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मुख्यमंत्री महाकाल स्टेडियम का 15 फरवरी को लोकार्पण करेंगे, नए पुल के बीच में 19 मीटर चौड़ी जगह बनाई गई

उज्जैन बाबा महाकाल के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है. 15 फरवरी से महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए एक और नया प्रवेश द्वार खुलने जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रुद्रसागर पर बनाए नए ब्रिज का लोकार्पण करेंगे. इसका निर्माण 25 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. इस ब्रिज के खुलने से श्रद्धालु शक्ति पथ से सीधे महाकाल मंदिर तक पहुंच सकेंगे, जिससे चारधाम मंदिर से आने वाले दर्शनार्थियों की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर कम हो जाएगी. रुद्रसागर पर बना 200 मीटर लंबा ब्रिज उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने मई 2022 में इस ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया था. यह ब्रिज 200 मीटर लंबा और 7 मीटर चौड़ा है, जबकि मध्य में 19 मीटर चौड़ी जगह छोड़ी गई है. पहले इस ब्रिज को 2023 के अंत तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन निर्माण में करीब डेढ़ साल की देरी हुई. अब यह पूरी तरह तैयार है और जल्द ही श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा. ब्रिज से मिलेगा लाइट एंड साउंड शो का आनंद इस नए ब्रिज पर खड़े होकर भक्त जल्द ही शुरू होने वाले लेजर लाइट एंड साउंड शो का आनंद ले सकेंगे. 500 से अधिक श्रद्धालु एक साथ खड़े होकर भगवान शिव के प्राकट्य और उज्जयिनी की गौरवशाली गाथा को देख और सुन सकेंगे. वर्तमान में महाकाल मंदिर पहुंचने के लिए छह रास्ते हैं. इस ब्रिज के खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं को सातवां मार्ग मिल जाएगा, जिससे भीड़ नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी. मुख्यमंत्री नगर निगम द्वारा दशहरा मैदान पर 4 करोड़ 43 लाख रुपये से बनाए राजाभाऊ महाकाल स्टेडियम, मोती नगर में चार करोड़ 33 लाख के श्रीकृष्ण आश्रय सभा मंडप और त्रिवेणी शनि मंदिर के समीप बनाए हाल का लोकार्पण भी करेंगे। महाशिवरात्रि पर ब्रिज रहेगा बंद लोकार्पण के बाद यह मार्ग भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा, हालांकि 27 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर इसे बंद रखा जाएगा. कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार महाशिवरात्रि पर भीड़ के कारण इस ब्रिज को बंद रखा जाएगा. लोकार्पण के बाद शुरू हो जाएगी आवाजाही इसके पहले मुख्यमंत्री सरपंचों से चर्चा करेंगे। कार्यक्रम की तैयारी में बुधवार को प्रशासनिक अमला लगा नजर आया। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि लोकार्पण के बाद पैदल पुल से आवाजाही शुरू हो जाएगी। मंदिर पहुंचने का नौवां रास्ता तैयार श्रद्धालु, शक्ति पथ पर पिनाकी द्वार से आगे माधवगंज स्कूल के सामने रुद्रसागर पर बनाए पुल के रास्ते महाकाल महालोक में मानसरोवर भवन के सामने पहुंचकर महाकाल मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे। पुल बनने से मंदिर पहुंच के लिए नौवां रास्ता तैयार हो गया है। पुल 200 मीटर लंबा और छह मीटर चौड़ा है। पुल के मध्य 19 मीटर चौड़ी जगह है, जहां कुछ देर खड़े रहकर श्रद्धालु रुद्रसागर और आसपास की खूबसूरती निहार सकेंगे। यहीं से महाकाल मंदिर के शिखर के दर्शन भी कर सकेंगे।

उज्जैन महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि की तैयारी शुरू, 10 दिन तक मनमोहक रूपों में दर्शन देंगे बाबा

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में 17 फरवरी से महाशिवरात्रि महोत्सव की भव्य शुरुआत होगी. ये आयोजन पूरे 10 दिन तक चलेगा. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और इन्हें सुविधाएं देने के लिए महाकालेश्वर मंदिर समिति ने दर्शन व्यवस्था को और सरल-सुविधाजनक बनाने की रणनीति बनाई है. मंदिर समिति का कहना है कि भक्तों को आसानी से भगवान महाकाल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सके, इसकी तैयारियां की जा रही हैं. श्रद्धालुओं की कहां और कैसे एंट्री व एग्जिट महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने इस बार दो प्रमुख बदलाव किए हैं. सभी प्रवेश द्वारों जैसे त्रिवेणी संग्रहालय, नीलकंठ द्वार और अवंतिका द्वार पर संकेतक लगाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को सटीक मार्गदर्शन मिल सके. इसके अलावा टनल (सुरंग मार्ग) का पूर्ण क्षमता से उपयोग किया जाएगा, जिससे दर्शन प्रक्रिया में गति आएगी. सामान्य श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से प्रवेश करेंगे और शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय, नंदी द्वार, महाकाल लोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1 और टनल मार्ग से होते हुए गणेश मंडपम् पहुंचकर दर्शन कर सकेंगे. दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से होते हुए हरसिद्धि मंदिर के पास से चारधाम मंदिर लौट सकेंगे. वीआईपी और मीडिया प्रवेश की ऐसी रहेगी व्यवस्था वीआईपी, वीवीआईपी और मीडिया के लिए नीलकंठ द्वार से प्रवेश की व्यवस्था की गई है. इनके वाहन विशेष पार्किंग क्षेत्र में रखे जाएंगे, जहां से वे महाकाल लोक, कंट्रोल रूम, शंख द्वार, निर्माल्य द्वार होते हुए सभा मंडपम् पहुंचेंगे. दर्शन के बाद इसी मार्ग से वापसी होगी. अवंतिका द्वार (गेट नंबर 1) से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को निःशुल्क दर्शन की सुविधा मिलेगी. महाकाल लोक और हरसिद्धि मंदिर तिराहे पर प्रसाद वितरण केंद्र इसके अलावा महाकाल लोक और हरसिद्धि मंदिर तिराहे पर प्रसाद वितरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे. नीलकंठ द्वार पर आपातकालीन एंबुलेंस तैनात रहेंगी. इसके साथ ही भील समाज धर्मशाला, कलोता समाज धर्मशाला, हरिफाटक ब्रिज के नीचे हाट बाजार और मेघदूत पार्किंग स्थल पर वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है. श्रद्धालुओं को बस के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया जाएगा. दर्शन मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर अस्थायी पूछताछ केंद्र स्थापित किए जाएंगे. सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी के माध्यम से निरीक्षण किया जाएगा. भीड़ बढ़ने पर दो अलग दर्शन मार्ग तैयार श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने पर दो अलग दर्शन मार्ग खोले जाएंगे. पहला फेसिलिटी सेंटर-1 से मंदिर परिसर के निर्गम रैंप और नवीन टनल तक और दूसरा, फेसिलिटी सेंटर-1 से सीधे कार्तिकेय मंडपम् तक. महाकाल मंदिर सहायक प्रशासक मूलचंद्र जूनवाल ने बताया “मंदिर समिति और प्रशासन पूरी तरह से तैयार है. श्रद्धालुओं इस पावन पर्व पर भगवान महाकाल के दर्शन का लाभ बिना किसी कठिनाई के हो सकें, इस प्रकार की व्यवस्था बनाई गई है.”

महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद की कमी के कारण भक्तों को परेशानी, कच्चे माल की कमी के कारण प्रसाद का उत्पादन प्रभावित

 उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में पिछले कुछ दिनों से लड्डू प्रसाद का टोटा बना हुआ है। दिन में कई बार काउंटरों पर प्रसाद उपलब्ध नहीं रहता है। चिंतामन स्थित यूनिट से गाड़ी आने के बाद व्यवस्था सुचारु हो पाती है। बताया जाता है कि कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने से समय पर लड्डू प्रसाद बन नहीं पा रहा है। अब 12 फरवरी को नए टेंडर होने के बाद सप्लाय व्यवस्था सामान्य होगी। महाकाल मंदिर में परिसर तथा महाकाल महालोक के काउंटरों से लड्डू प्रसाद विक्रय किया जाता है। देशभर से महाकाल दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थी बड़े ही श्रद्धाभाव से लड्डू प्रसाद खरीदकर अपने साथ घर ले जाते हैं। महाकाल का लड्डू प्रसाद इतना शुद्ध व स्वादिष्ट है कि देशभर में इसकी बड़ी मांग है। काउंटरों पर किल्लत शुरू हालांकि समय-समय पर मंदिर प्रशासन की खामियों के कारण मांग के अनुरूप पूर्ति नहीं हो पाती है। बीते कुछ दिनों से कच्चे माल की कमी के कारण समय पर पर्याप्त मात्रा में लड्डू प्रसाद नहीं बन पा रहा है। इसका असर काउंटरों पर किल्लत के रूप में नजर आता है। काउंटर बंद नहीं करना पड़े इसलिए चिंतामन यूनिट से थोड़ा थोड़ा प्रसाद बनाकर आपूर्ति की जा रही है। टेंडर की ओर ध्यान नहीं दिया बता दें कि मंदिर में बीते एक वर्ष में लगातार प्रशासक बदले जाते रहे। प्रभारी प्रशासक बनकर आए अधिकारियों ने टेंडर की ओर ध्यान नहीं दिया। स्टोर विभाग व लड्डू प्रसाद निर्माण इकाई प्रभारी के बीच में भी तालमेल की कमी टेंडर प्रक्रिया में देरी का कारण मानी जा रही है। काफी मशक्कत के बाद मंगलवार को टेंडर होंगे। इसके बाद जिस फर्म को ठेका मिलेगा वह सप्लाय की शुरुआत करेगा। इसके बाद पर्याप्त मात्रा में प्रसाद बनेगा। अगर यही स्थित रही तो इस बार महाशिवरात्रि पर प्रसाद की कमी सामने आने वाली है। 40 से 50 क्विंटल लड्डू रोज बनता है यूनिट में चिंतामन स्थित लड्डू प्रसाद युनिट में प्रतिदिन 40 से 50 क्विंटल लड्डू प्रसाद रोज बनाया जाता है। काउंटरों से इतना प्रसाद बिक जाता है। लेकिन इन दिनों कच्चामाल उपलब्ध नहीं होने से पर्याप्त मात्रा में लड्डू प्रसाद नहीं बन पा रहा है। टेंडर के बाद व्यवस्था ठीक होगी     समय पर पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने से पूर्ण क्षमता के साथ लड्डू प्रसाद नहीं बन पा रहा है। 12 फरवरी को टेंडर होने के बाद व्यवस्था ठीक हो जाएगी। महाशिवरात्रि पर किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहेगी। महापर्व पर भक्तों को पर्याप्त मात्रा में लड्डू प्रसाद मिलेगा। – अशोक लांडगे, प्रभारी लड्डू प्रसाद यूनिट प्रभारी  

17 फरवरी से प्रारंभ हो रहे नौ दिवसीय शिवनवरात्रि पर्व के दौरान भोग आरती का समय सुबह 10:30 बजे से बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया

उज्जैन उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि के अवसर पर पूजन व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। 17 फरवरी से प्रारंभ हो रहे नौ दिवसीय शिवनवरात्रि पर्व के दौरान भोग आरती का समय सुबह 10:30 बजे से बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया है। यह क्रम नौ दिन रहेगा। महाशिवरात्रि पर्व के दिन रात्रि में महानिशा काल में रात्रि पर्यंत विविध प्रकार से भगवान महाकाल की पूजा होगी। 27 फरवरी को तड़के 4 बजे भगवान को सप्तधान मुखारविंद धारण करवाकर उनके शीश पर सवा मन फल व फूलों से बना मुकुट धारण करवाया जाएगा। इसके बाद सुबह 11 बजे से सेहरा उतारने के बाद वर्ष में एक बार दोपहर में भस्म आरती होगी। वहीं भस्म आरती के बाद दोपहर में ही भगवान को भोग अर्पित कर आरती होगी। इसी दिन मंदिर के पुजारी-पुरोहितों को मंदिर समिति द्वारा पारणा करवाया जाएगा। कोटितीर्थ कुंड व रुद्रयंत्र की सफाई कार्य शुरू होगा महाशिवरात्रि की तैयारियों के तहत कोटितीर्थ कुंड की विशेष सफाई की जाएगी। कुंड से पानी निकालकर काई हटाई जाएगी और नया जल भरा जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में स्थित चांदी के रुद्र यंत्र, जलाधारी और दरवाजों की सफाई व पॉलिश की जाएगी। शिखर की रंगाई-पुताई के साथ स्वर्ण शिखरों को भी चमकाया जाएगा। पर्व से पूर्व संपूर्ण मंदिर परिसर की विशेष सफाई की जाएगी। बैठक में श्रद्धालुओं की प्रवेश तथा निर्गम व्यवस्था, भस्मार्ती में श्रद्धालुओं के प्रवेश संबंधी व्यवस्था, पुजारी/पुरोहित/साधु-संतों/मीडिया कर्मियों की प्रवेश व्यवस्था, श्री महाकालेश्वर मंदिर में आगंतुक श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से उज्जैन शहर में चारो ओर से आने वाले मार्गो के चयनित स्थानों पर अस्थाई रूप से वाहन पार्किंग की व्यवस्था, बसो की व्यवस्था, अस्थाई हाॅस्पिटल, पेयजल, सेंट्रलाईज्ड पी.ए. सिस्टम आदि की व्यवस्था की जाना है। आगंतुक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समिति द्वारा अस्थाई रूप से मंदिर परिक्षेत्र के चारो ओर चयनित स्थानों पर पूछताछ एवं खोया-पाया केन्द्र स्थापित किए जाऐगें। आगन्तुक श्रद्धालु सरलता से अपने पदवेश व्यवस्थित रूप से रख कर दर्शन उपरांत पुनः सरलता से प्राप्त कर सके, इस हेतु पूर्व वर्षानुसार चिन्हित निर्धारित स्थानों पर अस्थाई जूता स्टेण्ड का संचालन मुख्य कार्यपालन अधिकारी उज्जैन विकास प्राधिकरण उज्जैन के माध्यम से किया जाना हैं। महाशिवरात्रि पर्व 2025 के उपलक्ष्य पर सम्पूर्ण मंदिर आंतरिक एवं एवं बाह्य परिक्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में फ्लेक्स एवं दिशा सूचक बोर्ड की व्यवस्था श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा की जावेगी। महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए चयनित स्थानों पर नगर पालिक निगम उज्जैन द्वारा अस्थाई फायर स्टेशन स्थापित किए जाना है।आगन्तुक दर्शनार्थियों को लड्डू प्रसाद उपलब्ध कराने हेतु श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा विभिन्न स्थानों पर लड्डू प्रसाद काउण्टर पहले से अधिक संख्या में स्थापित किये जायेगे। बैठक में दीनदयाल रसोई योजना के संचालन के अंतर्गत उज्जैन शहर में निवासरत गरीब, भिक्षुक, असहाय, निःशक्तजन एवं ऐसे व्यक्ति जो स्वयं भोजन का प्रबंध करने में असमर्थ है, को श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर जी का निःशुल्क भोग/भोजन प्रसाद उपलब्ध कराए जाने का निर्णय लिया गया, जिसके अंतर्गत नगर पालिक निगम उज्जैन द्वारा शहर के 06 स्थानों पर स्थापित भोजन केन्द्र में 500 व्यक्ति प्रति भोजन केन्द्र पर कुल 3000 व्यक्तियों के लिए भोजन पहुंचाया जाएगा। पूर्व में भी श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा दीन दयाल रसोई योजना के अंतर्गत सेवाएं दी जाती रही है, जिन्हे पुनः प्रारंभ किया गया।  श्री महाकालेश्वर मंदिर में दान एवं भेंट के माध्यम से प्राप्त स्वर्ण एवं रजत सामग्री का त्वरीत मूल्यांकन कर सामग्री पर क्यू.आर. कोडिंग की जावेगी।पं. श्री सूर्यनारायण व्यास अतिथि निवास एवं जे.के. सीमेंट द्वारा नवनिर्मित अतिथि निवास में लाईट चली जाने पर आरक्षित कक्षो में 01 पंखा एवं 01 टयूब लाईट चालु रहे इस हेतु प्रचलित निर्माण कार्यो के अंतर्गत ही डी.जी. सेट (जनरेटर) स्थापित करवाए जाएंगे, साथ ही दोनो अतिथि निवास में 01 पेन्ट्री संचालित करने का निर्णय लिया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा त्रिवेणी संग्रहालय के सम्मुख श्री महाकाल अतिथि निवास का निर्माण कराया गया है, जिसमें वर्तमान में बेसमेंट में पार्किंग एवं ग्राउण्ड फ्लोर पर 09 कक्ष निर्मित है, जो कि वर्तमान परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए पर्याप्त नहीं है। सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए श्री महाकाल अतिथि निवास के ऊपर 04 फ्लोर (जी+04) का निर्माण कराए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। यह निर्माण दानदाता के माध्यम से या मंदिर प्रबंध समिति स्वयं करेगी।  मंदिर समिति के वाहन बोलेरो, टाटा मेजिक लोडिंग वाहन एवं मारूति वेन लगभग 15 से 20 वर्ष पुराने होने के कारण वर्तमान में उपयोग में नहीं लिए जा सकते है, जिन्हे आर.टी.ओ. के माध्यम समिति बनाकर अपलेखित (हटाने) किए जाने का निर्णय लिया गया।

उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया

उज्जैन उज्जैन  कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सिंहस्थ 2028 को दृष्टिगत रखते हुए पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया। सभी 13 अखाड़ों की पेशवाई के रूटों का निरीक्षण कर कलेक्टर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर सिंह ने सभी मार्गों की गूगल मैप पर मार्किंग के निर्देश दिए। साथ ही मार्गों से अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के निर्देश भी दिए। कलेक्टर सिंह ने नीलगंगा तालाब के सौंदर्यीकरण और व्यवस्थाओं की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। पेशवाई मार्गों के निरीक्षण के दौरान अग्नि अखाड़े की पेशवाई का मार्ग लाल बाबा के मंदिर से, निरंजनी अखाड़े की पेशवाई का मार्ग राजे धर्मशाला से, जूना अखाड़ा, नया उदासीन, आनंद, आवाहन, अटल, निर्वाणी अखाड़ों का पेशवाई मार्ग नीलगंगा से, उदासीन अखाड़े का मार्ग अलखधाम आश्रम से और निर्मल अखाड़े का मार्ग गुरुद्वारा फ्रीगंज से निर्धारित किया गया है। निरीक्षण के दौरान खाक चौक से अंकपात मार्ग होते हुए निकास चौराहा, इंदौर गेट से कंठाल मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा आदि पेशवाई मार्गों का निरीक्षण किया गया। कलेक्टर सिंह ने श्री महाकाल महालोक में श्री महाकाल अन्न क्षेत्र के प्रथम तल पर संचालित प्रसादी क्षेत्र का भ्रमण कर निरीक्षण किया एवं वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने प्रवचन हॉल, रोपवे के निर्माणाधीन कार्यों का भी निरीक्षण किया। इसके पश्चात, कलेक्टर सिंह ने रुद्रसागर सेतु एवं महाराजवाड़ा हेरिटेज होटल के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर इसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, कार्य की गुणवत्ता व मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

साल के नए दिन को खास बनाने के लिए बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया

उज्जैन  नए साल के पहले दिन उज्जैन में बाबा महाकाल की भस्मारती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। देश भर से भक्त आये थे। सभी ने नए साल 2025 की शुभकामनाएं मांगीं और महाकालेश्वर से आशीर्वाद लिया। साल के नए दिन को खास बनाने के लिए बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार भी किया गया, जिसे देखकर लोग देखते ही रह गए। महाआरती भी हुई। मान्यता है कि भस्मारती देखने से व्यक्ति विशेष हो जाता है। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में नए साल का अनोखा जश्न मना। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आये। सुबह तीन बजे से ही भक्त महाकाल की भक्ति में लीन हो गए। नए साल की पहली सुबह बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से बाबा को नहलाया गया। चंदन का लेप लगाया गया। सुगंधित द्रव्य चढ़ाए गए। भांग से श्रृंगार किया गया। पंडितों ने मंत्रोच्चार किए। बाबा को श्वेत वस्त्र पहनाए गए। फिर भस्म रमाई गई। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्मारती हुई। देखने लायक होता है विशेष श्रृंगार भस्मारती में शामिल होने वाले भक्तों में खासा उत्साह दिखा। किसी ने परिवार की सुख-शांति की कामना की। किसी ने देश की अमन-चैन और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। यह मान्यता है कि बाबा महाकाल की भस्मारती के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति धन्य हो जाता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। नए साल पर बाबा का विशेष श्रृंगार देखने लायक था। इस श्रृंगार में बाबा और भी दिव्य लग रहे थे। भक्तों ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया। भक्तों की संख्या नियंत्रण के लिए खास व्यवस्था मंदिर प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। पुलिस बल तैनात था। स्वयंसेवक भी मदद कर रहे थे। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और पानी की व्यवस्था भी की गई थी। सब कुछ सुचारू रूप से चला। इस तरह उज्जैन में नए साल की शुरुआत बाबा महाकाल के आशीर्वाद से हुई। हजारों भक्तों ने भस्मारती का लाभ उठाया और नए साल के लिए शुभकामनाएं प्राप्त कीं। यह वाकई एक अविस्मरणीय अनुभव था। भक्तों के चेहरों पर श्रद्धा और भक्ति साफ दिख रही थी। सभी ने नए साल की शुरुआत एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ की। शिव को समर्पित विशेष अनुष्ठान है भस्मआरती भस्मारती, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। यह शिव जी को समर्पित है। यह प्रातः काल सूर्योदय से पहले की जाती है। इसमें जली हुई लकड़ी की राख का उपयोग किया जाता है। इस राख को भस्म कहा जाता है। मान्यता है कि भस्म सभी पापों को नष्ट कर देती है। और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में हुई भस्मारती का विशेष महत्व है। यहाँ देश-विदेश से लोग भस्मारती के दर्शन करने आते हैं।

नववर्ष में सिर्फ 45 मिनट में होंगे बाबा महाकाल के दर्शन, प्रशासन ने की पूरी तैयारी

उज्जैन  नया साल आने में अब कुछ ही समय बचा है। ज्यादातर लोग नए साल की शुरुआत उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दर्शन से करते हैं। ऐसे में 31 दिसंबर और 01 जनवरी को बाबा महाकाल के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 31 दिसंबर और एक जनवरी के दिन मंदिर समिति इस बार विशेष तैयारी कर रही है। भक्तों को आसानी से दर्शन कराने के लिए कई व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं, प्रशासन का दावा है कि सुगम दर्शन व्यवस्था से भक्त करीब 45 मिनट में भगवान के दर्शन कर सकेंगे। भक्तों को कर्कराज पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए महाकाल लोक से मंदिर में प्रवेश मिलेगा। 31 और एक को शीघ्र दर्शन टिकट व्यवस्था बंद रहेगी। कार्तिक मंडपम में सामान्य श्रद्धालुओं को बड़ी संख्या में प्रवेश कराकर दर्शन करवाए जाएंगे। इन दोनों दिन भस्मार्ती में श्रद्धालुओं की संख्या को आधा कर दिया जाएगा। कहां होगी वाहन पार्क करने की व्यवस्था?     हरिफाटक ब्रीज के नीचे तथा हाटबाजार परिसर     कर्कराज, कलोता व भील समाज धर्मशाला परिसर     कार्तिक मेला ग्राउंड तथा माधव सेवा न्यास परिसर यहां से मिलेगा भक्तों को मंदिर में प्रवेश सामान्य दर्शनार्थी: चारधाम मंदिर के सामने से दर्शन की कतार में लगने के बाद शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर, महाकाल टनल-1 से गणेश मंडप में पहुंचेंगे तथा भगवान महाकाल के दर्शन करेंगे। वीआईपी: प्रोटोकाल के तहत आने वाले वीआईपी दर्शनार्थी हरिफाटक ओवर ब्रीज से होकर बेगमबाग के रास्ते नीलकंठ द्वार से मंदिर में प्रवेश करेंगे। यहां वीआइपी पार्किंग की व्यवस्था भी रहेगी। वृद्ध, दिव्यांग: नए साल पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले वृद्ध व दिव्यांग दर्शनार्थियों का प्रवेश मंदिर कार्यालय के सामने अवंतिका से होगा। यहीं व्हील चेयर की सुविधा उपलब्ध रहेगी। दर्शन के बाद भक्त इस रास्ते से जाएंगे बाहर भगवान महाकाल के दर्शन उपरांत भक्त गेट नंबर 10 अथवा निर्माल्य द्वार से मंदिर के बाहर आएंगे। इसके बाद निर्धारित मार्ग से बड़ा गणेश मंदिर के सामने से होते हुए हरसिद्धि चौराहा से पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे। भक्तों के लिए फ्री रहेंगी ये सुविधाएं जूता स्टैंड: भील समाज की धर्मशाला, चारधाम मंदिर के सामने, अवंतिका द्वार के समीप निशुल्क जूता स्टैंड की सुविधा उपलब्ध रहेगी। भोजन प्रसादी: श्री महाकाल महालोक के सामने मंदिर समिति के अन्नक्षेत्र में भक्तों को निशुल्क भोजन प्रसादी की सुविधा उपलब्ध रहेगी। पेयजल: करीब ढाई किलो मीटर लंबे मार्ग पर कई स्थानों पर पेयजल के इंतजाम रहेंगे। यहां से प्रसाद खरीद सकेंगे भक्त मंदिर समिति द्वारा चारधाम मंदिर के समीप और पार्किंग में लड्डू प्रसाद काउंटर स्थापित किए जाएंगे। भक्त यहां से लड्डू प्रसाद खरीद सकेंगे। डायवर्सन और पार्किंग व्यवस्था चार पहिया वाहन पार्किंग 1. इंदौर/देवास/मक्सी मार्ग सेः वाहन कर्कराज, भील समाज पार्किंग। वैकल्पिक मन्नत गार्डन, इम्पीरियल होटल के पीछे। 2. बड़नगर/नागदा मार्ग सेः मोहनपुरा ब्रिज से कार्तिक मेला मैदान। 3. आगर मार्ग से मकोडिया आम से कार्तिक मेला मैदान वैकल्पिकः कृषि उपार्जन मैदान। दो पहिया वाहन पार्किंग 1. इंदौर/देवास/मक्सी मार्ग से नरसिंह घाट पार्किंग। 2. बड़नगर /आगर/नागदा मार्ग से हरसिद्धी पाल पार्किंग। वैकल्पिक शंकराचार्य चौराहा गुरुद्वारा पार्किंग। भारी वाहन डायवर्सन 1. इंदौर से नागदा /आगर/मक्सी मार्ग, तपोभूमि-देवास बायपास। 2. मक्सी से इंदौर मार्ग, नरवर बायपास। 3. बड़नगर/नागदा/आगर मार्ग, मोहनपुरा ब्रिज से देवास रोड। वाहन प्रतिबंधित मार्ग (31 दिसंबर शाम 4 बजे से) 1. हरिफाटक टी से महाकाल घाटी चौराहा। 2. जंतर-मंतर से चारधाम पार्किंग। 3. शंकराचार्य चौराहा से नरसिंहघाट। पार्किंग से निकास मार्ग 1. कर्कराज/नरसिंहघाट पार्किंग, भूखी माता मार्ग। 2. इंटरपिटिशन पार्किंग, जयसिंहपुरा से लालपुल। 3. हरिफाटक पार्किंग, वाकणकर ब्रिज। रिजर्व पार्किग इंजीनियरिंग कॉलेज और प्रशांति चौराहा। नोटः नगर निगम द्वारा चारधाम टर्निंग तक बस सेवा उपलब्ध।

महाकाल मंदिर में बड़ा एक्शन, प्रशासक बने एडीएम अनुकूल जैन, गणेश धाकड़ को हटाने का बाद दी जिम्मेदारी

उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने पुष्टि की है कि महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश धाकड़ को उनके पद से हटा दिया गया है. हालांकि, उनके स्थान पर नया प्रशासक कौन होगा, इस पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है. वही महाकालेश्वर मंदिर की आय से हेरफेर के मामले में आरोपी बनाए गए दो कर्मचारियों को कोर्ट ने जेल भेज दिया है और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है. 2 बार मंदिर समिति के प्रशासक रहे हैं धाकड़ महाकाल मंदिर का अगला समिति प्रशासक कौन होगा इसे लेकर संशय है. ये फैसला भोपाल से लिया जाएगा या स्थानीय स्तर पर, इसे लेकर भी चर्चा जारी है। इस पर कलेक्टर नीरज सिंह का कहना है कि जल्द ही मामले में स्पष्टता आएगी. गौरतलब है कि गणेश धाकड़ को 14 अगस्त 2024 को महाकाल मंदिर समिति का प्रशासक नियुक्त किया गया था. यह उनका दूसरा कार्यकाल था। इससे पहले वे 2021 से 2022 तक करीब एक वर्ष तक इसी पद पर रह चुके थे. धाकड़ ने कहा, मुझे कोई जानकारी नहीं वहीं महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक पद से हटाए जाने के सवाल पर गणेश धाकड़ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें अब तक स्थानांतरण से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. वहीं इस घटनाक्रम को लेकर मंदिर से जुड़े अधिकारी और स्थानीय लोगों में चर्चा का बाजार गर्म है. पूर्व मे भी मिला था प्रभार बताया जाता है कि एडीएम अनुकूल जैन एडीएम का पद संभालने के साथ ही जिला प्रोटोकॉल की व्यवस्थाओं के संबंध में महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े रहते हैं। पूर्व में भी 13 अगस्त को उन्हें एक दिन के लिए महाकालेश्वर मंदिर का प्रशासक बनाया गया था, जिसके बाद गणेश धाकड़ को मंदिर का प्रशासक बना दिया गया था।   अवैध वसूली करने वाले रिमांड पर महाकालेश्वर मंदिर में अवैध वसूली करने वाले राजकुमार, अभिषेक भार्गव, रितेश शर्मा, राजेंद्र सिसोदिया को पुलिस ने एक दिन के रिमांड पर लिया है. महाकाल थाना पुलिस के मुताबिक अभी तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दो लोग निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी है.

कलेक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दर्शन व्यवस्था का मुआयना कर आवश्यक निर्देश दिए

उज्जैन वर्ष 2024 की समाप्ति एवं अंग्रेजी नववर्ष 2025 के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में दूरदराज से आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में वृद्धि होने के कारण उन्हें दर्शन की सुव्यवस्थित व्यवस्था कर सुगमतापूर्वक दर्शन कराने के लिए तैयारियां की जा रही है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शुक्रवार 27 दिसंबर को प्रात: प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का मुआयना कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिए कि शीघ्रता से बेरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने सर्वप्रथम कर्कराज पार्किंग स्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए कि पार्किंग स्थल पर समतलीकरण, साफ-सफाई, चलित शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके बाद कलोता समाज एवं भील समाज की धर्मशाला पर पार्किंग व्यवस्था का अवलोकन किया। उक्त स्थलों पर भी सुव्यवस्थित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले के साथ कर्कराज पार्किंग स्थल से पैदल मार्ग का मुआयना करते हुए गंगा गार्डन से गोंड बस्ती, चारधाम पार्किंग, शक्तिपथ, महाकाल महालोक, मानसरोवर होते हुए भगवान महाकाल मंदिर की रैलिंग तक की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने दर्शनार्थियों की सुलभ दर्शन व्यवस्था के दौरान दर्शनार्थियों के लिए जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। शक्तिपथ के साईड रोड़ तरफ कहीं कहीं अतिक्रमण है उसे हटाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। शक्तिपथ की साफ-सफाई, प्रकाश आदि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।       कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने महाकाल मंदिर के निर्गम की ओर बने नवीन शौचालय को प्रारंभ कराए जाए और आस-पास की गंदगी को साफ कराने के निर्देश दिए। तत्पश्चात कलेक्टर ने पैदल चलकर हरसिद्धी होते हुए रामघाट की व्यवस्था का मुआयना किया और संबंधित अधिकारियों को बेरिकेडिंग और महिलाओं के लिए स्नान करने के बाद कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम बनाए जाए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अलावा जिला पंचायत सीईओ श्रीमती जयति सिंह, एडीएम अनुकूल जैन, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, एसडीएम एलएन गर्ग, स्मार्ट सीईओ संदीप शिवा, विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी, सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल, मंदिर समिति सदस्य राजेन्द्र शर्मा तथा संबंधित विभाग के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।    

महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में हुई कम

उज्जैन उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर के विस्तार का कार्य तेजी से जारी है। यह परिसर पहले 25 हजार वर्गफीट में फैला हुआ था, लेकिन अब इसका क्षेत्रफल बढ़ाकर 78 हजार वर्गफीट कर दिया गया है। महाकाल महालोक के निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों पर बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च की जा रही है। पहले चरण में 351.55 करोड़ रुपए, लोकार्पण से पहले के कार्यों पर 44.32 करोड़ रुपए, और दूसरे चरण में 755.82 करोड़ रुपए का खर्च किया गया है। इस तरह कुल 1 हजार151 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार कम श्रद्धालु बाबा के दरबार में आए। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी     महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 2023 की तुलना में 2024 के आखिरी पांच महीनों (अगस्त से दिसंबर) में कुछ कम हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 अगस्त से 31 दिसंबर 2023 तक मंदिर में 3 करोड़ 91 लाख 94 हजार 796 श्रद्धालु पहुंचे थे। वहीं, 2024 में 1 अगस्त से 22 दिसंबर तक यह संख्या घटकर 3 करोड़ 09 लाख 49 हजार 193 पर आ गई।       हालांकि, मंदिर प्रशासन का कहना है कि दिसंबर के आखिरी 9 दिनों में करीब 25 लाख श्रद्धालु आने की संभावना है। मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए नवीनतम तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उनके दर्शन का अनुभव बेहतर हो।   2023 में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक क्यों रही?     अधिकमास का प्रभाव: वर्ष 2023 में श्रावण माह में अधिकमास होने के कारण सावन 59 दिनों का था। इस दौरान 10 शाही सवारियां निकाली गईं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई।       महालोक का आकर्षण: महाकाल महालोक के पहले चरण का कार्य पूरा होने के बाद श्रद्धालु न केवल ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आए, बल्कि महालोक के भव्य नजारों का आनंद लेने भी पहुंचे।       भस्म आरती में बदलाव: भस्म आरती को ऑनलाइन, ऑफलाइन और चलित स्वरूप में संचालित किया गया, जिससे ज्यादा श्रद्धालु आकर्षित हुए। इस व्यवस्था को पहले केवल 2016 के सिंहस्थ मेले में लागू किया गया था।   2024 में आधुनिक तकनीकों का उपयोग श्रद्धालुओं के अनुभव को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए 2024 में आरएफआईडी (रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) बैंड का उपयोग शुरू किया गया। यह व्यवस्था भस्म आरती में प्रवेश के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और बिना अनुमति वाले लोगों को परिसर में आने से रोकती है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि अब केवल उन्हीं भक्तों को प्रवेश मिल रहा है, जिन्होंने पहले से अनुमति प्राप्त की है।   भविष्य की योजनाएं और प्रशासन की तैयारी मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार नई योजनाओं पर काम कर रहा है। दर्शन के दौरान भीड़ प्रबंधन से लेकर हाई-टेक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, महालोक के दूसरे चरण का कार्य भी प्राथमिकता पर है।

नए साल पर महाकाल भस्म आरती की ऑनलाइन बंद, बदली दर्शन व्यवस्था

उज्जैन बाबा महाकाल के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। 2024 के आखिरी और नए साल 2025 के शुरुआती दिनों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर समिति ने बड़ा फैसला लिया है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन को सुगम बनाने के लिए समिति ने नई व्यवस्था लागू की है। समिति अध्यक्ष व कलेक्टर नीरजकुमार सिंह ने निर्धारित किया है कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को ऑनलाइन-ऑफलाइन भस्मआरती बुकिंग बंद रहेगी। दोनों दिन चलित भस्मआरती का विकल्प रखा है। सुबह 4.15 बजे से श्रद्धालु कार्तिकेय मंडपम् से आरती का लाभ ले सकेंगे। 45 मिनट में दर्शन होने का दावा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति का दावा है कि नई व्यवस्था के मुताबिक, 40 से 45 मिनट में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर पाएंगे। मंदिर प्रबंध समिति ने महाशिवरात्रि पर आए दर्शनार्थियों को देखते हुए दिसंबर के आखिरी दिनों और नए साल के पहले सप्ताह में 10 से 15 लाख दर्शनार्थी आने की उम्मीद जताई है। कालभैरव मंदिर में प्रवेश बंद इधर उज्जैन के श्री कालभैरव मंदिर में 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक गर्भगृह में प्रवेश पूर्ण रूप से बंद रहेगा। मंदिरों में ड्यूटीरत कर्मियों को बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अच्छा व्यवहार करने की सीख दी गई है। कलेक्टर ने 29 दिसंबर से 5 जनवरी तक श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिफ्टवार ड्यूटी लगाई जाने के निर्देश दिए हैं। कहां से होगी एंट्री, कैसे आएंगे बाहर सामान्य दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु चारधाम मंदिर पार्किंग से प्रवेश करेंगे। यहां से संग्रहालय के पास नंदी द्वार भवन, फेसेलिटी सेंटर 1 टनल, शक्ति पथ, त्रिवेणी, श्री महाकाल, मानसरोवर, नवीन टनल 1, और गणेश मंडपम् होते हुए श्री महाकालेश्वर के दर्शन करेंगे। दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर के पास हरसिद्धि मंदिर तिराहे पहुंचेंगे और अंत में चारधाम मंदिर पर वापस आकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगे। जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़े यदि दर्शनार्थियों की संख्या अधिक हो जाती है, तो फेसेलिटी सेंटर 1 से मंदिर परिसर के निर्गम रैंप, गणेश मंडपम् और नवीन टनल के दोनों ओर से दर्शन की व्यवस्था की जाएगी। भीड़ और अधिक होने पर श्रद्धालुओं को सीधे फेसेलिटी सेंटर 1 से कार्तिकेय मंडपम् में प्रवेश दिलाया जाएगा। दर्शन के बाद द्वार नंबर 10 या निर्माल्य द्वार से बाहर निकलने की व्यवस्था रहेगी। वीआईपी दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्था विशेष श्रेणी के दर्शनार्थी नीलकंठ द्वार से प्रवेश करेंगे। यहां से त्रिनेत्र (महाकाल लोक कंट्रोल रूम के सामने) होते हुए शंख द्वार, कोटितीर्थ कुंड और सभा मंडपम् के जरिए मंदिर में प्रवेश किया जाएगा। दर्शन के बाद, सभा मंडपम् से कोटितीर्थ कुंड, शंख द्वार, त्रिनेत्र और नीलकंठ द्वार के माध्यम से बाहर जाने का मार्ग तय होगा।

गत श्रावण मास में 1 करोड़ से अधिक संत-महंत-श्रध्दालुओं ने त्रिनेत्रधारी अवंतिकानाथ भगवान महाकाल के दर्शन किए

उज्जैन उज्जयिनी एक महान धार्मिक सांस्कृतिक, साहित्यिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक सिध्द नगरी है। पृथ्वी के नाभिस्थल पर स्थित होने से कुण्डलिनी शक्ति-जागरण के सुविज्ञ योगियों एवं आध्यात्मविदों के लिए यह सफलदायी महत्ती सिध्द भूमि है। यहां पर प्रत्येक 12वें वर्ष में सिंह राशि में गुरू के स्थित होने पर कुम्भ महापर्व का आयोजन सुदीर्घकाल से होता आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव प्रदेश के साथ-साथ उज्जैन के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं और निरंतर विकास के कार्य कर रहे हैं। उज्जयिनी नगरी का विश्व प्रसिध्द बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन की जीवन शैली का केन्द्र बिन्दू है। अवंतिकानाथ भगवान महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल महालोक बनने के बाद से देश-विदेश से श्रध्दालुओं का अधिकाधिक संख्या में आगमन हो रहा है और निरंतर श्रध्दालुओं की संख्या में वृध्दि हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव की मंशानुरूप भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ मास की सवारियों व राजसी सवारी ने सम्पूर्ण भारतवर्ष का ध्यान आकर्षित किया। भगवान महाकालेश्वर का राजसी वैभव व ठाट-बाट देखने देश-विदेश से 1 करोड़ से अधिक श्रध्दालु सिर्फ श्रावण के एक माह में पधारें। मुख्यमंत्री डॉ.यादव के निर्देशानुसार इस वर्ष सवारी में आकर्षण का केन्द्र देश की विभिन्न जनजातिय दलों के कलाकारों द्वारा लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां, पुलिस बैंड द्वारा मधुर धुन की सवारी मार्ग में प्रस्तुति, डमरूवादन का विश्व रिकॉर्ड व राजसी सवारी में भगवान महाकालेश्वर की पालकी रामघाट पहुंचने पर हेलीकाप्टर से पुष्पवर्षा रही। श्रावण मास 22 जुलाई 2024 से 19 अगस्त 2024 में 1 करोड़ से अधिक श्रध्दालुओं ने उज्जैन आकर भगवान महाकाल के देव दर्शन कर महाकाल महालोक को निहारा व सवारियों में सम्मिलित हुए। उज्जयिनी में दिन-प्रतिदिन श्रध्दालुओं की संख्या में वृध्दि होने से उज्जैन, मालवा क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन, आर्थिक, सामाजिक केन्द्र बनकर उभरा है। व्यापार के क्षेत्र में बढ़ोतरी होने से नागरिकों को बहुआयामी रोजगार प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप सम्राट विक्रमादित्य के समय का गौरव अवंतिका नगरी पुन: प्राप्त करें इसके लिए सम्पूर्ण भारतवर्ष के साधु-संत-महंत, विद्वानों, चिन्तकों, विचारकों, साहित्यकारों, अनुसंधानकर्ताओं का केन्द्र उज्जैन विभिन्न आयोजनों, सेमीनार, संगोष्ठी, महोत्सवों से सम्पूर्ण वर्ष रहा। क्षिप्रा नदी के पावन तट रामघाट पर चैत्र नवरात्रि गुडी पड़वा के अवसर पर “शिवज्योति अर्पणम” भव्य कार्यक्रम आयोजित कर दीप दान किया गया। विक्रमोत्सव व अखिल भारतीय कालिदास महोत्सव के अंतर्गत विविध सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक व विज्ञान के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में देश-विदेश की महान विभूतियां पधारी और उज्जैन निरंतर वर्ष भर साहित्यकारों, विचारकों, चिंतकों और वैज्ञानिकों का केन्द्र बना रहा। 

साल 2024 में अबतक मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे

उज्जैन मप्र के प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक और पौराणिक महत्व की दुनियाभर में पहचान है। इसीलिए पर्यटक बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश पहुंच रहे हैं। जनवरी से नवंबर तक रिकॉर्ड 6.57 करोड़ पर्यटक उज्जैन आए। मप्र के अन्य पर्यटन स्थलों में 10 करोड़ 66 लाख पर्यटक पहुंचे। सबसे खास बात यह है कि देसी पर्यटकों के टॉप-5 डेस्टिनेशन में उज्जैन, ओंकारेश्वर, इंदौर, भोपाल और मैहर शामिल हैं। इस वर्ष 10 लाख 85 हजार विदेशी पर्यटक भी मप्र पहुंचे। विदेशियों सैलानियों में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल खास आकर्षण का केंद्र रहे। टॉप-5 डेस्टिनेशन में खजुराहो, बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना और ओरछा हैं। ​देसी पर्यटकों की रुचि धार्मिक क्षेत्रों में अधिक है। ओंकारेश्वर में 21 लाख 29 हजार लोगों ने दर्शन किए। इसी तरह 97 लाख लोग मैहर पहुंचे। हालांकि, इस साल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले घटी है। साल 2023 में प्रदेश में 11.21 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। वहीं, साल 2022 में यह आंकड़ा 3.41 करोड़ का था। पिछले दो साल की ही बात करें तो प्रदेश में 21.87 करोड़ पर्यटक पहुंचे। यह दो साल में पर्यटकों की संख्या का रिकॉर्ड है। धार्मिक स्थलों की ओर रुझान ज्यादा, महाकाल लोक बनने के बाद बदली तस्वीर महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। अभी फेज-2 के काम चल रहे हैं। महाकाल मंदिर प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ ने बताया कि मंदिर में कम समय में दर्शन होते। भस्मआरती में आरएफ बैंड सिस्टम शुरू किया है। ​इससे अवैध रूप से भस्मआरती में शामिल होने वालों पर अंकुश लगा है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दो भक्त निवास बन चुके हैं। तीसरा अभी बन रहा है। महाकाल लोक बनने के बाद सेलीब्रिटी भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले पाँच सालों में दोगुनी हो गई है। कोरोना काल में पर्यटन में तेजी से गिरावट हुई थी, लेकिन वर्ष 2023 में एक बार फिर जबर्दस्त तेजी आई है और 5 करोड़ से भी ज्यादा पर्यटकों के पहुँचने का रिकार्ड उज्जैन ने बनाया है। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक उज्जैन में 5 करोड़ 28 लाख 41 हजार 802 पर्यटक पहुँचे। इसी के साथ मध्य प्रदेश के टॉप-10 पर्यटन केंद्रों में उज्जैन सबसे आगे रहा हैं। प्रदेश के टॉप 10 शहरों की सूची में पहले नंबर पर उज्जैन और दूसरे नंबर पर मैहर रहा, जबकि भोपाल सबसे आखिरी पायदान पर है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में बाबा महाकाल के दर्शन और महाकाल लोक के वैभव को देखने पहुँच रहे हैं। यहाँ महाराष्ट्र के शिरडी से तीन गुना, राजस्थान के खाटू श्याम से चार गुना ज्यादा श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। मंदिर समिति के मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है कि गर्मी की शुरुआत के एक माह में 22 अप्रैल से 22 मई में अभी तक करीब 45 लाख से अधिक लोग उज्जैन पहुँच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा श्रद्धालु दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए हैं।

पीएम मोदी की पत्नी जशोदा बेन महाकाल के दर पर, किये महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धर्मपत्नी जशोदाबेन इन दिनों निजी कार्यक्रम के तहत धार्मिक नगरी उज्जैन में हैं। शुक्रवार को वे विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन किए और भोग आरती में शामिल हुईं। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित अर्पित गुरु ने बताया कि जशोदाबेन ने बाबा महाकाल के चांदी द्वार पर माथा टेककर पूजन-अर्चन और जलाभिषेक किया। इसके बाद, उन्होंने नंदी हॉल में जाकर नंदीजी के कानों में अपनी मनोकामनाएं कही और ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए ध्यान लगाया। बाबा महाकाल की अनन्य भक्त जशोदाबेन बाबा महाकाल की अनन्य भक्त मानी जाती हैं और समय-समय पर उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन करती रहती हैं। इससे पहले भी वे कई बार बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने यहां आ चुकी हैं। इस बार उनकी धार्मिक यात्रा में परिवार के कुछ सदस्य भी साथ थे। खजराना गणेश मंदिर में भी दर्शन बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धर्मपत्नी जशोदाबेन बुधवार रात 11:30 बजे इंदौर पहुंचीं। उन्होंने सबसे पहले खजराना गणेश मंदिर में भगवान के दर्शन किए और सुख-शांति की कामना की। गुरुवार सुबह उन्होंने साउथ तुकोगंज स्थित नाथ मंदिर में माधवनाथ महाराज की पूजा-अर्चना की। जशोदाबेन की महाकाल के प्रति विशेष श्रद्धा जशोदाबेन बाबा महाकाल की अनन्य भक्त मानी जाती हैं और समय-समय पर उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन करती रहती हैं। यह उनकी इस मंदिर में की गई यात्रा कोई नई बात नहीं है क्योंकि वे पहले भी कई बार यहां आ चुकी हैं। इस बार उनकी धार्मिक यात्रा में कुछ पारिवारिक सदस्य भी उनके साथ थे।

भस्म आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से संत मंत्र बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे

उज्जैन  कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में अगहन कृष्ण पक्ष की सप्तमी पर भस्म आरती के दौरान एक ऐसे संत बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे, जिन्हें देखकर हर कोई अचंभित रह गया। संत की कद-काठी काफी कम थी, लेकिन इन्होंने अपने मस्तक पर त्रिपुंड और रुद्राक्ष की माला पहन रखी थी। भस्म आरती के बाद उन्होंने चांदी द्वार पर पहुंचकर भगवान का पूजन-अर्चन किया और फिर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर में अयोध्या की हनुमानगढ़ी से संत मंत्र बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। देखने में यह संत एकदम साधारण नजर आ रहे थे, लेकिन उनकी कद-काठी के कारण हर कोई इन्हें देखता रह गया। संत की लंबाई करीब 2 फीट थी, जिन्होंने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन किए। संत के साथ कुछ अन्य लोग भी थे जो पूजन-अर्चन के दौरान उनका सहयोग करते नजर आ रहे थे। संत करीब 2 घंटे नंदी हॉल में बैठकर साधना में लीन रहे और बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन किए।   महानिर्वाणी अखाड़े पहुंचे हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए संत मंत्र बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज से मिलने अखाड़े पर पहुंचे थे। महंत विनीत गिरी ने उनका स्वागत किया।  

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