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भारत की बड़ी छलांग: अमेरिका के 206 अरब डॉलर बाजार में एंट्री, इन सेक्टरों पर होगी मेहरबानी

नई दिल्ली भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा मौका सामने आया है. लंबे समय से भारतीय किसान और फूड एक्सपोर्ट करने वाले अमेरिकी मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहते थे, और अब हालात उनके पक्ष में दिख रहे हैं. अमेरिका का कुल कृषि आयात बाजार करीब 206 अरब डॉलर का है, जो दुनिया के सबसे बड़े इम्पोर्ट मार्केट्स में गिना जाता है. नई ट्रेड व्यवस्था के तहत भारत को इस बड़े बाजार में एंट्री आसान होने जा रही है. कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स को पूरी तरह जीरो ड्यूटी पर एंट्री मिलेगी, जबकि कई अन्य सामानों पर पहले से कम टैरिफ देना होगा. इसका सीधा असर यह होगा कि भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में ज्यादा किफायती और कॉम्पिटिटिव हो जाएगा. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के 46 अरब डॉलर के एग्रीकल्चर इम्पोर्ट सेगमेंट में भारत को जीरो ड्यूटी का फायदा मिलेगा. इसमें मसाले, प्रोसेस्ड फूड, फल, चाय, कॉफी और एसेंशियल ऑयल जैसे अहम प्रोडक्ट शामिल हैं. इसके अलावा करीब 160 अरब डॉलर के बड़े हिस्से में भारतीय सामान 18 प्रतिशत की कम रेसिप्रोकल टैरिफ रेट पर जाएगा. यानी पहले जहां ज्यादा ड्यूटी लगती थी, अब वहां कम शुल्क लगेगा. इससे एक्सपोर्ट की लागत घटेगी और अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय प्रोडक्ट्स ज्यादा आकर्षक बनेंगे. भारत का होगा ट्रेड सरप्लस आंकड़े भी भारत के पक्ष में संकेत दे रहे हैं. साल 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 3.4 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात किए, जबकि आयात 2.1 अरब डॉलर का रहा. इस तरह भारत को करीब 1.3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर नई टैरिफ व्यवस्था सही समय पर लागू हो जाती है, तो यह सरप्लस और बढ़ सकता है. इसका फायदा सीधे किसानों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और एक्सपोर्ट कंपनियों को मिलेगा. यह जीरो ड्यूटी की सुविधा एक इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन होने के बाद लागू होगी, जिसकी संभावना मार्च के आसपास जताई जा रही है. वहीं 18 प्रतिशत की कम टैरिफ दर तब प्रभावी होगी, जब अमेरिका इस संबंध में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करेगा. उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकती है. यानी आने वाले कुछ महीनों में जमीन पर इसका असर दिखने लगेगा. मसालों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ अगर प्रोडक्ट कैटेगरी की बात करें तो मसालों के सबसे अधिक लाभ मिलने वाला है. अभी अमेरिका के कुल मसाला आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है, जिसकी वैल्यू लगभग 2.01 अरब डॉलर है. चाय और कॉफी की हिस्सेदारी फिलहाल 1 प्रतिशत से भी कम है, जबकि पूरा बाजार 9.38 अरब डॉलर का है. इसका मतलब है कि यहां ग्रोथ की बड़ी गुंजाइश मौजूद है. फलों में आम और केले जैसे प्रोडक्ट अमेरिका की कुल खरीद का सिर्फ 0.3 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. वहीं प्रोसेस्ड फलों का इम्पोर्ट लगभग 759 मिलियन डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 4.6 प्रतिशत है. साफ है कि सही रणनीति के साथ यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है. वनों वाले प्रोडक्ट्स जैसे बांस की कोपलें, वेजिटेबल वैक्स, नट्स और बीजवैक्स भी अलग-अलग सेगमेंट में 0.2 प्रतिशत से लेकर 38 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखते हैं. अब जब टैरिफ में राहत मिलेगी, तो इन प्रोडक्ट्स की डिमांड में इजाफा हो सकता है. खास तौर पर वे प्रोडक्ट्स, जिनकी क्वालिटी पहले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है, उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है. मरीन सेक्टर को भी मिलेगा फायदा 18 प्रतिशत की रेसिप्रोकल टैरिफ व्यवस्था से मरीन सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिल सकता है. खासकर झींगा जैसे उत्पाद, जिनका अमेरिकी इम्पोर्ट मार्केट करीब 25 अरब डॉलर का है. इसके अलावा बासमती और प्रीमियम चावल, तिल जैसे ऑयलसीड्स और कुछ खास फलों को भी इस रियायत का लाभ मिलेगा. अगर सप्लाई चेन मजबूत रही और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पूरे किए गए, तो भारत इस सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ सकता है. कुल मिलाकर यह कदम भारतीय एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है. लेकिन सिर्फ टैरिफ में छूट काफी नहीं होगी. सरकार और एक्सपोर्टर्स को क्वालिटी कंट्रोल, टाइमली सप्लाई, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी फोकस करना होगा. अगर इन पहलुओं पर गंभीरता से काम हुआ, तो आने वाले समय में अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी कई गुना बढ़ सकती है और इसका सीधा फायदा देश के किसानों और एग्री-बिजनेस से जुड़े लोगों को मिलेगा.

महाशक्तियों के बीच भारत से दोस्ती की होड़, चीन ने भी बढ़ाया दोस्ती का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में नया मोड़

महाशक्तियों में भारत से दोस्ती की होड़, अमेरिका के बाद अब चीन ने भी बढ़ाया हाथ भारत से दोस्ती का दौर तेज, अमेरिका के बाद चीन ने भी बढ़ाया मित्रता का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में U टर्न महाशक्तियों के बीच भारत से दोस्ती की होड़, चीन ने भी बढ़ाया दोस्ती का हाथ, वर्ल्ड डिप्लोमेसी में नया मोड़ नई दिल्ली  साल 2026 भारत की विदेश नीति के लिए एक नई सुबह लेकर आया है. जहां एक तरफ भारत को रोज धमक‍ियां देने वाले ट्रंप को भारत पर से टैर‍िफ हटाने के ल‍िए मजबूर होना पड़ा. वहीं, हिमालय के उस पार से भी शांति और मेल-मिलाप के संकेत मिल रहे हैं. भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग का रव‍िवार का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बीजिंग अब नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को शत्रुता के बजाय सहयोग के तराजू पर तौलने को मजबूर है. चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने एक्‍स पर ल‍िखा, चीन भारत के साथ मिलकर उस महत्वपूर्ण आम सहमति को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के लिए सहयोग के भागीदार और विकास के अवसर हैं. यह बयान पिछले कुछ वर्षों के कड़वे और तनावपूर्ण संबंधों के बाद एक बड़ी नरमी की ओर इशारा करता है. उन्होंने पारस्परिक लाभ के दायरे को और अधिक विस्तार देने की बात कही है. इसका सीधा अर्थ यह है कि दोनों देशों की आर्थिक रणनीतियों को एक दिशा में लाकर व्यापारिक और व्यावहारिक सहयोग को गहरा किया जाए. ब्रिक्स में भारत का साथ चीन ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत की भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है. बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत को स्वीकार करना चीन की कूटनीतिक विवशता और रणनीति दोनों का हिस्सा है. राजदूत ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है, ताकि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के करीब आ सकें. बीजिंग के इस हृदय परिवर्तन के पीछे की असली वजह आखिर चीन, जो कल तक सीमा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए था, आज दोस्ती की बात क्यों कर रहा है? इसके पीछे वजह है.     चीन की अपनी अर्थव्यवस्था इस समय मंदी और आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है. भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार को लंबे समय तक छोड़ना चीन के लिए आत्मघाती साबित हो रहा है. व्यापारिक घाटे और भारतीय कड़े रुख के कारण चीनी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है.     अमेरिका ने जिस तरह से भारत के साथ अपने रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया है, उसने चीन को बेचैन कर दिया है. हाल ही में भारत को शुल्कों में मिली छूट इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बन रहा है. चीन को डर है कि अगर वह अब भी अड़ा रहा, तो भारत पूरी तरह से पश्चिमी गुट के पाले में चला जाएगा.     रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से वैश्विक व्यवस्था बदली है, उसमें भारत एक ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनकर उभरा है. चीन जानता है कि एशिया की राजनीति में बिना भारत के सहयोग के वह अपनी धाक नहीं जमा सकता. भारत की गजब ड‍िप्‍लोमेसी चीन के इस शांति प्रस्ताव को भारत बड़े ही सतर्क नजरिए से देख रहा है. भारतीय विदेश नीति के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. इसल‍िए भारत बहुत सोच समझकर आगे बढ़ रहा है. 2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद भारत और चीन के बीच जो ‘विश्वास का संकट’ पैदा हुआ है, वह महज बयानों से दूर नहीं हो सकता. भारत का रुख साफ है क‍ि जब तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक व्यापार और संबंधों का सामान्य होना मुश्किल है. अमेरिका या चीन कौन बेहतर दोस्‍त भारत इस समय उस स्थिति में है जहां वह दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के साथ अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है. एक तरफ अमेरिका है जो भारत को रक्षा तकनीक दे रहा है, और दूसरी तरफ चीन है जो व्यापारिक लाभ का लालच दे रहा है. भारत की असली चुनौती इन दोनों के बीच अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बचाए रखने की है. राजदूत जू फेइहोंग का बयान निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन इसे जमीन पर उतरने में अभी समय लगेगा. 2026 की यह बदली हुई कूटनीति दिखाती है कि भारत अब किसी का ‘पिछलग्गू’ नहीं, बल्कि वह केंद्र है जिसके इर्द-गिर्द महाशक्तियों की नीतियां घूम रही हैं. वहीं भारत का लक्ष्य स्पष्ट है. साझेदारी में अवसर तो तलाशने हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की कीमत पर नहीं. चीन के साथ ‘सहयोग के दायरे’ को बढ़ाने से पहले पुरानी कड़वाहटों और सीमा विवादों का स्थायी समाधान जरूरी है.

PoK को भारत का हिस्सा मानने पर अमेरिका का बयान, शहबाज-मुनीर ने उठाया नक्शे का मुद्दा

वाशिंगटन  अमेरिका से पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली खबर आई है. अमेरिका और भारत ने ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी किया है. मगर इससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है. अब सवाल है कि आखिर अमेरिका ने ऐसा क्या किया कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की नींद उड़ जाएगी. दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके को भारत का हिस्सा माना है. वैसे भी पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके भारत का हिस्सा है. भारत शुरू से यह मानता है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा जमा रखा है. अब भारत की इस बात पर अमेरिका ने भी मुहर लगा दी है. अमेरिका ने जो नक्शा जारी किया है, वह साफ-साफ बता रहा है कि पाकिस्तान का कब्जा अवैध है और पीओके भारत का ही हिस्सा है. जी हां, अमेरिका ने एक ऐसा नक्शा जारी किया है जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव ने भारत-अमेरिका के नए अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट की जानकारी देते हुए जो नक्शा इस्तेमाल किया है, उसे देखकर शहबाज और मुनीर की छाती फट जाएगी. अमेरिका की ओर से जारी नक्शे में पूरा कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया गया है. इस नक्शे के मुताबिक, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी भारत में शामिल है. इस नक्शे में न कोई लाइन ऑफ कंट्रोल है और नकोई विवादित क्षेत्र. साफ-साफ सब कुछ भारत का दिखाया गया है. क्या हुआ नक्शे में दरअसल, यूएसटीआर यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अंतरिम फ्रेमवर्क से जुड़ा एक पोस्ट किया. इस पोस्ट में अमेरिकी उत्पादों (ट्री नट्स, ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, रेड सोरघम, फल आदि) के लिए भारत में नए बाजार खुलने की बात थी. अमेरिका ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘ट्री नट्स और सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन से लेकर लाल ज्वार और ताज़े और प्रोसेस्ड फलों तक, अमेरिका-भारत एग्रीमेंट अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए नए मार्केट एक्सेस देगा.’ मगर इस पोस्ट के साथ जारी नक्शे ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. अमेरिका ने यही नक्शा जारी किया है, जिसमें पीओके को भारत का हिस्सा माना गया है. अमेरिका का बड़ा संकेत अमेरिका की ओर से जारी यह नक्शा सिर्फ एक तस्वीर नहीं है.यह अमेरिका की सोच का बड़ा संकेत है. भारत हमेशा कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका भारत का अभिन्न अंग है. इसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी हैं. अब अमेरिका के आधिकारिक अकाउंट से ऐसा नक्शा आने का मतलब है कि वाशिंगटन भारत की इस बात को मान रहा है. इसका यह भी संकेत है कि अमेरिका अब पीओके के मसले पर न्यूट्रल नहीं है. यह बात हाल ही में हुई भारत-अमेरिका ट्रेड डील के साथ आई है. दोनों देशों ने टैरिफ कम करने और ट्रेड डील पर फ्रेमवर्क जारी किया है. पाक को झटका अमेरिका का यह कदम पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका है. पाकिस्तान दशकों से पीओके पर अवैध कब्जा जमा रखा है. भारत ने यह प्रण कर रखा है कि पीओके को वापस लेकर रहेगा. इस दिशा में भारत के लिए यह अच्छी खबर है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर को इस नक्शे को आंख खोलकर देखना चाहिए. उनका सबसे पुराना दोस्त अमेरिका अब भारत के साथ खड़ा दिख रहा है. जिनके घर जाकर मुनीर बिरयानी खाते हैं, उन्होंने कैसे भारत का लोहा माना है.

ट्रेड डील की हलचल में भारत-चीन व्यापार का रिकॉर्ड उछाल, चीनी राजदूत की प्रतिक्रिया सामने

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होने की खबरों के बीच चीनी राजदूत ने भी एक खुशखबरी दी है। चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने मंगलवार को बताया जी कि भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 155 अरब अमेरिकी डॉलर के ‘रिकॉर्ड उच्च स्तर’ पर पहुंच गया है। यह पिछले साल की तुलना में हुए व्यापार से करीब 12 प्रतिशत से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन को भारत का निर्यात भी 9.7 फीसदी बढ़ गया है, जो आर्थिक सहयोग की कई संभावनाओं को रेखांकित करता है। राजदूत चीनी नव वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने इस दौरान कहा है कि चीन भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का समर्थन करता है और भारत के साथ बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि चीन ‘ग्लोबल साउथ’ के विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर बात करते हुए, जू ने कहा कि पिछले साल तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद चीन और भारत के संबंधों में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन में एक सफल बैठक की, जिससे चीन-भारत संबंध ‘रीसेट और नई शुरुआत’ से सुधार के एक नए स्तर पर पहुंचे।”

गंभीर की जगह लक्ष्मण नहीं तो कौन? इंग्लैंड में टीम इंडिया के मुख्य कोच पर चौंकाने वाला खुलासा

लंदन  वीवीएस लक्ष्मण को पिछले दो दिनों से इंग्लैंड में भारतीय टीम के आसपास देखा गया है, लेकिन उनकी मौजूदगी को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. मीडिया रिपोर्ट्स में लक्ष्मण के इंग्लैंड दौरे को लेकर अलग-अलग बातें कही जा रही हैं, लेकिन एक बात तय है कि उन्हें बीसीसीआई ने टीम इंडिया के साथ किसी भी आधिकारिक भूमिका में इंग्लैंड नहीं भेजा है.  लक्ष्मण फिलहाल बेंगलुरु में BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े हुए हैं और भारतीय क्रिकेट सिस्टम का अहम हिस्सा हैं. माना जा रहा है कि वह इंग्लैंड में भारतीय टीम के कोचों से बातचीत कर सकते हैं और वहां खेलने को लेकर कुछ अहम सुझाव दे सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं. खबर है कि वह एक-दो दिन में इंग्लैंड से वापस भी लौट सकते हैं.  लक्ष्मण ने इंग्लैंड में कुल 34 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं, जिनमें 11 टेस्ट मैच शामिल हैं जो उन्होंने तीन अलग-अलग दौरों पर (2002, 2007 और 2011) खेले. इसके अलावा, उन्होंने 2007 और 2009 में लंकाशर के लिए 16 काउंटी मैच खेले थे. बाकी 7 मैच उन्होंने इंडिया की टूरिंग टीम के लिए खेले जो आम तौर पर इंग्लिश काउंटी या ‘लायन्स’ टीम के खिलाफ होते हैं.  बीसीसीआई के एक सूत्र ने क्रिकबज से कहा- वो किसी अन्य काम से इंग्लैंड गए हैं, भारतीय टीम के साथ उनकी कोई आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं है. वो लॉजेन (स्विट्जरलैंड) से लंदन आए हैं. एक और सूत्र ने कहा- टीम इंड‍िया का टारगेट इंग्लैंड में जीत हासिल करना है. हो सकता है लक्ष्मण ने कोच और सेलेक्टर्स से बात की हो या प्रैक्टिस मैच भी देखा हो, लेकिन उनका इस टीम के साथ कोई रोल नहीं है.  एक तीसरे सूत्र ने बताया-वो पहले स्विट्जरलैंड गए थे, फिर लंदन सिर्फ खिलाड़ियों से मिलने और समय बिताने पहुंचे थे. यह उनके प्लान का हिस्सा था. जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मण स्विट्जरलैंड में एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए थे, लक्ष्मण ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया.  लक्ष्मण की लंदन में मौजूदगी इस वजह से भी चर्चा में रही क्योंकि टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर इस समय टीम के साथ नहीं हैं. वह अपनी मां की तबीयत खराब होने के कारण दिल्ली लौटे हुए हैं. सूत्रों की मानें तो गंभीर अगले तीन दिनों में  या शायद सोमवार तक टीम से वापस जुड़ सकते हैं.  एक सूत्र ने बताया- गंभीर पहले टेस्ट से पहले जरूर टीम से जुड़ेंगे. उन्होंने डॉक्टरों से अपनी मां की तबीयत को लेकर सलाह ली है. उनकी हालत बेहतर हुई है लेकिन वो अब भी ICU में हैं. गंभीर जल्दी ही अपनी वापसी की योजना बनाएंगे.  पहला टेस्ट मैच 20 जून से लीड्स में खेला जाएगा. भारत ने अभी हाल ही में इंडिया ए के खिलाफ बेकेनहैम में एक अभ्यास मैच खेला है. टीम को 16 जून को रेस्ट करेगी और 17 जून को लीड्स के लिए रवाना होगी.  भारत और इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का इत‍िहास  भारत इंग्लैंड के बीच कुल टेस्ट : 136,  भारत जीता: 35, इंग्लैंड जीता:  51, ड्रॉ: 50  भारत इंग्लैंड के बीच कुल टेस्ट (इंग्लैंड में)   कुल टेस्ट: 67, भारत जीता: 9, इंग्लैंड जीता: 36, ड्रॉ: 22  भारत इंग्लैंड के बीच कुल टेस्ट (भारत में)  कुल टेस्ट: 69, भारत जीता: 26, इंग्लैंड जीता:15, ड्रॉ: 28 भारत के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम: बेन स्टोक्स (कप्तान), शोएब बशीर, जैकब बथेल, हैरी ब्रूक, ब्रायडन कार्स, सैम कुक, जैक क्रॉली, बेन डकेट, जेमी ओवरटन, ओली पोप, जो रूट, जेमी स्मिथ, जोश टंग, क्रिस वोक्स. इंग्लैंड दौरे के लिए 18 सदस्यीय भारतीय टीम: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत (उप-कप्तान/विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), अभिमन्यु ईश्वरन, शार्दुल ठाकुर, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, करुण नायर, वॉशिंगटन सुंदर, आकाश दीप, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव. भारत बनाम इंग्लैंड टेस्ट सीरीज का पूरा शेड्यूल  पहला टेस्ट: 20-24 जून, 2025 – हेडिंग्ले, लीड्स दूसरा टेस्ट: 2-6 जुलाई, 2025 – एजबेस्टन, बर्मिंघम तीसरा टेस्ट: 10-14 जुलाई, 2025 – लॉर्ड्स, लंदन चौथा टेस्ट: 23-27 जुलाई, 2025 – ओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर पांचवां टेस्ट: 31 जुलाई-4 अगस्त, 2025 – द ओवल, लंदन  

भारत ने अमेरिका पर जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा, बादाम, सेब, अखरोट, नाशपाती और…रसायन?

नई दिल्ली भारत में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह शुल्क एल्यूमिनियम और स्टील पर लगाए गए टैरिफ के जवाब में होगा। भारत का यह फैसला व्यापार हित की रक्षा और वैश्विक व्यापार नियमों के अंतर्गत अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाएगा भारत विश्व व्यापार संगठन को भेजे गए प्रस्ताव में भारत का कहना है कि अमेरिका के टैरिफ के कारण भारत के 7.6 अरब डॉलर के सामान का आयात प्रभावित हुआ , इसीलिए भारत भी अमेरिका से आने वाले कुछ चीज जरूरी सामानों पर इतना ही टैरिफ लगाने की मांग कर रहा है। अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाने के ये हैं कारण साल 2018 में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए भारतीय स्टील पर 25% और एल्यूमीनियम पर 10% का टैरिफ लगाया था। इसके बाद इस टैरिफ की दर को साल 2020 में बढ़ाया गया। 12 मार्च 2025 को यह टैरिफ 25% संशोधित कर दिया गया। विश्व व्यापार संगठन को दिए गए प्रस्ताव में भारत ने यह दावा किया है कि अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के सामान्य व्यापार और टैरिफ समझौते (GATT) 1994 और सुरक्षा उपाय पर समझौते का उल्लंघन किया है। अमेरिकी टैरिफ़ के कारण भारत को 7.6 अरब डॉलर के स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात प्रभावित हुए हैं। लेकिन अमेरिका को इस ड्यूटी से 1.91 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं। भारत में यह भी कहा कि उन्होंने अप्रैल 2025 में अमेरिका से विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत परामर्श मांगा था, लेकिन अमेरिका ने इन टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा का उपाय बताकर परामर्श से इनकार कर दिया था। भारत कर रहा जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी भारत सरकार के द्वारा 9 मई 2025 को वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाईजेशन के काउंसिल फॉर ट्रेड इन गुड्स को यह सूचना दी गई है कि वह अमेरिकी उत्पादों पर 1.91 अरब डॉलर के बराबर का टैरिफ लगाएगा। इसके लिए भारत ने 29 अमेरिकी उत्पादों का चयन किया है। जिनमें सेब, बादाम, अखरोट, नाशपाती, रसायन आदि शामिल हैं। हालांकि भारत ऐसा प्रस्ताव 2019 में भी ला चुका है। ये उत्पाद भारत के लिए आयात में महत्वपूर्ण हैं, जैसे अमेरिकी बादाम (543 मिलियन डॉलर) और सेब (156 मिलियन डॉलर)। कितना जवाबी शुल्क लगाएगी भारत सरकार भारत सरकार के द्वारा रखे गए प्रस्ताव के अनुसार टैरिफ की दरें उत्पादों के आधार पर 5% से 100% के बीच हो सकती है। इसके साथ भारत का यह भी कहना है कि उसके द्वारा उठाए जा रहे हैं यह कदम विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप है। भारत जवाबी टैरिफ इसलिए लगाना चाहता है ताकि अमेरिकी टैरिफ के व्यापारिक प्रभाव को संतुलित किया जा सके। भारतीय स्टील एसोसिएशन ने किया स्वागत भारत सरकार के इस फैसले का भारतीय स्टील एसोसिएशन ने स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाया है। यदि भारत सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया आदि को राहत मिल सकती है। अमेरिकी उत्पादों पर असर भारत द्वारा यह जवाबी टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे सेब, बादाम और रसायन उद्योग ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि भारत इनका बड़ा आयातक देश है। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका द्वारा भी जवाबी उपाय किए जा सकते हैं जिससे द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता और जटिल हो सकती है।

अबतक पाकिस्तान की हरकतों की वजह से भारत ने 11 बार उसे खुलकर मुंहतोड़ जवाब दिया

नई दिल्ली पाकिस्तान के साथ भारत का तनाव उसकी पैदाइश के साथ से ही चल रहा है। अबतक पाकिस्तान की हरकतों की वजह से भारत ने इस दौरान कम से कम 11 बार उसे खुलकर मुंहतोड़ जवाब दिया है। अभी ऑपरेशन सिंदूर की वजह से पाकिस्तान की दुनिया भर में भद पिट रही है। हर मिलिट्री ऑपरेशनों ने भारत की सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है और पाकिस्तान को नाक रगड़ने को मजबूर होना पड़ा है, लेकिन उसकी आदतें नहीं बदली हैं। बार-बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान और उसकी फौज कुछ न कुछ ऐसा कर देता है, जिसकी वजह भारत को कार्रवाई करनी पड़ती है। 1. ऑपरेशन रिडल (1965) सबसे पहले बात करते हैं ‘ऑपरेशन रिडल’ की। पहला मिलिट्री ऑपरेशन 1965 में किया गया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने की कोशिश की। उन्होंने ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ और ‘ग्रैंड स्लैम’ नाम से हमले किए। इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन रिडल’ शुरू किया। 6 सितंबर,1965 को भारतीय सेना ने लाहौर और कसूर पर हमला बोल दिया। भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना हिल गई। 2. ऑपरेशन एब्लेज (1965) इसके बाद ‘ऑपरेशन एब्लेज’ हुआ। यह भी 1965 में ही हुआ था। यह एक तरह की सैन्य तैयारी थी। भारतीय सेना ने पश्चिमी सीमा पर अपनी सेना की मौजूदगी बढ़ा दी। हालांकि, इसमें सीधा युद्ध नहीं हुआ, लेकिन यह युद्ध की तैयारी का एक अहम हिस्सा था। नतीजा: इन दोनों ऑपरेशनों के बाद सोवियत संघ (USSR) ने बीच में आकर ताशकंद समझौता कराया। 3. ऑपरेशन कैक्टस लिली (1971) 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान ‘ऑपरेशन कैक्टस लिली’ चलाया गया। भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर मेघना नदी पार की। उन्होंने पाकिस्तानी ठिकानों को पीछे छोड़ते हुए ढाका की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। 4. ऑपरेशन ट्राइडेंट (1971) ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर दो बार हमला किया। पहला हमला 4-5 दिसंबर को हुआ। भारतीय सेना पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर पाकिस्तानी फौज के नाक में दम कर रही थी। 5.ऑपरेशन पाइथन (1971) ऑपरेशन ट्राइडेंट के बाद ‘ऑपरेशन पाइथन’ हुआ। एक के बाद इन तीनों हमलों से पाकिस्तान बिखर गया और उसके नौसैनिक ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा। ऑपरेशन पाइथन में पहली बार एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। नतीजा: इन तीन ऑपरेशनों का नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान हार गया और बांग्लादेश नाम का एक नया देश बना। 6. ऑपरेशन मेघदूत (1984) सियाचिन में पाकिस्तान की हरकतों को रोकने के लिए भारत ने अप्रैल 1984 में ‘ऑपरेशन मेघदूत’ शुरू किया। भारतीय वायुसेना की मदद से सैनिकों को दुनिया की सबसे ऊंची युद्ध भूमि पर पहुंचाया गया। उन्होंने महत्वपूर्ण चोटियों पर कब्जा कर लिया। नतीजा: ऑपरेशन मेघदूत से भारत को सामरिक बढ़त मिली और भारत आज भी वहां लाभ की स्थिति में है। 7. ऑपरेशन विजय (1999) मई 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की चोटियों चोरी-चोरी पर कब्जा कर लिया। भारत ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाकर इन इलाकों को वापस अपने कब्जे में ले लिया। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की ताकत और बलिदान का प्रतीक है। 8. ऑपरेशन सफेद सागर (1999) ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ भी कारगिल युद्ध के दौरान ही हुआ। यह भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन था। इसमें कारगिल की पहाड़ियों में पाकिस्तान की चौकियों और ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। 1971 के बाद यह पहली बार था, जब इतने बड़े पैमाने पर वायुसेना का इस्तेमाल किया गया। नतीजा: इन दोनों मिलिट्री ऑपरेशन में पाकिस्तानी फौज को भारतीय सेना और वायुसेना ने बुरी तरह से पीटा और वे पीछे हटने को मजबूर हुए। 9. सर्जिकल स्ट्राइक (2016) उरी हमले के बाद भारत ने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक की। भारत की स्पेशल फोर्सेज ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (PoJK) में आतंकी ठिकानों पर हमला किया। यह पहली बार था, जब भारत ने खुलकर पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाके में अपनी सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। नतीजा: पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में संदेश गया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत अब भारत दुश्मन के घर में घुसकर मारने लगा है। 10. ऑपरेशन बंदर (2019) पुलवामा हमले के बाद भारत ने 26 फरवरी, 2019 को ‘ऑपरेशन बंदर’ को अंजाम दिया। इसके तहत पाकिस्तान के करीब 80 किलोमीटर भीतर घुसकर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक किया गया। 1971 के बाद यह पहली बार था, जब भारत ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार अपनी वायुसेना का इस्तेमाल किया। नतीजा: भारत ने पूरी दुनिया को संकेत दे दिया कि ‘नया भारत’ अब अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर तरह के मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए तैयार है। 11. ऑपरेशन सिंदूर (2025) भारत ने 6 और 7 अप्रैल, 2025 की दरमियानी रात पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) के 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसे ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया। इसमें भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) या नियंत्रण रेखा (LoC) का उल्लंघन नहीं किया और मिसाइल, ड्रोन और अन्य बमों का इस्तेमाल करके दहशतगर्दी कैंपों में तबाही मचा दी। नतीजा: पहली बार पाकिस्तान खुद मान रहा है कि भारत ने किस तरह से मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर दूर बहावलपुर तक में आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त हुए हैं और जैश-ए-मोहम्मद का सरगना अजहर मसूद खुद मान रहा है कि उसके परिवार के 10 लोगों समेत कुल 14 लोग मारे गए हैं।

भारत ने पाकिस्तान के एयरबेसों को निशाना बनाया और इसके बाद पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया

नई दिल्ली हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. दोनों देश जंग के मुहाने पर खड़े हो गए हैं और सेनाएं लामबंद हैं. शुक्रवार की शाम पाकिस्तान ने भारत की 26 जगहों पर हमले की कोशिश की थी. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के एयरबेसों को निशाना बनाया और इसके बाद पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. वही, भारत पर पाकिस्तान की तरफ से फतह-1 मिसाइल दागी गई. शुक्रवार रात को पाकिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों का भारत की तरफ से जवाब दिया गया. पाकिस्तान के द्वारा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात और राजस्थान के कई इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की गई है. पाकिस्तान के एयरबेस पर तबाही शनिवार की सुबह, भारत ने राजधानी इस्लामाबाद के करीब स्थित कुल चार एयरबेसों पर मिसाइलें दागी हैं और तबाही मचा दी है. देर रात टेलीविज़न पर दिए गए बयान में पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा, “भारत ने अपने विमानों के ज़रिए हवा से सतह पर मिसाइलें दागीं.” वहीं, बीती रात हुए हमलों से जुड़े सभी पहलुओं पर ताजा अपडेट देने के लिए सुबह 10 बजे भारत सरकार की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी. शनिवार की सुबह तड़के क्या-क्या हुआ?     जम्मू-कश्मीर में वायुसेना स्टेशन को निशाना बनाने की पाकिस्तानी कोशिशें नाकाम कर दी गईं. पाकिस्तान की ओर से रात को हुए हमले के बाद जम्मू-कश्मीर से सुबह की ताजा तस्वीरें सामने आई हैं.     गुजरात के कच्छ में पाकिस्तान के ड्रोन हमले को भारत ने नाकाम कर दिया है.     पठानकोट में भी सुबह होते ही कई विस्फोट हुए. कम से कम आधे घंटे तक रुक-रुक कर विस्फोट होते रहे, जवाबी कार्रवाई में विमान-रोधी तोपों से भी गोलीबारी की गई.     अमृतसर प्रशासन ने कहा कि हम रेड अलर्ट पर हैं. लोगों से घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया है. फ़िरोज़पुर और बठिंडा इलाके में हवाई हमले हुए और सायरन की आवाजें भी सुनी गईं.     सुबह 5.20 बजे श्रीनगर, एयरपोर्ट के पास, सुबह 4.50 बजे बारामुल्ला और उधमपुर में भी धमाके की आवाज़ें सुनी गईं.     गोलीबारी की वजह से जम्मू शहर के रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है. कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं.     जम्मू-कश्मीर के उरी में पाकिस्तानी गोलाबारी में मकान और संपत्तियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, ये गोलाबारी नागरिक इलाकों को निशाना बनाकर की जा रही है. भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए: भारत ने पाकिस्तान के नूर खान (रावलपिंडी), मुरीद (चकवाल) और रफीकी (शोरकोट) एयरबेस को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया है. इन स्थानों पर भारी नुकसान हुआ है और पाकिस्तान के सैन्य ढांचे पर यह हमला एक बड़ा झटका माना जा रहा है. ऐसे हमले से सीमा पर तनाव और भी तीव्र हो गया है. पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस बंद किया: तनाव के कारण पाकिस्तान ने अपना एयरस्पेस आज सुबह 12 बजे तक के लिए पूरी तरह बंद कर दी है. इस दौरान पेशावर जाने वाली पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PIA218 को क्वेटा के ऊपर उड़ते देखा गया. इस्लामाबाद और अन्य प्रमुख शहरों में धमाके: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और लाहौर समेत कई बड़े शहरों में धमाके की आवाजें सुनाई दी. पाकिस्तान सेना का दावा है कि भारत ने बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इस घटना से दोनों देशों के बीच विवाद और बढ़ गया है. ड्रोनों के हमलों के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई: पाकिस्तान की तरफ से सीमा पार ड्रोनों से कई हमले किए जाने के बाद, भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नीलम घाटी और सियालकोट में कड़ा जवाब दिया. सोशल मीडिया पर आईं वीडियोज में दिखा भारत का मिसाइल इंटरसेप्शन: कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें भारत ने सरसा क्षेत्र के ऊपर पाकिस्तानी लॉन्ग रेंज मिसाइल को सफलतापूर्वक रोकते हुए दिखाया गया है. सरसा के जिला सूचना अधिकारी ने नागरिकों को घर के अंदर रहने की सलाह दी है. भारत की एडवांस डिफेंस सिस्टम का प्रभाव: S-400, L-70, Zu-23 और शकिल्का जैसे आधुनिक वायु रक्षा उपकरण लगातार सीमा पर भारत की हवाई सुरक्षा को मजबूत बनाए हुए हैं. इन सिस्टम्स ने पाकिस्तान की ड्रोन हमलों और अन्य कारगर हथियारों को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने से रोक रखा है.  

पकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी, वह अमेरिका से लगातार मदद की गुहार भी लगा रहा

नई दिल्ली भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. वह लगातार भारत पर हमले की कोशिश कर रहा है. लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ रही है. इस बीच वह अमेरिका से लगातार मदद की गुहार भी लगा रहा है. लेकिन इस बीच अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान की इस मौजूदा स्थिति में अमेरिका हस्तक्षेप नहीं करेगा. यह अमेरिका का काम नहीं है. वेंस ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि हम दोनों पक्षों से तनाव कम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. लेकिन हम जंग के बीच में इसमें शामिल नहीं होंगे क्योंकि यह हमारा काम नहीं है और हम इसे कंट्रोल नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारतीयों से हथियार डालने को नहीं कह सकता. हम पाकिस्तानियों से हथियार डालने को नहीं कह सकते. हम डिप्लोमैटिक माध्यमों से इसे हल कर सकते हैं. हमारी उम्मीद है कि मौजूदा स्थिति किसी तरह के व्यापक क्षेत्रीय युद्ध या परमाणु युद्ध में तब्दील नहीं हो. हालांकि, अभी हमें नहीं लगता कि ऐसा होगा. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर मौजूदा स्थिति को लेकर मैं कुछ मदद कर सकूं तो मैं करूंगा. यह भयावह स्थिति है. मेरे भारत और पाकिस्तान दोनों से अच्छे संबंध हैं और मैं चाहता हूं कि दोनों इस मुद्दो को हल करें. वहीं, इससे पहले पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र से भी बड़ा झटका लगा था. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी. पाकिस्तान के अनुरोध के बाद की गई इस मीटिंग में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था.   यूएनएससी में बंद कमरे में सोमवार दोपहर को डेढ़ घंटे हुई बैठक के बाद पाकिस्तान की फजीहत हुई थी. संयुक्त राष्ट्र ने इस बैठक के बाद ना तो किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी किया और ना किसी तरह का रिजॉल्यूशन पारित किया गया. इस बैठक के दौरान पाकिस्तान ने लगातार झूठे बयान दिए थे. उन्होंने कहा था कि भारत ने सिंधु नदी समझौते को सस्पेंड करने के कदम को गैरकानूनी करार दिया. इससे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को खतरा है.  

PM मोदी से डरा पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से तनाव कम करने की अपील की

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है. पाकिस्तान को भारत की संभावित जवाबी कार्रवाई का अंदेशा है और इस वजह से वह सहमा हुआ है. वह कभी पहलगाम आतंकी हमले की तीसरे पक्ष से निष्पक्ष जांच करवाने और इसमें सहयोग करने, तो कभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे को उठा रहा है. पाकिस्तान ने शुक्रवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत के साथ तनाव बढ़ने पर उसे उचित समय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का अधिकार है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह सबकुछ जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में हो रहा है. अहमद इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या पाकिस्तान जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की योजना बना रहा है. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे. पाकिस्तान वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और जुलाई में 15 देशों वाली संयुक्त राष्ट्र संस्था की अध्यक्षता करेगा. PAK को सता रहा भारत की जवाबी कार्रवाई का डर उन्होंने कहा, ‘यह स्पष्ट है कि पहलगाम में एक घटना हुई है, लेकिन अब जो स्थिति उत्पन्न हुई है उससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा है. हमारा मानना ​​है कि सुरक्षा परिषद को वास्तव में ऐसा करने का अधिकार है. पाकिस्तान सहित परिषद के किसी भी सदस्य के लिए यह पूरी तरह उचित होगा कि वह सुरक्षा परिषद की बैठक और चर्चा का अनुरोध करे, ताकि इस गंभीर स्थिति पर विचार किया जा सके.’ अहमद ने कहा, ‘हमने परिषद के सदस्यों के साथ इस पर चर्चा की है. हमने पिछले महीने की अध्यक्षता और इस महीने की अध्यक्षता के साथ इस पर चर्चा की है. हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं और हमें उचित लगने पर बैठक बुलाने का अधिकार है.’ पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने अपने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस टिप्पणी के बारे में पीटीआई द्वारा पूछे गए सवाल का सीधे जवाब देने से परहेज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान तीन दशक से अमेरिका और पश्चिमि देशों के लिए ‘गंदा काम’ करता रहा है. पाकिस्तान तीन दशक से आतंकवाद को दे रहा पराश्रय दरअसल, पहलगाम हमले के परिप्रेक्ष्य में स्काई न्यूज के एंकर यल्दा हाकिम ने ख्वाजा आसिफ से सवाल किया था, ‘आप स्वीकार करते हैं कि पाकिस्तान का इन आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तपोषण देने का एक लंबा इतिहास रहा है?’ इसके जवाब में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री आसिफ ने कहा था, ‘आप जानते हैं कि हम संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह गंदा काम लगभग तीन दशकों से कर रहे हैं, और ब्रिटेन भी इसमें शामिल है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद 24 अप्रैल को बिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, ‘आतंकवादियों और आकाओं और इस हमले के साजिशकर्ताओं को उनकी कल्पना से भी कड़ी सजा देंगे. देश के दुश्मनों ने न केवल निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाया, बल्कि भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है.’ गत 29 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय बैठक में पीएम मोदी ने भारतीय सेना को खुली छूट दी थी और कहा था कि पहलगाम आतंकवादी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए इसका तरीका, लक्ष्य और समय सेना तय करे. भारत को रोको, हमें बचाओ; UNSC में रोया पाकिस्तान तो अब चर्चा की तैयारी भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने और तनाव को कम कराने की गुहार लगाई है। पाकिस्तान के अमेरिका में राजदूत रिजवान सईद शेख ने चेतावनी दी कि “कोई भी गलत कदम या गलत अनुमान परमाणु संघर्ष की ओर ले जा सकता है।” शेख ने कश्मीर को “विश्व का सबसे खतरनाक परमाणु फ्लैशपॉइंट” करार देते हुए ट्रंप से इस मुद्दे पर निर्णायक भूमिका निभाने का आग्रह किया है। Fox News Digital से बातचीत में शेख ने कश्मीर को “परमाणु फ्लैशपॉइंट” करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे को हल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रपति ट्रंप की विरासत का एक अहम हिस्सा बन सकता है, यदि वे इस मसले को सतही उपायों से नहीं बल्कि कश्मीर विवाद जैसे मूल कारणों को संबोधित करके हल करें।” राजदूत शेख ने भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया को “खतरनाक और भड़काऊ” बताया। उन्होंने कहा कि हमले के महज 10 मिनट बाद ही भारत की ओर से पाकिस्तान पर आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा, “भारत ने आरोप लगाने में एक मिनट भी नहीं गंवाया और बिना किसी जांच के ही पाकिस्तान को दोषी ठहराया। हमने सबूत शेयर करने की मांग की और निष्पक्ष व पारदर्शी जांच में भाग लेने की पेशकश की, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला।” “परमाणु युद्ध की संभावना को नजरअंदाज न करें” पाकिस्तानी राजदूत को भारत की संभावित प्रतिक्रिया से डर लग रहा है। यही वजह है कि वे दूसरे देशों के आगे गुहार लगा रहे हैं कि भारत को रोका जाए। राजदूत ने कहा कि यह क्षेत्र 1.5 अरब से ज्यादा लोगों का घर है और इस तरह के युद्धोन्माद भरे बयानात क्षेत्र को एक बार फिर से “युद्ध की मानसिकता का बंधक” बना रहे हैं। पाकिस्तानी दूत ने गीदड भभकी देते हुए कहा कि “कोई भी गलतफहमी या गलत निर्णय, परमाणु युद्ध में बदल सकता है – जो इस घनी आबादी वाले क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए बहने वाली नदियों के जल प्रवाह को एकतरफा रोकने की धमकी, अंतरराष्ट्रीय संधियों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इंडस वॉटर ट्रीटी का हवाला देते हुए कहा, “यह संधि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों के दौरान भी कायम रही, इसे तोड़ना अंतरराष्ट्रीय कानून की घोर अवहेलना है।” पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता निलंबित … Read more

भारत समेत G4 देशों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में मुस्लिम देश के आरक्षण के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया

वॉशिंगटन  भारत समेत जी 4 देशों ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में मुस्लिम देश के आरक्षण के प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया है। जी 4 देशों ने धार्मिक आधार पर स्‍थायी सदस्‍यता देने के किसी भी प्रस्‍ताव को संयुक्‍त राष्‍ट्र के नियमों के खिलाफ बताया। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर लंबे समय से मांग चल रही है। भारत समेत जी 4 के देशों ब्राजील, जर्मनी और जापान ने तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान, पाकिस्‍तानी पीएम शहबाज शरीफ और सऊदी प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान के इस्‍लामिक सपने को तोड़ दिया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि पी हारिश ने मंगलवार को जी4 देशों की ओर से कहा कि धर्म के आधार पर सुरक्षा परिषद में प्रतिन‍िध‍ित्‍व मंजूर नहीं है। भारतीय प्रतिनिधि ने तुर्की या उसके इस्‍लामिक दुनिया का खलीफा बनने का सपना देख रहे राष्‍ट्रपति एर्दोगान का नाम नहीं लिया। इससे पहले पिछले महीने तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्दोगान ने मांग की थी कि सुरक्षा परिषद में एक इस्‍लामिक देश को भी स्‍थायी सदस्‍यता दी जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्‍तान या सऊदी के नेतृत्‍व वाले इस्‍लामिक संगठन ओआईसी का भी नाम नहीं लिया। इन दोनों ने मांग की थी कि ‘इस्‍लामिक उम्‍मा’ को भी सुरक्षा परिषद के सभी वर्गो में सदस्‍यता दी जाए। हारिश ने कहा कि धार्मिक फैक्‍टर को लाने से सुरक्षा परिषद के अंदर सुधारों को लेकर चल रही प्रक्रिया में और ज्‍यादा जटिलता आ जाएगी। तुर्की के राष्‍ट्रपति ने खेला इस्‍लामिक कार्ड हारिश ने जी4 देशों की ओर से संयुक्‍त राष्‍ट्र के अंदर सुधारों को लेकर एक अंतरसरकारी वार्ता के दौरान यह बयान दिया। उन्‍होंने भारत के प्रतिनिधि होने के नाते जोर देकर कहा कि मुस्लिम आरक्षण क्षेत्रीय प्रतिनिध‍ित्‍व के सिद्धांत को कमजोर करेगा जिसे संयुक्‍त राष्‍ट्र ने स्‍वीकार किया है। तुर्की के ऑटोमन साम्राज्‍य को फिर से लाने की कोशिश में लगे एर्दोगान ने एक इफ्तार पार्टी में पिछले महीने कहा था, ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अंदर वीटो पावर के साथ एक इस्‍लामिक देश का होना न केवल आवश्‍यकता है, बल्कि एक दायित्‍व भी है।’ जी4 देशों का यह समूह सकारात्‍मक और आशावादी सोच वाले तथा सुधार समर्थक देशों का समूह है जो कई साल सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हारिश ने कहा कि जी4 एक सिफारिशी ग्रुप है जो सार्थक सुधार के लिए काम कर रहा है और किसी खास सुझाव को नहीं देता है कि किसे स्‍थायी सदस्‍य बनाया जाए। जी4 इसे संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा पर छोड़ता है। उन्‍होंने कहा कि महासभा को लोकतांत्रिक आधार पर सुरक्षा परिषद में सुधार करके नए स्‍थायी सदस्‍य को शामिल करना चाहिए। सुरक्षा पर‍िषद में सुधार का जी4 प्रस्‍ताव हारिश ने यह भी कहा कि जी4 देशों का मानना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाना चाहिए और क्षेत्रीय प्रतिनिध‍ित्‍व को देना चाहिए। भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या को 15 से 25 या 26 करना चाहिए। जी4 के प्रस्‍ताव के मुताबिक सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को बढ़ाकर 5 से 11 करना चाहिए, वहीं अस्‍थायी सदस्‍यों की संख्‍या को 10 से बढ़ाकर 14 या 15 करनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि 6 नए स्‍थायी सदस्‍यों में प्रत्‍येक को एशिया-प्रशांत, लैट‍िन अमेरिका, कैरेबियाई देश और पूर्वी यूरोप को एक-एक सीट दी जाए। वहीं अफ्रीका को कम से कम एक या दो सीट दी जाए। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्‍तान को भी जमकर फटकार लगाई जो सुरक्षा परिषद में सुधार का विरोध कर रहा है। पाकिस्‍तान स्‍थायी सदस्‍यता दिए जाने का विरोध कर रहा है ताकि भारत को रोका जा सके। पाकिस्‍तान इस्‍लामिक उम्‍मा को भी भड़काने का काम कर रहा है। अगर धर्म के आधार पर देखें तो चीन जहां आंशिक रूप से वामपंथी देश है, वहीं बाकी 4 स्‍थायी सदस्‍य ईसाई बहुल देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस हैं।

रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सदस्‍यता मांग का खुलकर समर्थन किया

नई दिल्ली/ मास्‍को  भारत और रूस की राजनयिक दोस्‍ती के 78 साल पूरे हो गए हैं। शीत युद्ध से लेकर पाकिस्‍तान युद्ध तक रूस ने भारत के साथ दोस्‍ती निभाई है। अब एक बार फिर से रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही मांग का खुलकर समर्थन किया है। रूस ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्‍थायी सदस्‍यता देने की मांग को फिर से दोहराया है। साथ ही रूस ने भारत के साथ आने वाले वर्षों में भी अच्‍छे रिश्‍ते बरकरार रखने की उम्‍मीद जताई है। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने संदेश में दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्‍ते स्‍थापित होने के 78 साल पूरे होने की बधाई दी। इस बीच स्‍लोवाकिया ने भी भारत की संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन किया है। टेलिग्राम पर दिए अपने संदेश में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम भारत के साथ रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। रूसी मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद मजबूत बना रहेगा और दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर जारी रहेगा। साल 2024 में पीएम मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के बीच दो शिखर सम्‍मेलन हुए थे। इस साल भी पुतिन भारत आने वाले हैं। रूस ने विक्‍ट्री डे परेड में पीएम मोदी को न्‍योता दिया था। इसमें हिस्‍सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर जा रहे हैं। भारत और रूस बढ़ाएं दोस्‍ती रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्‍यापार लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा पर भी सहयोग कर रहे हैं और तमिलनाडु के कुंडनकुलम में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाया जा रहा है। रूस ने कहा कि दोनों देशों को रक्षा, स्‍पेस, तकनीक और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को जारी रखना चाहिए ताकि एक बहुध्रुवीय दुनिया को बनाया जा सके। यह वैश्विक प्रशासन में ग्‍लोबल साऊथ की भागीदारी को बढ़ाएगा। सुरक्षा परिषद की दावेदारी में कहां फंसा पेंच? संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता के लिए कई साल से भारत मांग कर रहा है। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली निकाय है लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत इसका स्‍थायी सदस्‍य नहीं है। साल 1945 में बनाए गए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा पर‍िषद 15 सदस्‍य हैं और इसमें केवल 5 ही स्‍थायी सदस्‍य हैं। ये देश हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन। 10 गैर अस्‍थायी सदस्‍य होते हैं जिन्‍हें दो साल के लिए चुना जाता है। स्‍थायी सदस्‍यों के पास वीटो पावर होता है लेकिन अस्‍थायी सदस्‍यों के पास यह ताकत नहीं होती है। भारत को रूस, अमेरिका, फ्रांस समेत दुनिया के कई ताकतवर देशों का समर्थन हासिल है लेकिन नई दिल्‍ली की राह में सबसे बड़ी बाधा चीन बना हुआ है। चीन नहीं चाहता है कि एशिया में उसके एकाधिकार को भारत चुनौती दे। इसी वजह से चीन सुरक्षा परिषद में एशिया से अकेले प्रतिनिधित्‍व करना चाहता है।  

भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया, 25 से अधिक देशों को चाय निर्यात

नई दिल्‍ली भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया है। उसने श्रीलंका को पीछे छोड़ दिया है। भारतीय चाय बोर्ड के अनुसार, भारत ने 2024 में 25.5 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। केन्या पहले स्थान पर है। भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत का चाय निर्यात बढ़ा है। 2024 में निर्यात 10 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। चाय निर्यात से भारत को अच्छी कमाई हुई है। इराक को भेजे जाने वाले शिपमेंट में बढ़ोतरी हुई है। भारत 25 से ज्‍यादा देशों को चाय निर्यात करता है। भारत दुनिया के शीर्ष पांच चाय निर्यातकों में से एक है। भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों से पता चला है कि भारत ने चाय निर्यात में बड़ी सफलता हासिल की है। भारत अब श्रीलंका से आगे निकल गया है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय निर्यातक बन गया है। 2024 में भारत ने 25.5 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। इससे देश को 7111 करोड़ रुपये की आय हुई। चाय निर्यात पर कोई खास असर नहीं दुनिया में कई तरह की परेशानियां चल रही हैं। इसके बाद भी भारत के चाय निर्यात पर कोई खास असर नहीं पड़ा। यह पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा है। 2023 में यह आंकड़ा 23.16 करोड़ किलो था। इसका मतलब है कि 2024 में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चाय के निर्यात से भारत को खूब फायदा हुआ है। 2023 में भारत ने 6,161 करोड़ रुपये की चाय निर्यात की थी। 2024 में यह बढ़कर 7,111 करोड़ रुपये हो गई। यह 15 फीसदी की बढ़ोतरी है। 2024 में उत्तरी भारत (असम और पश्चिम बंगाल) ने 15.5 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। इससे 4833 करोड़ रुपये मिले। वहीं, दक्षिणी भारत ने 9.98 करोड़ किलो चाय का निर्यात किया। इससे 2278 करोड़ रुपये की आय हुई। उत्तरी भारत का योगदान मात्रा के हिसाब से 60.79% और मूल्य के हिसाब से 67.96% रहा। दक्षिणी भारत का योगदान मात्रा के हिसाब से 39.21% और मूल्य के हिसाब से 32.04% रहा। भारत 25 से ज्यादा देशों को चाय बेचता है। यूएई, इराक, ईरान, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन भारत के प्रमुख ग्राहक हैं। श्रीलंका में चाय की फसल कम होने के कारण कई भारतीय व्यापारियों को पश्चिम एशिया के बाजारों में जाने का मौका मिला। अब वे वहां पर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल हो रहे हैं। दुनिया के टॉप पांच चाय निर्यातकों में शामिल भारत भारत दुनिया के टॉप पांच चाय निर्यातकों में शामिल है। पूरी दुनिया में जितनी चाय का निर्यात होता है, उसका लगभग 10 फीसदी भारत से होता है। असम, दार्जिलिंग और नीलगिरी की चाय को दुनिया की सबसे अच्छी चाय माना जाता है। भारत से ज्यादातर ‘ब्लैक टी’ चाय का निर्यात होता है। यह कुल निर्यात का लगभग 96 फीसदी है। इसके अलावा, रेगुलर टी, ग्रीन टी, हर्बल चाय, मसाला चाय और लेमन टी भी निर्यात की जाती हैं। भारत सरकार चाय के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार चाहती है कि भारतीय चाय की एक खास पहचान बने। इसके साथ ही, सरकार चाय उद्योग से जुड़े परिवारों की मदद भी करना चाहती है। असम में दो मुख्य चाय उत्पादक क्षेत्र हैं: असम घाटी और कछार। पश्चिम बंगाल में तीन प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र हैं: दोआर्स, तराई और दार्जिलिंग। दक्षिण भारत देश के कुल चाय उत्पादन का लगभग 17 फीसदी उत्पादन करता है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक यहां के मुख्य चाय उत्पादक राज्य हैं। छोटे चाय उत्पादक भी चाय के उत्पादन में बड़ा योगदान दे रहे हैं। कुल उत्पादन का लगभग 52 फीसदी हिस्सा छोटे चाय उत्पादकों का होता है। अभी लगभग 2.30 लाख छोटे चाय उत्पादक हैं जो चाय के कारोबार से जुड़े हैं।  

फाइनल जीतते ही टीम इंडिया क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा 3 बार आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम करेगी

दुबई पाकिस्तान की मेजबानी में खेली जा रही आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 अब फाइनल दौर में पहुंच गई है. रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने अजेय रहकर ICC चैम्प‍ियंस ट्रॉफी 2025 के फाइनल में एंट्री कर ली है. यह खिताबी मुकाबला 9 मार्च को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. जहां भारत की भ‍िड़ंत न्यूजीलैंड से होगी. इस बार यदि भारतीय टीम खिताब जीतती है, तो वो एक खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लेगी. साथ ही इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई टीम को पछाड़ेगी. दरअसल, फाइनल जीतते ही टीम इंडिया क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा 3 बार आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम करेगी. इस बार चैम्पियंस ट्रॉफी का 9वां सीजन खेला जा रहा है. अब तक भारतीय टीम और ऑस्ट्रेलिया ने 2-2 बार खिताब जीते हैं. कंगारू टीम सेमीफाइनल में भारत के ही हाथों हारकर बाहर हो गई है. ऐसे में अब तीसरा खिताब जीतने का रिकॉर्ड बनाने का मौका टीम इंडिया के पास ही है. भारत ने 2002 (संयुक्त रूप से) और 2013 में जीता खिताब भारतीय टीम सबसे पहले श्रीलंका में खेले गए इस तीसरे यानी 2002 सीजन में चैम्पियन बनी थी. तब भारतीय टीम और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से खिताब अपने नाम किया था. जबकि 2013 सीजन में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने खिताब जीता. 2013 के बाद 2017 में भी चैम्पियंस ट्रॉफी को इंग्लैंड में कराया गया. तब पहली बार पाकिस्तान ने इसे अपने नाम किया. इसके बाद 2021 में टूर्नामेंट होना था, लेकिन कोरोना के कारण इसे टाल दिया गया. अब करीब 8 साल बाद यह टूर्नामेंट दोबारा कराया जा रहा है. अब तक चैम्पियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीमें साल विनर नतीजा 1998 साउथ अफ्रीका वेस्टइंडीज को 4 विकेट से हराया 2000 न्यूजीलैंड भारत को 4 विकेट से हराया 2002 भारत-श्रीलंका संयुक्त विजेता मैच बेनतीजा रहा 2004 वेस्टइंडीज इंग्लैंड को 2 विकेट से हराया 2006 ऑस्ट्रेलिया वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराया 2009 ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड को 6 विकेट से हराया 2013 भारत इंग्लैंड को 5 रनों से हराया 2017 पाकिस्तान भारत को 180 रनों से हराया चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में भारतीय स्क्वॉड: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उप-कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, हर्षित राणा, मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह और वॉशिंगटन सुंदर.

एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कीर्तिमानों की सूची, जानें पहले नंबर पर कौन सा देश काबिज

मुंबई क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट का अपना-अपना अलग अंदाज है, लेकिन क्रिकेट प्रेमी तीनों ही फॉर्मेट को पसंद करते हैं। हालांकि, तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग टीमें टॉप स्थान पर हो सकती हैं। इस समय आईसीसी की टॉप टीमों में वनडे और टी20 में भारत का नाम शामिल है, जबकि टेस्ट में इस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम कब्जा जमाए हुए है। इस समय आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी खेली जा रही है, जो वनडे फॉर्मेट में आयोजित हो रही है। वनडे फॉर्मेट का हमेशा से ही अलग जलवा रहा है। वनडे वर्ल्ड कप का बेसब्री से फैंस इंतजार करते हैं। दरअसल, वनडे मैचों में कई ऐसे रिकॉर्ड बने हैं जो टूटे हैं। कई महान बल्लेबाज हुए हैं, जिन्होंने वनडे में शतकों का अंबार लगाया है। कई ऐसी टीमें भी हैं, जिन्होंने वनडे में शतकों के मामले में रिकॉर्ड बनाया है। पाकिस्तान की टीम ने लगाए कुल 229 शतक पाकिस्तान की टीम में कई बड़े खिलाड़ी रहे हैं। आज के समय में बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान जैसे खिलाड़ी हैं। एक समय पर शाहिद अफरीदी, मोहम्मद यूनुस और मिस्बाह-उल-हक जैसे खिलाड़ी भी इस टीम का हिस्सा थे। लेकिन पाकिस्तान में अब तक सईद अनवर का रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ सका है। पाकिस्तान की पूरी टीम ने वनडे क्रिकेट में 229 शतक लगाए हैं। पाकिस्तान की ओर से सईद अनवर ने सबसे ज्यादा 20 शतक लगाए, जबकि बाबर आजम ने 19 शतक लगाए हैं। बाबर आजम जल्द ही सईद अनवर का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया की टीम ने लगाए कुल 252 शतक वहीं, दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की टीम है, जिसने पाकिस्तान से ज्यादा शतक बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम ने वनडे क्रिकेट में 252 शतक लगाए हैं। ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट हमेशा से ही शानदार रहा है। सबसे ज्यादा आईसीसी ट्रॉफियां भी ऑस्ट्रेलिया के पास ही हैं। ऑस्ट्रेलिया की ओर से वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड रिकी पोंटिंग के नाम है, जिन्होंने 30 वनडे शतक बनाए। इसके बाद मैथ्यू हेडन का नाम आता है, जिन्होंने 18 शतक जोड़े हैं। भारत की टीम ने लगाए कुल 323 शतक दुनिया में वनडे क्रिकेट की सबसे सफल टीम भारतीय टीम रही है। भारतीय खिलाड़ियों ने वनडे क्रिकेट में कुल 323 शतक लगाए हैं। भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में सचिन तेंदुलकर का नाम हमेशा से लिया जाता है, लेकिन अब इस रिकॉर्ड को विराट कोहली ने तोड़ दिया है। भारत की ओर से सबसे ज्यादा वनडे शतक विराट कोहली ने लगाए हैं। विराट कोहली अब तक 51 शतक लगा चुके हैं, जबकि इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने भारत के लिए 50 वनडे शतक लगाए थे। यानी कुल मिलाकर सचिन और विराट ने मिलकर ही 100 शतक जड़ दिए हैं।

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