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कोई उपचुनाव नहीं लड़ेगी बसपा, मायावती की करारी हार के बाद बड़ा एलान

लखनऊ. यूपी में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अब कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग फर्जी मतदान रोकने के लिए कोई सख्त निर्णय नहीं उठाता है तब तक बसपा किसी भी उपचुनाव में भाग नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि पहले बैलेट से फर्जी मतदान होते थे अब यह ईवीएम से भी होने लगा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर्फ उपचुनाव ही नहीं लड़ेंगे। बाकी चुनाव में भाग लेंगे। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती के इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब यूपी में उपचुनाव होने भी नहीं हैं। हालांकि, अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर कोर्ट का फैसला होने के बाद उपचुनाव हो सकते हैं।

मायावती ने कहा- ‘यूपी सरकार द्वारा 50 से कम छात्रों वाले बदहाल 27,764 विद्यालयों को बंद करके विलय करने का फैसला उचित नहीं

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने यूपी में 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के दूसरे स्‍कूलों में विलय की तैयारियों पर सवाल उठाया है। सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म ‘एक्‍स’ पर एक के बाद एक तीन ट्वीट के जरिए उन्‍होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मायावती ने लिखा- ‘यूपी सरकार द्वारा 50 से कम छात्रों वाले बदहाल 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जरूरी सुधार करके उन्हें बेहतर बनाने के उपाय करने के बजाय उनको बंद करके उनका दूसरे स्कूलों में विलय करने का फैसला उचित नहीं। ऐसे में गरीब बच्चे आखिर कहाँ और कैसे पढ़ेंगे?’ उन्होंने आगे लिखा, ‘यूपी व देश के अधिकतर राज्यों में खासकर प्राइमरी व सेकण्डरी शिक्षा का बहुत ही बुरा हाल है जिस कारण गरीब परिवार के करोड़ों बच्चे अच्छी शिक्षा तो दूर सही शिक्षा से भी लगातार वंचित हैं। ओडिसा सरकार द्वारा कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करने का भी फैसला अनुचित।’ अपने तीसरे ट्वीट में बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा-‘सरकारों की इसी प्रकार की गरीब व जनविरोधी नीतियों का परिणाम है कि लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं, जैसाकि सर्वे से स्पष्ट है, किन्तु सरकार द्वारा शिक्षा पर समुचित धन व ध्यान देकर इनमें जरूरी सुधार करने के बजाय इनको बंद करना ठीक नहीं।’

हरियाणा में भाजपा सरकार के फैसले पर भड़कीं मायावती, कहा- आरक्षण समाप्त करने की साजिश

नई दिल्ली हरियाणा की भाजपा सरकार ने पहली ही कैबिनेट मीटिंग में अनुसूचित जाति आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू करने का फैसला लिया है। सीएम नायब सिंह सैनी का कहना है कि इससे उन दलित जातियों को लाभ मिल सकेगा, जो अब तक आरक्षण से वंचित रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को एससी आरक्षण के वर्गीकरण का अधिकार दिया था। उसी फैसले के आधार पर भाजपा सरकार ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया है। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती इस फैसले पर भड़क गई हैं। उन्होंने कहा कि यह आरक्षण को ही खत्म करने की साजिश का हिस्सा है। इसके अलावा समाज में बंटवारे का प्रयास है। मायावती ने भाजपा सरकार के फैसले के तुरंत बाद एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘हरियाणा की नई भाजपा सरकार द्वारा एससी समाज के आरक्षण में वर्गीकरण को लागू करने अर्थात आरक्षण कोटे के भीतर कोटा की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला दलितों को फिर से बांटने व उन्हें आपस में ही लड़ाते रहने का षड्यंत्र है। यह दलित विरोधी ही नहीं बल्कि घोर आरक्षण विरोधी निर्णय है।’ यही नहीं मायावती ने भाजपा हाईकमान को भी इस फैसले को लेकर आड़े हाथों लिया। मायावती ने कहा कि हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोकने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आगे नहीं आने से भी यह साबित है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आरक्षण को पहले निष्प्रभावी बनाने और अन्ततः इसे समाप्त करने के षडयंत्र में लगी है। जो घोर अनुचित व बीएसपी इसकी घोर विरोधी है। मायवाती ने कहा कि वास्तव में जातिवादी पार्टियों द्वारा एससी-एसटी व ओबीसी समाज में ’फूट डालो-राज करो’ व इनके आरक्षण विरोधी षडयंत्र आदि के विरुद्ध संघर्ष का ही नाम बीएसपी है। इन वर्गों को संगठित व एकजुट करके उन्हें शासक वर्ग बनाने का हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी मायावती ने ऐतराज जताया था। उन्होंने तब केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह अदालत में सही से पैरवी करे ताकि फैसला बदला जा सके। वहीं दलितों के ही एक वर्ग ने इस फैसले को सही करार दिया है। यहां तक कि अगस्त में ही जब एक वर्ग आरक्षण पर इस फैसले के विरोध में उतरा था तो वहीं वाल्मीकि समुदाय ने कई जगहों पर इसके समर्थन में प्रदर्शन किए थे।

हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम के मायावती बोली अब कभी किसी भी दल के साथ बसपा गठबंधन नहीं करेगी

नई दिल्ली  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को गठबंधन को लेकर बड़ा निर्णय लिया। बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अब भविष्य किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं होगा। जबकि, एनडीए और इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी। मायावती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। बसपा चीफ मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यूपी सहित दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने, किंतु उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने के कारण अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा और उससे होने वाले मूवमेंट की हानि को बचाना जरूरी है। इसी संदर्भ में हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर आज हरियाणा और पंजाब की समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया है, जबकि भाजपा/एनडीए और कांग्रेस/इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी और उसके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान मूवमेंट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा जातिवादी कोशिशें लगातार जारी हैं, जिस क्रम में अपना उद्धार स्वयं करने योग्य व शासक वर्ग बनने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रखनी जरूरी।” आखिर में मायावती ने लिखा, ”बीएसपी विभिन्न पार्टियों/संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि ’बहुजन समाज’ के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा और सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने और उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है, जिसे अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना अति-हानिकारक।” बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। जहां भाजपा 48, कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। हालांकि, इनेलो ने बसपा के साथ मिलकर दो सीटों पर जीत हासिल की। बसपा को कुल 1.82 फीसदी वोट हासिल हुए हैं।    

बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

मायावती ने अफसोस जताते हुए कहा- जाट समुदाय ने चुनाव में बसपा को वोट नहीं दिया, अब जाटों की मानसिकता बदलने की जरूरत है

नई दिल्ली बसपा नेता मायावती ने बुधवार को इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

मायावती ने INLD के साथ किया गठबंधन, विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़ेगी टेंशन?

चंडीगढ़ हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव होने वाला है. इससे पहले सियासी गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं. अब, इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के प्रधान सचिव ने कहा कि हम विधानसभा चुनाव बीएसपी के साथ मिलकर लड़ेंगे. बीएसपी नेता आकाश आनंद ने कहा कि 6 जुलाई को अभय चौटाला और मायावती  के बीच विस्तार से सीटों पर चर्चा हुई. 90 में से 37 सीटों पर बीएसपी चुनाव लड़ेगी और बाकी सीटें INLD के खाते में जाएंगी. आकाश आनंद ने कहा कि अगर हम फतह हासिल करते हैं, तो अभय चौटाला को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. इसके अलावा अभय चौटाला ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने चीजों को बेहतर तरीके से संभाला, इन लोगों (अपराधियों) को सरकार का संरक्षण प्राप्त है. अभय चौटाला ने क्या कहा? वहीं आकाश आनंद के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद अभय चौटाला ने कहा कि ये गठबंधन स्वार्थ के लिए नहीं है. बीजेपी ने दस साल में और कांग्रेस ने अपने राज में राज्य को लूटा है. हम गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस गठबंधन राज्य में तैयार करेंगे और सरकार बनाएंगे. किसका कितना आधार? बीएसपी और इनेलो के गठबंधन से सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की विधानसभा चुनाव में टेंशन बढ़ सकती है. राज्य में इसी साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इनेलो मायावती के सहारे दलित वोट को साधने की कोशिश में है. हरियाणा में दलितों की आबादी करीब 20 फीसदी है. लोकसभा चुनाव में हरियाणा में बीएसपी को 1.28 फीसदी वोट मिले थे. वहीं आईएनएलडी को 1.74 से संतोष करना पड़ा. 2019 के विधानसभा चुनाव में इनेलो को मात्र एक सीट मिली थी और 2.44 फीसदी वोट से संतोष करना पड़ा. वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) को 4.21 फीसदी वोट मिले थे. पिछले चुनाव में इनेलो ने अकाली दल के साथ गठबंधन किया था. अभय चौटाला ने की मायावती से मुलाकात अभय चौटाला ने 6 जुलाई को मायावती से मुलाकात की थी. इस दौरान आकाश आनंद भी मौजूद थे. तब चौटाला ने एक्स पर लिखा, ”बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी से उनके निवास स्थान पर मुलाक़ात की और देश-प्रदेश के मुख्य मुद्दों पर विशेष चर्चा की.” फ्री बिजली का वादा अभय चौटाला ने मुफ्त बिजली और स्वच्छ पेयजल का वादा किया. उन्होंने कहा कि हमारे पास नए मीटर होंगे, जहां बिजली का बिल 500 रुपये से कम होगा. हम फ्री बिजली देने के लिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाएंगे. ‘गरीबों को न्याय, कमजोरों को सशक्त…’ चंडीगढ़ के बाहरी इलाके नयागांव में बीएसपी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए INLD नेता अभय चौटाला ने कहा कि यह गठबंधन किसी स्वार्थ पर आधारित नहीं है, बल्कि लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि बीएसपी और INLD की सोच यह है कि गरीबों को न्याय कैसे मिले और कमजोर वर्ग कैसे सशक्त हो. चौटाला ने आगे कहा, “हरियाणा में हमने आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का फैसला किया है. आज आम लोगों की भावना बीजेपी को सत्ता से बाहर करने और कांग्रेस पार्टी को सत्ता से दूर रखने की है, जिसने 10 साल तक राज्य को लूटा है.” बता दें कि फरवरी 2019 में बीएसपी ने INLD के साथ अपने लगभग 9 महीने पुराने गठबंधन को खत्म कर दिया था, जो उस वक्त हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी थी. उस समय यह घटनाक्रम चौटाला परिवार में झगड़े के बीच हुआ था. ‘जनविरोधियों को हराने का संकल्प…’ बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “बहुजन समाज पार्टी और इण्डियन नेशनल लोकदल मिलकर हरियाणा में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में वहां की जनविरोधी पार्टियों को हराकर अपने नये गठबन्धन की सरकार बनाने के संकल्प के साथ लड़ेंगे, जिसकी घोषणा मेरे पूरे आशीर्वाद के साथ आज चण्डीगढ़ में संयुक्त प्रेसवार्ता में की गयी. उन्होंने आगे कहा कि इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला आदि तथा बीएसपी के आनन्द कुमार, नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनन्द और पार्टी के राज्य प्रभारी रणधीर बेनीवाल की आज हुई प्रेसवार्ता से पहले दोनों पार्टियों के बीच नई दिल्ली में मेरे निवास पर गठबंधन को लेकर सफल वार्ता हुई. मायावती ने आगे कहा कि हरियाणा में सर्वसमाज-हितैषी जनकल्याणकारी सरकार बनाने के संकल्प के कारण इस गठबंधन में एक-दूसरे को पूरा आदर-सम्मान देकर सीटों आदि के बंटवारे में पूरी एकता व सहमति बन गई है. मुझे पूरी उम्मीद है कि यह आपसी एकजुटता जन आशीर्वाद से विरोधियों को हरा कर नई सरकार बनाएगी.    

स्टालिन सरकार पर बरसीं मायावती, ‘तमिलनाडु के बसपा अध्यक्ष आर्मस्ट्रांग की हत्या के असली अपराधी अब भी पकड़ से दूर’

चेन्नई. तमिलनाडु में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश अध्यक्ष के. आर्मस्ट्रांग की हत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि अब तक गिरफ्तार किए गए लोग असली अपराधी नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से पीड़िता को न्याय सुनिश्चित करने के लिए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आग्रह किया। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने तमिलनाडु बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष के. आर्मस्ट्रांग को श्रद्धांजलि दी। शहर के पेरंबूर में एक निजी स्कूल में 52 वर्षीय नेता के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने यह भी कहा कि देर शाम हमलावरों के एक समूह द्वारा जिस तरह से आर्मस्ट्रांग की हत्या की गई, उससे पता चलता है कि राज्य में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। सीएम स्टालिन को आर्मस्ट्रांग के लिए न्याय सुनिश्चित करना चाहिए और जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘असली दोषियों को पकड़ा नहीं गया है। जांच सीबीआई को सौंपी जाए। हमें उम्मीद नहीं है कि राज्य सरकार न्याय सुनिश्चित करेगी। इसलिए इस मामले को तुरंत सीबीआई को सौंपा जाए।’

मायावती कल चेन्नई जाएंगी, तमिलनाडु BSP अध्यक्ष को देंगी श्रद्धांजलि

चेन्नई तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में शुक्रवार शाम को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रदेश अध्यक्ष आर्मस्ट्रांग की सरेआम चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई. तीन बाइक पर सवार हत्यारों ने आर्मस्ट्रांग पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए और वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए जिन्हें बाद में अरेस्ट कर लिया गया. इस हत्या के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐलान किया है कि वह रविवार को चेन्नई जाएंगी और मृतक के परिजनों से मुलाकात करेंगी. इस हत्या पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सवाल खड़े करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग उठाई तो मुख्यमंत्री स्टालिन ने हमलावरों की गिरफ्तारी की जानकारी सोशल पर मीडिया दी। स्टालिन ने हत्या पर अफसोस जताते हुए हमलावरों के पकड़े जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आर्मस्ट्रॉन्ग की हत्या स्तब्धकारी एवं अत्यंत दुःखद है। पुलिस ने रातों रात हत्या में शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।” उन्होंने एक लंबे चौड़े पोस्ट में आगे लिखा, “इसके साथ ही मैं आर्मस्ट्रॉन्ग की शोक संतृप्त पार्टी, परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं… मैंने पुलिस अधिकारियों को मामले की शीघ्र तहकीकात कर दोषियों को कानून के अनुसार न्याय के कटघरे में लाने का आदेश दे दिया है।” इससे पहले बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने भी एक्स पर दुख जताते हुए नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, “बसपा तमिलनाडु राज्य इकाई के अध्यक्ष के. आर्मस्ट्रॉन्ग की आज शाम (5 जुलाई) उनके चेन्नई आवास के बाहर की गई नृशंस हत्या अति-दुःखद व अति-निन्दनीय है। पेशे से वकील आर्मस्ट्रॉन्ग राज्य में दलितों की सशक्त आवाज़ के रूप में जाने जाते थे। सरकार दोषियों के खिलाफ अविलम्ब सख्त कार्रवाई करे।   बसपा सुप्रीमो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘तमिलनाडु में बीएसपी के कर्मठ एवं समर्पित नेता व स्टेट पार्टी यूनिट के अध्यक्ष श्री के. आर्मस्ट्रांग की कल शाम उनके चेन्नई आवास के बाहर की गयी जघन्य हत्या से पूरे समाज में दुःख व आक्रोश की लहर. सरकार को अविलम्ब सख्त/जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को आगे रोका जा सके. इस अति-दुःखद व चिन्ताजनक घटना की गंभीरता आदि को देखते हुए कल सुबह मेरा चेन्नई जाकर श्री आर्मस्ट्रांग को श्रद्धा-सुमन अर्पित करने व उनके पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देने का कार्यक्रम. सभी शान्ति व्यवस्था बनाए रखें, यह अपील.’ 8 आरोपी अरेस्ट इस हाई प्रोफाइल हत्या के बाद एक्टिव हुई चेन्नई पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों का कनेक्शन आर्कोट सुरेश गैंग के साथ जुड़ा बताया जा रहा है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक BSP प्रदेश अध्यक्ष आर्मस्ट्रांग की हत्या के मामले में शुरुआती जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं. यह हत्याकांड पुरानी रंजिश और बदले की भावना से जुड़ा लग रहा है. दरअसल, पिछले साल चेन्नई में आर्कोट सुरेश नामक हिस्ट्रीशीटर की हत्या हुई थी. आर्मस्ट्रांग की हत्या के सिलसिले में अब तक गिरफ्तार किए गए 8 आरोपी या तो आर्कोट सुरेश के रिश्तेदार हैं या फिर गिरोह के सदस्य हैं. इनमें से एक पोन्नई बाला जो अभी हिरासत में है, आर्कोट सुरेश का भाई है. हालांकि अभी तक यह साबित नही हो सका है कि यह आपसी रंजिश का मामला है या फिर इसमें कुछ और एंगल है. आरोपियों से पूछताछ के बाद हत्या के पीछे के मकसद का पता लगाया जा सकेगा. चेन्नई उत्तर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक असरा गर्ग ने एजेंसी को बताया कि जांच के लिए दस टीमें गठित की गई हैं. मर्डर में धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया है. दोस्त से बात कर रहे थे आर्मस्ट्रांग बता दें कि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में 5 जून को शाम 7 बजे बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रदेश अध्यक्ष की बेरहमी से हत्या कर दी गई. 47 साल के आर्मस्ट्रांग पेरम्बूर इलाके में अपने नवनिर्मित घर के पास दोस्त से बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान शाम करीब 7 बजे हथियारों से लैस 3 बाइकों पर सवार बदमाशों ने आर्मस्ट्रांग पर हमला कर दिया. वारदात की जगह पर पड़ा मिला चाकू घटनास्थल पर एक बड़ा चाकू पड़ा मिला है, जहां आर्मस्ट्रांग की हत्या की गई. आर्मस्ट्रांग को घायल अवस्था में एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. जांच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने आजतक को बताया कि 6 लोगों में से 4 ने एक फूड डिलीवरी कंपनी की टी-शर्ट पहन रखी थी. स्टालिन के खिलाफ लड़ चुके हैं चुनाव पेशे के एक वकील और अंबेडकरवादी थे जो दलितों के हित के लिए काम करते थे. 52 वर्षीय आर्मस्ट्रांग कई सालों तक बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे. वह उत्तरी चेन्नई इलाके में काफी लोकप्रिय थे. खास कर उन युवाओं के बीच जिसकी उन्होंने पढ़ाई पूरी करने और नौकरियों के कई मामलों में मदद की थी. वह अपनी राजनीतिक सक्रियता और स्थानीय मध्यस्थता में भूमिका के लिए भी जाने जाते थे. आर्मस्ट्रांग ने 2006 के स्थानीय निकाय चुनावों में शहर के एक वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. वे तब चर्चा में आए जब उन्होंने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को आमंत्रित किया और चेन्नई के अमिनजिकरई में पुल्ला रेड्डी एवेन्यू में एक विशाल रैली और जनसभा आयोजित की. 2011 में आर्मस्ट्रांग ने विधानसभा चुनाव लड़ा था और कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में डीएमके के एमके स्टालिन से हार गए. उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटी है.

हाथरस भगदड़ पर मायावती बोली- गरीबों को ‘भोले बाबा’ जैसे बाबाओं के अंधविश्वास के बहकावे में न आना चाहिए

हाथरस उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को लोगों को सलाह दी कि वे अपने दुखों को दूर करने के लिए हाथरस के भोले बाबा जैसे अनेकों और बाबाओं के अंधविश्वास व पाखंडवाद के बहकावे में न आएं। साथ ही उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पूर्व सीएम मायावती ने अपने एक्स अकाउंट तीन पोस्ट किए। मायावती ने कहा, “देश में गरीबों, दलितों और पीड़ितों आदि को अपनी गरीबी और अन्य सभी दुःखों को दूर करने के लिए हाथरस के भोले बाबा जैसे अनेकों और बाबाओं के अंधविश्वास व पाखंडवाद के बहकावे में आकर अपने दुःख व पीड़ा को और नहीं बढ़ाना चाहिए, यही सलाह है।” मायावती ने कहा, “बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताए हुए रास्तों पर चलकर इन्हें सत्ता खुद अपने हाथों में लेकर अपनी तकदीर खुद बदलनी होगी। इन्हें अपनी पार्टी बीएसपी से ही जुड़ना होगा, तभी ये लोग हाथरस जैसे काण्डों से बच सकते हैं, जिसमें 121 लोगों की हुई मृत्यु अति-चिन्ताजनक है।” मायावती ने आगे कहा कि हाथरस कांड में, बाबा भोले सहित अन्य जो भी दोषी हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसे अन्य और बाबाओं के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी जरूरी। इस मामले में सरकार को अपने राजनीतिक स्वार्थ में ढीला नहीं पड़ना चाहिए, ताकि आगे लोगों को अपनी जान ना गंवानी पड़े। बता दें कि हाथरस में भगदड़ दो जुलाई को स्वयंभू संत और उपदेशक नारायण साकार हरि उर्फ ‘भोले बाबा’ के सत्संग के दौरान हुई थी। इसमें 121 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। एफआईआर के अनुसार, कार्यक्रम में 2.50 लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे, जबकि प्रशासन ने केवल 80 हजार लोगों को ही अनुमति दी थी। एफआईआर के अनुसार, सत्संग आयोजकों ने सबूत छिपाकर तथा बाबा के अनुयायियों की चप्पलें और अन्य सामान पास के खेतों में फेंक कर कार्यक्रम में मौजूद लोगों की वास्तविक संख्या को छिपाने की कोशिश की थी। ऐसा बताया जा रहा है कि भगदड़ तब मची जब कई श्रद्धालु उपदेशक के पैरों की मिट्टी लेने के लिए दौड़े थे। उनका मानना था कि इससे उनकी सभी बीमारियां ठीक हो सकती हैं।  

बहुजन समाज पार्टी ने चौथी सूची में 31 प्रत्याशी किये घोषित।

संतोष सिंह तोमरभोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने 31 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करते हुए अपनी चौथी सूची जारी कर दी है। पार्टी ने अपनी पहली सूची 11 अगस्त को जारी की थी। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की सहमति से जारी चौथी सूची में खुरई से मनोज रजक और देवतालाब से अमरनाथ पटेल को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जबलपुर पश्चिम से दिनेश कुशवाह को टिकट दिया है।बहुजन समाज पार्टी की तरफ से जारी सूची के अनुसार महाराजपुर से महेश कुशवाह, कोलारस से नवल सिंह धाकड़, बण्डा से रन्जोर सिंह बुंदेला, खुरई से मनोज रजक, देवतालाब से अमरनाथ पटेल, देवसर से शिवशंकर साकेत, बहोरीबंद से गोविंद पटेल, जबलपुर पश्चिम से दिनेश कुशवाह, होशंगाबाद से प्रदीप मांझी, पंधाना से मनोज सोलंकी, राजगढ़ से इंदर सिंह वर्मा, सारंगपुर से देवकरण वर्मा, बीना से रामेंद्र अहिरवार, सांची से सूरज पाल सिंह, नरयावली से लटूरी प्रसाद सूर्यवंशी और खरगोन से अजय भालसे को प्रत्याशी बनाया है।वहीं, गंधवानी से धूमसिंह मंडलोई,, अलीराजपुर से अंतरसिंह पटेल, सोनकच्छ से मुकेश सोंनगरा, बांगली से मुकेश रावत, देवास से हाजी जाकिर हुसैन उर्फ जाकिर मामू, राऊ से कु देवकी मण्डलोई, पेटलावद से रामचंद्र सोलंकी, जावद से लीलाराम मालवीय, जावरा से दशरथ सिंह अंजना, बड़नगर से निर्भय सिंह चद्रवंशी, शाजापुर से भागीरथ बगानिया, कालापीपल से जीवन मालवीय, चुरहट से संतोष प्रसाद सांकेत, सीधी से राम खिलावन रजक और इंदौर-1 से इंजीन सुनील कुमार अहिरवार को प्रत्याशी बनाया है।

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