After 10 years, the court declared the marriage void, and the husband got relief.
हरिप्रसाद गोहे
बैतूल/आमला । जिला न्यायालय आमला ने 13 अगस्त 2015 को हुए विवाह को शून्य घोषित कर दिया। न्यायालय ने पाया कि महिला का पहला विवाह 2011 में हुआ था और उसका वैधानिक तलाक नहीं हुआ था, इसलिए यह विवाह हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-5 के विपरीत था।
आमला निवासी युवक ने याचिका में बताया कि छिंदवाड़ा की युवती से 2015 में विवाह कराया गया था। बाद में पता चला कि महिला ने पुराना विवाह छिपाकर नोटरी शपथ पत्र के आधार पर मंदिर में शादी की बात कही थी। शादी के बाद दोनों में लगातार विवाद हुए और महिला ने दहेज प्रताड़ना व भरण-पोषण के मामले भी दर्ज कराए।
अदालत ने गवाहों, दस्तावेजों और शपथ पत्रों की जांच के बाद कहा कि सप्तपदी और हिंदू रीति-रिवाज के बिना हुआ विवाह वैध नहीं है। वकील राजेंद्र उपाध्याय के अनुसार नोटरी शपथ पत्र को अदालत ने विधिसंगत नहीं माना। न्यायालय ने धारा-11 के तहत विवाह को शून्य घोषित करते हुए याचिकाकर्ता को कानूनी राहत दी। यह फैसला पूर्व वैवाहिक स्थिति छिपाकर किए गए विवाहों के लिए मिसाल माना जा रहा है।








