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श्रावण मास में रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में भक्तों को सम्राट अशोक सेतु के रास्ते मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा। मंदिर प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे दर्शन प्लान में इस विषय पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है। महाकाल मंदिर के रूद्रसागर पर उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा 200 मीटर लंबा व 9 मीटर चौड़ा अत्याधुनिक पुल का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पुल का उद्घाटन कर इसे सम्राट अशोक सेतु नाम दिया है। हालांकि वर्तमान दर्शन व्यवस्था पूर्व निर्धारित मार्गों से सुचारू रूप से संचालित होने के कारण फिलहाल इस पुल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। श्रावण मास में भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। चलित भस्म आरती व्यवस्था श्रावण मास में चलित भस्म आरती व्यवस्था में सम्राट अशोक सेतु मुख्य भूमिका निभा सकता है। क्योंकि श्रावण मास में सामान्य दिनों में रात 3 बजे तथा प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, पश्चात भस्म आरती होगी। रात्रि के समय श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते इस पुल से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। यह रास्ता वर्तमान मार्ग से करीब डेढ़ किलो मीटर छोटा भी है। इससे होकर दर्शनार्थी शीघ्र मंदिर में दर्शन कर बाहर निकल सकते हैं। अभी इस मार्ग से मिल रहा मंदिर में प्रवेश वर्तमान में सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक के नंदी द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु महालोक में भ्रमण करते हुए श्री मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर से टनल के रास्ते मंदिर परिसर में होते हुए गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं। साढ़े 22 करोड़ की लागत से बना नया पुल सम्राट अशोक सेतु के निर्माण पर स्मार्ट सिटी कंपनी ने करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पुल का मध्य भाग काफी चौड़ा है। यहां खड़े होकर श्रद्धालु रूद्रसागर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। पुल पर आकर्षक लाइट लगाई गई है। रात्रि के समय इस पुल से गुजरना एक अलग ही आनंददायक अनुभव रहेगा। डायवर्ट रूट के रूप में होगा उपयोग     सम्राट अशोक सेतु महाकाल मंदिर में प्रवेश का नया मार्ग है। यह वर्तमान मार्ग से छोटा रास्ता है, भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायर्वट में इसका उपयोग होगा। श्रावण के दर्शन प्लान में इस पर विचार चल रहा है। – एसएन सोनी, उप प्रशासक महाकाल मंदिर  

राजा चंद्र प्रद्योत ने उज्जैन में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार को पुनर्जीवित किया जा रहा

उज्जैन  भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले भक्त अब भव्य द्वारों से होकर मंदिर पहुंचेंगे। प्रबंध समिति ने महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर विशाल द्वार बनवाने का निर्णय लिया है। मंदिर के आसपास भव्य द्वार बनाने की परंपरा 2600 साल पुरानी है। अलग-अलग कालखंड में राजा-महाराजा मंदिर के पहुंच मार्गों पर द्वार बनवाते रहे हैं। आज भी चौबीस खंभा व महाकाल द्वार इसके प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार मंदिर समिति इतिहास का पुनर्लेखन भी करा रही है। अशोक मौर्य ने कराया था द्वारों का जीर्णोद्धार धर्मधानी उज्जैन में दुर्ग व द्वार की परंपरा छठी शताब्दी ईसा पूर्व से चली आ रही है। पुराविद डॉ. रमण सोलंकी ने बताया कि राजा चंद्र प्रद्योत ने महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर भव्य द्वार बनवाए थे। जब अशोक मौर्य उज्जैन आए तो उन्होंने द्वारों का जीर्णोद्धार कराया। इसके बाद सम्राट विक्रमादित्य ने इनका संरक्षण किया। राजा भोज के शासन में भी यह परंपरा जीवित रही और उन्होंने चौबीस खंभा द्वार बनवाया। पुराने समय में इसी द्वार से भक्त महाकाल दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश किया करते थे। आज भी यह द्वार नगरीय सभ्यता के गौरवशाली इतिहास की गाथा सुना रहा है। भव्य और मनोरम महाकाल द्वार महाकाल मंदिर के उत्तर में महाकाल द्वार स्थित है। रामघाट पर शिप्रा स्नान के बाद श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते थे। इस द्वार का निर्माण मध्यकाल में हुआ है। द्वार के दोनों ओर भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है। सुरक्षा के लिए देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा राजा महाराजा नगर की सुरक्षा के लिए द्वारा का निर्माण कराते थे। यह द्वार आक्रांताओं के आक्रमण से नगर को सुरक्षित रखते थे। व्याधियों से रक्षा के लिए भी इन द्वारों का विशेष महत्व था। नगर प्रवेश द्वारों पर देवी-देवताओं की स्थापना की जाती थी। चौबीस खंभा, महाकाल द्वार, सती गेट सहित नगर में मौजूद द्वारों पर देवी-देवता विराजित हैं। अनादिकाल से समय-समय पर इनका पूजन किया जाता है। आज भी नगर की सुख-समृद्धि के लिए चौबीस खंबा स्थित माता महामाया व महालया की शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की जाती है। प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आठ मई को आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में महाकाल मंदिर पहुंच मार्गों पर द्वार बनाने का निर्णय लिया गया है। समिति उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से इन द्वारों का निर्माण कराएगी। योजना में यह खास     बड़ा गणेश, हरसिद्धि, शक्ति पथ पर होगा विशाल द्वारों का निर्माण।     नीलकंठ, नंदी, धनुष तथा शहनाई द्वार पर धातु के कलात्मक द्वार बनेंगे।  

महाकाल मंदिर में भस्मआरती में बैठने वालों की संख्या कम की जाएगी, चलित भस्मआरती के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे

उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्मआरती में बैठने वालों की संख्या कम की जाएगी। चलित भस्मआरती के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे। गुरुवार को मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर और समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने की। अभी भस्मआरती में 1700 श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर में दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन अब मंदिर में ही होगा। इसके लिए मशीन और ऑपरेटर लगाए जाएंगे। दान में मिली ई-कार्ट के लिए चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग स्थल बनाए जाएंगे। मंदिर की सभी सुविधाओं की जानकारी अब रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंदिर गेटों पर मिलेगी। महाराजवाड़ा और महाकाल परिसर को जोड़ने के लिए रिटेनिंग वॉल बनेगी। हर प्रवेश द्वार पर सुरक्षा गेट लगाए जाएंगे। उज्जैन में गीता भवन की स्थापना को समिति ने मंजूरी दी।  

साउथ एक्टर यश आज महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए

उज्जैन  मध्य प्रदेश में स्थित महाकाल की नगरी उज्जैन में सोमवार तड़के बाबा के भक्तों में उस समय उत्साह और भी बढ़ गया, जब उनके बीच साउथ की सुपरहिट फिल्म केजीएफ फेम रॉकी भाई उर्फ अभिनेता यश भी बाबा के दर्शन-पूजन करते नजर आए। जी हां, साउथ एक्टर यश आज उज्जैन स्थित महाकालेश्वर के मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा महाकाल के न सिर्फ दर्शन-पूजन किए, बल्कि भस्म आरती में भी शामिल हुए। वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने महाकाल के दरबार में आने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा- यहां आना अविश्वसनीय रहा।  भस्म आरती में शामिल होने के बाद यश ने चांदी द्वार से बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन किए, साथ ही माथा टेका। पूजन आकाश पुजारी ने संपन्न कराया। मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर अभिनेता शिव साधना करते नजर आए। चांदी द्वार से उन्होंने माथा टेककर बाबा का आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद पुजारी ने अभिनेता को प्रसाद स्वरूप लाल रंग का महाकाल नाम का छपा पटका भेंट किया। बोले- दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान सुपरस्टार यश ने कहा, महाकाल का दर्शन करके बहुत अच्छा लगा। यहां दर्शन करने का अनुभव अविश्वसनीय रहा। मैं यहां की व्यवस्थाएं देखकर बेहद खुश हूं। सभी श्रद्धालुओं को देखकर बहुत अच्छा लगा।

महाकाल मंदिर में नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफेक्शन आवश्यक

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित महाकालेश्वर मंदिर देश ही नहीं विदेशों में भी फेमस है. महाकाल मंदिर में हर दिन बड़ी हस्तियों से लेकर आम श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. वहीं महाकाल मंदिर के दर्शन और प्रसाद को लेकर भी नए-नए नियम आते रहते हैं. इसी तरह खबर है कि ठगी से बचने के लिए महाकालेश्वर मंदिर में अब कोई भी नई नियुक्ति बिना पुलिस वेरिफिकेशन के नहीं हो सकेगी. नियुक्ति से पहले चेक होगा पुलिस रिकॉर्ड एसपी प्रदीप शर्मा ने इस संबंध में महाकाल मंदिर के प्रशासक को एक आधिकारिक पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति से पहले उसका पुलिस रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से जांचा जाएगा. यह कदम हाल ही में सामने आए ठगी और अवैध वसूली के मामलों के बाद उठाया गया है. एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि “ठगी को देखते हुए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है.” मंदिर में ठगी के मामलों के बाद लिया फैसला कुछ समय पहले दर्शन और भस्म आरती के नाम पर श्रद्धालुओं से धोखाधड़ी के मामलों में 14 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी. इन आरोपियों में मंदिर के कर्मचारी भी शामिल थे. वहीं भस्म आरती बुकिंग और दर्शन के नाम पर भी फर्जीवाड़ा सामने आया था. जिसमें मंदिर की आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई. इन मामलों में शामिल कर्मचारियों को हाल ही में 90 दिनों बाद जमानत मिली है. मंदिर प्रशासन को सतर्क रहने की अपील इन घटनाओं को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मंदिर समिति को सतर्क रहने की सलाह दी है. अब हर नई नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है, क्योंकि लगातार देखने में आ रहा था कि महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ ठगी हो रही थी. इसी के साथ अब महाकालेश्वर मंदिर में नई भर्ती होने से पहले पुलिस सत्यापन करना जरूरी होगा. इसको लेकर उज्जैन एसपी ने पत्र लिखकर महाकाल प्रबंधन समिति को कहा है.

ज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के शीश पर कलशों की गलंतिका बांधी, ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगी परंपरा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल के शीश मिट्टी के कलशों से शीतल जलधारा प्रवाहित करने की शुरुआत हो गई है। सुबह 6 बजे पुजारियों ने पवित्र नदियों का आवाह्न कर भगवान के शीश 11 मिट्टी के कलशों की गलंतिका बांधी। प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भी भगवान मंगलनाथ को वैशाख की भीषण गर्मी में ठंडक प्रदान करने के लिए गलंतिका बांधने की शुरुआत हो गई है। पं.महेश पुजारी ने बताया महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पूरे दो माह तेज गर्मी रहने की मान्यता है। इन 60 दिनों में भगवान महाकाल को ठंडक प्रदान करने के लिए भगवान के शीश मिट्टी से बनी मटकियों से जलधारा प्रवाहित करने की परंपरा है। दो माह तक प्रतिदिन सुबह 6 से शाम 4 बजे तक गलंतिका बांधी जाती है। रविवार को इसकी शुरुआत हुई। पुजारियों ने गंगा, यमुना, कांवेरी, नर्मदा, शिप्रा आदि नदियों का आवाह्न कर उन्हीं के नाम से 11 कलश की गलंतिका बांधी। पंचामृत पूजन के बाद बांधी गलंतिका मंगल ग्रह की जन्म स्थली कहे जाने वाले प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में रविवार को गलंतिका बांधी गईं। सुबह गादीपति महंत जितेंद्र भारती द्वारा भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन कर भात अर्पण किया गया। इसके बाद भगवान के शीश गलंतिका बांधी गई। महंत भारती ने बताया भगवान मंगलनाथ अंगारकाय अर्थात अंगारे के समान कांति वाले देव हैं। इनकी प्रकृति उष्ण मानी जाती है। इसलिए जल, पंचामृत तथा भात अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं। गर्मी में भगवान को शीतल सुगंधित द्रव्य, शीतल पुष्प आदि अर्पण करने का भी महत्व है।

महाकाल के शिखर पर अब लहराएगा ब्रह्मध्वज, मप्र के प्रमुख मंदिरों-संस्थानों पर भी लगाएंगे ध्वज, नीम जल से होगा बाबा का अभिषेक

उज्जैन  हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में एक विशेष धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। इस साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मंदिर के मुख्य शिखर पर सूर्य चिन्ह वाला केसरिया ब्रह्म ध्वज फहराया जाएगा। यह ध्वज प्रदेशभर के प्रमुख मंदिरों और संस्थाओं में भी लगाया जाएगा। साथ ही मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना, भोग आरती और पंचांग पूजन की प्रक्रिया भी होगी।  मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा ब्रह्म ध्वज हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ध्वज बदलने की परंपरा का पालन किया जाता है। इस बार मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज को फहराया जाएगा, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से प्रदान किया गया है। पिछले दिनों भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व मंत्रिपरिषद ने ब्रह्म ध्वज व विक्रम संवत पुस्तिका का लोकार्पण किया है। इसके बाद से यह ध्वज श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। साथ ही सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ ने इस ध्वज को प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और शासकीय व अशासकीय संस्थानों में भी लगाने की पहल की है। श्री महाकालेश्वर मंदिर के साथ-साथ इस ध्वज को प्रदेशभर के प्रमुख स्थानों पर फहराया जाएगा। 65 वर्षों तक ध्वज को पूजा स्थान पर रखा था सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। इस दिन ब्रह्म ध्वज का फहराया जाना एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कड़ी को जोड़ता है। उन्होंने बताया कि इस ध्वज को पं. सूर्यनारायण व्यास परिवार से प्रेरणा लेकर तैयार किया गया, जिन्होंने 65 वर्षों तक इस ध्वज को सुरक्षित पूजा स्थान पर रखा था। गुड़ी पड़वा पर विशेष पूजा और अभिषेक 30 मार्च को गुड़ी पड़वा के दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। महाराष्ट्रीयन पंचांग के अनुसार, भगवान महाकाल का नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद, मंदिर में नई ध्वज का फहराया जाएगा। इस अवसर पर विशेष भोग आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्री खंड और पूरणपोली का भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही, मंदिर के नैवेद्य कक्ष में गुड़ी आरोहण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। गुड़ी पड़वा पर इस बार मंदिर में पंचांग पूजन भी किया जाएगा, जिससे यह दिन और भी विशेष हो जाएगा।

महाकाल की शरण में केएल राहुल, आईपीएल में सफलता के लिए आशीर्वाद लिया

उज्जैन  देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास और इंडियन क्रिकेटर केएल राहुल सोमवार को उज्जैन पहुंचे. कुमार विश्वास व केएल राहुल ने यहां महाकालेश्वर मंदिर पुहंच बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया. वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने नंदी हॉल में बैठक भगवान महाकाल का ध्यान लगाया. हमारी पीढ़ियों पर महाकाल की कृपा : कुमार विश्वास सोमवार को उज्जैन पहुंचे डॉ. कुमार विश्वास ने तकरीबन 15 मिनट तक महाकाल का ध्यान लगाया और पूजा अर्चना की. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद डॉ. विश्वास ने कहा, ” मैं उनसे क्या मांगू वो तो सबका मन जानते हैं. बाबा महाकाल की कृपा हमारे परिवार पर पीढ़ियों-शताब्दियों से बनी हुई है. जब भी अवसर मिलता है, मैं यहां आकर बाबा के चरणों में शीश नवाता हूं. बच्चे भी प्रवास पर हैं और जैसे ही वापस लौटेंगे वे भी बाबा की शरण में माथा टेकने आएंगे.” इंदौर में अपने-अपने राम गौरतलब है कि डॉ. कुमार विश्वास इन दिनों इंदौर प्रवास पर हैं. वे यहां इंदौर के गुजराती इनोवेटिव कॉलेज में ”अपने-अपने राम’ कार्यक्रम में राम कथा सुना रहे हैं. रविवार को कार्यक्रम के पहले दिन के समापन के बाद डॉ. विश्वास महाकाल के दर्शन करने के लिए रवाना हुए. परिवार के साथ पहुंचे थे केएल राहुल वहीं क्रिकेटर केएल राहुल ने भी परिवार के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. बता दें कि क्रिकेटर केएल राहुल कई बार बड़ी क्रिकेट सीरीज से पहले और बाद में महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं. चैंपियंस ट्रॉफी के बाद केएल राहुल फिर यहां पहुंचे.  बाबा महाकाल के दर्शन कर मांगी सफलता की कामना महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि केएल राहुल विशेष रूप से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आए थे। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने मस्तक पर तिलक लगाया और गले में आंकड़े की माला पहनी। पूजन के बाद वे नंदी हॉल पहुंचे और नंदी महाराज के कानों में अपनी मनोकामना कही। बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं केएल राहुल बताया जाता है कि केएल राहुल बाबा महाकाल के अनन्य भक्त हैं और समय मिलने पर उज्जैन आकर महाकाल के दर्शन करते हैं। इससे पहले भी वे अपनी पत्नी, अभिनेत्री आथिया शेट्टी के साथ बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। आईपीएल में नई टीम से खेलेंगे केएल राहुल जल्द ही शुरू होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए केएल राहुल पूरी तरह तैयार हैं। इस सीजन में वे दिल्ली कैपिटल्स टीम की ओर से खेलते नजर आएंगे। बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान उन्होंने अपनी टीम की शानदार परफॉर्मेंस के लिए प्रार्थना की।  

महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे

उज्जैन मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर में काम करने वाले सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारी हर महीने वेतन के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली और अब होली जैसे बड़े त्योहार भी उनके लिए मुश्किल भरे साबित हो रहे हैं। समय पर वेतन न मिलने से उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है, लेकिन मंदिर प्रशासन इस पर ध्यान देने के बजाय चुप्पी साधे बैठा है। हर महीने देरी से मिल रहा वेतन मंदिर में सफाई, सुरक्षा, तकनीकी और अन्य सेवाओं में लगे करीब 1500 कर्मचारी क्रिस्टल और केएसएस जैसी आउटसोर्स कंपनियों के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। अनुबंध के अनुसार, उन्हें हर महीने की 5 तारीख तक वेतन मिल जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि वेतन कभी 15 तारीख के बाद तो कभी 25 तारीख तक टल जाता है। त्योहारों पर अधूरी रह जाती हैं जरूरतें समय पर वेतन न मिलने की वजह से त्योहारों पर कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। न तो वे घर की जरूरतें पूरी कर पाते हैं और न ही परिवार के साथ त्योहार मना पाते हैं। इस साल भी रक्षाबंधन से लेकर होली तक उनकी आर्थिक परेशानियां कम नहीं हुईं, जिससे उनकी खुशियां फीकी पड़ गईं। प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी समस्या मंदिर प्रशासन इस पूरे मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। कर्मचारियों से ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की उम्मीद की जाती है, लेकिन उनके वेतन को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। वेतन में देरी की वजह से कई बार कर्मचारियों पर दर्शनार्थियों से अवैध वसूली के आरोप भी लगे हैं, जिन पर कार्रवाई भी हुई है। नियंत्रण की कमी, बढ़ता असंतोष मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन आउटसोर्स कंपनियों पर उनका कोई प्रभाव नहीं दिख रहा। कर्मचारी भी मजबूरी में शोषण सहने को मजबूर हैं, क्योंकि नौकरी छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते। अगर समय पर वेतन नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में असंतोष और बढ़ सकता है, जिससे मंदिर की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।

14 मार्च धुलेंडी पर भस्म आरती में हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे राजा

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 13 मार्च को राजसी वैभव के साथ होली उत्सव मनेगा। भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद प्रदोषकाल में होलिका का पूजन उपरांत दहन किया जाएगा। 14 मार्च को धुलेंडी पर तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से होली खेलेंगे। उत्सव को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। ज्योतिर्लिंग की पूजन परंपरा में होली उत्सव का विशेष महत्व है। देशभर से सैकड़ों भक्त राजा की रंगरंगीली होली देखने मंदिर पहुंचते हैं। इस बार यह उत्सव 13 मार्च को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिर परिसर में श्री ओंकरेश्वर मंदिर के सामने पुजारी, पुरोहित परिवार द्वारा होलिका का निर्माण किया जाएगा। शाम 7.30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होलिका का पूजन करेंगे। पश्चात होलिका का दहन होगा। मंदिर समिति उपलब्ध कराएगी हर्बल गुलाल परंपरा अनुसार 14 मार्च को होली उत्सव मनाया जाएगा। तड़के 4 बजे भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित करेंगे। मंदिर समिति पुजारियों को प्राकृतिक उत्पादों से तैयार हर्बल गुलाल उपलब्ध कराएगी। बताया जाता है, मंदिर समिति होली उत्सव के लिए एक थाल भरकर गुलाल उपलब्ध कराती है। वैसे भी ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को समिति मात्रा में पूजन सामग्री अर्पित करने का सुझाव दिया है। ज्योतिष का मत : 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत ज्योतिष व धर्मशास्त्र के जानकार 13 मार्च को होली मनाना शास्त्र सम्मत बता रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि के चंद्रमा की साक्षी में पूर्णिमा तिथि लगेगी, जो प्रदोष काल में पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी। धर्मशास्त्र में होलिका का पूजन प्रदोषकाल में बताया गया है। इसलिए शुभयोग व नक्षत्र में 13 मार्च को प्रदोषकाल में होलिका का पूजन करना श्रेष्ठ है। इस दिन पाताल वासनी भद्रा भी रहेगी, इसलिए होलिका का दहन अवश्य रात 11.30 बजे के बाद करना चाहिए। सामान्यत: होलिका का दहन अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है। ऐसे में 13 व 14 मार्च की तारीख होली तथा धुलेंडी मनाने के लिए शास्त्र सम्मत है। सिंहपुरी में पांच हजार कंडों से बनेगी हर्बल होली पुराने शहर सिंहपुरी में गाय के गोबर से बनाए गए पांच हजार कंडों से होली बनाई जाएगी। आयोजन समिति का दावा है कि यह विश्व की सबसे बड़ी हर्बल होली है। इसमें सिर्फ गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग होता है। लकड़ी का उपयोग नहीं किया जाता है। होली के मध्य में डांडा के रूप में ध्वज लगाया जाता है। इस बार यह आयोजन 13 मार्च को होगा। शाम को प्रदोष काल में चार वेद के ब्राह्मण चतुर्वेद पारायण से होलिका का पूजन करेंगे। रात्रि जागरण के उपरांत अगले दिन सुबह 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में होलिका का दहन किया जाएगा।

बाबा महाकाल की वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. पनगढ़िया ने की सपत्नीक पूजा-अर्चना

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने सपत्नीक बाबा महाकाल का पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उनके साथ वित्त आयोग के सचिव कुमार विवेक ने भी बाबा महाकाल की पूजा कर अभिषेक किया। महाकालेश्वर प्रबन्धन समिति की ओर से संभाग आयुक्त संजय गुप्ता और कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया। इसके बाद डॉ. पनगढ़िया ने सपत्नीक शक्ति पीठ माता हर सिद्धि मन्दिर मे माता रानी माँ हर सिद्धि की पूजा की और महाकाल लोक का अवलोकन किया।  

मंत्री प्रवेश वर्मा ने किए महाकाल के दर्शन, पूजा-पाठ के साथ-साथ संकल्प भी लिया

उज्जैन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव में हराने वाले दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा गुरुवार को भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे. उन्होंने परिवार के साथ भगवान महाकाल की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की.  दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा गुरुवार को रविवार के साथ उज्जैन पहुंचे. धार्मिक यात्रा पर उज्जैन पहुंचे प्रवेश वर्मा ने सीधे महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की. पंडित राजेश शर्मा और आकाश शर्मा ने पूजा अर्चना संपन्न कराई. उल्लेखनीय है कि प्रवेश शर्मा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के पुत्र हैं और वे इस बार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे लेकिन एन वक्त पर वे दौड़ में पीछे रह गए. पंडित राजेश शर्मा ने बताया कि दिल्ली के मंत्री प्रवेश शर्मा ने भगवान महाकाल की आराधना करने के साथ-साथ संकल्प भी लिया है. महाकालेश्वर मंदिर समिति के उप प्रशासक एस एल सोनी की ओर से बताया गया कि दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा का पूजा अर्चना के बाद मंदिर समिति की ओर से सम्मान भी किया गया. मंदिर समिति की परंपरा है कि जो भी वीआईपी मंदिर पहुंचते हैं उनका समिति की ओर से अभिनंदन किया जाता है. पहले भी भगवान महाकाल के दरबार में आ चुके हैं वर्मा दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा पहले भी भगवान महाकाल के दरबार में आ चुके हैं. वे धार्मिक यात्रा के दौरान मीडिया के सवालों से भी बचते रहे. हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि भगवान महाकाल के दर्शन की अभिलाषा थी जो कि आज पूरी हो गई है.

Chirag Paswan Ujjain के Mahakaleshwar ज्योतिर्लिंग मंदिर में ‘भस्म आरती’ में हुए शामिल

 उज्जैन उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पूरे परिवार और सहयोगियों के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. महाकाल के दरबार में दर्शन करने के बाद चिराग ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि श्री महाकाल ने उन्हें बहुत कुछ दिया है. उन्होंने कहा, ‘एक समय ऐसा था जब शायद मुझसे सब कुछ छिन गया था, लेकिन बाबा का आशीर्वाद रहा कि आज मैं यहां तक पहुंचा हूं’. परिवार संग पहुंचे महाकाल मंदिर : चिराग पासवान इस दौरान अपने पूरे परिवार के साथ मंदिर पहुंचे. उन्होंने बताया कि उनके साथ उनकी मां, बहन, जीजा, भांजे-भांजियां, करीबी सहयोगी और रिश्तेदार भी उपस्थित थे. महाकाल के समक्ष शीश झुकाते हुए उन्होंने भगवान शिव को धन्यवाद दिया और उनका आशीर्वाद लिया. महाकाल के आशीर्वाद से संकल्प : भस्म आरती के बाद चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे एक विशेष संकल्प लेकर जा रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर कहा,’प्रधानमंत्री जी ने देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने के लिए हम सभी प्रयासरत हैं. बाबा महाकाल के आशीर्वाद से हम इस संकल्प को साकार करेंगे’. महाकाल मंदिर में चिराग पासवान के भक्तिभाव में नजर आए. श्रद्धालुओं के साथ उन्होंने भी मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की. महाकाल के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए चिराग ने भगवान शिव का आभार जताया और देश की प्रगति के लिए उनका आशीर्वाद मांगा.

शहनाज अख्तर ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, दान किये 2 लाख 1 हजार रुपए

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में प्रसिद्ध गायिका शहनाज अख्तर ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर प्रबंध समिति को दो लाख एक हजार रुपये की राशि भेंट की। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से गायिका का सम्मान किया गया। दर्शन के उपरांत मीडिया से चर्चा करते हुए शहनाज ने कहा कि वें और उनका परिवार बीते पांच सालों से लगातार भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर आते हैं। इस दरबार ने उन्हें क्या कुछ नहीं दिया, आज वें जो भी हैं भगवान महाकाल की कृपा से हैं। शहनाज अख्तर का भगवान महाकाल पर गाया गया भजन ‘तकदीर मुझे ले चल महाकाल की बस्ती में’ काफी प्रसिद्ध हुआ है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने किए महाकाल दर्शन इसी तरह, मध्य प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने नंदी मंडपम से भगवान महाकाल को शीश नवाया। मंदिर समिति की ओर से उप प्रशासक डिप्टी कलेक्टर सिम्मी यादव ने शाल व भगवान महाकाल की लड्डू प्रसादी भेंट कर सम्मानित किया। बता दें नीरज मंडलोई पूर्व में उज्जैन कलेक्टर रह चुके हैं। रविवार को वे लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक लेने उज्जैन आए थे। महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह निकलेगा रंगपंचमी पर 19 मार्च को श्री महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा। मंदिर के पुजारी, पुरोहित परिवार द्वारा आयोजन को लेकर भव्य तैयारी की जा रही है। बताया जाता है इस बार भी कार्यक्रम में लोक संस्कृति के रंग नजर आएंगे। सिंहपुरी, कार्तिकचौक व भागसीपुरा से भी गेर चल समारोह निकलेंगे। गेर शौर्य का प्रतीक है, इसमें ब्राह्मण समाजजन ध्वज, निशान के साथ शौर्य का प्रदर्शन करने हुए निकलते हैं। बैंड, बाजे, अखाड़े तथा धार्मिक पृष्ठभूमि पर बनाई गई विद्युत रोशनी से जगमग झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के जनसैलाब में कमी, कड़ी सुरक्षा और खास इंतजाम, 4.52 लाख भक्त ही पहुंचे

उज्जैन महाशिवरात्रि पर महाकाल मंदिर में शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा कम समय में दर्शन हो, इसलिए चाक-चौबंद व्यवस्थाए की गईं। प्रातः चलित भस्मार्ती में लगभग 20 हजार दर्शनार्थियों ने दर्शन किए। बुधवार रात 10 बजे तक भक्तों का आंकड़ा 4 लाख से अधिक हो गया था। देर रात तक दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला जारी था। महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन हेतु पट गुरुवार 27 फरवरी की शयन आरती तक खुले रहेंगे।महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर इस बार श्रद्धालुओं की संख्या का आंकड़ा 4.52 लाख ही रहा, जो कि पिछले साल की तुलना में 2.83 लाख कम है। दो सालों की बात करें तो हर बार महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या घटती जा रही है। रंगोली से अर्धनारीश्वर स्वरूप बनाया श्री महाकालेश्वर मंदिर में इंदौर के केशव शर्मा और ग्रुप द्वारा मंदिर प्रांगण के शिखर दर्शन पर रंगोली से श्री महाकालेश्वर भगवान अर्धनारीश्वर स्वरूप बनाया गया। इसका मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अवलोकन किया व उनके कार्य की सराहना की। गर्म मीठे दूध का भोग लगाया बुधवार शाम को बाबा महाकाल को होलकर व सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन व सायं पंचामृत पूजन के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर को नित्य संध्या आरती के समय गर्म मीठे दूध का भोग लगाया गया। रात्रि में कोटितीर्थ कुंड के तट पर विराजित श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण, पुष्प मुकुट श्रृंगार (सेहरा) के उपरांत आरती की गई। भीड़ की कमी के लिए ये दो बड़े तर्क माने जा रहे 1. उत्तरप्रदेश में आयोजित कुंभ में महाशिवरात्रि पर्व पर अंतिम स्नान पर्व के चलते भीड़ वहां के लिए भी डायवर्ट हुई, जिसका असर यहां रहा। 2. सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर ही रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन रखा, यहां भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु जाना बताए, इसके चलते भी उज्जैन कम श्रद्धालु पहुंचे। (जैसा कि मंदिर के आईटी सेल प्रभारी गिरीश तिवारी ने तर्क दिया।) वाहन पार्किंग भी कई जगह खाली ट्रैफिक पुलिस को हर बार 10 से ज्यादा पार्किंग स्थान पर इंतजाम करना होते हैं और वह भी कम पड़ जाते हैं। इस बार अधिकांश पार्किंग खाली रही। सिर्फ हरिफाटक व कर्कराज पार्किंग भरी लेकिन वे भी पूरी तरह से फुल नहीं हो पा रही थी। कर्कराज पार्किंग की क्षमता 800 से 900 वाहनों की है लेकिन यहां 500 से 600 वाहन के लगभग ही भरते रहे। ट्रैफिक डीएसपी दिलीपसिंह परिहार ने बताया कि ये सही है कि कई पार्किंग खाली रही। ये दो कारण भी कम श्रद्धालु आने के 1. दर्शन के लिए नृसिंह घाट मार्ग से लंबे जिगजैग का सफर तय करना पड़ा है। करीब दो से ढाई किलोमीटर श्रद्धालु भीड़ में चलने से परेशान हो जाते हैं, खासकर महिलाएं व बच्चे। भीड़ कम हाेने के बावजूद भी बेवजह होल्डअप में लाेगाें काे लंबा चक्कर लगवाया। 2. वीआईपी से कई बार आपाधापी मची। आम लोगों को ज्यादा दिक्कत हुई। वे जद्दोजहद के बाद भगवान की झलक पाने पहुंचते हैं तो कर्मचारी धकेल देते हैं। वीआईपी के लिए गर्भगृह की देहरी से दर्शन महाशिवरात्रि पर गर्भगृह की देहरी से वीआईपी के दर्शन कराए जा रहे थे। आम जनता धक्के खा रही थी। वीआईपी के साथ 10-12 लोग गर्भगृह की देहरी के सामने खड़े हो रहे थे। इससे बैरिकेड्स से दर्शन करने वालों को दर्शन में परेशानी आ रही थी। इससे श्रद्धालुओं ने गुस्सा जाहिर किया। वीआईपी के अलावा पंडे-पुजारी भी खड़े हो रहे, इससे श्रद्धालुओं को महाकाल की एक झलक पाना मुश्किल रहा । शाम को एक वीआईपी करीब पांच मिनट तक गर्भगृह की देहरी पर भीड़ के साथ खड़े रहे। नंदी हॉल प्रभारी ने उन्हें हटाया। रात भर चलेगा महाभिषेक होगा पूजन अर्चन रात्रि 11 बजे से संपूर्ण रात्रि को श्री महाकालेश्वर का महाभिषेक व पूजन चलेगा। अभिषेक उपरांत भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए जाकर सप्तधान्य का मुखारविंद धारण कराया जाएगा। इसके बाद सप्तधान्य अर्पित किया जाएगा, जिसमें चावल, खडा मूंग, तिल, मसूर, गेहूं, जव, साल, खड़ा उडद सम्मिलित रहेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर का श्रृंगार कर पुष्प मुकुट (सेहरा) बांधा जाएगा। भगवान श्री महाकालेश्वर को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड व अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया जाएगा। भगवान पर न्योछावर नेग स्वरूप चांदी का सिक्का व बिल्वपत्र अर्पित की जाएगी। श्री महाकालेश्वर भगवान की सेहरा आरती की जाएगी व भगवान को विभिन्न मिष्ठान्न, फल, पञ्च मेवा आदि का भोग अर्पित किए जाएंगे। लगभग प्रात 6 बजे सेहरा आरती होगी। शिव धारण करेंगे सवा मन का पुष्प मुकुट श्री महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष में एक ही बार भगवान महाकाल को सवा मन का पुष्प मुकुट धारण कराया जाता है और साथ ही महाशिवरात्रि पर्व पर लगातार भगवान शिव के दर्शन दर्शनार्थियों के लिए 44 घंटे गर्भगृह के पट खुले रहते हैं। महाशिवरात्रि पर एक ऐसा अवसर आता है जिस पर श्री महाकालेश्वर भगवान के पट मंगल नहीं होते हैं। इस पर्व पर भगवान महाकाल सवा मन का फूलों से सजा मुकुट (सेहरा) धारण करते हैं। कल 12 बजे भस्मार्ती, 44 घंटे बाद बंद होंगे पट सेहरा दर्शन के उपरांत वर्ष में एक बार दिन में 12 बजे होने वाली भस्मार्ती होगी। भस्मार्ती के बाद भोग आरती होगी व शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा। 27 फरवरी को सायं पूजन, सायं आरती व शयन आरती के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर जी के पट मंगल होंगे।

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