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मायावती ने एक बार फिर सरकार से कहा- जनगणना का काम देशहित में ईमानदारी से पूरा होना चाहिए

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर जातीय जनगणना को लेकर सरकार से कहा कि जनगणना का काम देशहित में ईमानदारी से पूरा होना चाहिए। बसपा मुखिया मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि भाजपा ने केंद्र में अपने 11 वर्षों के कार्यकाल के बारे में जो अपार उपलब्धियां वर्णित की हैं, वे जमीनी हकीकत में लोगों की गरीबी, बेरोजगारी, दुख-दर्द आदि दूर करने अर्थात जन और देशहित में कितनी लाभदायक रही हैं, सही समय आने पर जनता खुद उनका जवाब दे देगी, जिसकी पूरी उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि देश में राष्ट्रीय और जातीय जनगणना का भी कार्य कांग्रेस के समय से लटका पड़ा था, जिस पर काफी आवाज उठाने के बाद अब इस मामले में प्रक्रिया शुरू हुई है। जनकल्याण से सीधे तौर पर जुड़ा जनगणना का यह कार्य देशहित में अब समय से ईमानदारी पूर्वक पूरा होना चाहिए। केंद्र इस पर ध्यान दे। मायावती ने कहा कि इन मामलों में पार्टी के लोगों को सही तथ्यों से अवगत कराने और उन्हें सजग करने के साथ ही पार्टी के संगठन से सम्बन्धित दिए गए कार्यों की समीक्षा उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की भी छोटी-छोटी बैठकों के जरिए विचार-विमर्श लगातार जारी है। पार्टी हित में इन पर पूरा ध्यान जरूरी है। यह अभियान मेरे द्वारा बैठकों से शुरू होकर अनवरत जारी है। ताजा बैठक पूर्वांचल में पार्टी संगठन की तैयारी और जनाधार को बढ़ाने के संबंध में हुई और सख्ती भी की गई। साथ ही, बिहार में होने वाले विधानसभा आम चुनाव से सम्बन्धित रणनीति पर भी तैयारी जारी है ताकि बेहतर रिजल्ट आ सके। ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अब जातीय जनगणना का रास्ता साफ हो गया है। अब पूरे देश में मार्च 2027 की रेफरेंस तिथि से जातीय जनगणना कराई जाएगी। हालांकि, इससे पांच महीने पहले अक्टूबर 2026 में पहाड़ी राज्यों में जातीय जनगणना का कार्यक्रम पूरा कर लिया जाएगा। यानी इन राज्यों में अक्टूबर 2026 में आबादी से जुड़े जो भी आंकड़े होंगे, वही रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने इस मुद्दे को लपकने की कोशिश जारी है। सपा ने भी अपने कार्यकर्ताओं को सजग रहने को कहा है।   

मायावती ने आज विशेष बैठक बुलायी और भाईचारा कमेटी का ऐलान भी कर दिया, चुनाव के लिए नया दांव चला

लखनऊ यूपी की राजनीति में लगातार पिछड़ने के बाद बहुजन समाज पार्टी ने आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नया दांव चल दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने 2007 की तरह 2027 के लिए भाईचारा कमेटियों का ऐलान करते हुए बड़े स्तर पर आयोजनों की तैयारी शुरू कर दी है। मायावती ने 2007 में भाईचारा कमेटियों के जरिए ही दलितों के साथ ब्राह्णण समाज को जोड़ते हुए बसपा की बहुमत वाली सरकार बनाई थी। इस बार मायावती की नजर पिछड़े यानी ओबीसी समाज पर है। मायावती ने मंगलवार को पिछड़े समाज की विशेष बैठक बुलायी और भाईचारा कमेटी का ऐलान भी कर दिया। बसपा ने 2007 में इसी तरह से भाईचारा कमिटियां बनाकर पहली बार बिना किसी सहयोग अपनी सरकार बनाई थी। अगले चुनाव में सपा से हारने के बाद भाईचारा कमेटियों का कार्यकाल खत्म हो गया और दोबारा नहीं बन सकीं। इसके बाद लगातार लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बसपा की ताकत घटती चली गई। लोकसभा में बसपा शून्य हो चुकी है और विधानसभा में केवल एक विधायक रह गया है।   बहुजन समाज के सभी अंग को संगठित करेंगे मंगलवार को आयोजित पिछड़ा समाज के भाईचारा कमेटी के ऐलान पर मायावती ने कहा कि दलितों की तरह ही अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के प्रति केन्द्र व राज्य सरकारों के जातिवादी द्वेषपूर्ण, हीन व संकीर्ण रवैये के कारण उनकी हर स्तर पर उपेक्षा, शोषण, तिरस्कार आदि का अपमान झेलते रहने से मुक्ति के लिए डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के संघर्ष के अनुरूप ’बहुजन समाज’ के सभी अंग को आपसी भाईचारा के आधार पर संगठित राजनीतिक शक्ति बनकर वोटों की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करेगी। पार्टी मुख्यालय में पिछड़ी जातियों की विशेष बैठक में मायावती ने कहा कि और अधिक ऊर्जा, तीव्रता से सार्थक बनाने हेतु नया ज़ोरदार अभियान शुरू करने की जरुरत है। इस अभियान के दौरान गांव-गांव में लोगों को खासकर कांग्रेस, भाजपा एवं सपा आदि इन पार्टियों के दलित व अन्य पिछड़े वर्ग विरोधी चाल, चरित्र व चेहरे के साथ-साथ इनके द्वारा लगातार किए जा रहे छल, छलावा तथा इन बहुजनों को उनके हक व न्याय से वंचित रखे जाने के कारण इन लोगों का जीवन लगातार खराब व बदहाल बने रहने के प्रति लोगों को जागरुक किया जाएगा। बसपा सरकार में पिछड़ों के लिए किए गए कार्य वैसे भी अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने से लेकर पार्टी में आगे बढ़ाने तथा उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार द्वारा इन वर्गों के हित व कल्याण के लिए तथा इनके महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों आदि को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देने के लिए जो अनेकों ठोस बुनियादी ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं वे बेमिसाल हैं, जिनमें से कुछ ख़ास का यहां उल्लेख भी किया गया है। पिछड़ों का हित बसपा में ही सुरक्षित बैठक में आमजन की इस धारणा को स्वीकार किया गया कि गांधीवादी कांग्रेस, आरएसएसवादी भाजपा एवं सपा व इनकी पीडीए में जिसे लोग परिवार डेवल्पमेन्ट अथारिटी भी कहते है इसमें बहुजन समाज में से ख़ासकर अन्य पिछड़े वर्गों के करोड़ों बहुजनों का हित कभी भी ना सुरक्षित था और ना ही आगे सुरक्षित रह सकता है। ​इसीलिए मायावती के नेतृत्व तले भाजपा, कांग्रेस व सपा आदि इन सभी जातिवादी पार्टियों को परास्त करके राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करना ही बहुजनों के सामने अपने ’अच्छे दिन’ लाने का एकमात्र बेहतर विकल्प है। इसके साथ ही अगले माह 14 अप्रैल को इन वर्गों के एकमात्र मसीहा डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की जयंती परम्परागत तौर पर पूरी मिशनरी भावना से मनाने का निर्देश दिया। किसे कहां की जिम्मेदारी बैठक के बाद बसपा सुप्रीमो ने पार्टी के तमाम नेताओं को राज्य के अलग-अलग मंडलों की जिम्मेदारी सौंपी। प्रयागराज मंडल के बीएसपी भाईचारा संगठन की जिम्मेदारी अवधेश कुमार गौतम और अनिल सिंह पटेल को दी गई है। महाकुंभ मेला भाईचारा संगठन की जिम्मेदारी प्रवीण गौतम और विकास पाल को दी गई है। फतेहपुर भाईचारा संगठन के संयोजक की जिम्मेदारी रिंकू गौतम और रामशरन पाल को दी गई है। इसके अलावा प्रतापगढ़ में शोभनाथ गौतम और बाके लाल पटेल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कौशांबी में मनीष गौतम और पप्पू निषाद, अयोध्या मंडल में रोहित गौतम और विजय वर्मा, अंबेडकरनगर में कृष्णकांत अंबेडकर उर्फ पंकज और मनोज कुमार वर्मा, सुल्तानपुर में दीपक भारती और नन्हेलाल निषाद, मिर्जापुर मंडल में संतोष कुमार और संतोष कुमार पाल के अलावा सोनभद्र में परमेश्वर और रमेश कुमार कुशवाहा को जिम्मेदारी दी गई है। भदोही में रामसनेही गौतम और वंशीधर मौर्य, अमेठी में विद्या प्रसाद गौतम और रमेश कुमार मौर्या के अलावा बाराबंकी में प्रदीप कुमार गौतम और माधव सिंह पटेल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिलाध्यक्षों की बात करें तो अयोध्या में कृष्ण कुमार पासी, अंबेडकरनगर में सुनील सावंत गौतम, सुल्तानपुर में सुरेश कुमार गौतम और अमेठी में दिलीप कुमार कोरी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। बाराबंकी में कृष्ण कुमार रावत, प्रयागराज में पंकज कुमार गौतम, महाकुंभ मेला में सतीश जाटव, फतेहपुर में डॉ. दीप गौतम, प्रतापगढ़ में सुशील कुमार गौतम और कौशांबी में राकेश कुमार गौतम को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

चीफ मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को BSP से निकाला बाहर, ससुर बने वजह?

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखया है। उन्होंने ट्वीट कर ये जानकारी दी है। मायावती ने कल ही आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाया था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा-“बीएसपी की आल-इण्डिया की बैठक में कल आकाश आनन्द को पार्टी हित से अधिक पार्टी से निष्कासित अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार बने रहने के कारण नेशनल कोआर्डिनेटर सहित सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, जिसका उसे पश्चताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी.” पूर्व सीएम ने आगे लिखा-“लेकिन इसके विपरीत आकाश ने जो अपनी लम्बी-चौड़ी प्रतिक्रिया दी है वह उसके पछतावे व राजनीतिक मैच्युरिटी का नहीं बल्कि उसके ससुर के ही प्रभाव वाला ज्यादातर स्वार्थी, अहंकारी व गैर-मिशनरी है, जिससे बचने की सलाह मैं पार्टी के ऐसे सभी लोगों को देने के साथ दण्डित भी करती रही हूँ.” उन्होंने लिखा-“अतः परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट के हित में तथा मान्यवर कांशीराम की अनुशासन की परम्परा को निभाते हुए आकाश आनन्द को, उनके ससुर की तरह, पार्टी व मूवमेन्ट के हित, में पार्टी से निष्कासित किया जाता है.” ससुर अशोक सिद्धार्थ को बताया था जिम्मेदार बता दें कि 2 मार्च (रविवार) को लखनऊ में हुई बसपा की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के बाद मायावती ने बयान जारी कर कहा था कि पार्टी हित में आकाश आनंद को इसकी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है. इस बयान में कहा गया था कि इस कार्रवाई के लिए पार्टी नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ जिम्मेदार हैं. क्या बोले थे आकाश आनंद वहीं बसपा से सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होने पर आकाश आनंद ने एक्स पर पोस्ट कर कहा-“मैं परमपूज्य आदरणीय बहन कु. मायावती का कैडर हूं, और उनके नेतृत्व में मैंने त्याग, निष्ठा और समर्पण के कभी ना भूलने वाले सबक सीखे हैं, ये सब मेरे लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य हैं. आदरणीय बहन जी का हर फैसला मेरे लिए पत्थर की लकीर के समान है, मैं उनके हर फैसले का सम्मान करता हूं उस फैसले के साथ खड़ा हूं. आदरणीय बहन कु. मायावती द्वारा मुझे पार्टी के सभी पदों से मुक्त करने का निर्णय मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भावनात्मक है, लेकिन साथ ही अब एक बड़ी चुनौती भी है, परीक्षा कठिन है और लड़ाई लंबी है. कल आकाश आनंद को दी गई थी चेतावनी मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, “बीएसपी की आल-इण्डिया की बैठक में कल आकाश आनन्द को पार्टी हित से अधिक पार्टी से निष्कासित अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार बने रहने के कारण नेशनल कोआर्डिनेटर सहित सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, जिसका उसे पश्चताप करके अपनी परिपक्वता दिखानी थी.” आकाश आनंद को मायावती ने बताया ‘अहंकारी’ मायावती ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि लेकिन आकाश आनंद की प्रतिक्रिया उम्मीदों के विपरीत रही. उन्होंने एक लम्बी प्रतिक्रिया दी, जिसे मायावती ने अहंकारी और गैर-मिशनरी करार दिया. उन्होंने इसे केवल स्वार्थी रवैया बताया, जो पार्टी की विचारधारा और मिशन से मेल नहीं खाता. अपने पोस्ट में मायावती ने उन सभी पार्टी सदस्यों को भी चेतावनी दी, जो इस तरह के व्यवहार करते हैं. मायावती ने “बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान और स्वाभिमान मूवमेन्ट के महत्व” पर जोर देते हुए ये फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह कदम बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की अनुशासन की परम्परा को निभाने के लिए आवश्यक था.

मायावती ने दी जानकारी, आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्त समेत दो बड़े नेताओं को बसपा से निकाला

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने भतीजे और उत्तराधिकारी आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्त समेत दो बड़े नेताओं को बसपा से निकाल दिया है। बहनजी के नाम से मशहूर मायावती के द्वारा बसपा के दो वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्सासित करने से अन्य नेताओं में हड़कंप मच गया है। बसपा प्रमख ने इन नेताओं पर कार्रवाई क्यों की, इसको लेकर मायावती ने खुद अपने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी दी है। सोशल मीडिया एक्स पर मायावती ने लिखा, बीएसपी की ओर से ख़ासकर दक्षिणी राज्यों आदि के प्रभारी रहे डा अशोक सिद्धार्थ, पूर्व सांसद व श्री नितिन सिंह, ज़िला मेरठ को, चेतावनी के बावजूद भी गुटबाजी आदि की पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी के हित में तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित किया जाता है। बसपा प्रमुख इस कार्रवाई के बाद पार्टी नेताओं में हड़कंप मच गया है। बतादें कि पिछले कुछ साल बसपा के लिए अच्छे नहीं रहे हैं। 12 में बसपा चुनाव हारने के बाद से ही सत्ता में वापसी के ख्वाब देख रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा को कुछ राहत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा को फिर झटक गया। इसके अलावा बसपा ने दूसरे राज्यों में दांव आजमाया लेकिन वहां भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी बसपा ने अपने उम्मीदवारों को उतारा था, लेकिन एक भी प्रत्याशी को जीत नहीं मिली। लगभग सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। बसपा कार्यकर्ताओं की उदासीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को चलते बसपा सुप्रीमो को ये फैसला लेना पड़ा।

बजट अगर चुनावी व राजनीतिक स्वार्थ पर आधारित होगा तो उससे देशहित कैसे संभव है: मायावती

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्रीय बजट पर रविवार को विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बजट अगर चुनावी व राजनीतिक स्वार्थ पर आधारित होगा तो उससे देशहित कैसे संभव है। मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट विशुद्ध रूप से देश की प्रगति अर्थात करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों व अन्य मेहनतकशों के साथ-साथ खासकर दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों के हित व कल्याण को साधने वाला बहुजनों का हितैषी होना जरूरी है, तभी विकसित भारत का सपना व लक्ष्य की प्राप्ति आज नहीं तो कल संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि वैसे तो 12 लाख रुपए तक के इनकम टैक्स में छूट देने को सरकार व रूलिंग पार्टी भाजपा राजनीतिक रूप से काफी भुनाने की कोशिश करने में लगी है, किन्तु वेतन पाने वाले मध्यम वर्ग के एक छोटे से समूह को ही इसका लाभ मिल पाएगा, तो फिर इससे सर्वजन हित कैसे संभव होगा। मायावती ने कहा कि वास्तव में देश की सम्पूर्ण कर व्यवस्था तथा जीएसटी कर व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है ताकि मासिक सैलरी पाने वाले मध्यम वर्ग के साथ ही रोजमर्रा इस्तेमाल की चीजों पर जीएसटी कर का भारी बोझ झेलने वाले सवा सौ करोड़ से अधिक देश की आबादी को इस महंगाई के दौर में थोड़ी राहत जरूर मिल सके। बसपा मुखिया ने कहा कि भाजपा तथा उसकी केंद्र सरकार की गलत नियत एवं नीतियों के कारण देश में छाई जबरदस्त महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, असुरक्षा जन व देशहित के ऐसे गंभीर वास्तविक मुद्दे हैं, जिसके प्रति सच्ची देशभक्ति, सोच व ईमानदार कार्यशैली बहुत जरूरी है। तभी सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय के लक्ष्य की प्राप्ति होगी। मायावती ने कहा कि बजट जिस भी मद में निर्धारित किया जा रहा है, उसका सही से उपयोग न होने से, उसका जमीनी लाभ लोगों को नहीं मिल पाना कांग्रेस के समय से ही बहुत बड़ी समस्या है। इतना ही नहीं, बल्कि बजट का सही आकलन, सही निर्धारण तथा बिना डाइवर्जन के सही से जमीनी उपयोग सुनिश्चित होना भी अति आवश्यक है। वर्ना विकास व जीडीपी दर आदि के वादे और दावे सब वैसे ही हवा-हवाई ही बने रहेंगे, जैसा कि कांग्रेस के समय से अब तक होता चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति व विकास पर सभी का हक होगा, तभी देश गैर-बराबरी व विषमताओं से मुक्त, गौरव करने योग्य खुश व खुशहाल हो पाएगा। केवल सरकारी वादों व दावों से लोगों का पेट नहीं भरेगा और न ही खाली पेट लोग बहुत दिनों तक सरकारी भजन करेंगे। मायावती ने कहा कि बीएसपी की यूपी में चार बार रही सरकार “सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय” के आधार पर सर्व समाज की गरीब, बेरोजगारी, रोटी-रोजी के अभाव में मजबूरी का पलायन रोकने तथा पिछड़ापन आदि दूर करने के मामले में ऐसी मिसाल है, जो लोगों के दिल-दिमाग में लगातार जीवित है। इसलिए सरकार, केंद्र सरकार को राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ से ऊपर उठकर पूरी तरह से जन व देशहित में बजट का आवंटन तथा उससे भ्रष्टाचार से मुक्त जमीनी हकीकत में उतारना भी बहुत जरूरी है।

अब मायावती ने होम मिनिस्टर अमित शाह को माफी मांगने और अपने शब्दों को वापस लेने की नसीहत दी

नई दिल्ली बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को लेकर अमित शाह के भाषण के एक हिस्से पर मचे बवाल के बीच मायावती ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने होम मिनिस्टर अमित शाह को माफी मांगने और अपने शब्दों को वापस लेने की नसीहत दी है। मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में कहा कि यदि अमित शाह ने माफी नहीं मांगी तो फिर दलित समाज भूल नहीं सकेगा। यही नहीं उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमित शाह के बयान से पूरे देश के दलितों में गुस्सा है। वह उन्हें भगवान की मानते हैं। ऐसे में अमित शाह के बयान का बड़ा असर हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि माफी न मांगने पर भाजपा का हाल भी कांग्रेस जैसा हो सकता है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, ‘अमित शाह के बयान से बाबासाहेब आंबेडकर के अनुयायियों में जबरदस्त गुस्सा व्याप्त है। अमित शाह को अपने कहे शब्दों को वापस ले लेना चाहिए और पश्चाताप भी करना चाहिए। ऐसा नहीं किया तो फिर आंबेडकर के अनुयायी कभी इसे भूला नहीं पाएंगे और माफ नहीं कर सकेंगे। यह ऐसा ही होगा, जैसे कांग्रेस के तमाम पापों को आज भी बाबासाहेब आंबेडकर के अनुयायी भुला नहीं सकेंगे। कांग्रेस कितने ही रंग और ढंग बदल ले, लेकिन लोग उस पर भरोसा नहीं कर सके हैं। मायावती ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने बाबासाहेब के देहांत के बाद उनके नाम को और संविधान निर्माण में रहे उनके योगदान को मिटाने की भी पूरी-पूरी कोशिश की है। यह पार्टी अपने मकसद में कामयाब हो जाती, लेकिन मान्यवर कांशीराम के आगे आने से ऐसा नहीं हो सका। यही नहीं इस मिशन को मंजिल तक पहुंचाने के लिए मुझे भी अपनी जिंदगी समर्पित करनी पड़ी। लेकिन आज अलग-अलग पार्टियां तमाम हथकंडे अपनाकर उनकी विरासत को खत्म करना चाहती हैं।’ उन्होंने कहा कि बसपा की सरकार 4 बार यूपी में रही और लखनऊ एवं नोएडा में हमने उनके नाम पर कई भव्य स्मारक बनाए। उनके नाम पर हमने किए जिले भी बनाए, लेकिन समाजवादी पार्टी ने नामों को बदल दिया। मायावती ने कहा कि दलित समाज के तमाम संतों, गुरुओं को बसपा ने हमेशा सम्मान दिया है। अब कांग्रेस और भाजपा आदि की नींद उड़ी हुई है। मायावती ने कहा कि भाजपा जैसे दल तो अब मजबूर होकर कुछ कदम उठा रहे हैं। अब कांग्रेस भी दलित वर्ग को लुभाने के लिए किस्म-किस्म के हथकंडे अपना रही है। अब कांग्रेस भी यही कोशिश कर रही है कि अमित शाह के बयान के आधार पर वोट बटोर लिए जाएं।

मायावती ने सरकार से गरीबी से राहत की योजनाएं चलाने की अपील की

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विधानसभा सत्र में सरकार से गरीबी से राहत की योजनाएं चलाने की अपील की है। साथ ही कहा कि अगर ऐसा होता है तो ये प्रयागराज में हो रहे महाकुंभ का बड़ा उपहार होगा। बसपा मुखिया मायावती ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स के माध्यम से लिखा कि यूपी में भी गरीबी, बेरोजगारी व महंगाई आदि से त्रस्त लोगों के हितों में यहां चल रहे विधानसभा सत्र में सरकार को कुछ ऐसी योजनाओं को भी शुरू करना चाहिए जिससे इनको थोड़ी राहत मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा किए जाने पर फिर सरकार का यहां प्रयागराज के महाकुंभ का इनके लिए बहुत बड़ा उपहार होगा। इससे फिर इनको कुछ हद तक राहत जरूर मिलेगी। इनकी ओर से पार्टी की यह खास अपील। ज्ञात हो कि प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है। इस बार महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हो रही है। वहीं, इसका समापन 26 फरवरी को होगा। प्रयागराज में शुरू होने जा रहा महाकुंभ का विशेष महत्व है, क्योंकि प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन होता है। यह संगम विश्वभर में प्रसिद्ध है। हर 12 वर्ष पर विशेष रूप से चार स्थानों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस आयोजन में पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।  

संसद में दोनों दल संभल हिंसा की आड़ में मुस्लिम वोट बैंक को साधने में लगे हैं: मायावती

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख व पूर्व मुख्य मुख्यमंत्री मायावती ने संभल हिंसा को लेकर कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संसद में दोनों दल संभल हिंसा की आड़ में मुस्लिम वोट बैंक को साधने में लगे हैं, जबकि वंचितों पर हो रहे अत्याचार की आवाज कोई नहीं उठा रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में वंचित समाज पर अत्याचार किया जा रहा है। मायावती ने इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि देश के बंटवारे से पहले बंगाल के जेस्सोर खुलना क्षेत्र से डॉ. भीमराव आंबेडकर को संविधान सभा में भेजा गया था, लेकिन कांग्रेस ने षड्यंत्र के तहत पहले इस क्षेत्र को पाकिस्तान को दे दिया, जो बाद में बांग्लादेश का हिस्सा बन गया। संभल मुद्दे पर हंगामा, बांग्लादेश मामले में चुप्पी क्यों- मायावती बहुजन समाज पार्टी मुख्यालय में शनिवार को मायावती ने पत्रकारों से वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में वंचितों पर हो रहे अत्याचार को लेकर कांग्रेस व समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के अन्य दलों ने चुप्पी साध रखी है, जबकि संभल के मुद्दे पर लगातार संसद में हंगामा किया जा रहा है।   मायावती ने केंद्र से बांग्लादेश के वंचितों की मदद की मांग की उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ-साथ वंचितों की भी सुरक्षा का इंतजाम करें। बांग्लादेश में हो रही हिंसा में पिस रहे वंचितों को भारत लाने का प्रबंध किया जाना चाहिए। बसपा प्रमुख ने कहा कि अगर केंद्र सरकार बांग्लादेश के वंचितों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाती है तो इससे सिद्ध हो जाएगा कि वह भी कांग्रेस जैसी ही है। कांग्रेस और सपा वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं- मायावती उन्होंने कहा कि संसद में कांग्रेस व सपा दलितों व देशहित के मुद्दों को उठाने की बजाय संभल-संभल चिल्ला रहे हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि जिस प्रकार कांग्रेस व सपा संभल में तुर्क व गैर तुर्क मुसलमानों को बांटकर वोट बैंक की राजनीति कर रही है, उससे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने वंचित समुदाय के सांसदों पर सियासी हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाले ऐसे सांसदों ने भी अपनी पार्टियों के आकाओं को खुश करने के लिए वंचितों के मुद्दों को लेकर चुप्पी साध रखी है।

कोई उपचुनाव नहीं लड़ेगी बसपा, मायावती की करारी हार के बाद बड़ा एलान

लखनऊ. यूपी में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अब कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग फर्जी मतदान रोकने के लिए कोई सख्त निर्णय नहीं उठाता है तब तक बसपा किसी भी उपचुनाव में भाग नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि पहले बैलेट से फर्जी मतदान होते थे अब यह ईवीएम से भी होने लगा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर्फ उपचुनाव ही नहीं लड़ेंगे। बाकी चुनाव में भाग लेंगे। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती के इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब यूपी में उपचुनाव होने भी नहीं हैं। हालांकि, अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर कोर्ट का फैसला होने के बाद उपचुनाव हो सकते हैं।

मायावती ने कहा- ‘यूपी सरकार द्वारा 50 से कम छात्रों वाले बदहाल 27,764 विद्यालयों को बंद करके विलय करने का फैसला उचित नहीं

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने यूपी में 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के दूसरे स्‍कूलों में विलय की तैयारियों पर सवाल उठाया है। सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म ‘एक्‍स’ पर एक के बाद एक तीन ट्वीट के जरिए उन्‍होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मायावती ने लिखा- ‘यूपी सरकार द्वारा 50 से कम छात्रों वाले बदहाल 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जरूरी सुधार करके उन्हें बेहतर बनाने के उपाय करने के बजाय उनको बंद करके उनका दूसरे स्कूलों में विलय करने का फैसला उचित नहीं। ऐसे में गरीब बच्चे आखिर कहाँ और कैसे पढ़ेंगे?’ उन्होंने आगे लिखा, ‘यूपी व देश के अधिकतर राज्यों में खासकर प्राइमरी व सेकण्डरी शिक्षा का बहुत ही बुरा हाल है जिस कारण गरीब परिवार के करोड़ों बच्चे अच्छी शिक्षा तो दूर सही शिक्षा से भी लगातार वंचित हैं। ओडिसा सरकार द्वारा कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करने का भी फैसला अनुचित।’ अपने तीसरे ट्वीट में बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा-‘सरकारों की इसी प्रकार की गरीब व जनविरोधी नीतियों का परिणाम है कि लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं, जैसाकि सर्वे से स्पष्ट है, किन्तु सरकार द्वारा शिक्षा पर समुचित धन व ध्यान देकर इनमें जरूरी सुधार करने के बजाय इनको बंद करना ठीक नहीं।’

हरियाणा में भाजपा सरकार के फैसले पर भड़कीं मायावती, कहा- आरक्षण समाप्त करने की साजिश

नई दिल्ली हरियाणा की भाजपा सरकार ने पहली ही कैबिनेट मीटिंग में अनुसूचित जाति आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू करने का फैसला लिया है। सीएम नायब सिंह सैनी का कहना है कि इससे उन दलित जातियों को लाभ मिल सकेगा, जो अब तक आरक्षण से वंचित रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को एससी आरक्षण के वर्गीकरण का अधिकार दिया था। उसी फैसले के आधार पर भाजपा सरकार ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया है। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती इस फैसले पर भड़क गई हैं। उन्होंने कहा कि यह आरक्षण को ही खत्म करने की साजिश का हिस्सा है। इसके अलावा समाज में बंटवारे का प्रयास है। मायावती ने भाजपा सरकार के फैसले के तुरंत बाद एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘हरियाणा की नई भाजपा सरकार द्वारा एससी समाज के आरक्षण में वर्गीकरण को लागू करने अर्थात आरक्षण कोटे के भीतर कोटा की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला दलितों को फिर से बांटने व उन्हें आपस में ही लड़ाते रहने का षड्यंत्र है। यह दलित विरोधी ही नहीं बल्कि घोर आरक्षण विरोधी निर्णय है।’ यही नहीं मायावती ने भाजपा हाईकमान को भी इस फैसले को लेकर आड़े हाथों लिया। मायावती ने कहा कि हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोकने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आगे नहीं आने से भी यह साबित है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आरक्षण को पहले निष्प्रभावी बनाने और अन्ततः इसे समाप्त करने के षडयंत्र में लगी है। जो घोर अनुचित व बीएसपी इसकी घोर विरोधी है। मायवाती ने कहा कि वास्तव में जातिवादी पार्टियों द्वारा एससी-एसटी व ओबीसी समाज में ’फूट डालो-राज करो’ व इनके आरक्षण विरोधी षडयंत्र आदि के विरुद्ध संघर्ष का ही नाम बीएसपी है। इन वर्गों को संगठित व एकजुट करके उन्हें शासक वर्ग बनाने का हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी मायावती ने ऐतराज जताया था। उन्होंने तब केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह अदालत में सही से पैरवी करे ताकि फैसला बदला जा सके। वहीं दलितों के ही एक वर्ग ने इस फैसले को सही करार दिया है। यहां तक कि अगस्त में ही जब एक वर्ग आरक्षण पर इस फैसले के विरोध में उतरा था तो वहीं वाल्मीकि समुदाय ने कई जगहों पर इसके समर्थन में प्रदर्शन किए थे।

हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम के मायावती बोली अब कभी किसी भी दल के साथ बसपा गठबंधन नहीं करेगी

नई दिल्ली  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को गठबंधन को लेकर बड़ा निर्णय लिया। बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अब भविष्य किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं होगा। जबकि, एनडीए और इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी। मायावती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। बसपा चीफ मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यूपी सहित दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने, किंतु उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने के कारण अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा और उससे होने वाले मूवमेंट की हानि को बचाना जरूरी है। इसी संदर्भ में हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर आज हरियाणा और पंजाब की समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया है, जबकि भाजपा/एनडीए और कांग्रेस/इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी और उसके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान मूवमेंट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा जातिवादी कोशिशें लगातार जारी हैं, जिस क्रम में अपना उद्धार स्वयं करने योग्य व शासक वर्ग बनने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रखनी जरूरी।” आखिर में मायावती ने लिखा, ”बीएसपी विभिन्न पार्टियों/संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि ’बहुजन समाज’ के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा और सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने और उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है, जिसे अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना अति-हानिकारक।” बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। जहां भाजपा 48, कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। हालांकि, इनेलो ने बसपा के साथ मिलकर दो सीटों पर जीत हासिल की। बसपा को कुल 1.82 फीसदी वोट हासिल हुए हैं।    

बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

मायावती ने अफसोस जताते हुए कहा- जाट समुदाय ने चुनाव में बसपा को वोट नहीं दिया, अब जाटों की मानसिकता बदलने की जरूरत है

नई दिल्ली बसपा नेता मायावती ने बुधवार को इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

मायावती ने INLD के साथ किया गठबंधन, विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़ेगी टेंशन?

चंडीगढ़ हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव होने वाला है. इससे पहले सियासी गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं. अब, इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के प्रधान सचिव ने कहा कि हम विधानसभा चुनाव बीएसपी के साथ मिलकर लड़ेंगे. बीएसपी नेता आकाश आनंद ने कहा कि 6 जुलाई को अभय चौटाला और मायावती  के बीच विस्तार से सीटों पर चर्चा हुई. 90 में से 37 सीटों पर बीएसपी चुनाव लड़ेगी और बाकी सीटें INLD के खाते में जाएंगी. आकाश आनंद ने कहा कि अगर हम फतह हासिल करते हैं, तो अभय चौटाला को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. इसके अलावा अभय चौटाला ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने चीजों को बेहतर तरीके से संभाला, इन लोगों (अपराधियों) को सरकार का संरक्षण प्राप्त है. अभय चौटाला ने क्या कहा? वहीं आकाश आनंद के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अभय चौटाला ने कहा कि ये गठबंधन स्वार्थ के लिए नहीं है. बीजेपी ने दस साल में और कांग्रेस ने अपने राज में राज्य को लूटा है. हम गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस गठबंधन राज्य में तैयार करेंगे और सरकार बनाएंगे. किसका कितना आधार? बीएसपी और इनेलो के गठबंधन से सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की विधानसभा चुनाव में टेंशन बढ़ सकती है. राज्य में इसी साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इनेलो मायावती के सहारे दलित वोट को साधने की कोशिश में है. हरियाणा में दलितों की आबादी करीब 20 फीसदी है. लोकसभा चुनाव में हरियाणा में बीएसपी को 1.28 फीसदी वोट मिले थे. वहीं आईएनएलडी को 1.74 से संतोष करना पड़ा. 2019 के विधानसभा चुनाव में इनेलो को मात्र एक सीट मिली थी और 2.44 फीसदी वोट से संतोष करना पड़ा. वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) को 4.21 फीसदी वोट मिले थे. पिछले चुनाव में इनेलो ने अकाली दल के साथ गठबंधन किया था. अभय चौटाला ने की मायावती से मुलाकात अभय चौटाला ने 6 जुलाई को मायावती से मुलाकात की थी. इस दौरान आकाश आनंद भी मौजूद थे. तब चौटाला ने एक्स पर लिखा, ”बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी से उनके निवास स्थान पर मुलाक़ात की और देश-प्रदेश के मुख्य मुद्दों पर विशेष चर्चा की.” फ्री बिजली का वादा अभय चौटाला ने मुफ्त बिजली और स्वच्छ पेयजल का वादा किया. उन्होंने कहा कि हमारे पास नए मीटर होंगे, जहां बिजली का बिल 500 रुपये से कम होगा. हम फ्री बिजली देने के लिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाएंगे. ‘गरीबों को न्याय, कमजोरों को सशक्त…’ चंडीगढ़ के बाहरी इलाके नयागांव में बीएसपी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए INLD नेता अभय चौटाला ने कहा कि यह गठबंधन किसी स्वार्थ पर आधारित नहीं है, बल्कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि बीएसपी और INLD की सोच यह है कि गरीबों को न्याय कैसे मिले और कमजोर वर्ग कैसे सशक्त हो. चौटाला ने आगे कहा, “हरियाणा में हमने आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का फैसला किया है. आज आम लोगों की भावना बीजेपी को सत्ता से बाहर करने और कांग्रेस पार्टी को सत्ता से दूर रखने की है, जिसने 10 साल तक राज्य को लूटा है.” बता दें कि फरवरी 2019 में बीएसपी ने INLD के साथ अपने लगभग 9 महीने पुराने गठबंधन को खत्म कर दिया था, जो उस वक्त हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी थी. उस समय यह घटनाक्रम चौटाला परिवार में झगड़े के बीच हुआ था. ‘जनविरोधियों को हराने का संकल्प…’ बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “बहुजन समाज पार्टी और इण्डियन नेशनल लोकदल मिलकर हरियाणा में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में वहां की जनविरोधी पार्टियों को हराकर अपने नये गठबन्धन की सरकार बनाने के संकल्प के साथ लड़ेंगे, जिसकी घोषणा मेरे पूरे आशीर्वाद के साथ आज चण्डीगढ़ में संयुक्त प्रेसवार्ता में की गयी. उन्होंने आगे कहा कि इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला आदि तथा बीएसपी के आनन्द कुमार, नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनन्द और पार्टी के राज्य प्रभारी रणधीर बेनीवाल की आज हुई प्रेसवार्ता से पहले दोनों पार्टियों के बीच नई दिल्ली में मेरे निवास पर गठबंधन को लेकर सफल वार्ता हुई. मायावती ने आगे कहा कि हरियाणा में सर्वसमाज-हितैषी जनकल्याणकारी सरकार बनाने के संकल्प के कारण इस गठबंधन में एक-दूसरे को पूरा आदर-सम्मान देकर सीटों आदि के बंटवारे में पूरी एकता व सहमति बन गई है. मुझे पूरी उम्मीद है कि यह आपसी एकजुटता जन आशीर्वाद से विरोधियों को हरा कर नई सरकार बनाएगी.    

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