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माघी के बाद भी हिलोरे मार रही श्रद्धालुओं की आस्था, 20 लाख से अधिक ने लगाई डुबकी

प्रयागराज माघी पूर्णिमा के बाद भी महाकुंभ में आस्था हिलोरे मार रही है। बृहस्पतिवार को हर तरफ श्रद्धालुओं का रेला रहा तथा करीब 85.46 लाख लोगों ने स्नान किया। इसी के साथ महाकुंभ में कुल स्नानार्थियों की संख्या 49 करोड़ पार हो गई। माघी पूर्णिमा के साथ बुधवार को एक महीने का कल्पवास पूरा हो गया। इसी के साथ कल्पवासियों के जाने का सिलसिला भी शुरू हो गया। हालांकि, मेला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार को भी पांच लाख से अधिक कल्पवासियों ने स्नान किया। इसके अलावा माघी पूर्णिमा के बाद भी स्नानार्थियों के आने का सिलसिला जा रही है। मेला क्षेत्र के काली एवं त्रिवेणी मार्ग के अलावा अन्य प्रमुख सड़कों पर भी श्रद्धालुओं की लगातार भीड़ बनी रही। शहर में भी शास्त्री ब्रिज समेत संगम की तरफ आने वाले मार्गों पर लगातार रेला बना रहा। यह सिलसिला भोर में ही शुरू हो गया था जो देर शाम तक बना रहा।इसका नतीजा रहा कि बृहस्पतिवार की रात आठ बजे तक 85.46 लाख लोग स्नान कर चुके थे। वहीं बुधवार तक 48.29 करोड़ लोग स्नान कर चुके थे। इस तरह से बृहस्पतिवार रात आठ बजे तक महाकुंभ में कुल स्नानालार्थियों की संख्या 49.14 करोड़ से अधिक हो गई। जबकि, इसके बाद भी स्नानार्थियों के आने और संगम स्नान का क्रम बना हुआ था।   महाकुंभ मेले के 32वें दिन शहर में जाम से मिला लोगों को राहत महाकुंभ के दौरान लगने वाले भीषण जाम से शहरवासियों को बृहस्पतिवार को राहत मिल गई। मेला शुरू होने के 32वें दिन शहर में आम दिनों की तरह यातायात सुगमता से चलता रहा। मेला शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब सड़कों पर जाम की स्थिति न के बराबर रही। जबकि बाहरी नंबर के गाड़ियों को भी प्रवेश दिया गया था। माघी पूर्णिमा स्नान के बाद से अधिकतर कल्पवासियों का वापस जाना शुरू हो गया है। मेले में श्रद्धालुओं के कम होने पर पुलिस ने विभिन्न जगहों पर लगे बैरिकेडिंग कम कर दिया। इस कारण सुबह नौ बजे से ही शहर की सड़काें पर रोजाना के मुकाबले गाड़ियों का कम लोड दिखा। इससे शहरी और श्रद्धालुओं को जाम से जूझना नहीं पड़ा। मेडिकल चौराहा, बालसन, सिविल लाइंस, सोहबतिया बाग, तेलियरगंज, फाफामऊ, लेप्रोसी, जानसेनगंज, सीएमपी, अलोपी बाग समेत अन्य जगहों पर जाम की स्थिति सामान्य रही। मुख्य वजह श्रद्धालुओं का मेले से वापस लौटना और चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल न होना है। 50 करोड़ का आंकड़ा हो सकता पार माघी पूर्णिमा के बाद भी महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है। बृहस्पतिवार को कुल स्नानार्थियों का आंकड़ा 49.14 करोड़ को पार हो गया। ऐसे में यदि शुक्रवार को भी बृहस्पतिवार की तरह भीड़ रही और 85 लाख से अधिक लोगों ने संगम में डुबकी लगाई तो कुल स्नानार्थियों की संख्या 50 करोड़ पार हो जाएगी। सीएम ने संगम में लगाई डुबकी लगा मांगी त्रिपुरा की समृदि महाकुंभ नगर। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ.माणिक साहा ने अपने परिवार के साथ बृहस्पतिवार को संगम में डुबकी लगाई। उन्होंने मां गंगा से त्रिपुरा की समृद्धि और शांति की प्रार्थना की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि संगम का पवित्र स्नान जीवन को शुद्ध करता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि आज महाकुंभ में स्नान करने का सौभाग्य मिला। पवित्र जल, दिव्य ऊर्जा और आध्यात्मिक माहौल ने इसे अविस्मरीय अनुभव बना दिया। गुजरात के मंत्री हर्ष सांघवी ने किया संगम स्नान  गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने बृहस्पतिवार को संगम में डुबकी लगाई तथा पूजन किया। इस दौरान उनके साथ फिल्म कलाकार विक्की कौशल भी रहे। मंत्री ने जून अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, सतुबा बाबा का भी आशीर्वाद प्राप्त किया। सचिन पायटल ने लगाई संगम में डुबकी कांग्रेस विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट ने भी बृहस्पतिवार को संगम में डुबकी लगाई तथा मांग गंगा से देश-प्रदेश की प्रगति एवं खुशहाली की कामना की। इस मौके पर उन्होंने ने कहा कि महाकुंभ श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने सोशल प्लेटफार्म भी संगम स्नान के फोटो एवं अनुभव साझा किए। काशी तमिल संगमम कल से, तैयारी तेज तृतीय काशी तमिल संगमम कार्यक्रम का आयोजन 15 से 24 फरवरी के बीच होगा। काशी आने वाला दक्षिण भारत का विशेष दल संगम स्नान तथा मेला क्षेत्र एवं अन्य स्थलों का भ्रमण भी करेगा। डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने बृहस्पतिवार को बैठक कर प्रतिनिधिमंडल के स्वागत तथा अन्य तैयारियों की समीक्षा की। साथ ही विभागों एवं अफसरों की जिम्मेदारी तय की।  

मुंबई के एक कपल 5 लाख की बाइक से पहुंचा प्रयागराज, जाने के लिए फ्लाइट को किया रिजेक्ट, तय किया 1200 KM का सफर!

प्रयागराज महाकुंभ 2025 अपनी भव्यता, दिव्यता और आध्यात्मिकता के कारण दुनियाभर में चर्चा का केंद्र बन चुका है। इस महाकुंभ में लाखों लोग अपनी आस्था और विश्वास के साथ पहुंचे हैं। मुंबई के एक कपल ने इस आस्था का अद्भुत उदाहरण पेश किया। उन्होंने 5 लाख की बाइक से लगभग 1200 किलोमीटर की यात्रा करके प्रयागराज के संगम तक पहुंचने का निर्णय लिया। राजेश और साधना मेहता का रोमांचक सफर महाराष्ट्र के भायंदर से अपने सफर की शुरुआत करने वाले राजेश मेहता और उनकी पत्नी साधना मेहता ने 3 दिन में करीब 1200 किलोमीटर की दूरी तय की। उनका मार्ग झांसी, चित्रकूट होते हुए प्रयागराज तक था। इस यात्रा के दौरान, उन्हें उत्तर प्रदेश को करीब से देखने का भी मौका मिला और उनका सफर बहुत ही रोमांचक रहा। फ्लाइट और ट्रेन के किराए में भारी अंतर राजेश मेहता ने बताया कि उन्होंने महाकुंभ में जाने के लिए ट्रेन और फ्लाइट दोनों के टिकट चेक किए थे, लेकिन इन दोनों ही विकल्पों में टिकट फुल थे और किराया 20,000 से 30,000 रुपए तक था। इस कारण उन्होंने बाइक से यात्रा करने का निर्णय लिया। महाकुंभ की भव्यता और प्रमुख दर्शनीय स्थल साधना मेहता ने महाकुंभ की भव्यता का अनुभव किया और बताया कि वे प्रयागराज में लगभग 24 घंटे रुकीं। इस दौरान, उन्होंने त्रिवेणी घाट, अखाड़े और रुद्राक्ष मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों के दर्शन किए। उन्होंने यह भी कहा कि महाकुंभ एक अद्भुत अनुभव था और वे इस आस्था और आध्यात्मिकता से अभिभूत थीं। प्रयागराज के स्थानीय लोगों का प्यार साधना मेहता ने बताया कि वे एक स्थानीय व्यक्ति से मिलीं, जिन्होंने उनका बहुत सम्मान किया, हालांकि उनकी उनसे कोई पहचान नहीं थी। उन्होंने प्रयागराज और उत्तर प्रदेश के सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों का प्यार और स्वागत अद्वितीय था। यूपी के बाइक सवारों के लिए सलाह राजेश मेहता ने उत्तर प्रदेश में बाइक चलाने वालों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि यहां के लोग ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करें, खासकर हेलमेट पहनने की आदत डालें। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार चार पहिया वाहन वाले लोग बाइक सवारों के सामने आकर कट मार देते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना न सिर्फ समय बचाता है, बल्कि जीवन को भी सुरक्षित रखता है। सीएम योगी को धन्यवाद राजेश मेहता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्था बहुत ही उत्तम रही, और इससे उन्हें यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हुई। इस अद्वितीय यात्रा से यह साबित होता है कि आस्था और श्रद्धा किसी भी मुश्किल को पार करने की ताकत रखती है, और हर किसी को अपने सफर पर निकलने का साहस होना चाहिए।  

महाकुंभ: नेशनल हाईवे से लेकर प्रयागराज शहर में भी गाड़ियां रेंग रही हैं, कई किलोमीटर तक भीषण जाम

प्रयागराज देश के कोने-कोने से लोग प्रयागराज महाकुंभ आ रहे हैं। भीड़ का दबाव इतना कि संगम जाने वाली हर सड़क जाम हो गई है। नेशनल हाईवे से लेकर प्रयागराज शहर में भी गाड़ियां रेंग रही हैं। कई किलोमीटर तक भीषण जाम है। शहर से जुड़े हर मार्ग पर जाम के कारण मेला पहुंचने के लिए लोगों को 20-25 किमी तक पैदल तक चलना पड़ रहा है। प्रयागराज को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर वाहनों का रेला प्रयागराज को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, रीवां व कानपुर मार्ग पर सिर्फ वाहनों का लंबा रेला दिख रहा है। वाहनों में फंसे श्रद्धालुओं को मेला तक पहुंचने के लिए तमाम दुश्वारियों से गुजरना पड़ रहा है। बच्चे, बुजुर्ग व महिलाएं तक घंटों भूख-प्यास का सामना कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से शहर के बाहर हाईवे किनारे अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। हालांकि अधिकांश पार्किंग स्थल फुल हो जाने से सड़कों पर ही वाहन फंसे हुए हैं। भीषण जाम को छुड़ाने में सिविल व यातायात पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बलों तक को तैनात कर दिया गया है। इधर, शहर के बालसन चौराहा, छोटा बघाड़ा, बांगड़ धर्मशाला चौराहा, जानसनगंज चौराहा आदि प्रमुख स्थानों पर पैदल चलना तक दुश्वार हो गया है। अखिलेश ने पोस्ट कर लिखा कि श्रद्धालुओं का पुरसाहाल कोई है क्या? वहीं इस जाम पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सरकार पर हमला बोला। अखिलेश ने पोस्ट कर लिखा कि श्रद्धालुओं का पुरसाहाल कोई है क्या? अखिलेश यादव ने लिखा कि जाम में फंसे लोग अपने वाहनों में क़ैद घंटों से क़ैद हैं। दैनंदिनी ज़रूरतों के लिए महिलाओं तक के लिए कोई स्थान नहीं है। जो लोग रास्तों में बेसुध हो रहे हैं, उनकी देखभाल का कोई इंतजाम नहीं है। श्रद्धालुओं के मोबाइल फ़ोन की बैटरी ख़त्म हो गयी है, जिससे उनका अपने लोगों से संपर्क टूट गया है। संपर्क और सूचना के अभाव में लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। हालातों पर क़ाबू पाने के लिए कोई ज़िम्मेदार मंत्री या व्यक्ति नहीं दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री तो पूरी तरह से नाकाम साबित हो ही चुके हैं साथ ही प्रयागराज से संबंधित उपमुख्यमंत्री और कई जानेमाने मंत्रीगण नदारद हैं। जिन्हें जनता के बीच होना चाहिए था वो घरों में बैठे हैं। जो सिपाही, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी या सफ़ाईकर्मी दिनरात निष्ठापूर्वक भूखे-प्यासे डटे हैं, उनके भोजन पानी की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। अधिकारी कमरों में बैठकर आदेश तो दे रहे हैं लेकिन ज़मीन पर नहीं उतर रहे हैं। प्रयागराज के नगरवासियों को गंदगी, जाम और महंगाई के सिवा कुछ भी नहीं मिला है। सुनने में आया है कि अब भाजपाई श्रद्धालुओं पर ही ये आरोप लगा रहे हैं कि जब पता है कि हर तरफ़ बद इंतज़ामी फैल गयी है कि तो श्रद्धालु आ ही क्यों रहे हैं। कोई प्रदेश में हादसे के मारे लोगों को अपने हाल पर छोड़कर दूसरे प्रदेश में समारोह में शामिल हो रहा है कोई विदेश चला जा रहा है, श्रद्धालुओं का पुरसाहाल कोई है क्या?

प्रयागराज के महाकुंभ में एक बार फिर लगी आ , सेक्टर-18 के शंकराचार्य मार्ग पर लगी , दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर

प्रयागराज प्रयागराज के महाकुंभ में एक बार फिर आग लग गई है. यह आग सेक्टर-18 के शंकराचार्य मार्ग पर लगी है. दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंची. फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है. आग लगने की यह इस तरह की तीसरी घटना बताई जा रही है. फायर ब्रिगेड आग बुझाने में मुस्तैदी से जुटा हुआ था. अभी आग लगने की वजह पता नहीं चल पाई है. आग में जाल एवं माल की किसी तरह की हानि नहीं हुई है. कहा जा रहा है कि आग पर काबू पा लिया गया है. इससे पहले 30 जनवरी को महाकुंभ के सेक्टर-22 में भी कई पंडालों में आग लग गई थी. इस आग में 15 टेंट जलकर खाक हो गए थे.  बता दें कि इससे पहले भी आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. महाकुंभ मेले के सेक्टर 2 में दो कारों में आग लगने के बाद हड़कंप मच गया था. हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ था और समय रहते फायर ब्रिगेड कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति पर काबू पा लिया था. वहीं, 19 जनवरी को महाकुंभ मेले के सेक्टर 19 में एक और आगजनी की घटना हुई थी, जब एक शिविर में रखे घास-फूस में आग लग गई थी. इस घटना में करीब 18 शिविर जलकर खाक हो गए थे. हालांकि, फायर ब्रिगेडकर्मियों ने तत्परता से आग पर काबू पा लिया था और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई थी.  

महाकुंभ में स्नानर्थियों की कुल संख्या 40 करोड़ के करीब पहुंच गई, सरकार अनुमानित संख्या के करीब पहुंची

महाकुंभ, प्रयागराज महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. कल शाम 4 बजे तक 63.12 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया. संगम में 63.12 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. अब स्नानर्थियों की कुल संख्या 40 करोड़ के करीब पहुंच गई है. इसके साथ ही सरकार का अनुमानित आंकड़ा वास्तविकता की ओर बढ़ रहा है. वहीं महाकुंभ में 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कल्पवास किया है. 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान महाकुंभ में इस बार 45 करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र संगम में स्नान करने का अनुमान है. हर 12 साल बाद लगने वाले इस कुंभ में 144 साल बाद खास संयोग बन रहा है, क्योंकि अब तक 12 कुंभ पूरे हो चुके हैं. इसी वजह से इसे महाकुंभ कहा जा रहा है और इसमें आने वाला श्रद्धालुओं की संख्या पहले के किसी भी कुंभ से ज्यादा है. ऐसे में कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती के लिए यूपी सरकार ने हाईटेक उपकरणों का सहारा लिया है और इस बार AI बेस्ड कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है. अब तक कौन-कौन कर चुका है स्नान महाकुंभ में अब तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, अखिलेश यादव, रवि किशन, सीएम योगी और उनका पूरा मंत्रिमंडल, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां संगम में स्नान कर चुकी हैं. वहीं बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी त्रिवेणी संगम में स्नान किया है.

महाकुंभ में आए हजारों लोगें के परिजन लापता हो गए हैं, सपा सांसद ने दावा किया कि भगदड़ में गायब हो गए 15 हजार लोग

नई दिल्ली महाकुंभ को लेकर संसद में बवाल के बाद अब समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने एक और बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि 15 हजार लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उनके परिवार के लोग नहीं मिल रहे हैं। महाकुंभ में आए हजारों लोगें के परिजन लापता हो गए हैं। वहीं सरकार कोई भी जानकारी देने से इनकार कर रही है। उन्होंने कहा कि 1954 के प्रयाग कुंभ में भगदड़ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में बताया कि कितने लोग घायल हुए हैं और कितने लोग मारे गए हैं। यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ का पूरा अमला केवल वीआईपी लोगों को सुविधाएं देने में व्यस्थ था। उन्हें आम आदमी की कोई फिक्र ही नहीं थी। उन्होंने कहा, हमारे मुख्यमंत्री रोज ही पहुंचते हैं। अधिकारी व्यवस्था में व्यस्त है कि वीआईपी लेन साफ-सुथरी रहनी चाहिए। वहीं आम आदमी चाहे डूब जाए या मर जाए। 15 हजार लोग कह रहे हैं कि उनके परिवार के सदस्य लापता हैं। सरकार कोई जानकारी ही नहीं दे रही है। बता दें कि सोमवार को बजट सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा किया था। विपक्ष का कहना था कि सदन में महाकुंभ में मची भगदड़ पर चर्चा करवाई जाए। एसपी चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि मृतकों की सही संख्या ना बताना बहुत निंदनीय है। मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या में एक रैली को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि सरकार यह आंकड़ो तो रोज बताती है कि कितने लोगों ने डुबकी लगाई है लेकिन मरने वालों का आंकड़ा आज तक साफ नहीं कर पाई है। अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर 5 तारीख को चुनाव होने हैं। बीजेडी नेता ने भी उठाए सवाल बीजू जनता दल (बीजद) की सदस्य सुलता देव ने महाकुंभ में एआई सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बावजूद मृतकों और लापता श्रद्धालुओं के आंकड़ों को पता करने में सरकार की असमर्थता पर सोमवार को सवाल उठाया। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान देव ने कहा कि इस घटना पर सदन में अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए। देव ने सवाल किया, “राष्ट्रपति ने कुंभ मेले में मृतकों के लिए दुख व्यक्त किया। कुंभ में जो कुछ भी हुआ और जो स्थिति है, उसकी आलोचना होनी चाहिए क्योंकि हम जानते हैं कि हजारों लोग बेघर हो गए हैं और खो गए हैं और उनका पता नहीं लगाया जा सका है। अगर हम एआई से भीड़ की संख्या देख सकते हैं तो हम तकनीक की मदद से यह क्यों नहीं देख पा रहे हैं कि कितने लोग गायब हैं। इसकी आलोचना क्यों नहीं की जा रही है?” उन्होंने कहा कि जब 27 जुलाई को दिल्ली में जलजमाव की घटना में छात्रों की मौत हो गई तब इस पर अल्पकालिक चर्चा हुई थी तो महाकुंभ की घटना पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती है।

महाकुंभ में अब तक 35 करोड़ श्रद्धालु स्‍नान कर चुके, हेलिकॉप्‍टर से पुष्‍पवर्षा, योगी 3 बजे से लखनऊ वार रूम में मॉनिटरिंग कर रहे

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में सोमवार को बसंत पंचमी का अमृत स्‍नान देर रात से जारी है। मौनी अमावस्‍या पर भगदड़ से सबक लेते हुए इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ खुद लखनऊ स्थित अपने आवास में बने वॉर रूम से सुबह तीन बजे से निगरानी कर रहे हैं। उनके साथ डीजीपी प्रशांत कुमार और अन्‍य अधिकारी भी मौजूद हैं। इस बीच, महाकुंभ में नागा साधुओं और आम श्रद्धालुओं के ऊपर हेलिकॉप्‍टर से फूल वर्षा की गई है।     नागा साधुओं ने त्रिशूल और डमरू बजा किया प्रदर्शन     बसंत पंचमी के अमृत स्नान के लिए निकली अखाड़ों की शोभायात्रा में कुछ नागा साधु घोड़े पर सवार थे तो कुछ पैदल चलते हुए अपनी विशिष्ट वेशभूषा और आभूषणों से सजे हुए थे। जटाओं में फूल, फूलों की मालाएं और त्रिशूल हवा में लहराते हुए उन्होंने महाकुंभ की पवित्रता को और भी बढ़ा दिया। स्व-अनुशासन में रहने वाले इन साधुओं को कोई रोक नहीं सकता था, लेकिन वे अपने अखाड़ों के शीर्ष पदाधिकारियों के आदेशों का पालन करते हुए आगे बढ़े। नगाड़ों की गूंज के बीच उनके जोश ने इस अवसर को और भी खास बना दिया। त्रिशूल और डमरू के साथ उनके प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के मिलन का उत्सव है। महाकुंभ में देखने को मिल रही विविध संस्कृतियों की झलक प्रयागराज में श्रद्धालुओं / स्नानार्थियों के जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है. पूरे देश और दुनिया से पवित्र त्रिवेणी में श्रद्धा और आस्था के साथ डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु प्रतिदिन करोड़ों की संख्या में प्रयागराज पहुंच रहे हैं. बसंत पंचमी के अंतिम अमृत स्नान पर भी सुबह से ही करोड़ों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम स्नान को पहुंचे. रविवार 2 फरवरी को करीब 1.20 करोड़ ने स्नान किया था, जिसके बाद कुल स्नानार्थियों की संख्या 35 करोड़ के करीब पहुंच गई थी, जिसने सोमवार सुबह यह आंकड़ा पार कर लिया. स्नानार्थियों में 10 लाख कल्पवासियों के साथ-साथ देश विदेश से आए श्रद्धालु एवं साधु-संत शामिल रहे. स्नान पर्व पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अब तक के कुल स्नानार्थियों की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था. जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान किया था. एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ के पार और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई. ये प्रमुख लोग अब तक लगा चुके हैं पावन डुबकी गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ (मंत्रिमंडल समेत) संगम में डुबकी लगा चुके हैं. इसके अलावा राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी, राज्य सभा सांसद सुधा मूर्ति, असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे, गोरखपुर के सांसद रवि किशन, हेमा मालिनी, बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री, अनुपम खेर, मिलिंद सोमण, एक्ट्रेस से किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं ममता कुलकर्णी, कवि कुमार विश्वास, क्रिकेटर सुरेश रैना, खली और कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा भी संगम में स्नान कर चुके हैं. महाकुंभ की आलोचना करने वालों को संतों ने दिया माकूल जवाब बसंत पंचमी के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करने के साथ ही संत और महात्माओं ने महाकुंभ की आलोचना करने वालों को माकूल जवाब भी दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं को दी जा रही सुविधाओं की तारीफ करते हुए विपक्षी दलों को आईना भी दिखाया। पंच निर्मोही अनी अखाड़ा के जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास सत्तुआ बाबा महाराज ने कहा, “जो लोग साधु और महाकुम्भ के बारे में बातें कर रहे हैं, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि (सपा प्रमुख) अखिलेश यादव जी, आपने कभी सनातन का पालन नहीं किया और न ही सनातन का सम्मान किया। तो अब इसका फायदा मत उठाइए। हमने देखा है जब आपकी पार्टी सत्ता में थी, आपने सनातनियों पर गोलियां चलाई थीं। अपने फायदे के लिए अफवाहें मत फैलाइए। हम सनातनी हैं और हम आपके जैसे लोगों को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। काला चश्‍मा पहने नागा साधु बने आकर्षण का केंद्र महाकुंभ में सोमवार को बसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित तीसरे अमृत स्नान में नागा साधु आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने अपने विशिष्ट स्वरूप और अनुष्ठानों से श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। अमृत स्नान के लिए अधिकांश अखाड़ों का नेतृत्व कर रहे इन नागा साधुओं का अनुशासन और उनका पारंपरिक शस्त्र कौशल देखने लायक था। कभी डमरू बजाते हुए तो कभी भाले और तलवारें लहराते हुए, इन साधुओं ने हथियार चलाने के कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया। कुछ नागा साधु घोड़ों पर सवार दिखे, जबकि अन्य गले में माला और त्रिशूल लटकाए नंगे पांव चलते दिखे। जब मीडियाकर्मी और श्रद्धालु उनकी तस्वीर ले रहे थे तो साधुओं ने उत्साहपूर्वक उन्हें अपनी परंपराओं को करीब से देखने के लिए आमंत्रित किया। कुछ ने तो काले चश्मे भी पहने हुए थे, जिससे दर्शक काफी खुश हुए। पुष्‍पवर्षा से अभिभूत नजर आए साधु और आम श्रद्धालु अमृत स्नान के दौरान पुष्पवर्षा से नागा संन्यासी, साधु संत और श्रद्धालु भी अभिभूत नजर आए। हर हर महादेव, जय श्री राम, गंगा मैया की जय जैसे जयकारों से पूरा त्रिवेणी क्षेत्र गुंजायमान हो गया। मालूम हो कि प्रयागराज उद्यान विभाग की ओर से अमृत स्नान के लिए पहले ही पर्याप्त फूलों की व्यवस्था की गई है। उद्यान विभाग की ओर 20 क्विंटल से अधिक मात्रा में गुलाब के फूलों का स्टॉक जमा किया गया था। वहीं 5 क्विंटल फूल रिजर्व में भी रखे गए हैं। बसंत पंचमी के अवसर पर विदेशी श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करते हुए भारतीय संस्कृति के जीवंत रंगों में रंगे दिखाई दिए। वे न सिर्फ भारतीय मित्रों के साथ आध्यात्मिक गहराइयों में डूबे नजर आए, बल्कि अन्य तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत करते भी दिखे। विदेशी श्रद्धालुओं ने इस विशेष अवसर पर भारतीय परंपराओं को अपनाते हुए दिव्य स्नान में भाग लिया और अपनी यात्रा को एक अद्वितीय और अविस्मरणीय अनुभव बताया। सभी घाटों और अखाड़ों पर हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा महाकुंभ 2025 … Read more

गीता प्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मिले उद्योगपति, महाकुंभ में धार्मिक पुस्तकें बांटेंगे अदाणी

नई दिल्ली/गोरखपुर। महाकुंभ 2025 का शुभारंभ 13 जनवरी 2025 को होने वाला है जबकि इसका समापन 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन होगा। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम अदाणी ने महाकुंभ को भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का महायज्ञ बताया। शुक्रवार को उन्होंने गीता प्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि इस महायज्ञ में प्रतिष्ठित संस्थान गीता प्रेस के सहयोग से आरती संग्रह की एक करोड़ प्रतियां कुम्भ में आए श्रद्धालुओं की सेवा में निःशुल्क अर्पित किया जाएगा। गीता प्रेस को दिया एक करोड़ धार्मिक पुस्तकें छापने का आर्डर बता दें कि गौतम अदाणी की कंपनी ने गीता प्रेस में एक करोड़ धार्मिक पुस्तकें छापने का आर्डर दिया था, जिन्हें महाकुंभ में वितरित किया जाना है। शुक्रवार को गीता प्रेस का प्रतिनिधिमंडल ने गौतम अदाणी से मुलाकात की। उन्होंने उद्योगपति को गीता प्रेस में छपी आरती संग्रह सहित विभिन्न पुस्तकें भेंट की। अदाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “यह हमारे लिए अपार संतुष्टि का विषय है कि इस महायज्ञ में प्रतिष्ठित संस्थान गीता प्रेस के सहयोग से हम ‘आरती संग्रह’ की एक करोड़ प्रतियां कुम्भ में आए श्रद्धालुओं की सेवा में निःशुल्क अर्पित कर रहे हैं। आज सनातन साहित्य के माध्यम से 100 वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहे गीता प्रेस के सम्मानित पदाधिकारियों से मिलकर प्रेरणा प्राप्त हुई और गीता प्रेस के उत्कृष्ट सेवा कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करने का सौभाग्य मिला। नि:स्वार्थ सेवाभाव और धर्म एवं संस्कृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना राष्ट्रप्रेम का ही एक रूप है, जिसके लिए हम सभी प्रतिबद्ध हैं।” अदाणी ने कहा, “महाकुंभ भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का महायज्ञ है। यह हमारे लिए अपार संतुष्टि का विषय है कि इस महायज्ञ में प्रतिष्ठित संस्थान गीता प्रेस के सहयोग से हम आरती संग्रह की एक करोड़ प्रतियां कुम्भ में आए श्रद्धालुओं की सेवा में निःशुल्क अर्पित कर रहे हैं। आज सनातन साहित्य के माध्यम से 100 वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहे गीता प्रेस के सम्मानित पदाधिकारियों से मिलकर प्रेरणा प्राप्त हुई और गीता प्रेस के उत्कृष्ट सेवा कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करने का सौभाग्य मिला। नि:स्वार्थ सेवाभाव और धर्म एवं संस्कृति के प्रति उत्तरदायित्व की भावना राष्ट्रप्रेम का ही एक रूप है, जिसके लिए हम सभी प्रतिबद्ध हैं। सेवा साधना है, सेवा प्रार्थना है और सेवा ही परमात्मा है।” महाकुंभ पर गौतम अदाणी ने कहा, “कुंभ सेवा की वो तपोभूमि है जहां हर हाथ स्वतः ही परमार्थ में जुट जाता है। यह मेरा सौभाग्य है कि महाकुम्भ में हम @IskconInc के साथ मिलकर श्रद्धालुओं के लिए ‘महाप्रसाद सेवा’ आरम्भ कर रहे हैं, जिसमें मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से लाखों लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस संदर्भ में आज इस्कॉन के गुरु प्रसाद स्वामी जी से मिल कर सेवा के प्रति समर्पण की शक्ति को गहराई से अनुभव करने का अवसर प्राप्त हुआ। सच्चे अर्थों में सेवा ही राष्ट्रभक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है। सेवा साधना है, सेवा प्रार्थना है और सेवा ही परमात्मा है।”

महाकुंभ: प्रयागराज रेल मंडल ने जरूरी कदम उठाया, श्रद्धालुओं के लिए रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम स्थापित किए

प्रयागराज प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यहां आने वाले भक्तों के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। महाकुंभ 2025 में लाखों लोगों के आने की संभावना जताई गई है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को देखते हुए प्रयागराज रेल मंडल ने जरूरी कदम उठाया है। महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की सेहत को ध्यान में रखकर रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम स्थापित किए गए हैं। प्रयागराज रेल मंडल के सीनियर पीआरओ डॉ. अमित मालवीय ने बताया कि महाकुंभ 2025 में आने वाले भक्तों के लिए रेलवे अधिकारी तीर्थयात्रियों के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। इसके तहत प्रयागराज जंक्शन और अन्य रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम स्थापित किए गए हैं। ये कमरे डॉक्टरों, चिकित्सा सुविधाओं और मिनी आईसीयू समेत उन्नत उपकरणों से सुसज्जित होंगे। तीर्थयात्रियों के लिए उचित चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के लिए उनमें कार्डियक मॉनिटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, डिफाइब्रिलेटर और डीसी बिजली की आपूर्ति होगी। सभी मेडिकल सुविधाएं होंगी। 24 घंटे इसे ऑपरेट किया जाएगा। 2019 में एक लाख लोगों को चिकित्सा सुविधा दी गई थी, इस बार उससे ज्यादा की उम्मीद है। प्रयागराज जंक्शन पर 10 बेड व्यवस्था रहेगी। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जाएगी। रेलवे चेकिंग स्टाफ, मेडिकल की टीम के अलावा अन्य वॉलिंटियर्स को श्रद्धालुओं की मदद के लिए ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2019 में कई हजार लोगों को स्वास्थ्य सेवा देकर उनकी जान बचाई गई थी। रेलवे स्टेशनों पर मेडिकल ऑब्जर्वेशन रूम होने से डायबिटीज के पेशेंट, अधिक पैदल चलने से थकान से बेहोशी सहित अन्य मेडिकल समस्या से जूझ रहे लोगों का इलाज किया जाएगा। मेडिकल अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। इसके लिए रेलवे प्रशासन ने शहर के सभी प्रमुख और रेलवे के अस्पताल से समन्वय स्थापित किया है। प्रयागराज रेल मंडल महाकुंभ 2025 में आने श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य की जरूरी सुविधाएं प्रदान करने के सभी जरूरी प्रयास किए गए हैं।  

Maha Kumbh: प्रयागराज में डुबकी लगाएंगी विश्व की अरबपति महिलाएं, पॉवेल कल्पवास तो सुधामूर्ति करेंगी प्रवास

प्रयागराज। दुनिया की चकाचौंध में संगम की रेती की महिमा किस तरह फैलने जा रही है, इसकी बानगी महाकुंभ में दिखेगी। इस महाकुंभ में सिर पर गठरी और हाथ में झोला लेकर पांटून पुलों पर धक्का खाने वाली खांटी गंवई अंदाज वाली घूंघट की ओट से झांकने वाली महिलाएं ही नहीं, दुनिया को चलाने वाली कई अरबपति महिलाएं भी संगम की रेती पर कल्पवास करेंगी। विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन महाकुंभ में दुनिया की जिन अरबपति महिलाओं के ठहरने के लिए संगम की रेती पर महाराजा डीलक्स के अलावा अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉटेज लगाए जा रहे हैं, उनमें एप्पल की मालकिन लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, पीट बटिगिग और कमला हैरिस जैसी हस्तियों के राजनीतिक सामाजिक अभियानों में हिस्सा ले चुकीं एप्पल की मालकिन लॉरेन पॉवेल जॉब्स पौष पूर्णिमा पर प्रथम डुबकी के साथ संगम की रेती पर कल्पवास भी करेंगी। लॉरेन महाकुंभ के शुभारंभ के दिन आएंगी। उनके ठहरने की व्यवस्था निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद के शिविर में की गई है। वह 29 जनवरी तक उनके शिविर में रहकर सनातन धर्म को समझेंगी।

महाकुंभ: श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर श्रेणी के लिए अलग-अलग ई-पास जारी किए जा रहे

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम व्यवस्था और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए छह अलग-अलग रंग के ई-पास जारी किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, इस बार श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर श्रेणी के लिए अलग-अलग ई-पास जारी किए जा रहे हैं। ई-पास को विभिन्न कैटेगिरी के आधार पर वितरित किया जाएगा, जैसे कि उच्च न्यायालय, वीआईपी, विदेशी राजदूत, विदेशी नागरिक और अप्रवासी भारतीयों के लिए सफेद रंग का पास, अखाड़ों और संस्थाओं के लिए केसरिया रंग का पास, कार्यदायी संस्थाओं, वेंडर, फूड कोर्ट, और मिल्क बूथ के लिए पीला रंग का पास, मीडिया के लिए आसमानी रंग का पास, पुलिस बल के लिए नीला रंग का पास, और आपातकालीन सेवाओं के लिए लाल रंग का पास जारी किया जाएगा। सुरक्षा के साथ-साथ व्यवस्थाओं की सुचारु कार्यप्रणाली के लिए प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नामित किए जा रहे हैं, जो आवश्यकताओं और अनुमोदन के आधार पर पास जारी करेंगे। इसके अतिरिक्त, महाकुंभ के दौरान वाहनों के लिए भी ई-पास जारी किए जाएंगे। इन पासों का वितरण विभागीय स्तर पर होगा और प्रत्येक वाहन पास के लिए आवेदक को अपना व्यक्तिगत विवरण, कलर्ड पासपोर्ट फोटो, आधार कार्ड अथवा पैन कार्ड, वाहन रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, और ड्राइविंग लाइसेंस की स्वहस्ताक्षरित छाया प्रति प्रस्तुत करनी होगी। बाइक या कार के लिए पास प्राप्त करने प्रक्रिया 1. पास की श्रेणियाँ और रंग: महाकुंभ में विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग रंग के ई-पास जारी किए जाएंगे: सफेद रंग: उच्च न्यायालय, वीआईपी, विदेशी राजदूत, विदेशी नागरिक, अप्रवासी भारतीय, केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए। केसरिया रंग: अखाड़ों और संस्थाओं के लिए। पीला रंग: कार्यदायी संस्थाओं, विक्रेताओं, फूड कोर्ट और मिल्क बूथ के लिए। आसमानी रंग: मीडिया कर्मियों के लिए। नीला रंग: पुलिस बल के लिए। लाल रंग: आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं के लिए। 2. आवेदन प्रक्रिया: आवेदन पत्र: ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें, जिसमें व्यक्तिगत विवरण, वाहन की जानकारी और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। दस्तावेज़: आवेदक का आधार कार्ड या पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, वाहन का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की स्वहस्ताक्षरित छाया प्रति आवश्यक होगी। प्रक्रिया: यूपी डेस्को (यूपी राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम) के माध्यम से ई-पास प्रणाली लागू की जाएगी। विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जो पास के अनुमोदन के लिए जिम्मेदार होंगे। 3. पास की प्राप्ति: स्वीकृति: आवेदन की स्वीकृति के बाद, ई-पास संबंधित विभाग द्वारा जारी किया जाएगा। प्रिंटिंग: ई-पास को प्रिंट करके मेला पुलिस कार्यालय से प्राप्त किया जा सकेगा। 4. सुरक्षा और नियंत्रण: बार कोड: ई-पास पर बार कोड होगा, जिससे पासधारक और वाहन की जानकारी सत्यापित की जा सकेगी। रंग कोडिंग: पास के रंग से यह पता चलेगा कि पासधारक मेला क्षेत्र में कहां तक जा सकता है, जिससे अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा। उत्तर प्रदेश की नोडल आईटी संस्था यूपीडेस्को द्वारा ई-पास प्रणाली की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे वाहनों के पास के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया जाएगा। विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी, मेला पुलिस और संस्थाओं के प्रतिनिधि वाहन पासों के आवेदनों की सत्यता की जांच करेंगे। इस व्यवस्था से महाकुंभ के आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।  

Maha Kumbh में 4500 टन लोहे से बना ब्रिज तैयार, श्रद्धालुओं को होगी सहूलिययत… संगम तट पर सीधे पहुंचेंगे

 प्रयागराज महाकुंभ के दृष्टिगत फाफामऊ में सिक्सलेन पुल के विकल्प के रूप में स्टील ब्रिज बनकर तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ब्रिज का दो जनवरी को शुभारंभ कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। अब इस समय मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) के विशेषज्ञों की पुल की लोड टेस्टिंग का काम कर रही है। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से यह अस्थायी ब्रिज बनाया गया है। गंगा पर लगभग 1948 करोड़ रुपये की लागत से सिक्सलेन पुल का निर्माण चल रहा था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। इसलिए लगभग चार माह पहले पुल के विकल्प के रूप में स्टील ब्रिज के निर्माण का निर्णय लिया गया था। लगभग 450 मीटर लंबे दो लेन के इस स्टील ब्रिज में 4500 टन लोहे का प्रयोग हुआ है। इसके लिए तीन किमी का एप्रोच रोड का भी निर्माण कराया गया है। पश्चिमी यूपी के श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत स्टील ब्रिज से पश्चिमी यूपी, अयोध्या, गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान की ओर से महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को काफी सहूलियत मिलेगी। उन्हें शहर नहीं जाना पड़ेगा। गंगा किनारे रिवर फ्रंट टाइप रोड से ये वाहन सीधे महाकुंभ मेला में प्रवेश कर सकेंगे। पुल का काम देखने मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह व मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी शनिवार को आए थे। मुख्य सचिव ने रायबरेली-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का भी काम देखा था। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भी रायबरेली से कार फाफामऊ आ सकते हैं, जहां से स्टील ब्रिज से उनका काफिला गुजरेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री कई अन्य परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे। महाकुंभ मेला क्षेत्र में चल तैयारियों का भी वह जायजा लेंगे। इसके बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण के सभागार में समीक्षा बैठक करेंगे। क्यों पड़ी पुल बनाने की जरूरत 26 नवंबर 2020 से गंगा नदी पर 10 किलोमीटर लंबे देश के दूसरे सबसे बड़े 6 लेन ब्रिज को बनाने का काम शुरू हुआ. ये पुल मलाका से शहर के त्रिपाठी चौराहे तक बनाया जा रहा है. इसमें करीब 4 किमी का पुल गंगा नदी पर बनना था. ये पुल NH-19: भदरी गांव (मलाका) से शुरू होकर गंगा नदी पार कर शहर के त्रिपाठी चौराहा तक बन रहा है. शिलान्यास के समय इसकी कुल लागत 980.77 करोड़ रुपए तय की गई थी. पुल की कुल लंबाई 9.9 किलोमीटर है. जर्मन तकनीक केबल और बॉक्सेस से बनने वाले देश के आधुनिकतम पुलों में से एक इस पुल के निर्माण के लिए 3 साल का लक्ष्य तय किया गया था लेकिन ये तय समय मे पूरा नहीं हो पाया. विकल्प के तौर पर बनाया जा रहा ये पुल महाकुंभ-2025 के लिए यह पुल बहुत जरूरी था. वजह गंगा नदी पर बने 50 साल पुराने पुल का जर्जर होना. दूसरा यह कि एक रास्ते से करोड़ों श्रद्धालुओं का संगम तक पहुंचना भी आसान नहीं है. इस पुल को फरवरी 2024 में बनकर तैयार हो जाना चाहिए था लेकिन जब ये पता चला कुंभ मेले तक ये पुल बनकर तैयार नहीं हो पाएगा तो विकल्प के तौर पर इस स्टील ब्रिज को बनाने की योजना तैयार की गई. फिलहाल स्टील के ब्रिज के निर्माण का काम अंतिम चरण में है. एक हफ्ते के अंदर पुल चालू हो जाएगा. हाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पुल का निरीक्षण कर इसे जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं. इस स्टील ब्रिज का निर्माण वही एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है, जो 10 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन ब्रिज का निर्माण कर रही है. 6 लेने ब्रिज समय पर पूरा नहीं हो पाया जिसके बाद कंपनी को कुंभ से पहले विकल्प के तौर पर ये स्टील ब्रिज खड़ा करना पड़ा है. अब तक 98 % तक काम पूरा हो चुका है. 4500 टन के इस ब्रिज की चौड़ाई 16 मीटर है लिहाजा पुल के एक एक पिलर की पुख्ता जांच के बाद ही इसे कार्य में लाया जाएगा. 60 दिन बाद मिट जाएगा पुल का नामों निशान कुंभ खत्म होने के बाद इस पुल को तोड़ दिया जाएगा. अब सवाल उठता है कि पुल को तोड़ने के बाद उसमें लगे 4500 टन लोहे का क्या होगा तो एसपी सिंगला कंपनी के इंजीनियर ने बताया कि काम के बाद सरकार और हमारी कंपनी की सहमति से तय किया जाएगा कि इस लोहे का क्या होगा. कंपनी के लोग कहते हैं कि ये सच है कि जब सिक्स लेन ब्रिज का काम पूरा नहीं हो पाया तो उन्हें विकल्प के तौर पर इसे बनाना पड़ा लेकिन इसको बनाने के पीछे एक मकसद यह भी है कि मेला प्रशासन को पुल के पास बड़ी पार्किंग मिल जाएगी. लखनऊ-अयोध्या समेत पश्चिमी यूपी की तरफ से आने वाली गाड़ियों को इधर ही पार्क किया जाएगा. यहां करीब डेढ़ लाख गाड़ियों को एक साथ पार्क किया जा सकता है. यहां से संगम की दूरी 10 से 12 किमी होगी. श्रद्धालुओं को शाही स्नान और महत्वपूर्ण दिनों पर पैदल ही जाना होगा. इससे पहले गाड़ियों को फाफामऊ पुल से पहले ही रोकने की कोशिश होती थी, उस वक्त इस इलाके में भीषण जाम लग जाता था. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि स्टील ब्रिज अपने आप में अनोखा है. प्रदेश में पहली बार ऐसा हो रहा कि कोई स्टील ब्रिज सिर्फ 2 महीने के लिए बनाया जा रहा. 2 महीने बाद यहां से इस पुल का नामोनिशान मिट जाएगा. उम्मीद की जानी चाहिए कि बगल में बनने वाला सिक्स लेन ब्रिज जल्द आम लोगों को समर्पित किया जाएगा. सिक्सलेन पुल का भी तेजी से चल रहा निर्माण फाफामऊ में गंगा पर सिक्सलेन पुल का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। हालांकि इसका काम जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 26 नवंबर 2020 को इसका शिलान्यास किया। 9.9 किमी लंबे पुल के लिए 1948 करोड़ रुपये का बजट है। जर्मन टेक्नोलॉजी से सिक्सलेन पुल को केबल और बाक्स के जरिए बनाया जा रहा है। लगभग 3840 मीटर का हिस्सा गंगा नदी और कछार एरिया पर बनना है। इसके लिए 67 पिलर तैयार किए गए।

श्रद्धालुओं के लिए होंगे ‘हाईटेक इंतजाम’, छह मोटर हाउसबोट का किया गया इंतजाम, बच्चों-बुजुर्गों को देंगे बड़ी राहत

प्रयागराज   महाकुंभ में श्रद्धालुओं को संगम तट पर हाईटेक हाउसबोट और आधुनिक आइसोलेटेड चेंजिंग रूम बड़ी राहत देंगे। हाउसबोट तट से संगम जाएंगे। जहां बोट के अंदर बने एंक्लोज्ड एरिया में श्रद्धालु सीढ़ी की मदद से नीचे उतरेंगे और संगम में डुबकी लगाएंगे। हाईटेक हाउसबोट की यह सुविधा बच्चों और बुजुर्ग के लिए कारगर साबित होगी। साथ ही साथ उन लोगों के लिए भी जो लोग पानी में उतरने से डरते हैं। छह मोटर हाउसबोट का किया गया इंतजाम आपको बता दें संगम के तट पर श्रद्धालुओं के लिए खास हाउसबोट का इंतजाम मेला प्रशासन ने किया है। मेला प्रशासन की तरफ से छह मोटर हाउसबोट का इंतजाम किया गया है। जिसमें कई तरह की आधुनिक सुविधा रहेगी। यह सभी हाउसबोट किसी भी कोने में जा सकती हैं। मतलब की घाट के किनारे से श्रद्धालुओं को बैठना होगा उसके बाद यह हाउसबोट मोटर की मदद से संगम तक पहुंचेगी। हाइटेक हाउसबोट में श्रद्धालुओं को सोफा सेट और चेंजिंग रूम भी मिलेगा। जिसमें श्रद्धालु डुबकी लगाने के बाद कवर्ड चेंजिंग रूम में कपड़े पहन सकेंगे। 144 आइसोलेटेड चेंजिंग रूम बनकर तैयार हाउसबोट के मैनेजर हर्ष अग्रवाल बताते हैं कि फिलहाल हाउसबोट का रेट डिसाइड नहीं किया गया है, लेकिन सबसे ज्यादा मदद उन श्रद्धालुओं को मिलेगी जिनको नदी में जाने से डर लगता है। वह सुरक्षित बैठकर संगम में जाकर डुबकी लगा सकते हैं। इसके साथ ही 144 आइसोलेटेड चेंजिंग रूम भी तैयार किए गए हैं। जो पहली बार संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए हैं। यह चेंजिंग रूम अंदर से गर्म रहेंगे और श्रद्धालुओं को बड़ी राहत देंगे। महिलाओं को खास ध्यान में रखते हुए इन चेंजिंग रूम को बनाया गया है।

महाकुंभ: सीएम योगी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने संत महात्माओं के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की

महाकुंभनगर महाकुंभ में इस बार स्वच्छता के लिहाज से विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सीएम योगी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने संत महात्माओं के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। यहां मच्छर और मक्खियों से पूरी तरह से निजात मिलेगी। सीएम योगी के निर्देश पर कुछ इस तरह के इंतजाम किए गए हैं कि महाकुंभ के किसी भी कोने से बस एक कॉल करते ही 30 मिनट के भीतर ऑटोमैटिक ब्लोअर मिस्ट मौके पर पहुंचकर मच्छर और मक्खी को खत्म कर देगी। अखाड़ों और टेंट सिटी को इंसेक्ट फ्री बनाने के साथ ही स्वच्छ वातावरण के लिए बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं, जिसके तहत 110 अत्याधुनिक ब्लोअर मिस्ट और 107 मिनी फॉगिंग मशीन तैनात की जा रही हैं। सीएम योगी के निर्देश पर महाकुंभनगर में सफाई व्यवस्था का विशेष इंतजाम किया जा रहा है। महाकुंभ के नोडल जॉइंट डायरेक्टर (वेक्टर कंट्रोल) डॉ वीपी सिंह ने बताया कि महाकुंभ के दौरान चप्पे-चप्पे पर कीटनाशक का छिड़काव किए जाने की तैयारी है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए इसके लिए 62 पल्स फॉगिंग मशीनें भी मंगवाई गई हैं। इस बार महाकुंभ में संतों और श्रद्धालुओं की हिफाजत के लिए 78 स्पेशल ऑफिसर तैनात किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी इस बार के महाकुंभ को हर बार के कुंभ से ज्यादा दिव्य और भव्य बनाना चाहते हैं, जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग को इस बार विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। मेला क्षेत्र में मलेरिया इंस्पेक्टर की तैनाती की जा रही है, जो श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखेंगे। एक-एक अखाड़े में जाकर मलेरिया इंस्पेक्टर संतों और महात्माओं से बात करेंगे और मच्छर, मक्खी की समस्या का तत्काल निदान भी करेंगे। मेला में वेक्टर कंट्रोल के असिस्टेंट नोडल और डीएमओ डॉ आनंद कुमार सिंह ने बताया कि महाकुंभ में पहली बार संतों और श्रद्धालुओं की हिफाजत के लिए इतने व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। 78 स्पेशल ऑफिसर तैनात किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अभी फिलहाल 45 मलेरिया इंस्पेक्टरों की तैनाती की योजना बनाई गई है। इनके अलावा 28 असिस्टेंट मलेरिया इंस्पेक्टर भी तैनात किए जाएंगे, जो साधु-संतों के साथ साथ श्रद्धालुओं की भी देखभाल करेंगे। इनके अलावा 5 डीएमओ की भी अलग से तैनाती की जा रही है, ताकि महाकुंभ में किसी प्रकार की असुविधा न होने पाए।  

प्रयागराज महाकुंभ में हरि इच्छा के अनुसार चलेगा भंडारा, 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

प्रयागराज सनातन आस्था का सबसे बड़ा समागम महाकुम्भ 2025 प्रयागराज में होने जा रहा है। अनुमान है कि 40 से 45 करोड़ श्रद्धालु पूरे देश और दुनिया के कोने-कोने से यहां त्रिवेणी के पवित्र संगम में डुबकी लगाने के लिए आने वाले हैं। माना जाता है कि महाकुम्भ में स्नान के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है। खासकर अन्न दान का, जिसके लिए 13 जनवरी से शुरू होने वाले इस महा आयोजन में सैकड़ों संस्थाएं पुण्य कमाने को आ रही हैं। ये सभी संस्थाएं पूरे मेला क्षेत्र में भंडारों का आयोजन करेंगी, जिसमें समस्त श्रद्धालुओं को निशुल्क भोजन की व्यवस्था रहेगी। इनमें से कई संस्थाओं ने यहां भंडारे और लंगर की शुरुआत भी कर दी है और कई अन्य विभिन्न संस्थाएं अन्न भंडार का जल्द शुभारंभ करने जा रही हैं। इन निशुल्क भंडारों के आयोजन से महाकुम्भ में आने वाला कोई भी श्रद्धालु भूखा नहीं रहेगा। सैकड़ों संस्थाएं चलाती हैं भंडारा प्रयागराज के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के अनुसार, महाकुम्भ में इस वर्ष 8 हजार से 10 हजार संस्थाओं के आने की संभावना है। महाकुम्भ जैसे आयोजन में देश के लगभग सभी पंथों के लोग प्रतिभाग करते हैं। मेला प्रशासन की ओर से इन सभी पंथ से जुड़े लोगों का स्वागत किया जा रहा है और उनके लिए समस्त व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। इनमें सैकड़ों ऐसी संस्थाएं भी हैं जो महाकुम्भ के दौरान निशुल्क भोजन के लिए लंगर और भंडारे का आयोजन करती हैं। इनमें अक्षय पात्र, इस्कॉन और ओम नमः शिवाय जैसी संस्थाएं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन कराती हैं। इसके अतिरिक्त प्रशासन ने फेयर प्राइस शॉप्स की भी व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को कम दाम में भोजन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं को मिलता है भोजन एडीएम मेला, विवेक चतुर्वेदी के अनुसार कुम्भ, महाकुम्भ और माघ मेला जैसे आयोजनों के दौरान प्रयागराज में स्नान और दान का विशेष महत्व है। इन सभी मेला के दौरान सैकड़ों संस्थाएं आगे आकर यहां निशुल्क लंगर और भंडारों का आयोजन करती हैं, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन मिलता है। मेला के साथ-साथ शहर के प्रमुख चौराहों, नुक्कड़ों और गलियों में भी भंडारे आयोजित किए जाते हैं। इनकी संख्या का सही-सही अनुमान लगाना आसान नहीं है, क्योंकि संस्थाओं के साथ-साथ स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इस तरह के आयोजनों का हिस्सा बनते हैं। कई भंडारों का शुरू हुआ आयोजन अखिल भारतीय पंचतेरह त्यागी, खाकचौक (राम संतोष दास जी महाराज)की ओर से दिगंबर अखाड़ा के पास एक दिसंबर से भंडारे का आयोजन शुरू कर दिया गया है। महंत गोपाल दास जी के अनुसार, महाकुम्भ से पहले और पूरे महाकुम्भ के दौरान हमारे यहां जितने लोग भी आएंगे उन सभी को निशुल्क भोजन कराया जाएगा। सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जबकि सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं को चाय वितरित की जा रही है। इसी तरह, सेक्टर 20 में जूना अखाड़े का अन्न भंडारा भी 25 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। श्री हिंगलाज मठ अलग दरबार के मृत्युंजय पुरी जी बताते हैं कि यह भंडारा सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक चलेगा। हमारे यहां से कोई भी श्रद्धालु भूखा नहीं जाएगा। हरि इच्छा के अनुसार चलेगा भंडारा आवाहन अखाड़ा के राष्ट्रीय सचिव महंत सत्यगिरि ने बताया कि भंडारे का आयोजन शुरू हो चुका है और पूरा महाकुम्भ यह निरंतर चलेगा। सभी श्रद्धालुओं को यहां निशुल्क भरपेट भोजन प्राप्त होगा। वहीं, रघुवंश सेवा संकल्प ट्रस्ट, अयोध्या द्वारा भी भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। राम वैदेही मंदिर के महंत स्वामी दिलीप दास त्यागी जी महाराज ने बताया कि यह भंडारा हरि इच्छा के अनुसार 24 घंटे चलेगा। हमारा प्रयास संगम स्नान के लिए आए समस्त श्रद्धालुओं को अन्न प्रसाद ग्रहण कराना है। इसी तर्ज पर खरगौन मध्य प्रदेश का मां रेवा फाउंडेशन भी महाकुम्भ में भंडारे का आयोजन करेगा, जो 24 घंटे का होगा। इसे अनन्य अन्न क्षेत्र का नाम दिया गया है। यहां पूरे 45 दिन सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद प्राप्त हो सकेगा।

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