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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया

भोपाल नागरिकों को अधिसूचित सेवाएँ प्रदाय करने की कानूनी गारंटी देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश में 25 सितम्बर 2010 से लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम प्रभावशील है। वर्तमान में अधिनियम अंतर्गत 748 सेवाएँ अधिसूचित की जा चूंकि है। इन सेवाओं में लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों के लिए 342 सेवाएँ ऑनलाईन प्रदाय की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सुशासन के लिए संकल्पबद्ध मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनोन्मुखी बनाया हैं। नागरिकों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए समाधान एक दिन तत्काल सेवा, सीएम हेल्पलाईन 181 कॉल सेन्टर, महिला हेल्पलाईन, सीएम जन सेवा, दिव्यांग हेल्पलाईन आदि का क्रियान्वयन जनोन्मुखी प्रशासन के गवाही देते है। मध्यप्रदेश सरकार ने नागरिक अधिकारों को सशक्त बनाने और सेवा प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए सुशासन की दिशा में समय-समय पर अनेक कदम उठाएँ है। मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम 2010 के बेहतर क्रियान्वयन के लिए पृथक से लोक सेवा प्रबंधन विभाग का गठन किया गया। वर्ष 2013 में राज्य लोक सेवा अभिकरण की स्थापना की गई। राज्य लोक सेवा अभिकरण में लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के साथ-साथ लोक सेवा केन्द्रों की स्थाना और संचालन का सीएम हेल्पलाईन कॉल सेंटर का संचालन और सीएम डेशबोर्ड का संचालन भी शामिल है। लोकसेवा केन्द्रों के माध्यम से नगारिकों को एक समयावधि में सेवाएँ प्रदाय करने के लिए सभी तहसीलों में 439 लोकसेवा केन्द्रों की स्थापना की गई है, जिनके माध्यम से विभिन्न विभागों की अधिसूचित सेवाएँ नागरिकों को प्रदाय की जा रही हो। अधिनियम के अंतर्गत विभाग की अधिसूचित सेवा “जाति प्रमाण पत्र प्रदाय” अभियान के तहत लोकसेवा केन्द्रों द्वारा प्रदेश भर के स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने का अभियान सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस अभियान में अब तक लगभग 1 करोड़ 40 लाख डिजिटल हस्ताक्षरित रंगीन प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा चुके है। प्रदेश में लोकसेवा गारंटी अंतर्गत अधिसूचित समस्त सेवाओं में 10 करोड़ 62 लाख आवेदनों का अब तक निराकरण किया जा चुका है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 अंतर्गत सेवाओं की प्रदाय की गारंटी हैं। प्रत्येक सेवा को प्रदाय करने की एक समयावधि भी तय की गई है। इसमें समय पर सेवा नहीं देने पर जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। अधिकारी वर्ग प्रतिदिन 250 रूपये से लेकर अधिकतम 5000 हजार रूपये तक की जुर्माना राशि जमा करने का प्रावधान है। समाधान एक दिन तत्काल प्रदाय सेवा नागरिकों को केवल एक दिन की समयावधि में सेवा उपलब्ध कराने की मंशा से मध्यप्रदेश शासन ने फरवरी 2018 में “समाधान एक दिन तत्काल सेवा” व्यवस्था शुरू की। इस व्यवस्था में आवेदक द्वारा दोपहर पूर्व तक दिए गए आवेदन का निराकरण दोपहर पश्चात कर दिया जाता है। इस सेवा में डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र व्हाटसअप, ई-मेल के माध्यम से भी आवेदकों को भेजे जा रहे है, जिससे आवेदक अपनी सुविधा अनुसार प्रमाण-पत्र समाधान एक दिन तत्काल सेवा व्यवस्था में अब तक दो करोड़ 63 लाख से अधिक आवेदन निराकृत किए गए है। समाधान एक दिन में दी जाने वाली 32 सेवाओं में आय प्रमाण-पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, ट्रेड लाइसेंस, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों को डुप्लीकेट पात्रता पर्ची जारी चालू खसरा, बी-1 खतौनी चालू नक्शा, खसरा की प्रतिलिपि (खाते के समस्त), अभिलेखागार प्रतिलिपि, राजस्व प्रकरण में आदेश की प्रतिलिपि, भू-अधिकार पुस्तिका का प्रथम बार प्रदाय, जिला स्तरीय रिकॉर्ड रूम से पारित आदेश/अंतरिम आदेश आदि की सत्यप्रतिलिपि इत्यादि कई सुविधाएँ प्रदान की जाती है। संयुक्त राष्ट्र संघ से मिली सराहना मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम अपनी तरह का पहला विशेष अधिनियम है जो निर्धारित समय-सीमा में नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं के प्रदान की गारंटी देता है। इसे वर्ष 2012 में अधिनियम को यूएनपीएसए पुरूस्कार प्राप्त हुआ। “लोक सेवाओं के वितरण में सुधार वर्ग में इस अधिनियम को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2012 को लोक सेवा पुरूस्कार भी प्राप्त हुआ है।  

मध्यप्रदेश के हर विवि में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब बनेगी, साल भर नहीं चलेगी परीक्षा

भोपाल मध्यप्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में 500 कम्प्यूटर वाली मॉडर्न लैब तैयार की जाएगी। ये लैब 24 घंटे सातों दिन स्टूडेंट्स को उपलब्ध रहेंगी। सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) और परीक्षा नियंत्रक की समीक्षा बैठक के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने ये निर्देश जारी किए हैं। इसमें जिन बिन्दुओं पर फोकस करने के निर्देश जारी किए हैं, उसमें छात्र हित से जुड़े कई मामले शामिल हैं। शासन ने ये निर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत हायर एजुकेशन में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च सेंटर स्थापना, विद्यार्थियों के एनरोलमेंट, अगली कक्षा में प्रमोशन, परीक्षा संचालन, परीक्षा परिणाम और अन्य मामलों में डिस्कसन के बाद जारी किए हैं। ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि साल भर न चले परीक्षा कुलसचिवों से कहा है कि वे ऐसा टाइम टेबल सेट करें कि परीक्षा साल भर न चले। खास तौर पर इग्नू विश्वविद्यालय, चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और भोज विश्वविद्यालय के कुलसचिव अपनी परीक्षा के टाइम टेबल परंपरागत विश्वविद्यालयों के टाइम टेबल के साथ सेट करें ताकि महाविद्यालय में साल भर परीक्षा की स्थिति न बने और शैक्षणिक कार्यक्रम कैलेंडर के अनुसार हो सके। इसके लिए आगामी कार्य योजना बनाई जाए और जरूरत हो तो स्कूलों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं। 45 दिन में पूरे हों एग्जाम, 15 जुलाई तक आए रिजल्ट सभी विश्वविद्यालय अपना परीक्षा कार्यक्रम 45 दिन में पूरा कराएं और एक माह में सप्लीमेंट्री परीक्षा कराएं। सभी विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम 15 जुलाई तक जारी करें। परीक्षाओं के कारण विद्यार्थियों का अस्थायी प्रवेश बाधित नहीं होना चाहिए। हायर क्लास में प्रवेश तुरंत देने की जिम्मेदरी कुलसचिव की है। काॅलेज में टीचर की नियुक्ति रोकें, शासन से होगी भर्ती उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि पुराने विश्वविद्यालयों के सभी रजिस्ट्रार शैक्षणिक स्टाफ की कमी को देखते हुए महाविद्यालय के शिक्षकों की नियुक्ति प्रथा को रोकें। रिक्त पदों पर शासन के निर्देशानुसार भर्ती की जाएगी ताकि महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता ठीक की जा सके। इसको लेकर शासन की ओर से दिव्यांगों और सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा है कि सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए रोस्टर खुद तैयार करें और जरूरत होने पर उच्च शिक्षा विभाग से संपर्क करें। शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार हो जो बगैर सूचना विजिट करे विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक उड़नदस्ता तैयार कराएं जो अपने क्षेत्र में माह में एक बार बगैर सूचना दिए विजिट करें, यह विजिट सकारात्मक होना चाहिए। सभी विश्वविद्यालय अपने से संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी शासन को जल्द देंगे। सभी रजिस्ट्रार मान्यता और संबद्धता का साफ्टवेयर तैयार करने के लिए आपस में चर्चा करेंगे और शासन द्वारा ली जाने वाली अगली बैठक में जानकारी देंगे। रीवा, छतरपुर, छिंदवाड़ा में पेंशन फंड का पैसा जमा नहीं कार्यकारी परिषद की जानकारी सभी विश्वविद्यालयों को सरकार को देना होगी। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त भी शामिल होंगे। विश्वविद्यालयों के पेंशन पंड के संबंध में सभी विवि को निर्देश दिए हैं कि राशि पेंशन फंड में जमा करें। रीवा, छतरपुर और छिंदवाड़ा विश्वविद्यालयों के कुल सचिव से 2023-24 का पेंशन फंड का बाकी पैसा जल्द जमा करने के लिए कहा गया है। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है।

टाईगर, चीता, तेंदुआ, कि मौतों का अड्डा बना प्रदेश, एक और मादा तेंदुआ कि मौत

The state became a den of deaths of tiger

The state became a den of deaths of tiger, cheetah and leopard, another female leopard died. बुरहानपुर । नयाखेड़ा-केरपानी रोड़ के पास मामा-भांजे बलडी में बुधवार को मादा तेंदुए का शव मिलने से गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही बुरहानपुर डीएफओ विजय सिंह, एसडीओ अजय सागर सहित वन अमला मौके पर पहुंचा। शव का पीएम कराकर फोरेंसिक जांच के लिए सैंपल को इंदौर भेजा गया है। घाघरला के जंगल में मादा तेंदुए का अंतिम संस्कार किया गया। करीब दस दिन पहले इसी क्षेत्र में एक नर तेंदुआ बीमार अवस्था में मिला था। जिसका इंदौर में उपचार चल रहा है। एक ही क्षेत्र में तेंदुए का बीमार होना सवालों को जन्म दे रहा है। राजस्व की भूमि पर पर शव की जानकारी मिली थीएसडीओ अजय सागर ने बताया कि मामा-भांजे की राजस्व की भूमि पर एक वन्य प्राणी का शव पड़ा होने की सूचना किसान से मिली। सूचना मिलते ही बुधवार सुबह 11 बजे मौके पर वन अमला पहुंचा। शव करीब दो दिन पुराना मादा तेंदुए का है। जो वयस्क होकर करीब तीन वर्ष के करीब है। शरीर पर घाव अथवा चोट के नहीं थे न‍िशानशव पर कोई घाव या शिकार के कोई चोट के निशान भी नहीं पाए गए है। इससे वन विभाग को शिकार की आशंका नहीं है। संक्रामक बीमारी से मौत की बात बताई जा रही है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एक माह बाद रिपोर्ट आने पर ही मौत का खुलासा हो पाएगा। हालांकि इसके पूर्व भी खेत में रेस्क्यू किए गए तेंदुए के पैर भी संक्रमण से ग्रसित पाए गए थे। 10 दिन पूर्व किया था तेंदुए को रेस्क्यूनयाखेड़ा गांव में चार माह से तेंदुए का आतंक चल रहा था। उसके द्वारा गोवंशी का शिकार किया जा रहा था।ग्रामीणों के अनुसार नौ जुलाई को किसान अकरम बाबू खां के खेत में तेंदुआ सुस्त अवस्था में मिला था।तेंदुए को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। जानकारी के अनुसार इसकी लोगों ने 10 फीट की दूरी से सेल्फी ली।लोगों से पता चला है कि इस दौरान तेंदुआ न तो गुर्रा रहा था और न ही उसके तेवर कोई आक्रामक थे।यह जानकारी भी मिली है कि तेंदुए के पीछे के पैर काम नहीं कर रहे थे। वह इससे कमजोर लग रहा था।तेंदुए को इसके बाद इंदौर कमला नेहरू संग्रहालय भेजा गया था। जहां उसका उपचार किया जा रहा है।तेंदुआ संक्रमण की बीमारी से ग्रसित पाया गया है। तेंदुआ किसी अन्‍य बीमारी से ग्रस्त बताया जा रहा है। क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंकाउल्लेखनीय है कि क्षेत्र में और भी तेंदुए होने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि नेपानगर सहित आसपास के करीब एक दर्जन से अधिक गांव में आए दिन तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी सामने आ रही है।

मध्‍य प्रदेश में विधानसभा सत्र के बाद हट सकता है तबादलों से 15 दिन के लिए प्रतिबंध हटा सकती है

भोपाल मध्‍य प्रदेश में एक जुलाई के बाद सरकार तबादलों से लगभग 15 दिन के लिए प्रतिबंध हटा सकती है। पहले विधानसभा और इसके बाद लोकसभा चुनाव के कारण इस वर्ष प्रतिबंध लगा हुआ है। तबादला नीति घोषित करके विभागों को प्रशासनिक आधार पर तबादले करने का अधिकार विभागों को दिया जाएगा। तब तक मंत्रियों को जिला का प्रभार भी दे दिया जाएगा। इनके अनुमोदन से जिले के भीतर तबादले होंगे। अभी मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से ही वे ही तबादले हो रहे हैं, जो आवश्यक हैं। सरकार आमतौर पर प्रतिवर्ष मई-जून में तबादलों पर से प्रतिबंध हटाती है। इसमें अधिकतम 20 प्रतिशत तबादले करने के अधिकार विभागीय मंत्रियों को मिलते हैं। विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के कारण तबादलों पर रोक लगी थी। अब चुनाव संपन्न हो चुके हैं और जनप्रतिनिधियों से लेकर कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कुछ दिनों के लिए तबादले पर लगी रोक को हटाया जाए। सूत्रों का कहना है कि एक जुलाई से विधानसभा का मानसून प्रारंभ होना है इस अवधि में तबादले करने से कार्य प्रभावित हो सकता है इसलिए सत्र समाप्त होने के बाद कुछ दिनों के लिए तबादलों पर लगी रोक हटाई जाएगी। इस अवधि में केवल वे ही तबादला मुख्यमंत्री कार्यालय से पूछ बिना नहीं होंगे, जिन्हें मुख्यमंत्री समन्वय से आदेश लेकर हटाया गया था। दरअसल, प्रतिबंध अवधि में तबादले केवल मुख्यमंत्री समन्वय के माध्यम से ही हो सकते हैं। उधर, छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव को देखते हुए यहां तबादले आचार संहिता के प्रभावी रहने के दौरान चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं होंगे। कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी-आइजी बदलेंगे उधर, सरकार कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी-आइजी भी बदलेगी। इसको लेकर सामान्य प्रशासन और पुलिस मुख्यालय स्तर पर तैयारियां भी प्रारंभ हो गई हैं। अब जो जमावट होगी, वह आगामी दो वर्ष के हिसाब से की जाएगी ताकि निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति हो सके। सूत्रों का कहना है कि मैदानी के साथ-साथ मंत्रालय स्तर पर भी अधिकारियों के दायित्व में परिवर्तन होगा।

सद्भावना और सहिष्णुता के “महात्मा“ थे गॉधी

Gandhi was the “Mahatma” of goodwill and tolerance. राष्ट्रपिता की 76वीं पुण्यतिथि पर विशेष शहीद दिवस डॉ. केशव पाण्डेय (अतिथि संपादक) महात्मा गॉधी ने अपने जीवन में अहिंसा का पालन कर यह सिखाया कि सत्य और अहिंसा ही सबसे बड़े शक्तिशाली युद्ध हैं। उनका यह उपदेश हमें आत्म-नियंत्रण, सद्भावना और सहिष्णुता की ओर प्रवृत्त करता है। उनके सिद्धांतों ने हमें बताया कि समस्त मानव जाति को एक परिवार की भावना के साथ जीना चाहिए। सभी को समानता और न्याय का अधिकार है। शहीद दिवस पर करते हैं महात्मा गॉधी का पुण्य स्मरण। 30 जनवरी को महात्मा गॉंधी की 76वीं पुण्यतिथि है। पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाकर पूरा देश आज बापू का पुण्य स्मरण कर रहा है। भारत सदियों से वीरों की भूमि रहा है। देश में अनेक वीर-सपूतों ने जन्म लिया और अपनी शहादत से वतन की मिट्टी को पावन कर दिया। वीर-शहीदों की याद में ही हर वर्ष शहीद दिवस मनाया जाता है। हालांकि भारत में विभिन्न तिथियों में शहीद दिवस मनाने की परंपरा है। जनवरी, मार्च और नवंबर महीने में शहीद दिवस की तारीख अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन इन दिवसों की भावना एक ही है। हम जांबाज क्रांतिकारियों को याद कर उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करने यह दिवस मनाते हैं। आज का शहीद दिवस गांधी जी की अहिंसात्मक सोच और उनके बलिदान के स्मरण का प्रतीक है। 1948 को इस दिन ही नाथूराम गोडसे ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। महात्मा गॉधी, जिन्हें कोई बापू कहता है तो कोई देश का राष्ट्रपिता। दोनों का अर्थ एक ही है। वे एक ऐसे महान आत्मा थे जो अपने आदर्शों और अनूठी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। बापू ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर आजादी की जंग लड़ी और देशवासियों का भी मार्गदर्शन किया।अहिंसा परमो धर्मः…. धर्म हिंसा तथैव चः … अर्थात अहिंसा ही मनुष्य का परम धर्म है और जब धर्म पर संकट आए तो उसकी रक्षा करने के लिए की गई हिंसा उससे भी बड़ा धर्म है। बावजूद इसके अहिंसा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाने वाले गॉधी ने इसे अपने आचार, विचार और व्यवहार में उतारा। अहिंसा परमो धर्मः को ही जीवन में अपनाया। हालांकि भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और महात्मा गाँधी की अंहिसा की धारणाएं अलग-अलग थीं फिर भी वेद, महावीर और बु़द्ध की अहिंसा से महात्मा गाँधी प्रेरित थे।महात्मा गाँधी ने अपने जीवन को भारतीय समाज के लिए समर्पित किया और अपने आदर्शों का पालन करते हुए आजादी के लिए संघर्ष किया। महात्मा गाँधी की शहादत ने यह सिखाने का मौका दिया कि हमें अपने मौलिक सिद्धांतों के लिए खड़ा होना चाहिए, चाहे जैसी भी परिस्थिति हो। उनका संदेश था कि सत्य, अहिंसा और ईमानदारी का पालन करते हुए हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करके एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। महात्मा गॉधी का मानना था कि एक मात्र वस्तु जो हमें पशु से भिन्न करती है वह है अहिंसा। व्यक्ति हिंसक है तो वह पशुवत है। मानव होने या बनने के लिए अहिंसा का भाव होना आवश्यक है। गॉधी जी की सोच थी कि हमारा समाजवाद अथवा साम्यवाद अहिंसा पर आधारित होना चाहिए। जिसमें मालिक, मजदूर एवं जमींदार, किसान के मध्य परस्पर सद्भाव पूर्ण सहयोग हो। निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी। सच्ची अहिंसा मृत्यु शैया पर भी मुस्कराती रहेगी। बहादुरी, निर्भिकता, स्पष्टता, सत्यनिष्ठा इस हद तक बढ़ा लेना कि तीर-तलवार उसके आगे तुच्छ जान पड़ें। यह अहिंसा की साधना है। शरीर की नश्वरता को समझते हुए उसके न रहने का अवसर आने पर विचलित न होना अहिंसा है। उनकी इसी सोच ने महात्मा गॉधी को देश का सबसे ज्यादा प्रभावशाली नेता बना दिया।जिन्होंने अहिंसा और सत्याग्रहों को एक मात्र हथियार बनाकर स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी। सामाजिक और राजनीतिक सुधार में उनकी सार्वजनिक भूमिका का परिणाम ऐसा था कि उनके विचारों और आंदोलनों पर अमेरिकी और यूरोपीय समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और रेडियों पर चर्चा होने लगी थी। उनके काम को दुनियाभर के शीर्ष राजनेताओं द्वारा उत्सुकता से अनुसरण किया जाने लगा। जबकि अहिंसा या अहिंसा का दर्शन गॉधी का पर्याय बन गया था। अहिंसा का उनका अभ्यास अन्य धर्मां के प्रति सम्मान और भाईचारे की भावना का विस्तार था। सत्य, अहिंसा और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें शांति का वैश्विक प्रतीक और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना दिया। अहिंसक विरोध आज गॉधीवादी विरासत की प्राथमिक अभिव्यक्ति है। गॉधी जी के अनुसार अहिंसा केवल एक दर्शन ही नहीं बल्कि कार्य करने की एक बेहतर पद्धति है। मानव के हृदय परिवर्तन का एक साधन है। यही वजह थी कि उन्होंने कभी भी अहिंसा को व्यक्तिक आचरण तक ही सीमित न रखकर उसे मानव जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में लागू किया। उनका मानना था कि सत्य सर्वोच्च कानून है। तो अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है। आत्म-समर्पण और सत्य के माध्यम से ही हम अद्वितीय भारत की ऊँचाइयों को छू सकते हैं। महात्मा गांधी ने दिखाया कि एक व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने मौलिक आदर्शों पर कैसे कड़ाई से अड़े रह सकता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।उनकी महानता को समझने का यह एक अद्वितीय अवसर है, जो हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में प्रेरित कर सकता है। क्योंकि सत्य की तरह ही अहिंसा की शक्ति भी कम नहीं है। वह भी असीम है। इसी सोच ने उन्हें सत्य और अहिंसा का पुजारी बना दिया। वे देश ही नहीं दुनिया में अहिंसा परमो धर्मः के साथ ही सद्भावना और सहिष्णुता के “महात्मा“ बन गए। सत्य, प्रेम और अहिंसा के ऐसे महात्मा को हमारा शत्-शत् नमन्।

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