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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए 120 बीघा जमीन की सहमति मिल चुकी

इंदौर  एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के किसान जमीन देने पर सहमत होते जा रहे हैं। बीते दिन दो विधायकों और जमीन मालिकों के साथ एमपीआइडीसी की बैठक हुई। मौके पर ही कुछ जमीन मालिकों ने करीब 40 बीघा जमीन देने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। अब तक 120 बीघा जमीन देने पर सहमति बन गई है।  एमपीआइडीसी के ऑफिस में हुई बैठक में विधायक उषा ठाकुर, मधु वर्मा और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 50 से अधिक जमीन मालिक व किसान मौजूद थे। प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देकर कई लोगों की शंका का समाधान किया गया। सवाल किया गया कि यह कब पूरा होगा तो एमपीआइडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बताया कि जमीन मिलने के बाद दो साल में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। पहली बार सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड किसी योजना में दे रही है। कॉरिडोर के तैयार होने से क्षेत्र और इंदौर के विकास को नई उड़ान मिलेगी। बच्चों को रोजगार मिलेगा। समय पर पूरी होने की उम्मीद एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों के हर सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, उन्हें मिलने वाले विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत शुरू कर सकेंगे। जमीन मालिकों ने भी इस बात पर संतोष जताया कि परियोजना समय पर पूरी होने की उम्मीद है। मिलेंगे रोजगार के अवसर उनका कहना था कि इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों का कहना है पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है, और अब जब हमें 60त्न विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दी जा रही है, तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। समय पर दर्ज कराएं सहमति राजेश राठौड़ ने कहा हमारा लक्ष्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप देना है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें किसान न केवल अपनी जमीन का उचित प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास के साझेदार भी बनेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सहमति दर्ज कराएं और इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।  जिला प्रशासन द्वारा भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। ग्राम रिजलाय में एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने एक अलग बैठक ली, जिसमें कई जमीन मालिक शामिल हुए। इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और किसानों ने परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया। प्रशासन का यह प्रयास है कि हर किसान की सहमति बिना किसी दबाव के, उनकी मर्जी से ली जाए। सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन बैठक में महू विधायक उषा ठाकुर ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की हर मांग को पूरा किया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जमीन देने वाले किसानों को 60 फीसदी विकसित प्लॉट मिलेगा। यह योजना स्वर्णिम भारत के निर्माण का एक कदम है। उद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की छोटी-छोटी शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रशासन और एमपीआईडीसी के अधिकारी हर कदम पर उनके साथ हैं। राऊ विधायक मधु वर्मा भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने परियोजना को क्षेत्र के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि किसानों के लिए भी आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। जिस गांव में जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सडक़ के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी। इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे विकास कार्य में कोई बाधा न आए। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि उन्हें अपनी जमीन के बदले 60त्न विकसित भूखंड मिलेंगे। ये भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानी किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। इससे किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका मिलेगा और वे इन भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे। सहमति देने की प्रक्रिया जमीन मालिक अपनी सहमति एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर में जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसकी पावती उन्हें दी जाएगी। सहमति मिलने के बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और इसके आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी। रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋ ण नहीं है। यदि जमीन पर ऋण है, तो संबंधित बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देना होगा। रजिस्ट्री के बाद किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार भूखंड आरक्षित कर सूचित किया जाएगा और परियोजना पूरी होने पर इनका कब्जा और रजिस्ट्री उनके नाम होगी। समस्या आई तो हम रहेंगे साथ विधायक ठाकुर ने किसानों से कहा कि औद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा। किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा खड़ी हूं। वर्मा ने योजना को क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी। दावे-आपत्तियों का अंतिम निराकरण कॉरिडोर को लेकर एमपीआइडीसी ने दावे-आपत्ति बुलाए थे, जिसमें 700 लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। पहले चरण में सभी दावे-आपत्तियों को सुना गया था। अब सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड देकर जमीन ले रही है तो बड़ी संख्या में किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं। मंगलवार को आपत्तिकर्ताओं की आखिरी सुनवाई होगी। बताया गया है कि कुछ कॉलोनाइजरों की भी जमीन है और वे अड़े हुए हैं।

इंदौर में बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं, अभियान में 35 हजार ओरल कैंसर और 10,768 सवाईकल कैंसर से पीड़ित पाए गए

इंदौर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए निरोगी काया अभियान के तहत कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस अभियान में 5 लाख 90 हजार से अधिक इंदौरियों की जांच की गई, जिसमें 62 हजार से अधिक लोग ब्लड प्रेशर और 45 हजार से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए। इसके अलावा, 17,156 लोगों को दोनों ही बीमारियां यानी उच्च रक्तचाप और शुगर एक साथ पाई गईं। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि इंदौर में लोग अव्यवस्थित खान-पान और फास्टफूड के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इंदौर में बढ़ रही जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं इंदौर जैसे खाने-पीने के शौक़ीन शहर में अब स्वास्थ्य समस्याएं भी तेजी से बढ़ने लगी हैं। तला-भुना और फास्टफूड खाने के कारण युवाओं में ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। निरोगी काया अभियान के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि 10 प्रतिशत से अधिक लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं। यह चौंकाने वाली बात है कि इन बीमारियों से प्रभावित कई लोग अब भी इससे अनजान हैं और समय रहते उपचार नहीं करा रहे हैं। निरोगी काया शिविर और जांच अभियान स्वास्थ्य विभाग द्वारा केंद्र सरकार की पहल पर चलाए गए इस निरोगी काया अभियान के तहत जिला अस्पताल और संजीवनी क्लिनिकों पर जांच शिविर लगाए गए। इन शिविरों में यह पाया गया कि अनियमित खानपान और इंदौरियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी के कारण युवाओं में नॉन-एल्कोहोलिक फेटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 21 प्रतिशत लोगों में इस बीमारी के लक्षण पाए गए। 26,727 व्यक्तियों की जांच में लगभग 10 प्रतिशत लोग इस समस्या से पीड़ित थे, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान निरोगी काया अभियान में मुंह के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के भी मामले सामने आए हैं। अभियान के दौरान 35 हजार लोग ओरल कैंसर और 10,768 लोग सवाईकल कैंसर से पीड़ित पाए गए। इनमें से 1500 से अधिक मरीजों को अन्य गंभीर जांचों के लिए भेजा गया। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इंदौर में स्वास्थ्य जागरूकता की कमी के कारण गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं और समय रहते उनका इलाज न करने से ये बीमारियां खतरनाक रूप ले सकती हैं।  

इंदौर में हुई 36 मौतों में कोई दोषी नहीं, मामले में ट्रस्ट के दोनों पदाधिकारी बरी

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 2 साल पहले हुए चर्चित बेलेश्वर बावड़ी हादसे में बड़ा अपडेट सामने आया है। 100 से अधिक लोगों में 36 लोगों की जान जान जाने का दर्दनाक हादसा हुआ था। हादसे में महादेव झूलेलाल मंदिर न्यास के अध्यक्ष सेवाराम गलानी और सचिव मुरली कुमार सबनानी को 22 मार्च 2024 को पुलिस ने अरेस्ट किया था। इस हादसे की दूसरी बरसी के कुछ दिनों बाद ही इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। भारतीय दंड विधान की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दर्ज शिकायत में अरेस्ट हुए अध्यक्ष और सचिव को कोर्ट से बरी कर दिया है। एक साल तक चले ट्रायल के बाद गुरुवार को जिला कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। साथ ही पुलिस पर सही से जांच नहीं करने की बात कही। 33 लोगों की हुई गवाही बावड़ी हादसे में गलानी और सचवि सबनानी के लिए वकील राघवेंद्र सिंह बैस ने केस लड़ा। इस मामले में सुनवाई के दौरान 33 गवाह पेश किए गए। सुनवाई में यह सामने आया कि आसपास रहने वालों के साथ ही अन्य लोगों को भी यह नहीं पता था कि नीचे बावड़ी है। इन हालातों में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की कोई गलती नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में अध्यक्ष और सचिव को बिना वजह आरोपी बनाया गया। इस बारे में जानकारी देते हुए बचाव पक्ष के एक वकील राघवेंद्र सिंह बैस ने मीडिया कर्मियों को बताया कि इस केस का फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सुनाया, जिन्होंने बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सेवाराम गलानी और सचिव मुरली कुमार सबनानी को भारतीय दंड विधान की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), धारा 323 (जान-बूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 325 (जान-बूझकर गंभीर चोट पहुंचाना) के आरोपों से मुक्त कर दिया। उन्होंने कहा,‘अदालत ने मेरे दोनों मुवक्किलों को सबूतों के अभाव में आरोपों से बरी किया।’ बैस के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने उनके दोनों मुवक्किलों पर आरोप साबित करने के लिए अदालत में कुल 33 गवाह पेश किए थे जिनमें कुछ सरकारी अधिकारी भी थे। बचाव पक्ष के वकील बैस ने बताया कि गवाहों में शामिल इंदौर विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी ने अदालत में बयान दिया कि हादसे से जुड़ी बावड़ी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों ने भी इस बावड़ी को लेकर अनभिज्ञता जताई, जबकि निगम का एक कार्यालय घटनास्थल के एकदम पास स्थित है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर का फर्श 30 मार्च 2023 को रामनवमी के मौके पर हो रहे हवन-पूजन के दौरान ढह गया था। इस दौरान फर्श के नीचे बनी बावड़ी में गिरकर 21 महिलाओं और दो बच्चों समेत 36 लोगों की जान चली गई थी। प्रशासन ने हादसे के चार दिन बाद 3 अप्रैल 2023 को बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर के देवी-देवताओं की मूर्तियां अन्य देवस्थान में पहुंचाई थीं। इसके बाद आम लोगों की सुरक्षा का हवाला देते हुए बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर को ढहा दिया था। और भीषण हादसे की गवाह रही बावड़ी को मलबा डालकर हमेशा के लिए बंद कर दिया था।  

मास्टर प्लान की सड़कें शहर के यातायात को संभालने में असमर्थ, नई सड़कों और ब्रिज की आवश्यकता, तेजी से काम करना होगा

इंदौर  मास्टर प्लान के तहत बनने वाले मेजर रोड में हुई देरी का खामियाजा लंबे समय तक शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। 17 पहले बनी योजना के तहत बन रही ये सड़कें भी अब शहर का यातायात संभालने में सक्षम नहीं होंगी। एजेंसियों को नई सड़कों के साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेजी से काम करना होगा। इधर मास्टर प्लान के तहत सड़कों का निर्माण अधूरा होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खोदी गई सड़कें यातायात को कर रही बाधित सड़कों का काम समय पर पूर्ण नहीं होने से लाखों लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। अधूरी और खोदी हुई सड़कें यातायात को बाधित कर रही हैं। इनकी वजह से रोज हादसे हो रहे हैं। जिन सड़कों का निर्माण शुरू किया गया है, उनका काम भी धीमी गति से जारी है। ऐसे में लोगों को धूल और गड्ढों के कारण परेशान होना पड़ रहा है। जिन सड़कों पर काम हुआ, वह भी टुकड़ों-टुकड़ों में बनी हैं और आधी-अधूरी हालत में छोड़ दी गई हैं। एमआर-5, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कों की लागत अब कई गुना बढ़ गई है। देरी से बढ़ गई निर्माण लागत मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कें दशकों तक नहीं बनने के कारण निर्माण लागत बढ़ गई है। कई लोगों को अन्य स्थानों पर विस्थापित करना पड़ेगा। एमआर-3 की निर्माण लागत शुरुआत में 34 करोड़ थी, जो अब 50 करोड़ के पार पहुंच गई है। एमआर-4 की लागत भी 55 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। एमआर-11 को बनाने में 75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। एमआर-12 को बनाने में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है। अन्य शहरों को जाने वाले वाहन शहर में करते हैं प्रवेश एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण पूरा नहीं होने से भोपाल और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को उज्जैन रोड जाने के लिए शहर में प्रवेश करना पड़ता है। वर्तमान में इन वाहनों का सर्वाधिक दबाव एमआर-10 पर है। यदि एमआर-11 बन गया होता तो बायपास से वाहन एबी रोड पहुंच सकते थे। एमआर-12 के बनने से वाहनों को एबी रोड और उज्जैन रोड तक की सीधी कनेक्टिविटी मिलने लगती। इन दोनों सड़कों के अधूरे होने से अभी विजय नगर क्षेत्र में वाहनों का खासा दबाव देखा जाता है। इनका निर्माण हुआ शुरू, लेकिन कई बाधाएं -एमआर-4 : रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी को जोड़ने वाली इस सड़क पर कई निर्माण सड़क पर आ रहे हैं। – एमआर-5 : इंदौर वायर से बड़ा बांगड़दा तक बनने वाली सड़क पर भी लक्ष्मीबाई मंडी के आगे सुपर कारिडोर की तरफ कई अतिक्रमण हैं। – एमआर-11 : बायपास से एबी रोड तक बनने वाली इस सड़क पर कई अतिक्रमण हैं। इस सड़क का समय पर निर्माण नहीं होने से कई विकास अनुमतियां जारी हो गईं। अब इसका सर्वे कर नया लेआउट तय किया जा सकता है। – एमआर-12 : बायपास से एबी रोड होते हुए उज्जैन रोड को जोड़ने वाली सड़क पर बाधाएं हैं। गत दो साल से टुकड़ों में इसका निर्माण किया जा रहा है। कैलोदहाला कांकड़ पर 100 से ज्यादा घरों की बाधा है। इनको विस्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। टुकड़ों- टुकड़ों में बनाया     मास्टर प्लान की प्रमुख सड़क एमआर-11 को बनाने का काम शुरू हो चुका है। दो साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। एमआर-12 का चार किमी हिस्सा टुकड़ों-टुकड़ों में बनाया जा चुका है। शेष सड़क का काम जारी है। कान्ह नदी पर पुल का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही कैलोदहाला रेलवे क्रासिंग पर आरओबी का काम शुरू किया जाएगा। सिंहस्थ तक इस सड़क को बनाने का लक्ष्य रखा गया है। – आरपी अहिरवार, सीईओ, आईडीए सड़कों के लिए राशि आवंटित हुई     मास्टर प्लान की कुछ सड़कों का काम शुरू हो गया है और कुछ का काम जल्द शुरू होगा। हमारा लक्ष्य सिंहस्थ से पहले मास्टर प्लान की सभी सड़कों को तैयार करने का है। हमें पूरा विश्वास है कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे। सड़कों को चार पैकेज में करने का उद्देश्य भी यही है। सड़कों के लिए राशि आवंटित हो चुकी है। कार्यादेश भी जारी हो गए हैं। ऐसे में दिक्कत नहीं आएगी। – शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त इंदौर    

कोर्ट ने कहा ट्रैफिक जाम की स्थिति हर कहीं बनती, इसके लिए नगर निगम के जनहित में लिए गए फैसले पर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता

इंदौर  शहर की छप्पन दुकान के मामले में मंगलवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यहां 56 दुकान के सामने बने बगीचे व अन्य व्यवस्थाओं को हटाकर ट्रैफिक शुरू करने के लिए याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि ट्रैफिक जाम की स्थिति हर कहीं बनती है, इसके लिए नगर निगम द्वारा जनहित में लिए गए फैसले पर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता. क्या है 56 दुकान ट्रैफिक जाम का मामला? दरअसल, इंदौर हाई कोर्ट में 56 दुकान के सामने मौजूद कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के दुकान संचालकों ने ये याचिका दायर की थी. इंदौर हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि 56 दुकान के सामने बनाए गए बगीचे व बैठक व्यवस्था ट्रैफिक संचालन में बाधा है और इसे हटाकर ट्रैफिक शुरू किया जाए. इंदौर हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद दुकान संचालक की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रैफिक जाम दुनिया के लिए कोई नई बात नहीं है. अगर वाहनों को एमजी रोड से 56 दुकान क्षेत्र की ओर मोड़ा गया तो बड़ी समस्या हो सकती है. निगम के काम में हस्तक्षेप नहीं करेगा कोर्ट कोर्ट ने आगे कहा, ” वर्तमाम में एमजी रोड से 56 दुकान में वाहनों को जाने की अनुमति नहीं है. कई वाहन एमजी रोड पर रुकते हैं या पार्क किए जाते हैं, जिससे जाम लगता है. नगर निगम उस जगह बैरिकेडिंग का निर्णय सुविचार और सार्वजनिक हित में लिया गया है, इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है.” इस मामले में इंदौर नगर निगम की ओर से अधिवक्ता कमल एरन ने पैरवी की. उन्होंने कोर्ट के समक्ष विभिन्न तर्क रखे, जिसके बाद कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के व्यापारियों द्वारा लगाई गई याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया. क्या है 56 दुकान? दरअसल, इंदौर में 56 दुकान एक तरह की चौपाटी है. यहां देश और दुनिया के तमाम तरह के व्यंजन चखने मिल जाते हैं. फूडी, ट्रैवलर्स और लोकल लोगों के बीच छप्पन दुकान काफी लोकप्रिय है. छप्पन दुकान का नाम यहां मौजूद 56 दुकानों की वजह से पड़ा. यहां 100 से ज्यादा वैरायटी का स्वादिष्ट खाना व फास्ट फूड लोगों को मिलता है, यही वजह है कि यहां सुबह 6 बजे से लेकर रात 10 बजे तक रौनक रहती है और अब यह इंदौर की पहचान भी बन चुका है.

इंदौर में रात के समय शहर की सड़कों और स्थानों को साफ किया जा रहा

 इंदौर इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण बीते तीन दिन से जारी है। चार दिन तक शहर में टीम रहेगी और अलग-अलग पैमानों पर स्वच्छता को परखा जाएगा। पिछले साल तीन दिन में ही टीम रवाना हो गई थी, लेकिन इस बार इंदौर को स्वच्छता की प्रीमियर लीग में शामिल किया गया है, इसलिए बारिकी से मुआयना किया जा रहा है। नगर निगम के अफसरों को पूरी उम्मीद है कि इस बार भी इंदौर स्वच्छता में पहले पायदान पर होगा, लेकिन ज्यादातर शहरवासी मान रहे है कि बीते साल वर्षों की तुलना में इस साल सफाई व्यवस्था थोड़ी कमजोर हुई है। इंदौर में रात के समय शहर की सड़कों और स्थानों को साफ किया जा रहा है, ताकि सुबह जब टीम सफाई व्यवस्था देखने निकले तो उन्हें शहर साफ नजर आए। इंदौर की स्वच्छता को दस पैमानों पर आका जा रहा है। इसमें शहर की सड़कों की सफाई, कचरा संग्रहण व्यवस्था, ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, सीवरेज के पानी का पुर्नउपयोग, सफाईकर्मियों के उत्थान के लिए होने वाले काम और सबसे महत्वपूर्ण शहरवासियों का फीडबैक है। दिल्ली से आई टीम शहर की बस्तियों, आवासीय क्षेत्रों के अलावा ट्रेंचिंग ग्राउंड, गोबरधन प्लांट को भी देखेंगी। टीम सुबह के समय घूम रही है, जब घर-घर जाकर वाहन कचरा लेने जाते है। इंदौर की सबसे बड़ी ताकत डोर टू डोर कलेक्शन इंदौर की सफाई की सबसे बड़ी ताकत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन है। शहर में पांच तरीकों से कचरा घरों से लिया जाता है। ज्यादातर शहरों में यह व्यवस्था ही ठीक नहीं हो पाई है। इंदौर में सात साल पहले इसके दम पर ही स्वच्छता रैंकिंग में पहला पुरस्कार पाया था।   वर्ष 2017 में तत्कालीन मेयर मालिनी गौड़ ने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने की कोशिश की थी। उन्हें साथ मिला भोपाल नगर निगम आयुक्त से तबादला होकर आए मनीष सिंह का। उन्होंने सबसे पहले इंदौर को खुले में शौच से मुक्त करने पर जोर दिया। जगह-जगह शौचालय बनवाए। इसके बाद शहर के कुछ वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था लागू की। कचरा उठाने वाली एटूझेड कंपनी का ठेका निरस्त किया और सफाईकर्मियों ने व्यवस्था संभाली। फिर पूरे वार्ड में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन होने लगा और शहर से कचरा पेटियां हटा ली गई। शहर साफ रहने लगा और इंदौर वर्ष 2017 की स्वच्छता रैंकिंग में पहले स्थान पर था। इसके बाद छह बार फिर इंदौर को पुरस्कार मिला बेकलन में गंदगी सबसे बड़ी कमजोरी इंदौर की बेकलेन में कचरा डालने की सिलसिला फिर शुरू हो गया। पहले स्पाॅट फाइन के चक्कर में लोग कचरा फेंकने से डरते थे, लेकिन अब फिर कचरा नजर आने लगा है। इसके अलावा फूल-पत्तियों का कचरा भी परेशानी बना हुआ है। सूखे पत्ते, फूल सड़कों पर फैले रहते है। यह कचरा दिनभर इधर-उधर उड़ता रहता है।

इंदौर में ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण होगा

इंदौर   इंदौर में कलेक्टर गाइडलाइन लगभग तैयार हो चुकी है। इस पर पंजीयन विभाग ने दावे-आपत्तियों को मंगाया था। डेढ़ सौ से अधिक आपत्तियां  आई है। जिसका निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद गाइडलाइन का प्रारुप राज्य सरकार को भेजा जाएगा। 1 अप्रैल ले नई कलेक्टर गाइड लाइन तैयार हो जाएगी। इंदौर में 3200 लोकेशनों पर गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है, जबकि 240 नई काॅलोनियों को गाइडलाइन के दायरे में लिया गया है। इस बदलाव से प्राॅपर्टी के कीमतों में भी वृद्धि होगी। सालभर हुए सौदों के आधार पर गाइडलाइन में बदलाव किया गया। इंदौर में सबसे ज्यादा तेजी खंडवा रोड़ और उज्जैन रोड़ पर देखने को मिली है। खंडवा रोड पर फोरलेन निर्माण हो रहा है, जबकि इंदौर उज्जैन रोड पर छह लेन बन रहा है। इंदौर में बड़े ग्रुप भी रियल इस्टेट सेक्टर में आ चुके है। 32 लोकेशनों के ज्यादातर इलाके शहरी सीमा से सटे है। इनमे बाइपास, सुपर काॅरिडोर, गांधी नगर जैसे क्षेत्र शामिल है। ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण पंजीयन विभाग के पास अलग-अलग तरह की आपत्तियां आई है। कुछ आपत्तियां ग्रीन बेल्ट को लेकर भी है। जिसमें कहा गया है कि ग्रीन बेल्ट की जमीनों के ज्यादा सौंदे नहीं होते है। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण अलग से किया जाना चाहिए। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की खरीदी बिक्री में छूट को बहाल करने की मांग भी की गई है। मास्टर प्लान में 89 गांवों को जोड़ा गया है। वहां भी प्राॅपर्टी गाइडलाइन में बदलाव हुए है। इंदौर में कुछ लोकेशनों पर 30 से लेकर 40 प्रतिशत तक गाइड लाइन बढ़ाई गई है। इंदौर एक में 531,इंदौर दो में 596, इंदौर तीन में 658, इंदौर चार में 425, महू में 429, सांवेर में 348,देपालपुर में 329 लोकेशनो पर गाइडलाइन बदली है। अब समिति के इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही एक अप्रैल से नई गाइडलाइन के हिसाब से पंजीयन विभाग में रजिस्ट्रियां होगी।

इंदौर में निगम अमले ने पहले तीन मंजिला बिल्डिंग पर बनाए पेंटा हाउस को तोड़ा, फिर तल मंजिल पर किए गए अवैध निर्माण को हटाया

इंदौर इंदौर के धार कोठी क्षेत्र में नगर निगम ने गुरुवार सुबह अवैध निर्माण हटाया। मौके पर पहुंचे अमले ने पहले तीन मंजिला बिल्डिंग पर बनाए गए अवैध पेंटा हाउस को तोड़ा, फिर तल मंजिल पर किए गए अवैध निर्माण को हटाया। एक माह पहले भवन मालिक को नगर निगम ने स्वेच्छता से अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा था, लेकिन तय समय के बावजूद निर्माण नहीं तोड़ा गया, इसलिए गुरुवार सुबह रिमूवल गैंग ने मौके पर पहुंच कर निर्माण तोड़ दिया। नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा से इस बिल्डिंग को लेकर जी प्लस थ्री के निर्माण की अनुमति मिली थी, लेकिन आगे एमअेाएस को कवर कर लिया गया था और छत पर पेंटा हाउस भी बना लिया गया था। जिस इलाके में तीन मंजिल भवन बनाया गया है। वह आवासीय है, लेकिन यहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थी। इसे लेकर भी पवित्र आत्मा संघ की अध्यक्ष गीता जोसेफ को नोटिस दिया था, लेकिन व्यावसायिक गतिविधियां बंद नहीं की गई। इस इलाके में कुछ अन्य भवनों में भी नक्शे के विपरित निर्माण हुआ है। निगम की तरफ से उन भवनों को भी नोटिस जारी हुए है।

इंदौर के रंग पंचमी में उमड़ी लाखों की भीड़, विदेशी पर्यटक भी बने हिस्सा, सड़कें 38 मिनट में साफ, निगम ने किया करिश्मा

इंदौर  मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर की पहचान देश के सबसे साफ सुथरे शहर के तौर पर है, यह बात एक बार फिर रंगपंचमी के दिन निकली गेर के बाद जाहिर भी हो गई। यहां गेर में शामिल लगभग पांच लाख लोगों ने होली खेली, इसके बाद सड़कों पर बिखरी गंदगी को नगर निगम के अमले ने महज 38 मिनट में साफ कर दिया। रंग पंचमी के मौके पर राजवाड़ा क्षेत्र में निकली गेर में लगभग 5 लाख लोग शामिल हुए। इस दौरान क्षेत्र में रंग-गुलाल, चप्पल, जूते, प्लास्टिक की थैलियां, कपड़े आदि से कचरा और गंदगी हो गई। जब गेर समाप्त हुई, तब राजवाड़ा क्षेत्र में चारों ओर कचरा ही कचरा दिखाई दे रहा था। चारों ओर कचरा, जूते, चप्पल, कपड़े, प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें, धूल, मिट्टी पड़ी हुई थी। नगर निगम के अमले ने आज फिर से यहां की सफाई को चुनौती के रूप में लिया। नगर निगम के अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा की देखरेख में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अखिलेश उपाध्याय द्वारा राजवाड़ा क्षेत्र और आसपास की गलियों में सफाई का अभियान प्रारंभ किया गया। मौके पर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया भी सफाई कर्मियों का हौसला बढ़ाने पहुंचे। नगर निगम के सफाई कर्मी वाकई सम्मान के पात्र हैं कि उन्होंने राजवाड़ा क्षेत्र की सफाई मात्र 38 मिनट में पूरी कर ली। रंगपंचमी के मौके पर व्यापारिक नगरी में गेर निकलती है रंगपंचमी के मौके पर व्यापारिक नगरी में गेर निकलती है और इसमें शामिल लाखों लोग अबीर-गुलाल और रंगों से जमकर होली खेलते हैं। यह आयोजन देश और दुनिया में अपने तरह का आयोजन है। यहां वाहनों पर मोटर रखकर रंग और गुलाल खूब उड़ाया जाता है और यह नजारा बुधवार को भी देखने को मिला। कोई भी ऐसा नहीं था जो रंग से बचा हो। मंत्री विजयवर्गीय और मंत्री तुलसी सिलावट ने गेर में भाग लिया। इस बार फाग यात्रा में विशेष रूप से झांकियां भी शामिल की गईं। इन झांकियों में ब्रज की प्रसिद्ध लट्ठमार होली, रासरंग और श्रीकृष्ण की झांकी प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरकर सामने आईं। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए इंदौर के लोग छतों पर बैठने के लिए पहले से ही बुकिंग करवा चुके थे। फाग यात्रा में मंत्री तुलसी सिलावट और विधायक मालिनी गौड़ भी शामिल हुईं। वहीं, संगम कॉर्नर की गेर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय रथ पर सवार होकर यात्रा में भाग ले रहे थे। सीएम यादव गेर में नहीं हुए शामिल इंदौर की गेर धूमधाम से मनाई गई । लेकिन, अब इसमें सीएम मोहन यादव शामिल नहीं हुए । जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर एयरपोर्ट से सीधे  उज्जैन के लिए रवानाहुए । टोरी कॉर्नर पर हुए हादसे के कारण उन्होंने गेर में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।   तीन बेहोश हुए, अस्पताल भेजा गेर में लाखों लोग मौजूद हैं। इससे कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ रही है। अधिक भीड़ के कारण गेर में शामिल तीन लोग बेहोश होकर सड़क पर गिर गए। जिन्हें एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया।   गैर में छाया भगवा रंग गेर के दौरान राजवाड़ा में एक हादसा भी हो गया। ट्रैक्टर का पहिया एक 45 वर्षीय शख्स के पेट के ऊपर से निकल गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इंदौर में जहां-जहां से गेर गुजरी, वहां रंग और कीचड़ हो गया था। गेर निकलने के बाद नगर निगम के अमले ने आज फिर से यहां की सफाई को चुनौती के रूप में लिया। नगर निगम के अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा की देखरेख में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अखिलेश उपाध्याय द्वारा राजवाड़ा क्षेत्र और आसपास की गलियों में सफाई का अभियान प्रारंभ किया गया। मौके पर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया भी सफाई कर्मियों का हौसला बढ़ाने पहुंचे। नगर निगम के सफाई कर्मी वाकई सम्मान के पात्र हैं कि उन्होंने राजबाड़ा क्षेत्र की सफाई मात्र 38 मिनट में पूरी कर ली। गेर के दौरान टैंकर की चपेट में आने से युवक की मौत वहीं, इंदौर के राजवाड़ा पर रंगपंचमी की गेर के दौरान एक हादसा भी हो गया। यहां एक युवक टैंकर की चपेट में आ गया। टैंकर का पहिया उसके पेट से गुजर गया। उसे एम्बुलेंस की मदद से एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने टैंकर ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है। मृतक की पहचान सनी मौर्य (उम्र 24 वर्ष) निवासी रुक्मिणी नगर के रूप में हुई है। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल हुआ तो उसके दोस्त राहुल सेन ने उसे पहचान लिया। राहुल ने यह खबर उसकी मां को दी और वे तत्काल एमवाय अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम पहुंचे।  

अब चंदन नगर चौराहे पर बनेगा फ्लाई ओवर, ट्रैफिक का दबाव होगा काम, जाम से मिलेगी निजात

 इंदौर  इंदौर के गंगवाल बस स्टैंड से चंदन नगर चौराहा होते हुए धार रोड आना-जाना किसी मुसीबत से कम नहीं है। यहां दिनभर ट्रैफिक का दबाव रहता है और कई बार जाम लगता है। यह समस्या जल्द हल होने वाली है, क्योंकि चंदन नगर चौराहे पर फ्लाई ओवर बनेगा। महापौर के प्रस्ताव पर इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) ब्रिज का फिजिबिलिटी सर्वे कराएगा। ट्रैफिक समस्या से राहत इंदौर में ट्रैफिक समस्या के निदान के लिए प्रमुख चौराहों पर ओवर ब्रिज बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में चंदन नगर चौराहे का नाम भी दर्ज होने जा रहा है। इस चौराहे से धार, रतलाम, झाबुआ और अहमदाबाद से इंदौर आने-जाने वाले वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों के अलावा ट्रेवल्स की बसों और बड़ी संख्या में निजी वाहनों की आवाजाही भी रहती है। भारी ट्रैफिक होने से हर दिन सुबह व शाम जाम लगता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि चंदन नगर चौराहे पर फ्लाई ओवर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसे आइडीए बनाएगा। सिक्स लेन फ्लाई ओवर जिला अस्पताल के पास से शुरू होकर सिरपुर तालाब के आगे उतरेगा। डेढ़ लाख से अधिक गुजरते हैं वाहन चंदन नगर चौराहे से करीब डेढ़ लाख वाहन नियमित गुजरते हैं। धार रोड पर दूर-दूर तक बसाहट होने से रहवासी भी शहर में आने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। सड़क किनारे सब्जी व फल वाले ठेला लगा लेते हैं, जिससे ट्रैफिक उलझता है और हटाने के बात पर कई बार विवाद की स्थिति बन चुकी है। फ्लाई ओवर बनने से यह समस्या भी दूर होगी। डेढ़ दर्जन चौराहों का हो रहा सर्वे हाल ही में आइडीए ने भंवरकुआं, फूटी कोठी, खजराना और लवकुश चौराहे पर ओवर ब्रिज बनाए हैं। इनसे काफी राहत मिली है। शहर के अन्य डेढ़ दर्जन से अधिक चौराहों पर ब्रिज को लेकर फिजिबिलिटी सर्वे चल रहा है। नगर निगम बनाएगा सड़क तीन दशक से अधूरे पश्चिमी रिंग रोड को पूरा करने की तैयारी है। चंदन नगर से मोहता बाग के बीच 18 मीटर चौड़ी और दो किमी लंबी सड़क नगर निगम बनाएगा। इसके लिए शासन से 25.63 करोड़ मांगे हैं। शहर के मध्य व दक्षिण से वाहन चालकों को एयरपोर्ट रोड की ओर जाने व आने के लिए यह सड़क काफी राहत वाली साबित होगी। अभी राज मोहल्ला, बड़ा गणपति से कालानी नगर वाले मार्ग से आना-जाना पड़ता है।

इंदौर में 3 किलोमीटर लंबी गेर में मुख्यमंत्री मोहन यादव, एनआरआई सहित लाखों लोग शामिल होंगे

इंदौर  रंगों के त्योहार को पूरे जोर-शोर से मनाने बनाने के लिए इंदौर नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली हैं. इस बार इंदौर की गेर में आकर्षक झांकियां भी देखने मिलेंगे जो टोरी कॉर्नर से शामिल होंगी. वहीं सबसे खास नजर रहेगी नगर निगम के हाथी पर जो 150 फीट की दूरी तक लोगों पर रंग फेंकेगा. आइए जानते इंदौर की गेर और नगर निगम के इस हाथी के बारे में. 20 फीट का हाथी बरसाएगा गेर में रंग दरअसल, इंदौर नगर निगम की वर्कशॉप में वेस्ट मटेरियल और मशीनी पार्ट्स से 20 फीट का एक हाथी बनाया गया है. यह हाथी अपने सिर को चारों तरफ घूमाएगा और सूंड से लगभग डेढ़ सौ फीट ऊंचाई तक रंगों की बौछार करेगा. सोमवार को इस हाथी को अंतिम रूप दिया गया है और इसकी टेस्टिंग भी पूरी कर ली गई है. वहीं दूसरी गेर में एक मंच पर खड़ी चार स्वच्छता दीदी लोगों को रंगों से सराबोर करेंगी. इसके साथ ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपनी एमआईसी टीम के साथ लोगों पर रंग वर्षा करते नजर आएंगे. मुख्यमंत्री और एनआरआई भी होंगे शामिल महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने बताया कि गेर में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल होने आ रहे हैं। सभी व्यवस्था की जा चुकी है। महापौर ने बताया कि पिछले दो साल से नगर निगम भी आधिकारिक रूप से शामिल हो रहा है। इस बार नगर निगम की गेर रहेगी, एनआरआई का रथ भी रहेगा। 500 से ज्यादा सफाई मित्र रहेंगे तैनात गेर के बाद सफाई व्यवस्था की भी पूरी तैयारी की जा चुकी है। 500 से ज्यादा कर्मचारी और संसाधन एक साथ लगकर रिकॉर्ड टाइम में पूरे गेर मार्ग को साफ करेंगे। इस बार के भी फोटो-वीडियो यूनेस्को को भेजे जाएंगे। भारत सरकार से भी निवेदन किया है कि यूनेस्को में पत्र भेजे और उनकी विजिट कराए। गेर के लिए अब तक की तैयारियां राजवाड़ा को ढंका गया इंदौर की विशेष पहचान राजवाड़ा को ढंकने का काम किया जा चुका है। बड़ा पीला प्लास्टिक राजवाड़ा पर लगा गया है ताकि रंगों के कारण इसे नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही गोराकुंड और सराफा क्षेत्र में बिल्डिंगों को बड़े प्लास्टिक से ढंका गया है। कई लोग भी अपने घरों को रंग-गुलाल से बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर कर रहे हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाया पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गेर के पूरे रूट में 100 से 200 मीटर के सेक्टर बनाए जा रहे हैं, ताकि उसमें प्रभावी तरीके से सुरक्षा व्यवस्था की जा सके। साथ ही अन्य आकस्मिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाए जा रहे हैं। हाइराइज की व्यवस्था भी की जा रही है। गेर वाली रूट पर सीसीटीवी, एंबुलेंस तमाम व्यवस्थाएं आज 19 मार्च बुधवार को परम्परागत रूप से निकल जाने वाली रंगपंचमी की गेर को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं. पूरे मार्ग पर ‍निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, साथ ही कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. बेरिकेटिंग से लेकर आकस्मिक चिकित्सा के लिए भी प्रबंध किए गए हैं. निर्धारित स्थानों पर एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों की व्यवस्था भी रहेगी. इंदौर शहर की पहचान बन चुके इस त्योहार को देखन के लिए गेर वाले रूट पर नागरिकों के बैठने का भी प्रबंध किया गया है. इंदौर नगर निगम द्वारा बनाया गया रंग फेंकने वाला हाथी वहीं बिजली विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस विभाग की टीमों ने एकसाथ टोरी कार्नर, मल्हारगंज से लेकर राजबाड़ा, कृष्णपुरा तक के गेर मार्ग का निरीक्षण किया और तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया है. सुरक्षा दृष्टि से बीच-बीच में बंद की जाएगी बिजली गेर मार्ग पर केबल व तार पर्याप्त व सुरक्षात्मक हाइट पर किए गए हैं, वहीं कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मर के पुराने, क्षतिग्रस्त बॉक्स बदले गए हैं. कई इलाकों में रंग व पानी से बचाव के लिए कवर लगाए गए हैं. वहीं सुभाष चौक जोन पर बिजली कंपनी का अस्थाई कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. ऐतिहासिक गेर के दौरान फायर फायटर से 100 से 150 फीट की ऊंचाई तक रंग उड़ाया जाएगा. इस दौरान सुरक्षात्मक कारणों से 11 केवी लाइन के कुल 14 फीडरों से अलग-अलग समय पर बिजली बंद की जाएगी. आपात स्थिति के लिए तैयार है प्रशासन कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि गेर को लेकर सभी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गेर मार्ग पर आइडेंटिफिकेशन किया गया है। कहां-कहां मंच लगाने हैं, कहां वॉच टावर बनेंगे, सीसीटीवी कैमरे लगाने की जगह भी निर्धारित की गई है। गलियों में बीच-बीच में एग्जिट रूट बनाए हैं। वहां एम्बुलेंस भी रहेगी, अगर कोई घटना हो जाती है तो उसके जरिए बाहर निकाला जा सकता है। कैबिनेट के आने की सूचना नहीं है, लेकिन हमारी पूरी तैयारी है। बैलगाड़ी से हुई थी गेर की शुरुआत गेर आयोजक कमलेश खंडेलवाल ने बताया कि आज से 75 साल पहले उनके पिता प्रेमस्वरूप खंडेलवाल, बाबूलाल गिरी और सत्यनारायण सत्तन साहब ने मिलकर इंदौर में गेर की शुरुआत की थी। बैलगाड़ी से शुरू हुआ गेमिसाइल, टैंकर, डीजे सहित मॉडर्न साधनों तक पहुंच चुका है। इस गेर की पहचान पूरे देशभर में है। गेर आयोजक शेखर गिरी ने बताया कि गेर 48 और 50 के दशक में बाबूलाल गिरी और छोटे लाल गिरी ने निकाली थी। हमारी एक पीढ़ी गेर निकाल चुकी है। दूसरी पीढ़ी गेर का संचालन कर रही है। मेरे बाद भी मेरे भाई और भतीजे भविष्य में गेर को निकालेंगे। गेर खेलने छतों की कराई जाती है बुकिंग गेर में अब ट्रैक्टर-ट्रॉली, डीजे, पानी के टैंकर और अन्य गाड़ियां शामिल होने लगी हैं। रंगपंचमी की गेर देखने के लिए लोग छतों पर बुकिंग कराने लगे हैं। पहले की अपेक्षा अब लाखों की संख्या में लोग इस गेर में शामिल होने लगे हैं। नगर निगम गेर में पिछले दो साल से आधिकारिक रूप से शामिल होने लगा है। इसमें अब एनआरआई भी शामिल होने के लिए आने लगे हैं।

इंदौर में लगा गंजों का मेला… बाल उगाने की गारंटी देने वाले से तेल लगवाने जुटे हजारों

इंदौर बाल झड़ने की समस्या और गंजेपन से जूझ रहे हजारों लोग इंदौर में एक साथ इकट्ठे हुए तो हर कोई हैरान रह गया. पता चला कि बिना बाल वालों की भीड़ ‘जादुई तेल’ के लिए लगी हुई. यह तेल दिल्ली से लगाने के लिए सलमान भाई आए हैं. दावा किया गया कि तेल से बाल उग आते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही सलमान भाई मौके से भाग निकले. इंदौर के डाकाचाइया इलाके में जादुई तेल लगवाने आए जवान, अधेड़ और बूढ़े लोगों को इतनी बड़ी संख्या में देख हर कोई अचंभित रह गया. दिल्ली से सलमान भाई के आने की खबर सुनकर सुबह 6 बजे से ही तेल लगवाने के लिए हजारों बिना बाल वाले लोग लाइन लगाकर खड़े हुए थे.  मौके पर इतनी भीड़ हो गई थी कि पुलिस को व्यवस्था संभालने के लिए तैनात करना पड़ा. दरअसल, खुद को दिल्ली निवासी बताने वाला सलमान भाई नाम का शख्स एक खास तेल और दवा लगाकर गंजेपन को दूर करने का दावा करता है. बालों की कमी से परेशान लोग सुबह से लेकर रात तक इस तेल को लगवाने के लिए मशक्कत करते हुए नजर आए. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गंजे लोगों को देखकर स्थानीय लोग हंसी नहीं रोक पाए, क्योंकि यह दृश्य कुछ खास था. इंदौर के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग इस तेल का इस्तेमाल करने के लिए घंटों लंबी लाइन में खड़े रहे. हालांकि, यह पूरी घटना इंदौर में एक मजेदार दृश्य पैदा कर गई, जहां लोग अपनी परेशानी से जादुई तरीके से निजात पाने के लिए इंतजार कर रहे थे. इस मेला ने इलाके में अनोखा माहौल बना दिया. हंसी-मजाक के बीच लोग अपने बाल वापस पाने की उम्मीद में दिन-भर अपनी अपनी बारी का इंतजार करते रहे. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ. हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद सलमान मौके से निकला. लेकिन कुछ लोगों ने सलमान के सहयोगी रईस अहमद को पकड़ लिया. दावा किया जा रहा है कि यूपी के मेरठ में भी इसी सलमान ने 20 रुपये की दवा और 300 रुपये का तेल देकर तमाम लोगों से बाल उगाने का वादा किया. अब इंदौर के लोगों से भी वादा करके गया है कि वह दोबारा आएगा और तेल लगाकर जाएगा. ‘आजतक’ इस तरह के किसी भ्रामक उत्पाद का समर्थन नहीं करता है. पाठकों को सलाह है कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल न करें.  

देवी अहिल्या की नगरी में 17 फरवरी से प्रदेश की मेयर काऊंसिल , मुख्यमंत्री भी होंगे शामिल

इंदौर इंदौर को प्रदेशभर के महापौरों आएंगे। 17 फरवरी को इंदौर में प्रदेश स्तरीय महापौर परिषद का सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव वर्चुअली जुड़ेंगे बतौर मध्यप्रदेश महापौर परिषद के अध्यक्ष होने के नाते पुष्यमित्र भार्गव इस आयोजन की अध्यक्षता करेंगे। दूसरे शहरों के नगरीय निकायों के मेयरों को इंदौर की सैर भी कराई जाएगी। शहर की सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी दी जाएगी। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, ट्रेंचिंग ग्राउंड, गोबरधन प्लांट की सैर भी कराई जाएगी। ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में आयोजित होने वाली बैठक में अखिल भारतीय महापौर परिषद की अध्यक्ष माधुरी पटेल ,राज्य मंत्री प्रतिभा बागरी समिलित होंगी।साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी ऑन लाईन आयोजन में सम्मिलित होंगे और मेयरों से चर्चा भी करेंगे। इस एक दिनी सम्मेलन में शहरों के विकास से जुड़े मुद्दों बजट आवंटन, महापौर के अधिकार बढ़ाने संबंधी विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के नियमों में बदलाव को लेकर भी चर्चा होगी। मेयर को मालवा के प्रसिद्ध व्यंजन भी परोसे जाएंगे। इसके अलावा 56 दुकान की सैर भी कराई जाएगी। इससे पहले देवास में प्रदेश के मेयरों का सम्मेलन हुआ था। इंदौर में तत्कालीन मेयर कैलाश विजयवर्गीय और कृष्णमुरारी मोघे के कार्यकाल में अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन भी हो चुका है।  

देश का सबसे स्वच्छ शहर नए साल में बनेगा भिक्षावृत्ति से मुक्त, इंदौर में भीख देने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई

इंदौर। इंदौर को भिखारी मुक्त शहर बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। फरवरी से शुरू हुए अभियान के पहले चरण में अगस्त तक भिक्षावृत्ति करने वालों और उनके परिजनों को भीख नहीं मांगने को लेकर समझाई दी गई। सितंबर से दिसंबर तक भिक्षुकों का रेस्क्यू किया जा रहा है। अब नए साल से इंदौर में भीख मांगने और भीख देने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। स्वच्छ शहर इंदौर को भिक्षुक मुक्त शहर बनाने के लिए जारी अभियान में एक जनवरी से तीसरा चरण शुरू किया जाएगा। इसमें भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहित कर भीख देने वालों पर कार्रवाई शुरू होगी। अब तक 300 से अधिक को उज्जैन सेवाधाम आश्रम भेजा कलेक्टर आशीष सिंह ने भिक्षा देने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के आदेश पूर्व में जारी किए जा चुके है। तीन चरणों में शुरू हुए अभियान का दूसरा चरण रेस्क्यू किया जा रहा है। इसमें अब तक तीन सौ से अधिक बुजुर्गों और व्यस्कों का रेस्क्यू कर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा जा चुका है। वहीं 34 बाल भिक्षुकों को रेस्क्यू भी किया गया है। कलेक्टर ने अब तीसरे चरण का अभियान शुरू करने के निर्देश दिए है।

इंदौर में भिखारी के पास 75 हजार कैश देखकर हैरान रह गए अधिकारी, बोली- एक हफ्ते की कमाई है

इंदौर इंदौर शहर का अपना मिजाजा है, इसे मिनी मुंबई भी कहा जाता है। हाल ही में यहां से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसके बारे में जानकर हर कोई दंग है। इस शहर को भिक्षुक मुक्त करने के अभियान चलाया जा रहा है, इसी बीच एक महिला भिक्षुक का रेस्क्यू करने जब अफसर पहुंचे तो उसने अपनी साड़ी में 75 हजार से अधिक कैश छिपाकर रखे थे। पुलिस अधिकारी ने जब एक रुपये से लेकर 500 तक के नोट देखे तो वे दंग रह गए। महिला के पास नोट ही नोट निकलने लगे। अधिकारी के अनुसार, महिला ने बताया कि यह उसकी एक हफ्ते की कमाई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के इंदौर को भिक्षुक मुक्त करने की दिशा में महिला बाल विकास विभाग बड़ी कार्रवाई कर रही है। इसी के तहत 14 भिक्षुओं को पकड़ा गया है। इनमें एक महिला ने भीख मांगकर हफ्ते में 75 हजार रुपये इकट्ठा कर लिए। अधिकारी महिला के पास इतना कैश देख दंग रह गए। महिला ने यह कैश अपनी साड़ी में छिपाकर रखे थे। इस हिसाब से यह महिला महीने में 3 लाख और सालाना इनकम 36 लाख रुपये कमाती होगी। अधिकारी ने इस महिला को महिला बाल विकास विभाग ने उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा है। उज्जैन के सेवा धाम आश्रम ले जा रहे सभी भिक्षुक कलेक्टर आशीष सिंह इंदौर शहर को भिक्षुक मुक्त करने के अभियान चला रहे हैं। महिला बाल विकास अधिकारी दिनेश मिश्रा के नेतृत्व में लगभग 14 अलग-अलग टीमें शहर के तमाम इलाकों में जाकर मंदिरों और धार्मिक स्थलों से भिक्षा वृत्ति करने वाले लोगों को पड़कर सेवा धाम आश्रम उज्जैन भेज रही हैं। अब तक टीम ने कई इलाकों से महिलाओं और बुजुर्गों को पकड़कर उज्जैन के सेवा धाम आश्रम भेज दिया है। इस दौरान अधिकारी की नजर राजवाड़ा के समीप शनि मंदिर के पास भीख मांग रही एक महिला पर पड़ी। जब उसकी जांच की गई तो उसने अपनी साड़ी में 75 हजार से अधिक कैश छिपाकर रखे थे। अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि महिला ने एक सप्ताह में 75 हजार रुपये भिक्षा वृत्तिकर यह राशि जमा की थी महिला इंदौर के पालदा इलाके की बताई जा रही है। ऐसे कई और लोगों को भी पकड़ा गया है जो 7 से 8 बार भिक्षावृत्ति करते हुए पहले भी पकड़े गए थे, इनका पेशा की भिक्षावृत्ति है। उज्जैन के सेवा धाम आश्रम में इनकी काउंसलिंग की जाएगी और फिर इ्न्हें समाज की मुख्य धारा में लाने का काम किया जाएगा, ताकि ये सामान्य जिंदगी जी सकें।

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