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अमरनाथ यात्रा के लिए इस वर्ष नहीं उड़ेंगे हेलीकॉप्टर, सुरक्षा कारणों से नो-फ्लाइंग जोन घोषित

भोपाल  बाबा बर्फानी की पवित्र अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) 3 जुलाई से शुरू हो रही है, यह अगस्त तक चलेगी। इस बार यह यात्रा 38 दिनों तक चलेगी। अमरनाथ यात्रा के पूरे मार्ग को श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड ने एक जुलाई से 10 अगस्त तक नो फ्लाइंग जोन घोषित कर दिया है। ऐसे में पारंपरिक बालटाल और पहलगाम ट्रैक पर यात्रियों के लिए हेलिकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी।  तीर्थयात्रियों को पवित्र गुफा तक या तो पैदल जाना होगा या फिर टट्टू या पालकी से पहुंचना होगा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है, लेकिन इससे तीर्थयात्रियों की संख्या पर असर पड़ सकता है। बड़ी संख्या में यात्री हेलिकॉप्टर से पवित्र गुफा तक जाते हैं। इनमें बीमार, बुजुर्ग, दिव्यांग भी शामिल होते हैं। ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में ऐसे यात्री हैं, जो हेलिकॉप्टर सेवा के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। बता दें कि 3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा में हेलिकॉप्टर सेवाएं बंद करने के पीछे आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया गया है. लेकिन सुरक्षा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आतंकी हेलिकॉप्टरों को निशाना बना सकते थे. इसलिए सरकार को यह फैसला लेना पड़ा हैं. वैसे कारण चाहे जो भी हों, इस निर्णय का असर व्यापक और गहरा पड़ा है. इसने कश्मीर को एक बार फिर डर के साये में जीने को मजबूर कर दिया हैं. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पूरे देश में कश्मीर की नकारात्मक छवि बनेगी. उन्होंने दुख प्रकट करते हुए कहा कि बैसरन हमले के बाद कश्मीरियों ने दो महीने तक कड़ी मेहनत कर हालात सामान्य किए थे. लेकिन एक फैसले ने सब पर पानी फेर दिया. श्राइन बोर्ड के इस फैसले से उन हजारों श्रद्धालुओं में भी रोष है जो हेलिकॉप्टर से यात्रा करने की योजना बना रहे थे. खासकर ऐसे श्रद्धालु जो उबड़-खाबड़ और पहाड़ी रास्तों में चल पाने में असमर्थ हैं . कई यात्रियों को अब यह संदेह सताने लगा है कि क्या सचमुच में अमरनाथ यात्रा करना पूरी तरह सुरक्षित होगा. इस बार जिस तरह सुरक्षा प्रबंधों को लेकर शोर मचा हुआ है. उससे यह आभास होता है कि कोई बड़ा खतरा वाकई यात्रा पर मंडरा रहा है. ऐसे में यात्रा करने से तो डर तो मन मे बना ही रहेगा. बताते चलें कि बाबा अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरु हो रही है जो 38 दिन की होगी और रक्षा बंधन वाले दिन 9 अगस्त को संपन्न होगी। पहलगाम व बालटाल रूट से हेलीकॉप्टर सेवा हर साल से चलती आ रही थी। दोनों तरफ के रूट के लिए आनलाइन बुकिंग होती थी और अलग अलग किराया निर्धारित होता था। नो फ्लाइंग जोन घोषित होने से हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं करवाने का फैसला किया गया है।

केदारनाथ घाटी में हेलीकॉप्‍टर सेवाएं फिर बहाल, नियमों का उल्‍लंघन करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

केदारनाथ: केदारनाथ घाटी में एक बार फिर से हेलीकॉप्‍टर सेवाएं शुरू कर दी गई हैं. रविवार को केदारनाथ में श्रद्धालुओं को लेकर जा रहा एक हेलीकॉप्‍टर क्रैश हो गया था. जिसके बाद हेलीकॉप्‍टर सेवाएं बंद कर दी गई थी. इस दर्दनाक हादसे में आर्यन एवियेशन प्राइवेट लिमिटेड के हेलीकॉप्टर में सवार सभी सातों लोगों की मौके पर ही मृत्यु हो गयी थी. बता दें केदारनाथ घाटी में  लगातार कई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई हैं, जो कई तरह के सवाल खड़े कर रही है. पिछले 14 सालों में 13 हादसों में 41 लोगों की जान गई है.  केदारनाथ धाम में बड़ी हेली दुर्घटनाएं     25 जून, 2013, एमआई-17 हेलिकॉप्टर गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त, 21 जवानों की मौत     28 जून 2013 केदारनाथ से दो किमी आगे गरुड़चट्टी में हेलिकॉप्टर क्रैश, 3 की मौत     18 अक्तूबर 2022 को केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा गरूडचटटी के पास पहाड़ी से टकराने से हेलीकप्टर क्रैश, 7 की मौत,     15 जून 2025 केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा हेली गौरी माई खर्क के पास क्रैश, सात की मौत रविवार की घटना के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्चाधिकारियों के साथ एक बैठक की थी तथा हेलीकॉप्टर हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने के अलावा हेली उड़ानों के बेहतर समन्वय के लिए ‘कमांड एवं कोऑर्डिनेशन सेंटर’ स्थापित करने के भी निर्देश दिए थे. बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था कि सोमवार तक चार धाम के लिए हेली सेवा पूर्ण रूप से बंद रहेगी. उन्होंने कहा था, ‘‘चार धाम में सेवा दे रहे सभी हेली ऑपरेटर एवं पायलटों के उच्च हिमालय क्षेत्रों में उड़ान अनुभवों की जांच होगी एवं सभी हेली ऑपरेटर के साथ बैठक के बाद ही हेली सेवा को शुरू किया जाएगा.”उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) की सीईओ सोनिका ने इस संबंध में जानकारी साझा की. यहां बता दें कि रविवार को केदारनाथ घाटी में एक निजी हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद पांच श्रद्धालुओं सहित सात लोगों की मौत हो गई थी. उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं को तत्काल से दो दिनों के लिए निलंबित कर दिया था. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए और हेली उड़ानों के बेहतर समन्वय के लिए ‘कमांड एंड कोऑर्डिनेशन सेंटर’ स्थापित करने का निर्देश दिया. UCADA की सीईओ सोनिका ने बताया कि हेलीकॉप्टर सेवाएं अब डीजीसीए की गाइडलाइन के अनुसार संचालित होंगी. सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी हेली ऑपरेटरों और पायलटों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उड़ान अनुभवों की जांच की जाएगी.  नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. लगातार निगरानी भी की जाएगी. मौसम को देखते हुए ही उड़ान भरने पर फैसला लेने के निर्देश हैं. शीएम धामी ने क्या कहा था? वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा हमारी प्राथमिकता है. हेलीकॉप्टर सेवाएं अब सुचारू रूप से चल रही हैं और हम यात्रियों की सुगम यात्रा के लिए प्रतिबद्ध हैं. उत्तराखंड में लगातार हेलिकॉप्टर हादसों में लोगों की मौत पर सोमवार को हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस भेजकर जवाब माँगा है. कोर्ट ने ये भी पूछा क्या एजेंसियां नियमों का पालन कर रहीं हैं. बीते दो महीने में अलग-अलग हुए हेलिकॉप्टर हादसों में 13 लोगों की जान चली गयी है अब तक. रविवार के हादसे के बाद सरकार और एजेंसियों पर बड़े सवाल उठ रहे थे.

बीच सड़क पर हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग: केदारनाथ धाम के लिए भरी थी उड़ान, सूझबूझ से बची यात्रियों की जान

रुद्रप्रयाग रुद्रप्रयाग जनपद के बडासू क्षेत्र में केदारनाथ के लिए जा रहा एक हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के चलते अचानक सड़क पर लैंड हुआ। हेलिकॉप्टर श्रद्धालुओं को लेकर केदारनाथ धाम की ओर जा रहा था, लेकिन रास्ते में आपात स्थिति के कारण पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को बडासू के पास सुरक्षित सड़क पर उतारा। स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। क्रिस्टल एविएशन कंपनी का हेली बताया जा रहा है। हेलिकॉप्टर ने बड़ासु हेलीपैड से केदारनाथ के लिए उड़ान भरी थी और टेकऑफ होते ही इमरजेंसी लैंडिंग सड़क पर करनी पड़ी। हेलिकॉप्टर में पांच यात्री, पायलट और सह पायलट सवार थे। सह पायलट को हल्की चोट की सूचना है। सीईओ यूकाडा सोनिका ने जानकारी दी कि क्रिस्टल एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के हेलिकॉप्टर ने यात्रियों को लेकर सिरसी से उड़ान भरते समय हेलीपैड के अलावा सड़क पर एहतियातन लैंडिंग की।किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। डीजीसीए को सूचित कर दिया गया है बाकी शटर ऑपरेशन तय कार्यक्रम के अनुसार सामान्य चल रहे हैं। यात्रियों में मची अफरा-तफरी, लेकिन कोई घायल नहीं हेलीकॉप्टर के अचानक नीचे उतरने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में हलचल मच गई। लेकिन जल्द ही राहत की सांस ली गई जब यह स्पष्ट हुआ कि कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ है। हेलीकॉप्टर में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें पायलट समेत छह यात्री थे। सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मौके पर पहुंची प्रशासन और तकनीकी टीम हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और हवाई सुरक्षा संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। हेलीपैड से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया ताकि हेलीकॉप्टर की जांच की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि तकनीकी खराबी की वजह क्या थी। फिलहाल हेलीकॉप्टर को उड़ान के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया है और उसे सड़क मार्ग से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कौन-कौन था हेलिकॉप्टर में? हेलिकॉप्टर में 5 यात्री, 1 पायलट और 1 सह पायलट सवार थे। सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन सह पायलट को मामूली चोटें आई हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। इस घटना की जानकारी डीजीसीए (DGCA) को भी दे दी गई है। क्या बाकी हेलिकॉप्टर सेवाएं चालू हैं? यूकाडा (UCADA) की सीईओ सोनिका ने बताया कि बाकी सभी हेलिकॉप्टर सेवाएं तय समय पर सामान्य रूप से जारी हैं। ये लैंडिंग सिर्फ एहतियात के तौर पर की गई थी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पिछले माह भी हुआ था हेलिकॉप्टर हादसा पिछले महीने भी केदारनाथ धाम में लैंडिंग के समय हेली एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेली एंबुलेंस ऋषिकेश एम्स का था, जोकि ऋषिकेश से केदारनाथ जा रहा था। वहीं बीते आठ मई को ही गंगोत्री धाम जा रहा एक हेलिकॉप्टर गंगनानी के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस घटना में पांच महिलाओं समेत छह लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। गंगनानी का हेलिकॉप्टर हादसा बहुत भयावह था। वहां पर खोज-बचाव अभियान चला रहे अधिकारी कर्मचारियों ने बताया कि घटना में हेलिकॉप्टर के भी दो टुकड़े हो गए थे। वहीं दो शव हेलिकॉप्टर में ही फंस गए थे। उन्हें निकालने के लिए हेली को काटना पड़ा था। वहीं करीब 200 मीटर गहरी खाई में रेस्क्यू अभियान चलाना बहुत मुश्किल था।    

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर चार लोगों को दिया जीवनदान, जयपुर में हेलिकॉप्टर से पहली बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट

जयपुर/झालावाड़। राजस्थान में अंगदान के क्षेत्र में नया इतिहास रचा गया जब एक ब्रेनडेड युवक के अंगों को हेलिकॉप्टर के जरिए ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाया गया। यह घटना उन मरीजों के लिए जीवनदायिनी बनी, जो वर्षों से ऑर्गन ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे थे। झालावाड़ जिले के पीपाजी निवासी विष्णु (33) को 10 दिसंबर को झगड़े के बाद गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया। विष्णु के परिवार ने 13 दिसंबर को साहसिक कदम उठाते हुए ऑर्गन डोनेशन की सहमति दी। इसके बाद जयपुर और जोधपुर में जरूरतमंद मरीजों के लिए अंगों को विशेष हेलिकॉप्टर के जरिए ट्रांसपोर्ट किया गया। रविवार सुबह करीब 11:30 बजे, झालावाड़ से हेलिकॉप्टर ने ऑर्गन लेकर उड़ान भरी और कुछ समय बाद जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में लैंडिंग की। ऑर्गन को दो विशेष बॉक्सों में रखा गया था, जिसमें से एक जयपुर के लिए और दूसरा जोधपुर के लिए भेजा गया। “ग्रीन कॉरिडोर” की मदद से जयपुर हॉस्पिटल तक ऑर्गन ट्रांसपोर्ट जयपुर में हार्ट और लंग्स को तत्काल एसएमएस हॉस्पिटल तक पहुंचाया गया, जहां मरीजों की सर्जरी के लिए पहले से तैयारी की जा चुकी थी। हेलिकॉप्टर की रिफ्यूलिंग के बाद, दूसरा बॉक्स लेकर हेलिकॉप्टर ने जोधपुर एम्स के लिए उड़ान भरी और दोपहर 12:45 बजे स्पोर्ट्स ग्राउंड में लैंडिंग की। जयपुर में 2 मरीजों को जीवनदान हार्ट और लंग्स ट्रांसप्लांट: जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में एक मरीज को हार्ट और लंग्स ट्रांसप्लांट किया जाएगा। यह ऑपरेशन करीब 12 घंटे चलेगा, जिसमें ट्रांसप्लांट टीम, एनेस्थीसिया एक्सपर्ट, नर्सिंग स्टाफ और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की 25 सदस्यीय टीम शामिल होगी। किडनी ट्रांसप्लांट: जयपुर के एसएसबी सुपर स्पेशलिस्ट बिल्डिंग में एक अन्य मरीज को किडनी का प्रत्यारोपण किया जाएगा। जोधपुर में 2 अंगों का प्रत्यारोपण लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट: जोधपुर एम्स में एक मरीज को लिवर और एक अन्य मरीज को किडनी प्रत्यारोपित की जाएगी। सर्जरी की तैयारी पहले से की जा चुकी थी और इस ऑपरेशन में भी करीब 12 घंटे का समय लगेगा। परिवार की मिसाल : 4 लोगों को मिला नया जीवन विष्णु के परिवार का यह निर्णय 4 जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदान साबित हुआ। यह घटना न केवल मेडिकल फील्ड के लिए मील का पत्थर है बल्कि समाज को अंगदान के प्रति जागरूक भी करती है। विशेषज्ञों की राय : एसएमएस मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स के अनुसार, “अंगों को सुरक्षित समय पर ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल एक क्रांतिकारी कदम है। इससे ट्रांसप्लांट की सफलता दर और मरीजों की रिकवरी बेहतर होती है।” झालावाड़ से जयपुर और जोधपुर तक जीवन की इस उड़ान ने दिखा दिया कि सही समय पर सही फैसले से असंभव को संभव बनाया जा सकता है। विष्णु के परिवार का यह महान कदम आने वाले समय में अन्य परिवारों को भी अंगदान के लिए प्रेरित करेगा।

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