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पानी के बाद अब सब्जियों में भी जहर! प्रदूषण बोर्ड का खुलासा; हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

After water, now vegetables are also poisoned! Pollution Board reveals; High Court asks government for report सार मप्र हाईकोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जबलपुर के नालों का पानी सीवेज से अत्यंत दूषित है। इस पानी से उगाई जा रही सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। युगलपीठ ने सरकार को तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। विस्तार हाईकोर्ट में मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से तरफ से पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि नाले के दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जी मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं। शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिलता है। जिस कारण वह अत्यंत दूषित हो गया है और उसका उपयोग निस्तार और सिंचाई के लिए किया जाना मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को निर्देशित किया है कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल अमल करते हुए रिपोर्ट पेश करें। याचिका पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को नियत की गई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक विधि छात्र के द्वारा पत्र लिखकर बताया गया था कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को नाले के दूषित पानी का उपयोग की सब्जी की खेती होती है। ऐसी सब्जी का उपयोग मानव जीवन के लिए खतरनाक है। चीफ जस्टिस ने पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये थे। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल नाले की पानी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे। याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और प्रदूषण बोर्ड की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नाला, मोती नाला , खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य नालों से पानी का सैंपल लेकर जांच की थी। जांच के बाद इनके पानी में बीओडी, टोटल कोलीफार्म या फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानक सीमा से अधिक है। नमूना रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट है कि यह अनुपचारित सीवर का जल है जो पीने, नहाने या खेती सहित किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में 174 मेगा लीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है। प्लांट्स की कुल क्षमता 154.38 मेगा लीटर प्रतिदिन की है। इसके लिए समय-समय पर करोड़ों रुपये की राशि का आवंटन भी किया गया है। हाल ही में नगर निगम जबलपुर को अमृत 2.0 सीवर योजना अंतर्गत 1202.38 करोड़ राशि स्वीकृत हुई है। पीबीसी की तरफ से नाले के पानी को दूषित होने के बचाने के लिए सुझाव भी दिये गये थे। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये।

Vastu Tips: क्यों पहले के समय में गोबर से होती थी घर की लीपाई? क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ?

why were homes plastered with cow dung

why were homes plastered with cow dung in earlier times pehle ke samay me gobar se kyon leepa jata tha आज भी जब हम गांव जाते हैं तो सुबह की पहली किरण के साथ जो सोंधी खुशबू उठती थी, वह सिर्फ मिट्टी की नहीं, गोबर से लिपे आंगनों की होती थी। यह परंपरा असल में सनातन धर्म की उन गहराइयों से जुड़ी है जहां हर वस्तु का एक दिव्य और व्यावहारिक अर्थ छुपा होता है। गोबर से घर लीपने से वह शुद्ध और ठंडा बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पहले के समय में घर को गोबर से क्यों लीपा जाता है। क्या ये सिर्फ एक चली आ रही कोई परंपरा थी, या इसके पीछे कुछ कारण भी थे? आइए जानते हैं। क्यों गोबर से लीपा जाता था घर?सनातन परंपरा में गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले जब घर के आंगन को गोबर से लिपा जाता है, तो वह सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि भूमि को ऊर्जा देने की एक क्रिया होती है। शास्त्रों में तो यहां तक कहा गया है कि गोबर में लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए कहते हैं, “गोमय वसते लक्ष्मी”। इसका अर्थ यही है कि जहां गोबर है, वहां समृद्धि, सकारात्मकता और पवित्रता खुद आ जाती है। पंचगव्य बनाने में भी आता है कामगोबर केवल धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल नहीं होता है, बल्कि यह पंचगव्य का भी एक आवश्यक हिस्सा है, जिसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी आदि शामिल है। इन पांच तत्वों का मिश्रण न केवल आध्यात्मिक शुद्धिकरण करता है, बल्कि यह आयुर्वेद में एक औषधीय तत्व के रूप में भी प्रयोग होता है। कुछ पुराणों में यह साफ बताया गया है कि पंचगव्य का सेवन पापों को हरने वाला और रोगों को मिटाने वाला होता है। शुभ कार्य के दौरान गोबर का किया जाता है इस्तेमालधार्मिक ग्रंथों में गोबर का जो स्थान है, इसे किसी भी प्रकार से बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताया गया है। अथर्ववेद से लेकर गरुड़ पुराण और मनुस्मृति तक में गोबर और गाय से जुड़े पदार्थों की महिमा का वर्णन मिलता है। इसलिए जब भी घर में कई त्यौहार मनाया जाता है या फिर कोई शुभ कार्य, जैसे कि हवन या पूजा किया जाता है तो पूरे घर को गोबर से लीपा जाता है, जिससे घर में लक्ष्मी का वास हो और घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि हो। घर में मक्खियों, मच्छरों को भी दूर भगाता है गोबरबता दें कि गोबर कीट-पतंगों से रक्षा करने में काफी असरदार साबित होता है। गोबर से घर में मक्खियां, मच्छर, और कीट दूर रहते हैं। यही कारण है कि गांवों में गोबर से लिपे घरों में रोगों का प्रकोप कम देखा गया है। इसके अलावा, यह पूरी तरह जैविक है, पर्यावरण के अनुकूल है, और धरती को हानि नहीं पहुंचाता। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए “SAHARA SAMACHAAR” उत्तरदायी नहीं है।

इंजेक्शन, टैबलेट या फिर लिक्विड…शरीर में दवा पहुंचाने का क्या है सबसे सही तरीका?

medication into the body

injection tablet or liquid what is the fastest way to get medication into the body Way to Get Medication into the Body : किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर डॉक्टर उनकी स्थिति के हिसाब से उन्हे दवाएं देते हैं. डॉक्टर अपने मरीजों को दवाएं कई रूपों में देते हैं, जिसमें टैबलेट, कैप्सूल, लिक्विड सिरप, इंजेक्शन या फिर इन्हेलर जैसे अन्य विकल्प होते हैं. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इनमें से किस तरह की दवाएं सबसे अधिक असरदार होती हैं? तो आपको बता दें कि इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह की समस्या हुई है और आपकी स्थिति कितनी गंभीर है. आइए जानते हैं इस बारे में- टैबलेट और कैप्सूल टैबलेट और कैप्सूल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है. इन्हें लेना आसान होता है, ये लंबे समय तक स्टोर की जा सकती हैं और कम खर्चीली भी होती हैं. हालांकि, इन्हें पचने और खून में घुलने में समय लगता है, इसलिए ये उन बीमारियों में दी जाती हैं जिनमें तुरंत असर की जरूरत नहीं होती, जैसे – सामान्य बुखार, दर्द, एलर्जी, ब्लड प्रेशर इत्यादि स्थितियों में टैबलेट और कैप्सूल जैसी दवाएं दी जाती हैं. लिक्विड जिन मरीजों के निगलने की क्षमता कम होती है, जैसे- छोटे बच्चे या बुजुर्ग, उन्हें दवाएं लिक्विड दी जाती हैं. लिक्विड में मिलने वाली दवाएं जल्दी अवशोषित होती हैं और स्वाद के अनुसार बनाई जाती हैं. पर इनकी मात्रा का सही निर्धारण जरूरी होता है. इंजेक्शन किसी भी मरीज को इंजेक्शन तब दिया जाता है, जब दवा को शरीर में तुरंत पहुंचाना होता है. इंजेक्शन सबसे सबसे प्रभावी तरीका होता है. ये सीधे खून में (IV), मांसपेशी (IM) या स्किन के नीचे (SC) दिए जाते हैं. इंजेक्शन गंभीर संक्रमण, एलर्जी रिएक्शन या सर्जरी के समय इसका इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से तेज बुखार, डिहाइड्रेशन, गंभीर संक्रमण, डायबिटीज (इंसुलिन) जैसी स्थितियों में दिया जाता है. सबसे सही तरीका कौन सा है? दवाएं देने का कोई सही तरीका नहीं होता है. यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि बीमारी की गंभीरता क्या है? दवा कितनी जल्दी असर दिखानी चाहिए? मरीज की उम्र और शारीरिक स्थिति क्या है? हर दवा देने का तरीका अपनी जगह सही होता है. डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं. खुद से दवाओं का रूप या तरीका बदलना खतरनाक हो सकता है, इसलिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है.

लाइफस्टाइल- गर्मियों में फायदेमंद गन्ने का जूस: लू से बचाए, शरीर को रखे हाइड्रेटेड, डाइटीशियन से जानें किन्हें नहीं पीना चाहिए

Lifestyle:Sugarcane juice is beneficial in summers: Protects from heat wave, keeps the body hydrated, know from dietician who should not drink it हेल्थ डेस्क: आपने गर्मी के मौसम में अपने आसपास गन्ने का जूस बिकते जरूर देखा होगा। तेज धूप और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोग इसे खूब पीते हैं। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह शरीर को हाइड्रेट के साथ-साथ एनर्जेटिक भी रखता है। इसके अलावा गन्ने का रस पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, इम्यूनिटी बूस्ट करने और स्किन को हेल्दी बनाए रखने में भी मददगार है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। फार्माकोग्नॉसी जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने के जूस के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में पीलिया व यूरिन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए गन्ने का जूस पीने की सलाह दी जाती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स का खजाना होता है। गन्ना अनुसंधान केंद्र की एक स्टडी के मुताबिक, इसके जूस में हाई पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो पावरफुल फाइटोन्यूट्रिएंट्स हैं। गन्ने के जूस में बैड कोलेस्ट्रॉल से लड़ने की क्षमता होती है। साथ ही ये मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है। इसलिए, आज जरूरत की खबर में गन्ने का जूस पीने के फायदों के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- क्या इसे ज्यादा पीने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं? किन लोगों को गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- गन्ने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गन्ने में 70-75% पानी, 13-15% सुक्रोज (नेचुरल शुगर) और 10-15% फाइबर होता है। हालांकि गन्ने का जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर लगभग खत्म हो जाता है। नीचे दिए ग्राफिक में 250ml जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू जानिए- सवाल- गन्ने का जूस सेहत के लिए किस तरह से फायदेमंद है? जवाब- गन्ने के जूस में मौजूद विटामिन C और फ्लेवोनोइड्स व फेनोलिक जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ये एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग ड्रिंक्स है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में पानी होता है। गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर, फाइबर और इनवर्टेज जैसे एंजाइम होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गन्ना सुक्रोज और ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट का एक नेचुरल सोर्स है, जो इंस्टेंट एनर्जी देता है। गन्ने के डाइयूरेटिक गुण यूरिन के जरिए शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार हैं। गन्ने में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। इसमें मौजूद कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट्स स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। ये उम्र बढ़ने के संकेतों जैसे झुर्रियां, महीन रेखाएं और स्किन के दाग-धब्बे को कम करते हैं। वहीं पॉलीफेनोल और पोटेशियम जैसे कंपाउंड कार्डियो प्रोटेक्टिव होते हैं। गन्ने के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आर्टरीज की सूजन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं। इसका जूस शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट को भी बैलेंस करता है। इस तरह ये हमें गर्मी में हीट स्ट्रोक के खतरे से बचाता है। नीचे दिए ग्राफिक से गन्ने का जूस पीने के कुछ फायदे समझिए- सवाल- गन्ना या गन्ने का जूस क्या ज्यादा फायदेमंद है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि चाहे गन्ने की बाइट चबाएं या उसका जूस पिएं दोनों ही फायदेमंद है। हालांकि गन्ने में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है। इसलिए जूस पीने से ज्यादा इसे चबाना बेहतर है। सवाल- क्या गन्ने में बर्फ डालकर पीना सेहत के लिए अच्छा है? जवाब- बर्फ डालने से गन्ने का रस ठंडा हो जाता है, जिससे गर्मी में ताजगी मिलती है। ठंडा गन्ने का जूस पीने से गर्मी से तुरंत राहत मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को इससे सर्दी-जुकाम, खांसी या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बहुत ज्यादा बर्फ वाला गन्ने का रस पीने से बचना चाहिए। सवाल- गन्ने का जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- गन्ने का जूस निकालने के तुरंत बाद पीना सबसे अच्छा होता है। बासी गन्ने के जूस में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। गन्ने का जूस हमेशा किसी साफ और स्वच्छ दुकान से ही पिएं। जिस मशीन से जूस निकाला जा रहा है, वह साफ-सुथरी होनी चाहिए। गन्ने का जूस पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर से पहले का होता है। खाली पेट गन्ने का जूस नहीं पीना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी हो सकती है। गन्ने के जूस में थोड़ा सा काला नमक और नींबू का जूस और पुदीना मिलाकर पीने से इसका स्वाद और न्यूट्रिशन दोनों बढ़ जाता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस किडनी स्टोन में फायदेमंद है? जवाब- गन्ने का जूस किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें ऑक्सालेट कम होता है। जो शरीर में पथरी बनने से रोकने में मदद कर सकता है। इसके डाइयूरेटिक गुण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और नए स्टोन्स के प्रोडक्शन को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा गन्ने के जूस में पोटेशियम, मैग्नीशियम और कई अन्य ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। गन्ने का रस शरीर में पानी की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे किडनी में पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग गन्ने का जूस पी सकते हैं? जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटिक लोगों को इसे पीने से बचना चाहिए। सवाल- एक दिन में कितना गन्ने का जूस पीना सुरक्षित है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में एक गिलास गन्ने का जूस पी सकता है। इससे ज्यादा पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सवाल- क्या गन्ने का जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट भी हैं? जवाब- गन्ने का जूस पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है। हालांकि इसके अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है। साथ ही ब्लड शुगर हाई हो सकता है। इसके अलावा दांत खराब हो सकते हैं और पाचन … Read more

ऐसे फल और सब्जियां जो खुद बताते हैं कि मैं किस चीज के लिए फायदेमंद हूं…

Fruits and vegetables that tell me what they are good for… हमारी प्रकृति हमें वो सब कुछ देती है जिसकी हमारे शरीर को जरूरत होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ फल और सब्जियां अपने आकार और बनावट से यह संकेत देती हैं कि वे हमारे शरीर के किस अंग के लिए फायदेमंद हो सकती हैं? प्रकृति ने हमें जो भी दिया है, वह किसी न किसी रूप में हमारे शरीर के लिए लाभकारी है। जरूरत है तो बस इसे सही तरीके से समझने और अपने आहार में शामिल करने की!

दिनभर आराम, फिर भी खूब हो रही थकान? हो जाएं सावधान, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

Fatigue- Weakness Causes : ज्यादा काम और भागदौड़ से थकान होना काफी आम है. यह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हो सकती है. लेकिन अगर अच्छा-खासा आराम करने के बावजूद भी थकान और कमजोरी हो रही है तो स्थिति गंभीर है. ये किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, थकान और कमजोरी के एक नहीं कई कारण हो सकते हैं. खानपान में पोषण की कमी, मानसिक तनाव, खराब लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद न लेना या फिर बीमारियों की वजह से ऐसा हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं बिना काम थकान-कमजोरी महसूस होना कितनी खतरनाक, क्या करना चाहिए.. बहुत ज्यादा थकान होने का कारण हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे लोग जिन्हें पोषक तत्व सही तरह नहीं मिल पाते हैं, उन्हें ज्यादा थकान महसूस हो सकती है. खासतौर पर शरीर में आयरन की कमी होने से हीमोग्लोबिन का लेवल घट जाता है और ऑक्सीजन की सही तरह सप्लाई नहीं हो पाती है. जिससे ज्यादा थकान महसूस होती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में करीब 30% लोगों में आयरन की कमी है. इसके अलावा विटामिन-D और B12 की कमी से भी थकान हो सकती है. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, लंबे समय तक तनाव बने रहने से शरीर की एनर्जी खत्म होने लगती है. क्रॉनिक स्ट्रेस और डिप्रेशन से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे थकान महसूस होने लगती है. इसका एक कारण यह भी है कि ज्यादा चिंता नींद को प्रभावित करने लगती है, जिससे थकान ज्यादा होने लगती है. एनीमिया (Anemia) की वजह से भी ज्यादा थकान महसूस हो सकती है. दरअसल, इस बीमारी में शरीर पर्याप्त रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता है और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होने लगती है,जो थकान और कमजोरी का कारण बन सकती है. इसके अलावा थायरॉइड (Thyroid) में भी शरीर में सुस्ती और थकान हो सकती है. थकान होने के अन्य कारण

छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों का मजा दोगुना करें हरे मटर के तीखे कबाब के साथ, जानें इसे बनाने की पूरी रेसिपी

hare matar kabab recipe jane ise banane ki aasan recipe Hare Matar Kabab Recipe: सर्दी में कुछ खास और सेहतमंद खाने की तलाश में हैं तो हरे मटर के तीखे कबाब आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं। यह कबाब स्वाद में तो लाजवाब होते ही हैं, साथ ही आपकी सेहत का भी ध्यान रखते हैं। तो इस सर्दी आप भी स्वादिष्ट और पौष्टिक कबाबों को घर पर बनाकर स्वाद का आनंद ले सकते हैं। Hare Matar Kabab Recipe: सर्दियों की ठंडी हवाएं दस्तक देने के साथ ही गरमागरम और मसालेदार खाने की चाहत बढ़ा देता है। ऐसे में हरे मटर के तीखे कबाब (Hare Matar Kabab Recipe) न केवल आपके स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। अगर आप इस सर्दी कुछ अलग और मजेदार ट्राई करना चाहते हैं, तो ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है। आइए जानते हैं, इसे बनाने की शानदार रेसिपी। हरे मटर कबाब बनाने की विधि हरे मटर कबाब के फायदे हरे मटर के कबाब न केवल स्वाद में बेहतरीन होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद होते हैं। आइए जानते हैं इन कबाबों के कुछ प्रमुख लाभ

सेहत के लिए खतरा! क्या पैकेट बंद खाना वाकई सेहतमंद है? नई रिसर्च ने उठाए सवाल

food why packaged food items under question items included in research भारत में लोगों के खाने-पीने का तरीका बदल रहा है और यह बदलाव सेहत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. ICMR ने बताया कि देश में 56.4% बीमारियां खराब खानपान की वजह से हो रही हैं. भारतीयों की पसंद और नापसंद बदल रही है, खासकर तब जब बात खाने की होती है. पहले के समय में लोग ज्यादातर कच्ची सब्जियां, फल और साबुत अनाज खाते थे, लेकिन आजकल पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड का चलन बढ़ गया है.कुछ डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने मिलकर भारत में बिकने वाले पैकेट बंद फूड की जांच की है. यह जानने के लिए कि ये फूड सेहत के लिए कितने अच्छे या बुरे हैं. उन्होंने यह भी देखा कि पैकेट पर जो कुछ लिखा है, वह सही है या नहीं. यह रिसर्च Plos One नाम की एक मशहूर मैगजीन में छपी है. इस रिसर्च को करने वालों में ये लोग शामिल थे: चेन्नई के मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डॉक्टर, भारत के मेडिकल रिसर्च काउंसिल के विशेषज्ञ और इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर. पैकेट बंद फूड: लेबल पर सही जानकारी, फिर भी सेहत के लिए खतरा! पैकेट बंद फूड के लेबल पर लिखी पोषण जानकारी हमें उस फूड में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में बताती है. यह जानकारी ग्राहकों के लिए बहुत जरूरी होती है क्योंकि इससे वे यह तय कर सकते हैं कि वह फूड उनकी सेहत के लिए कितना अच्छा या बुरा है.इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने भारतीय बाजार में उपलब्ध 432 पैकेट बंद फूड के लेबल की जांच की. इनमें इडली मिक्स, ब्रेकफास्ट सीरियल, दलिया मिक्स, बेवरेज मिक्स और फूले हुए स्नैक्स जैसे पैकेज्ड फूड शामिल थे.रिसर्च में पाया गया कि 80% पैकेट बंद फूड में लेबल पर लिखी जानकारी सही थी. यानी जो पोषक तत्व लेबल पर लिखे थे, वे प्रोडक्ट में मौजूद थे. ज्यादातर पैकेज्ड फूड में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. दरअसल, हमारे शरीर को एनर्जी के लिए कार्बोहाइड्रेट की जरूरत होती है, लेकिन अगर हम जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो यह हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारी हो सकती है. फूले हुए स्नैक्स में वसा की मात्रा ज्यादा मिली. वसा भी एनर्जी देता है, लेकिन ज्यादा वसा से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से क्या होता है? जब हम खाना खाते हैं तो वह ग्लूकोज में बदल जाता है. यह ग्लूकोज हमारे खून में मिल जाता है. इंसुलिन ग्लूकोज को हमारे शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा बनाने के लिए किया जाता है.ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से हमारे अग्न्याशय को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है. अगर यह ज्यादा समय तक चलता रहे, तो अग्न्याशय कमजोर हो सकता है और टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है. पैकेट बंद फूड की जांच: कैसे पता चला कौन सा सेहतमंद है? पैकेट बंद फूड की जांच करने के लिए विशेषज्ञों ने एक खास तरीका अपनाया. उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के हिसाब से पैकेज के आगे और पीछे लिखी पोषण जानकारी की जांच की. इस अध्ययन में सिर्फ प्रोटीन, फाइबर, वसा, चीनी और कोलेस्ट्रॉल से जुड़े पोषण संबंधी दावों का मूल्यांकन किया गया. विशेषज्ञों ने पैकेट बंद फूड में मौजूद प्रोटीन, फाइबर, वसा, चीनी और कोलेस्ट्रॉल की जांच की. फिर उन्होंने एक खास सिस्टम का इस्तेमाल करके यह तय किया कि कौन सा फूड सेहतमंद है और कौन सा नहीं. यह जानकारी लोगों को सेहतमंद पसंद चुनने में मदद कर सकती है. पैकेट बंद फूड में क्या मिला? ज्यादातर पैकेट बंद फूड में 70% से ज्यादा एनर्जी कार्बोहाइड्रेट से मिल रही थी. सिर्फ फूले हुए स्नैक्स ही ऐसे थे जिनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम थी. फूले हुए स्नैक्स में 47% से ज्यादा एनर्जी वसा से मिल रही थी. ज्यादा वसा से भी सेहत को नुकसान हो सकता है. सभी पैकेज्ड फूड में प्रोटीन की मात्रा 15% से कम थी. प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी होता है, इसलिए इसकी कमी सेहत के लिए अच्छी नहीं है.यह अध्ययन दिखाता है कि ज्यादातर पैकेट बंद फूड में कार्बोहाइड्रेट, वसा और चीनी की मात्रा ज्यादा होती है, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए हमें पैकेट बंद फूड का सेवन सीमित करना चाहिए. ताजा और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए. सभी पैकेट बंद फूड के लेबल पर पूरी जानकारी नहीं भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के मुताबिक, पैकेट बंद फूड के लेबल पर एनर्जी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, चीनी और कुल वसा की मात्रा ‘प्रति 100 ग्राम’ या ‘100 मिलीलीटर’ या ‘प्रति सर्विंग’ के हिसाब से लिखी होनी चाहिए. लेकिन अध्ययन में पाया गया कि ज्यादातर पैकेट बंद फूड में यह जानकारी पूरी तरह से नहीं दी गई थी. सिर्फ कुछ ब्रेकफास्ट सीरियल और कुछ पेय पदार्थों में ही प्रति सर्विंग जानकारी दी गई थी.कुछ प्रोडक्ट ने यह दावा किया कि उनमें साबुत अनाज हैं लेकिन इंग्रेडिएंट्स लिस्ट में साबुत अनाज का जिक्र नहीं था. यह ग्राहकों को गुमराह करने वाला है. अध्ययन में यह बात कही गई है कि एक स्पष्ट लेबलिंग सिस्टम होना चाहिए ताकि ग्राहक आसानी से सेहतमंद प्रोडक्ट का चयन कर सकें. घरेलू खर्च के आंकड़े क्या कहते हैं? 2022-23 के घरेलू खर्च सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय अब पैकेट बंद फ़ूड, पेय पदार्थों और रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि घर पर बने खाने पर खर्च कम हो रहा है. यह बदलाव शहरों और गांवों दोनों जगह देखा जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि खानपान में यह बदलाव देश में मोटापा, डायबिटीज, हार्टअटैक जैसे बढ़ते बोझ का एक बड़ा कारण है. इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में भी यह बात कही गई है कि भारत में 56.4% बीमारियां खराब खानपान की वजह से हो रही हैं. कितना बड़ा है पैकेज्ड फूड का बाजार भारत में पैकेट बंद फूड का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है. 2023 में ये बाजार करीब 76.28 बिलियन डॉलर का था और 2030 तक इसके 116 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसका मतलब है कि … Read more

क्या बोतल बंद पानी सेफ? वैज्ञानिकों की यह रिसर्च उड़ा देगी आपकी नींद

Is bottled water safe? This research by scientists will blow your mind कुछ साल में हुए रिसर्च में पाया गया कि औसतन एक लीटर पानी की बोतल में 240,000 प्लास्टिक कण पाए जाते हैं.यह एक बहुत ही चिंताजनक आंकड़ा है, क्योंकि नल के पानी के एक लीटर में औसतन 5.5 प्लास्टिक कण होते हैं. नैनोप्लास्टिक के कारण कैंसर, जन्म दोष और प्रजनन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. नैनोप्लास्टिक अपने छोटे आकार के कारण खतरनाक होते हैं – जिससे वे सीधे रक्त कोशिकाओं और मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं. बोतलों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक में आमतौर पर थैलेट्स होते हैं, जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, थैलेट्स ‘विकासात्मक, प्रजनन, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा और अन्य समस्याओं से जुड़े हैं’. पॉलियामाइड नामक एक प्रकार का नायलॉन पानी की बोतलों में पाया जाने वाला एक और प्लास्टिक कण था. हाल ही में हुए एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक लीटर के पानी की बोतल में लगभग 2, 40,000 प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं. नॉर्मल एक लीटर के पानी की बोतल में पानी पी रहे हैं तो हो सकता है आप प्लास्टिक के टुकड़े पी रहे होंगे. हो सकता है आप प्लास्टिक के कण भी पी रहे होंगे. प्लास्टिक की बोतल में पानी पीना क्योंकि है नुकसानदायक? हमारी खराब लाइफस्टाइल के कारण अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का खूब इस्तेमाल करते हैं. घर हो या ऑफिस प्लास्टिक बंद बोतल में पानी पीना हम खूब पसंद करते हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो संभल जाएं क्योंकि आपके शरीर में धीमा जहर पहुंच रहा है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की संस्थान ने एक स्टडी में डराने वाला खुलासा किया है. जिसमें बताया गया है कि एक लीटर बोतलबंद पानी में करीब 2.40 लाख प्लास्टिक के महीन टुकड़े मौजूद होते हैं.जिसकी वजह से सेहत को गंभीर और जानलेवा खतरे (Bottled Water Harmful Effects) हो सकते हैं.प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नाम की ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक प्लास्टिक के बोतल में पानी पीने के कारण कई गंभीर जानलेवा बीमारी हो सकती है. क्या है रिसर्च हाल ही में कुछ रिसर्च के मुताबिक बोतल में मौजूद बोतल बंद पानी में 100,000 से ज्यादा नैनोप्लास्टिक मिले हैं. यह इतने छोटे कण होते हैं कि ब्लड सर्कुलेशन तक को खराब कर सकते हैं. यह दिमाग और सेल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं. प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से इन बीमारियों का बढ़ता है खतरा? डायबिटीज और दिल की बीमारी हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, पॉली कार्बोनेट की बोतलों के पानी में बिस्फेनॉल ए केमिकल होता है, जो जब शरीर में जाता है तो दिल की बीमारियों और डायबिटीज का खतरा कई गुना तक बढ़ा सकता है. कैंसर का खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ता है. इससे ब्रेस्ट और ब्रेन कैंसर का जोखिम बढ़ता है. प्लास्टिक बर्तन में रखी गर्म चीजों को खाने से बचना चाहिए. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

क्या वेजिटेबल जूस में मिला सकते हैं फ्रूट्स, क्या यह सेहत के लिए हो सकता है खतरनाक?

lifestyle health mixing fruits and vegetables in juice can be dangerous to your health कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कच्ची सब्जियों का जूस पीना पसंद करते हैं. फिटनेस फ्रिक वाले लोग हरी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा अपनी डाइट में शामिल करते हैं. ऐसे डाइट लेने वाले समर्थकों का दावा है कि कच्ची सब्ज़ियों में कई जरूरी विटामिन और खनिज होते हैं जो खाना पकाने के दौरान खत्म हो जाते हैं और ये इम्युनिटी को बढ़ाने और बीमारियों को रोकने के लिए बहुत बढ़िया हैं. यह बात सही हो सकती है लेकिन किसी भी चीज़ को हद से ज्यादा खाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सर्दियां आ रही हैं और यह वह मौसम है जब हरी पत्तेदार सब्जियां काफी ज्यादा मार्केट में होती हैं और लोग हर संभव दिलचस्प तरीके से उन्हें अपने आहार में शामिल करके उनका अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश करते हैं. कुछ लोग इस मौसम में कच्ची सब्जियों का जूस पीना भी पसंद करते हैं. लेकिन क्या ये सभी वाकई सेहतमंद और सुरक्षित हैं? आपको हरी सब्जियां किस तरह खानी चाहिए – उन्हें पकाकर या कच्चे रूप में खाकर. आयुर्वेद और आंत स्वास्थ्य कोच डॉ. डिंपल जांगडा ने अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा है कि अधिक मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट में कुछ संक्रमण या अपच का खतरा हो सकता है. पके हुए भोजन की तुलना में कच्चे खाद्य पदार्थों को पचाना शरीर के लिए अधिक कठिन होता है, क्योंकि पके हुए भोजन पहले से ही गर्मी, मसालों और पकाने की विधि से टूट जाते हैं. वे अवशोषण के लिए अधिक जैविक रूप से उपलब्ध होते हैं और पाचन अग्नि पर तनाव को कम करते हैं. कुछ कच्चे खाद्य पदार्थों में एंटी-पोषक तत्व भी होते हैं जो वास्तव में खाद्य पदार्थों के पोषण अवशोषण को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देते हैं.हल्का खाना पकाने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आप मतली, थकान, चक्कर आना, पेट फूलना, दस्त या आईबीएस जैसे लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो आपका शरीर आपसे बात कर रहा है. आयुर्वेद बड़ी मात्रा में कच्चे खाद्य पदार्थों या ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह नहीं देता है, क्योंकि वे परजीवियों का घर होते हैं, जिन्हें केवल धोने से नष्ट नहीं किया जा सकता है. कच्ची सब्ज़ियां जिनसे बचना चाहिए Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

लोहे की काली कड़ाही को मिनटों में चमका देगी 10 रुपये की फिटकरी, सालों पुरानी जमी कालिख भी हो जाएगी साफ

shopping how to clean cast iron pan or lohe ki kadhai quickly by using alum or fitkari लोहे की काली कड़ाही को साफ करने में अच्छे-अच्छों की हालत पतली हो जाती है। जलने के बाद कड़ाही पर लगे दाग इतने ज्यादा जिद्दी हो जाते हैं कि आसानी से निकलते ही नहीं है। ऐसे में हम आपको 10 रूपये की फिटकरी का इस्तेमाल करने का तरीका बता रहे हैं, जिससे सालों पुरानी जमी कालिख भी साफ हो जाएगी। माना जाता है कि लोहे की कड़ाही में भोजन पकाने से स्वादिष्ट और पोष्टिक बनता है। मगर, सबसे बड़ी दिक्कत है कि यह बहुत जल्दी काली और गंदी हो जाती है। जिसकी वजह से पकने वाला भोजन भी काला हो जाता है और जल्दी जलने लगता है। अगर, ज्यादा दिनों तक कड़ाही को साफ ना किया जाए तो इसमें कालिख जमने लग जाती है। अब लोहे की काली कड़ाही को साफ करना बहुत ही मेहनत का काम होता है। आज भी गांव के लोग इसे साफ करने के लिए ईंट या राख की मदद लेते हैं। लेकिन हर कोई इतनी मेहनत नहीं कर सकता है और शहरों में ईंट या राख कड़ाही साफ करने के लिए मुश्किल ही है। ऐसे में 10 रुपये की फिटकरी वाला सस्ता और आसान तरीका बता रहे हैं। कड़ाही क्लीन करने की पहली स्टेप सबसे पहले आप काड़ाही को गैस पर रखकर गर्म कर लीजिए। अब इस पर फिटकरी को रगड़ दीजिए। जब आप लोहे की गर्म कड़ाही पर फिटकरी को रगड़ेंगी को कालिख छूटना शुरू हो जाएगी। रगड़ने के बाद आपको इसपर पानी डालना होगा। साथ ही बचे फिटकरी के तुकड़े को एक चम्मच नमक के साथ डालकर 5 मिनट के लिए छोड़ दीजिए। यूं चमक जाएगी लोहे की काली कड़ाही तय समय बाद आप कड़ाही में मिक्स घोल को किसी कटोरी में निकाल लीजिए। अब कड़ाही पर डिश बार या लिक्विड डालकर थोड़ा सा रगड़कर साफ कर लीजिए। इस दौरान फिटकरी घुले पानी का इस्तेमाल भी करते रहें। इस तरह थोड़ी देर में फिटकरी की मदद से आपकी काली कड़ाही नई जैसी चमक जाएगी।

सिर पर जमी डैंड्रफ की परत को एक हफ्ते में साफ कर देंगे ये नुस्खे

These remedies will clear the layer of dandruff on the head in a week एक हफ्ते में डैंड्रफ पूरी तरह से हटाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन आप इसे काफी हद तक कम करने के लिए कुछ प्रभावी उपाय अपना सकते हैं। भोपाल ! डैंड्रफ एक ऐसी समस्या है, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से बहुत से लोग तो काले रंग के कपड़े पहनना तक बंद कर देते हैं, क्योंकि रूसी उन कपड़ों पर झड़कर लोगों को शर्मिंदा करती है। खासतौर पर अब जब सर्दी का मौसम शुरू हो गया है तो हर दूसरा व्यक्ति इस परेशानी से जूझ रहा है। वैसे तो डैंड्रफ हटाने के लिए कई तरह के हेयर केयर ट्रीटमेंट आते हैं, लेकिन ये जेब पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इसी के चलते आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से एक हफ्ते में सिर पर जमी डैंड्रफ की परत कम हो जाएगी। अगर आपके सिर पर रूसी काफी ज्यादा है तब एक हफ्ते में इसका कम होना मुश्किल है, लेकिन हां आपको इसका अच्छा असर ही देखने को मिलेगा। नींबू और नारियल तेल का उपयोग यदि आपको नींबू सूट करता है तो आप 2-3 चम्मच नारियल तेल में आधा नींबू का रस मिलाएं। इसे अपनी स्कैल्प पर लगाएं और हल्के हाथों से मालिश करें। 30 मिनट बाद हल्के शैंपू से बाल धो लें। नींबू का रस फंगस को खत्म करने में मदद करता है और नारियल तेल स्कैल्प को मॉइश्चराइज करता है। टी ट्री ऑयल का उपयोग टी ट्री ऑयल को कभी भी सीधा बालों में न लगाएं। इस्तेमाल के लिए इसकी 2-3 बूंदें टी ट्री ऑयल शैम्पू में मिलाकर बाल धोएं। टी ट्री ऑयल में एंटी-फंगल गुण होते हैं जो डैंड्रफ को तेजी से कम करते हैं। एप्पल साइडर विनेगर विनेगर यानी कि सिरके के इस्तेमाल से भी आप सिर पर जमी रूसी को कम कर सकते हैं। इसके लिए बराबर मात्रा में पानी और एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं। इस मिश्रण को स्कैल्प पर स्प्रे करें और 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर अपने बालों को धो लें। मेथी का पेस्ट और दही मेथी के पेस्ट और दही दोनों में ही ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो सिर को साफ करते हैं और सिर पर जमी रूसी की परत को हटाने का काम करते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए 2 चम्मच मेथी के दानों को रातभर भिगोकर पीस लें। इसमें 2 चम्मच दही मिलाएं और स्कैल्प पर लगाएं। इससे भी रूसी की परत हटने लगेगी। एलोवेरा जेल यदि आपके घर में एलोवेरा का पौधा लगा है तो उससे बेहतर कोई विकल्प कुछ हो ही नहीं सकता। सिर से रूसी हटाने के लिए ताजा एलोवेरा जेल स्कैल्प पर लगाएं। 30 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। डिसक्लेमर : इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। ” सहारा समाचार ” इस लेख में दी गई जानकारी को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। त्वचा संबंधी किसी भी तरह की अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन के पेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी,एवं फायदे

Detailed information and benefits related to Arjuna tree which is rich in medicinal properties. अर्जुन के पेड़ को औषधीय पेड़ माना जाता हैं क्यूंकि इसे बहुत सी दवाइयों के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पेड़ ज्यादातर नदी और नालों के किनारे पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ सदाहरित रहता हैं। अर्जुन के पेड़ को अन्य कई नामो से जाना जाता हैं जैसे ,घवल और नदीसर्ज। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 60 -80 फ़ीट ऊँची रहती हैं। अर्जुन का पेड़ ज्यादातर उत्तर प्रदेश ,महाराष्ट्र ,बिहार और अन्य कई राज्यों नदियों के किनारे या सुखी नदियों के तल के पास पाए जाते है। अर्जुन का पेड़ कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ की लम्बाई काफी ऊँची रहती है। अर्जुन का पेड़ बहुत ही शुष्क इलाकों में पाया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ को किसी भी मिटटी में उगाया जा सकता है। अर्जुन के पेड़ को अनुनारिष्ट के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ का उपयोग बहुत सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों के लिए किया जा रहा है। अर्जुन के पेड़ का फल कैसा होता हैं अर्जुन के पेड़ का फल शुरुआत हल्के सफ़ेद और पीले रंग का होता हैं ,कुछ समय पश्चात जब फल में बढ़ोत्तरी होती हैं तो ये फल हरे और पीले रंग का दिखाई पड़ता हैं ,साथ ही इसमें से हल्की हल्की सुगंध भी आने लगती है। पकने के बाद ये फल लाल रंग का दिखाई पड़ने लगता है। अर्जुन के पेड़ के पत्ते हैं लाभकारी अर्जुन के पेड़ के पत्ते खाने से ये शरीर में जमा गंदे कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकलता हैं। इसका सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। इन पत्तों का सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता हैं। अर्जुन की छाल से मिलने वाले फायदे अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से खून पतला होता हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को संतुलित बनाये रखता है। इस छाल के काढ़े का उपयोग दो से तीन महीने लगातार करना चाहिए। इस काढ़े के उपयोग से रक्तश्राव कम होता है। यह ह्रदय के रक्तचाप जैसी गतिविधियों की क्षमता में सुधार लाता है। पाचन किर्या में सहायक अर्जुन का पेड़ पाचन किर्या में सहायक होता हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर लेने से ये पाचन तंत्र को संतुलित बनाये रखता है। यह बड़े हुए चर्बी को कम करने में मदद करता हैं ,अर्जुन की छाल का सेवन लिवर जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है। यह वजन घटाने में भी सहायता प्रदान करती है। सर्दी खांसी में है लाभकारी अर्जुन के पेड़ की छाल का कड़ा बनाकर पीने से या फिर अर्जुन के चूर्ण में शहद मिलाकर खाने से सर्दी और खांसी दोनों में फायदा होता है। अर्जुन के पेड़ का रस औषिधि के रूप में सदियों से किया जा रहा हैं। हड्डियों के जोड़ने में मददगार अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग टूटी हुई हड्डियों या फिर मांसपेशियों में होने वाले दुखाव के लिए किया जाता हैं। इसमें छाल के चूर्ण को एक गिलास दूध में दो चम्मच चूर्ण मिलाकर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। ये हड्डी में होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता हैं। अल्सर बीमारी में है फायदेमंद अर्जुन का प्रयोग अल्सर जैसी बीमारी में भी किया जाता हैं। कई बार अल्सर का घाव जल्द ही नहीं भर पाता हैं। या फिर घाव सूखते ही दूसरे घाव निकल आते हैं ,इसमें अर्जुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर ,घाव को इससे धोये। ऐसा करने से घाव कम होने लगते हैं,साथ ही अल्सर जैसे रोग को भी नियंत्रित करता है। अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसान अर्जुन के पेड़ को बहुत सी बीमारियों के लिए लाभकारी माना जाता हैं ,लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी हैं जो शरीर पर गलत प्रभाव डालते है। सीने में जलन होना अर्जुन की छाल का सेवन बहुत से लोगो की सेहत के लिए ठीक नहीं रहता हैं, जिसकी वजह से उन्हें जी मचलना या घबराहट जैसी परेशानियां अक्सर हो जाती है। यदि आप छाल का सेवन कर रहे हैं और आपको ऐसा महसूस होता हैं की सीने में जलन या दर्द हो रहा हैं तो इसका उपयोग करना उसी वक्त छोड़ दे। पेट में दर्द या ऐठन का महसूस होना यदि छाल का उपयोग करने से आपको पेट में दर्द या और कोई परेशानी महसूस होती हैं तो छाल का सेवन करना बंद कर दे। हालाँकि अर्जुन एक आयुर्वेदिक जड़ीबूटी हैं लड़की कुछ लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। एलेर्जी जैसो रोगों को जन्म देता हैं अर्जुन के पेड़ की छाल का घोल बनाकर शरीर पर लगाया जाता हैं, यह त्वचा के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं। लेकिन इसका लेप बहुत से लोगो के शरीर एलेर्जी से जुडी समस्याओं को भी खड़ा कर देता हैं। यदि इस लेप का उपयोग करने के बाद शरीर में खुजली जैसी परेशानिया हो तो इस लेप का उपयोग न करें। आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ को बहुत ही लाभकारी माना गया हैं। अर्जुन के पेड़ में सबसे ज्यादा उपयोग छाल का किया जाता हैं। अर्जुन के पेड़ की छाल में मैग्नीशियम ,पोटेसियम और कैल्शियम पाया जाता है। इस पेड़ की छल का इस्तेमाल बहुत से रोगो में किया जाता हैं ,और ये लाभकारी भी है। अर्जुन के पेड़ की छाल का उपयोग कैंसर सम्बंधित रोगो से निपटने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसके कुछ नुक्सान भी हैं। जो व्यक्ति पहले से किसी भी प्रकार की कोई दवाई ले रहा हैं ,उसे इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेकर ही करना चाहिए।

Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज पर खीरे की क्यों करते हैं पूजा, जानें रहस्य

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं (Married Women) के लिए बहुत ही खास होता है. सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह पर्व रखती हैं. वैसे तो साल भर में तीन प्रकार की तीज होती हैं, जिसमें हरियाली तीज सबसे पहले पड़ता है. हरियाली तीज का पर्व सावन महीने (Sawan Month 2024) की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होती है, जोकि आज बुधवार 7 अगस्त 2024 को है. आज विवाहिताएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी और शिव-पार्वती (Shiv Parvati) की पूजा करेंगी. पूजा में कई तरह की सामग्रियों (Puja Samagri) की जरूरत पड़ती है, जिसमें खीरा (Kheera) भी शामिल है. हरियाली तीज की पूजा (Hariyali Teej ki Puja) में खीरा का होना बहुत जरूरी होता है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. आइये जानते हैं आखिर क्यों हरियाली तीज में होती है खीरा की जरूरत और क्या है तीज में खीरा पूजन का रहस्य. हरियाली तीज की पूजा में खीरा का महत्व (Cucumber Importance of Hariyali Teej Puja) ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) में खीरा का संबंध चंद्रमा (Chandrama) से बताया गया है. दरअसल जितने भी तरल पदार्थ होते हैं, उनका संबंध चंद्र ग्रह से होता है. हरियाली तीज में शिव शक्ति के साथ ही चंद्रमा पूजन का भी महत्व है. इसलिए पूजा के दौरान खीरा रखना अनिवार्य माना जाता है. एक अन्य कारण यह भी है कि, चंद्रमा शिव को अधिक प्रिय है. इसे शिवजी (Shiv ji) ने अपने माथे पर इसे सुशोभित किया है. चंद्रमा से खीरे का संबंध है और चंद्र का शिव से. इसलिए हरियाली तीज की पूजा में खीरा को चंद्रमा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है, जिससे कि चंद्रमा के शुभ फल से मन के विकार दूर हों, शुभता प्राप्त हो और व्रत में किसी तरह का दोष न रहे.

किस विटामिन की कमी से जल्दी आता है बुढ़ापा? वैज्ञानिकों ने लगाया पता

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered

Deficiency of which vitamin causes early ageing? Scientists discovered उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. हर कोई बूढ़ा होता है, लेकिन कुछ लोगों की उम्र उनके चेहरे पर नहीं दिखती. वे अपनी उम्र से काफी छोटे लगते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब ढूंढ निकाला है. न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी कई महत्वपूर्ण कारकों को प्रभावित करता है जो उम्र बढ़ने और उम्र से संबंधित बीमारियों से जुड़े होते हैं. उम्र बढ़ने की प्रक्रिया कैसे होती है?उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कई बदलाव होते हैं. सेल्स में सूजन, सेल्स के बीच संचार में गड़बड़ी, स्टेम सेल की थकान, सेल्स की सेंसिटिविटी कम होना, माइटोकोंड्रिया का कमजोर होना, पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषण न होना, प्रोटीन में बदलाव और जीन में बदलाव जैसे कई कारक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. ये सभी प्रक्रियाएं बहुत जटिल हैं, लेकिन विटामिन डी इन सभी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विटामिन डी कैसे करता है काम?विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है. यह हड्डियों को मजबूत बनाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसके अलावा, विटामिन डी सेल्स की मरम्मत और नवीनीकरण में भी मदद करता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन डी सूजन को कम करके, सेल्स के बीच संचार को बेहतर बनाकर और स्टेम सेल को सक्रिय करके उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. विटामिन डी की कमी के क्या होते हैं लक्षण?विटामिन डी की कमी से हड्डियों का कमजोर होना, थकान, मसल्स में दर्द, डिप्रेशन और इम्यून सिस्टम कमजोर होना जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसके अलावा, विटामिन डी की कमी से दिल की बीमारियां, कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. विटामिन डी कैसे प्राप्त करें?विटामिन डी सूर की रोशनी से मिलता है. आप रोजाना कुछ समय धूप में बैठकर अपनी विटामिन डी की जरूरत पूरी कर सकते हैं. इसके अलावा, आप विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अंडे और दूध का सेवन भी कर सकते हैं. यदि आपको विटामिन डी की कमी है तो आप अपने डॉक्टर से विटामिन डी की गोलियां लेने की सलाह ले सकते हैं.

Nag Panchami 2024: नाग पंचमी की पूजा में शामिल करें ये चीजें, जीवन में नहीं लगेगा कोई दोष!

Nag Panchami 2024: Include these things in the worship of Nag Panchami, you will not face any flaw in life!

Nag Panchami 2024: Include these things in the worship of Nag Panchami, you will not face any flaw in life! Nag Panchami 2024: हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का पर्व हर साल बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने का विधान है. मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से न केवल उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि कई तरह के दोषों से भी छुटकारा भी मिलता है. विशेष रूप से, जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए नाग पंचमी का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. काल सर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है. इसके अलावा राहु-केतु की वजह से अगर जीवन में कोई कठिनाई आ रही है, तो भी नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करने पर राहु-केतु का बुरा प्रभाव कम हो जाता है. पूजा का सही समयपंचांग के अनुसार, साल 2024 में नाग पंचमी तिथि 9 अगस्त को रात 12:36 पर शुरू होगी, जिसका समापन 10 अगस्त की रात 3:14 पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, नाग पंचमी का पर्व 9 अगस्त को मनाई जाएगी. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 9 अगस्त की सुबह 5 बजे से लेकर 8 बजे तक रहेगा. इस दिन पूजा के लिए 3 घंटे की अवधि मिलेगी. इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होगा. इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सारी समस्याओं से मुक्ति मिलती है. नाग पंचमी के दिन पूजा में कुछ चीजों को शामिल करना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इनके बिना नाग देवता की पूजा अधूरी मानी जाती है और दोषों से भी जल्दी छुटकारा नहीं मिल पाता है. इसलिए नाग पंचमी की पूजा में इन चीजों को शामिल अवश्य करें. जिससे आपके किसी कार्य में बाधा न आए. इस दिन घर के द्वारों के पास गोबर, सिंदूर, नीम का पत्ता से नाग की आकृति बनाई जाती है. इसके बाद घरों में दूध, लावा नाग देवता को अर्पित कर पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने से काल सर्प दोष, सर्पदंश आदि से मुक्ति मिलती है. पूजा में शामिल करें ये चीजेंनाग पंचमी पूजा करते समय, अनुष्ठान को सही तरीके से पूरा करने के लिए सभी जरूरी सामग्री का होना आवश्यक है, जैसे- चांदी, लाल मिट्टी, गाय के गोबर, लकड़ी या पत्थर से बनी सांप की तस्वीर या मूर्ति या सांप की पेंटिंग, दूध, मीठा, फल,फूल, दालें, हल्दी का पेस्ट, कपूर, अंकुरित अनाज, धूपबत्ती आदि. नाग पंचमी पर करें ये उपायनाग पंचमी के दिन घर के प्रवेश द्वार पर सांप की आकृति बनाने से और पूरी श्रद्धा से प्रार्थना करने से आपको आर्थिक लाभ होता है.भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए आपको नाग पंचमी के दिन उनके मंदिर में जाकर चंदन की सात गोलियां चढ़ाएं.नाग पंचमी के दिन शिवलिंग पर दूध, फल, धतूरा, फूल और अर्क चढ़ाते हुए रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.अगर आपकी कुंडली में राहु और केतु का प्रभाव है, तो आपको ग्रह दोष को खत्म करने के लिए नाग पंचमी के दिन पूजा करें.अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आपको नाग पंचमी के दिन नाग पंचमी मंत्र का 108 बार जाप करें.मान्यताओं के अनुसार, कालसर्प दोष जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा करता है, जैसे कि धन-दौलत में बाधा, विवाह में अड़चन, संतान प्राप्ति में कठिनाई, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, और नौकरी में परेशानी, आदि. नाग पंचमी के दिन श्री सर्प सूक्त पाठ करें. ऐसा करने से काल सर्प दोष का प्रभाव बहुत हद तक कम हो जाता है.

सावन सोमवार से तुलसीदास जयंती तक 7 दिन के शुभ मुहूर्त, जानें

Auspicious times of 7 days from Sawan Monday to Tulsidas Jayanti, know

Auspicious times of 7 days from Sawan Monday to Tulsidas Jayanti, know Weekly Panchang 5 august-11 august 2024: 5 अगस्त 2024 को तीसरे सावन सोमवार (Sawan somwar) से अगस्त का पहला सप्ताह शुरू हो रहा है. इसकी समाप्ति 11 अगस्त 2024 को तुलसीदास जयंती (Tulsidas jayanti) पर होगी. इस सप्ताह में कल्कि जयंती (Kalki jayanti), सावन विनायक चतुर्थी (Sawan vinayak chaturthi), सावन मंगला गौरी व्रत, हरियाली तीज (Hariyali teej) आदि व्रत आएंगे. हरियाली तीज पति की लंबी उम्र के लिए मनाई जाती है. इस दिन सुहागिनें सुहाग की सलामती, सौभाग्य, सुख, समृद्धि और अच्छा जीवनसाथी पाने के लिए व्रत कर शिव-पार्वती की पूजा करती है. अगस्त के पहले सप्ताह में कोई ग्रह-गोचर नहीं हो रहा है.हालांकि शनि अभी वक्री चल रहे हैं ऐसे में सावन के सोमवार और हरियाली तीज पर भोलेनाथ की पूजा जरुर करें इससे शनि के दुष्प्रभाव में कमी आएगी.आइए जानते हैं 7 दिन कौन से त्योहार, व्रत, ग्रह परिवर्तन, शुभ योग होंगे. साप्ताहिक पंचांग 5 अगस्त – 11 अगस्त 2024, शुभ मुहूर्त, राहुकाल (Weekly Panchang 5 august – 11 august 2024) 5 अगस्त 2024 (Panchang 5 august 2024) व्रत-त्योहार – तीसरा सावन सोमवारतिथि – प्रतिपदापक्ष – शुक्लवार – सोमवारनक्षत्र – अश्लेषायोग – व्यतीपातराहुकाल – सुबह 07.25 – सुबह 09.066 अगस्त 2024 (Panchang 6 august 2024) व्रत-त्योहार – मंगला गौरी व्रततिथि – द्वितीयापक्ष – शुक्लवार – मंगलवारनक्षत्र – मघायोग – वरीयानराहुकाल – दोपहर 03.47 – शाम 05.287 अगस्त 2024 (Panchang 7 august 2024) व्रत-त्योहार – हरियाली तीजतिथि – तृतीयापक्ष – शुक्लवार – बुधवारनक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनीयोग – वरीयान, परिघराहुकाल – दोपहर 12.27 – दोपहर 02.078 अगस्त 2024 (Panchang 8 august 2024) व्रत-त्योहार – विनायक चतुर्थीतिथि – चतुर्थीपक्ष – शुक्लवार – गुरुवारनक्षत्र – उत्तराफाल्गुनीयोग – शिव, रवि योगराहुकाल – दोपहर 02.06 – दोपहर 03.469 अगस्त 2024 (Panchang 9 august 2024) व्रत-त्योहार – नाग पंचमीतिथि – पंचमीपक्ष – शुक्लवार – शुक्रवारनक्षत्र – हस्तयोग – सिद्ध, रवि योगराहुकाल – सुबह 10.47 – दोपहर 12.2610 अगस्त 2024 (Panchang 10 august 2024) व्रत-त्योहार – कल्कि जयंतीतिथि – षष्ठीपक्ष – शुक्लवार – शनिवारनक्षत्र – चित्रायोग – साध्य, द्विपुष्कर, रवि योगराहुकाल – सुबह 09.07 – सुबह 10.4711 अगस्त 2024 (Panchang 11 august 2024) व्रत-त्योहार – तुलसीदास जयंतीतिथि – सप्तमीपक्ष – शुक्लवार – रविवारनक्षत्र – चित्रायोग – द्विपुष्कर, रवि, शुभ योगराहुकाल – शाम 05.24 – रात 07.04

फूड पॉइजनिंग तो सुनी होगी, लेकिन क्या होती है वाटर पॉइजनिंग?

You must have heard of food poisoning, but what is water poisoning?

You must have heard of food poisoning, but what is water poisoning? फूड पॉइजनिंग को आम बोलचाल की भाषा में समझे तो गंदा आ दूषित खाना खाने से यह बीमारी होती है. गंदा खाना खाने से बैक्टीरिया शरीर में घुस जाता है और फिर यह शरीर को बीमार कर देता है. फूड पॉइजनिंग को आम बोलचाल की भाषा में समझे तो गंदा आ दूषित खाना खाने से यह बीमारी होती है. गंदा खाना खाने से बैक्टीरिया शरीर में घुस जाता है और फिर यह काफी ज्यादा परेशानी करता है. कुछ तो अपने आप ठीक हो जाते हैं लेकिन कुछ लोगों के शरीर में इसके खतरनाक रिएक्शन दिखते हैं. फूड पॉइजनिंग क्यों होता है? कुछ लोगों पर फूड पॉइजनिंग का ऐसा असर होता है कि इससे उनकी जान भी जा सकती है. फूड पॉइजन कई कारणों से हो सकता है जैसे- अधपका मांस, कच्ची सब्जियां, गंदे तरीके से पकाया हुआ खाना. जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है उन्हें खाना खाने के दौरान इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए कि जो वो खा रहे हैं वह पका, साफ और अच्छा या नहीं वरना वह इससे गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं. फूड पॉइजनिंग किसी को कभी भी हो सकती है. एबीपी लाइव हिंदी ने ‘आकाश हेल्थकेयर’ के कंसल्टेंट डॉक्टर सरोज कुमार यादव से खास बातचीत की. डॉक्टर सरोज यादव ने बताया कि अक्सर गर्मियों या मॉनसून के दौरान फूड पॉइजनिंग की समस्या ज्यादा होती है. खासकर हमने यह जानने की भी कोशिश की वॉटर पॉइजनिंग क्या होता है?खासकर कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को इस बीमारी का खतरा काफी ज्यादा रहता है. शरीर में इस तरह की समस्या हो जाए तो शरीर पर कुछ इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं. वॉटर पॉइजनिंग क्या होता है? हाइपोनाट्रेमिया एक ऐसी कंडीशन होती है. जिसमें खून में सोडियम की मात्रा जरूरत से ज्यादा कम हो जाती है. ऐसा उस कंडीशन में होता है जब शरीर में पानी की जरूरत से ज्यादा होने जाने की वजह से सोडियम उसमें घुलता है. इसके कारण दिमाग की सेल्स यानी कोशिकाओं में सूजन आ जाती है. इस सूजन को सेरिब्रल ओएडेमा कहते हैं. इससे इलेक्ट्रोलाइट्स में कमी होने लगती है. वॉटर पॉइजनिंग का शरीर पर असर कम पानी पीने से शरीर में कई तरह के नुकसान होते हैं लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने से भी शरीर को काफी ज्यादा नुकसान होता है. यहां तक कि मौत भी हो सकती है. वॉटर इनॉक्सिकेशन या वॉटर पॉइजनिंग भी कहते हैं. ज्यादा पानी पीने से ब्रेन ठीक से फंक्शन नहीं करता है. साथ ही साथ ब्लड में पानी की मात्रा बढ़ने लगती है. इसे ही वाटर पॉइजनिंग कहते हैं. वाटर पॉइजनिंग के कारण ब्लड में सोडियम का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है. जिसका ब्रेन पर सीधा असर होता है और व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है. शरीर में सोडियम की मात्रा कम होने पर ब्रेन और शरीर के सेल्स में सूजन भी हो सकती है. इसे सेल्युलर स्वेलिंग कहते हैं.

उमस भरे मौसम के कारण सिर में हो रही है खुजली, तो अपनाएं ये नुस्खे

If your head is itching due to humid weather, then follow these remedies

If your head is itching due to humid weather, then follow these remedies उमस और गर्मी के मौसम में स्कैल्प पर ज्यादा पसीना आने के कारण कई बार बदबू आना और खुजली जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में ये घरेलू नुस्खे इस परेशानी से राहत दिलाने में आपकी मदद कर सकते हैं. मौसम में बदलाव होने के साथ ही कई बार बालों से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं. उमस के मौसम में बालों में पसीना आने के कारण बदबू और स्कैल्प पर खुजली होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण बाल चिपचिपे लगने लगते हैं. इसकी वजह से कई लोगों को शर्मिंदा महसूस होना पड़ सकता है. इस समस्या से छुटकारा पाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इसे कम करने का प्रयास किया जा सकता है. मानसून के मौसम में बालों को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है. जिससे की पसीने के कारण बदबू और खुजली जैसी परेशानियों का सामना न करना पड़े. ऐसे में आप कुछ घरेलू नुस्खों को अपना सकते हैं. हेयर वॉशअगर उमस और गर्मी के कारण आपके बालों में ज्यादा पसीना आता है, तो आपको बाल हफ्ते में दो से तीन बार जरूर धोने चाहिए. जिससे की बाल साफ रहें. लेकिन अपने बालों के मुताबिक ही शैंपू का इस्तेमाल करें. जैसे कि अगर ड्रैंडफ ज्यादा है तो एंटी-ड्रैंडफ शैंपू का इस्तेमाल करें. आप एक्सपर्ट से भी इस बारे में सलाह ले सकते हैं. एलोवेरा और नारियल तेलएलोवेरा और नारियल तेल इन दोनों को भी हमारे बालों के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसलिए ताजा एलोवेरा जेल और नारियल तेल को अच्छे से मिक्स करें और इसे अपने बालों पर 20 मिनट तक लगाएं रखने के बाद शैंपू से हेयर वॉश करें. लेकिन कई लोगों को एलोवेरा सूट नहीं करता है ऐसे में वो सिर्फ नारियल तेल भी लगा सकते हैं. नीम का उपयोगनीम औषधि गुणों के कारण जानी जाती है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीफंगल और एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुण पाए जाते हैं. ऐसे में स्कैल्प पर होने वाली खुजली से राहत दिलाने में नीम मददगार साबित हो सकता है. इसके लिए पहले आपको नीम के ताजे पत्ते लेने हैं और इसे पानी में उबालना होगा. इसके बाद इस पानी को ठंडा होने पर छाल लें और शैंपू करने के बाद अपने बालों पर स्प्रे करें. आप नीम और तुलसी के पत्तों को एक साथ पीसकर उसका पेस्ट तैयार कर शैंपू करने के कुछ देर पहले आप अपने बालों पर 10 से 15 मिनट के लिए ये पेस्ट बालों और स्कैल्प पर लगा सकते हैं. एक बात का जरूर ध्यान रखें कि अगर स्कैल्प पर बहुत ज्यादा खुजली और जलन हो रही है तो पहले एक्सपर्ट से इसके बारे में सलाह लें और तभी कोई प्रोडक्ट और नुस्खा अपनाएं. क्योंकि कई बार इंफेक्शन या किसी बीमारी के कारण भी ये समस्या हो सकती है. इसलिए ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है.

बालों से खुलेंगे व्यक्तित्व के राज, सामने आएंगी खूबियां और खामियां

Hair will reveal the secrets of personality, strengths and weaknesses will be revealed.

Hair will reveal the secrets of personality, strengths and weaknesses will be revealed. Personality Test: व्यक्ति के लिए उसके बाल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। सभी अपने बालों को सजाते संवारते हैं और उनकी केयर करते हैं। महिलाएं तो विशेष तौर पर अपने बालों का ध्यान रखती हैं। हर व्यक्ति का हेयर स्टाइल उसकी सहूलियत के हिसाब से अलग-अलग होता है। कोई लंबे बाल रखना पसंद करता है तो किसी को छोटे बाल पसंद होते हैं। किसी के बाल स्ट्रेट होते हैं तो कोई घुंघराले बाल करवाता है। व्यक्ति की यही पसंद ना पसंद उसके व्यक्तित्व के बारे में जानकारी देने का काम करती है। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन किसी भी व्यक्ति के स्वभाव के अलावा उसके बालों को देखकर आसानी से व्यक्तित्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। आज हम आपको बालों की लेंथ और प्रकार के जरिए महिलाओं की पर्सनैलिटी की जानकारी देते हैं। घुंघराले बालजिन महिलाओं के बाल घुंघराले होते हैं वह बहुत भावनात्मक किस्म की होती हैं। अपने इमोशनल स्वभाव की वजह से यह कई बार परेशानी में पड़ जाती हैं। हालांकि, ये मृदु भाषी होती हैं और अपनी मीठी बोली से लोगों का दिल जीत लेती हैं। सीधे बालकुछ महिलाओं के बाहर बिल्कुल सीधे यानी कि स्ट्रेट होते हैं। यह महिलाएं सुनती तो सबकी हैं लेकिन करती सिर्फ और सिर्फ अपने मन की हैं। अपने स्वभाव की वजह से घमंडी कहा जाता है लेकिन यह साफ और कोमल हृदय वाली होती हैं। लंबे बाल कुछ महिलाओं के बाल काफी लंबे होते हैं। यह अपनी इमोशंस लोगों के सामने व्यक्त करने में घबराती नहीं है। इनके मन में जो भी होता है यह साफ साफ बोल देती हैं। यह प्रैक्टिकल किसने की होती है और हर चीज का प्रैक्टिकल करने के बाद ही निर्णय पर पहुंचती हैं। छोटे बालकुछ महिलाओं को छोटे बाल रखना पसंद होता है। इस तरह की महिलाएं स्टाइलिश और फैशन में बने रहना पसंद करती हैं। ये दिल की साफ और अच्छी होती हैं।

सेहत को दुरुस्त बनाते हैं ये फूड आइटम्स, उम्र बढ़ाने के लिए आज ही करें इन्हें डाइट में शामिल

These food items improve your health, include them in your diet today to increase your lifespan. सेहतमंद रहने के लिए लोग कई उपाय अपनाते हैं। अपने खानपान से लेकर रहन-सहन तक सभी का हमारी सेहत पर गहरा असर पड़ता है। इन दिनों लोगों की लाइफस्टाइल में काफी बदलाव होने लगा है जिससे कई समस्याएं आसानी से हमें अपना शिकार बनाने लगी हैं। ऐसे में कुछ फूड्स को डाइट (Healthy Foods) में शामिल कर आप हेल्दी रहने के साथ ही अपनी उम्र भी बढ़ा सकते हैं। हम क्या खाते हैं इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। यही वजह है कि सेहतमंद रहने के लिए सही खानपान बेहद जरूरी होता है। हेल्दी खाना जहां हमें हेल्दी बनाते हैं, तो वहीं जंक और प्रोसेस्ड फूड्स हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना देते हैं। इन दिनों लोगों के बीच अनहेल्दी फूड्स का चलन काफी बढ़ गया है, जिसकी वजह से लोग आजकल कई समस्याओं का शिकार होते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हेल्दी रहने के लिए उन फूड्स को डाइट में शामिल करें, जो आपको हेल्दी बनाकर आपकी उम्र लंबी बना सके। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे फूड्स, जो आपको स्वस्थ रखने के साथ ही आपकी उम्र भी बढ़ाएंगे। अनारइसमें मौजूद फाइटोकेमिकल इसे एक अच्छा एंटी-कैंसर एजेंट बनाते हैं। साथ ही ये दिल की सेहत के लिए भी बहुत जरूरी है और ब्रेन को हेल्दी रखने में भी मदद करता है। सीड्सकैल्शियम, विटामिन ई, जिंक, ट्रेस मिनरल से भरपूर सीड्स सेहत के लिए हर मायने में लाभकारी होता है। फ्लैक्स सीड्स, चिया सीड्स, सफेद तिल आदि में मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन ब्रेस्ट कैंसर से बचाव करते हैं। बीन्सयह ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ भूख कम करते हैं और कोलोन कैंसर से बचाव करते हैं। बेरीजये ब्रेन के लिए बहुत ही बेहतरीन फूड ऑप्शन है। इसमें एंटी कैंसर गुण भी होते हैं। यह एजिंग के साथ होने वाली बीमरियों से बचा कर लंबी आयु जीने में मदद करता है। लहसुन-प्याजइनमें मौजूद ऑर्गेनोसल्फर कंपाउंड कार्सिनोजेन को डिटॉक्सिफाई करते हैं और इस तरह ये एक बहुत अच्छे एंटी कैंसर एजेंट साबित होते हैं। ये कार्डियोवैस्कुलर और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं और साथ ही ये एंटी-डायबिटीक भी होते हैं। इस तरह स्वस्थ लंबी आयु के लिए लहसुन और प्याज बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। नट्सनट्स कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड हैं, जो पूरे खाने की प्लेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम करने में मदद करते हैं क्योंकि इसे खाने से देर तक पेट भरा रहता है, जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है और यह दिल की बीमारियों से भी बचाता है। ओटमीलसंतुलित मात्रा में फैट्स, कार्बोहाइड्रेट, प्लांट प्रोटीन, आयरन और विटामिन बी से भरपूर ओटमील हर तरीके से एक पौष्टिक आहार है, जिसे हर उम्र के लोग बेहिचक खा सकते हैं। 6 महीने के बच्चे से लेकर 60 साल के लोगों तक के लिए ये एक सुपाच्य और पौष्टिक आहार है। एवोकाडोपोटैशियम से भरपूर और नमक में कम एवोकाडो ब्लड प्रेशर कम करने के साथ स्ट्रोक के खतरे से भी बचाता है। इसमें केले से भी अधिक पोटैशियम पाया जाता है। नींबूइसे किसी भी रूप में लेने से इसकी हाई एसिडिटी ब्लड ग्लूकोज संतुलित रखने में मदद करती है, जिससे डायबिटीज से बचा जा सकता है।

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