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मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कर्नाटक के श्रृंगेरी शारदा मठ पधारने का आमंत्रण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ओंकारेश्वर में अद्वैत लोक कला संग्रहालय की स्वीकृति पर श्रृंगेरी शारदा पीठम ने माना आभार राज्य सरकार ने एकात्म धाम में भव्य ‘अद्वैत लोक कला संग्रहालय’ के लिए स्वीकृत किए 2195 करोड़ रुपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कर्नाटक के श्रृंगेरी शारदा मठ पधारने का आमंत्रण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में भव्य ‘अद्वैत लोक कला संग्रहालय’ के निर्माण के लिए 2195 करोड़ राशि स्वीकृत करने पर कर्नाटक के श्रृंगेरी शारदा मठ प्रशासन ने आभार माना है। श्रृंगेरी शारदा पीठम के प्रशासक पी.ए. मुरली ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित कैबिनेट बैठक में अद्वैत लोक संग्रहालय को एकात्मता के वैश्विक केन्द्र (ए ग्लोबल सेंटर ऑफ़ वननेस) के रूप में विकसित करने का निर्णय ऐसिहासिक है। मुरली ने राज्य सरकार के प्रति गहन कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह प्रयास न केवल जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की कालातीत शिक्षाओं को समर्पित एक भव्य स्मृति स्वरूप है, बल्कि समूचे विश्व में अद्वैत वेदांत के प्रकाश-स्तंभ के रूप में कार्य करेगा। मुरली ने कहा ओंकारेश्वर में एकात्म धाम के अंतर्गत प्रथम चरण में 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा (स्टैचू ऑफ़ वननेस) का लोकार्पण भी श्रृंगेरी मठ के वेदज्ञ पंडितों और विद्वानों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को श्रृंगेरी मठ में आमंत्रित भी किया। उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने आज से 1200 वर्ष पूर्व कर्नाटक की पवित्र तुंगा नदी के तट पर श्रृंगेरी मठ की स्थापना की थी। चार आम्नाय पीठों में प्रथम यह मठ, ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी शारदाम्बा की दिव्य उपस्थिति से पावन है और सदा से ही यह मठ विद्या, आध्यात्म और परंपरा का पूज्य केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा है कि सिंहस्थ : 2028 से पहले ओंकारेश्वर को उज्जैन की तरह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनाया जाए। यह स्थान प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन परिदृश्य में महत्वपूर्ण महत्व रखता है।  

मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय, मूंग एवं उड़द का 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य

किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा 19 जून से प्रारंभ होगा पंजीयन का कार्य मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में लिया निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी के लिये सभी क्षेत्रों में कार्य कर रही है। सरकार ने किसानों के हित में निर्णय लेते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन किये जाने संबंधी निर्णय लेकर प्रस्ताव केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा है। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग एवं उड़द के उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 19 जून से प्रारंभ होगा। इस संबंध में संबंधित विभाग एवं एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये कृषि आधारित उद्योग लगाने में भी मदद कर रही है। किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिये प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान संघों से हुई चर्चा में आश्वस्त किया कि हम सब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की बेहतरी के लिये डबल इंजन की सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सरकार किसानों को अगली फसल के लिये भी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उन्नत बीज और उन्नत कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिये प्रदेश में निरंतर कृषि मेलों का आयोजन कर रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। राज्य किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा केन्द्र को भेजे गये प्रस्ताव में किसानों का पंजीयन, उपार्जित फसल की गुणवत्ता, परिवहन, भुगतान के साथ प्रचार-प्रसार की कार्य-योजना भी प्रेषित की गई है। 36 जिलों में मूंग और 13 जिलों में उड़द प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है। एमएसपी पर पंजीयन प्रक्रिया न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी। बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी। किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा। इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे। समर्थन मूल्य पर उपार्जित मूंग-उड़द की एक समान विनिर्दिष्टियां भारत सरकार, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिये केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित एक समान विनिर्दिष्टियां के अनुरूप किया जायेगा। इसके अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी। निर्धारित मापदण्ड अनुसार उपार्जन सुनिश्चित करने के लिये सहकारी संस्थाओं/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपण संघ मर्यादित भोपाल/म.प्र. वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन, खाद्य, कृषि, सहकारिता एवं राजस्व विभाग के मैदानी अमले को ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की गुणवत्त हेतु जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया जायेगा। साथ ही किसानों के हित में समर्थन मूल्य पर ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द उपार्जन की कीमत एवं समान विनिर्दिष्टियां का व्यापार प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे किसानों का ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द विचौलियों द्वारा कम दाम पर खरीदा न जा सके। उपार्जित फसल का परिवहन उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी। ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा। किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी। परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के‍लिये सुविधाएं उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी। उपार्जन किये जाने वाले खाद्यान की गुणवत्ता परीक्षण के लिये आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी। इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा। जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी। साथ ही निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।  

भारत-फ्रांस का समझौता अगले तीन वर्षों के लिए वैध होगा और आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा

भोपाल  फ्रांस और मध्यप्रदेश के बीच संस्कृति और पर्यटन क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष मुख्यमंत्री निवास, समत्व में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह मध्यप्रदेश को भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक एवं पर्यटन सहयोग का नया केंद्र बनाएगा। इस ऐतिहासिक एमओयू पर भारत में फ्रांस के राजदूत डॉ. थिएरी मथौ, प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति श्री शिव शेखर शुक्ला और अलायंस फ्रांसेज़ डी भोपाल के अध्यक्ष श्री अखिलेश वर्मा ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता अगले तीन वर्षों के लिए वैध होगा और आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत और फ्रांस के साथ सम्बन्ध हमेशा से अच्छे रहे है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के फ्रांस दौरे के बाद यह और प्रगाढ़ हुए है। मध्यप्रदेश फ्रांस के साथ सांस्कृतिक संबंधों के साथ व्यापारिक सम्बन्धों के लिए भी तत्पर है। उनकी आगामी माह फ्रांस यात्रा प्रस्तावित है। भारत और फ्रांस के बीच औद्योगिक विकास की दृष्टि से, उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और शिल्प कलाओं को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से परस्पर सहयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। यह समझौता ज्ञापन मध्यप्रदेश को न केवल देश की सांस्कृतिक राजधानी बल्कि एक प्रगतिशील, वैश्विक पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की हमारी दूरदृष्टि को साकार करता है। प्रदेश के कलाकारों को वैश्विक मंच मिलेगा और फ्रांस तथा यूरोप से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारत में फ्रांस के राजदूत डॉ. थिएरी मथौ ने इस साझेदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “हमें मध्यप्रदेश सरकार के साथ इस महत्वपूर्ण सहयोग को स्थापित करते हुए बहुत खुशी हो रही है। फ्रांस मुख्य रूप से पर्यटन, सुरक्षा, पर्यावरण और शिक्षा पर विशेष रूप से कार्य करता है। यह एमओयू दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा, जिससे कला, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे।”  एमओयू के तहत प्रमुख रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन किया जाएगा, जिसमें कला उत्सव, संगीत, नृत्य, प्रदर्शनियां, फिल्म स्क्रीनिंग, खानपान और संस्कृति से जुड़े अन्य कार्यक्रम शामिल हैं। प्रतिवर्ष एक समर्पित इंडो-फ्रेंच सांस्कृतिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा। साथ ही प्रदेश की पर्यटन प्रचार सामग्री का फ्रेंच भाषा में अनुवाद किया जाएगा और फ्रांसीसी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन क्षेत्र के अधिकारियों और गाइड्स को फ्रेंच भाषा एवं संस्कृति का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह समझौता प्रदेश की सांस्कृतिक रणनीति को बल देगा और स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, छात्रों तथा सांस्कृतिक संगठनों को वैश्विक मंच प्रदान करेगा, जिससे मध्यप्रदेश की विशिष्ट पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी। इस अवसर पर प्रमुख सचिव उद्योग श्री राघवेंद्र कुमार सिंह, फ्रांस के कौंसुल जनरल श्री जीन-मार्क सेरे-शार्ले, फ्रांसीसी दूतावास के राजनीतिक परामर्शदाता, श्री शाद जॉयनाल आबेदीन और अलायंस फ्रांसेज़ के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।  

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान आधुनिक भारत की जीवन रेखा बन चुका है: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान आधुनिक भारत की जीवन रेखा बन चुका है: मुख्यमंत्री डॉ.यादव प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भारत को प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और नवाचार की क्रांति का वैश्विक केंद्र-बिंदु बनाने के लिए संपूर्ण प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजनरी नेतृत्व में ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान आधुनिक भारत की जीवन-रेखा बन चुका है। आज गांव हो या शहर, देश का हर कोना डिजिटल युग से कदमताल कर रहा है। बीते 11 वर्षों में, देश में डिजिटल इंडिया के माध्यम से ई-गवर्नेन्स, पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परिभाषा लिखी गई है। इसके परिणाम स्वरूप योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अब सीधे आमजन तक पहुंच रहा है, बिचौलियों और भ्रष्टाचार को मात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि सभी नागरिकों को गर्व है कि वैश्विक स्तर पर रियल टाइम डिजिटल लेन-देन में आज भारत की भागीदारी 49 प्रतिशत तक पहुंच गई है।  

बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के प्रयासों में सरकार के सहभागी बनें नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के नागरिकों से आहवान किया है कि वे बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए अभावग्रस्त बच्चों को उत्तम स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता प्रदान करने के प्रयासों में सरकार के सहभागी बनें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर ‘एक्स’ पर कहा कि एक सभ्य समाज में बाल श्रम के लिए कोई स्थान नहीं है, इस सामाजिक अपराध पर अंकुश लगाना सभी नागरिकों का कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रमिक परिवारों के खातों में संबल योजनाओं की राशि करेंगे अंतरित आज अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये का होगा अंतरण मुख्यमंत्री यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 6821 प्रकरणों में 150 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। आज शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में संबल योजना, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। योजना अन्तर्गत प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 76 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया गया है। पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है। योजना में अनुग्रह सहायता अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये प्रदान किये जाते हैं। स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रुपये तथा अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के लिये 16 हजार रुपये दिये जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा के लिये सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है, जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है, जिसे लागू करने का श्रेय प्रदेश की सरकार को है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती हैं, इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है, उन्हें 5 लाख रुपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिल रहा हैं।  

प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र और वन्यजीवों की विविधता से संपन्न राज्य है। भारत में सबसे अधिक बाघ (टाइगर) मध्यप्रदेश की धरती पर देखने को मिलते हैं। तेंदुआ (लेपर्ड) और गिद्ध (वल्चर) की संख्या भी मध्यप्रदेश में सबसे अधिक है। प्रदेश के अलग-अलग वन क्षेत्रों में मगरमच्छ और घड़ियालों का बसेरा है। प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण, जंगलों की रक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वन्य प्राणी संरक्षण सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति के साथ अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर स्थापित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  गुजरात रवाना होने के पहले मीडिया में जारी एक संदेश में यह विचार रखे। संभाग स्तर पर आवश्यक हैं रेस्क्यू सेंटर  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए मध्यप्रदेश में किंग कोबरा भी लेकर आए हैं। चीतों को पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान से गांधी सागर वन क्षेत्र में छोड़कर एक नया नेशनल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक दो नए टाइगर नेशनल पार्क बनने और चीतों के साथ-साथ दूसरे वन्य जीवों की संख्या बढ़ने से संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर की आवश्यकता महसूस हो रही है। इन सेंटर्स की स्थापना के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब तक केवल एक रेस्क्यू सेंटर राजधानी भोपाल स्थित वन विहार में है। यहां प्रदेशभर से घायल और बीमार वन्यजीवों को इलाज के लिए लाया जाता है, लेकिन उनके अनुकूल वातावरण में बदलाव हो जाने के कारण कई बार परेशानियां आती हैं। वन्यप्राणियों की जीवन रक्षा और उनके जीवन में सुखद बदलाव लाने के लिए संभाग स्तर पर रेस्क्यू सेंटर शुरू करने का प्रयास है। मध्यप्रदेश में जू़ की संख्या बढ़ेगी राज्य सरकार प्रदेश में चिड़ियाघरों अर्थात प्राणी उद्यान (जू़) की संख्या में भी वृद्धि करने जा रही है। बजट में दो प्राणी उद्यान की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात में देश का सर्वश्रेष्ठ जू एवं रेस्क्यू सेंटर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वे गुजरात की अध्ययन यात्रा में जामनगर में वन्यजीवों की देखरेख के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे साथ ही वन्यजीवों का आदान-प्रदान कर उनके जीवन रक्षा की संभावनाएं भी तलाशेंगे। नागरिकों के साथ-साथ वन्यजीवों के प्रति भी संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के कई विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों में वेटनरी कोर्स और वेटनरी अस्पताल शुरू कर पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। निकट भविष्य में इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण का भी व्यापक अभियान प्रदेश में चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि अगर किसी वन्यजीव के संकट में होने की जानकारी मिले या दिखाई दे तो नज़दीकी फॉरेस्ट ऑफिसर को सूचित करें। प्रदेश सरकार अपने नागरिकों की चिंता करने के साथ-साथ वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी संवेदनशील है।

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को सौगात देने जा रही मोहन यादव सरकार, पदोन्नति में आरक्षण का नियम जल्द होगा लागू

भोपाल  पिछले 9 सालों से पदोन्नति का रास्ता देख रहे मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को राज्य सरकार जल्द ही बड़ी राहत देने जा रही है. प्रदेश सरकार पदोन्नति में आरक्षण का नियम जल्द ही लागू करने की तैयारी करने जा रही है. इसके प्रारूप को देखने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ सभी मंत्रियों ने इसमें अपनी सहमति दे दी है. नए प्रारूप में तय किया गया है कि पहले जिनकी पदोन्नति हो चुकी है, उन्हें न तो रिवर्ट किया जाएगा और न ही रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा. पदोन्नति में आरक्षण के लाभ के लिए सबसे पहले एससी के 16 फीसदी और एसटी के 20 फीसदी पद भरे जाएंगे. इसके बाद बाकी वर्गों को इसका फायदा मिलेगा. माना जा रहा है कि जून माह के अंतिम सप्ताह में इस प्रारूप पर कैबिनेट अपनी मुहर लगा देगी. 9 साल से देख रहे पदोन्नति की राह मध्य प्रदेश में पदोन्नति का मामला पिछले 9 सालों से उलझा हुआ है. इन 9 सालों के दौरान हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर्ड हो गए और बड़ी संख्या में कर्मचारी पदोन्नति का रास्ता देख रहे हैं, लेकिन अब इसका रास्ता खुलने जा रहा है. राज्य सरकार ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है. इस प्रारूप को दो बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी देख चुके हैं. मंगलवार को सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में सभी मंत्रियों के साथ इसका प्रजेंटेशन दिया. अब माना जा रहा है कि अगली कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए लाया जा सकता है. इस तरह मिलेगा पदोन्नति का आरक्षण का लाभ     प्रारूप में तय किया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण का सबसे पहले जनजातीय वर्ग को लाभ दिया जाएगा. इसमें जनजातीय वर्ग के खाली पदों को भरा जाएगा. इसके बाद अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जाएगा. यदि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षिण पद पर कोई पात्र व्यक्ति नहीं मिलता तो दूसरे वर्ग के कर्मचारी को इसका लाभ नहीं दिया जाएगा. यह पद खाली रखे जाएंगे.     पदोन्नति के लिए जितने भी पद खाली होंगे, उससे दो गुना के साथ 4 अतिरिक्त नाम बुलाए जाएंगे. इस तरह यदि 10 पद खाली हैं तो उसके लिए 20 और 4 अतिरिक्त यानी 24 लोग बुलाए जाएंगे.     पदोन्नति के लिए हर साल सितंबर से लेकर नवंबर के बीच डीपीसी की जाएगी. इसके अलावा 31 दिसंबर को रिटायर्ड होने वाले कर्मचारियों की पात्रता का निर्धारण किया जाएगा. हर साल 1 जनवरी को रिक्त होने वाले पदों पर पात्र लोगों को प्रमोशन का लाभ मिलता जाएगा.     पदोन्नति के लिए दो तरह की लिस्ट तैयार होंगी. इसमें क्लास वन अधिकारियों को पदोन्नति का आधार मैरिट कम सीनियेरिटी को बनाया जाएगा. वहीं क्लास 2 के लिए नीचे के पदों के लिए सीनियेरिटी कम मैरिट के आधार पर लिस्ट तैयार की जाएगी. इससे सभी वर्गों को फायदा पहुंचेगा. प्रक्रिया दो आधारों पर होगी निर्धारित क्लास-1 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए “मेरिट कम सीनियरिटी” का फार्मूला लागू होगा। क्लास-2 व उससे नीचे के पदों के लिए “सीनियरिटी कम मेरिट” का आधार अपनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह संतुलित व्यवस्था आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के हितों का ध्यान रखेगी। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी की पदावनति (रिवर्ट) नहीं की जाएगी और पूर्व में सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था उस दिन से लागू मानी जाएगी जिस दिन इसका औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होगा। पात्रता की अंतिम तिथि 31 दिसंबर सरकार ने निर्णय लिया है कि पदोन्नति की प्रक्रिया हर साल सितंबर से नवंबर के बीच संपन्न होगी। पात्रता का निर्धारण 31 दिसंबर तक किया जाएगा और 1 जनवरी से पद रिक्तियों के अनुसार योग्य अधिकारियों को पदोन्नति दी जाएगी। पदोन्नति की रिक्तियों की संख्या के दोगुना दावेदारों के साथ चार अतिरिक्त अभ्यर्थियों को सूची में शामिल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि 6 पद रिक्त हैं, तो 12 (दोगुना) + 4 अतिरिक्त = कुल 16 लोगों को प्रमोशन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। पिछले कई वर्षों से प्रमोशन पर लगी रोक के कारण लगभग एक लाख कर्मचारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकार अब इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति देने की दिशा में कार्य कर रही है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था बनाकर मूंग खरीदी की जाएगी

मंडियों में किसानों को मूंग विक्रय का मिले उचित दाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था बनाकर मूंग खरीदी की जाएगी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों में पारदर्शी व्यवस्था बनाकर मूंग खरीदी की जाएगी। प्रदेश के बाहर से व्यापारियों को भी मूंग खरीदी के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएंगी और प्रोत्साहित किया जाएगा। मंडियों में किसानों को मूंग विक्रय का उचित दाम मिल सके इसके लिए व्यापारियों को बोली लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में उनसे भेंट करने आए भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल से यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मूंग पर मंडी शुल्क में राहत दी जा सकती है या नहीं इसकी जांच की जायेगी। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और आईटीसी को मूंग नीलामी में शामिल करने के लिये प्रेरित किया जायेगा। हमारा प्रयास यह है कि मंडियों में मूंग की मॉडल दरे बढ़कर लगभग 7500 रूपये प्रति क्विंटल हो जाये। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बाहर से आने वाले व्यापारियों को नये मंडी लायसेंस भी दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है। खेती और किसानी राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। प्रदेश में कृषि आधारित उद्योग लगाने के लिए कोई कसर छोड़ी नहीं जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कपास उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गौ-शाला संचालित करने के लिए 20 रुपए से बढ़ाकर प्रति गाय 40 रुपए अनुदान राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान, फसल चक्र अपना कर उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय किसान संघ, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, चंद्रकात गौर और अन्य पदाधिकारी शामिल थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा उपस्थित थे।  

प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय

प्रदेश की 20 हजार 600 सुदूर बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने 21 हजार 630 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना अंतर्गत 30 हजार 900 किलोमीटर सड़क का होगा निर्माण प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय झाबुआ, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम में वर्किंग वूमन हॉस्टल निर्माण का अनुमोदन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति” के गठन की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद का निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना अंतर्गत प्रदेश के सुदूर बसाहटों मजरा/टोला/धोनी/पुरा इत्यादि को बारहमासी सम्पर्कता प्रदान करने 21 हजार 630 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार योजना का क्रियान्वयन 2 चरणों में किया जायेगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पहले चरण एवं वित्तीय वर्ष 2030-31 से 2034-35 तक दूसरे चरण में कुल अनुमानित 30 हजार 900 कि.मी. मार्ग का निर्माण होगा। योजना का क्रियान्वयन राज्य मद से किया जायेगा। योजना के संबंध में मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की साधिकार समिति को निर्णय लिये जाने के लिए अधिकृत किया गया है। स्वीकृति अनुसार न्यूनतम 20 आवास और 100 से अधिक जनसंख्या वाले 6 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले ऐसे क्षेत्र, जिसके 50 मीटर की दूरी में पूर्व से बारहमासी सड़क न हो, को बसाहट के अंतर्गत लिया जायेगा। इसके लिए बसाहट की जनसंख्या के घटते क्रम में विधानसभा क्षेत्रवार प्राथमिकता सूची तैयार की जायेगी। सांसद, क्षेत्रीय विधायक और जिला पंचायत सदस्यों के परामर्श पर ग्रामीणजनों की स्थानीय आवश्यकता जैसे – सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के आधार पर बसाहटों की प्राथमिकता में कलेक्टर द्वारा लिपिबद्ध कारणों से सूची में परिवर्तन किया जा सकेगा। अंतिम प्राथमिकता सूची का राज्य स्तर पर प्रकाशन किया जायेगा। योजना अंतर्गत 20 हजार 600 बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर मार्ग का निर्माण किया जायेगा। प्रदेश के बाहर से आयातित तुअर पर मंडी फीस से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में तुअर दाल उद्योगों की आवश्यकता के दृष्टिगत प्रदेश में बाहर से आयातित तुअर पर मंडी शुल्क से पूर्णतः छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया। छूट दिए जाने से प्रदेश में तुअर दाल की पर्याप्त उपलब्धता होगी। साथ ही परिवहन बढेगा और रोजगार में वृद्धि होगी। झाबुआ, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम में वर्किंग वूमन हॉस्टल निर्माण का सैद्धांतिक अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा झाबुआ, सिंगरौली, देवास और नर्मदापुरम में कामकाजी महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के उद्देश्य से SASCI (स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट) 2024-25 योजना अंतर्गत स्वीकृत 350 सीट्स की क्षमता वाले 4 वर्किंग वूमन हॉस्टल के निर्माण का सैद्धांतिक अनुमोदन दिया गया है। योजना पी.पी.पी मोड में संचालित की जायेगी। योजना पर 40 करोड़ 59 लाख रूपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ”जिला विकास सलाहकार समिति” के गठन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा जिले के विकास योजना के लिए रोडमेप तैयार करने और जिले की दीर्घकालीन विकास योजनाएं बनाने के लिए सभी जिलों में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में “जिला विकास सलाहकार समिति” का गठन किये जाने का अनुमोदन दिया गया। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट भाषण में मध्यप्रदेश के समस्त जिलों में जिला विकास सलाहकार समिति का गठन किये जाने संबंधी निर्देश दिये गये थे। जिला विकास सलाहकार समिति में जिले के प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। सांसद, जिले के समस्त विधायक, जिला मुख्यालय के महापौर या नगरपालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिले के सभी जनपद अध्यक्ष के साथ उद्योग, व्यापार, प्रगतिशील किसान, समाज सेवी, चिकित्सा, विधि आदि क्षेत्रों के 20 प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। कलेक्टर समिति के सदस्य सचिव होंगे। समिति के उद्देश्यों में जिले की जनता, जनप्रतिनिधियों व अन्य हितधारकों की जरूरतों और सुझावों के अनुसार जिले के दीर्घकालीन विकास की योजनाएँ बनाना है। साथ ही समिति जिले के परंपरागत कौशल को चिन्हित कर प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल” के सिद्धांत के दृष्टिगत उन्हें राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देते हुए जिले की समृ‌द्धि का रोडमैप तैयार करेगी। जिले की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के सुझावों पर समिति विचार करेगी। जिले में स्थानीय प्रयासों से प्रचलित नवाचारों को एक योजना के रूप में मूर्त रूप देना। जिले में रोजगार सृजन एवं विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्यों के संबंध में सुझाव, उद्योग, व्यापार, जल संरचनाओं के संरक्षण, निर्यात, कृषि, खनिज आदि क्षेत्रों में जिले की कार्ययोजना के लिए सुझाव देना शामिल है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आगामी 19 जून को मध्यप्रदेश आगमन प्रस्तावित

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 19 जून को आएंगी मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्व सिकल सेल दिवस पर बड़वानी जिले की ग्राम पंचायत तालून में होगा कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आगामी 19 जून को मध्यप्रदेश आगमन प्रस्तावित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले की मंत्रीगण से चर्चा राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर किया विचार-विमर्श भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आगामी 19 जून को मध्यप्रदेश आगमन प्रस्तावित है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्व सिकल सेल दिवस पर बड़वानी जिले की ग्राम पंचायत तालून में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में शासकीय सेवकों के स्थानांतरण अब 17 जून तक किए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक प्रारंभ होने के पहले मंत्रीगण से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के संबंध में मंत्रीगण से विचार विमर्श किया। केंद्र सरकार के 11 वर्ष और राज्य सरकार के डेढ़ वर्ष के कार्यकाल पर होंगे कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सफल कार्यकाल के 11 वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रि-परिषद प्रसन्नता व्यक्त करती है। सुशासन के संकल्प के प्रति मंत्रि-परिषद प्रधानमंत्री का अभिनंदन का प्रस्ताव पारित करती है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अन्नदाता, नारी, युवा और गरीब सहित विभिन्न वर्गों का जीवन बदलने के लिए और उन्हें अधिक से अधिक रोजगार एवं विकास के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इस अवधि में केंद्र सरकार द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। सभी मंत्रीगण केंद्र की 11 वर्ष की योजनाओं की उपलब्धियां और मध्यप्रदेश शासन की डेढ़ वर्ष की उपलब्धियां नागरिकों तक पहुंचाएंगे। इस संबंध में संकल्प से सिद्धि अभियान भी संचालित होगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों को दायित्व सौंपे जाएंगे। स्पिरिचुअल एवं वैलनेस समिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गत 5 जून को उज्जैन में स्पिरिचुअल एंड वैलनेस समिट का आयोजन हुआ, जिसमें स्वामी चिदानंद सरस्वती सहित अनेक वैलनेस के क्षेत्र में कार्य कर रहे आध्यात्मिक गुरुओं ने हिस्सा लिया। विभिन्न निवेशकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधि इस समिट में शामिल हुए। समिट के माध्यम से वैलनेस हॉस्पिटैलिटी और स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 2000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। केरल, उत्तराखंड आदि राज्यों के प्रतिनिधि इसमें विशेष रूप से शामिल हुए। मध्यप्रदेश में यह अपने तरह की प्रथम समिट थी जो सरकार के प्रत्येक सेक्टर में निवेश की संभावनाओं और विकास की परिकल्पना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 11 आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किये जाने का निर्णय लिया गया था। इनमें से पांच कॉलेज की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हो चुकी है। शेष महाविद्यालय प्रारंभ करने के लिए भी राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। यह कॉलेज वैलनेस केंद्र के रूप में भी कार्य करेंगे। धार्मिक लोक का निर्माण और विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न धार्मिक स्थानों पर 13 लोक के निर्माण और विकास का कार्य चल रहा है। इन कार्यों की समय-समय पर समीक्षा भी की जा रही है। प्रदेश के पर्यटन विकास में यह लोक भी महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे। वर्षा काल में आवश्यक व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी वर्षाकाल में बाढ़ और अतिवृष्टि की आशंका के दृष्टिगत मंत्रीगण को अपने प्रभार के जिलों में आवश्यक परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयारी के निर्देश दिए। मंत्रीगण द्वारा जिला स्तर पर सभी संभावित परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी। कृषक कल्याण और नवकरणीय ऊर्जा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल में सौर ऊर्जा पर विशेष समिट का सौर ऊर्जा उत्पादन के संबंध में राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया जा रहा है। सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना आय के एक नए साधन के रूप में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। इसमें निवेशक की अपनी स्वयं की भूमि अथवा कृषि भूमि होना चाहिए। ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनाने की यह महत्वपूर्ण योजना है जो ऊर्जा की उपलब्धता और उसकी वृद्धि के साथ निवेशक और राज्य की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषकों के हित में संचालित गतिविधियों पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्र सरकार के 11 वर्ष पूर्ण होने पर मध्य प्रदेश में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा शव वाहन के संचालन का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। अस्पतालों में किसी नागरिक की मृत्यु के बाद उनके घर तक पार्थिव देह ले जाने की नि:शुल्क व्यवस्था प्रदान की जाएगी। संकट की स्थिति में राज्य सरकार नागरिकों के साथ है। इस योजना का क्रियान्वयन शीघ्र प्रारंभ किया जा रहा है।  

सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट छोटे निवेशक होंगे समिट से लाभान्वित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट में होंगे शामिल सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट आज  कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना समिट छोटे निवेशक होंगे समिट से लाभान्वित भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सिरमौर बनाने के लिये “सबका साथ-सबका विकास और सबके विश्वास’’ के साथ लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य प्राप्ति में मध्यप्रदेश भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रतिबद्धतापूर्वक निरंतर कार्य कर रहा है। मंगलवार 10 जून को कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में छोटे निवेशकों और किसानों की सौर ऊर्जा उत्पादन में सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिये सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समिट का शुभारंभ करेंगे। समिट में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला भी उपस्थित रहेंगे। इसमें विभिन्न सत्र आयोजित किये जायेंगे। सत्रों में विषय-विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से जानकारी दी जायेगी। एमडी ऊर्जा विकास निगम अमनबीर सिंह बैंस प्रात: 11 बजे प्रोजेक्ट और निविदा की विशेषताओं पर प्रकाश डालेंगे। दोपहर में निविदा प्रक्रिया का प्रेजेंटेशन होगा। रिसोर्स मॉनीटरिंग सिस्टम पर विचार-विमर्श होगा। इसके अतिरिक्त मेनिट की डॉ. प्रियंका पालीवाल ‘रियेक्टिव पॉवर-ग्रिड स्टेबिलाइजेशन एण्ड इम्पेक्ट ऑन फीडर’ पर व्याख्यान देंगी। समिट में फीडर सोलराइजेशन में वित्तीय सहायता के लिये बैंकर्स का सेशन भी आयोजित किया गया है। समिट में प्रोसेस फ्लो और डिमांस्ट्रेशन पर भी प्रेजेंटेशन होंगे। समिट में इनवर्टर मैन्युफेक्चरर्स का सेशन भी होगा। समिट का शुभारंभ प्रात: 10:30 बजे सहभागियों के रजिस्ट्रेशन से होगा। “सूर्य-मित्र कृषि फीडर”- क्रियान्वयन के मुख्य बिंदु     योजना के अंतर्गत विद्युत् सबस्टेशंस की 100 प्रतिशत क्षमता तक की सौर परियोजनाओं की स्थापना की जा सकेगी।     वोकल फॉर लोकल के अंतर्गत स्थानीय उद्यमियों के लिए निवेश एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। शासन के साथ 25 वर्षों तक विद्युत् क्रय अनुबंध किया जाएगा।     प्रदेश में 1900 से अधिक सबस्टेशंस पर 14500 मेगावाट क्षमता परियोजनाओं के चयन हेतु उपलब्ध हैं। परियोजनाओं को एग्रीकल्चर इन्फ्रा फंड से 7 वर्षों तक 3 प्रतिशत ब्याज में छूट का प्रावधान है।  

मुख्यमंत्री ने सांदीपनी और जवाहर नवोदय विद्यालय भवन का किया लोकार्पण

सांदीपनी स्कूल एवं नवोदय विद्यालय के स्थापित होने से शिक्षा के नए कीर्तिमान बनेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्य मार्ग से नवोदय विद्यालय तक सडक का निर्माण किया जाएगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने सांदीपनी और जवाहर नवोदय विद्यालय भवन का किया लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन रतलाम जिले के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जिले को दो सौगातें मिली हैं। आलोट में नवोदय विद्यालय के साथ ही सांदीपनी विद्यालय भवन का लोकापर्ण किया गया है, जो शिक्षा के क्षे़त्र में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। मध्यप्रदेश में शासकीय विद्यालयों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहें है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र मे उत्तरोतर प्रगति कर रहा है। रतलाम के आलोट में 38.4 करोड़ लागत से बने पीएम जवाहर नवोदय विद्यालय-2, छात्रावास और स्टॉफ क्वार्टरो तथा 35 करोड़ 11 लाख की लागत से निर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2025 में 10वी एवं 12वी बोर्ड परीक्षा के परिणामों में निजी स्कूलों के बजाए शासकीय स्कूल के बच्चों ने ज्यादा अच्छा प्रर्दशन किया है। नीट, जेईई जैसी परीक्षाओं में भी सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कोई कमी नही छोडी जाएगी। मुख्यमंत्री ने जवाहर नवोदय विद्यालय से मुख्य मार्ग से जोडने वाली सड़क का निर्माण किये जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अन्य क्षेत्रों में भी विकास के कार्य कर रही हैं। सिंचाई के लिए भी कई परियोजनाएं क्रियान्वित की गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी विजन के तहत नदी जोड़ो अभियान की शुरूआत हुई है। राजस्थान एवं मध्यप्रदेश की बेहतरी के लिए पार्वती, चंबल, कालीसिंध नदी जोडों परियोजना स्वीकृत की गई है। इससे प्रदेश के कई गांव को पेयजय एवं सिंचाई के लिए जल मिल सकेगा। मध्यप्रदेश मे लगभग 55 लाख हैक्टेयर में सिंचाई हो रही है। किसानों को विद्युत के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर पम्प देने की योजना है। इससे किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी। पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे है। मध्यप्रदेश देश में पर्यटन के क्षेत्र में तीसरे स्थान पर आ गया है। आलोट में क्षिप्रा-चंबल नदी संगम स्थल पर पर्यटन का विकास किया जाएगा। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि यह नवोदय विद्यालय रतलाम में दूसरा है, पहला विद्यालय कालूखेड़ा में स्थित है। नवोदय विद्यालय एवं केन्द्रीय विद्यालय और उत्कृष्ट विद्यालय पूरे देश में विद्यार्थियों का शैक्षणिक एवं नैतिक विकास कर रहे हैं। शिक्षा ही सामाजिक एवं आर्थिक विकास का आधार है। भारत में साक्षरता दर निरंतर बढ़ रही है, जिसमें नवोदय विद्यालय एवं केन्द्रीय विद्यालयों का महत्वपूर्ण योगदान है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि रतलाम जिले के आलोट में यह दूसरा नवोदय विद्यालय प्रारंभ हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आधार पर युवाओं को रोजगार मूलक शिक्षा देने में जवाहर नवोदय विद्यालय एवं केन्द्रीय विद्यालय महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे नवोदय विद्यालयों में अध्ययन कर जेईई, नीट जैसी परीक्षाएं पास कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए महाविद्यालय में प्रवेश ले रहे है। लगभग 1 करोड़ 53 लाख बच्चे मध्यप्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। राज्य एवं केन्द्र सरकार के सहयोग से इन विद्यालयों में एआई की पढ़ाई भी प्रारंभ की गई है। स्कूल समाज को मजबूत बनाते है। मध्यप्रदेश की नई पीढ़ी को सशक्त कर प्रदेश को विकसित किया जाएगा। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री चेतन्य काश्यप, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक आलोट डॉ. चिंतामणि मालवीय उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री एवं अतिथियों का स्वागत पारंपरिक पगड़ी, शॉल एवं पारंपरिक पेन्टिग भेंट कर किया गया। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में सर्व-सुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए वर्ष 2022-23 में सीएम राइज विद्यालय की स्थापना की है, जो अब महर्षि सांदीपनि विद्यालय के नाम से पहचाने जा रहे हैं। सांदीपनि विद्यालय परियोजना मध्यप्रदेश शासन की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो गरीब वर्ग के विद्यार्थियों को भी विश्व स्तरीय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के विज़न के साथ प्रारंभ की गई है। सांदीपनि विद्यालय आलोट में आसपास के 1600 से अधिक विद्यार्थी प्रवेश लेंगे, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। इस विद्यालय में 1 कि.मी. से 15 कि.मी. दूरी से आने वाले बच्चों के लिए परिवहन सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विषय-वार शिक्षकों के साथ-साथ संगीत शिक्षक, नृत्य शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक, खेल शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, कॅरियर काउंसलर आदि भी नियुक्त किये गये है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकमान्य तिलक शिक्षण समिति के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल

गुरू ही जीवन की दिशा तय करते है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि लोकमान्य तिलक विद्यालय परिसर में भविष्य के विकास का संकल्प निर्मित हुआ मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोकमान्य तिलक शिक्षण समिति के अभिनंदन समारोह में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शुक्रवार को लोकमान्य तिलक शिक्षण समिति के अभिनंदन कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि लोकमान्य तिलक विद्यालय परिसर में भविष्य के विकास का संकल्प निर्मित हुआ है। ये परिसर राष्ट्रवादी विचारों का जीवंत केंद्र है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में कुलपति के स्थान पर कुलगुरु संबोधित किए जाने पर कहा कि गुरु शब्द अंधेरे से प्रकाश को जोड़ता है। माता-पिता के बाद गुरु ही जीवन की दिशा तय करते हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में लोटी स्कूल से जुड़े अपने विद्यार्थी परिषद के समय के अनुभव भी साझा किए। विधायक अनिल जैन कालुहेड़ा एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम में स्वागत भाषण किशोर खंडेलवाल ने दिया। मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्रों को पुरस्कार प्रदान किये। खंडेलवाल ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष शिक्षकों के उन्नयन के लिए 3 दिवसीय अभ्यास वर्ग के चलते आयोजित किया जाता है। इसमें अलग-अलग विषय होते हैं। कार्यकम में विद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्यक्रम में 10वीं में टॉपर 3 छात्र, छात्राओं एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिता मल्लखम्भ खेल में मैडल हासिल करने वाले 4 खिलाड़ी छात्र, छात्राओं का सम्मान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष किशोर खंडेलवाल, सचिव विश्वनाथ सोमन और गिरीश भालेराव ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन गिरीश भालेराव ने किया और आभार प्रदर्शन विश्वनाथ सोमन ने किया।  

उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने व्यक्त किया आभार

मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव गंगा दशहरा और पर्यावरण दिवस पर “स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट” का आयोजन मध्यप्रदेश की वृहद प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का निरूपण निवेशकों से उपलब्ध अवसर का लाभ लेकर मध्यप्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया नाइपर उज्जैन मेडिसिटी में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने व्यक्त किया आभार मध्यप्रदेश बहुत प्यारी धरती, यहाँ सब कुछ है: धार्मिक गुरु सरस्वती उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है। मध्यप्रदेश को प्रकृति का पूर्ण स्नेह प्राप्त है। भारत के हृदय स्थल में स्थित मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट एयर कनेक्टिविटी, रेल नेटवर्क और हाईवे हैं जो देश के हर कोने से मध्यप्रदेश की पहुँच को सुगम बनाते हैं। इन बुनियादी ढाँचों का सतत् विस्तार जारी है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सतना और दतिया एयरपोर्ट का शुभारंभ कर इन सुविधाओं को और समृद्ध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक मन्त्रोचार की पवित्र ध्वनि के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर उज्जैन में स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट-2025 के मुख्य सत्र का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज गंगा दशहरा और पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्पिरिचुअल और वेलनेस समिट का आयोजन किया गया है। यह अवसर मध्यप्रदेश की वृहद प्राकृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का निरूपण भी है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और जीवनशैली आज पूरे विश्व का ध्यान आकृष्ट कर रही है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति प्रेम और पूजन अभिन्न अंग है। भारतीय जीवनदृष्टि केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी जीवनशैली को प्रोत्साहित करती है जिसमें व्यक्ति स्वस्थ रहे और रोगों की संभावना ही न हो। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को मेडिकल हब बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उज्जैन में मेडिसिटी की स्थापना की जा रही है और मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु मात्र ₹1 में 25 एकड़ भूमि प्रदान की जा रही है। निजी क्षेत्र को अस्पताल संचालन में भी हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और सेक्टर आधारित समिट के आयोजन से हर क्षेत्र, हर सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में 18 नवीन इन्वेस्टर फ्रेंडली पॉलिसी के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सहज और आकर्षक बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस में 30 लाख करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्ताव और 21 लाख 40 हज़ार से अधिक रोजगारों के सृजन के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगारपरक उद्यमों के लिए 5 हज़ार रुपए प्रति व्यक्ति के मान से विशेष प्रोत्साहन सरकार द्वारा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस है, शांति का टापू है, कुशल मैनपॉवर, उत्कृष्ट अधोसंरचना और प्राकृतिक, आध्यात्मिक स्थल इसे स्पिरिचुअल और वेलनेस क्षेत्र में निवेश के लिए आदर्श स्थल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत सहयोग के साथ-साथ 100 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों के लिए विशेष सहयोग कस्टमाइज्ड नीति के रास्ते भी उपलब्ध हैं। उन्होंने समस्त निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष नाइपर (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) और एमपीआईडीसी के मध्य एमओयू का हस्तांतरण हुआ। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह और नाइपर के संचालक शैलेन्द्र सराफ़ ने एमओयू साझा किया। नाइपर उज्जैन मेडिसिटी में नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर तथा उज्जैन की समग्र धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत पर लघु फ़िल्मों का प्रदर्शन किया गया। चिदानंद सरस्वती महाराज ने स्पिरिचुअल और वेलनेस सेंटर स्थापना के लिए दिया आशय पत्र परमार्थ निकेतन के धार्मिक गुरु चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मध्यप्रदेश बहुत प्यारी धरती है। यहाँ सब कुछ है। उन्होंने कहा कि आज के उज्जैन में अधोसंरचना विकास को देखकर नहीं लगता कि यह पुराना उज्जैन है। उन्होंने उज्जैन के विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। महाकाल लोक की भव्यता अनुपम है। चारों धाम की यात्रा पूर्ण करने के बाद लोग महाकाल लोक आना चाहते हैं। आज भारत के धार्मिक नगर पर्यटन में शीर्ष पर पहुँच रहे हैं। यह समय है जब निवेशक इस अवसर का लाभ उठायें और पर्यटन अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण में सहभागी बनें। आने वाले सिंहस्थ में यहाँ अपार संभावनाओं का सृजन होने जा रहा है। देश विदेश से करोड़ों पर्यटकों का आगमन होगा। उसके लिए हम सभी को अभी से तैयार रहना होगा। गुरु चिदानंद सरस्वती महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के समीप स्पिरिचुअल और वेलनेस सेंटर स्थापना के लिए आशय पत्र दिया। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्यटन के लिए अनुकूल वातावरण हैं। प्रदेश में जंगल, जंगली जानवर, पवित्र नदियां हैं, वहीं धार्मिक पर्यटन के लिए महाकाल तथा ओंकारेश्वर दो ज्योतिर्लिंग और अन्य आकर्षक धार्मिक स्थल हैं। प्रदेश में आकर्षक हेरिटेज हैं, कई पुराने अच्छे रजवाड़े हैं, जिन्हे हेरिटेज के रूप में विकसित किया गया हैं। पूरे देश मे यूनेस्को के 62 हेरिटेज धरोहरों में से 18 हेरिटेज मध्यप्रदेश में है। मध्यप्रदेश देश के मध्य होने से यहाँ पहुँचना आसान है। प्रधानमंत्री ने टूरिज़्म बढ़ाने पर जोर दिया हैं। टूरिज़्म बढ़ाने के लिए स्वच्छता सबसे आवश्यक हैं। सबसे स्वच्छ शहर “इंदौर” मध्यप्रदेश में है। इन्दौर ही नहीं अन्य शहरों में भी स्वच्छता की स्थिति बेहतर है। इन्दौर की स्वच्छता पश्चिमी देशों के समतुल्य हैं। प्रदेश में इन्वेस्टमेंट के लिए 18 नई पॉलिसीज बनाई हैं और कुछ पुरानी पॉलिसीज हैं। इनमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रमुख रूप से आर्थिक मदद और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में बराबरी का हैं या बेहतर हैं। निवेशकों को प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमतियां एनओसी को सुविधाजनक बनाया गया। प्रदेश में सबसे पहले राइट टू पब्लिक डिलीवरी सिस्टम लागू किया गया,जिसमें निर्धारित अवधि में अनुमतियां जारी होगी। इस अवसर पर भण्डारी ग्रुप के चेयरमैन विनोद भण्डारी ने उज्जैन में बन रहे मेडिकल टूरिज्म पर प्रकाश डाला। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति शिवशेखर … Read more

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