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आतंकवाद का केंद्र बने पाकिस्तान, सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक सुधार नहीं होगा

संयुक्त राष्ट्र   भारत ने दोहराया है कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक “आतंक का वैश्विक केंद्र” पाकिस्तान अपने तरीकों में सुधार नहीं करता। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने गुरुवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को “संधियों की पवित्रता बनाए रखने की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक जिम्मेदार उच्च जलधारा वाला राज्य रहा है लेकिन जिम्मेदारी दोतरफ़ा रास्ता है। पाकिस्तान को अपनी राज्य नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करना पूरी तरह से छोड़ना होगा।” हरीश का यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को ऐसा प्रस्तुत किया मानो वह हताहत पक्ष हो, जबकि कार्यक्रम का विषय था सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित करना, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) से जुड़ा है। हरिश ने कहा, “भारत ने इस संधि पर 1960 में सद्भाव और मित्रता की भावना में हस्ताक्षर किए लेकिन पाकिस्तान ने इस भावना का उल्लंघन करते हुए भारत पर तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमले किए।” उन्होंने कहा, “दसियों हजार निर्दोष भारतीय पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमलों के शिकार बने।” पिछले साल द रेजिस्टेंस फ्रंट द्वारा पहलगाम में धर्म आधारित आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी सहनशीलता और उदारता ने पाकिस्तान के तरीकों को नहीं बदला। अंततः हमें घोषणा करनी पड़ी कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान, जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, सभी प्रकार के आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता।” उन्होंने कहा कि तकनीकी, जनसांख्यिकीय और पारिस्थितिक बदलावों के कारण पिछले 65 वर्षों में क्षेत्र में मौलिक बदलाव हुए हैं, जिसके लिए पाकिस्तान चर्चा करने से इंकार करता रहा। उन्होंने कहा, “संधि में संशोधन पर पाकिस्तान के साथ हमारी सभी कोशिशें ठुकरा दी गईं।” कार्यक्रम के विषय पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस रविवार को पड़ रहा है और भारत ने सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सार्वभौमिक पहुंच के सतत विकास लक्ष्य को उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत ग्रामीण घरों में पाइप से पीने के पानी की आपूर्ति कर दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक को लागू कर रहा है।” 2019 में शुरू हुए इस मिशन ने अब तक ग्रामीण घरों के 81.76 प्रतिशत घरों (कुल 1.58 करोड़) तक सुरक्षित नल का पानी पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है, जिसमें गांव जल समितियां, जिनमें से कई महिलाओं द्वारा नेतृत्व की जाती हैं, स्थानीय जल प्रणालियों की योजना, निगरानी और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।” उन्होंने जोड़ा, “संयुक्त राष्ट्र में हमारे सामूहिक प्रयास तब सबसे प्रभावी होंगे जब वे ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित हों जो हमें जोड़ते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना, विशेष रूप से विकासशील देशों में, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाना।”

भारत का व्यापारिक घाटा फरवरी में घटकर 27.1 अरब डॉलर, दर्ज की गई गिरावट

नई दिल्ली  भारत का वस्तु व्यापारिक घाटा फरवरी में कम होकर 27.1 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पिछले महीने 34.68 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई। बीते महीने देश का वस्तु निर्यात बढ़कर 36.61 अरब डॉलर हो गया है, जो कि जनवरी में 36.56 अरब डॉलर था। वहीं, आयात कम होकर 63.71 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पहले 71.24 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का वस्तु निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में 402.93 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 395.66 अरब डॉलर था। यह समीक्षा अवधि में सालाना आधार पर 1.84 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था और जिसके चलते मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हो गया है। इसी जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है।  जलडमरूमध्य के बंद होने से मध्य पूर्व के देशों को चावल जैसी वस्तुओं के भारत के निर्यात पर भी असर पड़ा है। पहले, भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 50 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था, लेकिन अब इसमें विविधता आ गई है और इसका एक बड़ा हिस्सा रूस से आ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 आपूर्तिकर्ता देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाने से वैश्विक ऊर्जा संकटों का सामना करने की देश की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। इस लचीलेपन के कारण ईरान युद्ध से उत्पन्न व्यवधान के बावजूद भारत में कोई ऊर्जा संकट नहीं आया है, क्योंकि सरकार आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को संभाल रही है। जहाज और बंदरगाह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, भारत ईरान के साथ भी सीधे संपर्क में है ताकि उसके व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल सके। भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से लगभग 80,800 मीट्रिक टन मुरबान कच्चे तेल के साथ सुरक्षित रूप भारत के लिए रवाना हुआ। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। बयान में आगे कहा गया कि इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और वर्तमान में भारत की ओर रवाना हैं। इनके सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाले हैं।

नौसेना की कमान में कोई LPG कमी नहीं, होर्मुज से धड़ाधड़ निकलेंगे भारत के जहाज

नई दिल्ली/तेहरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने भी समुद्र में अपनी तैयारी तेज कर दी है. खबर है कि भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत फारस की खाड़ी के पास तैनात हैं और भारत की ओर आने वाले व्यापारी जहाजों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार रखे गए हैं. यानी हालात चाहे जितने तनावपूर्ण हों, भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर कोई ढील नहीं देना चाहता. न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी थी. यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान ने भारत के लिए राहत भरा संदेश दिया है. ईरानी अधिकारियों ने भारत की ओर आ रहे दो भारतीय झंडे वाले LPG जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है. ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण लगातार इन जहाजों पर खतरा बना है। शिवालिक जहाज कब पहुंचेगा भारत? इनमें से एक जहाज शिवालिक बताया जा रहा है, जो जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली साइट के मुताबिक ओमान की खाड़ी में दिखा था और 21 मार्च तक अपने गंतव्य पर पहुंच सकता है. इससे साफ है कि भारी तनाव के बावजूद भारत की ओर से समुद्री हितों को लेकर अलग तरह की संवेदनशीलता दिखाई जा रही है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू कहीं ज्यादा गंभीर है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है, जहां से हर दिन दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बन सकती है। फारस की खाड़ी में भारत के कितने जहाज मौजूद? केंद्रीय पोत, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी की मौजूदा स्थिति और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर जानकारी दी थी. मंत्रालय के मुताबिक इस समय फारस की खाड़ी में 24 भारतीय झंडे वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं. इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक भी मौजूद हैं. यानी कुल मिलाकर बड़ी संख्या में भारतीय समुद्री कर्मी इस संवेदनशील क्षेत्र में सक्रिय हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से निकलेंगे भारतीय जहाज इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत की ओर आने वाले जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा. उन्होंने भारत और ईरान की पुरानी दोस्ती और साझा हितों का जिक्र करते हुए भरोसा दिलाया कि भारतीय जहाजों के लिए रास्ता खुला रहेगा. इस बयान ने भारत के लिए कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन क्षेत्र की हालत ऐसी है कि भरोसे के साथ-साथ चौकन्नापन भी जरूरी है. वहीं ईरानी विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पूरी दुनिया के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए नहीं।

ईरान का करारा तंज, अमेरिका ने पहले आंख दिखाई और अब भारत से रूसी तेल खरीदने की गुहार लगाई

नई दिल्ली ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को रूसी तेल पर अमेरिकी रुख की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब भारत सहित दुनिया भर के देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है, जबकि पहले अमेरिका ने ही इस तरह के आयात को रोकने के लिए कई देशों पर भारी दबाव डाला था। ‘एक्स’ पर अमेरिका को घेरा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए अराघची ने लिखा- अमेरिका ने भारत को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाने में महीनों लगा दिए। लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्ध के बाद, अब वाइट हाउस भारत सहित पूरी दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है। यूरोपीय देशों की भी की कड़ी आलोचना ईरानी विदेश मंत्री ने ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने के लिए यूरोपीय देशों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय देशों को लगा था कि इसके बदले में उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिलेगा। अराघची ने तंज कसते हुए कहा- यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन मिल जाएगा। यह बहुत ही दयनीय है। भारत के जहाजों को ईरान ने दी सुरक्षित निकासी एक तरफ जहां पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष जारी है, वहीं इस बीच ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दो भारतीय झंडे वाले तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) वाहक जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस के शिपिंग डेटा का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने यह भी बताया कि सऊदी अरब का तेल ले जाने वाले एक कच्चे तेल के टैंकर के शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है। यह जहाज 1 मार्च के आसपास हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरा था। ‘भारत हमारा मित्र है, हमारी नियति एक है’ इससे पहले, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। उन्होंने इसके पीछे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती और साझा हितों का हवाला दिया था। जब फथली से पूछा गया कि क्या वैश्विक ऊर्जा व्यापार के इस सबसे महत्वपूर्ण मार्ग से ईरान भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने देगा, तो उन्होंने जवाब दिया: हां। क्योंकि भारत और हम दोस्त हैं। हम मानते हैं कि ईरान और भारत मित्र हैं। हमारे समान हित हैं; हमारी एक साझा नियति है। उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी संबंधों पर जोर देते हुए आगे कहा- भारत के लोगों की पीड़ा हमारी पीड़ा है और इसके विपरीत हमारी पीड़ा उनकी है। इसी कारण से भारत सरकार हमारी मदद करती है, और हमें भी भारत सरकार की मदद करनी चाहिए क्योंकि हमारा भाग्य और हित एक समान हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरेंगे भारतीय जहाज, जयशंकर और अराघची के बीच हुई महत्वपूर्ण चर्चा

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध) के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है. सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है. ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि विदेश मंत्री ने ईरान के अराघची से बात के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है. दोनों देशों के विदेश मंत्री की बातचीत का उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखना था, जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। रूस और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी की बात सूत्रों ने ये भी बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी तालमेल बिठाया. उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की. इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना था.भारत की इस सक्रिय विदेश नीति ने ये साबित कर दिया है कि तनाव के वक्त में भी वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने में सक्षम है। USA-यूरोप और इजरायल पर जारी रहेगा प्रतिबंध ईरान ने यह विशेष रियायत भारत को ऐसे वक्त में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। भारत को छूट देते हुए ईरान ने ये भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेंगे, लेकिन भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सकेंगे. ये भारत की कूटनीतिक सफलता है, क्योंकि वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का ट्रैफिक 90% तक कम हो गया है और कई देशों के टैंकर फंस गए हैं।

तारिक रहमान की पहल: भारत के साथ बेहतर रिश्तों के लिए बांग्लादेश के इंटेलिजेंस चीफ को दिल्ली भेजा

नई दिल्ली बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं। देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख ने भारत का एक उच्च-स्तरीय दौरा किया। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद से किसी शीर्ष अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के नवनियुक्त DGFI महानिदेशक मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को एक निजी रात्रिभोज के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की। आपको बता दें कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। भारत की प्राथमिकता नई सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए तारिक रहमान सरकार अब भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। आपको बता दें कि 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख युवा नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में सिर में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हो गई थी। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। इन्हें शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात बनगांव से पकड़ा गया। बांग्लादेश सरकार ने गिरफ्तार व्यक्तियों तक ‘काउंसुलर एक्सेस’ मांगी है ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में पत्रकारों से कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी। उन्होंने कहा, “हमने कोलकाता स्थित अपने मिशन के माध्यम से आरोपियों तक पहुंच मांगी है। चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच बंदियों के हस्तांतरण की संधि मौजूद है, इसलिए हम आरोपियों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयास करेंगे। हमें इस मामले में भारत से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।” सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी के हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।

चीन से शिफ्ट हो रहा उत्पादन, भारत में 2025 में 5.5 करोड़ आईफोन बने

नई दिल्ली Apple ने पिछले साल भारत में iPhone का प्रोडक्शन लगभग 53% बढ़ा दिया था। अब कंपनी अपने खास डिवाइस का एक-चौथाई हिस्सा देश में ही बनाती है। इससे पता चल रहा है कि चीन पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए ऐपल भारत में अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी ने 2025 में भारत में लगभग 55 मिलियन (5.5 करोड़) iPhone असेंबल किए थे। यह संख्या 2024 से काफी ज्यादा है। एक साल पहले यानी 2024 में कंपनी ने 36 मिलियन यानी लगभग 3.6 करोड़ आईफोन असेंबल किए थे। 2025 में असेंबल किए 5.5 करोड़ आईफोन  रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सोर्स ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर जानकारी दी है कि 2025 में भारत में 55 मिलियन (5.5 करोड़) आईफोन असेंबल किए गए। बता दें कि अभी ये डेटा रिलीज नहीं किया गया है। इस कारण सोर्स ने अपना नाम छिपाने के लिए कहा। Apple दुनिया भर में हर साल लगभग 220 से 230 मिलियन (22 करोड़ से 23 करोड़) iPhone बनाती है। इस संख्या में भारत की हिस्सेदारी साल दर साल बढ़ती जा रही है। भारत में आईफोन के प्रोडक्शन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव’ से बढ़ावा मिला है। इसका मकसद भारत को ‘दुनिया की फैक्ट्री’ बनाना है। आईफोन के नए मॉडल भी भारत में हो रहे असेंबल Apple फिलहाल अपने लेटेस्ट iPhone 17 लाइनअप के सभी वर्जन भारत में असेंबल करता है, जिसमें हाई-एंड Pro और Pro Max मॉडल भी शामिल हैं। भारत में इसके सप्लायर Foxconn Technology Group, Tata Electronics और Pegatron Corp हैं। लोकल मार्केट में बिक्री और एक्सपोर्ट के लिए iPhone 15 और iPhone 16 जैसे पुराने मॉडल भी भारत में असेंबल होते हैं। आगे आने वाले समय में कंपनी अपने और भी मॉडल भारत में असेंबल कर सकती है और यहां अपना प्रोडक्शन और भी बढ़ा सकती है। ज्यादा टैरिफ बना चीन के लिए मुसीबत चीन में ऐपल अभी भी अपने ज्यादा आईफोन बनाता है। इसके बाद भी 2025 में कंपनी को चीन से होने वाली शिपमेंट में काफी मुश्किलें आईं थी। इसका कारण अमेरिका और चीन के बीच चल रहे टैरिफ विवाद था। इस वजह से ऐपल और उसके सप्लायर्स को अमेरिकी बाजार के लिए बनने वाले ज्यादातर डिवाइसों का उत्पादन चीन से हटाकर दूसरी जगहों पर ले जाना पड़ा। इस बीच ऐपल के लिए भारत एक सही और आसान ऑप्शन के रूप में सामने आया और कंपनी ने यहां अपना प्रोडक्शन बढ़ा दिया। हालांकि, Apple के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

समुद्र में भारत की गुप्त ढाल: पनडुब्बियों का नेटवर्क, चीन-पाकिस्तान बेबस

नई दिल्ली भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है। भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी तट पर समंदर के पास पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है, जिससे भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन अपनी हद पार करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसमें हर तरह की पनडुब्बियां शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है। वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है। आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे। NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है। दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे। फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं। भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी। भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।

टी20 वर्ल्ड कप में भारत बनाम न्यूजीलैंड: आंकड़े बताते हैं टीम इंडिया की मुश्किलें

अहमदाबाद टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मुकाबला रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा। इस बड़े मैच से पहले एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जो भारतीय टीम की चिंता बढ़ा सकता है। दरअसल, टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। अब तक दोनों टीमों के बीच खेले गए तीनों मुकाबलों में भारत को हार का सामना करना पड़ा है। टी20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 का रिकॉर्ड टी20 विश्व कप इतिहास में भारत और न्यूजीलैंड के बीच अब तक तीन मुकाबले खेले गए हैं और इन सभी में कीवी टीम ने जीत दर्ज की है। यही वजह है कि फाइनल से पहले यह आंकड़ा भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय बन गया है। करीब पांच साल बाद दोनों टीमें टी20 वर्ल्ड कप में आमने-सामने होंगी और भारतीय टीम के पास इस बार अपने पुराने रिकॉर्ड को बदलने का सुनहरा मौका है। 2021 में हुआ था आखिरी मुकाबला टी20 वर्ल्ड कप में भारत और न्यूजीलैंड के बीच आखिरी मैच 2021 में दुबई में खेला गया था। उस समय टीम इंडिया की कप्तानी विराट कोहली के हाथों में थी और उस मुकाबले में भारत को 8 विकेट से हार झेलनी पड़ी थी। हालांकि, पिछले पांच सालों में दोनों टीमों में काफी बदलाव आ चुका है। उस मैच में भारत की ओर से खेलने वाले खिलाड़ियों में से सिर्फ चार खिलाड़ी ही मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं। ये खिलाड़ी हैं: ईशान किशन, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती। बाकी खिलाड़ी या तो इस फॉर्मेट से संन्यास ले चुके हैं या फिर टीम से बाहर हो चुके हैं। 2021 मैच में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन 2021 के मुकाबले में इन चार खिलाड़ियों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। ईशान किशन – 4 रन हार्दिक पांड्या – 24 गेंद में 23 रन वरुण चक्रवर्ती – कोई विकेट नहीं जसप्रीत बुमराह – 2 विकेट हालांकि मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है। मौजूदा टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में भारतीय खिलाड़ी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम के कई खिलाड़ी बेहतरीन फॉर्म में नजर आ रहे हैं। ईशान किशन ने बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन किया है। जसप्रीत बुमराह ने गेंदबाजी में कमाल किया है और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उनकी गेंदबाजी जीत की सबसे बड़ी वजह रही। हार्दिक पांड्या ने ऑलराउंडर के रूप में शानदार योगदान दिया है। वरुण चक्रवर्ती का फॉर्म थोड़ा गिरा है, लेकिन वे वापसी करने की क्षमता रखते हैं। इतिहास बदलने का मौका ऐसे में भारतीय टीम के पास फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में पहली जीत दर्ज करने का सुनहरा मौका है। अगर भारत यह मुकाबला जीतता है तो न सिर्फ वह अपने खराब रिकॉर्ड को सुधार लेगा, बल्कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब भी अपने नाम कर सकता है। कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुआई में टीम इंडिया के पास इतिहास रचने और पुराने घावों को भरने का बड़ा मौका है।  

ईरान के शाहेद ड्रोन से अधिक खतरनाक और एडवांस हथियार बना चुका है भारत

 नई दिल्ली ईरान के सस्ते शाहेद-136 ड्रोन और अमेरिका के नए LUCAS ड्रोन ने युद्ध में कम कीमत पर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इन ड्रोनों से दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस को भारी संख्या में हमला करके चकमा दिया जा सकता है. इसी तरह भारत भी अपना जवाब तैयार कर चुका है। बेंगलुरु की कंपनी न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज (NRT) ने शेषनाग-150 नाम का लंबी दूरी का स्वार्म अटैक ड्रोन बनाया है. यह ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी है. विकास परीक्षण में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह ड्रोन पहली बार करीब एक साल पहले उड़ा था. अब ऑपरेशन सिंदूर जैसी हाल की घटनाओं के बाद इसकी जरूरत और ज्यादा तेज हो गई है। शेषनाग-150 ड्रोन क्या है और इसकी खासियतें शेषनाग-150 एक लंबी दूरी का लॉयटरिंग मुनिशन है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर घूम सकता है. निगरानी कर सकता है. फिर हमला कर सकता है. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है. यह 5 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है. इसमें 25 से 40 किलोग्राम का वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो इमारतों, वाहनों, रडार या सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. यह ड्रोन स्वार्म अटैक कर सकता है, यानी कई ड्रोन साथ मिलकर हमला करते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करके तोड़ा जा सकता है. ड्रोन खुद लक्ष्य ढूंढता है, ट्रैक करता है और हमला करता है. यह GPS बंद होने पर भी काम कर सकता है क्योंकि इसमें विजुअल नेविगेशन सिस्टम है, जो कैमरे से रास्ता देखता है। स्वार्म टेक्नोलॉजी और मदर-कोड की ताकत शेषनाग-150 का असली राज उसका स्वदेशी मदर-कोड है. यह एक खास सॉफ्टवेयर है जो कई ड्रोनों को एक साथ कंट्रोल करता है. ड्रोन आपस में बात करते हैं, खुद प्लान बनाते हैं और हमला करते हैं. अगर एक ड्रोन खराब हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं. यह कोड ड्रोन को बहुत स्मार्ट बनाता है।  दुनिया में ऐसे स्वार्म ड्रोन कम हैं. भारत का यह सिस्टम ईरान के शाहेद से आगे है क्योंकि इसमें ज्यादा एडवांस्ड स्वार्म और GPS-डिनाइड नेविगेशन है. कंपनी ने इसे मॉड्यूलर बनाया है, यानी भविष्य में आसानी से बदलाव किए जा सकते हैं। क्यों अब यह ड्रोन इतना जरूरी हो गया पिछले कुछ सालों में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में संघर्ष और हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन कितने खतरनाक हैं. पाकिस्तान ने सैकड़ों सस्ते ड्रोन से भारत की एयर डिफेंस को थका देने की कोशिश की. लेकिन भारत ने कम लेकिन ज्यादा प्रभावी ड्रोन और लॉयटरिंग मुनिशन से पाकिस्तान के रडार और एयर डिफेंस को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में NRT की कंपनी ने अपनी अन्य ड्रोन क्षमताएं दीं, जिससे शेषनाग-150 पर फोकस बढ़ गया. अब भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए यह ड्रोन बहुत महत्वपूर्ण है. यह सस्ता, ज्यादा संख्या में बनाया जा सकता है. दुश्मन के महंगे सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकता है। भविष्य में क्या होगा शेषनाग-150 अभी विकास और परीक्षण के दौर में है. हाल में वर्ल्ड डिफेंस शो में इसका मॉडल दिखाया गया. कंपनी इसे सेना को पेश कर रही है. अगर यह सफल हुआ तो भारत की ड्रोन युद्ध क्षमता बहुत मजबूत हो जाएगी।

ईरान जंग से सीखा सबक, कुवैत में अमेरिकी फाइटर जेट जैसी गलती न हो, इसलिए भारत तैयार कर रहा तीनों सेनाओं का नया कमांड

नई दिल्ली भारत अब अपनी सेनाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. लंबे समय से मांग हो रही संयुक्त थिएटर कमांड (Joint Theatre Commands) को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. यह सुधार सेना, नौसेना और वायुसेना को एक साथ मिलाकर एकीकृत कमान बनाने का काम करेगा. यानी तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही कमांडर के अधीन काम करेंगी. यह बदलाव भारत की सैन्य ताकत को बहुत बढ़ाएगा और दुश्मन के सामने बेहतर तैयारी करेगा। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से सबक लेते हुए भारत तैयार हो रहा मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से भारत ने बहुत कुछ सीखा है. इस युद्ध में हवाई हमलों और ड्रोन-मिसाइलों की संख्या बहुत ज्यादा है. ऐसे में भारत अपनी हवाई रक्षा और कमांड सिस्टम को मजबूत कर रहा है. इसी क्रम में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) विकसित किया जा रहा है. यह सिस्टम ग्राउंड रडार, हवाई चेतावनी विमान (AEW&C) और फाइटर जेट्स से आने वाले डेटा को एक जगह इकट्ठा करेगा और पूरी हवाई स्थिति का एक साफ नक्शा दिखाएगा। ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने क्या कहा पूर्व फाइटर पायलट और वायुसेना के पूर्व प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने इंडिया टुडे को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अब ईरान युद्ध – भारत हर बदलती स्थिति से सीख रहा है. खासकर एयर डिफेंस के मामले में तीनों सेनाओं के लिए एक ही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से ही कई सिस्टम मौजूद हैं लेकिन अब उन्हें और एकीकृत किया जा रहा है ताकि कोई गलती न हो। IACCS क्या है और यह कैसे काम करेगा IACCS एक बहुत उन्नत और ऑटोमेटिक कमांड-कंट्रोल नेटवर्क है. यह भारत के लिए एक संयुक्त हवाई रक्षा कवच (एयर डिफेंस शील्ड) बनाएगा. इस सिस्टम से…     खतरे की तुरंत पहचान होगी।     दुश्मन के हवाई हमले को जल्दी नाकाम किया जा सकेगा.     फ्रेंडली फायर (अपनी ही सेना पर गलती से हमला) की घटनाएं रुकेंगी. ईरान युद्ध में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स की क्रैश जैसी घटनाओं से बचने के लिए ही यह सिस्टम बनाया जा रहा है. IACCS आर्मी के अकाशतीर सिस्टम से भी जुड़ेगा ताकि तीनों सेनाओं में पूरी तरह तालमेल रहे। कौन बना रहा है और कब तैयार होगा? यह सिस्टम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) बना रहा है. BEL भारत की सबसे बड़ी डिफेंस कंपनी है जो रडार और कमांड सिस्टम में माहिर है. IACCS को 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है. एक बार यह काम कर गया तो भारतीय वायुसेना (IAF) किसी भी हवाई खतरे का बहुत तेज और प्रभावी जवाब दे सकेगी। संयुक्त थिएटर कमांड और IACCS का बड़ा फायदा संयुक्त थिएटर कमांड से भारत की सेनाएं अब क्षेत्रीय आधार पर काम करेंगी. जैसे उत्तरी थिएटर में चीन के खिलाफ, पश्चिमी थिएटर में पाकिस्तान के खिलाफ – एक ही कमांडर तीनों सेनाओं को नियंत्रित करेगा. IACCS इस कमांड को हवाई हिस्से में और मजबूत बनाएगा. इससे…     फैसले तेज होंगे.       संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा.       दुश्मन के सामने एकजुट ताकत दिखेगी.     यह सुधार भारत को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रहा है जहां हवाई, जमीन और समुद्री ताकत एक साथ काम करती है। भविष्य में क्या होगा भारत की सेनाएं अब दुनिया के बड़े युद्धों से सीख रही हैं. अपनी कमजोरियों को दूर कर रही हैं. IACCS और संयुक्त थिएटर कमांड जैसे कदम भारत को न सिर्फ मजबूत बनाएंगे बल्कि पड़ोसी देशों को भी संदेश देंगे कि भारत की रक्षा व्यवस्था अब बहुत उन्नत हो गई है. 2026 तक IACCS चालू होने पर भारत की हवाई सुरक्षा दुनिया की सबसे बेहतरीन में शुमार हो जाएगी।  

39 साल बाद सेमीफाइनल भिड़ंत: भारत-इंग्लैंड, पिछली बार टीम इंडिया की जीत और कप्तान कौन था?

मुंबई  मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम भारतीय क्रिकेट के लिए सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि यादों और जज्बातों का सबसे बड़ा रंगमंच है. यही वह जगह है जहां कभी विश्व कप की सबसे बड़ी खुशी मिली, तो कभी दिल तोड़ देने वाली हार भी. अब एक बार फिर वही स्टेडियम इतिहास के नए मोड़ का गवाह बनने जा रहा है. टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे. मुकाबला सिर्फ फाइनल की टिकट का नहीं है, बल्कि इतिहास के अधूरे हिसाब को बराबर करने का भी है। लगभग चार दशक पहले इसी वानखेड़े में इंग्लैंड ने भारत को विश्व कप से बाहर कर दिया था. अब उसी मैदान पर भारतीय टीम के पास उस पुरानी टीस को मिटाने का मौका है. अगर भारत यह मैच जीतता है तो फाइनल में उसका सामना न्यूजीलैंड से होगा। वानखेड़े: जहां जश्न भी मिला, दर्द भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में वानखेड़े स्टेडियम का एक अलग ही स्थान है. 2011 के वनडे विश्व कप का वह ऐतिहासिक पल आज भी हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के दिल में बसता है, जब महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का लगाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया था और गौतम गंभीर की 97 रन की जुझारू पारी ने जीत की नींव रखी थी. लेकिन यही मैदान दर्द की कहानियों से भी भरा हुआ है. 1987 के विश्व कप सेमीफाइनल में कपिल देव की टीम यहां इंग्लैंड से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी. इसके बाद 2016 के टी20 विश्व कप सेमीफाइनल में भारत को वेस्टइंडीज के हाथों हार का सामना करना पड़ा. इसलिए जब भी भारत वानखेड़े में बड़ा मुकाबला खेलता है, तो यह सिर्फ क्रिकेट नहीं बल्कि भावनाओं की लड़ाई भी बन जाती है। क्‍या 2022 की हार ने बदला भारतीय टी20 क्रिकेट? भारत और इंग्लैंड की टी20 विश्व कप में भिड़ंत कोई नई बात नहीं है. लेकिन 2022 का सेमीफाइनल भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे दर्दनाक यादों में से एक बन गया. उस मैच में भारत ने 168 रन बनाए थे, लेकिन इंग्लैंड ने बिना कोई विकेट गंवाए लक्ष्य हासिल कर लिया था. जोस बटलर और एलेक्स हेल्स की ओपनिंग जोड़ी ने भारतीय गेंदबाजी को पूरी तरह बेअसर कर दिया था. उस हार ने भारतीय टीम को झकझोर दिया. इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने यह महसूस किया कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ टिककर खेलने से काम नहीं चलेगा. खेल का तरीका बदलना पड़ेगा। क्‍या काम आएगी भारत की आक्रामक रणनीति? 2022 के बाद भारतीय टीम ने अपनी टी20 रणनीति पूरी तरह बदल दी. अब बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक खेलने लगे. रन गति बढ़ाने पर जोर दिया गया और जोखिम लेने से डरना बंद किया गया. आज 2026 में यही रणनीति भारत की पहचान बन चुकी है. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने आक्रामक और निडर क्रिकेट को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. अगर भारत इस सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराता है तो यह सिर्फ जीत नहीं होगी, बल्कि उस नई सोच की भी जीत होगी जिसने भारतीय टी20 क्रिकेट को बदल दिया। भारत बनाम इंग्लैंड: क्‍या कहते हैं आंकड़े? टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक 29 मैच खेले गए हैं. इनमें भारत ने 17 मुकाबले जीते हैं जबकि इंग्लैंड ने 12 बार जीत दर्ज की है. टी20 विश्व कप की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक पांच मुकाबले हुए हैं, जिनमें भारत ने तीन बार जीत हासिल की है. वानखेड़े में भी दोनों टीमें दो बार भिड़ चुकी हैं. फरवरी 2025 में खेले गए मुकाबले में भारत ने इंग्लैंड को 150 रन से करारी शिकस्त दी थी. उस मैच में युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 54 गेंदों में 135 रन की तूफानी पारी खेली थी। कैसी है दोनों टीमों की फॉर्म? भारत ने सुपर 8 चरण में उतार-चढ़ाव भरा सफर तय किया. अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम दबाव में आ गई थी. लेकिन इसके बाद भारत ने जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल का टिकट पक्का किया. दूसरी ओर इंग्लैंड ने सुपर 8 में शानदार प्रदर्शन किया. श्रीलंका में खेले गए मुकाबलों में उन्होंने एक भी मैच नहीं गंवाया. कप्तान हैरी ब्रूक की अगुवाई में टीम ने धीमी पिचों पर भी शानदार संतुलन दिखाया। इस बार कैसी रहेगी वानखेड़े की पिच? इस टूर्नामेंट में वानखेड़े की पिच ने थोड़ा अलग व्यवहार किया है. पारंपरिक रूप से यह पिच तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है, लेकिन इस बार यहां बल्लेबाजों और स्पिनरों दोनों को मदद मिली है. भारत और अमेरिका के बीच खेले गए पहले मैच में भारतीय टीम को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था. शुरुआती विकेट गिरने के बाद सूर्यकुमार यादव की आक्रामक पारी की बदौलत भारत 161 रन तक पहुंच सका और 29 रन से मैच जीत लिया. मैदान की पिच पर हल्की घास भी छोड़ी गई है ताकि गेंद को अतिरिक्त उछाल मिल सके। क्या ओस बनेगी मैच का बड़ा फैक्टर? वानखेड़े में रात के मैचों में ओस हमेशा एक अहम भूमिका निभाती है. हालांकि इस टूर्नामेंट में अब तक सात मैचों में से चार में टीमों ने स्कोर का सफल बचाव किया है. लेकिन मुंबई की बढ़ती गर्मी को देखते हुए संभावना है कि सेमीफाइनल में ओस अहम भूमिका निभा सकती है. ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला कर सकती है। कौन जीतेगा सेमीफाइनल? दोनों टीमों के पास मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं. इंग्लैंड की बल्लेबाजी गहरी है और उनकी रणनीति बेहद आक्रामक रहती है. लेकिन भारत के पक्ष में कई फैक्‍टर हैं – घरेलू मैदान, दर्शकों का समर्थन और आक्रामक क्रिकेट का नया आत्मविश्वास. अगर भारतीय टीम दबाव में संयम बनाए रखती है तो उसके पास फाइनल में पहुंचने का सुनहरा मौका है।

डाउनलोड्स में नंबर-1 भारत, AI ऐप्स के इस्तेमाल में रिकॉर्ड के बावजूद एक कमी उजागर

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने के मामले में भारत सबसे आगे निकल रहा है। भारत में सबसे ज्यादा जेनरेटिव AI ऐप डाउनलोड किए जा रहे हैं। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टावर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में साल-दर-साल 207 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत जेनरेटिव AI ऐप डाउनलोड करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। देश में सबसे ज्यादा एआई ऐप और चैटबॉट डाउनलोड किए गए हैं। इससे देश को जेन-AI इस्तेमाल करने के मामले में अमेरिका से आगे निकलने में मदद मिली। भारत में डाउनलोड हुए सबसे ज्यादा एआई ऐप मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टावर की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जेनरेटिव एआई ऐप सबसे ज्यादा भारत में डाउनलोड किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में लगभग 20 प्रतिशत या हर 5 में से 1 जेनरेटिव AI ऐप भारत में डाउनलोड हुआ है। हालांकि, यह बड़ा यूजर बेस रेवेन्यू में नहीं बदलता है। 2025 में इन ऐप खरीदारी में भारतीय यूजर्स का हिस्सा सिर्फ लगभग 1 प्रतिशत रहा था। रेवन्यू में रह गया पीछे यह अंतर उन कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताता है जो तेजी से अपनाए जाने को लंबे सम तक बने रहने वाले रेवेन्यू में बदलने की कोशिश कर रही हैं। ऐप डाउनलोड की ग्रोथ भले ही साल-दर-साल 320 प्रतिशत बढ़ी हो, लेकिन रेवेन्यू की ग्रोथ अभी काफी पीछे है। नवंबर में इन-ऐप खरीदारी में 22 प्रतिशत और दिसंबर में 18 प्रतिशत की गिरावट आई है। फ्री ऑफर का दिखा असर डाउनलोड में यह उछाल प्रमोशनल पुश और DeepSeek, Grok, और Meta AI जैसे नए AI प्लेटफॉर्म के आने से आया है। साथ ही, इसका एक बड़ी कारण भारत में, Google द्वारा अपने AI Pro प्लान का एक साल का फ्री एक्सेस देने भी है। इतना ही नहीं, Perplexity ने Airtel के साथ मिलकर अपना Pro प्लान भारतीय यूजर्स के लिए फ्री किया था। OpenAI ने भी कुछ समय के लिए ChatGPT Go का एक साल का फ्री एक्सेस दिया है। कंपनियों द्वारा दिया जा रहा फ्री ऑफर्स का असर दिख रहा है। नवंबर में फ्री ChatGPT Go एक्सेस के लॉन्च के बाद, भारत में ChatGPT से होने वाला रेवेन्यू 33 प्रतिशत और दिसंबर में 32 प्रतिशत कम हो गया। हालांकि, OpenAI प्लेटफॉर्म ने अपना दबदबा बनाए रखा और भारत में जेनरेटिव AI इन-ऐप रेवेन्यू का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अपने पास रखा। पिछले हफ्ते भारत में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया गया। इसके दौरान भी AI पर काफी चर्चा हुई। कुछ समय पहले ही OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने बताया था कि भारत में चैटजीपीटी के हर हफ्ते 100 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर हैं। इससे भी साफ पता चलता है कि भारत में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यूजर्स एआई ऐप्स और चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत-इंग्लैंड का सेमीफाइनल रद्द होने पर कौन खेलेगा फाइनल? ICC के नियम से जानें

 मुंबई ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 का पहला सेमीफाइनल बुधवार (4 मार्च) को कोलकाता के ईडन गार्डन्स (Eden Gardens) में है. यहां साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड आमने-सामने होंगे.  वहीं दूसरा सेमीफाइनल गुरुवार (5 मार्च) को मुंबई के वानखेड़े स्टेड‍ियम में भारत और इंग्लैंड के बीच है.  ऐसे में तमाम क्रिकेट फैन्स के मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अगर ये दोनों मुकाबले बार‍िश की वजह से धुलते हैं तो क्या होगा. वेस्टइंडीज को सुपर 8 के अहम मुकाबले में हराकर भारतीय टीम ने अंतिम चार में जगह बनाई. सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम इंडिया अब फाइनल का टिकट पक्का करना चाहती है. इंग्लैंड ने अपने सुपर 8 ग्रुप में दमदार प्रदर्शन किया और तीनों मुकाबले जीतकर टॉप स्थान हासिल किया. दूसरी ओर भारत अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहा. टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. अगर भारत और इंग्लैंड के बीच मैच बारिश की वजह से रद्द हो जाता है, तो इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने एक रिजर्व डे रखा है.  अगर मैच में देरी होती है, तो अधिकारियों के पास गुरुवार को एक्स्ट्रा 90 मिनट और शुक्रवार को 120 मिनट का समय होगा ताकि कम से कम 5 ओवर का मैच हो सके.  अगर मैच रद्द हो जाता है, तो नतीजा सुपर 8 पॉइंट्स टेबल के आधार पर तय किया जाएगा.  पहले दिन पूरा कराने की कोशिश आईसीसी नियम 13.6 और 13.7 के तहत मैच 20-20 ओवर का होगा. अगर खेल के दौरान बारिश या रुकावट आती है तो अंपायर उपलब्ध अतिरिक्त समय का इस्तेमाल करेंगे और जरूरत पड़ी तो ओवर घटाए जाएंगे, ताकि उसी दिन नतीजा निकाला जा सके. सेमीफाइनल के तय दिन 90 मिनट का अतिरिक्त समय रखा गया है. हर टीम को कम से कम 10 ओवर खेलने का मौका मिलना जरूरी है ताकि नतीजा संभव हो सके. अगर तय कट-ऑफ समय तक न्यूनतम ओवर नहीं हो पाते, तो खेल रोककर रिजर्व डे पर शिफ्ट किया जाएगा. रिजर्व डे पर क्या होगा? रिजर्व डे पर 120 मिनट का अतिरिक्त समय उपलब्ध रहेगा. अगर मैच पहले दिन शुरू हो चुका था और बीच में रुका, तो मुकाबला वहीं से दोबारा शुरू होगा जहां आखिरी गेंद डाली गई थी. यानी स्कोर, ओवर और मैच की स्थिति जस की तस रहेगी. अगर पहले दिन टॉस हो चुका है और उसके बाद खेल नहीं हो पाया, तो टॉस दोबारा नहीं होगा. वही नतीजा और प्लेइंग इलेवन रिजर्व डे पर लागू रहेगी. ओवर कम हुए तो कैसे लागू होगा नियम? आईसीसी ने उदाहरण देकर साफ किया है कि अगर मैच 20 ओवर से घटाकर 17 ओवर प्रति पारी कर दिया गया और फिर खेल रुक गया, तो रिजर्व डे पर स्थिति के मुताबिक खेल जारी रहेगा. अगर एक भी गेंद दोबारा शुरू होने से पहले नहीं फेंकी गई थी, तो मुकाबला मूल 20 ओवर से (जरूरत पड़ने पर कटौती के साथ) जारी किया जा सकता है. दोनों दिन खेल नहीं हुआ तो? अगर सेमीफाइनल तय दिन और रिजर्व डे दोनों पर नहीं हो पाता, तो सुपर ओवर या टॉस से फैसला नहीं होगा. ऐसी स्थिति में सुपर 8 राउंड की अंक तालिका के आधार पर फैसला लिया जाएगा. अपने ग्रुप में टॉप रहने वाली टीम सीधे फाइनल में पहुंचेगी. यानी नियम साफ है, पहले दिन नतीजा निकालने की पूरी कोशिश, फिर रिजर्व डे, और अंत में ग्रुप स्टेज प्रदर्शन का महत्व. आईसीसी ने यह ढांचा इसलिए तय किया है ताकि नॉकआउट मुकाबलों में किसी तरह की असमंजस की स्थिति न बने. भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की टक्कर नई नहीं है. 2022 में इंग्लैंड ने भारत को हराकर खिताब अपने नाम किया था. वहीं 2024 में भारत ने सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराया और बाद में चैंपियन बना. अब 2026 में कौन किस पर भारी पड़ेगा, इसका जवाब 5 मार्च को मिलेगा.

भारत-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के नए ट्रायंगल का असर, जानें क्यों इसे गेमचेंजर माना जा रहा है

नई दिल्ली एक तरफ अमेरिका ट्रेड वॉर और भारी टैरिफ लगाकर अपनी अर्थव्यवस्था को समेट रहा है, तो दूसरी तरफ चीन ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के बाजार पर एकाधिकार जमाकर बैठा है. इस खींचतान के बीच, दुनिया को एक नए और सुरक्षित रास्ते की तलाश थी. इसी तलाश को पूरा करने और चीन-अमेरिका पर निर्भरता को जड़ से खत्म करने के लिए तीन बड़े देशों ने हाथ मिलाया है. भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने मिलकर एक नया और बेहद शक्तिशाली अलायंस बनाया गया है, जिसे ACITI यानी ऑस्‍ट्रेल‍िया, कनाडा, इंडिया टेक्‍नोलॉजी एंड इनोवेशन ट्रायंगल नाम द‍िया गया है. यह नया ट्रायंगल सिर्फ एक डील नहीं है, बल्कि इससे दुनिया की ग्रीन सप्लाई चेन का पूरा गेम बदलने वाला है |  आज की दुनिया में तरक्की का मतलब क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और विंड टर्बाइन है. इन सभी को बनाने के लिए लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिजों की जरूरत होती है.दिक्कत यह है कि इन खनिजों को निकालने और रिफाइन करने के बाजार पर चीन का लगभग पूरा कब्‍जा है. ग्रीन हाइड्रोजन बनाने वाले इलेक्ट्रोलाइजर की सप्लाई भी चीन ही कंट्रोल करता है. दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी नई नीतियों और टैरिफ से दुनिया भर के व्यापार को डरा दिया है. एक देश (चीन) पर पूरी तरह निर्भर रहना अब दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था. ACITI गठबंधन इसी सिंगल-कंट्री डिपेंडेंस को तोड़ने का अचूक हथियार है | कैसे काम करेगा यह नया ट्रायंगल?     यह गठबंधन तीन देशों की अलग-अलग ताकतों को मिलाकर एक सुपर-पावरफुल सप्लाई चेन बनाएगा. इस साझेदारी का फोकस मुख्य रूप से क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और लॉन्ग-टर्म आर्थिक सुरक्षा पर होगा |      ऑस्ट्रेलिया की ताकत: ऑस्ट्रेलिया दुनिया में लिथियम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यानी एक तरह से लीडर है. लिथियम वह मुख्य धातु है जिससे हर तरह की बैटरी बनती है |      कनाडा की ताकत: कनाडा के पास क्रिटिकल मिनरल्स का भारी भंडार है और वह ग्रीन टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए भारी फंड्स और नीतियां बना रहा है |      भारत की ताकत: भारत दुनिया का सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार है. भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट र‍िन्‍यूएबल एनर्जी पैदा करने का विशाल लक्ष्य रखा है. यानी भारत के पास इस नई तकनीक की सबसे ज्यादा डिमांड है |      जब ऑस्ट्रेलिया का कच्चा माल, कनाडा की तकनीक-पैसा और भारत का विशाल बाजार और मैन्युफैक्चरिंग स्केल एक साथ मिलेंगे, तो यह तिकड़ी चीन के एकाधिकार को सीधी और कड़ी टक्कर देगी |  सिर्फ मुनाफा नहीं, धरती को बचाना है लक्ष्‍य अक्सर ऐसे बड़े गठबंधन सिर्फ पैसा कमाने के लिए बनते हैं, लेकिन ACITI का नजरिया अलग है. इस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपना ध्यान सिर्फ स्मार्टफोन बनाने या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुलबुले में पैसा फूंकने पर न लगाएं. इस ट्रायंगल का असली लक्ष्य टेक-फॉर-गुड यानी भलाई के लिए तकनीक बनाना है. इसके तहत तीनों देश मिलकर काम करेंगे कि खनिजों का खनन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे हो. पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से लिथियम, कोबाल्ट और तांबे को दोबारा कैसे निकाला जाए. यह गठबंधन सर्कुलर इकॉनमी यानी जहां चीजें बर्बाद न हों, बल्कि बार-बार इस्तेमाल हों, उस पॉल‍िसी को बढ़ावा देगा |   

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