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EV दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से होने वाली दुर्घटनाओं में 2024 में 89 लोगों की जान चली गई। 868 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा राज्यसभा में पेश किया गया। इसके अनुसार ईवी दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर है। हालांकि, 2022 से मौतों की संख्या में कमी आई है, लेकिन दुर्घटनाएं 2023 से स्थिर हैं। सरकार ईवी बैटरी की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है और उसने सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए हैं। कुल 663 EV दुर्घटनाएं हुईं। उत्तराखंड 369 मौतों के साथ पहले स्थान पर है। मध्य प्रदेश से ऊपर अन्य राज्य बिहार (230 मौतें), महाराष्ट्र (154 मौतें), राजस्थान (144 मौतें), पश्चिम बंगाल (133 मौतें), असम (117 मौतें) और कर्नाटक (99 मौतें) हैं। भारत में सड़क दुर्घटनाएं रिपोर्ट में खुलासा अच्छी बात यह है कि मध्य प्रदेश में EV दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की संख्या में पिछले तीन सालों में कमी आई है। यह जानकारी राज्यसभा में दी गई। पूरे देश में 2024 में EV से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 7,575 थी। इनमें 1,947 लोगों की जान गई और 9,318 लोग घायल हुए। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ‘भारत में सड़क दुर्घटनाएं’ नाम से एक वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करती है। यह रिपोर्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले आंकड़ों पर आधारित होती है। राज्य सरकारें डालती हैं डाटा मंत्रालय ने बताया है कि एमओआरटीएच द्वारा ईवी से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं के बारे में अलग से कोई जानकारी नहीं जुटाई जा रही है। हालांकि, MoRTH के पास एक इलेक्ट्रॉनिक वेब पोर्टल है – eDAR। यह सड़क दुर्घटना के आंकड़ों की रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए एक केंद्रीय जगह है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू कर दिया गया है। पोर्टल पर डेटा राज्य सरकारें डालती हैं। मध्य प्रदेश में EV से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में काफी कमी आई है। 2022 में, EV दुर्घटनाओं की कुल संख्या 1067 थी, जिसमें 250 लोगों की जान चली गई। 2023 में यह संख्या घटकर 670 हो गई, जिसमें 140 लोगों की जान गई। 2024 में दुर्घटनाओं की संख्या 663 रही और 89 लोगों की जान गई। सुझाव से संशोधन सरकार ने राज्यसभा में यह भी बताया कि EV बैटरी में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। MoRTH ने बैटरी और उसके घटकों, BMS (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) और संबंधित प्रणालियों के लिए सुरक्षा मानकों का सुझाव देने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई थी। समिति के सुझावों के आधार पर MoRTH ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (AIS) में संशोधन किया है। ये संशोधन 1 दिसंबर, 2022 से लागू हैं। AIS के कुछ नियम 31 मार्च, 2023 से प्रभावी हैं। इन संशोधनों से EV बैटरी और उसके घटकों के लिए मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं को बढ़ाया गया है। इसके अलावा, MoRTH ने 19 दिसंबर, 2022 को एक नोटिफिकेशन जारी किया है। यह नोटिफिकेशन सभी प्रकार के EV, जिनमें क्वाड्रिसाइकिल, ई-रिक्शा, दोपहिया और चार पहिया वाहन शामिल हैं, के लिए उत्पादन की अनुरूपता (COP) की आवश्यकताओं से संबंधित है। सरकार ने यह जवाब दिया।

नक्सल गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश में एसआईए का गठन हुआ

भोपाल नक्सली गतिविधियों को रोकने, जांच व उनके विरुद्ध ऑपरेशन के लिए प्रदेश में स्टेट इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एसआईए) का गठन किया गया है। पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा के आईजी स्तर के अधिकारी को इसका प्रमुख बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जांच एजेंसी बनाई गई है। यह केंद्र की नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरह काम करेगी। एनआईए का गठन देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों पर कार्रवाई के लिए किया गया है। नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में आएगी तेजी केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में इसका गठन किया जा चुका है। नक्सलियों ने इन तीनों राज्यों को मिलाकर एक जोन (एमएमसी) बनाया हुआ है। एसआईए से इसमें नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई में तेजी आएगी। बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। एसआईए का गठन इसी दिशा में एक प्रयास है। इसका मुख्य काम नक्सलियों के नेटवर्क का पता लगाना है। साथ ही, एजेंसी के अन्य कार्य नक्सलियों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है, नक्सलियों द्वारा उपयोग किए जा रहे हथियार उन तक कैसे पहुंच रहे हैं, नए नक्सलियों की भर्ती का तरीका, ग्रामीणों से संपर्क की रणनीति, बड़ी नक्सली घटनाओं की जांच से संबंधित रहेगा। मध्य प्रदेश एसआईए नक्सल गतिविधियों की रोकथाम में एनआईए का भी सहयोग लेगी। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एसआईए ने काम प्रारंभ कर दिया है। मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं 65 से 70 नक्सली बता दें, मध्य प्रदेश में नक्सल प्रभावित बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 65 से 70 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें लगभग आधी महिलाएं हैं। ये नक्सली मूल रूप से छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र के हैं। मध्य प्रदेश के मात्र तीन ही हैं। पुलिस का प्रयास है कि ये नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर दें या उन्हें मार दिया जाए। नक्सली संगठन में नई भर्ती नहीं होने पाए, यह भी पुलिस की कोशिश है। 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प में मध्य प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नक्सलियों पर लगातार नजर रखी जाए और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए। सुरक्षा बलों को सीएम की बधाई मुख्यमंत्री ने हाल ही में बालाघाट में हुए पुलिस ऑपरेशन की सराहना की, जिसमें चार नक्सलियों को मार गिराया गया था और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में नक्सलवाद को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। सीएम ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें देश को 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। अब मध्य प्रदेश में नक्सलियों के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं! सरकार पूरी ताकत से विकास और सुरक्षा पर काम कर रही है।

मध्यप्रदेश खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि, शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी

भोपाल भारत का हृदय मध्यप्रदेश, समृद्ध अर्थव्यवस्था, विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों और विशेष प्रोत्साहन योजनाओं के साथ निवेश के असीमित अवसरों की उपलब्धता से देश-विदेश के उद्यमियों के लिए निवेश का प्रमुख स्थल बन गया है। देश-विदेश के उद्यमियों को निवेश के अवसरों से रूबरू कराने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में दो दिवसीय जीआईएस-2025 का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभांरभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे। इस ‘महाकुंभ’ में दुनिया भर से आने वाले निवेशकों का समागम होगा। व्यापार और उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिये प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सभी उद्यमियों के लिए निवेश के अपार अवसर और उसके बाद दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के प्रति संकल्पित है। मध्यप्रदेश पर्यटन, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खनन, डेयरी और खाद्य प्र-संस्करण जैसे क्षेत्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास की असीमित संभावनाएं मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट प्रिपेअर्डनेस इंडेक्स में देश के शीर्ष़-10 राज्यों में और विश्व बैंक द्वारा आयोजित ईज़-ऑफ-डूइंग बिज़नेस में चौथे स्थान पर है। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने से मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास के असीम अवसर उपलब्ध हैं। मजबूत रेल और सड़क नेटवर्क के अलावा राज्य में 6 व्यावसायिक एयरपोर्ट हैं, जहां से 100 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। इससे यहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवागमन सुगम हुआ है। खनिज संसाधन और औद्योगिक समृद्धि मध्यप्रदेश में कोयला, हीरा, तांबा, लौह अयस्क और ग्रेफाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों का भण्डार है। प्रदेश तांबा, मैंगनीज, मोलिब्डेनम और हीरे का देश का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। राज्य सरकार कृषि और खाद्य प्र-संस्करण, आईटी, आईटीईएस, पर्यटन, वस्त्र उद्योग, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, दवाइयां एवं फार्मास्युटिकल्स और रक्षा एवं एयरोस्पेस सेक्टर पर प्रमुखता से ध्यान दे रही है। राज्य में 8 फूड पार्क, लगभग 15 मिलियन मीट्रिक टन की वेयरहाउसिंग क्षमता और 3 लाख 54 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र कवर करने वाले कोल्ड-स्टोरेज के साथ मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बनता जा रहा है। शिक्षा, पर्यटन और हरित क्षेत्र में अग्रणी मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। यहां देश भर के सबसे बड़े क्षेत्र में जैविक खेती की जाती है। भारत के कुल जैविक उत्पादन का 27% मध्यप्रदेश में होता है। भारत के सबसे स्वच्छ राज्य मध्यप्रदेश का इंदौर शहर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है और भोपाल स्वच्छतम राजधानी। राज्य की बड़ी जनसंख्या इसे विशाल उपभोक्ता बाजार भी बनाती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए 1.25 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की औद्योगिक भूमि-बैंक है। इसमें से 19,011 हेक्टेयर क्षेत्र उद्योगों के लिए पहले ही विकसित किए जा चुके हैं। राज्य में 76 विकसित, 19 विकासाधीन और 13 प्रस्तावित भूमि-बैंक हैं, जो 5 ग्रोथ सेंटर्स में फैले 79 भूखंडों में वितरित हैं। राज्य में 6 प्रमुख ड्राई इनलैंड कंटेनर डिपो हैं, इनकी वेयरहाउसिंग क्षमता 240 लाख मीट्रिक टन है। मध्यप्रदेश ऊर्जा सरप्लस राज्य है, जहां 31 गीगावाट विद्युत का उत्पादन होता है, जिसमें 20 प्रतिशत क्लीन एनर्जी है। मध्यप्रदेश किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति करने में सक्षम है। सड़क नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स मध्यप्रदेश ने अपने सड़क नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई का सड़क नेटवर्क है, जिसमें 46 राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। यह देश के राष्ट्रीय राजमार्गों का 6.6% और राज्य-राजमार्गों का लगभग 6.4% है। राज्य में प्रतिदिन 550 से अधिक ट्रेनों का संचालन होता है। इसके साथ ही 2,32,344 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों के साथ, मध्यप्रदेश 5वां सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला राज्य है। राज्य में अटल प्रोग्रेस-वे और नर्मदा एक्सप्रेस-वे के साथ ही दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, पीथमपुर-धार-महू, रतलाम-नागदा, शाजापुर-देवास, और नीमच-नयागांव जैसे औद्योगिक एवं निवेश क्षेत्रों का निर्माण किया गया है। औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में 4 निवेश गलियारों का विकास किया जा रहा है। इनमें भोपाल-इंदौर, भोपाल-बीना, जबलपुर-कटनी-सतना-सिंगरौली और मुरैना-ग्वालियर-शिवपुरी-गुना शामिल हैं। मध्यप्रदेश ईज़-ऑफ-डूइंग बिजनेस रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक है। यहां व्यापार संचालन और निवेश के लिये माहौल को अत्यधिक अनुकूल बनाया गया है। इसके साथ ही नियामकीय प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल किया गया है। इससे आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रदेश में किये गए मुख्य सुधारों में ऑनलाइन पंजीकरण, लाइसेंसिंग और अनुमति स्वीकृति जैसी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और इन्वेस्ट मध्यप्रदेश विंडो प्रमुख हैं। इन्वेस्ट पोर्टल को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ रहा है। प्रमुख सेक्टर्स और उद्योग प्रोत्साहनकारी नीतियां राज्य में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए आकर्षक नीतियां बनाई गई हैं। इनमें संयंत्र और मशीनरी में निवेश पर 40% तक इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन सहायता, रोजगार सृजन पर 1.5 गुना पूंजी सब्सिडी, निर्यात पर 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए 1.2 गुना पूंजी सब्सिडी शामिल है। ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन असिस्टेंस जैसी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना के लिए सहायता, पॉवर, जल और सड़क इन्फ्रास्ट्रक्टर के निर्माण के लिए प्रति यूनिट एक रुपया की दर से टैरिफ रिबेट और पेटेंट शुल्क की प्रतिपूर्ति भी प्रमुख प्रोत्साहन नीतियों में शामिल हैं। वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में ब्याज सब्सिडी, रोजगार सृजन और प्रशिक्षण प्रोत्साहन दिया जा रहा है। फार्मा सेक्टर में ग्रॉस सप्लाई वेल्यू के लिए एक वर्ष का स्टॉक पीरियड और खाद्य प्र-संस्करण सेक्टर में 50% अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी और मंडी कर (कृषि व्यापार कर) में 5 वर्षों के लिए छूट दी गई है। स्टार्टअप और एमएसएमई नीति नवाचार-आधारित उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति-2022 जारी की है। एमएसएमई इकाइयों के विस्तार और राज्य में स्व-रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना प्रारंभ की गई है। निवेश को आकर्षित करने के लिए, राज्य सरकार ने एमएसएमई विकास नीति और औद्योगिक प्रोत्साहन नीति प्रारंभ की है। डिजिटल गवर्नेंस के तहत, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर्स के कार्यान्वयन से नागरिक-केन्द्रित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करने और सूचना के एकत्रीकरण और निगरानी को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नवाचार, संसाधन, और अवसंरचना के मेल से मध्यप्रदेश न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों के लिए एक आदर्श स्थल बनकर उभर रहा … Read more

मध्यप्रदेश: तीन तहसीलें बनेंगी जिला! मुख्यमंत्री मोहन यादव का है प्लान

भोपाल. मध्यप्रदेश में जिले बनाने की मांग तेजी से उठ रही है। आने वाले समय में प्रदेश के कई जिलों और संभागों का नक्शा जल्द बदल सकता है। सरकार के द्वारा पुनर्गठन आयोग का गठन कर दिया गया है। जिसमें रिटार्यड आईएएस मनोज श्रीवास्तव और मुकेश कुमार शुक्ला को नियुक्त किया गया है। पुनर्गठन आयोग को जिम्मेदारी दी गई है कि प्रदेश में संभाग, जिले, तहसील, विकासखंड का नए सिरे से सीमांकन कर रूपरेखा तैयारी किए जाएंगे। इन तीन तहसीलों को जिला बनाने की तैयारी बीना को जिले बनाने की मांग पिछले 40 साल से हो रही है। विधायक निर्मला सप्रे ने बीना को जिला बनाने की मांग को लेकर बीजेपी ज्वाइन की थी, लेकिन खुरई को भी जिला बनाने की लॉबिंग होने लगी। बीना की सागर से दूरी लगभग 75 किलोमीटर है। अगर बीना नया जिला बनता है तो खुरई, बीना, मालथौन, कुरवाई, पठारी, बांदरी जैसी जगहों को इसमें शामिल किया जा सकता है। सिरोंज को बनाया जा सकता है नया जिला सिरोंज तहसील की विदिशा से दूरी करीब 85 किलोमीटर है। वहां के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए विदिशा आने में काफी समय लग जाता है। जिससे की समय की बर्बादी होती है। अगर सिरोंज जिले के अस्तित्व में आता है तो लटेरी तहसील और ग्राम पंचायत आनंदपुर को इसमें शामिल किया जा सकता है। इधर, आनंदपुर को गुना जिले में शामिल करने का भी सुझाव दिया गया है। क्योंकि गुना की दूरी आनंदपुर से सिरोंज के बराबर है। नए जिले के अस्तित्व में आ सकता है पिपरिया नर्मदापुरम से अलग करके पिपरिया को अलग जिला बनाया जा सकता है। क्योंकि नर्मदापुरम से पिपरिया की दूरी 70 किलोमीटर है। पहाड़ी रास्तों से गुजरने में करीब 2 घंटे का समय लग जाता है। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान पिपरिया को जिला बनाने की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और हड़ताल भी की गई थी। बता दें कि, सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा था कि हमने सरकार बनाई तो हमने इस बात पर ध्यान दिया कि एमपी भौगेलिक दृष्टि से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। क्षेत्रफल में बड़ा तो है, लेकिन समय के साथ कुछ कठिनाइयां भी आई हैं। जिले तो बढ़ गए हैं, लेकिन सीमाओं को लेकर विसंगतियां हैं।

अगले 48 घंटों में पड़ेगी कड़ाके की ठंड, मध्य प्रदेश में फेंगल तूफान का असर

भोपाल। मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी पड़ने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में रविवार को प्रदेश में सबसे कम सात डिग्री सेल्सियस तापमान राजगढ़ में दर्ज किया गया। हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात का तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस पर रहा। राजधानी सहित 11 शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, हवाओं का रुख बदलने से कहीं-कहीं आंशिक बादल छाने लगे हैं। इस वजह से न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन ठंड का जलवा बरकरार रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में देश के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में जेट स्ट्रीम बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी में तूफान फेंगल कुछ कमजोर पड़ने के बाद गहरा अवदाब का क्षेत्र बन गया है। इसके पुड्डूचेरी के आसपास टकराने के आसार हैं। पाकिस्तान के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ द्रोणिका के रूप में बना हुआ है। हवाओं का रुख उत्तरी एवं उत्तर-पूर्वी बना हुआ है। तूफान फेंगल का असर मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि तूफान फेंगल के असर से हवाओं का रुख बदलने लगा है। इस वजह से कहीं-कहीं मध्यम एवं ऊंचाई के स्तर पर बादल छा रहे हैं। इस वजह से न्यूनतम तापमान में कुछ बढ़ोतरी होने के आसार हैं। उधर, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी, वर्षा होने की भी संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने पर एक बार फिर तापमान में गिरावट होने की संभावना है। 10 डिग्री से कम तापमान वाले शहर राजगढ़- 7.0 नौगांव- 7.2 भोपाल- 8.6 रायसेन- 9.0 टीकमगढ़- 9.0 खंडवा- 9.4 खजुराहो- 9.4 बैतूल- 9.5 उमरिया- 9.5 गुना- 9.6 ग्वालियर- 9.8 -, तापमान डिग्री सेल्सियस में।

सब रजिस्ट्रार के मिलेंगे अधिकार, मध्य प्रदेश में अब बिल्डर खुद कर सकेंगे प्रोजेक्ट प्रापर्टी की रजिस्ट्री

भोपाल। राज्य सरकार अब रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) में पंजीकृत बिल्डरों (निजी निर्माणकर्ता) को भी सब रजिस्ट्रार का अधिकार देने जा रही है। इससे वह अपने प्रोजेक्ट में संपत्ति की रजिस्ट्री खुद कर सकेंगे। राज्य सरकार शुरुआत में मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड और भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) के एक-एक अधिकारी को सब रजिस्ट्रार के अधिकार देगी। इसका प्रस्ताव तैयार है। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही यह नई व्यवस्था प्रदेशभर में लागू हो जाएगी। इसके तहत हाउसिंग बोर्ड या विकास प्राधिकरण के किसी अधिकारी को सब रजिस्ट्रार का प्रभार दिया जाएगा। यह अधिकारी प्रदेश में हाउसिंग बोर्ड या विकास प्राधिकरण के प्रोजेक्ट में संपत्ति की रजिस्ट्री कर सकेगा। इस नई व्यवस्था से बड़ा फायदा यही होगा कि संपत्ति खरीदने वाले व्यक्ति को रजिस्ट्रार दफ्तर नहीं जाना होगा। वह हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में बनाए गए सब रजिस्ट्रार के माध्यम से भी रजिस्ट्री करवा सकेगा। बिल्डर रजिस्ट्री की प्रक्रिया की करेगा वीडियोग्राफी प्रस्ताव के अनुसार हाउसिंग बोर्ड, बीडीए सहित रेरा में पंजीकृत बिल्डर को सब रजिस्ट्रार का अधिकार देने से वे अपने प्रोजेक्ट में संपत्ति की एक साथ रजिस्ट्री करवा सकेंगे। इससे लाभ यह होगा कि प्रापर्टी खरीदने वालों को रजिस्ट्रार कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा और वे दलालों के चंगुल से भी बच सकेंगे। इस नई व्यवस्था को ‘नान इंट्रेस्ट मोड’ नाम दिया गया है। बिल्डर रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करेगा, इसे आधार से लिंक कर साफ्टवेयर में दस्तावेज का पंजीयन कर आनलाइन सबमिट किया जाएगा। सब रजिस्ट्रार इसका परीक्षण करके इसे स्वीकृति प्रदान करेगा। अभी यह है व्यवस्था अभी स्टांप वेंडर की मदद से क्रेता और विक्रेता अपने दो गवाह के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होता है। संपत्ति के दस्तावेजों का आनलाइन वेरिफिकेशन किया जाता है। इसके बाद रजिस्ट्री कर दी जाती है। इसके पहले रजिस्ट्रार कार्यालय से स्लाट बुक होता है। स्लाट का नंबर आने पर ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया की जाती है। संपदा 2.0 के तहत भी रजिस्ट्री कराने की घर बैठे मिल रही सुविधा अक्टूबर, 2024 से प्रदेश में लागू किए गए रजिस्ट्री के नए साफ्टवेयर संपदा-2.0 के तहत अब लोग घर बैठे संपत्ति की रजिस्ट्री करवा रहे हैं यानी खरीद या बेच रहे हैं। इस प्रणाली से प्रदेश ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश के बाहर से भी ऑनलाइन रजिस्ट्रियां कराई जा सकती हैं। हालांकि इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद भी गवाहों को कार्यालय तक आना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह सेवा प्रदाताओं के पास थंब इंप्रेशन और वेब कैमरा नहीं होना हैं इसलिए रजिस्ट्री के पुराने साफ्टवेयर संपदा-1 पर भी काम जारी है।

मध्यप्रदेश: 1800 करोड़ से बनेंगे एक्सप्रेस हाइवे, 25 मिनट दूर होगा एयरपोर्ट

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के भविष्य का रास्ता अयोध्या बाईपास के आसपास से निकलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आमजन से लेकर कारोबारी तक को केवल 25 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचने के लिए यहां काम तेजी से किया जा रहा है। इतना ही नहीं भोपाल को लॉजिस्टिक हब बनाने, नया व्यवसायिक क्षेत्र- इंडस्ट्रीयल कॉरीडोर विकसित करने समेत भोपाल में प्रवेश के एतिहासिक गेट को बनाने का प्रस्ताव भी यहीं पर है। प्रभात चौराहा, रायसेन रोड से लेकर जेके रोड तिराहा, रत्नागिरी से बायपास और फिर एयरपोर्ट तक शहर के विकास की कहानी इस समय इसके ही इर्द-गिर्द है। यहीं से लोगों को मिसरोद, 11 मिल, मंडीदीप के लिए निकाला जाएगा। 1800 करोड़ रुपए में आठ लेन होगा बायपास रत्नागिरी से आसाराम तिराहा तक 20 किमी लंबे चार लेन अयोध्या बायपास को आठ लेन किया जा रहा है। 6 लेग मुख्य मार्ग होगा, जबकि दो लेन सर्विस रोड रहेगी। इसके तहत स्त्नागिरी पर टी जंक्शन होगा। ये आनंद नगर, पिपलानी, प्रभात चौराहा से जुड़ेगा। इससे रयरपोर्ट का रास्ता महज 25 मिनट का रह जाएगा। एनएचएआई ने इसके लिए काम शुरू किया है। 1800 करोड़ रुपए का बजट लगेगा। अयोध्या बायपास में पांच फ्लाइओवर बनेंगे। भोपाल की ये सबसे लंबी कमर्शियल रोड होगी। यूपी-एमपी के उद्योग सप्लाई में राहत मिलेगी। शहर के 5 लाख लोगों को व्यापार में राहत होगी। ये भी जानिए लॉजिस्टिक हब और औद्योगिक कॉरिडोर 2200 करोड़ के लॉजिस्टिक हब की योजना। भोपाल मास्टर प्लान में औद्योगिक नी विकास का प्रावधान। आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स 1100 करोड़ के हाउसिंग प्रोजेक्ट । बनेगा ट्रांसपोर्ट और टैक्स केंद्र कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और आरटीओ यहीं या स्थित। यूपी-एमपी व्यापार को मिलेगी राहत। भोपाल की सबसे लंबी कमर्शियल रोड। 5 लाख लोगों को मिलेगा सीधा लाभ । को व्यापार और उद्योगों के लिए आदर्श क्षेत्र ।

मोहन सरकार देगी मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नए साल में 3 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता बढ़ेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के करीब 7 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल (New Year 2025) पर मोहन सरकार (Mohan Government) बड़ा तोहफा देने जा रही है. दरअसल, प्रदेश में DA यानी महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. यहां कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3 से 4 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. इसे लेकर वित्त विभाग तैयारी कर रहा है. वहीं दिसंबर महीने में प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के अकाउंट में एरियर की पहली किस्त की राशि भी आएगी. 3 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है महंगाई भत्ता जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 में 3 प्रतिशत तक महंगाई भत्ता बढ़ाया जा सकता है. इससे पहले राज्य सरकार ने जनवरी 2024 में यह 46 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था. हालांकि केंद्रीय कर्मचारियों (Central employees) को जुलाई 2024 से 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं  केंद्र सरकार जनवरी 2025 से महंगाई भत्ता में फिर वृद्धि करने जा रही है. ऐसे में मोहन सरकार भी अपने कर्मचारियों को नए साल में तोहफा देने की तैयारी में हैं. राज्य सरकार ने की देरी बताते चलें कि अब तक मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाती थी, महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि की जाती थी, लेकिन अब इसमें विलंब हो रहा है। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है। केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत किया जा चुका है, लेकिन राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ नहीं मिला है। केंद्र सरकार फिर बढ़ाएगी महंगाई भत्ता सूत्रों का कहना है कि मप्र सरकार नए साल में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है, क्योंकि केंद्र सरकार फिर इसमें वृद्धि कर सकती है। राज्य सरकार के बजट में भी 56 फीसदी महंगाई भत्ते का प्राविधान है। ऐसे में महंगाई भत्ता बढ़ाने में बजट की भी कोई समस्या नहीं आएगी। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त इससे पहले मप्र सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की थी, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया। ऐसे में जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है। पहली किस्त दिसंबर में दी जाएगी। दूसरी जनवरी, तीसरी फरवरी और चौथी किस्त की राशि खातों में मार्च 2025 में आएगी। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की थी, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया. ऐसे में जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है. पहली किस्त दिसंबर में मिलेगी, जबकि दूसरी किस्त जनवरी में दी जाएगी. वहीं तीसरी किस्त फरवरी और चौथी किस्त की राशि मार्च 2025 में कर्मचारियों के खातों में आएगी. बता दें कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है. दरअसल, केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत दिया जा रहा है, जबकि राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ अभी तक नहीं मिला है.  

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए ई-खसरा परियोजना शुरू, ₹30 में ले पाएंगे खसरा-खतौनी की प्रमाणित प्रति

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें अपनी जमीन के रिकॉर्ड आसानी से और कम कीमत पर मिलेंगे। मोहन सरकार ने ई-खसरा परियोजना शुरू की है, जिसके तहत किसान सिर्फ 30 रुपये में खसरा-खतौनी की प्रमाणित कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई है। राष्ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ई-खसरा परियोजना की शुरुआत हुई है। इस परियोजना का लक्ष्य जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाना और किसानों तक आसानी से पहुंचाना है। इससे जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। अब किसानों को केवल 30 रुपये प्रति पन्ने पर खसरा, खतौनी और नक्शे की प्रमाणित प्रति मिलेगी। नहीं रहेगी हेराफेरी की आशंका खसरा और खतौनी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनमें जमीन और खेती से जुड़ी सारी जानकारी होती है। पहले किसानों को केवल खसरा-खतौनी की फोटोकॉपी मिलती थी, जिसमें कई बार हेराफेरी की आशंका रहती थी। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। कई बार तो किसानों के साथ धोखाधड़ी भी हो जाती थी। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें खसरा-खतौनी में बदलाव करके किसानों को ठगा गया है। लेकिन अब इस नई व्यवस्था के आने से ऐसी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। किसानों को अब प्रमाणित दस्तावेज मिलेंगे, जिससे उन्हें सुरक्षा मिलेगी। सभी तहसीलों में आईटी सेंटर की व्यवस्था ई-खसरा परियोजना के तहत, प्रदेश की सभी तहसीलों में आईटी सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटर्स में एक निजी कंपनी काम कर रही है, जिसे सरकार ने यह जिम्मेदारी सौंपी है। किसान इन सेंटर्स में जाकर आसानी से अपने जमीन के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर सकते हैं। खसरा (B-1) और नक्शे की कॉपी के लिए 30 रुपये प्रति पन्ना देना होगा। यह व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी है और इससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। इस लिए यह व्यवस्था किसानों के हित में बताई जा रही है। यहां देख सकते हैं विवरण सरकार ने किसानों के लिए एक और सुविधा भी उपलब्ध कराई है। यदि कोई किसान पैसे खर्च नहीं करना चाहता है, तो वह अपने खेत का विवरण मुफ्त में देख सकता है। इसके लिए उसे mpbhulekh.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा। यहां से वह अपने खाते की जानकारी, खेत का नक्शा और अन्य जरूरी विवरण देख सकता है। इससे किसानों को अपने खेत और फसल पर नजर रखने में भी मदद मिलेगी।

मध्यप्रदेश के 21 जिलों में पीवीटीजी परिवारों के लिये बनेंगे पक्के आवास

भोपाल केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में 33 हजार 138 आवास मंजूर किये गये हैं। पीएम जन-मन के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से कमजोर एवं पिछड़े जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के ‘पक्के घर’ बनाये जा रहे हैं। मंत्रालय द्वारा प्रदेश के 21 जिलों में रहने वाले पीवीटीजी परिवारों को पक्के घर की सौगात देते हुए यह विशेष मंजूरी दी गई है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मध्यप्रदेश को बड़ी संख्या में पीएम आवास मंजूर करने के लिये केन्द्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया है। मध्यप्रदेश को इन पीएम आवासों की 25 नवम्बर को मंजूरी दी गई है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा श्योपुर जिले को 7561, शिवपुरी को 5154, उमरिया को 4092, शहडोल 2591, अशोकनगर 2294, गुना 2084, सिंगरौली 1895, डिंडोरी 1532, अनूपपुर 1522, सीधी 1042, मंडला 903, मुरैना 695, विदिशा 448, बालाघाट 401, ग्वालियर 266, छिंदवाड़ा 202, नरसिंहपुर 158, सिवनी 117, दतिया 110, जबलपुर 42 एवं रायसेन जिले को 29 पीएम आवास मंजूर किये गये हैं। मध्यप्रदेश को 1 लाख 44 हजार 200 पीएम आवासों की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है। इस प्रकार मध्यप्रदेश को अब तक 1 लाख 77 हजार 338 पीएम आवास स्वीकृत हो चुके हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पीएम जन-मन के तहत प्रदेश के 24 जिलों में रहने वाले पीवीटीजी परिवारों के समग्र विकास के लिये विभिन्न प्रकार के विकास एवं हितग्राहीमूलक कार्य किये जा रहे हैं। पीएम जन-मन में ‘सबको पक्का घर’ के तहत सभी पीवीटीजी परिवारों के पक्के घर बनाकर इन घरों में विद्युतिकरण भी कराया जा रहा है।

सीएम यादव के विदेश दौरे से पहले नए DGP के नाम का ऐलान होगा, दिल्ली में मंथन जारी !

नईदिल्ली  मध्यप्रदेश के नए DGP को लेकर दिल्ली (Delhi) में बैठक का दौरा जारी है. पिछले कई दिनों से सरकार में अलग-अलग स्तर पर नए डीजीपी (MP New DGP) के नाम को लेकर मंथन हो चुका है. अब बारी दिल्ली की है, नए डीजीपी के नाम किस अधिकारी पर मोहर लगती है, ये देखना अभी बाकी है. सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के विदेश दौरे पर जाने से पहले नए अधिकारी के नाम का ऐलान होना है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले तीन दिनो में ये नाम सामने आ जाएगा. 9 नामों में से होगा एक नाम राज्य सरकार ने केंद्र सरकार (डीओपीटी) को 9 नामों का पैनल भेजा था. जिसमें डीजी ईओडब्ल्यू अजय कुमार शर्मा, डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार, पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के अध्यक्ष कैलाश चंद्र मकवाना, डीजी जेल जीपी सिंह, पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के एमडी उपेंद्र कुमार जैन, स्पेशल डीजी वरुण कपूर, स्पेशल डीजी आलोक रंजन, डीजी महिल सेल प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, एडीजी योगेश मुद्ग़ल के नाम शामिल है. मध्य प्रदेश के नए डीजीपी का नाम इन्हीं नामों में से चुना जाएगा. रेस में शर्मा सबसे आगे डीजीपी की दौड़ में सीनियर अफसर अजय शर्मा का नाम सबसे आगे है. 1989 बैच के IPS अफसर अजय शर्मा हाल के दिनों में डीजी ईओडब्ल्यू की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. अगस्त 2026 में रिटारयर होंगे. दूसरा नाम 1988 बैच के IPS अफसर कैलाश मकवाना का है, मकवाना हाउसिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं. मोहन सरकार ने जिन अफसरों के नाम केंद्र को भेजे है, उन सभी अधिकारियों ने अपनी 30 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है. 30 को रिटायर होंगे सक्सेना प्रदेश के डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना 30 नवंबर के रिटायर हो रहे है. सक्सेना मार्च 2022 से इस पद पर है,  नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग के पैनल से हुई थी करीब ढ़ाई साल तक प्रदेश के डीजीपी पद रहकर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे. अगले तीन दिनों में सामने होगा नाम डीजीपी का नाम अगले तीन दिनो में सामने आ जाएगा. सीएम मोहन यादव 24 नवंबर से विदेश दौरे पर जा रहे है, ऐसे में नए डीजीपी का नाम उससे पहले तय होने की पूरी संभावना है.ऐसे में 30 नवंबर से पहले से नए डीजीपी वर्तमान डीजीपी के ओएसडी के रूप में काम करेंगे. इन 6 IPS अधिकारियों के नाम की चर्चा जोरों पर डीजीपी पद के प्रबल दावेदार कौन? इस पद के प्रबल दावेदारों में होमगार्ड डीजी अरविंद कुमार और हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश मकवाना के नाम सबसे आगे हैं। ईओडब्ल्यू के डीजी अजय शर्मा और प्रतिनियुक्ति पर गए आलोक रंजन, योगेश मुद्गल और पवन श्रीवास्तव भी रेस में शामिल हैं। ये सभी अधिकारी 1988 और 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वरिष्ठता के आधार पर इनमें से एक को डीजीपी बनाया जाएगा। जबकि अन्य अधिकारियों का नाम रेस में नहीं है, क्योंकि उनका कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने वाला है। बेटी संभालेगी परेड की कमान बता दें कि डीजीपी सक्सेना के लिए 30 नवंबर को एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। उनकी बेटी और आईपीएस अधिकारी सोनाक्षी परेड की कमान संभालेंगी। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश के पुलिस इतिहास में पहली बार होगा कि किसी डीजीपी को उनकी बेटी द्वारा विदाई परेड की कमान सौंपी जाएगी। इस आयोजन को यादगार बनाने की तैयारी जोरों पर है। नए डीजीपी के सामने होंगी ये चुनौतियां गौरतलब है कि राज्य को अक्टूबर में अनुराग जैन को मुख्य सचिव का पद मिला था। अब नए डीजीपी की नियुक्ति के साथ ही राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में नए चेहरों शामिल हो जाएंगे। यह बदलाव राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। नए डीजीपी के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर अंकुश लगाने जैसी चुनौतियां होंगी। देखना होगा कि नवनियुक्त डीजीपी इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और राज्य की जनता की उम्मीदों पर कैसे खरे उतरते हैं।  DGP पिता की विदाई परेड में DCP बेटी देगी सलामी  मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि डीजीपी पिता के सेवानिवृत्त होने पर उनके विदाई परेड में सलामी की जिम्मेदारी उनकी डीसीपी बेटी को मिली है. विदाई परेड मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित की जाएगी. दरअसल, 32 महीने के कार्यकाल के बाद मध्य प्रदेश पुलिस के डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना सेवानिवृत्त (रिटायर) हो जाएंगे. उनकी विदाई परेड का आयोजन मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित किया गया है. खास बात यह है कि उनकी विदाई परेड की जिम्मेदारी उनकी बेटी सोनाक्षी सक्सेना को दी गई, जो 2020 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. सोनाक्षी को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ही परेड कमांडर की जिम्मेदारी दी गई थी. उनकी पहली तैनाती इंदौर में की गई थी. दो साल पहले बने डीजीपी प्रदेश के 30वें पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं. वो 1987 बैच के भारतीय पुलिस सेवा आईपीएस अधिकारी हैं. सुधीर कुमार सक्सेना 4 मार्च 2020 को पूर्व डीजीपी विवेक जौहरी के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद पर काबिज हुए थे. उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने साइबर अपराध के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित किया और नक्सल प्रभावित जिलों में पुलिस कार्रवाई को मजबूत किया. राजधानी भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में 30 नवंबर को आयोजित होने वाले विदाई समारोह में होने वाली परेड को लेकर पुलिस का अभ्यास कार्यक्रम जल्द शुरू होगा. सलामी देने वाली टीम सोमवार से नेहरू नगर स्टेडियम में अभ्यास करेगी. मौजूदा डीजीपी सुधीर सक्सेना के सेवानिवृत्त के साथ ही प्रदेश में नए डीजीपी के नामों पर भी चर्चा शुरू हो गई है. आईपीएस अरविंद कुमार, आईपीएस कैलाश मकवाना और आईपीएस पवन श्रीवास्तव सहित कई नामों पर चर्चा हो रही है. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जिसके नाम पर मुहर लगेगी, वह प्रदेश का नया डीजीपी होगा.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया

भोपाल नागरिकों को अधिसूचित सेवाएँ प्रदाय करने की कानूनी गारंटी देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश में 25 सितम्बर 2010 से लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम प्रभावशील है। वर्तमान में अधिनियम अंतर्गत 748 सेवाएँ अधिसूचित की जा चूंकि है। इन सेवाओं में लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों के लिए 342 सेवाएँ ऑनलाईन प्रदाय की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया हैं। नागरिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए समाधान एक दिन तत्काल सेवा, सीएम हेल्पलाईन 181 कॉल सेन्टर, महिला हेल्पलाईन, सीएम जन सेवा, दिव्यांग हेल्पलाईन आदि का क्रियान्वयन जनोन्मुखी प्रशासन के गवाही देते है। मध्यप्रदेश सरकार ने नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने और सेवा प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए सुशासन की दिशा में समय-समय पर अनेक कदम उठाएँ है। मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम 2010 के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पृथक से लोक सेवा प्रबंधन विभाग का गठन किया गया। वर्ष 2013 में राज्य लोक सेवा अभिकरण की स्थापना की गई। राज्य लोक सेवा अभिकरण में लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के साथ-साथ लोक सेवा केन्द्रों की स्थाना और संचालन का सीएम हेल्पलाईन कॉल सेंटर का संचालन और सीएम डेशबोर्ड का संचालन भी शामिल है। लोकसेवा केन्द्रों के माध्यम से नगारिकों को एक समयावधि में सेवाएँ प्रदाय करने के लिए सभी तहसीलों में 439 लोकसेवा केन्द्रों की स्थापना की गई है, जिनके माध्यम से विभिन्न विभागों की अधिसूचित सेवाएँ नागरिकों को प्रदाय की जा रही हो। अधिनियम के अंतर्गत विभाग की अधिसूचित सेवा “जाति प्रमाण पत्र प्रदाय” अभियान के तहत लोकसेवा केन्द्रों द्वारा प्रदेश भर के स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने का अभियान सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस अभियान में अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख डिजिटल हस्ताक्षरित रंगीन प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा चुके है। प्रदेश में लोकसेवा गारंटी अंतर्गत अधिसूचित समस्त सेवाओं में 10 करोड़ 62 लाख आवेदनों का अब तक निराकरण किया जा चुका है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 अंतर्गत सेवाओं की प्रदाय की गारंटी हैं। प्रत्येक सेवा को प्रदाय करने की एक समयावधि भी तय की गई है। इसमें समय पर सेवा नहीं देने पर जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। अधिकारी वर्ग प्रतिदिन 250 रूपये से लेकर अधिकतम 5000 हजार रूपये तक की जुर्माना राशि जमा करने का प्रावधान है। समाधान एक दिन तत्काल प्रदाय सेवा नागरिकों को केवल एक दिन की समयावधि में सेवा उपलब्ध कराने की मंशा से मध्यप्रदेश शासन ने फरवरी 2018 में “समाधान एक दिन तत्काल सेवा” व्यवस्था शुरू की। इस व्यवस्था में आवेदक द्वारा दोपहर पूर्व तक दिए गए आवेदन का निराकरण दोपहर पश्चात कर दिया जाता है। इस सेवा में डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र व्हाटसअप, ई-मेल के माध्यम से भी आवेदकों को भेजे जा रहे है, जिससे आवेदक अपनी सुविधा अनुसार प्रमाण-पत्र समाधान एक दिन तत्काल सेवा व्यवस्था में अब तक दो करोड़ 63 लाख से अधिक आवेदन निराकृत किए गए है। समाधान एक दिन में दी जाने वाली 32 सेवाओं में आय प्रमाण-पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, ट्रेड लाइसेंस, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को डुप्लीकेट पात्रता पर्ची जारी चालू खसरा, बी-1 खतौनी चालू नक्शा, खसरा की प्रतिलिपि (खाते के समस्त), अभिलेखागार प्रतिलिपि, राजस्व प्रकरण में आदेश की प्रतिलिपि, भू-अधिकार पुस्तिका का प्रथम बार प्रदाय, जिला स्तरीय रिकॉर्ड रूम से पारित आदेश/अंतरिम आदेश आदि की सत्यप्रतिलिपि इत्यादि कई सुविधाएँ प्रदान की जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ से मिली सराहना मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम अपनी तरह का पहला विशेष अधिनियम है जो निर्धारित समय-सीमा में नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं के प्रदान की गारंटी देता है। इसे वर्ष 2012 में अधिनियम को यूएनपीएसए पुरूस्कार प्राप्त हुआ। “लोक सेवाओं के वितरण में सुधार वर्ग में इस अधिनियम को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2012 को लोक सेवा पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ है।  

मध्यप्रदेश के हर विवि में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब बनेगी, साल भर नहीं चलेगी परीक्षा

भोपाल मध्यप्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब तैयार की जाएगी। ये लैब 24 घंटे सातों दिन स्टूडेंट्स को उपलब्ध रहेंगी। सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) और परीक्षा नियंत्रक की समीक्षा बैठक के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने ये निर्देश जारी किए हैं। इसमें जिन बिन्दुओं पर फोकस करने के निर्देश जारी किए हैं, उसमें छात्र हित से जुड़े कई मामले शामिल हैं। शासन ने ये निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत हायर एजुकेशन में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च सेंटर स्थापना, विद्यार्थियों के एनरोलमेंट, अगली कक्षा में प्रमोशन, परीक्षा संचालन, परीक्षा परिणाम और अन्य मामलों में डिस्कसन के बाद जारी किए हैं। ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि साल भर न चले परीक्षा कुलसचिवों से कहा है कि वे ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि परीक्षा साल भर न चले। खास तौर पर इग्नू विश्वविद्यालय, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और भोज विश्वविद्यालय के कुलसचिव अपनी परीक्षा के टाइम टेबल परंपरागत विश्वविद्यालयों के टाइम टेबल के साथ सेट करें ताकि महाविद्यालय में साल भर परीक्षा की स्थिति न बने और शैक्षणिक कार्यक्रम कैलेंडर के अनुसार हो सके। इसके लिए आगामी कार्य योजना बनाई जाए और जरूरत हो तो स्कूलों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं। 45 दिन में पूरे हों एग्जाम, 15 जुलाई तक आए रिजल्ट सभी विश्वविद्यालय अपना परीक्षा कार्यक्रम 45 दिन में पूरा कराएं और एक माह में सप्लीमेंट्री परीक्षा कराएं। सभी विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम 15 जुलाई तक जारी करें। परीक्षाओं के कारण विद्यार्थियों का अस्थायी प्रवेश बाधित नहीं होना चाहिए। हायर क्लास में प्रवेश तुरंत देने की जिम्मेदरी कुलसचिव की है। काॅलेज में टीचर की नियुक्ति रोकें, शासन से होगी भर्ती उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि पुराने विश्वविद्यालयों के सभी रजिस्ट्रार शैक्षणिक स्टाफ की कमी को देखते हुए महाविद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति प्रथा को रोकें। रिक्त पदों पर शासन के निर्देशानुसार भर्ती की जाएगी ताकि महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता ठीक की जा सके। इसको लेकर शासन की ओर से दिव्यांगों और सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा है कि सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए रोस्टर खुद तैयार करें और जरूरत होने पर उच्च शिक्षा विभाग से संपर्क करें। शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार हो जो बगैर सूचना विजिट करे विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार कराएं जो अपने क्षेत्र में माह में एक बार बगैर सूचना दिए विजिट करें, यह विजिट सकारात्मक होना चाहिए। सभी विश्वविद्यालय अपने से संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी शासन को जल्द देंगे। सभी रजिस्ट्रार मान्यता और संबद्धता का साफ्टवेयर तैयार करने के लिए आपस में चर्चा करेंगे और शासन द्वारा ली जाने वाली अगली बैठक में जानकारी देंगे। रीवा, छतरपुर, छिंदवाड़ा में पेंशन फंड का पैसा जमा नहीं कार्यकारी परिषद की जानकारी सभी विश्वविद्यालयों को सरकार को देना होगी। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त भी शामिल होंगे। विश्वविद्यालयों के पेंशन पंड के संबंध में सभी विवि को निर्देश दिए हैं कि राशि पेंशन फंड में जमा करें। रीवा, छतरपुर और छिंदवाड़ा विश्वविद्यालयों के कुल सचिव से 2023-24 का पेंशन फंड का बाकी पैसा जल्द जमा करने के लिए कहा गया है। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है।

टाईगर, चीता, तेंदुआ, कि मौतों का अड्डा बना प्रदेश, एक और मादा तेंदुआ कि मौत

The state became a den of deaths of tiger

The state became a den of deaths of tiger, cheetah and leopard, another female leopard died. बुरहानपुर । नयाखेड़ा-केरपानी रोड़ के पास मामा-भांजे बलडी में बुधवार को मादा तेंदुए का शव मिलने से गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही बुरहानपुर डीएफओ विजय सिंह, एसडीओ अजय सागर सहित वन अमला मौके पर पहुंचा। शव का पीएम कराकर फोरेंसिक जांच के लिए सैंपल को इंदौर भेजा गया है। घाघरला के जंगल में मादा तेंदुए का अंतिम संस्कार किया गया। करीब दस दिन पहले इसी क्षेत्र में एक नर तेंदुआ बीमार अवस्था में मिला था। जिसका इंदौर में उपचार चल रहा है। एक ही क्षेत्र में तेंदुए का बीमार होना सवालों को जन्म दे रहा है। राजस्व की भूमि पर पर शव की जानकारी मिली थीएसडीओ अजय सागर ने बताया कि मामा-भांजे की राजस्व की भूमि पर एक वन्य प्राणी का शव पड़ा होने की सूचना किसान से मिली। सूचना मिलते ही बुधवार सुबह 11 बजे मौके पर वन अमला पहुंचा। शव करीब दो दिन पुराना मादा तेंदुए का है। जो वयस्क होकर करीब तीन वर्ष के करीब है। शरीर पर घाव अथवा चोट के नहीं थे न‍िशानशव पर कोई घाव या शिकार के कोई चोट के निशान भी नहीं पाए गए है। इससे वन विभाग को शिकार की आशंका नहीं है। संक्रामक बीमारी से मौत की बात बताई जा रही है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एक माह बाद रिपोर्ट आने पर ही मौत का खुलासा हो पाएगा। हालांकि इसके पूर्व भी खेत में रेस्क्यू किए गए तेंदुए के पैर भी संक्रमण से ग्रसित पाए गए थे। 10 दिन पूर्व किया था तेंदुए को रेस्क्यूनयाखेड़ा गांव में चार माह से तेंदुए का आतंक चल रहा था। उसके द्वारा गोवंशी का शिकार किया जा रहा था।ग्रामीणों के अनुसार नौ जुलाई को किसान अकरम बाबू खां के खेत में तेंदुआ सुस्त अवस्था में मिला था।तेंदुए को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। जानकारी के अनुसार इसकी लोगों ने 10 फीट की दूरी से सेल्फी ली।लोगों से पता चला है कि इस दौरान तेंदुआ न तो गुर्रा रहा था और न ही उसके तेवर कोई आक्रामक थे।यह जानकारी भी मिली है कि तेंदुए के पीछे के पैर काम नहीं कर रहे थे। वह इससे कमजोर लग रहा था।तेंदुए को इसके बाद इंदौर कमला नेहरू संग्रहालय भेजा गया था। जहां उसका उपचार किया जा रहा है।तेंदुआ संक्रमण की बीमारी से ग्रसित पाया गया है। तेंदुआ किसी अन्‍य बीमारी से ग्रस्त बताया जा रहा है। क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंकाउल्लेखनीय है कि क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि नेपानगर सहित आसपास के करीब एक दर्जन से अधिक गांव में आए दिन तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी सामने आ रही है।

मध्‍य प्रदेश में विधानसभा सत्र के बाद हट सकता है तबादलों से 15 दिन के लिए प्रतिबंध हटा सकती है

भोपाल मध्‍य प्रदेश में एक जुलाई के बाद सरकार तबादलों से लगभग 15 दिन के लिए प्रतिबंध हटा सकती है। पहले विधानसभा और इसके बाद लोकसभा चुनाव के कारण इस वर्ष प्रतिबंध लगा हुआ है। तबादला नीति घोषित करके विभागों को प्रशासनिक आधार पर तबादले करने का अधिकार विभागों को दिया जाएगा। तब तक मंत्रियों को जिला का प्रभार भी दे दिया जाएगा। इनके अनुमोदन से जिले के भीतर तबादले होंगे। अभी मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से ही वे ही तबादले हो रहे हैं, जो आवश्यक हैं। सरकार आमतौर पर प्रतिवर्ष मई-जून में तबादलों पर से प्रतिबंध हटाती है। इसमें अधिकतम 20 प्रतिशत तबादले करने के अधिकार विभागीय मंत्रियों को मिलते हैं। विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के कारण तबादलों पर रोक लगी थी। अब चुनाव संपन्न हो चुके हैं और जनप्रतिनिधियों से लेकर कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कुछ दिनों के लिए तबादले पर लगी रोक को हटाया जाए। सूत्रों का कहना है कि एक जुलाई से विधानसभा का मानसून प्रारंभ होना है इस अवधि में तबादले करने से कार्य प्रभावित हो सकता है इसलिए सत्र समाप्त होने के बाद कुछ दिनों के लिए तबादलों पर लगी रोक हटाई जाएगी। इस अवधि में केवल वे ही तबादला मुख्यमंत्री कार्यालय से पूछ बिना नहीं होंगे, जिन्हें मुख्यमंत्री समन्वय से आदेश लेकर हटाया गया था। दरअसल, प्रतिबंध अवधि में तबादले केवल मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से ही हो सकते हैं। उधर, छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव को देखते हुए यहां तबादले आचार संहिता के प्रभावी रहने के दौरान चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं होंगे। कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी-आइजी बदलेंगे उधर, सरकार कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी-आइजी भी बदलेगी। इसको लेकर सामान्य प्रशासन और पुलिस मुख्यालय स्तर पर तैयारियां भी प्रारंभ हो गई हैं। अब जो जमावट होगी, वह आगामी दो वर्ष के हिसाब से की जाएगी ताकि निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति हो सके। सूत्रों का कहना है कि मैदानी के साथ-साथ मंत्रालय स्तर पर भी अधिकारियों के दायित्व में परिवर्तन होगा।

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