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रेत का बैखौप उत्खनन नदियां हो रही बर्बाद पर्यावरण को भी भारी नुकसान

बड़वारा क्षेत्र के संगम घाट में रेत का बैखौप उत्खनन नदियां हो रही बर्बाद पर्यावरण को भी भारी नुकसान नियमों की उड़ रही धज्जियां जिम्मेदारों ने शादी चुप्पी कटनी । रेत के अवैध उत्खनन को लेकर जिला वैसे भी विख्यात है नदियों को उजाड़ कर ऐसो आराम की जिंदगी जीने वाले किस तरह प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं यह सभी जानते हैं मजे की बात तो यह है कि इनके रखवाले जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं देते हैं जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं जिले के बड़वारा तहसील क्षेत्र के महानदी के संगम घाट,नया नौआ , पुराना नौआ घाट और बंदर कूदनी घाट में धनलक्ष्मी कंपनी के कर्मचारी बंदूक की दम पर अवैध रेत उत्खनन कर रहे है। रात्रि में संगम घाट से लाई जा रही अवैध रेत के वाहनों को ग्रामीणों ने रोक लिया। कंपनी के हथियारों से लैस कर्मचारी ग्रामीणों से विवाद करने लगे। ग्रामीणों का कहना है की बंदूक की नोक पर प्रशासन की नाक के नीचे अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। खनिज विभाग और पुलिस के संरक्षण में राजस्व का चूना सरकार को जमकर लगाए जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वाहन रोकने पर हथियारों से लैस कर्मचारी मारपीट करने लगते हैं। नदियों का सीना चीर के रेत को इस तरह निकाला जा रहा है नदियां खून के आंसू रो रही हैं आसपास के जंगली जानवर पशु पक्षियों पर भी भारी खतरा मंडरा रहा है लेकिन जिम्मेदार विभाग के कानों में जू तक नहीं रेंगती है

अफसर नहीं कर रहे काम, भ्रष्टाचार हावी सरकारी जमीनों में अतिक्रमण के मामले लंबित,

Officers are not working, cases of encroachment are pending in government lands dominated by corruption, बगैर चढौतरी दिए नहीं हो रहे काम नामांतरण और सीमांकन कराने आमजन परेशान, अफसर नहीं कर रहे काम भ्रष्टाचार हावी सरकारी जमीनों में अतिक्रमण के मामले भी लंबित हैं Special Correspondent, Sahara Samachaar, Katni. कटनी। किसानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर समय पर काम नहीं हो रहा है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हजारों नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के प्रकरण लंबित पड़े हैं। राजस्व वर्ष बीतने के कुछ माह शेष हैं, बावजदू इसके प्रकरणों का समय पर निराकरण नहीं हो रहा है। तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम कार्यालय में प्रकरणों का निराकरण करने अफसर कई प्रकरणों में रूचि नहीं ले रहे हंै। प्रकरण न सिर्फ अफसरों के लिए चुनौती बने हैं बल्कि कई जगह भ्रष्टाचार हावी होने के चलते लंबित पड़े हैं। कलेक्टर द्वारा सतत निगरानी और समीक्षा किए जाने के बाद भी लोगों को न्याय न मिलना सवालों के घेरे में है। रेवन्यू केस मनेजमेंट सिस्टम (आरसीएमएस) भी पक्षकारों के लिए काम नहीं आ रहा है। जिलेभर में 4 हजार 389 प्रकरण लंबित हैं। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के प्रकरणों का समय से निराकरण नहीं होने के चलते जमीनी विवाद बढ़ रहे हैं। सरकारी गैर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के भी प्रकरण बढ़े हैं। जबकि नियम है कि अधिकतम 45 दिन के भीतर विवादित प्रकरणों का निराकरण करना है। यहां लंबित हैं इतने प्रकरणकार्यालय दर्ज लंबिततहसीलदार नगर 3389 900नायब तहसीलदार सिलौंड़ी 363 64नायब तहसीलदार उमरियापान 999 88नायब तहसीलदार सिनगौड़ी 811 326नायब तहसीलदार बिलहरी 1204 219नायब तहसीलदार मुड़वारा-2 1496 330नायब तहसीलदार पहाड़ी 689 121नायब तहसीलदार बाकल 1015 147तहसीलदार स्लीमनाबाद 1868 284तहसीलदार विजयराघवगढ़ 1233 306तहसीलदार बरही 1476 299तहसीलदार बड़वारा 1923 296तहसीलदार रीठी 1735 322तहसीलदार कटनी 1154 223तहसीलदार ढीमरखेड़ा 785 176तहसीलदार बहोरीबंद 1426 279 यह है लंबित प्रकरणों की स्थितिनामांतरण के प्रकरण जो सीधे दर्ज हुई हैं उनकी लंबी लिस्ट है जो लंबित पड़े हैं। तीन माह से 2 हजार 978 प्रकरण, 3 से 6 माह तक के अंतराल में 1024 प्रकरण, 6 माह से एक वर्ष तक 373 प्रकरण, एक से दो वर्ष तक 14 प्रकरण लंबित पड़े हैं। लोग कार्यालयों के चक्कर काटकर परेशान हैं। लोकसेवा केंद्र से पहुंचे मामले भी लंबितसरकार द्वारा लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया गया है, जिसके तहत एकदम तय मियाद में काम होने हैं। लोकसेवा के माध्यम से 16 तहसीलदार व नायब तहसीलदार कार्यालय में भेजे एक हजार से अधिक सीमांकन, नामांतरण के प्रकरण लंबित हैं। इसमें 1330 सीमांकन व 55 प्रकरण नामांतरण के लंबित हैं। जबकि इनको 30 दिवस के अंदर कार्रवाई व 3 दिवस के अंदर पटवारी व आरआइ के द्वारा रिकॉर्ड सुधार कर दिया जाना था। प्रकरणों में समझें गफलतबाजीकेस-1नायब तहसीलदार मुड़वारा द्वारा 5 अक्टूबर 23 को नामांतरण प्रकरण में आदेश पारित किया गया कि रामलाल पिता सुखनंदी पटेल निवासी ग्राम जुहला द्वारा पटवारी हलका नंबर 27 रानिमं मुड़वारा-2 खसरा नंबर 266/2 रकबा 0.538 हेक्टेयर का नक्शा बटांकन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने पर आदेश हुआ। यह जमीन शहडोल बायपास मार्ग पर स्थित है, लेकिन इस मामले में बटांकन करने के स्थान पर हलका पटवारी विनीत सिंह द्वारा एसडीएम न्यायालय में पुन: मौका की जांच कर कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव पेश किया गया। इस मामले की सुनवाई करते हुए 10 नवंबर को अनुविभागीय अधिकारी ने सुनवाई के बाद आदेश पारित किया कि प्रकरण में राजस्व निरीक्षक द्वारा पंचनामा एवं नक्शा बंटाकन प्रस्ताव में आरआइ व पटवारी के हस्ताक्षर हैं। लेकिन आदेश पर अमल न करते हुए पटवारी द्वारा 16 अक्टूबर को न्यायालय के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया गया वहीं दूसरी ओर बंटाकनधारियों ने कोई आपत्ति नहीं लगाई। एसडीएम न्यायालय ने नायब तहसीलदार के आदेश को स्थिर रखा है व पटवारी के इस कृत्य को एसडीएम ने संदेहास्पद माना है। आरई व पटवारी को रिकॉर्ड दुरुस्त करने आदेश 10 नवंबर को पारित किया गया, बावजूद इसके आदेश का पालन नहीं हुआ। केस 02खसरा का ही नहीं बताया पताकमल कुमार यादव निवासी रेलवे कॉलोनी झुकेही ने 27 मई 2019 को शिवा बिल्डकॉन आदर्श कॉलोनी कटनी में 105 नंबर प्लाट क्रय किया गया। नामांतरण के लिए तहसीलदान नगर न्यायालय में 12 जुलाई 19 को प्रकरण लगाया गया। यहां से प्रकरण खारिज हो गया कि जहां पर जमीन ली गई है व किस खसरे का अंशभाग है वह अंकित नहीं है, बैनामा में खसरे का संशोधन कराएं। 25 सितंबर 19 को मामला एसडीएम न्यायालय में पहुंचा। तहसीलदार के आदेश को अनुविभागीय अधिकारी ने स्थित रखा। इसके बाद कमल कुमार द्वारा 17 फरवरी 2020 को प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में अपील की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कॉलोनाइजर द्वारा भी कोई मदद नहीं की गई। 19 अगस्त 21 में उपभोक्ता फोरम से भी खसरे का संसोधन के लिए आदेश हुआ, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, जबकि अन्य लोगों के नामांतरण यहीं पर कर दिए गए हैं। केस यह भीरकबा हो गया खत्मप्रीति यादव निवासी गाताखेड़ा तसहीलदार न्यायालय कटनी ग्रामीण में लोक सेवा के माध्यम से 21 जनवरी 2020 को प्रकरण नामांतरण के लिए पेश किया गया। 12 मार्च 20 को तहसीलदार ने आदेश पारित करते हुए पटवारी को तीन दिवस के अंदर रिकॉर्ड दुरुस्त करने कहा गया, लेकिन अबतक नहीं हुआ, जबकि पटवारी द्वारा अन्य 15 लोगों के रिकॉर्ड का सुधार कर दिया गया है। जब निष्पादन का आवेदन लगाया गया तो पटवारी ने यह कह दिया कि वहां पर रकबा खत्म हो गया है। जब अनुविभागीय अधिकारी के 28 अप्रेल 22 को अपील की गई तो यहां भी कोई हल नहीं निकला, अब फिर द्वितीय अपील में 28 अप्रेल से मामला कलेक्टर न्यायालय में है। केस 4एक साल में नहीं सुधरा रिकॉर्डप्रेमशंकर यादव निवासी गाताखेड़ा का प्रकरण में सुनवाई करते हुए नामांतरण के लिए नवंबर 22 में प्रकरण तहसीलदार न्यायालय में लगाया गया। माह मार्च में आदेश हो गया था, 5 हजार की पेनाल्टी भी लगी, जिसे चालान के माध्यम से जमा किया गया। पटवारी को रिकॉर्ड दुरुस्त करने के आदेश हुए, लेकिन आजतक रिकॉर्ड अद्यतन नहीं हुआ, भूमि स्वामी दो साल से परेशान है। चढ़ोत्तरी प्रथा हावीसूत्रों के हवालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कई जगह पर भ्रष्टाचार हावी है। बगैर चढ़ोत्तरी के नामांकन, सीमांकन, बटांकन आदि काम हो ही नहीं रहे हैं। पूर्व में … Read more

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