गई जिसके चलते पूरे वार्ड में अफरा तफरी फैल गई और अस्पताल परिसर में भगदड़ मच गई। बताया गया कि यह आग शॉर्ट सर्किट के चलते हुए लगी है । फटाफट इस वार्ड से नवजात बच्चों को और प्रसूति महिलाओं को दूसरे वार्ड में तत्काल प्रभाव से शिफ्ट किया गया । जैसे ही घटना की सूचना पुलिस और प्रशासन को मिली तो मुरैना के अपर कलेक्टर और पुलिसअफसर मौके पर पहुंचे । अस्पताल के अग्नि शमक यंत्र से कर्मचारियों के द्वारा आज पर काबू पाया गया मौके पर दमकल विभाग की दो गाड़ी पहुंची। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जिला चिकित्सालय में हमारा बच्चा भर्ती था यहां न तो कोई सायरन बजा न कुछ प्रशासन की लापरवाही इतनी है कि आग लग गई हमारा बच्चा दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया है और प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा है। वहीं सीएमएचओ का कहना है कि बिजली का जो फॉल्ट हुआ है उसकी हम जांच करवा रहे है और उसे दिखवा रहे है। उन्होंने बताया कि वार्ड में 47 बच्चे थे अब उनको दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है । सारे बच्चे सुरक्षित है जिनको ऑक्सीजन की जरूरत है उनको प्रदाय की जा रही है और जिनको उपचार की जरूरत है उनको भी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई करने मैं प्रशासन सुस्त

Civil hospital in-charge unable to take action against quacks झोलाछाप डॉक्टरों पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी प्रभारी दोनों ही मेहरबान जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहे ऐसा लगता कहीं ना कहीं मोटी रकम दी जा रही है मलखान सिंह परमार अंबाह । झोलाछाप डॉक्टरों को प्रशासन का भय नहीं, बिना डिग्री के डाक्टरी और विना लायसेंस के मेडिकल स्टोर चला धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं, ऐसा एक मामला अंबाह पिनाहट रोड पर देखने को मिला है यहां डा पीयूष सेनी राज मार्केट में मौत का अस्पताल चला रहे हैं जब इसकी हमने जानकारी सिविल अस्पताल बीएमओ को दी तो उनका कहना लिखित में दो कार्रवाई करेंगे पर 19 10 2023 लिखित में दी गई उसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं की बिना डिग्री के मरीजों की चिकित्सा कर रहे हैं यही नहीं एक मेडिकल स्टोर भी बिना लायसेंस के वैखोफ संचालित कर रहे हैं ऐसे झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं जिस पर प्रशासन का भी कोई अंकुश नहीं है। यही बजय है कि लोग पैसे के लालच में लोगों के जीवन से खेल रहे हैं कई बार झोलाछाप डॉक्टरों के उपचार से भोले भाले ग्रामीण मरीज अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं।समय रहते ऐसे गैरकानूनी काम करने वाले लोगों पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो झोलाछाप डॉक्टर एक बीमारी की तरह पूरे शहर को नष्ट-भुष्ट कर देंगे और प्रशासन को अवगत होने के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा क्या चक्कर है सिविल अस्पताल से नोटिस जारी होते हैं पर कार्यवाही नहीं होती

कोरोना के JN.1 वेरिएंट ने भारत में मचाया कोहराम, 24 घंटे में 5 लोगों की मौत, 529 नए मामले

The JN.1 variant of the coronavirus has caused havoc in India, with 5 deaths and 529 new cases reported in the last 24 hours. नई दिल्ली ! भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। भारत में कोरोना के नए वेरिएंट JN.I ने कोहराम मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 24 घंटे के भीतर कोविड के 529 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 5 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली में भी JN.1 का पहला मामला सामने आया है। दरअसल, JN.] वेरिएंट दिल्ली से लेकर भारत के 9 राज्यों में फैला हुआ है। वहीं महाराष्ट्र में तीन महीने में पहली बार कोविड-19 से मौत की खबर सामने आई है। वहीं 4,093 मरीज इलाज करा रहे है। रिपोर्ट के अनुसार JN.1 वेरिएंट गुजरात, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में पाया गया है। एक्सपर्ट के अनुसार, JN.1 के लक्षण हल्के हैं। इसलिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, JN.1 वेरिएंट में म्यूटेशन होता है। 24 घंटे में सामने आए 529 नए मामले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में 24 घंटों में कोविड-19 के 529 मामले और 5 मौतें दर्ज की गईं हैं। वहीं कोविड का JN.] वेरिएंट का पहला केस 8 दिसंबर को केरल में पाया गया था। इसके बाद यह 9 राज्यों में फैल गया। इसके साथ ही नई दिल्ली में JN.1 वेरिएंट का पहला मामला मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत में बुधवार सुबह 8 बजे तक 24 घंटे में 529 नए मामले दर्ज किए गए। अब तक कोविड के कारण 5 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं बुधवार को 87 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अब तक JN.1 के कुल 110 मामलों की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में JN.1 के सबसे अधिक 36 मामले हैं। इसके बाद कर्नाटक में 34, गोवा में 14, महाराष्ट्र में 9, केरल में 6, राजस्थान में 4, तमिलनाडु में 4, तेलंगाना में 2 और दिल्ली में एक मामले सामने आए है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि मामले बढ़ रहे हैं लेकिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कम पड़ रही है क्योंकि अधिकतर मामलों में हल्के लक्षण है।

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर, पर्चे में दवाओं के नाम कैपिटल लेटर्स में लिखना होगा.

Doctors at Hamidia Hospital will need to write the names of medicines in capital letters on prescriptions. हमीदिया अस्पताल में फरमान, पर्ची की जांच भी होगी भोपाल। अब डॉक्टरों की घसीटा राइटिंग से किसी मरीज को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर परिचय में दावों के नाम कैपिटल लेटर्स में ही लिखेंगे। यही नहीं, जिन परचों में जो में घसीटा राइटिंग होगी उन्हें मान्य नहीं किया जाएगा। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक ने इस संबंध में अस्पताल के सभी एचओडी को आदेश जारी कर इसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि दवाओं के नाम स्पष्ट व बड़े अक्षरों में लिखें, जिससे मेडिकल स्टोर में कार्यरत फार्मासिस्ट व दूसरे कर्मचारियों को आसानी से दवा का नाम समझ सकें। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने पहले भी दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में लिखने का फरमान जारी किया था। हालांकि यह फरमान पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। हमीदिया अस्पताल भोपाल के अधीक्षक डा. आशीष गोहिया ने बताया कि हम मॉनिटरिंग भी करेंगे हमीदिया के सभी विभागों में एचओडी को जेनेरिक दवाएं और बड़े अक्षरों में लिखने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद हम इसे लेकर मानिटरिंग भी करेंगे। एमसीआई ने पूर्व में इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। लेकिन पालन नहीं किया जाता था। घसीटा राइटिंग से होता है कन्फ्यूजनडॉक्टरों की रेटिंग के कारण कई बार मेडिकल स्टोर में दवाओं के नाम पर कंफ्यूजन होता है। कई बार मरीजों को गलत दवा मिल जाती है। मरीजों को परेशानी से बचने के लिए कैपिटल लेटर में दवा का नाम लिखने को कहा है। यही नहीं चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं या नहीं, इसकी मानीटरिंग भी की जाएगी। सभी विभागों की ओपीडी पर्ची की जांच की जाएगी, ताकि कैपिटल लेटर में लिखने को बढ़ावा दिया जा सके। केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिखते हैं चिकित्सक :चिकित्सकों को मरीजों के लिए केवल जेनेरिक दवा लिखने का फरमान जारी किया गया है। मानीटरिंग में यह बात सामने आई कि डाक्टर मरीजों की परची में केवल 40 फीसदी जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। बाकी ब्रांडेड दवाओं के नाम सामने आ रहे है । अस्पताल प्रबंधन ने सभी विभाग के चिकित्सकों को जेनेरिक दवा लिखने के निर्देश दिए हैं।ऐसे जारी होते रहे आदेश

फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन, 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए- Central Drugs Standard Control Organisation.

According to the Central Drugs Standard Control Organisation, the combination of Chlorpheniramine Maleate and Phenylephrine should not be administered to children under 4 years of age in a fixed-dose combination. Manish Trivedi, Sahara Samachaar. नई दिल्ली ! सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के इस हफ़्ते लिए गए फ़ैसले के अनुसार फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का इस्तेमाल करने पर दवा कंपनियों को दवा के लेबल पर लिखना होगा कि “एफडीसी का उपयोग 4 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दिया जाना चाहिए ! सरकार का यह फ़ैसला कुछ महीने पहले कई देशों में कफ़ सीरप पीने से 100 से अधिक बच्चों की मौत होने के बाद आया है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि बच्चों के लिए एक अस्वीकृत सर्दी-रोधी दवा फॉर्मूलेशन के प्रमोशन को लेकर चिंता जताई गई थी. अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एफडीसी का इस्तेमाल न करने की सिफारिश की गई. नियामक के आदेश के अनुसार, फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन (एफडीसी) का उपयोग करने पर दवा कंपनियों को अपने उत्पादों पर चेतावनी के साथ लेबल लगाने की ज़रूरत होगी. फिक्स्ड-ड्रग कॉम्बिनेशन में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन शामिल होते हैं. इसका उपयोग अक्सर सर्दी जुकाम के इलाज के लिए सिरप या गोलियों में किया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पांच साल से छोटे बच्चों में खांसी और सर्दी के इलाज के लिए बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप या अन्य दवाई के उपयोग की सिफ़ारिश नहीं करता.

अब नहीं सोना पड़ेगा बेंच पर, जेपी अस्पताल में बनेगा रैन बसेरा.

A Renbaseara will be built in J P Hospital. प्रस्ताव तैयार, परिसर में मंदिर के पास की जगह तय भोपाल। जेपी अस्पताल शहर का तीसरा सरकारी अस्पताल है, जहां रैन बसरे की सुविधा होगी। अब तक हमीदिया अस्पताल व एम्स में दूर दराज से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था थी। प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना जेपी में 60 से 80 मरीज भर्ती होते हैं। अस्पताल में वार्ड में एक मरीज के साथ एक परिजन के ही रुकने की अनुमति होती है। जिसके कारण रात में कई परिजन फर्श व बेंच पर सोते नजर आते हैं। ठंड के मौसम इसके चलते वे भी बीमार हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रैन बसेरा बनाने का फैसला लिया गया है। परिसर में मौजूद हनुमान मंदिर के रैन बसेरा बनाना तय किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। नई व्यवस्था का परिजनों को ठंड से बचाने के लिए अलाव जलाया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी, जब तक शीतलहर का प्रकोप रहेगा। जेपी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में रूकने वाले परिजनों की सुविधा के लिए रैन बसेरा बनाया जाएगा। जमीन का चयन कर प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही रैन बसेरा तैयार किया जाएगा।

11793 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई, पहले दिन 68% टारगेट पूरा किया.

11,793 children were administered polio medicine, achieving 68% of the target on the first day. सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार विदिशा.विदिशा/गंज बासोदा, रविवार से मध्य प्रदेश के 16 जिलों में राज्यस्तरीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हुई । जिला स्वास्थ्य प्राधिकृतियां इस अभियान के तहत लगभग 36 लाख, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा हैं। जिलों को उनकी संक्रामक संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर चयनित किया गया है. इसी अभियान के तहत विदिशा के गंज बासोदा ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाया गया. जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई, यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है जिसमें गंज बासोदा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 17756 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा। जिसमें से पहले दिन 11793 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक गंज बासोदा ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी गंज बासोदा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ प्रमोद कुमार दीवान ने बताया है 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही शहर के अधिकांश जगहों पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की जीरो से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

12244 बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाई.

Administered polio medicine to 12,244 children सीताराम कुशवाहा, सहारा समाचार, विदिशाविदिशा! ग्यारसपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्यारसपुर के सरपंच राजू कुशवाहा एवं स्वास्थ्य विभाग के सुपरवाइजर गणेशराम विश्वकर्मा के द्वारा जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई यह अभियान 10 दिसंबर से 12 दिसंबर तक चलाया जा रहा है! जिसमें ग्यारसपुर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 16432 बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा है। जिसमें से पहले दिन 12244 बच्चों को दवाई पिलाई गई । तीन दिन तक ग्यारसपुर ब्लॉक में सभी गांव में बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी ग्यारसपुर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सुनीता नागाचे ने बताया कि 169 केंद्र ग्यारसपुर ब्लॉक में बनाए गए हैं! जहां पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवाई पिलाई जाएगी । वही बस स्टैंड पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई जिससे की बसों में आने जाने वाले 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दवाई पिलाई जा सके ।

जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की लापरवाही का सिलसिला जारी, कार्यवाही के नाम पर रस्म अदायगी, प्रसूता की हुई मौत.

The saga of doctors’ negligence continues at the district hospital, with formalities being carried out in the name of disciplinary action, leading to the unfortunate death of a pregnant woman. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी। जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय बिगड़ती जा रही हैं ऐसे डॉक्टर है जो स्वयं के क्लीनिक चला रहे हैं जिला अस्पताल में दो दिन बाद फिर एक बार डॉ की लापरवाही से प्रसूता की मौत लागतार डॉक्टरों की लापरवाही से प्रस्तुओ की मौत होने का सिलसिला थम ही नही रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ जांच का अस्वाशन देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है लेकिन आज तक किसी पर ठोस कार्यबाही नही होने के कारण लापरबाही का रवैया अपनाते हुए डॉक्टर अपने प्राइवेट डिस्पेंसरी में लगे रहते है जानकारी के अनुसार बताया गया है कि विजयराघवगढ़ से आयी प्रसूता की इलाज दौरान मौत विजयराघवगढ़ से आई शालिनी तिवारी पति राजू तिवारी 28 वर्ष कारितलाई निवाशी कल विजयराघवगढ़ में कल शाम 8 बजे स्वास्थ केन्द्र में प्रसव हुआ जिसमें लड़का हुआ था महिला की हालत गम्भीर होने के कारण जिला अस्पताल कटनी रेफर किया गया था जहाँ पर महिला को किसी भी डॉक्टर ने नही देखा रात में डॉक्टर सुनीता वर्मा को अस्पताल से कॉल गया था आधे घण्टे करते करते सुबह 5 बजा दिया, फिर परिजनों को कही ओर ले जाने की सलाह स्टाफ द्वारा दी गयी। जहाँ परिजन शारदा हॉस्पिटल ले गए लेकिन से भी बोल दिया गया था कि जबलपुर ले जाओ लेकिन महिला की मौत हो गयी परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया कि इलाज में बेपरवाही की गई जिससे प्रसूता की मौत हो गयी गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही चौधरी परिवार की एक महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था जिससे उसके परिवारजनो ने लापरवाही का आरोप लगाया था.

108 एम्बुलेंस के लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की गई जान.

Chhindwara; Sahara Samachaar; Health Department;

Negligence of 108 ambulances led to the death of a newborn child चन्द्रदीप गगन तेकामछिंन्दवाडा, जिले के पतालकोट में जननी 108 की लापरवाही के चलते नवजात बच्चे की गई जान लापरवाही की भेंट चढ़ा मासूम मामला ग्राम गैलडुब्बा का बताया जा रहा रहा यहां निवासी श्याम कुमारी पति ब्रजलाल उईके को प्रसव पीड़ा के चलते जननी 108 एम्बुलेंस की राह देखते देखते घर पर ही डिलेवरी होने से बच्चे की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही मौत हो गई अगर समय रहते महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तामिया लाया गया होता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी लेकिन 108वाहन ना मिलने से एक नौ निहाल बच्चे की जान नहीं बची छिंदी में ना तो डाक्टर ना उचित स्वास्थ्य व्यवस्था फिर भी नेता मंत्री बड़े बड़े वादे करने से पीछे नहीं है आखिर कब होगी स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त फिलहाल कहना मुश्किल है।

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