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हॉक फोर्स और एसएसयू में कई पदों पर भर्ती की तैयारी, 300 पद व विशेष सहयोगी दस्ते में 800 पदों पर होगी भर्ती

बालाघाट नक्सलियों के सफाए के लिए पुलिस अपनी रणनीति और संख्या बल को मजबूत करने में जुटी है। नक्सल प्रभावित लांजी और बैहर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की कमान भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संभालेंगे। अभी यहां युवा अधिकारियों की तैनाती की गई है। पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह का कहना है कि युवा आईपीएस को नक्सल आपरेशन की कमान देकर उनके कौशल, सूझबूझ और ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। बल संख्या को मजबूत करते हुए जल्द ही हॉक फोर्स के 300 पद और विशेष सहयोगी दस्ता(एसएसयू) के करीब 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ के बाद गश्त तेज ये बड़े और अहम फैसले ‘मिशन 2026’ को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। 20 मार्च को छत्तीसगढ़ में हुईं दो अलग-अलग मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार गिराने के बाद यहां पुलिस ने अपनी गश्त और तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से लगे करीब 12 कैंप के 700 से अधिक जवान दिन-रात गश्त कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को नक्सलियों की गतिविधि से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिससे पुलिस पहले से ज्यादा सतर्क है। मिशन 2026 के लिए बढ़ा रहे पद दिसंबर 2022 में नक्सल उन्मूल अभियान के तहत पुलिस ने तीन जिलों के क्षेत्रीय युवक-युवतियों का विशेष सहयोगी दस्ता बनाया था। तब बालाघाट में विशेष सहयोगी दस्ता के 80, मंडला में 30 और डिंडौरी में 40 पदों पर युवाओं की अस्थाई भर्ती की गई थी। मिशन 2026 को देखते हुए बालाघाट पुलिस इन पदों को बढ़ाने जा रही है। युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका     मिशन 2026 को देखते हुए मुख्यालय स्तर से हॉक फोर्स और पुलिस के कई पदों पर युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका दिया गया है। हॉक फोर्स के 300 और एसएसयू के 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। हमारी कोशिश है कि युवा पुलिस अधिकारियों के कौशल, उनकी सूझबूझ और ऊर्जा का सही उपयोग हो। – नगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट   वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर हुई ’38 वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खतरे से समग्र रूप से निपटने के लिए, भारत सरकार (जीओआई) ने 2015 में ‘एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ को मंजूरी दी थी। इस नीति में सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकों को सुनिश्चित करने आदि से जुड़ी एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है। नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा और भौगोलिक विस्तार में लगातार कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल 2018 तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है, जुलाई 2021 तक यह संख्या 70 और फिर अप्रैल 2024 तक 38 रह गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही है। उन्होंने बताया, वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2010 में अपने उच्चतम स्तर 1936 पर पहुंच गई थीं, 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। यानी 81 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 85 प्रतिशत घटकर 2010 में 1005 से 2024 में 150 हो गई है। पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी उग्रवादियों द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2019 में 501 थीं, 2024 में घटकर 374 हो गई हैं, यानी 25 प्रतिशत की कमी। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 26 प्रतिशत घटकर 2019 में 202 से 2024 में 150 हो गई है। वर्ष 2022 और 2023 में हिंसा में वृद्धि वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ बढ़े हुए अभियानों के कारण है, क्योंकि सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के मुख्य क्षेत्रों में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार (जीओआई) वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बटालियन, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रशिक्षण और धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करना, किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि प्रदान करके क्षमता निर्माण के लिए सहायता करती है। सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत सुरक्षा बलों की परिचालन और प्रशिक्षण आवश्यकताओं से संबंधित आवर्ती व्यय, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए राज्यों द्वारा किए गए व्यय, सामुदायिक पुलिसिंग, ग्राम रक्षा समितियों और प्रचार सामग्री आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 2014-15 से 2024-25 के दौरान 3260.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विशेष अवसंरचना योजना के तहत विशेष खुफिया शाखाओं, विशेष बलों, जिला पुलिस को मजबूत करने और फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशनों (एफपीएस) के निर्माण के लिए धनराशि प्रदान की जाती है। एसआईएस के तहत 1741 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना के तहत पहले से निर्मित 400 एफपीएस के अलावा 226 एफपीएस का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा शिविरों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों को 1120.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं। विकास के मोर्चे पर, प्रमुख योजनाओं के अलावा, भारत सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कई विशिष्ट पहल की हैं, जिसमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, कौशल और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क संपर्क के विस्तार के लिए 14,618 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 7,768 टावर लगाए गए हैं। कौशल विकास के संबंध में 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) चालू किए गए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 178 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) चालू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं के साथ 5731 … Read more

दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जारी है मुठभेड़, 5 नक्सली ढेर होने की खबर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा-बीजापुर-नारायणपुर जिले की सीमा पर पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है। अब तक 5 से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। मौके से 3 शव और इंसास राइफल बरामद की गई है। नक्सलियों के बड़े कैडर्स की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने कोर इलाके में घेराबंदी की। करीब 500 जवान इस अभियान में शामिल हैं। फायरिंग सुबह 8 बजे से जारी है। इंद्रावती नदी के पार ऑपरेशन पुलिस को जानकारी मिली थी कि इंद्रावती नदी के पार भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इसी आधार पर एक दिन पहले दंतेवाड़ा और बीजापुर से जवानों को अभियान के लिए रवाना किया गया था। 25 मार्च की सुबह नक्सलियों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक, फोर्स ने नक्सलियों को चारों ओर से घेर लिया है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय और एएसपी आरके बर्मन ने बताया कि मुठभेड़ जारी है। पूरी स्थिति सर्च ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही स्पष्ट होगी। दोनों ओर से हो रही फायरिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंगल में पहले से मौजूद नक्सलियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से लगातार गोलियां चल रही हैं। खबर है कि जवानों ने नक्सलियों को घेर लिया है। मुठभेड़ के बारे में पूरी जानकारी कुछ देर बाद पता चलेगी। लेकिन माना जा रहा है कि फोर्स ने बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है, जिससे कई नक्सली मारे जा सकते हैं। नक्सलियों को हो सकता है भारी नुकसान दंतेवाड़ा के SP गौरव राय ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जवानों को नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद ऑपरेशन शुरू किया गया। फिलहाल मुठभेड़ जारी है और ज्यादा जानकारी का इंतजार है। यह मुठभेड़ ऐसे समय में हो रही है जब बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। सुरक्षा बल लगातार नक्सलियों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुठभेड़ से नक्सलियों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। चार दिन पहले इसी इलाके में 30 नक्सली मारे गए थे चार दिन पहले इसी इलाके में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 30 नक्सलियों को मार गिराया था। दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर 26 और कांकेर में 4 नक्सली ढेर हुए थे। यह नक्सलियों के लिए उनके TCOC (टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन) माह में सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह हमला हाल ही में सरेंडर किए नक्सली दिनेश मोड़ियाम की सूचना के आधार पर किया गया था।

Chhattisgarh में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन, सुरक्षाबल ने 30 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया

बीजापुर / कांकेर छत्तीसगढ़ में आज सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर और कांकेर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुए एनकाउंटर में अब तक कुल 30 नक्सली मारे गए हैं। इसमें बीजापुर में 26 और कांकेर में 4 नक्सली मार गिराए गए हैं। आज सुबह 7 बजे से ही लाल आतंक के खिलाफ जवानों का अभियान जारी था। एक बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में मुठभेड़ हुई तो दूसरी कांकेर में हुई है। इसमें एक जवान की भी शहादत हुई है। कुल 30 नक्सली एनकाउंटर में ढेर बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा क्षेत्र के अलावा कांकेड़ में भी सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को ठिकाने लगाने में सफलता मिली है। कांकेर जिले में हुई मुठभेड़ में कुल 4 नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस ऑपरेशन में अब कुल 30 नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिसमें बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 26 और कांकेर जिले में हुए एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए हैं। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों के खिलाफ आने वाले दिनों में और भी बड़े ऑपरेशन होंगे. नक्सली कमांडर हिडमा की तलाश में सुरक्षा बल जुटे हुए हैं. हिडमा की तलाश के लिए 125 से ज्यादा गांवों की टेक्निकल मैपिंग की जा रही है. सिक्योरिटी फोर्स छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित करीब 125 गांव का थर्मल इमेजिंग करवा रही है. सुरक्षाबलों ने इस साल अब तक 77 नक्सली ढेर किए हैं. कांकेर में जारी नक्सली ऑपरेशन के बार में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि मुठभेड़ अभी जारी है और अब तक हमने चार शव और एक स्वचालित राइफल बरामद की है। यह मुठभेड़ कांकेर-नारायणपुर सीमा क्षेत्र में हुई, जब माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद एक संयुक्त पुलिस दल को तलाशी अभियान के लिए भेजा गया था। एसपी ने बताया कि तलाशी अभियान अभी भी जारी है और शाम तक विस्तृत जानकारी दी जाएगी। गुरुवार को यह दूसरी मुठभेड़ है क्योंकि सुकमा में भी एक और मुठभेड़ चल रही है,जिसमें अब तक 18 शव बरामद किए जा चुके हैं। सीएम ने थपथपाई पीठ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दो अलग-अलग ऑपरेशनों के बाद,कांकेर और बीजापुर में 26 नक्सलियों के शव मिले हैं। हम अपने सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का भी यह संकल्प है कि 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाए। हमें विश्वास है कि उनका संकल्प पूरा होगा। यह डबल इंजन सरकार का लाभ है। सुबह से चल रहा था ऑपरेशन छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सलियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आज बीजापुर और दंतेवाड़ा के सरहदी में थाना गंगालूर क्षेत्रान्तर्गत माओवादी विरोधी अभियान पर संयुक्त टीम निकली थी। सुबह 7 बजे से माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार फायरिंग जारी थी। एनकाउंटर वाले क्षेत्र में भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद के साथ दो नक्सलियों के शव बरामद हुआ था। टीम की तरफ से सर्चिंग जारी थी।

छत्तीसगढ़ : बीजापुर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में कई नक्सली मारे गए

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों की सीमा पर स्थित जंगल में उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम गंगालूर थाना क्षेत्र (बीजापुर) में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। अधिकारी ने बताया कि दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ अभी भी जारी है और क्षेत्र में सर्चिंग आपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि विस्तृत जानकारी का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक, इस मुठभेड़ में कई नक्सली मारे गए हैं, हालांकि उनकी संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा बलों को इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। जवानों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, और अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं, ताकि छिपे हुए नक्सलियों को पकड़कर इलाके को सुरक्षित किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही मारे गए नक्सलियों की सही संख्या और उनके संगठन से जुड़ी जानकारी सामने आ पाएगी। नक्सलियों के खिलाफ एक्शन इससे पहले बीजापुर और नारायणपुर से लगी महाराष्ट्र की सीमा पर सुरक्षाबल और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई थी। इसमें 31 नक्सलियों की मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही मुठभेड़ की जगह से ऑटोमैटिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने बीजापुर दंतेवाड़ा बॉर्डर पर गंगालूर थाना क्षेत्र में मुठभेड़ होने की पुष्टि की है. गंगालूर के एएंड्री जंगलों में जवानों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान के लिए निकली थी. इसी दौरान मुठभेड़ शुरू हो गई. इलाके में जवानों का सर्चिंग अभियान भी चल रहा है. टीसीओसी क्या है ?: TCOC यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन ( Tactical Counter Offensive Campaign) हैं. गर्मी के दिनों में बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी TCOC कैंपेन चलाते हैं. मार्च से शुरू होकर टीसीओसी जून तक चलता है. इस दौरान माओवादी संगठन सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इस दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही सड़क निर्माण में लगी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश नक्सली करते हैं. नक्सलियों के टीसीओसी के दौरान बस्तर में बीते सालों में कई बड़ी नक्सली घटनाएं हुई. जिनमें जवानों को काफी नुकसान हुआ.     3 अप्रैल 2021 को सुकमा बीजापुर बॉर्डर पर टेकलगुड़ा में नक्सली घटना में 22 जवान शहीद     21 मार्च 2020 में सुकमा के मीनपा में नक्सली घटना में 17 जवान शहीद     अप्रैल 2017 में सुकमा जिले के बुर्कापाल में नक्सली घटना में 25 जवान शहीद लेकिन टीसीओसी के दौरान साल 2023 और साल 2024 में जवानों की कड़ी सुरक्षा के कारण नक्सली किसी भी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे सके, बल्कि इस दौरान नक्सल संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा है. साल 2024 में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों को बड़ा नुकसान हुआ है. 2024 में सुरक्षाबलों ने 217 माओवादियों को मार गिराया. 15 अप्रैल 2024 में जवानों ने कांकेर जिले के छोटे बेठिया में एक एनकाउंटर को अंजाम दिया. इस एनकाउंटर में 29 माओवादी मारे गए. 4 अक्टूबर 2024 को नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले के थुलथुली में एनकाउंटर में 38 माओवादियों को जवानों ने मार गिराया. साल 2023 में नक्सलियों को नुकसान: टीसीओसी के दौरान साल 2023 में 22 मुठभेड़ हुए जिसमें जवानों ने चार हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया. इस साल 150 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, 78 नक्सलियों ने सरेंडर किया.

सभी की हुई शिनाख्त, छत्तीसगढ़-बीजापुर में मुठभेड़ में मारे गए 16 लाख के इनामी नक्सली

बीजापुर। बीजापुर में बीते दिनों गंगालुर थाना क्षेत्र के तोड़का व कोरचोली के जंगल में हुई मुठभेड़ में मारे  गये आठ नक्सलियों की शिनाख्त हो गई है। मारे सभी नक्सलियों पर 16 लाख रुपये का ईनाम घोषित है। मारे गए नक्सली पश्चिम बस्तर डिवीजन के गंगालुर एरिया कमेटी एसीएम समेत मिलिशिया कंपनी के सदस्य शामिल है। पुलिस ने बताया कि तोड़का कोरचोली मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान कर ली गई है। मुठभेड़ में मारे गए 8 नक्सलियों में 5 लाख के इनामी गंगालुर एरिया कमेटी एसीएम कमलेश नीलकंठ उम्र 24, 3 लाख के इनामी गंगालुर एलओएस सदस्य ताती कमलू पिता सोमा उम्र 30, 3 लाख के इनामी गंगालुर एलओएस सदस्य मंगल ताती पिता सुक्कू ताती उम्र 35, 1 लाख के इनामी मिलिशिया कमाण्डर लच्छू पोटाम पिता बुड़ता उम्र 40, 1 लाख के इनामी आरपीसी उपाध्यक्ष शंकर ताती पिता सुक्कू ताती उम्र 26, 1 लाख के ईनामी सावनार आरपीसी उपाध्यक्ष राजू ताती पिता सुक्कू ताती, 1 लाख के ईनामी मिलीशिया कंपनी सदस्य विज्जु पदम पिता मुन्ना पदम उम्र 22 व 1 लाख के इनामी जनताना सरकार कमाण्डर सावनार आरपीसी सन्नू ताती पिता स्व. मासा उम्र 40 शामिल है। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के बाद घटना स्थल से 1 इंसास रायफल 3 मैगजीन, 2 नग 12 बोर रायफल व सेल, 1 नग बीजीएल लांचर, 10 नग सेल व पोच, 4 नग मुजल लोडिंग रायफल, स्क्रेनर सेट व भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री माओवादी साहित्य व दैनिक उपयोगी सामान बरामद की गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार 2026 तक नक्सलियों के सफाये के लक्ष्य पर खरी उतरती नजर आ रही, अब तक 237 नक्सलियों को ढेर किया

जगदलपुर  छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में 2024 में अब तक 237 नक्सली ढेर किए जा चुके है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद जवानों का हौंसला बढ़ा हुआ है। बस्तर में नक्सलियों के लिए कोई रास्ता नहीं बच गया है। नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें क्योंकि आने वाले दिनों में अभियान और भी तेज किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बस्तर में अब तक 237 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है जिनमें से 217 के शव पुलिस को मिले हैं। अन्य 20 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि नक्सली स्वयं कर चुके हैं। इस अवधि में 925 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है तो 792 नक्सली अपने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौट आए हैं। इन मुठभेड़ में पुलिस को नक्सलियों के 284 हथियार पुलिस को मिले हैं जिसमें इंसास, एके-47 राइफल समेत कई बड़े हथियार हैं। इनमें से कई हथियार नक्सलियों ने पुलिस से लूटे थे। जानिए कितने नक्सली एक साल में ढेर इन मुठभेड़ में पुलिस को नक्सलियों के 284 हथियार पुलिस को मिले हैं, जिसमें इंसास, एके-47 राइफल समेत कई बड़े हथियार हैं। इनमें से कई हथियार नक्सलियों ने पुलिस से लूटे थे। इस वर्ष सुरक्षा बल ने सीधे नक्सलियों को निशाना बनाकर अभियान चलाया। बीते चार दशक में एक वर्ष के भीतर सर्वाधिक 124 बार पुलिस व नक्सलियों के बीच आमना-सामना हुआ। इन मुठभेड़ों में नौ करोड़ 24 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सलियों को ढेर किया गया है। इनमें 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली रणधीर, नीति, रुपेश उर्फ कोलू जोगन्ना शामिल थे। 28 नए कैंप सीधे नक्सलियों के गढ़ में प्रदेश में इस वर्ष 28 नवीन सुरक्षा कैंप सीधे नक्सलियों के गढ़ में खोले गए हैं। विगत माहभर में ही लगभग दस नए कैंप नक्सलियों के आधार क्षेत्र तेलंगाना राज्य सीमा से सटे दक्षिण व पश्चिम बस्तर क्षेत्र में खोले गए हैं। इसी तरह अबूझमाड़ में भी सुरक्षा कैंपों की दीवार खड़ी कर दी गई है। आईजीपी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस वर्ष मिली सफलता के बाद जवानों का हौसला बढ़ा हुआ है। बस्तर में नक्सलियों के लिए कोई रास्ता नहीं बच गया है। नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। अबूझमाड़ में 130 नक्सली हुए ढेर अबूझमाड़ में पिछले एक साल यानि 2024 में सुरक्षाबलों और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 130 नक्सलियों को मार गिराने में सफलता मिली है, वहीं पूवर्ती गांव जो नक्सली कमांडर हिडमा का गांव था वहां भी पुलिस ने कैंप खोला है, अबूझमाड़ इलाके में कुल सात नए पुलिस कैंप खोले गए हैं, जहां पहले पगडंडियों के सहारे जाना मुश्किल होता था वहां पर अब चार पहिया गाड़ियां दौड़ती नजर आ रही है, नियद नेल्लानार योजना के तहत गांवों में विकास के कार्य कर दशकों से मूलभूत सुविधाओं से नक्सली दहशत के चलते महरूम रहने वाले ग्रामीणों के लिए सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से होने लगा है. वहीं सरकार की सरेंडर नीति से प्रभावित होकर पिछले पांच साल में जितने नक्सलियों ने सरेंडर किया था, उतने नक्सली एक साल में सरेंडर कर समाज की मुख्यधारा में वापस लौट आए है. जो अबूझमाड़ में सफलता की कहानी कहता नजर आता है. अबूझमाड़ में बनी पक्की सड़कें 2024 की शुरुआत में अबूझमाड़ से नारायणपुर जिला मुख्यालय तक जाने के लिए सड़क मार्ग सोनपुर, कोहकामेटा और आंकाबेड़ा तक ही सीमित था, लेकिन 2024 में नक्सलियों के खिलाफ शुरु हुए अभियान के बाद यहां की स्थिति बदली है. नक्सलियों के खिलाफ प्रहार की रणनीति में बदलाव आने के साथ ही नक्सलियों के आधार इलाके में पुलिस बेस कैंप स्थापित करने के साथ ही सड़को का निर्माण कार्य भी तेजी से होने लगा. एक साल के अंदर अबूझमाड़ के घोर नक्सल प्रभावित घने जंगलों से घिरे कस्तूरमेटा, मोहंदी, इरकभट्टी, कच्चापाल, मसपूर, होरादी और गारपा तक पुलिस ने पहुंच कर पुलिस कैंप खोलने के साथ ही इन इलाकों तक सड़को का निर्माण कार्य नियद नेल्लानार योजना के तहत तेजी से कराया जहां चार दशकों से लोग नक्सलियों के दहशत के साए में जीवन जीने को मजबूर हुआ करते थे, वहां पुलिस ने उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की आजादी दिलाई है. 2025 में 6 नए थाने बनाने की योजना 2025 के साल में नारायणपुर पुलिस अबूझमाड़ में 6 नए थाने का विस्तार करने वाली हैं, जिसमे गारपा और कस्तूरमेटा में पुलिस ने अपने कैंप स्थापित कर दिए है, जिन्हें थाने का दर्जा मिलेगा वहीं फारसबेडा, तोके, कुतुल और गोमागल में थाना खोलना है जो बताता है कि अब नारायणपुर पुलिस नक्सलियों के कोर इलाके में घुसने की 2025 में योजना बना चुकी है. आने वाला साल अबूझमाड़ में एक नया इतिहास फिर लिखता नजर आएगा. क्योंकि 2024 में अबूझमाड़ में नक्सलियों के खिलाफ बड़े आपरेशन करने की रणनीति में बदलाव करते हुए नारायणपुर पुलिस ने अबूझमाड़ से लगे कोंडागांव, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिले की पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों के आधार इलाके में आपरेशन लांच किया है. पुलिस की रणनीति में आए बदलाव का एक बड़ा असर नक्सलियों के कोर इलाके अबूझमाड़ में देखने को मिला. 2024  में नारायणपुर पुलिस अन्य जिलों के साथ मिलकर 130 नक्सलियों को अबूझमाड़ में मार गिराने में सफलता हासिल किया. 130 नक्सलियों को उन इलाको में जाकर पुलिस के जवानों ने मारा जहां कभी फोर्स नहीं पहुंच पाई थी और उन इलाकों को नक्सलियों ने अपना ठिकाना बना दिया लिया था, लेकिन अब यहां से नक्सलियों ने अपना ठिकाना बदला है. नक्सलियों के गढ़ से नाम से जाने जाने वाले अबूझमाड़ और वहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए 2024 का साल बड़े बदलाव लेकर आया जहा लोगों को नक्सलियों के दहशत और भय के साए में जीवन जीने से आजादी मिली, वही इन इलाकों में नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास के रास्ते के निर्माण की नई बयार लिखी गई, अब इन रास्तों से विकास से महरूम रहने वाले ग्रामीणों को दशकों बाद 2025 के नए साल में विकास की किरण की सौगात मिलेगी. यह जानकारी नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की तरफ से मिली है.   

अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार के साथ जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने नई एंटी नक्सल नीति में विस्तार किया है. बीजेपी की राज्य सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों की सुविधाओं को बढ़ाने जा रही है. गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सल नीति को लेकर बात करते हुए बताया अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार की राशि दी जाएगी. साथ ही रहने के लिए जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे. सरकार का प्लान है कि घर जमीन के साथ ही नक्सलियों को खास ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार हासिल करने में आसानी हो. नई नीति के तहत नक्सलियों पर जो इनाम की राशि होती है वो भी नक्सलियों को दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखने के लिए पांच जिलों में भवन बन रहे हैं. शर्मा ने बताया  नक्सलवाद को कम करने के लिए कई आयामों पर काम हो रहे हैं. आगे की जिंदगी जीने के लिए तमाम सुविधाएं दी जाएगी। फिर चाहे वह रहने के लिए जमीन-मकान हो या फिर रोजगार से जुड़े संसाधन। अलग खास भवनों में रखकर नक्सलियों को ट्रेंड किया जाएगा। उन्हें काम सिखाया जाएगा ताकि वह आगामी जीवन में रोजगार हासिल कर सकें। शर्मा बोले- मुझसे किसी ने कहा, नक्सली बनना अच्छा नई नीतियों को बेहतर बताते हुए विजय शर्मा  सुविधाएं गिनाते हुए बोले- ये फायदे सुनने के बाद मुझसे एक सीनियर पत्रकार ने कहा था कि ऐसे में तो नक्सली बनना ही अच्छा है। यह कहकर गृहमंत्री मुस्कुराए। मांझी तय करेंगे गांव में क्या बनेगा गृहमंत्री ने बताया कि, पंचायती राज के माध्यम से बस्तर के विकास का काम हम करने जा रहे हैं। गांवों के मांझियों (बस्तर के अंदरूनी इलाकों के जनप्रतिनिधि) की भागीदारी सुनिश्चित की जाने की मांग उठी थी, तो अब बस्तर के जिला पंचायत के सभागृह में मांझियों की बैठक होगी। जिलेवार ये बैठकें होंगी और मांझी बताएंगे कि उनको क्या-क्या निर्माण कार्य करवाने हैं। इन सभी आयामों को मिलाकर नया सॉल्यूशन समाज को देने की कोशिश है। नक्सल नीति से जुड़ी गृहमंत्री की कुछ बड़ी बातें-     हम अनेक आयामों में काम हो रहे हैं। हम ये भी कर रहे हैं कि सरेंडर बढ़े, लोग नक्सलवाद में न जाए।     अब बस्तर के पांच जिलों में ऐसे भवन तैयार हैं, जहां पर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखा जाएगा।     इन भवनों में उनका स्किल डेवलपमेंट किया जाएगा। वहां उनके रहने खाने के लिए 3 साल की व्यवस्था होगी।     जो हथियार वह लेकर के आएंगे उस हथियार से जुड़ी जो राशि घोषित है वह भी उनको दी जाएगी।     उनको प्लॉट दिया जाएगा, उनको प्रधानमंत्री आवास दिया जाएगा।     ये पॉलिसी इस उद्देश्य के साथ तैयार हुई है कि लोग मुख्यधारा में आएं। सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती।     IED ब्लास्ट कर और बंदूक के दम पर गांव की उन्नति को रोक देना कब तक सहा जाएगा।     नक्सल घटनाओं से पीड़ित और प्रभावितों के लिए अलग योजना बनी है, केंद्र से भी और राज्य की भी।     बस्तर के युवाओं को लगातार रायपुर लाया जाएगा, उनके एजुकेशन और स्पोर्ट्स को लेकर कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मार्च 2026 तक खत्म करना है नक्सलवाद हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। इसके बाद से ही प्रदेश में एनकाउंटर और नक्सलियों के खिलाफ दूसरे तरीकों की कार्रवाई बढ़ी है। प्रदेश सरकार का दावा है कि एक साल में 212 से अधिक नक्सली एनकाउंटर में मारे गए हैं। इतने एनकाउंटर पिछली सरकारों के 5-5 साल के कार्यकाल में भी नहीं हुए थे।

123 ग्रामीणों के मोबाइल भी लूटे, छत्तीसगढ़-बस्तर में नक्सलियों ने की ग्रामीण की हत्या

बस्तर. छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों पर कार्रवाई के बीच उनका भी उत्पात जारी है. वे ग्रामीणों को अपना निशाना बना रहे हैं. सुकमा जिले में शुक्रवार को एक ग्रामीण की हत्या कर दी. इतना ही नहीं नक्सली गांव के 123 ग्रामीणों का मोबाइल भी लूटकर ले गए हैं. नक्सली वारदात के बाद गांव में दहशत का माहौल है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज शनिवार से छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे. वे बस्तर में रात भी बताएंगे. इससे पहले नक्सली बस्तर में  दहशत फैलाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. बौखलाए नक्सली ग्रामीणों की हत्या कर रहे हैं. बीजापुर के बाद अब सुकमा जिले में भी नक्सलियों का तांडव देखने को मिल रहा है. यहां चिंतागुफा थाना क्षेत्र के कहर दुलेड़ गांव में नक्सलियों ने 31 साल के ग्रामीण मड़कम हड़मा की हत्या कर दी. वे उसे उसके घर से किडनैप करके ले गए थे. नक्सलियों ने इस पर मुखबिरी का शक जताया और उसकी हत्या करके सड़क पर शव फेंक दिया. इसके बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है. मोबाइल भी लूटे इतना ही नहीं नक्सलियों ने गांव के ग्रामीणों के मोबाइल भी छीन लिए.123 ग्रामीणों के मोबाइल को लूटकर अपने साथ ले गए. बताया जा रहा है कि नक्सलियों को इस बात का अंदेशा है कि ग्रामीण उनके मूवमेंट की जानकारी सुरक्षाबलों और पुलिस तक पहुंचा रहे हैं.क्षेत्र में ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि पूरे गांव के ग्रामीणों के मोबाइल नक्सलियों ने लूटे हैं. इस घटना के बाद सिर्फ दुलेड़ गांव ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में देखने को मिल रहा है.

फूलबगड़ी पुलिस व डीआरजी की संयुक्त टीम ने दो नक्सलियों को विस्फोटक समेत गिरफ्तार किया

सुकमा सुकमा| जिले के फूलबगड़ी पुलिस व डीआरजी की संयुक्त टीम ने दो नक्सलियों को विस्फोटक समेत गिरफ्तार किया है। नक्सलियों की निशानदेही पर जंगल से 5 किलो वजनी टिफिन बम, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, जिलेटिन रॉड, बरामद की हैं। दोनों ने अपना नाम माड़वी मंगा और माड़वी भीमा बताया। दोनों को फुलबगड़ी थाने में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया। जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। नक्सलियों की मौजूदगी की खबर पर 7 दिसंबर को थाना फुलबगड़ी से जिला बल की पार्टी बड़सेट्टी व आस-पास क्षेत्र रवाना की थी। इस दौरान बड़ेसट्टी बुरदापारा, करकापारा के बीच नाले के पास के जंगल में 2 संदिग्ध व्यक्ति जवानों को देखकर भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा। दोनों जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए विस्फोटक को प्लांट करने की तैयारी में थे।  

बीजापुर में सुरक्षाबलों को मिली सफलता, दस हजार के इनामी समेत तीन नक्सली गिरफ्तार

बीजापुर  माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में बीजापुर जिले में संयुक्त सुरक्षा बल को बड़ी सफलता मिली है. मिरतुर व नेलसनार पुलिस ने अलग अलग कार्रवाई में तीन अलग अलग क्षेत्रों से 3 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. विस्फोटक के साथ 1 नक्सली गिरफ्तार: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीजापुर के अनुसार 1 दिसंबर 2024 को माओवादियों के खिलाफ नक्सल ऑपरेशन चलाया जा रहा था. इसी दौरान मिरतुर पुलिस व छत्तीसगढ़ 15 ई बटालियन चेरली पिनकोंड़ा में साप्ताहिक बाजार की सुरक्षा व्यवस्था से लौट रही थीं. तभी पाटलीगुड़ा पुलिया के पास 5 किलोग्राम विस्फोटक के साथ 24 वर्षीय सुरेश कारम को गिरफ्तार किया गया. उसके साथ एक अन्य नक्सली भी गिरफ्तार किया गया.  अभियान से वापसी के दौरान पाटलीगुडा पुलिया के पास दो संदिग्ध व्यक्ति पुलिस पार्टी को देखकर भागने का प्रयास कर रहे थे। जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। इनमें जन मिलिशिया सदस्य सुरेश कारम पिता स्व. कोसा कारम उम्र 24 निवासी हुर्रेपाल व जन मिलिशिया सदस्य राजेश माड़वी पिता स्व. मंगू माड़वी उम्र 23 निवासी हुर्रेपाल शामिल है। इनके पास रखे थैला की चेकिंग करने पर 5 किलो का टिफिन बम, कॉर्डेक्स वायर बरामद किया गया है। वही थाना नेलसनार की टीम द्वारा बोदली मरी नदी के किनारे से जनताना सरकार सदस्य व सीएनएम कमाण्डर दशरथ हेमला पिता वेल्ला उर्फ मंगू उम्र 29 निवासी फुलादी कुंजामपारा थाना मिरतुर को पकड़ा गया। पकड़ा गया नक्सली 17 अप्रैल 2019 को नगर सैनिक राजूराम गोंदे की हत्या में शामिल था। जिसकी गिरफ्तार के लिए पुलिस अधीक्षक बीजापुर ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पकड़े गए नक्सलियों के विरुद्ध मिरतुर व नेलसनार थाना में वैधानिक कार्यवाही कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय बीजापुर के समक्ष पेश किया  है। नगर सैनिक की हत्या में शामिल कमांडर गिरफ्तार: नक्सलियों के खिलाफ दूसरी कार्रवाई नेलनसार पुलिस ने किया. जवानों ने सीएनएम कमांडर दशरथ हेमला को गिरफ्तार किया. जो साल 2019 में नगर सैनिक राजू राम गोंदे की हत्या में शामिल था. दशरथ हेमला पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित था. पकड़े गए तीनों नक्सली सीएनएम सदस्य व जनताना सरकार से जुड़े माओवादी बताए जा रहे हैं. बीजापुर में मोबाइल टावर में नक्सलियों ने लगाई आग: रविवार देर रात नक्सलियों ने बीजापुर के मोरमेड गांव में लगाए गए निजी मोबाइल कंपनी के मोबाइल टावर में आग लगा दी. नक्सली सादी वेशभूषा में पहुंचे और टावर में लगे उपकरणों को जला दिया. हाल ही में दूरस्थ अंचल में कनेक्टिविटी बढ़ाने मोबाइल टावर लगाया गया था.

भैरमगढ़ एरिया कमेटी का मिला पर्चा, छत्तीसगढ़-बीजापुर में नक्सलियों ने ने मुखबिरी में युवक का घोंटा गला

बीजापुर. बीजापुर जिले में नक्सलियों ने शनिवार रात पुलिस मुखबिरी के आरोप में एक ग्रामीण युवक की गला घोंटकर निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी। भैरमगढ़ एरिया कमेटी द्वारा जारी पर्चा छोड़ा गया है। इसमें ग्रामीण युवक पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए हत्या करने की बात लिखी हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के डालेर निवासी युवक कुममेश कुंजाम (25) की शनिवार रात नक्सलियों ने गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद नक्सलियों ने शव को चिहका टिन्डोडी जोडान मार्ग पर डाल दिया। घटनास्थल से भैरमगढ़ एरिया कमेटी द्वारा जारी पर्चा छोड़ा गया है। इसमें ग्रामीण युवक पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए हत्या करने की बात लिखी हुई है। भैरमगढ़ पुलिस शव को कब्जे में लेकर वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

मध्य प्रदेश में अब सिर्फ तीन नक्सली बचे, इन्हें पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब सिर्फ 3 नक्सली बचे हैं. ये तीनों नक्सली बालाघाट और मंडला जिले में एक्टिव हैं और इनके खात्मे के लिए राज्य में 7500 से ज्यादा सुरक्षा बल तैनात है. पुलिस के मुताबिक ये तीनों बालाघाट और मंडला में एक्टिव हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इन तीनों को पकड़ने और खत्म करने के लिए 7 हजार 500 से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया है। हालांकि, ये अभी भी सुरक्षा बलों की पकड़ से दूर नजर आ रहे हैं। इन नक्सलियों को खत्म करने के लिए दो जिलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 3 बटालियन समेत 7 हजार 500 से ज्यादा पुलिस बल तैनात हैं। बता दें कि इस मिशन में एक आईजी, एक डीआईजी और 6 एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से सीआरपीएफ की दो और बटालियन मांगी हैं ताकि इन तीनों नक्सलियों को पकड़ा जा सके। 24 साल से गिरफ्तार नहीं     अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस पिछले 24 सालों में इन 3 नक्सलियों में से एक को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। आखिरी बार साल 2000 में एक नक्सली पकड़ा गया था, उसे भी 2004 में रिहा कर दिया गया था। अफसरों का कहना है कि इन नक्सलियों का ग्रामीण इलाकों में मजबूत नेटवर्क है। ये छापेमारी से पहले ही फरार हो जाते हैं। पुलिस का ये भी कहना है कि यहां छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 60 नक्सलियों का मूवमेंट है, इसलिए भारी सुरक्षा बल तैनात हैं। केवल बालाघाट में 6 हजार जवान तैनात बता दें कि अकेले बालाघाट में 6 हजार पुलिस जवान तैनात हैं। जबकि मंडला में 1 हजार 500 पुलिस बल हैं। इन जवानों को तैनात करने की वजह यह बताई जा रही है कि बालाघाट में दूसरे राज्यों यानी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से करीब 60 नक्सलियों का मूवमेंट रहता है। इनके साथ मुठभेड़ होती रहती है, जिसके चलते यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसकी कितनी टीमें तैनात     सीआरपीएफ – 3 बटालियन     एसएएफ – 1 बटालियन     हॉक फोर्स – 1 बटालियन     कोबरा – 1 कंपनी     स्टेट आईबी टीम 1     जिला पुलिस बल 2500 ये हैं तीन नक्सली जिन तीन नक्सलियों की तलाश पूरी पुलिस फोर्स कर रही है उनमें पहला नाम दीपक उर्फ ​​सुधाकर का है, जिसकी उम्र 50 साल है। उस पर 29 लाख का इनाम घोषित है। बताया जा रहा है कि वो बालाघाट के ग्राम पालागोंदी चौकी सोनावाली थाना रूपझर का रहने वाला है। दीपक पर बालाघाट में 125 मामले दर्ज हैं। दूसरी नक्सली जिसकी पुलिस तलाश कर रही है उसका नाम संगीता उर्फ ​​सेवंती पंद्रे है, जिसकी उम्र 38 साल है। इस पर 14 लाख का इनाम है। तीसरे का नाम राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता है, जिसकी उम्र 60 साल है। पुलिस ने उस पर भी 14 लाख का इनाम रखा है। वो 1991 से सक्रिय है। उस पर करीब 60 मामले दर्ज हैं। राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता को 2000 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन 2004 में उसे छोड़ दिया गया था। तीन नक्सली को पकड़ने में 70 करोड़ रुपए खर्च मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तीनों नक्सलियों को पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। यह खर्च नक्सल इलाकों में कैंप, हथियार, वाहन, पेट्रोलिंग, ट्रेनिंग, डीजल-पेट्रोल, बिजली-पानी आदि पर होता है। मुखबिरों का खर्च भी इसमें शामिल है। सीआरपीएफ की 3 बटालियन और दूसरे बलों के वेतन और भर्तियों पर होने वाला खर्च अलग है।

जवानों ने सफल अभियान का उत्सव हथियार हाथ में उठाकर जवान नाचते-गाते हुए मनाया

सुकमा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वर्ष 2026 तक छत्‍तीसगढ़ से नक्सलियों का सफाया करने का जो लक्ष्य तय किया था, पिछले 11 माह में डबल इंजन की सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को गति देते हुए नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। शुक्रवार को बस्तर संभाग के सुकमा जिले में भेज्जी थाना क्षेत्र के ग्राम कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम, भंडारपदर के जंगल-पहाड़ी में शुक्रवार को हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बल ने तीन महिला समेत दस नक्सलियों को ढेर कर दिया है। सभी के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), एक सिंगल शाट व पांच भरमार व पिस्टल बरामद किए गए हैं। नक्सलियों का लैपटाप भी मिला है। सफल अभियान का नाच कर मनाया जश्‍न सफल अभियान के बाद नक्सलियों के शव व हथियार लेकर जवान कोताचेरु स्थित सीआरपीएफ कैंप पहुंचे। डीआईजी कमलोचन कश्यप ने जवानों का मुंह मीठा कर सफल अभियान की बधाई दी। जवानों ने सफल अभियान का उत्सव हथियार हाथ में उठाकर जवान नाचते-गाते हुए मनाया। इससे पहले कांकेर में मिली सफलता का उत्सव भी जवानों ने इसी तरह से मनाया था। कुछ वर्ष पहले जब बस्तर में नक्सली मजबूत स्थिति में थे, तो सुरक्षा बल पर हमले के बाद इसी तरह से सफलता का जश्न मनाते थे। झीरम कांड में भी नक्सलियों ने नेताओं व जवानों को मारने के बाद शवों पर नाचकर जश्न मनाया था। नक्सलियों के विरुद्ध यह सर्वाधिक सफल वर्ष राज्य गठन के बाद से नक्सलियों के विरुद्ध यह सर्वाधिक सफल वर्ष रहा है। सुकमा मुठभेड़ में मारे गए 10 नक्सलियों के साथ इस वर्ष 207 नक्सलियों के शव पुलिस को मिल चुके हैं, जबकि इससे अधिक नक्सलियों को मार गिराने का पुलिस का दावा है। इस अवधि में 787 नक्सलियों को गिरफ्तार, 789 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया व 262 हथियार पुलिस को मिले हैं। 21 लाख के इनामी छह नक्सली की पहचान पुलिस के अनुसार मारे गए नक्सलियों में छह की पहचान कर ली गई है। इनमें आठ लाख का इनामी मड़कम मासा दक्षिण बस्तर डिविजन एमआइ प्रभारी व प्लाटून नंबर चार व आठ का प्रभारी था। पांच लाख का इनामी डिविजनल स्माल एक्शन टीम कमांडर व एरिया कमेटी सदस्य लखमा माड़वी भी मारा गया। अन्य सभी पांच प्लाटून नंबर चार के सदस्य दो-दो लाख के इनामी हैं। इनमें मासा की पत्नी दूधी मासा, मड़कम जीतू, मड़कम कोसी, कोवासी केसा की पहचान कर ली गई है। चार अन्य की पहचान की जा रही है। मारे गए नक्सलियों के शव को कांधे पर लेकर जवान मुख्यालय पहुंच चुके हैं। सभी जवान सुरक्षित हैं। 50 किमी चलकर पहुंचे जवान पुलिस को भेज्जी थाना क्षेत्र में कई दिनों से नक्सलियों के उपस्थिति की सूचना मिली रही थी। नक्सली भंडारपदर की पहाड़ी पर बड़ी साजिश रचने के इरादे से एकत्र हो रहे थे। इस पर तीन दिन पहले एक अभियान लांच किया गया। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की छह टीम को एलारमड़गू, पालोड़ी और पोटकपल्ली से डीआरजी व सीआरपीएफ की टीम को अभियान पर भेजा गया था जवान लगभग 50 किमी की दूरी तय कर मुठभेड़ स्थल तक पहुंचे थे। शुक्रवार की सुबह डीआरजी की टीम के साथ भंडारपदर में नक्सलियों से मुठभेड़ हुई। दस किमी की घेराबंदी के बाद नक्सलियों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी गई, पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद रुक-रुक कर लगभग चार घंटे तक मुठभेड़ चली। जवानों को भारी पड़ता देख नक्सली वहां से भाग खड़े हुए। जवानों के शौर्य के आगे साथियों के शव व हथियार को भी छोड़ना पड़ा।

सुकमा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में10 नक्सली को किया ढेर, मुख्यमंत्री ने की सराहना

सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई की है। कोन्टा थाना क्षेत्र के भेज्जी इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ। साथ ही, कई हथियार भी बरामद किए गए हैं। फिलहाल, सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षाबलों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार नक्सलवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम बस्तर क्षेत्र में विकास, शांति और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।” खबरों के अनुसार, मुठभेड़ में 10नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने तीन ऑटोमैटिक राइफल्स समेत कई अन्य हथियार बरामद किए। मुठभेड़ सुबह के समय शुरू हुई, जब सुरक्षाबल ने नक्सलियों की घेराबंदी की। दोनों ओर से सैकड़ों राउंड गोलीबारी की गई। नक्सलियों के पास से अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। डीआरजी की टीम के साथ मुठभेड़ खबर के मुताबिक डीआरजी की टीम नक्सलियों की घेराबंदी के लिए निकली थी। सूचना मिली थी कि ओडिशा के रास्ते नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगल में प्रवेश किए हैं। इसके बाद ही टीम घेराबंदी के लिए गई थी। डीआरजी जवानों के साथ सीआरपीएफ के जवान भी मुठभेड़ में शामिल। वहीं, बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने की मुठभेड़ की पुष्टि की है। मारे गए नक्सलियों की संख्या और हथियारों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है। सुकमा एसपी ने नक्सलियों के शव मिलने की पुष्टि कर दी है। कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम, भंडारपदर के जंगल-पहाड़ी में यह मुठभेड़ हुई है। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब जवान इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से काफी देर तक गोलीबारी हुई। DRGऔर CRPFकी टीम की संयुक्त कार्रवाई DRG(डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और CRPF(केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की टीम ने नक्सलियों की घेराबंदी के लिए संयुक्त कार्रवाई की। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि ओडिशा से नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगलों में घुस आए हैं। इसके बाद, सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन और घेराबंदी की योजना बनाई थी। IGऔर SPने मुठभेड़ की पुष्टि की बस्तर के IGपी सुंदरराज ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि मारे गए नक्सलियों की संख्या और बरामद हथियारों की आधिकारिक जानकारी जल्द जारी की जाएगी। सुकमा के SPने भी नक्सलियों के शव मिलने की पुष्टि की है। मुठभेड़ कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम और भंडारपदर के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में हुई। सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने किया हमला यह मुठभेड़ उस समय हुई जब सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों ओर से लंबी गोलीबारी हुई। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। सुकमा के SP किरण चव्हाण ने कहा है कि यह बड़ी सफलता है. जवान मौके पर ही हैं. लौटेंगे तो ज्यादा जानकारी मिलेगी. सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि भेज्जी के जंगल में नक्सलियों का जमावड़ा है. जवानों ने इस इलाके को घेर लिया और ऑपरेशन चलाया. सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में नक्सली ओडिशा के रास्ते छत्तीसगढ़ में घुसे हैं.   पांच दिन पहले छत्तीसगढ़ के कांकेर में जवानों और नक्सलियों के बीच रविवार को मुठभेड़ हुई थी. इस दौरान पुलिस ने पांच नक्सलियों को ढेर कर दिया था. इनमें 2 महिलाएं शामिल थीं. इस साल 1 जनवरी से 22 नवंबर तक 207 नक्सली मारे गए हैं. इससे पूर्व 16 नवंबर को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर और कांकेर जिले की सीमा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में पांच नक्सलियों को मार गिराया था.

नक्सलियों ने 24 घंटे में तस्वीर जारी कर ली जिम्मेदारी, ‘छत्तीसगढ़-सुकमा के बाजार में जवानों से हमने लूटे हथियार’

सुकमा. सुकमा जिले के जगरगुंडा में दो जवानों के ऊपर हमला करते हुए उनके पास से हथियार भी लूट कर ले गए। घटना के बाद घायल जवानों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। वहीं घटना के 24 घंटे के बाद नक्सलियों ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए लूटे हुए हथियार की फोटो के साथ ही प्रेस नोट जारी किया है। बताया जा रहा है कि बीते रविवार को सुकमा जिले के जगरगुंडा साप्ताहिक बाजार की ड्यूटी में तैनात जवानों पर नक्सलियों ने हमला करते हुए उनके पास रखे हथियार को लूट कर फरार हो गए, जवानों पर हुए अचानक से हमले के बाद बाजार में दहशत फैल गई। घटना के तत्काल बाद जहां घायलों को अस्पताल ले जाया गया। वहीं बाजार में शांति देखी गई। आसपास के लोगों का कहना था कि बाजार में ड्यूटी कर रहे दो जवानों पर नक्सलियों की स्माल एक्शन टीम ने हमला कर दिया। हमले में दो जवान घायल हुए, जिन्हें जगरगुंडा अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। बाजार में घटना के बाद अफरा तफरी होते ही पुलिस ने इलाके को घेर लिया। घटना के 24 घंटे के बाद दक्षिण सब जोनल ब्यूरो के प्रवक्ता समता ने प्रेस नोट जारी किया। बता दें कि इस घटना को नक्सलियों की पीएलजीए के लड़ाकुओं ने आठ बजे अंजाम दिया। जिसके बाद हथियार को लूट कर ले गए। नक्सलियों ने लुटे हुए हथियार की फोटो भी जारी की है।

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