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नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल: विवादों में घिरे एसडीएम सर्वेश यादव, मिलिंद ढोके का कार्यकाल बना मिसाल

Questions on administrative working style in Nalkheda: SDM Sarvesh Yadav surrounded by controversies, tenure of Milind Dhoke became an example संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद एसडीएम सर्वेश यादव की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी सामने आ रही है। मंदिर के पंडितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान एसडीएम ने धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल दिया, बिना संवाद के फैसले थोपे और मर्यादित भाषा व व्यवहार का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसे रवैये के कारण ही मंदिर में हवन-अनुष्ठान तक रोकने जैसी स्थिति बनी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पंडितों की चेतावनी और बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः एसडीएम को मंदिर कार्यों से हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे कई लोग देर से लिया गया कदम बता रहे हैं। इसी बीच नलखेड़ा में पूर्व एसडीएम मिलिंद ढोके के कार्यकाल की खुलकर सराहना होने लगी है। स्थानीय नागरिकों और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि ढोके के समय प्रशासनिक कामकाज संतुलित, संवेदनशील और संवाद आधारित रहा। उनके कार्यकाल में मंदिर में चांदी से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कराए गए, व्यवस्थाएं बेहतर हुईं और किसी भी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। पंडित समाज और श्रद्धालु उस दौर को शांति और सहयोग का उदाहरण बताते हैं। लोगों का मानना है कि मिलिंद ढोके की कार्यप्रणाली अलग थी, जहां आदेश से पहले संवाद और शक्ति से पहले समझदारी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी तुलना के बीच अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि नलखेड़ा जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए विवाद पैदा करने वाली नहीं, बल्कि भरोसा बनाने वाली प्रशासनिक शैली की जरूरत है, जैसी पूर्व में देखने को मिली थी।

मां बगलामुखी मंदिर विवाद: एसडीएम की तानाशाही से भड़के पंडित, हवन बंद कर प्रशासन को झुकाया

Maa Baglamukhi Temple Dispute: Pandits enraged by SDM’s dictatorship, stopped havan and forced the administration to bow down संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में उत्पन्न विवाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर के पंडितों का आरोप है कि सुसनेर के एसडीएम ने लगातार मंदिर के धार्मिक कार्यों में अनावश्यक दखल दिया, बिना किसी समन्वय के आदेश थोपे और पूजा-पद्धति को बाधित किया। पंडितों का कहना है कि एसडीएम का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण रहा और उन्होंने बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर पंडितों और मंदिर प्रबंधन पर दबाव बनाते रहे, जिससे भय और असंतोष का माहौल बना। इस रवैये से आक्रोशित होकर पंडितों ने हवन-अनुष्ठान बंद कर दिया और खुली चेतावनी दी कि यदि एसडीएम को तत्काल नहीं हटाया गया तो उन्हें जूतों की माला पहनाकर मंदिर परिसर से बाहर छोड़ा जाएगा। स्थिति के बिगड़ते ही प्रशासन पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद एडीएम ने सख्ती दिखाते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से मंदिर से जुड़े सभी कार्यों से मुक्त कर दिया। इस कार्रवाई को पंडितों ने प्रशासन की मजबूरी में उठाया गया कदम बताया और कहा कि यदि समय रहते एसडीएम को नहीं रोका जाता तो मंदिर की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंचता।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत

Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।

नलखेड़ा: हाईकोर्ट के आदेश पर राम मंदिर की भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

Nalkheda: Encroachment removed from Ram Temple land on High Court orders नलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि पर वर्षों पुराने विवाद का अध्याय आखिरकार शनिवार को बंद हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस अमले की भारी संख्या में मौजूदगी रही। मौके पर पहुंचे अधिकारी, विरोध के बीच शुरू हुई कार्रवाई सुबह होते ही SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव मौके पर पहुँचे। उनके साथ पटवारी पंकज वर्मा,पटवारी चिराग शर्मा,पटवारी राजेश घावरी, पटवारी रामपाल सिंह तोमर, अन्य पटवारी, राजस्व अमला तथा पुलिस टीम तैनात की गई। कार्रवाई शुरू होते ही कुछ लोगों ने विरोध जताया, जिस कारण थोड़ी देर के लिए विवाद की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद माहौल नियंत्रित किया गया। कई लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही हटाया अतिक्रमण हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देने पर कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें, शेड और सामान हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन ने इसे सकारात्मक माना और कहा कि स्वेच्छा से हटाया गया अतिक्रमण प्रक्रिया को काफी आसान बना देता है। कुछ जगह नहीं माने लोग, SDM के निर्देश पर चलाई गई JCB जहाँ लोगों ने अतिक्रमण हटाने में सहयोग नहीं किया, वहाँ SDM सर्वेश यादव के निर्देश पर JCB लगाई गई। सीमांकन के आधार पर अतिक्रमण हटवाया गया और विवादित भूमि को पूरी तरह साफ करवाया गया। पुलिस बल पूरे समय मौजूद रहा जिससे किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। भूस्वामी क्षेत्र को किया गया अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन की सख्त चेतावनी कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा गया कि धार्मिक एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन सर्वोपरि है और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

संगठन को नई दिशा: रोहित सकलेचा ने संभाली नलखेड़ा मंडल अध्यक्ष की कमान

New direction to the organization: Rohit Saklecha took over as Nalkheda Mandal President चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। भारतीय जनता पार्टी संगठन में नलखेड़ा मंडल को नई ऊर्जा और दिशा देते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने सुसनेर विधानसभा के नलखेड़ा मंडल के नए मंडल अध्यक्ष के रूप में रोहित सकलेचा की नियुक्ति की है। यह निर्णय सामने आते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने ढोल-ढमाकों और फूल मालाओं के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। रोहित सकलेचा अपने सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और संगठन के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। लंबे समय से वे पार्टी की विचारधारा को घर–घर तक पहुंचाने और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने में सक्रिय रहे हैं। उनकी नियुक्ति को संगठन में नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। मंडल अध्यक्ष बनने के बाद रोहित सकलेचा ने सबसे पहले मां बगलामुखी मंदिर में जाकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। वहां उन्होंने नलखेड़ा के विकास और पार्टी की मजबूती के लिए संकल्प लिया। इसके पश्चात उन्होंने अपने गुरुदेव महामंडलेश्वर संदीपेंद्र जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। रोहित सकलेचा ने कहा— “यह पद मेरे लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। मैं संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नलखेड़ा के विकास कार्यों को गति देने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करूंगा।” कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन की नई दिशा बताते हुए कहा कि सकलेचा के नेतृत्व में पार्टी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों ने भी उनके चयन को सराहनीय बताते हुए कहा कि वे हर वर्ग के लोगों से जुड़े हुए हैं और हमेशा सेवा भाव के साथ उपलब्ध रहते हैं। नगर व क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों, युवा कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और समाजसेवियों ने भी रोहित सकलेचा को शुभकामनाएं प्रेषित की।

नलखेड़ा आए मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल: जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने किया सम्मान, विकास पर हुई अहम बैठक

Minister Prahlad Singh Patel came to Nalkheda: District President representative Mukesh Chauhan honored him, an important meeting was held on development संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा /आगर मालवा। मंगलवार को नलखेड़ा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का आगमन हुआ। जनपद पंचायत नलखेड़ा के जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने मंत्री का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने भी मंत्री का सम्मान किया और उन्हें नलखेड़ा आने के लिए आमंत्रित करने की पहल की। तीनों जनप्रतिनिधियों की संयुक्त उपस्थिति ने कार्यक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया। स्वागत के बाद मंत्री पटेल और जनप्रतिनिधियों की बैठक में नलखेड़ा जनपद के विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें ग्रामीण सड़कों के पक्के निर्माण, नल-जल योजनाओं को गति, पंचायत भवनों का नवीनीकरण, मनरेगा कार्य, आवास योजना के लंबित प्रकरणों का समाधान, श्रमिक पंजीयन, नाली निर्माण, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष रूप से बात हुई। जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने गांवों की वास्तविक समस्याएँ सामने रखते हुए मंत्री को महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपे। बैठक में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे ने नगर क्षेत्र की समस्याओं का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने विशेष रूप से माँ बगलामुखी मंदिर क्षेत्र के विकास पर जोर दिया। राठौरे ने कहा कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए सड़क सुधार, पार्किंग, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाना आवश्यक है। मंत्री पटेल ने इस पर गंभीरता से प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर क्षेत्र के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करने का आश्वासन दिया। वहीं जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की धीमी प्रगति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में आवास, नालियों, मनरेगा कार्यों और पेयजल से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने इन कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने की मांग रखते हुए मंत्री के सामने जनपद की प्राथमिक आवश्यकताओं को स्पष्ट किया। मंत्री ने इस पर विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि नलखेड़ा क्षेत्र के लंबित कार्यों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नलखेड़ा जैसे उभरते जनपद में विकास कार्यों को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता और रोजगार से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाएगा। विभागीय योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुँचना चाहिए।” कार्यक्रम के दौरान कई सरपंचों और ग्रामीणों ने भी अपने-अपने गाँवों की समस्याओं से जुड़े ज्ञापन मंत्री को सौंपे। मंत्री ने सभी ज्ञापनों का संज्ञान लिया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। समापन पर जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने मंत्री का आभार व्यक्त किया। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मंत्री का यह दौरा नलखेड़ा में विकास कार्यों की रफ्तार को और तेज करेगा।

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर जब उठे सवाल — तो बौखलाए बीएमओ ने मीडिया से तोड़ा रिश्ता!

When questions were raised about the negligence of the health department, the distraught BMO broke ties with the media! नलखेड़ा। जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने वाले ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव शायद भूल गए हैं कि सरकारी कुर्सी जवाबदेही के लिए होती है, अहंकार के लिए नहीं।स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्थाओं पर जब मीडिया ने आईना दिखाया, तो बीएमओ ने उस आईने को ही तोड़ देने का रास्ता चुन लिया।मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप से खुद को अलग कर लेना, क्या इस बात का प्रमाण नहीं कि अधिकारी आलोचना से भाग रहे हैं? नलखेड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।अस्पतालों में गंदगी, झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला, पीने के पानी की दुर्दशा और जांच केंद्रों की मनमानी – इन सब पर जब पत्रकारों ने बार-बार लिखा, तो विभाग की नींद टूटने के बजाय बेबसी और दबाव की बदबू आने लगी।जिम्मेदार अधिकारी ने सुधार की दिशा में कदम उठाने के बजाय पत्रकारिता पर ही दूरी बनाकर यह साबित कर दिया कि अब सिस्टम की पारदर्शिता उन्हें खटकने लगी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि डॉ. यादव पिछले 23 सालों से नलखेड़ा में ही क्यों टिके हुए हैं?क्या स्वास्थ्य विभाग में कोई और अधिकारी नहीं जो इस जिम्मेदारी को संभाल सके?या फिर स्थानीय राजनीतिक संरक्षण और रसूख ने नियमों को ताक पर रख दिया है? इतने लंबे समय से एक ही जगह जमे रहना, खुद में एक बड़ा सवाल है —क्योंकि विभागीय नियम साफ कहते हैं कि हर अधिकारी का तबादला निश्चित अवधि में होना चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।लेकिन जब अधिकारी खुद को पद से बड़ा समझने लगे, तो ऐसी ही नौबत आती है — जहां जनता बीमार है, और जिम्मेदार मौन। वंदे मातरम कार्यक्रम जैसे सरकारी आयोजनों से दूरी बनाना,मीडिया संवाद से पलायन करना,और ग्रुप छोड़ देना —ये सब वही संकेत हैं जो यह बताते हैं कि नलखेड़ा का स्वास्थ्य तंत्र बीमार है और इलाज करने वाला खुद इलाज से भाग रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा किक्या डॉ. विजय यादव इस आलोचना को आत्ममंथन का अवसर बनाएंगे,या फिर आलोचना से चिढ़कर नलखेड़ा को लाचारियों की नई दवा लिख देंगे।

ठा. धीरेंद्र सिंह सिसोदिया ‘पिलवास’ को मिली बड़ी जिम्मेदारी, करणी सेना परिवार आगर के जिला महामंत्री पद से नवाज़े गए

Awarded the post of District General Secretary of Karni Sena Parivar Agar चंदा कुशवाह ( संवाददाता ) नलखेड़ा। दृढ़ नेतृत्व और समाजसेवा के प्रति अटूट समर्पण के लिए पहचान बनाने वाले ठा. धीरेंद्र सिंह सिसोदिया ‘पिलवास’ को करणी सेना परिवार, आगर का जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। संगठन ने उनके व्यक्तित्व, कार्यकुशलता और संगठनात्मक दक्षता को देखते हुए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। नियुक्ति की घोषणा के बाद करणी सेना के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों में हर्ष की लहर दौड़ गई। सभी ने सिसोदिया को बधाई देते हुए क्षेत्र और समाज की प्रगति हेतु उनके उत्कृष्ट नेतृत्व की उम्मीद जताई। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि सिसोदिया का सक्रिय एवं परिश्रमी स्वभाव, समाजहित के प्रति सजग दृष्टिकोण और संघर्षशील कार्यशैली हमेशा प्रेरणादायक रही है। उनकी नियुक्ति से करणी सेना को नई दिशा और संगठनात्मक मजबूती मिलेगी। सिसोदिया ने दायित्व के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने, सामाजिक सरोकारों को सशक्त करने और युवाओं को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ज्ञात हो कि सिसोदिया लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी रहे हैं और जनसेवा में भी उनकी छवि ईमानदार एवं जनप्रिय नेतृत्वकर्ता की है।

नलखेड़ा नगर में देवउठनी ग्यारस पर किया तुलसी विवाह कार्यक्रम

Tulsi marriage ceremony was organised on Devuthani Gyaras in Nalkheda town. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नगर में देवउठनी ग्यारस के उपलक्ष में नगर की महिला और पुरुषों द्वारा तुलसी विवाह का कार्यक्रम रखा गया जिसमें सप्तमी के दिन माता पूजन धोली कलश  कार्यक्रम रखा गया, ग्यारस के दिन श्री राम मंदिर से भगवान शालिग्राम की बारात बैंड बाजे के साथ निकली जो नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए बारात निकली जहां रास्ते में नगर की जनता द्वारा जगह जगह पुष्पों से बारात का स्वागत किया गया व फलाहार मिठाई से स्वागत किया जिसमें बाराती नाचते गाते हुए भारत में चल रहे थे, ,उसके पश्चात  बारात गणपति मंदिर पहुंची जहां पर तुलसी माता और भगवान शालिग्राम का विधि विधान के साथ विवाह संपन्न कराया गया साथ ही तुलसी माता के  मामा पवन कुशवाहा द्वारा शादी विवाह का हथेला छुड़वाया गया,  उसके पश्चात नगर के भक्तगणों   द्वारा भोजन प्रसादी का आयोजन रखा गया था जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भोजन प्रसादी का लाभ उठाया !

मां बगलामुखी मंदिर में बच्चे कर रहे छीना-झपटी, भिक्षावृत्ति का वीडियो वायरल; भोपाल मॉडल जैसी कार्रवाई की मांग — SDM व मंदिर प्रशासन पर सवाल

Video of children engaging in physical assault and begging at the Maa Baglamukhi Temple goes viral; demands for action similar to the Bhopal model—SDM and temple administration questioned. संवाददाता: चंदा कुशवाह नलखेड़ा। विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से जबरदस्ती भिक्षा मांगने और सामान छीनने की कोशिश का वीडियो वायरल हो गया है। वीडियो में कुछ बच्चे पर्यटकों और भक्तों के पीछे भागते, सामान पकड़ते और छीना-झपटी की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस घटना ने मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की चौकसी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का दावा सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। धार्मिक पर्यटन स्थल होने के बावजूद सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने में प्रशासन नाकाम नजर आ रहा है। भोपाल में भिक्षावृत्ति अपराध, नलखेड़ा में क्यों ढील? भोपाल में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत भीख मांगना और देना, दोनों को दंडनीय अपराध घोषित किया है। साथ ही भिक्षुकों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है — “जब यह सख्त कदम राजधानी में उठाया जा सकता है, तो नलखेड़ा जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर क्यों नहीं?” SDM सर्वेश यादव की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिसकर्मी और CCTV कैमरे मौजूद हैं। इसके बावजूद भिक्षावृत्ति और श्रद्धालुओं के साथ असुविधा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि SDM नलखेड़ा सर्वेश यादव द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है और मंदिर क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिखते। स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगें भिक्षावृत्ति में शामिल बच्चों की पहचान कर पुनर्वास कराया जाए बच्चों को भिक्षा दिलाने वाले परिजनों/गिरोहों पर FIR मंदिर परिसर में सुरक्षा एवं चेकिंग सिस्टम मजबूत किया जाए बाल संरक्षण विभाग द्वारा नियमित अभियान चलाया जाए त्वरित शिकायत और कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन स्थापित हो “नलखेड़ा अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल, व्यवस्था पर समझौता नहीं” भक्तों ने कहा कि माँ बगलामुखी धाम की प्रतिष्ठा विश्वस्तरीय है। ऐसे में प्रशासन को भोपाल मॉडल लागू कर मंदिर क्षेत्र को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाना चाहिए। “भोपाल में नियम लागू हो सकते हैं, तो नलखेड़ा में क्यों नहीं?” यह सवाल अब स्थानीय समाज और श्रद्धालुओं का है।

प्रेस क्लब नलखेड़ा ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की बड़ी पहल

Press Club Nalkheda took a big initiative against quack doctors. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! क्षेत्र में बढ़ते झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर अब प्रेस क्लब नलखेड़ा ने निर्णायक कदम उठाया है। बीते मंगलवार को प्रेस क्लब प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) को एक शिकायती आवेदन सौंपा, जिसमें झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। आवेदन में उल्लेख किया गया कि नलखेड़ा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के लोगों का इलाज कर रहे हैं। इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि शासन के स्वास्थ्य नियमों का भी खुला उल्लंघन हो रहा है। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं राज्य में झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त अभियान चलाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन नलखेड़ा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आवेदन में इस बात पर नाराजगी जताई गई कि पूर्व में जिन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग ने सील लगाई थी, उन्होंने सील तोड़कर पुनः अपने क्लीनिक चालू कर लिए, जो सीधा-सीधा कानूनी अपराध है। प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश कश्यप ने कहा कि प्रेस क्लब ने यह शिकायत जनता की सुरक्षा और जनहित में दी है। जब प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तब मीडिया को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अब स्वास्थ्य विभाग को यह साबित करना होगा कि मुख्यमंत्री के निर्देश सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी लागू होते हैं। आवेदन में यह भी मांग की गई है कि जिन झोलाछाप डॉक्टरों ने सील तोड़ी है, उनके खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाकर उनके क्लीनिकों को स्थायी रूप से बंद कराया जाए। प्रेस क्लब ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी जनस्वास्थ्य त्रासदी का कारण बन सकती है। छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में जिस तरह जहरीली दवा से मासूम बच्चों की मौत हुई थी, उसी तरह झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गलत दवा या इलाज नलखेड़ा क्षेत्र में भी किसी गंभीर हादसे का रूप ले सकता है। इसलिए इस खतरे को देखते हुए तत्काल और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। जनता और मीडिया की बढ़ती जागरूकता के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग वास्तव में इन झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कस पाएगा या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा। इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश देहलकर ने कहा कि, झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने सील तोड़ी है या अवैध रूप से इलाज किया जा रहा है, तो उसके विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

नलखेड़ा में बैलों की भव्य शोभायात्रा निकली, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने किया किसानों का उत्साहवर्धन

नलखेड़ा में बैलों की भव्य शोभायात्रा निकली, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने किया किसानों का उत्साहवर्धन Municipal Council President representative Vijay Soni encouraged the farmers. चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। परंपरा और संस्कृति का संगम देखने को मिला जब दीपावली के बाद पड़वा पर नलखेड़ा नगर में हर वर्ष की तरह इस बार भी बैलों के जोड़े का पारंपरिक पथ संचलन धूमधाम से निकाला गया। कार्यक्रम की शुरुआत सांवलिया नाथ मंदिर से हुई, जहां विभिन्न गांवों से आए कुल 13 जोड़े बैलों के एकत्र हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में आधे रहे। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच बैलों का यह संचलन नगर के मुख्य मार्ग, चौक बाजार होते हुए गणपति चौराहे तक पहुंचा। रास्तेभर युवाओं ने नाचते-गाते हुए परंपरा का उल्लास मनाया। कार्यक्रम का समापन बड़ा गणपति मंदिर के सामने हुआ, जहां गौ सेवा समिति नलखेड़ा द्वारा बैलों के पालन-पोषण करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण इस प्रकार रहा: प्रथम पुरस्कार ₹11,000 — धरोला के दुर्गेश पिता पन्नालाल द्वितीय पुरस्कार ₹5,100 — ढंडेडा के प्रेम नारायण तृतीय पुरस्कार ₹3,100 — तराना के बाबूलाल.     चतुर्थ पुरस्कार ₹1,100 — नंदू सिंह पिता पर्वत सिंह इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी नगर के पार्षदों के साथ उपस्थित रहे और किसानों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि “नलखेड़ा की पहचान उसकी परंपराओं से है, और बैलों के जोड़े का यह संचलन हमारी कृषि संस्कृति का प्रतीक है। इसे जीवित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” समिति सदस्य सोनू जायसवाल ने बताया कि इस बार बैलों के जोड़ों की संख्या में कमी आई है, जिससे यह स्पष्ट है कि किसानों में पारंपरिक पशुपालन की प्रवृत्ति घट रही है। इस अवसर पर थाना प्रभारी नागेश यादव भी पुलिस बल के साथ मौजूद रहे और प्रथम पुरस्कार विजेता किसान का सम्मान किया। गोवर्धन पूजा से खिला नगर नगर में जगह-जगह गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। गोबर से बनाए गए गोवर्धन पर्वत की पूजा में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। गवली मोहल्ला की परंपरा इस बार भी आकर्षण का केंद्र रही, जहां बच्चों को गोवर्धन पर्वत पर लिटाकर पूजा की गई — यह अनोखी परंपरा पीढ़ियों से यहां निभाई जा रही है। नलखेड़ा की सड़कों पर इस दिन परंपरा, श्रद्धा और संस्कृति ने मिलकर एक अद्भुत दृश्य रचा, जहां नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने परंपरा को नई ऊर्जा और सम्मान दिया।

नलखेड़ा : SDM ने अब तक नहीं किया स्थान निर्धारित, लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग का आरोप — नगर पालिका प्रतिनिधि विजय सोनी ने जताई नाराज़गी

Nalkheda: SDM has not yet determined the location, and is demanding ₹1,500 for the license. Municipal representative Vijay Soni expressed his displeasure. चंदा कुशवाहनलखेड़ा। दिवाली में अब केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन नगर में इस बार अब तक पटाखों की दुकानें नहीं लग सकी हैं। इसका कारण है — SDM कार्यालय द्वारा पटाखा बाजार के लिए स्थान निर्धारित न किया जाना। व्यापारी तैयार बैठे हैं, लेकिन अनुमति और स्थान न मिलने से वे दुकानें नहीं सजा पा रहे हैं। इधर, कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि SDM कार्यालय द्वारा पटाखा दुकान के लाइसेंस के लिए ₹1500 की मांग की जा रही है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हम पिछले कई सालों से पटाखे बेचते आ रहे हैं, लेकिन इस बार लाइसेंस जारी करने में देरी की जा रही है और ₹1500 की मांग की जा रही है। अगर जल्द अनुमति नहीं मिली, तो दिवाली का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा।” नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय सोनी ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “नलखेड़ा में हर साल सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर दिवाली का पर्व मनाते हैं। यह हमारे सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है, लेकिन इस बार बच्चों के चेहरे पर खुशी की जगह मायूसी है क्योंकि पटाखों की दुकानें ही नहीं लगीं।” उन्होंने प्रशासन से तुरंत स्थान तय कर व्यापारियों को राहत देने की मांग की है।व्यापारी भी कहते हैं कि तैयारी पूरी है — स्टॉक आ चुका है, पर बेचने की अनुमति नहीं मिली। दिवाली तक अगर जगह तय नहीं हुई तो उनका माल बेकार हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की देरी से हर साल की तरह इस बार भी अंतिम समय पर हड़बड़ी मचेगी। लोग चाहते हैं कि त्योहार की खुशियों में रुकावट न आए और बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटे।

नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने थामी कमान, देर रात तक चल रहा मुआवज़ा तैयार करने का काम

Farmers may receive a bell of relief on Dhanteras! Nalkheda Tehsildar Priyank Srivastava is in charge, and the work of preparing compensation continues late into the night. चंदा कुशवाह ( संवाददाता )नलखेड़ा ! आगर मालवा ज़िले के नलखेड़ा से राहत भरी खबर लंबे इंतज़ार के बाद किसानों को इस धनतेरस पर मुआवज़े की सौगात मिल सकती है। जब ज़िले को मुआवज़े की सूची से वंचित रखा गया और किसानों में नाराज़गी बढ़ी, तब नलखेड़ा तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव ने खुद मोर्चा संभाला। सूत्रों के अनुसार, तहसील कार्यालय में बीते कई दिनों से तहसीलदार श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार अरुण चंद्रवंशी और राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके लगातार काम में जुटे हुए हैं। तीनों अधिकारी देर रात तक दफ़्तर में रहकर मुआवज़ा सूची की जांच, सत्यापन और बिल तैयार कराने का काम कर रहे हैं, ताकि हर पात्र किसान तक राहत राशि समय पर पहुंच सके। राजस्व निरीक्षक डिंपल उइके द्वारा एक-एक गांव के प्रकरण की बारीकी से जांच की जा रही है, जिससे कोई भी पात्र किसान मुआवज़े से वंचित न रह जाए।एक पटवारी ने बताया कि “तहसीलदार साहब हर सूची खुद देख रहे हैं, कहीं कोई गलती न रह जाए इसके लिए रोज़ मॉनिटरिंग हो रही है। उनका लक्ष्य साफ़ है — धनतेरस पर किसानों के खातों में मुआवज़ा पहुंचना चाहिए।” कर्मचारियों का कहना है कि “अगर यह काम पहले शुरू होता तो हम भी परिवार के साथ दीवाली मना पाते, लेकिन अब किसानों की मुस्कान ही हमारी दीवाली है।” नलखेड़ा तहसील प्रशासन की यह कार्यशैली पूरे जिले के लिए मिसाल बन गई है — जब बाकी जगह फाइलें अटकी रहीं, नलखेड़ा में अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात डटे हुए हैं।

नलखेड़ा मंडी में नहीं बिक रही सोयाबीन… बिक रही है किसानों की मजबूरी!

Soybean is not being sold in Nalkheda Mandi… Farmers’ helplessness is being sold! चंदा कुशवाह नलखेड़ा । नलखेड़ा कृषि उपज मंडी में इस बार किसान भारी परेशानी झेल रहे हैं। सोयाबीन की खरीदी न शुरू होने से लेकर अव्यवस्था तक, हर मोर्चे पर किसानों का सब्र टूटता दिख रहा है। मंडी में न बैठने की जगह है, न पीने के पानी की व्यवस्था और न ही शौचालय। किसान खुले आसमान के नीचे अपनी बोरियां लिए मंडी प्रांगण में बैठे हैं — उम्मीद बस यही कि कोई व्यापारी आए और दाम थोड़ा ठीक मिल जाए।  “ना दाम मिल रहा, ना व्यवस्था… मजबूरी में बेच रहे हैं” ग्राम नालखेड़ा  के किसान चिन्तामन विश्वकर्मा  ने बताया — “सुबह से मंडी में बैठे हैं, लेकिन कोई भाव ही नहीं लगाता। जो आ भी रहे हैं वो ₹3500 से ऊपर देने को तैयार नहीं। MSP जो कि ₹5300 रुपए का तो नाम तक नहीं ले रहे।” एक अन्य किसान बोले — “बैठने की जगह तक नहीं है। मंडी में पानी नहीं, टॉयलेट नहीं, अधिकारी दिखते तक नहीं।” पंजीयन पोर्टल पर फसल नहीं दिख रही, किसान हैरान कई किसानों ने शिकायत की कि पंजीयन के समय पोर्टल पर उनकी सोयाबीन की एंट्री दिख ही नहीं रही। इससे वे खरीदी प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं। इस बारे में जब तहसील  नलखेड़ा के एक पटवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा — “गिरदावरी का काम शासन द्वारा नियुक्त स्थानीय युवाओं द्वारा समय पर किया गया था। सभी रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड भी किए गए हैं। यह समस्या संभवतः तकनीकी गड़बड़ी के कारण है।” SDM सुसनेर की लापरवाही पर उठे सवाल किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी की बदहाल व्यवस्था पर SDM सुसनेर का ध्यान नहीं है। ना तो उन्होंने मौके का निरीक्षण किया, और ना ही मंडी प्रशासन को कोई सख्त निर्देश दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इस बार हालत और खराब हैं। मंडी में व्यवस्था सुधारना SDM की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्होंने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

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